Category: National

  • जालंधर ब्लास्ट की जांच में नया मोड़, दूर से मोबाइल सिग्नल से ट्रिगर किया गया IED हमला

    जालंधर ब्लास्ट की जांच में नया मोड़, दूर से मोबाइल सिग्नल से ट्रिगर किया गया IED हमला

    नई दिल्ली ।  जालंधर में बीएसएफ मुख्यालय के बाहर हुए धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मामले में अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क से जुड़े नए और गंभीर खुलासे सामने आ रहे हैं। शुरुआती जांच में यह संकेत मिला है कि इस विस्फोट के पीछे पाकिस्तान में बैठे एक आतंकी हैंडलर का हाथ हो सकता है, जिसने मोबाइल सिम आधारित आधुनिक तकनीक के जरिए इस घटना को अंजाम देने की योजना बनाई। इस पूरे मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता को और बढ़ा दिया है, क्योंकि यह हमला पारंपरिक तरीकों से हटकर अत्याधुनिक रिमोट ट्रिगरिंग सिस्टम के इस्तेमाल की ओर इशारा करता है।

    जांच रिपोर्ट के अनुसार, विस्फोटक उपकरण को पहले से ही घटनास्थल के पास प्लांट किया गया था और उसमें एक सिम कार्ड को विशेष डिवाइस के साथ जोड़ा गया था। इसके बाद यह सिम नंबर पाकिस्तान में बैठे हैंडलर को भेजा गया, जिसने कॉल या मैसेज के जरिए डिवाइस को सक्रिय किया। जैसे ही उस सिग्नल को सिस्टम ने रिसीव किया, एक इलेक्ट्रॉनिक रिले सर्किट सक्रिय हुआ और डेटोनेटर के जरिए विस्फोट हो गया। इस पूरी प्रक्रिया में किसी व्यक्ति की मौके पर मौजूदगी या किसी तार से कनेक्शन की आवश्यकता नहीं होती, जिससे इस तकनीक को बेहद खतरनाक माना जा रहा है।

    सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक आतंकवाद के नए डिजिटल स्वरूप को दर्शाती है, जिसमें साधारण मोबाइल नेटवर्क का उपयोग विस्फोटक को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। इसमें जीएसएम मॉड्यूल, सिम कार्ड और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट का उपयोग कर हजारों किलोमीटर दूर बैठे व्यक्ति द्वारा भी विस्फोट को ट्रिगर किया जा सकता है। यह तरीका न केवल आसान है बल्कि इसे ट्रेस करना भी पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होता है।

    इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल नेटवर्क डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स की गहन जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि विस्फोटक सामग्री को मौके तक कैसे पहुंचाया गया और इसमें किन स्थानीय सहयोगियों की भूमिका रही।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस तरह की घटनाएं सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकी नेटवर्क की बदलती रणनीति को दर्शाती हैं, जहां अब तकनीक का इस्तेमाल हथियार के रूप में किया जा रहा है। यह हमला न केवल सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि आने वाले समय में आतंकवाद तकनीकी रूप से और अधिक उन्नत रूप ले सकता है।

    फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस हमले के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

  • अहमदाबाद में विकास की नई उड़ान: अमित शाह बोले- गुजरात को AI, सेमीकंडक्टर और सर्विस सेक्टर में बनाएंगे अग्रणी राज्य

    अहमदाबाद में विकास की नई उड़ान: अमित शाह बोले- गुजरात को AI, सेमीकंडक्टर और सर्विस सेक्टर में बनाएंगे अग्रणी राज्य


    नई दिल्ली ।  अहमदाबाद में विकास और तकनीक की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण किया, जिनमें ‘मिलियन माइंड्स टेक पार्क’ और ‘गणेश रियल एस्टेट मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट’ शामिल हैं। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि गुजरात अब केवल औद्योगिक उत्पादन का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में यह राज्य तकनीक, सेवा क्षेत्र और नवाचार की वैश्विक पहचान बनने की ओर अग्रसर है। उनके अनुसार राज्य की विकास यात्रा अब एक नए चरण में प्रवेश कर रही है, जहां डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में तेजी से विस्तार होगा।

    लोकार्पण कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि गुजरात ने हमेशा देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और अब यही राज्य तकनीकी क्रांति का नेतृत्व भी करेगा। ‘मिलियन माइंड्स टेक पार्क’ को उन्होंने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई एक ऐसी परियोजना बताया, जो हजारों युवाओं को उच्च कौशल आधारित रोजगार उपलब्ध कराएगी। इस टेक पार्क में आधुनिक तकनीकी कंपनियों, अनुसंधान केंद्रों और स्टार्टअप्स के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा, जिससे नवाचार और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

    इसके साथ ही ‘गणेश रियल एस्टेट मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट’ को शहरी विकास और आधुनिक रियल एस्टेट प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बताया गया। यह संस्थान आधुनिक शहरी नियोजन, तकनीक आधारित शिक्षा और वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण देकर कुशल मानव संसाधन तैयार करेगा। इससे न केवल रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और पेशेवरता बढ़ेगी, बल्कि शहरी विकास योजनाओं को भी नई दिशा मिलेगी।

    कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि अहमदाबाद-गिफ्ट सिटी-गांधीनगर कॉरिडोर में विकसित हो रही यह टेक सिटी हजारों करोड़ रुपये के निवेश और लाखों रोजगार के अवसर पैदा करने की क्षमता रखती है। इस परियोजना के तहत ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस, आवासीय सुविधाएं और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है, जो भारत को वैश्विक टेक्नोलॉजी और वित्तीय सेवाओं के नक्शे पर और मजबूत स्थिति में लाएगा।

    अमित शाह ने यह भी कहा कि गुजरात पहले से ही मैन्युफैक्चरिंग, पोर्ट डेवलपमेंट, ग्रीन एनर्जी और फार्मा सेक्टर में अग्रणी रहा है, और अब यह राज्य आईटी और नॉलेज-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में गुजरात देश का प्रमुख टेक्नोलॉजी और सर्विस सेक्टर हब बनकर उभरेगा।

    कार्यक्रम में यह भी उल्लेख किया गया कि राज्य में विकसित हो रही सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम और गिफ्ट सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स भारत को वैश्विक निवेश का आकर्षण केंद्र बना रहे हैं। इस दौरान यह संदेश भी सामने आया कि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में गुजरात की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी और यह राज्य देश की विकास यात्रा का प्रमुख इंजन साबित होगा।

  • DU PG Admission 2026 शुरू, जानें आवेदन प्रक्रिया और जरूरी तारीखें

    DU PG Admission 2026 शुरू, जानें आवेदन प्रक्रिया और जरूरी तारीखें

    नई दिल्ली। देश की प्रतिष्ठित University of Delhi ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पोस्टग्रेजुएट कोर्सेज में दाखिले की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पीजी में एडमिशन लेने के इच्छुक छात्र अब कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम यानी CSAS पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस बार यूनिवर्सिटी ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के तहत एक वर्षीय और दो वर्षीय मास्टर डिग्री प्रोग्राम भी शुरू किए हैं, जिससे छात्रों को नए विकल्प मिलेंगे।

    7 जून तक भर सकेंगे फॉर्म
    दिल्ली यूनिवर्सिटी के अनुसार आवेदन प्रक्रिया 16 मई 2026 से शुरू हो चुकी है। छात्र 7 जून 2026 रात 11:59 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यूनिवर्सिटी ने छात्रों को सलाह दी है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें और समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।

    CUET PG स्कोर से होगा एडमिशन
    इस बार पीजी कोर्सेज में दाखिला केवल CUET PG 2026 स्कोर के आधार पर दिया जाएगा। यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया है कि संबंधित कोर्स में एडमिशन के लिए छात्रों को उसी विषय में CUET PG परीक्षा देना जरूरी होगा। जो छात्र फिलहाल ग्रेजुएशन के तीसरे या चौथे वर्ष में पढ़ाई कर रहे हैं, वे भी आवेदन कर सकते हैं, लेकिन उन्हें पात्रता की सभी शर्तें पूरी करनी होंगी।

    DigiLocker फीचर से आसान होगी प्रक्रिया
    इस बार एडमिशन प्रक्रिया को ज्यादा आसान और डिजिटल बनाने के लिए DigiLocker/API Setu आधारित ऑटो-इंटीग्रेशन फीचर जोड़ा गया है। इसके जरिए छात्रों का नाम, जन्मतिथि, श्रेणी और CUET स्कोर जैसी जानकारी स्वतः पोर्टल पर अपडेट हो जाएगी। इससे दस्तावेज अपलोड करने में आसानी होगी और गलतियों की संभावना भी कम रहेगी।

    आवेदन शुल्क कितना है?
    यूनिवर्सिटी द्वारा जारी जानकारी के अनुसार आवेदन शुल्क श्रेणी के अनुसार तय किया गया है-
    SC/ST/PwBD वर्ग : ₹100 प्रति प्रोग्राम
    UR/OBC-NCL/EWS वर्ग : ₹250 प्रति प्रोग्राम
    छात्र एक से अधिक कोर्स के लिए भी आवेदन कर सकते हैं, लेकिन प्रत्येक प्रोग्राम के लिए अलग शुल्क देना होगा।

    कौन-कौन से डॉक्यूमेंट होंगे जरूरी?
    आवेदन के दौरान छात्रों को कुछ जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे, जिनमें-
    CUET PG स्कोर कार्ड
    ग्रेजुएशन मार्कशीट
    पासपोर्ट साइज फोटो
    हस्ताक्षर
    कैटेगरी सर्टिफिकेट (यदि लागू हो)
    आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र

    छात्रों को दी गई खास सला
    दिल्ली यूनिवर्सिटी ने छात्रों से कहा है कि वे एडमिशन से जुड़ी हर अपडेट के लिए आधिकारिक CSAS पोर्टल नियमित रूप से चेक करते रहें। सोशल मीडिया पर कई छात्रों ने शुरुआती तकनीकी समस्याओं की जानकारी भी साझा की है। ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि आवेदन की अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय जल्द फॉर्म भरना बेहतर रहेगा।

    नए कोर्स और बढ़ते अवसर
    NEP के तहत शुरू किए गए नए मास्टर प्रोग्राम्स के चलते छात्रों को अब अधिक फ्लेक्सिबिलिटी और स्पेशलाइजेशन का मौका मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में दिल्ली यूनिवर्सिटी के ये नए कोर्स छात्रों के करियर को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएंगे।

  • 12वीं के बाद ऐसे बनें Architect, जानिए एंट्रेंस एग्जाम से लेकर सैलरी तक पूरी डिटेल

    12वीं के बाद ऐसे बनें Architect, जानिए एंट्रेंस एग्जाम से लेकर सैलरी तक पूरी डिटेल


    नई दिल्ली। अगर आप 12वीं के बाद ऐसा करियर चुनना चाहते हैं, जिसमें क्रिएटिविटी, टेक्नोलॉजी और शानदार कमाई तीनों का बेहतरीन कॉम्बिनेशन हो, तो आर्किटेक्चर आपके लिए शानदार विकल्प साबित हो सकता है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के दौर में प्रोफेशनल आर्किटेक्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। एक Architect सिर्फ इमारतों का डिजाइन तैयार नहीं करता, बल्कि स्पेस प्लानिंग, सुरक्षा, पर्यावरण और आधुनिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए पूरी संरचना की योजना बनाता है।

    आर्किटेक्ट बनने के लिए सबसे पहले 12वीं कक्षा PCM यानी Physics, Chemistry और Mathematics विषयों के साथ पास करना जरूरी होता है। इसके बाद छात्रों को B.Arch यानी बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर कोर्स में एडमिशन लेना होता है। यह 5 साल का प्रोफेशनल डिग्री कोर्स है, जिसे पूरा करने के बाद छात्र आर्किटेक्ट के रूप में करियर शुरू कर सकते हैं।

    देश के प्रतिष्ठित आर्किटेक्चर कॉलेजों में दाखिले के लिए NATA (National Aptitude Test in Architecture) और JEE Main Paper 2 जैसी प्रवेश परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं। इन परीक्षाओं में छात्रों की ड्रॉइंग स्किल, क्रिएटिविटी, लॉजिकल सोच और गणितीय क्षमता का मूल्यांकन किया जाता है। अच्छे स्कोर के आधार पर छात्रों को टॉप सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में प्रवेश मिलता है।

    आर्किटेक्चर की पढ़ाई के दौरान छात्रों को बिल्डिंग डिजाइन, ड्राफ्टिंग, 3D मॉडलिंग, अर्बन प्लानिंग, इंटीरियर डिजाइन और कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी जैसी कई चीजें सिखाई जाती हैं। इसके साथ ही आज के डिजिटल दौर में AutoCAD, Revit, SketchUp, BIM और 3D Visualization जैसे सॉफ्टवेयर की जानकारी होना बेहद जरूरी माना जाता है। जिन छात्रों की डिजाइनिंग और टेक्निकल स्किल मजबूत होती है, उन्हें बेहतर अवसर आसानी से मिल जाते हैं।

    इस फील्ड में सिर्फ तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि कम्युनिकेशन स्किल, प्रॉब्लम सॉल्विंग एबिलिटी और क्रिएटिव सोच भी बेहद अहम होती है। एक सफल आर्किटेक्ट को क्लाइंट की जरूरत समझकर डिजाइन तैयार करना होता है, इसलिए प्रेजेंटेशन और प्लानिंग स्किल्स भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

    डिग्री पूरी करने के बाद छात्र आर्किटेक्चर फर्म, रियल एस्टेट कंपनियों, सरकारी विभागों, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में नौकरी कर सकते हैं। कई छात्र अनुभव लेने के बाद अपना खुद का आर्किटेक्चर स्टूडियो या डिजाइन कंसल्टेंसी भी शुरू करते हैं।

    अगर सैलरी की बात करें तो शुरुआती दौर में एक फ्रेशर आर्किटेक्ट को सालाना 3 लाख से 6 लाख रुपए तक का पैकेज मिल सकता है। वहीं अनुभव और विशेषज्ञता बढ़ने के साथ यह कमाई 10 लाख रुपए सालाना या उससे भी अधिक पहुंच सकती है। विदेशों में भी भारतीय आर्किटेक्ट्स की काफी डिमांड रहती है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले वर्षों में ग्रीन बिल्डिंग, सस्टेनेबल डिजाइन और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के बढ़ते ट्रेंड के कारण आर्किटेक्चर सेक्टर में करियर के अवसर तेजी से बढ़ने वाले हैं। ऐसे में क्रिएटिव और टेक्निकल सोच रखने वाले छात्रों के लिए यह फील्ड सुनहरा भविष्य साबित हो सकती है।

  • आत्मनिर्भरता की नई उड़ान: महिला उद्यमियों के लिए दिल्ली सरकार का ऐतिहासिक आर्थिक पैकेज

    आत्मनिर्भरता की नई उड़ान: महिला उद्यमियों के लिए दिल्ली सरकार का ऐतिहासिक आर्थिक पैकेज

    नई दिल्ली ।  दिल्ली सरकार ने राजधानी की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने घोषणा की है कि महिला स्वयं सहायता समूहों और स्टार्टअप्स को अब 10 करोड़ रुपये तक का बिना गिरवी ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इस ऋण की पूरी गारंटी स्वयं दिल्ली सरकार लेगी, जिससे महिलाओं को बिना किसी संपत्ति के जोखिम के बड़ा वित्तीय सहयोग मिल सकेगा।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस पहल को महिलाओं की उद्यमिता को नई दिशा देने वाला कदम बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि राजधानी की हर महिला केवल घरेलू कार्यों तक सीमित न रहे, बल्कि अपने कौशल और क्षमता के आधार पर एक सफल उद्यमी बन सके। इसके लिए वित्तीय सहायता सबसे महत्वपूर्ण आधार है, जिसे मजबूत करने के लिए यह योजना लागू की जा रही है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि महिला स्वयं सहायता समूहों और स्टार्टअप्स को केवल ऋण ही नहीं दिया जाएगा, बल्कि उनके उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए भी व्यापक मंच उपलब्ध कराया जाएगा। इसके तहत बड़े मॉल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्सों में स्वदेशी उत्पादों के लिए नियमित प्रदर्शन और बिक्री के अवसर दिए जाएंगे, ताकि स्थानीय उत्पादों को एक स्थायी और मजबूत बाजार मिल सके।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश में ‘स्वदेशी अपनाओ’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे विचार तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और दिल्ली सरकार भी उसी दिशा में काम कर रही है। उनका कहना है कि भारत में बने हस्तशिल्प, खादी, घरेलू उत्पाद और अन्य स्थानीय वस्तुएं किसी भी विदेशी उत्पाद से कम नहीं हैं, जरूरत केवल उन्हें सही पहचान और बाजार देने की है।

    इस अवसर पर यह भी बताया गया कि सरकार बैंकिंग संस्थानों के साथ मिलकर महिलाओं को आसान और सरल ऋण प्रक्रिया उपलब्ध कराने पर काम कर रही है। स्वयं सहायता समूहों की वित्तीय पहुंच को मजबूत करने के लिए बैंकिंग व्यवस्था को और अधिक सक्रिय बनाया जा रहा है, ताकि महिलाओं को किसी भी स्तर पर आर्थिक बाधाओं का सामना न करना पड़े।

    सरकार का मानना है कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होंगी तो समाज और परिवार दोनों की स्थिति मजबूत होगी। इसी उद्देश्य से महिलाओं को छोटे उद्योगों, हस्तनिर्मित उत्पादों और स्टार्टअप गतिविधियों से जोड़ने के प्रयास तेज किए जा रहे हैं। इससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिलेगी।

    इसके अलावा सरकार ने यह भी बताया कि स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न मेलों और प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाएगा, जहां महिला उद्यमियों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। ऐसे आयोजनों से उन्हें न केवल बाजार मिलेगा, बल्कि अपने व्यवसाय को विस्तार देने का अनुभव भी प्राप्त होगा।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नागरिकों को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे विदेशी वस्तुओं की बजाय स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दें, जिससे देश के छोटे उद्योगों और कारीगरों को सीधा लाभ मिल सके।

    यह नई योजना महिलाओं के लिए केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का एक बड़ा अवसर भी है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में दिल्ली की महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करें, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

  • तकनीक और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम: गुजरात में स्व-गणना शुरू, राज्यभर में जनगणना प्रक्रिया को मिला नया आयाम

    तकनीक और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम: गुजरात में स्व-गणना शुरू, राज्यभर में जनगणना प्रक्रिया को मिला नया आयाम

    नई दिल्ली ।  गुजरात में जनगणना-2027 की तैयारियों के बीच एक नए डिजिटल युग की शुरुआत देखने को मिल रही है, जहां स्व-गणना प्रक्रिया को औपचारिक रूप से शुरू कर दिया गया है और राज्य सरकार ने नागरिकों से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की है। इस पहल के तहत लोगों को यह सुविधा दी गई है कि वे अपने घर और परिवार से जुड़ी आवश्यक जानकारी स्वयं ऑनलाइन माध्यम से दर्ज कर सकें, जिससे न केवल प्रक्रिया तेज होगी बल्कि डेटा संग्रह अधिक सटीक और पारदर्शी भी बन सकेगा। इस महत्वपूर्ण अभियान की शुरुआत राज्य के शीर्ष नेतृत्व द्वारा स्वयं अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर की गई, जिससे यह संदेश दिया गया कि यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी है जिसमें हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि नागरिकों के पास एक निश्चित अवधि के भीतर अपनी जानकारी दर्ज करने का अवसर होगा, जिसके बाद फील्ड स्तर पर घर-घर जाकर सत्यापन और विस्तृत सर्वेक्षण का कार्य किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है और पहली बार जनगणना को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अधिक आधुनिक स्वरूप दिया गया है, जिससे डेटा संग्रह की गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार की उम्मीद है।

    इस व्यवस्था के तहत लोगों से उनके आवास, परिवार के सदस्यों, उपलब्ध सुविधाओं और जीवन स्तर से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी ली जा रही है, ताकि नीति निर्माण और विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। सरकार का मानना है कि जब वास्तविक और सटीक डेटा उपलब्ध होगा, तो सामाजिक कल्याण योजनाओं को अधिक लक्षित और प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा। इसी के साथ पारंपरिक घर-घर सर्वेक्षण की प्रक्रिया भी जारी रखी गई है ताकि उन लोगों तक भी पहुंच सुनिश्चित हो सके जो डिजिटल माध्यम का उपयोग करने में सक्षम नहीं हैं। फील्ड स्तर पर नियुक्त कर्मचारी मोबाइल तकनीक के माध्यम से डेटा एकत्र करेंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और त्रुटियों की संभावना कम होगी।

    राज्य में इस स्व-गणना प्रक्रिया को लेकर लोगों में जागरूकता और भागीदारी बढ़ रही है, और बड़ी संख्या में परिवार इस डिजिटल पहल से जुड़कर अपनी जानकारी दर्ज कर रहे हैं। यह कदम न केवल प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाता है बल्कि नागरिकों को भी एक सरल और सुरक्षित माध्यम प्रदान करता है जिसके जरिए वे सीधे इस राष्ट्रीय प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं। जनगणना को लेकर यह नया दृष्टिकोण आने वाले समय में देशभर में डेटा प्रबंधन और नीति निर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है, क्योंकि यह पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक तकनीक का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करता है और विकास योजनाओं को अधिक वास्तविक आधार प्रदान करता है।

  • भारतीय रेल वित्त निगम की आक्रामक रणनीति, कर्ज मंजूरी और फंड जुटाने का बड़ा रोडमैप तैयार

    भारतीय रेल वित्त निगम की आक्रामक रणनीति, कर्ज मंजूरी और फंड जुटाने का बड़ा रोडमैप तैयार

    नई दिल्ली ।  भारतीय रेलवे से जुड़ी वित्तीय आवश्यकताओं को मजबूत आधार देने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारतीय रेल वित्त निगम (IRFC) ने चालू वित्त वर्ष के लिए एक बड़ा और महत्वाकांक्षी विस्तार लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके तहत कंपनी ने 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की ऋण मंजूरी का लक्ष्य तय किया है। यह कदम न केवल कंपनी की बढ़ती वित्तीय क्षमता को दर्शाता है, बल्कि देश के बुनियादी ढांचा क्षेत्र में उसके विस्तारशील योगदान को भी रेखांकित करता है। कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक के अनुसार, मजबूत परियोजना पाइपलाइन और लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए यह लक्ष्य पूरी तरह व्यावहारिक और विकासोन्मुख है, जिससे रेलवे और संबंधित क्षेत्रों में निवेश की गति और तेज होगी।

    IRFC ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एक और बड़ा लक्ष्य तय करते हुए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से लगभग 70,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई है, जिससे कंपनी अपनी वित्तीय संरचना को और अधिक मजबूत और विविध बना सके। यह पूंजी जुटाने की रणनीति कंपनी को केवल रेलवे फाइनेंसिंग तक सीमित न रखकर एक व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग संस्था के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    पिछले वित्तीय वर्ष में भी कंपनी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था, जहां उसने लगभग 72,949 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी थी और 35,067 करोड़ रुपये का वितरण किया था, जो उसके वार्षिक अनुमानों से अधिक रहा। इस प्रदर्शन ने यह संकेत दिया कि IRFC की वित्तीय क्षमता और परियोजना निष्पादन की गति दोनों ही मजबूत स्थिति में हैं। इसी अवधि में कंपनी का शुद्ध लाभ बढ़कर 7,009 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 7.8 प्रतिशत अधिक है। लगातार बढ़ते लाभ और मजबूत बैलेंस शीट ने कंपनी की बाजार स्थिति को और मजबूत किया है।

    कंपनी की परिसंपत्तियां भी तेजी से बढ़कर 4.85 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं, जबकि इसका नेटवर्थ 56,748 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर दर्ज किया गया है। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि IRFC न केवल पारंपरिक रेलवे वित्तपोषण तक सीमित है, बल्कि अब यह बिजली उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा, ट्रांसमिशन और उर्वरक जैसे विविध क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। इस रणनीतिक विविधीकरण ने कंपनी की आय संरचना को अधिक स्थिर और मजबूत बनाने में मदद की है।

    IRFC ने अब तक शून्य एनपीए की स्थिति बनाए रखी है, जो उसकी मजबूत वित्तीय अनुशासन और जोखिम प्रबंधन क्षमता को दर्शाता है। कंपनी का शुद्ध ब्याज मार्जिन भी लगातार सुधार के साथ आगे बढ़ रहा है, जिसे आने वाले समय में और बेहतर करने का लक्ष्य रखा गया है। भारतीय रेलवे द्वारा नए ऋण वितरण का उपयोग कम करने के बाद IRFC ने अपनी भूमिका को और व्यापक बनाते हुए विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया है, जिससे यह एक बहुआयामी वित्तीय संस्था के रूप में उभर रही है।

    आने वाले समय में IRFC की यह विस्तार रणनीति देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और बड़े स्तर पर निवेश को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जिससे न केवल रेलवे परियोजनाओं को लाभ मिलेगा, बल्कि ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्रों में भी विकास की रफ्तार तेज हो सकती है।

  • एमसीडी क्षेत्रों में जनगणना अभियान की शुरुआत, हर घर से जुटाई जाएगी विस्तृत जनसांख्यिकी जानकारी

    एमसीडी क्षेत्रों में जनगणना अभियान की शुरुआत, हर घर से जुटाई जाएगी विस्तृत जनसांख्यिकी जानकारी


    नई दिल्ली ।  देश की राजधानी में जनसंख्या और आवास से जुड़े आंकड़ों को अधिक सटीक और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से जनगणना 2027 की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस प्रक्रिया के पहले चरण की शुरुआत एमसीडी क्षेत्रों में घर-घर सर्वेक्षण के साथ की गई है, जिसमें मकानों की सूची तैयार करने और परिवारों से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्र करने का कार्य किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी घर या परिवार का डेटा छूट न जाए और शहर की वास्तविक जनसंख्या संरचना को सही ढंग से समझा जा सके।

    इस व्यापक अभियान के तहत लगभग 32 लाख मकानों का विस्तृत सर्वे किया जाएगा, जिसके लिए पूरे क्षेत्र को 46 हजार से अधिक छोटे ब्लॉकों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक ब्लॉक में करीब 180 से 200 घर शामिल किए गए हैं और अनुमान है कि हर ब्लॉक में 700 से 800 लोग निवास करते हैं। इस कार्य के लिए लगभग 50 हजार जनगणना कर्मियों को तैनात किया गया है, जो निर्धारित क्षेत्रों में जाकर डिजिटल टैबलेट के माध्यम से जानकारी एकत्र करेंगे और उसे सीधे ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज करेंगे।

    इस प्रक्रिया में प्रत्येक जनगणना कर्मी को एक निश्चित ब्लॉक सौंपा गया है और उन्हें घर-घर जाकर परिवारों की स्थिति, मकान की संरचना, उपलब्ध सुविधाओं और संपत्तियों से जुड़े लगभग 33 प्रश्नों के उत्तर दर्ज करने होंगे। इस बार विशेष रूप से किरायेदारों के आंकड़ों पर भी ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि शहर की बड़ी आबादी किराए के मकानों में रहती है। इस डेटा के आधार पर शहरी विकास और भविष्य की योजनाओं को अधिक प्रभावी और वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाएगा।

    सर्वेक्षण के दौरान यदि किसी घर में ताला लगा हुआ मिलता है तो संबंधित कर्मी दोबारा वहां जाएंगे और यदि कोई परिवार दिन में उपलब्ध नहीं होता है तो उनके घर का दौरा देर रात तक भी किया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर परिवार का डेटा सही तरीके से दर्ज किया जाए। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जनगणना कर्मियों और सुपरवाइजरों की निगरानी व्यवस्था भी मजबूत की गई है, जहां हर छह कर्मियों पर एक पर्यवेक्षक तैनात किया गया है।

    इसके साथ ही नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा के लिए जनगणना कर्मियों की पहचान को भी सत्यापित करने की व्यवस्था की गई है, जिसमें उनके पहचान पत्र और क्यूआर कोड स्कैन करके उनकी प्रामाणिकता की पुष्टि की जा सकती है। पहले से ही कई लोगों ने स्व-गणना के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर दी है, जिसे आगे चलकर फील्ड सर्वे के दौरान सत्यापित किया जाएगा।

    कुल मिलाकर यह पूरा अभियान न केवल जनसंख्या के सटीक आंकड़े जुटाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह शहरी नियोजन, संसाधन प्रबंधन और विकास योजनाओं के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करेगा, जिससे आने वाले वर्षों में शहर के विकास को अधिक संतुलित और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

  • सरकार का बड़ा फैसला: शराब टैक्स व्यवस्था बदली, उपभोक्ताओं को मिल सकता है फायदा

    सरकार का बड़ा फैसला: शराब टैक्स व्यवस्था बदली, उपभोक्ताओं को मिल सकता है फायदा

    नई दिल्ली ।  कर्नाटक सरकार ने शराब पर टैक्स लगाने की व्यवस्था में एक बड़ा और संरचनात्मक बदलाव करते हुए राज्य की आबकारी नीति को नए स्वरूप में ढाल दिया है। इस नई नीति के तहत अब शराब पर टैक्स उसकी बोतल की कीमत के आधार पर नहीं, बल्कि उसमें मौजूद अल्कोहल की मात्रा के आधार पर तय किया जाएगा। इस प्रणाली को Alcohol-in-Beverage यानी AIB मॉडल कहा जाता है, जिसे दुनिया के कई देशों में एक पारदर्शी और वैज्ञानिक टैक्स व्यवस्था के रूप में अपनाया जाता है।

    सरकार के इस फैसले के बाद कर्नाटक देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने इस तरह के मॉडल को व्यापक रूप से लागू किया है। नई व्यवस्था को वर्ष 2026-27 के बजट प्रावधानों के तहत लागू किया गया है, जिसके बाद शराब की कीमत तय करने का पूरा ढांचा बदल गया है। अब तक जहां शराब की कीमतें कई स्लैब और सरकारी नियंत्रण के आधार पर तय होती थीं, वहीं अब यह प्रक्रिया अधिक बाजार-आधारित और सरल हो गई है।

    नई नीति के अनुसार इंडियन मेड लिकर की कैटेगरी में भी बड़ा बदलाव किया गया है। पहले जहां कई स्लैब मौजूद थे, उन्हें घटाकर एक सीमित संख्या में लाया गया है, जिससे टैक्स संरचना को समझना और लागू करना दोनों आसान हो गया है। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से न केवल सिस्टम अधिक पारदर्शी बनेगा, बल्कि कर निर्धारण में अनावश्यक जटिलता भी समाप्त होगी।

    आबकारी विभाग के अनुसार इस नई प्रणाली का उद्देश्य शराब की कीमतों को अधिक तर्कसंगत बनाना है, जिससे उपभोक्ताओं को वास्तविक मूल्य निर्धारण का लाभ मिल सके। इसके साथ ही सरकार का यह भी मानना है कि इस मॉडल से पड़ोसी राज्यों के बीच कीमतों का अंतर कम होगा, जिससे अवैध या सीमा पार खरीदारी पर भी अंकुश लग सकता है।

    नई नीति में यह भी प्रावधान किया गया है कि अब कंपनियों को अपने उत्पादों की कीमत और श्रेणी तय करने में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी। हालांकि यह स्वतंत्रता बाजार की मांग और गुणवत्ता के आधार पर नियंत्रित ढांचे के भीतर रहेगी। इससे उद्योग को लचीलापन मिलेगा और प्रतिस्पर्धा भी अधिक संतुलित होने की संभावना है।

    सरकार का दावा है कि यह मॉडल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे आधुनिक टैक्सिंग सिस्टम में से एक माना जाता है, क्योंकि इसमें उत्पाद की वास्तविक संरचना को आधार बनाकर टैक्स लगाया जाता है। इससे न केवल राजस्व प्रणाली अधिक वैज्ञानिक बनती है, बल्कि उपभोक्ता हितों को भी बेहतर तरीके से संतुलित किया जा सकता है।

    हालांकि इस बदलाव को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या वास्तव में इससे शराब की कीमतों में कमी आएगी या कंपनियां नई संरचना के तहत अपने मूल्य निर्धारण को किसी अन्य तरीके से संतुलित करेंगी। आने वाले समय में बाजार की प्रतिक्रिया और उपभोक्ता व्यवहार यह तय करेगा कि यह नीति कितनी प्रभावी साबित होती है। फिलहाल इस बदलाव ने राज्य की आबकारी नीति को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।

  • केरल में नई सरकार की तस्वीर साफ, सतीशन कैबिनेट में चेन्निथला से लेकर युवा चेहरों तक पर बड़ा दांव

    केरल में नई सरकार की तस्वीर साफ, सतीशन कैबिनेट में चेन्निथला से लेकर युवा चेहरों तक पर बड़ा दांव


    नई दिल्ली ।  केरल में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक हलचल अब नई सरकार के गठन पर केंद्रित हो गई है, जहां यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की भारी जीत के बाद वी.डी. सतीशन के नेतृत्व में बनने वाली नई कैबिनेट को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। 140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटों के मजबूत जनादेश के साथ यूडीएफ ने जहां सत्ता में वापसी की है, वहीं अब मंत्रिमंडल में किसे जगह मिलेगी, इस पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हुई हैं। मुख्यमंत्री पद के लिए मनोनीत वी.डी. सतीशन और केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ के बीच हुई महत्वपूर्ण बैठकों के बाद मंत्रिमंडल की रूपरेखा लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, और माना जा रहा है कि विभागों के बंटवारे के साथ नामों की आधिकारिक घोषणा जल्द हो सकती है।

    सूत्रों के अनुसार, नई सरकार में अनुभव और युवा नेतृत्व का संतुलन बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि मंत्रिमंडल न केवल प्रशासनिक रूप से मजबूत हो, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करे। इसी रणनीति के तहत क्षेत्रीय संतुलन को भी प्रमुखता दी गई है, जिसमें त्रावणकोर, कोच्चि और मालाबार क्षेत्रों से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है। इसके साथ ही समुदायिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए नायर, ईझवा, ईसाई और मुस्लिम समुदायों के बीच भी उचित भागीदारी देने की योजना तैयार की गई है, ताकि सरकार को व्यापक सामाजिक स्वीकार्यता मिल सके।

    सबसे चर्चित नामों में वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है, जिन्हें गृह या वित्त जैसे अहम विभाग की जिम्मेदारी मिल सकती है। पार्टी के भीतर उन्हें एक अनुभवी और भरोसेमंद नेता के रूप में देखा जाता है, और ऐसे में उनकी भूमिका नई सरकार में काफी अहम मानी जा रही है। इसके अलावा सहयोगी दलों में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को उनके मजबूत प्रदर्शन के आधार पर महत्वपूर्ण मंत्रालय दिए जाने की संभावना है, जबकि केरल कांग्रेस के जोसेफ गुट को भी सरकार में सम्मानजनक हिस्सेदारी मिलने की उम्मीद है।

    नई कैबिनेट में युवाओं और पहली बार मंत्री बनने वाले चेहरों को भी शामिल किए जाने की तैयारी है, जिससे सरकार में नई ऊर्जा का संचार हो सके। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि आने वाले वर्षों में विकास और प्रशासनिक सुधारों के लिए युवा नेतृत्व की भूमिका अहम होगी। इसके साथ ही महिला प्रतिनिधित्व को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है और दो महिला विधायकों को कैबिनेट में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिससे सरकार का सामाजिक आधार और व्यापक हो सके।

    राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मंत्रिमंडल न केवल सत्ता संतुलन का प्रतीक होगा, बल्कि केरल की विकास यात्रा को नई दिशा देने का भी प्रयास करेगा। मुख्यमंत्री सतीशन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि उनकी सरकार पूरी तरह पारदर्शिता, जवाबदेही और विकास के एजेंडे पर काम करेगी। शपथ ग्रहण समारोह से पहले राज्य में राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरम है और सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि नई सरकार अपने पहले फैसलों से जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरती है।