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  • बिहार के मोतिहारी में घोड़ागाड़ी से विदेशी शराब की तस्करी का भंडाफोड़, पुलिस ने दो सौ बोतलें जब्त कीं

    बिहार के मोतिहारी में घोड़ागाड़ी से विदेशी शराब की तस्करी का भंडाफोड़, पुलिस ने दो सौ बोतलें जब्त कीं


    नई दिल्ली । 
    बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी क्षेत्र में अवैध शराब की तस्करी को लेकर एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां तस्करों ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए पारंपरिक परिवहन साधनों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए स्थानीय पुलिस ने एक घोड़ागाड़ी को रोककर भारी मात्रा में विदेशी शराब जब्त की है।

    पुलिस को सूचना मिली थी कि तस्कर वाहनों की नियमित जांच से बचने के लिए घोड़े का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस आधार पर पुलिस टीम ने बेघर गांव के पास नाकाबंदी कर संदिग्ध घोड़ागाड़ी को रोका। तलाशी के दौरान उसमें विशेष रूप से बनाए गए गुप्त खानों से विभिन्न ब्रांडों की लगभग दो सौ बोतलें विदेशी शराब बरामद की गईं।

    कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से तस्करी में संलिप्त एक आरोपी को गिरफ्तार किया, जबकि उसका एक अन्य साथी अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ की जा रही है ताकि इस अवैध नेटवर्क के मुख्य आपूर्तिकर्ताओं और खरीदारों का पता लगाया जा सके।

    जांच अधिकारियों के अनुसार, राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद से तस्कर लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। आमतौर पर चार पहिया वाहनों, ट्रकों या यात्री बसों का उपयोग किया जाता था, लेकिन पुलिस की सख्ती के कारण अब ग्रामीण इलाकों के कच्चे रास्तों और जानवरों का सहारा लिया जा रहा है।

    प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह खेप पड़ोसी क्षेत्रों से लाकर स्थानीय स्तर पर ऊंचे दामों में खपाने की योजना थी। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह के तार अंतरराज्यीय तस्करों से जुड़े हैं और क्या पूर्व में भी इस माध्यम का उपयोग किया गया था।

    शराबबंदी कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पुलिस प्रशासन ने सीमावर्ती और ग्रामीण इलाकों में गश्त बढ़ा दी है। संदेह के आधार पर कृषि कार्यों या माल ढुलाई में लगे पारंपरिक साधनों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है ताकि तस्करी के किसी भी प्रयास को विफल किया जा सके।

    उल्लेखनीय है कि अवैध मादक पदार्थों और शराब की अंतरराज्यीय तस्करी की रोकथाम के लिए बिहार पुलिस के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों जैसे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में भी विशेष जांच अभियान चलाए जाते रहे हैं, जिससे तस्करों के नेटवर्क पर अंकुश लगाया जा सके।

    पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भागे हुए आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। जब्त शराब और वाहन को कानूनी प्रक्रिया के तहत सील कर दिया गया है तथा संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई जारी है।

  • PM मोदी के दिमागी नक्सल वाले बयान पर सियासी घमासान… विपक्षी दलों ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

    PM मोदी के दिमागी नक्सल वाले बयान पर सियासी घमासान… विपक्षी दलों ने दी कड़ी प्रतिक्रिया


    नई दिल्ली।
    80वें स्वतंत्रता दिवस (80th Independence Day) (15 अगस्त 2026) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के लाल किले से दिए गए भाषण में “दिमागी नक्सल” (“Intellectual Naxal”) शब्द के इस्तेमाल ने देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।

    प्रधानमंत्री ने कहा था कि देश में जहां एक तरफ हथियारबंद नक्सलवाद खात्मे की कगार पर है, वहीं दूसरी तरफ ‘दिमागी नक्सल’ समाज में अराजकता फैलाने और युवाओं को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। इस बयान पर कांग्रेस, सीपीआई, तृणमूल कांग्रेस और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) समेत तमाम विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

    लाल किले से PM मोदी का क्या था बयान?
    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में वैचारिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा, “सुरक्षा बलों ने जंगलों में जारी बंदूकधारी माओवादी उग्रवाद को लगभग ध्वस्त कर दिया है।” उन्होंने आगे कहा, “लेकिन नक्सली विचारधारा वाले लोग अब ‘दिमागी नक्सल’ के रूप में देश को गलत रास्ते पर ले जाने और युवाओं को गुमराह करने के मौकों की तलाश में हैं।”

    पीएम ने कहा कि माओवादी विचारधारा ने दशकों तक सत्ता के गलियारों और सलाहकार समितियों में पैठ बनाकर सरकारी नीतियों को प्रभावित किया था। हमें इन ‘दिमागी नक्सलियों’ को अलग-थलग करना होगा।

    विपक्षी नेताओं का तीखा पलटवार
    प्रधानमंत्री के इस बयान के सामने आते ही विपक्षी दलों ने उन पर स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों को निशाना बनाने के लिए करने का आरोप लगाया।

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “पहले उन्होंने अपने विरोधियों को ‘अर्बन नक्सल’ कहा, अब वे उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कह रहे हैं। यह उनकी हताशा का स्पष्ट संकेत है। पीएम अक्सर उन्हीं नीतियों को अपनाते हैं जिनकी सलाह उनकी तरफ से निशाना बनाए गए लोग देते हैं।”

    वहीं CJP के मुख्य प्रवक्ता और स्वतंत्र पत्रकार सौरभ दास ने पीएम की शब्दावली पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, “दिमागी नक्सल या ऐसा कोई भी ठप्पा काम नहीं आने वाला, प्रधानमंत्री जी! आप देश के शिक्षित युवाओं को सिर्फ इसलिए ‘नक्सली’ कैसे कह सकते हैं क्योंकि वे आपकी सरकार से सवाल पूछते हैं? यह सरासर अहंकार और युवाओं की समस्याओं को हल करने में नाकामी है।”

    भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के महासचिव डी. राजा ने कहा कि राइट-विंग ट्रॉप्स में ‘एंटी-नेशनल’ और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ के बाद अब पीएम ने ‘दिमागी नक्सल’ का एक नया निरर्थक लेबल जोड़ दिया है। यह असहमति की आवाजों को दबाने और रोजगार-शिक्षा मांगने वाले युवाओं के मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास है।

    टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने पीएम के बयान पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “हां, मैं एक दिमागी नक्सल हूं। परिभाषा के मुताबिक सभी कॉकरोच होते हैं।” 2027 और 2028 के आगामी राज्य विधानसभा चुनावों से पहले लाल किले से आया यह बयान आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा बहस का एक मुख्य केंद्र बनने वाला है।

  • लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान, एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI प्रशिक्षण देने का लक्ष्य

    लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान, एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI प्रशिक्षण देने का लक्ष्य

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए युवाओं, तकनीक और आत्मनिर्भरता को भारत की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले एक साल में देश के एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य भारतीय युवाओं में AI के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता विकसित करना है।

    प्रधानमंत्री ने 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि इस लक्ष्य को देश के 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयास से हासिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए ऊंचे संकल्प और उसी स्तर के सामर्थ्य व प्रयास जरूरी हैं। उनके संबोधन में युवाओं को विकसित भारत की यात्रा की प्रमुख शक्ति के रूप में रेखांकित किया गया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा दौर में डेटा सेंटर, AI और क्वांटम तकनीक का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। उभरती तकनीकें भारत के सामने नई चुनौतियां और अवसर दोनों लेकर आ रही हैं। ऐसे में देश को इनोवेशन का केंद्र बनाने के साथ डिजिटल पब्लिक टेक्नोलॉजी को दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास बढ़ाने की जरूरत है।

    तकनीकी विकास के साथ सेमीकंडक्टर निर्माण को भी प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के लिए अहम बताया। उन्होंने कहा कि आज इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल तकनीक में चिप की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाए हैं और तीन प्लांट शुरू होने की जानकारी दी गई। आने वाले सात से आठ वर्षों में और संयंत्र शुरू करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

    प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा को भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि AI, चिप निर्माण और डेटा सेंटर के विस्तार के लिए बड़ी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होगी। ऐसे में पर्याप्त और भरोसेमंद ऊर्जा उपलब्धता भारत की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। उन्होंने परमाणु ऊर्जा को ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के प्रमुख माध्यमों में शामिल किया।

    प्रधानमंत्री ने देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य बताया। उन्होंने कहा कि इस दशक में पांच परमाणु रिएक्टरों के काम शुरू करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि भविष्य की अर्थव्यवस्था में तकनीक और ऊर्जा दोनों की जरूरत बढ़ेगी, इसलिए दोनों क्षेत्रों में क्षमता निर्माण जरूरी है।

    संबोधन में ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी पर भी जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, ग्रीन मोबिलिटी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि भारत के पास लंबी समुद्री तटरेखा, मत्स्य संसाधन, तटीय पर्यटन और तटीय तकनीक के जरिए ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने की भी व्यापक संभावनाएं हैं।

    प्रधानमंत्री के भाषण में AI प्रशिक्षण से लेकर सेमीकंडक्टर निर्माण, परमाणु ऊर्जा और हरित अर्थव्यवस्था तक कई क्षेत्रों को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा गया। एक करोड़ युवाओं को AI स्किल देने की घोषणा से तकनीकी रूप से सक्षम कार्यबल तैयार करने पर विशेष ध्यान का संकेत मिला है। इसके साथ ही ऊर्जा और विनिर्माण क्षमता बढ़ाने को भी भविष्य की आर्थिक जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

  • पीएम मोदी की बंधेज पगड़ी ने खींचा ध्यान, 2014 से 2026 तक हर स्वतंत्रता दिवस पर बदला साफे का रंग और अंदाज

    पीएम मोदी की बंधेज पगड़ी ने खींचा ध्यान, 2014 से 2026 तक हर स्वतंत्रता दिवस पर बदला साफे का रंग और अंदाज

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। इस दौरान उनका पारंपरिक पहनावा एक बार फिर चर्चा में रहा। प्रधानमंत्री ने लाल और पीले रंग की बंधेज पगड़ी पहनी, जिसके साथ सफेद कुर्ता-पायजामा और भूरे रंग की नेहरू जैकेट थी।

    प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस पर पहने जाने वाले साफे और पगड़ी की खास बात यह है कि हर वर्ष इसका रंग, डिजाइन और बांधने का अंदाज अलग दिखाई देता है। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उनकी पगड़ी एक अलग पहचान बन चुकी है।

    इस बार पहनी गई बंधेज पगड़ी गहरे लाल रंग की थी और उस पर सफेद रंग के छोटे-छोटे बिंदु बने थे। बंधेज राजस्थान और गुजरात की पारंपरिक टाई-एंड-डाई कला से जुड़ी है। इसमें कपड़े को धागों से बांधकर अलग-अलग हिस्सों में रंग दिया जाता है, जिससे कपड़े पर खास तरह के बिंदु और पैटर्न उभरते हैं।

    बंधेज को राजस्थान और गुजरात में उत्सव, सम्मान और परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। इस तरह की पगड़ी विशेष अवसरों और समारोहों में भी पहनी जाती है। प्रधानमंत्री के इस परिधान को स्थानीय हस्तकला और पारंपरिक कपड़ा कला के संदर्भ में भी देखा गया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में अपने पहले स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लाल रंग की चमकदार राजस्थानी बंधेज पगड़ी पहनी थी। इसके अगले वर्ष उनकी पगड़ी में पीले रंग के साथ लाल और गहरे हरे रंग के क्रॉस-क्रॉस पैटर्न दिखाई दिए थे।

    2016 में उन्होंने गुलाबी और पीले रंग की टाई-डाई शैली वाली पगड़ी पहनी। 2017 में लाल रंग की पगड़ी उनके पहनावे का हिस्सा बनी। 2018 में उन्होंने भगवा रंग की पगड़ी पहनी थी, जबकि 2019 में लाल, पीले और हरे रंगों से सजी राजस्थानी पगड़ी नजर आई।

    2020 में प्रधानमंत्री ने केसरिया रंग की पगड़ी पहनी, जिस पर क्रीम रंग का प्रिंट दिखाई दिया। 2021 में उनकी पगड़ी केसरी और लाल रंग के पैटर्न वाली थी। उस समय हल्के नीले रंग की जैकेट के साथ उनका पहनावा भी चर्चा में रहा।

    2022 में प्रधानमंत्री तिरंगे रंगों वाली पगड़ी में नजर आए। इसके साथ उन्होंने नीले रंग की जैकेट पहनी थी। 2023 में उनकी पगड़ी में लाल, पीले, हरे और बैंगनी रंगों वाली बांधनी शैली दिखाई दी। 2024 में भगवा और हरे रंग की पगड़ी के साथ उन्होंने नीले रंग की सदरी पहनी थी।

    2025 में प्रधानमंत्री ने भगवा रंग की पगड़ी पहनी थी और उनके पहनावे में तिरंगे का प्रिंट भी शामिल था। इस तरह स्वतंत्रता दिवस पर उनकी पगड़ी के रंग और डिजाइन हर वर्ष अलग रहे हैं।

    इस वर्ष की बंधेज पगड़ी में लाल रंग प्रमुख रहा। पारंपरिक बंधेज कला के इस्तेमाल ने एक बार फिर प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस के पहनावे को चर्चा में ला दिया। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी पगड़ी ने उनके परिधान में पारंपरिक भारतीय शैली को प्रमुखता दी।

  • LPG टैंकर में घुसकर लापता क्रू की तलाश करने वाले लेफ्टिनेंट कमांडर शिवम को शौर्य चक्र, 78 वीरता पुरस्कारों की पूरी सूची

    LPG टैंकर में घुसकर लापता क्रू की तलाश करने वाले लेफ्टिनेंट कमांडर शिवम को शौर्य चक्र, 78 वीरता पुरस्कारों की पूरी सूची


    नई दिल्ली।
    80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सशस्त्र बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों के लिए 78 वीरता पुरस्कारों को मंजूरी दी है। इनमें 13 मरणोपरांत पुरस्कार भी शामिल हैं। पुरस्कारों में 9 कीर्ति चक्र, 19 शौर्य चक्र, 36 सेना पदक, 3 नौसेना पदक और 5 वायु सेना पदक शामिल हैं। इसके अलावा सेना, नौसेना और वायुसेना के जवानों के लिए 89 मेंशन-इन-डिस्पैचेज को भी मंजूरी दी गई है।

    इन पुरस्कारों में भारतीय नौसेना के INS त्रिकंद के NBCD ऑफिसर लेफ्टिनेंट कमांडर शिवम कुमार का नाम खास तौर पर सामने आया है। उन्हें अदम्य साहस, नेतृत्व क्षमता और कर्तव्य के प्रति असाधारण समर्पण के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया जाएगा।

    जान की परवाह किए बिना चलाया था रेस्क्यू ऑपरेशन

    लेफ्टिनेंट कमांडर शिवम कुमार ने अक्टूबर 2025 में अदन की खाड़ी में बेहद जोखिम भरे बचाव अभियान का नेतृत्व किया था। यह इलाका हूती हमलों के खतरे के कारण पहले से ही बेहद संवेदनशील माना जाता था।

    घटना 18 अक्टूबर 2025 की है। उस दिन कैमरून के झंडे वाला LPG टैंकर MT Falcon भीषण विस्फोट के बाद आग की चपेट में आ गया था। हादसे के बाद जहाज से खतरनाक LPG गैस का रिसाव हो रहा था और किसी भी समय दूसरा बड़ा विस्फोट होने का खतरा बना हुआ था।

    टैंकर पर सवार दो भारतीय क्रू सदस्य लापता हो गए थे। ऐसे समय में लेफ्टिनेंट कमांडर शिवम कुमार ने खुद आगे बढ़कर खोज और राहत अभियान की कमान संभाली।

    जहरीली गैस और धुएं के बीच बार-बार जहाज में घुसे

    रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान शिवम कुमार ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना क्षतिग्रस्त टैंकर के बेहद खतरनाक हिस्सों में प्रवेश किया। वहां जहरीली गैस, तेज गर्मी और घना धुआं मौजूद था और किसी भी वक्त स्थिति जानलेवा हो सकती थी।

    उन्होंने तकनीकी और सुरक्षा जोखिमों का आकलन करते हुए अभियान को आगे बढ़ाया। इस दौरान उन्होंने लापता भारतीय क्रू सदस्यों के अवशेषों को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।

    उनका यह अभियान न केवल असाधारण साहस बल्कि संकट की स्थिति में नेतृत्व, तकनीकी दक्षता और कर्तव्यनिष्ठा का भी उदाहरण माना गया है।

    वीरता पुरस्कार विजेताओं की सूची

    कीर्ति चक्र
    1. लेफ्टिनेंट कर्नल मनियो फ्रांसिस पीएफ, एससी, 21 पैरा (विशेष बल) – सेना
    2. मेजर जितेंद्र राठी, 2 पैरा (विशेष बल) – सेना
    3. हवलदार गजेंद्र सिंह, 2 पैरा (विशेष बल) (मरणोपरांत) – सेना
    4. श्री जगबीर सिंह, हेड कांस्टेबल (मरणोपरांत) – गृह मंत्रालय (MHA)
    5. श्री जसवंत सिंह, सिलेक्शन ग्रेड कांस्टेबल (मरणोपरांत) – गृह मंत्रालय (MHA)
    6. श्री बलविंदर सिंह, सिलेक्शन ग्रेड कांस्टेबल (मरणोपरांत) – गृह मंत्रालय (MHA)
    7. श्री तारिक हुसैन, सिलेक्शन ग्रेड कांस्टेबल (मरणोपरांत) – गृह मंत्रालय (MHA)
    8. श्री बशीर अहमद, हेड कांस्टेबल (मरणोपरांत) – गृह मंत्रालय (MHA)
    9. श्री सुनील कुमार, इंस्पेक्टर एसटीएफ (मरणोपरांत) – गृह मंत्रालय (MHA)
    बार टू शौर्य चक्र
    1. मेजर आदित्य प्रताप सिंह, एससी, एसएम, द राजपूताना राइफल्स, 44 असम राइफल्स – सेना
    शौर्य चक्र
    1. मेजर परमवीर, द गढ़वाल राइफल्स, 36 राष्ट्रीय राइफल्स – सेना
    2. मेजर तरुण वासुदेवन, कोर ऑफ इंजीनियर्स, 57 राष्ट्रीय राइफल्स – सेना
    3. मेजर केशव कुमार, 12 डोगरा – सेना
    4. मेजर गौरव सिंह ब्रिजवाल, 21 ग्रेनेडियर्स – सेना
    5. मेजर विपीन कुमार, कोर ऑफ सिग्नल्स, 11 राष्ट्रीय राइफल्स – सेना
    6. नायब सूबेदार शंकर राम, 3 असम राइफल्स – सेना
    7. नायब सूबेदार डब्बल सिंह बिष्ट, 21 पैरा (विशेष बल) – सेना
    8. हवलदार जगतार सिंह, 4 पैरा (विशेष बल) – सेना
    9. लांस नायक नरेंद्र सिंधु, द राजपूताना राइफल्स, 9 राष्ट्रीय राइफल्स (मरणोपरांत) – सेना
    10. लांस नायक कपिल देव, द डोगरा रेजीमेंट, 11 राष्ट्रीय राइफल्स – सेना
    11. सिपाही जसविंदर सिंह, 7 सिख लाइट इन्फैंट्री – सेना
    12. लेफ्टिनेंट कमांडर शिवम कुमार – नौसेना
    13. स्क्वाड्रन लीडर सुधीर कुमार, फ्लाइंग (पायलट) – वायु सेना
    14. श्री धीरज सिंह कटोच, डिप्टी एसपी – गृह मंत्रालय (MHA)
    15. श्री अजय सिंह चिब, इंस्पेक्टर – गृह मंत्रालय (MHA)
    16. श्री सुखवीर सिंह, डिप्टी एसपी – गृह मंत्रालय (MHA)
    17. श्री नियाज अहमद, सहायक उप-निरीक्षक – गृह मंत्रालय (MHA)
    18. श्री अंजनी कुमार, डिप्टी कमांडेंट – गृह मंत्रालय (MHA)
    19. श्री दीपक साह, कांस्टेबल – गृह मंत्रालय (MHA)


    बार टू सेना पदक (वीरता)
    1. मेजर डीएस पाओशो, एसएम, 7 मद्रास – सेना
    2. मेजर अनुज महाजन, एसएम, मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री, 36 असम राइफल्स – सेना
    3. मेजर कृष्ण कांत, एसएम, 21 पैरा (विशेष बल) – सेना
    4. सूबेदार रमेश कुमार, एसएम, 159 इन्फैंट्री बटालियन (टेरिटोरियल आर्मी) – सेना
    5. नायब सूबेदार राजेंद्र सिंह, एसएम, 2 पैरा (विशेष बल) – सेना
    सेना पदक (वीरता)
    1. लेफ्टिनेंट कर्नल पुष्कर विजय चौधरी, 27 (इंडिपेंडेंट) आरएंडओ फ्लाइट – सेना
    2. लेफ्टिनेंट कर्नल सोनम तोपदेन भूटिया, 2/8 गोरखा राइफल्स – सेना
    3. मेजर सुधांशु शेखर पाणी, पैरा रेजीमेंट, 9 राष्ट्रीय राइफल्स – सेना
    4. मेजर मोहित पोडिया, रेजीमेंट ऑफ आर्टिलरी, 37 असम राइफल्स – सेना
    5. मेजर आर साहिल, द गढ़वाल राइफल्स, 33 असम राइफल्स – सेना
    6. मेजर बालेन्दु कुमार झा, 24 ग्रेनेडियर्स – सेना
    7. मेजर रवि शंकर जोशी, द राजपूताना राइफल्स, 57 राष्ट्रीय राइफल्स – सेना
    8. मेजर रूपम दास, 8 बिहार – सेना
    9. मेजर अर्णव बाली, मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री, 9 राष्ट्रीय राइफल्स – सेना
    10. मेजर अंशुमान रंजन, 4 पैरा (विशेष बल) – सेना
    11. मेजर अरविंद कुमार, कोर ऑफ इंजीनियर्स, 33 असम राइफल्स – सेना
    12. कैप्टन करन सिंह चीमा, असम रेजीमेंट, 59 राष्ट्रीय राइफल्स – सेना
    13. कैप्टन हरीश सिंह देवाली, द मराठा लाइट इन्फैंट्री, 17 राष्ट्रीय राइफल्स – सेना
    14. कैप्टन मोहित रावत, कोर ऑफ सिग्नल्स, 44 असम राइफल्स – सेना
    15. कैप्टन अंशुमान सिंह, 11 पैरा (विशेष बल) – सेना
    16. कैप्टन बाने स्वरांज सुधीर, 21 पैरा (विशेष बल) – सेना
    17. कैप्टन पृथ्वीराज जयसिंह निघोट, 21 पैरा (विशेष बल) – सेना
    18. कैप्टन साविक, 5/9 गोरखा राइफल्स – सेना
    19. लेफ्टिनेंट भानु प्रताप सिंह, 12 डोगरा – सेना
    20. लेफ्टिनेंट अमन पांडे, 8 बिहार – सेना
    21. असिस्टेंट कमांडेंट बिकाश राय, 11 असम राइफल्स – सेना
    22. सूबेदार पवन कुमार, 11 पैरा (विशेष बल) – सेना
    23. सूबेदार परभात गौड़, पैरा रेजीमेंट, 9 राष्ट्रीय राइफल्स (मरणोपरांत) – सेना
    24. सूबेदार कणसे नामदेव बालकृष्ण, 18 मराठा लाइट इन्फैंट्री – सेना
    25. सूबेदार बलजिंदर सिंह, 7 सिख लाइट इन्फैंट्री – सेना
    26. नायब सूबेदार दयाल सिंह, द गढ़वाल राइफल्स, 36 राष्ट्रीय राइफल्स – सेना
    27. हवलदार एल जोएल कॉम, 21 पैरा (विशेष बल) – सेना
    28. हवलदार मुल्ला आबिदअली अशरफअली, 18 मराठा लाइट इन्फैंट्री – सेना
    29. लांस हवलदार पलाश घोष, पैरा रेजीमेंट, 19 राष्ट्रीय राइफल्स (मरणोपरांत) – सेना
    30. नायक अली मोहम्मद खान, 24 ग्रेनेडियर्स – सेना
    31. लांस नायक सुजय घोष, पैरा रेजीमेंट, 19 राष्ट्रीय राइफल्स (मरणोपरांत) – सेना
    32. लांस नायक अभिमन्यु सिंह, 21 ग्रेनेडियर्स – सेना
    33. लांस नायक बिधा सिंह, द जाट रेजीमेंट, 34 राष्ट्रीय राइफल्स – सेना
    34. लांस नायक प्रीतपाल सिंह, सिख लाइट इन्फैंट्री, 19 राष्ट्रीय राइफल्स (मरणोपरांत) – सेना
    35. सिपाही हरमिंदर सिंह, सिख लाइट इन्फैंट्री, 19 राष्ट्रीय राइफल्स (मरणोपरांत) – सेना
    36. पैराट्रूपर हिमांशु कुमार, 21 पैरा (विशेष बल) – सेना
    नौ सेना पदक (वीरता)
    1. कमांडर विनीत शर्मा – नौसेना
    2. कमांडर युवराज कुमार – नौसेना
    3. अविनाश अण्णासो, पीओए (एफडी) – नौसेना
    वायु सेना पदक (वीरता)
    1. ग्रुप कैप्टन राहुल जगोता, फ्लाइंग (पायलट) – वायु सेना
    2. ग्रुप कैप्टन राहुल रावत, फ्लाइंग (पायलट) – वायु सेना
    3. विंग कमांडर आशीष राजपूत, फ्लाइंग (पायलट) – वायु सेना
    4. फ्लाइट लेफ्टिनेंट यश, फ्लाइंग (पायलट) – वायु सेना
    5. मास्टर वारंट ऑफिसर रविंदरजीत सिंह, पैराशूट जंप इंस्ट्रक्टर – वायु सेना
    मेंशन-इन-डिस्पैचेज
    राष्ट्रपति ने 89 मेंशन-इन-डिस्पैचेज की भी मंजूरी दी है, जिनमें भारतीय सेना के 75, भारतीय नौसेना के 04 और भारतीय वायु सेना के 10 कर्मी शामिल हैं.
    भारतीय सेना
    ऑपरेशन रक्षक
    • कर्नल रणवीर सिंह, 207 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (UH)
    • लेफ्टिनेंट कर्नल अभिषेक जोशी, एसएम, 666 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (R&O)
    • लेफ्टिनेंट कर्नल हिमांशु शर्मा, 21 काउंटर इंसर्जेंसी इंटेलिजेंस यूनिट
    • लेफ्टिनेंट कर्नल आदित्य जसरोटिया, 666 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (R&O)
    • मेजर देवश्री अरविंद शर्मा, 25 मद्रास
    • मेजर कुणाल नरूला, 662 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (R&O)
    • मेजर स्वप्निल श्रीवास्तव, द राजपूताना राइफल्स, 9 राष्ट्रीय राइफल्स
    • मेजर अक्षय सिंह, द डोगरा रेजीमेंट, 11 राष्ट्रीय राइफल्स
    • मेजर अरुण, रेजीमेंट ऑफ आर्टिलरी, 11 राष्ट्रीय राइफल्स
    • मेजर अब्दुलअजीज एम, मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री, 26 राष्ट्रीय राइफल्स
    • मेजर रोहित शर्मा, 290 फील्ड रेजीमेंट
    • कैप्टन मुनिराज टी, आर्मी मेडिकल कोर, 19 राष्ट्रीय राइफल्स
    • सुल्तान महमूद, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस, जम्मू-कश्मीर पुलिस, उधमपुर
    • सूबेदार मनोज कुमार, 4 पैरा (विशेष बल)
    • नायब सूबेदार करमबीर, 21 ग्रेनेडियर्स
    • नायक मुकेश सिंह, 159 इन्फैंट्री बटालियन (टेरिटोरियल आर्मी)
    • नायक रोशन कुमार, कोर ऑफ इंजीनियर्स, 3 राष्ट्रीय राइफल्स
    • नायक रजत शर्मा, 12 डोगरा
    • नायक नंदन सिंह गुसाईं, 4 पैरा (विशेष बल)
    • राइफलमैन रंजीत सिंह, द राजपूताना राइफल्स, 57 राष्ट्रीय राइफल्स
    • राइफलमैन रमेश सिंह, द गढ़वाल राइफल्स, 36 राष्ट्रीय राइफल्स
    • राइफलमैन गोविंद सिंह, द राजपूताना राइफल्स, 57 राष्ट्रीय राइफल्स
    • पैराट्रूपर मधुकर शैलेश चौगुले, 2 पैरा (विशेष बल)
    • आर्मी डॉग टाइसन (C071), रिमाउंट वेटनरी कोर, 2 पैरा (विशेष बल)
    ऑपरेशन हिफाजत
    • मेजर सी साई विवेक, एसएम, रेजीमेंट ऑफ आर्टिलरी, 33 असम राइफल्स
    • मेजर राजकुमार संजीव, जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स, 31 असम राइफल्स
    • कैप्टन अथर्व श्रीरंग जाधव, 5/9 गोरखा राइफल्स
    • सूबेदार तिल बहादुर डांगी, 21 पैरा (विशेष बल)
    • सूबेदार अमित कुमार, 2 महार
    • सूबेदार जरनैल सिंह, 2 महार
    • हवलदार देवेंद्र सिंह नेगी, 21 पैरा (विशेष बल)
    • हवलदार डोंगरे गुलाबराव शामराव, 2 महार
    • नायक कपिल देव, 21 पैरा (विशेष बल)
    • नायक सुनील कुमार, 2 महार
    • लांस नायक बिन्नार योगेश पोपट, 21 पैरा (विशेष बल)
    • पैराट्रूपर राहुल कुमार यादव, 21 पैरा (विशेष बल)
    • अग्निवीर हरिओम, 2 महार
    • अग्निवीर कृष्ण कुमार, 2 महार
    ऑपरेशन आर्किड
    • मेजर लक्ष्यद्वीप कांकेर, आर्मी एयर डिफेंस, 4 असम राइफल्स
    • पैराट्रूपर बिकाश काकती, 11 पैरा (विशेष बल)
    • पैराट्रूपर योग राज, 11 पैरा (विशेष बल)
    • पैराट्रूपर लालतन सांगा, 11 पैरा (विशेष बल)
    • पैराट्रूपर दीपचंद कारगवाल, एसएम, 21 पैरा (विशेष बल)
    ऑपरेशन मेघदूत
    • मेजर देवेश भंडारी, 666 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (R&O)
    • मेजर ऋषिकेश पाठक, 24 पंजाब
    ऑपरेशन स्नो लेपर्ड
    • लेफ्टिनेंट कर्नल राकेश वशिष्ठ, 301 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (SO)
    • मेजर अभिमन्यु यादव, 16 पंजाब
    • मेजर राजीव मील, 203 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (UH)
    • मेजर राहुल मेहता, रेजीमेंट ऑफ आर्टिलरी, 5 विकास (SFF)
    • कैप्टन मोहित गंजू, असम रेजीमेंट, 59 राष्ट्रीय राइफल्स
    • कैप्टन गौरव कुमार, 60 आर्मर्ड रेजीमेंट
    ऑपरेशन चक्रव्यूह
    • मेजर अमित नैन, 19 गढ़वाल राइफल्स
    ऑपरेशन चेथेबा
    • मेजर देबाशीष पुस्टी, आर्मर्ड रेजीमेंट, 13 असम राइफल्स
    ऑपरेशन खोइजुमान
    • मेजर अभिषेक कुमार सिंह, 2 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री
    ऑपरेशन माउंट कांगतो
    • मेजर कार्तिक यादव, आर्मी एयर डिफेंस, 667 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (R&O)
    ऑपरेशन तलाश
    • मेजर विशाल राणा, 2 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री
    • मेजर ज़ुबैर अहमद इटू, कोर ऑफ इंजीनियर्स, 19 असम राइफल्स
    ऑपरेशन अवांग लेखाई
    • मेजर शर्मा तनुज दिलीप, 2 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री
    ऑपरेशन खोज
    • लेफ्टिनेंट शिवम पांडे, 2 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री
    ऑपरेशन नोंगरेन II
    • सिपाही शुभम कुमार, 8 बिहार
    ऑपरेशन माओवा-कियेवी
    • राइफलमैन एच यांग पांग शानयेई फोम, 22 असम राइफल्स
    ऑपरेशन सिक्योर शील्ड-XLII
    • राइफलमैन देलबोर अली मोंडल, 3 असम राइफल्स
    • राइफलमैन अडेपु राकेश, 3 असम राइफल्स
    ऑपरेशन चानबिरोक
    • राइफलमैन भोज बहादुर राना मगर, 2/8 गोरखा राइफल्स
    विविध ऑपरेशन
    • लांस नायक जसपुनीत सिंह, 22 सिख
    • लेफ्टिनेंट कर्नल रोहित सिंह साही (सेवानिवृत्त)
    • लेफ्टिनेंट कर्नल सुहेल सिंह गिल, 666 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (R&O)
    • लेफ्टिनेंट कर्नल सौबाम किनोबाबू सिंह, एसएम, 2 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री
    • लेफ्टिनेंट कर्नल विकास पांडे, 667 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (R&O)
    • मेजर निकम निखिल जनार्दन, 2/8 गोरखा राइफल्स
    • मेजर अभिषेक अर्जुन, द गढ़वाल राइफल्स, 666 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (R&O)
    • कैप्टन अरुण कुमार सोलानिया, 2 महार
    • हवलदार ऐजाज अहमद, 159 इन्फैंट्री बटालियन (टेरिटोरियल आर्मी)
    • हवलदार नेहखोहाओ हाओकिप, 165 इन्फैंट्री बटालियन (टेरिटोरियल आर्मी)
    • हवलदार नरेश शर्मा, 18 जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स
    भारतीय नौसेना
    1. कमांडर निखिल चुघ
    2. लेफ्टिनेंट अजय जोस एन जोसेफ
    3. अश्विन संतोष, एवीआर सी (सीडी)
    4. अभिषेक सी धनवड़े, सी I (सीडी)
    भारतीय वायु सेना
    1. विंग कमांडर राजा रेड्डी ललिता नागेश कुमार, फ्लाइंग (पायलट)
    2. विंग कमांडर अम्मर हैदर नकवी, फ्लाइंग (पायलट)
    3. विंग कमांडर मनोज पुरी गोस्वामी, एडमिनिस्ट्रेशन/एयर ट्रैफिक कंट्रोलर
    4. स्क्वाड्रन लीडर कुंदरापु कौशिक, फ्लाइंग (पायलट)
    5. फ्लाइट लेफ्टिनेंट पार्थसारथी मुले, फ्लाइंग (पायलट)
    6. मास्टर वारंट ऑफिसर ब्रह्म प्रकाश, पैरा जंपिंग इंस्ट्रक्टर (सेवानिवृत्त)
    7. मास्टर वारंट ऑफिसर अनूप सिंह, पैरा जंपिंग इंस्ट्रक्टर
    8. कॉर्पोरल मोहन लाल सैनी, भारतीय वायु सेना (सुरक्षा)
    9. विंग कमांडर सीआर प्रदीप, फ्लाइंग (पायलट)
    10. स्क्वाड्रन लीडर अविरल गांधी, फ्लाइंग (पायलट)

  • CJI सूर्यकांत ने NALSAR छात्रों के विवाद में BCI को फटकारा, कहा विरोध के कारण छात्रों का करियर प्रभावित नहीं होना चाहिए

    CJI सूर्यकांत ने NALSAR छात्रों के विवाद में BCI को फटकारा, कहा विरोध के कारण छात्रों का करियर प्रभावित नहीं होना चाहिए


    नई दिल्ली ।महाराष्ट्र के नांदेड़ में हुए हमले के एक दिन बाद शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने पंजाब की शांति, धार्मिक सद्भाव और देश के विकास को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

    सुखबीर बादल ने कहा कि कुछ ताकतें पंजाब के शांतिपूर्ण माहौल और सांप्रदायिक भाईचारे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी कोशिशों से वह पीछे नहीं हटेंगे और राज्य में शांति तथा सभी समुदायों के बीच सद्भाव बनाए रखने के लिए मजबूती से खड़े रहेंगे।

    उन्होंने कहा कि उनके लिए पंजाब और देश का विकास सबसे महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही धार्मिक और सांप्रदायिक सद्भाव को भी उन्होंने उतना ही अहम बताया। उनके मुताबिक, पंजाब की सामाजिक संरचना और आपसी भाईचारे को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाना चाहिए।

    सुखबीर बादल ने अपने पिता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को भी याद किया। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह बादल ने हमेशा सभी समुदायों और क्षेत्रों को साथ लेकर चलने की कोशिश की। उनके अनुसार, उनके पिता की राजनीति में सांप्रदायिक सौहार्द और पंजाब की शांति को विशेष महत्व दिया जाता था।

    सुखबीर बादल ने कहा कि प्रकाश सिंह बादल ने कभी उन ताकतों के सामने समझौता नहीं किया, जो पंजाब के शांतिपूर्ण वातावरण को प्रभावित करना चाहती थीं। उन्होंने इसी सोच को आगे बढ़ाने की बात कही और कहा कि राज्य में भाईचारा बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है।

    नांदेड़ की घटना का जिक्र करते हुए सुखबीर बादल ने अपने ऊपर हुए पिछले हमले की भी बात की। उन्होंने कहा कि दोनों घटनाओं का संबंध बेहद पवित्र धार्मिक स्थलों से है। उन्होंने पहले अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर और अब नांदेड़ स्थित तख्त हजूर साहिब में हुई घटनाओं का उल्लेख किया।

    उन्होंने कहा कि चाहे कितनी भी कोशिशें क्यों न की जाएं, अंतिम निर्णय ईश्वर के हाथ में है। सुखबीर बादल ने विश्वास जताया कि गुरु साहिब का आशीर्वाद उनके साथ है और पंजाब की शांति को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतें अपने उद्देश्य में सफल नहीं होंगी।

    अकाली दल प्रमुख ने कहा कि पंजाब ने लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों का सामना किया है और राज्य की जनता शांति तथा भाईचारे को महत्व देती है। उन्होंने कहा कि किसी भी घटना का असर पंजाब के सामाजिक माहौल पर नहीं पड़ना चाहिए और सभी समुदायों को संयम बनाए रखना जरूरी है।

    सुखबीर बादल ने यह भी स्पष्ट किया कि वह ऐसी घटनाओं से भयभीत होकर अपनी राजनीतिक और सामाजिक जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने पंजाब की एकता, धार्मिक सद्भाव और विकास को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    नांदेड़ की घटना के बाद उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और पंजाब के सामाजिक माहौल को लेकर चर्चा तेज है। बादल ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी ऐसी कोशिश को सफल नहीं होने देने की अपील की, जिससे समुदायों के बीच तनाव पैदा हो सकता है।

  • 970 किलो मेफेड्रोन केस में बड़ा अपडेट, वीरेंद्र बसोया दुबई से भारत लाया गया; अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क की जांच तेज

    970 किलो मेफेड्रोन केस में बड़ा अपडेट, वीरेंद्र बसोया दुबई से भारत लाया गया; अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क की जांच तेज


    नई दिल्ली ।
    ड्रग्स तस्करी से जुड़े एक बड़े मामले में भारतीय जांच एजेंसियों को अहम सफलता मिली है। 970 किलो मेफेड्रोन की बरामदगी से जुड़े मामले में वांछित आरोपी वीरेंद्र सिंह बसोया को दुबई से भारत लाया गया है। उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी था और भारत सरकार की पहल के बाद संयुक्त अरब अमीरात से उसे डिपोर्ट करने की प्रक्रिया पूरी की गई।

    वीरेंद्र बसोया पर पुणे से जुड़े एक बड़े कथित ड्रग्स नेटवर्क में शामिल होने का आरोप है। जांच में सामने आए मामले की अनुमानित कीमत करीब 6,000 करोड़ रुपये बताई गई है। आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए बड़ी मात्रा में मेफेड्रोन की खेप तैयार कर उसे विदेश भेजने की योजना बनाई गई थी।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बसोया की भारत वापसी को लेकर जानकारी साझा करते हुए कहा कि विदेशों में छिपे ड्रग्स तस्करों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। उन्होंने नशीले पदार्थों के नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में एजेंसियों की कार्रवाई और सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर जोर दिया।

    मामले की जांच के दौरान 21 फरवरी 2024 को दिल्ली में कार्रवाई की गई थी। इस कार्रवाई में दिवेश चरंजीत भूतानी और संदीपकुमार राजपाल बैसोया को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई थी। उनके कब्जे से करीब 970 किलो मेफेड्रोन बरामद होने का दावा किया गया था।

    जांच में आरोप लगाया गया कि गिरफ्तार किए गए आरोपी कथित तौर पर वीरेंद्र सिंह बसोया के निर्देश पर काम कर रहे थे। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तथा विदेश में मौजूद संदिग्धों की भूमिका की पड़ताल शुरू हुई।

    जांच एजेंसियों के अनुसार मेफेड्रोन की खेप को विदेश भेजने के लिए लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का इस्तेमाल किए जाने की योजना थी। इस सिलसिले में डेल्टा लॉजिस्टिक्स से जुड़े कुछ लोगों पर भी कार्रवाई की गई। संदीप हनुमानसिंह यादव और देवेंद्र रामफुल यादव को मामले में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी है।

    मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ वीरेंद्र बसोया के बेटे ऋषभ का नाम भी सामने आया। उसके खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जाने की जानकारी है। वह फिलहाल विदेश में बताया जा रहा है। जांच एजेंसियां अब कथित ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और इसकी अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की जानकारी जुटाने में लगी हैं।

    वीरेंद्र बसोया की भारत वापसी को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह लंबे समय से देश से बाहर था और उसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तलाश की प्रक्रिया चल रही थी। उसके भारत आने के बाद जांच एजेंसियों को मामले की कथित साजिश, नेटवर्क के संचालन और विदेशों तक नशीले पदार्थ पहुंचाने की योजना से जुड़े कई सवालों के जवाब हासिल करने का अवसर मिल सकता है।

    जांच एजेंसियां अब बसोया से मामले में उसकी कथित भूमिका और अन्य आरोपियों से संबंधों को लेकर पूछताछ कर सकती हैं। साथ ही बरामद मेफेड्रोन की खेप, उसके स्रोत, तैयार करने की प्रक्रिया और कथित अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े पहलुओं की भी जांच आगे बढ़ सकती है।

    हालांकि, जांच में लगाए गए आरोपों को अदालत में अंतिम रूप से साबित किया जाना बाकी है। किसी भी आरोपी की कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा। फिलहाल बसोया की भारत वापसी के बाद इस मामले में जांच और कानूनी कार्रवाई के अगले चरण पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

  • नांदेड़ हमले के बाद सुखबीर सिंह बादल ने कहा, डरने वाला नहीं, पंजाब की शांति और सांप्रदायिक सद्भाव सर्वोच्च प्राथमिकता

    नांदेड़ हमले के बाद सुखबीर सिंह बादल ने कहा, डरने वाला नहीं, पंजाब की शांति और सांप्रदायिक सद्भाव सर्वोच्च प्राथमिकता

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के नांदेड़ में हुए हमले के एक दिन बाद शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने पंजाब की शांति, धार्मिक सद्भाव और देश के विकास को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

    सुखबीर बादल ने कहा कि कुछ ताकतें पंजाब के शांतिपूर्ण माहौल और सांप्रदायिक भाईचारे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी कोशिशों से वह पीछे नहीं हटेंगे और राज्य में शांति तथा सभी समुदायों के बीच सद्भाव बनाए रखने के लिए मजबूती से खड़े रहेंगे।

    उन्होंने कहा कि उनके लिए पंजाब और देश का विकास सबसे महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही धार्मिक और सांप्रदायिक सद्भाव को भी उन्होंने उतना ही अहम बताया। उनके मुताबिक, पंजाब की सामाजिक संरचना और आपसी भाईचारे को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाना चाहिए।

    सुखबीर बादल ने अपने पिता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को भी याद किया। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह बादल ने हमेशा सभी समुदायों और क्षेत्रों को साथ लेकर चलने की कोशिश की। उनके अनुसार, उनके पिता की राजनीति में सांप्रदायिक सौहार्द और पंजाब की शांति को विशेष महत्व दिया जाता था।

    सुखबीर बादल ने कहा कि प्रकाश सिंह बादल ने कभी उन ताकतों के सामने समझौता नहीं किया, जो पंजाब के शांतिपूर्ण वातावरण को प्रभावित करना चाहती थीं। उन्होंने इसी सोच को आगे बढ़ाने की बात कही और कहा कि राज्य में भाईचारा बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है।

    नांदेड़ की घटना का जिक्र करते हुए सुखबीर बादल ने अपने ऊपर हुए पिछले हमले की भी बात की। उन्होंने कहा कि दोनों घटनाओं का संबंध बेहद पवित्र धार्मिक स्थलों से है। उन्होंने पहले अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर और अब नांदेड़ स्थित तख्त हजूर साहिब में हुई घटनाओं का उल्लेख किया।

    उन्होंने कहा कि चाहे कितनी भी कोशिशें क्यों न की जाएं, अंतिम निर्णय ईश्वर के हाथ में है। सुखबीर बादल ने विश्वास जताया कि गुरु साहिब का आशीर्वाद उनके साथ है और पंजाब की शांति को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतें अपने उद्देश्य में सफल नहीं होंगी।

    अकाली दल प्रमुख ने कहा कि पंजाब ने लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों का सामना किया है और राज्य की जनता शांति तथा भाईचारे को महत्व देती है। उन्होंने कहा कि किसी भी घटना का असर पंजाब के सामाजिक माहौल पर नहीं पड़ना चाहिए और सभी समुदायों को संयम बनाए रखना जरूरी है।

    सुखबीर बादल ने यह भी स्पष्ट किया कि वह ऐसी घटनाओं से भयभीत होकर अपनी राजनीतिक और सामाजिक जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने पंजाब की एकता, धार्मिक सद्भाव और विकास को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    नांदेड़ की घटना के बाद उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और पंजाब के सामाजिक माहौल को लेकर चर्चा तेज है। बादल ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी ऐसी कोशिश को सफल नहीं होने देने की अपील की, जिससे समुदायों के बीच तनाव पैदा हो सकता है।

  • दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजी इतिहास सिलेबस में बड़ा बदलाव, दिल्ली सल्तनत पर केंद्रित मुख्य पेपर नए पाठ्यक्रम से हटाया गया

    दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजी इतिहास सिलेबस में बड़ा बदलाव, दिल्ली सल्तनत पर केंद्रित मुख्य पेपर नए पाठ्यक्रम से हटाया गया

    नई दिल्ली । दिल्ली विश्वविद्यालय ने पोस्टग्रेजुएट इतिहास के पाठ्यक्रम में बदलाव किया है। जुलाई 2026 से लागू नए सिलेबस में दिल्ली सल्तनत के इतिहास से जुड़े एक प्रमुख पेपर को तीसरे सत्र की अंतिम सूची से हटा दिया गया है। यह बदलाव नई शिक्षा नीति और नए पीजी शिक्षा ढांचे के अनुरूप किए गए पाठ्यक्रम संशोधन का हिस्सा बताया गया है।

    हटाए गए विषय का नाम दिल्ली सल्तनत : मध्यकालीन उत्तर भारत में सत्ता की बनावट था। इस पेपर में 13वीं और 14वीं सदी के दौरान दिल्ली सल्तनत की राजनीतिक व्यवस्था, शासन प्रणाली और सत्ता के स्वरूप का अध्ययन कराया जाता था। विषय के जरिए विद्यार्थियों को उस दौर के राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक बदलावों को समझने का अवसर मिलता था।

    नए पाठ्यक्रम में केवल दिल्ली सल्तनत से जुड़े पेपर में ही बदलाव नहीं हुआ है। उत्तर भारत के इतिहास से संबंधित लगभग 1400 से 1550 की अवधि वाला एक अन्य विषय भी तीसरे सत्र की अंतिम सूची में शामिल नहीं किया गया है। इससे मध्यकालीन भारतीय इतिहास के अध्ययन की संरचना में बदलाव दिखाई देता है।

    पाठ्यक्रम में प्रस्तावित कई अन्य विषयों को भी अंतिम रूप से जगह नहीं मिली है। इनमें शुरुआती भारत में महिलाओं और लिंग से संबंधित इतिहास, प्राचीन भारत में राजनीतिक व्यवस्था तथा प्राचीन भारतीय साहित्य में धर्म और समाज जैसे विषय शामिल हैं। इन बदलावों के कारण इतिहास के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध वैकल्पिक विषयों का दायरा पहले की तुलना में अलग हो गया है।

    इतिहास विभाग की ओर से तीसरे सत्र के लिए कुल 38 विशेष वैकल्पिक विषय प्रस्तावित किए गए थे। अंतिम पाठ्यक्रम में इनमें से 16 विषयों को ही शामिल किया गया है। इस तरह 22 प्रस्तावित विषय अंतिम सूची का हिस्सा नहीं बने हैं। विश्वविद्यालय के नए पीजी ढांचे के तहत विषयों के चयन और संरचना को नए तरीके से व्यवस्थित किया गया है।

    दिल्ली सल्तनत से संबंधित पेपर को हटाए जाने को समझने के लिए स्नातक और परास्नातक स्तर के पाठ्यक्रम के बीच अंतर भी महत्वपूर्ण है। परास्नातक स्तर पर हटाए गए पेपर में केवल सल्तनत काल की घटनाओं का सामान्य परिचय नहीं दिया जाता था, बल्कि सत्ता, शासन और इतिहास को समझने के अलग-अलग दृष्टिकोणों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाता था।

    वहीं स्नातक स्तर पर दिल्ली सल्तनत के इतिहास से संबंधित विषय अभी अलग स्वरूप में पढ़ाया जाता है। इसमें इस कालखंड की प्रमुख घटनाओं, शासकों, राजनीतिक परिस्थितियों और व्यापक ऐतिहासिक विकास का अध्ययन शामिल होता है। इसलिए पीजी के एक विशेष पेपर को हटाने का अर्थ यह नहीं है कि दिल्ली सल्तनत का इतिहास दिल्ली विश्वविद्यालय की पूरी शैक्षणिक व्यवस्था से समाप्त हो गया है।

    नए बदलावों के पीछे विश्वविद्यालय की पाठ्यक्रम संरचना को नई शिक्षा नीति और संशोधित पीजी शिक्षा ढांचे के अनुरूप तैयार करने की प्रक्रिया बताई गई है। इसमें वैकल्पिक विषयों की संख्या, उनकी विशेषज्ञता और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अध्ययन क्षेत्रों को नए तरीके से व्यवस्थित किया गया है।

    इतिहास जैसे विषय में पाठ्यक्रम में होने वाले बदलाव अकादमिक अध्ययन की दिशा को प्रभावित करते हैं। विशेष रूप से परास्नातक स्तर पर विषयों का चयन विद्यार्थियों को किसी ऐतिहासिक कालखंड को अलग-अलग दृष्टिकोणों से समझने का अवसर देता है। ऐसे में नए पाठ्यक्रम के तहत शामिल विषयों और हटाए गए विषयों को लेकर अकादमिक क्षेत्र में चर्चा होना स्वाभाविक है।

    दिल्ली विश्वविद्यालय में लागू किए गए इस संशोधित पाठ्यक्रम के तहत अब विद्यार्थियों को उपलब्ध अंतिम 16 वैकल्पिक विषयों में से अपने अध्ययन क्षेत्र का चयन करना होगा। विश्वविद्यालय की नई व्यवस्था में इतिहास के विभिन्न कालखंडों और विषयगत क्षेत्रों को नए शैक्षणिक ढांचे के अनुरूप व्यवस्थित करने पर जोर दिया गया है।

  • जनगणना 2027 में जाति के सवाल पर गिरिराज सिंह का राहुल गांधी पर हमला, बोले अपनी जाति बतानी पड़ेगी

    जनगणना 2027 में जाति के सवाल पर गिरिराज सिंह का राहुल गांधी पर हमला, बोले अपनी जाति बतानी पड़ेगी

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने आगामी जनगणना 2027 के लिए सवालों की सूची जारी कर दी है। इस बार जनगणना में जाति से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इसी मुद्दे को लेकर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि अब उन्हें भी अपनी जाति बतानी पड़ेगी। उनके इस बयान के बाद जाति जनगणना का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

    गिरिराज सिंह ने कहा कि जनगणना में जब जाति से संबंधित जानकारी मांगी जाएगी तो राहुल गांधी को भी अपनी जाति बतानी होगी। उन्होंने राहुल गांधी पर राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि उन्हें अपनी जाति के बारे में जवाब देना पड़ा तो उनके लिए स्थिति अलग हो सकती है। केंद्रीय मंत्री ने इस दौरान राहुल गांधी के राजनीतिक रुख पर भी सवाल उठाए।

    जनगणना 2027 के लिए जारी किए गए प्रश्नों में जाति से संबंधित सवाल को विशेष रूप से शामिल किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जाति संबंधी प्रश्न सूची में 10वें स्थान पर है। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के साथ जाति की जानकारी का विकल्प भी जोड़ा गया है। यह बदलाव सामाजिक संरचना से जुड़ा विस्तृत आंकड़ा तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    आजादी के बाद होने वाली जनगणनाओं के संदर्भ में यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बार सभी समुदायों की जाति संबंधी जानकारी दर्ज किए जाने की व्यवस्था की गई है। वर्ष 2011 की जनगणना के फॉर्म में जाति से जुड़े सवाल के तहत मुख्य रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित जानकारी दर्ज की जाती थी।

    नई जनगणना में केवल जाति तक सीमित जानकारी नहीं ली जाएगी। व्यक्ति का नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, वैवाहिक स्थिति, विवाह के समय उम्र, पति या पत्नी का नाम, राष्ट्रीयता और धर्म जैसे विषयों से संबंधित जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इसके साथ माता-पिता से जुड़ी जानकारी भी जनगणना प्रक्रिया का हिस्सा होगी।

    शिक्षा और डिजिटल साक्षरता को लेकर भी सवाल पूछे जाने हैं। व्यक्ति किसी शैक्षणिक संस्थान में पढ़ रहा है या नहीं, उसकी उच्चतम शैक्षणिक योग्यता क्या है और संबंधित अध्ययन क्षेत्र कौन सा है, जैसी जानकारियां दर्ज की जाएंगी। इससे देश की शिक्षा व्यवस्था और मानव संसाधन से जुड़े आंकड़ों को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिल सकती है।

    जनगणना में लोगों की आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जाएगी। व्यक्ति ने पिछले एक वर्ष में काम किया है या नहीं, उसका व्यवसाय क्या है और वह किस क्षेत्र में कार्य करता है, जैसे प्रश्न शामिल किए गए हैं। कामगार की श्रेणी और काम से जुड़ी अन्य गतिविधियों के बारे में भी जानकारी ली जाएगी।

    इसके अलावा काम की तलाश, काम करने की उपलब्धता और कार्यस्थल तक आने जाने से जुड़े विवरण भी दर्ज किए जाएंगे। जनगणना के दौरान मोबाइल नंबर, आधार, मतदाता पहचान पत्र और बैंक खाते से संबंधित सवालों को भी शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    जाति जनगणना को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच पहले से राजनीतिक मतभेद रहे हैं। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल लंबे समय से जातिगत आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग करते रहे हैं। ऐसे में जनगणना 2027 में जाति संबंधी जानकारी शामिल किए जाने का निर्णय राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।