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  • कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में अब CBSE अंकों को मिलेगी मान्यता: भारतीय छात्रों के लिए खुला अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का द्वार; रिसर्च के लिए बनेगा CAS सेंटर

    कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में अब CBSE अंकों को मिलेगी मान्यता: भारतीय छात्रों के लिए खुला अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का द्वार; रिसर्च के लिए बनेगा CAS सेंटर


    नई दिल्ली/कैम्ब्रिज। विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना संजोए भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों में गिने जाने वाले कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने भारतीय शिक्षा प्रणाली, विशेषकर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड CBSE के स्तर को वैश्विक मान्यता प्रदान की है। अब CBSE से 12वीं कक्षा पास करने वाले मेधावी छात्र अपने बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के चुनिंदा अंडरग्रेजुएट UG कोर्सेज में प्रवेश के लिए सीधे आवेदन कर सकेंगे। यह कदम न केवल भारतीय छात्रों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारतीय स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता पर मुहर भी लगाता है।

    वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रतिभा की पहचान इससे पहले कई विदेशी विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने के लिए भारतीय छात्रों को जटिल प्रक्रियाओं और अतिरिक्त प्रवेश परीक्षाओं के दौर से गुजरना पड़ता था। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के इस फैसले ने उस बाधा को काफी हद तक कम कर दिया है। यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर डेबोरा प्रेंटिस ने इस महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा करते हुए कहा कि भारतीय छात्रों में अद्भुत प्रतिभा और जुनून है। कैम्ब्रिज इस मेधा को पहचानते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना चाहता है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि केवल 12वीं के अंक ही प्रवेश का एकमात्र आधार नहीं होंगे; छात्रों को यूनिवर्सिटी द्वारा निर्धारित अन्य मापदंडों और शर्तों को भी पूरा करना होगा, लेकिन बोर्ड अंकों को मान्यता मिलना प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक सुलभ बना देगा।

    शैक्षणिक संबंधों को नई दिशाCAS की स्थापना भारत और कैम्ब्रिज के बीच इन शैक्षणिक संबंधों को और गहरा बनाने के लिए यूनिवर्सिटी ने कैम्ब्रिज इंडिया सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज शुरू करने का भी निर्णय लिया है। यह केंद्र रिसर्च, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और आधुनिक शिक्षा पद्धतियों के संगम के रूप में कार्य करेगा। CAS का मुख्य उद्देश्य भारत की तेजी से उभरती ‘नॉलेज इकोनॉमी’ को वैश्विक शिक्षा नेटवर्क से जोड़ना है। इस सेंटर के माध्यम से न केवल छात्रों को, बल्कि भारतीय रिसर्च स्कॉलर्स और शिक्षकों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध करने और दुनिया भर के विशेषज्ञों के साथ काम करने का बेहतरीन मंच मिलेगा।

    भविष्य की राह हुई आसान कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी का यह कदम भविष्य में अन्य वैश्विक संस्थानों के लिए भी एक मिसाल पेश करेगा। इससे भारतीय छात्रों के लिए करियर के नए और रोमांचक रास्ते खुलेंगे। यह पहल उन हजारों परिवारों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है जो अपने बच्चों को विश्व स्तरीय शिक्षा दिलाने का सपना देखते हैं। जानकारों का मानना है कि इस फैसले से भारतीय स्कूली शिक्षा की साख दुनिया भर में बढ़ेगी और वैश्विक विश्वविद्यालयों में भारतीय चेहरों की मौजूदगी पहले से कहीं अधिक प्रभावी और सशक्त होगी।

  • बंगाल में संवैधानिक संकट: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी पर लगाया भड़काने का आरोप; चुनाव अधिकारियों के लिए मांगी विशेष सुरक्षा

    बंगाल में संवैधानिक संकट: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी पर लगाया भड़काने का आरोप; चुनाव अधिकारियों के लिए मांगी विशेष सुरक्षा


    नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन SIR को लेकर निर्वाचन आयोग ECI और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच चल रही जंग अब सुप्रीम कोर्ट के गलियारों में पहुँच गई है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक बेहद तीखे हलफनामे में चुनाव आयोग ने बंगाल की स्थिति को ‘असाधारण’ करार देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आयोग का कहना है कि राज्य में चुनाव अधिकारियों को न केवल डराया-धमकाया जा रहा है, बल्कि मुख्यमंत्री के सार्वजनिक भाषणों से अधिकारियों के खिलाफ नफरत और हिंसा का माहौल बनाया जा रहा है।

    अधिकारियों की जान को खतरा और पुलिस की चुप्पी चुनाव आयोग ने शीर्ष अदालत को बताया कि पश्चिम बंगाल में चुनावी मशीनरी को पंगु बनाने का प्रयास किया जा रहा है। आयोग ने हलफनामे में जिक्र किया कि मुख्यमंत्री ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ‘हरि दास’ नामक एक माइक्रो-ऑब्जर्वर का नाम सार्वजनिक रूप से लिया, जिससे उस अधिकारी की जान खतरे में पड़ गई है। हालात इतने बेकाबू हैं कि मुर्शिदाबाद के 9 माइक्रो-ऑब्जर्वर्स ने सामूहिक इस्तीफा देते हुए काम करने से मना कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उन पर जानलेवा हमले हो रहे हैं और राज्य पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। उत्तर दिनाजपुर में तो 700 लोगों की भीड़ ने उस केंद्र पर ही धावा बोल दिया जहाँ सूची संशोधन का कार्य चल रहा था। आयोग ने स्पष्ट कहा कि पुलिस FIR दर्ज करने में भी आनाकानी कर रही है।

    देश का इकलौता राज्य जहाँ CEO को मिली ‘Y+’ सुरक्षा चुनाव आयोग ने इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया कि बंगाल की जमीनी हकीकत देश के अन्य राज्यों से पूरी तरह अलग और डरावनी है। यही कारण है कि केंद्र सरकार को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को ‘Y+ श्रेणी’ की सुरक्षा प्रदान करनी पड़ी है। पूरे भारत में बंगाल इकलौता ऐसा राज्य बन गया है जहाँ एक चुनाव अधिकारी को अपनी सुरक्षा के लिए कमांडो के घेरे में रहना पड़ रहा है। आयोग ने दलील दी कि जहाँ अन्य राज्यों में SIR प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है, वहीं बंगाल में राजनीतिक हस्तक्षेप ने संकट खड़ा कर दिया है।

    ममता बनर्जी का पक्ष:लोकतंत्र को खतरा दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका की पैरवी करते हुए चुनाव आयोग की नीयत पर हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर केवल बंगाल में ही ‘माइक्रो-ऑब्जर्वर्स’ की नियुक्ति क्यों की जा रही है? मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि करीब 58 लाख वैध मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने मांग की कि 2026 का विधानसभा चुनाव पुरानी सूची के आधार पर ही हो और वर्तमान संशोधन प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए।

    सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फिलहाल चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह नामों की त्रुटियों को सुधारते समय संवेदनशीलता बरते ताकि किसी भी असली नागरिक का मताधिकार न छीने। अब सोमवार को होने वाली अगली सुनवाई पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं कि क्या बंगाल में चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो पाएगी या हिंसा का यह साया गहराता जाएगा।

  • BJP सांसद का दावा- PM मोदी पर हमला करना चाहती थीं महिला सांसद…. संसद में घेर ली उनकी कुर्सी

    BJP सांसद का दावा- PM मोदी पर हमला करना चाहती थीं महिला सांसद…. संसद में घेर ली उनकी कुर्सी


    नई दिल्ली।
    बुधवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) का भाषण स्थगित कर दिया गया, जिसके बाद भाजपा ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। भाजपा सांसद मनोज तिवारी (BJP MP Manoj Tiwari) ने दावा किया कि विपक्ष की महिला सांसदों (Women MPs.) ने पीएम मोदी की कुर्सी को घेर लिया और वे “हमला करने की नीयत” से आई थीं, जिससे पीएम मोदी भाषण नहीं दे सके। तिवारी ने कहा कि यह एक सुनियोजित प्रयास था, ताकि प्रधानमंत्री के भाषण को रोका जा सके।

    मनोज तिवारी ने कहा, “आज सदन में जो हुआ, वह देखकर देश कांग्रेस को धिक्कारेगा। पीएम मोदी का भाषण था और जब पांच बजे का समय आया, तो महिला सांसदों को आगे बढ़ाकर पीएम मोदी की कुर्सी तक घेर लिया गया। इससे भी आगे बढ़कर उन्होंने कुर्सी के चारों ओर घेरा डाला। क्या इसका उद्देश्य पीएम मोदी पर हमला करना था? वे गुस्से में आकर हमला करने के लिए आई थीं। हम सब सदन में बैठकर आश्चर्यचकित थे कि यह क्या हो रहा है, यह सब प्री-प्लान था।”

    सदन में हंगामा और विवाद
    इस घटना के बाद, सदन में हंगामा बढ़ गया। बजट सत्र की शुरुआत से ही कांग्रेस और भाजपा के बीच तीखी नोकझोंक चल रही है। राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक के उद्धरण का हवाला देने की कोशिश की थी, लेकिन इस पर उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे सदन में विवाद बढ़ा और कार्यवाही कई बार स्थगित हो गई। इसके बाद, बुधवार को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने गांधी-नेहरू परिवार पर टिप्पणी की, जिससे और भी हंगामा मच गया।

    कांग्रेस की महिला सांसदों, जिनमें वर्षा गायकवाड़ भी शामिल थीं, ने निशिकांत दुबे से जवाब मांगने के लिए पोस्टर दिखाते हुए विरोध किया और उन पर तीखा हमला किया। भाजपा का आरोप है कि इस दौरान महिला सांसदों ने पीएम मोदी की कुर्सी घेर ली, जिससे पीएम मोदी अपने भाषण के लिए सदन में नहीं आ सके।

    राहुल गांधी का पीएम मोदी पर हमला
    वहीं, इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज संसद में इसलिए नहीं आए क्योंकि वह “डरे हुए” थे और “सच्चाई का सामना नहीं करना चाहते थे”। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “जैसा मैंने कहा था, पीएम मोदी संसद में नहीं आएंगे क्योंकि वे डरते हैं और सच्चाई का सामना नहीं करना चाहते।” उन्होंने यह भी कहा कि यदि पीएम मोदी सदन में आते, तो वह पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की किताब उन्हें भेंट करते।

    सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित होने के बाद राहुल गांधी ने यह बयान दिया, जबकि भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी जारी रही।

  • ट्रेड डील पर नया खुलासा…. डोभाल ने US से दो टूक कहा था- ट्रंप के दबाव में नहीं आएगा भारत

    ट्रेड डील पर नया खुलासा…. डोभाल ने US से दो टूक कहा था- ट्रंप के दबाव में नहीं आएगा भारत


    नई दिल्ली।
    भारत और अमेरिका (India and America) के बीच रिश्तों में फिर से सुधार की प्रक्रिया शुरू हो गई है। दो दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर सहमति और भारत द्वारा टैरिफ में कमी करने की जानकारी दी। अब यह खुलासा हुआ है कि सितंबर में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (National Security Advisor of India-NSA) अजीत डोभाल (Ajit Doval) ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्क रुबियो को स्पष्ट रूप से समझाते हुए कहा था कि भारत अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उनके अधिकारियों के दबाव में नहीं आएगा।

    भारत और चीन के बीच एससीओ बैठक में पीएम मोदी की मुलाकात के बाद अजीत डोभाल ने अमेरिका यात्रा की थी। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, डोभाल ने इस बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री को एक अहम संदेश दिया – भारत अमेरिका के साथ रिश्तों में तनाव को पीछे छोड़ते हुए फिर से व्यापारिक बातचीत शुरू करना चाहता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अमेरिकी दबाव के सामने नहीं झुकेगा और ट्रंप के कार्यकाल के अंत तक इंतजार करने को तैयार है, जैसा कि भारत ने पहले भी अमेरिकी विरोधी सरकारों का सामना किया था।

    डोभाल ने बैठक में यह भी कहा कि भारत चाहता है कि ट्रंप और उनके सलाहकार भारत की सार्वजनिक आलोचना कम करें, ताकि दोनों देशों के रिश्ते और भी मजबूत हो सकें।


    तनाव घटने के संकेत

    इस बैठक के तुरंत बाद दोनों देशों के बीच तनाव में कमी के संकेत मिलना शुरू हो गए। 16 सितंबर को, ट्रंप ने मोदी को उनके जन्मदिन पर फोन किया और उनकी सराहना की। इसके बाद, दोनों नेताओं ने फोन पर चार बार बातचीत की और व्यापारिक सौदे को लेकर सहमति बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए।

    ट्रंप ने घोषणा की कि दोनों देशों के बीच एक व्यापार समझौता हुआ है, जिसके तहत भारत के सामानों पर टैरिफ घटाकर 18 फीसदी कर दिया जाएगा, जो एशिया के अधिकांश देशों से कम है। इसके अलावा, रूसी तेल खरीदने पर लगाए गए 25 फीसदी टैरिफ को भी हटा दिया गया है। बदले में, भारत ने 500 बिलियन डॉलर का अमेरिकी सामान खरीदने, वेनेजुएला का तेल न खरीदने और अमेरिकी आयात पर टैरिफ को शून्य करने पर सहमति जताई है।

  • निशिकांत दुबे के नेहरू-गांधी परिवार पर विवादित बयान पर भड़का विपक्ष…. संसद में जमकर हुआ हंगामा

    निशिकांत दुबे के नेहरू-गांधी परिवार पर विवादित बयान पर भड़का विपक्ष…. संसद में जमकर हुआ हंगामा


    नई दिल्ली।
    संसद (Parliament) के बजट सत्र (Budget Session) में बुधवार को एक बार फिर हंगामा मच गया, जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे (BJP MP Nishikant Dubey) ने गांधी-नेहरू परिवार (Gandhi-Nehru family) पर विवादास्पद बयान दिया। दुबे ने अपने भाषण के दौरान कुछ किताबें लहराईं और उनके हवाले से नेहरू और कांग्रेस परिवार के खिलाफ आरोप लगाए, जिससे विपक्षी सांसद आगबबूला हो गए। सूत्रों के अनुसार, विपक्षी सांसदों ने इस बयान के खिलाफ लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से शिकायत की है।

    निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “यहां एक किताब पर चर्चा हो रही है, जो आज तक छपी ही नहीं। लेकिन मैं उन किताबों के बारे में बात करना चाहता हूं, जो नेहरू और कांग्रेस परिवार के भ्रष्टाचार, गद्दारी और अय्याशी से भरी पड़ी हैं।” उन्होंने “एडविना और नेहरू” और “मथई” जैसे किताबों का हवाला देते हुए गांधी-नेहरू परिवार के निजी जीवन और उनके कथित संबंधों पर सवाल उठाए। इसके अलावा, दुबे ने सोनिया गांधी पर लिखी किताबों को भी दिखाया और कांग्रेस पर आरोपों की झड़ी लगाई।

    इस दौरान पीठासीन सभापति ने उन्हें किताबों का जिक्र करने से मना किया, लेकिन दुबे ने नियमों की अनदेखी करते हुए किताबें दिखाते रहे। विपक्षी सदस्य इससे नाराज हो गए और सदन में हंगामा करने लगे। कुछ सदस्यों को आसन के सामने कागज उछालते हुए भी देखा गया। हंगामा बढ़ने पर पीठासीन सभापति ने कार्यवाही शाम पांच बजे तक स्थगित कर दी।


    **प्रियंका गांधी का पलटवार:**

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रियंका गांधी ने निशिकांत दुबे पर पलटवार किया। प्रियंका ने कहा, “जब मोदी सरकार सदन को बाधित करना चाहती है, तो निशिकांत दुबे को खड़ा कर देती है। राहुल गांधी जी को एक पब्लिश हो चुकी किताब से उद्धृत नहीं करने दिया जाता, लेकिन निशिकांत दुबे छह किताबें लेकर आकर उन्हें दिखा रहे हैं, उनका माइक बंद नहीं किया जा रहा।”

    प्रियंका ने आगे कहा, “मोदी सरकार चाहती है कि संसद में सिर्फ उन्हीं की बात चले, और जो विपक्षी सांसद हैं, उन्हें बोलने का कोई मौका नहीं दिया जाए। यह लोकतंत्र का अपमान है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार देश का ध्यान भटकाने के लिए बार-बार नेहरू-गांधी परिवार का नाम लेकर विवाद पैदा कर रही है, जबकि असल मुद्दों पर चर्चा नहीं हो रही है। प्रियंका ने कहा, “सरकार चाहती है कि लोग नरवणे जी की किताब से संबंधित बातें न जानें, जबकि जब चीन की सेना हमारे सीमा पर थी, तो सरकार निर्णय लेने में असमर्थ थी।”

  • कांग्रेस सांसद थरूर फोन पर बात करते हुए संसद की सीढ़ियों पर लड़खड़ाकर गिरे… अखिलेश यादव ने संभाला

    कांग्रेस सांसद थरूर फोन पर बात करते हुए संसद की सीढ़ियों पर लड़खड़ाकर गिरे… अखिलेश यादव ने संभाला

    नई दिल्ली। संसद (Parliament) के बजट सत्र (Budget Session) में इन दिनों हंगामा और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस बीच बुधवार को एक दिलचस्प घटना घटी, जिसने सोशल मीडिया पर सुर्खियाँ बटोरीं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Congress MP Shashi Tharoor) संसद भवन की सीढ़ियों पर फोन पर बात करते हुए लड़खड़ा गए और गिरते हुए नजर आए। हालांकि, इस दौरान समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने तुरंत उनकी मदद की और उन्हें सहारा देकर गिरने से बचाया।

    वीडियो में देखा जा सकता है कि शशि थरूर जैसे ही बैलेंस खोते हैं, अखिलेश यादव पास खड़े होते हुए तेजी से उनकी ओर बढ़ते हैं और उन्हें सहारा देते हैं। साथ ही एक महिला सुरक्षा अधिकारी भी तुरंत मदद के लिए पहुंची। अखिलेश ने शशि थरूर को कुछ समय तक सहारा दिया और फिर उन्हें कुछ सीढ़ियाँ नीचे उतारा।

    https://twitter.com/ShashiTharoor/status/2019102516416479508
    इस घटना के बाद शशि थरूर ने ट्विटर (अब एक्स) पर एक शायराना अंदाज में पोस्ट किया, “जिस दिए को, तूफां में जलना होगा, उसे संभल संभल कर चलना होगा। मैं ठीक हूं।” सोशल मीडिया पर इस सजीव और संवेदनशील मदद की काफी सराहना हो रही है, और लोग अखिलेश यादव की सहज शिष्टाचार की तारीफ कर रहे हैं।

    इससे पहले, शशि थरूर ने भाजपा पर निशाना साधते हुए सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाया था। उन्होंने यह आरोप लगाया कि सरकार ने इस मुद्दे पर अतिशयोक्तिपूर्ण प्रतिक्रिया दी, जिसके चलते सदन की कार्यवाही बाधित हुई।

  • अनिल अंबानी ने SC को दिया वचन, बोले- 'ED-CBI जांच के बीच देश नहीं छोड़ूंगा

    अनिल अंबानी ने SC को दिया वचन, बोले- 'ED-CBI जांच के बीच देश नहीं छोड़ूंगा


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को रिलायंस कम्युनिकेशंस (Reliance Communications- RCom) और अनिल धीरभाई अंबानी ग्रुप (Anil Dhirubhai Ambani Group-ADAG) से जुड़े ₹40,000 करोड़ के कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में एक कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया और साथ ही उद्योगपति अनिल अंबानी ( (Anil Ambani) को एक अहम वचन देने को कहा कि वे बिना अनुमति के भारत नहीं छोड़ेंगे।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ई.ए.एस. सरमा के वकील, प्रशांत भूषण ने चिंता व्यक्त की कि धोखाधड़ी के बड़े पैमाने को देखते हुए मुख्य आरोपी, अनिल अंबानी, देश छोड़कर भाग सकते हैं। इस पर अंबानी के वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत को आश्वस्त किया कि “मेरे मुवक्किल का देश छोड़ने का कोई इरादा नहीं है। वे प्रतिदिन अपने कार्यालय जाते हैं और मैं वचन देता हूं कि वे बिना अदालत की अनुमति के विदेश नहीं जाएंगे।”

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अदालत को याद दिलाया कि पहले भी एक वचन दिया गया था, लेकिन वह व्यक्ति अंततः देश से भाग गया था। सरकार ने बताया कि अंबानी के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर पहले से जारी है, ताकि उनके विदेश जाने के प्रयास को रोका जा सके।

    मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों द्वारा की गई देरी पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट 2020 में आई थी, लेकिन CBI ने प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने में 2025 तक का समय लिया।

    अदालत ने जांच एजेंसी से निर्देश दिया कि बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत के हर मामले के लिए अलग-अलग FIR दर्ज की जाए। इसके अलावा, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि बैंक अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए कानूनी अनुमति की आवश्यकता नहीं है और यदि कोई अधिकारी धोखाधड़ी या साजिश में शामिल है, तो उसे तुरंत कार्रवाई का सामना करना चाहिए।


    IBC का दुरुपयोग:

    सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) का इस्तेमाल परिसंपत्तियों को कम मूल्य पर खरीदने के लिए किया जा रहा है। प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि RCom पर ₹47,000 करोड़ का बकाया था, लेकिन उसकी संपत्तियां केवल ₹430 करोड़ में (मुकेश अंबानी की कंपनी द्वारा) खरीदी गईं। अदालत ने इसे IBC का दुरुपयोग करार दिया और कहा कि नीलामी प्रक्रिया पूर्व-नियोजित लगती है।


    ईडी का बयान:

    ईडी ने अदालत को सूचित किया कि अब तक 204 संपत्तियों को कुर्क किया जा चुका है, जिनकी कीमत लगभग ₹12,012 करोड़ है। हाल ही में, रिलायंस ग्रुप के पूर्व निदेशक पुनीत गर्ग को गिरफ्तार किया गया है, जो 7 फरवरी तक हिरासत में रहेंगे। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले की खुद निगरानी करेगा और जांच एजेंसियों को चार सप्ताह के भीतर ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीर मामले में कड़ी कार्रवाई का संकेत दिया और जांच एजेंसियों को शीघ्रता से कार्रवाई करने की हिदायत दी है।

  • PM मोदी 7–8 फरवरी को जाएंगे मलेशिया, रणनीतिक साझेदारी होगी और मजबूत

    PM मोदी 7–8 फरवरी को जाएंगे मलेशिया, रणनीतिक साझेदारी होगी और मजबूत


    नई दिल्‍ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 और 8 फरवरी 2026 को मलेशिया के प्रधानमंत्री दातो सेरी अनवर इब्राहिम के निमंत्रण पर मलेशिया की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। यह यात्रा कई मायनों में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक ओर यह प्रधानमंत्री मोदी की मलेशिया की तीसरी यात्रा होगी, वहीं दूसरी ओर अगस्त 2024 में भारत मलेशिया संबंधों को समग्र रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिए जाने के बाद उनकी यह पहली मलेशिया यात्रा होगी। ऐसे में इस दौरे से दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    विदेश मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के बीच व्यापक द्विपक्षीय वार्ता होगी। इस बातचीत में भारत-मलेशिया संबंधों के सभी अहम पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। दोनों नेता न केवल अब तक हुए सहयोग की समीक्षा करेंगे, बल्कि भविष्य में आपसी हितों के लिए सहयोग की नई रूपरेखा भी तय करेंगे।

    द्विपक्षीय वार्ता के साथ विविध कार्यक्रम

    प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं रहेगी। वे मलेशिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी संवाद करेंगे। मलेशिया में भारतीय प्रवासियों की बड़ी और प्रभावशाली आबादी है, जो दोनों देशों के बीच एक मजबूत सेतु का काम करती है। इसके अलावा प्रधानमंत्री उद्योग और व्यापार जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे, जिससे व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को और बढ़ावा मिलने की संभावना है।

    इस यात्रा के दौरान 10वां भारत-मलेशिया सीईओ फोरम आयोजित किया जाना भी तय है। यह मंच दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट नेताओं को एक साथ लाएगा, जहां वे निवेश के नए अवसरों, व्यापारिक साझेदारियों और आर्थिक सहयोग को लेकर विचार-विमर्श करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फोरम भारत-मलेशिया आर्थिक संबंधों को और मजबूती देने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों की मजबूत नींव

    भारत और मलेशिया के रिश्ते केवल कूटनीतिक या आर्थिक नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे ऐतिहासिक, सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों की गहरी नींव है। सदियों पुराने संपर्कों के चलते दोनों देशों के बीच आपसी समझ और विश्वास का स्तर हमेशा ऊंचा रहा है। मलेशिया में लगभग 29 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो दुनिया में भारतीय प्रवासियों का तीसरा सबसे बड़ा समुदाय है। यह प्रवासी समुदाय दोनों देशों के रिश्तों को सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर और अधिक मजबूत बनाता है।
    भारतीय मूल के लोग मलेशिया की अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, राजनीति और संस्कृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि भारत और मलेशिया के रिश्तों में पीपल-टू-पीपल कॉन्टैक्ट एक केंद्रीय तत्व रहा है।

    बहुआयामी और विस्तारशील संबंध

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत-मलेशिया संबंध बहुआयामी हैं और समय के साथ लगातार विस्तार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की इस आगामी यात्रा के दौरान व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा सहयोग, समुद्री सहयोग, डिजिटल और वित्तीय प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की व्यापक समीक्षा की जाएगी।

    खासतौर पर रक्षा और समुद्री सहयोग के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच साझेदारी को रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत और मलेशिया का सहयोग बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा डिजिटल तकनीक, फिनटेक और स्टार्टअप जैसे उभरते क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं।

    भविष्य की दिशा तय करेगी यात्रा

    प्रधानमंत्री मोदी की यह मलेशिया यात्रा न केवल मौजूदा सहयोग की समीक्षा का अवसर होगी, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए भारत-मलेशिया संबंधों की दिशा और प्राथमिकताओं को भी स्पष्ट करेगी। अगस्त 2024 में संबंधों को समग्र रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिलने के बाद यह यात्रा दोनों देशों के लिए उस साझेदारी को जमीन पर उतारने का एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • राहुल गांधी ने संसद को बनाया बंधक, लोकसभा में BJP सांसद निशिकांत दुबे का तीखा हमला

    राहुल गांधी ने संसद को बनाया बंधक, लोकसभा में BJP सांसद निशिकांत दुबे का तीखा हमला


    नई दिल्‍ली । लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी को लेकर भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने एक बड़ा और तीखा बयान दिया है। संसद के भीतर जारी गतिरोध और हंगामे के बीच निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि बीते कई दिनों से संसद का कामकाज पूरी तरह ठप है और इसके लिए सीधे तौर पर राहुल गांधी जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने संसद को बंधक बना लिया है, जिसकी वजह से देश से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पा रही है।

    निशिकांत दुबे ने लोकसभा में बोलते हुए कहा कि राहुल गांधी ऐसे विषय उठा रहे हैं जिनका न तो कोई ठोस आधार है और न ही कोई स्पष्ट संदर्भ। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने सदन में जिस किताब का हवाला दिया है, वह आज तक प्रकाशित ही नहीं हुई है। भाजपा सांसद के मुताबिक, “जो किताब छपी ही नहीं, उसका संसद में जिक्र करना दर्शाता है कि उनकी बातें बे सिर-पैर की हैं और उनका कोई वास्तविक मतलब नहीं निकलता।”

    छपी ही नहीं किताब, फिर भी संसद में हंगामा

    निशिकांत दुबे ने कहा कि राहुल गांधी का रवैया गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ राहुल गांधी ऐसी किताबों का हवाला दे रहे हैं जो अस्तित्व में ही नहीं हैं, वहीं दूसरी ओर वे खुद ऐसी किताबें लेकर आए हैं जो वास्तव में प्रकाशित हो चुकी हैं, लेकिन भारत में प्रतिबंधित हैं या जिन पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। उनका कहना था कि अगर किताबों के आधार पर ही चर्चा करनी है, तो इन पुस्तकों पर भी बात होनी चाहिए।

    इन विवादित किताबों का किया जिक्र

    BJP सांसद निशिकांत दुबे ने इस दौरान कई चर्चित और विवादास्पद किताबों का नाम लिया। इनमें इंडिया इंडिपेंडेंट, एडवीना एंड नेहरू, द लाइफ ऑफ़ इंदिरा एंड नेहरू, नेहरू ए पॉलिटिकल बायोग्राफी, सीजफायर, द हर्ट ऑफ़ इंडिया नेपाल जैसी किताबें शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने कुछ अन्य पुस्तकों का भी उल्लेख किया, जिनमें रेड साड़ी, बोफोर्स गेट, एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर और इमरजेंसी रिटोल्ड प्रमुख हैं।

    निशिकांत दुबे का कहना था कि इन किताबों में इतिहास, राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई संवेदनशील विषयों का जिक्र है, लेकिन इन पर संसद में कभी विस्तार से चर्चा नहीं की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर राहुल गांधी किताबों के हवाले से सरकार को घेरना चाहते हैं, तो इन पुस्तकों के तथ्यों पर भी खुली बहस होनी चाहिए।

    सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा

    निशिकांत दुबे ने अपने बयान में आर्मी एक्ट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सेना से जुड़े किसी भी विषय पर किताब लिखने से पहले रक्षा मंत्रालय की अनुमति लेना अनिवार्य होता है। उन्होंने पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के बयान का हवाला देते हुए कहा कि “जनरल नरवणे खुद साफ कह चुके हैं कि भारत की एक इंच जमीन भी नहीं गई। इसके बावजूद एक “छोटी सी बात” को लेकर संसद को ठप कर दिया गया है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका कहना था कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर राजनीति करना देशहित में नहीं है। इसी वजह से वे चाहते हैं कि जिन किताबों में सेना, युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संदर्भ हैं, उन पर भी गंभीरता से चर्चा हो।

    सोशल मीडिया पर भी राहुल गांधी पर निशाना

    निशिकांत दुबे ने एक दिन पहले राहुल गांधी को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पूर्व में ट्विटर पर भी एक पोस्ट साझा की थी। इस पोस्ट में उन्होंने राहुल गांधी को संबोधित करते हुए लिखा था कि वे अपने नाना पंडित जवाहरलाल नेहरू के तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल करियप्पा के बारे में दिए गए विचार जरूर पढ़ें। इसके साथ ही उन्होंने जनरल थिमय्या का पत्र, फील्ड मार्शल मानेकशॉ का पत्र और मथाई जी की किताब का भी जिक्र किया।उन्होंने पोस्ट में लिखा कि ये सभी दस्तावेज और किताबें बेहद खतरनाक हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से इन्हें हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी से अपील की कि वे कम से कम राष्ट्रीय सुरक्षा का तो लिहाज करें।

    सियासी माहौल और तेज होता टकराव

    निशिकांत दुबे के इस बयान के बाद संसद के भीतर और बाहर सियासी माहौल और गरमा गया है। एक तरफ BJP राहुल गांधी पर संसद को बाधित करने का आरोप लगा रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष सरकार पर सवाल उठाने की अपनी रणनीति पर अड़ा हुआ है। फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में संसद का गतिरोध कैसे खत्म होता है और क्या इन आरोप-प्रत्यारोप के बीच सदन का कामकाज पटरी पर लौट पाता है या नहीं।

  • भारत–सऊदी सुरक्षा सहयोग को नई धार: NSA डोभाल और सऊदी समकक्ष के बीच हुई अहम चर्चा

    भारत–सऊदी सुरक्षा सहयोग को नई धार: NSA डोभाल और सऊदी समकक्ष के बीच हुई अहम चर्चा


    नई दिल्‍ली । भारत और सऊदी अरब के बीच रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बुधवार को रियाद में अपने सऊदी समकक्ष मूसाएद बिन मोहम्मद अल-ऐबन से मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय बैठक में द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षाआतंकवाद से निपटने और आपसी हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

    रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि अजीत डोभाल और सऊदी अरब के विदेश राज्य मंत्री, कैबिनेट सदस्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. मूसाएद बिन मोहम्मद अल-ऐबन के बीच हुई यह बैठक बेहद सकारात्मक और उपयोगी” रही। पोस्ट के अनुसार, बातचीत में भारत सऊदी संबंधों के विभिन्न आयामों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

    आधिकारिक दौरे पर रियाद पहुंचे डोभाल

    अजीत डोभाल मंगलवार को एक आधिकारिक दौरे पर सऊदी अरब की राजधानी रियाद पहुंचे थे। किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उनका स्वागत सऊदी अरब में भारत के राजदूत सुहेल एजाज खान और सऊदी विदेश मंत्रालय में राजनीतिक मामलों के उप मंत्री सऊद अल-साती ने किया। डोभाल की यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब भारत और सऊदी अरब के बीच सुरक्षा और काउंटर टेररिज्म सहयोग लगातार गहराता जा रहा है।

    रणनीतिक साझेदारी के तहत सुरक्षा सहयोग पर जोर

    गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ही भारत और सऊदी अरब ने रियाद में स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप काउंसिल के तहत पॉलिटिकल, काउंसलर और सिक्योरिटी कोऑपरेशन कमेटी के अंतर्गत सिक्योरिटी वर्किंग ग्रुप की तीसरी बैठक आयोजित की थी। इस बैठक में दोनों देशों के बीच चल रहे द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग की व्यापक समीक्षा की गई थी और भविष्य की दिशा तय करने पर सहमति बनी थी।

    आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ साझा रणनीति

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने आतंकवाद का मुकाबला करने से जुड़ी मौजूदा और उभरती चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श किया। इसमें उग्रवाद और कट्टरपंथ से निपटना, आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकना, आतंकवादी उद्देश्यों के लिए टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग को नियंत्रित करना और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध व आतंकवाद के बीच बढ़ते संबंधों जैसे मुद्दे शामिल रहे।

    ने बताया कि भारत और सऊदी अरब के अधिकारियों ने द्विपक्षीय कानूनी और न्यायिक सहयोग को और मजबूत करने तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा की। इसका उद्देश्य आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

    आतंकवाद की कड़ी निंदा, हालिया हमलों का उल्लेख

    विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की कड़ी निंदा दोहराई। इसमें सीमा पार आतंकवाद के साथ-साथ भारत में हुए हालिया आतंकवादी हमलों का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया। बयान में 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में निर्दोष नागरिकों पर हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले और 10 नवंबर, 2025 को नई दिल्ली में लाल किले के पास हुई आतंकवादी घटना को गंभीर चिंता का विषय बताया गया।

    उच्चस्तरीय अधिकारियों की भागीदारी

    सिक्योरिटी वर्किंग ग्रुप की इस अहम बैठक की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव काउंटर टेररिज्म विनोद बहादे और सऊदी अरब की ओर से गृह मंत्रालय में लीगल अफेयर्स एवं इंटरनेशनल कोऑपरेशन के डायरेक्टर जनरल अहमद अल-ईसा ने की। बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ सुरक्षा और कूटनीतिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

    अगली बैठक भारत में होगी

    MEA के अनुसार, सिक्योरिटी वर्किंग ग्रुप की अगली बैठक आपसी सहमति से तय की गई तारीख पर भारत में आयोजित की जाएगी। यह बैठक भारत–सऊदी अरब के बीच बढ़ते रणनीतिक विश्वास और सुरक्षा साझेदारी को और मजबूती देने में अहम भूमिका निभाएगी।