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  • "जुकाम का इंजेक्शन, 30 सेकंड और साध्वी की मौत! पढ़िए वो रहस्य जो सबको कर देगा हैरान!"

    "जुकाम का इंजेक्शन, 30 सेकंड और साध्वी की मौत! पढ़िए वो रहस्य जो सबको कर देगा हैरान!"

    नई दिल्ली जोधपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में साध्वी और कथावाचक प्रेम बाईसा की अचानक मौत ने उनके अनुयायियों और ग्रामीण समाज को गहरे शोक में डुबो दिया। इंजेक्शन लगने के कुछ ही पलों बाद तबीयत बिगड़ना, अस्पताल पहुंचते ही मृत घोषित कर दिया जाना और सोशल मीडिया पर उठे सवाल उनकी मौत को रहस्यमयी और चिंता का विषय बना रहे हैं।
    हर घटना की कड़ी अपने आप में गंभीर सवाल खड़े कर रही है और लोग इस हादसे की सही वजह जानने के लिए बेसब्र हैं।

    पार्थिव शरीर परेऊ गांव पहुंचा, शोक और न्याय की मांग
    आज साध्वी प्रेम बाईसा का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव परेऊ (बालोतरा) पहुंचा, तो पूरे गांव में शोक का माहौल बन गया। सैकड़ों अनुयायी, ग्रामीण और संत समाज के लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। परिजनों ने परंपरा के अनुसार उन्हें समाधि देने का निर्णय लिया, लेकिन इस बीच न्याय की मांग भी जोर पकड़ने लगी, क्योंकि लोग चाहते हैं कि उनकी मौत के रहस्यमयी पहलुओं की निष्पक्ष जांच हो।

    साध्वी पूरी तरह स्वस्थ, हल्का जुकाम ही था शिकायत
    साध्वी प्रेम बाईसा के पिता वीरम नाथ ने बताया कि उनकी बेटी पूरी तरह स्वस्थ थी और कोई गंभीर बीमारी नहीं थी।

    लगातार धार्मिक कार्यक्रमों में व्यस्त रहने के कारण थकान जरूर थी, लेकिन स्वास्थ्य सामान्य था। 28 जनवरी को साध्वी को हल्का जुकाम और गले में खराश की शिकायत हुई। वीरम नाथ के अनुसार, “मैंने कहा कि अस्पताल चल लेते हैं, लेकिन उसने कहा कि यह मामूली जुकाम है, डॉक्टर को घर ही बुला लो।”

    इंजेक्शन के 30 सेकंड में तबीयत बिगड़ी
    कंपाउंडर ने शुरुआती जांच के बाद इंजेक्शन लगाया, लेकिन महज 30 सेकंड में ही साध्वी की हालत बिगड़ गई। सांस लेने में दिक्कत, बेचैनी और अचानक कमजोरी ने सबको हैरान कर दिया। घबराए परिजन तुरंत उन्हें जोधपुर के प्रेक्षा हॉस्पिटल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए-क्या यह एलर्जिक रिएक्शन था, क्या बिना जरूरी जांच के दवा दी गई, या यह मेडिकल लापरवाही थी।

    अंतिम शब्द और न्याय की पुकार
    वीरम नाथ की आंखें भर आती हैं, जब वह अपनी बेटी के अंतिम शब्द याद करते हैं। साध्वी ने कहा था, “मुझे जीते जी तो न्याय नहीं मिला, लेकिन मरने के बाद मुझे न्याय जरूर मिलना चाहिए।” परिवार का कहना है कि वे किसी पर बेबुनियाद आरोप नहीं लगाना चाहते, लेकिन निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।

    सोशल मीडिया विवाद ने बढ़ाई पीड़ा
    सोशल मीडिया पर इस मामले में आग में घी डालने का काम हुआ। तरह-तरह की पोस्ट, अफवाहें और आपत्तिजनक टिप्पणियां सामने आने लगीं। कुछ पोस्टों में निजी रिश्तों और भगवे को लेकर भी सवाल उठाए गए, जिससे संत समाज में नाराजगी फैली। मेवाड़ से श्रद्धांजलि देने पहुंचे महामंडलेश्वर ईश्वरी नंद गिरी ने कहा कि बिना तथ्य जाने साधु-संतों की छवि खराब की जा रही है और बाप-बेटी के पवित्र रिश्ते को कलंकित करना शर्मनाक है।

    उन्होंने पुलिस से मांग की कि मौत की निष्पक्ष जांच हो और सोशल मीडिया पर अनर्गल लिखने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

    संत समाज की एक सुर में मांग
    संत समाज भी एक सुर में यही मांग कर रहा है

    साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की सच्चाई सामने लाई जाए। कई संतों का कहना है कि बिना प्रमाण की टिप्पणियां न केवल दिवंगत साध्वी का अपमान हैं, बल्कि समाज में भ्रम और नफरत फैलाने का काम कर रही हैं। ऐसे गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की भी मांग की जा रही है।
    कंपाउंडर आया और शुरुआती जांच के बाद उसने इंजेक्शन लगाया गया.
    परेऊ गांव में अंतिम दर्शन का भावुक माहौल
    गांव परेऊ में अंतिम दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। महिलाएं भजन गा रही थीं, पुरुषों की आंखों में आंसू थे। हर कोई यही कह रहा था कि प्रेम बाईसा का जीवन सादगी और सेवा का प्रतीक था।
    समाधि देने के फैसले को लेकर गांव में भावनात्मक माहौल था। अनुयायियों का मानना है कि यह कदम साध्वी की साधना और त्याग के प्रति सम्मान व्यक्त करने का तरीका है।

    आश्रम से कैमरे हटने और पिछले विवाद की जांच जरूरी
    साध्वी के समर्थक प्रेमराज चौधरी ने कहा कि पूरी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, क्योंकि हाल ही में आश्रम से सीसीटीवी कैमरे हटाए गए हैं, जो संदेह पैदा करते हैं। मृत्यु के बाद डॉक्टरों ने पोस्टमॉर्टम करवाने को कहा, लेकिन पिता ने मना कर दिया। गत वर्ष जुलाई में सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और पुलिस की कार्रवाई ने भी साध्वी पर दबाव बनाए रखा।

  • पश्चिम बंगाल में TMC की पकड़ मजबूत, BJP को 42% वोट शेयर के बावजूद बड़ा झटका?

    पश्चिम बंगाल में TMC की पकड़ मजबूत, BJP को 42% वोट शेयर के बावजूद बड़ा झटका?


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का माहौल गरम है और इसी बीच ताजे सर्वे ने राज्य की राजनीति का नया रुख सामने ला दिया है। सर्वे के अनुसार अगर आज लोकसभा चुनाव होते, तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) 2024 के अपने प्रदर्शन को दोहरा सकती है और लगभग सभी सीटें बरकरार रख सकती है। हालांकि भाजपा के लिए भी एक अच्छी खबर है, क्योंकि सर्वे में भाजपा के नेतृत्व वाले NDA का वोट शेयर 39% से बढ़कर 42% तक पहुंचने की संभावना दिखाई गई है। यह तीन प्रतिशत की बढ़त भाजपा के लिए सकारात्मक मानी जा रही है, लेकिन इस बढ़त के बावजूद बंगाल में बड़े स्तर पर सत्ता परिवर्तन की तस्वीर अभी साफ नहीं दिखती।

    विशेष रूप से यह सर्वे ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव सिर्फ दो महीने दूर हैं। ऐसे में यह सर्वे राज्य की जनता के मौजूदा राजनीतिक मूड का संकेत माना जा रहा है, लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक चुनावी नतीजे कई कारकों पर निर्भर करते हैं। फिर भी, सर्वे यह साफ करता है कि बंगाल में अब मुकाबला पूरी तरह TMC और BJP के बीच द्विध्रुवीय होता जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम बंगाल में राजनीतिक ध्रुवीकरण काफी तेज हुआ है और यह राज्य अब साफ तौर पर TMC और BJP के बीच टकराव की दिशा में बढ़ रहा है। अगर पिछले सर्वे को देखा जाए तो फरवरी 2024 में TMC को 22 सीटें और BJP को 19 सीटें मिलने का अनुमान था। बाद में अगस्त 2024 में TMC के 32 और BJP के 8 सीटें मिलने की संभावना जताई गई थी। अब ताजे सर्वे में भाजपा का वोट शेयर बढ़ा है, लेकिन फिर भी TMC की पकड़ मजबूत दिखती है और ममता बनर्जी की छवि बंगाल में एक प्रमुख राजनीतिक धुरी बनी हुई है।

    सर्वे के मुताबिक, BJP के वोट शेयर में बढ़ोतरी के बावजूद वह बंगाल में कोई बड़ा उलटफेर करने की स्थिति में नहीं दिख रही। तृणमूल कांग्रेस की मजबूत सामाजिक और क्षेत्रीय जड़ों के कारण भद्रलोक और ग्रामीण इलाकों में उसकी पकड़ अभी भी टेढ़ी खाई बनी हुई है। वहीं BJP धीरे-धीरे अपना आधार बढ़ा रही है, खासकर कुछ खास इलाकों में जहां पार्टी का संगठन मजबूत हो रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषक यह मान रहे हैं कि यदि चुनाव तक इसी तरह का जनाधार बना रहता है तो बंगाल में कमल का फूल खिलाने का भाजपा का सपना अधूरा रह सकता है। वहीं, ममता बनर्जी के लिए यह सर्वे एक राहत भरा संकेत है कि उनकी पार्टी के प्रति लोगों की विश्वास की लहर अभी भी कायम है। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि भाजपा की बढ़ती ताकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण और वोट शेयर के बदलाव भविष्य में किसी भी मोड़ पर निर्णायक साबित हो सकते हैं।

    अगले कुछ हफ्तों में चुनावी प्रचार, घोषणापत्र, गठबंधन रणनीति और स्थानीय मुद्दों का प्रभाव नतीजों को बदल सकता है। फिलहाल सर्वे यह संकेत दे रहा है कि बंगाल में TMC का प्रभाव अभी भी मजबूत है और BJP को बड़े स्तर पर सत्ता परिवर्तन के लिए अभी और मेहनत करनी होगी। ऐसे में बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य पर नजरें टिके हुए हैं, क्योंकि आने वाले चुनावी माहौल में हर छोटा-सा बदलाव भी बड़े नतीजे ला सकता है।

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बापू के अहिंसा संदेश को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम किया साझा

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बापू के अहिंसा संदेश को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम किया साझा


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके अहिंसा के संदेश को स्मरण करते हुए संस्कृत में रचित एक प्रेरणादायी सुभाषितम साझा किया। इस सुभाषितम के माध्यम से प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी द्वारा मानवता की रक्षा के लिए अहिंसा को सर्वोच्च मूल्य मानने की भावना को देश और दुनिया के सामने पुनः रेखांकित किया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि पूज्य बापू का संपूर्ण जीवन अहिंसा, सत्य और मानव कल्याण के सिद्धांतों पर आधारित रहा। उन्होंने बिना हथियार के, केवल नैतिक बल और सत्य की शक्ति से न केवल भारत को स्वतंत्रता दिलाई, बल्कि पूरी दुनिया को शांति और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाया। अहिंसा का यह संदेश आज के अशांत वैश्विक वातावरण में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा की गई अपनी पोस्ट में लिखा कि महात्मा गांधी ने मानवता की रक्षा के लिए सदैव अहिंसा पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अहिंसा में वह शक्ति निहित है, जो बिना हिंसा और हथियार के भी दुनिया को बदल सकती है। प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया संस्कृत सुभाषितम अहिंसा के दर्शन को गहराई से अभिव्यक्त करता है

    अहिंसा परमो धर्मस्तथाऽहिंसा परन्तपः।
    अहिंसा परमं सत्यं यतो धर्मः प्रवर्तते॥

    इस सुभाषितम का तात्पर्य है कि अहिंसा सर्वोच्च कर्तव्य है और अहिंसा ही सर्वोच्च तपस्या है। अहिंसा को परम सत्य बताया गया है, जिससे सभी धर्मों और नैतिक मूल्यों की उत्पत्ति होती है। यह संदेश महात्मा गांधी के जीवन दर्शन का सार प्रस्तुत करता है, जिसमें उन्होंने मानवता, करुणा और नैतिकता को सर्वोपरि रखा।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी संकेत दिया कि अहिंसा केवल व्यक्तिगत आचरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के निर्माण का आधार भी है। बापू का अहिंसा का विचार सामाजिक समरसता, शांति और न्यायपूर्ण व्यवस्था की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि महात्मा गांधी के सिद्धांत आज भी भारत की नीतियों और मूल्यों में प्रतिबिंबित होते हैं।

    देशभर में शहीद दिवस के अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया यह सुभाषितम न केवल बापू के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है बल्कि देशवासियों के लिए यह संदेश भी है कि सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर ही स्थायी शांति और मानव कल्याण संभव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संदेश बापू के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर किया नमन, स्वदेशी को बताया आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर किया नमन, स्वदेशी को बताया आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके विचारों एवं आदर्शों को स्मरण किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि पूज्य बापू का जीवन, उनका व्यक्तित्व और उनका कृतित्व देशवासियों को सत्य, अहिंसा और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की निरंतर प्रेरणा देता रहेगा। महात्मा गांधी का स्वदेशी पर दिया गया बल आज के विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का मजबूत आधारस्तंभ है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा अपने संदेश में राष्ट्रपिता को नमन करते हुए कहा कि बापू का स्वदेशी विचार केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता तक सीमित नहीं था, बल्कि यह आत्मसम्मान, आत्मबल और सामाजिक चेतना से भी जुड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का दर्शन आज के भारत के विकास मॉडल में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है, जहां स्थानीय संसाधनों, स्वदेशी उत्पादों और भारतीय मूल्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी का संपूर्ण जीवन मानवता, करुणा और नैतिकता का प्रतीक है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सत्य और अहिंसा जैसे मूल्यों के बल पर न केवल भारत को आज़ादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि पूरी दुनिया को शांति और सह-अस्तित्व का मार्ग भी दिखाया। बापू का यह संदेश आज के वैश्विक परिदृश्य में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि महात्मा गांधी का व्यक्तित्व देशवासियों को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की सीख देता है। उन्होंने समाज के हर वर्ग को समानता, स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और अनुशासन का महत्व समझाया। गांधीजी के विचारों में निहित सादगी और सेवा भाव आज भी राष्ट्र निर्माण की प्रेरक शक्ति बने हुए हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के जो संकल्प लिए गए हैं, उनकी जड़ें महात्मा गांधी के स्वदेशी और ग्राम स्वराज के विचारों में निहित हैं। स्थानीय से वैश्विक की सोच, कुटीर उद्योगों को बढ़ावा और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण, बापू के सपनों को साकार करने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।

    देशभर में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। यह दिन शहीद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है और राष्ट्रपिता के बलिदान को याद करने का अवसर प्रदान करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा व्यक्त किए गए विचार एक बार फिर यह स्मरण कराते हैं कि महात्मा गांधी केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित व्यक्तित्व नहीं हैं, बल्कि वे आज भी भारत की आत्मा और दिशा के मार्गदर्शक हैं।

  • सुप्रीम कोर्ट ने NHAI को दिया अल्टीमेटम: हर 50 किलोमीटर पर गौशाला बनाएं, आवारा जानवरों के लिए CSR से समाधान जरूरी

    सुप्रीम कोर्ट ने NHAI को दिया अल्टीमेटम: हर 50 किलोमीटर पर गौशाला बनाएं, आवारा जानवरों के लिए CSR से समाधान जरूरी


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को गुरुवार को निर्देश दिया कि वह सड़क निर्माण में लगे ठेकेदारों से राजमार्गों पर आवारा जानवरों की देखभाल के लिए CSR के तहत गौशाला/पशु आश्रय बनाने पर विचार करने को कहे। अदालत ने कहा कि लगभग हर 50 किलोमीटर के बाद ऐसे आश्रय बनाकर आवारा पशुओं को संरक्षित किया जा सकता है।

    न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने आवारा कुत्तों के स्थानांतरण और बधियाकरण संबंधी 7 नवंबर, 2025 के आदेश में संशोधन की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

    पंजाब, राजस्थान, यूपी और तमिलनाडु पर कोर्ट ने जताया असंतोष
    सुप्रीम कोर्ट ने कई राज्यों के निर्देशों के अनुपालन पर असंतोष जताया। कोर्ट ने पंजाब सरकार के दैनिक 100 कुत्तों के बधियाकरण प्रयास को अपर्याप्त बताते हुए इसे “ऊंट के मुंह में जीरे” जैसा बताया।

    NHAI से ऐप बनाने का निर्देश
    कोर्ट ने NHAI से कहा कि वह एक ऐप विकसित करे, जिसमें लोग राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा जानवरों को देखने पर तुरंत सूचना दे सकें। इससे सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।

    राज्यों की रिपोर्टों पर कोर्ट ने उठाए सवाल
    NHAI ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर 1300 से अधिक संवेदनशील स्थान हैं। कुछ राज्यों ने कदम उठाए हैं, लेकिन महाराष्ट्र, झारखंड और राजस्थान जैसे राज्यों ने अभी तक समस्या के समाधान के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की।

    राजस्थान ने कहा कि राज्य में बधियाकरण केंद्र बनाए गए हैं और संस्थानों के आसपास बाड़बंदी की गई है, लेकिन कोर्ट ने कहा कि केवल 45 वैन से यह काम संभव नहीं है।

    कोर्ट ने दी चेतावनी: समस्या बढ़ती जाएगी
    पीठ ने कहा कि यदि अभी कार्रवाई नहीं हुई तो आवारा कुत्तों की संख्या हर साल 10-15% तक बढ़ेगी। कोर्ट ने कहा कि 100 कुत्तों का रोज़ाना बधियाकरण कोई समाधान नहीं है।

    AWBI के पास 250+ आवेदन लंबित, कोर्ट ने फटकार लगाई
    भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) ने बताया कि 7 नवंबर के आदेश के बाद 250 से अधिक बधियाकरण केंद्र और आश्रय खोलने के आवेदन आए हैं, लेकिन कई आवेदन पर अभी भी निर्णय नहीं लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने AWBI से कहा कि वे जल्दी से जल्दी निर्णय लें।

    कोर्ट ने राज्यों को दिया चेतावनी संकेत
    सुप्रीम कोर्ट ने 13 जनवरी को कहा था कि यदि कुत्ते के काटने की घटनाएं बढ़ती हैं तो राज्यों को भारी हर्जाना देना होगा और कुत्तों को खाना खिलाने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
    सुप्रीम कोर्ट ने आवारा पशुओं की समस्या पर सख्त रुख अपनाया है और NHAI को CSR के जरिए गौशाला बनाने, ऐप बनाने और ठेकेदारों को जिम्मेदार बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राज्यों को चेतावनी दी है कि यदि वे निर्देशों का पालन नहीं करेंगे तो कानूनी कार्रवाई और भारी जुर्माना हो सकता है।

  • चंद्रपुर में कांग्रेस के पार्षदों को अगवा करने का प्रयास, 6 लोगों के खिलाफ FIR, एक आरोपी गिरफ्तार

    चंद्रपुर में कांग्रेस के पार्षदों को अगवा करने का प्रयास, 6 लोगों के खिलाफ FIR, एक आरोपी गिरफ्तार


    चंद्रपुर महाराष्ट्र।  महाराष्ट्र में कांग्रेस के नवनिर्वाचित पार्षदों को बस से अगवा करने की कोशिश का सनसनीखेज मामला सामने आया है। गुरुवार को चंद्रपुर में कुछ नकाबपोश हमलावरों ने कांग्रेस के पार्षदों को जबरन बस से बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन स्थानीय कार्यकर्ताओं और पुलिस के त्वरित हस्तक्षेप से यह प्रयास नाकाम हो गया।

    कांग्रेस पार्षद नागपुर जा रहे थे, समृद्धि एक्सप्रेसवे पर हुआ हमला
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना वर्धा जिले के समृद्धि एक्सप्रेसवे के पास हुई, जो नागपुर के पास है। बस में सवार कांग्रेस पार्षद नागपुर जा रहे थे, जहां उन्हें स्थानीय निकाय चुनावों में जीत के बाद डिविजनल कमिश्नर कार्यालय में पंजीकरण कराने जाना था।

    कौन थे पार्षद? विजय वडेट्टीवार के समर्थक
    पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस बस में 17 से 18 पार्षद सवार थे, जो कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार के करीबी माने जाते हैं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ पार्षद ने बताया कि कार्यकर्ताओं ने समय पर पहुंचकर मदद की और पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की, जिससे अगवा करने की कोशिश विफल हुई।

    हमलावर 4-6 गाड़ियों में आए, नकाबपोश थे
    जानकारी के मुताबिक, शाम लगभग 5:45 बजे येलकेली टोल प्लाजा के पास लगभग 20 नकाबपोश लोग पहुंचे। वे 4 से 6 गाड़ियों में सवार थे और उन्होंने पार्षदों को बस से बाहर निकालने की कोशिश की। इसी दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के पहुंचने पर झड़प हुई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।

    एक गिरफ्तार, 6 पर FIR
    पुलिस ने बताया कि इस मामले में कनैन सिद्दीकी (नागपुर निवासी) को गिरफ्तार किया गया है। कांग्रेस पार्षद राजेश अदूर की शिकायत पर कनैन सिद्दीकी और अन्य 5 लोगों के खिलाफ BNS की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है। साथ ही कई अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।

    कांग्रेस के अंदर मेयर पद को लेकर संघर्ष
    यह घटना कांग्रेस के अंदर चल रहे सत्ता संघर्ष के बीच हुई है। चंद्रपुर नगर निगम में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन मेयर पद को लेकर पार्टी में दो गुटों के बीच टकराव है—एक गुट विजय वडेट्टीवार का, जबकि दूसरा कांग्रेस सांसद प्रतिभा धनोरकर का है।

    10 फरवरी को मेयर चुनाव
    स्थानीय निकाय चुनावों के बाद चंद्रपुर में मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव 10 फरवरी को होना है। 66 सदस्यीय चंद्रपुर नगर निगम में कांग्रेस को 27 सीटें मिली हैं, जबकि बीजेपी को 23 और शिवसेना (UBT) को 6 सीटें मिली हैंइस घटना ने राजनीतिक हलकों में भूचाल ला दिया है और पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने NHAI को निर्देश दिया: 50 किलोमीटर के बाद गौशाला बनाएं, आवारा पशुओं की देखभाल CSR से हो

    सुप्रीम कोर्ट ने NHAI को निर्देश दिया: 50 किलोमीटर के बाद गौशाला बनाएं, आवारा पशुओं की देखभाल CSR से हो


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से कहा है कि सड़क निर्माण में लगे ठेकेदारों को आवारा जानवरों की समस्या से निपटने के लिए CSR (कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी) के तहत गौशाला/पशु आश्रय बनाने के निर्देश दिए जाएं। कोर्ट ने कहा कि हर 50 किलोमीटर के बाद ऐसे आश्रय बनाकर आवारा पशुओं की देखभाल सुनिश्चित की जा सकती है। कोर्ट ने कई राज्यों पर जताया असंतोष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के निर्देशों के पालन पर नाराजगी जताई।
    कोर्ट ने विशेषकर पंजाब सरकार के दैनिक 100 कुत्तों के बधियाकरण प्रयास को अपर्याप्त बताया और इसे “ऊंट के मुंह में जीरे” जैसा बताया। NHAI को ऐप बनाने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने NHAI से कहा कि वह एक ऐप विकसित करे, जिसमें आम लोग राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा जानवरों को देखने पर सूचना (report) कर सकें।
    इससे तुरंत कार्रवाई संभव होगी और दुर्घटनाओं में कमी आएगी। राज्यों की रिपोर्ट पर कोर्ट ने उठाए सवाल राजस्थान सरकार ने कहा कि उन्होंने बधियाकरण केंद्र बनाए हैं और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास बाड़बंदी की गई है, लेकिन कोर्ट ने इस पर भी संदेह जताया कि केवल 45 वैन से कैसे काम चलेगा।
    न्यायमूर्ति मेहता ने कहा कि जयपुर के लिए ही लगभग 20 वैन की जरूरत होगी और विभिन्न शहरों में वैन की संख्या बढ़ानी होगी। कोर्ट का सख्त संदेश: समस्या बढ़ती जा रही है पीठ ने चेतावनी दी कि अगर आवारा कुत्तों की समस्या पर तुरंत नियंत्रण नहीं हुआ तो हर साल उनकी संख्या 10-15% बढ़ती जाएगी। कोर्ट ने कहा कि 100 कुत्तों का बधियाकरण रोज़ाना कोई बड़ी मदद नहीं है।
    AWBI की स्थिति: 250 से अधिक आवेदन लंबित भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) ने बताया कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 250 से अधिक बधियाकरण केंद्र और आश्रय खोलने के लिए आवेदन आए, लेकिन अभी तक कई आवेदन पर कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट ने AWBI से कहा कि वे अभ्यर्थियों के आवेदन को जल्द निर्णय दें। कोर्ट ने राज्यों को दिया चेतावनी का संकेत सुप्रीम कोर्ट ने 13 जनवरी को कहा था कि यदि कुत्ते के काटने की घटनाओं में वृद्धि होती है तो राज्यों को भारी हर्जाना देना होगा और कुत्तों को खाना खिलाने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
    सुप्रीम कोर्ट ने NHAI को आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैंगौशाला, ऐप, CSR के तहत पहलऔर राज्यों को चेतावनी दी है कि इस समस्या को हल न किया गया तो कानूनी कार्रवाई और भारी जुर्माना हो सकता है।
  • TVK के प्रस्‍ताव पर कांग्रेस बोली- राहुल गांधी ही हमारा ‘बूस्ट’

    TVK के प्रस्‍ताव पर कांग्रेस बोली- राहुल गांधी ही हमारा ‘बूस्ट’

    चैन्‍नई। दक्षिण के चुनावी राज्य तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। दरअसल, अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK) की ओर से कांग्रेस को गठबंधन का प्रस्ताव मिला है। यह पेशकश विजय के पिता और प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक एस.ए. चंद्रशेखर ने की है। तिरुवारूर जिले में एक शादी समारोह में शामिल होने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि कांग्रेस तमिलनाडु में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन तलाश रही है और विजय उसे फिर से ‘पुरानी शान’ दिलाने को तैयार हैं।

    उन्होंने कहा, “कांग्रेस का एक इतिहास और विरासत रही है। अब वह ढलान पर है लेकिन विजय कांग्रेस को समर्थन देने के लिए तैयार हैं। यह मौका कांग्रेस को गंवाना नहीं चाहिए।” हालांकि, अभी तक न तो विजय और न ही उनकी पार्टी TVK ने इस प्रस्ताव की आधिकारिक पुष्टि या खंडन किया है।

    कांग्रेस बोली- राहुल गांधी ही हमारा ‘बूस्ट’
    विजय के पिता के इस बयान पर कांग्रेस की ओर से भी तुरंत प्रतिक्रिया आई।

    तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष के. सेल्वापेरुंथगई ने इस ऑफर को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने तंज़ कसते हुए कहा, “हमारे कार्यकर्ताओं को किसी बाहरी बूस्ट की जरूरत नहीं है। हमारे नेता राहुल गांधी ही हमें ‘बूस्ट, हॉर्लिक्स और बॉर्नविटा’ दे रहे हैं।” बावजूद इसके चंद्रशेखर के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा और तेज कर दी है।
    DMK से बढ़ती दूरी?
    कांग्रेस का यह बयान सख़्त जरूर है, लेकिन सियासी अटकलें थमी नहीं हैं। कांग्रेस फिलहाल सत्तारूढ़ DMK की सहयोगी है और 2019, 2021 और 2024 के चुनावों में दोनों ने साथ मिलकर जीत हासिल की थी। लेकिन अब कांग्रेस DMK से सत्ता में हिस्सेदारी चाहती है। सूत्रों के हवाले से NDTV की रिपोर्ट में कहा गया है कि कांग्रेस कम से कम छह मंत्री पद मांग रही है, जिस पर DMK अभी तक सहमत नहीं हुई है।
    सीट बंटवारे पर भी फंसा पेच
    इसके अलावा आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सीट बंटवारे पर भी दोनों दलों में सहमति नहीं बन पाई है। कांग्रेस चाहती है कि उसे कम से कम 35 सीटें मिलें लेकिन DMK 19 से ज़्यादा सीटें देने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि कांग्रेस के भीतर असंतोष बढ़ता जा रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने राज्य में DMK गठबंधन के साथ 9 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि 2021 के विधानसभा चुनावों में 25 में से 18 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

    TVK का ऑफर क्यों लुभावना?
    सूत्रों के अनुसार, TVK ने कांग्रेस को 60 से अधिक सीटें और सरकार बनने की स्थिति में मंत्री पदों का भी संकेत दिया है। यही कारण है कि भले ही सार्वजनिक तौर पर कांग्रेस इनकार कर रही हो, लेकिन अंदरखाने इस प्रस्ताव पर मंथन जारी है। विश्लेषकों का कहना है कि तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरण बनते-बिगड़ते देर नहीं लगती। ऐसे में कांग्रेस और विजय की पार्टी के बीच संभावित गठबंधन को पूरी तरह नकारा भी नहीं जा सकता। आने वाले दिनों में यह साफ़ होगा कि कांग्रेस DMK के साथ बनी रहती है या किसी नए सियासी रास्ते की ओर बढ़ती है।

  • UPI यूजर्स को Payment फेल होने पर मुआवजा के रूप में मिलेगा अतिरिक्त पैसा, जानें क्या है RBI के नियम

    UPI यूजर्स को Payment फेल होने पर मुआवजा के रूप में मिलेगा अतिरिक्त पैसा, जानें क्या है RBI के नियम


    नई दिल्ली।
    आजकल ज्यादातर लोग UPI से पेमेंट करते हैं। दूध, सब्जी, किराया या ऑनलाइन शॉपिंग (Online Shopping) हर जगह लोग गूगल पे (Google Pay), फोन पे (PhonePe) और पेटीएम (Paytm) का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन क्या हो अगर पैसा अकाउंट से कट जाए और सामने वाले तक न पहुंचे, तो सबसे पहले यही डर लगता है कि कहीं पैसा डूब तो नहीं गया। ऐसे मामलों में आरबीआई (RBI) ने साफ नियम बना रखे हैं, जिनके तहत पैसा वापस मिलने के साथ-साथ मुआवजा भी मिल सकता है।


    पैसा कट गया लेकिन पेमेंट फेल हो गया, तो क्या होता है?

    अगर UPI ट्रांजैक्शन फेल हो जाता है और पैसा कट जाता है, तो बैंक या UPI ऐप की जिम्मेदारी होती है कि तय समय के अंदर इस समस्या को सुलझाए। आमतौर पर 1 दिन के अंदर पैसा अपने आप वापस आ जाना चाहिए। कई बार यह प्रोसेस तुरंत हो जाता है, लेकिन कुछ मामलों में देरी भी होती है। यही देरी आगे चलकर आपको Compensation लेने में मदद करती है।


    किन मामलों में मिलता है Compensation?

    RBI और NPCI के नियमों के अनुसार, अगर बैंक या UPI सर्विस प्रोवाइडर तय समय में फेल ट्रांजैक्शन को ठीक नहीं करता, तो यूजर मुआवजे का हकदार होता है। यह मुआवजा रिफंड से अलग होता है, यानी पहले आपका कटा हुआ पैसा वापस आएगा और फिर उसके बाद अतिरिक्त रकम दी जा सकती है। लेकिन ध्यान दें कि यह नियम तभी लागू होता है जब गलती बैंक, सर्वर या ऐप की तरफ से हो।


    कितना Compensation मिल सकता है?

    Compensation की रकम ट्रांजैक्शन की देरी पर निर्भर करती है। RBI के नियमों के मुताबिक, अगर तय समय सीमा के बाद भी समस्या हल नहीं होती, तो प्रति दिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जाता है, जो सीधे यूजर को दिया जाता है। हालांकि इसकी रकम बहुत ज्यादा नहीं होती, लेकिन यह यूजर के अधिकार के तौर पर दी जाती है ताकि कंपनियां लापरवाही न करें।


    UPI पेमेंट फेल होने पर शिकायत कैसे करें?

    अगर आपका पैसा कट गया है और वापस नहीं आया, तो सबसे पहले उसी UPI ऐप में शिकायत दर्ज करें जिससे आपने पेमेंट किया था। ट्रांजैक्शन हिस्ट्री में जाकर फेल पेमेंट चुनें और “Help” या “Report a Problem” ऑप्शन पर क्लिक करें। यहां आपको UTR नंबर या ट्रांजैक्शन ID डालनी होती है, जिससे आपकी शिकायत जल्दी ट्रैक हो सके।


    हर फेल ट्रांजैक्शन पर नहीं मिलता मुआवजा

    यह समझना जरूरी है कि हर फेल UPI ट्रांजैक्शन पर मुआवजा नहीं मिलता। अगर गलती आपकी तरफ से हुई है, जैसे गलत UPI ID डालना, नेटवर्क खुद बंद हो जाना या ट्रांजैक्शन तुरंत रिवर्स हो जाना, तो ऐसे मामलों में मुआवजा का नियम लागू नहीं होता।


    समस्या न सुलझे तो कहां करें शिकायत?

    अगर ऐप और बैंक दोनों से बात करने के बाद भी आपकी समस्या हल नहीं होती, तो आप NPCI या RBI के ऑफिशियल शिकायत पोर्टल पर कंप्लेंट दर्ज करें। दर्ज की गई शिकायतों पर गंभीरता से जांच होती है और सही पाए जाने पर यूजर को उसका पैसा और मुआवजा मिल सकता है।


    UPI इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान

    UPI पेमेंट करते समय हमेशा सही UPI ID चेक करें, मजबूत इंटरनेट कनेक्शन रखें और पेमेंट पूरा होने तक ऐप बंद न करें। साथ ही, हर ट्रांजैक्शन का स्क्रीनशॉट संभालकर रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर शिकायत दर्ज करते समय आपके पास सबूत मौजूद हो।

  • “बहुत बड़ी और बहुत अच्छी खबर, लेकिन…” भारत-EU FTA पर शशि थरूर ने जताई अहम चिंता

    “बहुत बड़ी और बहुत अच्छी खबर, लेकिन…” भारत-EU FTA पर शशि थरूर ने जताई अहम चिंता

    नई दिल्ली  शशि थरूर ने भारत-ईयू में हुए एफटीएम पर कहा कि इसके लागू होने में शायद एक और साल लगेगा। इसलिए, किसी भी शॉर्ट-टर्म फायदे की उम्मीद न करें, लेकिन लंबे समय में यह बहुत अच्छा होना चाहिए।

    भारत-यूरोपियन यूनियन (ईयू) के बीच हुए व्यापार समझौते (FTA) पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ी खबर है, बहुत अच्छी खबर है, लेकिन इसमें एक साल लगेगा क्योंकि यूरोपियन यूनियन में 27 सदस्य देश हैं जिन्हें इस समझौते को लागू होने से पहले मंजूरी देनी होगी।

    उन्होंने आगे कहा कि ऐसे में इसके लागू होने में शायद एक और साल लगेगा। इसलिए, किसी भी शॉर्ट-टर्म फायदे की उम्मीद न करें, लेकिन लंबे समय में यह बहुत अच्छा होना चाहिए, और मुझे उम्मीद है कि मैन्युफैक्चरर्स, एक्सपोर्टर्स वगैरह आने वाले बड़े अवसरों के लिए खुद को तैयार करेंगे।

    भारत और यूरोप के 27 देशों के साझा बाजार यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में सहमति हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इसकी घोषणा करते हुए इस समझौते को ऐतिहासिक करार दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “कल ही भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक बहुत बड़ा समझौता हुआ है। दुनिया के लोग इसकी चर्चा मदर ऑफ ऑल डील्स (अबतक के सबसे बड़े व्यापार समझौते) के रूप में कर रहे हैं।”

    उल्लेखनीय है कि ईयू भारत का एक प्रमुख व्यापारिक और आर्थिक भागीदार है। साल 2024-2025 में दोनों के बीच 136 अरब डॉलर के सामान का व्यापार हुआ था। भारत वहां से मुख्य रूप से मशीनें, परिवहन उपकरण और रसायनों का आयात करता है, जबकि भारत की ओर से वहां मशीनें, रसायन, लोहा, एल्मुनियम और तांबा जैसी प्राथमिक धातुएं, खनिज उत्पाद तथा कपड़ा और चमड़े के सामान आदि का निर्यात होता है।