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  • Gen Z दफ्तरों की जटिल अंग्रेजी से परेशान…. आसान भाषा अपनाने की उठी मांग

    Gen Z दफ्तरों की जटिल अंग्रेजी से परेशान…. आसान भाषा अपनाने की उठी मांग


    नई दिल्ली।
    ऑफिस (Office) में इस्तेमाल होने वाली भारी-भरकम अंग्रेजी (Heavy English.) आज की युवा पीढ़ी (Young Generation-Gen Z) के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। जेन-जी (1997 से 2012 के बीच जन्मे युवा) का कहना है कि ऐसे शब्द न सिर्फ भ्रम पैदा करते हैं, बल्कि कामकाजी संवाद को भी मुश्किल बना देते हैं। इसी को लेकर अमेरिका के भाषा शिक्षण प्लेटफॉर्म ‘प्रेपली’ ने एक रिपोर्ट जारी की है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, जब मैनेजर मीटिंग में यह कहते हैं कि “इस प्रोजेक्ट के लिए सिनर्जी चाहिए” या “क्या आपके पास इसकी बैंडविड्थ है”, तो कई युवा कर्मचारियों को इन शब्दों का सही मतलब समझने में दिक्कत होती है। भाषा विशेषज्ञों का कहना है कि हर महीने हजारों युवा इन कॉर्पोरेट शब्दों के अर्थ जानने के लिए गूगल का सहारा लेते हैं।

    रिसर्च में सामने आया है कि ‘Synergy’ सबसे ज्यादा खोजा जाने वाला ऑफिस शब्द है, जिसे हर महीने करीब 40,500 बार सर्च किया जाता है। इसके बाद ‘Paradigm’ (लगभग 27,000 सर्च) और ‘Best Practice’ जैसे शब्द सूची में शामिल हैं।


    युवाओं को कैसी भाषा चाहिए?

    आज की पीढ़ी ऐसी भाषा को प्राथमिकता देती है जो साफ, सरल और सीधी हो। उनके अनुसार, दफ्तरों में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक अंग्रेजी मुहावरे अक्सर दिखावटी लगते हैं और बातचीत को जटिल बना देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसी कर्मचारी को काम समझने के लिए शब्दों का मतलब अलग से ढूंढना पड़े, तो यह संचार की कमजोरी को दर्शाता है।


    डिजिटल दौर से मेल नहीं खा रही कॉर्पोरेट भाषा

    जेन-जी का कहना है कि पारंपरिक कॉर्पोरेट अंग्रेजी अब डिजिटल युग की बातचीत से तालमेल नहीं बैठा पा रही है। वे चाहते हैं कि दफ्तरों की भाषा भी रोजमर्रा की बातचीत जैसी स्वाभाविक हो। यह बदलाव सिर्फ कार्यस्थल तक सीमित नहीं है—निजी जीवन में भी पुराने और भारी शब्दों की जगह आसान भाषा लेती जा रही है। भाषा विशेषज्ञों के अनुसार, हर पीढ़ी अपने समय के अनुसार भाषा को ढालती है और जेन-जी के लिए स्पष्टता और सादगी सबसे अहम है। जैसे-जैसे इस पीढ़ी की भागीदारी कार्यक्षेत्र में बढ़ रही है, वैसे-वैसे दफ्तरों में भी संवाद का तरीका बदल रहा है।


    कठिन शब्दों की जगह आसान विकल्प

    Synergy → Teamwork
    Bandwidth → Availability (समय/उपलब्धता)
    Circle Back → दोबारा बात करना

    युवाओं का मानना है कि इस तरह की सरल भाषा अपनाने से न सिर्फ काम आसान होगा, बल्कि संवाद भी ज्यादा प्रभावी बन सकेगा।

  • हरिद्वार: संत रविदास जयंती की शोभायात्रा के बाद भड़की हिंसा, तोड़फोड़ और फायरिंग में दो लोगों की मौत… गांव में तनाव

    हरिद्वार: संत रविदास जयंती की शोभायात्रा के बाद भड़की हिंसा, तोड़फोड़ और फायरिंग में दो लोगों की मौत… गांव में तनाव


    हरिद्वार।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) के हरिद्वार जिले (Haridwar district) के भगवानपुर क्षेत्र (Bhagwanpur area) में संत रविदास जयंती (Sant Ravidas Jayanti) के अवसर पर निकाली गई शोभायात्रा के बाद हालात बेकाबू हो गए। एक ही समुदाय के दो गुटों के बीच हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि एक पक्ष की ओर से की गई गोलीबारी में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए। घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने आरोपी पक्ष के घर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। देर रात गांव में एक और शव मिलने से तनाव और बढ़ गया, जिसके चलते पुलिस ने एहतियातन अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है।

    भगवानपुर थाना क्षेत्र के बिनारसी गांव में रविवार को रविदास जयंती को लेकर आयोजन किया गया था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद 27 वर्षीय आनंद, पुत्र लक्ष्मीचंद, अपने परिवार और कुछ परिचितों के साथ घर लौट रहा था। इसी दौरान रास्ते में, घर के सामने रहने वाले धर्मवीर और उसके साथ मौजूद लोगों से किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई, जो देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गई।

    पुलिस के मुताबिक, आरोपित पक्ष ने लाइसेंसी और अवैध हथियारों का इस्तेमाल करते हुए फायरिंग की। इसमें आनंद, उसका भाई विकास, गगनदीप और योगेंद्र गोली लगने से घायल हो गए। आनंद की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। विकास को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि गगनदीप और योगेंद्र को रुड़की के अस्पताल ले जाया गया। गगनदीप के पैर में गोली लगने के कारण उसे हायर सेंटर रेफर किया गया है, वहीं योगेंद्र को छर्रे लगे हैं और उसका इलाज जारी है।


    आरोपियों का घर फूंका

    उधर, गांव में फायरिंग के बाद अफरातफरी मच गई। घटना से गुस्साए आनंद के घरवालों-परिचितों ने आरोपी के घर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। मामले की जानकारी पर पुलिस मौके पर पहुंची पर लोगों ने आनंद का शव नहीं उठने दिया। रात करीब साढ़े आठ बजे पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर शव पोस्टमार्टम को भेजा। इस बीच, पुलिस को सूचना मिली की गांव में धर्मवीर पक्ष का 45 वर्षीय मांगेराम, बेसुध पड़ा है। पुलिस मौके पर पहुंची तो मांगेराम मृत पड़ा था। पुलिस के अनुसार प्रथमदृष्टया मांगेराम की मौत पिटाई से होना लग रही है। पुलिस ने मामले में कुछ लोगों को हिरासत में लिया है।


    पुरानी रंजिश बनीं खून-खराबे की वजह

    बताया जा रहा है कि प्रधान पक्ष धर्मवीर और आनंद पक्ष के बीच पुरानी रंजिश के चलते दो साल से तनातनी बनी हुई थी। हालांकि दोनों ही पक्ष एक दूसरे के पड़ोसी होने के साथ-साथ एक ही समाज से हैं, लेकिन किसी ने भी इस तनातनी को गंभीरता से नहीं किया। रविवार को शाम को दोनों पक्ष फिर से आमने सामने आ गए। जिसके चलते मामूली कहासुनी हिंसक खूनी संघर्ष के रूप में सामने आई। जिसमें हुई फायरिंग में आनंद की मौके पर ही मौत हो गई। और तीन अन्य युवक घायल हो गए। उधर देर रात पुलिस ने बताया कि एक युवक 45 वर्षीय मांगेराम का शव क्षेत्र से ही बरामद किया गया है।


    चंद मिनटों में ही मातम में बदला खुशियां

    गांव में संत शिरोमणि जयंती पर्व को लेकर पिछले कई दिनों से गांव में तैयारियां चल रही थी। पूरे गांव में एक उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा था। रविवार को पर्व के मौके पर सुबह से ही लोग मंदिर में पूजा-अर्चना में परिवार सहित जुटे थे। धूमधाम से शोभायात्रा निकाली गई। भंडारे में बड़ी संख्या में लोग परिवार सहित पहुंचे। पूरे गांव में उत्साह का माहौल था। लेकिन दिन ढलते ही पूरा माहौल मातम में बदल गया।

  • Bihar: केन्द्रीय बजट में बड़ी सौगात… पटना में गंगा तट पर 300 करोड़ की लागत से बनेगा शिप रिपेयर सेंटर

    Bihar: केन्द्रीय बजट में बड़ी सौगात… पटना में गंगा तट पर 300 करोड़ की लागत से बनेगा शिप रिपेयर सेंटर


    पटना।
    पटना (Patna) में गंगा नदी (River Ganges) के किनारे दीघा क्षेत्र (Digha area) में 300 करोड़ रुपये की लागत से एक जहाज मरम्मत केंद्र (Ship Repair Center) स्थापित किया जाएगा। केंद्रीय बजट (Union Budget) में इसकी घोषणा के बाद इसका मार्ग प्रशस्त हो गया है। राज्य सरकार ने इसके लिए दीघा में कुर्जी के सामने गंगा किनारे पांच एकड़ जमीन भी आवंटित कर दी है। केंद्र बनने के बाद जलमार्ग से माल ढुलाई और पर्यटन उद्देश्यों के लिए चलने वाले जहाजों की संख्या बढ़ेगी और परिवहन लागत में कमी आएगी।


    दूर-दराज से भी जहाज पहुंचेंगे

    वर्तमान में जहाजों की मरम्मत के लिए उन्हें कोलकाता या वाराणसी ले जाना पड़ता है। पटना में सुविधा उपलब्ध होने के बाद अब स्थानीय जहाजों के साथ-साथ दूरदराज से आने वाले जहाजों की मरम्मत भी यहीं की जाएगी। इससे कोलकाता या वाराणसी तक जहाज भेजने और वापस लाने में होने वाले हजारों रुपये के परिवहन खर्च में बचत होगी। साथ ही, केंद्र के खुलने से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।


    एक बार में चार जहाज की मरम्मत

    इस नए केंद्र में एक बार में चार जहाजों की मरम्मत की सुविधा होगी। इसके लिए लिफ्ट सिस्टम लगाया जाएगा। जहाज को लिफ्ट से गंगा नदी से उठाकर खुले स्थान पर रखा जाएगा, फिर मरम्मत की जाएगी और कार्य पूरा होने के बाद उसे पुनः पानी में स्थापित किया जाएगा।

    रोजगार और परिचालन के नए अवसर

    वर्तमान में गंगा में लगभग 50-60 छोटे और बड़े जहाज चलते हैं, जिनका परिचालन बिहार के साथ उत्तर प्रदेश और बंगाल तक होता है। पटना में मरम्मत केंद्र की कमी के कारण सरकारी विभाग और निजी लोग जहाज संचालन में कम रुचि दिखाते थे। केंद्र खुलने के बाद परिवहन और पर्यटन विभाग जहाज परिचालन बढ़ा सकते हैं और निजी कंपनियां भी माल ढुलाई और पर्यटन के लिए जहाज संचालन कर सकती हैं।

  • यूपीआई लेन-देन जनवरी महीने में 28.33 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर

    यूपीआई लेन-देन जनवरी महीने में 28.33 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर


    नई दिल्‍ली।
    देश में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) (Unified Payments Interface – UPI) के जरिए होने वाला लेन-देन (Translations) जनवरी में 28.33 लाख करोड़ रुपये के मूल्य और 21.70 अरब की संख्या के साथ रिकॉर्ड स्तर (Record level.) पर पहुंच गया है।

    भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की ओर से रविवार को जारी की गई आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है। एनपीसीआई के मुताबिक दिसंबर 2025 में यूपीआई के जरिए लेन-देन का मूल्य 27.97 लाख करोड़ रुपये रहा था। मासिक आधार पर लेन-देन के मूल्य में 21 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार जनवरी में औसत दैनिक लेनदेन 70 करोड़ रहा जिसका औसत मूल्य 91,403 करोड़ रुपये था।

    वर्ल्डलाइन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रमेश नरसिम्हन ने में कहा कि यूपीआई की वृद्धि की गति लगातार मजबूत हो रही है। केवल जनवरी में भारतीयों ने 28.33 लाख करोड़ रुपये के 21.7 अरब यूपीआई लेनदेन किए, जो दिसंबर की तुलना में ज्‍यादा है, जो सालाना आधार पर 28 फीसदी की मजबूत वृद्धि दर्शाता है।

  • सकल जीएसटी संग्रह जनवरी में 6.2 फीसदी बढ़कर 1.93 लाख करोड़ रुपये

    सकल जीएसटी संग्रह जनवरी में 6.2 फीसदी बढ़कर 1.93 लाख करोड़ रुपये


    नई दिल्‍ली।
    अर्थव्‍यस्‍था (Economy) के मोर्चे पर अच्‍छी खबर है। सकल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) राजस्‍व संग्रह (Gross Goods and Services Tax (GST) Revenue Collection) जनवरी महीने में आयात से प्राप्त राजस्व में वृद्धि के दम पर 6.2 फीसदी बढ़कर 1.93 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

    जीएसटी महानिदेशालय ने रविवार को जारी आंकड़ों में बताया कि जनवरी में शुद्ध माल एवं सेवा कर (जीएसटी) राजस्व संग्रह में 7.6 फीसदी की वृद्धि हुई और यह करीब 1.71 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि, कुल ‘रिफंड’ में 3.1 फीसदी की गिरावट आई, यह 22,665 करोड़ रुपये रहा।

    आंकड़ों के मुताबिक जनवरी में घरेलू लेन-देन से सकल कर संग्रह 4.8 फीसदी बढ़कर 1.41 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि आयात राजस्व 10.1 फीसदी बढ़कर 52,253 करोड़ रुपये रहा। वहीं, इस दौरान तंबाकू उत्पादों से उपकर संग्रह जनवरी में 5,768 करोड़ रुपये रहा। जनवरी, 2025 में यह 13,009 करोड़ रुपये रहा था, जब कार तथा तंबाकू उत्पादों जैसे विलासिता, हानिकारक एवं अहितकर वस्तुओं पर उपकर लगाया जाता था।

    उल्‍लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने 22 सितंबर, 2025 से करीब 375 वस्तुओं पर जीएसटी की दरें कम कर दी थीं, जिससे सामान सस्ता हो गया। साथ ही, पहले की तरह विलासिता, हानिकारक एवं अहितकर वस्तुओं पर लगने वाले उपकर के बजाय अब केवल तंबाकू तथा संबंधित उत्पादों पर ही क्षतिपूर्ति उपकर लगाया जाता है। जीएसटी दरों में कमी से राजस्व संग्रह पर असर पड़ा है।

  • आयकर स्लैब में बदलाव नहीं, कैंसर की 17 दवाइयां सीमा शुल्क मुक्त, 3 आयुर्वेदिक एम्स, बनेंगे सात हाईस्पीड रेल कॉरिडोर

    आयकर स्लैब में बदलाव नहीं, कैंसर की 17 दवाइयां सीमा शुल्क मुक्त, 3 आयुर्वेदिक एम्स, बनेंगे सात हाईस्पीड रेल कॉरिडोर


    नई दिल्‍ली।
    केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Union Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने रविवार को लोकसभा (Lok Sabha) में केंद्रीय बजट 2026-27 (Union Budget 2026-27) पेश किया। नौवीं बार बजट पेश करते हुए वह संसद में 85 मिनट बोलीं, लेकिन आम आदमी के लिए कोई बड़ा ऐलान नहीं किया। हालांकि, आयकर दाखिल करने में सहूलियत, 7 रेलवे प्रोजेक्ट और तीन नए आयुर्वेदिक एम्स का प्रस्‍ताव बजट भाषण में किया है।

    वित्त मंत्री लोकसभा में तमिलनाडु की प्रसिद्ध कांजीवरम साड़ी पहनकर पहुंचीं जरूर, लेकिन साल 2026 होने वाले पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी चुनाव पर सीधा असर डालने वाली घोषणाएं नहीं कीं। इसके साथ ही बजट भाषण में कोई सीधा चुनावी ऐलान भी नहीं हुआ है।ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहले केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री ने जियो-पॉलिटिक्स और चुनौतियों की बात कही और देश का रक्षा बजट 6.81 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 7.85 लाख करोड़ रुपये कर दिया। इस तरह रक्षा बजट में कुल 15.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। रक्षा बजट की खास बात ये है कि हथियार खरीदी और सेना के आधुनिकीकरण पर पिछले साल के 1.80 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले इस बार 2.19 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। ये पूंजीगत खर्च में सीधे 22 फीसदी की बढ़ोतरी है।

    केंद्रीय वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा, “मरीजों, खासकर कैंसर से पीड़ित लोगों को राहत देने के लिए मैं 17 दवाओं पर बुनियादी सीमा शुल्क से छूट देने का प्रस्ताव करती हूं। सीतारमण ने कहा कि मैं दवाओं, मेडिसिन और खास मेडिकल मकसद के लिए इस्तेमाल होने वाले खाने के व्यक्तिगत आयात पर आयात शुल्क से छूट देने के मकसद से 7 और दुर्लभ बीमारियों को जोड़ने का भी प्रस्ताव करती हूं।” सीतारमण ने कहा, “मैं एक खास वन-टाइम उपाय के तौर पर विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में योग्य विनिर्माण इकाइयां को घरेलू टैरिफ एरिया में रियायती ड्यूटी दरों पर बिक्री करने की सुविधा देने का प्रस्ताव करती हूं। वित्‍त मंत्री ने कहा कि ऐसी बिक्री की मात्रा उनके निर्यात के एक तय अनुपात तक सीमित होगी।”

    वित्त मंत्री ने केंद्रीय बजट 2026-27 को लोकसभा में पेश करते हुए अपने बजट भाषण में कहा, “रक्षा क्षेत्र की यूनिट्स द्वारा मेंटेनेंस, रिपेयर या ओवरऑल जरूरतों के लिए इस्तेमाल होने वाले एयरक्राफ्ट के पार्ट्स बनाने के लिए इंपोर्ट किए जाने वाले कच्चे माल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट देने का प्रस्ताव है।” सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए कहा, “मैं लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम, जिसे एलआरएस के नाम से जाना जाता है, के तहत शिक्षा और मेडिकल मकसद से टीसीएस दर को 5 फीसदी से घटाकर 2 फीसदी करने का प्रस्ताव करती हूं।” केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए सीतारमण ने कहा, “…सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी) के मुकाबले कर्ज का अनुपात जीडीपी का 55.6 फीसदी रहने का अनुमान है।”

    सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, “मैं बैटरी के लिए लिथियम-आयन सेल बनाने में इस्तेमाल होने वाले कैपिटल गुड्स पर दी गई बेसिक कस्टम ड्यूटी छूट को बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के लिए लिथियम-आयन सेल बनाने में इस्तेमाल होने वाले कैपिटल गुड्स तक बढ़ाने का प्रस्ताव करती हूं। उन्‍होंने कहा क‍ि मैं सोलर ग्लास बनाने में इस्तेमाल होने वाले सोडियम एंटीमोनेट के इंपोर्ट पर बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट देने का प्रस्ताव करती हूं।”

    सीतारमण ने बजट भाषण में कहा, “केंद्रीय बजट 2026-27 में मैं सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव करती हूं।” केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा, “पर्यावरण के लिहाज़ से टिकाऊ पैसेंजर सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए हम शहरों के बीच ग्रोथ कनेक्टर के तौर पर 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाएंगे, जिसमें मुंबई से पुणे, पुणे से हैदराबाद, हैदराबाद से बेंगलुरु, हैदराबाद से चेन्नई, चेन्नई से बेंगलुरु, दिल्ली से वाराणसी, वाराणसी से सिलीगुड़ी शमिल है।”

    सीतारमण ने कहा, “भारत को मेडिकल टूरिज्म हब के तौर पर बढ़ावा देने के लिए मैं राज्यों को देश में 5 रीजनल हब स्थापित करने में मदद करने के लिए एक योजना का प्रस्ताव करती हूं।” केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा, “नारियल उत्पादन में कॉम्पिटिशन को और बढ़ाने के लिए मैं एक नारियल संवर्धन योजना का प्रस्ताव करती हूं, ताकि अलग-अलग तरीकों से उत्पादन बढ़ाया जा सके और उत्पादकता बेहतर हो सके। इसमें मुख्य नारियल उगाने वाले राज्यों में बेकार पेड़ों की जगह नई किस्म के पौधे लगाना शामिल है।

    उन्‍होंने कहा कि भारतीय काजू और कोको के लिए एक खास प्रोग्राम का प्रस्ताव है, ताकि भारत कच्चे काजू और नारियल के उत्पादन और प्रोसेसिंग में आत्मनिर्भर बन सके, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़े और 2030 तक भारतीय काजू और भारतीय कोको को प्रीमियम ग्लोबल ब्रांड में बदला जा सके।”

    केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बजट पेश करते हुए कहा, “…मैं भविष्य के चैंपियन बनाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का एमएसएमई ग्रोथ फंड बनाने का प्रस्ताव करती हूं।” सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, “…2025 में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के लिए एक योजना शुरू की गई थी। अब हम ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों को समर्पित रेयर-अर्थ कॉरिडोर स्थापित करने में मदद करने का प्रस्ताव देते हैं।”

    आधारभूत संरचना पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, “…हम 5 लाख से ज्‍यादा आबादी वाले शहरों, यानी टियर-2 और टियर-3 शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास जारी रखेंगे।” सीतारमण ने कहा, “…हाई-वैल्यू, टेक्नोलॉजी-एडवांस्ड सीआईई की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने के लिए कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट को बेहतर बनाने की एक योजना शुरू की जाएगी। इसमें आग बुझाने के उपकरण से लेकर लिफ्ट और टनल बोरिंग मशीन तक शामिल हो सकते हैं।”

    केंद्रीय वित्त मंत्री कहा, “…मैं चुनौती मोड में मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने का प्रस्ताव करती हूं। मैं खादी और हथकरघा को मजबूत करने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल शुरू करने का प्रस्ताव करती हूं।” सीतारमण ने कहा, “पर्यावरण के लिहाज़ से टिकाऊ कार्गो मूवमेंट को बढ़ावा देने के लिए, मैं पूर्व में डंकुनी को पश्चिम में सूरत से जोड़ने वाले नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव करती हूं, अगले 5 सालों में 20 नए जलमार्ग चालू किए जाएंगे, जिसकी शुरुआत ओडिशा में नेशनल वॉटरवे 5 से होगी, जो तालचेर और अंगुल के खनिज-समृद्ध इलाकों और कलिंगनगर जैसे औद्योगिक केंद्रों को पारादीप और धमरा बंदरगाहों से जोड़ेगा। वाराणसी और पटना में भी अंतर्देशीय जलमार्गों के लिए एक शिप रिपेयर इकोसिस्टम स्थापित किया जाएगा…।”

    केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा, “जब से हमने 12 साल पहले सत्ता संभाली है, देश की आर्थिक स्थिति स्थिरता, वित्तीय अनुशासन, लगातार विकास और कम महंगाई से पहचानी गई है। उन्‍होंने कहा कि ये उन सोच-समझकर लिए गए फैसलों का नतीजा है, जो हमने अनिश्चितता और मुश्किल समय में भी लिए हैं।”

    सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, “आत्मनिर्भरता को अपना मार्गदर्शक मानते हुए, हमने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, ऊर्जा सुरक्षा बनाई है और जरूरी आयात पर निर्भरता कम की है। इसके साथ ही हमने यह भी सुनिश्चित किया है कि सरकार के हर काम से नागरिकों को फायदा हो। रोज़गार पैदा करने, कृषि उत्पादकता, परिवारों की खरीदने की शक्ति और लोगों को यूनिवर्सल सर्विस देने के लिए सुधार किए गए हैं। इन उपायों से लगभग 7 फीसदी की हाई ग्रोथ रेट मिली है और हमें गरीबी कम करने और हमारे लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में काफी मदद मिली है।”

    केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा, “…हम इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 लॉन्च करेंगे और टेक्नोलॉजी और स्किल्ड वर्कफोर्स डेवलप करने के लिए इंडस्ट्री-लेड रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर्स पर भी फोकस करेंगे।” सीतारमण ने कहा कि हमने सुनिश्चित किया है कि किसानों, अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों, युवाओं, महिलाओं, गरीबों को लाभ मिलता रहे। यह युवा शक्ति से प्रेरित बजट है। हमारी सरकार का संकल्प गरीब, हाशिए पर पड़े लोगों पर ध्यान देना है।

    उन्‍होंने कहा कि कर्तव्य भवन में यह बजट बना है। पहला कर्तव्य है- आर्थिक विकास को सतत तरीके से बढ़ाना। दूसरा कर्तव्य है- जनआकांक्षाओं को पूरा करना। तीसरा कर्तव्य है- सबका साथ, सबका विकास। यह सुनिश्चित करना कि सभी को संसाधनों, सुविधाओं और अवसरों तक समान रूप से पहुंच मिले। केंद्रीय बजट 2026-27 की फिजिकल कॉपी संसद में लाई गईं।

    सीतारमण ने लोकसभा में अपना रिकॉर्ड नौवां बजट पेश करने से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। परंपरा के अनुसार राष्ट्रपति ने वित्त मंत्री सीतारमण को दही-चीनी खिलाई। राष्ट्रपति भवन जाने से पहले सीतारमण ने कर्तव्य भवन स्थित अपने कार्यालय के सामने अपने बजट दल के साथ तस्वीर खिंचवाई। ‘मैजेंटा’ रंग की रेशमी साड़ी पहने सीतारमण ने राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न वाले एक लाल ‘पाउच’ (थैले) में टैबलेट पकड़ा था। निर्मला सीतारमण ने 2019 में स्थापित की गई अपनी परंपरा को जारी रखते हुए बजट भाषण को ‘बही-खाते’ में ले जाना जारी रखा। ‘ब्रीफकेस’ की परंपरा को छोड़ने के बाद इसकी शुरुआत की गई थी।

  • नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 24 घंटे उड़ानें शुरू

    नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 24 घंटे उड़ानें शुरू


    मुंबई।
    नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (Navi Mumbai International Airport) से यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत और खुशखबरी सामने आई है। अब यह हवाई अड्डा 12 घंटे के बजाय पूरे 24 घंटे संचालित (Operated 24 hours) होगा। आज यानी 01 फरवरी से नवी मुंबई एयरपोर्ट पर चौबीसों घंटे विमान सेवाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। इससे पहले यह एयरपोर्ट केवल सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक ही कार्यरत था।

    बता दें कि यात्रियों के लिए इसकी शुरुआत 25 दिसंबर से की गई थी। शुरुआत में सीमित समय और सीमित उड़ानों के साथ परिचालन शुरू किया गया था, लेकिन अब परिचालन समय बढ़ाए जाने से उड़ानों की संख्या में तेजी से इजाफा होने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि मुंबई महानगर क्षेत्र पर हवाई यातायात का दबाव भी कम होगा।


    प्रति घंटे लगभग 10 विमानों की आवाजाही

    हालांकि फिलहाल देर रात और आधी रात की उड़ानों का आधिकारिक शेड्यूल घोषित नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक जल्द ही मध्यरात्रि की सेवाएं भी शुरू कर दी जाएंगी। वर्तमान समय में नवी मुंबई एयरपोर्ट से आखिरी उड़ान रात 9 बजकर 50 मिनट पर रवाना होती है, जबकि पहली उड़ान सुबह 7 बजकर 10 मिनट पर संचालित की जाती है। 24 घंटे की अनुमति मिलने के बाद एयरलाइंस कंपनियां अपने स्लॉट्स धीरे-धीरे बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं।

    विमानन उद्योग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि मार्च के अंत में जब एयरलाइंस का समर शेड्यूल लागू होगा, तब नवी मुंबई एयरपोर्ट पर उड़ानों की संख्या में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। फिलहाल जहां प्रति घंटे लगभग 10 विमानों की आवाजाही हो रही है, वहीं अप्रैल महीने तक यह संख्या बढ़कर 20 प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।


    सिर्फ 19 दिनोंमें एक लाख यात्रियों ने किया सफर

    अभी तक एयरपोर्ट पर केवल दो अतिरिक्त विमानों को शामिल किया गया है, लेकिन आने वाले दिनों और हफ्तों में कई विमानन कंपनियां नवी मुंबई एयरपोर्ट से अपनी उड़ानों की संख्या बढ़ा सकती हैं। इससे घरेलू के साथ-साथ भविष्य में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के रास्ते भी खुलेंगे। नवी मुंबई एयरपोर्ट ने 12 जनवरी को एक अहम परिचालन उपलब्धि भी हासिल की थी। एयरपोर्ट के शुरू होने के महज 19 दिनों के भीतर ही एक लाख यात्रियों ने यहां से सफर किया था, जो इसकी लोकप्रियता और उपयोगिता को दर्शाता है।

    देश के विमानन ढांचे को करेगा मजबूत
    वैश्विक स्तर पर अगर देखा जाए तो यूरोप और अमेरिका में कई हवाई अड्डों पर रात के समय उड़ानों पर प्रतिबंध होता है। आमतौर पर शोर प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वहां रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक एयरपोर्ट बंद रहते हैं। इस दौरान यदि कोई यात्री फंस जाता है तो उसे टर्मिनल छोड़ना पड़ता है। इसके विपरीत भारत के प्रमुख हवाई अड्डे 24 घंटे खुले रहते हैं, जिससे यात्रियों को रात के समय भी सुरक्षित स्थान उपलब्ध होता है। नवी मुंबई एयरपोर्ट का 24×7 संचालन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो यात्रियों की सुविधा, एयरलाइंस की क्षमता और देश के विमानन ढांचे को मजबूत करेगा।

  • रिक्शा चालक पिता की बेटी से अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टार तक, अनुराधा देवी थोकचोम की संघर्ष और स्वर्णिम सफलता की कहानी

    रिक्शा चालक पिता की बेटी से अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टार तक, अनुराधा देवी थोकचोम की संघर्ष और स्वर्णिम सफलता की कहानी

    नई दिल्ली। मणिपुर बीते कुछ वर्षों में भारतीय खेल जगत का मजबूत केंद्र बनकर उभरा है। इस छोटे से राज्य ने देश को कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं, जिन्होंने अपने जज्बे और मेहनत से भारत का नाम रोशन किया। इन्हीं नामों में एक है अनुराधा देवी थोकचोम, जिन्होंने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारतीय महिला हॉकी में अपनी अलग पहचान बनाई। अनुराधा न सिर्फ एक बेहतरीन खिलाड़ी रहीं, बल्कि उनकी जिंदगी की कहानी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है।

    गरीबी से निकला हौसले का सफर
    अनुराधा देवी थोकचोम का जन्म 2 फरवरी 1989 को मणिपुर के तौबुल गांव में हुआ। उनके पिता थोकचोम चुरामणि पेशे से रिक्शा चालक थे और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद साधारण थी। खेती और मछली पालन से जुड़े इस परिवार में तीन बच्चे थे। बड़े भाई फुटबॉल खेलते थे और खेल का माहौल घर में पहले से मौजूद था। हालांकि मणिपुर में फुटबॉल ज्यादा लोकप्रिय रहा है, लेकिन अनुराधा ने बहुत कम उम्र में हॉकी को अपना सपना बना लिया।

    हॉकी स्टिक से बदली किस्मत
    भाई-बहनों के मार्गदर्शन और अपने जिद्दी इरादों के चलते अनुराधा ने हॉकी स्टिक थामी। उन्होंने तोबुल यूथ क्लब से अपने करियर की शुरुआत की और बाद में इम्फाल स्थित पोस्टीरियर हॉकी अकादमी में प्रशिक्षण लिया। संसाधनों की कमी के बावजूद उनका अनुशासन और मेहनत जल्द ही रंग लाने लगी और वे राज्य स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गईं।

    अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकी अनुराधा
    2006 में महिला हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी के जरिए अनुराधा ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी में पदार्पण किया। फॉरवर्ड के रूप में खेलते हुए उन्होंने भारतीय टीम के लिए 80 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। 2014-15 महिला हॉकी वर्ल्ड लीग में उनके शानदार प्रदर्शन की खूब सराहना हुई, जहां भारत ने पांचवां स्थान हासिल कर रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया। 2016 के रियो ओलंपिक में भारतीय महिला टीम की 36 साल बाद वापसी में भी अनुराधा टीम का अहम हिस्सा रहीं।

    एशिया में पदक, करियर का स्वर्णिम अध्याय
    अनुराधा 2013 क्वालालंपुर एशिया कप में कांस्य पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा रहीं। इसके बाद 2016 में सिंगापुर में आयोजित एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाली टीम में शामिल होकर उन्होंने अपने करियर को यादगार बना दिया। इसी ऐतिहासिक जीत के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास ले लिया।

    खेल के बाद नई जिम्मेदारी
    हॉकी को अलविदा कहने के बाद अनुराधा देवी थोकचोम वर्तमान में भारतीय रेलवे के लिपिक विभाग में कार्यरत हैं। उनका सफर यह साबित करता है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो गरीबी भी प्रतिभा की राह नहीं रोक सकती। अनुराधा आज भी मणिपुर और देश की युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं।

  • सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, एम्स जोधपुर में हुई विशेषज्ञ जांच, मेडिकल रिपोर्ट तलब

    सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, एम्स जोधपुर में हुई विशेषज्ञ जांच, मेडिकल रिपोर्ट तलब


    नई दिल्ली । जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद सोनम वांगचुक की तबीयत को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट के निर्देश पर शनिवार सुबह कड़ी पुलिस सुरक्षा में सोनम वांगचुक को एम्स जोधपुर ले जाया गया, जहां गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में उनकी करीब डेढ़ घंटे तक विस्तृत चिकित्सकीय जांच की गई। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से पेट दर्द, गैस और गैस्ट्रो से जुड़ी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं और सामान्य इलाज से उनकी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हो रहा है।

    सोनम वांगचुक 27 सितंबर 2025 से जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि जेल में उपलब्ध खराब गुणवत्ता वाले पानी के कारण उनके मुवक्किल की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। कोर्ट को यह भी बताया गया कि वांगचुक को लगातार पेट से जुड़ी परेशानियां हो रही हैं और जेल में दिया जा रहा सामान्य इलाज उनकी बीमारी के लिए पर्याप्त नहीं है।

    इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जेल प्रशासन को निर्देश दिए थे कि सोनम वांगचुक को किसी विशेषज्ञ डॉक्टर, विशेष रूप से गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट को दिखाया जाए। इसी आदेश के तहत शनिवार को उन्हें एम्स जोधपुर ले जाया गया। एम्स सूत्रों के अनुसार, डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन किया और जरूरी मेडिकल टेस्ट किए। जांच के बाद उन्हें वापस जोधपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया।

    गौरतलब है कि सोनम वांगचुक को शुक्रवार को भी मेडिकल जांच के लिए एम्स जोधपुर लाया गया था। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति पर नजर रखते हुए आवश्यक जांचें की थीं। अब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट 2 फरवरी तक अदालत में पेश की जाए, ताकि आगे की कार्रवाई उसी रिपोर्ट के आधार पर तय की जा सके।

    यह मामला सुप्रीम कोर्ट में सोनम वांगचुक की पत्नी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि वांगचुक की सेहत लगातार गिरती जा रही है और जेल की मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाएं उनकी बीमारी के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि कैदियों के स्वास्थ्य से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता और जरूरत पड़ने पर उन्हें विशेषज्ञ इलाज उपलब्ध कराना जेल प्रशासन की जिम्मेदारी है।

    इससे पहले हुई सुनवाई में जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने जेल अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिया था कि सोनम वांगचुक की जांच गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट से कराई जाए। राजस्थान सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कोर्ट को बताया था कि पिछले चार महीनों में जेल के डॉक्टरों द्वारा सोनम वांगचुक की 21 बार जांच की जा चुकी है और 26 जनवरी को भी उनकी मेडिकल जांच हुई थी। हालांकि कपिल सिब्बल ने इस दलील पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि सामान्य जांच पर्याप्त नहीं है क्योंकि समस्या की जड़ जेल का खराब पानी है। अब सभी की निगाहें सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसे सुप्रीम कोर्ट में पेश किया जाएगा और जिसके आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा।

  • Budget 2026: निर्मला सीतारमण के एक के बाद एक बड़े ऐलान, जानिए किस सेक्टर को मिला क्या?

    Budget 2026: निर्मला सीतारमण के एक के बाद एक बड़े ऐलान, जानिए किस सेक्टर को मिला क्या?


    नई दिल्ली । संसद के भीतर जैसे ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण शुरू किया, देश की अर्थव्यवस्था की दिशा पर सबकी नजरें टिक गईं। बजट 2026 में उन्होंने एक के बाद एक ऐसे ऐलान किए, जिनका असर सीधे आम आदमी से लेकर उद्योग, स्टार्टअप, MSME और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर तक दिखने वाला है। कहीं मैन्युफैक्चरिंग को नई रफ्तार देने की बात हुई, तो कहीं शहरों को आर्थिक हब बनाने का रोडमैप सामने आया। आइए, बजट 2026 के बड़े ऐलानों पर नजर डालते हैं।
    बायोफॉर्मा शक्ति मिशन की शुरुआत: सरकार ने अगले पांच वर्षों के लिए 10,000 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ बायोफॉर्मा शक्ति पहल शुरू करने का ऐलान किया है, जिसका मकसद देश की बायोफार्मा क्षमताओं को नई मजबूती देना है।
    हाईटेक टूल रूम और माइनिंग कॉरिडोर: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि दो अत्याधुनिक टूल रूम स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही केरल और तमिलनाडु में नए माइनिंग कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे, जिससे औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
    इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0: सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 लॉन्च करने की घोषणा की है। इसके तहत तकनीकी क्षमता बढ़ाने और कुशल मानव संसाधन तैयार करने के लिए उद्योग के नेतृत्व वाले रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर्स पर खास फोकस रहेगा।
    चार राज्यों में रेयर अर्थ कॉरिडोर ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज संपन्न राज्यों में समर्पित रेयर-अर्थ कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि दुर्लभ मृदा खनिजों और स्थायी चुम्बकों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके।
    SME ग्रोथ फंड का ऐलान: छोटे और मझोले उद्यमों को सशक्त बनाने के लिए बजट 2026 में 10,000 करोड़ रुपये का विशेष SME ग्रोथ फंड प्रस्तावित किया गया है, जिससे रोजगार सृजन होगा और चयनित मानदंडों पर खरे उतरने वाले MSME को प्रोत्साहन मिलेगा।