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  • जनकपुरी सड़क हादसा: मंत्री प्रवेश वर्मा सख्त, तीन इंजीनियर सस्पेंड, उच्चस्तरीय जांच के निर्देश

    जनकपुरी सड़क हादसा: मंत्री प्रवेश वर्मा सख्त, तीन इंजीनियर सस्पेंड, उच्चस्तरीय जांच के निर्देश


    नई दिल्ली । दिल्ली के जनकपुरी स्थित जोगिंदर सिंह मार्ग पर बीती रात हुए सड़क हादसे ने निर्माण कार्यों में बरती जा रही लापरवाही को उजागर कर दिया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और सुरक्षा में चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही, घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं।

    मंत्री वर्मा ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और स्पष्ट कहा कि निर्माण कार्यों के दौरान आम लोगों की सुरक्षा से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाए जाएं।

    जांच में सामने आई गंभीर खामियां
    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसे वाली जगह पर पिछले कई महीनों से सीवर लाइन का निर्माण कार्य चल रहा था। इस दौरान करीब 6 मीटर लंबा, 4 मीटर चौड़ा और 4.25 मीटर गहरा गड्ढा खोदा गया था। कुछ स्थानों पर बैरिकेडिंग जरूर की गई थी, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं थे। खुदाई क्षेत्र के आसपास दोपहिया वाहनों की आवाजाही जारी रहने से आम लोगों की जान को गंभीर खतरा बना हुआ था।

    मंत्री के निरीक्षण में यह भी सामने आया कि इस तरह की लापरवाही पहले भी देखी जा चुकी है। जनवरी में नोएडा में हुए एक समान हादसे के बाद संबंधित विभागों को सतर्क किया गया था। 24 जनवरी को दिल्ली जल बोर्ड ने अधिकारियों और ठेके पर काम कर रही एजेंसियों को सुरक्षा नियमों के सख्त पालन के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद जनकपुरी की घटना ने इन आदेशों की अनदेखी को उजागर कर दिया।

    तीन इंजीनियर निलंबित, एजेंसी पर भी शिकंजा
    सुरक्षा मानकों की अनदेखी को गंभीर अपराध मानते हुए मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने कार्यकारी अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए। साथ ही, निर्माण कार्य कर रही एजेंसी की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी गई है। दोषी पाए जाने पर एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने समेत कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

    इधर, दिल्ली पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, दिल्ली जल बोर्ड ने एक विशेष उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है, जो यह पता लगाएगी कि लापरवाही किस स्तर पर हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या सुधार जरूरी हैं।

    जनता की सुरक्षा सर्वोपरि: मंत्री वर्मा
    मंत्री वर्मा ने हादसे पर दुख जताते हुए कहा कि सरकार पीड़ित परिवार के साथ पूरी संवेदना के साथ खड़ी है। उन्होंने दो टूक कहा कि जनता की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। साथ ही, राजधानी में चल रहे सभी सीवर, सड़क निर्माण और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े कार्यों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

  • दिल्ली सरकार के एक साल पूरे, कल रामलीला मैदान में होगा बड़ा कार्यक्रम, नए ऐलान की संभावना

    दिल्ली सरकार के एक साल पूरे, कल रामलीला मैदान में होगा बड़ा कार्यक्रम, नए ऐलान की संभावना


    नई दिल्ली। दिल्ली सरकार 8 फरवरी को अपने एक साल के कार्यकाल पूरा होने पर रामलीला मैदान में एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम का आयोजन कर रही है। इस मौके पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूरी कैबिनेट और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी मौजूद रहेंगे। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे।

    सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली सरकार परिवहन ढांचे को मजबूत करने के लिए 500 नई ई-बसें जोड़ने की योजना का ऐलान कर सकती है। इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और शहरी सुविधाओं से जुड़ी कई महत्वाकांक्षी योजनाओं की घोषणा भी संभव है। सरकार पर्यावरण अनुकूल परिवहन, ट्रैफिक कम करने और प्रदूषण घटाने पर विशेष ध्यान देगी। इस मंच के जरिए सरकार जनता को यह संदेश देना चाहती है कि बीते एक साल में किए गए वादों को पूरा करने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं और आगे राजधानी के विकास पर फोकस किया जाएगा।

    सरकार इस कार्यक्रम के माध्यम से जनता से फीडबैक भी लेगी। बीजेपी विधायक और सांसदों को अधिकतम लोगों को कार्यक्रम में शामिल करने की जिम्मेदारी दी गई है। हर कैबिनेट मंत्री को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही दिल्ली की सभी विधानसभा सीटों पर छोटे-छोटे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि सरकार अपनी उपलब्धियां और योजनाएं जनता तक पहुंचा सके।

    दिल्ली बीजेपी विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक आज दोपहर 3:30 बजे मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के आवास पर होगी। बैठक में एक साल पूरे होने पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रणनीति और रूपरेखा पर चर्चा की जाएगी।दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में बीजेपी ने कई वर्षों बाद आम आदमी पार्टी को हराकर पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की थी। 70 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी ने 48 सीटें जीती, जबकि आम आदमी पार्टी की सीटें घटकर 22 रह गईं।

  • चार साल में 34 किताबों को मंजूरी, लेकिन नरवणे की किताब अब भी रक्षा मंत्रालय में पेंडिंग

    चार साल में 34 किताबों को मंजूरी, लेकिन नरवणे की किताब अब भी रक्षा मंत्रालय में पेंडिंग


    नई दिल्ली। तथाकथित कश्मीर एकजुटता दिवस के मौके पर पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से सक्रिय आतंकी संगठनों ने एक बार फिर भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान दिए हैं। जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के शीर्ष कमांडरों ने सार्वजनिक सभाओं में भारत के प्रमुख शहरों पर हमले और सीधे जिहाद का आह्वान किया। इन धमकियों के बाद भारतीय खुफिया एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।

    लश्कर की दिल्ली और आगरा को धमकी
    लाहौर में आयोजित रैली में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी सैयद अब्दुल रहमान नकवी ने भारत की अखंडता को चुनौती देते हुए आगरा में आग लगाने और दिल्ली को हिला देने की धमकी दी। नकवी, जो हाफिज सईद की राजनीतिक मोर्चा ‘पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग’ का कमांडर है, ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपने पूर्वजों की इच्छा पूरी करेंगे। नकवी का हाफिज सईद और उसके बेटे तलहा सईद के साथ करीबी रिश्ता है।

    जैश कमांडर का वैश्विक संदेश
    PoK के रावलाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर मसूद इलियास कश्मीरी ने रैली में पाकिस्तानी युवाओं को आतंकी संगठन में शामिल होने के लिए उकसाया। उन्होंने कहा कि उनके समर्थक दुश्मन को कुचलने के लिए पूरी ताकत और आतंक के साथ तैयार हैं।

    मसूद कश्मीरी ने अपने भाषण में दिल्ली के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन और इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू को चेतावनी दी। रैली में जैश के नए आतंकियों के ‘नेक्स्ट-जेनरेशन’ कैडर को भी सार्वजनिक रूप से पेश किया गया। वह पहले बहावलपुर में जैश मुख्यालय पर भारतीय हमलों के प्रभाव को स्वीकार कर चुके हैं, जिसमें उन्होंने बताया था कि धमाकों ने आतंकवादियों के चिथड़े उड़ा दिए थे।

    भारतीय सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
    सीमा पार से संभावित खतरे और भड़काऊ बयानबाजी के मद्देनजर भारतीय खुफिया तंत्र ने LoC और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर चौकसी बढ़ा दी है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह बयानबाजी हताशा का प्रतीक है, लेकिन सेना और सुरक्षा बल पूरी तरह मुस्तैद हैं और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सतर्कता बरत रहे हैं।

  • शाही मंडप नहीं, अपना आशियाना बना यादगार; शादी के खर्च से खरीदा घर, कपल की हर तरफ तारीफ

    शाही मंडप नहीं, अपना आशियाना बना यादगार; शादी के खर्च से खरीदा घर, कपल की हर तरफ तारीफ

    नई दिल्ली। आज के दौर में शादियों को भव्य बनाने की होड़ किसी से छिपी नहीं है। डेस्टिनेशन वेडिंग, लाखों का सजावटी मंडप, डिजाइनर कपड़े और सैकड़ों मेहमानों की दावत—इन सब पर लोग अपनी जमा-पूंजी तक खर्च कर देते हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा कपल चर्चा में है, जिसने इस चलन से हटकर मिसाल पेश की है।

    इस जोड़े ने एक दिन के शोर-शराबे और दिखावे पर लाखों रुपये खर्च करने की बजाय उसी रकम से अपना घर खरीदने का फैसला किया। यही नहीं, दोनों ने अपने नए घर में ही बेहद सादगी से शादी रचाई, जो अब लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है।

    नए घर में लिए सात फेरे

    वायरल हो रहे वीडियो में दिखाया गया है कि कपल ने अपने नए घर के लिविंग रूम को ही मंडप बना लिया। परिवार के चुनिंदा सदस्य और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में रस्में निभाई गईं। वीडियो में दूल्हे के भाई ने बताया कि महंगी शादी की बजाय घर में निवेश करने का फैसला सोच-समझकर लिया गया था।

    यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस फैसले की खुलकर तारीफ कर रहे हैं।

    सोशल मीडिया पर मिल रही जमकर सराहना

    यूजर्स इस शादी को “समझदारी भरा कदम” बता रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि दिखावे के लिए कर्ज में डूबने से बेहतर है भविष्य की मजबूती पर ध्यान देना। कुछ यूजर्स ने लिखा कि समाज की परवाह किए बिना ऐसा फैसला लेना वाकई काबिले-तारीफ है। वहीं, कई लोग इसे आने वाली पीढ़ी के लिए एक बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।

    इस कपल ने साबित कर दिया कि शादी की यादें खर्च से नहीं, फैसलों की समझदारी से खास बनती हैं।

  • वॉट्सऐप की प्राइवेसी नीति पर छिड़ा विवाद… SC ने लगाई कड़ी फटकार… कहा- नागरिकों की निजता सर्वोपरि

    वॉट्सऐप की प्राइवेसी नीति पर छिड़ा विवाद… SC ने लगाई कड़ी फटकार… कहा- नागरिकों की निजता सर्वोपरि


    नई दिल्ली।
    क्या वाकई आपकी चैट पूरी तरह सुरक्षित है? इस सवाल के बीच भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court.) ने मेटा (Meta) के स्वामित्व वाले इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म वॉट्सऐप (Instant messaging platform WhatsApp.) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि डेटा साझा करने के नाम पर देश के नागरिकों की निजता से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने वॉट्सऐप और उसकी पैरेंट कंपनी मेटा की डेटा-शेयरिंग व्यवस्था और प्राइवेसी पॉलिसी पर गंभीर नाराजगी जाहिर की है।

    कोर्ट ने दो टूक कहा कि भारतीय नागरिकों के प्राइवेसी अधिकारों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं होगा। वॉट्सऐप डेटा साझा करने की आड़ में निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल नहीं कर सकता। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ तीन फरवरी को मेटा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। गौरतलब है कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने वर्ष 2024 में वॉट्सऐप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था, जिसे नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने भी सही ठहराया।

    सुप्रीम कोर्ट ने वॉट्सऐप की तथाकथित “टेक इट ऑर लीव इट” प्राइवेसी नीति पर भी सवाल उठाए। अदालत का कहना है कि आम यूजर्स इन जटिल शर्तों को ठीक से समझ ही नहीं पाते। कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि कंपनी को भारतीय कानून और संविधान का पालन करना ही होगा, अन्यथा उसे देश छोड़ने तक का विकल्प चुनना पड़ सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी याचिका में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई 9 फरवरी को तय की गई है।


    क्या है वॉट्सऐप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी?

    वॉट्सऐप ने 8 फरवरी 2021 को अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी लागू की थी। कंपनी का दावा है कि उसका एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पूरी तरह सुरक्षित है, यानी यूजर की चैट, वॉइस कॉल और तस्वीरें मेटा नहीं देख सकता। अगर रिसीवर का फोन अस्थायी रूप से बंद हो या वह ऑफलाइन हो, तो संदेश अधिकतम 30 दिनों तक वॉट्सऐप के सर्वर पर एन्क्रिप्टेड रूप में सुरक्षित रखे जाते हैं ताकि बाद में डिलीवरी हो सके।

    हालांकि चैट कंटेंट निजी रहता है, लेकिन वॉट्सऐप यूजर के “मेटाडाटा” तक पहुंच रखता है। यूजर्स के सामने केवल दो ही विकल्प होते हैं—इन शर्तों को स्वीकार करना या ऐप का इस्तेमाल बंद कर देना।

    एआई आधारित साइबर सुरक्षा और डेटा एनालिटिक्स कंपनी इनेफ्यू लैब्स के को-फाउंडर और सीईओ तरुण विज के मुताबिक, वॉट्सऐप मेटाडाटा और व्यवहारिक संकेतों का उपयोग करता है। इसमें यह जानकारी शामिल होती है कि यूजर किससे, कितनी बार और किस समय बात करता है, उसका डिवाइस, लोकेशन, प्रोफाइल फोटो, ग्रुप मेंबरशिप और कॉन्टैक्ट लिस्ट। इसी आधार पर यूजर प्रोफाइलिंग की जाती है। मेटा इस डेटा को इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब जैसे अन्य प्लेटफॉर्म्स के साथ साझा कर सकता है, जिससे डेटा लीक और संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग का खतरा बढ़ जाता है।

    हालांकि यूरोप में यूरोपीय डेटा संरक्षण नियम (जीडीपीआर) के चलते ऐसी डेटा शेयरिंग पर सख्त सीमाएं हैं। तरुण विज बताते हैं कि वॉट्सऐप पर की गई गतिविधियां अन्य प्लेटफॉर्म्स पर दिखने वाले विज्ञापनों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि यूजर अपनी कितनी जानकारी साझा करना चाहता है।


    पहले भी घिर चुका है वॉट्सऐप

    वॉट्सऐप ने अपनी सफाई में कहा है कि उसकी मैसेजिंग सेवा मुफ्त है और दो लोगों के बीच की निजी चैट्स को कंपनी नहीं पढ़ती। वॉट्सऐप और मेटा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि डेटा केवल यूजर की सहमति से ही साझा किया जाता है और प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं।

    यह पहला मौका नहीं है जब वॉट्सऐप की नीतियों पर सवाल उठे हों। वर्ष 2021 में आयरलैंड के डेटा रेगुलेटर ने डेटा पारदर्शिता के नियमों के उल्लंघन पर वॉट्सऐप पर 225 मिलियन यूरो का जुर्माना लगाया था। जर्मनी की लाइपजिग रीजनल कोर्ट भी मेटा को दंडित कर चुकी है। अदालत ने कहा था कि मेटा के पास ऐसे टूल्स हैं जिनके जरिए वह यूजर्स के ऑनलाइन व्यवहार को ट्रैक कर टार्गेटेड विज्ञापनों से अरबों डॉलर कमाता है।


    सुरक्षा खामियों के आरोप

    पिछले वर्ष वॉट्सऐप के पूर्व सुरक्षा प्रमुख अत्ताउल्लाह बैग ने अमेरिका में मेटा के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्लेटफॉर्म पर रोजाना लाखों अकाउंट हैक हो रहे थे और सुरक्षा खामियों के चलते कर्मचारी यूजर्स का निजी डेटा देख सकते थे। बैग के अनुसार, बार-बार चेतावनी देने के बावजूद मेटा ने ठोस कदम नहीं उठाए।

    साल 2025 में शोधकर्ताओं ने “जीरो-क्लिक” हमलों का खुलासा किया, जिनमें बिना किसी क्लिक के वॉट्सऐप के जरिए आईफोन और मैक डिवाइस हैक कर लिए गए। इन हमलों में मैकओएस और आईओएस में इमेज प्रोसेसिंग की खामी और वॉट्सऐप के डिवाइस लिंकिंग फीचर की कमजोरी सामने आई।

    ऑस्ट्रिया के स्वतंत्र शोधकर्ताओं के एक समूह ने भी वॉट्सऐप में ऐसी कमी खोजी, जिसके जरिये 350 करोड़ फोन नंबर, प्रोफाइल फोटो, डिवाइस जानकारी, टाइमस्टैम्प और बिजनेस डिटेल्स तक पहुंच संभव हो गई थी।


    भारत में कानूनी स्थिति

    राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ अमित दुबे बताते हैं कि वर्ष 2019 में वॉट्सऐप के जरिए पेगासस स्पायवेयर ने केवल एक मिस्ड कॉल से कई भारतीयों के फोन हैक कर लिए थे। यह स्पायवेयर इजरायली कंपनी एनएसओ ग्रुप ने विकसित किया था। इस मामले में वॉट्सऐप ने एनएसओ ग्रुप के खिलाफ मुकदमा दायर किया था।

    अमित दुबे के अनुसार, हाल के वर्षों में वॉट्सऐप ने चैट समरी और ऑटो-रिप्लाई जैसे एआई आधारित फीचर्स भी जोड़े हैं, जो यूजर की सहमति से सीमित परिस्थितियों में काम करते हैं। ऐसे में खासकर निजी, चिकित्सकीय या कानूनी बातचीत के दौरान सतर्क रहना जरूरी है।

    भारत में अभी बड़ी टेक कंपनियों को नियंत्रित करने के लिए सख्त और प्रभावी कानूनों की कमी है। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम मौजूद है, लेकिन यह पूरी तरह 13 मई 2027 से लागू होगा। ऐसे में नागरिकों के पास अदालत का रास्ता ही मुख्य विकल्प बचता है। पुट्टस्वामी फैसले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही निजता को मौलिक अधिकार घोषित कर चुका है।


    यूजर क्या करें?

    वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट वकील पवन दुग्गल के अनुसार, आज कई सरकारी और निजी संस्थानों के आधिकारिक ग्रुप्स वॉट्सऐप पर चल रहे हैं, जो चिंता का विषय है। स्पष्ट कानूनी ढांचे के अभाव में डेटा सुरक्षा की जिम्मेदारी काफी हद तक यूजर पर ही है। वे सलाह देते हैं कि ऐप इस्तेमाल करने से पहले उसकी शर्तें और नीतियां ध्यान से पढ़ी जाएं।

    टेकयुगो के सीईओ अभिनव सिंह का कहना है कि प्राइवेसी को लेकर चिंतित यूजर्स सिग्नल, टेलीग्राम या आईफोन पर आईमैसेज जैसे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। सिग्नल विज्ञापनों के लिए डेटा का इस्तेमाल नहीं करता और टेलीग्राम में “सीक्रेट चैट” का विकल्प मिलता है। हालांकि, लोकप्रियता के मामले में ये प्लेटफॉर्म अभी भी वॉट्सऐप से पीछे हैं।

  • पुणे में CBI का बड़ा एक्शन… मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज के 2 घूसखोर अफसर रंगे हाथ गिरफ्तार

    पुणे में CBI का बड़ा एक्शन… मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज के 2 घूसखोर अफसर रंगे हाथ गिरफ्तार


    पुणे।
    मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (एमईएस) (Military Engineering Services – MES) में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (Central Bureau of Investigation-CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पुणे के खड़की क्षेत्र से दो अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में एक असिस्टेंट गैरीसन इंजीनियर और एक जूनियर इंजीनियर शामिल हैं। सीबीआई ने यह कार्रवाई 5 फरवरी को सुनियोजित ट्रैप के जरिए की, जिसमें जूनियर इंजीनियर को शिकायतकर्ता से 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए मौके पर ही दबोच लिया गया। रिश्वत की पूरी रकम उनके कार्यालय से बरामद कर ली गई है, जबकि असिस्टेंट गैरीसन इंजीनियर को भी इस साजिश में शामिल होने के आरोप में हिरासत में लिया गया है।

    सीबीआई के अनुसार, दोनों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है और पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच जारी है। एजेंसी ने बताया कि यह केस 3 फरवरी को दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता एक निजी कंपनी का पावर ऑफ अटॉर्नी धारक है, जिसने आरोप लगाया था कि कार्य पूरा होने और जरूरी प्रमाणपत्र जमा करने के बावजूद भुगतान जानबूझकर रोका जा रहा था, ताकि रिश्वत की मांग की जा सके।

    शिकायत में यह भी सामने आया कि शुरुआत में दोनों अधिकारियों ने भुगतान जारी करने के बदले 6 लाख रुपये की मांग की थी। बाद में बातचीत के बाद यह सौदा पहली किस्त के रूप में 2 लाख रुपये पर तय हुआ। रिश्वत की मांग से परेशान होकर शिकायतकर्ता ने सीबीआई से संपर्क किया, जिसके बाद एजेंसी ने जाल बिछाया और आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया।


    छापेमारी में मिला अतिरिक्त कैश

    ट्रैप के तुरंत बाद सीबीआई ने दोनों अधिकारियों के आवासीय और कार्यालय परिसरों पर छापेमारी की। इस दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ-साथ 1 लाख 88 हजार 500 रुपये की अनएक्सप्लेन्ड नकदी भी बरामद की गई। एजेंसी का कहना है कि यह रकम उनकी ज्ञात वैध आय से अधिक प्रतीत होती है और इसकी जांच की जा रही है।

    प्राथमिक जांच में यह मामला सिर्फ एक रिश्वत लेनदेन तक सीमित नहीं दिख रहा है, बल्कि इसे एक संगठित प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें ठेकेदारों को भुगतान के लिए दबाव बनाकर अवैध वसूली की जाती थी। ऐसे कृत्य न केवल सरकारी कामकाज में पारदर्शिता को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि रक्षा से जुड़े संवेदनशील विभागों में भरोसे को भी कमजोर करते हैं।

    सीबीआई ने कहा है कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई है। एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है और अतिरिक्त सबूत जुटाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाइयां न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में मददगार होती हैं, बल्कि सरकारी तंत्र में जवाबदेही और विश्वास को भी मजबूत करती हैं।

  • कांग्रेस से निष्कासन के बाद नवजोत कौर सिद्धू का तीखा हमला, राहुल गांधी पर की कड़ी टिप्पणी

    कांग्रेस से निष्कासन के बाद नवजोत कौर सिद्धू का तीखा हमला, राहुल गांधी पर की कड़ी टिप्पणी


    चंडीगढ़।
    कांग्रेस पार्टी (Congress Party.) ने पूर्व क्रिकेटर और पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू (Navjot Kaur Sidhu.) को संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इस फैसले की जानकारी छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) ने अमृतसर में मीडिया को दी। उन्होंने बताया कि नवजोत कौर सिद्धू (Navjot Kaur Sidhu) पहले से ही पार्टी से निलंबित थीं और अब संगठन ने औपचारिक प्रक्रिया पूरी करते हुए उन्हें निष्कासित कर दिया है।

    भूपेश बघेल ने कहा कि कांग्रेस में अनुशासन सर्वोपरि है और पार्टी विरोधी गतिविधियों को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले नवजोत कौर सिद्धू खुद सार्वजनिक मंच से कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर चुकी थीं। इसके बावजूद पार्टी ने संगठनात्मक नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें बाहर करने का निर्णय लिया।


    सोशल मीडिया पर निकाली भड़ास

    पार्टी से निष्कासन के बाद नवजोत कौर सिद्धू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ जमकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने राहुल गांधी पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें “पप्पू” तक कह दिया। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि राहुल गांधी ने आखिरकार अपने नाम को सही साबित कर दिया है। उनके मुताबिक, राहुल खुद को अकेला ईमानदार और समझदार नेता मानते हैं, जबकि उन्हें जमीनी हकीकत की कोई समझ नहीं है।

    नवजोत कौर ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के आसपास मौजूद लोग उन्हें वास्तविक स्थिति से दूर रखते हैं और फैसले होने से पहले ही टिकट बेचकर ऐश करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी इमरजेंसी कॉल का जवाब देने में राहुल को छह महीने से ज्यादा लग जाते हैं, जिससे तब तक नुकसान हो चुका होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि लोगों को साथ जोड़ने से पहले राहुल को अपने तथाकथित समर्थकों से पूछना चाहिए कि क्या वे ईमानदारी से पंजाब के लिए काम करना चाहते हैं।


    राहुल गांधी पर आगे भी साधा निशाना

    अपनी पोस्ट में नवजोत कौर ने आगे कहा कि राहुल गांधी के पास न तो जमीनी सच्चाई सुनने का समय है और न ही इच्छाशक्ति, क्योंकि वे अपनी बनाई हुई दुनिया में रहना पसंद करते हैं। उन्होंने दावा किया कि राहुल के अधिकांश समर्थक नि:स्वार्थ सेवा के बजाय अपनी जेबें भरने में लगे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि वे दोबारा सत्ता में नहीं लौटने वाले।

    उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर राहुल में हिम्मत है तो वे अपने समर्थकों से मौजूदा सरकार के खिलाफ खुलकर बोलने को कहें और अपनी फाइलें खुलवाने के लिए भी तैयार रहें। नवजोत कौर ने राहुल को सलाह दी कि उन्हें सच बोलना और उसका सामना करना सीखना चाहिए, क्योंकि सच वही रहता है जो था और जो है।


    राजनीति और पंजाब पर टिप्पणी

    नवजोत कौर सिद्धू ने खुद को एक शुभचिंतक बताते हुए राहुल गांधी को ज्यादा संवेदनशील, व्यावहारिक और ग्रहणशील बनने की सलाह दी। उन्होंने दावा किया कि राहुल के ज्यादातर कथित समर्थक भाजपा में जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि न तो वे किसी से मिलने गई हैं और न ही कोई उनके पास आया है। उनके अनुसार, वे एक फाउंडेशन के माध्यम से काम कर सकती हैं, लेकिन उनका समय और ऊर्जा केवल पंजाब की भलाई के लिए समर्पित है।

    उन्होंने कांग्रेस पर यह भी आरोप लगाया कि जब पार्टी में भ्रष्ट नेताओं को सम्मान मिलता है, तब ईमानदारी और सच्चाई की बातें बेमानी हो जाती हैं। अंत में उन्होंने राहुल गांधी को “गुड लक” कहते हुए राजनीति में अपना वजूद बचाने की नसीहत दी।


    बीजेपी को लेकर भी की टिप्पणी

    एक अन्य पोस्ट में नवजोत कौर सिद्धू ने भारतीय जनता पार्टी की तारीफ भी की। उन्होंने लिखा कि बीजेपी ने उनके टैलेंट को पहचाना और निष्पक्ष सर्वे के आधार पर उन्हें वर्ष 2012 में विधायक का टिकट दिया। उस समय वे अस्पताल में कार्यरत थीं और डॉक्टर होने के कारण उन्हें सीएपीएस हेल्थ की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने कहा कि बीजेपी में उन्हें ईमानदारी और सच्चाई से काम करने की पूरी आजादी मिली और वे किसी भी विभाग में जाकर उसी दिन काम निपटाकर लौट सकती थीं।

  • गरीब नहीं, संघर्षशील महिला कहिए- वकील की दलील पर CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी

    गरीब नहीं, संघर्षशील महिला कहिए- वकील की दलील पर CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में रोजाना सैकड़ों मामलों की सुनवाई होती है, लेकिन शुक्रवार को एक सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice- CJI) सूर्यकांत (Suryakant.) की टिप्पणी ने सबका ध्यान खींच लिया। मामला एक महिला से जुड़ी लंबित क्लेम याचिका का था, जो लंबे समय से हाई कोर्ट (High Court) में विचाराधीन है। सुनवाई के दौरान जब महिला की ओर से पेश वकील ने उसे “गरीब महिला” बताया, तो इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने तीखा और चर्चा में रहने वाला जवाब दिया।

    लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे ही वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता एक गरीब महिला है, सीजेआई सूर्यकांत ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए पूछा, “वह सुप्रीम कोर्ट आने से पहले गरीब थी या सुप्रीम कोर्ट आने के बाद गरीब हुई है?”

    सीजेआई ने वकील को आगे समझाते हुए कहा कि अदालत के सामने इस तरह की शब्दावली का प्रयोग न किया जाए। उन्होंने कहा कि उसे गरीब महिला कहने के बजाय “फाइटर महिला” कहा जाना चाहिए, जो तब तक शांत नहीं बैठेगी जब तक उसका पूरा दावा तार्किक अंजाम तक नहीं पहुंच जाता। सीजेआई ने यह भी जोड़ा कि जब कोई महिला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची है, तो उसे कमजोर या गरीब बताने की जरूरत क्यों पड़ती है।

    यह मामला हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट से संबंधित है, जहां महिला का केस करीब 11 वर्षों से लंबित है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह आग्रह किया गया है कि हाई कोर्ट को निर्देश दिया जाए ताकि मामले की सुनवाई शीघ्र पूरी हो और फैसला सुनाया जा सके।

    इसी दिन एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि अदालतें किसी महिला, विशेषकर नाबालिग लड़की को, जबरन गर्भ जारी रखने के लिए मजबूर नहीं कर सकतीं।

    पीठ के समक्ष यह मामला आया था कि एक नाबालिग लड़की पड़ोस के एक लड़के के साथ संबंध में थी और उसी दौरान वह गर्भवती हो गई। लड़की ने अदालत से चिकित्सकीय रूप से गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति मांगी थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के जेजे अस्पताल को निर्देश दिया कि नाबालिग की गर्भावस्था को मेडिकल प्रक्रिया के तहत समाप्त किया जाए। साथ ही अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि इस दौरान सभी जरूरी चिकित्सकीय सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए।

    इन दोनों मामलों में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को महिला अधिकारों और न्याय तक पहुंच के संदर्भ में बेहद अहम माना जा रहा है।

  • J&K: अनंतनाग में ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल पर बड़ी कार्रवाई… NIA ने की मेडिकल कॉलेज पर छापामारी

    J&K: अनंतनाग में ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल पर बड़ी कार्रवाई… NIA ने की मेडिकल कॉलेज पर छापामारी


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency- NIA) ने जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के अनंतनाग जिले (Anantnag district) में स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) में छापेमारी की है। यह कार्रवाई ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल से जुड़ी है, जिसमें शिक्षित और प्रतिष्ठित पेशेवर शामिल हैं—जैसे डॉक्टर, तकनीशियन और अन्य लोग—जो पारंपरिक आतंकवादी प्रोफाइल से अलग हैं। एनआईए की टीम ने कॉलेज परिसर में तलाशी ली और खास तौर पर एक डॉक्टर के लॉकर से राइफल बरामद होने के संबंध में साक्ष्य जुटाए।

    यह मॉड्यूल ‘व्हाइट कॉलर’ इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इसमें आम आतंकवादियों के बजाय समाज के सम्मानित वर्ग के लोग शामिल थे। छापेमारी के दौरान एजेंसी ने दस्तावेजों और अन्य सबूतों की खोज की, ताकि इस नेटवर्क के गहरे संबंधों और संरचना का पता लगाया जा सके।

    जांच की शुरुआत और लाल किले विस्फोट
    इस जांच की शुरुआत नवंबर 2025 में हुई, जब दिल्ली के लाल किले के पास एक कार बम विस्फोट हुआ, जिसमें कई लोगों की मौत हुई। इस हमले के बाद ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल का खुलासा हुआ, जिसमें डॉक्टरों का एक समूह शामिल था। इस मामले में प्रमुख आरोपी डॉ. आदिल अहमद रदर है, जो पहले GMC अनंतनाग में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर रह चुका था। उसकी गिरफ्तारी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से हुई, जहां वह एक निजी अस्पताल में काम कर रहा था।

    डॉ. रदर के लॉकर से AK-56 राइफल और गोला-बारूद बरामद हुआ, जिसके बाद मामला एनआईए को सौंप दिया गया। अब तक इस मॉड्यूल से जुड़े 9 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और फरीदाबाद से बड़ी मात्रा में विस्फोटक जब्त किए गए हैं।


    जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

    जांच में यह भी पता चला कि डॉ. आदिल अहमद रदर कश्मीर के कुलगाम जिले के वानपोरा का रहने वाला है और उसने श्रीनगर के GMC से MBBS की डिग्री हासिल की थी। एनआईए के दावे के मुताबिक, वह जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों से जुड़ा था और दिल्ली में हुए विस्फोट में उसकी भूमिका थी।

    मॉड्यूल में अन्य डॉक्टर भी शामिल थे, जिनमें डॉ. मुजामिल अहमद गनाई और डॉ. शाहीन सईद का नाम सामने आया है। एनआईए ने बताया कि यह समूह पिछले चार वर्षों से सक्रिय था और वैश्विक कॉफी चेन जैसी जगहों पर हमले की साजिश रच रहा था। उनका लक्ष्य इजराइल-गाजा संघर्ष से प्रेरित होकर ऐसे हमले करना था। कुछ सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की भी योजना बनाई थी।


    आतंकवाद का नया चेहरा

    यह मामला आतंकवाद के एक नए रूप को दर्शाता है, जहां समाज के प्रतिष्ठित पेशेवर कट्टरपंथी विचारधारा की तरफ आकर्षित हो रहे हैं और अपनी शिक्षा तथा सामाजिक स्थिति का गलत उपयोग कर रहे हैं। एनआईए की यह छापेमारी मॉड्यूल के बचे हुए सदस्यों और उनके नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    जांच अभी जारी है और भविष्य में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। इस तरह के मॉड्यूल समाज के लिए अधिक खतरनाक माने जाते हैं, क्योंकि ये सामान्य जीवन में घुलमिलकर काम करते हैं और अपनी पहचान छुपाते हैं। कुल मिलाकर, यह घटना सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और तेज कार्रवाई की आवश्यकता को उजागर करती है।

  • इस CM का राज्य के प्रबुद्धजन ही कर रहे विरोध… Ex IAS, डॉक्टरों और लेखकों ने चीफ जस्टिस से लगाई ये गुहार?

    इस CM का राज्य के प्रबुद्धजन ही कर रहे विरोध… Ex IAS, डॉक्टरों और लेखकों ने चीफ जस्टिस से लगाई ये गुहार?


    नई दिल्ली।
    असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा (Assam Chief Minister Himanta Biswa Sarma) के खिलाफ राज्य के 40 से अधिक रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों (Retired IAS officers), डॉक्टरों, शिक्षाविदों, लेखकों, पत्रकारों और अन्य प्रसिद्ध नागरिकों ने खुलकर विरोध जताया है। इन प्रबुद्ध नागरिकों ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री के कथित “नफरती भाषण” और एक विशेष समुदाय के खिलाफ दिए गए विवादित बयानों पर स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है। उनका कहना है कि संवैधानिक उल्लंघनों के प्रति चुप्पी या निष्क्रियता संविधान की नैतिक शक्ति को कमजोर कर सकती है।

    पत्र में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ( Chief Minister Himanta Biswa Sarma) ने कई सार्वजनिक मंचों पर ऐसे बयान दिए हैं जो प्रथम दृष्टया नफरती भाषण, सरकारी धमकी और एक खास समुदाय को बदनाम करने जैसे प्रतीत होते हैं। चिट्ठी में विशेष रूप से मुख्यमंत्री के ‘मियां’ (बांग्ला भाषी मुसलमानों) के खिलाफ दिए गए टिप्पणियों का उल्लेख किया गया है। इन लोगों ने चीफ जस्टिस से मांग की है कि वह इस मामले में संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करें।


    CM के बयान को संविधान विरोधी बताया

    पत्र में कहा गया है कि बांग्ला भाषी मुसलमान असम के समाज का हिस्सा बन चुके हैं, और मुख्यमंत्री के बयान अमानवीय, सामूहिक बदनामी और राज्य प्रायोजित उत्पीड़न की धमकियों जैसे हैं। यह टिप्पणी संविधान की भावना के खिलाफ मानी जा रही है। यहाँ यह भी महत्वपूर्ण है कि ‘मियां’ शब्द असम में बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए अपमानजनक रूप से इस्तेमाल होता है। गैर-बांग्ला भाषी लोग इन्हें अक्सर बांग्लादेशी प्रवासी मानते हैं, जिससे समुदाय पर सामाजिक और राजनीतिक दबाव बढ़ता है।


    पत्र पर साइन करने वालों में कौन-कौन?

    गुवाहाटी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखी इस चिट्ठी पर हस्ताक्षर करने वालों में कई प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं। इनमें विद्वान डॉ. हिरेन गोहेन, असम के पूर्व DGP हरेकृष्ण डेका, गुवाहाटी के पूर्व आर्कबिशप थॉमस मेनमपारामपिल, राज्यसभा सांसद अजीत कुमार भुइयां, रिटायर्ड IAS अधिकारी, वरिष्ठ पत्रकार, शिक्षाविद, कलाकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। ज्ञापन में हस्ताक्षर करने वालों ने कहा है कि वे मौलिक अधिकारों के संरक्षक के रूप में गुवाहाटी हाई कोर्ट की संवैधानिक भूमिका में पूर्ण विश्वास रखते हैं और इसी विश्वास के साथ अदालत से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।


    हाई कोर्ट से क्या मांग की गई?

    पत्र में हाई कोर्ट से कई महत्वपूर्ण निर्देशों की मांग की गई है, जिनमें शामिल हैं:
    उचित मामले दर्ज करने के निर्देश
    प्रभावित समुदाय की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय
    सार्वजनिक पद धारकों के लिए संवैधानिक अनुशासन की पुष्टि

    धर्मनिरपेक्षता को बनाए रखने का निर्देश
    विशेष रूप से, यह मांग की गई है कि गुवाहाटी हाई कोर्ट संविधान की मूल संरचना के हिस्से के रूप में धर्मनिरपेक्षता की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाए। यह ज्ञापन असम में बढ़ते सामाजिक तनाव और भाषणों के संभावित प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता का संकेत है, और इससे राज्य में संवैधानिक मूल्यों और साम्प्रदायिक सौहार्द की रक्षा के मुद्दे फिर से सामने आए हैं।