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  • दिल्ली-NCR में तेज आंधी और झमाझम बारिश से कूल-कूल हुआ मौसम…. आज कई राज्यों में अलर्ट

    दिल्ली-NCR में तेज आंधी और झमाझम बारिश से कूल-कूल हुआ मौसम…. आज कई राज्यों में अलर्ट


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) और एनसीआर (NCR) में गुरुवार रात तेज आंधी, गरज-चमक और बारिश (Strong Winds, Thunderstorms Rain) के साथ मौसम ने अचानक करवट ले ली. दिनभर की भीषण गर्मी (Scorching heat) और उमस के बाद आई बारिश ने लोगों को राहत दी, लेकिन तेज हवाओं और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने रेड अलर्ट जारी कर दिया।

    दिल्ली के कई इलाकों में देर रात तेज हवाएं चलीं, आसमान में घने बादल छा गए और बारिश दर्ज की गई. मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ घंटों तक गरज-चमक के साथ बारिश जारी रह सकती है. इस दौरान 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और उनके झोंके 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है.

    IMD ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने, कमजोर ढांचों और पेड़ों से दूर रहने तथा खुले इलाकों में जाने से बचने की सलाह दी है. विभाग के मुताबिक रेड अलर्ट का मतलब है कि मौसम की स्थिति जान-माल के लिए खतरा पैदा कर सकती है और तत्काल सावधानी बरतना जरूरी है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पाकिस्तान और उससे सटे क्षेत्रों में बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर वायुमंडलीय अस्थिरता बढ़ी है. इसी वजह से दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में मौसम तेजी से बदल रहा है.


    दिल्ली समेत इन राज्यों में आज भी बारिश

    शुक्रवार को भी उत्तर भारत के कई राज्यों में मौसम सक्रिय रहेगा. दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तर राजस्थान में गरज-चमक, तेज हवाओं और धूल भरी आंधी की संभावना है. वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

    दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. केरल, तटीय कर्नाटक, अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह, सिक्किम और पश्चिमी असम में मध्यम से भारी बारिश का अनुमान है।

    हालांकि बारिश के बावजूद राजस्थान और विदर्भ के कुछ हिस्सों में लू का असर जारी रह सकता है. गुरुवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 38.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि उमस के कारण महसूस किया जाने वाला तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में बादल और बारिश के कारण तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी।

  • उद्योग-व्यावसायिक यूजर्स अब पंपों से नहीं खरीद सकेंगे पेट्रोल-डीजल…. सरकार ने 90 दिन के लिए लगी रोक

    उद्योग-व्यावसायिक यूजर्स अब पंपों से नहीं खरीद सकेंगे पेट्रोल-डीजल…. सरकार ने 90 दिन के लिए लगी रोक


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब औद्योगिक और व्यावसायिक (Industrial and Commercial Users) संस्थान पेट्रोल पंपों (Petrol pumps) से पेट्रोल-डीजल (Petrol and Diesel ) नहीं खरीद सकेंगे। उन्हें अपनी जरूरत का तेल थोक बिक्री केंद्रों से ही लेना होगा। यह पाबंदी 90 दिनों तक लागू रहेगी। सरकार ने यह कदम तेल की बढ़ती मांग को देखते हुए उठाया है।

    दरअसल, पेट्रोल पंप और थोक बाजार की कीमतों में बड़ा अंतर आ गया है। दिल्ली में पेट्रोल पंप पर डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। वहीं थोक ग्राहकों के लिए इसकी कीमत 134.50 रुपये है। इस भारी अंतर की वजह से बड़े ग्राहक पेट्रोल पंपों से तेल खरीदने लगे थे। इससे देश के कुछ हिस्सों में डीजल की मांग असामान्य रूप से बढ़ गई थी।

    सरकारी तेल कंपनियों ने आम लोगों को महंगाई से बचाने के लिए पेट्रोल पंपों पर दाम स्थिर रखे हैं। पश्चिम एशिया के संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा हुआ है। टेलीकॉम टावर और बिजली बनाने वाली कंपनियों जैसे थोक ग्राहकों को बाजार की पूरी कीमत चुकानी पड़ती है। इसी वजह से वे सस्ता तेल लेने के लिए पेट्रोल पंपों का रुख कर रहे थे।

    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 11 जून को नया आदेश जारी किया। इस आदेश का नाम ‘मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (रिटेल आउटलेट के माध्यम से आपूर्ति का अस्थायी विनियमन) आदेश, 2026’ है। सरकार ने कहा कि दुनिया के कुछ हिस्सों में जारी तनाव से तेल की सप्लाई और जहाजों के आने-जाने पर बुरा असर पड़ा है। इससे पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता प्रभावित हुई है।

    नए नियमों के मुताबिक, पेट्रोल पंपों पर डीजल की बिक्री केवल वाहनों की टंकी या मान्यता प्राप्त कंटेनरों में ही होगी। एक ग्राहक या वाहन एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही खरीद पाएगा। इस तेल को दोबारा बेचना पूरी तरह मना है। सरकार का मानना है कि बड़े ग्राहकों की भीड़ से आम जनता के लिए तेल की कमी हो सकती है। इससे जरूरी सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।

    तेल कंपनियों और राज्य सरकारों को इन नियमों को सख्ती से लागू करने को कहा गया है। जमाखोरी, कालाबाजारी और तेल की हेराफेरी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। यह कार्रवाई ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ के तहत की जाएगी। सरकार जरूरत पड़ने पर किसी खास ग्राहक या क्षेत्र को इन नियमों से छूट दे सकती है। यह पाबंदी 90 दिनों के बाद फिर से बढ़ाई जा सकती है। इसका मुख्य उद्देश्य देश भर में तेल की सही और बराबर सप्लाई सुनिश्चित करना है।

  • कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव….PM मोदी एक माह में दूसरी बार मिले CM विजय

    कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव….PM मोदी एक माह में दूसरी बार मिले CM विजय


    नई दिल्ली।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) की राजनीति और केंद्र-राज्य संबंधों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य के नए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय (New Chief Minister C. Joseph Vijay) गुरुवार को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में शामिल हुए। सीएम विजय का यह कदम पूर्ववर्ती द्रमुक (DMK) सरकार के रुख से बिल्कुल अलग है जो अक्सर केंद्र सरकार के साथ टकराव की नीति अपनाती रही थी।

    नीति आयोग की इस अहम बैठक के बाद मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) से अलग से मुलाकात भी की। एक महीने से भी कम समय में प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्री की यह दूसरी मुलाकात है। पिछले महीने पदभार संभालने के तुरंत बाद विजय ने 27 मई को दिल्ली जाकर पीएम मोदी से मुलाकात की थी। उस दौरान उन्होंने राज्य की कल्याणकारी और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता, प्रमुख विकास पहलों को मंजूरी और संवेदनशील मेकेदातू जल विवाद में केंद्र के हस्तक्षेप की मांग की थी। इसके अलावा उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिलकर तमिलनाडु के लिए अधिक बजटीय सहायता का भी अनुरोध किया था।


    नीति आयोग की बैठक में गूंजा NEET का मुद्दा

    बैठक में शामिल होने के साथ ही मुख्यमंत्री विजय ने राज्य के हितों से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात मजबूती से रखी। उन्होंने चिकित्सा और दंत चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा NEET का तमिलनाडु की ओर से विरोध दोहराया। विजय ने तर्क दिया कि इस परीक्षा ने ग्रामीण पृष्ठभूमि और सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के छात्रों के भविष्य पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव डाला है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि तमिलनाडु को एमबीबीएस (MBBS), बीडीएस (BDS) और आयुष (AYUSH) पाठ्यक्रमों में राज्य कोटे की सभी सीटों को केवल कक्षा 12वीं के अंकों के आधार पर भरने की अनुमति दी जाए।

    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान विजय ने भले ही भाजपा को अपनी पार्टी का वैचारिक दुश्मन बताया था, लेकिन सत्ता संभालने के बाद उनके आचरण में केंद्र के प्रति एक व्यावहारिक और परिपक्व दृष्टिकोण दिखाई दे रहा है।


    BJP पर हमला करने से परहेज

    जहां कई विपक्षी नेताओं ने नीट-यूजी परीक्षा विवाद को लेकर सीधे तौर पर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को निशाना बनाया, वहीं विजय ने केंद्र पर सीधा हमला करने के बजाय खुद को परीक्षा प्रणाली की कमियों तक ही सीमित रखा। उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा प्रणाली में खामियों और संरचनात्मक कमियों का पुख्ता सबूत बताया। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री के रूप में तमिलनाडु विधानसभा में अपने पहले भाषण में भी विजय ने भाजपा या केंद्र सरकार की आलोचना करने से परहेज किया था।


    स्टालिन के रुख से बिल्कुल जुदा

    विजय का यह रुख उनके पूर्ववर्ती एमके स्टालिन से बिल्कुल उलट है। स्टालिन ने यह आरोप लगाते हुए लगातार तीन नीति आयोग की बैठकों का बहिष्कार किया था कि केंद्र सरकार द्वारा तमिलनाडु के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।

  • बिहार में शराबबंदी के बावजूद बढ़े शराब सेवन के मामले, NDPS मामलों में 150% उछाल ने बढ़ाई चिंता

    बिहार में शराबबंदी के बावजूद बढ़े शराब सेवन के मामले, NDPS मामलों में 150% उछाल ने बढ़ाई चिंता


    नई दिल्ली। बिहार में वर्ष 2016 में लागू की गई पूर्ण शराबबंदी को सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना गया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इस पहल का विशेष रूप से महिलाओं ने स्वागत किया था, क्योंकि इससे घरेलू हिंसा, आर्थिक नुकसान और शराब की लत से जुड़ी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद जताई गई थी। हालांकि, आठ वर्ष बाद सामने आए आंकड़े एक अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।

    शराबबंदी के बावजूद बढ़े शराब सेवन के मामले
    भारत सरकार के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में 15 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 16.5 प्रतिशत पुरुषों ने शराब सेवन की बात स्वीकार की है। यह आंकड़ा पिछले सर्वे NFHS-5 (2019-21) के 15.4 प्रतिशत की तुलना में अधिक है। इतना ही नहीं, 0.4 प्रतिशत महिलाओं ने भी शराब पीने की बात मानी है। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि शराबबंदी के बावजूद शराब सेवन पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पाया है।

    ग्रामीण इलाकों में अधिक प्रभावहीन दिखी शराबबंदी
    सर्वे के मुताबिक ग्रामीण बिहार में 17.1 प्रतिशत पुरुष शराब का सेवन करते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 12.8 प्रतिशत है। विशेषज्ञों का मानना है कि गांवों में अवैध शराब की उपलब्धता और निगरानी की सीमित व्यवस्था के कारण प्रतिबंध का असर अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है।

    शराब की जगह नशीली दवाओं की ओर बढ़ा रुझान
    विशेषज्ञों के अनुसार शराबबंदी के बाद नशे के आदी लोगों का एक वर्ग अन्य विकल्पों की ओर मुड़ गया। पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) के चिकित्सकों ने भी नशीली दवाओं, नींद की गोलियों और फार्मास्यूटिकल उत्पादों के दुरुपयोग में वृद्धि की ओर संकेत किया है।

    हाल के वर्षों में पुलिस ने कोडीन युक्त कफ सिरप की बड़ी खेपें भी जब्त की हैं। कोडीन का अधिक मात्रा में सेवन नशे का प्रभाव पैदा करता है और इसे शराब के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई जा रही है।

    चार साल में NDPS मामलों में 150 प्रतिशत की बढ़ोतरी
    राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, नशीले पदार्थों और मन:प्रभावी दवाओं से जुड़े अपराधों के लिए लागू NDPS अधिनियम के तहत बिहार में दर्ज मामलों की संख्या लगातार बढ़ी है।

    वर्ष 2020 में जहां ऐसे 964 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में इनकी संख्या बढ़कर 2,411 तक पहुंच गई। यानी चार वर्षों में करीब 150 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    आंकड़े उठा रहे हैं बड़े सवाल
    शराबबंदी लागू होने के समय उम्मीद की गई थी कि इससे नशे की प्रवृत्ति में कमी आएगी, परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और सामाजिक समस्याओं पर नियंत्रण मिलेगा। लेकिन हालिया आंकड़े बताते हैं कि शराब सेवन पूरी तरह नहीं रुका और नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    NFHS और NCRB के आंकड़े मिलकर यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या केवल प्रतिबंध लगाने से नशे की समस्या का स्थायी समाधान संभव है, या इसके लिए जागरूकता, पुनर्वास और प्रभावी निगरानी जैसे व्यापक उपायों की भी आवश्यकता है।

  • कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ कानूनी जांच की मांग, चुनावी दस्तावेजों में वित्तीय जानकारी छिपाने का आरोप

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ कानूनी जांच की मांग, चुनावी दस्तावेजों में वित्तीय जानकारी छिपाने का आरोप

    नई दिल्ली । कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मल्लिकार्जुन खरगे एक नए विवाद के केंद्र में आ गए हैं। उनके खिलाफ चुनावी हलफनामे में कथित रूप से महत्वपूर्ण वित्तीय जानकारी का खुलासा नहीं करने के आरोप में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में दावा किया गया है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान दाखिल किए गए चुनावी दस्तावेजों में एक ट्रस्ट से जुड़ी करोड़ों रुपये की संपत्तियों का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे चुनावी पारदर्शिता और वैधानिक दायित्वों को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

    शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश कल्लाहल्ली द्वारा दर्ज कराई गई है। उनका आरोप है कि कलबुर्गी स्थित सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट, जिसकी स्थापना मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा की गई थी, उससे संबंधित वित्तीय विवरण चुनावी हलफनामे में शामिल नहीं किए गए। शिकायत के अनुसार ट्रस्ट की कुल परिसंपत्तियां 31 मार्च 2023 तक लगभग 36.86 करोड़ रुपये आंकी गई थीं, लेकिन इनका उल्लेख चुनावी दस्तावेजों में नहीं किया गया।

    शिकायतकर्ता का कहना है कि चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक उम्मीदवार के लिए अपनी वित्तीय स्थिति, संपत्तियों और संभावित हितों से जुड़ी जानकारियां स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना आवश्यक होता है। उनका आरोप है कि ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय हितों और उससे संबंधित अन्य महत्वपूर्ण विवरणों को सार्वजनिक न करना चुनावी पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत माना जा सकता है। इसी आधार पर उन्होंने मामले की विस्तृत जांच की मांग की है।

    मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों से कानूनी समीक्षा कराए जाने की मांग भी की गई है। शिकायत में ट्रस्ट के ट्रस्टी रिकॉर्ड, ऑडिट रिपोर्ट, आयकर दस्तावेजों तथा अन्य वित्तीय अभिलेखों की जांच कराने का आग्रह किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन दस्तावेजों की पड़ताल से यह स्पष्ट हो सकेगा कि चुनावी हलफनामे में आवश्यक जानकारियां पूरी तरह प्रस्तुत की गई थीं या नहीं।

    शिकायत में चुनावी पारदर्शिता से जुड़े कानूनी प्रावधानों और विभिन्न न्यायिक निर्णयों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का तर्क है कि यदि किसी उम्मीदवार द्वारा जानबूझकर अथवा अनजाने में भी महत्वपूर्ण जानकारी छूट जाती है, तो उसकी तथ्यात्मक जांच की जानी चाहिए। उनका मानना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए चुनावी घोषणाओं की सत्यता और पूर्णता सुनिश्चित करना आवश्यक है।

    फिलहाल यह मामला शिकायत के स्तर पर है और संबंधित प्राधिकारियों द्वारा इसकी समीक्षा किए जाने की मांग की गई है। अभी तक इस संबंध में किसी प्रकार का आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, मल्लिकार्जुन खरगे या कांग्रेस पार्टी की ओर से भी इस विषय पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। ऐसे में आगे की प्रक्रिया और संभावित जांच के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

    राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि चुनावी हलफनामों में दी जाने वाली जानकारी की पारदर्शिता लंबे समय से सार्वजनिक विमर्श का विषय रही है। यदि मामले में औपचारिक जांच आगे बढ़ती है तो संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर ही यह तय होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सत्यता है और क्या किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता बनती है।

  • एनडीए में शामिल होने की खबरों को किया खारिज, शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा- दीदी के साथ खड़ा हूं और रहूंगा

    एनडीए में शामिल होने की खबरों को किया खारिज, शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा- दीदी के साथ खड़ा हूं और रहूंगा

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के कुछ सांसदों के संभावित राजनीतिक रुख को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पार्टी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने उन अटकलों को सिरे से खारिज किया है जिनमें उन्हें पार्टी के कथित बागी सांसदों की सूची में शामिल बताया जा रहा था। सिन्हा ने साफ कहा कि वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ खड़े हैं और उनका साथ छोड़ने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

    राजनीतिक गलियारों में पिछले कुछ दिनों से ऐसी चर्चाएं तेज थीं कि तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट हैं और वे अपना राजनीतिक भविष्य किसी नए समीकरण के साथ जोड़ सकते हैं। इसी बीच कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि पार्टी के कई सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अलग राजनीतिक रुख अपनाने की इच्छा जताई है। इन चर्चाओं में शत्रुघ्न सिन्हा का नाम भी सामने आया था।

    हालांकि शत्रुघ्न सिन्हा ने इन खबरों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने उनके जीवन और राजनीतिक सफर के कठिन दौर में उनका साथ दिया था। ऐसे में उनके प्रति उनकी प्रतिबद्धता और सम्मान हमेशा बना रहेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह किसी भी प्रकार की बगावत या दल बदल से जुड़े नहीं हैं और पार्टी नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं।

    सूत्रों के अनुसार भी ऐसी कोई पुष्टि नहीं हुई है कि शत्रुघ्न सिन्हा ने किसी पत्र या प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हों। उनके करीबी लोगों का कहना है कि उनके नाम को लेकर जो दावे किए गए, वे तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। इस स्पष्टीकरण के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही अटकलों पर काफी हद तक विराम लग गया है।

    दरअसल हाल के दिनों में शत्रुघ्न सिन्हा द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक रूप से शुभकामनाएं देने के बाद राजनीतिक चर्चाओं को और बल मिला था। प्रधानमंत्री के लगातार लंबे कार्यकाल को लेकर दिए गए उनके संदेश को कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने अलग नजरिए से देखा था। हालांकि अब स्वयं सिन्हा ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी नेता को बधाई देना राजनीतिक निष्ठा बदलने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।

    शत्रुघ्न सिन्हा वर्तमान में पश्चिम बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने हालिया लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की थी। फिल्म जगत से राजनीति में आए सिन्हा लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति का चर्चित चेहरा रहे हैं और विभिन्न दलों के नेताओं के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध भी रहे हैं।

    इस बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में राज्यसभा स्तर पर कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रम भी देखने को मिले हैं। हाल के दिनों में कुछ नेताओं के इस्तीफों ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज किया है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि संगठन मजबूत है और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है।

    शत्रुघ्न सिन्हा के ताजा बयान को तृणमूल कांग्रेस के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है। उनके स्पष्ट रुख ने पार्टी के भीतर संभावित टूट या बड़े स्तर पर असंतोष की चर्चाओं को फिलहाल कमजोर कर दिया है। आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति में घटनाक्रम किस दिशा में आगे बढ़ते हैं, इस पर राजनीतिक विश्लेषकों और दलों की नजर बनी रहेगी।

  • पीएम मोदी से ‘गुप्त मुलाकात’ के दावे पर सियासी घमासान, संजय राउत के बयान से मचा बवाल, अभिजीत दीपके ने किया खंडन

    पीएम मोदी से ‘गुप्त मुलाकात’ के दावे पर सियासी घमासान, संजय राउत के बयान से मचा बवाल, अभिजीत दीपके ने किया खंडन

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया विवाद उस समय खड़ा हो गया जब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को लेकर एक सनसनीखेज दावा किया। राउत ने कहा कि उन्हें कुछ ऐसी जानकारियां और तस्वीरें प्राप्त हुई हैं, जिनमें अमेरिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अभिजीत दीपके के बीच कथित मुलाकात होने की बात कही जा रही है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई।

    संजय राउत ने अपने बयान में कहा कि कुछ लोगों ने उन्हें ऐसी तस्वीरें भेजी हैं, जिनके बारे में दावा किया जा रहा है कि वे अमेरिका में हुई एक बैठक से जुड़ी हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह स्वयं कोई सीधा आरोप नहीं लगा रहे हैं और केवल उनके पास पहुंची सूचनाओं का उल्लेख कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय में वह और जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहे हैं तथा तथ्यों की पुष्टि के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।

    राउत का यह बयान ऐसे समय आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी और उसके नेतृत्व को लेकर महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में चर्चा बढ़ी हुई है। हाल के दिनों में इस संगठन की गतिविधियों और अभियानों ने सोशल मीडिया सहित राजनीतिक मंचों पर भी ध्यान आकर्षित किया है। ऐसे में कथित मुलाकात को लेकर दिया गया बयान तुरंत राजनीतिक बहस का विषय बन गया।

    विवाद बढ़ने के बाद अभिजीत दीपके ने भी इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने संजय राउत के दावे को आश्चर्यजनक बताते हुए कहा कि उन्हें ऐसी किसी मुलाकात की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि वह एक साधारण छात्र हैं और प्रधानमंत्री के सुरक्षा एवं प्रोटोकॉल स्तर को देखते हुए ऐसी मुलाकात की कल्पना भी करना कठिन है। उन्होंने यह भी संभावना जताई कि यदि कोई तस्वीर सामने आई है तो वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई तकनीक से तैयार की गई हो सकती है।

    दीपके ने कहा कि उनका संगठन स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है और उसका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी गतिविधियां किसी दल विशेष के समर्थन या विरोध पर आधारित नहीं हैं। उनका कहना था कि यदि कोई राजनीतिक दल उनके विचारों का समर्थन करना चाहता है तो यह उसका निर्णय हो सकता है, लेकिन संगठन किसी राजनीतिक पार्टी के साथ औपचारिक रूप से नहीं जुड़ेगा।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के कारण अपुष्ट दावे और तस्वीरें तेजी से चर्चा का विषय बन जाती हैं। ऐसे मामलों में तथ्यों की पुष्टि होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जाता। यही कारण है कि इस विवाद में भी दोनों पक्षों के बयानों के बाद अब ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि कथित तस्वीरों और दावों की सत्यता क्या है।

    फिलहाल इस मामले में कोई आधिकारिक प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। हालांकि संजय राउत के बयान और अभिजीत दीपके के खंडन के बाद यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया है। आने वाले दिनों में यदि इस संबंध में कोई अतिरिक्त जानकारी सामने आती है तो विवाद की दिशा और प्रभाव दोनों स्पष्ट हो सकेंगे।

  • सरकार का बड़ा गैस सुधार अभियान, PNG वाले उपभोक्ताओं को छोड़ना पड़ सकता है LPG कनेक्शन

    सरकार का बड़ा गैस सुधार अभियान, PNG वाले उपभोक्ताओं को छोड़ना पड़ सकता है LPG कनेक्शन

    नई दिल्ली । देश में ऊर्जा संसाधनों के बेहतर उपयोग और गैस वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। इसी दिशा में उन उपभोक्ताओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जिनके पास एक साथ PNG और LPG दोनों कनेक्शन मौजूद हैं। ऐसे उपभोक्ताओं को भविष्य में अपने LPG कनेक्शन की स्थिति स्पष्ट करने और आवश्यकता पड़ने पर उसे सरेंडर करने के लिए कहा जा सकता है।

    सरकार का मानना है कि जिन क्षेत्रों में पाइप्ड गैस की सुविधा उपलब्ध है, वहां घरेलू उपभोक्ताओं को धीरे-धीरे उसी प्रणाली का उपयोग करना चाहिए। इससे गैस वितरण नेटवर्क अधिक व्यवस्थित होगा और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। पिछले कुछ वर्षों में देश के कई शहरों और कस्बों में PNG नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है, जिससे बड़ी संख्या में घरों तक सीधे गैस पहुंचने लगी है।

    ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि एक ही घर में दो अलग-अलग घरेलू गैस कनेक्शन बनाए रखना वितरण प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पैदा करता है। यही कारण है कि अब ऐसी व्यवस्था तैयार की जा रही है जिसमें उपभोक्ताओं को उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार एक विकल्प चुनना पड़ सकता है। इससे गैस आपूर्ति प्रणाली अधिक पारदर्शी और संतुलित बन सकेगी।

    PNG को बढ़ावा देने के पीछे आर्थिक और रणनीतिक दोनों कारण बताए जा रहे हैं। पाइप्ड गैस व्यवस्था में उपभोक्ताओं को सिलेंडर बुकिंग, डिलीवरी और स्टोरेज जैसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। इसके अलावा गैस की आपूर्ति लगातार बनी रहती है, जिससे घरेलू उपयोग में सुविधा बढ़ जाती है। शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग पहले ही इस व्यवस्था को अपना चुके हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में लगातार बदलते हालात को देखते हुए ऊर्जा संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक हो गया है। देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के बीच सरकार ऐसे विकल्पों को प्राथमिकता दे रही है जो लंबे समय तक टिकाऊ और व्यवस्थित साबित हो सकें। PNG नेटवर्क का विस्तार भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    नई व्यवस्था के तहत गैस वितरण कंपनियों को ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान करने का निर्देश दिया जा सकता है, जिनके रिकॉर्ड में PNG और LPG दोनों कनेक्शन दर्ज हैं। इसके बाद संबंधित उपभोक्ताओं को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए सूचना भेजी जा सकती है। इस कदम का उद्देश्य किसी प्रकार की असुविधा पैदा करना नहीं बल्कि उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है।

    हालांकि जिन इलाकों में अभी PNG की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां LPG सिलेंडर व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रसोई गैस की आपूर्ति में किसी प्रकार का बदलाव प्रस्तावित नहीं है। सरकार का फोकस फिलहाल उन क्षेत्रों पर है जहां पाइप्ड गैस नेटवर्क पूरी तरह सक्रिय हो चुका है।

    ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे इन बदलावों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में PNG नेटवर्क के विस्तार के साथ गैस वितरण व्यवस्था और अधिक आधुनिक, प्रभावी तथा उपभोक्ता-केंद्रित बन सकती है। इससे न केवल ऊर्जा प्रबंधन बेहतर होगा बल्कि देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

  • सुकेश चंद्रशेखर केस में जैकलीन की राहत की उम्मीदों को झटका, सुप्रीम कोर्ट की पीठ बदलेगी

    सुकेश चंद्रशेखर केस में जैकलीन की राहत की उम्मीदों को झटका, सुप्रीम कोर्ट की पीठ बदलेगी

    नई दिल्ली । मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े चर्चित मामले में बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस को सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण कानूनी झटका लगा है। उनकी याचिका पर सुनवाई कर रही पीठ के एक न्यायाधीश ने स्वयं को मामले से अलग कर लिया, जिसके बाद अब इस मामले की सुनवाई किसी अन्य पीठ के समक्ष होगी। इससे अभिनेत्री की कानूनी चुनौती पर फैसला फिलहाल आगे के लिए टल गया है।

    जैकलीन फर्नांडिस ने उस आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को बरकरार रखा गया था। अभिनेत्री का पक्ष है कि उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। हालांकि सुनवाई के शुरुआती चरण में ही प्रक्रिया में नया मोड़ आ गया।

    सुनवाई के दौरान संबंधित न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि एक जुड़े हुए मामले में उनका पारिवारिक संबंध पेशेवर रूप से सामने आया था। इसी कारण उन्होंने निष्पक्षता और न्यायिक मर्यादा को प्राथमिकता देते हुए स्वयं को मामले की सुनवाई से अलग करने का निर्णय लिया। अदालत ने निर्देश दिया कि इस याचिका को ऐसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए, जिसमें वर्तमान पीठ का कोई सदस्य शामिल न हो।

    यह मामला 200 करोड़ रुपये के कथित धन शोधन प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें कथित ठगी और अवैध वित्तीय लेनदेन की जांच लंबे समय से जारी है। हाल ही में एक निचली अदालत ने अभिनेत्री, कथित मास्टरमाइंड सुकेश चंद्रशेखर और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। इसी आदेश और उससे जुड़ी कानूनी कार्यवाही को चुनौती देते हुए जैकलीन ने उच्च न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है।

    जांच एजेंसियों का आरोप है कि अभिनेत्री का संपर्क मुख्य आरोपी के साथ बना हुआ था और उन्हें विभिन्न माध्यमों से महंगे उपहार तथा आर्थिक लाभ प्राप्त हुए थे। जांच के दौरान उन्हें कई बार पूछताछ के लिए बुलाया गया था। बाद में पूरक आरोपपत्र में उनका नाम भी शामिल किया गया, जिसके बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया।

    अभियोजन पक्ष का दावा है कि मुख्य आरोपी ने एक संगठित नेटवर्क के जरिए प्रभावशाली व्यक्तियों और सरकारी अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को कथित रूप से ठगा। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क के माध्यम से बड़ी रकम की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया और उसके बाद धन के स्रोत तथा उपयोग को छिपाने की कोशिश की गई।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी न्यायाधीश का स्वयं को मामले से अलग करना न्यायिक प्रक्रिया का सामान्य और पारदर्शी हिस्सा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि सुनवाई पूरी तरह निष्पक्ष वातावरण में हो और भविष्य में किसी प्रकार के हितों के टकराव की आशंका न रहे।

    अब इस मामले की अगली सुनवाई नई पीठ के समक्ष होगी। कानूनी हलकों में इस पर नजर बनी हुई है क्योंकि आने वाले दिनों में यह तय होगा कि अभिनेत्री की याचिका पर अदालत क्या रुख अपनाती है और जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर आगे की प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।

  • बीज से बाजार तक बदली तस्वीर: मोदी सरकार के 12 वर्षों में कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों पर योगी और धामी का बड़ा बयान

    बीज से बाजार तक बदली तस्वीर: मोदी सरकार के 12 वर्षों में कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों पर योगी और धामी का बड़ा बयान


    नई दिल्ली ।
    केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कृषि क्षेत्र में हुए बदलाव और किसान कल्याण योजनाओं की उपलब्धियां एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किसानों के हित में लागू की गई विभिन्न योजनाओं और नीतिगत सुधारों की सराहना करते हुए इन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने वाला कदम बताया।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश के अन्नदाता किसानों के जीवन में सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के नए आयाम जुड़े हैं। उनके अनुसार केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र को केवल उत्पादन तक सीमित न रखते हुए बीज से लेकर बाजार तक किसानों को केंद्र में रखकर योजनाएं तैयार की हैं। इन प्रयासों से किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है और कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा मिली है।

    उन्होंने कहा कि किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं ने किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है, जबकि फसल बीमा योजना ने प्राकृतिक आपदाओं और नुकसान की स्थिति में सुरक्षा का भरोसा मजबूत किया है। इसके साथ ही सौर ऊर्जा आधारित पहल और कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देकर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

    योगी आदित्यनाथ ने डिजिटल कृषि बाजार व्यवस्था के विस्तार को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनका कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्मों के माध्यम से किसानों को अपनी उपज के लिए व्यापक बाजार उपलब्ध हुआ है, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि किसान समृद्धि ही राष्ट्र समृद्धि का आधार है और बीते वर्षों की नीतियां इसी सोच को आगे बढ़ाती हैं।

    वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी कृषि क्षेत्र में हुए बदलावों को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि पिछले एक दशक से अधिक समय में भारतीय कृषि व्यवस्था ने व्यापक परिवर्तन देखा है। उन्होंने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, फसल सुरक्षा योजनाएं और कृषि में तकनीकी नवाचारों ने किसानों की कार्यक्षमता तथा आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    धामी ने कहा कि किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए अनेक स्तरों पर काम किया गया है। उनके अनुसार कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के उद्देश्य से बाजारों तक पहुंच बढ़ाने, आधुनिक खेती को प्रोत्साहन देने और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया गया है।

    उन्होंने उत्तराखंड में चल रही विभिन्न कृषि पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। बागवानी, प्राकृतिक खेती, मोटे अनाजों के उत्पादन, कृषि यंत्रीकरण तथा सीमांत किसानों को बेहतर विपणन सुविधाएं प्रदान करने के लिए राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है।

    दोनों मुख्यमंत्रियों के वक्तव्यों से स्पष्ट है कि कृषि क्षेत्र को देश की आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार मानते हुए केंद्र और राज्य सरकारें किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादन क्षमता मजबूत करने तथा ग्रामीण विकास को गति देने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। कृषि क्षेत्र में तकनीक, वित्तीय सहायता, बाजार विस्तार और आधारभूत संरचना के विकास को आने वाले वर्षों में भी प्राथमिकता दिए जाने की बात दोहराई गई है।