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  • बंगला साहिब गुरुद्वारे में हंगामे पर विवाद, केजरीवाल समेत ‘आप’ नेताओं के खिलाफ DSGMC ने दी शिकायत

    बंगला साहिब गुरुद्वारे में हंगामे पर विवाद, केजरीवाल समेत ‘आप’ नेताओं के खिलाफ DSGMC ने दी शिकायत

    नई दिल्ली। दिल्ली के बंगला साहिब गुरुद्वारे में कथित हंगामे और घटना से जुड़े भ्रामक वीडियो प्रसारित करने के मामले में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) ने आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के अन्य नेताओं के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। कमेटी ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारियों ने गुरुद्वारे के पवित्र परिसर में राजनीतिक नारे लगाए, जिससे धार्मिक माहौल प्रभावित हुआ। उसने पुलिस से मामले में उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

    DSGMC अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका के नेतृत्व में कमेटी के पदाधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को नई दिल्ली जिला के पुलिस उपायुक्त कार्यालय में शिकायत सौंपी। कमेटी ने पुलिस को घटना से संबंधित वीडियो भी उपलब्ध कराए हैं।

    गुरुद्वारे की मर्यादा भंग करने का आरोप

    दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने अपनी शिकायत में कहा कि प्रदर्शनकारियों ने पवित्र परिसर के भीतर राजनीतिक नारे लगाए। कमेटी के मुताबिक, इस तरह की गतिविधियों से गुरुद्वारे का धार्मिक वातावरण प्रभावित हुआ और गुरु घर की पवित्रता एवं मर्यादा का उल्लंघन हुआ।

    कमेटी ने मामले में दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। इसके साथ ही घटना से जुड़े वीडियो प्रसारित किए जाने के मामले की भी जांच की मांग उठाई गई है।

    पुलिस के गुरुद्वारे में प्रवेश पर ‘आप’ ने उठाए सवाल

    इस विवाद को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गुरुद्वारे में पुलिस के प्रवेश की निंदा की थी। उन्होंने कहा था कि गुरुद्वारों के दरवाजे जरूरतमंद लोगों को आश्रय देने के लिए हमेशा खुले रहते हैं।

    वहीं, आम आदमी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के लिए गुरुद्वारे के भीतर दाखिल हुई थी। इस मुद्दे पर रविवार शाम आप कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और विधायक जरनैल सिंह ने प्रेस वार्ता की। इस दौरान उन्होंने DSGMC अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका पर भाजपा का पक्ष लेने का आरोप लगाया।

    कालका बोले- मुख्य दरबार हॉल में नहीं गई थी पुलिस

    DSGMC अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने पुलिस के प्रवेश को लेकर अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने पहुंचे पुलिसकर्मियों ने गुरुद्वारे के मुख्य दरबार हॉल में प्रवेश नहीं किया था। उनके मुताबिक, पुलिस ने परिसर के भीतर से गुजरने वाले रास्ते का इस्तेमाल किया था।

    हालांकि, कालका ने यह भी कहा कि पुलिसकर्मियों को वर्दी में गुरुद्वारा परिसर के भीतर प्रवेश नहीं करना चाहिए था। इस तरह उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को लेकर अपनी आपत्ति भी जाहिर की।

    पुलिस ने वीडियो दुर्भावनापूर्ण मंशा से प्रसारित करने की बात कही

    नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस मामले में स्पष्टीकरण दिया था। उन्होंने कहा था कि पुलिसकर्मी उस साझा रास्ते से गुजर रहे थे, जिसका इस्तेमाल श्रद्धालु जूते उतारने के स्थान तक पहुंचने के लिए करते हैं।

    पुलिस उपायुक्त ने आरोप लगाया कि घटना से संबंधित वीडियो दुर्भावनापूर्ण मंशा से प्रसारित किए गए। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया।

    फिलहाल, बंगला साहिब गुरुद्वारे की घटना को लेकर DSGMC और आम आदमी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। कमेटी की शिकायत के बाद अब मामले में पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

  • दिल्ली में पुलिस का कड़ा पहरा….CJP नहीं जुटा पाई भीड़…. ठंडा पड़ा आंदोलन…

    दिल्ली में पुलिस का कड़ा पहरा….CJP नहीं जुटा पाई भीड़…. ठंडा पड़ा आंदोलन…


    नई दिल्ली।
    दिल्ली (Delhi) में जब पिछली बार कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party) यानी CJP का आंदोलन हुआ था. तब देश के तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) को इस्तीफा देना पड़ा था. शायद यही वो बात थी जो सरकार और सीजेपी नेताओं दोनों को याद रही. सीजेपी इस बार 10 अक्टूबर को जुलाई जैसा ही कुछ करना चाहती थी. लेकिन सरकार किसी भी कीमत पर उसे रोकने में जुटी थी. दिल्ली पुलिस की तैयारी और राजधानी में लागू पाबंदियां इसकी गवाह हैं।

    एक तरफ कॉकरोच थे, जिनके साथ युवा और कुछ छात्र संगठन खड़े थे. दूसरी तरफ राजधानी में तैनात पुलिस और पैरामिलिट्री की फौज थी. इस बार सीजेपी के प्रदर्शन को आंदोलन बनने से रोक दिया गया। 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट का कॉल दिया था. लेकिन दिल्ली लैंड होते ही फ्लाइट से सीजेपी के तीनों बड़े नेता अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत के बाद प्रदर्शन ठंडा पड़ गया।

    नई दिल्ली के इलाके में शनिवार को दिनभर पुलिस और सीजेपी समर्थकों के बीच चूहा-बिल्ली का खेल देखने को मिला. सीजेपी समर्थकों की जंतर-मंतर पर जुटने और वहां धरना देने की हर कोशिश नाकाम साबित हुई. दिपके ने अपने डिटेंशन से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसे बाद में जारी किया गया. सीजेपी के प्लान-B के तहत दिपके, रांका और सौरव दास के पकड़े जाने के बाद अंजिक्य शिंदे को प्रोटेस्ट लीड करने का जिम्मा दिया गया. लेकिन लीड करने के लिए समर्थकों की भीड़ को जमा ही नहीं होने दिया गया।

    अंजिक्य शिंदे ने समर्थकों से प्रोटेस्ट जारी रखने की अपील की और हर जगह को जंतर-मंतर बनाने का आह्वान भी किया. लेकिन रविवार आते-आते सीजेपी समर्थक हल्के पड़ गए. सड़कों पर प्रदर्शनकारियों से ज्यादा पुलिस की मौजूदगी थी. प्रोटेस्ट के दूसरे दिन रविवार को सड़कों पर सन्नाटा रहा. कनॉट प्लेस के आसपास कुछ इलाके में छिटपुट लोग जमा हुए, लेकिन पुलिस ने उन्हें भी खदेड़ दिया. सीजेपी के तीनों बड़े नेताओं की रिहाई भी हुई, लेकिन शर्त यह थी कि एक साल तक वे कोई प्रदर्शन नहीं करेंगे।

    पुलिस इस बार पहले से ज्यादा तैयार थी और तैयारी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत थी. जुलाई में हुए पेपर लीक प्रोटेस्ट से इस बार का प्रोटेस्ट एकदम अलग रहा. पेपर लीक के मुद्दे से वह आमजन भी जुड़े जिनका राजनीति से सीधे कोई सरोकार नहीं था. जंतर-मंतर पर लोग अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर पहुंचे हुए थे. पिछली बार छात्रों का बड़ा हुजूम नजर आया, जिसे तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं था।

    लेकिन इस बार के प्रदर्शन की वजह वोट चोरी, एक सियासी मुद्दा ज्यादा है. SIR के तहत लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, इसके पीछे चुनाव आयोग और सरकार के अपने तर्क हैं. विपक्ष खास तौर पर राहुल गांधी सालभर से इस मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं. कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं. पिछले सप्ताह तीन दिन तक लगातार राहुल गांधी समेत समूचा विपक्ष ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली की सड़कों पर उतरा. आखिर में राष्ट्रपति से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी है. अब उसी मुद्दे के साथ दिपके की सीजेपी जब मैदान में आई तो उसे पहले जैसा जनसमर्थन नहीं मिल सका।

    वोट चोरी के मुद्दे को पहले से ही विपक्ष दल पूरे जोर-शोर से उठा रहे हैं और एक प्रेशर ग्रुप के तौर पर सीजेपी इसके जरिए युवाओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है. 10 अक्टूबर के प्रोटेस्ट से यह बात साफ हो गई कि सीजेपी को इस बार पेपर लीक जैसा समर्थन नहीं मिला. दूसरी बात पुलिस ने इस बार पहले से ज्यादा सतर्कता बरती. दिल्ली को छावनी बना दिया गया. ट्रेनें, मेट्रो, बाजार, यहां तक कि इंटरनेट पर भी पाबंदी लगाई गई. सरकार को पता था कि अगर एक बार सीजेपी जंतर-मंतर डेरा डाल लेती तो उन्हें वहां से हटाना मुश्किल होगा. लेकिन पुलिस ने ऐसा होने ही नहीं दिया।

    रविवार को सीजेपी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है. आशुतोष रांका, सौरव दाव और रत्ना सिंह ने पुलिस और सरकार पर प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता करने के आरोप लगाए. दिपके इस प्रेस वार्ता का हिस्सा नहीं थे. क्योंकि दादी के निधन के बाद वह वापस महाराष्ट्र अपने गांव लौट चुके हैं. उन्होंने कहा कि हमने कोर्ट में कोई बॉन्ड साइन नहीं किया है और फिर से सड़कों पर उतरेंगे. लेकिन अब तक सीजेपी की तरफ से आगे की रणनीति का खुलासा नहीं किया गया है।

  • जनगणना के आंकड़ों से सामने आएगी शहरों की असली तस्वीर…. संसदीय समिति ने की सिफारिश

    जनगणना के आंकड़ों से सामने आएगी शहरों की असली तस्वीर…. संसदीय समिति ने की सिफारिश


    नई दिल्ली।
    देश में जारी जनगणना (Census) के नतीजे आने के बाद शहरों की असली तस्वीर सामने आएगी। संसद की संसदीय समिति (Parliamentary Committee) ने आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय से कहा है कि वर्तमान में 3,000 से अधिक शहर या कस्बे शहरी विशेषताएं तो रखते हैं, लेकिन अब भी ग्रामीण स्थानीय निकायों (Rural Local Bodies) के प्रशासनिक नियंत्रण में हैं। यह स्थिति बदलनी चाहिए। शहर की मौजूदा परिभाषा पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। आजादी के सौवें वर्ष तक शहरी आबादी 87 करोड़ तक होने की उम्मीद है।

    मंत्रालय ने शहरीकरण की बदलती जरूरतों को देखते हुए बस्ती वर्गीकरण व्यवस्था में ‘संक्रमणकालीन क्षेत्र’ (ट्रांजिशनल एरिया) की नई श्रेणी बनाने का प्रस्ताव दिया है। इससे उन क्षेत्रों की पहचान और नियोजन आसान हो सकता है, जहां आबादी और आर्थिक गतिविधियां तो शहरी स्वरूप ले रही हैं, लेकिन उन्हें अभी शहर का दर्जा नहीं मिला है। भारत के महापंजीयक व जनगणना आयुक्त कार्यालय ने कहा है, मौजूदा जनगणना डिजिटल तरीके से हो रही है। आंकड़ों को अंतिम रूप दिए जाने के बाद गांव व शहरों के आंकड़ों से सीमाओं का विश्लेषण कर अर्धशहरी या संक्रमणकालीन बस्तियों की पहचान की जा सकती है। लेकिन इस वक्त जनगणना के बीच अर्ध शहरी क्षेत्रों की नई श्रेणी शुरू करना संभव नहीं है।

    वर्ष 2025 में भारत की शहरी आवादी लगभग 45 से 50 करोड़ के बीच होने का अनुमान था। वहीं, 2047 तक इसके बढ़कर 85 से 87 करोड़ होने की संभावना है। मंत्रालय का कहना है कि नए शहरी क्षेत्रों का विकास हाई स्पीड रेल नेटवर्क, क्षेत्रीय तीव्र पारगमन प्रणाली और प्रमुख एक्सप्रेसवे जैसे परिवहन एवं आर्थिक गलियारों के आसपास होने की संभावना है।


    क्या होते हैं जनगणना नगर व वैधानिक नगर

    5,000 आबादी, 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर जनसंख्या घनत्व वाला क्षेत्र जनगणना नगर कहलाता है। यहां मुख्य कामगारों में पुरुष के कम से कम 75 प्रतिशत गैर-कृषि गतिविधियों में शामिल रहना जरूरी शर्त है। वैधानिक नगर में नगर निगम, नगरपालिका, छावनी बोर्ड और अधिसूचित क्षेत्र समितियां शामिल हैं।


    संसदीय समिति की सिफारिशें

    संसदीय समिति ने कहा, शहर की परिभाषा में बदलाव की जरूरत है। सरकार लैंगिक पक्षपाती मानदंड में संशोधन के लिए एक केंद्रित अध्ययन कराए और शहरी क्षेत्रों की पहचान हेतु लैंगिक-समावेशी कार्यप्रणाली विकसित करे।

  • महाराष्ट्र: MPSC में सुधार के लिए तुकाराम मुंढे को मिली बड़ी जिम्मेदारी, बनाया गया समिति का सचिव

    महाराष्ट्र: MPSC में सुधार के लिए तुकाराम मुंढे को मिली बड़ी जिम्मेदारी, बनाया गया समिति का सचिव


    मुंबई। महाराष्ट्र में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच राज्य सरकार ने सुधार की दिशा में कदम उठाया है। पुणे में भर्ती अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार 10 दिनों से जारी था। इसी बीच सरकार ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की व्यवस्था में बदलाव के सुझाव देने के लिए एक समिति बनाई है। इसमें प्रशासनिक अनुभव रखने वाले अधिकारियों और न्यायिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को शामिल किया गया है।

    राज्य सरकार में मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने रविवार को पुणे के एसएम जोशी पुल पर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों से मुलाकात के बाद समिति के गठन की घोषणा की। बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश दिलीप भोसले को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त तुकाराम मुंढे समिति के सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे।

    समिति के अन्य सदस्यों में आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी गौतम, पूर्व आईएएस अधिकारी गणेश पाटिल और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पीडी नाइक शामिल हैं। समिति से एमपीएससी की भर्ती व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव देने की अपेक्षा है।

    तीन साल में 70 हजार पदों पर भर्ती की मांग

    अभ्यर्थियों का आंदोलन केवल एमपीएससी के कामकाज में बदलाव तक सीमित नहीं है। प्रदर्शनकारी अगले तीन वर्षों में सरकारी विभागों के 70 हजार पदों पर भर्ती करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया को गति देने के साथ परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।

    इसके अलावा, अभ्यर्थियों ने जनवरी में प्रस्तावित समूह-सी की परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग उठाई है। उनका जोर भर्ती के अधिक अवसर उपलब्ध कराने पर है, ताकि सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को राहत मिल सके।

    आंदोलनकारियों ने प्रदर्शन से जुड़े कुछ प्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी रखी है। मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने आश्वासन दिया कि भर्ती प्रक्रिया में सुधार के अलावा अभ्यर्थियों की अन्य मांगों पर भी ध्यान दिया जाएगा।

    MPSC अध्यक्ष को हटाने की भी मांग

    प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सचिव की नियुक्ति से पहले उनकी पृष्ठभूमि की जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने आयोग के मौजूदा अध्यक्ष विवेक भीमनवार को पद से हटाने की मांग भी उठाई है।

    हालांकि, अध्यक्ष को हटाने के संबंध में सरकार ने कोई निर्णय लिया है या नहीं, यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सका। समिति का गठन भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांगों के बीच हुआ है, लेकिन अभ्यर्थियों की सभी मांगों पर अंतिम निर्णय होना अभी बाकी है।

    रोहित पवार ने किया मुंढे की नियुक्ति का स्वागत

    राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार भी अभ्यर्थियों के आंदोलन में शामिल हैं। उन्होंने तुकाराम मुंढे को समिति का सचिव बनाए जाने का स्वागत किया।

    पवार ने उम्मीद जताई कि समिति को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलेगा, जिससे भर्ती प्रक्रिया में जरूरी सुधारों का रास्ता साफ हो सकेगा।

    अब समिति की कार्यवाही और उससे सामने आने वाले सुझावों पर नजर रहेगी। अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में भर्ती कैलेंडर को प्रभावी बनाना, पर्याप्त पदों पर नियुक्तियां करना और आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है। सरकार की ओर से समिति गठित किए जाने के बाद आंदोलनकारी अपनी बाकी मांगों पर होने वाली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

  • पीएम मोदी ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय को दिया केंद्र की मदद का भरोसा, 13 हजार करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास

    पीएम मोदी ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय को दिया केंद्र की मदद का भरोसा, 13 हजार करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को तमिलनाडु के विकास के लिए केंद्र सरकार की ओर से हर जरूरी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। चेन्नई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि केंद्र पूरी प्रतिबद्धता के साथ तमिलनाडु के साथ खड़ा है। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व में तमिलनाडु के विकास और देश को विकसित बनाने के साझा लक्ष्य पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों मिलकर विकसित तमिलनाडु के माध्यम से विकसित भारत के संकल्प को साकार कर सकते हैं।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार तमिलनाडु को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए आवश्यक सहयोग देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि राज्य को केंद्र से जिस भी सहायता की जरूरत होगी, उसे उपलब्ध कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उनके मुताबिक, तमिलनाडु के विकास को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य के बीच सहयोग महत्वपूर्ण है। उन्होंने राज्य के लोगों को विकास परियोजनाओं से जुड़े इस अवसर पर बधाई भी दी।

    चेन्नई में आयोजित कार्यक्रम में लगभग 13 हजार करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया। प्रधानमंत्री ने इसे तमिलनाडु के लिए ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के तहत कुछ ऐसी परियोजनाएं जनता को समर्पित की जा रही हैं, जिनका काम पूरा हो चुका है, जबकि कई नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी जा रही है। इन योजनाओं का संबंध परिवहन, उद्योग, व्यापार और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों से है।

    मोदी ने कहा कि विकास परियोजनाओं में से कुछ लोगों की रोजमर्रा की यात्रा को आसान बनाएंगी। वहीं, दूसरी परियोजनाओं से उद्योग और व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इन पहलों का संयुक्त उद्देश्य तमिलनाडु के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना है। प्रधानमंत्री ने राज्य के विकास में बुनियादी ढांचे की भूमिका को भी रेखांकित किया।

    अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने चेन्नई मेट्रो के एक अन्य चरण को जनता को समर्पित करने का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उन्हें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में ब्रेन रिसर्च सेंटर जाने का अवसर मिला। प्रधानमंत्री के अनुसार, इस क्षेत्र में होने वाला अनुसंधान सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई नए अवसर पैदा कर सकता है। इस तरह उनके कार्यक्रम में आधुनिक परिवहन व्यवस्था के साथ वैज्ञानिक अनुसंधान और स्वास्थ्य से जुड़े विषय भी शामिल रहे।

    प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास के बीच संबंध पर भी बात की। उन्होंने कहा कि मंदिरों से लेकर मेट्रो तक राज्य के अनुभव आज के भारत की भावना को दर्शाते हैं। उनके अनुसार, भारत अपनी सांस्कृतिक शक्ति से प्रेरणा लेते हुए विज्ञान में प्रगति कर रहा है और आधुनिक बुनियादी ढांचे के माध्यम से नए अवसर तैयार कर रहा है। उन्होंने विरासत और भविष्य की आकांक्षाओं को साथ लेकर आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    प्रधानमंत्री का यह संबोधन तमिलनाडु में विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास के अवसर पर हुआ। उन्होंने राज्य के विकास के लिए केंद्र की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि सरकार तमिलनाडु को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक सहायता देने को तैयार है। 13 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं के जरिए परिवहन, उद्योग, व्यापार और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में विकास को गति देने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में मुख्यमंत्री विजय की ओर से इस प्रस्ताव पर किसी प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है।

  • योगी आदित्यनाथ ने देवीपाटन मंदिर में कन्या पूजन कर बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वावलंबन को राम राज्य का आधार बताया

    योगी आदित्यनाथ ने देवीपाटन मंदिर में कन्या पूजन कर बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वावलंबन को राम राज्य का आधार बताया

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को शारदीय नवरात्रि की प्रतिपदा और अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर बलरामपुर स्थित देवीपाटन मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने नवदुर्गा के स्वरूप में नौ कन्याओं का पूजन किया। कन्याओं को तिलक लगाने के साथ चुनरी ओढ़ाई गई। मंदिर परिसर में आयोजित ‘शिक्षा की उड़ान’ पहल के अंतर्गत मुख्यमंत्री ने स्कूली बच्चों को स्टडी टेबल, आशीर्वाद पत्र और स्टेशनरी किट वितरित कीं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन देना राम राज्य की स्थापना का मूल आधार है।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले पांचवीं कक्षा तक पहुंचने से पहले ही हर पांचवीं बेटी स्कूल छोड़ देती थी। उस समय 60 से 70 प्रतिशत बच्चे नंगे पैर विद्यालय जाते थे। स्कूलों में शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था। उन्होंने कहा कि सरकार ने कार्यभार संभालने के बाद बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय, स्वच्छ पेयजल और गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन की व्यवस्था की।

    योगी आदित्यनाथ के मुताबिक, ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के माध्यम से प्रदेश के 1.60 करोड़ परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को हर साल दो जोड़ी यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, स्वेटर, स्कूल बैग और पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं। कार्यक्रम में शिक्षा और बालिकाओं के विकास से जुड़े प्रयासों पर भी जोर दिया गया। ‘शिक्षा की उड़ान’ के तहत बच्चों को अध्ययन के लिए आवश्यक सामग्री देकर उनकी पढ़ाई को प्रोत्साहित किया गया।

    महिला सशक्तिकरण के विषय पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाओं में महिलाओं को संपत्ति का मालिकाना हक देने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत मकानों की रजिस्ट्री तथा धनराशि परिवार की महिला मुखिया के नाम पर दी जा रही है। उन्होंने बताया कि एक करोड़ से अधिक परिवारों को वितरित की गई घरौनियों में भी महिलाओं को मालिकाना अधिकार मिला है। इसके अलावा उज्ज्वला योजना और तीन करोड़ से अधिक शौचालयों के निर्माण को महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े प्रयासों के रूप में प्रस्तुत किया।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों की विकास प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इसके साथ ही विराट किसान मेले का शुभारंभ भी किया गया। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर की चाबियां और कीटनाशक छिड़काव करने वाले यंत्र वितरित किए गए। इन गतिविधियों के माध्यम से कृषि क्षेत्र से जुड़े उपकरणों और सुविधाओं को किसानों तक पहुंचाने पर ध्यान दिया गया।

    मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को ट्रैक सूट देकर सम्मानित किया। वहीं, बेसिक विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को स्टेशनरी किट प्रदान की गईं। कार्यक्रम में देवीपाटन मंदिर के महंत मिथिलेश नाथ, विधायक कैलाश नाथ शुक्ला, पल्टूराम और रामप्रताप वर्मा सहित जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर कन्या पूजन, बालिका शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, किसानों को उपकरणों के वितरण और विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए।

  • बस्तर में आबकारी विभाग की कार्रवाई, 8.28 लाख रुपये की गोवा शराब और टाटा वाहन जब्त, एक आरोपी गिरफ्तार, दूसरा फरार

    बस्तर में आबकारी विभाग की कार्रवाई, 8.28 लाख रुपये की गोवा शराब और टाटा वाहन जब्त, एक आरोपी गिरफ्तार, दूसरा फरार

    नई दिल्ली । छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में अवैध शराब के परिवहन और बिक्री के खिलाफ आबकारी विभाग ने कार्रवाई की है। इस दौरान विभाग की टीम ने मध्य प्रदेश में बिक्री के लिए निर्धारित गोवा ब्रांड की विदेशी शराब की 20 पेटियां जब्त कीं। शराब को दूसरे राज्य से लाकर खपाने के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दूसरा आरोपी फरार बताया जा रहा है। कार्रवाई के दौरान शराब के परिवहन में इस्तेमाल किया जा रहा एक टाटा वाहन भी जब्त किया गया। शराब और वाहन की कुल अनुमानित कीमत 8 लाख 28 हजार रुपये बताई गई है।

    यह कार्रवाई जगदलपुर-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ग्राम सोनारपाल के पास जांच के दौरान की गई। आबकारी विभाग के जगदलपुर वृत्त की टीम ने वाहन की जांच की तो उसमें विदेशी शराब मिली। जब्त शराब की मात्रा 180 लीटर बताई गई है। अधिकारियों के अनुसार, शराब मध्य प्रदेश में बिक्री के लिए निर्धारित थी, लेकिन उसे दूसरे राज्य में ले जाकर खपाने की आशंका के आधार पर कार्रवाई की गई। विभाग ने शराब की खेप और उसके परिवहन में इस्तेमाल किए जा रहे वाहन को अपने कब्जे में ले लिया है।

    जब्त की गई गोवा ब्रांड की विदेशी शराब की कीमत करीब 1 लाख 28 हजार रुपये आंकी गई है। वहीं, शराब ले जाने के लिए इस्तेमाल किए गए टाटा वाहन का अनुमानित मूल्य करीब 7 लाख रुपये बताया गया है। इस तरह शराब और वाहन दोनों को मिलाकर जब्त किए गए सामान की कुल कीमत 8 लाख 28 हजार रुपये है। आबकारी विभाग ने अवैध शराब के परिवहन से जुड़े मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    इस प्रकरण में दुर्ग जिले के सुपेला स्थित शास्त्री नगर निवासी 33 वर्षीय देवेंद्र कुमार जांगड़े को आरोपी बनाया गया है। कार्रवाई के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। वहीं, जोगेन्दर कश्यप उर्फ जोगी फरार बताया जा रहा है। विभाग की टीम उसकी तलाश में जुटी है। मामले में दोनों आरोपियों की भूमिका और शराब के परिवहन से जुड़े तथ्यों को लेकर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    आबकारी विभाग ने इस मामले में आबकारी अधिनियम, 1915 की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है। जब्त शराब और वाहन को कार्रवाई का हिस्सा बनाया गया है। विभाग की टीम मामले की जांच आगे बढ़ा रही है। फरार आरोपी की तलाश के साथ ही अवैध शराब के परिवहन से जुड़े मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

    बस्तर जिले में की गई इस कार्रवाई में खास तौर पर उस शराब की खेप को पकड़ा गया, जो मध्य प्रदेश में बिक्री के लिए निर्धारित थी। जगदलपुर-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सोनारपाल के पास हुई जांच के दौरान 20 पेटियां और 180 लीटर विदेशी शराब बरामद हुई। विभाग ने शराब के साथ वाहन भी जब्त किया है। इस कार्रवाई में एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई है, जबकि दूसरे आरोपी के फरार होने के कारण उसकी तलाश जारी है।

  • राजस्थान पंचायत चुनाव के लिए भाजपा ने जारी किया संकल्प पत्र, गांवों में शिक्षा, चिकित्सा और खेल सुविधाएं बढ़ाने का वादा

    राजस्थान पंचायत चुनाव के लिए भाजपा ने जारी किया संकल्प पत्र, गांवों में शिक्षा, चिकित्सा और खेल सुविधाएं बढ़ाने का वादा


    नई दिल्ली । 
    राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपना संकल्प पत्र जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश भाजपा कार्यालय के नए सभागार में इस दस्तावेज को जारी करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने का वादा किया। संकल्प पत्र में शिक्षा, चिकित्सा और खेल सुविधाओं को प्रमुखता दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य गांवों में ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि ग्रामीणों को अपनी सामान्य जरूरतों के लिए शहरों की ओर न जाना पड़े।

    संकल्प पत्र जारी करने के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ग्रामीण क्षेत्रों में शहरों जैसी सुविधाएं विकसित करने के पक्ष में है। उनका कहना था कि गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी। इससे लोगों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए शहरों तक पहुंचने की मजबूरी कम हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं का विस्तार करने को पार्टी ने अपने विकास संबंधी वादों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।

    भजनलाल शर्मा ने गांवों से शहरों की ओर बढ़ते पलायन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में शहरों का विस्तार हुआ है और कई जगह उनका दायरा 40 से 50 किलोमीटर तक बढ़ गया है। ऐसे में शहरों के भीतर भी एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यदि गांवों में ही बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी, तो ग्रामीणों को 100 से 150 किलोमीटर की दूरी तय करके शहरों तक आने की जरूरत कम होगी। इससे वे अपने गांव में रहते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सेवाओं का लाभ ले सकेंगे।

    संकल्प पत्र में शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने इन दोनों क्षेत्रों को ग्रामीण जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताया। स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और बड़े अस्पतालों की उपलब्धता से जुड़े दूरी के मानकों पर काम करने की बात कही गई है। हालांकि, स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों की संख्या, उनके बीच निर्धारित दूरी तथा स्थापना की समयसीमा का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं किया गया है।

    ग्रामीण युवाओं के लिए खेल सुविधाओं का विस्तार भी भाजपा के प्रमुख वादों में शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक पंचायत स्तर पर खेल मैदान विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य गांवों में युवाओं को खेल गतिविधियों के लिए स्थान और सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इस घोषणा के जरिए पार्टी ने पंचायत स्तर पर खेल के अवसर बढ़ाने की बात रखी है।

    संकल्प पत्र जारी होने से पहले कार्यक्रम के मंच पर एक अप्रत्याशित घटना भी हुई। संगठन महामंत्री अजेय कुमार का स्वागत करने के लिए पहुंचे सोशल मीडिया संयोजक हीरेन कौशिक अचानक फिसलकर नीचे गिर गए। इस घटना से मंच पर मौजूद लोग कुछ समय के लिए चौंक गए। इसके बाद प्रदेश प्रभारी संजय भाटिया और अन्य कार्यकर्ताओं ने उन्हें संभाला। घटना के बाद हीरेन कौशिक ने संगठन महामंत्री का स्वागत किया।

    कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, संगठन महामंत्री अजेय कुमार, प्रदेश प्रभारी संजय भाटिया, सह प्रभारी कुलदीप चहल और कविता पाटीदार सहित पार्टी के कई पदाधिकारी मौजूद रहे। पंचायत चुनाव से पहले जारी संकल्प पत्र में ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल सुविधाओं को केंद्र में रखा गया है। इन वादों के साथ गांवों में बुनियादी सेवाओं को बेहतर बनाने और शहरों पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य सामने रखा गया है। इन घोषणाओं को लागू करने की विस्तृत रूपरेखा और समयसीमा की जानकारी उपलब्ध सामग्री में नहीं दी गई है।

  • गुरुग्राम में हिरासत से रिहाई के बाद ध्रुव राठी का आरोप, मां को धक्का देकर बेडरूम से उठाया और 23 घंटे रखा

    गुरुग्राम में हिरासत से रिहाई के बाद ध्रुव राठी का आरोप, मां को धक्का देकर बेडरूम से उठाया और 23 घंटे रखा


    नई दिल्ली । यूट्यूबर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर ध्रुव राठी ने गुरुग्राम स्थित अपने आवास से हिरासत में लिए जाने और रिहाई के बाद पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने एक वीडियो जारी कर दावा किया कि शनिवार सुबह सिविल कपड़ों में पहुंचे करीब 20 लोग उनके घर में दाखिल हुए और उन्हें सोते समय बेडरूम से उठाकर अपने साथ ले गए। राठी के अनुसार, इस दौरान उनकी मां को भी रास्ते से हटाने के लिए धक्का दिया गया। उन्होंने पूरी कार्रवाई को कानूनी गिरफ्तारी के बजाय अपहरण करार दिया है।

    राठी ने वीडियो में बताया कि उन्हें करीब 22 से 23 घंटे तक हिरासत में रखा गया। उनका आरोप है कि इस दौरान उन्हें अपने कानूनी सलाहकार से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें जबरन ले जाने के दौरान उनके शरीर और हाथों पर अंदरूनी चोटें आईं। रिहाई के बाद सामने आए वीडियो में उन्होंने अपनी आपबीती साझा करते हुए संबंधित कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाए। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में स्वतंत्र पुष्टि या पुलिस का पक्ष उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।

    वीडियो में ध्रुव राठी ने अपनी नागरिकता को लेकर उठाए जाने वाले सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने भारतीय पासपोर्ट कैमरे के सामने दिखाते हुए कहा कि वह भारतीय नागरिक थे, हैं और आगे भी रहेंगे। उन्होंने अपनी राष्ट्रीय पहचान पर सवाल उठाने वालों को संबोधित करते हुए कहा कि उनका जुड़ाव भारत से है और उन्हें सच बोलने से रोका नहीं जा सकता। विदेश में निवास को लेकर उनकी नागरिकता पर होने वाली चर्चाओं के संदर्भ में उन्होंने अपने पासपोर्ट को अपनी पहचान का प्रमाण बताया।

    राठी ने देश के मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक हालात पर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति बन रही है और सरकार के खिलाफ बोलने वाले लोगों तथा स्वतंत्र आवाजों को डराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों की तुलना उत्तर कोरिया जैसे देशों से करते हुए दावा किया कि असहमति की आवाजों को दबाने की कोशिश हो रही है। ये टिप्पणियां उनके वीडियो में व्यक्त विचार और आरोप हैं।

    उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ध्रुव राठी को गुरुग्राम के केंद्रीय विहार स्थित आवास से ले जाकर सेक्टर-39 के क्राइम ब्रांच थाने में रखा गया था। इससे एक दिन पहले, शुक्रवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया था, जिसमें नागरिकों से ‘सीजेपी प्रोटेस्ट’ में शामिल होने का आह्वान किया गया था। हालांकि, इस आह्वान और हिरासत की कार्रवाई के बीच संबंध को लेकर पुलिस का आधिकारिक बयान उपलब्ध विवरण में नहीं दिया गया है।

    अपने वीडियो के अंतिम हिस्से में राठी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग, न्यायपालिका और निष्पक्ष मीडिया जैसे प्रमुख संस्थानों पर सत्ता का प्रभाव बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने अपनी हिरासत की कार्रवाई को लेकर भी असहमति जताई और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े सवालों के संदर्भ में रखा। मामले में पुलिस का पक्ष और हिरासत से संबंधित आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद ही घटनाक्रम की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन से 2000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित, बाजारों से होटल और पर्यटन उद्योग तक पड़ा असर

    दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन से 2000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित, बाजारों से होटल और पर्यटन उद्योग तक पड़ा असर


    नई दिल्ली ।
    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन और सुरक्षा पाबंदियों का व्यापक असर व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ा। व्यापारिक संगठन चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) के अनुसार, एक दिन के दौरान दिल्ली में करीब 2000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ। प्रदर्शन के दौरान प्रमुख बाजारों, मेट्रो स्टेशनों और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था सख्त किए जाने से आम लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। इसका असर त्योहारी सीजन की शुरुआत में व्यापारियों के कारोबार पर पड़ा।

    सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, प्रदर्शन के कारण हुए आर्थिक नुकसान का असर केवल खुदरा कारोबार तक सीमित नहीं रहा। सेवा क्षेत्र, होटल और आतिथ्य उद्योग, परिवहन तथा पर्यटन सहित कई क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। संगठन ने 10 अक्टूबर को हुए नुकसान का अनुमान करीब 2000 करोड़ रुपये लगाया है। इस दौरान पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों की आवाजाही कम रही। होटल, रेस्तरां, सिनेमा हॉल, ब्यूटी पार्लर और सैलून में भी पहले से की गई बुकिंग बड़े स्तर पर रद्द होने की जानकारी सामने आई।

    दिल्ली के कई प्रमुख बाजारों में कारोबार सामान्य रूप से नहीं चल सका। सुरक्षा प्रतिबंधों और यातायात जाम की आशंका के कारण सदर बाजार, चांदनी चौक, चावड़ी बाजार, कनॉट प्लेस, करोल बाग और लाजपत राय मार्केट जैसे व्यावसायिक केंद्रों में गतिविधियां प्रभावित रहीं। इन बाजारों में दिल्ली के साथ-साथ आसपास के शहरों से भी बड़ी संख्या में ग्राहक खरीदारी के लिए आते हैं। प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था के चलते इस बार उनकी आवाजाही पर असर पड़ा।

    सीटीआई के अनुसार, दिल्ली के बाहर से प्रतिदिन आने वाले करीब तीन से चार लाख खरीदार 10 अक्टूबर को राजधानी नहीं पहुंच सके। वहीं, सुरक्षा संबंधी आशंकाओं के कारण स्थानीय लोग भी घरों से निकलने से बचते रहे। मेट्रो स्टेशनों के बंद रहने से लोगों की आवाजाही और बाजारों तक पहुंचने में भी परेशानी हुई। ग्राहकों की संख्या घटने से खुदरा व्यापार के अलावा परिवहन और अन्य सेवाओं से जुड़े कारोबार पर भी दबाव पड़ा।

    व्यापारियों को होने वाले नुकसान को देखते हुए सीटीआई ने सीजेपी सहित सभी राजनीतिक दलों से दिवाली तक दिल्ली में धरना-प्रदर्शन नहीं करने की अपील की है। संगठन ने इस संबंध में राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर मांग की है कि त्योहारों के दौरान राजधानी में विरोध कार्यक्रम आयोजित करने से बचा जाए। सीटीआई का कहना है कि नवरात्र और रामलीलाओं का आयोजन शुरू हो चुका है। यह अवधि दिल्ली के करीब 20 लाख व्यापारियों के लिए साल के सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी समय में शामिल है।

    संगठन ने दिल्ली में आयोजित होने वाली करीब 650 रामलीलाओं का भी उल्लेख किया। इन आयोजनों से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है और त्योहारों के दौरान विभिन्न कारोबारों को ग्राहकों की बढ़ी हुई आवाजाही से लाभ होता है। सीटीआई के अनुसार, यदि सड़कों और मेट्रो सेवाओं पर प्रतिबंधों का असर जारी रहता है, तो त्योहारों से जुड़े व्यापार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी वजह से संगठन ने राजनीतिक दलों को सुझाव दिया है कि यदि उन्हें प्रदर्शन करना है, तो दिवाली तक दिल्ली के बजाय किसी दूसरे शहर को आयोजन स्थल के रूप में चुना जाए। संगठन की अपील का उद्देश्य त्योहारों के दौरान व्यापारिक गतिविधियों और राजधानी की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना है।