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  • OpenAI में बड़े बदलाव का दौर: कई पावरफुल लीडर्स ने एक साथ दिया इस्तीफा..

    OpenAI में बड़े बदलाव का दौर: कई पावरफुल लीडर्स ने एक साथ दिया इस्तीफा..


    नई दिल्ली। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में काम करने वाली प्रमुख कंपनी OpenAI में हाल ही में बड़े स्तर पर नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिला है। कंपनी के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है, जिससे टेक्नोलॉजी जगत में हलचल तेज हो गई है। इनमें से कुछ प्रमुख तकनीकी और प्रोडक्ट लीडर्स शामिल हैं, जिन्होंने लंबे समय तक कंपनी के विकास और AI उत्पादों के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    यह बदलाव केवल व्यक्तिगत निर्णयों तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे कंपनी के भीतर चल रहे व्यापक पुनर्गठन का हिस्सा बताया जा रहा है। पिछले कुछ समय से OpenAI अपने फोकस में बदलाव कर रही है, जहां शोध आधारित मॉडल से आगे बढ़कर व्यावसायिक उपयोग और उत्पाद केंद्रित रणनीति पर जोर दिया जा रहा है।

    इस बदलाव का सीधा असर कंपनी के लोकप्रिय AI टूल ChatGPT पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में ChatGPT और अन्य AI सेवाएं अधिक व्यावहारिक और व्यावसायिक जरूरतों के अनुरूप विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य इन तकनीकों को सिर्फ शोध तक सीमित न रखकर रोजमर्रा के उपयोग और बिजनेस सेक्टर में अधिक उपयोगी बनाना है।

    हाल ही में कंपनी छोड़ने वाले एक वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी ने अपने इस्तीफे को व्यक्तिगत और पेशेवर संतुलन से जुड़ा निर्णय बताया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करने के बाद अब वे अपने जीवन में परिवार और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर ध्यान देना चाहते हैं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण AI प्रोडक्ट्स के विकास में योगदान दिया था।

    इसके साथ ही कंपनी में हाल के महीनों में कई अन्य स्तरों पर भी बदलाव देखने को मिले हैं। कुछ वरिष्ठ अधिकारी या तो कंपनी छोड़ चुके हैं या फिर उनकी भूमिकाओं में परिवर्तन किया गया है। साथ ही कुछ रिसर्च यूनिट्स को पुनर्गठित कर अन्य टीमों के साथ मिला दिया गया है, जिससे कंपनी की आंतरिक संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।

    इन घटनाओं को केवल सामान्य इस्तीफों के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि यह माना जा रहा है कि AI उद्योग एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। अब कंपनियां ऐसे मॉडल पर ध्यान दे रही हैं जो न केवल तकनीकी रूप से उन्नत हों, बल्कि सीधे तौर पर उपयोगकर्ताओं और व्यवसायों के लिए लाभकारी भी साबित हों।

    इस बदलाव का असर पूरी AI इंडस्ट्री पर पड़ सकता है, क्योंकि अब फोकस केवल शोध और प्रयोगों से हटकर ऐसे प्रोडक्ट्स पर केंद्रित हो रहा है जो बड़े पैमाने पर उपयोग में लाए जा सकें और आर्थिक रूप से भी मजबूत साबित हों।

    ChatGPT जैसे प्लेटफॉर्म के लिए यह परिवर्तन एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, जहां आने वाले समय में यह तकनीक और अधिक उपयोगी, तेज और व्यवसायिक जरूरतों के अनुरूप विकसित हो सकती है।

  • 726 पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू; क्या आप बनना चाहते हैं तकनीकी शिक्षक?

    726 पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू; क्या आप बनना चाहते हैं तकनीकी शिक्षक?


    नई दिल्ली। बिहार तकनीकी सेवा आयोग की ओर से राज्य में तकनीकी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ी भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। इस भर्ती के तहत इंस्ट्रक्टर के कुल 726 पदों को भरा जाएगा। आयोग ने इसके लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी करते हुए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 15 अप्रैल से शुरू कर दी है, जो 15 मई तक जारी रहेगी। निर्धारित समय सीमा के भीतर इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं।

    इस भर्ती में विभिन्न तकनीकी ट्रेडों के लिए पद शामिल किए गए हैं। इनमें सर्वेक्षण, मशीनिस्ट, फिटर, वेल्डर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक, रेडियो और टीवी मैकेनिक, इलेक्ट्रिशियन, वायरमैन, ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग, ट्रैक्टर मैकेनिक और कृषि मशीनरी जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं। इन पदों का उद्देश्य राज्य के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में कुशल प्रशिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

    आवेदन के लिए उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय में आईटीआई, डिप्लोमा या स्नातक की डिग्री होना अनिवार्य रखा गया है। इसके साथ ही कुछ पदों के लिए अनुभव और आवश्यक तकनीकी कौशल भी जरूरी होंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल पात्र उम्मीदवारों को ही आगे की चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।

    आयु सीमा के अनुसार न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई है। पुरुष उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु 37 वर्ष और महिला उम्मीदवारों के लिए 40 वर्ष तय की गई है। आयु की गणना निर्धारित तिथि के अनुसार की जाएगी और आरक्षित वर्ग को नियमों के अनुसार छूट दी जाएगी।

    चयन प्रक्रिया में ऑनलाइन लिखित परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन और चिकित्सा परीक्षण जैसे चरण शामिल होंगे। सभी चरणों को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले उम्मीदवारों को अंतिम चयन सूची में जगह मिलेगी। चयनित उम्मीदवारों को शुरुआती स्तर पर 35,400 रुपये प्रतिमाह वेतन प्रदान किया जाएगा।

    आवेदन शुल्क सभी वर्गों के लिए समान रखा गया है, जिसे ऑनलाइन माध्यम से जमा करना अनिवार्य होगा। शुल्क जमा किए बिना आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। उम्मीदवारों को पहले रजिस्ट्रेशन करना होगा, उसके बाद लॉगिन कर आवेदन फॉर्म भरना होगा। सभी व्यक्तिगत और शैक्षणिक विवरण सही तरीके से भरने के बाद आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे। अंत में आवेदन शुल्क जमा कर फॉर्म सबमिट करना होगा और भविष्य के लिए उसका प्रिंट सुरक्षित रखना होगा।

  • UPI और दक्षिण कोरियाई पेमेंट सिस्टम के बीच ऐतिहासिक करार, लेन-देन होगा अब और भी आसान!

    UPI और दक्षिण कोरियाई पेमेंट सिस्टम के बीच ऐतिहासिक करार, लेन-देन होगा अब और भी आसान!


    नई दिल्ली। भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली UPI अब एक और बड़े देश में अपनी पहुंच बनाने जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत भारत और दक्षिण कोरिया ने अपने-अपने इलेक्ट्रॉनिक भुगतान सिस्टम को जोड़ने पर सहमति जताई है। इस पहल के बाद भारतीय नागरिक जल्द ही दक्षिण कोरिया में भी अपने UPI आधारित ऐप्स के जरिए आसानी से भुगतान कर सकेंगे, जिससे विदेशी यात्रा और लेनदेन पहले से अधिक सरल हो जाएंगे।

    इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के लोकल QR कोड आधारित भुगतान सिस्टम को आपस में जोड़ना है। इसका सीधा फायदा यात्रियों, छात्रों और कामकाजी लोगों को मिलेगा, जो एक देश से दूसरे देश में जाते समय डिजिटल भुगतान की सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद भारतीय उपयोगकर्ता दक्षिण कोरिया में वहां के QR कोड स्कैन कर अपने UPI ऐप से सीधे भुगतान कर सकेंगे। इसी तरह दक्षिण कोरिया के नागरिक भारत में भी इसी सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।

    यह पहल डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके तहत तकनीकी एकीकरण, सुरक्षा मानक, मुद्रा विनिमय और संचालन व्यवस्था जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर काम किया जाएगा। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही यह सुविधा आम उपयोगकर्ताओं के लिए पूरी तरह से उपलब्ध हो पाएगी।

    भारत में UPI पहले से ही डिजिटल लेनदेन का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। देश के भीतर इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और अब इसका अंतरराष्ट्रीय विस्तार इसे वैश्विक पहचान दिला रहा है। इस कदम से भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है और नकद रहित लेनदेन को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।

    डिजिटल भुगतान के अलावा इस समझौते के दौरान दोनों देशों ने आपसी सहयोग के अन्य क्षेत्रों पर भी चर्चा की है। इनमें सांस्कृतिक आदान-प्रदान, शिक्षा, तकनीकी सहयोग और रचनात्मक उद्योग शामिल हैं। दोनों देशों ने फिल्म, संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से लोगों के बीच संबंध मजबूत करने पर सहमति जताई है, जिससे आपसी समझ और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

    इसके साथ ही दोनों देशों ने व्यापारिक संबंधों को भी विस्तार देने का लक्ष्य तय किया है। आने वाले वर्षों में व्यापार को दोगुना करने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके लिए एआई, सेमीकंडक्टर, जहाज निर्माण और वित्तीय तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।

    इस डिजिटल पेमेंट एकीकरण को एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय यात्रा आसान होगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की फिनटेक क्षमता भी मजबूत होगी। यह पहल भविष्य में अन्य देशों के साथ भी इसी तरह के समझौतों का रास्ता खोल सकती है।

  • ग्रामीण धरोहरों को विकास का आधार बनाने के लिए विशेषज्ञों ने दिया बड़ा मंत्र!

    ग्रामीण धरोहरों को विकास का आधार बनाने के लिए विशेषज्ञों ने दिया बड़ा मंत्र!

    नई दिल्ली। वर्ल्ड हेरिटेज डे के अवसर पर नई दिल्ली में ग्रामीण धरोहर संरक्षण और सतत विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें देश की सांस्कृतिक और ग्रामीण विरासत को बचाने और उसे विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर विस्तृत चर्चा हुई। इस अवसर पर यह विचार प्रमुख रूप से सामने आया कि धरोहर केवल ऐतिहासिक पहचान नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास का एक मजबूत आधार भी हो सकती है। कार्यक्रम में पिछले कई वर्षों में किए गए प्रयासों और ग्रामीण क्षेत्रों में धरोहर संरक्षण से जुड़े कार्यों की समीक्षा भी की गई। इस दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि बदलते समय में धरोहर संरक्षण को नई चुनौतियों के अनुरूप ढालना आवश्यक है ताकि इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।

    कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में धरोहर संरक्षण के लिए मजबूत कानूनी प्रावधान मौजूद हैं लेकिन असली चुनौती उनके प्रभावी क्रियान्वयन की है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर जागरूकता की कमी और संवेदनशीलता का अभाव देखा जाता है जिससे ऐतिहासिक स्थलों और ग्रामीण विरासत को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि वहां धरोहर को संरक्षित करने के लिए अधिक सक्रिय प्रयासों की आवश्यकता है ताकि स्थानीय पहचान और सांस्कृतिक परंपराएं सुरक्षित रह सकें।

    संस्था के अध्यक्ष ने अपने विचार रखते हुए कहा कि ग्रामीण धरोहर को केवल संरक्षण की दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि इसे स्थानीय विकास और रोजगार के अवसरों से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने बताया कि संस्था पिछले कई वर्षों से उपेक्षित धरोहर स्थलों को पुनर्जीवित करने और उन्हें स्थानीय समुदायों के साथ जोड़ने के लिए कार्य कर रही है। उनका मानना है कि जब स्थानीय लोग अपनी विरासत से जुड़ते हैं तो उसका संरक्षण स्वाभाविक रूप से मजबूत होता है और यह क्षेत्रीय विकास में भी योगदान देता है।

    कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय अनुभवों को भी साझा किया गया जिसमें बताया गया कि कई देशों में धरोहर संरक्षण में समुदाय की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह देखा गया कि जब लोग अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को अपने जीवन का हिस्सा बना लेते हैं तो धरोहर अधिक सुरक्षित रहती है और पीढ़ियों तक आगे बढ़ती है। इस दौरान यह भी कहा गया कि धरोहर केवल भौतिक संरचनाओं तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें ज्ञान परंपराएं, सामाजिक मूल्य और सांस्कृतिक भावनाएं भी शामिल हैं जिन्हें संरक्षित करना आवश्यक है।

    चर्चा में यह बात भी सामने आई कि भारत की ग्रामीण धरोहर जिसमें पारंपरिक खेती, हस्तशिल्प, लोक कलाएं और स्थानीय भाषाएं शामिल हैं अभी भी विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह नहीं जुड़ पाई हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि यदि इन संसाधनों को आर्थिक अवसरों से जोड़ा जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और सतत विकास को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की बड़ी ग्रामीण आबादी को ध्यान में रखते हुए धरोहर आधारित विकास मॉडल अपनाना समय की आवश्यकता है।

    कार्यक्रम में युवाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया और कहा गया कि नई पीढ़ी को धरोहर से जोड़ना और उनके भीतर सांस्कृतिक जागरूकता विकसित करना भविष्य के संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर यह भी कहा गया कि धरोहर संरक्षण केवल सरकारी या संस्थागत जिम्मेदारी नहीं है बल्कि समाज के हर वर्ग की साझा जिम्मेदारी है।

  • ईरान युद्ध के बीच भारतीय सेना ने की ऊर्जा संकट से निपटने की तैयारी, बनाया ये प्लान..

    ईरान युद्ध के बीच भारतीय सेना ने की ऊर्जा संकट से निपटने की तैयारी, बनाया ये प्लान..

    नई दिल्ली। ईरान में जारी तनाव और संभावित तेल-गैस संकट के बीच भारतीय सेना ने ऊर्जा खपत को कम करने और वैकल्पिक संसाधनों को अपनाने के लिए बड़ा रणनीतिक प्लान तैयार किया है। सेना अब एलपीजी और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता घटाकर बायोगैस, सोलर और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर तेजी से बढ़ रही है। यह योजना अगले महीने से मिशन मोड में लागू की जाएगी।

    फ्यूल बचाने के लिए नई रणनीति तैयार
    रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना ने बायोगैस स्टोव्स की खरीद का ऑर्डर जारी कर दिया है। इसके साथ ही जवानों की मूवमेंट को 400 किलोमीटर के दायरे तक सीमित करने की योजना बनाई गई है, ताकि ईंधन की खपत कम की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव बिना किसी ऑपरेशनल क्षमता को प्रभावित किए लागू किया जाएगा।

    वाहनों की पूलिंग और इलेक्ट्रिक विकल्पों पर जोर
    सेना अब वाहनों की पूलिंग सिस्टम को बढ़ावा दे रही है, यानी एक साथ कई कार्यों को एक यात्रा में पूरा करने की रणनीति अपनाई जा रही है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों और सीएनजी के उपयोग को भी बढ़ाने की योजना है। कुछ नियम पहले ही लागू हो चुके हैं, जबकि बाकी अगले एक-दो हफ्तों में लागू किए जाएंगे।

    हवाई गतिविधियों में भी कटौती
    फ्यूल बचाने के लिए सेना से जुड़ी कुछ उड़ानों को भी सीमित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार यह कदम रणनीतिक जरूरतों को प्रभावित किए बिना ईंधन खपत कम करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।

    सौर और पवन ऊर्जा पर बड़ा फोक

    सेना की योजना आने वाले वर्षों में बड़े स्तर पर सोलर प्लांट और पवन चक्कियों की स्थापना करने की है। अनुमान के मुताबिक, सेना में रोजाना लगभग 1,56,000 किलो कुकिंग गैस की खपत होती है, जिसमें बायोगैस के इस्तेमाल से लगभग 20% तक बचत संभव है। वहीं, करीब 2 लाख वाहनों के चलते बड़ी मात्रा में ईंधन खर्च होता है।

    पांच साल का हरित ऊर्जा मिशन
    सेना का लक्ष्य है कि अगले पांच वर्षों में खाली और उपयोग न हो रहे क्षेत्रों में सोलर और विंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स लगाए जाएं, जिससे ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता घटे।

    होर्मुज जलमार्ग से गुजरता भारतीय टैंकर सुरक्षित

    इसी बीच एक अहम घटनाक्रम में भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार कर मुंबई की ओर बढ़ रहा है। यह वही संवेदनशील जलमार्ग है, जहां हाल ही में तनाव की स्थिति देखने को मिली थी। इस टैंकर पर 31 भारतीय नाविक सवार हैं और इसके 22 अप्रैल तक मुंबई पहुंचने की उम्मीद है।

  • बंगाल चुनाव से पहले गरमाई सियासत, हिमंत बिस्वा सरमा का तीखा हमला, बोले- 29 से पहले सरेंडर करो, वरना..

    बंगाल चुनाव से पहले गरमाई सियासत, हिमंत बिस्वा सरमा का तीखा हमला, बोले- 29 से पहले सरेंडर करो, वरना..


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग में अब कुछ ही दिन शेष हैं। 23 तारीख को पहले चरण का मतदान होना है, जबकि दूसरे चरण के लिए 29 तारीख तय की गई है। इसके साथ ही तमिलनाडु में भी 23 को एक ही चरण में मतदान होगा। वहीं 4 मई को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।

    बंगाल में बनेगी भाजपा सरकार- हिमंत बिस्वा सरमा
    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत का बड़ा दावा किया है। पश्चिम बर्धमान जिले के गौरबाजार में चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा कि इस बार राज्य में भाजपा की सरकार बनना 100 प्रतिशत तय है। उन्होंने पार्टी की संभावनाओं को लेकर पूरा भरोसा जताया।

    चुनावी मंच से दी सख्त चेतावनी
    पांडुआ में जनसभा को संबोधित करते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने तीखा बयान दिया। उन्होंने टीएमसी के कथित सिंडिकेट पर निशाना साधते हुए कहा, 29 तारीख से पहले सरेंडर कर दो, नहीं तो बाद में जेल जाना पड़ेगा। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है।

    गौरव वल्लभ का दावा, भवानीपुर से हारेंगी ममता बनर्जी

    भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने भी बड़ा बयान देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से चुनाव हार सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों में टीएमसी सरकार ने मां, माटी और मानुष के साथ विश्वासघात किया है और राज्य में अराजकता का माहौल बना रहा।

    भाजपा नेताओं का डबल इंजन सरकार पर जोर
    भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की जनता डबल इंजन सरकार बनाने का मन बना चुकी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि 29 अप्रैल से पहले आरोपियों को सरेंडर कर देना चाहिए, अन्यथा 4 मई के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • सरकार की बड़ी स्कॉलरशिप योजना, विदेश में शिक्षा के लिए मिलेगा फंड

    सरकार की बड़ी स्कॉलरशिप योजना, विदेश में शिक्षा के लिए मिलेगा फंड


    नई दिल्ली। सरकार ने छात्रों के लिए एक बड़ा मौका दिया है। National Overseas Scholarship (NOS) के तहत इस साल 125 स्कॉलरशिप दी जा रही हैं, जिससे छात्र विदेश में मास्टर्स और पीएचडी कर सकते हैं। यह योजना खास तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के छात्रों के लिए शुरू की गई है, ताकि वे विदेश की टॉप यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई कर सकें।

    इस स्कीम को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय चलाता है और इसका उद्देश्य छात्रों को ग्लोबल स्तर पर पढ़ाई का मौका देना है। इस स्कॉलरशिप के तहत ट्यूशन फीस, रहने का खर्च, ट्रैवल, वीजा और हेल्थ इंश्योरेंस तक का खर्च सरकार उठाती है।

    कौन कर सकता है National Overseas Scholarship में आवेदन
    इस स्कॉलरशिप के लिए आवेदन वही छात्र कर सकते हैं जो SC, डिनोटिफाइड/नोमैडिक ट्राइब्स, लैंडलेस लेबर या ट्रेडिशनल आर्टिजन कैटेगरी से आते हैं।

    योग्यता की बात करें तो उम्मीदवार के पास कम से कम 60% अंक होना जरूरी है। मास्टर्स के लिए ग्रेजुएशन और पीएचडी के लिए पोस्टग्रेजुएशन जरूरी है। उम्र सीमा 35 साल से कम होनी चाहिए और परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

    सबसे जरूरी शर्त यह है कि छात्र के पास विदेश की टॉप 500 QS रैंकिंग वाली यूनिवर्सिटी से एडमिशन ऑफर होना चाहिए।

    कैसे होता है चयन और कितनी मिलती है स्कॉलरशिप
    इस योजना के तहत हर साल कुल 125 सीटें दी जाती हैं, जिसमें 30% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होती हैं।

    चयन प्रक्रिया दो चरणों में होती है। पहले चरण में यूनिवर्सिटी की रैंकिंग के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है। अगर रैंकिंग समान होती है तो उम्मीदवार के अंकों को देखा जाता है।

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    इस स्कॉलरशिप के तहत छात्रों को पूरी फाइनेंशियल मदद मिलती है। पीएचडी के लिए 4 साल और मास्टर्स के लिए 3 साल तक सहायता दी जाती है।

    कुल मिलाकर, यह स्कीम उन छात्रों के लिए सुनहरा मौका है जो विदेश में पढ़ाई का सपना देखते हैं लेकिन आर्थिक वजहों से पीछे रह जाते हैं।

  • भारत और दक्षिण कोरिया के बीच '2030 का मास्टरप्लान' तैयार; 50 बिलियन डॉलर के व्यापारिक लक्ष्य के साथ शुरू हुआ आर्थिक दोस्ती का नया स्वर्णिम युग!

    भारत और दक्षिण कोरिया के बीच '2030 का मास्टरप्लान' तैयार; 50 बिलियन डॉलर के व्यापारिक लक्ष्य के साथ शुरू हुआ आर्थिक दोस्ती का नया स्वर्णिम युग!

    नई दिल्ली। दिल्ली के हैदराबाद हाउस में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक आयोजित हुई जिसमें दोनों देशों ने अपने रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी संबंधों को नई मजबूती देने पर सहमति जताई। इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत के प्रधानमंत्री और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के बीच व्यापक चर्चा हुई जिसमें व्यापार विस्तार, निवेश सहयोग, तकनीकी विकास, सांस्कृतिक आदान प्रदान और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर गहन विचार किया गया। बैठक के बाद दोनों देशों ने आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए कई नए कदमों की घोषणा की और आने वाले वर्षों में साझेदारी को अधिक व्यापक और परिणाममुखी बनाने का संकल्प दोहराया।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया के संबंध पिछले कई वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं और दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग की नींव और अधिक गहरी हुई है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों, बाजार आधारित अर्थव्यवस्था और कानून के शासन के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोनों देशों को एक मजबूत साझेदार बनाती है। उन्होंने यह भी कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और दक्षिण कोरिया की साझेदारी इंडो पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    बैठक के दौरान आर्थिक सहयोग पर विशेष जोर दिया गया और दोनों देशों ने मौजूदा व्यापार को बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया। वर्तमान में यह व्यापार लगभग 27 बिलियन डॉलर के स्तर पर है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वित्तीय सहयोग को आसान बनाने, औद्योगिक साझेदारी को बढ़ाने और निवेश के नए अवसर खोलने पर सहमति बनी। इसके लिए एक नए वित्तीय सहयोग मंच की शुरुआत की गई है जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक लेनदेन और निवेश प्रक्रिया अधिक सरल हो सकेगी।

    औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है जो विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करेगी। इसके साथ ही आर्थिक सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए एक नया संवाद तंत्र शुरू किया गया है। भारत में कोरियाई कंपनियों के लिए औद्योगिक टाउनशिप विकसित करने की योजना पर भी सहमति बनी है जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों को भी लाभ मिलेगा।

    तकनीकी क्षेत्र में दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, डिजिटल तकनीक और सूचना प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए एक नए डिजिटल सहयोग मंच की शुरुआत की जा रही है जो नवाचार और तकनीकी विकास को नई गति देगा। इसके अलावा जहाज निर्माण, इस्पात उद्योग और पर्यावरण अनुकूल विकास परियोजनाओं में भी संयुक्त प्रयासों पर सहमति बनी है।

    सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। दोनों देशों ने फिल्म, एनीमेशन और गेमिंग जैसे रचनात्मक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। शिक्षा, अनुसंधान और पर्यटन के क्षेत्र में लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में भी नई पहल की जाएगी। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों ने भविष्य में सांस्कृतिक उत्सवों और आदान प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की बात कही।

    अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी दोनों देशों ने साझा दृष्टिकोण अपनाते हुए वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार की आवश्यकता पर सहमति जताई और एक शांतिपूर्ण और संतुलित वैश्विक व्यवस्था के निर्माण की दिशा में सहयोग जारी रखने का संकल्प लिया।

  • रिकॉर्ड समय में बढ़ता जहाजों का आवागमन और बंदरगाह विस्तार की भविष्य की योजनाएं..

    रिकॉर्ड समय में बढ़ता जहाजों का आवागमन और बंदरगाह विस्तार की भविष्य की योजनाएं..


    नई दिल्ली। वैश्विक समुद्री व्यापार के मार्ग में उत्पन्न हुए होर्मुज संकट ने भारत के पहले डीपवॉटर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट विजिनजम की महत्ता को पूरी दुनिया के सामने सिद्ध कर दिया है। वर्तमान परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां एक सुरक्षित और भरोसेमंद मार्ग की तलाश में हैं और केरल स्थित यह बंदरगाह इस आवश्यकता को पूरा करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। विजिनजम पोर्ट पर जहाजों का आवागमन इस कदर बढ़ गया है कि वर्तमान में करीब सौ जहाज यहां प्रवेश की प्रतीक्षा में कतारबद्ध खड़े हैं। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि दक्षिण एशिया में समुद्री व्यापार के केंद्र अब तेजी से बदल रहे हैं और भारत वैश्विक लॉजिस्टिक्स के मानचित्र पर एक नए मानक स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है।

    विजिनजम पोर्ट की संकल्पना तीन दशक पहले अंतरराष्ट्रीय कार्गो के भार को व्यवस्थित करने और विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से की गई थी। वर्ष दो हजार पंद्रह में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ और वर्तमान में यह बंदरगाह रिकॉर्ड समय में दस लाख टीईयू का आंकड़ा पार कर चुका है। भारी दबाव के बावजूद इस पोर्ट की कार्यक्षमता उल्लेखनीय रही है और पिछले महीने ही यहां साठ से अधिक जहाजों का सफल संचालन किया गया जो अपने आप में एक नया कीर्तिमान है। डीपवॉटर ट्रांसशिपमेंट की सुविधा होने के कारण यहां बड़े जहाजों को आसानी से संभाला जा सकता है जिससे यह अंतरराष्ट्रीय कार्गो परिवहन के लिए एक अनिवार्य विकल्प बन गया है।

    ट्रांसशिपमेंट सुविधा किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्ग के लिए रीढ़ की हड्डी के समान होती है जहां कंटेनरों को एक बड़े जहाज से दूसरे जहाजों में स्थानांतरित किया जाता है ताकि वे अपने अंतिम गंतव्य तक सुगमता से पहुंच सकें। भारत पारंपरिक रूप से इस कार्य के लिए पड़ोसी देशों के हब पर निर्भर रहा है लेकिन विजिनजम के उदय ने इस समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है। वर्तमान विस्तार कार्यों के पूरा होने के बाद यहां एक साथ पांच बड़े मदरशिप्स को संभालने की क्षमता विकसित हो जाएगी। यह विस्तार न केवल भारत की समुद्री शक्ति को बढ़ाएगा बल्कि वैश्विक स्तर के बड़े समुद्री केंद्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में भी सक्षम बनाएगा।

    समुद्री विशेषज्ञों का मानना है कि विजिनजम पोर्ट का विकास अब केवल एक राष्ट्रीय परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह एक वैश्विक आवश्यकता बन चुका है। होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे गतिरोध के बीच शिपिंग उद्योग को एक ऐसे केंद्र की तलाश थी जो सुरक्षित होने के साथ-साथ तकनीकी रूप से भी उन्नत हो। विजिनजम ने इन सभी मानकों पर खरा उतरकर खुद को एक भरोसेमंद समुद्री दिग्गज के रूप में स्थापित किया है। जैसे-जैसे इसके दूसरे चरण का काम गति पकड़ रहा है उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में यह बंदरगाह वैश्विक अर्थव्यवस्था की गति को बनाए रखने में भारत का सबसे महत्वपूर्ण योगदान साबित होगा।

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    बढ़ते पारे के बीच 'पाती' के जरिए सीधे जनता से जुड़े सीएम योगी; सुरक्षा के लिए जारी किए कड़े निर्देश!


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में तापमान लगातार बढ़ रहा है और भीषण गर्मी का असर जनजीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। इस स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम एक विशेष पाती जारी कर लोगों से सावधानी बरतने और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की अपील की है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि बदलते मौसम के इस दौर में सतर्कता और तैयारी ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है, जिससे लू और गर्मी के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि प्रकृति का चक्र निरंतर चलता रहता है और हर ऋतु अपने साथ अलग परिस्थितियां लेकर आती है। इस समय ग्रीष्म ऋतु अपने चरम की ओर बढ़ रही है और तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि जैसे सर्दी के मौसम में बचाव के उपाय किए जाते हैं, वैसे ही गर्मी के मौसम में भी व्यापक तैयारियां आवश्यक हैं। सरकार की ओर से आमजन की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि बढ़ती गर्मी के कारण बिजली की मांग में भी तेजी आई है, जिसे ध्यान में रखते हुए पर्याप्त विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है। उत्पादन इकाइयों को उनकी पूरी क्षमता से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि प्रदेश के किसी भी हिस्से में बिजली की कमी न हो।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गर्मी के मौसम में श्रमिकों और खुले में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। कार्यस्थलों पर छाया, पेयजल और प्राथमिक स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। लू और गर्मी से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं ताकि लोग समय रहते आवश्यक सावधानियां अपना सकें।

    उन्होंने आगे बताया कि सार्वजनिक स्थानों जैसे सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों, थानों और अन्य केंद्रों पर ठंडे और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही अस्पतालों में हीट स्ट्रोक से प्रभावित मरीजों के लिए विशेष चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं ताकि आपात स्थिति में तुरंत उपचार मिल सके।

    मुख्यमंत्री ने पशुधन और वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही। गोशालाओं और अन्य पशु आश्रयों में पानी, चारा और छाया की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पशुओं को भी इस भीषण गर्मी से सुरक्षित रखा जा सके।

    अपने संदेश के अंत में मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे स्वयं और अपने परिवार का विशेष ध्यान रखें। पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें और हल्के तथा सूती वस्त्र पहनें। उन्होंने लोगों से यह भी कहा कि अनावश्यक रूप से धूप में निकलने से बचें और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें। साथ ही उन्होंने पशु पक्षियों के लिए पानी रखने की भी अपील की ताकि इस कठिन मौसम में संवेदनशीलता और मानवता का संदेश आगे बढ़ सके।