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  • उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्या ने पति के खिलाफ दर्ज कराई FIR, दूसरी महिलाओं से संबंध रखने के आरोप

    उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्या ने पति के खिलाफ दर्ज कराई FIR, दूसरी महिलाओं से संबंध रखने के आरोप


    देहरादून। उत्तराखंड की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री रेखा आर्या ने अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने धोखाधड़ी, कथित प्रताड़ना, जान से मारने की धमकी और अन्य गंभीर आरोप लगाए हैं। मंत्री ने अपनी और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का भी जिक्र किया है। इस बीच, उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराए जाने की जानकारी सामने आई है।

    रेखा आर्या ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर अपने पक्ष में बात रखी। वीडियो में वह भावुक नजर आईं। उन्होंने बताया कि एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनने के बाद उन्हें अपनी और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका हुई, जिसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क करने का फैसला लिया। हालांकि, ऑडियो में कथित तौर पर कही गई बातों और शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

    पहली शादी छिपाने और प्रताड़ना के आरोप

    एफआईआर के मुताबिक, रेखा आर्या ने आरोप लगाया है कि गिरधारी लाल साहू ने शादी के समय अपनी पहली शादी की जानकारी उनसे छिपाई थी। उन्होंने पति के दूसरी महिलाओं से संबंध होने का भी दावा किया है। शिकायत में शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना, जान से मारने की धमकी देने तथा जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने जैसे आरोप भी शामिल हैं।

    मंत्री ने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए कहा कि उसमें कथित तौर पर उन्हें नुकसान पहुंचाने की साजिश से जुड़ी बातें सामने आईं। उनके अनुसार, रिकॉर्डिंग सुनने के बाद वह भीतर तक विचलित हो गईं। इसके बाद उन्होंने अपनी और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

    ये सभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। इनकी सत्यता की पुष्टि जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के जरिए ही हो सकेगी।

    कंपनी के निदेशक पद से हटाने के लिए फर्जी हस्ताक्षर का आरोप

    रेखा आर्या ने अपने पति पर कंपनी के निदेशक पद से उन्हें हटाने के लिए उनके हस्ताक्षरों का कथित रूप से गलत इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया है। शिकायत के अनुसार, इस मामले में दस्तावेजों के साथ कथित छेड़छाड़ की गई। मंत्री ने इसे अपने खिलाफ किए गए गलत कामों में से एक बताया है।

    अपने वीडियो संदेश में रेखा आर्या ने कहा कि ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनने के बाद उन्हें लगा कि अपनी और बच्चों की सुरक्षा के लिए पुलिस तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे घरेलू हिंसा या किसी भी तरह की प्रताड़ना को चुपचाप सहन न करें और जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता लें।

    उन्होंने कहा कि किसी भी महिला को डर या दबाव में अन्याय सहने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

    15 अक्टूबर को दर्ज हुई FIR

    जानकारी के मुताबिक, देहरादून के कैंट थाना पुलिस ने रेखा आर्या की शिकायत पर 15 अक्टूबर 2026 को एफआईआर संख्या 0158 दर्ज की। शिकायत में आपराधिक षड्यंत्र, मारपीट, धोखाधड़ी, महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जालसाजी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल, पूर्व विवाह छिपाकर दोबारा शादी करने, विवाहित महिला के साथ क्रूरता, जानबूझकर अपमान और आपराधिक धमकी देने से संबंधित आरोप शामिल हैं।

    एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं 3(1)(r), 3(1)(s) और 3(2)(va) भी लगाई गई हैं।

    पहले भी विवादों में आए थे गिरधारी लाल साहू

    गिरधारी लाल साहू इसी साल जनवरी में भी विवादों में आए थे। उस समय बिहार की लड़कियों को लेकर उनके कथित बयान के सार्वजनिक होने के बाद विरोध प्रदर्शन हुए थे। विवाद बढ़ने पर साहू ने अपने बयान को लेकर सफाई दी थी।

    अब रेखा आर्या की शिकायत के बाद मामला फिर चर्चा में है। एफआईआर में लगाए गए आरोपों की जांच और पुलिस की आगे की कार्रवाई इस प्रकरण में अहम होगी।

  • रेलवे काउंटर से टिकट लेने वालों को भी मिल सकता है बीमा, सुप्रीम कोर्ट ने 27 अक्टूबर तक कदम उठाने को कहा

    रेलवे काउंटर से टिकट लेने वालों को भी मिल सकता है बीमा, सुप्रीम कोर्ट ने 27 अक्टूबर तक कदम उठाने को कहा


    नई दिल्ली। ट्रेन से सफर करने वाले उन यात्रियों के लिए राहत की उम्मीद है, जो रेलवे स्टेशन के काउंटर से टिकट खरीदते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को निर्देश दिया है कि काउंटर टिकट पर भी यात्रा बीमा की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 27 अक्टूबर तक ठोस कदम उठाए जाएं। अदालत ने ऑनलाइन और काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्रियों के बीच बीमा सुविधा को लेकर अंतर पर सवाल उठाए हैं।

    6 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि ऑनलाइन टिकट बुक करते समय यात्रियों को मामूली अतिरिक्त रकम देकर बीमा लेने का विकल्प मिलता है, जबकि काउंटर से टिकट खरीदने वालों के लिए ऐसी व्यवस्था नहीं है। अदालत ने इस अंतर को दूर करने की जरूरत पर जोर दिया।

    पीठ ने कहा कि काउंटर से टिकट लेकर यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या भी काफी है और उनके लिए बीमा की सुविधा महत्वपूर्ण हो सकती है। अदालत के मुताबिक, रेलवे को व्यवस्था तैयार करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन अब तक ठोस प्रगति नहीं हुई। इसी के बाद रेलवे को 27 अक्टूबर तक इस दिशा में कदम उठाने को कहा गया।

    रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर भी जताई नाराजगी

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन उनके अनुरूप जमीन पर पर्याप्त बदलाव दिखाई नहीं दे रहे हैं।

    अदालत ने सुरक्षा संबंधी कार्यों के लिए तय बजट का पूरा इस्तेमाल नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। इसके साथ ही रेलवे ट्रैक के किनारे बाड़ लगाने के लक्ष्य को पूरा करने में हर साल करीब एक-तिहाई की कमी का जिक्र किया गया। पीठ ने रेलवे से पूछा कि जब सुरक्षा के लिए योजनाएं बनाई जाती हैं, तो उन्हें निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक पूरा क्यों नहीं किया जा रहा।

    रेलवे बोर्ड के अधिकारियों से मांगा था जवाब

    सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्यों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था। अदालत चाहती थी कि अधिकारी रेलवे ट्रैक की फेंसिंग के लक्ष्य को पूरा करने में लगातार हो रही देरी के कारणों और सुरक्षा कार्यों की प्रगति के बारे में जवाब दें।

    हालांकि, आदेश लिखवाए जाने के बाद केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने अदालत से एक और मौका देने का अनुरोध किया। उन्होंने पिछले साल किए गए काम, फेंसिंग का लक्ष्य पूरा नहीं होने के कारणों और आगे की कार्ययोजना के बारे में हलफनामा दाखिल करने की पेशकश की।

    केंद्र सरकार के इस अनुरोध के बाद रेलवे बोर्ड के अधिकारियों की व्यक्तिगत पेशी के निर्देश पर फिलहाल रोक लगा दी गई। अब रेलवे को हलफनामे के माध्यम से सुरक्षा कार्यों की प्रगति और भविष्य की योजना का विवरण देना होगा।

    यात्रियों को कब मिलेगी सुविधा?

    यदि रेलवे निर्धारित समयसीमा के भीतर जरूरी व्यवस्था करता है, तो काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्रियों को भी यात्रा बीमा लेने का विकल्प मिल सकता है। फिलहाल ऑनलाइन टिकट बुकिंग के दौरान अतिरिक्त रकम देकर बीमा चुनने की सुविधा उपलब्ध है।

    हालांकि, काउंटर टिकट पर बीमा किस तरह मिलेगा, इसके लिए कितनी रकम देनी होगी और बीमा के तहत कितना कवरेज मिलेगा, यह रेलवे की ओर से व्यवस्था स्पष्ट किए जाने के बाद ही पता चलेगा। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश सुविधा लागू करने की दिशा में कदम उठाने से जुड़ा है; इसे सभी काउंटरों पर बीमा शुरू हो जाने की घोषणा नहीं माना जाना चाहिए।

    इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी। रेलवे को हलफनामे में अब तक किए गए काम और आगे की योजना की जानकारी देनी होगी। अदालत सुरक्षा संबंधी निर्देशों पर हुई प्रगति की भी समीक्षा करेगी।

  • CJP की तिरंगा मार्च से पहले अभिजीत दिपके का दावा, कहा- पुलिस हिरासत में ले सकती है

    CJP की तिरंगा मार्च से पहले अभिजीत दिपके का दावा, कहा- पुलिस हिरासत में ले सकती है


    नई दिल्ली। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित तिरंगा मार्च से पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दावा किया है कि कुछ बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियां उनका पीछा कर रही हैं और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के कर्मचारी उनके घर की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि दिल्ली पुलिस गुरुवार रात या शुक्रवार सुबह उन्हें हिरासत में ले सकती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिपके ने कहा कि पार्टी के सदस्य शुक्रवार को शांतिपूर्वक तिरंगा लहराने जाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए जेल जाना पड़े, तो वे इसके लिए भी तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तिरंगा लहराने के मामले में CJP के सहयोगियों सौरव दास और आशुतोष रांका को गिरफ्तार किया गया था।

    सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च निकालने की तैयारी

    CJP ने अपने समर्थकों और आम लोगों से शुक्रवार को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में जुटने की अपील की है। पार्टी यहां तिरंगा लहराकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध जताना चाहती है। यह विरोध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर है।

    दिपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पार्टी शांतिपूर्वक तिरंगा लहराएगी। उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्रीय ध्वज फहराना अपराध माना जाता है, तो वे जेल जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि तिरंगा लहराने के लिए किसी को अपराधी मानना गलत है।

    16 और 17 अक्टूबर को बंद रहेगा सेंट्रल पार्क

    तिरंगा मार्च की घोषणा के बीच नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने गुरुवार को बताया कि कनॉट प्लेस का सेंट्रल पार्क 16 और 17 अक्टूबर को बंद रहेगा। इसी स्थान पर CJP ने अपना कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई थी।

    पार्क बंद रखने के फैसले पर दिपके ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी 100 अलग-अलग जगहों पर तिरंगा लहराने का ऐलान कर दे, तो क्या प्रशासन सभी 100 स्थानों को बंद कर देगा? उन्होंने यह भी पूछा कि यदि किसी राजनीतिक रैली में लोग तिरंगा लेकर पहुंचें, तो क्या उस रैली को भी रद्द कर दिया जाएगा?

    ‘पुलिस कार्रवाई से डरने वाले नहीं’

    अभिजीत दिपके ने दावा किया कि बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियां उनका पीछा कर रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि IB के कर्मचारी उनके घर के बाहर तैनात चौकीदार से उनके बारे में जानकारी जुटा रहे थे। दिपके ने आशंका जताई कि पुलिस उन्हें गुरुवार रात या शुक्रवार सुबह हिरासत में ले सकती है। उन्होंने कहा कि वे ऐसी कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं और अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए दिपके ने कहा कि उनकी पार्टी सरकार बदलने की मांग नहीं कर रही है। CJP की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए और उनकी जगह किसी दूसरे व्यक्ति की नियुक्ति स्वतंत्र एवं निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत की जाए।

    मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग पर सवाल

    दिपके ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अन्य चुनाव आयुक्तों की बात भी नहीं सुन रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग करना क्या अपराध है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिपके ने देश में आपातकाल जैसे हालात होने का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आपातकाल घोषित नहीं कर रहे, क्योंकि इससे उनकी छवि को नुकसान पहुंच सकता है।

    CJP के तिरंगा मार्च, सेंट्रल पार्क को बंद रखने के फैसले और पुलिस हिरासत की आशंका को लेकर दिपके के बयान ऐसे समय आए हैं, जब पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने की तैयारी कर रही है। हालांकि, उनके पीछा किए जाने और निगरानी संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

  • राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर मांगा जवाब, मार्च पर भी की टिप्पणी

    राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर मांगा जवाब, मार्च पर भी की टिप्पणी

    नई दिल्ली ।सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी से जवाब मांगा है। विपक्ष की इन याचिकाओं में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने को चुनौती दी गई है।

    विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। याचिकाओं में मतदाताओं के नाम हटाए जाने से संबंधित मुद्दे को उठाते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की गई है। इन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद अदालत ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस भेजकर अपना पक्ष रखने को कहा है।

    सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने राहुल गांधी के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए विरोध मार्च का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कोई भी अदालत को डराने या धमकाने की कोशिश नहीं कर सकता। ऐसी कोशिशें बेकार हैं और उन पर कोई ध्यान नहीं देता। मुख्य न्यायाधीश ने यह टिप्पणी विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की।

    इस सुनवाई से पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने बताया कि 12 अक्टूबर को राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया था। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ याचिकाएं दाखिल कीं। बैज के मुताबिक, अदालत ने इन याचिकाओं पर संज्ञान लिया और 15 अक्टूबर को सुनवाई हुई।

    दीपक बैज ने एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ी होने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि वोटों की चोरी करके सत्ता हासिल की गई और चुनाव आयोग तथा भारतीय जनता पार्टी के बीच गठबंधन है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने इन आरोपों से जुड़े सबूत सुप्रीम कोर्ट के सामने रखे हैं। बैज ने यह भी कहा कि विपक्ष को मामले में अपने पक्ष में फैसला आने की उम्मीद है। हालांकि, ये बातें कांग्रेस नेता की ओर से लगाए गए आरोप और व्यक्त किया गया विश्वास हैं।

    इस मामले में विपक्षी नेताओं ने अदालत से मुलाकात करने और ज्ञापन सौंपने के लिए पहले भी समय मांगा था। 11 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मुलाकात का समय देने का अनुरोध किया था। वे अपनी मांगों और शिकायतों से संबंधित ज्ञापन सौंपना चाहते थे, लेकिन उन्हें मुलाकात का समय नहीं मिला।

    इसके अगले दिन, यानी 12 अक्टूबर को राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। इसके बाद उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मुद्दे पर याचिकाएं दाखिल कीं। विपक्ष की ओर से इस कदम के जरिए चुनाव आयोग की प्रक्रिया को न्यायिक चुनौती दी गई है।

    15 अक्टूबर को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। अब इन याचिकाओं में उठाए गए सवालों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना है। मामले में आगे की कार्रवाई अदालत के समक्ष प्रस्तुत जवाब और सुनवाई के दौरान होने वाली कार्यवाही के आधार पर आगे बढ़ेगी।

  • कर्नाटक चुनाव की वीडियो रिकॉर्डिंग गायब होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, निर्वाचन आयोग से पूछा रिकॉर्ड कहां गया, अगली सुनवाई पर मांगा जवाब

    कर्नाटक चुनाव की वीडियो रिकॉर्डिंग गायब होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, निर्वाचन आयोग से पूछा रिकॉर्ड कहां गया, अगली सुनवाई पर मांगा जवाब

    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक की शृंगेरी विधानसभा सीट पर वर्ष 2023 में हुई मतगणना की मूल वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होने पर भारत निर्वाचन आयोग के प्रति कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने सवाल किया कि चुनाव कराने वाली संस्था के पास अपने ही चुनाव से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड कैसे गायब हो सकते हैं। पीठ ने आयोग की ओर से रिकॉर्ड नहीं मिलने की दलील पर असंतोष जताते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले में लापरवाही को सामान्य रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने चेतावनी दी कि अगली सुनवाई तक उपलब्ध रिकॉर्ड पेश नहीं किए गए तो आयोग के खिलाफ प्रतिकूल कानूनी निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं।

    इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शेषाद्रि नायडू ने बताया कि वर्ष 2023 की मूल मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं मिल पा रही है और उसे खोजने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई। पीठ ने कहा कि चुनाव कराना आयोग का मुख्य दायित्व है और इस प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों तथा रिकॉर्ड का सुरक्षित रहना जरूरी है। अदालत ने आयोग से उपलब्ध सभी रिकॉर्ड अगली सुनवाई के दौरान पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 फरवरी 2027 को निर्धारित की गई है।

    यह पूरा विवाद कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 में शृंगेरी सीट के नतीजे से जुड़ा है। इस सीट पर कांग्रेस के टीडी राजेगौड़ा को मात्र 201 वोटों के अंतर से विजेता घोषित किया गया था। भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार डीएनए जीवराज ने चुनाव परिणाम को कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अप्रैल 2026 में डाक मतपत्रों की दोबारा गिनती करने का आदेश दिया।

    इसके बाद 3 मई 2026 को जारी संशोधित परिणाम में राजेगौड़ा के मतों की संख्या कम हो गई और जीवराज को विजेता घोषित कर दिया गया। इस फैसले के खिलाफ राजेगौड़ा सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। शीर्ष अदालत ने उन्हें अंतरिम राहत देते हुए विधायक पद पर बने रहने की अनुमति दी थी।

    राजेगौड़ा की ओर से पुनर्गणना की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। उनका तर्क है कि हाई कोर्ट ने केवल 279 खारिज किए गए डाक मतपत्रों की दोबारा जांच करने का आदेश दिया था। हालांकि, उनके अनुसार चुनाव अधिकारी ने निर्धारित दायरे से बाहर जाकर 562 वैध डाक मतपत्रों का भी पुनर्मूल्यांकन कर दिया। इसी प्रक्रिया की वैधता और निष्पक्षता से जुड़े सवालों के बीच मतगणना की मूल वीडियो रिकॉर्डिंग महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    राजेगौड़ा ने मामले में पर्यवेक्षक की रिपोर्ट के साथ वर्ष 2023 की मूल मतगणना और पुनर्गणना की वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने की मांग की है। इन दस्तावेजों के माध्यम से यह स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है कि मतगणना और पुनर्गणना के दौरान निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन हुआ था या नहीं।

    सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद अब निर्वाचन आयोग को अगली सुनवाई पर उपलब्ध रिकॉर्ड पेश करने होंगे। अदालत ने संकेत दिया है कि रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं होने की स्थिति में मामले में आयोग के विरुद्ध प्रतिकूल निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं। हालांकि, वीडियो रिकॉर्डिंग के गायब होने और पुनर्गणना की प्रक्रिया से जुड़े सभी सवालों पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है। अगली सुनवाई में रिकॉर्ड की उपलब्धता और मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर आगे विचार किया जाएगा।

  • बिहार के भोजपुर में सुबह-सुबह सनसनीखेज वारदात, टहलने निकले 72 वर्षीय पूर्व कस्टम सुपरिंटेंडेंट की गोली मारकर हत्या, नकाबपोश हमलावर फरार

    बिहार के भोजपुर में सुबह-सुबह सनसनीखेज वारदात, टहलने निकले 72 वर्षीय पूर्व कस्टम सुपरिंटेंडेंट की गोली मारकर हत्या, नकाबपोश हमलावर फरार

    नई दिल्ली । बिहार के भोजपुर जिले के आरा में गुरुवार सुबह गोलीबारी की घटना से सनसनी फैल गई। जैन कॉलेज के पास कनकपुरी मोहल्ले में बाइक सवार नकाबपोश बदमाशों ने 72 वर्षीय पूर्व कस्टम सुपरिंटेंडेंट रामकुमार सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी। वारदात के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में दहशत और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी।
    मृतक रामकुमार सिंह मूल रूप से भोजपुर जिले के बिहिया थाना क्षेत्र के डुमरिया गांव के निवासी थे। वह लंबे समय से आरा के नवादा थाना क्षेत्र स्थित कनकपुरी मोहल्ले में मकान बनाकर रह रहे थे। सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद वह सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय थे। उनकी हत्या की खबर सामने आने के बाद इलाके में घटना को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
    जानकारी के अनुसार, रामकुमार सिंह गुरुवार सुबह रोजाना की तरह टहलने के लिए अपने घर से निकले थे। वह घर से लगभग डेढ़ सौ मीटर की दूरी पर पहुंचे ही थे कि पहले से घात लगाए बैठे बाइक सवार नकाबपोश हथियारबंद बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। इसके बाद हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। बताया जा रहा है कि इस दौरान उन्हें करीब आठ गोलियां लगीं। गंभीर रूप से घायल होने के कारण उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
    वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर बाइक से फरार हो गए। सुबह के समय गोलीबारी होने से आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों के बीच हलचल बढ़ गई। इसके बाद नवादा थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लिया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए हत्या से जुड़े तथ्यों का पता लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
    फिलहाल रामकुमार सिंह की हत्या के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि हमलावरों ने उन्हें किस कारण निशाना बनाया। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वारदात में शामिल लोग कौन थे और उन्होंने हत्या की योजना कैसे बनाई। आरोपियों की पहचान और उनकी गिरफ्तारी के संबंध में जांच जारी है।
    इस घटना में सबसे अहम सवाल हत्या की वजह और हमलावरों की पहचान को लेकर है। रामकुमार सिंह सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय थे। ऐसे में पुलिस विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है। हालांकि, अभी तक हत्या के कारण को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
    सुबह टहलने के दौरान हुई इस वारदात ने आरा के कनकपुरी मोहल्ले में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बाइक सवार नकाबपोश बदमाशों द्वारा दिन की शुरुआत में ही गोलीबारी कर फरार हो जाना घटना की गंभीरता को दर्शाता है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है। फिलहाल यह स्पष्ट होना बाकी है कि रामकुमार सिंह की हत्या के पीछे व्यक्तिगत रंजिश थी या कोई अन्य कारण। जांच पूरी होने और आरोपियों की पहचान होने के बाद ही वारदात से जुड़े अन्य पहलुओं का खुलासा हो सकेगा।
  • राहुल गांधी ने CJP नेताओं की गिरफ्तारी पर जताया विरोध, अब हाई टी के न्योते से विपक्षी एकजुटता की नई चर्चा

    राहुल गांधी ने CJP नेताओं की गिरफ्तारी पर जताया विरोध, अब हाई टी के न्योते से विपक्षी एकजुटता की नई चर्चा


    नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के बीच संभावित नजदीकी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। राहुल गांधी की ओर से आयोजित हाई टी में CJP के नेताओं को आमंत्रित करने की कोशिश की खबर सामने आने के बाद कांग्रेस और इस संगठन के संबंधों को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं। हालांकि इसे दोनों के बीच दोस्ती या किसी औपचारिक राजनीतिक गठबंधन के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी। रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और संगठन के अन्य नेताओं तक पहुंचने के लिए वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण की मदद लेने की कोशिश की थी। इस घटनाक्रम को विपक्षी एकजुटता की रणनीति और कांग्रेस के बदलते राजनीतिक रुख के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार सुबह कांग्रेस की ओर से CJP से संपर्क करने और उसके नेताओं को राहुल गांधी की हाई टी में आमंत्रित करने का फैसला किया गया। इसके लिए प्रशांत भूषण से मध्यस्थ की भूमिका निभाने का अनुरोध किया गया था। प्रशांत भूषण के करीबी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस की ओर से उनसे संपर्क किया गया था। उस समय अभिजीत दीपके महाराष्ट्र में थे जबकि CJP के कुछ प्रमुख नेता जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस हिरासत में थे। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का दावा है कि दीपके तक पहुंचने की कोशिश की गई लेकिन वह निमंत्रण को लेकर विशेष उत्साहित नहीं थे। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस संपर्क से दोनों पक्षों के बीच आगे कोई औपचारिक बातचीत होगी या नहीं।

    CJP मई में सोशल मीडिया पर चर्चा में आई थी। इसके बाद जून और जुलाई में संगठन ने परीक्षा में पेपर लीक के मुद्दे पर जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन के चलते संगठन को व्यापक पहचान मिली। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व का एक वर्ग शुरुआत से ही CJP को लेकर संदेह जताता रहा है। पार्टी के कुछ नेताओं की राय रही है कि यह संगठन आम आदमी पार्टी के प्रभाव में काम करता है या उसके राजनीतिक विस्तार के रूप में देखा जा सकता है। दूसरी ओर CJP खुद को स्वतंत्र संगठन बताती रही है। अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को रद्द करने की मांग को लेकर चल रहे अभियान ने दोनों पक्षों के बीच संभावित संवाद की चर्चा को बढ़ा दिया है।

    राहुल गांधी ने हाल ही में कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले सभी समूह एक व्यापक आंदोलन का हिस्सा हैं। उनका कहना था कि संगठन और झंडे अलग हो सकते हैं लेकिन संविधान की रक्षा और नागरिक अधिकारों की मांग करने वालों के उद्देश्य समान हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई समूह संवैधानिक अधिकारों के लिए आवाज उठा रहा है तो कांग्रेस उसका समर्थन करेगी। इस बयान को विपक्षी दलों और अन्य संगठनों को साथ लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    CJP नेताओं की गिरफ्तारी के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराने को अपराध मानने पर सवाल उठाया और युवाओं को जेल भेजे जाने की आलोचना की। राहुल गांधी के बयान पर अभिजीत दीपके ने उनका आभार जताया था। इससे दोनों पक्षों के बीच संवाद की संभावनाओं को लेकर चर्चा और तेज हो गई। हालांकि CJP सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए इंडिया गठबंधन के मार्च में शामिल नहीं हुई थी। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि समान मुद्दों पर समर्थन के बावजूद दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक तालमेल पूरी तरह स्थापित नहीं हुआ है।

    इसी बीच अभिजीत दीपके ने शुक्रवार 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च का आह्वान किया है। उन्होंने समर्थकों से शाम पांच बजे राष्ट्रीय ध्वज के साथ पहुंचने की अपील की है। दूसरे शहरों में भी तिरंगा फहराने का आग्रह किया गया है। अब राजनीतिक नजर इस बात पर रहेगी कि प्रस्तावित मार्च में कितने लोग शामिल होते हैं और कांग्रेस तथा CJP के बीच आगे कोई संवाद होता है या नहीं। फिलहाल हाई टी के निमंत्रण की कोशिश को विपक्षी एकजुटता के संदर्भ में एक घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है लेकिन इसे दोनों के बीच नई राजनीतिक दोस्ती का पक्का संकेत नहीं माना जा सकता।

  • सौरभ दास और आशुतोष रांका के बाद अभिजीत दीपके की मुश्किलें बढ़ीं, SC/ST एक्ट में केस, 16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च का ऐलान

    सौरभ दास और आशुतोष रांका के बाद अभिजीत दीपके की मुश्किलें बढ़ीं, SC/ST एक्ट में केस, 16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च का ऐलान


    नई दिल्ली।
    दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी से जुड़े नेताओं और स्वतंत्र पत्रकारों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके साथियों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम यानी एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में स्वतंत्र पत्रकार रोजी और गजेंद्र सिंह के साथ सीजेपी से जुड़े सौरभ दास आशुतोष रांका रत्ना सिंह और अभिजीत दीपके के नाम एफआईआर में शामिल किए गए हैं। शिकायत दिल्ली पुलिस के कनॉट प्लेस सब डिवीजन के एसीपी विवेक भगत की ओर से दर्ज कराई गई है। आरोप है कि एसीपी के संबंध में अपमानजनक और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगी।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब सीजेपी से जुड़े नेताओं और पुलिस के बीच विवाद पहले से चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक सौरभ दास और आशुतोष रांका को बुधवार को गिरफ्तार किए जाने के बाद अदालत ने पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। दोनों को जंतर मंतर पर प्रतिबंध के बावजूद प्रवेश करने और सुरक्षा घेरा तोड़ने के आरोपों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया। अब एससी एसटी एक्ट के तहत नया मामला दर्ज होने से पार्टी से जुड़े लोगों की कानूनी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। इस मामले में पुलिस की जांच और अदालत की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

    सौरभ दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में सीजेपी ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च निकालने का ऐलान किया है। पार्टी संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर समर्थकों से शुक्रवार शाम पांच बजे सेंट्रल पार्क पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में शामिल लोग राष्ट्रीय ध्वज लेकर आएं और तिरंगा फहराएं। दीपके ने यह भी अपील की कि जो लोग दिल्ली नहीं पहुंच सकते वे अपने शहरों में भी तिरंगा फहराएं। उन्होंने गिरफ्तारी की आशंका को लेकर भी बयान दिया और कहा कि जेल जाने की संभावना से उन्हें चिंता नहीं है। प्रस्तावित मार्च को लेकर अब प्रशासन की व्यवस्था और कानून व्यवस्था की स्थिति पर नजर रहेगी।

    इससे पहले नागपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि देश में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति थोपने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार आपातकाल लगाना चाहती है तो उसे आधिकारिक रूप से ऐसा करना चाहिए। हालांकि यह उनका राजनीतिक आरोप है और इसे किसी स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन को लेकर पूछे गए सवाल पर दीपके ने कहा कि सीजेपी एक स्वतंत्र समूह है और अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्वतंत्र रहने का मतलब इंडिया गठबंधन के खिलाफ होना नहीं है।

    विदेशी फंडिंग को लेकर उठे सवालों पर भी दीपके ने प्रतिक्रिया दी है। पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे के इस दावे पर कि भारत में हाल के कुछ विरोध प्रदर्शनों को विदेश से आर्थिक सहायता मिल रही है उन्होंने कहा कि यदि उनके पास इससे संबंधित सबूत हैं तो उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सौंपना चाहिए। दीपके ने सवाल उठाया कि यदि ऐसे प्रमाण मौजूद हैं तो उन्हें संबंधित अधिकारियों के सामने पेश किया जाना चाहिए। फिलहाल सीजेपी से जुड़े नेताओं के खिलाफ दर्ज मामले और प्रस्तावित तिरंगा मार्च को लेकर स्थिति पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में पुलिस की जांच अदालत की कार्यवाही और प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदम इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेंगे।

  • मौसम का बिगड़ता मिजाज बढ़ाएगा मुश्किलें, अल नीनो से बारिश और तापमान पर असर की आशंका, खाद्य कीमतों पर रहेगी नजर

    मौसम का बिगड़ता मिजाज बढ़ाएगा मुश्किलें, अल नीनो से बारिश और तापमान पर असर की आशंका, खाद्य कीमतों पर रहेगी नजर


    नई दिल्ली।
    भारत में अल नीनो को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। विश्व मौसम संगठन यानी डब्ल्यूएमओ के ताजा अनुमान के मुताबिक प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने की यह स्थिति फरवरी 2027 तक बनी रह सकती है। इसका असर भारत के मौसम और कृषि क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है। मौसम में बदलाव के कारण सर्दियों की बारिश और तापमान प्रभावित हो सकते हैं। इसके साथ ही आने वाले महीनों में फसलों की पैदावार और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी नजर रखनी होगी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो के प्रभाव का वास्तविक आकलन करने के लिए मौसम के ताजा आंकड़ों और अगले मानसून के पूर्वानुमान को समझना जरूरी होगा।
    विश्व मौसम संगठन के अनुसार भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक बना हुआ है।

    रिपोर्ट में दिसंबर के आसपास इसके चरम पर पहुंचने की संभावना जताई गई है। कुछ अनुमानों में तापमान सामान्य से करीब चार डिग्री सेल्सियस तक अधिक होने की आशंका व्यक्त की गई है। यदि ऐसा होता है तो अल नीनो की स्थिति मजबूत हो सकती है। इससे पहले 2015 में भी इस जलवायु घटना का प्रभाव काफी व्यापक रहा था। नए अनुमान में तापमान के चरम पर पहुंचने का समय नवंबर से बढ़ाकर दिसंबर बताया गया है। ऐसे में आशंका है कि इसका प्रभाव फरवरी 2027 के बाद भी कुछ समय तक बना रह सकता है।

    अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी से जुड़ी जलवायु घटना है। इसका असर दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश और तापमान के पैटर्न पर पड़ सकता है। भारत में इसका संबंध अक्सर मानसूनी बारिश में बदलाव से जोड़ा जाता है। हालांकि हर अल नीनो वर्ष में भारत में सूखा पड़े या बारिश सामान्य से कम हो ऐसा जरूरी नहीं है। इसका असर अन्य मौसमी परिस्थितियों और समुद्र तथा वायुमंडल के बीच होने वाली गतिविधियों पर भी निर्भर करता है। इसलिए अगले मानसून की स्थिति को लेकर अभी से किसी निश्चित नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

    इस बीच कृषि उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस साल मानसूनी बारिश सामान्य से 12.6 प्रतिशत कम रही और धान की बुवाई का क्षेत्र करीब 17 लाख हेक्टेयर घटा है। इसके चलते धान उत्पादन में लगभग 70 लाख टन की कमी आने का अनुमान जताया गया है। भारत में चावल प्रमुख खाद्यान्नों में शामिल है और देश में इसकी खपत के मुकाबले उत्पादन आम तौर पर अधिक रहता है। ऐसे में उत्पादन में गिरावट का वास्तविक असर घरेलू आपूर्ति और बाजार कीमतों पर निर्भर करेगा। यदि उपलब्धता प्रभावित होती है तो चावल समेत कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि उत्पादन में अनुमानित कमी का मतलब यह नहीं है कि देश में अनाज की तत्काल कमी हो जाएगी।

    मौसम विभाग के पूर्व महानिदेशक डॉ. केजे रमेश के अनुसार अल नीनो का मिश्रित प्रभाव मानसून पर देखा गया है और धान की बुवाई में कमी आई है। उनका कहना है कि जितनी गंभीर आशंका जताई जा रही थी उतना प्रतिकूल असर सामने नहीं आया। उन्होंने फरवरी और मार्च तक परिस्थितियां सामान्य होने की उम्मीद जताई है। सर्दियों की बारिश के संबंध में भी कुछ पूर्वानुमानों में सामान्य से अधिक वर्षा की संभावना बताई गई है। इससे साफ है कि अल नीनो के प्रभाव का आकलन करते समय सभी मौसमी संकेतों को साथ लेकर चलना होगा।

    जलवायु परिवर्तन का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है बल्कि इसका व्यापक प्रभाव अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। क्लाइमेट ट्रेंड्स की एक रिपोर्ट में तापमान बढ़ने से भारत की आर्थिक वृद्धि को होने वाले संभावित नुकसान की ओर ध्यान दिलाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक अत्यधिक गर्मी से कृषि उत्पादकता और औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। इससे रोजगार और आर्थिक विकास की गति पर दबाव पड़ने की आशंका है। रिपोर्ट में जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए निवेश बढ़ाने की जरूरत भी बताई गई है। आने वाले महीनों में मौसम की स्थिति और फसल उत्पादन के आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे। किसानों के लिए बेहतर मौसम पूर्वानुमान जल प्रबंधन और कृषि संबंधी तैयारी इस चुनौती से निपटने में मददगार साबित हो सकती है।

  • रणथंभौर से कूनो तक बनेगा वाइल्डलाइफ टूरिज्म सर्किट… बाघ के साथ चीतों के दीदार कर सकेंगे पर्यटक

    रणथंभौर से कूनो तक बनेगा वाइल्डलाइफ टूरिज्म सर्किट… बाघ के साथ चीतों के दीदार कर सकेंगे पर्यटक


    जयपुर।
    राजस्थान (Rajasthan) के रणथंभौर टाइगर रिजर्व (Ranthambore Tiger Reserve) घूमने आने वाले पर्यटक जल्द ही मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) और माधव टाइगर रिजर्व (Madhav Tiger Reserve) तक भी वन्यजीव पर्यटन का सफर कर सकेंगे। तीनों संरक्षित क्षेत्रों को जोड़कर एक वाइल्डलाइफ टूरिज्म सर्किट (Wildlife Tourism Circuit) विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसका मकसद राजस्थान और मध्य प्रदेश में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ पर्यटकों को सफारी और प्रकृति से जुड़ी गतिविधियों के ज्यादा विकल्प देना है।

    मध्य प्रदेश के वन विभाग ने रणथंभौर को कूनो नेशनल पार्क और शिवपुरी स्थित माधव टाइगर रिजर्व से जोड़ने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस सर्किट से घरेलू और विदेशी पर्यटकों को एक ही यात्रा में अलग-अलग वन्यजीवों और प्राकृतिक स्थलों को देखने का मौका मिल सकेगा। फिलहाल कूनो में करीब 55 चीते, माधव टाइगर रिजर्व में चार बाघ और रणथंभौर में 75 से अधिक बाघ होने की जानकारी दी गई है।


    रणथंभौर-कूनो-माधव के बीच वन्यजीव कॉरिडोर पर भी जोर

    तीनों क्षेत्रों को जोड़ने की पहल केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) भी रणथंभौर, कूनो और माधव के बीच वन्यजीव कॉरिडोर की पहचान करने में रुचि दिखा चुका है। संस्थान के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, देशभर में ऐतिहासिक रिकॉर्ड, वन्यजीवों की आवाजाही और उनके प्राकृतिक आवासों के बीच संपर्क के आधार पर कॉरिडोर चिह्नित किए जा रहे हैं। इन्हें विकसित करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की होगी।


    राजस्थान में चीतों की आवाजाही से बढ़ी संरक्षण की मांग

    मध्य प्रदेश के कूनो से चीतों के बार-बार राजस्थान की सीमा में आने के कारण राज्य को प्रोजेक्ट चीता से औपचारिक रूप से जोड़ने की मांग भी तेज हुई है। हाड़ौती क्षेत्र के वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि बारां, चित्तौड़गढ़ और राजस्थान के अन्य हिस्सों में चीतों की आवाजाही को चुनौती के बजाय संरक्षण के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।

    हाल ही में मादा चीता वीरा ने बारां में काफी समय बिताया था। बाद में उसे बेहोश कर वापस कूनो ले जाया गया। भारत में जन्मे चीते केपी-2 और केपी-3 भी राजस्थान के इलाकों में पहुंच चुके हैं। इन घटनाओं के बाद दोनों राज्यों के बीच समन्वित संरक्षण रणनीति की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने 17,000 वर्ग किलोमीटर के कूनो-गांधी सागर लैंडस्केप को अंतरराज्यीय संरक्षण कॉरिडोर के रूप में चिह्नित किया है।