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  • कालकाजी में बुजुर्ग संगीतकार की मौत के बाद बेटों ने आने से किया इनकार, पुलिस के समझाने पर पहुंचे अस्पताल

    कालकाजी में बुजुर्ग संगीतकार की मौत के बाद बेटों ने आने से किया इनकार, पुलिस के समझाने पर पहुंचे अस्पताल

    नई दिल्ली ।मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक रिश्तों को झकझोर देने वाली एक दुखद घटना राजधानी के कालकाजी थाना क्षेत्र में सामने आई है। यहां गोविंदपुरी एक्सटेंशन स्थित एक किराए के मकान में रहने वाले 64 वर्षीय संगीतकार रवि डे का शव उनके घर में लगभग पांच दिनों तक संदिग्ध परिस्थितियों में पड़ा रहा। हैरान करने वाली बात यह है कि मृतक के दो बेटे महज साढ़े पांच किलोमीटर की दूरी पर लाजपत नगर में रहते हैं, लेकिन पिता की मृत्यु की सूचना मिलने के बाद भी उन्होंने शुरुआत में आने से साफ इनकार कर दिया।

    घटना का खुलासा तब हुआ जब पड़ोसियों को बंद मकान से असहनीय बदबू आने लगी। स्थानीय निवासियों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही कालकाजी थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। मकान का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद था, जिसे पुलिसकर्मियों ने दरवाजा तोड़कर खोला। अंदर का दृश्य अत्यंत भयावह था, जहां बुजुर्ग का शव बाथरूम के पास गंभीर रूप से क्षत-विक्षत अवस्था में पड़ा हुआ था।

    पुलिस ने तत्काल परिजनों की जानकारी जुटाई और लाजपत नगर में रह रहे उनके दोनों बेटों से संपर्क साधकर घटना की जानकारी दी। हालांकि, बेटों ने मौके पर आने में कोई रुचि नहीं दिखाई और आने से मना कर दिया। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के शवगृह में सुरक्षित रखवा दिया।

    पुलिस अधिकारियों द्वारा लगातार समझाने-बुझाने और कानूनी प्रक्रियाओं का हवाला देने के बाद आखिरकार परिजन 16 अगस्त को अस्पताल पहुंचे। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में शव का पोस्टमार्टम संपन्न कराया गया और अंतिम संस्कार के लिए पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया।

    यह घटना समाज में बुजुर्गों के प्रति बढ़ती उपेक्षा और टूटते पारिवारिक ताने-बाने पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में भी समय-समय पर बुजुर्गों के एकाकीपन और अपनों से दूरी की ऐसी दुखद खबरें सामने आती रही हैं। कालकाजी थाना पुलिस ने इस पूरे मामले में केस दर्ज कर आसपास के लोगों और परिजनों के बयान दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामले में एसआईटी ने शासन को सौंपी अंतिम रिपोर्ट, अग्रिम कार्रवाई के लिए ट्रस्ट को भेजी गई

    राम मंदिर चढ़ावा मामले में एसआईटी ने शासन को सौंपी अंतिम रिपोर्ट, अग्रिम कार्रवाई के लिए ट्रस्ट को भेजी गई

    नई दिल्ली ।अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे से जुड़े बहुचर्चित मामले में विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। गृह विभाग द्वारा इस रिपोर्ट का गहन परीक्षण किए जाने के बाद इसे आवश्यक अग्रिम कार्रवाई के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को उपलब्ध करा दिया गया है। इस कदम के साथ ही मामले की प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया अगले चरण में प्रवेश कर गई है।

    उल्लेखनीय है कि मंदिर ट्रस्ट के विशेष अनुरोध पर शासन द्वारा 13 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम का गठन किया गया था। इस उच्चस्तरीय जांच समिति की अध्यक्षता लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे थे, जबकि आईजी रेंज किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार को इसमें सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। समिति को मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का जिम्मा सौंपा गया था।

    जांच टीम ने काफी कम समय में गहन पड़ताल करते हुए 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन के समक्ष प्रस्तुत की थी। प्रारंभिक रिपोर्ट में मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित तत्वों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की स्पष्ट संस्तुति की गई थी। शासन द्वारा इस रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए तत्काल वैधानिक कदम उठाने के निर्देश जारी किए गए थे।

    प्रारंभिक रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर 25 जून को राम जन्मभूमि थाने में औपचारिक रूप से मुकदमा दर्ज किया गया था। ट्रस्ट के प्रतिनिधि की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में कई लोगों को नामजद करते हुए अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की सुसंगत धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण पंजीकृत किया गया था।

    मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस और जांच एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी समेत अन्य आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की थीं। जांच के दौरान वित्तीय लेन-देन, संबंधित दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का बारीक अध्ययन किया गया था, जिसके बाद अब अंतिम रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी गई है।

    मध्य प्रदेश सहित देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र राम मंदिर में व्यवस्थाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए ट्रस्ट अब इस अंतिम रिपोर्ट के सुझावों के आधार पर आगामी कदम उठाएगा। शासन से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ट्रस्ट स्तर पर आवश्यक प्रशासनिक सुधारों और कानूनी कदमों को लागू करने की तैयारी की जा रही है।

  • जनगणना 2027: आधार से लेकर बैंक खातों तक….. लोगों से पूछी जाएंगी ये जानकारियां

    जनगणना 2027: आधार से लेकर बैंक खातों तक….. लोगों से पूछी जाएंगी ये जानकारियां


    नई दिल्ली।
    जनगणना 2027 (Census 2027) को लेकर आधार (Aadhaar), मतदाता पहचान पत्र (Voter ID), ड्राइविंग लाइसेंस (Driving license), पासपोर्ट, मोबाइल नंबर (Mobile number) और बैंक खातों (Bank accounts) से जुड़ी जानकारी मांगे जाने को लेकर लोगों के बीच कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान नागरिकों से कोई निजी या गोपनीय बैंकिंग जानकारी नहीं मांगी जाएगी। नागरिकों से बैंक खातों की सिर्फ संख्या पूछी जाएगी।

    इसका मतलब है कि बैंक खाता संख्या, आईएफएससी कोड, एटीएम या डेबिट कार्ड नंबर, पासवर्ड, पिन, ओटीपी, खाते में जमा राशि या लेन-देन का विवरण नहीं देना है। सिर्फ यह बताना है कि आपके नाम पर कितने बैंक खाते हैं। इसी तरह आधार, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट जैसे सरकार द्वारा जारी पहचान दस्तावेजों से संबंधित जानकारी मांगी जाएगी। यह जानकारी उपलब्ध होने की स्थिति में ही दी जानी है।

    कर्मियों को क्यूआर कोड वाले पहचान पत्र: जनगणना का कार्य करने वाले कर्मचारियों की पहचान के लिए क्यूआर कोड युक्त पहचान पत्र की व्यवस्था की गई है। किसी भी तरह का संदेह होने की स्थिति में इस कोड की मदद से कर्मचारी की पहचान सत्यापित की जा सकती है।


    पहले से तैयारी पूरी रखें

    अधिकारियों ने कहा कि जनगणना में करीब 40 प्रश्न पूछे जाने हैं। इसलिए घर पर पहले से आवश्यक जानकारी कागज पर लिखकर तैयार रखना उपयोगी होगा। इससे प्रक्रिया में आसानी और गलत जानकारी देने की संभावना भी कम होगी।


    वित्तीय जानकारी नहीं लेंगे

    अधिकारियों ने कहा कि जनगणना का उद्देश्य लोगों की निजी बैंकिंग या वित्तीय जानकारी हासिल करना नहीं है। इसका उद्देश्य देश की जनसंख्या, सामाजिक स्थिति, आवास, शिक्षा, रोजगार, प्रवास और जनसांख्यिकीय पहलुओं से जुड़ा विश्वसनीय आंकड़ा तैयार करना है।


    आपकी जानकारी सुरक्षित

    अधिकारियों ने कहा कि जनगणना की जानकारी ‘जनगणना अधिनियम, 1948’ के तहत एकत्र की जाती है। इसके अंतर्गत व्यक्तिगत जानकारी गोपनीयता धारा 15 के तहत सुरक्षित है। इसलिए नागरिकों को अनावश्यक भय या भ्रम में पड़ने की जरूरत नहीं है।


    साइबर ठगी से सावधान, आपको क्या नहीं बताना है

    1. बैंक अकाउंट नंबर
    2. एटीएम/डेबिट कार्ड नंबर
    3. इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड
    4. यूपीआई पिन
    5. ओटीपी
    6. खाते में उपलब्ध राशि
    7. बैंक लेन-देन का विवरण

  • राजनीति में अपराधियों का बोलबाला…. 326 सांसदों और 14 मुख्यमंत्रियों के खिलाफ दर्ज हैं केस….

    राजनीति में अपराधियों का बोलबाला…. 326 सांसदों और 14 मुख्यमंत्रियों के खिलाफ दर्ज हैं केस….


    नई दिल्ली।
    राजनीति में अपराधीकरण (Criminalization Politics) के संबंध में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को सौंपी गई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि लोकसभा (Lok Sabha) के 543 सदस्यों में से 251 और राज्यसभा (Rajya Sabha) के 233 सदस्यों में से 75 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।

    न्यायालय में वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया ने एक हलफनामा दायर किया है। उन्हें सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे की मांग वाली जनहित याचिका (पीआईएल) में ‘न्यायमित्र’ (अदालत की मदद करने वाला वकील) नियुक्त किया गया है। हलफनामे में कहा गया है कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ 4,000 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं।


    28 में से 14 CM के खिलाफ मामलों का अंबार

    हलफनामे में कहा गया है कि 28 में से 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने उनके खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है, जिनमें गंभीर मामले भी शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी के खिलाफ 89 मामले दर्ज हैं, इसके बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (29 मामले) और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार (19 मामले) हैं।

    हंसारिया ने कहा कि मुकदमों की तेजी से सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय की निगरानी के बावजूद, 2018 से सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की संख्या लगभग उसी स्तर पर बनी हुई है।

    अलग-अलग उच्च न्यायालय से आंकड़े इकट्ठा करके, न्यायमित्र ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि 2025 में 1,243 आपराधिक मामलों का निपटारा किया गया, जबकि उसी साल 1,050 नए मामले दर्ज किए गए। उन्होंने न्यायालय को बताया कि पूर्व और मौजूदा सांसदों/विधायकों के खिलाफ कुल 4,192 मामले लंबित हैं।


    170 मामले गंभीर आपराधिक श्रेणी

    लोकसभा में 543 सदस्यों में से 251 सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 170 मामले गंभीर आपराधिक श्रेणी के हैं (जिनमें पांच साल या उससे अधिक की जेल की सजा हो सकती है)।

    हलफनामे में ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि राज्यसभा के 233 सदस्यों में से 75 (33 प्रतिशत) सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 40 (18 प्रतिशत) मामले गंभीर आपराधिक श्रेणी के हैं (जिनमें पांच साल या उससे अधिक की जेल की सजा हो सकती है)।

    वरिष्ठ वकील ने अलग-अलग उच्च न्यायालय की तरफ से दाखिल रिपोर्ट का विश्लेषण भी जमा किया। इसमें उत्तर प्रदेश शामिल नहीं था क्योंकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय से कोई रिपोर्ट नहीं मिली थी।


    केरल-तेलंगाना का तो हार बुरा है

    वकील स्नेहा कलिता के जरिए दाखिल हलफनामे के मुताबिक, केरल के 20 में से 19 सांसदों (95 प्रतिशत) पर आपराधिक मामले दर्ज थे और उनमें से 11 पर गंभीर मामले थे। तेलंगाना के 17 सांसदों में से 14 (82 प्रतिशत) पर आपराधिक मामले थे; ओडिशा में यह आंकड़ा 76 प्रतिशत (21 में से 16), झारखंड में 71 प्रतिशत (14 में से 10) और तमिलनाडु में 67 प्रतिशत (39 में से 26) था। वहीं, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे अन्य बड़े राज्यों के लगभग 50 प्रतिशत सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज थे।


    हरियाणा, छत्तीसगढ़ में केवल एक

    हरियाणा (10 सांसद) और छत्तीसगढ़ (11 सांसद) में से सिर्फ एक-एक सांसद पर आपराधिक मामले हैं; पंजाब में 13 में से दो, असम में 14 में से तीन, दिल्ली में सात में से तीन, राजस्थान में 25 में से चार, गुजरात में 25 में से पांच और मध्य प्रदेश में 29 में से नौ सांसदों पर आपराधिक मामले हैं।

    न्यायमित्र ने इस बात पर जोर दिया है कि सांसद/विधायक के खिलाफ आपराधिक मामलों के तेजी से निस्तारण के लिए उच्चतम न्यायालय को उन पर नजर रखनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि सांसद/विधायक के लिए तय की गई विशेष अदालत सिर्फ सांसद/विधायक के खिलाफ मुकदमों की सुनवाई करें और जब इन मामलों की सुनवाई पूरी हो जाए, तभी दूसरे मामलों को लिया जाए। हंसारिया, विधि निर्माताओं के खिलाफ मामलों के जल्द निस्तारण के लिए अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका में न्यायालय की मदद कर रहे हैं।

  • सात महीने से ISRO की लॉन्चिंग पर ब्रेक, सितंबर में GISAT-1A से फिर शुरू होगा अभियान, नवंबर में NVS-03 की तैयारी

    सात महीने से ISRO की लॉन्चिंग पर ब्रेक, सितंबर में GISAT-1A से फिर शुरू होगा अभियान, नवंबर में NVS-03 की तैयारी


    नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) करीब सात महीने के अंतराल के बाद एक बार फिर अपने लॉन्च अभियान को रफ्तार देने की तैयारी में है। तकनीकी दिक्कतों के चलते लगातार मिशनों में सामने आई समस्याओं के बाद लॉन्चिंग पर ब्रेक लगा हुआ था। अब अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट GISAT-1A को सितंबर के पहले सप्ताह में लॉन्च करने की तैयारी है। इसके बाद नवंबर में NVS-03 को लॉन्च किए जाने की संभावना है।

    GISAT-1A क्यों है अहम?
    GISAT-1A को जियो इमेजिंग सैटेलाइट और नई नामकरण व्यवस्था के तहत EOS-05 भी कहा जाता है। यह 2021 में लॉन्च किए गए GISAT-1 यानी EOS-03 का रिप्लेसमेंट है। पिछला मिशन रॉकेट के अंतिम प्रोपल्सिव सेगमेंट के इग्नाइट नहीं होने के कारण अपनी तय कक्षा तक नहीं पहुंच सका था।

    नया GISAT-1A करीब 10 साल की मिशन लाइफ के लिए तैयार किया गया है। यह बड़े इलाकों की बार-बार तस्वीरें लेने में सक्षम होगा। इससे प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी के साथ कृषि और वानिकी से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी।

    नवंबर में NVS-03 की लॉन्चिंग संभव
    GISAT-1A के बाद NVS-03 को लॉन्च किया जा सकता है। अधिकारियों के मुताबिक यह सैटेलाइट श्रीहरिकोटा में ईंधन भरने के बाद लॉन्च के लिए तैयार है। इसकी लॉन्चिंग नवंबर में संभावित है।

    NVS-03 का मिशन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले लॉन्च किए गए NVS-02 को तय कक्षा तक पहुंचाने में सफलता नहीं मिली थी। इसके चलते भारत के NavIC नेविगेशन सिस्टम की स्वतंत्र कवरेज प्रभावित हुई है।

    जनवरी में PSLV-C62 मिशन हुआ था फेल
    2026 में ISRO ने अब तक सिर्फ एक लॉन्च किया है। 12 जनवरी को PSLV-C62/EOS-N1 मिशन के तहत अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-N1 को कक्षा में स्थापित किया जाना था, लेकिन रॉकेट के तीसरे चरण में आई तकनीकी ‘एनोमली’ के कारण मिशन असफल हो गया। इसकी जांच के लिए बनाई गई फेलियर एनालिसिस कमेटी की रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।

    2025 में भी दो बड़े मिशनों को झटका
    2025 में ISRO ने पांच लॉन्च किए थे। इनमें PSLV-C61 से EOS-9 की लॉन्चिंग भी शामिल थी, लेकिन तीसरे चरण में आई एनोमली के कारण यह मिशन भी विफल हो गया था। ISRO ने दोनों घटनाओं को एक-दूसरे से असंबंधित बताया था।

    वहीं GSLV-F16 से NASA के साथ विकसित NISAR सैटेलाइट का लॉन्च सफल रहा। GSLV-F15 से NVS-02 को भी लॉन्च किया गया, लेकिन ऑर्बिट बढ़ाने की प्रक्रिया में समस्या के कारण सैटेलाइट तय कक्षा तक नहीं पहुंच सका। इसके अलावा LVM3 के जरिए Bluebird-2 और CMS-03 के लॉन्च भी किए गए।

    लॉन्चिंग के लक्ष्य से पीछे चल रहा ISRO
    ISRO की वार्षिक योजना के मुताबिक 2025-26 में 15 और 2026-27 में 27 मिशन का लक्ष्य रखा गया था। मौजूदा लॉन्चिंग इस लक्ष्य से काफी पीछे है। 2026-27 में ISRO ने कम से कम पांच SSLV, चार PSLV, तीन GSLV और एक LVM3 मिशन की योजना बनाई है। इसके अलावा गगनयान कार्यक्रम के तहत भी कई मिशन निर्धारित हैं।

    अब सितंबर में GISAT-1A की लॉन्चिंग ISRO के लिए सिर्फ एक सैटेलाइट मिशन नहीं, बल्कि लगातार सामने आई तकनीकी चुनौतियों के बाद लॉन्च कार्यक्रम को फिर पटरी पर लाने की बड़ी परीक्षा होगी।

  • छात्रों के आंदोलन के आगे झुकी हेमंत सरकार, JSSC-CGL समेत कई परीक्षाएं रद्द; जांच के भी आदेश

    छात्रों के आंदोलन के आगे झुकी हेमंत सरकार, JSSC-CGL समेत कई परीक्षाएं रद्द; जांच के भी आदेश

    रांची। झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई मैराथन बैठक के बाद सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं। मंत्रियों के साथ तीन घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में टीडीपीएल की ओर से आयोजित परीक्षा को रद्द करने, जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा की जांच कराने और पुरानी परीक्षाओं की भी समीक्षा करने का निर्णय लिया गया।

    बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को लेकर गंभीर है और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जेपीएससी और जेएसएससी के माध्यम से युवाओं की नियुक्ति होती है और परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

    TDPL की परीक्षा रद्द

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि टीडीपीएल द्वारा आयोजित परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया है। सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में सामने आई शिकायतों और अनियमितताओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

    उन्होंने कहा कि परीक्षा किस तरह और किन नियमों के तहत आयोजित होनी चाहिए, इसे लेकर सरकार सुधार की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए बनाए गए रिफॉर्म पोर्टल में अब अभिभावकों को भी जोड़ा जाएगा।


    रिटायर्ड जज करेंगे JSSC-CGL की जांच

    सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को लेकर सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति गठित करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा मामले की जांच एसआईटी और सीआईडी की टीम भी कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच में सामने आ रहे कुछ तथ्य चौंकाने वाले हैं। उन्होंने दावा किया कि सीजीएल परीक्षा और नियुक्तियों से जुड़े लोगों तथा कुछ कंपनियों के बीच बड़े नेटवर्क की बात सामने आई है।

    2014 से अब तक की परीक्षाओं की होगी जांच

    सरकार ने वर्ष 2014 से अब तक आयोजित परीक्षाओं की जांच कराने का भी फैसला लिया है। इसके तहत परीक्षा प्रक्रिया, नियुक्तियों और उससे जुड़ी एजेंसियों की भूमिका की समीक्षा की जाएगी।

    हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार ने मजबूत कानून बनाए हैं और उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करने की मंशा भी रखती है। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।

    रिफॉर्म के लिए बनी कमेटी

    परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। यह कमेटी परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और पारदर्शिता से जुड़े सुझाव देगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि परीक्षाएं निर्धारित एसओपी के तहत पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित की जाएं तो गड़बड़ी की आशंका काफी कम हो सकती है।

    सरकार के प्रमुख फैसले

    बैठक के बाद सरकार की ओर से सामने आए प्रमुख फैसले इस प्रकार हैं-

    • TDPL द्वारा आयोजित परीक्षा रद्द की जाएगी।
    • JSSC-CGL परीक्षा को लेकर सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच होगी।
    • मामले की जांच SIT और CID भी कर रही है।
    • वर्ष 2014 से अब तक आयोजित परीक्षाओं की जांच की जाएगी।
    • JSSC-CGL से जुड़ी परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया है।
    • 14वीं JPSC परीक्षा तथा 2023/25 की बैकलॉग परीक्षा रद्द करने की बात कही गई है।
    • परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गठित रिफॉर्म कमेटी काम करेगी।
    • रिफॉर्म पोर्टल में अभिभावकों को भी शामिल किया जाएगा।

    सरकार के इन फैसलों को लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों के बीच महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब जांच के निष्कर्ष और आगे की परीक्षा प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।

  • अमित शाह का दावा, आईएसआई समर्थित आतंकी नेटवर्क ध्वस्त, कई राज्यों में संयुक्त अभियान के दौरान हथियार और विस्फोटक बरामद

    अमित शाह का दावा, आईएसआई समर्थित आतंकी नेटवर्क ध्वस्त, कई राज्यों में संयुक्त अभियान के दौरान हथियार और विस्फोटक बरामद

    नई दिल्ली ।केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को दावा किया कि स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित बताए जा रहे शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। उनके अनुसार 14 राज्यों में एक साथ चलाए गए अभियान के दौरान 200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया और आतंकी गतिविधियों से जुड़ी सामग्री बरामद की गई।

    अमित शाह के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों और विभिन्न राज्यों की पुलिस ने 12 अगस्त को रियल टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग सिस्टम के जरिए समन्वित अभियान चलाया। कार्रवाई का उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस के आसपास संभावित आतंकी गतिविधियों और हिंसा की साजिशों को समय रहते रोकना था। इस अभियान में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, कर्नाटक, गुजरात, बिहार, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और केरल को शामिल किया गया।

    गिरफ्तारियों के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में 62, हरियाणा में 52, दिल्ली में 51 और पंजाब में 44 लोगों को पकड़ा गया। राजस्थान में 15, महाराष्ट्र में आठ और उत्तराखंड में पांच गिरफ्तारियां हुईं। गुजरात, कर्नाटक और बिहार में तीन तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और केरल में दो दो लोगों को पकड़ा गया।

    गृह मंत्री ने कहा कि कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में संदिग्ध आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की गई। इनमें आईईडी, पिस्तौल, जिंदा कारतूस और ग्रेनेड शामिल हैं। कुछ ग्रेनेड पर पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री की मार्किंग मिलने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा जासूसी और निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सीसीटीवी कैमरे भी बरामद किए गए।

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार शहजाद भट्टी नेटवर्क को पाकिस्तान स्थित और आईएसआई समर्थित आतंकी सिंडिकेट के रूप में देखा जा रहा है। आरोप है कि यह नेटवर्क भारत में ग्रेनेड, आईईडी और पेट्रोल बम हमलों के अलावा लक्षित हत्याओं जैसी गतिविधियों में स्थानीय सहयोगियों का इस्तेमाल करता था।

    एजेंसियों के अनुसार नेटवर्क से जुड़े स्थानीय लोगों को कथित तौर पर धन उपलब्ध कराया जाता था और उनसे पुलिस, रक्षा प्रतिष्ठानों तथा धार्मिक स्थलों की रेकी कराने जैसे काम लिए जाते थे। निगरानी के लिए विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।

    अमित शाह ने इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की समयबद्ध कार्रवाई से संभावित विध्वंसक योजनाओं को नाकाम किया गया। स्वतंत्रता दिवस जैसे संवेदनशील अवसर से पहले इतने बड़े स्तर पर की गई कार्रवाई को सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    बताया गया है कि इस नेटवर्क के खिलाफ अब तक 80 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं। मामलों में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता, शस्त्र अधिनियम, मादक पदार्थ संबंधी कानून और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम जैसी धाराओं का इस्तेमाल किया गया है।

    सुरक्षा एजेंसियां गिरफ्तार किए गए लोगों की भूमिका, उनके आपसी संपर्क, वित्तीय नेटवर्क और सीमा पार से संभावित संबंधों की जांच कर रही हैं। बरामद हथियारों और अन्य सामग्री के स्रोत की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और उसकी गतिविधियों के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है।

  • भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश, वैश्विक उत्पादन में करीब 8 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज

    भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश, वैश्विक उत्पादन में करीब 8 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज

    नई दिल्ली ।भारत का मत्स्य और जलीय कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सरकार के अनुसार भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश है और वैश्विक मत्स्य उत्पादन में करीब 8 प्रतिशत योगदान करता है। जलीय कृषि उत्पादन के मामले में भी भारत दूसरे स्थान पर है, जबकि झींगा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में देश दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल है।

    मत्स्य क्षेत्र का विस्तार सीधे तौर पर बड़ी आबादी की आजीविका से जुड़ा हुआ है। सरकार के मुताबिक देश में करीब तीन करोड़ मछुआरों और मत्स्य किसानों की आजीविका इस क्षेत्र पर निर्भर है। मछली पकड़ने और उत्पादन के अलावा प्रसंस्करण, परिवहन, भंडारण, विपणन और निर्यात जैसी गतिविधियों के जरिए भी मत्स्य मूल्य शृंखला में रोजगार के बड़े अवसर पैदा होते हैं।

    सरकार ने बताया कि वर्ष 2015 से अब तक मत्स्य क्षेत्र के सतत विकास और आधुनिकीकरण के लिए 39,272 करोड़ रुपये का संचयी निवेश किया गया है। यह निवेश ब्लू रिवोल्यूशन, फिशरीज एंड एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना जैसी विभिन्न पहलों के माध्यम से किया गया है।

    इन योजनाओं का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्र में आधुनिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। उत्पादन से लेकर बाजार तक पूरी मूल्य शृंखला को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि मछुआरों और मत्स्य किसानों को बेहतर बाजार, तकनीक और आय के अवसर उपलब्ध हो सकें।

    मत्स्य क्षेत्र में युवाओं और उद्यमशील किसानों की भागीदारी को भी सरकार महत्वपूर्ण मान रही है। आधुनिक जलीय कृषि तकनीक, डिजिटल ट्रेसबिलिटी, कोल्ड चेन प्रबंधन, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में नई तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इससे पारंपरिक मत्स्य गतिविधियों को अधिक संगठित और बाजार आधारित बनाने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

    सरकार का मानना है कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी भारत की ब्लू इकोनॉमी को मजबूती दे सकती है। मत्स्य उत्पादन के साथ प्रसंस्करण और निर्यात क्षमता बढ़ने से ग्रामीण और तटीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

    प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फरवरी 2024 में मंजूरी दी थी। यह प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत केंद्रीय क्षेत्र की उप-योजना है और वित्त वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक चार वर्षों के लिए लागू की जा रही है। इसके लिए करीब 6,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    यह योजना देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। इसका उद्देश्य वित्तीय और तकनीकी सहायता के जरिए मत्स्य क्षेत्र की संरचनात्मक कमियों को दूर करना, संस्थागत सुधारों को बढ़ावा देना, उत्पादकता बढ़ाना और आधुनिक तकनीक को अपनाने में मदद करना है।

    योजना के तहत बाजार तक पहुंच मजबूत करने और मत्स्य किसानों की आय बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उत्पादन के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए बेहतर भंडारण और कोल्ड चेन सुविधाओं का विस्तार भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    स्वतंत्रता दिवस समारोह के बाद मत्स्य पालन विभाग ने योजना के लाभार्थियों और उनके जीवनसाथियों के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इसका उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र से जुड़े लोगों के योगदान को सम्मानित करना और सरकारी योजनाओं से मिले बदलावों को सामने लाना था। भारत की बढ़ती उत्पादन क्षमता, आधुनिक तकनीक और निर्यात संभावनाओं को देखते हुए मत्स्य क्षेत्र आने वाले वर्षों में देश की ब्लू इकोनॉमी और ग्रामीण रोजगार का अहम आधार बन सकता है।

  • बीजेपी ने नई राष्ट्रीय टीम के साथ संगठन मजबूत किया, जानिए राष्ट्रीय अध्यक्ष से बूथ स्तर तक कैसे चलता है पार्टी का ढांचा

    बीजेपी ने नई राष्ट्रीय टीम के साथ संगठन मजबूत किया, जानिए राष्ट्रीय अध्यक्ष से बूथ स्तर तक कैसे चलता है पार्टी का ढांचा


    नई दिल्ली : 
    भारतीय जनता पार्टी ने 17 अगस्त 2026 को अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान किया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में तैयार की गई इस टीम में स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव और वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। बीएल संतोष संगठन महामंत्री के पद पर बने हुए हैं। नई टीम में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और आठ महासचिव शामिल किए गए हैं।

    नई टीम का गठन ऐसे समय हुआ है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे धीरे तेज हो रही हैं। संगठन में उत्तर प्रदेश के आठ पदाधिकारियों को जगह मिली है। इसके अलावा दिल्ली से 10, महाराष्ट्र से पांच, राजस्थान और उत्तराखंड से चार चार तथा पंजाब और बिहार से दो दो चेहरों को स्थान मिला है। इससे राज्यों के प्रतिनिधित्व और चुनावी प्राथमिकताओं का संकेत मिलता है।

    बीजेपी की सबसे बड़ी संगठनात्मक विशेषता उसका बहुस्तरीय ढांचा है। पार्टी की संरचना राष्ट्रीय स्तर से शुरू होकर राज्य, जिला, मंडल और बूथ तक जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य केंद्रीय स्तर पर तय रणनीति को स्थानीय स्तर तक पहुंचाना और बूथ स्तर से मिलने वाले फीडबैक को ऊपर तक ले जाना है।

    संगठन के शीर्ष स्तर पर मार्गदर्शक मंडल की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके बाद पार्टी के प्रमुख निर्णय लेने वाले निकाय और राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्थान आता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष संगठन का सर्वोच्च पद होता है। पार्टी संविधान के अनुसार अध्यक्ष के चुनाव के लिए निर्धारित प्रक्रिया और योग्यता तय है तथा कार्यकाल तीन वर्ष का होता है।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ राष्ट्रीय कार्यकारिणी पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती है। इसमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे पद शामिल होते हैं। राष्ट्रीय महासचिवों में संगठन महामंत्री का पद विशेष महत्व रखता है, क्योंकि संगठन के नियमित संचालन और विभिन्न स्तरों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी इससे जुड़ी होती है।

    राष्ट्रीय स्तर के बाद राज्य संगठन पार्टी की रणनीति को जमीन पर लागू करता है। राज्य परिषद और राज्य कार्यकारिणी इसके प्रमुख अंग हैं। राज्य परिषद प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जबकि राज्य कार्यकारिणी संगठन की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों को आगे बढ़ाती है।

    प्रदेश अध्यक्ष अपनी टीम में उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे पदों पर नियुक्तियां करता है। राज्य स्तर पर संगठन महामंत्री की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है और उसकी नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय स्तर की सहमति आवश्यक होती है। इससे राष्ट्रीय और राज्य इकाइयों के बीच तालमेल बनाए रखने की व्यवस्था मजबूत होती है।

    राज्य के नीचे जिला और मंडल स्तर का संगठन आता है। इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण इकाई बूथ है। बीजेपी की चुनावी रणनीति में बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत रखना लंबे समय से प्राथमिकता रहा है। बूथ अध्यक्ष स्थानीय स्तर पर पार्टी की गतिविधियों का संचालन करता है, जबकि पन्ना प्रमुख मतदाता सूची के एक हिस्से की जिम्मेदारी संभालते हुए मतदाताओं से सीधे संपर्क करता है।

    संगठनात्मक चुनावों के हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश के 1,036 जिलों में से 978 में जिला अध्यक्षों का चुनाव पूरा हो चुका है। इसी तरह 17,743 मंडलों में से 16,469 मंडल अध्यक्ष चुने जा चुके हैं, जबकि 10,70,462 बूथों में से 7,88,197 बूथ अध्यक्षों का चुनाव पूरा हुआ है।

    बीजेपी में संगठन निर्माण की प्रक्रिया को संगठन पर्व कहा जाता है। इसमें बूथ से मंडल, जिला और प्रदेश स्तर होते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव तक क्रम आगे बढ़ता है। पार्टी के विभिन्न मोर्चे भी इसी ढांचे का हिस्सा हैं। युवा, महिला, किसान, ओबीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक मोर्चों के जरिए अलग अलग सामाजिक समूहों तक संगठन की पहुंच बनाने की कोशिश की जाती है। यही बहुस्तरीय व्यवस्था बीजेपी के चुनावी संगठन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में शामिल है।

  • ₹11200 करोड़ का जेवर एयरपोर्ट और भारी बारिश का दावा! वायरल तस्वीर के बाद सुरक्षा और जलनिकासी पर चर्चा

    ₹11200 करोड़ का जेवर एयरपोर्ट और भारी बारिश का दावा! वायरल तस्वीर के बाद सुरक्षा और जलनिकासी पर चर्चा


    नई दिल्ली । नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को लेकर सोशल मीडिया पर सामने आई एक तस्वीर ने बारिश के दौरान एयरपोर्ट परिसर की तैयारियों और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है। तस्वीर में एयरपोर्ट के आसपास बड़े स्तर पर पानी भरा हुआ दिखाई दे रहा है और पार्किंग तथा सड़क जैसे हिस्से भी जलमग्न नजर आ रहे हैं। तस्वीर के साथ दावा किया जा रहा है कि भारी बारिश के बाद जेवर एयरपोर्ट का बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया। हालांकि तस्वीर और उसके साथ किए जा रहे दावे की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इसे वास्तविक स्थिति का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    तस्वीर में एयरपोर्ट जैसी इमारत और उसके सामने बड़ी मात्रा में जमा पानी दिखाई देता है। कई वाहन पानी के बीच खड़े नजर आ रहे हैं जबकि आसपास के रास्ते भी जलभराव की चपेट में दिखाई दे रहे हैं। इसी आधार पर सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे भारी बारिश के दौरान जलनिकासी व्यवस्था की परीक्षा के तौर पर देख रहे हैं तो कुछ लोग तस्वीर की वास्तविकता पर सवाल उठा रहे हैं।

    जेवर में विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में शामिल है। इसे दिल्ली एनसीआर के लिए एक महत्वपूर्ण एयर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जा रहा है। एयरपोर्ट के निर्माण से क्षेत्र में कारोबार पर्यटन रोजगार और रियल एस्टेट गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जाती रही है। ऐसे में बारिश के दौरान जलभराव से जुड़ी कोई भी तस्वीर स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान खींचती है।

    किसी भी बड़े एयरपोर्ट के लिए बारिश के पानी की निकासी बेहद महत्वपूर्ण होती है। रनवे टैक्सीवे पार्किंग एप्रन और यात्रियों के आवागमन वाले हिस्सों में जलभराव रोकना एयरपोर्ट संचालन की अहम जरूरत होती है। खासतौर पर मानसून के दौरान कम समय में होने वाली तेज बारिश के पानी को तेजी से बाहर निकालने के लिए प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम जरूरी होता है। अगर किसी एयरपोर्ट परिसर में लंबे समय तक पानी जमा रहता है तो इससे यातायात और संचालन के साथ बुनियादी ढांचे पर भी असर पड़ सकता है।

    हालांकि वायरल तस्वीर को देखकर सीधे यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि पूरा एयरपोर्ट जलमग्न हो गया या परियोजना की पूरी व्यवस्था विफल हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली तस्वीरों के साथ कई बार गलत संदर्भ भी जोड़ दिए जाते हैं। तस्वीर पुरानी हो सकती है किसी दूसरे स्थान की हो सकती है या डिजिटल रूप से बदली गई हो सकती है। इसलिए आधिकारिक पुष्टि के बिना बड़े दावे को तथ्य मानने से बचना जरूरी है।

    इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि एयरपोर्ट प्रबंधन या संबंधित प्रशासन की ओर से बारिश और जलभराव को लेकर क्या आधिकारिक जानकारी सामने आती है। अगर वास्तव में परिसर के किसी हिस्से में पानी जमा हुआ है तो इसकी वजह और जलनिकासी व्यवस्था की स्थिति की जानकारी भी सामने आनी चाहिए।

    फिलहाल वायरल तस्वीर ने जेवर एयरपोर्ट की बारिश से निपटने की तैयारियों को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है। लेकिन तस्वीर के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय रिपोर्ट का इंतजार करना ज्यादा उचित होगा।