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  • पहलगाम हमले की बरसी: नरेंद्र मोदी का पाकिस्तान को कड़ा संदेश-‘भारत आतंकवाद के आगे नहीं झुकेगा’

    पहलगाम हमले की बरसी: नरेंद्र मोदी का पाकिस्तान को कड़ा संदेश-‘भारत आतंकवाद के आगे नहीं झुकेगा’


    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के Pahalgam में हुए आतंकी हमले की बरसी पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शहीदों को याद करते हुए आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी रूप में आतंकवाद के आगे नहीं झुकेगा और आतंकियों के मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे।

    पीएम मोदी ने जताई संवेदना
    प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि पिछले साल इसी दिन हुए इस भयावह हमले में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा देश इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़ा है और एक राष्ट्र के रूप में भारत शोक और संकल्प में एकजुट है।

    क्या हुआ था पहलगाम में?
    दरअसल, 22 अप्रैल 2025 को Pahalgam की बैसरन घाटी में आतंकियों ने घूमने आए सैलानियों पर अंधाधुंध गोलीबारी की थी। इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे। इस हमले के पीछे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन Lashkar-e-Taiba का हाथ बताया गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, आतंकियों ने लोगों से नाम और धर्म पूछकर महिलाओं और बच्चों के सामने गोली चलाई थी, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया था।

    शहीदों की याद में बना स्मारक
    हमले में जान गंवाने वाले लोगों की याद में लिद्दर नदी के किनारे एक स्मारक बनाया गया है। काले संगमरमर से बने इस स्मारक पर सभी 26 मृतकों के नाम अंकित हैं। बरसी के मौके पर इलाके में सुरक्षा भी कड़ी कर दी गई है और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

    ऑपरेशन सिंदूर: भारत का जवाब
    हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए “ऑपरेशन सिंदूर” शुरू किया था। इस अभियान के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों के कई ठिकानों को निशाना बनाया और उन्हें तबाह किया। बताया जाता है कि इस कार्रवाई में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए। इसके बाद 28 जुलाई 2025 को “ऑपरेशन महादेव” के तहत हमले में शामिल आतंकियों को भी मार गिराया गया।

    आतंकवाद पर भारत का स्पष्ट रुख
    प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने संदेश में दोहराया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगा और किसी भी कीमत पर देश की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आतंक के खिलाफ यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक इस खतरे को पूरी तरह समाप्त नहीं कर दिया जाता।

  • योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल विस्तार की हलचल तेज, गोपनीय हस्तांतरण का दौर

    योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल विस्तार की हलचल तेज, गोपनीय हस्तांतरण का दौर

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की कवायद अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक बैठकों और गोपनीय चर्चाओं का दौर जारी है, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा संगठन और सरकार दोनों स्तर पर संतुलन साधने में जुटी है।
    गोपनीय दौरे ने बढ़ाई सियासी सरगर्मी
    भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े का हालिया लखनऊ दौरा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। चंद घंटों के इस दौरे में उन्होंने महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह के साथ बंद कमरे में लंबी बैठक की। वहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी से फोन पर बातचीत भी की। इस पूरी कवायद को बेहद गोपनीय रखा गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर रणनीति लगभग तैयार है।
    दिल्ली में भी बनी रणनीति, हाईकमान की नजर
    इससे पहले दिल्ली में भी शीर्ष स्तर पर कई अहम बैठकें हो चुकी हैं। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व, जिसमें नरेंद्र मोदी और संगठन के वरिष्ठ नेता शामिल हैं, ने उत्तर प्रदेश के सियासी समीकरणों पर विस्तार से चर्चा की है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद यह संकेत और मजबूत हुआ कि पार्टी बड़े बदलाव के मूड में है।
    सीमित विस्तार, लेकिन असरदार बदलाव
    सूत्रों के मुताबिक, मंत्रिमंडल विस्तार बहुत बड़ा नहीं होगा। करीब आधा दर्जन खाली पदों को भरा जा सकता है, जबकि कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में फेरबदल भी संभव है। पार्टी की कोशिश है कि इस विस्तार के जरिए सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधा जाए, ताकि हर वर्ग को प्रतिनिधित्व मिल सके और चुनाव से पहले संगठन को मजबूती मिले।
    सामाजिक समीकरण पर फोकस
    संभावित नए मंत्रियों की सूची तैयार कर ली गई है। अब इन नामों को सामाजिक और राजनीतिक समीकरण के हिसाब से अंतिम रूप दिया जा रहा है। भाजपा नेतृत्व चाहता है कि विस्तार ऐसा हो, जिससे पिछड़े, दलित, ब्राह्मण और क्षेत्रीय संतुलन सभी का ध्यान रखा जा सके। यही वजह है कि हर नाम को सावधानी से परखा जा रहा है।
    जल्द हो सकता है शपथ ग्रहण
    पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस महीने के अंत तक या अगले महीने की शुरुआत में नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण हो सकता है। यह कार्यक्रम राजभवन में आयोजित किया जा सकता है। इस विस्तार से न केवल सरकार का चेहरा बदलेगा, बल्कि कार्यकर्ताओं में भी नया उत्साह देखने को मिलेगा।
    चुनाव से पहले बड़ा संदेश
    माना जा रहा है कि यह मंत्रिमंडल विस्तार 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। इसके जरिए भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि वह हर वर्ग और क्षेत्र को साथ लेकर चल रही है।

  • महिला प्रतिनिधित्व पर सुप्रीम कोर्ट का रुख कड़ा, बार एसोसिएशनों को दिए स्पष्ट निर्देश

    महिला प्रतिनिधित्व पर सुप्रीम कोर्ट का रुख कड़ा, बार एसोसिएशनों को दिए स्पष्ट निर्देश


    नई दिल्ली। देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने बार एसोसिएशनों को कड़ा संदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि महिला वकीलों को 30 प्रतिशत आरक्षण देना अब अनिवार्य है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि जो बार एसोसिएशन इस नियम का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें मान्यता निलंबित करना भी शामिल हो सकता है। अदालत ने साफ कहा कि यह सिर्फ एक औपचारिक निर्देश नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने का गंभीर प्रयास है।
    आरक्षण का स्पष्ट फार्मूला तय
    दरअसल, अदालत पहले ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया और देशभर की बार एसोसिएशनों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व अनिवार्य कर चुकी है। इसमें 20 प्रतिशत सीटें चुनाव के जरिए और 10 प्रतिशत सीटें को-ऑप्शन (नामांकन) के जरिए भरी जानी हैं। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि लंबे समय से वकालत के क्षेत्र में महिलाओं की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन नेतृत्व पदों पर उनकी भागीदारी बेहद कम रही है।
    नियमों में ढिलाई पर कोर्ट नाराज
    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि कई बार एसोसिएशन इस नियम को लागू करने में ढिलाई बरत रही हैं। इस पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने दो टूक कहा कि अगर तय कोटा पूरा नहीं किया गया, तो संबंधित संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई तय है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर जिला न्यायाधीशों को अधिकार दिए जा सकते हैं, ताकि वे महिलाओं को नामित कर इस 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व को हर हाल में पूरा कर सकें।
    न्याय व्यवस्था में बढ़ेगा संतुलन और भरोसा
    अदालत ने अपने आदेश में दोहराया कि न्यायिक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना समय की जरूरत है। इससे न केवल निर्णय प्रक्रिया में संतुलन आता है, बल्कि पारदर्शिता और जनता का भरोसा भी मजबूत होता है। कोर्ट का मानना है कि जब नेतृत्व स्तर पर महिलाओं की मौजूदगी बढ़ेगी, तो न्याय प्रणाली ज्यादा समावेशी और संवेदनशील बनेगी।
    समयबद्ध पालन के निर्देश
    सुप्रीम कोर्ट ने सभी बार एसोसिएशनों और संबंधित निकायों को निर्देश दिया है कि वे तय समयसीमा में इस आदेश को लागू करें। यदि इसमें लापरवाही बरती गई, तो कड़े कदम उठाए जाएंगे। यह फैसला कानूनी पेशे में महिलाओं को समान अवसर देने की दिशा में एक अहम और निर्णायक कदम माना जा रहा है।

  • ग्राउंड रिपोर्ट: ममता बनर्जी और मुस्लिम वोट बैंक-दरार की आहट या कायम है भरोसा?

    ग्राउंड रिपोर्ट: ममता बनर्जी और मुस्लिम वोट बैंक-दरार की आहट या कायम है भरोसा?


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल तेजी से बदलता नजर आ रहा है। लंबे समय तक सत्ता की धुरी रहे मुस्लिम मतदाता इस बार एकजुट नहीं दिख रहे, जिससे ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। पिछले चुनावों में मुस्लिम बहुल इलाकों में एकतरफा समर्थन पाने वाली पार्टी अब मतदाता सूची में नाम कटने, स्थानीय असंतोष और नए राजनीतिक विकल्पों के कारण दबाव में है।
    एसआईआर के बाद वोटर लिस्ट में बदलाव बना बड़ा मुद्दा
    मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद लाखों नाम हटने की चर्चा ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। अनुमान के मुताबिक करीब 91 लाख नाम सूची से बाहर हुए हैं, जिनमें लगभग 34 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता बताए जा रहे हैं, जबकि राज्य में उनकी आबादी करीब 27 प्रतिशत है। इस बदलाव से मुस्लिम वोट शेयर में 2.5 से 3 प्रतिशत तक गिरावट की आशंका जताई जा रही है। 2021 में TMC और भाजपा के बीच वोट शेयर का अंतर करीब 8 प्रतिशत था, ऐसे में यह कमी कई सीटों पर समीकरण बदल सकती है।
    करीबी मुकाबले वाली सीटों पर बढ़ा खतरा
    पिछले चुनाव में तृणमूल ने 37 सीटें 5 प्रतिशत से कम अंतर से जीती थीं। अब यदि किसी सीट पर 10-20 हजार वोट भी कम होते हैं, तो नतीजे पलट सकते हैं। नादिया की करीमपुर, मुर्शिदाबाद की डोमकल और भवानीपुर जैसी सीटें इसका उदाहरण हैं, जहां मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम कटने की बात सामने आई है। इससे चुनावी मुकाबला और ज्यादा कांटे का हो सकता है।
    उत्तर बंगाल में स्थानीय बनाम राज्य की राजनीति
    मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में दिलचस्प स्थिति बन गई है। यहां अधीर रंजन चौधरी का प्रभाव अब भी कायम है। कई मतदाता राज्य स्तर पर TMC को समर्थन देने की बात करते हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर अलग विकल्प चुनने की सोच रखते हैं। यह दोहरी रणनीति चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकती है।
    भांगड़ मॉडल: बदलते वोटर ट्रेंड का संकेत
    दक्षिण 24 परगना की भांगड़ सीट मुस्लिम वोट बैंक में बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरी है। यहां नौशाद सिद्दीकी की जीत ने संकेत दिया कि अब वोट एक दिशा में नहीं जा रहा। उनकी पार्टी ISF और वाम मोर्चे का गठबंधन युवाओं को आकर्षित कर रहा है और कई सीटों पर प्रभाव बढ़ा रहा है।
    डर और विकल्प के बीच उलझा मतदाता
    मुस्लिम मतदाताओं के बीच भाजपा का डर अब भी एकजुटता का कारण बना हुआ है, लेकिन साथ ही बेहतर प्रतिनिधित्व की मांग भी तेज हो रही है। कई लोग मानते हैं कि अब सिर्फ एक पार्टी पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है और विकल्प तलाशना भी जरूरी है।
    हुमायूं कबीर का अलग सुर
    पूर्व TMC नेता हुमायूं कबीर ने अलग पार्टी बनाकर मुस्लिम समाज को वास्तविक हिस्सेदारी देने की बात उठाई है। उनका आरोप है कि केवल प्रतीकात्मक राजनीति से समुदाय का भला नहीं हो सकता। इस तरह के बयान विपक्ष को मजबूत आधार दे रहे हैं।
    दरार साफ, नतीजा अभी बाकी
    कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में मुस्लिम वोट बैंक में दरार साफ दिखाई दे रही है, लेकिन इसकी अंतिम दिशा अभी तय नहीं है। मतदाता अब राज्य की स्थिरता और स्थानीय प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। 2026 का चुनाव इसी बदलते मिजाज की असली परीक्षा साबित होगा।
  • सबरीमाला केस में SC को अहम टिप्पणी, पूछा- भक्त के छूने से अपवित्र कैसे हो सकते हैं देवता या मूर्ति,,,

    सबरीमाला केस में SC को अहम टिप्पणी, पूछा- भक्त के छूने से अपवित्र कैसे हो सकते हैं देवता या मूर्ति,,,


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की संविधान पीठ ने मंगलवार को सबरीमाला मामले (Sabarimala case) में सुनवाई की। पीठ ने सवाल किया कि कोई भक्त जो मंदिर में मौजूदा देवता को अपना मूल रचियता मानता है, उसके स्पर्श मात्र से मूर्ति या देवता अपवित्र कैसे हो सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Chief Justice Surya Kant) की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय पीठ ने ये सवाल सबरीमाला मंदिर के मुख्य तांत्री (पुजारी) की दलीलों को सुनने के बाद किया।


    पुजारी की दलील

    पुजारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी गिरि ने छठे दिन की बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि अनुच्छेद 25 के तहत किसी श्रद्धालु का पूजा स्थल में प्रवेश करने का अधिकार, उस देवता की विशेषताओं के अनुरूप होना चाहिए। कहा कि जब कोई भक्त पूजा के लिए मंदिर जाता है, तो वह देवता की विशेषताओं के उलट नहीं हो सकता। अदालत ने सवाल किया कि मंदिर में यदि किसी भक्त को सिर्फ उसके जन्म, वंश या किसी अन्य स्थिति के आधार पर मूर्ति स्पर्श से रोका जाए, तो क्या संविधान मूकदर्शक बना रहेगा?

    पीठ सबरीमाला सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई कर रही है। सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी ने ही 2018 के उस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार अर्जी दी है, जिसमें महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी गई।


    ‘भक्त के लिए संविधान को ही आगे आना होगा’

    सबरीमाला मंदिर से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए नौ जजों की संविधान पीठ में शामिल जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह ने मुख्य पुजारी से पूछा कि जब किसी भक्त को सिर्फ उसके जन्म, वंश के आधार पर देवता को छूने से रोका जाए, तो क्या तब संविधान दखल दे सकता है? उन्होंने पूछा कि श्रद्धालु की सहायता के लिए कौन आगे आएगा, जिसे देवी-देवता को स्पर्श करने की अनुमति नहीं है। इस स्थिति में अदालत की क्या भूमिका होगी? इसके बार उन्होंने स्वयं इन प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि यह कार्य संविधान को ही करना होगा।


    रीति-रिवाज की प्रकृति धर्म का एक अभिन्न अंग

    सुनवाई के दौरान सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि ने पीठ से कहा कि किसी भी मंदिर में होने वाले समारोह और रीति-रिवाज की प्रकृति धर्म का एक अभिन्न अंग है। इसलिए यह एक धार्मिक प्रथा है। ऐसी प्रथा को जारी रखना, जो कि एक जरूरी धार्मिक प्रथा है, पूजा के अधिकार का ही हिस्सा होगा। अधिवक्ता ने कहा कि अनुच्छेद- 25 के तहत पूजा का अधिकार केवल वही व्यक्ति मांग सकता है, जिसका उस देवता में विश्वास हो, जिसमें देवता की विशिष्ट विशेषताएं भी शामिल हों।

    उन्होंने कहा कोई भी व्यक्ति जो मंदिर की मूर्ति में विश्वास रखता है और देवता को अपना ईश्वर मानता है, वह मंदिर की मूल विशेषताओं के विपरीत कोई कार्य नहीं करेगा, क्योंकि ऐसी प्रथा को उसके धर्म की प्रथा का हिस्सा नहीं माना जा सकता। अधिवक्ता गिरी ने कहा कि अनुच्छेद 25(1) के तहत मेरा अधिकार जहां तक पूजा स्थल में प्रवेश का अधिकार शामिल है, उसे मंदिरों द्वारा की जाने वाली प्रथाओं- देवता की विशेषताओं के अनुरूप ही होना होगा।


    ‘रचयिता और उसकी रचना के बीच फर्क नहीं’

    अधिवक्ता गिरि के तर्क पर जस्टिस अमनुल्लाह ने सवाल किया कि जब मैं किसी मंदिर में जाता हूं, तो मेरा मूल विश्वास यह होता है कि वह भगवान हैं, वह मेरे रचयिता हैं। उन्होंने ही मुझे बनाया है। है ना? मैं वहां सौ फीसदी विश्वास के साथ जाता हूं और पूरी तरह समर्पित होता हूं। मेरे दिल में जरा भी अशुद्धि नहीं होती और वहां, मुझसे कहा जाता है कि विभिन्न वजहों से मुझे हमेशा के लिए देवता को छूने की इजाजत नहीं है।


    धार्मिक प्रथाएं पूरी तरह से न्यायिक समीक्षा से बाहर?

    संविधान पीठ ने कहा कि यह बात स्वीकार करना मुश्किल है कि धार्मिक प्रथाएं पूरी तरह से न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर हैं। पीठ ने सवाल किया कि सामाजिक सुधार के नाम पर ऐसी प्रथाओं पर रोक लगाने वाले कानूनों की जांच और कौन करेगा? सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि ‘हम धार्मिक मामलों में न्यायिक समीक्षा की सीमाओं से अवगत है और इसके लिए विस्तृत दलीलों की कोई आवश्यकता नहीं है।

  • चारधाम यात्राः इंतजार की घड़ियां खत्म…. भक्तों के लिए खुले केदारनाथ धाम के पट

    चारधाम यात्राः इंतजार की घड़ियां खत्म…. भक्तों के लिए खुले केदारनाथ धाम के पट


    देहरादून।
    इंतजार की घड़ियां अब खत्म हो चुकी है। आज 22 अप्रैल 2026 को सुबह केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) के कपाट खोल दिए गए हैं। भगवान शिव (Lord Shiva.) के भक्तों के लिए आज का दिन बेहद ही खास है। मंदिर के द्वार खुलने से पहले ही धाम में भक्ति का माहौल बन गया। वहीं बीती शाम ही यहां पर ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर से बाबा केदार की चल विग्रह डोली पहुंचीं। बता दें कि ये परंपरा सदियों से चली आ रही है। हर साल 6 महीने के लिए बाबा केदार की इस डोली को ठंडी के दिनों में केदारनाथ धाम से ऊखीमठ ले जाया जाता है। मौसम सही होते ही इस डोली को वापस केदारनाथ लाया जाता है।

    आज सुबह से ही केदारनाथ में हर हर महादेव के जयकारों से साथ हजारों भक्त पहुंचते रहें। बता दें कि ये सिर्फ एक मंदिर या ज्योतिर्लिंग नहीं है बल्कि आस्था और विश्वास का अटूट केंद्र है। इसी वजह से केदारनाथ मंदिर का कपाट खुलना भक्तों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है। आइए जानते हैं कि इस मंदिर से जुड़ी जानकारियां-


    इतने बजे खुले केदारनाथ मंदिर के कपाट

    आज सुबह 8 बजे शुभ मुहूर्त में वैदिक मंत्रों और पूरे विधि-विधान के साथ बाबा केदारनाथ मंदिर के कपाट खोल दिए गए हैं। कपाट खुलने के खास मौके पर मंदिर को कई क्विंटल फूलों से बहुत ही सुंदर तरीके से सजाया गया जिससे इसकी भव्यता देखते ही बन रही है। कपाट खुलने के साथ ही मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं।


    भोग 25 अप्रैल से शुरू

    केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने के पहले दिन मंदिर में खास पूजा और आरती की गई। वहीं परंपरा के अनुसार नियमित भोग और पूरी तरह से तय दिनचर्या वाली पूजा 25 अप्रैल से शुरू होगी। यानी शुरुआती कुछ दिनों में यहां विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। इसके बाद रोज की पूजा सामान्य तरीके से होती है।


    केदारनाथ से पहले किनके दर्शन करना जरूरी?

    मान्यता है कि केदारनाथ जाने से पहले भगवान भैरवनाथ के दर्शन करना जरूरी है। भैरवनाथ मंदिर केदारनाथ धाम के पास ही ऊंचाई पर स्थित है। कहा जाता है कि जब सर्दियों में केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं तब भैरवनाथ ही पूरे धाम की रक्षा करते हैं। उन्हें यहां का क्षेत्रपाल भी कहा जाता है। ऐसे में लोग केदारनाथ के दर्शन करने से पहले भैरवनाथ मंदिर में ही मत्था टेकते हैं। ऐसा माना जाता है कि भैरवनाथ के दर्शन के बिना केदारनाथ यात्रा अधूरी है। लोगों का मानना है कि भैरवनाथ मंदिर में दर्शन करने से केदारनाथ यात्रा सफल और सुरक्षित होती है।

    केदारनाथ मंदिर को भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां पर मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। ऐसे में यहां दर्शन करना बहुत ही शुभ माना जाता है। कपाट खुलते ही देश-विदेश से तमाम श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।


    कब खुलेंगे बद्रीनाथ के कपाट

    केदारनाथ के बाद अब सबकी नजरें भगवान विष्णु के पवित्र धाम बद्रीनाथ पर हैं। बद्रीनाथ धाम के कपाट कल यानी 23 अप्रैल 2026 को खुलेंगे। कपाट के खुलने का समय सुबह 6:15 बजे है। बता दें कि ये चारधाम यात्रा का सबसे अहम पड़ाव है। बद्रीनाथ को धरती का बैकुंठ यानी भगवान विष्णु का निवास स्थान कहा जाता है।

  • MP समेत पूरा उत्तर-पश्चिम भारत इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में… इन राज्यों में हीटवेव का अलर्ट

    MP समेत पूरा उत्तर-पश्चिम भारत इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में… इन राज्यों में हीटवेव का अलर्ट


    भोपाल।
    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 22 अप्रैल को देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज अलग-अलग रहेगा। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत (North-west and central India.) में भीषण गर्मी और लू (Extreme heat and heat wave.) का असर जारी रहेगा। पूर्वोत्तर, दक्षिण और कुछ पश्चिमी हिस्सों में बारिश व आंधी-तूफान की गतिविधियां देखने को मिलेंगी। पहले बात उत्तर-पश्चिम भारत की करें तो राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में गर्मी का प्रकोप बना रहेगा। इन इलाकों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तक जा सकता है और लू चलने की संभावना है।

    IMD के अनुसार, खासतौर पर पश्चिमी राजस्थान (Western Rajasthan.) और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में आज भी हीटवेव की स्थिति बनी रह सकती है। लोगों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 24 घंटों के दौरान भी लगभग पूरे उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी पड़ने और लू चलने का अनुमान है। राजधानी लखनऊ में दिन का तापमान लगभग 42 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है, जबकि रात का तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आस-पास रहने का अनुमान है।


    मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ में गर्मी, कुछ इलाकों में बारिश

    मध्य भारत यानी मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh), छत्तीसगढ़ और विदर्भ क्षेत्र में भी मौसम काफी गर्म रहेगा। यहां तापमान में और बढ़ोतरी के संकेत हैं। कई जगहों पर लू जैसी स्थिति बन सकती है। कुछ इलाकों में हल्की बारिश या बादल छाने से थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन यह राहत अस्थायी होगी और कुल मिलाकर गर्मी का असर बना रहेगा। वहीं, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मौसम का मिजाज थोड़ा अलग रहेगा। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों (जैसे- असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश) में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। इससे तापमान में कुछ गिरावट आ सकती है और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि आंधी-तूफान और बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा।


    असम में भारी बारिश जारी रहने की संभावना

    अधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, असम में भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने भूस्खलन प्रभावित पहाड़ी क्षेत्रों के निवासियों को सतर्क रहने और जान-माल की हानि से बचने के लिए सावधानियां बरतने के लिए कहा है। इसमें कहा गया कि आने वाले दिनों में छिटपुट बारिश और आंधी चलने की संभावना है। सभी एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया गया है। वहीं, दक्षिण भारत और तटीय इलाकों की बात करें तो केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में गर्म और उमस भरा मौसम रहेगा। इसके साथ ही कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। महाराष्ट्र और पश्चिमी तट के कुछ हिस्सों में भी 22 अप्रैल को हल्की बारिश और आंधी की संभावना है, जिससे अस्थायी राहत मिलेगी लेकिन उमस बनी रहेगी।

  • छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में भर्ती का बड़ा अवसर डेटा एंट्री ऑपरेटर के 38 पदों पर आवेदन शुरू, 12 मई तक मौका

    छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में भर्ती का बड़ा अवसर डेटा एंट्री ऑपरेटर के 38 पदों पर आवेदन शुरू, 12 मई तक मौका


    नई दिल्ली। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर सामने आया है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट, बिलासपुर ने डेटा एंट्री ऑपरेटर के पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 38 पदों को भरा जाएगा, जिसमें विभिन्न श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण के अनुसार अवसर निर्धारित किए गए हैं। इस घोषणा के बाद राज्यभर में योग्य अभ्यर्थियों के बीच आवेदन को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है।

    इस भर्ती में कुल 38 पद शामिल हैं, जिनमें अनारक्षित वर्ग के लिए 19 पद, अनुसूचित जाति के लिए 7 पद, अनुसूचित जनजाति के लिए 7 पद और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 5 पद निर्धारित किए गए हैं। यह भर्ती विशेष रूप से महिला उम्मीदवारों के लिए भी एक अच्छा अवसर मानी जा रही है, क्योंकि इससे उन्हें न्यायिक क्षेत्र में रोजगार का अवसर प्राप्त होगा।

    ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 20 अप्रैल से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 12 मई तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम समय सीमा शाम 5 बजे तय की गई है। इसके साथ ही जिन उम्मीदवारों से आवेदन भरते समय कोई गलती हो जाती है, उनके लिए सुधार का अवसर भी प्रदान किया गया है, जो 13 मई से 15 मई तक उपलब्ध रहेगा। इस व्यवस्था से अभ्यर्थियों को अपने आवेदन को सही करने का अतिरिक्त समय मिलेगा।

    इस पद के लिए शैक्षणिक योग्यता के रूप में उम्मीदवार के पास कंप्यूटर साइंस या संबंधित विषय में न्यूनतम द्वितीय श्रेणी के साथ स्नातक डिग्री होना आवश्यक है। इसके अलावा पीजीडीसीए या डीओई से ओ लेवल कोर्स करने वाले उम्मीदवार भी पात्र होंगे। साथ ही ऑपरेटिंग सिस्टम और ऑफिस एप्लिकेशन का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य है। हिंदी और अंग्रेजी टाइपिंग में दक्ष उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी।

    आयु सीमा के अनुसार आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 30 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना 1 जनवरी के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी, जिससे अधिक से अधिक अभ्यर्थी इस अवसर का लाभ उठा सकें।

    चयन प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाएगी, जिसमें लिखित परीक्षा, कौशल परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन शामिल हैं। इन सभी चरणों में प्रदर्शन के आधार पर अंतिम चयन किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को आकर्षक वेतनमान प्रदान किया जाएगा, जो लगभग ₹25,300 से ₹80,500 प्रतिमाह तक रहेगा। यह वेतन इस पद को और अधिक आकर्षक बनाता है।

    लिखित परीक्षा के आयोजन की संभावित तिथि 28 जून निर्धारित की गई है, जो सुबह 10 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक आयोजित होने की संभावना है। परीक्षा का आयोजन बिलासपुर और रायपुर में किया जा सकता है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों के उम्मीदवारों को सुविधा मिल सके।

    आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से की जा रही है। उम्मीदवारों को आवेदन करने के लिए संबंधित पोर्टल पर जाकर पहले रजिस्ट्रेशन करना होगा, फिर लॉगिन करके आवेदन फॉर्म भरना होगा। सभी आवश्यक दस्तावेज सही प्रारूप में अपलोड करने के बाद फॉर्म को ध्यानपूर्वक जांचकर सबमिट करना होगा। अंत में आवेदन पत्र की एक प्रति भविष्य के उपयोग के लिए सुरक्षित रखना जरूरी है।

  • NCP प्रमुख शरद पवार की तबीयत पर अपडेट, डॉक्टरों की निगरानी में हालत स्थिर..

    NCP प्रमुख शरद पवार की तबीयत पर अपडेट, डॉक्टरों की निगरानी में हालत स्थिर..


    नई दिल्ली
    /मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख और वरिष्ठ नेता शरद पवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच और मेडिकल फॉलो-अप के लिए अस्पताल में लाया गया है। डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है और उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
    अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार यह भर्ती किसी आपात स्थिति के कारण नहीं है बल्कि यह उनके नियमित स्वास्थ्य परीक्षण का हिस्सा है। उनकी उम्र को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर इस तरह की जांच की जाती है ताकि स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा सके।

    पिछले कुछ समय से शरद पवार के स्वास्थ्य को लेकर हल्की चिंताएं सामने आती रही हैं। इससे पहले भी वे अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं और कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उनका इलाज हुआ था। इनमें सांस लेने में हल्की परेशानी और शरीर में कमजोरी जैसी स्थितियां शामिल रही हैं।

    डॉक्टरों की सलाह के अनुसार उन्हें आराम करने और अपनी दिनचर्या में संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता बताई गई है ताकि किसी भी प्रकार का अतिरिक्त दबाव उनकी सेहत पर न पड़े। इसके बावजूद वे राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय बने हुए हैं और लगातार विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रखते हैं।

    हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति भी चर्चा में रही थी, जहां उनकी शारीरिक स्थिति को लेकर लोगों की नजरें उन पर टिकी थीं। इसके बाद से ही उनकी सेहत को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई थी।

    इस बीच उनके समर्थकों और राजनीतिक सहयोगियों ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार उनकी स्थिति नियंत्रण में है और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं।

  • खड़गे के बयान से सियासी भूचाल मोदी को बताया ‘आतंकवादी’ भाजपा ने EC से की सख्त कार्रवाई की मांग

    खड़गे के बयान से सियासी भूचाल मोदी को बताया ‘आतंकवादी’ भाजपा ने EC से की सख्त कार्रवाई की मांग


    नई दिल्ली। तमिलनाडु में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान ने देश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ में तीखी टिप्पणी करते हुए एक शब्द का प्रयोग किया, जिसे लेकर राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया है। इस बयान के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है और मामला अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है।

    भाजपा नेताओं ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि देश के प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद के लिए इस तरह की भाषा का प्रयोग न केवल आपत्तिजनक है बल्कि यह राजनीतिक संस्कृति को भी नुकसान पहुंचाता है। भाजपा का कहना है कि चुनावी माहौल में इस तरह की टिप्पणियां जनता को गुमराह करने और माहौल को बिगाड़ने का काम करती हैं।

    इस मामले को लेकर भाजपा ने औपचारिक रूप से चुनाव आयोग से शिकायत दर्ज कराते हुए मांग की है कि इस बयान का संज्ञान लिया जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए। पार्टी नेताओं का आरोप है कि विपक्ष चुनावी हार के डर से इस तरह की भाषा का सहारा ले रहा है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर इस तरह की टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती।

    इस विवाद में भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह बयान किसी भावनात्मक प्रतिक्रिया का परिणाम नहीं बल्कि सोच समझकर दिया गया राजनीतिक संदेश है। उनके अनुसार विपक्ष लगातार प्रधानमंत्री और सरकार पर व्यक्तिगत हमले कर रहा है जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

    वहीं भाजपा के एक अन्य नेता प्रदीप भंडारी ने भी इस बयान की आलोचना करते हुए कहा कि यह बयान देश की जनता और लोकतंत्र दोनों का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार चुनावी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहा है।

    विवाद बढ़ने के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनके शब्दों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। उनके अनुसार उनका आशय किसी व्यक्ति विशेष पर हमला करना नहीं था बल्कि केंद्र सरकार की नीतियों और विपक्ष के प्रति कथित दबाव की राजनीति को उजागर करना था। उन्होंने कहा कि सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्षी दलों को दबाने का प्रयास कर रही है और यही बात उन्होंने अपने बयान में कही थी।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे जैसे चुनाव नजदीक आते हैं वैसे वैसे राजनीतिक बयानबाजी और तेज होती जाती है। उनका कहना है कि इस तरह के विवाद अक्सर चुनावी माहौल को प्रभावित करते हैं और कई बार वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाकर व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोप को बढ़ावा देते हैं।

    इस पूरे विवाद ने चुनावी चर्चा का केंद्र बदल दिया है और अब राजनीतिक दल एक दूसरे पर आरोप लगाने में जुट गए हैं। फिलहाल यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।