Category: National

  • Republic Day Special: डेढ़ लीटर दूध के दाम में 10 ग्राम सोना! 76 सालों में कितना बदल गया भारत

    Republic Day Special: डेढ़ लीटर दूध के दाम में 10 ग्राम सोना! 76 सालों में कितना बदल गया भारत

    नई दिल्ली। आज अगर आपके गुल्लक में या आलमारी के किसी कोने में 25 पैसे का सिक्का है तो आप उससे कुछ नहीं खरीद सकते, लेकिन आजादी के समय, पहले गणतंत्र दिवस के समय आप इससे 1 लीटर दूध, 1 लीटर पेट्रोल भरवा सकते थे. जिसमें आज एक लीटर दूध मिलता है, उतने ही रुपये में आप आजादी के वक्त 10 ग्राम सोना खरीद सकते थे. जितने में आज एक लीटर दूध खरीदते हैं, उतने में 4 बार आप दिल्ली से मुंबई ट्रेन से सफर कर सकते थे. आबादी बढ़ी और साथ में महंगाई भी. अगर एक नजर साल 1950 से साल 2026 तक के सफर में डाले तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि महंगाई का आलम कितना है.

    साल 1950 से लेकर साल 2026 तक का सफर
    आजादी के समय देश की जनसंख्या सिर्फ 34 करोड़ थी. पहली बार जब 1951 में जनगणना हुई तो उस वक्त देश की आबादी 34 करोड़ से बढ़कर 36 करोड़ हो गई थी. आज भारत की आबादी 140 करोड़ के ऊपर पहुंच गई है. आबादी के साथ देश की अर्थव्यवस्था भी बढ़ी, देश की जीडीपी में विस्तार देखने को मिली. 1950 से लेकर अब तक भारत की जीडीपी 55 गुना से अधिक बढ़ चुकी है. 1950 में भारत की अर्थव्यवस्था करीब 2.7 लाख करोड़ की थी, जो साल 2026 में बढ़कर 4.51 ट्रिलियन पर पहुंच गई है

    1950 में कितने का था सोना-चांदी
    सोने-चांदी की बात करें तो भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था. लोगों के घरों में सोने-चांदी के जेवरों की ढ़ेर लगे थे. आज भी दुनिया के कई देशों की जीडीपी से ज्यादा सोना भारत के घरों में है, जो कई पीढ़ियों से चली आ रही है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक भारत के घरों में 25 हजार टन से ज्यादा सोना है. अगर कीमत की बात करें तो साल 1950 में भारत के पहले गणतंत्र दिवस के मौके पर सोने की कीमत 99 रुपये प्रति 10 ग्राम थी. इससे पहले आजादी के वक्त 1947 में सोना मात्र 89 रुपये प्रति 10 ग्राम का बिक रहा था. आज साल 2026 में सोने की कीमत 155000 रुपये प्रति 10 ग्राम को पार कर गया है. चांदी की बात करें तो उस वक्त 1 किलो चांदी 100-159 रुपये में मिल जाती थी. 10 ग्राम चांदी के लिए के लिए 1 रुपये से 1.50 रुपये तक खर्च करना पड़ता था. आज उतनी ही चांदी खरीदने के लिए आपको साढ़े 3 लाख रुपये चाहिए.

    1950 से अब तक कितना महंगा हुआ तेल

    1950 से लेकर अब तक पेट्रोल की कीमत 300 गुना बढ़ चुकी है. 1951 के मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट के गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन डेटा के मुताबिक उस समय देश में 3 लाख गाड़ियां रजिस्टर्ड थीं. 1947 में पेट्रोल की कीमत 27 पैसे प्रति लीटर था, जो 1950 में 30 पैसे पर पहुंच गया था. आज 2026 में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत औसत रूप से 100 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है.

    76 सालों में रेल किराया कितना महंगा हुआ

    भारत में पहली ट्रेन 16 अप्रैल 1853 को चली थी. 76 सालों में रेल यात्रियों की संख्या जिस तेजी से बढ़ी उतनी ही तेजी से रेल किराया भी. 1951 से लेकर अब तक रेल किराए में 30 गुना से अधिक बढ़ोतरी हुई. 1950-51 में रेलवे हर एक किमी पर 1.5 पैसा किराया वसूलती थी जो साल 2018-19 में बढ़कर 44 पैसे से ऊपर पहुंच गई. रेलवे ने हाल ही में प्रति किलोमीटर में रेल किराए में 2 पैसा प्रति किमी की बढ़ोतरी कर दी है.

    डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का हाल

    1947 में आजादी के वक्त 1 डॉलर की वैल्यू 1 रुपए के बराबर थी. साल 1950 में डॉलर के मुकाबले रुपया काफी मजबूत था और इसकी वैल्यूएशन $1 = ₹4.76 थी. आज डॉलर के मुकाबले रुपया 92 रुपये पर पहुंच गया है. कर्तव्य पथ बनेगा ‘पावर पथ’, 77वें गणतंत्र दिवस पर दुनिया देखेगी भारत के अर्जुन-ब्रह्मोस का दम

  • अटारी-वाघा बॉर्डर पर मिठास पर ब्रेक, भारत-पाक जवानों के बीच नहीं होगा मिठाई का आदान-प्रदान

    अटारी-वाघा बॉर्डर पर मिठास पर ब्रेक, भारत-पाक जवानों के बीच नहीं होगा मिठाई का आदान-प्रदान

    नई दिल्ली।  अटारी-वाघा बॉर्डर पर नहीं मिलेगी मिठास! भारत-पाक जवानों के बीच नहीं होगा मिठाई का आदान-प्रदान2019 में जम्मू और कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर युद्धविराम उल्लंघन की बढ़ती घटनाओं के कारण भारत ने बीटिंग रिट्रीट परंपरा को छोड़ने का फैसला किया था. सितंबर 2016 में भारतीय सेना द्वारा सीमा पार सर्जिकल स्ट्राइक के बाद बीएसएफ ने पाकिस्तान रेंजर्स को मिठाइयां नहीं दी थीं.
    इस बार गणतंत्र दिवस के मौके पर वाघा बॉर्डर पर भारत और पाकिस्तान के बीच मिठाई एक्सचेंज करने की परंपरा नहीं निभाई जाएगी. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद से बने नियमों के तहत बीएसएफ (BSF) और पाक रेंजर्स के जवान न तो हाथ मिलाएंगे और न ही सरहद का गेट खोला जाएगा. बॉर्डर पर दोपहर 2.50 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू होंगे और शाम 4.30 बजे दोनों देशों के जवान अपने-अपने क्षेत्र में परेड करेंगे.

    कई बार तोड़ी गई मिठाई आदान-प्रदान की परंपरा
    जनवरी 2025 (गणतंत्र दिवस) यानी पिछले साल भी सीमा पर जारी घुसपैठ की कोशिशों और सुरक्षा कारणों से बीएसएफ (BSF) ने पाकिस्तान को मिठाई देने से मना कर दिया था. भारत द्वारा अनुच्छेद 370 (Article 370) को निष्प्रभावी किए जाने के बाद पाकिस्तान ने कड़ा विरोध जताया था. तनाव इतना अधिक था कि दोनों ओर से कोई मिठाई नहीं बांटी गई थी.

    जनवरी 2017 और 2018 में नियंत्रण रेखा (LoC) पर पाकिस्तान द्वारा लगातार किए जा रहे संघर्ष विराम उल्लंघन (Ceasefire Violations) और भारतीय सैनिकों की शहादत के विरोध में बीएसएफ ने परंपरा को तोड़ा था. वहीं अक्टूबर 2016 में उरी हमले के बाद भारत द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक (Surgical Strike) के कारण दिवाली के मौके पर मिठाई का आदान-प्रदान नहीं हुआ था. इसके अलावा अक्टूबर 2014 में दिवाली के दौरान सीमा पर भारी गोलाबारी के चलते बीएसएफ ने पाकिस्तान को मिठाई देने से इनकार कर दिया था.

    कहां है वाघा बॉर्डर
    बता दें कि अटारी-वाघा जॉइंट चेक पोस्ट अमृतसर से लगभग 30 किमी और पाकिस्तान के लाहौर से 22 किमी दूर है, जहां करीब 25,000 दर्शक बीटिंग रिट्रीट समारोह को देखने आते हैं.

  • बर्फीली हवाओं के घेरे में उत्तर भारत: पहाड़ों पर भारी हिमपात और मैदानों में शीतलहर का 'डबल अटैक', अलर्ट जारी

    बर्फीली हवाओं के घेरे में उत्तर भारत: पहाड़ों पर भारी हिमपात और मैदानों में शीतलहर का 'डबल अटैक', अलर्ट जारी


    नई दिल्ली/शिमला। उत्तर भारत में कुदरत के दो अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ जहां ऊंचे हिमालयी क्षेत्र भारी बर्फबारी के बाद सफेद चादर में लिपटे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं ने दिल्ली NCR सहित पूरे मैदानी बेल्ट को डीप फ्रीजर बना दिया है। मकर संक्रांति के 10 दिन बीत जाने के बाद भी सर्दी का सितम कम होने के बजाय और गहरा गया है। मौसम विभाग ने अगले 72 घंटों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए चेतावनी दी है कि फिलहाल राहत के आसार नहीं हैं।

    पहाड़ों पर बर्फ का प्रहार जनजीवन अस्त-व्यस्त
    हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में पिछले 48 घंटों से रुक-रुक कर हो रही बर्फबारी ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। हिमाचल शिमला और मनाली जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर भारी हिमपात के कारण कई सड़कें बंद हो गई हैं। बिजली और पानी की आपूर्ति पर भी बुरा असर पड़ा है। उत्तराखंड और जम्मू उत्तरकाशी, चमोली और डोडा में बर्फ की मोटी परत जमने से यातायात पूरी तरह ठप है। कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालयों से टूट गया है।

    दिल्ली-NCR बारिश के बाद कोहरे का पहरा

    राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में शुक्रवार को हुई बारिश ने फिजा में नमी भर दी है, जिसके कारण शनिवार को विजिबिलिटी दृश्यता काफी कम रही। तापमान: दिल्ली में न्यूनतम तापमान 8-9 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, लेकिन 15-20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही ठंडी हवाओं ने कनकनी बढ़ा दी है। यातायात: घने कोहरे के कारण दिल्ली आने वाली कई ट्रेनें और उड़ानें देरी से चल रही हैं।

    पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में ‘रेड अलर्ट’ जैसी स्थिति

    मैदानी राज्यों में ठंड का सबसे ज्यादा असर पंजाब और हरियाणा में देखा जा रहा है।पंजाब-हरियाणा: यहां कई शहरों में पारा 4 डिग्री से नीचे चला गया है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में ‘घना से बहुत घना’ कोहरा छाए रहने की संभावना जताई है, जिससे विजिबिलिटी शून्य रह सकती है।राजस्थान: मरुधरा में मौसम का मिजाज सबसे ज्यादा बिगड़ा हुआ है। ने कई जिलों में ओलावृष्टि और गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है। फतेहपुर और चूरू जैसे इलाकों में तापमान 0 से 5 डिग्री के बीच रहने की संभावना है।

    विशेषज्ञों की राय: कब मिलेगी राहत

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्तमान में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण यह स्थिति बनी है।अगले 2 से 3 दिनों तक मौसम का यही कड़ा रुख बना रहेगा। 27-28 जनवरी के बाद ही तापमान में मामूली बढ़ोतरी की उम्मीद की जा सकती है। तब तक शीतलहर और पाला पड़ने की संभावना बनी रहेगी।प्रवक्ता सावधानी की अपील: प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे लंबी दूरी की यात्रा से बचें और विशेषकर रात व सुबह के समय वाहन चलाते समय फॉग लाइट का प्रयोग करें।
  • सुप्रीम कोर्ट के जज का चेतावनी भरा संदेश, कॉलेजियम प्रणाली पर उठाए सवाल

    सुप्रीम कोर्ट के जज का चेतावनी भरा संदेश, कॉलेजियम प्रणाली पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और कॉलेजियम सिस्टम में सरकार के बढ़ते हस्तक्षेप पर चिंता जताई है। शनिवार को पुणे के ILS लॉ कॉलेज में दिए व्याख्यान में उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के लिए सबसे बड़ा खतरा बाहरी ताकतों से नहीं, बल्कि भीतर से है।

    जस्टिस भुइयां ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन के तबादले का उदाहरण देते हुए कॉलेजियम के फैसले पर सवाल उठाया। अगस्त में कॉलेजियम ने उन्हें छत्तीसगढ़ HC भेजने की सिफारिश की थी, लेकिन केंद्र सरकार के अनुरोध पर अक्टूबर में उनका तबादला इलाहाबाद HC कर दिया गया।यह तबादला उस समय हुआ जब जस्टिस श्रीधरन ने मई में एक भाजपा मंत्री द्वारा सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल पर स्वतः संज्ञान लिया था। कानून विशेषज्ञ इसे सरकार के खिलाफ असुविधाजनक निर्णय की “सजा” मानते हैं।

    अधिकार और संवैधानिक नैतिकता:
    जस्टिस भुइयां ने कहा, “जजों के तबादले में सरकार की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए। यह न्यायपालिका का अनन्य क्षेत्र है।” उन्होंने कॉलेजियम के सदस्यों से आग्रह किया कि वे बिना किसी डर या पक्षपात के अपनी शपथ का पालन करें और सिस्टम की अखंडता बनाए रखें। वेने कहा, “यदि न्यायपालिका अपनी साख खो देगी, तो जज और अदालतें रह जाएंगी, लेकिन न्यायपालिका की आत्मा गायब हो जाएगी।”

    कॉलेजियम प्रणाली में सुधार:

    जस्टिस भुइयां ने स्वीकार किया कि वर्तमान कॉलेजियम प्रणाली जजों की नियुक्ति के लिए आदर्श नहीं है और इसमें सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एक न्यायाधीश की व्यक्तिगत राजनीतिक विचारधारा हो सकती है, लेकिन फैसले हमेशा संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप होने चाहिए।

  • मुरादाबाद: 5 मुस्लिम छात्राओं ने हिंदू छात्रा को सड़क पर घेरकर जबरन बुर्का पहनाया, भाई ने लगाया धर्मांतरण का आरोप FIR दर्ज

    मुरादाबाद: 5 मुस्लिम छात्राओं ने हिंदू छात्रा को सड़क पर घेरकर जबरन बुर्का पहनाया, भाई ने लगाया धर्मांतरण का आरोप FIR दर्ज



    मुरादाबाद। यूपी के मुरादाबाद में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें 5 मुस्लिम छात्राओं पर एक हिंदू नाबालिग छात्रा को जबरन बुर्का पहनाने का आरोप लगा है। घटना 20 दिसंबर की बताई जा रही है, लेकिन पीड़िता के भाई ने 22 जनवरी को पुलिस में FIR दर्ज कराई।

    पीड़िता और आरोपी छात्राएं सभी 12वीं की छात्राएं हैं और एक ही स्कूल तथा कोचिंग में पढ़ती हैं। आरोप है कि कोचिंग से निकलने के बाद आरोपित छात्राओं ने छात्रा को सड़क पर घेर लिया, उसके बैग से बुर्का निकाला और उसे पहनाने पर मजबूर किया।

    भाई ने लगाया बड़ा आरोप: “इस्लाम कबूल करने से किस्मत बदलेगी”
    पीड़िता के भाई ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि शुरुआत में दोस्ती के बहाने आरोपी छात्राओं ने उसकी बहन का ब्रेनवॉश किया और उसे बार-बार इस्लाम अपनाने के लिए उकसाया। उसने दावा किया कि उसकी बहन के मन में हिंदू धर्म के प्रति नकारात्मक भाव पैदा किए गए।

    भाई ने बताया कि 11वीं में दोस्ती बढ़ी और धीरे-धीरे बहन ने परिवार की बात नहीं सुननी शुरू कर दी। 20 दिसंबर को ट्यूशन के बाद आरोपी छात्राओं ने उसे रोककर बुर्का पहनाया और उसका वीडियो/फोटो भी लिया जा सकता है।

    मामले में FIR दर्ज, जांच जारी
    पुलिस ने 5 आरोपी छात्राओं के खिलाफ आईपीसी और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें छात्रा को बुर्का पहनाते हुए देखा गया है।

    भाई का दावा: पीछे साजिश है
    पीड़िता के भाई का कहना है कि यह सिर्फ दोस्ती नहीं, बल्कि धर्मांतरण की साजिश है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि किसी संगठन द्वारा छात्राओं को उकसाकर हिंदू नाबालिगों को धर्म बदलने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
    भाई ने यह भी कहा कि ट्यूशन टीचर ने सबसे पहले बहन को बुर्का पहनाने की जानकारी दी थी और बाद में जब बहन से पूछा गया तो वह डरकर कुछ नहीं बताई।

  • यूपी बना सिनेमा का 'हॉटस्पॉट': वाराणसी की गलियों से मिर्जापुर के स्वैग तक, सिल्वर स्क्रीन पर छा रहा है उत्तर प्रदेश

    यूपी बना सिनेमा का 'हॉटस्पॉट': वाराणसी की गलियों से मिर्जापुर के स्वैग तक, सिल्वर स्क्रीन पर छा रहा है उत्तर प्रदेश

    नई दिल्ली/वाराणसी। आज उत्तर प्रदेश अपना 77वां स्थापना दिवस मना रहा है। जनसंख्या के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य अब केवल राजनीति ही नहीं बल्कि मनोरंजन जगत की धुरी भी बन चुका है। अपनी प्राचीन वास्तुकला गंगा के घाटों और ऐतिहासिक धरोहरों के दम पर यूपी फिल्म मेकर्स के लिए हब बन गया है। साल 2021 में मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट का नेशनल अवार्ड जीतने वाला यह राज्य अब दुनिया भर के निर्देशकों को आकर्षित कर रहा है।

    बनारस: फिल्मकारों की पहली पसंद वाराणसी की संकरी गलियां और मणिकर्णिका घाट की जीवन-मृत्यु की गाथा ने मसान जैसी संजीदा फिल्मों को जन्म दिया तो वहीं अस्सी घाट की जीवंतता रांझणा और मोहल्ला अस्सी की आत्मा बनी। ब्रह्मास्त्र जैसी बड़े बजट की फिल्मों से लेकर वनवास और भूल चूक माफ जैसी नई कहानियों तक काशी का कैनवास हर रंग में फिट बैठता है।

    अपराध और इमोशन का कॉकटेल यूपी की पृष्ठभूमि ने भारतीय डिजिटल स्पेस को मिर्जापुर और असुर जैसी कल्ट वेब सीरीज दी हैं। वहीं गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्मों ने राज्य के देहाती और औद्योगिक परिवेश को वैश्विक पहचान दिलाई। लखनऊ आगरा और कानपुर जैसे शहर अब केवल पर्यटन केंद्र नहीं बल्कि बड़े फिल्म स्टूडियो में तब्दील हो चुके हैं।

    सरकार का प्रोत्साहन और भविष्य उत्तर प्रदेश सरकार की फिल्म बंधु एजेंसी और नई फिल्म पॉलिसी ने शूटिंग के नियमों को बेहद सरल बना दिया है। सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए न केवल ऑनलाइन अनुमति मिलती है बल्कि वेब सीरीज और फिल्मों के लिए भारी सब्सिडी का भी प्रावधान है। नोएडा के सेक्टर 21 में बन रही फिल्म सिटी इस क्रांति को नए पंख लगाने के लिए तैयार है।

  • वाराणसी से मिर्जापुर तक, मनोरंजन जगत के लिए बेहद खास उत्तर प्रदेश, सैकड़ों फिल्मों की हो चुकी है शूटिंग

    वाराणसी से मिर्जापुर तक, मनोरंजन जगत के लिए बेहद खास उत्तर प्रदेश, सैकड़ों फिल्मों की हो चुकी है शूटिंग

    नई दिल्ली।  जनसंख्या के लिहाज से देश का सबसे बड़ा और खूबसूरत राज्य उत्तर प्रदेश न केवल पर्यटन बल्कि सिनेमा जगत को समृद्ध करने में भी अहम योगदान देता रहा है। प्राचीन शहरों के गंगा घाट, पतली गलियां, ऐतिहासिक मंदिर, ताजमहल और खूबसूरत नजारे फिल्मों के लिए आकर्षक पृष्ठभूमि बनाते हैं। यही वजह है कि यूपी भारत के सबसे फिल्म फ्रेंडली राज्यों में शुमार है। 2021 में इसे “मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट” घोषित किया गया था।

    शूटिंग की विशेषताएं और फिल्म नीति

    राज्य सरकार ने शूटिंग नियमों को सरल किया है। सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम के जरिए फिल्म मेकर्स को ऑनलाइन अनुमति और सब्सिडी मिलती है। वेब सीरीज के लिए भी सब्सिडी का प्रावधान है। सूचना विभाग की नोड एजेंसी ‘फिल्म बंधु’ फिल्म शूटिंग को बढ़ावा दे रही है। यूपी की फिल्म पॉलिसी सांस्कृतिक, पौराणिक और ऐतिहासिक विरासत को दुनिया तक पहुंचाने पर केंद्रित है।

    बोलती पृष्ठभूमि: प्रसिद्ध फिल्में और वेब सीरीज

    मसान (2015) में विक्की कौशल और ऋचा चड्ढा के किरदार काशी की गहराई को छूते हैं।
    रांझणा (2013) बनारस की गलियों में प्रेम, त्याग और सामाजिक विभाजन की कहानी दिखाती है।
    मुक्ति भवन (2016) में कॉमेडी और भावुकता का अनोखा मिश्रण है।
    बनारस में शहर की आध्यात्मिकता और रहस्य कहानी को मजबूती देती है।
    मोहल्ला अस्सी अस्सी घाट और स्थानीय संस्कृति पर आधारित व्यंग्यात्मक कहानी है।
    ब्रह्मास्त्र: पार्ट वन – शिव (2022) में पौराणिक कथाओं से प्रेरित कहानी और शक्तियों का खेल है।
    गैंग्स ऑफ वासेपुर (2012) में अपराध, सत्ता और बदले की महाकाव्य कहानी दिखाई गई।
    मिर्जापुर (वेब सीरीज) में अपराधी कालीन त्रिपाठी का साम्राज्य और क्राइम थ्रिलर कहानी है।
    वनवास (2024) बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा और परिवारिक संघर्ष पर आधारित भावुक कहानी है।
    भूल चूक माफ में वाराणसी की रंगीन गलियों और टाइम लूप की रोमांटिक कॉमेडी दिखाई गई।

    उत्तर प्रदेश की फिल्म नीति और पुरस्कार

    यूपी ने कई बड़े पुरस्कार जीते हैं। 64वें और 68वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड, 2021 में आईएफएफआई गोवा, और 2022 में मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल से ‘शूटिंग फ्रेंडली राज्य’ का सम्मान मिला।

    उत्तर प्रदेश अपने खूबसूरत नजारों, सांस्कृतिक विरासत और फिल्म फ्रेंडली नीति से सिनेमा जगत का पसंदीदा राज्य बनकर 77वें स्थापना दिवस पर गौरव महसूस कर रहा है।

  • RJD में बड़े संगठनात्मक बदलाव के संकेत, तेजस्वी यादव को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी, कल फैसले के आसार

    RJD में बड़े संगठनात्मक बदलाव के संकेत, तेजस्वी यादव को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी, कल फैसले के आसार


    नई दिल्‍ली। राष्ट्रीय जनता दल RJD में जल्द ही बड़ा फैसला लिया जा सकता है। तेजस्वी यादव को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपे जाने की चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, 25 जनवरी को होने वाली RJD की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लग सकती है। यदि यह निर्णय होता है, तो पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में यह एक अहम बदलाव माना जाएगा।

    पूरा मामला क्या है

    आजेडी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की एक महत्वपूर्ण बैठक 25 जनवरी को पटना स्थित होटल मौर्या में सुबह 11:30 बजे आयोजित होने वाली है। इस बैठक को पार्टी के भविष्य के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने पर विचार किया जा सकता है। यदि प्रस्ताव रखा गया तो उस पर अंतिम फैसला RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों की सहमति से लिया जाएगा। पार्टी के अंदरखाने में यह चर्चा तेज है कि आने वाले वर्षों की राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखते हुए तेजस्वी यादव संगठन की कमान और मजबूत रूप से अपने हाथ में लेना चाहते हैं। माना जा रहा है कि यह कदम RJD के नेतृत्व को स्पष्ट करने की दिशा में अहम साबित हो सकता है।

    तेजस्वी यादव की सुरक्षा में हालिया बदलाव

    हाल ही में तेजस्वी यादव की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया गया था। बिहार के कई प्रमुख नेताओं की सुरक्षा श्रेणी की समीक्षा केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर की गई थी, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। इस कदम को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए इसे राजनीतिक मंशा से जुड़ा बताया था। वहीं सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि यह फैसला पूरी तरह खतरे के आकलन और सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है।

    तेजस्वी यादव फिलहाल बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। पिछला विधानसभा चुनाव आरजेडी के लिए निराशाजनक रहा था, जहां एनडीए ने भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज की और महागठबंधन को हार का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणामों के बाद तेजस्वी यादव को सदन में विपक्ष का नेता चुना गया।

    गौरतलब है कि चुनाव के बाद लालू परिवार के भीतर मतभेद भी सार्वजनिक रूप से सामने आए थे। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अपने भाई तेजस्वी यादव पर तीखी टिप्पणी की थी, जिससे राजनीतिक और पारिवारिक चर्चाएं तेज हो गई थीं। इसी दौरान तेजस्वी यादव के बड़े भाई तेज प्रताप यादव को चुनाव से पहले ही पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद तेज प्रताप ने अलग राजनीतिक दल बनाकर चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें चुनावी सफलता नहीं मिल पाई।

  • चुनाव आयोग का कड़ा रुख: मतदाता सूची में गड़बड़ी की तो BLOs पर होगी सीधी FIR, ECI ने जारी किए सख्त निर्देश

    चुनाव आयोग का कड़ा रुख: मतदाता सूची में गड़बड़ी की तो BLOs पर होगी सीधी FIR, ECI ने जारी किए सख्त निर्देश

    नई दिल्ली/कोलकाता। भारत निर्वाचन आयोग ECI ने लोकतंत्र की सबसे बुनियादी इकाई ‘मतदाता सूची’ की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए कमर कस ली है। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि बूथ लेवल ऑफिसर्स BLOs द्वारा की गई किसी भी प्रकार की लापरवाही, जानबूझकर की गई गड़बड़ी या निर्देशों की अवहेलना को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शुक्रवार को जारी नई गाइडलाइंस के अनुसार, दोषी अधिकारियों के खिलाफ न केवल विभागीय जांच होगी, बल्कि आपराधिक कृत्य पाए जाने पर सीधे FIR भी दर्ज कराई जाएगी।

    गाइडलाइंस के मुख्य बिंदु: क्यों और कैसे होगी कार्रवाई

    आयोग ने उन परिस्थितियों को स्पष्ट किया है जिनके तहत BLOs पर गाज गिर सकती है गड़बड़ी के दायरे: मतदाता सूची की सटीकता को प्रभावित करना, ड्यूटी से नदारद रहना, दुर्व्यवहार, चुनाव कानूनों का उल्लंघन या आयोग के आदेशों की जानबूझकर अनदेखी करना। निलंबन और विभागीय जांच: जिला निर्वाचन अधिकारी DEO के पास दोषी BLO को तत्काल निलंबित करने का अधिकार होगा। संबंधित अनुशासनात्मक प्राधिकारी को 6 महीने के भीतर कार्यवाही पूरी कर रिपोर्ट देनी होगी।

    आपराधिक कार्यवाही FIR यदि गड़बड़ी आपराधिक श्रेणी की है, तो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम RP Act 1950 की धारा 32 के तहत मुख्य निर्वाचन अधिकारी CEO की अनुमति से तुरंत FIR दर्ज की जाएगी। निगरानी: CEO को यह अधिकार होगा कि वे स्वयं या DEO की रिपोर्ट पर संज्ञान लेकर कार्रवाई करें। अनुशासनात्मक कार्यवाही का अंतिम निर्णय CEO की सहमति के बिना प्रभावी नहीं होगा।

    पश्चिम बंगाल: सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद विशेष सतर्कता

    पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण SIR 2026 के दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर चुनाव आयोग बेहद संवेदनशील है। सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: 19 जनवरी 2026 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी आदेश के बाद, बंगाल के CEO मनोज अग्रवाल ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों DM को निर्देश दिए हैं कि मतदाता सूची संशोधन के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा या धांधली को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं। सुरक्षा और पारदर्शिता: बंगाल में पुनरीक्षण कार्य के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन को विशेष निर्देश दिए गए हैं ताकि मतदाता बिना किसी डर के अपना नाम जुड़वा सकें या संशोधन करा सकें।

    BLO की भूमिका का महत्व

    एक BLO के पास औसतन 970 मतदाता या लगभग 300 घरों की जिम्मेदारी होती है। जमीनी स्तर पर यही अधिकारी तय करते हैं कि मतदाता सूची कितनी पारदर्शी है। आयोग का मानना है कि यदि नींव BLO स्तर मजबूत और ईमानदार होगी, तो चुनाव की पूरी प्रक्रिया पर जनता का विश्वास बना रहेगा।

  • सारंडा के बीहड़ों में 'ऑपरेशन मेगाबुरु': 47 घंटे की जंग में 13 खूंखार नक्सली ढेर, 4.5 करोड़ का इनाम साफ

    सारंडा के बीहड़ों में 'ऑपरेशन मेगाबुरु': 47 घंटे की जंग में 13 खूंखार नक्सली ढेर, 4.5 करोड़ का इनाम साफ


    झारखंड । झारखंड और ओडिशा की सीमा पर स्थित एशिया के सबसे घने सारंडा जंगलों में सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया है। ‘ऑपरेशन मेगाबुरु’ के तहत 47 घंटों तक चली इस भीषण मुठभेड़ में 13 हार्डकोर नक्सलियों को मार गिराया गया है। मारे गए इन नक्सलियों पर कुल 4.49 करोड़ रुपये का सामूहिक इनाम घोषित था। पश्चिमी सिंहभूम जिले के कुमडीह और बहादा जंगल में चली इस गोलीबारी ने नक्सली संगठन की जड़ों को हिलाकर रख दिया है। सुरक्षाबलों ने मौके से भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार आईईडी और गोला-बारूद भी बरामद किया है।

    ऑपरेशन मेगाबुरु की बड़ी सफलताएं

    सुरक्षाबलों के लिए यह जीत रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें संगठन के कई बड़े चेहरे खत्म हो गए हैं रापा मुंडा 35 लाख का इनामी जोनल कमांडर रापा मुंडा इस मुठभेड़ का सबसे बड़ा शिकार बना। वह अप्रैल 2025 में हुए उस घातक आईईडी ब्लास्ट का मास्टरमाइंड था जिसमें झारखंड जगुआर का एक जवान शहीद हुआ था। मुवति होनहांगा 2 लाख की इनामी इस महिला नक्सली को भी सुरक्षाबलों ने ढेर कर दिया है। बड़ी बरामदगी मुठभेड़ स्थल से एके-47 इंसास राइफलें और भारी मात्रा में बारूद बरामद हुआ है।

    दहशत के बीच भारी नाकेबंदी

    मुठभेड़ इतनी भीषण थी कि इसका असर आसपास के गांवों में साफ देखा जा रहा है घरों में कैद ग्रामीण फायरिंग की गूंज से डरे हुए लगभग 20 परिवार अपने घरों में सिमटे हुए हैं। लॉजिस्टिक्स घने जंगलों से नक्सलियों के शव बाहर निकालने के लिए प्रशासन को 6 ट्रैक्टरों और सुरक्षा के लिए 8 मजिस्ट्रेटों की तैनाती करनी पड़ी। सील इलाका: कुमडीह और सेडल नाका सहित पूरे इलाके को झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ ने चारों तरफ से सील कर दिया है।

    सर्च ऑपरेशन अब भी जारी

    हालांकि मुख्य मुठभेड़ थम गई है, लेकिन ‘ऑपरेशन मेगाबुरु’ अभी खत्म नहीं हुआ है। पुलिस को अंदेशा है कि घने बीहड़ों और गुफाओं में कुछ और हार्डकोर नक्सली छिपे हो सकते हैं। चप्पे-चप्पे पर जवानों की तैनाती है ताकि कोई भी अपराधी घेराबंदी तोड़कर ओडिशा की सीमा में न भाग सके।