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  • CJP के दो पदाधिकारियों का पता नहीं चलने का दावा, दिल्ली पुलिस पर अवैध हिरासत के आरोप

    CJP के दो पदाधिकारियों का पता नहीं चलने का दावा, दिल्ली पुलिस पर अवैध हिरासत के आरोप


    नई दिल्ली।
    कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दिल्ली पुलिस पर अपने दो पदाधिकारियों को हिरासत में लेने के बाद उनके ठिकाने की जानकारी नहीं देने का आरोप लगाया है। पार्टी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह के मुताबिक, राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधीर सांगवान और सह सचिव बालकृष्णन शुक्ला को रविवार शाम कनॉट प्लेस से हिरासत में लिया गया था। पार्टी का दावा है कि इसके बाद से दोनों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। हालांकि, इस मामले में पुलिस का पक्ष इन आरोपों से अलग है।

    इस बीच, सीजेपी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति के लिए सोमवार सुबह दिल्ली पुलिस से संपर्क किया। पार्टी नेताओं के मुताबिक, पुलिस ने प्रदर्शन की तारीख बताने के लिए 24 घंटे का समय दिया है। इससे पहले शनिवार को हुए प्रदर्शन के दौरान पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया था।

    रत्ना सिंह ने पुलिस से मांगी जानकारी

    सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने रविवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दोनों पदाधिकारियों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने लिखा कि राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधीर सांगवान और सह सचिव बालकृष्णन शुक्ला को शाम के समय कनॉट प्लेस से हिरासत में लिया गया था, लेकिन उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।

    रत्ना सिंह ने सवाल उठाया कि दोनों को हिरासत में रखने की वजह और उनके ठिकाने की जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है। उन्होंने दिल्ली पुलिस से तत्काल यह बताने की मांग की कि दोनों को कहां रखा गया है और उनके मामले में सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित किया जाए।

    उन्होंने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, न कि कानून से ऊपर उठकर काम करना।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के उल्लंघन का आरोप

    पार्टी के शीर्ष नेताओं में शामिल सौरभ दास ने भी दोनों पदाधिकारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान दोनों को हिरासत में लिया गया और उनके ठिकाने का पता लगाने की कोशिशें सफल नहीं हुईं। दास के अनुसार, बालकृष्णन के भाई को भी उनकी सुरक्षा की चिंता सता रही है।

    दास ने आरोप लगाया कि दोनों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया है। उनका दावा है कि उन्हें न तो परिवार के सदस्यों से बात करने दी जा रही है और न ही अपनी पसंद का वकील उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताते हुए कहा कि यदि दोनों के ठिकाने की जानकारी तत्काल नहीं दी गई, तो पार्टी के वकील अदालत में अवमानना याचिका दाखिल करेंगे।

    ये आरोप पार्टी की ओर से लगाए गए हैं। इनके संबंध में पुलिस का विस्तृत पक्ष इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए आवश्यक है।

    जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति का इंतजार

    सीजेपी नेता आशुतोष रांका ने सोमवार को कहा कि पार्टी दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की तारीख पूछ रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पुलिस जल्द तारीख तय करेगी। रांका के मुताबिक, अनुमति मिलने पर पार्टी 24 घंटे के भीतर निर्धारित स्थल पर प्रदर्शन के लिए जुटेगी।

    उन्होंने राजधानी में पुलिस की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि दिल्ली को जिस तरह बंद किया गया है, वैसा पहले कभी नहीं देखा गया। उनके अनुसार, इससे लोगों और कारोबारियों को परेशानी हो रही है, जबकि त्योहारों का समय भी नजदीक है। उन्होंने सवाल किया कि प्रदर्शन के लिए कोई निर्धारित स्थान क्यों नहीं दिया जा रहा है।

    ‘अब पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा’

    सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शन के लिए जगह नहीं दी गई, तो पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा।

    दीपके ने आशंका जताई कि मौजूदा हालात जारी रहने पर एक दिन ऐसा भी आ सकता है, जब देश से लोकतंत्र को ही हटा दिया जाए। वहीं, सौरभ दास ने कहा कि सरकार का जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में हटाने का फैसला उन्हें मंजूर नहीं है और पार्टी इसे मनमाना मानती है।

    दादी के निधन के बाद दीपके की हिरासत पर भी विवाद

    शनिवार को दिल्ली पहुंचने के बाद अभिजीत दीपके को भी हिरासत में लिया गया था। कुछ समय बाद उन्हें छोड़ दिया गया। दादी के निधन की खबर मिलने के बाद वह अपने गृह नगर छत्रपति संभाजीनगर रवाना हो गए थे।

    दीपके ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने उनकी दादी की मौत की सूचना मिलने के बाद भी उन्हें रिश्तेदार को फोन करने के लिए मोबाइल उपलब्ध नहीं कराया। उन्होंने पुलिस पर असंवेदनशील रवैया अपनाने का आरोप लगाया था।

    दिल्ली पुलिस ने आरोपों से किया इनकार

    दिल्ली पुलिस ने दीपके के आरोपों से अलग पक्ष रखा है। पुलिस की जनसंपर्क अधिकारी डीसीपी नेहा यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वीडियो फुटेज दिखाते हुए कहा कि दीपके को उनकी दादी के निधन और अंतिम संस्कार के समय की जानकारी समय पर और संवेदनशीलता के साथ दी गई थी।

    पुलिस के अनुसार, दीपके को परिवार से फोन पर बात करने का विकल्प दिया गया था। इसके अलावा अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए गृह नगर जाने हेतु प्रशासनिक और यात्रा संबंधी सहायता की पेशकश भी की गई थी। पुलिस का दावा है कि दीपके ने इस पेशकश को स्वीकार नहीं किया।

    इस तरह, सीजेपी जहां अपने दो पदाधिकारियों के ठिकाने और हिरासत की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं दीपके की हिरासत के मामले में दिल्ली पुलिस ने पार्टी के आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा है।

  • कन्हैया कुमार कहां हैं? राहुल गांधी के साथ मार्च में दिखीं नेहा बोरा, छात्र संगठनों को मिली अहमियत

    कन्हैया कुमार कहां हैं? राहुल गांधी के साथ मार्च में दिखीं नेहा बोरा, छात्र संगठनों को मिली अहमियत


    नई दिल्ली।
    कथित वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस और इंडिया गठबंधन का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अपील के बाद विपक्षी दलों के साथ छात्र और नागरिक संगठन भी सड़कों पर उतर रहे हैं। इस दौरान अखिल भारतीय छात्र संघ (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा प्रदर्शन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरी हैं। वहीं, कभी छात्र आंदोलनों के चर्चित चेहरों में शामिल रहे कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    हालांकि, कन्हैया कुमार सोमवार को बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च में शामिल हुए थे, लेकिन वह कैमरों की नजर से दूर रहे। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, कांग्रेस की छात्र इकाई भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के प्रभारी होने के नाते कन्हैया की भूमिका अब बदल गई है। ऐसे में उनकी व्यक्तिगत मौजूदगी से ज्यादा संगठन की भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है।


    राहुल गांधी के साथ मार्च में दिखीं नेहा बोरा

    कथित वोट चोरी के खिलाफ चल रहे आंदोलन में नेहा बोरा और उनके साथियों की सक्रियता चर्चा में है। पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन के दौरान भी नेहा युवाओं की आवाज उठाती रही हैं। अब वह मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे पर विपक्ष के प्रदर्शन में सक्रिय दिखाई दे रही हैं।

    इंडिया गठबंधन के बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च में नेहा बोरा छात्र संगठनों के साथ शामिल हुईं। मार्च के दौरान कई मौकों पर राहुल गांधी एक हाथ से प्रियंका गांधी और दूसरे हाथ से नेहा बोरा का हाथ थामे नजर आए। इस दौरान प्रियंका गांधी को नेहा के नारों में आवाज मिलाते हुए भी देखा गया। विपक्ष के प्रमुख नेताओं के लिए तैयार किए गए ट्रक पर भी नेहा मौजूद थीं।

    इस भागीदारी ने छात्र संगठनों और नागरिक समूहों को विपक्ष के आंदोलन में मिल रही अहमियत को रेखांकित किया है।

    कहां हैं कन्हैया कुमार?

    कन्हैया कुमार भी बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च में शामिल थे, लेकिन वह प्रमुख नेताओं की तरह कैमरों के सामने दिखाई नहीं दिए। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, कन्हैया कुमार को एनएसयूआई की जिम्मेदारी दी गई है। इसलिए उनकी भूमिका केवल किसी प्रदर्शन में व्यक्तिगत तौर पर शामिल होने तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्र संगठन की भागीदारी सुनिश्चित करना भी है।

    कथित वोट चोरी के खिलाफ चल रहे आंदोलन में एनएसयूआई लगातार सक्रिय है। पार्टी के भीतर यह माना जा रहा है कि संगठन की मौजूदगी और भागीदारी को मजबूत करना भी इस राजनीतिक अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    छात्र और नागरिक संगठनों पर जोर

    राजनीतिक रणनीतिकारों के अनुसार, पेपर लीक के खिलाफ युवाओं का आंदोलन हो या मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा, नेहा बोरा इन मामलों में सक्रिय रही हैं। यही वजह है कि राहुल गांधी ने इंडिया गठबंधन के मार्च में छात्र संगठनों और नागरिक समूहों से जुड़े लोगों को प्रमुखता दी।

    इस रणनीति के पीछे यह संदेश देने की कोशिश दिखाई देती है कि मतदाता सूची से जुड़ा मुद्दा केवल कांग्रेस या किसी एक विपक्षी नेता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे व्यापक जनभागीदारी के साथ उठाया जा रहा है। विपक्ष का तर्क है कि अपने अधिकारों से जुड़े सवालों पर विभिन्न संगठनों को मिलकर आवाज उठानी चाहिए।


    वोटर लिस्ट के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा विपक्ष

    मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्षी नेताओं ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका दायर करने वालों में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव समेत 10 दलों के नेता शामिल हैं।

    सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, याचिका सोमवार शाम दाखिल की गई। इसमें विपक्ष की ओर से कुल 10 राहतों की मांग की गई है।

    याचिका दायर करने वाले नेताओं में मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय, अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले, शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माजी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव एम. ए. बेबी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेता ई. टी. मोहम्मद बशीर शामिल हैं।

    याचिका में मिलीं 14 खामियां

    सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में 14 खामियां बताई गई हैं। अदालत की वेबसाइट पर इनका उल्लेख करते हुए याचिकाकर्ताओं को कमियां दूर करने के लिए कहा गया है।

    प्रमुख खामियों में याचिका दाखिल करने के शुल्क का कम भुगतान किया जाना शामिल है। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं से 220 रुपये का अतिरिक्त शुल्क जमा करने को कहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, खामियों को दूर करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है।

    इस बीच, कथित वोट चोरी के खिलाफ विपक्ष का राजनीतिक आंदोलन और न्यायिक प्रक्रिया दोनों आगे बढ़ रहे हैं। प्रदर्शन में छात्र संगठनों की सक्रिय भागीदारी और कन्हैया कुमार की संगठनात्मक भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • राम मंदिर में अयोध्यावासियों के लिए अलग प्रवेश द्वार की तैयारी, आधार कार्ड से मिल सकता है सीधे दर्शन का लाभ

    राम मंदिर में अयोध्यावासियों के लिए अलग प्रवेश द्वार की तैयारी, आधार कार्ड से मिल सकता है सीधे दर्शन का लाभ

    अयोध्या। राम मंदिर में स्थानीय निवासियों को रामलला के सीधे दर्शन की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना पर जल्द मंथन होगा। इसके तहत अयोध्यावासियों को आधार कार्ड के माध्यम से प्रवेश देने और संत-महंतों व गृहस्थों के लिए अलग प्रवेश व्यवस्था बनाने पर विचार किया जा रहा है। इस संबंध में पुलिस प्रशासन और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव ने 15 अक्टूबर को धार्मिक न्यास समिति की बैठक बुलाई है। पहली बार भौतिक रूप से आयोजित होने वाली इस बैठक में अयोध्या के संत-महंतों और गृहस्थों को रामलला के दर्शन सुलभ कराने के विभिन्न विकल्पों पर चर्चा होगी। बैठक में तैयार रूपरेखा को दो दिसंबर को ट्रस्ट की कार्यकारिणी के समक्ष प्रस्ताव के रूप में रखा जाएगा। इसके बाद ट्रस्ट की सहमति और सुझावों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

    पुलिस और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट अहम

    स्थानीय निवासियों के लिए अलग प्रवेश व्यवस्था लागू करने से पहले पुलिस प्रशासन और खुफिया एजेंसियों की सकारात्मक रिपोर्ट जरूरी मानी जा रही है। 15 अक्टूबर को होने वाली बैठक में यह भी स्पष्ट होने की संभावना है कि संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट ट्रस्ट को मिली है या नहीं।

    यदि रिपोर्ट अनुकूल रही, तो स्थानीय लोगों के लिए सीधे दर्शन की सुविधा देने की योजना आगे बढ़ सकती है। इसके साथ ही संत-महंतों और गृहस्थों के लिए निर्धारित प्रवेश द्वार बनाने पर भी निर्णय लिया जा सकता है।

    यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिलती है, तो स्थानीय दर्शनार्थियों के लिए पहले से लागू व्यवस्था जारी रह सकती है। इसके तहत अयोध्या के निवासियों को आधार कार्ड के माध्यम से छह महीने की अवधि वाला नियमित दर्शन पास उपलब्ध कराया जाता है।

    अलग-अलग लेन बनाने की मांग

    राम मंदिर में स्थानीय दर्शनार्थियों के लिए अलग प्रवेश लेन बनाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जा रहा है। स्थानीय संत-महंतों का कहना है कि अलग लेन की व्यवस्था नहीं होने से दर्शन के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या के समाधान के लिए स्थानीय निवासियों, संत-महंतों और गृहस्थों के लिए अलग-अलग प्रवेश व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।

    धार्मिक न्यास समिति की बैठक में इन समस्याओं और संभावित समाधानों पर विचार किया जाएगा। बैठक में बनने वाली रूपरेखा के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।

    15 अक्टूबर से निर्माण समिति की तीन दिवसीय बैठक

    राम मंदिर की निर्माण समिति की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक भी 15 अक्टूबर से शुरू होगी। निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अपने सहयोगियों के साथ अयोध्या पहुंचेंगे। संभावना जताई जा रही है कि धार्मिक न्यास समिति की बैठक में उन्हें भी आमंत्रित किया जा सकता है। स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश व्यवस्था से जुड़े विषय पर उनका सुझाव भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

    निर्माण समिति की बैठक में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव भी पहली बार हिस्सा लेंगे। इस दौरान निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के साथ अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय के निर्माण कार्यों का भी अवलोकन किया जाएगा।

    अब 15 अक्टूबर की बैठकों में स्थानीय निवासियों के लिए दर्शन व्यवस्था और मंदिर निर्माण से जुड़े विषयों पर होने वाली चर्चा के बाद आगे की तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • दुर्गा पूजा के बीच सिलीगुड़ी में लगे पोस्टर, मांस और बिरयानी हिंदू दुकानदारों से खरीदने की अपील पर विवाद

    दुर्गा पूजा के बीच सिलीगुड़ी में लगे पोस्टर, मांस और बिरयानी हिंदू दुकानदारों से खरीदने की अपील पर विवाद


    नई दिल्ली:
    पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में दुर्गा पूजा के बीच मांस, बिरयानी और पूजा से जुड़ी सामग्री हिंदू दुकानदारों से खरीदने की अपील वाले पोस्टर लगाए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। शहर के कई इलाकों में दिखाई दिए इन पोस्टरों में लोगों से कहा गया है कि बिरयानी खाने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन इसे हिंदू दुकानदारों से ही खरीदा जाए। इसी तरह मांस और पूजा की सामग्री भी हिंदू व्यापारियों से खरीदने की अपील की गई है। इन संदेशों ने त्योहार के दौरान धार्मिक पहचान, कारोबार और सामाजिक सौहार्द को लेकर बहस तेज कर दी है।

    ये पोस्टर सिलीगुड़ी के भारत नगर सहित कई स्थानों पर लगाए गए हैं। कुछ पोस्टर तरुण तीर्थ क्लब के दुर्गा पूजा आयोजन स्थल के आसपास की दीवारों पर भी दिखाई दिए। इन संदेशों में लोगों से हिंदू व्यापारियों का समर्थन करने और समुदाय के कारोबार को बढ़ावा देने की अपील की गई है। पोस्टर लगाने की जिम्मेदारी हिंदू जागरण मंच ने ली है। संगठन का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य हिंदुओं में एकता की भावना को मजबूत करना और त्योहार के दौरान हिंदू दुकानदारों को आर्थिक लाभ पहुंचाना है। संगठन के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि ये संदेश किसी तरह का आदेश नहीं, बल्कि लोगों से की गई अपील हैं।

    हिंदू जागरण मंच के प्रतिनिधि अभिषेक दास के अनुसार, पोस्टर केवल भारत नगर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शहर के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों के आसपास भी लगाए गए हैं। संगठन इन संदेशों के जरिए हिंदू एकता का विचार सामने रखना चाहता है। मंच से जुड़े लोगों का तर्क है कि दुर्गा पूजा के दौरान बड़ी संख्या में लोग खरीदारी करते हैं और इस आर्थिक गतिविधि का लाभ हिंदू व्यापारियों को भी मिलना चाहिए। पोस्टरों में मांस और बिरयानी की दुकानों के अलावा पूजा सामग्री बेचने वाले कारोबारियों का भी उल्लेख किया गया है। इस तरह धार्मिक पहचान को खरीदारी के विकल्प से जोड़ने की कोशिश की गई है।

    हालांकि, इस अभियान को लेकर राजनीतिक विरोध भी सामने आया है। सिलीगुड़ी के पूर्व महापौर और वामपंथी नेता अशोक भट्टाचार्य ने पोस्टरों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इस तरह के संदेश समाज में धर्म के आधार पर विभाजन को बढ़ावा दे सकते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े संगठनों पर धार्मिक पहचान के आधार पर लोगों के बीच दूरी पैदा करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश में इस प्रकार के अभियान पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। विरोध करने वाले नेताओं का कहना है कि दुर्गा पूजा बंगाल की सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इस दौरान सामाजिक सद्भाव बनाए रखना जरूरी है।

    इस विवाद के बीच पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री और सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है कि उनके आवास के पास पूजा स्थल के आसपास पोस्टर किसने लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पोस्टर लगाने वाले ही उनके उद्देश्य के बारे में बता सकते हैं। इस बयान के बाद भी पोस्टर अभियान को लेकर चर्चा जारी है। एक ओर संगठन इसे हिंदू व्यापारियों को प्रोत्साहित करने और समुदाय के भीतर एकजुटता बढ़ाने का प्रयास बता रहा है, वहीं आलोचक इसे धार्मिक पहचान के आधार पर खरीदारी को प्रभावित करने वाला कदम मान रहे हैं। दुर्गा पूजा के दौरान सामने आया यह मामला अब व्यापारिक हितों, व्यक्तिगत पसंद और बंगाल की सामाजिक परंपराओं से जुड़ी बहस का विषय बन गया है।

  • दिल्ली में बारिश से मौसम हुआ सुहाना, आज 23 राज्यों में अलर्ट…. उत्तर भारत में ठंड की दस्तक

    दिल्ली में बारिश से मौसम हुआ सुहाना, आज 23 राज्यों में अलर्ट…. उत्तर भारत में ठंड की दस्तक


    नई दिल्ली।
    गर्मी से परेशान लोगों को अब धीरे-धीरे राहत मिलने लगी है. कहीं बारिश (Rain) ने मौसम सुहाना (Pleasant Weather) कर दिया है, तो कहीं सुबह और रात की हवा में ठंडक महसूस होने लगी है. दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में रातभर हुई बारिश के बाद मंगलवार की सुबह गुलाबी ठंड के एहसास के साथ हुई. उत्तर प्रदेश से लेकर पंजाब, हरियाणा और राजस्थान तक मौसम का मिजाज बदला हुआ है. पहाड़ी राज्यों में भी बारिश का असर देखने को मिल रहा है।

    ऐसे में लोगों को अब एसी की ठंडक से ज्यादा मौसम की प्राकृतिक ठंडक राहत दे रही है. आने वाले दिनों में सुबह-शाम की ठंडक बढ़ी, तो पंखों की रफ्तार कम करने और रात में गर्म चादर या रजाई निकालने की जरूरत पड़ सकती है. हालांकि, दिन में धूप निकलने पर गर्मी का असर अभी बना रह सकता है।


    23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बारिश की संभावना

    मौसम विभाग के 13 अक्टूबर के पूर्वानुमान के मुताबिक, देश के 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बारिश हो सकती है. अंडमान-निकोबार, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भारी बारिश की संभावना जताई गई है. वहीं, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और लक्षद्वीप में मध्यम बारिश के आसार हैं. इसके अलावा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, बिहार, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और कर्नाटक में हल्की बारिश हो सकती है. अलग-अलग क्षेत्रों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की भी आशंका है।

    दिल्ली-एनसीआर में रविवार रात से ही बादल छाए हुए थे. इसके बाद तेज हवाओं और बारिश ने मौसम का रुख बदल दिया. राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के इलाकों में मंगलवार रात और सुबह भी बारिश का असर बना रहा. तापमान में गिरावट के चलते सुबह घर से निकलने वाले लोगों को ठंड महसूस हुई और उन्हें हल्के गर्म कपड़े पहनने पड़े. मौसम में आए इस बदलाव का असर अब रोजमर्रा की दिनचर्या पर भी दिखने लगा है. दिन में गर्मी से राहत मिलने के साथ सुबह और रात के समय ठंडक बढ़ रही है।


    दिल्ली में आज कैसा रहेगा मौसम?

    मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, दिल्ली और एनसीआर के कई हिस्सों में 13 अक्टूबर को भी बारिश और गरज-चमक की संभावना है. लगातार बारिश के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि, यह राहत पूरे दिन एक जैसी बनी रहेगी, इसकी संभावना नहीं है. बादलों की आवाजाही और धूप निकलने के साथ तापमान में उतार-चढ़ाव हो सकता है. आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस के आसपास और न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है. यानी दिन में अभी गर्मी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन सुबह और रात के समय ठंडक रह सकती है।


    यूपी से राजस्थान तक बदला मौसम

    उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले दो दिनों के दौरान हुई बारिश से मौसम में बदलाव आया है. पश्चिमी यूपी के कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं के कारण ठंडक बढ़ी है. बुलंदशहर समेत कई इलाकों में सुबह हुई रिमझिम बारिश ने लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत दी. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, पश्चिमी यूपी में 16 अक्टूबर तक कहीं-कहीं बारिश हो सकती है. अमरोहा, बागपत, बिजनौर, बुलंदशहर, गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ और संभल समेत कई इलाकों में बारिश की संभावना है।

    पूर्वी यूपी में 15 और 16 अक्टूबर को गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने के आसार हैं. अगले कुछ दिनों में तापमान में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. ऐसे में सुबह और शाम के समय मौसम में ठंडक महसूस हो सकती है. राजस्थान में भी नए वेदर सिस्टम के असर से बारिश दर्ज की गई है. मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर-पश्चिमी राजस्थान और राज्य के उत्तरी हिस्सों में अगले तीन से चार दिनों तक कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. 13 और 14 अक्टूबर को बीकानेर संभाग और शेखावाटी क्षेत्र में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बारिश होने की संभावना है।


    पंजाब, हरियाणा, पहाड़ों में मौसम सक्रिय

    उत्तर भारत के मैदानी इलाकों के साथ पहाड़ी राज्यों में भी मौसम बदला हुआ है. पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में बारिश की संभावना है, जबकि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी मौसम सक्रिय बना रह सकता है. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की विदाई के बाद एक्टिव हुए नए वेदर सिस्टम के असर से उत्तर भारत के कई इलाकों में बारिश और तेज हवाएं देखने को मिली हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के कारण तापमान में गिरावट महसूस हो सकती है. हालांकि, अलग-अलग जिलों में मौसम का असर अलग रहेगा. ऐसे में पहाड़ों की यात्रा पर जाने वाले लोगों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और सड़क की स्थिति की जानकारी लेकर निकलना चाहिए।


    दक्षिण भारत में भी बारिश के बने आसार

    बारिश का असर सिर्फ उत्तर भारत तक सीमित नहीं है. तमिलनाडु के कई जिलों में भी गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना है. मौसम विभाग के मुताबिक, नीलगिरि, कोयंबटूर, इरोड, कन्याकुमारी, तिरुनेलवेली, थूथुकुडी, तेनकासी, मदुरै, शिवगंगा, सलेम और तिरुप्पुर में बारिश हो सकती है. पुडुचेरी और कराईकल में भी कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ हल्की बारिश के आसार हैं. दक्षिण भारत में बारिश का यह दौर स्थानीय मौसम परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग इलाकों में असर दिखा सकता है।

  • Protest: बैटमैन के अवतार में दिखे राहुल गांधी, खरगे ने भी मास्क पहनकर दिया पोज

    Protest: बैटमैन के अवतार में दिखे राहुल गांधी, खरगे ने भी मास्क पहनकर दिया पोज


    नई दिल्ली।
    दिल्ली (Delhi) में चुनाव आयोग (Election Commission) के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन के दौरान सोमवार को एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) बैटमैन (Batman) के मास्क के साथ नजर आए, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (President Mallikarjun Kharge) ने भी बैटमैन वाला मास्क पहनकर पोज दिया। विपक्ष का यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के तहत सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाला गया था। यह पूरा मामला मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ा है।


    राहुल गांधी की बैटमैन वाली तस्वीर हुई चर्चा में

    राहुल गांधी की बैटमैन मास्क के साथ तस्वीर ने लोगों का ध्यान खींचा। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने भी इस तस्वीर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी सोमवार को विरोध मार्च के दौरान बैटमैन के मास्क के साथ पोज देते नजर आए। राजनीतिक रूप से अहम इस प्रदर्शन के बीच दोनों नेताओं का यह अंदाज चर्चा का विषय बना।


    जब राहुल गांधी से पूछा गया था- क्या आप बैटमैन हैं?

    बैटमैन के साथ राहुल गांधी का यह जुड़ाव पहले भी चर्चा में आ चुका है। इससे पहले इंस्टाग्राम पर आयोजित ‘आस्क मी एनीथिंग’ सत्र के दौरान एक यूजर ने उनसे पूछा था कि क्या वह बैटमैन हैं? इस सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने मजाकिया अंदाज में कहा था, “बस इतना कह सकते हैं कि किसी ने मुझे और बैटमैन को कभी एक ही कमरे में साथ नहीं देखा है।” अब विपक्ष के मार्च के दौरान बैटमैन मास्क के साथ उनकी तस्वीर सामने आने से यह पुराना जवाब एक बार फिर प्रासंगिक हो गया।


    SIR के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा INDIA गठबंधन

    बैटमैन मास्क के बीच इस प्रदर्शन की भी खूब चर्चा है। राहुल गांधी ने INDIA गठबंधन के 10 अन्य नेताओं के साथ भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। यह याचिका विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों पर दाखिल की गई है। इस याचिका पर मंगलवार यानी आज सुनवाई होने की संभावना है।


    याचिका दाखिल करने वाले नेताओं में शामिल हैं:

    राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष
    मल्लिकार्जुन खरगे
    तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय
    समाजवादी पार्टी के प्रमुख और सांसद
    अखिलेश यादव
    राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव
    शिवसेना
    (UBT) के सांसद
    संजय राउत
    माकपा महासचिव एमए बेबी
    भाकपा महासचिव डी. राजा
    झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माझी
    एनसीपी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले
    इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के सांसद ईटी मोहम्मद बशीर


    दिल्ली में जारी है विरोध प्रदर्शन

    दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी बीच सोमवार को दिल्ली पुलिस के एक सर्कुलर के अनुसार, जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया है।

    यह घटनाक्रम जून और जुलाई में हुए CJP के प्रदर्शनों के बाद सामने आया है। उस दौरान संगठन ने कथित पेपर लीक के मुद्दे पर तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।

  • राष्ट्रपति ने उत्तराखंड समेत 6 राज्यों में की नए राज्यपालों की नियुक्ति

    राष्ट्रपति ने उत्तराखंड समेत 6 राज्यों में की नए राज्यपालों की नियुक्ति


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रपति दौपदी मुर्मु (President Droupadi Murmu) ने सोमवार को 6 राज्यों के राज्यपालों (Governors 6 states) की नियुक्ति की घोषणा की। राष्ट्रपति भवन (President’s House) की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, ओम प्रकाश माथुर को केरलम, सुधा यादव को कर्नाटक, ब्रज मोहन राम को ओडिशा, दुष्यंत गौतम को सिक्किम, राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु और डॉ. ढाल सिंह (Dr. Dhal Singh) को उत्तराखंड के राज्यपाल के तौर पर नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों से जुड़े आदेश संबंधित राज्यपालों के अपने-अपने पदों का कार्यभार संभालने की तारीख से प्रभावी होंगे।


    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यपालों की निम्नलिखित नियुक्तियां कीं

    सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर को केरल का राज्यपाल नियुक्त किया गया। केरलम के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया गया। ब्रज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया। डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया। डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया। दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया। आर्लेकर को तमिलनाडु का पूर्णकालिक राज्यपाल बनाया गया।

    केरलम से स्थानांतरित किए गए राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर मार्च से ही तमिलनाडु के राज्यपाल के कार्यों का निर्वहन कर रहे थे। उस समय आरएन रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। ताजा आदेश के बाद आर्लेकर तमिलनाडु के नियमित राज्यपाल होंगे। गोवा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष आर्लेकर हिमाचल प्रदेश और बिहार के राज्यपाल के रूप में भी काम कर चुके हैं।

    ओम प्रकाश माथुर उनकी जगह केरलम के राज्यपाल का पद संभालेंगे। भाजपा के वरिष्ठ नेता और राजस्थान से पूर्व राज्यसभा सांसद माथुर ने जुलाई 2024 में सिक्किम के राज्यपाल का कार्यभार संभाला था।


    चार राज्यों को मिले नए राज्यपाल

    ब्रज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। पलामू से लोकसभा के पूर्व सांसद राम हरि बाबू कंभमपति की जगह लेंगे। कंभमपति ने जनवरी 2025 में ओडिशा के राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। सुधा यादव कर्नाटक की नई राज्यपाल होंगी। महेंद्रगढ़ से भाजपा की पूर्व सांसद और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की पूर्व सदस्य यादव, थावरचंद गहलोत की जगह लेंगी।

    मध्य प्रदेश के बालाघाट से लोकसभा के पूर्व सांसद ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह की जगह लेंगे। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व राज्यसभा सांसद दुष्यंत गौतम सिक्किम के नए राज्यपाल होंगे। वह ओम प्रकाश माथुर का स्थान लेंगे। राष्ट्रपति भवन की विज्ञप्ति में हरि बाबू कंभमपति, थावरचंद गहलोत और गुरमीत सिंह के लिए किसी नई जिम्मेदारी की घोषणा नहीं की गई है।

  • डिजिटल व्यवस्था की राह में साइबर ठगी बनी बाधा… 72% भारतीयों ने बनाई ऑनलाइन दुनिया से दूरी

    डिजिटल व्यवस्था की राह में साइबर ठगी बनी बाधा… 72% भारतीयों ने बनाई ऑनलाइन दुनिया से दूरी


    नई दिल्ली।
    देश जब एआई (AI) और भविष्य के 6जी नेटवर्क में दुनिया का नेतृत्व करने का महत्वाकांक्षी विजन लेकर आगे बढ़ रहा है, तब साइबर धोखाधड़ी (Cyber Fraud) और ऑनलाइन स्कैम्स (Online Scams) की बाढ़ भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था (Digital Economy) की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बनकर उभर रही है। वैश्विक दूरसंचार संस्था जीएसएमए के एक ताजा सर्वेक्षण के अनुसार, साइबर ठगी के डर से देश के लगभग तीन-चौथाई (70 से 72 फीसदी) नागरिक ऑनलाइन गतिविधियों से कतरा रहे हैं और अपने डिजिटल व्यवहार को सीमित कर रहे हैं।

    नई दिल्ली में आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) के इतर जीएसएमए के एशिया-पैसिफिक प्रमुख जूलियन गोरमैन ने आगाह किया कि यह भरोसे का संकट देश के डिजिटल विकास की गति को कुंद कर सकता है। जीएसएमए के सर्वे के मुताबिक, पिछले 12 महीनों में भारत में लगभग हर आठ में से एक नागरिक किसी न किसी ऑनलाइन स्कैम का शिकार बना। शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अधिकांश पीड़ितों को कोई संतोषजनक समाधान नहीं मिला। गौरमैन ने कहा, सबसे चिंताजनक है कि 70-72% आबादी घबराई हुई है और ऑनलाइन व्यवहार को सीमित कर रही है।


    1-2% के अंतर को पाटेगा सैटेलाइट

    सैटेलाइट संचार पर छिड़ी बहस पर गोरमैन ने कहा, भारत का जमीनी मोबाइल ब्रॉडबैंड पहले ही 98% से अधिक आबादी तक पहुंच चुका है। सैटेलाइट केवल दूरदराज के क्षेत्रों, जहाजों या जंगलों में बचे 1-2% कनेक्टिविटी गैप को भरने का काम करेगा ना कि मोबाइल नेटवर्क की जगह ले सकता है। भारत सबसे सस्ते मोबाइल टैरिफ वाले देशों में से एक है, यहां सैटेलाइट ब्रॉडबैंड की भारी लागत इसके कार्यान्वयन में बाधा होगी।


    डिजिटल ट्रस्ट बड़ी चुनौती

    गोरमैन ने कहा कि दूरसंचार और डिजिटल सेक्टर के एजेंडे में सबसे ऊपर डिजिटल ट्रस्ट (डिजिटल भरोसा) कायम करना होना चाहिए, क्योंकि धोखाधड़ी ग्राहकों के साथ-साथ व्यवसायों और सरकारी पहलों को भी प्रभावित करती है। विदेशी सैटेलाइट कंपनियां घरेलू ऑपरेटरों पर हावी होनेे के सवाल पर गोरमैन ने कहा, भारत 5जी लॉन्च करने वाला पहला देश नहीं था, लेकिन आज वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा 5जी बाजार बन चुका है। पहले आना ही सब कुछ तय नहीं करता। उन्होंने सलाह दी कि सभी को सैटेलाइट से जोड़ने की कोशिश के बजाय उन करोड़ों लोगों को मौजूदा मोबाइल ब्रॉडबैंड से जोड़ने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो अब तक इंटरनेट की पहुंच से बाहर हैं।

  • लेह एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का 15 अक्टूबर को उद्घाटन करेंगे पीएम मोदी, 600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से हुआ निर्माण

    लेह एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का 15 अक्टूबर को उद्घाटन करेंगे पीएम मोदी, 600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से हुआ निर्माण

    नई दिल्ली: लद्दाख के लेह स्थित कुशोक बकुला रिम्पोचे (केबीआर) एयरपोर्ट की नई टर्मिनल बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अक्टूबर को इस आधुनिक टर्मिनल का वर्चुअल उद्घाटन कर सकते हैं। इसके लिए जमीन पर जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अब कार्यक्रम के समय को लेकर अंतिम मंजूरी का इंतजार है। इस नई सुविधा के शुरू होने से हवाई अड्डे की यात्री क्षमता बढ़ेगी और यात्रियों को पहले के मुकाबले बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

    लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने उद्घाटन कार्यक्रम से पहले निर्माण स्थल का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने नए टर्मिनल के विभिन्न हिस्सों को देखा, जिनमें प्रस्थान लाउंज, आगमन लाउंज, प्रतीक्षालय, यात्रियों की जांच के लिए निर्धारित क्षेत्र और फूड लाउंज शामिल हैं। उन्होंने यात्रियों को दी जाने वाली दूसरी सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। साथ ही, टर्मिनल को पूरी तरह चालू करने के लिए शेष कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। अधिकारियों के अनुसार, भवन से जुड़ी संरचनात्मक और परिचालन तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। उम्मीद है कि उद्घाटन के तुरंत बाद नए टर्मिनल को यात्रियों के इस्तेमाल के लिए खोल दिया जाएगा।

    भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने इस परियोजना को 600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया है। लगभग 23,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली यह तीन मंजिला इमारत सालाना 35 लाख यात्रियों को संभालने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसके अलावा, यहां प्रतिदिन 54 उड़ानों के संचालन को ध्यान में रखकर सुविधाएं विकसित की गई हैं। नए टर्मिनल में यात्रियों की आवाजाही और विमान सेवाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए आधुनिक व्यवस्थाएं की गई हैं। इनमें 20 चेक-इन काउंटर, इनलाइन बैगेज हैंडलिंग सिस्टम, सामान प्राप्त करने के लिए दो कैरोसेल, 15 लिफ्ट और 12 एस्केलेटर शामिल हैं। इन सुविधाओं से यात्रियों के चेक-इन, सामान प्रबंधन और टर्मिनल के भीतर आवागमन में मदद मिलने की उम्मीद है।

    नई टर्मिनल बिल्डिंग को ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण अनुकूल तकनीक को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें 700 किलोवाट पीक क्षमता का रूफटॉप सौर ऊर्जा संयंत्र लगाया गया है। इसके साथ ही, अत्यधिक ठंड वाले मौसम में इमारत को गर्म रखने के लिए भू-तापीय तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है। इस परियोजना में शून्य से नीचे तापमान वाले सर्दियों के मौसम की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। भू-तापीय तकनीक के उपयोग को भारत में इस तरह की व्यवस्था के शुरुआती बड़े पैमाने के इस्तेमाल के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इससे लेह जैसे ठंडे क्षेत्र में हवाई अड्डे के संचालन के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    टर्मिनल के उद्घाटन के बाद परियोजना के दूसरे चरण के तहत पुराने टर्मिनल को गिराने की योजना है। अधिकारियों के मुताबिक, इससे हवाई अड्डे के एप्रन का विस्तार करने और विमानों के संचालन से जुड़ी अतिरिक्त सुविधाएं विकसित करने का रास्ता साफ होगा। योजना में तीन एयरोब्रिज और विमानों की पार्किंग के लिए चार अतिरिक्त बे बनाने का प्रस्ताव शामिल है। इन बदलावों से यात्रियों को विमान तक पहुंचने में सुविधा मिलने के साथ विमानों की पार्किंग और परिचालन व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इससे पहले 11 अगस्त को मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने लेह एयरपोर्ट के नए टर्मिनल के निर्माण और नुब्रा क्षेत्र के थॉइस एयरपोर्ट से नागरिक उड़ान सेवाएं शुरू करने की प्रगति की समीक्षा के लिए बैठक की थी। उस बैठक में एएआई के एयरपोर्ट निदेशक और परियोजना महाप्रबंधक ए. उमाशंकर ने निर्माण कार्य की स्थिति की जानकारी दी थी। अब नई टर्मिनल बिल्डिंग तैयार होने के बाद इसके उद्घाटन और यात्रियों के लिए संचालन शुरू होने पर ध्यान केंद्रित है।

  • राहुल गांधी से लेकर अभिजीत दीपके तक, विरोध प्रदर्शनों पर BJP की जवाबी रणनीति की तैयारी

    राहुल गांधी से लेकर अभिजीत दीपके तक, विरोध प्रदर्शनों पर BJP की जवाबी रणनीति की तैयारी


    नई दिल्‍ली । दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, भाजपा प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं से बातचीत के लिए तैयार है। साथ ही, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के रुख का राजनीतिक जवाब देने तथा चुनाव आयोग के कामकाज पर तथ्य आधारित जानकारी सामने रखने की तैयारी भी की जा रही है। हालांकि, भाजपा ने अपनी रणनीति को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी से जुड़े सूत्रों ने संकेत दिया है कि मौजूदा हालात से निपटने के लिए बातचीत और राजनीतिक स्तर पर जवाब देने, दोनों विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इस बीच, विपक्षी गठबंधन INDIA, कांग्रेस से जुड़े संगठनों और अभिजीत दीपके की कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से विरोध जारी रहने की संभावना है।

    चुनाव आयोग के मुद्दे पर फैक्टशीट तैयार करने की चर्चा

    रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखने के लिए एक फैक्टशीट तैयार कर रही है। पार्टी की रणनीति में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के आरोपों का राजनीतिक जवाब देना भी शामिल बताया गया है। हालांकि, किसी भाजपा नेता ने सार्वजनिक रूप से इन तैयारियों की पुष्टि नहीं की है।

    अखबार से बातचीत में पार्टी से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि देश में कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है और प्रदर्शन सहित सभी गतिविधियां निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के दायरे में होनी चाहिए। सूत्र ने यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया निर्धारित है और इसके लिए महाभियोग की प्रक्रिया अपनानी होती है।

    प्रदर्शनकारियों के अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन का दावा

    रिपोर्ट में भाजपा से जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि चुनाव आयोग ने SIR के मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट करने की कोशिश की है। वहीं, सरकार ने दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में प्रदर्शनकारियों से निपटते समय संयम बरता है। सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बीच संतुलन रखने की कोशिश की गई।

    भाजपा से जुड़े एक सूत्र ने रामलीला मैदान में प्रदर्शन की अनुमति का हवाला देते हुए कहा कि सरकार विरोध के अधिकार के खिलाफ नहीं है। पार्टी का तर्क है कि निर्धारित स्थानों पर प्रदर्शन होने से लोगों को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है और आम नागरिकों को होने वाली परेशानी भी कम की जा सकती है। ये दावे पार्टी से जुड़े सूत्रों के हैं; सरकार की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक रणनीति जारी नहीं की गई है।

    INDIA गठबंधन के प्रदर्शन पर लग सकता है विराम

    पिछले सप्ताह से विपक्षी गठबंधन INDIA के नेता दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, माकपा महासचिव एमए बेबी ने कहा कि उन्हें कांग्रेस की ओर से फोन आया था। कांग्रेस का मानना था कि सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने और याचिका दाखिल करने के बाद मंगलवार को नए मार्च या प्रदर्शन की जरूरत नहीं है।

    हालांकि, गठबंधन के साझा प्रदर्शन पर विराम लगने की स्थिति में भी कांग्रेस से जुड़े कुछ संगठन अपना विरोध जारी रख सकते हैं। इनमें भारतीय युवा कांग्रेस और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के नाम शामिल हैं। ऐसे में दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों की आगे की दिशा इन संगठनों के फैसलों पर भी निर्भर करेगी।

    कॉकरोच जनता पार्टी ने पुलिस को दिया 24 घंटे का समय

    अभिजीत दीपके से जुड़ी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) भी दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति को लेकर सक्रिय है। सोमवार को पार्टी के प्रतिनिधि दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय करने की मांग लेकर पहुंचे थे। पार्टी ने पुलिस को जवाब देने के लिए 24 घंटे का समय दिया था।

    सीजेपी नेता सौरभ दास ने कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध संवैधानिक अधिकार है और उनकी पार्टी इसी अधिकार के तहत प्रदर्शन करना चाहती है। उन्होंने कहा कि पुलिस अक्सर प्रदर्शन की अनुमति के लिए पहले से संपर्क करने की बात कहती है, इसलिए इस बार तारीख और समय तय करने का फैसला पुलिस पर छोड़ा गया है।

    पार्टी पदाधिकारी आशुतोष रांका ने भी कहा था कि सीजेपी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए पुलिस से समय मांग रही है। उनके मुताबिक, अनुमति मिलने पर पार्टी 24 घंटे के भीतर निर्धारित स्थल पर जुटने के लिए तैयार है।

    मंगलवार को नए ऐलान पर नजर

    सीजेपी की ओर से पुलिस को दिया गया 24 घंटे का समय मंगलवार को पूरा होने की बात कही जा रही है। ऐसे में पार्टी की अगली घोषणा पर नजर रहेगी। दूसरी ओर, कांग्रेस से जुड़े छात्र और युवा संगठन विरोध जारी रखने का फैसला कर सकते हैं, भले ही INDIA गठबंधन के स्तर पर साझा प्रदर्शन न हो।

    फिलहाल भाजपा की ओर से बातचीत और राजनीतिक जवाब की संभावित रणनीति की खबरें सामने आई हैं, लेकिन पार्टी ने आधिकारिक तौर पर अपने अगले कदमों का खुलासा नहीं किया है। दिल्ली में आगे विरोध प्रदर्शन किस रूप में जारी रहेंगे, यह संबंधित दलों और संगठनों के फैसलों के साथ-साथ पुलिस की अनुमति पर भी निर्भर करेगा।