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  • UGC बिल वापस लें या इच्छामृत्यु की अनुमति दें , जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने PM को लिखा पत्र

    UGC बिल वापस लें या इच्छामृत्यु की अनुमति दें , जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने PM को लिखा पत्र


    नई दिल्ली । UGC बिल 2026 का विरोध तेज हो गया है. अब इसमें अयोध्या के जगद्गुरु परमहंस आचार्य भी कूद गए हैं. उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है मांग की है कि या तो यूजीसी के नए नियमों को वापस लिया जाए या फिर उन्हें इच्छामृत्यु की इजाजत दी जाए. नए नियमों के खिलाफ यूपी के अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं. नए नियमों का विरोध कर रहे पक्ष का कहना है कि इसमें सर्वण छात्रों को पहले ही दोषी माना गया.

    किसने क्या कहा

    केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू- हम कानून के तहत ही काम करते हैं  देवेंद्र प्रताप सिंह, विधायक, बीजेपी- इस से समाज में नफरत बढ़ेगी उपेंद्र कुशवाहा, अध्यक्ष, RLSP- गड़बड़ियों को ठीक करने के लिए नियम चंद्रशेखर आजाद, अध्यक्ष, ASP- बाकी मुद्दों से भटकाने की कोशिश की जा रही है फौजिया खान, सांसद, NCP- शिक्षा में ऐसा माहौल नहीं बनना चाहिए  हरीश चंद, प्रवक्ता, बीजेपी- लोगों के मतभेद पर सरकार विचार करेगी  मणिकम टैगोर, सांसद, कांग्रेस- शिक्षण संस्थानों पर RSS का कंट्रोल  राकेश टिकैत, प्रवक्ता, BKU- ऐसी चीजों से जातिगत दुश्मनी बढ़ती है  रामगोपाल यादव, सांसद, SP- UGC ने कुछ गलत नहीं किया

    UGC का नया एक्ट

    जातीय भेदभाव में SC/ST के अलावा OBC शामि झूठी शिकायतों पर जुर्माना और निलंबन नही कॉलेज, यूनिवर्सिटी में 24 घंटे हेल्पलाइन का गठन कमेटी में SC/ST, OBC, महिला का प्रतिनिधित्व UGC एक्ट पर सवर्णों का दावा सवर्णों को अच्याचारी मानने वाला एक्ट झूठी शिकायत करने पर कोई सजा नहीं सवर्ण छात्रों पर लगेंगे फर्जी आरोप भेदभाव की परिभाषा सवर्ण छात्रों के खिलाफ
    कमेटी में सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व अस्पष्ट 
    कहां-कहां विरोध
    लखनऊ- करणी सेना का विरोध-प्रदर्शन गोंडा-विरोध में बीजेपी विधायक प्रतीक भूषण रायबरेली-भाजपा नेताओं ने सवर्ण सांसदों को चूड़ियां भेजीं सोनभद्र-सवर्ण समाज के लोगों ने जिला मुख्यालय घेरा फर्रुखाबाद-प्रधानमंत्री गद्दी छोड़ो के नारे लगे प्रतापगढ़-सवर्ण एकता जिंदाबाद के नारे लगे
    वाराणसी- विरोध में “हमारी भूल, कमल का फूल नारे लगे मेरठ- राजपूत समाज के लोगों ने विरोध किया संभल- काली पट्टी बांधकर विरोध में सड़कों पर नारेबाजी फर्रुखाबाद- फतेहगढ़ स्टेडियम के बाहर सवर्ण समाज की नारेबाजी लखीमपुर- सवर्ण समाज के लोगों ने भाजपा के विरोध में शपथ ली
    दिल्ली- UGC के नये नियम के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन

    विरोध में बीजेपी में इस्तीफे
    BJP के 11 जिला पदाधिकारियों का सामूहिक इस्तीफानोएडा- BJYM के जिला उपाध्यक्ष का इस्तीफा रायबरेली- भाजपा किसान मोर्चा के मंडल अध्यक्ष का इस्तीफा इगलास अलीगढ़ भाजपा सोशल मीडिया प्रभारी का इस्तीफा वाराणसी- BJP बूथ अध्यक्ष ने इस्तीफा दिया
    नए नियम क्यों बने
    17 दिसंबर 2012 से जारी पुराने नियम2016 में छात्र रोहित वेमुला ने आत्महत्या की
    जातीय उत्पीड़न के चलते आत्महत्या की मई 2019 में एक मेडिकल छात्रा ने आत्महत्या की जातीय उत्पीड़न के आरोप में आत्महत्या की 29 अगस्त 2019 को SC में याचिका दाखिल  जातीय भेदभाव पर सख्त नियम बनाने की याचिका जनवरी 2025 को SC ने UGC को निर्देश दिए फरवरी 2025 में नए नियमों का ड्राफ्ट जारी हुआ
    संसदीय समिति ने ड्राफ्ट की समीक्षा की कमेटी के अध्यक्ष कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह थे ड्राफ्ट में OBC को शामिल नहीं किया गया था झूठी शिकायत करने पर सजा का प्रावधान था कमेटी ने ड्राफ्ट में OBC को शामिल कराया कमेटी ने झूठी शिकायत करने पर सजा भी हटाई

  • शंकराचार्य विवाद को लेकर भड़के AAP सांसद संजय सिंह, बोले- 'इस मुद्दे पर योगी सरकार ने…'

    शंकराचार्य विवाद को लेकर भड़के AAP सांसद संजय सिंह, बोले- 'इस मुद्दे पर योगी सरकार ने…'


    नई दिल्ली । AAP सांसद संजय सिंह ने हाल ही में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और साथ ही उनका समर्थन जताया। मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में संजय सिंह ने कहा कि माघ मेले जैसे पवित्र आयोजन में किसी संत के साथ ऐसा व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि संत के शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की, उनकी चोटी खींचकर पिटाई और सरेआम अपमान जैसी घटनाएं हुईं, जो बिल्कुल अस्वीकार्य हैं।

    संवाद से समाधान की मांग, धरना नहीं

    संजय सिंह ने कहा कि शंकराचार्य का धरने पर बैठना उचित नहीं है। उन्होंने योगी सरकार से कहा कि अगर राज्य सरकार संवाद करने में असमर्थ है, तो केंद्र सरकार का कोई जिम्मेदार प्रतिनिधि आगे आए और इस मुद्दे का हल निकाले। सांसद ने यह भी कहा कि अब तक सरकार ने सिर्फ सुनवाई की है, लेकिन समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जो निराशाजनक है।

    संगम नोज पर रोक को बताया अपराध

    संजय सिंह ने संगम नोज पर शंकराचार्य के स्नान पर रोक को अपराध बताया। उन्होंने कहा, “एक शंकराचार्य को स्नान से रोकना खुद में अपराध है, और उनसे शंकराचार्य होने का सबूत मांगना उससे भी बड़ा अपराध है। यह घटना बेहद शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने बताया कि इसी दौरान संत के शिष्यों को धक्का दिया गया और महाराज को मजबूरन धरने पर बैठना पड़ा।

    धार्मिक और सामाजिक माहौल पर चिंता

    सांसद संजय सिंह ने हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि काशी कॉरिडोर में मंदिर और मणिकर्णिका घाट में हुई तोड़फोड़, वृंदावन में बाबा के साथ धक्का-मुक्की और शंकराचार्य के साथ वायरल तस्वीरें, सभी सामाजिक और धार्मिक माहौल के लिए नकारात्मक संकेत हैं।

    यूजीसी बिल और पार्टी की स्थिति

    संजय सिंह ने यह भी कहा कि यूजीसी बिल को लेकर पार्टी में चर्चा जारी है और आम आदमी पार्टी की आधिकारिक स्थिति जल्द तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि लोग अपने-अपने तरीके से इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन पार्टी न्याय और संविधान के दायरे में रहकर ही निर्णय लेगी।

  • UGC बिल पर नीतीश कुमार की JDU ने साफ किया रुख, 'समाज के किसी तबके में…'

    UGC बिल पर नीतीश कुमार की JDU ने साफ किया रुख, 'समाज के किसी तबके में…'


    नई दिल्ली । यूजीसी बिल 2026 पर नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू का रुख सामने आया है. पार्टी के प्रवक्ता और एमलसी नीरज कुमार ने कहा कि डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने इस देश के अंदर संविधान बनाया है. संविधान में सबको अपनी बात कहने का अधिकार है. ऐसी स्थिति में समाज के किसी भी तबके में कोई उपेक्षा या नाराजगी का भाव लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार न्याय के साथ सबका विकास और सबका सम्मान के रोल मॉडल हैं. यूजीसी का जो नया रेगुलेशन आया है, उस संबंध में तरह-तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं. अब इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. न्यायपालिका का सम्मान तो सब करते हैं तो अब न्यायपालिका का फैसला ही सबके लिए महत्वपूर्ण होगा.

    यूजीसी की नई गाइडलाइंस का क्यों हो रहा है विरोध

    इसी महीने लागू हुआ है OBC वर्ग को जातिगत भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर जुर्माना या निलंबन जैसे प्रावधान हटे सामान्य वर्ग के मुताबिक, कानून का दुरुपयोग उन्हें निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है दावा है कि गलत शिकायत दर्ज कराने वाले को किसी दंड का डर नहीं होगा

    सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

    यूजीसी की नई गाडलाइंस ने यूपी का सियासी पारा बढ़ा दिया है. बीजेपी के कई पदाधिकारियों ने इसको लेकर इस्तीफा तक दे दिया. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. याचिका में आरोप लगाया गया कि जाति आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई गई है और संस्थागत सुरक्षा से कुछ श्रेणियों को बाहर कर दिया गया है.

    कोर्ट से रोक लगाने की मांग

    सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि इसके मौजूदा स्वरूप में लागू करने से रोका जाए और जाति-आधारित भेदभाव को ‘जाति-तटस्थ और संविधान अनुरूप’ तरीके से फिर से परिभाषित किया जाए. इसमें कहा गया है जाति के आधार पर भेदभाव को इस तरह से परिभाषित किया जाना चाहिए कि जाति के आधार पर भेदभाव का शिकार होने वाले सभी लोगों को सुरक्षा मिले चाहे उनकी जाति की पहचान कुछ भी हो याचिका में केंद्र सरकार और यूजीसी को अंतरिम निर्देश देने की मांग की गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन नियमों के तहत बनाए गए ‘समान अवसर केंद्र’ और ‘समानता हेल्पलाइन आदि को बिना किसी भेदभाव के उपलब्ध कराया जाए.

  • बलिया: सांसद के पैरों में झुकी खाकी! सपा सांसद सनातन पांडे के पैर छूने वाले दरोगा का वीडियो वायरल

    बलिया: सांसद के पैरों में झुकी खाकी! सपा सांसद सनातन पांडे के पैर छूने वाले दरोगा का वीडियो वायरल


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति और पुलिसिया कार्यशैली को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। बलिया से समाजवादी पार्टी के सांसद सनातन पांडे और नगरा थाना प्रभारी संजय मिश्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है। घटना रविवार की है जब सांसद सनातन पांडे, जंगीपुर विधायक वीरेंद्र यादव के साथ वाराणसी के मणिकर्णिका घाट की जांच के लिए जा रहे थे। गाजीपुर के बिरनो टोल प्लाजा पर पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद सांसद समर्थकों के साथ वहीं धरने पर बैठ गए।

    इसी गहमागहमी के बीच बलिया के नगरा थाना प्रभारी संजय मिश्रा मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रोटोकॉल या गिरफ्तारी के बजाय सीधे सांसद सनातन पांडे के पैर छूकर उन्हें प्रणाम किया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जब सपा विधायक वीरेंद्र यादव ने मजाकिया अंदाज में दरोगा से गिरफ्तारी की बात कही, तो दरोगा संजय मिश्रा ने विनम्रता या कटाक्ष भरे लहजे में कहा हमारी औकात कहां जो आपको गिरफ्तार कर सकें। यह सुनकर वहां मौजूद लोग हंस पड़े, लेकिन कानून के जानकारों के बीच यह बहस का मुद्दा बन गया।

    दरोगा यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे कहा कि वे किसी को गिरफ्तार नहीं करेंगे बल्कि जरूरत पड़ी तो सांसदों के साथ धरने पर ही बैठ जाएंगे। काफी देर तक चले इस ड्रामे के बाद पुलिस टीम ने सांसद को एस्कॉर्ट करते हुए वापस बलिया के लिए रवाना कर दिया। इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स दो धड़ों में बंट गए हैं। जहां एक पक्ष इसे पुलिस का जन प्रतिनिधियों के प्रति सम्मान और लोकतांत्रिक प्रदर्शन के प्रति नरम रुख बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे वर्दी का अपमान और ‘तुष्टिकरण’ की राजनीति से जोड़कर देख रहा है। फिलहाल इस मामले में पुलिस के आला अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।

  • महाकाल मंदिर में VIP एंट्री पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: याचिका खारिज, CJI बोले- सब कुछ कोर्ट तय नहीं कर सकता

    महाकाल मंदिर में VIP एंट्री पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: याचिका खारिज, CJI बोले- सब कुछ कोर्ट तय नहीं कर सकता


    नई दिल्ली। उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध भगवान महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी प्रवेश को लेकर चल रहा कानूनी विवाद अब शांत हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में दायर याचिका पर विचार करने से साफ इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मंदिर परिसर के भीतर किसे प्रवेश दिया जाए और किसे नहीं, यह तय करना पूरी तरह से मंदिर प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों के विवेक का विषय है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इन प्रबंधकीय कार्यों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

    समानता के अधिकार की दलील खारिज याचिकाकर्ता दर्पण सिंह अवस्थी की ओर से पेश हुए प्रसिद्ध अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने संविधान के अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार का हवाला देते हुए तर्क दिया था कि या तो सभी श्रद्धालुओं को जलाभिषेक के लिए गर्भगृह में जाने दिया जाए या फिर किसी को भी नहीं। उन्होंने दलील दी कि कलेक्टर की सिफारिश पर ‘वीआईपी’ को प्रवेश देना आम भक्तों के अधिकारों का हनन है। हालांकि, CJI सूर्यकांत ने इस तर्क को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यदि मंदिर के भीतर मौलिक अधिकारों को इस तरह लागू किया गया, तो व्यवस्था संभालना नामुमकिन हो जाएगा।

    कोर्ट की तल्ख टिप्पणी सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता की मंशा पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि ऐसी याचिकाएं श्रद्धा से प्रेरित नहीं लगतीं, बल्कि इनके पीछे कुछ और ही उद्देश्य प्रतीत होता है। बेंच ने चेतावनी दी कि अगर आज गर्भगृह में प्रवेश को समानता के अधिकार से जोड़ा गया, तो कल लोग वहां जाकर अपनी पसंद के मंत्रोच्चार करने या अन्य गतिविधियों के लिए अनुच्छेद 19 वाक् स्वतंत्रता का दावा करने लगेंगे। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मंदिर प्रशासन को सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ विवेकपूर्ण निर्णय लेने का अधिकार है।

    हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी वापस ले ली। इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने भी इसी तरह का फैसला सुनाया था, जिसे अब शीर्ष अदालत ने भी सही माना है। इस फैसले से साफ है कि महाकाल मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश के नियम यथावत रहेंगे और मंदिर समिति के दिशा-निर्देशों का ही पालन होगा।

  • झारखंड में शहर की सरकार' का बिगुल: 23 फरवरी को मतदान, 27 को नतीजे; 48 निकायों में लागू हुई आचार संहिता

    झारखंड में शहर की सरकार' का बिगुल: 23 फरवरी को मतदान, 27 को नतीजे; 48 निकायों में लागू हुई आचार संहिता


    नई दिल्‍ली । झारखंड में पिछले कई वर्षों से लंबित नगर निकाय चुनावों का इंतजार अब खत्म हो गया है। राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चुनावी शेड्यूल जारी कर दिया। राज्य के 48 नगर निकायों 9 नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायत में 23 फरवरी 2026 को मतदान होगा, जबकि 27 फरवरी को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।

    महत्वपूर्ण चुनावी कार्यक्रम अधिसूचना जारी होने की तिथि: 28 जनवरी 2026 नामांकन की शुरुआत: 29 जनवरी 2026 नामांकन की अंतिम तिथि: 4 फरवरी 2026 दोपहर 3 बजे तक नामांकन पत्रों की जांच: 5 फरवरी 2026 नाम वापसी की अंतिम तिथि: 6 फरवरी 2026 चुनाव चिन्हों का आवंटन: 7 फरवरी 2026 मतदान की तिथि: 23 फरवरी 2026 सुबह 7 से शाम 5 बजे तक मतगणना व परिणाम: 27 फरवरी 2026

    चुनाव की मुख्य विशेषताएं आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस बार चुनाव गैर-दलीय आधार पर होंगे, यानी उम्मीदवार किसी राजनीतिक दल के सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ेंगे। मतदान के लिए बैलेट पेपर मतपत्र का उपयोग किया जाएगा और इस बार नोटा का विकल्प उपलब्ध नहीं होगा।

    आरक्षण और भागीदारी झारखंड में पहली बार नगर निकाय चुनावों में ट्रिपल टेस्ट के आधार पर अनुसूचित जाति , अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के साथ-साथ पिछड़े वर्ग के लिए भी आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। राजधानी रांची नगर निगम का मेयर पद इस बार अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है, जबकि धनबाद और चास जैसे निकायों में मेयर पद अनारक्षित सामान्य रखा गया है।

    कुल 1087 वार्डों में होने वाले इस चुनाव में 42 ऐसी नगरपालिकाएं हैं जिनका कार्यकाल बहुत पहले समाप्त हो चुका था, जबकि 6 नवगठित निकायों में पहली बार पार्षद और अध्यक्ष चुने जाएंगे। निर्वाचन आयुक्त ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों और शांतिपूर्ण मतदान के लिए पर्याप्त बल की तैनाती का भरोसा दिलाया है।

  • टीचर्स से लेकर स्टूडेंट्स तक..UGC के वो 4 नियम कौन से हैं जिनपर बवाल मचा हुआ है?

    टीचर्स से लेकर स्टूडेंट्स तक..UGC के वो 4 नियम कौन से हैं जिनपर बवाल मचा हुआ है?


    नई दिल्ली । देशभर में UGC के नए नियम को लेकर भारी विरोध देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर यूजीसी आरोलबैक तेजी से ट्रेंड करने लगा, जबकि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया और इसे भेदभाव बढ़ाने वाला बताया गया। इसी बीच, बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस बदलाव का विरोध करते हुए इस्तीफा दे दिया। इस पूरे विवाद के बीच सवाल उठता है कि UGC ने कौन से नियम बनाए हैं और आखिर क्यों टीचर्स, स्टूडेंट्स और आम लोग इसमें नाराज हैं।

    UGC का नया नियम क्या है

    UGC ने 13 जनवरी 2026 को नया नियम लागू किया, जिसका नाम है उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के विनियम 2026 । इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव और असमानता को रोकना बताया गया है। नए नियम के तहत सभी विश्वविद्यालय और कॉलेजों को इक्विटी सेंटर, इक्विटी स्क्वाड और इक्विटी कमेटी बनाने होंगे, साथ ही 24×7 हेल्पलाइन का प्रावधान भी होगा। अगर कोई संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता, तो UGC उनकी मान्यता रद्द कर सकता है या फंड रोक सकता है। UGC का कहना है कि पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जातियों और जनजातियों के खिलाफ शिकायतों में 2020 से 2025 के बीच 100% से अधिक वृद्धि देखी गई है। इसके अलावा, रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए यह नियम बनाया गया है, ताकि उच्च शिक्षा में समानता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    क्यों मचा बवाल

    UGC के नए नियम के कुछ सेक्शन विशेष रूप से विवादित बने हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका PIL में कहा गया है कि Section 3C अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और व्यक्तिगत आज़ादी के अधिकारों का उल्लंघन करता है। इसके अलावा, सामान्य वर्ग यानी सवर्ण समाज के छात्र और शिक्षक भी नाराज हैं। बरेली के मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इसे सामान्य वर्ग के छात्रों को स्वघोषित अपराधी बनाने जैसा बताया। छात्र और शिक्षक दोनों का कहना है कि नियम एकतरफा है, झूठी शिकायतों पर कार्रवाई की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है, और सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व पर्याप्त नहीं है। यही कारण है कि देशभर में इस नियम को लेकर तीव्र विरोध और बहस चल रही है।

    UGC के 4 विवादित नियम / बदलाव ,इक्विटी समिति और इक्विटी स्क्वाड का गठन

    नए नियम के तहत हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में इक्विटी समिति और इक्विटी स्क्वाड बनाना अनिवार्य है। हालांकि, छात्रों का कहना है कि इसमें सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व जरूरी नहीं है, जिससे निर्णयों में पक्षपात होने का डर है। साथ ही इक्विटी स्क्वाडको बहुत अधिकार दिए गए हैं, लेकिन ‘भेदभाव’ की स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है, जिससे इसकी कार्यवाही और सीमाओं को लेकर शंका बनी हुई है।

    अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जातियों पर ध्यान
    नए नियम का मुख्य उद्देश्य एससी, एसटी और पिछड़ी जातियों के खिलाफ भेदभाव को रोकना है। हालांकि, सामान्य वर्ग के छात्र और शिक्षक इसे एकतरफा मान रहे हैं। उनका कहना है कि इस नियम के तहत सवर्ण छात्रों को ‘संभावित अपराधी’ मानकर देखा जा सकता है, जिससे वास्तव में भेदभाव बढ़ने और माहौल में तनाव पैदा होने की संभावना है।

    सख्त कार्रवाई का अधिकार
    नए नियम के तहत, अगर कोई संस्थान के नियमों का पालन नहीं करता, तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है या फंड रोक दिया जा सकता है। छात्र और शिक्षक मानते हैं कि यह कदम संस्थानों पर अत्यधिक दबाव डालता है और बिना पर्याप्त प्रशिक्षण और संसाधन के इसे लागू करना मुश्किल और जटिल होगा।
    छात्रों और शिक्षकों की प्रतिक्रिया
    कई छात्र संगठन और शिक्षक संघ के नए नियम का विरोध कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड कर रहा है, जबकि बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा देकर अपना विरोध जताया। छात्रों का कहना है कि नियम एकतरफा है, झूठी शिकायतों पर कोई रोक नहीं है, और सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकार खतरे में पड़ सकते हैं।

    UGC का पक्ष
    UGC का कहना है कि यह नियम उच्च शिक्षा में समान अवसर और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। आयोग के अनुसार, बिना निगरानी और संरचना के पिछड़ी जातियों के खिलाफ भेदभाव रोकना मुश्किल है। यह भी बताता है कि नियम धीरे-धीरे लागू किए जाएंगे और उद्देश्य केवल समान अवसर और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। जबकि यह कदम शिक्षा प्रणाली में समानता और सुरक्षा बढ़ाने का प्रयास है, नियम के कुछ सेक्शन विवादास्पद माने जा रहे हैं।

    सवर्ण छात्रों और शिक्षकों की चिंता और भविष्य की राह

    टीचर्स से लेकर स्टूडेंट्स तक सभी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि नया नियम सवर्ण छात्रों और शिक्षकों के अधिकारों के खिलाफ तो नहीं जा रहा। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका पर हैं, जिससे तय होगा कि नियम में कोई संशोधन या बदलाव करता है या नहीं। फिलहाल, यह मामला शिक्षा जगत में सबसे बड़ा और गर्म चर्चा का विषय बन गया है, और भविष्य में इसके प्रभाव को लेकर बहस जारी रहने की संभावना है।

  • बंगाल में मौत का तांडव: दो गोदामों में लगी भीषण आग, 8 मजदूरों की मौत, मलबे में अभी भी कई के फंसे होने की आशंका

    बंगाल में मौत का तांडव: दो गोदामों में लगी भीषण आग, 8 मजदूरों की मौत, मलबे में अभी भी कई के फंसे होने की आशंका


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के नरेंद्रपुर थाना क्षेत्र में सोमवार को आग ने ऐसा तांडव मचाया कि हंसते-खेलते 8 परिवारों के चिराग बुझ गए। नजीराबाद स्थित दो सटे हुए गोदामों में तड़के करीब 3 बजे उस वक्त भीषण आग लग गई जब वहां सो रहे मजदूरों को भागने का मौका तक नहीं मिला। पुलिस और दमकल विभाग के अनुसार, अब तक 8 शव बरामद किए जा चुके हैं, जो इतनी बुरी तरह झुलस गए हैं कि उनकी शिनाख्त करना मुश्किल हो रहा है।

    साजिश या लापरवाही बताया जा रहा है कि इन गोदामों में एक डेकोरेटिंग कंपनी और एक प्रसिद्ध मोमो चेन का काम होता था। यहां रहने वाले मजदूर पुरबा मेदिनीपुर और दक्षिण 24 परगना के निवासी थे। चश्मदीदों और भाजपा विधायक अशोक डिंडा के अनुसार, आधी रात को गोदाम का मुख्य गेट बाहर से बंद था, जिसके कारण आग लगने पर मजदूर बाहर नहीं निकल पाए और अंदर ही फंस गए। हालांकि, चार मजदूरों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई, लेकिन लापता लोगों की संख्या 10 से अधिक होने की आशंका जताई जा रही है।

    रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासनिक चुनौतियां दमकल की 12 गाड़ियों ने करीब 7 घंटे तक आग से लोहा लिया, तब जाकर सुबह 10 बजे लपटों पर काबू पाया जा सका। बिजली मंत्री आरूप बिस्वास ने बताया कि गोदाम के भीतर धुआं इतना घना था कि कोलकाता नगर निगम की डिमोलिशन टीम को दीवारें तोड़ने के लिए बुलाना पड़ा। बारुईपुर के पुलिस अधीक्षक शुभेंदु कुमार ने स्पष्ट किया कि मलबा पूरी तरह साफ होने के बाद ही मौतों का सटीक आंकड़ा सामने आ पाएगा।

    सियासी घमासान शुरू इस त्रासदी ने बंगाल की राजनीति में भी उबाल ला दिया है। नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने राज्य सरकार पर असंवेदनशीलता का आरोप लगाते हुए कहा कि जब मजदूर मर रहे थे, तब वरिष्ठ अधिकारी और मंत्री छुट्टी मना रहे थे। दूसरी ओर, अग्निशमन मंत्री सुजीत बोस ने कहा कि सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है और मालिकों की जवाबदेही तय की जाएगी। फिलहाल, पूरे इलाके में मातम छाया हुआ है और बचाव दल मलबे में दबे संभावित जिंदगियों की तलाश में जुटा है।

  • उत्तराखंड में सख्ती बढ़ी: गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन, बदरीनाथ-केदारनाथ पर भी प्रस्ताव की तैयारी

    उत्तराखंड में सख्ती बढ़ी: गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन, बदरीनाथ-केदारनाथ पर भी प्रस्ताव की तैयारी


    देहरादून। हरिद्वार के गंगा घाटों पर प्रतिबंध के बाद अब उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक का कदम बढ़ता जा रहा है। गंगोत्री धाम में यह फैसला लागू कर दिया गया है और अब बदरीनाथ-केदारनाथ में भी इसी तरह का प्रस्ताव बोर्ड में लाया जाएगा।

    गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन
    श्री गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने बताया कि सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है।
    गंगोत्री धाम के साथ-साथ शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा में भी गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित रहेगा।

    बदरीनाथ-केदारनाथ में भी प्रस्ताव लाया जाएगा
    श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि बोर्ड की अगली बैठक में बदरीनाथ और केदारनाथ में भी गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक का प्रस्ताव लाया जाएगा।
    इसके बाद इसे शासन और सरकार के समक्ष रखा जाएगा।

    हरिद्वार के बाद अब अन्य स्थलों पर मांग बढ़ी
    हरिद्वार में सरकार ने पहले ही गंगा घाटों, हर की पैड़ी और अन्य प्रमुख स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई है।
    धार्मिक संस्थाओं की मांग है कि पूरे कुंभ क्षेत्र में भी इसी तरह का प्रतिबंध लागू किया जाए।

    बीकेटीसी अध्यक्ष का बयान
    हेमंत द्विवेदी ने इसे “ऐतिहासिक फैसला” बताया और कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा लिया गया यह कदम बदरी-केदार धाम में भी लागू होगा।
    उन्होंने कहा कि बोर्ड में प्रस्ताव पास होने के बाद सरकार को इसे लागू कराने की प्रक्रिया शुरू होगी।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का रुख
    मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पवित्र धाम हमारी आस्था के धाम हैं और यहाँ पौराणिक मान्यता व संस्कृति के अनुसार ही निर्णय होंगे।
    उन्होंने कहा कि मंदिर समिति और तीर्थ पुरोहितों की मांग पर सरकार काम करेगी।
    हरिद्वार के गंगा घाटों के पुराने एक्ट का अध्ययन करके आगे निर्णय लिया जाएगा।


    सरकार का संकेत
    धामी ने कहा कि अगर बीकेटीसी से प्रस्ताव आता है, तो सरकार सभी पहलुओं को देखते हुए आगे निर्णय करेगी।
    सरकार सनातन धर्म के आस्था केंद्रों की पवित्रता बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाने को तैयार है।

  • राष्ट्रगीत के 150 साल… सिनेमा में हर बार नए जोश और अंदाज के साथ गूंजा 'वंदे मातरम'

    राष्ट्रगीत के 150 साल… सिनेमा में हर बार नए जोश और अंदाज के साथ गूंजा 'वंदे मातरम'


    नई दिल्ली। वंदे मातरम केवल राष्ट्रीय गीत नहीं बल्कि स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक है, यह भारतीय सिनेमा में भी बार-बार देशभक्ति की भावना जगाता रहा है। हर बार जब स्क्रीन पर यह गीत सुनाई दिया, तो जोश, ऊर्जा और राष्ट्रप्रेम की लहर दौड़ गई।

    ‘वंदे मातरम’ क्लासिकल से मॉडर्न तक विकसित होता रहा। लता मंगेशकर से विशाल-शेखर तक कई हस्तियों ने इसे गाया। सिनेमा में यह बलिदान और एकता का प्रतीक बना।

    भारतीय सिनेमा में ‘वंदे मातरम’ पहली बार 1952 की फिल्म ‘आनंद मठ’ में गूंजा। लता मंगेशकर ने इसे गाया और हेमंत कुमार ने संगीत दिया। यह क्लासिक वर्जन आज भी सबसे प्रसिद्ध है। फिल्म में यह गीत स्वतंत्रता संग्राम की भावना को दर्शाता है।

    यही नहीं साल 1997 में एआर. रहमान ने ‘वंदे मातरम’ (मां तुझे सलाम) नाम से एक इंडिपेंडेंट एल्बम ट्रैक जारी किया। यह नॉन-फिल्म म्यूजिक वीडियो था। भारत बाला और मेहबूब ने वीडियो बनाया। आधुनिक फ्यूजन, रॉक और क्लासिकल मिश्रण के साथ गीत नए अंदाज में पेश किया गया।

    साल 2001 की फिल्म ‘कभी खुशी कभी गम’ में ‘वंदे मातरम’ को उषा उत्थुप और कविता कृष्णमूर्ति ने गाया। संगीत संदेश शांडिल्य का था। यह गाना फिल्म के अंत में आता है। अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, काजोल जैसे कलाकारों वाली इस फिल्म में परिवार और देशभक्ति का मिश्रण दिखाया गया।

    वंदे मातरम साल 2015 की फिल्म ‘एबीसीडी 2’ में सचिन-जिगर ने ‘वंदे मातरम’ को नए अंदाज में पेश किया। यह डांस फिल्म थी। गीत में एनर्जेटिक बीट्स थे। फिल्म में देशभक्ति और डांस का मेल दिखाया गया। यह आधुनिक पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक रहा। वहीं, साल 2024 की फिल्म ‘फाइटर’ में विशाल-शेखर ने ‘वंदे मातरम’ (द फाइटर एंथम) गाया। विशाल ददलानी, शेखर रवजियानी मुख्य गायक थे। ऋतिक रोशन, दीपिका पादुकोण, अनिल कपूर स्टारर फिल्म के इस गाने को खूब पसंद किया गया।

    साल 2022 में रिलीज हुई फिल्म ‘कोड नेम: तिरंगा’ में शंकर महादेवन ने ‘वंदे मातरम’ गाया। यह देशभक्ति थीम वाली फिल्म थी। गीत ने राष्ट्रप्रेम का संदेश मजबूत किया। वहीं, साल 2024 की फिल्म ‘ऑपरेशन वेलेंटाइन’ में भी ‘वंदे मातरम’ का नया वर्जन इस्तेमाल हुआ। यह आधुनिक एंथम स्टाइल में था। फिल्म देशभक्ति और एक्शन पर आधारित थी। गीत ने क्लाइमैक्स में जोश भरा।

    इसके अलावा, कई अन्य फिल्मों के छोटे-छोटे हिस्सों में भी यह गीत इस्तेमाल होता रहा है। वहीं, साल 2021 में टाइगर श्रॉफ ने ‘वंदे मातरम’ का अपना इंडिपेंडेंट वर्जन गाया। यह उनका हिंदी सिंगिंग डेब्यू था। जैकी भगनानी प्रोडक्शन में म्यूजिक वीडियो बना। युवा और एनर्जेटिक स्टाइल में देशभक्ति थीम पर आधारित गाने को विशाल मिश्रा ने कंपोज किया था।

    ‘वंदे मातरम’ की रचना बंकिमचंद्र चटर्जी ने की थी। यह पहली बार 7 नवंबर 1875 को उनकी साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में प्रकाशित हुआ। उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल यह गीत मातृभूमि को देवी के रूप में पूजने का संदेश देता है। साल 2025 में ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 नवंबर 2025 को इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम, नई दिल्ली में एक साल भर चलने वाले राष्ट्रव्यापी समारोह की शुरुआत की। यह जश्न 7 नवंबर 2026 तक चलेगा।