Category: National

  • ब्राह्मण होना योग्यता नहीं, हिंदू होना जरूरी’ RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, अंग्रेजी और राजनीति पर भी रखी दो टूक

    ब्राह्मण होना योग्यता नहीं, हिंदू होना जरूरी’ RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, अंग्रेजी और राजनीति पर भी रखी दो टूक


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर मुंबई में आयोजित व्याख्यानमाला के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सरसंघचालक पद जाति भाषा राजनीति और राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संघ प्रमुख बनने के लिए ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं है बल्कि कोई भी हिंदू चाहे वह ब्राह्मण हो क्षत्रिय वैश्य शूद्र या फिर एससी-एसटी वर्ग से सरसंघचालक बन सकता है।

    कार्यक्रम के दौरान सवालों के जवाब देते हुए मोहन भागवत ने कहा कि RSS में पद जाति के आधार पर नहीं बल्कि काम और समर्पण के आधार पर तय होते हैं। उन्होंने कहा संघ में यह नहीं देखा जाता कि कौन किस जाति से है। जो काम करेगा वही आगे बढ़ेगा। एससी-एसटी होना अयोग्यता नहीं है और ब्राह्मण होना कोई विशेष योग्यता नहीं।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संघ का नेतृत्व किसी जातीय पहचान से नहीं बल्कि हिंदू समाज की एकता से जुड़ा है।

    भाषा को लेकर भी संघ प्रमुख ने अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी कभी भी RSS की भाषा नहीं बनेगी क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है। अंग्रेजी का उपयोग केवल आवश्यकता पड़ने पर किया जाएगा। संघ भारतीय भाषाओं विशेषकर हिंदी को प्राथमिकता देता है और आगे भी सिर्फ भारतीय भाषाओं में ही काम करेगा।

    राजनीति को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर मोहन भागवत ने कहा कि RSS सरकार नहीं चलाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि RSS और BJP दो अलग-अलग संगठन हैं। संघ का राजनीति से सीधा कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि संघ ने पहले ही तय कर लिया है कि उसका काम केवल समाज को जोड़ना है न कि सत्ता या शासन चलाना। स्वयंसेवक भले ही अलग-अलग क्षेत्रों में हों लेकिन संगठन का उद्देश्य सामाजिक एकता तक ही सीमित है।

    संघ की शुरुआत को याद करते हुए भागवत ने कहा कि प्रारंभिक दौर में संघ एक छोटी ब्राह्मण बस्ती से शुरू हुआ था इसलिए उस समय पदाधिकारी ब्राह्मण थे। इसी कारण लोगों में यह धारणा बनी कि संघ ब्राह्मणों का संगठन है। लेकिन जैसे-जैसे संघ का विस्तार हुआ यह धारणा स्वतः टूटती चली गई। आज संघ में हर जाति और वर्ग के लोग सक्रिय हैं।

    अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर संघ प्रमुख ने सरकार से और सख्त कदम उठाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पहले इस दिशा में काम नहीं हो रहा था लेकिन अब पहचान और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू हुई है। जनगणना और SIR जैसी प्रक्रियाओं से ऐसे लोग सामने आते हैं जो भारत के नागरिक नहीं हैं। उन्होंने आम नागरिकों से भी सतर्क रहने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना प्रशासन को देने की अपील की। भागवत ने कहा कि घुसपैठियों को रोजगार नहीं मिलना चाहिए जबकि देश के नागरिकों को चाहे वे किसी भी धर्म के हों काम मिलना चाहिए।

    बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि वहां करीब 1.25 करोड़ हिंदू रहते हैं। यदि वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का निर्णय लेते हैं तो पूरी दुनिया के हिंदू उनके समर्थन में खड़े होंगे। भाषा विवाद को उन्होंने स्थानीय बीमारी” बताते हुए कहा कि इसे फैलने नहीं देना चाहिए। संघ के विस्तार को लेकर मोहन भागवत ने कहा कि अब संघ जाति के आधार पर नहीं बल्कि भौगोलिक आधार पर फैलता है। हर बस्ती हर मंडल और हर गांव तक संघ का काम पहुंच रहा है। इसी कारण आज संघ में सभी जातियों और वर्गों की सहभागिता स्वाभाविक रूप से देखने को मिलती है।

  • जनकपुरी हादसे के बाद एक्शन मोड में सरकार, खुदाई कार्यों पर सख्ती—CM रेखा गुप्ता ने दिए कड़े निर्देश

    जनकपुरी हादसे के बाद एक्शन मोड में सरकार, खुदाई कार्यों पर सख्ती—CM रेखा गुप्ता ने दिए कड़े निर्देश


    नई दिल्ली । जनकपुरी में हुए हादसे के बाद दिल्ली सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस घटना को सुरक्षा व्यवस्था में एक गंभीर चूक बताते हुए साफ शब्दों में कहा है कि जनता की जान से जुड़ी जिम्मेदारियों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि किसी अधिकारी या ठेकेदार की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ न सिर्फ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी, बल्कि कठोर कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे।

    घटना के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि दिल्ली में सड़कों और फुटपाथों पर जहां-जहां खुदाई का कार्य चल रहा है, उसकी विस्तृत रिपोर्ट तीन दिनों के भीतर सरकार को सौंपी जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राजधानी में चल रहे विकास कार्यों के नाम पर नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि निर्माण और खुदाई कार्यों की निगरानी अब पहले से कहीं अधिक सख्ती से की जाएगी।

    मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद मुख्य सचिव ने एक आधिकारिक आदेश जारी किया है, जो लोक निर्माण विभाग दिल्ली जल बोर्ड, नगर निगम और सभी बिजली वितरण कंपनियों सहित हर संबंधित एजेंसी पर लागू होगा। इस आदेश के तहत दिल्ली में चल रहे सभी खुदाई कार्यों के लिए नए और कड़े सुरक्षा मानक अनिवार्य कर दिए गए हैं।

    अब हर खुदाई स्थल पर बड़े, स्पष्ट और पढ़ने योग्य चेतावनी बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा, ताकि राहगीरों को पहले से खतरे की जानकारी मिल सके। रात के समय सुरक्षा को लेकर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत रिफ्लेक्टर लाइट, ब्लिंकर और चमकीली टेप का उपयोग जरूरी किया गया है, जिससे अंधेरे में भी खुदाई स्थल साफ नजर आए। इसके अलावा खुदाई वाली जगह को चारों तरफ से ऊंची और मजबूत बैरिकेडिंग से सुरक्षित करना होगा।

    सरकार ने मलबा प्रबंधन और धूल नियंत्रण को भी सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। सड़क पर मिट्टी या निर्माण सामग्री बिखरी नहीं होनी चाहिए और प्रदूषण को रोकने के लिए प्रभावी उपाय किए जाएंगे। पैदल यात्रियों और वाहनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित वैकल्पिक रास्ता सुनिश्चित करना भी अब अनिवार्य होगा। साथ ही संबंधित इंजीनियरों को रोजाना साइट का निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों की जांच करनी होगी और ट्रैफिक बाधित न हो, इसके लिए उचित डायवर्जन और प्रबंधन करना होगा।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भरोसा दिलाया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दिल्ली सरकार एक सख्त निगरानी तंत्र विकसित कर रही है। उन्होंने दोहराया कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ बिना किसी दबाव के कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद राजधानी में चल रहे सभी निर्माण और खुदाई प्रोजेक्ट्स का सुरक्षा ऑडिट शुरू कर दिया गया है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि ऑडिट के दौरान पाई जाने वाली किसी भी खामी पर तत्काल और सख्त कदम उठाए जाएंगे।

  • विकसित भारत’ के लिए नई वित्तीय रूपरेखा: बैंकिंग सेक्टर को मजबूत बनाने को बनेगी हाई-लेवल कमिटी

    विकसित भारत’ के लिए नई वित्तीय रूपरेखा: बैंकिंग सेक्टर को मजबूत बनाने को बनेगी हाई-लेवल कमिटी

    नई दिल्ली । भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की दिशा में केंद्र सरकार अब बैंकिंग क्षेत्र को नई ऊंचाई देने की तैयारी में है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की है कि सरकार जल्द ही बैंकिंग सेक्टर के लिए एक हाई-लेवल कमिटी का गठन करेगी। इस कमिटी का उद्देश्य आने वाले वर्षों में देश की बढ़ती वित्तीय जरूरतों के अनुरूप बैंकिंग व्यवस्था को तैयार करना और उसे अधिक सक्षम, व्यापक और मजबूत बनाना होगा।

    दरअसल, जैसे-जैसे भारत तेजी से आर्थिक विकास की ओर बढ़ रहा है, बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, उद्योग, स्टार्टअप और सामाजिक योजनाओं के लिए भारी वित्तीय संसाधनों की जरूरत पड़ रही है। ऐसे में बैंकिंग सिस्टम को भी उसी गति से विकसित करना जरूरी है, ताकि वह देश की विकास यात्रा का मजबूत आधार बन सके। इसी उद्देश्य से यह कमिटी बैंकिंग सेक्टर की पूरी समीक्षा करेगी और यह तय करेगी कि आने वाले समय में उसे किस दिशा में आगे बढ़ाना है।

    वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि विकसित भारतका सपना केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि मजबूत वित्तीय ढांचे से पूरा होगा। इसके लिए पर्याप्त फंडिंग, क्रेडिट की उपलब्धता और बैंकिंग सुविधाओं का आम लोगों तक पहुंचना बेहद जरूरी है। कमिटी इसी बात का ब्लूप्रिंट तैयार करेगी कि बैंकिंग क्षेत्र कैसे देश की अगली विकास छलांग का साथ दे सकता है।

    इस प्रस्ताव का जिक्र 1 फरवरी 2026 को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 में भी किया गया था। बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा था कि विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर हाई-लेवल कमिटीबनाई जाएगी, जो पूरे सेक्टर की समीक्षा करेगी और इसे भारत के अगले विकास चरण से जोड़ेगी। साथ ही यह सुनिश्चित करेगी कि वित्तीय स्थिरता, वित्तीय समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण से कोई समझौता न हो।

    सरकार का फोकस केवल बड़े उद्योगों को फंडिंग देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि बैंकिंग सेवाएं देश के हर व्यक्ति तक पहुंचें। ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे कारोबारियों, महिलाओं और युवाओं को सस्ती और आसान वित्तीय सेवाएं मिलें, इसके लिए भी कमिटी सुझाव देगी। वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकिंग को इतना बड़ा और सक्षम बनाना है कि वह देश की बढ़ती आर्थिक जरूरतों को पूरा कर सके और आम आदमी की पहुंच में भी बनी रहे।

    उन्होंने यह भी कहा कि विकसित भारत तक पहुंचने के लिए बड़े पैमाने पर पूंजी की आवश्यकता होगी। इसके लिए बैंकिंग सिस्टम को मजबूत, लचीला और भविष्य के लिए तैयार बनाना जरूरी है। यही कारण है कि सरकार इस कमिटी का गठन जल्द से जल्द करने की दिशा में काम कर रही है।

    बजट में बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में कुछ शुरुआती कदम भी उठाए गए हैं। इसी कड़ी में पावर फाइनेंस कॉर्पोरेश PFC और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशनस REC जैसे बड़े पब्लिक सेक्टर एनबीएफसी को पुनर्गठित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसका मकसद इन संस्थानों का आकार बढ़ाना और उनकी कार्यक्षमता को और बेहतर बनाना है, ताकि वे बड़े स्तर पर परियोजनाओं को फंडिंग दे सकें।

    हाल ही में PFC के बोर्ड ने REC के साथ मर्जर को सैद्धांतिक मंजूरी भी दे दी है। REC पहले से ही PFC की सब्सिडियरी है और दोनों ही नवरत्नश्रेणी की केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां हैं, जो बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देती हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2019 में PFC ने सरकार से REC में 52.63 प्रतिशत हिस्सेदारी लगभग 14,500 करोड़ रुपये में खरीदी थी, जिससे उसे प्रबंधन का नियंत्रण मिला था। अब यह कदम वित्तीय संस्थानों के समेकन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

    जब वित्त मंत्री से पूछा गया कि क्या यह कमिटी भविष्य में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मर्जर की भी सिफारिश कर सकती है, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पहल को केवल मर्जर के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि इसका मुख्य उद्देश्य बैंकिंग सेक्टर को इतना बड़ा और मजबूत बनाना है कि वह विकसित भारत की वित्तीय जरूरतों को आसानी से पूरा कर सके।

    उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मंत्रालय के भीतर इस दिशा में काफी काम पहले से चल रहा है और कई विचार सामने आ चुके हैं। अब यह कमिटी उन सभी पहलुओं का गहराई से अध्ययन कर आगे की रणनीति तय करेगी। माना जा रहा है कि बैंकिंग सेक्टर पहले से ही अपेक्षाकृत अच्छी स्थिति में है, ऐसे में यह सही समय है जब इसे अगले स्तर पर ले जाने की योजना बनाई जाए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था जिस तेजी से बढ़ रही है, उसे देखते हुए आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत होगी। इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, डिजिटल इकोनॉमी, मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप सेक्टर में पूंजी की मांग लगातार बढ़ेगी। ऐसे में बैंकिंग सिस्टम की क्षमता बढ़ाना समय की जरूरत है।

    हाई-लेवल कमिटी का गठन इसी सोच के साथ किया जा रहा है, ताकि बैंकिंग सेक्टर केवल पारंपरिक सेवाओं तक सीमित न रहे, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति का मुख्य इंजन बन सके। यह कमिटी इस बात पर भी ध्यान देगी कि वित्तीय स्थिरता बनी रहे और बैंकिंग सेवाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

  • 38th Noida Flower Show: नोएडा में यहां एंजॉय करें बसंत उत्सव, एंट्री से तारीख तक जानें हर डिटेल

    38th Noida Flower Show: नोएडा में यहां एंजॉय करें बसंत उत्सव, एंट्री से तारीख तक जानें हर डिटेल


    नई दिल्ली । बसंत के मौसम में पेड़-पौधौं पर रंग-बिरंगे फूलों की बहार आ जाती है. इस दौरान कई तरह के फेस्ट भी ऑर्गेनाइज किए जाते हैं. हर साल नोएडा में बसंत उत्सव फ्लावर शो होता है, जिसमें अनगिनत फूलों की वैरायटी देखने को मिलती हैं. इसके अलावा भी इसमें बहुत कुछ होता है. यह उत्सव नेचर लवर्स, फूलों की बागवानी का शौक रखने वाले लोगों के लिए बेहद खास होता है. इस बार 38वां नोएडा फ्लावर शो होने जा रहा है. जिसमें फूलों की प्रदर्षनी से लेकर स्प्रिंग गार्डन कम्पटीशन और फूलों से बने ऊंचे सेंटर पीस सेंटर ऑफ अट्रैक्शन होंगे.
    अगर आप फूलों के पौधे लगाने के शौकीन हैं या फिर बागवानी करते हैं तो आप भी इस फ्लावर शो में अपने पौधे लेकर जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए आज आपको रजिस्ट्रेशन करवाना होगा, जिसके लिए फ्लोरीकल्चर सोसाइटी नोएडा की साइट पर विजिट करना होगा. यहां पर आपको सारी डिटेल मिल जाएंगी. फिलहाल हम जान लेते हैं कि अगर आपको यहां विजिट करना हो तो एंट्री से लेकर डेट्स क्या हैं और क्या है वेन्यू.
    यहां होगा बसंत उत्सव
    38वां नोएडा फ्लावर शो, बसंत उत्सव 2026 शिवालिक पार्क, सेक्टर 33 ए, नोएडा. नोएडा हाट के पास ऑर्गेनाइज होगा. यहां पहुंचने के लिए अगर आप मेट्रो ले रहे हैं तो नोएडा सिटी सेंटर सबसे पास पड़ेगा. यहां सो आप ऑटो या फिर ई-रिक्शा से शिवालिक पार्क पहुंच सकते हैं.

    ये हैं सेंटर ऑफ अट्रेक्शन

    इस फ्लावर शो यानी बसंत उत्सव को फ्लोरीकल्चर सोसाइटी नोएडा द्वारा आयोजित किया जाता है. इस बार स्प्रिंग गार्डन प्रतियोगिता रखी गई है यानी आप भी इसमें अपने फूलों वाले पौधों की प्रदर्शनी लगा सकते हैं. इसके अलावा इसमें कई तरह से रंग-बिरंगे फूल होंगे. फूलों से बने हुए कई फीट ऊंचे सेंटर पीस लोगों को यहां आने के लिए अट्रैक्ट करते हैं. आप भी अगर यहां विजिट करते हैं तो बेहतरीन एक्सपीरियंस रहेगा. अगर आप फोटो क्लिक करने के शौकीन हैं तो ये फेस्ट आपके लिए बेहतरीन रहेगी. ये उत्सव बसंत ऋतु और बागवानी का जश्न मनाने का एक शानदार मौका है.

    एंट्री और डेट्स की डिटेल

    ये बसंत उत्सव चार दिन तक चलेगा. डेट्स की बात करें तो 19 फरवरी ये ये फेस्ट शुरू हो जाएगा और 22 फरवरी 2026 तक चलेगा. एंट्री की बात करें तो यहां पर आने के लिए आपको कोई टिकट नहीं लगेगा यानी पब्लिक के लिए यहां फ्री एंट्री है.
    दिल्ली-एनसीआर के इवेंट्स
    बसंत उत्सव के अलावा भी दिल्ली-एनसीआर में कई अपकमिंग इवेंट्स आने वाले हैं. सूरजकुंड इंटरनेशनल क्राफ्ट मेला 31 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी तक चलेगा. इसके अलावा अगर आपको म्यूजिक और पार्टी करना बेहद पसंद है तो 7 फरवरी को द्वारका के IICC में सिंगर अनुष्का शंकर के कॉन्सर्ट में जा सकते हैं. इसके अलावा 13 फरवरी को पलक मुछाल तालकटोरा में स्टेडियम में परफॉर्म करेंगी. स्पोर्ट्स वालों के लिए इवेंट्स की बात करें तो 2 से 14 फरवरी तक डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज एरिया में एशियन शूटिंग चैंपियनशिप ऑर्गेनाइज होगी. वहीं आप दिल्ली मैराथन एंजॉय कर सकते हैं.

  • पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर राहुल और प्रियंका गांधी बोले- राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से की गई कार्रवाई

    पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर राहुल और प्रियंका गांधी बोले- राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से की गई कार्रवाई


    नई दिल्ली।
    पप्पू यादव (Pappu Yadav) के समर्थन में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) भी उतर पड़े हैं। राहुल गांधी ने कहा कि उनकी गिरफ्तारी केवल राजनीतिक प्रतिशोध (Political vendetta) की भावना से की गई है। उन्होंने कहा कि NEET छात्रा की संदिग्ध मौत को लेकर ही उन्हें गिरफ्तार किया गया है और अब डराया धमकाया जा रहा है। शुक्रवार को देर रात पटना पुलिस ने 31 साल पुराने एक मामले में निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को गिरफ्तार किया है।

    राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”पटना में नीट की आकांक्षी छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत और उसके बाद की पूरी कार्रवाई ने एक बार फिर व्यवस्था की गहरी सड़ांध को उजागर कर दिया है।” उन्होंने दावा किया कि पीड़ित परिवार ने जब निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की, तो वही पुराना भाजपा-राजग मॉडल सामने आ गया कि मामले को भटकाओ, परिजनों को प्रताड़ित करो और अपराधियों को सत्ता का संरक्षण दो।

    राहुल ने कहा, ‘इस बेटी के लिए न्याय की आवाज़ बनकर साथी सांसद पप्पू यादव जी मजबूती से खड़े हुए। उनकी गिरफ़्तारी साफ़ तौर पर राजनीतिक प्रतिशोध है ताकि जवाबदेही मांगने वाली हर आवाज़ को डराया और दबाया जा सके।’

    उन्होंने कहा कि सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि यह घटना किसी एक मामले तक सीमित नहीं दिखती। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ”यह एक भयावह साजिश एवं खतरनाक चलन की ओर इशारा करती है, जहां और भी बेटियां शिकार बन रही हैं और सत्ता इस खौफ़नाक सच्चाई से आंखें मूंदकर बैठी है। यह राजनीति नहीं, इंसाफ़ का सवाल है। यह बिहार की बेटी की इज़्ज़त और सुरक्षा का सवाल है।”


    प्रियंका गांधी बोलीं- अत्याचार के साथ खड़ी बीजेपी

    पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने भी पप्पू यादव के प्रति एकजुटता प्रकट की और आरोप लगाया कि भाजपा एवं उसके सहयोगी दल अत्याचार के साथ खड़े हुए हैं। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया,”पटना के हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा के साथ बलात्कार और हत्या का मामला झकझोर देने वाला है। यह मामला सामने आने के बाद सरकार का रवैया उससे भी ज्यादा खौफनाक है।’ प्रियंका ने कहा, ‘प्राथमिकी दर्ज होने से लेकर जांच और कार्रवाई तक सबकुछ संदिग्ध बना दिया गया है। यह सब किसे बचाने के लिए किया जा रहा है?’

    उन्होंने कहा कि हाथरस, उन्नाव से लेकर अंकिता भंडारी और पटना तक- जहां भी महिलाओं के साथ अत्याचार होता है, भाजपा की सरकारें पीड़िता को न्याय दिलाने की जगह आरोपियों के साथ खड़ी हो जाती हैं। प्रियंका ने आरोप लगाया कि इस मामले में आवाज उठा रहे सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी इसी असंवेदनशील रवैये की एक और कड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके सहयोगियों का एजेंडा स्पष्ट है कि वे अन्याय और अत्याचार के साथ खड़े हैं।

  • हिन्दुत्व में ही सबकी सुरक्षा की गारंटी है : संघ प्रमुख डॉ भागवत

    हिन्दुत्व में ही सबकी सुरक्षा की गारंटी है : संघ प्रमुख डॉ भागवत


    मुंबई।
    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शनिवार को मुंबई में कहा कि हिन्दुत्व में ही सबकी सुरक्षा की गारंटी है। भाषा, भूषा, खान-पान रीति रिवाज में भिन्नता के बावजूद हम राष्ट्र और संस्कृति से हिन्दू हैं। संघ प्रमुख डॉ. भागवत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुंबई में आयोजित “नए क्षितिज” कार्यक्रम के दूसरे सत्र को संबोधित कर रहे थे।

    संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि भाषा, भूषा, खान पान रीति रिवाज में भिन्नता के बावजूद हम राष्ट्र और संस्कृति से हिन्दू हैं, ऐसा कहने से आपको कुछ भी छोडऩा नहीं होगा और न ही आपकी पहचान संकट नहीं पैदा होगा। इसके लिए संवाद की आवश्यकता होती है। हिन्दू-मुस्लिम एक हैं, यह नारा ही गलत है। हम एक ही थे। वह भूल गए उसे याद दिलाने की आवश्यकता है। एक कालखंड में उन्होंने पूजा-पद्धति बदली, अब उसे छोड़ नहीं सकते। लेकिन अपना मूल याद कर अपनी संस्कृति के आधार पर जुड़ तो सकते हैं। संघ की शाखा में आकर एक घंटे शरीर मन बुद्धि से व्यायाम करना और शेष 23 घंटे अपनी सुविधा और सामथ्र्य के अनुसार अपने समाज के लिए कार्य करना ,यह भी एक मार्ग है। भारत अपने स्वत्व के आधार पर सब प्रकार से खड़ा हो, इसके लिए आप कुछ भी कर रहे हैं तो एक प्रकारसे आप संघ का ही कार्य कर रहे हैं। संघ के बारे में संघ को देखकर मन और मत बनाइये, यही मेरा आग्रह है। सही स्रोत से संघ को समझिए। संघ की शाखा, संघ के कार्यक्रम, संघ स्वयंसेवकों के आचरण और उनके घर से आपको संघ समझ में आएगा। तथ्यों के आधार पर यदि आप हमारा विरोध करेंगे तो भी हम आपका स्वागत करेंगे।

    सर संघचालक ने कहा कि ग्राम विकास, गोसेवा आदि सर्वमान्य कार्यों से व्यवस्था परिवर्तन भले न हो पर इससे समाज में परिवर्तन आता है। समाज की सज्जन शक्ति को अच्छी तरीके से सक्रिय होने की आवश्यकता है और सभी एक दूसरे के पूरक हों। समाज की सज्जन शक्ति की सक्रियता और उनके बीच समन्वय के लिए ही पंच परिवर्तन का अभियान है। सामाजिक समरसता अर्थात अपने समाज के बीच बिना किसी भेदभाव के अपने संचार के क्षेत्र में सम्पूर्ण हिन्दू समाज के सभी वर्गों में अपने एक मित्र होने चाहिए। इसके लिए अलग से कुछ खर्च नहीं लगता और अलग से अधिक परिश्रम नहीं करना पड़ता। अपने घर के निकट चर्मकार का कार्य करने वाला या आपका माली ही हो, उसके साथ अपने कुटुम्ब के सदस्यों के समान व्यवहार करना, इससे अपने आप संदेश जाएगा। बच्चों के भीतर परिवार के संस्कार, यह 12 वर्ष की आयु तक दिए जाते हैं तो यह जीवन भर प्रभावी होते हैं। वर्तमान समय में परिवार के सभी सदस्य मोबाइल में अधिक समय बिताते हैं। आवश्यकता है कि सप्ताह में एक दिन परिवार के साथ सामूहिक चर्चा करना, साथ ही भोजन करना। सभी को प्रामाणिकता और निस्वार्थ बुद्धि से अपने समाज की सेवा करना और उसकी चर्चा परिवार में करना, इसे मंगल संवाद कहते हैं। ऐसा करने से परिवार और समाज में बहुत सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेगा। अपने घर की चारदीवारी के बीच भाषा, भूषा, भजन, हवन, भोजन, भ्रमण अपना ही होना चाहिए। अपनी भाषा में हस्ताक्षर से ही शुरू करें। उसके लिए किसी दूसरी या विदेशी भाषा की आवश्यकता क्या है। पंच परिवर्तन की बात स्वयंसेवकों ने अपने घरों में शुरू कर दी है। यह एक दिन में नहीं होगा लेकिन यह एक दिन अवश्य होगा। हम सम्पूर्ण समाज को भी पंच परिवर्तन के विभिन्न आयामों को अपनाने का आग्रह करते हैं।

  • महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में 71 लाख के इनामी 7 नक्सली ढेर

    महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में 71 लाख के इनामी 7 नक्सली ढेर


    मुंबई।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) के गढ़चिरौली जिले (Gadchiroli district) में पिछले तीन दिनों से चल रही मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने 71 लाख रुपये के इनामी 07 नक्सलियों मार गिराया है। पुलिस अधीक्षक नीलोत्पल (Superintendent of Police Neelotpal) ने इसकी पुष्टि की है।

    पुलिस अधीक्षक नीलोत्पल ने शनिवार को गढ़चिरौली में पत्रकार वार्ता में बताया कि जिले में सिर्फ सात नक्सली बचे हैं, 31 मार्च तक जिले से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो जाएगा। उन्होंने बताया कि तीन दिन और तीन रात तक चली इस मुठभेड़ में पुलिस के जवानों ने बहादुरी से नक्सलियों का सामना किया। हालांकि इसमें दीपक मडावी नाम का एक जवान बलिदान हो गया, जबकि एक जवान घायल हो गया। उसकी हालत खतरे से बाहर है।

    पुलिस के जवान इस मुठभेड़ में 7 नक्सलियों को मारने में कामयाब रहे और इन सभी की पहचान हो गई है। इसमें दो बड़े कैडर शामिल हैं, दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी और कंपनी नंबर 10 का कमांडर प्रभाकर और कंपनी नंबर 5 का कमांडर पगु मोड्यम। इन सभी पर 200 मामले दर्ज हैं और महाराष्ट्र सरकार ने कुल 71 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। प्रभाकर से अब तक दस बार आत्मसमर्पण करने की अपील की गई थी। लेकिन जब से उसने कोई जवाब नहीं दिया, तब पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। अब गढ़चिरौली जिले में केवल 7 हथियारबंद नक्सली बचे हैं, जिनमें गढ़चिरौली जिले के दो और छत्तीसगढ़ के 5 कैडर शामिल हैं। उन्हें पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करना चाहिए ,वर्ना उन्हें 31 मार्च तक खत्म कर दिया जाएगा।

    पुलिस अधीक्षक ने बताया कि नक्सलियों ने मुठभेड़ में लगभग 1,000 राउंड फायरिंग की, जबकि पुलिस को 5,000 राउंड फायरिंग करनी पड़ी। इस मुठभेड़ में और भी नक्सली मारे गए होंगे। आने वाले दिनों में इसकी जानकारी मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि मारे गए नक्सलियों में प्रभाकर उर्फ रवि उर्फ प्रकालवीर उर्फ स्वामी उर्फ लोकेटी चंद्रराव (57) तेलंगाना राज्य के कामारेड्डी जिले के इसरोजीवाड़ा का रहने वाला था। वह दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी, वेस्ट सबजोनल ब्यूरो और कंपनी नंबर 10 का इंचार्ज था। उसके खिलाफ 113 केस दर्ज थे और महाराष्ट्र सरकार ने उस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। पगु मोड्यम (30) छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के डल्ला का रहने वाला था। वह सीवाईपीसी और कंपनी नंबर 5 का कमांडर था। उस पर 16 लाख रुपये का इनाम था।

    अनिला उर्फ बुदरी कोवाची (24) छत्तीसगढ़ के सुकमा की रहने वाली थी। वह प्रभाकर की बॉडीगार्ड थी। उसके खिलाफ 12 केस दर्ज थे और उस पर 8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। कामेश पाडा (35) छत्तीसगढ़ के दरबा का रहने वाला था। वह मैड एरिया स्पेशल प्लाटून का कमांडर था। उस पर 8 लाख रुपये का इनाम था। भजनथ उर्फ भीमा होली (40) छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के टेकलगुडेम का रहने वाला था। भजनथ, जो परलकोट दलम का एसीएम है, उस पर 6 लाख रुपये का इनाम था। मंगली कुरसम पश्चिम बस्तर का रहने वाला था। कंपनी नंबर 10 के सदस्य मंगली पर 4 लाख रुपये का इनाम था। जोगी सोडी-मडावी (27) बीजापुर जिले के बुडगीचेरू का रहने वाला था। कंपनी नंबर 5 के सदस्य जोगी पर 6 लाख रुपये का इनाम था।

    पुलिस उप महानिरीक्षक अंकित गोयल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस के उप महानिरीक्षक अजय कुमार शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एम. रमेश, गोकुल राज जी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे।

  • रूस से तेल आयात पर क्या बदलेगा भारत का रुख? ट्रंप के दावे के बाद विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब

    रूस से तेल आयात पर क्या बदलेगा भारत का रुख? ट्रंप के दावे के बाद विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब


    नई दिल्ली । यूएस-इंडिया ट्रेड डील के ऐलान के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा किया था कि भारत अब रूस से तेल की खरीद रोक देगा। इस बयान के बाद अब भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) की प्रतिक्रिया सामने आई है। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को रूसी तेल आयात को लेकर अपने पहले से चले आ रहे रुख को दोहराते हुए साफ कहा है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

    विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, ‘भारत के लिए ऊर्जा स्रोतों में विविधता बनाए रखना हमारी नीति का अहम हिस्सा है। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर सरकार कई बार सार्वजनिक मंचों से यह स्पष्ट कर चुकी है कि 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।’

    MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘वैश्विक बाजार की स्थिति और बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात के अनुसार ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी रणनीति का केंद्र है। भारत के फैसले इसी सोच के आधार पर लिए गए हैं और भविष्य में भी इसी दिशा में आगे बढ़ेंगे।’

    रूसी तेल को लेकर भारत ने दोहराया अपना रुख

    अमेरिका लंबे समय से चाहता है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना पूरी तरह बंद करे। इस पर भारत ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि देश की ऊर्जा आवश्यकताएं किसी भी अन्य दबाव से ऊपर हैं। रूस से तेल आयात को लेकर यह भारत का लगातार रुख रहा है। अमेरिका का कहना है कि रूस तेल से होने वाली आय का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में करता है, जबकि रूस इन आरोपों को लगातार खारिज करता आया है।

    व्हाइट हाउस के बयान के बाद सामने आया MEA का पक्ष

    विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया व्हाइट हाउस के उस दावे के बाद आई है, जिसमें कहा गया था कि भारत ने रूस से सीधे या किसी तीसरे देश के माध्यम से तेल खरीद रोकने और अमेरिका से तेल आयात बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। यह बयान उस समय सामने आया था, जब अमेरिका ने रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर लगाए गए 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ को हटाने का ऐलान किया था।

    रूसी तेल पर भारत की स्वतंत्रता पर क्रेमलिन की टिप्पणी

    इस बीच, जब इस मुद्दे पर क्रेमलिन से सवाल किया गया तो उसने कहा कि भारत को जहां से चाहे वहां से तेल खरीदने का पूरा अधिकार है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस इस तथ्य से भली-भांति अवगत है कि वह भारत का अकेला तेल और पेट्रोलियम उत्पाद आपूर्तिकर्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत पहले भी अन्य देशों से इन उत्पादों की खरीद करता रहा है, इसलिए इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है।

  • दिल्‍ली के मयूर विहार पॉकेट-1 मेट्रो स्टेशन का नया नाम, अब कहलाएगा श्रीराम मंदिर मयूर विहार

    दिल्‍ली के मयूर विहार पॉकेट-1 मेट्रो स्टेशन का नया नाम, अब कहलाएगा श्रीराम मंदिर मयूर विहार


    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली के पूर्वी क्षेत्र में स्थित मयूर विहार पॉकेट-1 मेट्रो स्टेशन को नया नाम दिया गया है। अब इस स्टेशन की पहचान ‘श्रीराम मंदिर मयूर विहार’ के रूप में होगी। स्टेशन के नाम में किए गए इस बदलाव को लेकर लोगों के बीच जिज्ञासा बनी हुई है कि आखिर ऐसा निर्णय क्यों लिया गया और इसकी पृष्ठभूमि क्या रही।

    मिली जानकारी के अनुसार, मयूर विहार इलाके में पहले से मयूर विहार पॉकेट-1 और मयूर विहार फेज-1 नाम से दो मेट्रो स्टेशन मौजूद थे। दोनों स्टेशनों के नाम काफी हद तक एक जैसे होने के कारण यात्रियों को बार-बार असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ता था। कई यात्री गलती से दूसरे स्टेशन पर उतर जाते थे, जिससे उनका समय खराब होता था और परेशानी भी बढ़ जाती थी। बुजुर्ग यात्रियों, नए लोगों और बाहरी राज्यों से आने वालों को यह दिक्कत ज्यादा होती थी।

    इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कई नेताओं ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) से मयूर विहार पॉकेट-1 मेट्रो स्टेशन का नाम बदलने का आग्रह किया था। नेताओं का तर्क था कि अलग नाम होने से स्टेशन की पहचान स्पष्ट होगी और यात्रियों को सुविधा मिलेगी।

    सूत्रों के मुताबिक, स्टेशन के नाम में बदलाव की अनुशंसा स्ट्रीट नेम्स अथॉरिटी (SNA) की ओर से की गई है। यह अथॉरिटी दिल्ली सरकार के तहत कार्यरत 29 सदस्यीय संस्था है, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री करते हैं। इसका मुख्य कार्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) दिल्ली में सड़कों, पार्कों, कॉलोनियों और अन्य सार्वजनिक स्थानों के नाम तय करना या उनमें बदलाव करना है। हालांकि, नगर निगम (MCD) और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) इसके अधिकार क्षेत्र में शामिल नहीं हैं।

    बताया जा रहा है कि मेट्रो स्टेशन के पास स्थित श्रीराम मंदिर इस इलाके की एक प्रमुख पहचान है। इसी कारण नए नाम में स्थानीय धार्मिक और सामाजिक पहचान को जोड़ा गया है। इससे क्षेत्र को अलग पहचान मिलेगी और यात्रियों को दिशा समझने में भी सहूलियत होगी।


    सुविधा और पहचान के लिए बदला गया नाम
    दिल्ली में इससे पहले भी कई स्थानों के नाम बदले जा चुके हैं। सरकार और संबंधित एजेंसियों का कहना है कि ऐसे बदलाव का मकसद आम जनता की सुविधा बढ़ाना, स्थानीय पहचान को मजबूत करना और भ्रम की स्थिति को समाप्त करना होता है। अब मयूर विहार पॉकेट-1 मेट्रो स्टेशन ‘श्रीराम मंदिर मयूर विहार’ के नाम से जाना जाएगा। उम्मीद है कि इस फैसले से रोजाना यात्रा करने वाले हजारों लोगों को राहत मिलेगी और मेट्रो सफर पहले से ज्यादा आसान होगा।

  • UP विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी में जुटी बसपा, मायावती ने बुलाई अहम बैठक, विपक्ष पर साधा निशाना

    UP विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी में जुटी बसपा, मायावती ने बुलाई अहम बैठक, विपक्ष पर साधा निशाना


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने संगठनात्मक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में पार्टी अध्यक्ष मायावती की अध्यक्षता में लखनऊ में एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें 1400 से अधिक पार्टी पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में जिला और विधानसभा स्तर के जिम्मेदार नेताओं ने हिस्सा लिया। चर्चा का मुख्य फोकस संगठन को मजबूत करना और पार्टी के जनाधार को बनाए रखना रहा।

    बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मायावती ने कहा कि प्रदेश में बसपा को कमजोर करने के लिए विरोधी दल योजनाबद्ध कोशिशें कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी इन साजिशों के प्रति अपने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को सतर्क करेगी, ताकि संगठन किसी भी चुनौती का मजबूती से सामना कर सके।

    विरोधी दलों पर मायावती का हमला
    मायावती ने विरोधी दलों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य की सरकारें जनहित से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज कर रही हैं। उनका आरोप था कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही जाति और धर्म के नाम पर राजनीति में उलझे हुए हैं, जिससे समाज में वैमनस्य बढ़ रहा है और यह देशहित के लिए घातक है। उन्होंने संसद में लगातार हो रहे हंगामे पर भी नाराजगी जाहिर की और कहा कि संसद चर्चा और समाधान के लिए होती है, लेकिन वहां केवल एक-दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ लगी है।

    जनमुद्दे हाशिए पर, जाति-धर्म राजनीति हावी
    मायावती ने अमेरिका-भारत के प्रस्तावित ट्रेड डील का उदाहरण देते हुए कहा कि देश में किसानों, मजदूरों और अल्पसंख्यक समुदाय की स्थिति सुधारने के लिए ठोस प्रयास नहीं हो रहे। उन्होंने कहा कि टैरिफ जैसे अहम मुद्दों पर संसद में स्पष्ट स्थिति होनी चाहिए, लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष गंभीर बहस के बजाय जाति-धर्म की राजनीति में उलझे हैं।

    बैठक में प्रदेश और मंडल स्तर के पदाधिकारी और सभी 403 विधानसभा सीटों के अध्यक्ष शामिल हुए। इस दौरान संगठन की सालाना गतिविधियों, आगामी रणनीति और एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मायावती ने बैठक को चुनावी तैयारी के लिहाज से अहम बताया और कहा कि अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ज्यादा समय नहीं बचा है।