Category: National
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राहुल गांधी से मिले दिल्ली प्रदर्शनकारी, पुलिस पर मारपीट और अभद्र भाषा के आरोप लगाकर सुनाई आपबीती, छात्रों से सबूत सुरक्षित रखने की अपील
नई दिल्ली ।दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर मारपीट और अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगे हैं। प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने राहुल गांधी से मुलाकात कर अपने साथ हुई कथित घटनाओं के बारे में बताया। इस दौरान राहुल गांधी ने प्रदर्शन में शामिल युवक-युवतियों को कैमरे के सामने अपनी बात रखने का मौका दिया। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे थे, लेकिन इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, पुलिसकर्मी उन्हें संसद मार्ग से दिल्ली गेट तक ले जाते समय पीटते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उनसे कहा कि वे पैसे लेकर प्रदर्शन करने आते हैं। प्रदर्शनकारियों ने यह भी दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने उनके लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया और कहा कि उनकी वजह से पुलिस की ड्यूटी दोगुनी हो गई है। उनका आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने यह भी कहा कि उन्होंने पुलिसकर्मियों का जीना मुश्किल कर दिया है। हालांकि, ये सभी बातें प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोप हैं।इस मामले को लेकर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को संबोधित करते हुए कहा, “अमित शाह जी, देख लीजिए… यह है एक हिंदुस्तान।” उन्होंने प्रदर्शनकारियों से कहा कि वे घटनाओं के वीडियो बनाएं और उपलब्ध सबूतों को संभालकर रखें। राहुल गांधी ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा कि ऊपर से लेकर नीचे तक सभी को सजा दिलाई जाएगी। उन्होंने छात्रों से घबराने की जरूरत नहीं होने की बात भी कही।प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई के बारे में अपनी बात रखने वालों में केरल की एक युवती भी शामिल थी। उसने आरोप लगाया कि महिला कांस्टेबल चंचल यादव ने उसके साथ मारपीट की। युवती ने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि उसने विरोध के दौरान पुलिसकर्मी से कहा था, “जितना मारना है मारो, फिर प्रोटेस्ट में मिलते हैं।” राहुल गांधी ने युवती की हिम्मत की तारीफ करते हुए उसे ‘शेरनी’ कहा। युवती की ओर से लगाए गए आरोपों के संबंध में खबर में पुलिस का पक्ष या किसी आधिकारिक जांच का विवरण नहीं दिया गया है।प्रदर्शनकारियों ने मुलाकात के दौरान अपने विरोध के तरीके और पुलिस के व्यवहार को लेकर भी बातें साझा कीं। उनका कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन उन्हें कथित तौर पर पीटा गया और अपमानित किया गया। उन्होंने संसद मार्ग से दिल्ली गेट तक ले जाए जाने के दौरान मारपीट होने का आरोप दोहराया। राहुल गांधी ने उनकी बातें सुनीं और वीडियो तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित रखने पर जोर दिया।इस मुलाकात के दौरान प्रदर्शनकारियों में शामिल एक व्यक्ति ने बांसुरी पर ‘वैष्णव जन तो’ की धुन बजाई। उसने कहा कि नफरत का जवाब प्यार से दिया जाएगा। इस प्रसंग के जरिए प्रदर्शनकारियों ने अपने संदेश को सामने रखा। राहुल गांधी ने भी उनकी एकजुटता का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी आवाज को धर्म, जाति या लिंग के आधार पर अलग-अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रदर्शनकारियों की आवाज को इन पहचानों के आधार पर बांटकर नहीं देखा जाना चाहिए।प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों और राहुल गांधी की प्रतिक्रिया के बीच पुलिस की कथित कार्रवाई का मुद्दा सामने आया है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि, पुलिस का जवाब या मामले में किसी आधिकारिक कार्रवाई का विस्तृत विवरण शामिल नहीं है। -

रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन, योगी आदित्यनाथ बोले- अभावों से संघर्ष कर सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की प्रेरक कहानी
नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में अधिक समय बिताने के बजाय अच्छी पुस्तकों को पढ़ने की आदत विकसित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया पर प्रतिदिन पांच से सात घंटे बिताने वाले लोग यदि इसमें से एक-दो घंटे भी पुस्तकें पढ़ने के लिए निकालें, तो उनके जीवन को नई दिशा मिल सकती है। सोशल मीडिया पर रील बनाकर लाइक्स जुटाने की तुलना में वास्तविक जीवन में आगे बढ़ने के प्रयास अधिक उपयोगी हैं। उन्होंने महापुरुषों की जीवनियां और आत्मकथाएं पढ़ने को संघर्षों से प्रेरणा प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को लखनऊ स्थित लोकभवन सभागार में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक ऐसे व्यक्ति की जीवनयात्रा को सामने लाती है, जिसने अभावों को अपनी कमजोरी या आगे बढ़ने में बाधा नहीं बनने दिया। संघर्ष, परिश्रम और पुरुषार्थ के बल पर रामनाथ कोविंद देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचे। मुख्यमंत्री के अनुसार, उनकी आत्मकथा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बन सकती है।योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में पुस्तकालयों के विस्तार और पढ़ने की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से प्रत्येक ग्राम पंचायत में पुस्तकालय की व्यवस्था की जा रही है। प्रदेश में 57,600 ग्राम सचिवालय बन चुके हैं और इनमें पुस्तकालय के लिए एक कमरा निर्धारित किया गया है। इन स्थानों पर गांव के बच्चे अध्ययन कर रहे हैं। इसके साथ ही डिजिटल लाइब्रेरी विकसित करने का काम भी किया जा रहा है। बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों से लेकर महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों तक पुस्तकालयों का विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि रामनाथ कोविंद की आत्मकथा भी व्यापक स्तर पर पुस्तकालयों तक पहुंचनी चाहिए और सरकार इस दिशा में प्रयास करेगी।मुख्यमंत्री ने पुस्तक मेलों में लोगों की भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि शुरुआत में आयोजकों को आशंका थी कि मौजूदा दौर में लोग पुस्तकें खरीदने में कितनी रुचि दिखाएंगे। हालांकि, लखनऊ में आयोजित पुस्तक मेले में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इसके बाद गोरखपुर में उससे भी अधिक पुस्तकें बिकीं। हाल में लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में लगे पुस्तक मेले में भी युवाओं और विद्यार्थियों ने अच्छी भागीदारी की। उन्होंने कहा कि लोगों में पढ़ने की रुचि मौजूद है, जरूरत उन्हें उपयुक्त मंच और अवसर उपलब्ध कराने की है।रामनाथ कोविंद की जीवनयात्रा का उल्लेख करते हुए योगी आदित्यनाथ ने बताया कि उनका जन्म कानपुर के परौंख गांव में हुआ था और बचपन में ही उन्होंने अपनी मां को खो दिया था। उन्होंने गांव के विद्यालय से पढ़ाई शुरू की और उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद अधिवक्ता के रूप में गरीबों तथा वंचितों की आवाज बने। इसके बाद उन्होंने भाजपा संगठन, राज्यसभा, बिहार के राज्यपाल और राष्ट्रपति के रूप में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों से पीछे हटने के बजाय उनका सामना करना ही महानता की पहचान है।उन्होंने यह भी कहा कि सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने के बावजूद रामनाथ कोविंद का अपनी जन्मभूमि परौंख से जुड़ाव बना रहा। वह अवसर मिलने पर गांव जाते हैं और पुराने साथियों के साथ चाय तथा चाट बेचने वालों से भी उनके संबंध कायम हैं। उन्होंने गांव में शिक्षा सुविधाओं के विकास के लिए प्रयास किए। वहां विद्यालय भवन को विकसित करके राज्य सरकार को सौंपा गया, जिसे आगे आवासीय विद्यालय के रूप में विकसित किया गया। मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम के जन्मभूमि प्रेम का उदाहरण देते हुए कहा कि जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं।उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि रामनाथ कोविंद की आत्मकथा सार्वजनिक जीवन में शुचिता, सादगी और अहंकार से दूर रहने की प्रेरणा देती है। उनके अनुसार, व्यक्ति कितना भी बड़ा पद हासिल कर ले, उसके संस्कार और विचार नहीं बदलने चाहिए। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि कानपुर के छोटे से गांव के गरीब परिवार में जन्मा व्यक्ति अपनी योग्यता और कार्यक्षमता के बल पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच सकता है। उन्होंने इसे भारतीय गणतंत्र की खूबसूरती और रामनाथ कोविंद के जीवन को लोकतांत्रिक मूल्यों तथा पारदर्शिता का उदाहरण बताया।विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने पूर्व राष्ट्रपति की जीवनयात्रा को ‘कच्चे घर, पक्के इरादे’ का उदाहरण बताया और विधानसभा सदस्यों के लिए पुस्तक की 500 प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध निदेशक कपिश मेहरा ने कहा कि प्रदेश के विद्यालयों और पुस्तकालयों में अच्छी हिंदी पुस्तकों की पहुंच बढ़ी है और किताबें बच्चों तक पहुंच रही हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत के गायन से हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामनाथ कोविंद को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। उनकी पत्नी सविता कोविंद का भी स्वागत किया गया। इसके बाद पूर्व राष्ट्रपति ने अतिथियों के साथ अपनी आत्मकथा के हिंदी संस्करण का विमोचन किया। -

रूस में हुआ प्यार, बिहार में शादी की तैयारी; राहुल के साधारण घर में रहने को तैयार हुईं जूली, परिवार की सहमति से बनेगी बात
नई दिल्ली: प्यार में दो लोगों के बीच देश और रहन-सहन का अंतर भी रिश्ते के आड़े नहीं आया। बिहार के भागलपुर जिले के राहुल यादव और रूस की रहने वाली जूली की प्रेम कहानी इन दिनों चर्चा में है। दोनों की मुलाकात रूस में हुई थी, जहां राहुल काम करने के लिए गए थे। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और दोस्ती प्यार में बदल गई। अब जूली अपने परिवार के साथ रूस से बिहार पहुंच गई हैं। उनका उद्देश्य राहुल के साथ रहना और अपने रिश्ते को शादी तक पहुंचाना है।राहुल यादव बिहार के भागलपुर जिले के राजापुर गांव के रहने वाले हैं। वह रोजगार के सिलसिले में रूस गए थे। वहीं उनकी मुलाकात जूली से हुई। शुरुआती परिचय के बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं और समय के साथ उनका रिश्ता प्रेम में बदल गया। दोनों ने एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने की इच्छा जताई। कुछ समय बाद राहुल भारत लौट आए, लेकिन उनके स्वदेश आने के बाद भी दोनों के बीच संपर्क बना रहा। अलग-अलग देशों में रहने के बावजूद उनका रिश्ता कायम रहा और साथ रहने की इच्छा भी बनी रही।राहुल के भारत लौटने के करीब छह महीने बाद जूली ने उनसे मिलने के लिए बिहार आने का फैसला किया। वह अकेले भारत नहीं आईं, बल्कि अपने परिवार के सदस्यों को भी साथ लेकर पहुंचीं। जूली का इस तरह अपने परिवार के साथ राहुल के गांव पहुंचना इस प्रेम कहानी का खास पहलू बन गया है। दोनों के बीच रिश्ते को आगे बढ़ाने और शादी करने की इच्छा के चलते यह मुलाकात महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जूली के परिवार की मौजूदगी से भी यह स्पष्ट होता है कि वह इस रिश्ते को लेकर गंभीर हैं।इस प्रेम कहानी में सबसे अधिक चर्चा राहुल के साधारण घर और जूली के फैसले को लेकर हो रही है। राहुल का परिवार गांव में एक बेहद साधारण मकान में रहता है, जिसकी छत फूस से बनी हुई है। जूली को जब राहुल के घर और उनके रहन-सहन के बारे में जानकारी मिली, तब भी उन्होंने अपना निर्णय नहीं बदला। वह राहुल के साथ उसी घर में रहकर जीवन बिताने के लिए तैयार हैं। उनके इस फैसले ने दोनों के रिश्ते को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ा दी है। अलग-अलग देशों और परिस्थितियों से आने के बावजूद दोनों एक साथ रहने की इच्छा रखते हैं।जूली के फैसले को देखते हुए दोनों परिवारों के बड़े-बुजुर्ग भी इस रिश्ते को शादी में बदलने के लिए सहमत हो गए हैं। अब राहुल और जूली की शादी नवंबर 2026 में होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, दोनों की शादी की निश्चित तारीख और अन्य तैयारियों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में विवाह की अंतिम योजना को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।राहुल और जूली की कहानी में रोजगार के सिलसिले में हुई मुलाकात से लेकर शादी की तैयारी तक का सफर शामिल है। रूस में शुरू हुआ उनका रिश्ता अब बिहार में नए पड़ाव की ओर बढ़ रहा है। जूली का अपने परिवार के साथ राहुल के गांव पहुंचना और उनके साधारण घर में रहने के लिए तैयार होना इस कहानी को खास बना रहा है। फिलहाल, दोनों परिवारों की सहमति के बाद नवंबर में शादी होने की संभावना पर सबकी नजरें टिकी हैं। -

एक साल जेल में रहने के बाद अमृतप्रभा महंत को मिली राहत, जुबीन गर्ग मौत मामले में जमानत पर रिहा होने वाली पहली आरोपी
नई दिल्ली । असम के मशहूर गायक जुबीन गर्ग की मौत के मामले में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। इस मामले में आरोपी सिंगर अमृतप्रभा महंत को जेल से रिहा कर दिया गया है। मंगलवार को आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद वह हाफलोंग सब-जेल से बाहर आईं। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दी थी और अदालत के आदेश के चार दिन बाद उनकी रिहाई संभव हो सकी। इस घटनाक्रम को जुबीन गर्ग की मौत से जुड़े मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ माना जा रहा है।अमृतप्रभा महंत पिछले करीब एक साल से जेल में बंद थीं। गुवाहाटी हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हुआ। अदालत ने उन्हें बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश दिया था। इसके बाद जेल प्रशासन ने निर्धारित प्रक्रिया पूरी की और उन्हें रिहा कर दिया। इस मामले में मुख्य केस में जमानत पाने वाली अमृतप्रभा पहली आरोपी बताई जा रही हैं। उनकी रिहाई के बाद अब मामले की जांच और आगे की कानूनी कार्यवाही पर भी लोगों की नजर रहेगी।जुबीन गर्ग असम के लोकप्रिय गायकों में शामिल थे और उनकी मौत की खबर ने संगीत जगत के साथ-साथ उनके प्रशंसकों को भी झकझोर दिया था। उनकी मौत से जुड़े मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया लगातार चर्चा में रही है। इस प्रकरण में अमृतप्रभा महंत का नाम आरोपी के रूप में सामने आया था और इसके बाद उन्हें जेल में रहना पड़ा। अब हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आ गई हैं। हालांकि जमानत पर रिहाई का अर्थ मामले से पूरी तरह बरी होना नहीं है। उनके खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया अपने निर्धारित तरीके से आगे बढ़ सकती है।अदालत से जमानत मिलने के बाद आरोपी को तय शर्तों का पालन करना होता है। बॉन्ड पर रिहाई भी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। इसलिए अमृतप्रभा महंत की रिहाई को मामले में अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। अदालत में आगे होने वाली सुनवाई और जांच से जुड़े तथ्यों के आधार पर ही प्रकरण की दिशा स्पष्ट होगी। फिलहाल इस मामले में उनकी जेल से रिहाई सबसे प्रमुख घटनाक्रम बनकर सामने आई है।जुबीन गर्ग की मौत के मामले में उनके प्रशंसक और असम के लोग लंबे समय से जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी पर नजर बनाए हुए हैं। अमृतप्रभा महंत को मिली जमानत ने इस मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। आने वाले समय में अदालत की कार्यवाही और जांच से जुड़े अपडेट अहम रहेंगे। -

गुटखा और तंबाकू बेचने वालों के लिए बड़ी खबर, उत्तराखंड में 13 अक्टूबर से एक साल तक लागू रहेगा प्रतिबंध
नई दिल्ली । उत्तराखंड में गुटखा पान मसाला और तंबाकू से जुड़े उत्पादों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने राज्य में तंबाकू और निकोटिन युक्त गुटखा पान मसाला तथा अन्य खाद्य पदार्थों के निर्माण भंडारण वितरण और बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश 13 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो गया है और अगले एक साल तक लागू रहेगा। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य लोगों को तंबाकू और निकोटिन के हानिकारक प्रभावों से बचाना तथा खाद्य पदार्थों में प्रतिबंधित तत्वों के इस्तेमाल पर रोक लगाना है। इस आदेश के बाद राज्य में इन उत्पादों के कारोबार से जुड़े लोगों और उपभोक्ताओं के बीच चर्चा तेज हो गई है।खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन उत्तराखंड के आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किया। सरकार ने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 की धारा 26 के साथ धारा 92 और धारा 30 की उपधारा 2 के तहत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह कदम उठाया है। आदेश के मुताबिक राज्य में किसी भी नाम से बिकने वाले ऐसे खाद्य उत्पादों पर प्रतिबंध रहेगा जिनमें तंबाकू या निकोटिन का इस्तेमाल किया गया हो। इसमें इनके उत्पादन से लेकर भंडारण वितरण और बिक्री तक की गतिविधियां शामिल हैं। यह पाबंदी पूरे उत्तराखंड में लागू होगी।सरकार के इस फैसले के पीछे खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी एक अहम वजह है। खाद्य सुरक्षा और मानक विनियम 2011 के विनियम 2.3.4 के तहत किसी भी खाद्य पदार्थ में संघटक के रूप में तंबाकू और निकोटिन के इस्तेमाल पर रोक है। इसके बावजूद गुटखा और पान मसाला जैसे उत्पादों में इन पदार्थों के इस्तेमाल की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने एक साल के लिए प्रतिबंध लागू करने का निर्णय लिया है। तंबाकू और निकोटिन का सेवन मुंह और गले के कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है। ऐसे में इनके इस्तेमाल को नियंत्रित करना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।उत्तराखंड में इस तरह की पाबंदी पहली बार नहीं लगाई गई है। इससे पहले वर्ष 2013 में भी राज्य सरकार ने गुटखा और इससे जुड़े उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद 2015 और 2019 में भी आदेश जारी कर पाबंदियों को आगे बढ़ाया गया। इसके बावजूद बाजार में ऐसे उत्पादों की उपलब्धता और इस्तेमाल को लेकर सवाल उठते रहे। अब सरकार ने एक बार फिर एक साल की अवधि के लिए प्रतिबंध लागू किया है। इस बार आदेश में निर्माण और बिक्री के साथ भंडारण तथा वितरण को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। इससे प्रतिबंध के दायरे को व्यापक बनाने की कोशिश की गई है।इस फैसले का प्रभाव दुकानदारों वितरकों और इन उत्पादों से जुड़े कारोबारियों पर भी पड़ सकता है। प्रतिबंध के दौरान संबंधित उत्पादों का कारोबार करने वालों को सरकारी आदेश का पालन करना होगा। वहीं उपभोक्ताओं के लिए भी यह जरूरी होगा कि वे प्रतिबंधित खाद्य उत्पादों की खरीद और बिक्री से बचें। हालांकि किसी भी प्रतिबंध की वास्तविक सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित निगरानी पर निर्भर करती है। पहले भी पाबंदियां लागू होने के बावजूद उत्पादों के इस्तेमाल की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस बार नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए किस तरह की निगरानी व्यवस्था अपनाता है।उत्तराखंड सरकार का यह कदम तंबाकू और निकोटिन से जुड़े खाद्य उत्पादों के खिलाफ नियंत्रण को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया फैसला है। एक साल तक लागू रहने वाली इस पाबंदी का उद्देश्य लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करना और खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। अब इसकी प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री और वितरण पर कितनी सख्ती से निगरानी रखी जाती है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। -

मुरुगन के मंत्रि-परिषद और राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा…. कैबिनेट में जल्द हो सकता है फेरबदल
नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना प्रसारण राज्य मंत्री एल मुरुगन (L. Murugan) ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद (Ministers Council) और राज्यसभा (Rajya Sabha) की सदस्यता दोनों से इस्तीफा दे दिया है। मुरुगन ने प्रधानमंत्री को पांच पृष्ठों का पत्र लिखकर राज्य में जाकर संगठन को मजबूत करने की इच्छा जताई है। उनके इस्तीफे से केंद्रीय मंत्रिपरिषद में एक और पद रिक्त हो जाएगा। पहले से ही कई मंत्री पद खाली हैं।वहीं, कुछ राज्यसभा सदस्यों को दोबारा कार्यकाल नहीं मिलने के कारण भी मंत्रिपरिषद में और पद रिक्त होंगे। ऐसे में इस बात की संभावना जताई जा रही है कि इसी माह केंद्रीय मंत्रिपरिषद का विस्तार और फेरबदल हो सकता है। हालांकि, इसे लेकर भाजपा नेतृत्व की तरफ से आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है।
तमिलनाडु में काम करने की जताई इच्छा
मुरुगन ने अपना इस्तीफा वाला पत्र एक्स पर पोस्ट किया है। प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में भारत माता और तमिलनाडु की सेवा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है। विनम्रता और कृतज्ञता के साथ उन्होंने अनुरोध किया कि उन्हें राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया जाए और राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने की भी अनुमति दी जाए, ताकि वह तमिलनाडु में पार्टी को मजबूत करने के लिए पूरा समय समर्पित कर सकें। मुरुगन मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं।उन्होंने पत्र में लिखा, ‘पिछले पांच वर्षों से आपकी सरकार में सेवा करने का सम्मान दिए जाने के लिए मैं गहरी कृतज्ञता के साथ यह अनुरोध कर रहा हूं। दिहाड़ी मजदूरों के बेटे पर आपने जो भरोसा जताया, वह मेरे जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बना रहेगा। अब मैं अपने लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच अथक मेहनत करके उस भरोसे पर खरा उतरने के लिए आपका आशीर्वाद चाहता हूं।’
मुरुगन सितंबर 2021 से राज्यसभा के सदस्य हैं और अप्रैल 2024 में मध्य प्रदेश से उच्च सदन के लिए दोबारा निर्वाचित हुए थे। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 में समाप्त होगा। मंत्री ने कहा कि वह राज्यसभा की सदस्यता छोड़ना चाहते हैं।
खुद ही छोड़ने के लिए कहा था
मुरुगन ने कहा, ‘मैंने प्रधानमंत्री से मंत्रिपरिषद और राज्यसभा से मुझे मुक्त करने का अनुरोध किया है, क्योंकि मैं तमिलनाडु जाकर अपनी पार्टी को मजबूत करना चाहता हूं।’ उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में मैंने कहा है कि मैं गांवों, गलियों और हर जगह जाकर अपनी पार्टी को मजबूत करना चाहता हूं और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए जमीन तैयार करना चाहता हूं।’
5 नए मंत्री आ सकते हैं
खास बात है कि इससे पहले जॉर्ज कुरियन इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं, पार्टी के राज्यसभा सांसद रहे रवनीत सिंह बिट्टू ने भी जुलाई में इस्तीफा दे दिया था। वहीं हाल ही में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को भी हाल ही में संपन्न राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने उत्तर प्रदेश से दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया था। हालांकि, वह केंद्रीय मंत्रिपरिषद में बने हुए हैं। इसी तरह उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री बी एल वर्मा को भी उच्च सदन के चुनाव के लिए दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया गया था। वह भी अपने पद पर बने हुए हैं। -

राजस्थान बॉर्डर पर ड्रोन से हथियारों की खेप बरामद, 600 कारतूस और विस्फोटक मिले, दो आरोपी गिरफ्तार
जयपुर। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास सुरक्षा एजेंसियों ने ड्रोन के जरिए गिराई गई हथियारों और विस्फोटकों की खेप बरामद की है। रावला क्षेत्र के एक खेत से 7.7 किलोग्राम प्लास्टिक एक्सप्लोसिव, दो पिस्टल, करीब 600 कारतूस और अन्य संदिग्ध उपकरण मिले हैं। मामले में पंजाब निवासी लखविंद्र सिंह और सुखविंद्र सिंह को गिरफ्तार किया गया है। राजस्थान एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने संयुक्त अभियान चलाकर यह कार्रवाई की।ANTF के आईजी विकास कुमार के मुताबिक, ड्रोन की तीन उड़ानों के जरिए सीमा क्षेत्र में हथियार, कारतूस और विस्फोटक गिराए गए थे। बरामद सामग्री की गिनती और जांच की जा रही है। अधिकारियों को आशंका है कि खेप में आईईडी बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और विस्फोटक से जुड़ी अन्य सामग्री भी शामिल है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जयपुर से विशेष बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया है, जो मौके पर पहुंचकर विस्फोटकों की जांच और उन्हें निष्क्रिय करने की कार्रवाई करेगा।
खेत में मिले तीन पैकेट, विस्फोटक भी बरामद
जानकारी के मुताबिक, श्रीगंगानगर जिले के रावला क्षेत्र में सीमा के पास 12 केएनडी इलाके के एक खेत में ड्रोन से तीन पैकेट गिराए गए थे। तलाशी के दौरान इन पैकेटों से 7.7 किलोग्राम प्लास्टिक एक्सप्लोसिव, दो पिस्टल, करीब 600 कारतूस और चार मैगजीन बरामद हुईं।इसके अलावा एक रिमोट, दो केपलर और चार बैटरियां भी मिली हैं। सुरक्षा एजेंसियां बरामद सामग्री की प्रकृति, इस्तेमाल और संभावित खतरे का आकलन कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, विस्फोटकों की स्थिति की जांच के बाद उन्हें निष्क्रिय करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हथियारों और विस्फोटकों की खेप किसके लिए भेजी गई थी, इसे आगे कहां पहुंचाया जाना था और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
मजदूर बनकर रह रहे थे दोनों संदिग्ध
इस मामले में गिरफ्तार लखविंद्र सिंह और सुखविंद्र सिंह पंजाब के रहने वाले हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, दोनों रावला मंडी क्षेत्र में मजदूर बनकर रह रहे थे। जांच एजेंसियों को संदेह है कि वे ड्रोन से गिराए गए पैकेट लेने के लिए वहां पहुंचे थे।एजेंसियां उन बाइक सवार युवकों की भी तलाश कर रही हैं, जो कथित तौर पर दोनों को रावला छोड़ने आए थे। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि संदिग्धों का संपर्क किन लोगों से था और हथियारों की खेप मंगाने के पीछे किसका निर्देश था।
मामले की जांच जारी होने के कारण अधिकारियों ने गिरफ्तार आरोपियों से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की है।
एक महीने से संदिग्धों की गतिविधियों पर थी नजर
ANTF के आईजी विकास कुमार ने बताया कि यह कार्रवाई पहले से मिली खुफिया सूचना के आधार पर की गई। एजेंसी को करीब एक महीने पहले जानकारी मिली थी कि पंजाब के दो संदिग्ध किसी खास मकसद से राजस्थान के सीमावर्ती इलाके में मौजूद हैं। इसके बाद टीम ने उनकी गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी थी।विकास कुमार के मुताबिक, संदिग्धों की निगरानी के दौरान बाद में सूचना मिली कि हथियारों और विस्फोटकों की खेप अगले दिन पहुंचने वाली है। इसके बाद ANTF और BSF ने संयुक्त अभियान की योजना बनाई और कार्रवाई करते हुए कथित तौर पर खेप लेने पहुंचे दोनों संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया।
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां बरामद हथियारों, विस्फोटकों और अन्य उपकरणों की जांच के साथ पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं। जांच का प्रमुख पहलू यह है कि खेप कहां से भेजी गई थी और इसे हासिल करने के बाद किस ठिकाने तक पहुंचाया जाना था।
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देवरहा बाबा के जीवन पर बनेगी फिल्म ‘मचान बाबा’, जॉर्ज पंचम, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से जुड़ी मुलाकातों पर भी होगा फोकस
नई दिल्ली ।प्रसिद्ध संत देवरहा बाबा के जीवन और उनसे जुड़े रहस्यमयी प्रसंगों को अब बड़े पर्दे पर दिखाने की तैयारी है। उनके जीवन, अनूठी जीवनशैली और देश-विदेश की प्रमुख हस्तियों से जुड़ी मुलाकातों पर आधारित फिल्म ‘मचान बाबा’ का आधिकारिक टाइटल पोस्टर जारी कर दिया गया है। फिल्म का उद्देश्य संत के जीवन के विभिन्न पहलुओं को शोध के आधार पर दर्शकों के सामने प्रस्तुत करना है। इससे पहले नीब करौरी बाबा से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ को मिली सफलता के बाद अब देवरहा बाबा की कहानी को फिल्म के माध्यम से सामने लाने की तैयारी की गई है।‘मचान बाबा’ का निर्माण ओजस फिल्म्स के बैनर तले किया जा रहा है। यह कंपनी सॉफ्टवेयर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में काम करने वाली ओजस सॉफ्टेक की फिल्म और कंटेंट इकाई है। इस परियोजना को ब्रिटेन में स्थापित भारतीय मूल की कारोबारी पूनम गुप्ता और अमेरिका में रहने वाले उद्यमी विकल्प पालीवाल मिलकर प्रोड्यूस कर रहे हैं। फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जा रहा है। निर्माताओं के अनुसार, इसकी कहानी में संत के जीवन से जुड़े प्रसंगों को विस्तार से शामिल किया जाएगा।
फिल्म की खास बात देवरहा बाबा की जीवनशैली और उनसे जुड़ी ऐतिहासिक मुलाकातों पर किया जा रहा शोध है। देवरहा बाबा पेड़ या बांस से बने मचान पर रहने के अपने अनूठे अंदाज के लिए जाने जाते थे। फिल्म में उनकी रहस्यमयी आयु और जीवन से जुड़े पहलुओं को भी दिखाने की तैयारी है। निर्माताओं के अनुसार, इन विषयों को प्रस्तुत करने के लिए शोध किया जा रहा है, ताकि कहानी में संत के जीवन से संबंधित विभिन्न घटनाओं को शामिल किया जा सके।
शोध के दायरे में ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम, भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से जुड़ी ऐतिहासिक मुलाकातों के प्रसंग भी शामिल हैं। इन प्रमुख हस्तियों के साथ देवरहा बाबा के संबंधों और मुलाकातों को फिल्म में जगह देने की योजना है। इसके अलावा, नीब करौरी बाबा और देवरहा बाबा के बीच आत्मीयता तथा आपसी सम्मान से जुड़े प्रसंगों पर भी काम किया जा रहा है। इस तरह फिल्म में संत के आध्यात्मिक जीवन के साथ उन ऐतिहासिक संदर्भों को भी प्रस्तुत करने का प्रयास होगा, जो उनके जीवन से जुड़े बताए जाते हैं।
निर्माताओं ने कहा है कि ‘मचान बाबा’ केवल चमत्कारों या अंधविश्वास पर केंद्रित फिल्म नहीं होगी। इसे भारतीय आस्था, समृद्ध इतिहास, राजनीति और संत जीवन से जुड़े गूढ़ पहलुओं को सामने लाने वाली कहानी के रूप में तैयार किया जा रहा है। फिल्म में इन विषयों को प्रमाणिकता के साथ प्रस्तुत करने पर जोर दिया जाएगा। हालांकि, फिल्म में शामिल किए जाने वाले सभी प्रसंगों और उन्हें पर्दे पर दिखाने के तरीके के बारे में अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
फिल्म को वर्ष 2027 में सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना बनाई गई है। टाइटल पोस्टर जारी होने के साथ इस परियोजना की औपचारिक घोषणा हो गई है। अब दर्शकों की नजर इस बात पर रहेगी कि देवरहा बाबा के जीवन से जुड़े आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और राजनीतिक प्रसंगों को फिल्म किस रूप में पेश करती है। निर्माताओं के लिए इस संत के जीवन की विशिष्टताओं को शोध के साथ पर्दे पर उतारना परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
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मुकेश अंबानी फिर बने भारत के सबसे अमीर व्यक्ति, गौतम अडानी से छीना नंबर-1 का ताज
नई दिल्ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी एक बार फिर भारत के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। फोर्ब्स की रियल-टाइम बिलियनेयर्स लिस्ट के अनुसार, अंबानी ने संपत्ति के मामले में अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति का खिताब चीन की कंपनी बाइटडांस के संस्थापक झांग यिमिंग के पास है। वहीं, दुनिया के अरबपतियों की सूची में एलन मस्क शीर्ष स्थान पर बने हुए हैं।
फोर्ब्स के दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, मुकेश अंबानी की अनुमानित कुल संपत्ति 78.8 अरब डॉलर है। इसके साथ वह दुनिया के अमीरों की सूची में 25वें स्थान पर हैं। दूसरी ओर, गौतम अडानी की संपत्ति 74.9 अरब डॉलर आंकी गई है।
भारत के टॉप-5 अरबपतियों में कौन-कौन?
फोर्ब्स की सूची में भारत के प्रमुख अरबपतियों में सावित्री जिंदल, लक्ष्मी मित्तल और शिव नादर भी शामिल हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इनकी अनुमानित संपत्ति इस प्रकार है।
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मुकेश अंबानी: 78.8 अरब डॉलर
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गौतम अडानी: 74.9 अरब डॉलर
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सावित्री जिंदल: 36.6 अरब डॉलर
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लक्ष्मी मित्तल: 30.6 अरब डॉलर
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शिव नादर: 27.4 अरब डॉलर
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सावित्री जिंदल दुनिया के अरबपतियों की सूची में 64वें स्थान पर बताई गई हैं। इन आंकड़ों के आधार पर अंबानी और अडानी के बीच संपत्ति का अंतर 3.9 अरब डॉलर है।
अंबानी-अडानी को पछाड़कर झांग यिमिंग बने एशिया के सबसे अमीर शख्स
भारत के दोनों दिग्गज उद्योगपतियों को पीछे छोड़ते हुए चीन की कंपनी बाइटडांस के संस्थापक झांग यिमिंग एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। बाइटडांस टिकटॉक की मूल कंपनी है।
दिए गए आंकड़ों के अनुसार, झांग यिमिंग की अनुमानित संपत्ति 84 अरब डॉलर है। एशिया के अमीरों की सूची में मुकेश अंबानी दूसरे और गौतम अडानी तीसरे स्थान पर हैं।
वहीं, एलन मस्क दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बने हुए हैं। <Entity value=”फोर्ब्स रियल-टाइम बिलियनेयर्स लिस्ट” category=”other” disambig=”अरबपतियों की अनुमानित संपत्ति और रैंकिंग”/> के आंकड़ों के अनुसार, मस्क की संपत्ति एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक बताई गई है। <Cite refs={[“turn299138search2″,”turn299138search10”]}/>
हर दिन कैसे बदलती है अरबपतियों की संपत्ति?
फोर्ब्स की रियल-टाइम बिलियनेयर्स लिस्ट दुनिया के अरबपतियों की अनुमानित संपत्ति में होने वाले बदलावों पर नजर रखती है। इसमें उनकी नेटवर्थ, वैश्विक रैंकिंग और पिछले कारोबारी दिन के मुकाबले संपत्ति में हुई बढ़ोतरी या गिरावट दिखाई जाती है।
अरबपतियों की संपत्ति का बड़ा हिस्सा कंपनियों में शेयरों के रूप में निवेश किया गया होता है। इसलिए शेयर बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का उनकी अनुमानित नेटवर्थ पर सीधा असर पड़ता है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी अरबपति के पास किसी कंपनी के 10 करोड़ शेयर हैं और प्रत्येक शेयर की कीमत 1,000 रुपये है, तो उसकी हिस्सेदारी का बाजार मूल्य 10,000 करोड़ रुपये होगा। शेयर की कीमत बढ़कर 1,100 रुपये होने पर यह मूल्य 11,000 करोड़ रुपये हो जाएगा।
इस तरह शेयर की कीमत में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी से हिस्सेदारी के मूल्य में 1,000 करोड़ रुपये का इजाफा हो जाएगा। हालांकि, यह कागजों पर संपत्ति के मूल्य में हुई बढ़ोतरी है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अरबपति के बैंक खाते में इतनी नकदी जमा हो गई है।
हर पांच मिनट में अपडेट होती है नेटवर्थ
फोर्ब्स के मुताबिक, शेयर बाजार खुले रहने के दौरान सार्वजनिक कंपनियों में अरबपतियों की हिस्सेदारी के मूल्य को हर पांच मिनट में अपडेट किया जाता है। हालांकि, शेयरों की कीमतों के आंकड़ों में लगभग 15 मिनट की देरी हो सकती है। <Cite refs={[“turn299138search0″,”turn299138search10”]}/>
इसी वजह से शेयर बाजार में तेजी या गिरावट आने पर अरबपतियों की अनुमानित संपत्ति और उनकी रैंकिंग भी बदल सकती है। शेयरों के भाव बढ़ने से नेटवर्थ में इजाफा होता है, जबकि कीमतें गिरने पर संपत्ति का अनुमानित मूल्य कम हो जाता है।
इसलिए मुकेश अंबानी, गौतम अडानी और दूसरे उद्योगपतियों की रैंकिंग को स्थायी नहीं माना जा सकता। यह बाजार की चाल और उनकी कंपनियों के शेयरों के प्रदर्शन के साथ बदलती रहती है।
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