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  • CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का आंदोलन तेज, सोमवार को मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात और दिल्ली में विरोध मार्च का ऐलान

    CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का आंदोलन तेज, सोमवार को मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात और दिल्ली में विरोध मार्च का ऐलान

    नई दिल्ली ।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी राजनीतिक विवाद के बीच INDIA गठबंधन ने अपने विरोध को आगे बढ़ाने की घोषणा की है। विपक्षी दलों ने सोमवार को देश के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करने और दिल्ली में विरोध मार्च निकालने की योजना बनाई है। इस दौरान चुनाव आयोग के फैसलों, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए जाने की बात कही गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक विरोध के साथ न्यायपालिका तक पहुंचाने की तैयारी में है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपने के बाद विपक्ष ने मुख्य न्यायाधीश से मिलने का फैसला किया है। इसके लिए विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मुलाकात करेगा। इस बैठक में चुनाव आयोग के हालिया फैसलों, प्रशासनिक पाबंदियों और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों से संबंधित चिंताओं को सामने रखने की योजना है। गठबंधन का उद्देश्य इन मुद्दों को न्यायपालिका के समक्ष प्रस्तुत करना है। हालांकि, प्रस्तावित मुलाकात के दौरान किन बिंदुओं पर चर्चा होगी, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

    विपक्षी गठबंधन ने सोमवार को दिल्ली में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन और मार्च निकालने का भी ऐलान किया है। यह आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जारी विरोध और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच आयोजित किया जाएगा। विपक्षी दल चुनावी पारदर्शिता, निष्पक्षता और संविधान की रक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस प्रदर्शन में विभिन्न विपक्षी नेता और युवा भी शामिल हो सकते हैं। राजधानी में प्रस्तावित मार्च को लेकर सुरक्षा व्यवस्था के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

    इससे पहले INDIA गठबंधन के सांसदों और नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग के साथ संसद भवन से निर्वाचन आयोग के मुख्यालय तक मार्च निकाला था। इस विरोध प्रदर्शन में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा समेत कई नेता शामिल हुए थे। मार्च के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी और कुछ नेताओं को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर धरना दिया। विपक्ष ने इस दौरान चुनावी व्यवस्था से संबंधित अपनी मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराया था।

    इसके बाद विपक्षी प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। अब मुख्य न्यायाधीश से प्रस्तावित मुलाकात को इसी राजनीतिक अभियान के अगले कदम के तौर पर देखा जा रहा है। गठबंधन चुनाव आयोग के फैसलों और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखना चाहता है। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी इस विरोध का प्रमुख हिस्सा बनी हुई है।

    कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उनका कहना है कि यह संघर्ष केवल किसी एक पद या व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा से जुड़ा है। उन्होंने कहा है कि प्रशासनिक दबाव या पुलिस कार्रवाई से विपक्ष की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। राहुल गांधी ने चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता बहाल होने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही है। सोमवार को प्रस्तावित मुलाकात और मार्च के जरिए INDIA गठबंधन इस मुद्दे पर अपना विरोध आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

  • दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा कड़ी, पुलिस ने दर्ज कीं 20 एफआईआर, जंतर-मंतर पर विरोध के बीच कई नेता हिरासत में

    दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा कड़ी, पुलिस ने दर्ज कीं 20 एफआईआर, जंतर-मंतर पर विरोध के बीच कई नेता हिरासत में

    नई दिल्ली । दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का विरोध प्रदर्शन रविवार, 11 अक्टूबर को भी जारी रहने वाला है। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शन करने की योजना बनाई। प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। पुलिस ने इस मामले में 20 एफआईआर दर्ज की हैं। वहीं, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू की गई है। प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम के बीच दिल्ली के कई इलाकों में पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है।

    शनिवार को प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के बाद रविवार को भी विरोध प्रदर्शन को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। नई दिल्ली और मध्य दिल्ली में यातायात प्रभावित होने की आशंका के मद्देनजर लोगों को रास्तों पर पाबंदियों के बारे में चेतावनी दी गई है। सुरक्षा प्रबंधों के तहत बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जानकारी भी सामने आई है। प्रदर्शन के दौरान कनॉट प्लेस के इनर सर्कल में एकत्र हुए कुछ प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कार्रवाई को लेकर तनाव की स्थिति बनी।

    प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम में सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके की रिहाई की भी जानकारी सामने आई। रिहा होने के बाद वह अपने घर लौट गए। वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद जॉन ब्रिटास की दिल्ली पुलिस के जवानों से बहस हो गई। पुलिस जब उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश कर रही थी, तब दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। प्रदर्शन को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।

    आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राय ने प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने इसे भारत के राजनीतिक इतिहास का काला दिन बताते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने देश पर ‘काली इमरजेंसी’ थोप दी है। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने ट्रेनों के रद्द होने और दिल्ली मेट्रो के बड़े पैमाने पर बंद रहने का भी उल्लेख किया। गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती लोकतांत्रिक इतिहास के लिए बड़ा झटका है। ये आरोप उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।

    मेट्रो सेवाओं और इंटरनेट को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि मेट्रो सामान्य रूप से चले और इंटरनेट सेवाओं में कोई बाधा न आए। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि 10 अक्टूबर को मेट्रो नेटवर्क के कुल 303 स्टेशनों में से 45 पर ही प्रवेश और निकास पर रोक लगाई गई थी। मेट्रो संचालन को लेकर यह जानकारी अदालत के समक्ष रखी गई।

    इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त एक स्वतंत्र संस्था का हिस्सा हैं और उन्हें अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेने चाहिए। खड़गे के अनुसार, उन्हें फैसले लेने की पूरी आजादी नहीं मिल रही है। उन्होंने ‘वोट चोरी’ और लोकतंत्र के साथ धोखे के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की बात भी कही। प्रदर्शन और उससे जुड़ी राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच दिल्ली में सुरक्षा, यातायात और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

  • विराट-अनुष्का 2023 से 2026 तक आठ बार पहुंचे प्रेमानंद महाराज के आश्रम, 5 करोड़ रुपये के दावे को क्रिकेटर के प्रवक्ता ने बताया निराधार

    विराट-अनुष्का 2023 से 2026 तक आठ बार पहुंचे प्रेमानंद महाराज के आश्रम, 5 करोड़ रुपये के दावे को क्रिकेटर के प्रवक्ता ने बताया निराधार

    नई दिल्ली: क्रिकेटर विराट कोहली और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा का संत प्रेमानंद महाराज से मिलने के लिए वृंदावन जाना एक बार फिर चर्चा में है। इसकी वजह विराट को आश्रम ले जाने के लिए पांच करोड़ रुपये खर्च किए जाने का दावा है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा, जिन्हें फलाहारी महाराज के नाम से भी जाना जाता है, ने यह दावा किया था। इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखे जाने की जानकारी भी सामने आई। हालांकि, विराट कोहली के प्रवक्ता ने इस दावे को गलत, निराधार और तथ्यहीन बताते हुए खारिज कर दिया। उनके मुताबिक, विराट प्रेमानंद महाराज के दर्शन गहरी आस्था और श्रद्धा के कारण करते हैं, न कि किसी आर्थिक समझौते के तहत। इस दावे को साबित करने वाला कोई सार्वजनिक भुगतान रिकॉर्ड या स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रमाण भी सामने नहीं आया है। विवाद के बीच विराट और अनुष्का की आध्यात्मिक यात्राओं का सिलसिला फिर चर्चा में आ गया है।

    विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की प्रेमानंद महाराज से पहली सार्वजनिक रूप से सामने आई मुलाकात 4 जनवरी 2023 को हुई थी। दोनों अपनी बेटी वामिका के साथ वृंदावन पहुंचे थे। इस यात्रा के दौरान उन्होंने पहले बाबा नीम करोली के आश्रम में दर्शन किए और फिर प्रेमानंद महाराज के आश्रम जाकर सत्संग सुना और आशीर्वाद लिया। उस समय उनकी यात्रा निजी रखी गई थी, लेकिन बाद में तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद यह जानकारी सार्वजनिक हुई। करीब दो साल बाद 10 जनवरी 2025 को दोनों अपने बच्चों वामिका और अकाय के साथ दोबारा आश्रम पहुंचे। उस समय विराट ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अपने प्रदर्शन को लेकर चर्चा में थे। मुलाकात के दौरान प्रेमानंद महाराज ने उनसे पूछा कि क्या उनका मन प्रसन्न है। विराट ने मुस्कुराकर हां में जवाब दिया। अनुष्का ने भी महाराज से बातचीत में कहा कि उन्हें प्रेम भक्ति चाहिए। उन्होंने बताया कि पिछली मुलाकात में वह कुछ सवाल पूछना चाहती थीं, लेकिन दूसरे लोगों ने वही सवाल पहले पूछ लिए थे।

    13 मई 2025 को विराट और अनुष्का फिर प्रेमानंद महाराज के पास पहुंचे। इस बार दोनों ने उनके साथ एकांत में बातचीत की। यह मुलाकात विराट के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा के ठीक बाद हुई थी। इसके बाद 16 दिसंबर 2025 को दोनों दोबारा आश्रम पहुंचे और जमीन पर बैठकर सत्संग सुना। इस दौरान अनुष्का भावुक नजर आईं। उन्होंने महाराज से कहा था कि वे उनके हैं। जवाब में महाराज ने समझाया कि सभी श्रीजी के हैं। फरवरी 2026 में दोनों फिर वृंदावन पहुंचे और आम श्रद्धालुओं के बीच बैठकर सत्संग में शामिल हुए। अप्रैल 2026 में भी उन्होंने आश्रम पहुंचकर महाराज का आशीर्वाद लिया। इन मुलाकातों में दोनों का सादगी से सत्संग में शामिल होना भी चर्चा में रहा।

    विराट कोहली की टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के आईपीएल 2026 का खिताब जीतने के बाद 2 जून 2026 को विराट और अनुष्का फिर प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचे। दोनों ने वहां सत्संग सुना और आध्यात्मिक बातचीत में हिस्सा लिया। इसके बाद 22 जुलाई 2026 को दोनों श्रीहित राधा केली कुंज आश्रम पहुंचे। बारिश के कारण रास्तों पर कीचड़ था, फिर भी दोनों नंगे पैर आश्रम से बाहर निकलते दिखाई दिए। उनके हाथों में प्रसाद था और चेहरे पर मास्क लगा हुआ था। वहां मौजूद लोगों का उन्होंने ‘राधे-राधे’ कहकर अभिवादन किया। जनवरी 2023 से जुलाई 2026 तक दोनों की आठ सार्वजनिक रूप से सामने आई मुलाकातों की जानकारी सामने आ चुकी है। इन यात्राओं में कभी वे बच्चों के साथ पहुंचे, तो कभी सत्संग और एकांत बातचीत में शामिल हुए।

    पांच करोड़ रुपये के दावे के सामने आने के बाद विराट के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि प्रेमानंद महाराज से मिलने के लिए किसी तरह की आर्थिक डील नहीं हुई थी। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि विराट से जुड़े ऐसे दावों को आगे बढ़ाने से पहले उनकी तथ्यात्मक जांच की जाए। फिलहाल इस कथित भुगतान के समर्थन में कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रमाण सामने नहीं आया है। वहीं, विराट और अनुष्का की वृंदावन यात्राओं का सिलसिला पिछले साढ़े तीन वर्षों से सार्वजनिक रूप से चर्चा में रहा है। इस पूरे मामले में एक ओर पांच करोड़ रुपये खर्च किए जाने का दावा है, जबकि दूसरी ओर विराट की टीम ने इसे स्पष्ट रूप से नकारा है। ऐसे में इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इसे स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।

  • CJP के प्रदर्शन से पहले सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, छात्रों और युवाओं की भीड़ जुटाने की आशंका के बीच सरकार ने ऐसे बनाया सुरक्षा चक्र

    CJP के प्रदर्शन से पहले सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, छात्रों और युवाओं की भीड़ जुटाने की आशंका के बीच सरकार ने ऐसे बनाया सुरक्षा चक्र


    नई दिल्ली। नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP और विपक्षी INDIA गठबंधन के दिल्ली मार्च को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क रहीं। शनिवार को प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने राजधानी के संवेदनशील इलाकों में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए। जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली के आसपास बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों की आवाजाही पर नजर रखी गई। सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को एक बड़ी भीड़ में एकजुट होने से रोकना और किसी भी संभावित हिंसक स्थिति से निपटना था। हालांकि हिंसा भड़काने की कथित साजिश को लेकर सामने आए दावे सुरक्षा एजेंसियों के आकलन पर आधारित हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
    रिपोर्ट के अनुसार खुफिया एजेंसियों को आशंका थी कि प्रदर्शन के आयोजक छात्रों और युवाओं को आगे रखकर सेंट्रल दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में छोटे-छोटे समूहों में विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। इससे कई स्थानों पर एक साथ भीड़ जुटने और कानून व्यवस्था की चुनौती पैदा होने की आशंका जताई गई थी। इसी इनपुट के आधार पर पुलिस ने जंतर-मंतर तक पहुंचने वाले रास्तों और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी। 37 से अधिक स्थानों पर बैरिकेडिंग और अर्धसैनिक बलों की तैनाती किए जाने की जानकारी सामने आई। अधिकारियों की रणनीति यह थी कि अलग-अलग स्थानों पर मौजूद समूह एकजुट होकर बड़ी भीड़ नहीं बना सकें और स्थिति पर समय रहते नियंत्रण रखा जा सके।
    सुरक्षा एजेंसियों के लिए 20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर हुई झड़पों का अनुभव भी महत्वपूर्ण बताया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उस दौरान प्रदर्शन की अनुमति सीमित अवधि के लिए होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने लंबे समय तक वहां डेरा जमाए रखा था। इसके बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने प्रदर्शन से जुड़े आयोजनों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिक सतर्कता बरती। रिपोर्ट के मुताबिक आयोजकों के बीच संवाद के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और बर्नर फोन के इस्तेमाल की आशंका भी जताई गई थी। हालांकि इन माध्यमों के इस्तेमाल से संबंधित सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
    इस बार दिल्ली पुलिस ने रियल टाइम सूचना और निगरानी व्यवस्था पर भी जोर दिया। रिपोर्ट में बताया गया है कि डिजिटल निगरानी और मैसेजिंग नेटवर्क से जुड़ी सूचनाओं के आधार पर पुलिस कमांड सेंटर को प्रदर्शनकारियों की संभावित आवाजाही और भीड़ के आकार पर नजर रखने में मदद मिली। इसके साथ ही अलग-अलग स्थानों पर पुलिस बल तैनात किए गए ताकि किसी क्षेत्र में अचानक भीड़ बढ़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। प्रदर्शन के प्रमुख आयोजकों और विपक्षी नेताओं को अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिए जाने की भी जानकारी सामने आई। पुलिस की इस कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों के एकजुट होने की संभावना प्रभावित हुई।
    इस पूरे घटनाक्रम के बीच केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विरोध प्रदर्शन और कानून व्यवस्था को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध का अधिकार सभी को है लेकिन अराजकता के लिए कोई जगह नहीं है। संवैधानिक संस्थाओं की साख को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जा सकता। CJP के प्रदर्शन को लेकर उठे सवालों के बीच राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार पर बहस तेज हो गई है। इस मामले में आगे की स्थिति पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन से जुड़े तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि पर निर्भर करेगी।
  • अयोध्या में योगी बनाम अखिलेश का मुकाबला हुआ तो कौन पड़ेगा भारी? पिछले चुनावों के आंकड़े क्या कहते हैं

    अयोध्या में योगी बनाम अखिलेश का मुकाबला हुआ तो कौन पड़ेगा भारी? पिछले चुनावों के आंकड़े क्या कहते हैं

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने के साथ ही नेताओं के बीच जुबानी जंग भी बढ़ने लगी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती ने सियासी चर्चा को और तेज कर दिया है। हालांकि, दोनों नेताओं के अयोध्या से चुनाव लड़ने को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है, लेकिन इस बयानबाजी के बाद संभावित मुकाबले को लेकर कयास लगाए जाने लगे हैं।

    दरअसल, अयोध्या में एक कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनौती देते हुए कहा कि वह पवन पांडेय के खिलाफ चुनाव लड़कर दिखाएं। इसके जवाब में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि चेलों से मुकाबला करने के बजाय दोनों अयोध्या से नामांकन कर चुनाव लड़ें। इस बयान के बाद सवाल उठ रहा है कि यदि दोनों नेता वास्तव में अयोध्या विधानसभा सीट से आमने-सामने आते हैं, तो किसका पलड़ा भारी रह सकता है?

    फिलहाल यह मुकाबला काल्पनिक है। इसके संभावित नतीजे का अनुमान पिछले चुनावों, सामाजिक समीकरणों, स्थानीय मुद्दों और दोनों दलों के संगठनात्मक प्रभाव के आधार पर ही लगाया जा सकता है। यहां दिए गए जातीय आंकड़े विभिन्न मीडिया रिपोर्टों पर आधारित अनुमान हैं, आधिकारिक मतदाता आंकड़े नहीं। इसलिए इन्हें चुनाव परिणाम की निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए।

    अयोध्या में जातीय समीकरण की क्या है तस्वीर?

    अयोध्या विधानसभा क्षेत्र के जातीय समीकरण को लेकर अलग-अलग चुनावी रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। वर्ष 2022 की एक रिपोर्ट में ब्राह्मण मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 22 प्रतिशत, यादव मतदाताओं की 12 प्रतिशत और दलित मतदाताओं की 15 प्रतिशत बताई गई थी। वहीं, दूसरी रिपोर्ट में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या करीब 40 हजार और दलित मतदाताओं की संख्या लगभग 65 हजार बताई गई थी।

    एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में अयोध्या विधानसभा क्षेत्र में करीब 45 हजार ब्राह्मण, 43 हजार अनुसूचित जाति और 36 हजार यादव मतदाता थे। इन आंकड़ों में अंतर होने के कारण जातीय समीकरण का आकलन करते समय सावधानी जरूरी है।

    अगड़ी जातियों का रुख किसके पक्ष में जा सकता है?

    अयोध्या विधानसभा सीट पर ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य, बनिया, अग्रवाल और कायस्थ जैसे समुदायों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। ब्राह्मण मतदाता भाजपा और सपा, दोनों के लिए अहम हो सकते हैं। उनका रुख संभावित मुकाबले की दिशा प्रभावित कर सकता है।

    ठाकुर मतदाताओं को भाजपा के परंपरागत समर्थक वर्गों में गिना जाता है, जबकि वैश्य, बनिया और अग्रवाल समुदाय का प्रभाव शहरी और कारोबारी मतदाताओं के बीच महत्वपूर्ण माना जाता है। इन वर्गों का झुकाव किस पार्टी की ओर रहता है, यह उम्मीदवारों की छवि, स्थानीय मुद्दों और चुनाव प्रचार पर भी निर्भर करेगा।

    पिछड़ी जातियों के वोट पर भी रहेगी नजर

    अयोध्या विधानसभा क्षेत्र में यादव, कुर्मी, मौर्य, कुशवाहा, निषाद, केवट, राजभर, लोध और अन्य पिछड़ी जातियों के मतदाता भी चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    यादव समुदाय को समाजवादी पार्टी का पारंपरिक समर्थक वर्ग माना जाता है। अखिलेश यादव के लिए चुनौती यह होगी कि वह यादव मतदाताओं के साथ-साथ दूसरे पिछड़े वर्गों और दलित मतदाताओं का कितना समर्थन हासिल कर पाते हैं।

    दूसरी ओर, कुर्मी, मौर्य, निषाद और राजभर जैसे समुदायों के बीच भाजपा की पकड़ संभावित मुकाबले में उसके लिए फायदेमंद हो सकती है। हालांकि, किसी समुदाय के सभी मतदाताओं के एक ही पार्टी को वोट देने की धारणा सही नहीं मानी जा सकती। स्थानीय उम्मीदवार, क्षेत्रीय समस्याएं और व्यक्तिगत पसंद भी मतदान को प्रभावित करते हैं।

    योगी के लिए राम मंदिर और विकास होंगे अहम मुद्दे

    यदि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या से चुनाव लड़ते हैं, तो राम मंदिर, धार्मिक पर्यटन, शहर का विकास, बुनियादी सुविधाएं और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे चुनाव प्रचार के केंद्र में रह सकते हैं। भाजपा के संगठन और स्थानीय कार्यकर्ताओं की सक्रियता भी उनके लिए महत्वपूर्ण होगी।

    इसके साथ ही यह देखना होगा कि अगड़ी जातियों के अलावा पिछड़े वर्गों और दलित मतदाताओं के बीच भाजपा कितना समर्थन बनाए रख पाती है। केवल राम मंदिर या विकास के मुद्दे के आधार पर नतीजे का अनुमान लगाना पर्याप्त नहीं होगा।

    अखिलेश के लिए पीडीए की कितनी होगी भूमिका?

    अखिलेश यादव की राजनीति में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी पीडीए सामाजिक गठजोड़ को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रदर्शन ने इस रणनीति को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया था।

    अयोध्या विधानसभा सीट पर अखिलेश यादव के लिए अहम सवाल यह होगा कि यादव मतदाताओं के साथ दूसरे पिछड़े वर्गों और दलित समुदायों का कितना समर्थन मिल पाता है। इसके अलावा ब्राह्मणों और अन्य गैर-यादव मतदाताओं का रुख भी संभावित मुकाबले पर असर डाल सकता है।

    पिछले तीन विधानसभा चुनावों में क्या रहा परिणाम?

    अयोध्या विधानसभा सीट पर पिछले तीन चुनावों के नतीजे बताते हैं कि यहां भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबले का रुख समय के साथ बदला है।

    विधानसभा चुनाव विजेता पार्टी जीत का अंतर
    2012 तेज नारायण पांडेय (पवन पांडेय) सपा 5,405
    2017 वेद प्रकाश गुप्ता भाजपा 50,440
    2022 वेद प्रकाश गुप्ता भाजपा 19,990

    इन नतीजों से स्पष्ट है कि समाजवादी पार्टी वर्ष 2012 में अयोध्या सीट जीत चुकी है, जबकि भाजपा ने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की। वर्ष 2022 में भाजपा की जीत का अंतर 2017 के मुकाबले कम रहा था।

    वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद संसदीय सीट से समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद ने जीत दर्ज की थी। हालांकि, अयोध्या विधानसभा क्षेत्र के चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, इस हिस्से में भाजपा के लल्लू सिंह को सपा के अवधेश प्रसाद के मुकाबले करीब 4,667 मतों की बढ़त मिली थी। इससे पता चलता है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदाताओं का रुख अलग-अलग हो सकता है।

    आखिर किसका पलड़ा रहेगा भारी?

    योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच अयोध्या से संभावित मुकाबले में किसी एक को अभी से विजेता घोषित करना जल्दबाजी होगी। योगी के पक्ष में भाजपा का संगठन, हिंदुत्व की राजनीति और अयोध्या के विकास से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं। वहीं, अखिलेश यादव के लिए पीडीए का सामाजिक समीकरण, पिछड़े वर्गों और दलित मतदाताओं का समर्थन तथा स्थानीय स्तर पर पार्टी की सक्रियता निर्णायक साबित हो सकती है।

    पिछले चुनावों के आंकड़े भाजपा की लगातार दो विधानसभा जीत और सपा की पुरानी जीत, दोनों को सामने रखते हैं। ऐसे में अंतिम नतीजा उम्मीदवारों की लोकप्रियता, चुनावी रणनीति, स्थानीय मुद्दों और विभिन्न समुदायों के मतदान व्यवहार पर निर्भर करेगा। जब तक दोनों नेताओं के अयोध्या से चुनाव लड़ने की औपचारिक घोषणा नहीं होती, तब तक यह चर्चा केवल संभावनाओं और उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित अनुमान ही रहेगी। वास्तविक तस्वीर चुनाव के नतीजे आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • सड़कें सूनी.. बाजार बंद…. CJP के प्रदर्शन से दिल्ली में लॉकडाउन जैसा हाल… एक दिन में 2000 करोड़ का नुकसान

    सड़कें सूनी.. बाजार बंद…. CJP के प्रदर्शन से दिल्ली में लॉकडाउन जैसा हाल… एक दिन में 2000 करोड़ का नुकसान


    नई दिल्ली।
    राजधानी नई दिल्ली (New Delhi) में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) (Cockroach Janata Party -CJP) के विरोध-प्रदर्शन के चलते सदर बाजार, चांदनी चौक, कनॉट प्लेस समेत एक दर्जन से ज्यादा बाजार बंद (Shops Closed ) रहे। इसकी वजह से शनिवार को तकरीबन दो हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ। दिल्ली में वीकेंड पर ही बाजारों में सबसे ज्यादा खरीदारी होती है, लेकिन एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बाजार बंद होने के कारण कारोबार ठप रहा। हालांकि, जिन इलाकों में बाजार खुले थे, वहां भी ग्राहकों की संख्या बेहद कम रही।


    लॉकडाउन जैसा दिखा मंजर

    राजधानी के थोक बाजार अब साप्ताहिक अवकाश के चलते रविवार को भी बंद रहेंगे। सोमवार से कामकाज सुचारू हो सकेगा। व्यापारियों का कहना है कि दिल्ली में त्योहारी सीजन में जहां बाजारों में रौनक बढ़ जाती थी, वहीं इस बार हालात विपरीत हैं। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि नवरात्रि और रामलीला मंचन के इस सीजन में दिल्ली में शनिवार को लॉकडाउन जैसे हालात बन गए। बाजार सूने पड़े थे। इसकी वजह से करीब 2000 करोड़ से ज्यादा के नुकसान का अनुमान है।

    पेट्रोल पंपों पर भी भीड़ कम रही। होटल, रेस्टोरेंट, ब्यूटी पार्लर, सैलून में बड़ी संख्या में बुकिंग कैंसिल हुई हैं। वहीं, फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश यादव ने कहा कि शनिवार को ज्यादा बिक्री की उम्मीद थी, लेकिन सुरक्षा के चलते बाजार बंदी का निर्णय लेना पड़ा। सदर बाजार के 40 हजार दुकानदारों को करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ा।


    यूपीआई से पेमेंट में दिक्कत हुई, गूगल मैप भी नहीं चला

    जंतर-मंतर और इसके आसपास नई दिल्ली के कई इलाकों में शनिवार को सीजेपी के प्रदर्शन के चलते इंटरनेट सेवा बंद रही। इससे न तो कैब, ऑटो चालक और गिग वर्कर्स गूगल मैप से रास्ता खोज पाए और न ही लोग यूपीआई से भुगतान कर सके। इसकी वजह से लोगों को दिनभर परेशानियों का सामना करना पड़ा।

    बाहरी शहरों से आए लोगों को वैकल्पिक रास्तों की जानकारी न होने की वजह से ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इंटरनेट सेवा बंद होने के कारण वे गूगल मैप से वैकल्पिक रास्तों की जानकारी नहीं कर पाए और सड़कों पर एक से दूसरी जगह भटकते रहे। वहीं, नई दिल्ली क्षेत्र में मेट्रो स्टेशन और डीटीसी की बस सेवा बंद होने के कारण लोगों ने गंतव्य तक जाने के लिए ऑटो, बाइक कैब और टैक्सी बुक की, लेकिन यूपीआई से भुगतान नहीं हो सका। जेब में नकदी न होने के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।

  • उत्तर भारत में ओलावृष्टि और बर्फबारी से बदला मौसम… पूरब और दक्षिण में बारिश का दौर जारी

    उत्तर भारत में ओलावृष्टि और बर्फबारी से बदला मौसम… पूरब और दक्षिण में बारिश का दौर जारी


    नई दिल्ली।
    उत्तर भारत (North India) के पहाड़ी व मैदानी इलाकों में ओलावृष्टि (Hailstorms) और बर्फबारी (Snowfall) से मौसम (Weather Change) में अचानक बदलाव आया है, वहीं पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में जोरदार बारिश (Rain) का सिलसिला जारी है। पिछले 24 घंटों के दौरान बिहार में भारी दर्ज की गई है और कई क्षेत्रों में 12 से 20 सेमीटर तक पानी बरसने से फसलों को नुकसान हुआ है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिमोत्तर उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में तेज हवाएं भी चली हैं।

    मौसम विभाग के मुताबि, मौसम में यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ और वायुमंडलीय हलचल के प्रभाव से आया है। हिमाचल प्रदेश के मनाली सहित ऊझी घाटी में शनिवार दोपहर बाद बारिश हुई। रोहतांग सहित कुंजम दर्रा, बारालाचा व शिंकुला सहित ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई है। यहां शुक्रवार रात को भी फाहे गिरे थे। बारिश और बर्फबारी से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और जनजातीय क्षेत्र कुकुमसेरी में न्यूनतम तापमान गिरकर 1.9 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। राज्य में 16 अक्तूबर तक मौसम खराब रहने का अनुमान है। इस दौरान ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और मैदानी व मध्य पर्वतीय इलाकों में बारिश हो सकती है। 13 और 14 अक्तूबर को कुछ स्थानों पर अंधड़ का यलो अलर्ट जारी किया गया है।

    आदि कैलाश में फिर हुई बर्फबारी
    उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश में शनिवार को भी ताजा हिमपात हुआ। बर्फबारी होने से कैलाश पर्वत के दर्शन नहीं हुए। इससे यात्रियों को निराश लौटना पड़ा। दोपहर बाद मौसम खुलने से 100 से अधिक यात्रियों ने आदि कैलाश के दर्शन किए। आदि कैलाश क्षेत्र में अब भी तीन से चार फीट बर्फ जमा है। लगातार हो रही बर्फबारी से आदि कैलाश में तापमान माइनस दो से माइनस तीन डिग्री पहुंच गया है। इससे कड़ाके की ठंड पड़ रही है।


    मलबा आने से तीन घंटे रुकी केदारनाथ यात्रा

    रुद्रप्रयाग में केदारनाथ पैदल मार्ग पर चीरबासा में मलबा और पत्थर आने से शनिवार सुबह छह बजे से नौ बजे तक यात्रियों की आवाजाही रोकनी पड़ी। सुरक्षा के मद्देनजर गौरीकुंड और सोनप्रयाग में यात्रियों को रोका गया। सुबह नौ बजे मार्ग खुलने के बाद आवाजाही सुचारु करा दी गई। बीते दिन हुई तेज बारिश के बाद रात में चीरबासा में मलबा आने से पैदल मार्ग अवरुद्ध हो गया था।


    अभी बदला रहेगा मौसम का मिजाज :

    उत्तर भारत के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में अगले कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज बदला रहेगा। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सहित मैदानी राज्यों में 16 अक्तबर तक रुक-रुक कर बारिश, आंधी और बिजली गिरने का अनुमान है। वहीं, 11 अक्तूबर तथा 14-15 अक्तूबर को यहां कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। वहीं, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और राजधानी दिल्ली में 16 अक्तूबर के बीच छिटपुट बारिश होगी।

  • ‘पेपर लीक अब रोग बन चुका है’, शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी बोले- परीक्षाओं की सुरक्षा के लिए सरकारें सतर्क

    ‘पेपर लीक अब रोग बन चुका है’, शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी बोले- परीक्षाओं की सुरक्षा के लिए सरकारें सतर्क


    पटना। देश में प्रतियोगी और अन्य परीक्षाओं के दौरान पेपर लीक की घटनाओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक अब एक रोग बन चुका है और इससे निपटने के लिए केंद्र तथा राज्य सरकारें लगातार सतर्कता बरत रही हैं। सरकारों का प्रयास है कि परीक्षाएं निष्पक्ष और सुरक्षित माहौल में आयोजित हों, ताकि विद्यार्थियों के हितों की रक्षा की जा सके।

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री पटना से दिल्ली रवाना होने के दौरान एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने पेपर लीक की समस्या के साथ बिहार की शिक्षा व्यवस्था में हो रहे बदलावों पर भी अपनी बात रखी।

    छात्रों के खर्च की भरपाई पर क्या बोले शिक्षा मंत्री?

    परीक्षा में पेपर लीक होने की स्थिति में विद्यार्थियों के खर्च का भुगतान शिक्षा विभाग की ओर से किए जाने संबंधी सवाल पर प्रह्लाद जोशी ने कहा कि संबंधित अध्यक्ष ने इस बारे में क्या बयान दिया है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में जनता पर अनावश्यक खर्च का बोझ नहीं पड़ना चाहिए।

    पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण विद्यार्थियों को दोबारा परीक्षा देने, यात्रा करने और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च करना पड़ सकता है। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना और गड़बड़ियों की आशंका कम करना महत्वपूर्ण है।

    बिहार की शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा

    प्रह्लाद जोशी ने बताया कि बिहार में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के साथ बैठक हुई है। इसमें प्राथमिक शिक्षा सहित शिक्षा विभाग के कामकाज की समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि बिहार में शिक्षा विभाग समेत विभिन्न क्षेत्रों में बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

    शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने परीक्षा संचालन में सतर्कता और पारदर्शिता की जरूरत पर भी जोर दिया।

    निष्पक्ष परीक्षा के लिए व्यवस्थाएं मजबूत करना जरूरी

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं गंभीर चुनौती बन चुकी हैं। केंद्र और राज्य सरकारें परीक्षाओं को पारदर्शी, निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए सावधानी बरत रही हैं। बिहार सरकार भी इस दिशा में जरूरी व्यवस्थाएं कर रही है।

    परीक्षा में गड़बड़ियों को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता देना जरूरी है। पेपर लीक की घटनाओं से छात्रों की मेहनत, समय और भविष्य प्रभावित हो सकता है। ऐसे में परीक्षा प्रणाली को भरोसेमंद बनाना और अनियमितताओं की गुंजाइश कम करना सरकारों के सामने अहम चुनौती है।

  • सोनम वांगचुक आज कर सकते हैं बड़ा ऐलान, गिरफ्तार CJP नेताओं के विरोध में उठाएंगे कदम

    सोनम वांगचुक आज कर सकते हैं बड़ा ऐलान, गिरफ्तार CJP नेताओं के विरोध में उठाएंगे कदम


    नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक आज कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में अगला कदम उठाने का ऐलान कर सकते हैं। उन्होंने सरकार से प्रदर्शनकारियों को रिहा करने और गिरफ्तारियों से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए 24 घंटे का समय दिया था। यह समयसीमा पूरी होने पर वांगचुक धरना, अनशन या पदयात्रा जैसे शांतिपूर्ण विरोध के विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।

    वांगचुक ने दिल्ली में छात्र और युवा नेताओं, वकीलों, पत्रकारों तथा सांसदों को हिरासत में लिए जाने की निंदा की है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन की अनुमति होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि गिरफ्तारियों को वापस लेकर संबंधित मामलों का समाधान बातचीत के जरिए किया जाए।

    वांगचुक बोले- देश में अघोषित आपातकाल जैसे हालात

    सोनम वांगचुक ने कहा कि दिल्ली में छात्र नेताओं, युवा नेताओं, वकीलों, पत्रकारों और यहां तक कि सांसदों को भी हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान शांति और एकता बनाए रखने की अपील करने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध की अनुमति दी जाएगी।

    वांगचुक ने आरोप लगाया कि देशभर में अघोषित आपातकाल जैसे हालात दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि दिन खत्म होने से पहले गिरफ्तारियों को समाप्त किया जाए और विवाद का समाधान निकाला जाए।

    उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले 24 घंटे में गिरफ्तारियों को वापस नहीं लिया गया, तो उन्हें लेह या दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पर विचार करना पड़ेगा। इसके लिए धरना, अनशन या पदयात्रा जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार बातचीत के जरिए ही मामले को सुलझा लेगी और उन्हें आंदोलन का अगला कदम उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    7 हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने का दावा

    दिल्ली में ‘जंतर-मंतर 2.0’ आंदोलन के दौरान पुलिस की भारी तैनाती और बैरिकेडिंग के बीच प्रदर्शन सीमित हो गया। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सात हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। इनमें सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और चार पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल बताए गए हैं।

    सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमान से ही हिरासत में ले लिया। जंतर-मंतर की ओर जा रहे आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, माकपा नेता पिनराई विजयन और माणिक सरकार सहित कई विपक्षी नेताओं को भी हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई।

    इसके अलावा, ध्रुव राठी को गुरुग्राम स्थित उनके आवास से और आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली हाट से हिरासत में लिया गया।

    सीजेपी का ऐलान- मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक जारी रहेगा आंदोलन

    सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प जताया है। पार्टी ने रविवार सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पर दोबारा प्रदर्शन करने की घोषणा की।

    प्रेस वार्ता में सीजेपी के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी और आंदोलन की कमान संभाल रहे अजिंक्य शिंदे ने कहा कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बावजूद संगठन पीछे नहीं हटेगा। पार्टी ने अपने आंदोलन को जारी रखने की बात दोहराते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है।

    सुप्रीम कोर्ट में आज अवमानना याचिका पर सुनवाई

    इस मामले से जुड़ा एक कानूनी घटनाक्रम भी सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट रविवार को उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें आरोप लगाया गया है कि 10 अक्टूबर को मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक नहीं लगाने संबंधी अदालत के आदेश का उल्लंघन हुआ।

    अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने यह अवमानना याचिका दाखिल की है। इसमें संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया गया है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर भी नजर रहेगी।

  • अजिंक्य शिंदे कौन हैं, सीजेपी नेताओं की हिरासत के बाद जंतर-मंतर प्रदर्शन की जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई उन्हें

    अजिंक्य शिंदे कौन हैं, सीजेपी नेताओं की हिरासत के बाद जंतर-मंतर प्रदर्शन की जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई उन्हें

    नई दिल्ली ।कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, प्रवक्ता आशुतोष रांका और सह-संयोजक सौरव दास को दिल्ली एयरपोर्ट पर पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस घटनाक्रम के बाद प्रदर्शन के नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे। इसी बीच अभिजीत दीपके का पहले से रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी गैरमौजूदगी में पार्टी के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे आंदोलन का नेतृत्व करेंगे। इसके बाद शिंदे की राजनीतिक पृष्ठभूमि, पार्टी में उनकी भूमिका और आम आदमी पार्टी से उनके पुराने संबंधों को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

    अजिंक्य शिंदे मूल रूप से महाराष्ट्र के अलिबाग के रहने वाले हैं। उनके माता-पिता खेती-किसानी करते हैं। उनकी उम्र 35 वर्ष बताई गई है और उनका संबंध महाराष्ट्र के लातूर से भी बताया गया है। शिंदे ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, लोनेरे से बीटेक की पढ़ाई पूरी की है। राजनीति में आने से पहले वह पुणे की एक सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी में नौकरी करते थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने वर्ष 2016 में नौकरी छोड़कर पूर्णकालिक सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में काम करना शुरू किया था। तकनीकी शिक्षा के बाद राजनीति में उनकी सक्रियता ने उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारियों तक पहुंचाया।

    अजिंक्य शिंदे का आम आदमी पार्टी से भी जुड़ाव रहा है। वह महाराष्ट्र में पार्टी की युवा इकाई के प्रदेश संयोजक के तौर पर काम कर चुके हैं। इसके अलावा, उन्हें गोवा में आम आदमी पार्टी का सह-प्रभारी भी बनाया गया था। उनके सोशल मीडिया खातों पर वर्ष 2024 तक आम आदमी पार्टी के समर्थन में की गई पोस्ट मौजूद होने की जानकारी दी गई है। सीजेपी में उनकी मौजूदा भूमिका और आम आदमी पार्टी में पहले निभाई गई जिम्मेदारियों के कारण दोनों संगठनों के बीच संभावित राजनीतिक संबंधों को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को अपने आप में दोनों दलों के बीच सीधे संबंध का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    सीजेपी में अजिंक्य शिंदे को 6 अगस्त 2026 को घोषित राष्ट्रीय कार्यसमिति के दौरान राष्ट्रीय संगठन प्रभारी नियुक्त किया गया था। यह पद पार्टी के संगठनात्मक कामकाज में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से जुड़ा है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सार्वजनिक रूप से शिंदे को दीपके का मार्गदर्शक बताया है। इससे पार्टी के भीतर उनके प्रभाव और नेतृत्व से जुड़े संबंधों का संकेत मिलता है। संगठन में उनकी जिम्मेदारी केवल पद तक सीमित नहीं रही। जून से 25 जुलाई 2026 के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी के प्रदर्शनों में भीड़ प्रबंधन, स्वयंसेवकों के समन्वय और पर्दे के पीछे की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी उनके पास होने की जानकारी सामने आई है।

    10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले तीन प्रमुख नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद शिंदे की भूमिका और अहम हो गई। अभिजीत दीपके ने अपने पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो में कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि उनकी अनुपस्थिति में आंदोलन को अजिंक्य शिंदे के नेतृत्व में आगे बढ़ाया जाए। इस घोषणा के बाद शिंदे को प्रदर्शन की कमान संभालने वाले नेता के रूप में देखा जा रहा है। संगठनात्मक प्रबंधन और पहले के प्रदर्शनों में उनकी भूमिका को देखते हुए पार्टी ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है।

    अब जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में अजिंक्य शिंदे की भूमिका पर नजर रहेगी। सीजेपी के शीर्ष नेताओं की हिरासत के बीच उन्हें कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करने और आंदोलन की व्यवस्थाएं संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और पाबंदियों के बीच पार्टी अपने कार्यक्रम को किस तरह आगे बढ़ाती है, यह आगे की गतिविधियों से स्पष्ट होगा।