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  • अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार बन सकती हैं महाराष्ट्र की डिप्टी CM, नेताओं ने की अहम मुलाकात

    अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार बन सकती हैं महाराष्ट्र की डिप्टी CM, नेताओं ने की अहम मुलाकात

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद राजनीतिक हलकों में सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाने की अटकलें तेज हो गई हैं। इस सिलसिले में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, धनंजय मुंडे और सुनील तटकरे ने सुनेत्रा पवार से अहम मुलाकात की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम महाराष्ट्र की राजनीति में संतुलन बनाए रखने और पार्टी के समन्वय को कायम रखने के उद्देश्य से उठाया जा सकता है।

    सुनेत्रा पवार के लिए डिप्टी सीएम पद पर विचार

    सूत्रों के मुताबिक, सुनेत्रा पवार को महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम पद का प्रस्ताव दिया जा सकता है। संभावना जताई जा रही है कि वह अपने दिवंगत पति अजित पवार की सीट से आगामी चुनाव में हिस्सा लें। इसके साथ ही खबर है कि प्रफुल्ल पटेल को एनसीपी का अध्यक्ष बनाए जाने पर भी विचार किया जा रहा है। इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय और आगे की चर्चा के लिए वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करेंगे। वहीं, इस बैठक में एनसीपी (एसपी) के विलय और संगठनात्मक मुद्दों पर भी बातचीत होने की संभावना है।

    हादसा जिसने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर दिया

    गौरतलब है कि महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का विमान बुधवार को बारामती में क्रैश हो गया, जिसमें उनके साथ कुल पांच लोगों की जान चली गई। हादसे में विमान में मौजूद एक सुरक्षाकर्मी, दो पायलट और एक महिला क्रू मेंबर भी मारे गए। अजित पवार पुणे में होने वाले जिला परिषद चुनावों के लिए रैलियों को संबोधित करने जा रहे थे।

    सुबह मुंबई से बारामती के लिए रवाना हुए विमान का लैंडिंग के दौरान कंट्रोल गड़बड़ हो गया। चश्मदीदों ने बताया कि विमान लड़खड़ाया और पल भर में क्रैश का शिकार हो गया। क्रैश के बाद विमान आग के गोले में बदल गया और पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया। इस दर्दनाक हादसे ने न केवल परिवार को शोक में डुबो दिया, बल्कि राज्य की राजनीति में भी भूचाल ला दिया।

    राजनीति में संतुलन और पार्टी नेतृत्व की चुनौती

    राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस दुखद हादसे के बाद एनसीपी और अन्य सहयोगी दलों के लिए संतुलन बनाए रखना और नेतृत्व संरचना को मजबूत करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में सुनेत्रा पवार का डिप्टी सीएम बनना राजनीतिक स्थिरता और पार्टी की भावी रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

  • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन विवाद हाई कोर्ट तक पहुँचा, अधिकारियों के निलंबन और CBI जांच की मांग

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन विवाद हाई कोर्ट तक पहुँचा, अधिकारियों के निलंबन और CBI जांच की मांग

    नई दिल्ली। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और माघ मेला प्रशासन के बीच उत्पन्न विवाद अब इलाहाबाद हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। याचिका में 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के दिन घटित घटना की CBI जांच कराने की मांग की गई है। यह मामला धार्मिक भावनाओं, प्रशासनिक हस्तक्षेप और नाबालिगों के अधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है।

    अधिवक्ता गौरव द्विवेदी ने मुख्य न्यायमूर्ति के समक्ष लेटर पिटीशन दाखिल की है। याचिकाकर्ता का दावा है कि माघ मेला सनातन धर्म का अत्यंत पवित्र उत्सव है, जिसमें मौनी अमावस्या का संगम स्नान सर्वोच्च धार्मिक महत्व रखता है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जब अपने शिष्यों के साथ पालकी में सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे, तब मेला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने उन्हें जबरन पालकी से उतार दिया और पैदल स्नान करने का निर्देश दिया।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि स्वामीजी के साथ चल रहे 11 से 14 वर्ष आयु के नाबालिग बटुकों को हिरासत में लिया गया, उनके साथ कथित मारपीट की गई और उनकी शिखा (चोटी) पकड़कर घसीटा गया। याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया है कि नाबालिगों के साथ इस प्रकार का व्यवहार जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन) एक्ट का उल्लंघन करता है और यह दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

    याचिका में यह भी उल्लेख है कि बटुकों की शिखा खींचना सनातन धर्म की धार्मिक भावनाओं का अपमान है। मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पद और शंकराचार्य नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए थे, जबकि याचिकाकर्ता का कहना है कि शंकराचार्य की नियुक्ति की मान्य धार्मिक प्रक्रिया अखाड़ों और काशी विद्वत परिषद के माध्यम से होती है। प्रशासन को इस प्रक्रिया या पद की वैधता पर प्रश्न उठाने का अधिकार नहीं है।

    अधिवक्ता ने कोर्ट से मांग की है कि मामले की तुरंत CBI जांच करवाई जाए, मेला और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ निलंबन किया जाए, और नाबालिग बटुकों के साथ मारपीट करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए।

    धार्मिक अधिकारों और नाबालिग सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह याचिका हाई कोर्ट में विचाराधीन है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि प्रशासनिक हस्तक्षेप ने न केवल धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाई, बल्कि छोटे बच्चों के अधिकारों का भी उल्लंघन किया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता, प्रशासनिक दखल और बाल सुरक्षा का संगम है और इसका निर्णय पूरे धार्मिक और प्रशासनिक तंत्र के लिए एक मिसाल साबित हो सकता है। कोर्ट से उम्मीद जताई जा रही है कि CBI जांच और अधिकारियों के निलंबन के निर्देश जल्द जारी होंगे।

  • महिला-नेतृत्व वाले विकास पर सरकार का फोकस, ब्लू इकोनॉमी में भारत की बड़ी छलांग: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

    महिला-नेतृत्व वाले विकास पर सरकार का फोकस, ब्लू इकोनॉमी में भारत की बड़ी छलांग: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

    नई दिल्ली | संसद के बजट सत्र की शुरुआत बुधवार, 28 जनवरी से औपचारिक रूप से हो गई। सत्र की शुरुआत संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण से हुई। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने महिला-नेतृत्व वाले विकास, ब्लू इकोनॉमी, आत्मनिर्भर भारत और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया।

    ब्लू इकोनॉमी में भारत की मजबूती

    राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन चुका है, जो ब्लू इकोनॉमी में देश की मजबूत स्थिति को दर्शाता है।
    उन्होंने बताया कि दूध उत्पादन में भारत विश्व में अग्रणी है, जो सहकारी आंदोलन की बड़ी सफलता का परिणाम है।

    विकास और न्याय व्यवस्था पर जोर

    राष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी न्याय व्यवस्था की असली सफलता इस बात से आंकी जाती है कि वह नागरिकों में सुरक्षा और भरोसे की भावना कितनी मजबूत करती है।
    उन्होंने कहा कि सरकार अविकसित क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

    ग्रामीण रोजगार और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण

    राष्ट्रपति मुर्मु ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने के लिए ‘विकसित भारत जी राम जी’ कानून लागू किया गया है, जिसके तहत गांवों में 125 दिनों के गारंटीड रोजगार का प्रावधान किया गया है।
    उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और लीकेज रोकने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं, जिससे किसानों, पशुपालकों और मछुआरों को नए अवसर मिलेंगे।

    राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद पर सख्त रुख

    राष्ट्रपति ने कहा कि सिंधु जल संधि का निलंबन आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई का हिस्सा है।
    उन्होंने बताया कि मिशन सुदर्शन चक्र के जरिए देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत किया जा रहा है और माओवादी आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों ने निर्णायक कार्रवाई की है।

    महिला-नेतृत्व वाले विकास की ओर भारत

    राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि सरकार का मानना है कि देश का विकास तभी संभव है जब सभी को समान अवसर मिलें।
    इसी सोच के साथ भारत आज महिला-नेतृत्व वाले विकास के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है।
    उन्होंने बताया कि सरकार जल्द ही 3 करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य हासिल करने जा रही है, जिससे महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी।

    आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया

    राष्ट्रपति ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बने उत्पाद आज वैश्विक बाजारों तक पहुंच रहे हैं।
    स्वदेशी उत्पादों को लेकर देशवासियों में उत्साह बढ़ा है और भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    एआई और डीपफेक पर चेतावनी

    राष्ट्रपति मुर्मु ने एआई के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि डीपफेक, गलत सूचना और फर्जी कंटेंट लोकतंत्र, सामाजिक सद्भाव और जनता के भरोसे के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं।
    उन्होंने इस विषय पर गंभीर और सतर्क रहने की जरूरत पर जोर दिया।

    नारी शक्ति की ऐतिहासिक उपलब्धि

    राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार की नीतियों के चलते महिलाएं देश के हर महत्वाकांक्षी क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
    उन्होंने याद दिलाया कि हाल ही में नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) से महिला कैडेट्स का पहला बैच पास आउट हुआ, जो नारी शक्ति की बढ़ती भूमिका का प्रतीक है।

    युवाओं, स्टार्टअप और सामाजिक सुरक्षा पर फोकस

    राष्ट्रपति ने बताया कि—

    60 हजार युवाओं को सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए प्रशिक्षण दिया गया

    10 लाख युवाओं को एआई के लिए ट्रेन किया जा रहा है

    सोशल सिक्योरिटी योजनाओं का दायरा 25 करोड़ से बढ़कर 95 करोड़ लोगों तक पहुंचा

    मुद्रा योजना के तहत 38 लाख करोड़ रुपये जारी किए गए और 12 करोड़ लोन दिए गए

    पीएम स्वनिधि योजना से 72 लाख लोगों को 16 लाख करोड़ रुपये की मदद मिली

    देश में करीब 2 लाख स्टार्टअप पंजीकृत हैं, जिनमें 20 लाख से अधिक लोग काम कर रहे हैं और लगभग 40 फीसदी स्टार्टअप्स में महिला डायरेक्टर हैं

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारत महिला-नेतृत्व वाले विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और ब्लू इकोनॉमी में बड़ी छलांग लगा चुका है।
    सरकार की नीतियों से रोजगार, सुरक्षा, स्टार्टअप और महिला सशक्तीकरण को नई मजबूती मिली है।

  • यूजीसी के नए नियमों पर छात्र राजनीति गरम: NSUI ने मांगी जजों की भागीदारी ABVP ने कहा- भ्रांतियां दूर करे आयोग

    यूजीसी के नए नियमों पर छात्र राजनीति गरम: NSUI ने मांगी जजों की भागीदारी ABVP ने कहा- भ्रांतियां दूर करे आयोग


    नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग UGC द्वारा जारी उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु विनियम 2026 को लेकर देश के दो सबसे बड़े छात्र संगठनों NSUI और ABVP ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। जहां दोनों संगठनों ने कैंपस में जाति आधारित भेदभाव को खत्म करने के उद्देश्य का स्वागत किया है वहीं इसके कार्यान्वयन और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल भी उठाए हैं।

    NSUI की मांग कागजी नहीं जवाबदेह बने समिति

    कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया ने नियमों का स्वागत तो किया लेकिन इन्हें अधूरा बताया है। संगठन का कहना है कि भेदभाव विरोधी समितियां विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रभाव से मुक्त होनी चाहिए। रिटायर्ड जजों की एंट्री: NSUI ने मांग की है कि समितियों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए इसमें कार्यरत या सेवानिवृत्त न्यायाधीशोंको शामिल किया जाना चाहिए।

    प्रतिनिधित्व की शर्त: संगठन के अनुसार समिति में एससी एसटी और ओबीसी वर्ग के छात्रों और शिक्षकों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य होना चाहिए। प्रशासन पर निशाना ने आशंका जताई कि स्पष्ट संरचना के अभाव में ये समितियां विश्वविद्यालय प्रशासन की कठपुतली बन सकती हैं जिससे न्याय का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा। जवाबदेही: संगठन ने मांग की है कि आरक्षण नीतियों और रिक्त पदों NFS के कारण खाली के मामले में दोषियों की जवाबदेही तय की जाए।

    ABVP का रुख संवाद और स्पष्टता की जरूरत

    वहीं आरएसएस समर्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने यूजीसी के नियमों में अस्पष्टता और शब्दावली को लेकर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि नियमों को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रांतियां पैदा हो रही हैं। भ्रांतियों का निवारण: ABVP के राष्ट्रीय महामंत्री वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि यूजीसी को तत्काल अधिसूचना के उन उपबंधों पर स्पष्टीकरण देना चाहिए जिनकी शब्दावली को लेकर समाज में भ्रम है। कोर्ट में पक्ष: चूंकि यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है इसलिए ABVP ने मांग की है कि यूजीसी को शीघ्र हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। मान अधिकार: परिषद का कहना है कि सभी संस्थानों को लोकतांत्रिक भावना का सम्मान करना चाहिए ताकि हर छात्र को समान अधिकार मिलें और कैंपस भेदभाव-मुक्त हो।

    क्या है UGC विनियम 2026
    यूजीसी ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति लिंग या अन्य आधारों पर होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें प्रत्येक संस्थान में एक प्रभावी निवारण तंत्र बनाने और समता को बढ़ावा देने के प्रावधान शामिल हैं। नों ही संगठनों का एक सुर में कहना है कि कैंपस में भेदभाव की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। हालांकि NSUI जहां संरचनात्मक बदलाव और न्यायिक हस्तक्षेप पर जोर दे रहा है वहीं ABVP वैधानिक स्पष्टता और प्रशासनिक जवाबदेही की मांग कर रहा है।
  • कर्नाटक कांग्रेस में कलह की गूंज: सिद्धारमैया की रैली में लगे डीके-डीके के नारे मुख्यमंत्री ने मंच से खोया आपाzz

    कर्नाटक कांग्रेस में कलह की गूंज: सिद्धारमैया की रैली में लगे डीके-डीके के नारे मुख्यमंत्री ने मंच से खोया आपाzz


    नई दिल्ली । कर्नाटक की सियासत में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच की अंदरूनी खींचतान मंगलवार को एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर नुमाया हो गई। बेंगलुरु में आयोजित एक विरोध रैली के दौरान मुख्यमंत्री उस वक्त बेहद असहज हो गए और अपना आपा खो बैठे जब उनके भाषण से ठीक पहले पार्टी कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने अपने चहेते नेता डीके शिवकुमार के पक्ष में जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।

    रैली का मंजर: जब सिद्धारमैया पर भारी पड़े डीके के नारे

    मंगलवार 27 जनवरी को बेंगलुरु में कांग्रेस ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ एक बड़ी रैली बुलाई थी। मंच पर दिग्गज नेताओं की मौजूदगी थी लेकिन माहौल तब बिगड़ गया जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पोडियम की ओर बढ़े: नारेबाजी की गूंज: जैसे ही सिद्धारमैया अपनी कुर्सी से उठे यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने “डीके डीके” के नारे लगाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते ये शोर इतना बढ़ा कि मुख्यमंत्री का भाषण शुरू होना मुश्किल हो गया।

    आपा खो बैठे सीएम: नारेबाजी से चिढ़कर सिद्धारमैया ने पहले शांति की अपील की लेकिन जब हंगामा नहीं थमा तो उन्होंने गुस्से में चिल्लाकर पूछा ये कौन है जो DK DK चिल्ला रहा है मंच से चेतावनी: स्थिति बिगड़ती देख मंच संचालक को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने यूथ कांग्रेस के नेताओं को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाते हुए कहा “हम जानते हैं आप कौन हैं शांति से मुख्यमंत्री की बात सुनिए।”

    मुद्दा पीछे छूटा गुटबाजी आई सामने

    यह रैली असल में केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की जगह नया मिशन लाने के प्रस्ताव के विरोध में थी। रैली में डीके शिवकुमार रणदीप सुरजेवाला और कई मंत्री भी मौजूद थे लेकिन नेतृत्व संघर्ष की छाया ने असल मुद्दे को गौण कर दिया। राजनीतिक गलियारों की चर्चा: विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल नारेबाजी नहीं थी बल्कि कर्नाटक कांग्रेस के भीतर चल रहे शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा है। कई विधायक और एमएलसी खुले तौर पर डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की लॉबिंग कर रहे हैं।

    नेतृत्व परिवर्तन पर क्या है स्थिति

    यद्यपि सिद्धारमैया बार-बार दावा कर रहे हैं कि वे अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा करेंगे और उन्हें आलाकमान का पूरा समर्थन प्राप्त है लेकिन मंगलवार की घटना ने साफ कर दिया कि पार्टी के भीतर एक बड़ा धड़ा डीके शिवकुमार के लिए बेताब है। हालांकि डीके शिवकुमार ने आधिकारिक तौर पर यही कहा है कि वे हाईकमान के हर फैसले को स्वीकार करेंगे पर उनके समर्थकों का उत्साह सिद्धारमैया की राह में रोड़े अटका रहा है।

  • अकीरा नंदन AI फिल्म केस: दिल्ली हाई कोर्ट का कड़ा रुख फर्जी सामग्री 72 घंटे में हटाने का आदेश

    अकीरा नंदन AI फिल्म केस: दिल्ली हाई कोर्ट का कड़ा रुख फर्जी सामग्री 72 घंटे में हटाने का आदेश


    नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI के बढ़ते दुरुपयोग और डीपफेक तकनीक पर दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने आंध्र प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री और सुपरस्टार पवन कल्याण के बेटे अकीरा नंदन की तस्वीर और नाम का इस्तेमाल कर बनाई गई AI फिल्म के प्रसारण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी की निजता और व्यक्तित्व के अधिकारों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    क्या है पूरा मामला

    अकीरा नंदन अकीरा देसाई की ओर से दायर याचिका में संभवमी स्टूडियोज एलएलपी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए थे बिना अनुमति फिल्म: स्टूडियो ने अकीरा की अनुमति के बिना उनकी इमेज का उपयोग कर लगभग एक घंटे की फिल्म बनाई और उसे यूट्यूब पर दुनिया की पहली ग्लोबल एआई फिल्म बताकर पोस्ट कर दिया। मनगढ़ंत सीन: याचिका में दावा किया गया कि फिल्म में AI के जरिए अकीरा के फर्जी रोमांटिक सीन दिखाए गए हैं जिससे उनकी प्रतिष्ठा और सामाजिक छवि को गहरा नुकसान पहुंचा है।अधिकारों का हनन: अकीरा के व्यक्तित्व आवाज और नाम का कमर्शियल उपयोग उनकी निजता के अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।

    दिल्ली हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणियाँ

    मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति तुषार राव गडेला की पीठ ने कहा एआई टूल्स का उपयोग करके किसी व्यक्ति को उसकी अनुमति के बिना मुख्य भूमिका में दिखाना और मनगढ़ंत सामग्री पेश करना उसके व्यक्तित्व के अधिकारों का उल्लंघन है। यदि इस पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई तो याचिकाकर्ता को ऐसी क्षति हो सकती है जिसकी भरपाई संभव नहीं होगी।

    अदालत का आदेश और टेक कंपनियों को निर्देश

    अदालत ने अकीरा के पक्ष में अंतरिम आदेश जारी करते हुए निम्नलिखित निर्देश दिए हैं: ब्रॉडकास्ट पर रोक: विवादित फिल्म के सर्कुलेशन और ब्रॉडकास्ट पर तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध। मेटा को निर्देश कोर्ट ने मेटा प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वह उल्लंघन करने वाले सभी URL की पहचान करे। 2 घंटे की डेडलाइन: संबंधित प्लेटफॉर्म्स को 72 घंटे के भीतर इस सामग्री को हटाने का आदेश दिया गया है। यदि स्टूडियो सामग्री नहीं हटाता है तो मेटा खुद इसे ब्लॉक/डिलीट करेगा। अगली सुनवाई: इस गंभीर विषय पर अब अगली सुनवाई 5 फरवरी 2026 को होगी।

    व्यक्तित्व अधिकार क्या हैं

    यह कानूनी अधिकार किसी प्रसिद्ध व्यक्ति को अपने नाम छवि आवाज या व्यक्तित्व की अन्य विशेषताओं को व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल होने से रोकने की शक्ति देता है। हाल के दिनों में अमिताभ बच्चन और अनिल कपूर जैसे सितारों ने भी अपने पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए कोर्ट से आदेश प्राप्त किए हैं।

  • चारधाम में नो एंट्री पर इमाम की दो टूक: मक्का-मदीना की तरह ,गंगोत्री के भी अपने नियम मुस्लिमों का वहां क्या काम?

    चारधाम में नो एंट्री पर इमाम की दो टूक: मक्का-मदीना की तरह ,गंगोत्री के भी अपने नियम मुस्लिमों का वहां क्या काम?

    नई दिल्ली । देवभूमि उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थलों बद्रीनाथ केदारनाथ और गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित करने की सुगबुगाहट ने देश के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर इसे लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है वहीं दूसरी ओर ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने इस संभावित फैसले का पुरजोर समर्थन कर सबको चौंका दिया है। इमाम इलियासी ने इसे पूरी तरह आस्था का विषय करार देते हुए तर्क दिया है कि जिस प्रकार इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल मक्का और मदीना में गैर-मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है उसी तरह हिंदू धर्मस्थलों को भी अपने नियम तय करने का पूरा अधिकार है।

    आस्था और मर्यादा की दलील इमाम उमर अहमद इलियासी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हर धर्मस्थल की अपनी गरिमा और मर्यादा होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक मुसलमान का गंगोत्री या केदारनाथ जैसे पवित्र सनातनी केंद्रों में क्या काम? उनके अनुसार यदि कोई मुस्लिम ऐसी जगहों पर जाता है जहां सदियों पुरानी सनातनी परंपराएं जुड़ी हैं तो वहां वैचारिक या शारीरिक टकराव की स्थिति बन सकती है। उन्होंने नसीहत दी कि मुसलमानों को दूसरे धर्मों की अत्यंत पवित्र जगहों पर जाने से परहेज करना चाहिए। इमाम ने तिरुपति बालाजी मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी इसी प्रकार के कड़े नियम लागू हैं और सभी समुदायों को एक-दूसरे के धार्मिक नियमों और सीमाओं का सम्मान करना चाहिए। उनके मुताबिक इस मुद्दे पर राजनीति करना व्यर्थ है क्योंकि यह सीधे तौर पर किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है।

    मंदिर समितियों की एकजुटता वर्तमान स्थिति यह है कि गंगोत्री मंदिर समिति ने पहले ही गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय ले लिया है। वहीं बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने सभी संबंधित हितधारकों और तीर्थ पुरोहितों के साथ इस विषय पर आम सहमति बना ली है। अब बस बोर्ड की बैठक में इसे औपचारिक रूप दिया जाना बाकी है। हालांकि समितियों ने यह स्पष्ट किया है कि सनातन धर्म में सच्ची आस्था रखने वाले किसी भी व्यक्ति का स्वागत किया जाएगा चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि का हो। दूसरी ओर हरिद्वार की गंगा सभा ने भी हर की पौड़ी पर इसी तरह की पाबंदी लगाने की मांग तेज कर दी है जिससे यह अभियान पूरे उत्तराखंड में फैलता दिख रहा है।

    सियासी घमासान और विरोध के स्वर जैसे-जैसे यह मामला चर्चा में आ रहा है उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे भारतीय जनता पार्टी की सोची-समझी रणनीति बताया है। उत्तराखंड कांग्रेस का आरोप है कि सरकार बेरोजगारी और महंगाई जैसे बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के भावनात्मक विवाद पैदा कर रही है। वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गंगोत्री जैसे ऊंचे और पवित्र स्थानों पर पहले से ही कोई मुसलमान नहीं जाता लेकिन वहां पहचान साबित करने जैसी अनिवार्य शर्तें लगाना समाज में नफरत का जहर घोलने जैसा है। फिलहाल उत्तराखंड सरकार ने इस संवेदनशील विषय पर फूंक-फूंक कर कदम रखने का संकेत दिया है और कहा है कि सभी मंदिर समितियों का पक्ष सुनने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।

  • Ajit Pawar Death: क्या करते हैं अजित पवार की पत्नी और बच्चे, जानें पॉलिटिक्स से किसका कितना कनेक्शन?

    Ajit Pawar Death: क्या करते हैं अजित पवार की पत्नी और बच्चे, जानें पॉलिटिक्स से किसका कितना कनेक्शन?

    नई दिल्ली | Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र के बारामती से जुड़ी एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है. यहां एक विमान दुर्घटना में एनसीपी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन हो गया है. खबर है कि यह हादसा बुधवार, 28 जनवरी 2026 को सुबह नौ बजे के बाद हुआ और इसमें कुल छह लोगों के मरने की बात कही जा रही है. इन्हीं खबरों के बीच यह जानना अहम हो जाता है कि अजित पवार का परिवार क्या करता है और उनका राजनीति से कैसा और कितना गहरा जुड़ाव रहा है.

    पवार परिवार और राजनीति की मजबूत जड़ें

    अजित पवार महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के देओलाली प्रवरा में जन्मे हैं. उनके पिता का नाम अनंतराव पवार और माता आशाताई पवार थीं. वह देश के वरिष्ठ नेता शरद पवार के भतीजे हैं. शरद पवार महाराष्ट्र के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों में गिने जाते हैं और चार बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. इसी वजह से पवार परिवार की पहचान दशकों से राजनीति के केंद्र में रही है.

    अजित पवार की पत्नी

    अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार न सिर्फ एक राजनीतिक चेहरा हैं, बल्कि संगठन और सामाजिक क्षेत्र में भी उनकी भूमिका रही है. वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़ी रही हैं और राज्यसभा सदस्य के रूप में भी काम कर चुकी हैं. इसके साथ ही सुनेत्रा पवार बारामती टेक्सटाइल कंपनी से भी जुड़ी रही हैं और पर्यावरण से जुड़े संगठनों में उनकी सक्रियता रही है. उन्हें पवार परिवार की रणनीतिक और शांत भूमिका निभाने वाली सदस्य माना जाता है.

    बड़ा बेटा जय पवार

    अजित पवार के बड़े बेटे जय पवार ने राजनीति के बजाय कारोबार का रास्ता चुना है. वह बिजनेस सेक्टर से जुड़े हुए हैं और पारिवारिक औद्योगिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी बताई जाती है. जय पवार सार्वजनिक राजनीति में सक्रिय नहीं दिखते, लेकिन आर्थिक और प्रबंधन से जुड़े मामलों में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है.

    पार्थ पवार

    अजित पवार के छोटे बेटे पार्थ पवार ने राजनीति में कदम रखा और लोकसभा चुनाव भी लड़ा. हालांकि उन्हें उस चुनाव में जीत नहीं मिल सकी, लेकिन उनकी राजनीतिक मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि नई पीढ़ी भी पवार परिवार की राजनीतिक विरासत से जुड़ी हुई है. पार्थ पवार युवाओं के बीच संपर्क और पार्टी कार्यक्रमों में सक्रिय नजर आते रहे हैं.

    शरद पवार परिवार से जुड़ा व्यापक नेटवर्क

    पवार परिवार सिर्फ अजित पवार तक सीमित नहीं है. शरद पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार स्वयं राज्यसभा सांसद रह चुकी हैं. उनके बेटे जय पवार और भतीजे-भतीजियां भी राजनीतिक और सामाजिक आयोजनों में सक्रिय रहते हैं. युगेंद्र पवार जैसे युवा चेहरे भी समय-समय पर सार्वजनिक मंचों पर नजर आते हैं, जिससे साफ होता है कि यह परिवार आने वाले समय में भी राजनीति में प्रभाव बनाए रखने की तैयारी में है.

  • अजित पवार महाराष्ट्र की सियासत के बेताज बादशाह, चाचा की छाया से निकलकर बनाई थी अपनी जगह

    अजित पवार महाराष्ट्र की सियासत के बेताज बादशाह, चाचा की छाया से निकलकर बनाई थी अपनी जगह

    नई दिल्ली | महाराष्ट्र के बारामती के पास एनसीपी नेता और डिप्टी सीएम अजित पवार का निजी विमान दुर्घटना में मौत हो गई है. लैंडिंग के दौरान विमान हादसा हुआ, जिसमें अजित पवार सहित विमान में सवार सभी लोगों की जान चली गई.

    सियासत के बेताज बादशाह कहे जाने वाले अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार की उंगली पकड़कर राजनीति में कदम रखा. वो अपनी राजनीतिक कौशल के जरिए पार्टी को महाराष्ट्र में मजबूत बनाया. पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर एनसीपी को एक बड़ा जनाधार तैयार करने में अहम रोल अदा किया, लेकिन 2022 में शरद पवार से अलग अपनी राजनीतिक लकीर खींची और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई.

    अजित पवार के पिता फिल्म जगत से जुड़े

    22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा में अपने दादा के घर जन्मे अजित पवार, शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवरा के बेटे हैं. उनके पिता फिल्म जगत से जुड़े हुए थे. अनंतराव ने मुंबई में मौजूद वी. शांताराम के राजकमल स्टूडियो में काम किया. अजित पवार की शादी सुनेत्रा पवार से हुई और उनके दो बच्चे हैं, जिनका नाम पार्थ पवार और जय पवार है,

    महाराष्ट्र एजुकेशन सोसायटी हाई स्कूल बारामती से अजित पवार ने प्राथमिक शिक्षा हासिल की, हालांकि, जब वो कॉलेज में थे तो उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी. इसके बाद सियासत में कदम रखा.

    शरद पवार की उंगली पकड़कर राजनीति में आए

    अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार की उंगली पकड़कर साल 1982 में राजनीति में कदम रखा. अजित पवार प्राथमिक शिक्षा की पढ़ाई कर रहे थे, तो उस दौरान उनके चाचा यानी शरद पवार एक दिग्गज सियासी नेता बन चुके थे. राजनीति में कदम रखने के बाद सबसे पहले उन्होंने एक सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड के लिए चुने लड़ा. वो पुणे सहकारी बैंक के अध्यक्ष के रूप में चुने गए, वो16 सालों तक इस पद पर काबिज रहे.

    साल 1991 में पहली बार बारामती संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुने गए, लेकिन बाद में उन्होंने यह सीट अपने चाचा शरद पवार के लिए खाली कर दी. इसके बाद शरद पवार केंद्र में पीवी नरसिम्हा राव सरकार में रक्षा मंत्री बने. यहीं से शरद पवार केंद्र की राजनीति में खुद को सक्रिय कर लिया तो अजित पवार महाराष्ट्र की सियासत की कमान अपने हाथ में ले ली.

    शरद पवार के सियासी वारिस बनकर उभरे

    अजित पवार ने अपनी मेहनत और लगन के बाद खुद को शरद पवार के सियासी वारिस के तौर पर महाराष्ट्र में स्थापित किया. महाराष्ट्र की राजनीति पर अपनी पकड़ मजबूत बना ली, इसके बाद साल 1995 में वो पहली बार पुणे जिले में बारामती विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक बने. इसके बाद से वो लगातार इस निर्वाचन क्षेत्र के विधायक चुने जाते रहे, उन्होंने साल 1995, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 में विधायक बने. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में खुद को स्थापित ही नहीं किया बल्कि अपनी पकड़ भी बनाई.

    विधायक से डिप्टी सीएम तक का सियासी सफर

    अजित पवार ने अपने 45 साल के सियासी सफर में एक बार सांसद और सात बार विधायक रहे. उन्होंने खुद को महाराष्ट्र के राजनीति तक सीमित रखा. सरकार में रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मंत्री पद संभालने का तजुर्बा है, उन्होंने राज्य सरकार में कृषि, ऊर्जा और योजना राज्य मंत्री के रूप में काम किया, उन्होंने सुधाकर नाइक की सरकार में कृषि और बिजली राज्य मंत्री के रूप में काम किया, इसके बाद जब उनके चाचा शरद पवार 1992 और 1993 में मुख्यमंत्री बने तो उन्हें मंत्री बनाया गया.

    साल 1999 में जब कांग्रेस और एनसीपी सत्ता में आई तो उन्हों विलासराव देशमुख की सरकार सिंचाई मंत्री का कार्यभार सौंपा गया. वहीं, साल 2003-2004 में सुशील कुमार शिंदे की सरकार में उन्हें ग्रामीण विकास का अतिरिक्त प्रभार दिया गया. इसके बाद उपमुख्यमंत्री बने.

    एक साल में दो बार अजित पवार बने डिप्टी सीएम

    साल 2019 के बाद अजित पवार की राजनीतिक करियर काफी दिलचस्प रही. उन्होंने 2019 में दो अलग-अलग मुख्यमंत्री के अधीन उपमुख्यमंत्री की शपथ ली. 23 नवंबर की सुबह उन्होंने देवेंद्र फडनवीस के साथ उपमुख्यमंत्री की शपथ ली. लेकिन, सदन में फडनवीस बहुमत साबित करने में नाकाम रहे। इसके बाद उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री की शपथ ली तो उन्हें एक बार फिर उपमुख्यमंत्री बनाया गया। अब साल 2023 में वो एक बार फिर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने हैं. वो अबतक छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बन चुके हैं.

    अजित पवार पहली बार साल 2010 के नवंबर महीने में उपमुख्मंत्री बने, इसके बाद साल 2010 में वो दूसरी बार उपमुख्यमंत्री बने. 2019 में फडणवीस के साथ डिप्टीसीएम बने और फिर उद्धव ठाकरे के अगुवाई में महाविकास अघाड़ी की सरकार बनी तो उसमें भी डिप्टीसीएम रहे. इसके बाद 2023 में शरद पवार के बगावत कर शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार में डिप्टीसीएम बने. 2024 में छठी बार डिप्टीसीएम बने.

    2022 में अजित पवार ने किया चाचा से बगावत

    अजित पवार जिस चाचा शरद पवार की उंगली पकड़कर राजनीति सीखा, लेकिन शरद पवार ने अपने सियासी वारिस के तौर पर बेटी सुप्रिया सुले को आगे बढ़ाने लगे तो फिर अजित पवार ने अपनी अलग सियासी राह चुन ली. एनसीपी के तमाम नेताओं को लेकर बीजेपी के अगुवाई वाली महायुति सरकार में शामिल हो गए. 2023 में अजित पवार ने पूरी तरह से एनसीपी पर कब्जा जमा लिया. 2024 में खुद को स्थापित करने में भी सफल रहे.

  • 'दादा के बिना महाराष्ट्र की राजनीति कुछ नहीं', अजित पवार के निधन पर संजय राउत ने जताया दुख

    'दादा के बिना महाराष्ट्र की राजनीति कुछ नहीं', अजित पवार के निधन पर संजय राउत ने जताया दुख


    नई दिल्ली| महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के चीफ और लोकप्रिय नेता अजित पवार अब इस दुनिया में नहीं रहे. बुधवार, 28 जनवरी को बारामती प्लेन क्रैश में उनका निधन हो गया. यह हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को कुछ सोचने-समझने का समय ही नहीं मिला. अजित पवार के निधन पर पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर है. उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने भी शोक व्यक्त किया है.

    शिवसेना यूबीटी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इसे ‘महाराष्ट्र की राजनीति का काला दिन’ बताया है. उन्होंने कहा कि अजित पवार के बिना महाराष्ट्र की राजनीति कुछ नहीं है.

    ‘कभी सोचा नहीं था अजित पवार की सियासत ऐसे खत्म होगी’
    संजय राउत ने कहा कि अजित पवार ने शरद पवार के बिना राजनीति शुरू की थी, लेकिन मैंने कभी सोचा नहीं था कि यह ऐसे खत्म होगी. हमने चैनल पर उनके काम के बारे में एक वीडियो देखा था. उन्हें वाक्य कहने का हुनर था.

    महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और एनसीपी के चेयरमैन अजित पवार अब इस दुनिया में नहीं रहे। बुधवार, 28 जनवरी को बारामती में उनके निजी विमान के क्रैश में अचानक निधन हो गया, जिससे राज्य में शोक की लहर फैल गई। यह हादसा इतना त्वरित था कि किसी को कुछ सोचने-समझने का मौका तक नहीं मिला। शिवसेना यूबीटी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इसे महाराष्ट्र की राजनीति का काला दिन बताया और कहा कि अजित पवार के बिना राज्य की राजनीति अधूरी है।
    अजित पवार को बारामती से था गहरा लगाव
    शिवसेना यूबीटी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने अजित पवार को याद करते हुए कहा कि उनकी पर्सनालिटी बहुत खुले दिल की थी और हर कार्यकर्ता उन्हें बेहद चाहता था। उन्होंने बताया कि अजित पवार की प्रशासनिक पकड़ मजबूत थी और उन्हें बारामती से गहरा लगाव था। राउत ने आगे कहा कि उद्धव ठाकरे सरकार में वे डिप्टी सीएम के रूप में कैबिनेट को पूरी तरह तैयार करते थे और राज्य के शिक्षा क्षेत्र में भी उनका योगदान अहम रहा।

    अजित पवार की सियासत का अचानक अंत
    संजय राउत ने कहा कि अजित पवार ने शरद पवार के बिना राजनीति की शुरुआत की थी, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि उनका सियासी सफर इतना अचानक खत्म हो जाएगा। उन्होंने याद किया कि हाल ही में चैनल पर उनके काम का वीडियो देखा गया था और अजित पवार को वाक्य कहने का खास हुनर हासिल था।
    अजित पवार: महाराष्ट्र का अधूरा सपना
    शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र पर ऐसे संकट आए कि कई बड़े नेता गुज़र गए। अजित पवार रिकॉर्ड पांच या छह बार उपमुख्यमंत्री रहे और अगर वे मुख्यमंत्री बनते, तो राज्य को एक महान नेतृत्व मिलता। ठाकरे ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके अचानक निधन पर दुख व्यक्त किया।