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  • लड़की बनकर लड़के से इंस्टाग्राम पर चैट, रोमांस के नाम पर अपहरण

    लड़की बनकर लड़के से इंस्टाग्राम पर चैट, रोमांस के नाम पर अपहरण

    मुंबई। महाराष्ट्र के ठाणे में एक फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए 15 वर्षीय लड़के के अपहरण का मामला सामने आया है।
    आरोपियों ने सबसे पहले लड़की बनकर लड़के के साथ भावनात्मक संबंधों को मजबूत किया फिर उसे रोमेंटिक संबंध बनाने के लिए एक जगह पर बुलाया, जहां पर उसका अपहरण करने की कोशिश की गई। हालांकि, इस मामले की जानकारी जल्दी ही पुलिस के पास पहुंच गई, जिससे पुलिस ने लड़के को बचा लिया और चार आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया।

    रिपोर्ट के मुताबिक पीड़ित एक निजी स्कूल में कक्षा दसवीं का छात्र है। आरोपियों ने लड़की के नाम से एक फर्जी आईडी बनाकर उससे दोस्ती बढ़ाई, फिर धीरे-धीरे उसके साथ रोमेंटिक बातें करने लगे। कुछ समय के बाद जब आरोपियों ने पीड़ित का भरोसा जीत लिया और उसे रोमांटिक संबंध के लिए ठाणे के कल्याण पूर्व स्थित नंदीवली में मिलने बुला लिया।

    भरोसे में आने पर लड़का कैब के जरिए वहां पहुंच गया।

    लड़के के वहां पहुंचते ही चारों आरोपियों ने उसका अपहरण कर लिया और उसे एक रिहायशी इमारत के कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद उन्होंने उसके परिजनों से संपर्क करके 20 लाख रुपए की मांग की और दवाब बनाने के लिए कई मैसेज भी भेजे।

    इसके बाद लड़के के माता-पिता की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत ही कार्रवाई शुरू की और सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच के आधार पर पहले कार और फिर उस जगह का पता लगाया, जहां पर लड़के को छोड़ा गया था। इसके बाद पुलिस ने नंदीवली के कमरे में छापा मारा औऱ लड़के को छुड़ा लिया, इसके बाद पुलिस ने 24 घंटे के अंदर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस के मुताबिक आरोपियों की पहचान प्रदीप कुमार जायसवाल (24), विशाल पासी(19), चंदन मौर्य (19) और सत्यम यादव के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि उन पर भारतीय न्याय संहिता के तहत अपहरण और जबरन वसूली के आरोप लगाकर पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

  • एक शख्स ने सचमुच खोद दी अपनी ही कब्र, लाखों खर्च कर बनवाया अपना मकबरा

    एक शख्स ने सचमुच खोद दी अपनी ही कब्र, लाखों खर्च कर बनवाया अपना मकबरा

    हैदराबाद। ‘अपनी कब्र खुद खोदने’ वाली कहावत तो आपने अक्सर सुनी होगी। लेकिन क्या हो अगर आपको पता चले कि इस कहावत को एक शख्स ने सच कर दिखाया है। इस शख्स ने ना सिर्फ मौत के बाद खुद को दफनाए जाने की तैयारी कर ली है, बल्कि उसने अपनी कब्र भी तैयार कर ली है। जानकारी के मुताबिक उसने इस पर करीब 12 लाख रुपए खर्च भी किए हैं।
    एक रिपोर्ट के मुताबिक तेलंगाना के एक गांव रहने वाले 80 साल के इस बुजुर्ग की इस हरकत से स्थानीय लोग दंग रह गए हैं। जगतियाल जिले के लक्ष्मीपुर के रहने वाले नक्का इंद्रय्या के इस अपने मकबरे को एक नाम भी दिया गया है। लोग इसे ‘ग्रेनाइट महल’ के नाम से पुकारते हैं क्योंकि इसे पूरी तरह ग्रेनाइट से बनाया गया है। इसकी कीमत लगभग 12 लाख रुपये बताई जा रही है।
    ढांचा करीब 5 फीट गहरा और छह फीट से ज्यादा लंबा है। डिजाइन को बनाने के लिए तमिलनाडु से खास तौर पर एक मिस्त्री को बुलाया गया था।
    रोज करते हैं सफाई

    इंद्रय्या ने अपनी दिवंगत पत्नी की कब्र के बगल में अपनी कब्र बनवाई है। वह रोज अपनी कब्र की सफाई करने भी जाते हैं और आस-पास के पौधों को पानी देते हैं, पत्थर को साफ करते हैं और फिर बैठकर सुकून के पल बिताते हैं। वह कहते हैं कि उन्हें यह जानकर सुकून मिलता है कि सब कुछ ठीक वैसे ही तैयार किया गया है जैसा वह चाहते थे।

    रिपोर्ट में इंद्रय्या के हवाले से बताया गया, “यह मेरा घर है, जिसे मैंने अपने लिए खोदा है। मेरे मरने के बाद, मुझे यहीं दफनाया जाएगा, इसलिए मैंने इसे ठीक वैसे ही बनाया जैसा मैं चाहता था।”

    वह यह भी कहते हैं कि मरने के बाद वह किसी पर बोझ नहीं बनना चाहते। उन्होंने कहा, “मैं किसी पर बोझ नहीं बनना चाहता था। मौत से डरने की कोई जरूरत नहीं है। हर किसी को मरना है। मुझे भी मरना है। कम से कम मुझे पता है कि मुझे कहां दफनाया जाएगा।”

  • कश्मीरियों को निशाना बनाने वालों पर भड़के फारुख अब्दुल्ला

    कश्मीरियों को निशाना बनाने वालों पर भड़के फारुख अब्दुल्ला

    नई दिल्‍ली। देश में कई जगह पर कश्मीरियों के साथ हुई हिंसा को लेकर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला ने अपनी भड़ास निकाली है। ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वाले लोगों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि देश के कुछ हिस्सों में कश्मीरियों को निशाना बनाने वाले यह लोग ‘हिटलर के रास्ते पर’ चल रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि एक समय के बाद यह ‘अतिवादी’ लोग खत्म हो जाएंगे।

    कश्मीरियों के हाथ देश में हुई हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग हिटलर जैसा शासन बनाना चाहते हैं।

    उन्होंने कहा, “यह हमारी किस्त्म है कि कुछ लोग ऐसे हैं, जिनका मकसद कुछ और ही है। यह हिटलर के रास्ते पर चलकर हिटलर जैसा शासन बनाना चाहते हैं। लेकिन इन्हें याद रखना चाहिए कि हिटलर ने भी खुद को गोली मार ली और खत्म हो गया। वहीं, नाजीवाद का भी अंत हो गया। यहां भी एक समय आएगा जब यह अतिवादी चले जाएंगे।”

    गौरतलब है कि हाल ही में देश के कुछ इलाकों में कश्मीरियों के साथ हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। इनमें दिल्ली, हरियाणा तमिलनाडु समेत अन्य राज्यों में हुई घटनाएं शामिल थीं। इसमें शॉल बेचने के लिए आने वाले कश्मीरी युवाओं के साथ मारपीट करने और परेशान करने की घटनाएं दर्ज हुई थी। इसी मुद्दे पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी राय रखी थी।

    विदेश मंत्री जयशंकर की खालिदा जिया के निधन पर बांग्लादेश यात्रा को लेकर अपनी बात रखते हुए फारुख ने कहा कि यह अच्छा है। उन्होंने कहा, “बांग्लादेश हमारा पुराना मित्र है। हमें इस दोस्ती को आगे बढ़ाना होगा और इसे और मजबूत करना होगा।”

    पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को लेकर अपनी बात रखते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि यह साल भारत की पड़ोसी देशों के साथ दोस्ती को बढ़ाए, ताकि हम इन मुश्किलों से निकल सकें। उन्होंने कहा,, “नया साल शुरू हो गया है। ईश्वर बारिश और बर्फ भेजे ताकि हमारी परेशानियां कम हों। मैं प्रार्थना करता हूं कि हमारे देश में शांति बनी रहे और हम पड़ोसी देशों के साथ दोस्ती करें, ताकि इन मुश्किलों से बाहर निकल सकें।

  • शाहरुख को रामभद्राचार्य ने बताया देशद्रोही, संगीत सोम ने कहा गद्दार

    शाहरुख को रामभद्राचार्य ने बताया देशद्रोही, संगीत सोम ने कहा गद्दार

    लखनऊ। बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं. वजह है उनकी IPL टीम कोलकाता नाइट राइडर्स द्वारा बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को खरीदना. बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे कथित अत्याचारों के बीच इस फैसले को लेकर राजनीतिक नेता, धर्मगुरु और अन्य लोग शाहरुख को निशाने पर ले रहे हैं. कुछ ने उन्हें देशद्रोही तक करार दिया है, जबकि कुछ उनके पक्ष में खड़े हो गए हैं.

    विवाद की शुरुआत तब हुई जब कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने इस मुद्दे पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रही ज्यादतियों के समय में बांग्लादेशी खिलाड़ी को टीम में शामिल करना सही नहीं है. इसके बाद मामला और तूल पकड़ गया. उत्तर प्रदेश के बीजेपी नेता संगीत सोम ने भी तीखी टिप्पणी की.

    उन्होंने कहा कि IPL के लिए बांग्लादेशी खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान को खरीदकर शाहरुख खान ने देश के साथ गद्दारी की है. सोम के इस बयान ने सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया और विवाद को और हवा दे दी.
    शाहरुख का कोई चरित्र नहीं
    नागपुर पहुंचे स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने भी शाहरुख खान पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, “शाहरुख खान तो ऐसा करेंगे ही, वे कोई हीरो नहीं हैं. उनका कोई चरित्र नहीं है. उनकी हरकतें देशद्रोही जैसी रही हैं.” स्वामी के इस बयान से शाहरुख के आलोचकों को और बल मिला, और हर तरफ से उन्हें खरी-खोटी सुनाई जाने लगी.
    बरेली के मौलाना ने शाहरुख का किया बचाव
    हालांकि, सभी लोग शाहरुख के खिलाफ नहीं हैं. बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी बरेलवी ने शाहरुख खान का बचाव किया है. उन्होंने कहा कि शाहरुख का मकसद गलत नहीं है. उन्हें गद्दार या आतंकी कहना शर्मनाक और गलत है. मौलाना ने आगे कहा, “बांग्लादेश भारत का मित्र देश है. देवकीनंदन ठाकुर और संगीत सोम के बयान सरासर गलत और अन्यायपूर्ण हैं.” मौलाना के इस समर्थन से विवाद में एक नया मोड़ आया है, जहां एक तरफ राजनीतिक और धार्मिक आलोचना है, तो दूसरी तरफ उनका बचाव भी हो रहा है.
  • देश के इन हिस्सों में जनवरी से मार्च तक तेज बारिश की संभावना.. IMD ने चेताया

    देश के इन हिस्सों में जनवरी से मार्च तक तेज बारिश की संभावना.. IMD ने चेताया


    नई दिल्ली।
    इस साल जनवरी से मार्च तक की अवधि में दक्षिण और मध्य भारत (South and Central India) में अच्छी बारिश (Rain) होने की संभावना है, जबकि पंजाब और हरियाणा (Punjab and Haryana) सहित उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है। IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने गुरुवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी।

    महापात्रा ने हालांकि बताया कि देश के कुछ हिस्सों में औसत से कम बारिश के पूर्वानुमान का रबी की फसल पर असर पड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में सिंचाई की अच्छी व्यवस्था है। साथ ही मॉनसून की अच्छी बारिश के कारण जलाशय भरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर, बिहार और विदर्भ के कुछ हिस्सों में एक से तीन दिन अतिरिक्त ठंड पड़ने की संभावना है, जबकि राजस्थान में कम ठंड पड़ने का अनुमान है।

    महापात्रा ने कहा कि देश के अधिकांश क्षेत्रों में जनवरी में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम रहने का अनुमान है। हालांकि, उत्तर-पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों के साथ-साथ प्रायद्वीपीय भारत में भी सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान है।

    दिसंबर में क्यों रहा सूखे जैसा मौसम
    मौसम विभाग ने दिसंबर महीने में लगभग सूखे मौसम का कारण पश्चिमी विक्षोभों की अनुपस्थिति को बताया, जो आमतौर पर देश के उत्तर-पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में बारिश और गरज के साथ बौछारें लाते हैं। महापात्रा ने कहा, ‘पश्चिमी विक्षोभ या तो उत्तर की ओर बढ़ रहे हैं या बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसका कारण जलवायु परिवर्तन है।’ उन्होंने कहा कि दिसंबर से मार्च के दौरान कम बर्फबारी दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के मौसम में अच्छी बारिश के संकेतकों में से एक है।

    महापात्रा ने कहा कि वर्तमान में ला नीना की स्थिति बनी हुई है – यानी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह ठंडी हो रही है – और वैश्विक पूर्वानुमान ने मार्च तक ईएनएसओ तटस्थ स्थितियों का अनुमान जताया है। उन्होंने कहा, ‘जून-जुलाई तक ईएनएसओ की तटस्थ परिस्थितियां हावी रहने की संभावना है। इससे यह संकेत मिलता है कि यह अच्छी मॉनसूनी बारिश का सूचक है।’ महापात्रा ने कहा कि 2025, 1901 के बाद से आठवां सबसे गर्म वर्ष था, जिसमें अखिल भारतीय वार्षिक औसत भूमि सतह वायु तापमान 1991-2020 के दीर्घकालिक औसत से 0.28 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।

    अब तक का सबसे गर्म वर्ष 2024 था, जब पूरे भारत में तापमान दीर्घकालिक औसत से 0.65 डिग्री सेल्सियस अधिक था। आईएमडी के महानिदेशक ने कहा कि शीतकालीन (जनवरी-फरवरी) और मॉनसून-पूर्व (मार्च-मई) ऋतुओं के दौरान अखिल भारतीय मौसमी औसत तापमान दीर्घकालिक औसत से अधिक रहा, जिसमें क्रमशः 1.17 डिग्री सेल्सियस और 0.29 डिग्री सेल्सियस की विसंगति देखी गई।

  • UP में जायके और जाति का अनोखा मेल.. चर्चा में सपा की 'बाटी-चोखा' की दावत

    UP में जायके और जाति का अनोखा मेल.. चर्चा में सपा की 'बाटी-चोखा' की दावत


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजनीति में इन दिनों जायके और जाति का एक अनोखा मेल देखने को मिल रहा है। नए साल के पहले दिन समाजवादी पार्टी (सपा) (Samajwadi Party – SP) के मुख्यालय में आयोजित ‘बाटी-चोखा’ की दावत ने राज्य में एक नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया है। यह दावत सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के भीतर चल रहे ‘ब्राह्मण बनाम संगठन’ विवाद पर कटाक्ष के रूप में देखी जा रही है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, नए साल के अवसर पर आयोजित इस भोज में शामिल कार्यकर्ताओं और जनता को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “बाटी-चोखा हमारे प्रदेश की संस्कृति का हिस्सा है, इसे आपसी झगड़ों और राजनीति में बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। सभी को बिना किसी पाबंदी के एक साथ बैठकर भोजन करना चाहिए।”

    सपा प्रमुख का यह बयान भाजपा के उन ब्राह्मण विधायकों और विधान पार्षदों (MLCs) के समर्थन में माना जा रहा है, जिन्हें हाल ही में एक ऐसी ही दावत में शामिल होने के लिए अपनी ही पार्टी से चेतावनी मिली थी। सपा सूत्रों के अनुसार, इस भोज का मकसद सत्तारूढ़ दल को यह संदेश देना था कि खाने-पीने और सामाजिक मेलजोल पर किसी भी तरह की जातिगत बंदिश गलत है।


    क्या है पूरा विवाद?

    इस सियासी दावत की पटकथा लगभग एक सप्ताह पहले लिखी गई थी। उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पार्टी के कई ब्राह्मण विधायकों और एमएलसी को चेतावनी जारी की थी। ये नेता पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के लोकप्रिय व्यंजन ‘बाटी-चोखा’ के बहाने आयोजित एक सामुदायिक बैठक और डिनर में शामिल हुए थे। भाजपा ने इसे जाति आधारित गतिविधि और अनुशासनहीनता के तौर पर देखा था। हालांकि, पूर्व सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह जैसे नेताओं ने अपनी ही पार्टी के इस रुख का विरोध करते हुए कहा था कि जब दल खुद जाति सम्मेलन करते हैं, तो विधायकों के साथ बैठने पर आपत्ति क्यों है।

    जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव ने ‘बाटी-चोखा’ के जरिए दो निशाने साधे हैं। भाजपा के भीतर जो ब्राह्मण नेता संगठन की सख्ती से नाराज हैं, उनके प्रति सहानुभूति दिखाकर सपा उन्हें अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। वहीं, बाटी-चोखा पूर्वी यूपी की पहचान है। इसके जरिए सपा खुद को आम जनता की परंपराओं के करीब और भाजपा को कठोर दिखाने की कोशिश कर रही है।

  • गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सरकार का बड़ा कदम… 90 दिनों तक काम… पेंशन की भी व्यवस्था

    गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सरकार का बड़ा कदम… 90 दिनों तक काम… पेंशन की भी व्यवस्था


    नई दिल्ली।
    भारत सरकार (Government of India) ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Social Security Code, 2020) के तहत गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों (Gig and platform workers) के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभों को ध्यान में रखते हुए नए मसौदा नियमों का प्रस्ताव दिया है। ये नियम 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी होने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य जोमैटो, स्विगी, ओला और उबर जैसे एग्रीगेटर्स के साथ काम करने वाले लाखों श्रमिकों को स्वास्थ्य, जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा जैसी सुरक्षा प्रदान करना है।

    मसौदा नियमों के अनुसार, लाभ प्राप्त करने के लिए श्रमिकों को एक विशिष्ट अवधि के लिए कार्य करना अनिवार्य होगा। यदि कोई श्रमिक केवल एक ही प्लेटफॉर्म के साथ जुड़ा है, तो उसे एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 90 दिनों तक काम करना होगा। यदि श्रमिक एक से अधिक प्लेटफॉर्म (जैसे सुबह ओला और शाम को स्विगी) पर काम करता है, तो कुल कार्य अवधि कम से कम 120 दिन होनी चाहिए।

    काम की गिनती उस दिन से शुरू होगी जब श्रमिक पहली बार आय अर्जित करता है, चाहे राशि कितनी भी हो। यदि कोई व्यक्ति एक ही दिन में तीन अलग-अलग एग्रीगेटर्स के साथ काम करता है, तो उसे नियमों के अनुसार तीन दिन का काम माना जाएगा।

    रजिस्ट्रेशन और पहचान
    सरकार ने इन लाभों को सुव्यवस्थित करने के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे पर जोर दिया है। 16 वर्ष से अधिक आयु के सभी गिग श्रमिक पंजीकरण के पात्र हैं। लाभ प्राप्त करने की अधिकतम आयु 60 वर्ष तय की गई है। ई-श्रम पोर्टल के जरिए सभी श्रमिकों का आधार-लिंक्ड रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। सरकार प्रत्येक पात्र श्रमिक को एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) और एक डिजिटल पहचान पत्र जारी करेगी। आधार-लिंक्ड UAN होने के कारण श्रमिक यदि प्लेटफॉर्म बदलते हैं, तो भी उनके लाभ निरंतर बने रहेंगे।


    पेंशन से बीमा तक की व्यवस्था

    श्रमिकों के स्वास्थ्य और चिकित्सा के लिए ‘आयुष्मान भारत’ योजना के साथ एकीकरण किया जाएगा। जीवन बीमा और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा की भी सुविधा होगा। भविष्य में एक ऐसी पेंशन योजना का प्रस्ताव है जिसमें प्लेटफॉर्म और श्रमिक दोनों का अंशदान शामिल होगा। मातृत्व लाभ (Maternity Benefits) और बच्चों के लिए क्रेच की भी सुविधा होगी।


    राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड

    नियमों में एक ‘राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड’ के गठन का भी प्रावधान है। केंद्र और राज्य सरकारों के नामित अधिकारी इसमें शामिल होंगे। असंगठित क्षेत्र के श्रमिक संघों से 5 प्रतिनिधि शामिल होंगे। एग्रीगेटर संघों से भी 5 प्रतिनिधि को जगह दी जाएगी। लोकसभा, राज्यसभा और अनुसूचित जाति/जनजाति के प्रतिनिधि को भी जगह।


    बोर्ड के मुख्य कार्य

    गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों की संख्या का आकलन करना। नए प्रकार के एग्रीगेटर्स की पहचान करना। इसके अलावा, कल्याणकारी नीतियों की निगरानी और सिफारिश करना। यदि कोई श्रमिक पिछले वित्तीय वर्ष में निर्धारित 90/120 दिनों की कार्य अवधि पूरी नहीं कर पाता है, तो वह लाभ के लिए अपात्र हो जाएगा। 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद सामाजिक सुरक्षा लाभ समाप्त हो जाएंगे। इन मसौदा नियमों पर वर्तमान में जनता से राय मांगी गई है, जिसके बाद मार्च 2026 तक अंतिम अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है।

  • बांग्लादेशी क्रिकेटर पर करोड़ों लुटाने पर हो रही शाहरुख खान की आलोचना… BJP नेता ने बताया गद्दार

    बांग्लादेशी क्रिकेटर पर करोड़ों लुटाने पर हो रही शाहरुख खान की आलोचना… BJP नेता ने बताया गद्दार


    नई दिल्ली।
    IPL 2026 में बांग्लादेश के तेज गेंदबाज (Bangladesh fast Bowler) मुस्तफिजुर रहमान (Mustafizur Rahman) खेलेंगे या नहीं, इस पर बीसीसीआई (BCCI) ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। मगर नीलामी में उन्हें कोलकाता नाइट राइडर्स (Kolkata Knight Riders) द्वारा 9.20 करोड़ में खरीदे जानें पर केकेआर के सह-मालिक और बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान (Shahrukh Khan) की जमकर आलोचना हो रही है। इस बीच उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व सदस्य संगीत सोम ने शाहरुख खान को गद्दार बताया है। उनका कहना है कि शाहरुख खान के पास जो कुछ भी है, वह भारत ने दिया है, भारत के लोगों ने दिया है, लेकिन वे इस पैसे को कहां लगाते हैं? वे इसे ऐसे देश के खिलाड़ियों पर लगाते हैं जो भारत के खिलाफ काम कर रहा है।

    संगीत सोम ने कहा, “जिस तरह बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है, महिलाओं और लड़कियों का रेप हो रहा है, उनके घर जलाए जा रहे हैं, और वहां भारत विरोधी नारे लगाए जा रहे हैं। इन सबके बावजूद, शाहरुख खान जैसे गद्दार, मैं उन्हें गद्दार कह रहा हूं क्योंकि उनके पास जो कुछ भी है, वह भारत ने दिया है, भारत के लोगों ने दिया है, लेकिन वे इस पैसे को कहां लगाते हैं? वे इसे ऐसे देश के खिलाड़ियों पर लगाते हैं जो भारत के खिलाफ काम कर रहा है। मैं शाहरुख खान जैसे लोगों को बताना चाहता हूं कि वे सफल नहीं होंगे। किसी भी कीमत पर, वे मुस्तफिजुर रहमान को यहां खेलने नहीं दे पाएंगे। रहमान एयरपोर्ट से बाहर कदम नहीं रख पाएगा।”


    BCCI को है सरकार के आदेश का इंतजार

    इस विवाद पर भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाई है। बीसीसीआई का कहना है कि वह सरकार के निर्देशों के बिना किसी भी खिलाड़ी पर प्रतिबंध नहीं लगाएगा। बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए इनसाइड स्पोर्ट से कहा, “स्थिति संवेदनशील है। हम लगातार सरकार के संपर्क में हैं। फिलहाल ऐसा कुछ नहीं है जिससे बांग्लादेशी खिलाड़ियों पर बैन लगाया जाए। मुस्ताफिजुर आईपीएल खेलेंगे। बांग्लादेश कोई दुश्मन देश नहीं है।” बोर्ड वर्तमान में टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए विदेश मंत्रालय (MEA) के साथ बांग्लादेशी खिलाड़ियों के वीजा संबंधी बातचीत भी कर रहा है।

    हालांकि, मुस्ताफिजुर की आईपीएल में पूरी उपलब्धता अभी भी कई कारकों पर निर्भर करेगी। अप्रैल में बांग्लादेश को न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज खेलनी है और यदि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने एनओसी (NOC) देने से इनकार कर दिया, तो वह कई मैचों से बाहर रह सकते हैं। वीजा को लेकर बीसीसीआई अधिकारी ने कहा है कि, “मुस्ताफिजुर रहमान टी20 वर्ल्ड कप के लिए वीजा अप्लाई करेंगे, जिसे IPL के लिए बढ़ाया जाएगा। वीजा कोई बड़ी समस्या नहीं होगी। बीसीबी की तरफ से भी एनओसी को लेकर कोई नकारात्मक संकेत नहीं मिले हैं।” वर्तमान में बीसीसीआई पूरी तरह से भारत सरकार के अगले आदेश की प्रतीक्षा कर रहा है।

    भड़के मौलाना… बोले- मुस्लिम नाम आते ही शुरू हो जाता है विरोध

    आईपीएल (IPL) में कोलकाता नाइट राइडर्स (Kolkata Knight Riders-KKR) की ओर से बांग्लादेशी क्रिकेटर (Bangladeshi cricketer.) को शामिल करने पर हंगामा मचा हुआ है। विरोध के बीच इमाम एसोसिएशन ने केकेआर के सह-मालिक बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान (Actor Shah Rukh Khan) का बचाव किया। एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी (Maulana Sajid Rashidi) ने कहा, ‘इस देश में बिना सोचे-समझे या संविधान को समझे किसी भी चीज का अंधाधुंध विरोध करना आदत बन गई है। जैसे ही कोई मुस्लिम नाम आता है, विरोध करना बहुत आसान हो जाता है। शाहरुख खान मुस्लिम हैं और उन्होंने जो बांग्लादेशी क्रिकेटर खरीदा वह भी मुस्लिम है, इसलिए विरोध तो होना ही लाजमी है क्योंकि यहां मुसलमानों के प्रति नफरत तुरंत सामने आ जाती है। लोगों का इससे क्या लेना-देना? अगर वे संविधान के खिलाफ कुछ करते हैं तो कानून निपटेगा ना? सरकार कार्रवाई करेगी। आप कौन होते हैं विरोध करने वाले और कहने वाले कि शाहरुख खान को यह नहीं करना चाहिए?’

    ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी की भी इस मामले पर प्रतिक्रिया आई। उन्होंने कहा, ‘देवकीनंदन ठाकुर और संगीत सोम को समझ जाना चाहिए कि भारतीय मुसलमान भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर चिंतित हैं और उनकी सुरक्षा व हिफाजत के लिए एकजुट होकर आवाज उठा रहे हैं। ऐसी स्थिति में अगर शाहरुख खान वहां के किसी क्रिकेटर के साथ कोई समझौता करते हैं तो यह विश्वासघात का काम नहीं है। इसे किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता।’


    शाहरुख खान को किसने बताया गद्दार

    आध्यात्मिक गुरु देवकीनंदन ठाकुर ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ जारी हिंसा का हवाला देते हुए शाहरुख खान की आलोचना की है। उन्होंने केकेआर से रहमान को टीम से हटाने और उसे दी गई 9.2 करोड़ रुपये की करार राशि का इस्तेमाल हिंसा से प्रभावित हिंदू परिवारों की मदद के लिए करने का आग्रह किया। वहीं, धर्मगुरु रामभद्राचार्य ने शाहरुख खान की आलोचना करते हुए कहा कि पड़ोसी देश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के बीच IPL की उनकी टीम ने एक बांग्लादेशी क्रिकेटर को शामिल किया है। आईपीएल 2026 के लिए केकेआर की ओर से बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को खरीदे जाने के बारे में पूछने पर रामभद्राचार्य ने कहा, ‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि उनका रवैया हमेशा से गद्दार जैसा रहा है।’

  • देश में UPI से लेन-देन में 29% की वृद्धि, दिसंबर में हुए रिकॉर्ड ₹27.97 लाख करोड़ के ट्रांजैक्शन

    देश में UPI से लेन-देन में 29% की वृद्धि, दिसंबर में हुए रिकॉर्ड ₹27.97 लाख करोड़ के ट्रांजैक्शन


    नई दिल्ली।
    बीते दिसंबर में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (Unified Payments Interface-UPI) से होने वाले लेन-देन में तेज बढ़ोतरी (Rapid Increase UPI Transactions) देखने को मिली। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (National Payments Corporation of India-NPCI) द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में यूपीआई के जरिए 21.63 अरब सौदे हुए, जो पिछले साल की तुलना में 29 प्रतिशत ज्यादा हैं। वहीं, इन सौदों की कुल राशि भी 20 प्रतिशत बढ़कर 27.97 लाख करोड़ रुपए हो गई।

    महीने के हिसाब से भी यूपीआई लेन-देन की संख्या और रकम में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। दिसंबर में रोजाना औसतन 90,217 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ, जबकि नवंबर में यह आंकड़ा 87,721 करोड़ रुपए था।

    दिसंबर में रोजाना औसतन 698 मिलियन (करीब 69.8 करोड़) यूपीआई लेन-देन हुए, जो नवंबर के 682 मिलियन से ज्यादा हैं। नवंबर महीने में यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या 20.47 अरब रही थी, जो सालाना आधार पर 32 प्रतिशत की बढ़त थी। उस महीने लेन-देन की कुल राशि 26.32 लाख करोड़ रुपए रही थी, जिसमें 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी।

    इसी दौरान, इंस्टेंट मनी ट्रांसफर सिस्टम (आईएमपीएस) के जरिए दिसंबर में कुल 6.62 लाख करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ। यह पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत ज्यादा है और नवंबर के 6.15 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक है।


    अब 70.9 करोड़ सक्रिय यूपीआई क्यूआर कोड

    एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अब 70.9 करोड़ सक्रिय यूपीआई क्यूआर कोड हैं। जुलाई 2024 के बाद इनकी संख्या में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। किराना दुकानों, मेडिकल स्टोर, बस-अड्डों, रेलवे स्टेशनों और गांवों तक क्यूआर कोड की सुविधा पहुंच जाने से अब स्कैन करके भुगतान करना पूरे देश में आम हो गया है।रिपोर्ट में बताया गया कि व्यक्ति से दुकानदार (पी2एम) वाले लेन-देन, व्यक्ति से व्यक्ति (पी2पी) लेन-देन से ज्यादा रहे। इसका मतलब है कि लोग रोजमर्रा की खरीदारी में यूपीआई का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं।

    पी2एम ट्रांजैक्शन 35 प्रतिशत बढ़कर अब 37.46 अरब हो गए, जबकि पी2पी ट्रांजैक्शन 29 प्रतिशत बढ़कर 21.65 अरब हो गए। औसतन हर लेन-देन की राशि 1,262 रुपए हो गई, जो पहले 1,363 थी। इससे पता चलता है कि लोग अब छोटे-छोटे भुगतानों जैसे यात्रा, खाना, दवा और स्थानीय खरीदारी के लिए यूपीआई का ज्यादा उपयोग कर रहे हैं।

  • गोल्ड लोन का क्रेज… नवंबर 2025 तक 125% की वृद्धि, बैंक ऋण से 10 गुना ज्यादा

    गोल्ड लोन का क्रेज… नवंबर 2025 तक 125% की वृद्धि, बैंक ऋण से 10 गुना ज्यादा


    नई दिल्ली।
    नवंबर 2025 के अंत तक, गोल्ड लोन (Gold Loan) में साल-दर-साल 125% की भारी वृद्धि (Massive Increase of 125%) दर्ज की गई है, जो कुल बैंक ऋण (Bank loan) की 11.5% वृद्धि दर से लगभग दस गुना अधिक है। गोल्ड लोन में यह उछाल पिछले साल 77% की वृद्धि के बाद आया है और यह सोने की बढ़ती कीमतों के दौर में हुआ है। हालांकि, गोल्ड लोन की कुल बकाया राशि 3.6 लाख करोड़ रुपये है, जो कुल बैंक ऋण का 2% से भी कम है, लेकिन नवंबर 2025 तक दिए गए नए कुल ऋण में इसका योगदान 12% रहा।


    तेजी के तीन कारण

    एक खबर के मुताबिक पिछले 12 महीनों में इस पोर्टफोलियो में लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। बैंकरों ने इस तेजी के तीन कारण बताए हैं। ऋणदाताओं का सिक्योर्ड लोन देने की तरफ झुकाव, सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से घरों में उधार लेने की क्षमता बढ़ना और आरबीआई के निर्देश के बाद कुछ रिटेल लोन का पुनर्वर्गीकरण, जिसमें कहा गया था कि सोने के गहनों से सुरक्षित कृषि ऋणों को गोल्ड लोन के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए। गोल्ड लोन और एमएसएमई ऋण वृद्धि के प्रमुख चालक बनकर उभरे हैं।

    एमएसएमई को दिया गया लोन, जो लगभग 9.5 लाख करोड़ रुपये के साथ कुल बकाया ऋण का लगभग 5% है, नए ऋण में भी लगभग 12% की समान हिस्सेदारी रखता है, जिसमें वित्त वर्ष 2026 में 1.5 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ।


    बड़े उद्योगों के लिए कर्ज में कमी

    जैसे-जैसे बड़ी कंपनियां बैंक उधार लेने से कम रुचि ले रही हैं और ऋणदाता बिना जमानत वाले (अनसिक्योर्ड) ऋणों को लेकर सतर्क हो रहे हैं, बैंकिंग क्षेत्र का ऋण मिश्रण अपने पारंपरिक आधारों से दूर जा रहा है। लेटेस्ट आंकड़ों से संकेत मिलता है कि बड़े उद्योग क्षेत्र की गति धीमी पड़ रही है। 28.7 लाख करोड़ रुपये के बकाया ऋण के साथ यह क्षेत्र कुल बकाया ऋण का 15% हिस्सा रखता है, लेकिन नए ऋणों में इसकी हिस्सेदारी महज 3.6% रही है, जिसमें 46,090 करोड़ रुपये का ही इजाफा हुआ।


    बड़ी कंपनियां लगातार अपना कर्ज घटा रहीं

    आंकड़े बताते हैं कि बड़ी कंपनियां लगातार अपना कर्ज घटा रही हैं और वे बैंक वित्त के बजाय बॉन्ड बाजार या आंतरिक संचय को प्राथमिकता दे रही हैं। कमजोर वर्गों को दिया जाने वाला ऋण भी पीछे रहा, जिसमें बकाया ऋण में लगभग 10% की हिस्सेदारी के बावजूद नए ऋण का केवल 6% हिस्सा ही गया। पर्सनल लोनों के भीतर, होम लोन में भी रफ्तार धीमी रही। बकाया ऋण में मॉर्गेज की हिस्सेदारी 16% है, लेकिन नए ऋणों में इसकी हिस्सेदारी केवल 14% रही।

    ऋण वृद्धि में पर्सनल लोन बने रहे प्रमुख चालक
    कुल मिलाकर, पर्सनल लोन वृद्धि के सबसे बड़े इंजन बने रहे, जिनका नए ऋणों में लगभग 40% योगदान रहा, जबकि सेवा क्षेत्र ने लगभग 20% का योगदान दिया, जिसकी मुख्य वजह एनबीएफसी और व्यापार को दिया गया ऋण रहा। कुल बकाया बैंक ऋण 195.2 लाख करोड़ रुपये है। नवंबर 2025 तक के आंकड़े बताते हैं कि एक संरचनात्मक बदलाव हो रहा है, जिसमें बड़े उद्योगों से ध्यान हटकर उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों की ओर बढ़ रहा है। यह बदलाव आने वाले वर्षों में बैंकों के रिटर्न और जोखिमों को आकार देगा।