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  • कीमतें आसमान पर… आम आदमी की पहुंच से दूर हुआ सोना, मांग में भारी गिरावट

    कीमतें आसमान पर… आम आदमी की पहुंच से दूर हुआ सोना, मांग में भारी गिरावट


    नई दिल्ली।
    कीमतों के रिकॉर्ड स्तर (Record levels Prices) पर पहुंचने और उपभोक्ताओं के खरीद व्यवहार में बदलाव के कारण वर्ष 2025 में भारत (India) की सोने की मांग (Gold Demand) में 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) की गुरुवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सोने की कुल मांग 2025 में गिरकर 710.9 टन रह गई, जो 2024 में 802.8 टन थी। परिषद का अनुमान है कि 2026 में देश में सोने की मांग 600 से 700 टन के बीच रह सकती है। हालांकि, कीमतों में भारी उछाल के कारण मूल्य के संदर्भ में सोने की मांग 30 प्रतिशत बढ़कर 7,51,490 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष यह 5,75,930 करोड़ रुपये थी।

    डब्ल्यूजीसी ने बताया, ‘वर्ष, 2025 की चौथी तिमाही में सोने की मांग पर ऊंची कीमतों और उपभोक्ताओं के बदलते व्यवहार का असर स्पष्ट दिखा। मात्रा के आधार पर इस तिमाही में मांग नौ प्रतिशत गिरकर 241.3 टन रही, लेकिन मूल्य के आधार पर यह 49 प्रतिशत बढ़कर करीब 3,03,470 करोड़ रुपये हो गई।

    वर्ष 2025 के दौरान आभूषणों की कुल मांग 24 प्रतिशत घटकर 430.5 टन रही, जो 2024 में 563.4 टन थी। हालांकि, मूल्य के लिहाज से यह 12 प्रतिशत बढ़कर 4,54,390 करोड़ रुपये रही, जो इससे पिछले साल 4,04,510 करोड़ रुपये रही थी। शादियों के सीजन के बावजूद ऊंची कीमतों और महंगाई के कारण आभूषणों की बिक्री में 23 प्रतिशत की कमी आई। 2025 में सोने ने 60 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया और 53 बार सर्वकालिक उच्च स्तर को छुआ। इसके विपरीत, निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ी है। चौथी तिमाही में निवेश मांग 26 प्रतिशत बढ़कर 96 टन रही, जबकि इसका मूल्य 108 प्रतिशत उछलकर 1,20,700 करोड़ रुपये हो गया।


    सोने की वैश्विक मांग 5,000 टन से अधिक हुई

    वैश्विक स्तर पर सोने की मांग 2025 में 5,000 टन से अधिक होकर एक नए सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंच गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल सोने की मांग 2025 में 5,002 टन के नए ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई, जो पिछले वर्ष 4,961.9 टन थी। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से निवेश मांग में तेज उछाल के कारण हुई, जो 2025 में बढ़कर 2,175.3 टन हो गई जबकि यह 2024 में 1,185.4 टन थी। चालू वित्त वर्ष की अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में उपभोक्ता मांग दो प्रतिशत बढ़कर 1,345.3 टन हो गई जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 1,318.5 टन थी।

  • दिल्ली में आज जुटेंगे सभी अरब देश…. वैश्विक तनाव के बीच भारत में लगेगा मुस्लिम देशों का जमावड़ा

    दिल्ली में आज जुटेंगे सभी अरब देश…. वैश्विक तनाव के बीच भारत में लगेगा मुस्लिम देशों का जमावड़ा


    नई दिल्ली।
    मिडिल ईस्ट (Middle East) में जारी तनाव के बीच भारत (India) में इस सप्ताह के अंत में मुस्लिम देशों (Muslim Countries) का जमावड़ा लगने जा रहा है। भारत आगामी शनिवार को राजधानी दिल्ली में भारत-अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक की मेजबानी करेगा जिसमें अरब लीग के सभी 22 अरब देशों (All 22 Arab countries) के प्रतिनिधि भाग लेंगे। बता दें कि यह बैठक दस साल बाद हो रही है। वहीं यह बात भी अहम है कि यह पहली बार होगा जब भारत इस बैठक की मेजबानी करने जा रहा है।

    जानकारी के मुताबिक अरब देशों के विदेश मंत्री, राज्य मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और अरब लीग सचिवालय इस बैठक में अपने देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बताया है कि इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत और संयुक्त अरब अमीरात मिलकर करेंगे। इसमें अरब लीग के सदस्य देशों के विदेश मंत्री और अरब लीग के महासचिव भी भाग लेंगे। वहीं बैठक से पहले शुक्रवार को भारत और अरब वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बातचीत भी होगी।


    एजेंडे में क्या?

    दोनों पक्षों की दूसरी बैठक दस सालों के अंतराल के बाद हो रही है। इससे पहले दोनों पक्षों के बीच पहली बैठक 2016 में बहरीन में हुई थी। पहली बैठक के दौरान मंत्रियों ने सहयोग के पांच प्राथमिक क्षेत्रों-अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति-की पहचान की थी और इन क्षेत्रों में विभिन्न गतिविधियों का प्रस्ताव रखा था। वहीं शनिवार को होने वाली बैठक से मौजूदा सहयोग को आगे बढ़ाने और भारत-अरब साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ और व्यापक बनाने की अपेक्षा होगी।


    अरब लीग में पर्यवेक्षक की भूमिका में भारत

    गैरतलब है कि भारत 22 सदस्य देशों वाले पैन-अरब संगठन अरब लीग में पर्यवेक्षक की भूमिका में है। वहीं भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक भारत और अरब देशों के बीच साझेदारी को आगे बढ़ाने वाली सर्वोच्च संस्थागत व्यवस्था है। इस साझेदारी को मार्च 2002 में औपचारिक रूप दिया गया था जब भारत और अरब लीग के बीच संवाद प्रक्रिया को संस्थागत स्वरूप देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

    इसके बाद दिसंबर 2008 में तत्कालीन अरब लीग महासचिव अमर मूसा की भारत यात्रा के दौरान अरब-भारत सहयोग मंच की स्थापना के लिए एक सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। 2013 में इसकी संरचनात्मक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से इसमें संशोधन भी किया गया।

  • रेलवे ने तत्काल बुकिंग के नियमों में किया बदलाव… कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ी

    रेलवे ने तत्काल बुकिंग के नियमों में किया बदलाव… कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ी


    नई दिल्ली।
    भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने तत्काल टिकट बुकिंग की प्रक्रिया (Tatkal Ticket Booking Process) को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए अपनी तकनीक और नियमों को पूरी तरह अपडेट कर दिया है। पिछले कई वर्षों से यात्रियों की शिकायत थी कि बुकिंग शुरू होते ही कुछ ही सेकंड में टिकट खत्म हो जाते हैं। रेलवे का दावा है कि नए सिस्टम (New Systems) से अब वास्तविक यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना काफी बढ़ जाएगी।

    नए नियमों के तहत अब केवल पूरी तरह सत्यापित IRCTC अकाउंट से ही तत्काल टिकट बुक किए जा सकेंगे। अब यात्रियों को अपना IRCTC अकाउंट आधार कार्ड से लिंक करना होगा। बिना वेरिफिकेशन वाले या अधूरे प्रोफाइल वाले अकाउंट्स को तत्काल विंडो के दौरान ब्लॉक कर दिया जाएगा। बुकिंग के समय यात्री को वही पहचान विवरण देना होगा जो उसके आधार या सरकारी आईडी से जुड़ा है। इससे फर्जी नामों से टिकट बुक करने और उन्हें ऊंचे दामों पर बेचने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।

    रेलवे ने इस बार तकनीक के मोर्चे पर भी बड़े बदलाव किए हैं। बुकिंग के शुरुआती मिनटों में ऑटो-फिल टूल्स और स्क्रिप्ट्स को रोकने के लिए ‘सोफिस्टिकेटेड टेक्निकल फिल्टर्स’ लगाए गए हैं। इससे अब सॉफ्टवेयर के जरिए पलक झपकते ही टिकट उड़ा लेना मुमकिन नहीं होगा। यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायत पेमेंट फेल होने की रहती थी। नए सिस्टम में पेमेंट गेटवे को और अधिक फास्ट और सुरक्षित बनाया गया है, जिससे आखिरी स्टेप पर टिकट कैंसिल होने का डर कम होगा।

    तत्काल विंडो खुलते ही शुरुआती समय में एजेंटों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। उनके लिए नए प्रतिबंध और ट्रैकिंग टूल्स लागू किए गए हैं ताकि आम जनता को प्राथमिकता मिल सके।


    यात्रियों के लिए क्या बदला?

    रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यदि आपका प्रोफाइल पहले से अपडेटेड और आधार से लिंक है, तो आपको कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना पिछले वर्षों के मुकाबले कई गुना ज्यादा है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे बुकिंग समय से पहले अपना इंटरनेट कनेक्शन और प्रोफाइल की स्थिति जांच लें।

    2026 के ये नए नियम रेलवे बुकिंग में पारदर्शिता बहाल करने और सिस्टम पर लोगों का भरोसा फिर से जगाने की एक कोशिश है। तकनीकी सुधार और अनिवार्य पहचान सत्यापन के माध्यम से रेलवे ने दलालों और सॉफ्टवेयर के अवैध इस्तेमाल पर सीधा हमला किया है।

  • Survey : 45 फीसदी भारतीयों ने मोदी सरकार से की अमेरिका पर टैरिफ लगाने की अपील

    Survey : 45 फीसदी भारतीयों ने मोदी सरकार से की अमेरिका पर टैरिफ लगाने की अपील


    नई दिल्ली।
    भारत और अमेरिका (India and America) में जल्द ही बड़ी ट्रेड डील (Big Trade Deal) होने के आसार हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर (Indian Foreign Minister S. Jaishankar) की आगामी अमेरिका यात्रा के दौरान डील पर बड़ा फैसला आ सकता है। इसी बीच एक सर्वे से पता चला है कि भारतीय चाहते हैं कि भारत सरकार टैरिफ का जवाब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को टैरिफ से ही दे।

    एक सर्वे के अनुसार, उत्तर देने वाले करीब 45 फीसदी लोगों ने मोदी सरकार से जवाबी टैरिफ लगाने की अपील की है। सर्वे से पता चला है कि सिर्फ 6 प्रतिशत ही मानते हैं कि भारत सरकार को ट्रंप की मांगों को स्वीकार कर लेना चाहिए। जबकि, 34 फीसद उत्तरदाता जीएसटी में कमी और ऐसे ही उपाय करने के पक्ष में हैं।


    भारत और ईयू में हुई बड़ी डील

    भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को एफटीए पर वार्ता के समापन की घोषणा की थी। इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बताया जा रहा है। इस समझौते के तहत भारत के 93 प्रतिशत निर्यात को 27 देशों वाले यूरोपीय संघ में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जबकि यूरोपीय संघ से लग्जरी कारों और वाइन का आयात सस्ता हो जाएगा।

    करीब दो दशक तक चली बातचीत के बाद हुए इस समझौते से भारत और यूरोपीय संघ के बीच लगभग दो अरब लोगों का साझा बाजार बनेगा। भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, और यूरोपीय संघ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आर्थिक इकाई है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि यूरोपीय संघ (EU) के साथ किया गया मुक्त व्यापार समझौता (FTA) महत्वाकांक्षी भारत के लिए है और इससे देश के विनिर्माताओं के लिए नए बाजार खुलेंगे। उन्होंने उद्योग जगत से इस अवसर का पूरा लाभ उठाने का आह्वान किया।

  • मौसम के बदलते मिजाज के बीच नए पश्चिमी विक्षोभ की दस्तक…MP समेत इन राज्यों में 3 दिन बारिश का अलर्ट

    मौसम के बदलते मिजाज के बीच नए पश्चिमी विक्षोभ की दस्तक…MP समेत इन राज्यों में 3 दिन बारिश का अलर्ट


    नई दिल्ली।
    भारत मौसम विभाग (IMD) ने उत्तर-पश्चिम भारत (North-West India.) में एक नए पश्चिमी विक्षोभ (New western disturbance) के प्रभाव की चेतावनी जारी की है, जो 30 जनवरी की रात से प्रभावी हो सकता है। इसके अलावा, 2 फरवरी से एक और ताजा पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करने की संभावना है। इसके कारण 31 जनवरी से 3 फरवरी तक पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र (Western Himalayan Region) में छिटपुट से भारी बारिश/बर्फबारी हो सकती है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में 31 जनवरी और 1 फरवरी को ऐसा ही मौसम रहेगा। हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड में 1-2 फरवरी को गरज-चमक, बिजली के साथ बारिश/बर्फबारी हो सकती है। राजस्थान में 31 जनवरी से 3 फरवरी तक छिटपुट हल्की बारिश के साथ गरज-चमक की संभावना है। मध्य प्रदेश में 1-2 फरवरी, छत्तीसगढ़ में 2 फरवरी को हल्की बारिश संभव है। उत्तराखंड में 30 जनवरी को पाला पड़ने की स्थिति बनी रह सकती है।

    न्यूनतम तापमान में बदलाव की भविष्यवाणी के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में अगले दो दिनों तक कोई बड़ा परिवर्तन नहीं होगा। इसके बाद अगले तीन दिनों में 3-5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी और फिर दो दिनों में 2-4 डिग्री की गिरावट संभावित है। मध्य भारत में अगले 24 घंटों में 2-3 डिग्री की बढ़ोतरी, फिर दो दिनों में गिरावट और उसके बाद स्थिरता रहेगी। महाराष्ट्र में अगले चार दिनों में 2-4 डिग्री की बढ़ोतरी और गुजरात में अगले दो दिनों में 3-5 डिग्री की बढ़ोतरी, फिर तीन दिनों में गिरावट और बाद में फिर बढ़ोतरी का अनुमान है। देश के अन्य हिस्सों में न्यूनतम तापमान में खास बदलाव नहीं होगा।


    घने कोहरे की मार से अभी राहत नहीं

    घने कोहरे और शीतलहर की चेतावनी भी जारी है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश में 31 जनवरी तक सुबह-रात के समय घना कोहरा रहेगा। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान में 31 जनवरी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1 फरवरी तक घना से बहुत घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। 30-31 जनवरी को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ में शीतलहर चल सकती है। मछुआरों को 29 जनवरी से 3 फरवरी तक बंगाल की खाड़ी (दक्षिण तमिलनाडु, पश्चिमी श्रीलंका तट, मन्नार की खाड़ी, कोमोरिन क्षेत्र) और अरब सागर (गुजरात तट के पास) में न जाने की सलाह दी गई है। कुल मिलाकर, उत्तर भारत में सर्दी फिर से जोर पकड़ सकती है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है।

  • नागालैंड की जुको घाटी में भीषण आग…3 दिन में मणिपुर की सर्वोच्च चोटी माउंट ईसो तक पहुंची

    नागालैंड की जुको घाटी में भीषण आग…3 दिन में मणिपुर की सर्वोच्च चोटी माउंट ईसो तक पहुंची


    काहिमा।
    नागालैंड (Nagaland) की ज़ुको घाटी (Dzuko Valley) में पिछले तीन दिनों से लगी भीषण जंगल की आग (Massive forest fire.) अब मणिपुर (Manipur) की सबसे ऊंची चोटी माउंट ईसो (Highest peak Mount Iso) तक फैल गई है, जिससे इस जैव-विविधता संपन्न क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। सॉन्ग-सॉन्ग यूथ एंड स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (SSYSO) के स्वयंसेवक और आसपास के गांवों के निवासी आग बुझाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, उबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाके में आग की तीव्रता प्रयासों पर भारी पड़ रही है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि युवा स्वयंसेवकों के लगातार प्रयासों के बावजूद आग तेजी से आगे बढ़ रही है।

    राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक रिपोर्ट जारी नहीं की गई है। हालांकि, कई स्थानीय नेताओं ने मणिपुर के राज्यपाल से अपील की है कि आग पर काबू पाने के लिए तत्काल विशेषज्ञ टीमों को तैनात किया जाए। SSYSO के एक सदस्य ने कहा, “स्थिति भयावह है। हमें उचित संसाधनों और उपकरणों के साथ सरकारी हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता है। हमारे सीमित साधन आग से निपटने के लिए बहुत पर्याप्त नहीं है।” पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि आग पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो यह मणिपुर के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान पहुँचा सकती है और पूरे क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन को बिगाड़ सकती है।


    2020 और 2021 में भी लगी थी भीषण आग

    यह पहली बार नहीं है जब ज़ुको घाटी और माउंट ईसो क्षेत्र को ऐसी तबाही का सामना करना पड़ा है। दिसंबर 2020 और जनवरी 2021 के बीच भी एक भीषण आग ने इस क्षेत्र की वनस्पतियों के एक बड़े हिस्से को नष्ट कर दिया था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उस समय तेज हवाओं ने आग बुझाने के प्रयासों में काफी बाधा डाली थी। मणिपुर के सेनापति जिले और नागालैंड के कोहिमा जिले की सीमा पर 2,452 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ज़ुको घाटी अपनी अनूठी जैव-विविधता के लिए जानी जाती है, जिसमें दुर्लभ ‘ज़ुको लिली’ भी शामिल है। यह क्षेत्र पूर्वोत्तर हिमालय में एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक गलियारे के रूप में भी काम करता है।


    2024 में मणिपुर में लगभग 17.8 हजार हेक्टेयर वन नष्ट

    आधिकारिक स्रोतों के अनुसार, मणिपुर हाल के वर्षों में भारत के सबसे अधिक आग की चपेट में आने वाले राज्यों में से एक बनकर उभरा है। अप्रैल 2025 की शुरुआत में, राज्य में मात्र सात दिनों के भीतर जंगल की आग की 1,424 घटनाएं दर्ज की गईं, जो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बाद देश में तीसरे स्थान पर थीं। अकेले 2024 में, मणिपुर ने लगभग 17.8 हजार हेक्टेयर प्राकृतिक वन खो दिए, जिससे वातावरण में अनुमानित 91 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन हुआ।


    90 प्रतिशत जंगल की आग मानवीय कारणों से

    विशेषज्ञों का मानना है कि लगभग 90 प्रतिशत जंगल की आग मानवीय कारणों से लगती है, जो अक्सर वन क्षेत्रों के किनारे रहने वाले समुदायों द्वारा भूमि साफ करने जैसे उद्देश्यों के लिए लगाई जाती है। पारंपरिक ‘झूम खेती’ ने भी इस समस्या को बढ़ाया है। इस पहाड़ी इलाके के दुर्गम होने और तेज हवाओं के कारण आग बुझाना बेहद चुनौतीपूर्ण है। स्वयंसेवकों ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीमों को हवाई सहायता के साथ तैनात करने की अपील की है। चूंकि प्रभावित क्षेत्र मणिपुर-नागालैंड सीमा पर स्थित है, इसलिए स्थानीय समुदायों ने इस बात पर जोर दिया है कि आग को नियंत्रित करने के लिए दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच समन्वित कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

  • महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मोड़ टला एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की तैयारी अंतिम दौर में थी, 8 फरवरी को होना था ऐलान

    महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मोड़ टला एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की तैयारी अंतिम दौर में थी, 8 फरवरी को होना था ऐलान


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में फरवरी के पहले हफ्ते एक बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल सकता था। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों धड़ोंशरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपीके एक होने की पटकथा लगभग तैयार थी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक 8 फरवरी 2026 को औपचारिक विलय की घोषणा होनी थी, लेकिन कुछ राजनीतिक और रणनीतिक कारणों से यह प्रक्रिया फिलहाल टाल दी गई।

    बीते कुछ महीनों से चाचा-भतीजे की बढ़ती नजदीकियां महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का केंद्र बनी रहीं। पुणे और बारामती क्षेत्र में स्थानीय निकाय स्तर पर दोनों गुटों के नेताओं का साथ आना इस बात का संकेत माना जा रहा था कि पार्टी में आई टूट स्थायी नहीं रहेगी। इसी बीच बंद कमरे में हुई कई बैठकों ने सियासी हलचल और तेज कर दी थी।

    जिला परिषद चुनाव के बाद ऐलान की रणनीति
    एक रिपोर्ट के अनुसार, विलय को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी थी। जिला परिषद और नगर निकाय चुनावों के बाद औपचारिक घोषणा की रणनीति तय की गई थी। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत थे कि बंटा हुआ जनाधार आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में नुकसान पहुंचा सकता है।

    एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने पुष्टि की कि दोनों गुटों के बीच लगातार संवाद चल रहा था। उन्होंने बताया कि 16 जनवरी को उनके आवास पर अहम बैठक हुई, जिसमें चुनाव साथ लड़ने और संगठनात्मक ढांचे को लेकर अंतिम दौर की चर्चा की गई। इसके अगले दिन 17 जनवरी को शरद पवार के आवास पर भी भविष्य की रणनीति पर मंथन हुआ।

    कैबिनेट फेरबदल पर भी हुई चर्चा
    एनसीपी (एसपी) नेता शशिकांत शिंदे ने भी स्वीकार किया कि विलय को लेकर बातचीत नई नहीं है और दोनों पक्षों की सहमति से आगे बढ़ रही थी। उनके अनुसार, अजित पवार पहले ही संकेत दे चुके थे कि स्थानीय निकाय चुनावों के बाद दोनों गुट साथ आ सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि इस दौरान संभावित कैबिनेट फेरबदल और नए चेहरों को सरकार में शामिल करने पर भी अनौपचारिक चर्चा हुई थी।

    दोनों गुटों ने हाल के पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में गठबंधन किया था और 5 फरवरी को होने वाले जिला परिषद चुनावों में भी साथ लड़ने की योजना बनाई गई थी।

    दुर्घटना के बाद रुकी प्रक्रिया
    28 जनवरी 2026 को विमान दुर्घटना में अजित पवार के असामयिक निधन के बाद विलय की आधिकारिक घोषणा पर फिलहाल विराम लग गया। हालांकि शिंदे ने संकेत दिए हैं कि प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और अनुकूल परिस्थितियों में इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह विलय होता, तो यह शरद पवार की पार्टी के लिए सरकार में शामिल होने की दिशा में बड़ा कदम साबित होता। फिलहाल एनसीपी (एसपी) महाविकास अघाड़ी का हिस्सा है, जबकि अजित पवार की एनसीपी सत्तारूढ़ महायुति में शामिल रही है। ऐसे में दोनों गुटों का एक होना राज्य की सत्ता राजनीति के समीकरण पूरी तरह बदल सकता था।

    भले ही 8 फरवरी को होने वाला संभावित ऐलान टल गया हो, लेकिन एनसीपी के दोनों गुटों के एक होने की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में इससे जुड़ा कोई बड़ा फैसला फिर सुर्खियों में आ सकता है।

  • 'मुसलमान रिक्शावाला अगर 5 रुपये मांगे तो उसे 4 रुपये दो', हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर भड़की कांग्रेस

    'मुसलमान रिक्शावाला अगर 5 रुपये मांगे तो उसे 4 रुपये दो', हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर भड़की कांग्रेस

    नई दिल्ली । असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के एक विवादित बयान ने देश की राजनीति में नया बवंडर खड़ा कर दिया है। मुस्लिम समुदाय को लेकर की गई टिप्पणी पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और मुख्यमंत्री पर संविधान की शपथ का उल्लंघन करने तथा समाज में नफरत फैलाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने इस मामले में भाजपा और आरएसएस को भी कटघरे में खड़ा किया है।

    रिक्शावाले वाले बयान पर कांग्रेस का तीखा हमला

    कांग्रेस ने गुरुवार (29 जनवरी 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हिमंता बिस्वा सरमा का एक वीडियो साझा किया, जिसमें वे कथित तौर पर कहते सुनाई दे रहे हैं, “अगर कोई मुसलमान रिक्शावाला 5 रुपये मांगे तो उसे 4 रुपये दो… खूब परेशान करो।”
    इस वीडियो को साझा करते हुए कांग्रेस ने कहा कि यह बयान न सिर्फ असंवैधानिक है, बल्कि समाज को बांटने वाला और नफरत फैलाने वाला है।

    ‘संविधान और गंगा-जमुनी तहजीब पर हमला’

    कांग्रेस ने अपने बयान में कहा,
    “यह घटिया बयान असम के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाडले हिमंता बिस्वा सरमा का है। वे संविधान की शपथ लेकर उसी की धज्जियां उड़ा रहे हैं। यह भाजपा-आरएसएस की नफरती सोच का प्रतिबिंब है। यह बयान बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान और हमारी गंगा-जमुनी तहजीब पर सीधा हमला है।”
    पार्टी ने मांग की कि इस बयान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पूरे देश से माफी मांगें।

    ‘मियां’ समुदाय को लेकर पहले भी दे चुके हैं बयान

    यह पहला मौका नहीं है जब असम के मुख्यमंत्री अपने बयानों को लेकर विवादों में आए हों। इससे पहले मंगलवार (27 जनवरी 2026) को डिगबोई में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मतदाता सूची के विशेष संशोधन (एसआईआर) को लेकर कहा था कि इस प्रक्रिया से किसी असमिया नागरिक को दिक्कत नहीं हो रही, बल्कि केवल ‘मियां’ (बांग्ला भाषी मुस्लिम) समुदाय को ही परेशानी है।

    ‘बांग्लादेश में वोट दें’ वाले बयान ने बढ़ाया विवाद

    हिमंता बिस्वा सरमा ने यह भी कहा था कि ‘मियां’ समुदाय के लोगों को असम में वोट देने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और उन्हें बांग्लादेश में वोट देना चाहिए। उन्होंने कहा,
    “हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि वे असम में वोट न दे सकें। अगर उन्हें दिक्कत हो रही है, तो हमें क्यों चिंता करनी चाहिए?”

    राजनीतिक और सामाजिक असर पर सवाल

    मुख्यमंत्री के इन बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि ऐसे बयान सामाजिक सौहार्द, संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा हैं। वहीं, यह मुद्दा आने वाले समय में असम की राजनीति में और तीखा होने के संकेत दे रहा है।

  • मायावती का सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर समर्थन, UGC नए नियमों पर रोक को बताया उचित

    मायावती का सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर समर्थन, UGC नए नियमों पर रोक को बताया उचित

    जयपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगाना उचित निर्णय है। मायावती ने यह भी सुझाव दिया कि अगर नए नियम लागू किए जाते समय सवर्ण समाज को भी उचित प्रतिनिधित्व दिया जाता और सभी पक्षों की सहमति ली जाती, तो विवाद से बचा जा सकता था। UGC ने 13 जनवरी 2026 को उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए नए नियम लागू किए थे। इन नियमों में विशेष रूप से एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों को लक्षित किया गया, जबकि सामान्य वर्ग के लिए कोई स्पष्ट सुरक्षा प्रावधान नहीं था।

    इस पर कुछ याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान कहा कि आजादी के 75 सालों में भारत ने जातिविहीन समाज की दिशा में प्रगति की है, क्या हम अब पीछे जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी किया और 13 जनवरी को लागू हुए नए UGC रेगुलेशंस पर रोक लगा दी। मायावती ने कहा कि नए नियमों के कारण सामाजिक तनाव पैदा हुआ और अगर सभी पक्षों की राय ली जाती और अपरकास्ट/सवर्णों को न्यायसंगत प्रतिनिधित्व दिया जाता, तो विवाद से बचा जा सकता था। बीएसपी सुप्रीमो ने जोर देकर कहा कि उच्च शिक्षा में समानता महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे लागू करते समय सभी वर्गों के अधिकार और न्याय का ध्यान रखना जरूरी है।

    उन्होंने प्रशासन और विश्वविद्यालयों से अपील की कि सभी नियम पारदर्शी और निष्पक्ष हों ताकि समाज में सामाजिक असंतोष न बढ़े। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह कदम उच्च शिक्षा संस्थानों में संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिहाज से अहम है। वहीं, राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से यह मामला ध्यानाकर्षक है क्योंकि इसमें देश के सामाजिक संवेदनशील वर्गों के अधिकारों और प्रतिनिधित्व की बहस छिड़ी हुई है। इस फैसले के बाद अब सरकार और UGC को नए नियमों को दोबारा ड्राफ्ट करना होगा, जिसमें सभी वर्गों की भागीदारी और सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। मायावती ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल जाति या धर्म का नहीं है, बल्कि समानता, न्याय और सामाजिक शांति से जुड़ा है।

  • अजित पवार की पत्नी महाराष्ट्र की डिप्टी CM बन सकती हैं; प्रफुल्ल पटेल NCP अध्यक्ष बनने की दिशा में, शरद गुट के साथ विलय की भी चर्चा

    अजित पवार की पत्नी महाराष्ट्र की डिप्टी CM बन सकती हैं; प्रफुल्ल पटेल NCP अध्यक्ष बनने की दिशा में, शरद गुट के साथ विलय की भी चर्चा


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा फेरबदल होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, अजित पवार की पत्नी को राज्य की डिप्टी मुख्यमंत्री बनाए जाने पर विचार चल रहा है। वहीं, प्रफुल्ल पटेल NCP अध्यक्ष बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    इसके अलावा, शरद गुट के साथ NCP के विलय की भी चर्चा जोर पकड़ रही है, जिससे पार्टी का राजनीतिक समीकरण और मजबूत हो सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से महाराष्ट्र में सत्ता संतुलन और पार्टी की रणनीति दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

    इससे साफ है कि NCP और महाराष्ट्र राजनीति में आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।