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  • लखीसराय मंदिर हादसे में आठ महिलाओं की मौत, दो ट्रेनों के आने और बिजली पोल गिरने के बाद बढ़ी अफरा-तफरी

    लखीसराय मंदिर हादसे में आठ महिलाओं की मौत, दो ट्रेनों के आने और बिजली पोल गिरने के बाद बढ़ी अफरा-तफरी

    नई दिल्ली । बिहार के लखीसराय जिले में सावन के तीसरे सोमवार को इंद्र दमनेश्वर महादेव मंदिर अशोक धाम में बड़ा हादसा हो गया। सोमवार सुबह मंदिर परिसर के आसपास अचानक अफरा-तफरी मचने के बाद भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई। इस घटना में आठ महिला श्रद्धालुओं की मौत होने की पुष्टि प्रशासन की ओर से की गई है, जबकि नौ लोग गंभीर रूप से घायल बताए गए हैं।

    घटना के बाद शुरुआती स्तर पर यह जानकारी सामने आई कि बिजली के हाईटेंशन तार की चपेट में आने से श्रद्धालु प्रभावित हुए हैं। हालांकि, बाद में जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार और एडीएम नीरज कुमार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि मौतों की मुख्य वजह करंट लगना नहीं, बल्कि भगदड़ थी। प्रशासन के अनुसार बिजली का पोल गिरने और उसके बाद करंट फैलने की अफवाह ने भीड़ में अचानक डर पैदा कर दिया।

    बताया गया कि हादसे के समय अशोक धाम मंदिर में सावन सोमवार के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। इसी दौरान अशोक धाम हाल्ट के आसपास एक ही समय में दोनों दिशाओं से ट्रेनें पहुंचीं। ट्रेनों के आने के कारण वहां लोगों की आवाजाही और भीड़ का दबाव अचानक बढ़ गया। इसी बीच कुछ युवकों के भागने से अफरा-तफरी और तेज हो गई।

    इसी दौरान बिजली का एक पोल गिर गया। पोल गिरने के बाद लोगों के बीच यह बात फैल गई कि बिजली का तार गिर गया है और वहां करंट फैल गया है। प्रशासन के अनुसार उस समय बिजली आपूर्ति बंद थी और संबंधित तार कवर किया हुआ था। इसके बावजूद अफवाह तेजी से भीड़ में फैल गई और श्रद्धालुओं ने सुरक्षित स्थान की ओर भागना शुरू कर दिया।

    अचानक मची भगदड़ में कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर गए। सबसे ज्यादा प्रभावित महिलाओं की कतार रही। भीड़ के दबाव में दबने से आठ महिला श्रद्धालुओं की जान चली गई। नौ अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घटना के बाद मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

    सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। स्थानीय लोगों की सहायता से राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। प्रशासन ने मृतकों और घायलों की पहचान तथा उनके परिजनों तक सूचना पहुंचाने की प्रक्रिया भी शुरू की।

    जिलाधिकारी ने बताया कि घटना की परिस्थितियों को लेकर विस्तृत जांच की जा रही है। जांच में भीड़ बढ़ने, ट्रेनों के एक साथ आने, बिजली के पोल गिरने और अफवाह फैलने सहित सभी पहलुओं को देखा जाएगा। प्रशासन यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि भीड़ नियंत्रण और प्रवेश व्यवस्था के दौरान किन परिस्थितियों में दबाव अचानक बढ़ा।

    अशोक धाम मंदिर सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने वाला प्रमुख धार्मिक स्थल है। सावन सोमवार के अवसर पर यहां सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक भीड़ जुटती है। ऐसे में हादसे ने धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन, सुरक्षित आवाजाही और अफवाहों पर तत्काल नियंत्रण की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।

    प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल घायलों का उपचार और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है। साथ ही घटना की उच्चस्तरीय जांच के जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है कि भगदड़ की स्थिति किस क्रम में बनी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन व्यवस्थाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है।

  • बीरभूम के तारापीठ में होटल अग्निकांड से मचा हड़कंप, सात की मौत और कई घायल, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    बीरभूम के तारापीठ में होटल अग्निकांड से मचा हड़कंप, सात की मौत और कई घायल, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के तारापीठ में सोमवार को एक होटल में लगी भीषण आग ने बड़ा हादसा कर दिया। आग की चपेट में आने से सात लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत तथा बचाव अभियान शुरू किया गया। शुरुआती जांच में आग लगने की संभावित वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है।

    बताया गया कि आग लगने के समय होटल के अंदर कई लोग मौजूद थे। आग और धुएं के कारण उन्हें बाहर निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ा। घटनास्थल पर पहुंची पुलिस और दमकल कर्मियों ने काफी सावधानी के साथ बचाव अभियान चलाया। इस दौरान होटल में फंसे 22 लोगों को सीढ़ी की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया।

    बचाव अभियान के बाद 11 लोगों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। अधिकारियों के अनुसार इनमें से दो लोगों की हालत सुस्त बताई गई, जबकि एक व्यक्ति को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। हादसे में सात लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। मृतकों की पहचान और घटना से जुड़े अन्य विवरणों की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

    पुलिस के अनुसार घटनास्थल पर शुरुआती स्थिति ऐसी थी कि होटल के बाहर से धुआं या आग की लपटें स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही थीं। इसके बावजूद अंदर आग फैलने के बाद स्थिति गंभीर हो गई। दमकल कर्मियों और पुलिस की संयुक्त टीम ने होटल के अलग-अलग हिस्सों की जांच कर फंसे लोगों को बाहर निकाला।

    आग लगने के कारणों को लेकर फिलहाल शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। हालांकि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आग वास्तव में किस वजह से लगी तथा होटल में अग्नि सुरक्षा से जुड़े पर्याप्त इंतजाम मौजूद थे या नहीं। जांच के दौरान बिजली व्यवस्था, आग बुझाने के उपकरण और आपातकालीन निकासी व्यवस्था जैसे पहलुओं को भी देखा जा सकता है।

    हादसे के बाद होटल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर तारापीठ रामपुरहाट डेवलपमेंट अथॉरिटी की कार्यप्रणाली और बड़े भवनों में अग्निशमन सुविधाओं को लेकर चर्चा तेज हुई है। विधायक ध्रुबा साहा ने व्यवस्था में बदलाव की जरूरत बताते हुए कहा कि इतनी बड़ी इमारत तैयार की गई, लेकिन आग पर नियंत्रण के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं दिखाई दिए।

    पुलिस ने होटल संचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उसे हिरासत में लिया है। उससे होटल में मौजूद सुरक्षा इंतजामों, आग लगने की परिस्थितियों और घटना के दौरान अपनाई गई व्यवस्थाओं को लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच में जुटी है।

    तारापीठ पश्चिम बंगाल का प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में यहां होटल और अन्य ठहरने वाले स्थानों में अग्नि सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस घटना के बाद होटल परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन तैयारियों की समीक्षा की जरूरत भी सामने आई है। फिलहाल पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • श्री बाबा बूढ़ा अमरनाथ यात्रा का आज से शुभारंभ, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भगवती नगर से दिखाएंगे हरी झंडी

    श्री बाबा बूढ़ा अमरनाथ यात्रा का आज से शुभारंभ, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भगवती नगर से दिखाएंगे हरी झंडी

    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर में 21वीं श्री बाबा बूढ़ा अमरनाथ यात्रा का सोमवार से विधिवत शुभारंभ हो रहा है। केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा सुबह जम्मू स्थित भगवती नगर यात्री निवास से श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को पुंछ में स्थित पवित्र धाम के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह धार्मिक यात्रा 28 अगस्त तक चलेगी, जिसके लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।

    यात्रा की पूर्व संध्या पर रविवार को जम्मू के अभिनव थिएटर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्कार भारती तथा कला, भाषा एवं संस्कृति अकादमी की ओर से आयोजित इस भजन संध्या में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने औपचारिक रूप से यात्रा समारोह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर पूरा परिसर श्रद्धालुओं और कलाकारों के ‘बम बम भोले’ के जयकारों से गूंज उठा।

    उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि भगवान शिव सत्य, एकता और आध्यात्मिक शक्ति के शाश्वत प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि बूढ़ा अमरनाथ यात्रा पर निकलने वाले श्रद्धालुओं का प्रत्येक कदम समाज को निरंतर उन्नति और सद्भाव की दिशा में ले जाता है। बाबा के दर्शन से प्राप्त होने वाली आध्यात्मिक ऊर्जा समाज में आपसी भाईचारे और राष्ट्रीय एकता को और अधिक मजबूती प्रदान करती है।

    उपराज्यपाल ने सभी नागरिकों से धर्म और करुणा के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि प्रशासन ने यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ठहरने, भोजन, चिकित्सा सुविधा और सुरक्षा के कड़े और पुख्ता इंतजाम किए हैं। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सुगम आवाजाही के लिए संपूर्ण यात्रा मार्ग और पुंछ क्षेत्र में प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

    भजन संध्या के दौरान गायिका रितिमा और उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत भक्ति भजनों ने समां बांध दिया। इस गरिमामयी कार्यक्रम में संत शिरोमणि दिनेश भारती, विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता शक्तिदास शर्मा, सतपाल शर्मा, जम्मू के मंडलायुक्त रमेश कुमार सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा में भाग लेने के लिए जम्मू पहुंचे हैं।

  • होर्मुज का इंतजार छोड़ दुनिया खोज रही नया रास्ता, साइबेरिया के ऊपर से होगा व्यापार; भारत भी भेजेगा जहाज

    होर्मुज का इंतजार छोड़ दुनिया खोज रही नया रास्ता, साइबेरिया के ऊपर से होगा व्यापार; भारत भी भेजेगा जहाज


    नई दिल्ली । होर्मुज और स्वेज नहर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को लेकर लगातार बनी अनिश्चितता ने दुनिया के सामने वैकल्पिक व्यापारिक रास्तों की जरूरत बढ़ा दी है। इसी बीच रूस के साइबेरियाई तट के ऊपर से गुजरने वाले आर्कटिक समुद्री मार्ग यानी नॉर्दर्न सी रूट को लेकर गतिविधियां तेज हो रही हैं। चीन यूरोप के साथ व्यापार के लिए इस बर्फीले रास्ते का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी में है। वहीं भारत भी इस मार्ग की संभावनाओं को देखते हुए 2027 में परीक्षण के लिए अपना जहाज भेजने की योजना बना रहा है।

    वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा समुद्री मार्गों पर निर्भर है। लाल सागर और स्वेज नहर क्षेत्र में तनाव के कारण पहले ही जहाजों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ा है। दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी भू-राजनीतिक तनाव ने ऊर्जा और समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। ऐसे हालात में किसी एक रास्ते पर निर्भर रहने के बजाय वैकल्पिक मार्ग विकसित करना रणनीतिक जरूरत बनता जा रहा है।

    नॉर्दर्न सी रूट रूस के आर्कटिक तट के साथ चलता है और पूर्वी एशिया को यूरोप से जोड़ता है। चीन से उत्तरी यूरोप तक समुद्री यात्रा इस रास्ते से करीब 18 से 20 दिनों में पूरी होने की संभावना बताई जाती है। इसके मुकाबले स्वेज नहर के रास्ते यात्रा में लगभग 40 दिन तक लग सकते हैं जबकि अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते जहाजों को करीब 50 दिन तक का समय लग सकता है। कम दूरी का मतलब ईंधन और परिचालन लागत में संभावित कमी भी हो सकता है।

    फिलहाल चीन से यूरोप जाने वाले कंटेनर जहाज हिंद महासागर अरब सागर लाल सागर और स्वेज नहर से होते हुए भूमध्य सागर तक पहुंचते हैं। आर्कटिक मार्ग में जहाज चीन के उत्तरी हिस्से से निकलकर रूस के साइबेरियाई तट के ऊपर से आर्कटिक महासागर में प्रवेश करते हैं और फिर यूरोप की ओर बढ़ते हैं। यही वजह है कि चीन इस मार्ग को आइस सिल्क रोड के नाम से भी देख रहा है।

    चीन के लिए इस मार्ग की अहमियत केवल समय और लागत तक सीमित नहीं है। चीन लंबे समय से अपने व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए कुछ समुद्री मार्गों पर अत्यधिक निर्भरता को लेकर चिंतित रहा है। मलक्का जलडमरूमध्य को लेकर उसकी रणनीतिक चिंता को मलक्का दुविधा कहा जाता है। ऐसे में वैकल्पिक समुद्री मार्ग चीन को व्यापारिक जोखिम कम करने का विकल्प दे सकता है।

    भारत भी आर्कटिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक और आर्थिक मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रूस के साथ ऊर्जा और व्यापारिक संबंधों के अलावा यूरोप तक बेहतर समुद्री संपर्क भारत के लिए इस मार्ग को महत्वपूर्ण बनाता है। इसी संभावनाओं को परखने के लिए भारत 2027 में इस रास्ते पर परीक्षण के लिए अपना जहाज भेजने की तैयारी कर रहा है। इससे भारत को इस मार्ग की व्यावहारिक चुनौतियों और संभावित आर्थिक फायदे को समझने का मौका मिलेगा।

    हालांकि आर्कटिक समुद्री मार्ग को पूरी तरह आसान विकल्प मानना जल्दबाजी होगी। यहां अत्यधिक ठंड बर्फ की स्थिति और मौसम संबंधी चुनौतियां जहाजों के संचालन को कठिन बना सकती हैं। विशेष प्रकार के जहाज और बेहतर नेविगेशन व्यवस्था की जरूरत पड़ सकती है। इसके बावजूद समुद्री व्यापार में विविधता लाने और पारंपरिक मार्गों पर निर्भरता घटाने की दिशा में यह रास्ता आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    अगर आर्कटिक मार्ग का व्यावसायिक इस्तेमाल बड़े स्तर पर बढ़ता है तो एशिया और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार के समीकरण बदल सकते हैं। चीन के साथ रूस की साझेदारी और भारत की संभावित भागीदारी इस पूरे मार्ग को केवल व्यापार का विकल्प नहीं बल्कि बदलती वैश्विक भू-राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना सकती है।

  • बंबई उच्च न्यायालय लिपिक भर्ती परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ी का आरोप, अभ्यर्थियों का छत्रपति संभाजीनगर में प्रदर्शन

    बंबई उच्च न्यायालय लिपिक भर्ती परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ी का आरोप, अभ्यर्थियों का छत्रपति संभाजीनगर में प्रदर्शन


    नई दिल्ली ।
    बंबई उच्च न्यायालय में लिपिक पद के लिए आयोजित ऑनलाइन टाइपिंग परीक्षा के दौरान तकनीकी और सर्वर संबंधी गंभीर गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं। परीक्षा प्रक्रिया में आई बाधाओं से आक्रोशित कई अभ्यर्थियों ने रविवार को छत्रपति संभाजीनगर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि प्रणालीगत कमियों के कारण कई उम्मीदवारों को बिना किसी गलती के अनुत्तीर्ण घोषित कर दिया गया है।

    प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके प्रभावित उम्मीदवारों से मिलने सुराणा नगर स्थित परीक्षा केंद्र पहुंचे। अभ्यर्थियों का समर्थन करते हुए दीपके ने परीक्षा को नए सिरे से दोबारा आयोजित कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रभावित अभ्यर्थियों की मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे इस संघर्ष में उनके साथ खड़े रहेंगे। दीपके ने अधिकारियों पर अभ्यर्थियों की शिकायतों की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया।

    परीक्षार्थियों के अनुसार, सुबह के सत्र में परीक्षा के दौरान कंप्यूटर स्क्रीन में पीलापन आने और कीबोर्ड द्वारा काम करना बंद कर देने जैसी गंभीर समस्याएं आईं। कई केंद्रों पर सर्वर की सुस्ती के कारण अभ्यर्थी अपना मूल्यांकन कार्य सुचारू रूप से पूरा नहीं कर सके। अभ्यर्थियों ने आशंका जताई है कि इन तकनीकी खामियों के कारण उनके भविष्य पर विपरीत असर पड़ेगा, इसलिए प्रभावित सत्र की परीक्षा दोबारा आयोजित कराई जानी चाहिए।

    उच्च न्यायालय प्रशासन की ओर से जारी एक आधिकारिक संदेश में स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा का आयोजन तय एजेंसी के माध्यम से कराया गया था। हालांकि, प्रशासन ने माना कि औरंगाबाद और कल्याण जैसे कुछ केंद्रों पर तकनीकी बाधाएं दर्ज की गई हैं। एजेंसी द्वारा संचालित इस प्रक्रिया की विस्तृत जांच की जा रही है और उचित कार्रवाई के संबंध में उम्मीदवारों को आधिकारिक रूप से सूचित किया जाएगा।

    उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय की औरंगाबाद और नागपुर पीठ के अंतर्गत 1,300 लिपिकीय पदों के लिए यह परीक्षा तीन सत्रों में आयोजित की गई थी। इसके लिए पूरे राज्य से लगभग 13,000 उम्मीदवार पात्र पाए गए थे, जिनमें से अकेले मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र के करीब 2,900 अभ्यर्थियों ने छत्रपति संभाजीनगर के केंद्रों पर भाग लिया था। मध्य प्रदेश सहित पड़ोसी राज्यों के प्रतियोगी परीक्षा विशेषज्ञों की नजरें भी इस भर्ती मामले के आगामी प्रशासनिक घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।

  • BRICS Summit 2026 से पहले दिल्ली में महामंथन, पर्यावरण पर 4 बड़े मुद्दों को लेकर बनेगी साझा रणनीति

    BRICS Summit 2026 से पहले दिल्ली में महामंथन, पर्यावरण पर 4 बड़े मुद्दों को लेकर बनेगी साझा रणनीति


    नई दिल्ली । ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले दिल्ली में सदस्य देशों के पर्यावरण मंत्रियों की अहम बैठक होने जा रही है। भारत की अध्यक्षता में 18 अगस्त को आयोजित होने वाली इस बैठक में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। बैठक का मुख्य फोकस सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने जंगलों की आग से निपटने सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूत करने और जलवायु परिवर्तन के असर के प्रति बेहतर अनुकूलन की रणनीति तैयार करने पर रहेगा। माना जा रहा है कि बैठक के बाद इन मुद्दों को लेकर साझा बयान भी जारी किया जा सकता है।

    पर्यावरण मंत्रियों की बैठक से एक दिन पहले 17 अगस्त को पर्यावरण कार्य समूह और जलवायु परिवर्तन एवं टिकाऊ विकास से जुड़े संपर्क समूह के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक भी होगी। इन बैठकों को भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 की व्यापक थीम सुदृढ़शीलता नवाचार सहयोग और सतत विकास से जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास को लेकर सामूहिक सहयोग को और मजबूत करना है।

    बैठक में सबसे अहम मुद्दों में से एक सर्कुलर इकोनॉमी यानी चक्रीय अर्थव्यवस्था रहेगा। इसका उद्देश्य संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने के साथ कचरे को कम करना और दोबारा उपयोग की संभावनाओं को बढ़ाना है। इसके लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व जैसे नीतिगत ढांचे को मजबूत करने और प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में सदस्य देशों के अनुभव साझा किए जाएंगे। माना जा रहा है कि अलग अलग देशों में अपनाई जा रही सफल व्यवस्थाओं से सीख लेकर संसाधनों के कुशल उपयोग के लिए साझा रणनीति पर जोर दिया जाएगा।

    जंगल की आग का प्रबंधन भी बैठक के प्रमुख एजेंडे में शामिल है। दुनियाभर में बढ़ती जंगल की आग पर्यावरण के साथ साथ वन्यजीवों और स्थानीय समुदायों के लिए बड़ी चुनौती बन रही है। ऐसे में ब्रिक्स देश डेटा संग्रह निगरानी क्षमता निर्माण और समय रहते आग का पता लगाने जैसी व्यवस्थाओं पर सहयोग बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं। रोकथाम से लेकर तैयारी और आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया तक एक बेहतर व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।

    तीसरा प्रमुख मुद्दा सतत जीवनशैली का है। संसाधनों के बढ़ते इस्तेमाल और पर्यावरण पर पड़ रहे दबाव को देखते हुए लोगों की जीवनशैली में ऐसे बदलाव लाने पर जोर दिया जा रहा है जिससे विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कायम रह सके। ब्रिक्स देशों के बीच ज्ञान साझा करने और सफल प्रयोगों को एक दूसरे तक पहुंचाने पर भी चर्चा होगी। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर ऐसे नए और व्यावहारिक मॉडल विकसित करना है जिन्हें बड़े स्तर पर लागू किया जा सके।

    चौथा महत्वपूर्ण मुद्दा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अनुकूलन का रहेगा। इसमें समुदायों को केंद्र में रखकर जलवायु जोखिमों से निपटने की रणनीति तैयार करने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय अनुभवों को आधुनिक उपायों के साथ जोड़कर जलवायु अनुकूलन को अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा सदस्य देशों के बीच तकनीकी सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान प्रदान को बढ़ावा देने पर भी जोर रहेगा।

    दिल्ली में होने वाली यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन वैश्विक स्तर पर बड़ी चुनौतियां बन चुके हैं। ऐसे में ब्रिक्स देशों के बीच साझा प्रयासों और नीतिगत सहयोग को मजबूत करने की दिशा में इसे अहम कदम माना जा रहा है। बैठक के निष्कर्ष और संभावित साझा बयान से यह संकेत मिल सकता है कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए किस तरह की सामूहिक रणनीति को आगे बढ़ाना चाहता है।

  • अन्नामलाई का बड़ा दावा- अमित शाह ने दिल्ली आने को कहा था, मैंने ठुकराया ऑफर; मेकेदातु और भ्रष्टाचार पर भी बरसे

    अन्नामलाई का बड़ा दावा- अमित शाह ने दिल्ली आने को कहा था, मैंने ठुकराया ऑफर; मेकेदातु और भ्रष्टाचार पर भी बरसे


    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई के एक बयान ने नई चर्चा छेड़ दी है। अन्नामलाई ने दावा किया है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें दिल्ली बुलाकर पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी संभालने और लंबे समय तक राजधानी में रहने को कहा था। हालांकि उन्होंने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया और तमिलनाडु में रहकर लोगों के बीच काम करने का फैसला किया। अन्नामलाई ने कहा कि उनके लिए राज्य में रहकर जनता के मुद्दों पर काम करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

    अन्नामलाई के मुताबिक अमित शाह ने उनसे दिल्ली आकर जिम्मेदारी संभालने और करीब तीन साल से अधिक समय तक वहां रहने को कहा था। उन्होंने अमित शाह से स्पष्ट तौर पर कहा कि यह उनके लिए सही नहीं रहेगा। इसके बाद उन्होंने तमिलनाडु में ही रहकर सामाजिक और राजनीतिक बदलाव के लिए काम करने का फैसला किया। अन्नामलाई ने यह भी कहा कि वह बीजेपी के भीतर रहें या पार्टी से बाहर हों लेकिन जिन सिद्धांतों पर अमित शाह के साथ काम किया है उन्हें हमेशा अपने काम में आगे बढ़ाते रहेंगे।

    उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब तमिलनाडु बीजेपी में उनकी भूमिका और भविष्य को लेकर लगातार चर्चाएं होती रही हैं। अन्नामलाई अब वी द लीडर आंदोलन से भी जुड़े हैं और राज्य की राजनीति में सक्रिय बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य तमिलनाडु के लोगों के हितों के लिए काम करना और सामाजिक बदलाव की दिशा में अपनी भूमिका निभाना है।

    मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर भी अन्नामलाई ने अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के हितों से जुड़े इस मुद्दे पर उन्होंने हमेशा आवाज उठाई है। उनका दावा है कि जब वह बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष थे तब भी तमिलनाडु बीजेपी ने मेकेदातु परियोजना का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु के लोगों को पीने का पानी मिलना चाहिए लेकिन इसके लिए तमिलनाडु के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

    अन्नामलाई ने कहा कि जब किसी परियोजना का असर दो राज्यों पर पड़ता है तो दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को साथ बैठकर बातचीत करनी चाहिए और ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे दोनों पक्षों के हितों का ध्यान रखा जा सके। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा जताते हुए कहा कि वह ईमानदार नेता हैं और गलत काम नहीं करते।

    तमिलनाडु सरकार पर निशाना साधते हुए अन्नामलाई ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि सरकार को कम से कम एक साल काम करने का अवसर दिया जाना चाहिए और उसके बाद उसके प्रदर्शन का आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ठीक से काम नहीं करती है तो वह सबसे पहले सवाल उठाएंगे। साथ ही उन्होंने लोगों से जल्दबाजी में हंगामा करने के बजाय सरकार को काम करने का मौका देने की अपील की।

    हालांकि अन्नामलाई ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार रोकने के दावों के बावजूद कुछ जगहों पर रिश्वतखोरी फिर शुरू हो गई है। उन्होंने दावा किया कि कुछ मंत्रियों के खिलाफ उनके पास कथित ऑडियो सबूत भी हैं। अन्नामलाई ने मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि वह एक साल बाद मुद्दा उठाने से पहले ही सरकार को आगाह कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि मुख्यमंत्री वास्तव में भ्रष्टाचार खत्म करना चाहते हैं तो उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके मंत्री भी उसी नीति पर चलें।

    अन्नामलाई के बयान ने एक तरफ बीजेपी में उनकी भूमिका को लेकर चर्चा बढ़ा दी है तो दूसरी तरफ तमिलनाडु की राजनीति में उनके अगले कदम पर भी निगाहें टिक गई हैं। दिल्ली की जिम्मेदारी को ठुकराकर राज्य में सक्रिय रहने का उनका दावा आने वाले समय में उनकी राजनीतिक रणनीति के लिए कितना अहम साबित होगा यह देखना दिलचस्प होगा।

  • बीजेपी संगठन में जल्द बड़ा बदलाव, नितिन नवीन की नई टीम में युवाओं-महिलाओं को मिल सकती है जगह

    बीजेपी संगठन में जल्द बड़ा बदलाव, नितिन नवीन की नई टीम में युवाओं-महिलाओं को मिल सकती है जगह


    नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) में संगठनात्मक बदलाव की तैयारी तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोमवार को पार्टी की नई टीम का ऐलान हो सकता है। जनवरी में नितिन नवीन बीजेपी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे और अब उनके नेतृत्व में संगठन में बड़े फेरबदल की संभावना जताई जा रही है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक नई टीम में एक कोषाध्यक्ष, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और 9 राष्ट्रीय महामंत्रियों की नियुक्ति हो सकती है। इसके अलावा करीब 15 मंत्री भी बनाए जाने की चर्चा है। बीजेपी के संविधान में संशोधन के बाद संगठन में 33 फीसदी पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। ऐसे में नई टीम में महिलाओं और युवाओं को खास प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है। प्रत्येक वर्ग में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से कम से कम तीन पदाधिकारी शामिल किए जा सकते हैं।

    पार्ल्यामेंट्री बोर्ड का भी होगा गठन
    बीजेपी की सबसे बड़ी निर्णायक संस्था पार्ल्यामेंट्री बोर्ड का भी नए सिरे से गठन होना है। इसमें अध्यक्ष समेत अधिकतम 11 सदस्य हो सकते हैं। इसके साथ ही केंद्रीय चुनाव समिति का भी गठन किया जाएगा। फिलहाल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, महिला मोर्चा की अध्यक्ष वनाती श्रीनिवासन और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव इसके सदस्य हैं।

    राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी बदलाव
    पार्टी की रणनीति और महत्वपूर्ण फैसलों पर विचार करने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी का भी गठन किया जाना है। इसमें अध्यक्ष के अलावा 120 सदस्य हो सकते हैं। इनमें 40 महिलाओं का होना जरूरी है। वहीं राष्ट्रीय परिषद में राज्य परिषदों के निर्वाचित सदस्य, पार्टी के पूर्व अध्यक्ष, राज्यों में विधान परिषद और विधानसभा के नेताओं, राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य तथा 20 मनोनीत सदस्य शामिल होंगे।

    युवाओं को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी
    नितिन नवीन पहले ही संकेत दे चुके हैं कि उन्होंने अपनी नई टीम तैयार कर ली है। माना जा रहा है कि उनकी टीम में युवाओं को ज्यादा जिम्मेदारी दी जा सकती है। संगठन में बदलाव के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी फेरबदल की अटकलें लगाई जा रही हैं।

    मौजूदा संगठन में कई बड़े चेहरे
    वर्तमान बीजेपी संगठन में चार सदस्यीय मार्गदर्शक मंडल है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शामिल हैं। वहीं संसदीय बोर्ड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा नितिन नवीन, राजनाथ सिंह, अमित शाह, जेपी नड्डा, बीए येदियुरप्पा, सर्वानंद सोनोवाल, के. लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव, सत्यनारायण जटिया और बीएल संतोष शामिल हैं।

    मौजूदा संगठन में 11 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, 7 राष्ट्रीय महासचिव, एक संयुक्त महासचिव, 11 राष्ट्रीय सचिव, सात मोर्चा अध्यक्ष, मीडिया प्रभारी, मीडिया सह-प्रभारी, कोषाध्यक्ष और सह-कोषाध्यक्ष समेत कई पद हैं। नई टीम में इन पदों पर बदलाव के साथ बीजेपी संगठन में नई पीढ़ी को आगे लाने की तस्वीर साफ हो सकती है।

  • UGC-NET के तीन विषयों की फिर होगी परीक्षा, NTA ने जारी किया शेड्यूल; जानें क्या रही वजह

    UGC-NET के तीन विषयों की फिर होगी परीक्षा, NTA ने जारी किया शेड्यूल; जानें क्या रही वजह


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने UGC-NET जून 2026 सत्र के अभ्यर्थियों के लिए बड़ा फैसला लिया है। परीक्षा में प्रश्नों की पुनरावृत्ति, तथ्यात्मक एवं टाइपोग्राफिकल त्रुटियों और भाषा संबंधी गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों की परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी। NTA ने री-एग्जाम की तारीखें भी घोषित कर दी हैं।

    एजेंसी का यह निर्णय विशेषज्ञ समिति की जांच के बाद आया है। समिति ने अभ्यर्थियों की ओर से उठाई गई आपत्तियों और प्रश्नपत्रों में सामने आई खामियों की समीक्षा की थी। इसके बाद परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इन तीन विषयों की परीक्षा फिर से कराने की सिफारिश की गई।

    9 और 10 सितंबर को होगी री-एग्जाम

    NTA की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक तीनों विषयों की दोबारा परीक्षा इस प्रकार होगी! 

    विषय परीक्षा की तारीख शिफ्ट समय
    इंग्लिश 9 सितंबर 2026 शिफ्ट-1 सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक
    कॉमर्स 9 सितंबर 2026 शिफ्ट-2 दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक
    सोशियोलॉजी 10 सितंबर 2026 शिफ्ट-1 सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक

    प्रश्नपत्र में मिली थीं कई तरह की गड़बड़ियां

    UGC-NET परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों ने इन विषयों के प्रश्नपत्रों को लेकर कई आपत्तियां दर्ज कराई थीं। शिकायतों में सवाल दोहराए जाने, तथ्यात्मक त्रुटियों, टाइपिंग की गलतियों और अनुवाद में विसंगतियों का मुद्दा प्रमुख था।

    विशेषज्ञ समिति ने प्रश्नपत्रों की समीक्षा के दौरान इन शिकायतों की जांच की। खास तौर पर अंग्रेजी और हिंदी भाषा में दिए गए प्रश्नों के बीच कुछ जगहों पर अंतर पाया गया, जिससे अभ्यर्थियों के सामने सही विकल्प चुनने को लेकर परेशानी की स्थिति बनी।

    समिति की रिपोर्ट और सिफारिश के आधार पर NTA ने इन तीन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला किया है।

    री-एग्जाम के लिए नहीं देनी होगी अतिरिक्त फीस

    NTA ने अभ्यर्थियों को राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि दोबारा परीक्षा में शामिल होने के लिए कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क नहीं लिया जाएगा। संबंधित अभ्यर्थी बिना अतिरिक्त फीस के री-एग्जाम में शामिल हो सकेंगे।

    84 अन्य विषयों के परिणाम पर असर नहीं

    एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन तीन विषयों की दोबारा परीक्षा के कारण अन्य 84 विषयों के परिणाम प्रभावित नहीं होंगे। इन विषयों के परिणाम निर्धारित प्रक्रिया और कार्यक्रम के अनुसार जारी किए जाएंगे।

    सीटों के आवंटन में नहीं होगी कटौती

    NTA के अनुसार, री-एग्जाम के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर और पीएचडी में प्रवेश के लिए पात्रता तय करते समय विषयवार सीटों के आवंटन में भी कोई कटौती नहीं की जाएगी। पहले से निर्धारित सीट और कोटा व्यवस्था पूर्ववत लागू रहेगी।

    इस फैसले से उन अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्होंने प्रश्नपत्र की खामियों के कारण परीक्षा परिणाम प्रभावित होने की आशंका जताई थी। अब इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के अभ्यर्थियों को निर्धारित तारीख पर दोबारा परीक्षा देनी होगी।

  • रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सेहत से जुड़ी चिंता बढ़ी, ऑडिट में दूषित पानी और स्वच्छता व्यवस्था की खामियां उजागर

    रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सेहत से जुड़ी चिंता बढ़ी, ऑडिट में दूषित पानी और स्वच्छता व्यवस्था की खामियां उजागर

    नई दिल्ली ।रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को उपलब्ध कराई जाने वाली बुनियादी सुविधाओं को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट ने गंभीर कमियां उजागर की हैं। रिपोर्ट में देश के कई गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर पेयजल की गुणवत्ता, स्वच्छता और यात्री सुविधाओं के मानकों का पर्याप्त पालन नहीं होने की बात सामने आई है। जांच के दौरान कुछ स्टेशनों के वाटर कूलर और नलों के पानी में ई-कोलाई तथा टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए।

    यह ऑडिट वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच देश के 512 गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे बोर्ड ने यात्रियों के लिए पेयजल, शौचालय, बैठने की जगह और अन्य सुविधाओं को लेकर नियम और दिशा-निर्देश निर्धारित किए थे, लेकिन कई क्षेत्रीय रेलवे जोन में इनका प्रभावी पालन नहीं हुआ।

    जांच में छह अलग-अलग रेलवे जोन के 59 स्टेशनों पर पेयजल की बैक्टीरियोलॉजिकल जांच तक नहीं कराए जाने की बात सामने आई। जिन स्टेशनों के पानी के नमूनों की जांच हुई, उनमें भी कुछ स्थानों पर गुणवत्ता मानकों से जुड़ी गंभीर समस्याएं मिलीं।

    मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, कल्याण, लोनावाला और भिवंडी रोड जैसे स्टेशनों के वाटर कूलर से लिए गए नमूनों में ई-कोलाई की मौजूदगी पाई गई। दक्षिण रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड़ जंक्शन तथा दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद स्टेशन के पेयजल नमूनों में भी ई-कोलाई पाया गया।

    पूर्वी रेलवे के मधुपुर स्टेशन का पानी भी गुणवत्ता जांच में मानकों पर खरा नहीं उतरा। इसके अलावा अलग-अलग वर्षों में कई रेलवे जोन के अनेक स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर लगे नलों के पानी में टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए जाने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। ऐसे बैक्टीरिया दूषित जल की ओर संकेत करते हैं और इनके कारण संक्रमण तथा पेट से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

    रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों के शौचालयों और अन्य सुविधाओं की स्थिति पर भी चिंता जताई गई है। यात्री सुविधाओं से संबंधित आंकड़ों के अनुसार 2,035 स्टेशनों पर पानी के नलों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। वहीं 403 स्टेशनों पर जरूरत के मुताबिक मूत्रालय और 201 स्टेशनों पर निर्धारित मानकों के अनुसार शौचालय उपलब्ध नहीं पाए गए।

    रेलवे बोर्ड ने अप्रैल 2018 में सभी स्टेशनों पर न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इनमें पेयजल, बैठने की व्यवस्था, शेड, शौचालय, पंखे, फुट ओवर ब्रिज और यात्री सूचना बोर्ड जैसी सुविधाएं शामिल थीं। हालांकि ऑडिट में शामिल 512 स्टेशनों में से 458 पर ये सुविधाएं या तो उपलब्ध नहीं थीं या निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थीं।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि न्यू दिल्ली, हावड़ा, सियालदह, मुंबई सेंट्रल और छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस जैसे प्रमुख स्टेशनों पर भी कुछ आवश्यक सुविधाएं पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं थीं या उनकी स्थिति संतोषजनक नहीं थी। इनमें सीटें, पंखे, वाटर कूलर, डस्टबिन और ट्रेन सूचना डिस्प्ले जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

    कैग ने रेलवे प्रशासन को पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था में तत्काल सुधार करने की जरूरत बताई है। साथ ही जल आपूर्ति तंत्र की नियमित निगरानी और पानी की गुणवत्ता की व्यवस्थित जांच सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित पेयजल और निर्धारित मानकों के अनुरूप बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत करना है।