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  • मोबाइल उत्पादन में नोएडा देश में नंबर वन… यहां बन रहे कई नामी कंपनियों के फोन…

    मोबाइल उत्पादन में नोएडा देश में नंबर वन… यहां बन रहे कई नामी कंपनियों के फोन…


    नोएडा।
    यूपी सरकार (UP Government) के बजट में कहा कि देश के 65 प्रतिशत मोबाइल का उत्पादन (Mobile Production) उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh) में हो रहा है। मोबाइल उत्पादन (Mobile Production) में गौतमबुद्ध नगर (Gautam Buddha Nagar) पूरे देश में पहले नंबर पर है। देश के 55 फीसदी से अधिक मोबाइल फोन यहीं बनते हैं।


    इन कंपनियों के फोन नोएडा में बन रहे

    सैमसंग का यहां सबसे बड़ा मोबाइल प्लांट है, जो सालाना 12 करोड़ यूनिट तक उत्पादन क्षमता रखता है। ओप्पो, वीवो, और डिक्सन टेक्नोलॉजीज जैसी अन्य कंपनियां भी यहां पर बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के खजाने को जीएसटी से भरने में गौतमबुद्ध नगर जिले का योगदान सबसे अधिक है।


    मेक इन इंडिया का सपना हो रहा साकार

    जानकारी के मुताबिक, सैमसंग के गौतमबुद्ध नगर स्थित संयंत्र में दुनिया के लगभग 25 फीसदी फोन का निर्माण होता है। मोबाइल फोन के निर्माण के साथ ही यहां पर बड़ी संख्या में रोजगार सृजित हुए हैं। उत्तर प्रदेश में मोबाइल निर्माण का प्रमुख केंद्र होने के कारण यह क्षेत्र मेक इन इंडिया पहल का प्रमुख हिस्सा बना हुआ है।


    रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

    यमुना सिटी के सेक्टर-24ए में वीवो कंपनी मोबाइल बना रही है। कंपनी को 169 एकड़ भूमि का आंवटन वर्ष 2018 में हुआ था। इसमें 156.32 एकड़ भूमि के लिए चेकलिस्ट जारी की गई थी। प्रथम चरण में कंपनी प्रति वर्ष छह करोड़ स्मार्ट मोबाइल तैयार कर रही है। दो चरणों में कंपनी का निर्माण पूरा होगा। दूसरा चरण पूरा होने के बाद शहर में हर साल करीब 14.40 करोड़ मोबाइल का उत्पादन किया जाएगा। वर्तमान में यहां पर 800 लोग काम कर रहे हैं।

    दूसरा चरण पूरा होने के बाद एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। यहां की मोबाइल कंपनियों ने निर्यात का ग्राफ बढ़ाने के साथ जीएसटी चुकाने में भी टॉप रैंक हासिल की है। जीएसटी महकमे ने राज्य जीएसटी देने वाली जिन टॉप 100 कंपनियों की सूची जारी की थी, उसमें सबसे ऊपर ग्रेटर नोएडा की ओप्पो मोबाइल कंपनी का नाम है। वर्ष 2023-24 में ओप्पो मोबाइल इंडिया ने 1945. 87करोड़ रुपये जीएसटी जमा किया था। वर्ष 2024-25 में 1141.47 करोड़ रुपये जीएसटी जमा किया था।

  • US से ट्रेड डील से कश्मीर से हिमाचल तक टेंशन में किसान…. 10,000 CR की इंडस्ट्री पर संकट

    US से ट्रेड डील से कश्मीर से हिमाचल तक टेंशन में किसान…. 10,000 CR की इंडस्ट्री पर संकट


    नई दिल्ली।
    भारत-अमेरिका ट्रेड डील (India-US Trade Deal) को लेकर कश्मीर (Kashmir) से लेकर हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) तक के सेब किसानों में चिंता बढ़ गई है। किसानों को डर है कि अगर अमेरिकी सेब (American Apple) सस्ते दाम पर भारतीय बाजार में आने लगे, तो स्थानीय सेब की मांग और कीमत दोनों गिर सकती हैं। इस डील के तहत कई देशों से आने वाले सेब पर आयात शुल्क कम किया जा रहा है। पहले ज्यादा कीमत होने के कारण विदेशी सेब कम मात्रा में आते थे, लेकिन अब ड्यूटी कम होने से आयात बढ़ने का डर है।

    कश्मीर की अर्थव्यवस्था में सेब उद्योग बहुत अहम है। हजारों परिवार सीधे या परोक्ष रूप से इससे जुड़े हैं। ऐसे में अगर विदेशी सेब ज्यादा आए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार पर असर पड़ सकता है। जम्मू-कश्मीर के नेताओं ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के आयात बढ़ा, तो स्थानीय बागवानी उद्योग को नुकसान हो सकता है।


    अगर आयात ज्यादा बढ़ता है, तो टेंशन बढ़ेगी

    हालांकि सरकार का कहना है कि अमेरिकी सेब के लिए केवल सीमित (कोटा आधारित) रियायत दी जा रही है और किसानों की सुरक्षा के लिए न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) जैसी व्यवस्था रखी गई है, ताकि बहुत सस्ते सेब बाजार में न आ सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आयात ज्यादा बढ़ता है, तो घरेलू किसानों पर कीमत का दबाव बढ़ सकता है। वहीं कुछ लोग इसे अवसर भी मानते हैं—कहते हैं कि इससे भारतीय किसान गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान दे सकते हैं।


    फल मंडी के नेता क्या कह रहे?

    घाटी के सबसे बड़े फल मार्केट, सोपोर फ्रूट मंडी के प्रेसिडेंट फैयाज अहमद मलिक ने बताया, “यह (इंडिया-US डील) हमारे लिए बहुत बुरा होगा।” वे कहते हैं, “हम US में फल उगाने वालों से मुकाबला नहीं कर सकते। उन्हें खेती के हर स्टेज पर सरकार से मदद मिलती है। उन्हें अच्छी-खासी सब्सिडी और कैश ट्रांसफर मिलते हैं, जबकि हमारे पास फसल बीमा तक नहीं है।” मलिक का कहना है कि इस ट्रेड डील का कश्मीर घाटी की इकॉनमी पर बड़ा असर पड़ेगा। वे कहते हैं, “जब हम अपने सेब बांग्लादेश भेजते हैं, तो हमें 100% से ज़्यादा टैक्स देना पड़ता है। सरकार अमेरिकन सेब पर टैक्स कैसे कम कर सकती है? इससे लोकल इंडस्ट्री और इकॉनमी बर्बाद हो जाएगी।”


    10,000 करोड़ रुपये की है सेब इंडस्ट्री

    बता दें कि सेब इंडस्ट्री जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) की अर्थव्यवस्था, खासकर कश्मीर घाटी की इकॉनमी का आधार और रीढ़ है। घाटी देश के कुल सेब उत्पादन का 75% पैदा करती है। आधिकारिक आंकड़ों के के मुताबिक घाटी में करीब 20 लाख मीट्रिक टन सेब पैदा होते हैं और इस सेब इंडस्ट्री की कीमत 10,000 करोड़ रुपये है। अधिकारियों का कहना है कि इस इंडस्ट्री में सीधे या अप्रत्यक्ष करीब 50 लाख लोग जुड़े हुए हैं। फिलहाल किसान संगठन सरकार से सुरक्षा उपाय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में सेब किसानों ने भारत-US डील में खेती की उपज, खासकर सेब को शामिल करने के खिलाफ 12 फरवरी को बंद और विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। कश्मीर के किसान भी अब इसी तरह के प्रदर्शन का प्लान बना रहे हैं।

  • ट्रेनों में यात्रियों को अब सीट पर मिलेगा गर्म-ताजा खाना…. नई ऑनलाइन भोजन बुकिंग सेवा शुरू

    ट्रेनों में यात्रियों को अब सीट पर मिलेगा गर्म-ताजा खाना…. नई ऑनलाइन भोजन बुकिंग सेवा शुरू


    नई दिल्ली।
    भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने यात्रियों (Passengers) के खाने-पीने के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए E-Pantry (ई-पैंट्री) नाम से एक नई ऑनलाइन भोजन बुकिंग सेवा (New Online Food Booking Service) शुरू कर दी है। यह सुविधा 25 Mail और Express ट्रेनों में उपलब्ध कराई गई है, जिससे यात्री अपनी पसंद का भोजन टिकट बुकिंग के समय या बाद में ऑनलाइन ही बुक कर सकते हैं और ट्रेन में बैठे-बिठाए उनकी सीट पर भोजन मिल सकता है। E-Pantry सर्काविस लक्ष्य यात्रा को अधिक सुविधाजनक, साफ-सुथरा बनाना है। पहले यात्रियों को स्टेशन पर उतरकर खाना खरीदना पड़ता था या अनजाने वेंडरों पर निर्भर रहना होता था। लेकिन अब इस नई डिजिटल सेवा से टिकट बुक करते समय या बाद में IRCTC की वेबसाइट/ऐप पर आप भोजन और पानी को पहले से बुक कर सकते हैं और ट्रेन में बैठे-बिठाए वही खाना आपकी सीट तक डिलीवर हो जाएगा।

    बुकिंग के बाद आपको एक Meal Verification Code (MVC) मिलता है, जिसे यात्रा के दिन साझा करने पर भोजन सीधे आपकी सीट पर डिलीवर किया जाता है। यह सेवा उन Mail/Express ट्रेनों के लिए खास है जिनमें टिकट में भोजन शामिल नहीं होता। जिसमें अगर भोजन नहीं मिला तो refund भी मिलता है।


    E-Pantry बुकिंग कैसे करें?

    E-Pantry से भोजन बुक करना बिल्कुल आसान है:
    Step 1: IRCTC वेबसाइट या ऐप पर लॉग-इन करें।
    Step 2: ट्रेन टिकट बुक करते समय (या बाद में “Booked Ticket History” सेक्शन से भी) E-Pantry ऑप्शन चुनें।
    Step 3: अपनी पसंद का डिश/भोजन और Rail Neer का चयन करें।
    Step 4: ऑनलाइन पेमेंट पूरा करें।
    Step 5: आपको एक Meal Verification Code (MVC) SMS/Email के जरिए मिलेगा।
    Step 6: यात्रा के दिन उस MVC को ट्रेन में भोजन देने वाले स्टाफ को दिखाएं और भोजन अपनी सीट पर पाएं।


    E-Pantry सर्विस इन ट्रेनें में शामिल

    E-Pantry सेवा को शुरुआत में 25 प्रमुख Mail और Express ट्रेनों में लाया गया है। इसमें ऐसे लंबे रास्तों वाली ट्रेनें शामिल हैं जिनमें यात्रियों को खाने-पीने की जरूरत अधिक होती है। Vivek Express, Swatantra Senani Express, Swarnajayanti Express, Karnataka Sampark Kranti, Mangaldweep Express, Kalinga Utkal Express, Pushpak Express, Paschim Express, Grand Trunk Express, Poorva Express में यह सर्विस शुरू हो गई है। जल्द ही अन्य ट्रेनों फीडबैक के आधार पर इसे शुरू किया जाएगा।

  • Bharat Bandh: भारत बंद 12 फरवरी 2026 जानें क्या खुलेगा, क्या बंद रहेगा

    Bharat Bandh: भारत बंद 12 फरवरी 2026 जानें क्या खुलेगा, क्या बंद रहेगा


    नई दिल्ली। गुरुवार, 12 फरवरी 2026 को पूरे देश में भारत बंद का असर दिखाई दे सकता है। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC), संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और 10 से अधिक राष्ट्रीय ट्रेड यूनियनों के समर्थन से यह हड़ताल आयोजित की गई है। इसे कृषि, ग्रामीण और अनौपचारिक श्रमिकों के प्रतिनिधियों ने समर्थन दिया है।

    कौन-कौन से सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं
    यातायात: बसें, टैक्सियां और लोकल ट्रेनें प्रभावित हो सकती हैं। कुछ क्षेत्रों में “चक्का जाम” की संभावना।
    बैंकिंग: AIBEA, AIBOA और BEFI के कर्मचारियों की हड़ताल के चलते सार्वजनिक बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होंगी।
    बाजार और दुकानें: अधिकतर थोक और खुदरा दुकानें, रेस्तरां बंद रहने की संभावना।
    हवाई यात्रा: एयरपोर्ट खुले रहेंगे, लेकिन ट्रैफिक जाम के कारण अतिरिक्त समय लेने की सलाह।

    स्कूल और कॉलेज
    आधिकारिक अवकाश नहीं: भारत भर में स्कूल और कॉलेज खुलेंगे।
    स्थानीय असर: केरल, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में हड़ताल के कारण कुछ संस्थान बंद रह सकते हैं।

    यात्रियों के लिए सलाह
    सड़क अवरोध और विरोध प्रदर्शन के कारण यात्रा में विलंब की संभावना।
    रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त समय रखें।
    प्रभावित क्षेत्रों में राज्य संचालित बसें और ऑटो-रिक्शा सीमित हो सकते हैं।

    हड़ताल के पीछे कारण और मांगे
    नवंबर 2025 में लागू चार नए श्रम संहिता को वापस लेने की मांग।
    बीज विधेयक, विद्युत संशोधन विधेयक और पशु-अधिनियम को रद्द करने की मांग।
    MGNREGA की बहाली।
    विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 का विरोध।इस हड़ताल में INTUC, AITUC, HMS, CITU, AIUTUC, TUCC, SEWA, AICCTU, LPF और UTUC जैसे प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने SKM के समर्थन में देशभर के श्रमिकों, कर्मचारियों और किसानों को शामिल किया है।

  • राघव चड्ढा का संसद में ‘राइट टू रिकॉल’ पर जोर, बोले- मतदाता को नेता हटाने का अधिकार मिले

    राघव चड्ढा का संसद में ‘राइट टू रिकॉल’ पर जोर, बोले- मतदाता को नेता हटाने का अधिकार मिले


    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने बुधवार को संसद में ‘राइट टू रिकॉल’ यानी जनप्रतिनिधि को वापस बुलाने का अधिकार पर चर्चा कर सुर्खियां बटोरीं। उन्होंने कहा कि अगर चुने हुए नेता जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते, तो मतदाताओं को उनका कार्यकाल पूरा होने से पहले उन्हें हटाने का अधिकार होना चाहिए।

    शून्यकाल के दौरान बोलते हुए चड्ढा ने कहा, “जैसे मतदाता को चुनाव में हिस्सा लेने का अधिकार है, उसी तरह अगर नेता काम नहीं करता तो उसे हटाने का अधिकार भी होना चाहिए। ‘राइट टू रिकॉल’ मतदाताओं को सशक्त बनाएगी और नेताओं को जवाबदेह बनाएगी।”

    ‘राइट टू रिकॉल’ क्या है?
    राघव चड्ढा ने इसे एक ऐसी प्रक्रिया बताया है जिसमें वोटर किसी चुने हुए नेता को उनके कार्यकाल पूरा होने से पहले हटाने का अधिकार रखते हैं। आसान शब्दों में, अगर जनता अपने नेता के काम से संतुष्ट नहीं है, तो वह उसे जल्दी हटाने का विकल्प रख सकती है।

    राष्ट्रपति और जज हैं हटाए जा सकते हैं, नेताओं को क्यों नहीं?
    चड्ढा ने तर्क दिया कि भारत में पहले ही राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और न्यायाधीशों के लिए महाभियोग की व्यवस्था है। सरकारों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया जा सकता है। ऐसे में निर्वाचित नेताओं के लिए भी सुरक्षित और कानूनी प्रक्रिया के जरिए हटाने की सुविधा होना चाहिए।

    दुरुपयोग रोकने के लिए सुरक्षा उपाय
    सांसद ने कहा कि ‘राइट टू रिकॉल’ लोकतंत्र को मजबूत करेगा, इसे नेताओं के खिलाफ हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कम से कम 35-40% मतदाताओं के हस्ताक्षर जरूरी हों। नेता को 18 महीने का ‘परफॉर्मेंस पीरियड’ दिया जाए, ताकि वह सुधार कर सके। इस तरह काम करने वाले नेताओं को पार्टी टिकट देंगी और लोकतंत्र मजबूत होगा।

    किन देशों में लागू है?
    राघव चड्ढा के अनुसार, दुनिया के 20 से अधिक लोकतांत्रिक देशों में यह व्यवस्था मौजूद है। उदाहरण- अमेरिका, स्विट्जरलैंड, कनाडा, ब्रिटेन, वेनेज़ुएला, पेरू, इक्वाडोर, जापान, ताइवान। इसके अलावा भारत में यह व्यवस्था कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान की ग्राम पंचायतों में लागू है।

  • राहुल-सीतारमण के बीच संसद में तीखी बहस: भारत बेचने के आरोप पर गरमा गया बजट सत्र

    राहुल-सीतारमण के बीच संसद में तीखी बहस: भारत बेचने के आरोप पर गरमा गया बजट सत्र


    नई दिल्ली। लोकसभा में बजट चर्चा के दौरान विपक्ष और केंद्र सरकार के बीच जोरदार टकराव देखने को मिला। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अमेरिका-भारत ट्रेड डील को लेकर आरोप लगाया कि सरकार ने भारत माता को बेच दिया और अब अमेरिका तय करेगा कि हम किससे तेल खरीदेंगे।

    सीतारमण का पलटवार: कांग्रेस ने भारत को बेचा
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि भारत को बेचने का असली जिम्मेदार कांग्रेस है। उन्होंने याद दिलाया कि बाली में जाकर कांग्रेस ने सौदा किया था और किसानों के हक से समझौता किया। मोदी सरकार ने 2014 में विश्व व्यापार संगठन में जाकर इसे सुधारा।

    सीतारमण ने बजट पर सवाल उठाने वाले टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के GST आरोपों को भी खारिज किया और कहा कि बंगाल में पेट्रोल दिल्ली से 10रुपए ज्यादा महंगा है, जिसे कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट शासित राज्यों में आर्थिक विकास सबसे नीचे है और वहां उद्योग नहीं टिकते।

    राहुल के अडाणी और अमेरिका केस वाले आरोप
    राहुल गांधी ने अडाणी पर अमेरिका में चल रहे केस का जिक्र किया और कहा कि यह मोदी पर दबाव बनाने का तरीका है। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने राहुल से सबूत पेश करने को कहा और संसद में विशेषाधिकार नोटिस देने की बात कही।

    सीतारमण ने संसद में मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं
    निर्मला सीतारमण ने कहा कि बजट का मुख्य फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और MSME के लिए सहायक नीतियों पर है। उन्होंने कहा कि हेल्थकेयर, शिक्षा और लाइफ इंश्योरेंस पर जीएसटी हटाया गया है।

    ओवैसी ने तेल और विदेश नीति पर सवाल उठाया
    एआईएमआईएमके असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि किसी “गोरी चमड़ी वाले” को यह तय करने का अधिकार नहीं कि भारत किससे तेल खरीदे। उन्होंने ऑपरेशन इंसाफ, हाफिज सईद, मसूद अजहर और लखवी को भारत लाने की मांग भी की।

  • किरेन रिजिजू बोले- सरकार लाएगी राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव

    किरेन रिजिजू बोले- सरकार लाएगी राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव


    नई दिल्ली। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा सदन में लगाए गए आरोपों के कारण सरकार उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने जा रही है। रिजिजू ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा कि राहुल गांधी ने बिना पूर्व सूचना दिए कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर गंभीर और बेबुनियाद आरोप लगाए। यह सदन के सदस्य का विशेषाधिकार उल्लंघन है और इसकी सूचना लोकसभा अध्यक्ष को दी जाएगी।

    क्या कहा किरेन रिजिजू ने?

    रिजिजू ने बताया कि बजट पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कोई उपयोगी या ठोस सुझाव नहीं दिए बल्कि केवल आरोप लगाते रहे। उन्होंने कहा कि जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शाम पांच बजे चर्चा का जवाब देंगी तो राहुल गांधी को सदन में उपस्थित रहने की सलाह दी गई थी।

    सदन से समय से पहले चले गए

    सांसदों के नियम के अनुसार एक सदस्य को अपना भाषण समाप्त करने के बाद तुरंत सदन छोड़ने की अनुमति नहीं होती। रिजिजू ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अक्सर अपना भाषण समाप्त करके तुरंत सदन छोड़ देते हैं और इसे गंभीर मामला माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाकर सदन के नियमों और सम्मान की रक्षा की जाएगी।

  • बिहार: नीतीश कुमार पर विपक्ष की अभद्र टिप्पणी से भड़के विजय सिन्हा, बोले- लोकतंत्र की गरिमा से खिलवाड़

    बिहार: नीतीश कुमार पर विपक्ष की अभद्र टिप्पणी से भड़के विजय सिन्हा, बोले- लोकतंत्र की गरिमा से खिलवाड़


    नई दिल्ली । बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी को लेकर माहौल गरमा गया है. विपक्ष द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर की गई अभद्र टिप्पणी पर राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के प्रति इस तरह की भाषा का प्रयोग न सिर्फ गलत, बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण भी है. सदन में जाने से पहले विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राजनीतिक असहमति अपनी जगह है, लेकिन मर्यादा और भाषा की सीमा लांघना लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ है. उन्होंने विपक्ष की इस मानसिकता को पूरी तरह अनुचित बताया और संयम व जिम्मेदारी की अपील की.

    पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को लेकर सदन में नीतीश कुमार के बयान पर उन्होंने कहा कि जिस भाव से मुख्यमंत्री ने कहा उन दोनों का देवर-भौजाई का रिश्ता है. उन्होंने कहा कि राजनीति नहीं अपनत्व का प्रकट मुख्यमंत्री ने किया जिसे गलत सेंस में लेना कतई उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि सदन की मर्यादा सबको रखने की जिम्मेवारी है और मुख्यमंत्री का वैसा कोई भाव नहीं था.

    विपक्ष को संविधान पर नहीं है विश्वास- विजय कुमार सिन्हा

    वहीं विपक्ष के 119 सांसदों के द्वारा लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने पर विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि विपक्ष को संविधान में विश्वास नहीं है. ये लोग संवैधानिक पद का सम्मान नहीं करते हैं. उन्होंने कहा कि ओम बिरला ने विधायकी कार्य को बेहतर करने एवं सुंदर वातावरण बनाने का काम किया है. विपक्ष की अराजकता को रोकने के लिए जब वो सतर्क और सावधान करते हैं. अविश्वास प्रस्ताव से संवैधानिक संस्था को डिमोरलाईज करने का प्रयास विपक्ष करती है.

    संवैधानिक संस्था का अपमान करना ही है कांग्रेस का चरित्र- सिन्हा

    उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि कांग्रेस के लोगों का चरित्र ही वैसा है. संवैधानिक संस्था का अपमान करना, भय का वातावरण बनाना और वैसे लोग जो बेहतर काम करते हैं उनको डिमोरलाईज करने का काम ये लोग करते हैं.उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्था, सीबीआई, चुनाव आयोग पर ये सवाल उठाते रहे हैं. लेकिन अब ये देश के सबसे बड़े मंदिर के सबसे बड़े पुजारी पर सवाल खड़े कर सदन की गरिमा को गिराने का काम कर रही है.

  • अजित पवार के भतीजे ने विमान हादसे पर जताई साजिश की आशंका, विशेषज्ञ जांच की मांग

    अजित पवार के भतीजे ने विमान हादसे पर जताई साजिश की आशंका, विशेषज्ञ जांच की मांग


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के पिछले महीने हुए विमान हादसे को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक रोहित पवार ने मंगलवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह दुर्घटना केवल सामान्य हादसा नहीं था, बल्कि इसमें साजिश की संभावना है। रोहित ने विशेषज्ञ एजेंसियों द्वारा विस्तृत जांच कराने की मांग की है।

    हालांकि, NCP के संस्थापक शरद पवार ने इस त्रासदी को सिर्फ दुर्घटना करार दिया और साजिश की आशंका को खारिज किया था। रोहित पवार ने विमान के पायलट कैप्टन सुमित कपूर के पिछले रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए और बताया कि उनके अतीत में शराब के सेवन के लिए तीन साल का निलंबन रहा है।

    विशेषज्ञ जांच की मांग

    रोहित पवार ने कहा कि सीआईडी इस मामले की पूरी जांच करने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से जांच कराने की मांग की, जिनमें राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड नागरिक विमानन सुरक्षा जांच एवं विश्लेषण ब्यूरो और ब्रिटेन की विमान दुर्घटना जांच शाखा शामिल हैं।

    VSR कंपनी पर शक

    रोहित ने दुर्घटनाग्रस्त लियरजेट विमान की मालिकाना कंपनी VSR पर संदेह जताया। उन्होंने बताया कि 2023 में इस कंपनी के एक विमान हादसे की रिपोर्ट सामने आ चुकी है, बावजूद इसके यह कंपनी उच्चस्तरीय नेताओं द्वारा उपयोग की जा रही है और डीजीसीए अधिकारियों पर इसका प्रभाव है। उन्होंने कंपनी, बुकिंग एजेंसी एरो और पायलट सुमित कपूर पर गंभीर सवाल उठाए।

    महज एक्सीडेंट नहीं, साजिश की संभावना

    रोहित पवार ने कहा, हमें नहीं लगता कि यह केवल दुर्घटना थी। इसमें साजिश की बू है। उन्होंने विमान के अंतिम क्षणों और लैंडिंग के समय लिए गए निर्णयों पर सवाल उठाए। रोहित ने पूछा कि क्या ट्रांसपोंडर जानबूझकर बंद किया गया, पायलटों के आने में देरी क्यों हुई और रनवे 11 पर लैंडिंग क्यों की गई।

    रोहित पवार ने कहा कि पूरा महाराष्ट्र इस बात पर सवाल उठा रहा है कि क्या अजित पवार का विमान क्रैश एक्सीडेंट था या किसी साजिश का हिस्सा। उन्होंने बताया कि यह हादसा अभी भी एक बुरे सपने जैसा महसूस होता है और कई लोग अजित पवार के जीवित होने की आशा जता रहे हैं।

  • बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाएंगे, रोक सको तो रोक लो” हुमायूं कबीर ने CM योगी को दी खुली चुनौती

    बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाएंगे, रोक सको तो रोक लो” हुमायूं कबीर ने CM योगी को दी खुली चुनौती


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले बाबरी मस्जिद को लेकर सियासी तापमान बढ़ गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बाबरी मस्जिद संबंधी बयान के बाद पूर्व तृणमूल कांग्रेस नेता और जनता उन्नयन पार्टी प्रमुख हुमायूं कबीर ने पलटवार किया है। मंगलवार को हुमायूं कबीर ने कहा कि वे मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नकल वाली मस्जिद जरूर बनाएंगे। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा मस्जिद बनाकर रहूंगा रोक सको तो रोक लो।

    मीडिया से बातचीत में हुमायूं ने कहा कि बंगाल में ममता बनर्जी का शासन है और भारतीय संविधान के अनुसार मुसलमानों को भी मस्जिद बनाने का पूरा अधिकार है जैसे अन्य लोग मंदिर या चर्च बनाते हैं। उन्होंने बताया कि 6 दिसंबर 2025 को बाबरी ढांचे के गिराए जाने की वर्षगांठ पर उन्होंने मस्जिद की नींव रखी थी और 11 फरवरी 2026 से निर्माण कार्य शुरू होगा। सुबह 10 बजे लगभग 1200 लोग कुरान पढ़ते हुए निर्माण कार्य में शामिल होंगे। हुमायूं ने दोहराया कि वे किसी दबाव में नहीं आएंगे और किसी से डरते नहीं।

    इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबरी ढांचे के पुनर्निर्माण को कयामत के दिन जैसा बताते हुए इसे कभी संभव न होने वाला कहा था। उन्होंने बाराबंकी में कहा था हमने कहा था कि रामलला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे। मंदिर बन गया है। जो लोग कयामत के दिन के आने का सपना देख रहे हैं वे ऐसे ही सड़-गल जाएंगे।

    योगी ने आगे कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण 500 वर्षों के बाद संभव हुआ और विपक्षी दल संकट के समय भगवान राम को याद करते हैं बाकि समय भूल जाते हैं। उनका कहना था कि बाबरी मस्जिद का निर्माण अब कभी नहीं होगा।