Category: National

  • देवकीनंदन ठाकुर द्वारा शाहरुख खान पर की गई टिप्पणी पर ऐक्शन ले सरकार: मौलाना राशिदी

    देवकीनंदन ठाकुर द्वारा शाहरुख खान पर की गई टिप्पणी पर ऐक्शन ले सरकार: मौलाना राशिदी


    नई दिल्‍ली। ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद राशिदी ने भारतीय क्रिकेट टीम कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) में बांग्लादेशी खिलाड़ी के चयन को लेकर बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान पर की गई टिप्पणियों के लिए कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
    मौलाना साजिद राशिदी ने कहा कि खेल और फिल्मों की कोई सीमा नहीं होती और इस मुद्दे पर नफरत फैलाने वाले बयानों से बचना चाहिए। उन्होंने शाहरुख खान के साथ-साथ अभिनेता सलमान खान की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि दोनों कलाकार समाजसेवा और दान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देते रहे हैं।

    उन्होंने कहा- शाहरुख खान ने एक खिलाड़ी को खरीदा है। खेल और फिल्मों में कोई सीमाएं नहीं होतीं। शाहरुख खान और सलमान खान ऐसे कलाकार हैं जो सबसे ज्यादा चैरिटी करते हैं।

    सरकार को देवकीनंदन ठाकुर के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
    बांग्लादेश हिंसा पर बयान

    बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों को लेकर पूछे गए सवाल पर मौलाना साजिद राशिदी ने कहा कि वे वहां हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा की निंदा करते हैं, लेकिन उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि भारत में मुसलमानों पर हो रहे लक्षित हमलों पर समान रूप से चर्चा क्यों नहीं होती। उन्होंने कहा- हम बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की निंदा कर रहे हैं, लेकिन अपने देश में मुसलमानों पर हो रहे हमलों की बात क्यों नहीं होती? मुसलमान अभी शांत हैं, लेकिन अगर वे इन हमलों के खिलाफ खड़े हो गए तो स्थिति क्या होगी?
    देवकीनंदन ठाकुर की आपत्ति

    यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब देवकीनंदन ठाकुर ने शाहरुख खान की सह-मालिकाना वाली टीम कोलकाता नाइट राइडर्स द्वारा इंडियन प्रीमियर लीग के लिए बांग्लादेशी खिलाड़ी को शामिल करने पर आपत्ति जताई। ठाकुर ने बातचीत में कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं और ऐसे समय में वहां के खिलाड़ी को टीम में शामिल करना असंवेदनशील कदम है।

    उन्होंने कहा- बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या की जा रही है, उनके घर जलाए जा रहे हैं और बहन-बेटियों के साथ अत्याचार हो रहा है। ऐसे हालात में कोई इतना निर्दयी कैसे हो सकता है कि उसी देश के खिलाड़ी को अपनी टीम में ले आए? ठाकुर ने शाहरुख खान के अतीत का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने उन्हें स्टार बनाया और पहचान दी। उन्होंने सवाल उठाया कि हिंदू समुदाय के समर्थन का कर्ज कैसे चुकाया जा रहा है। हालांकि, ठाकुर ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी व्यक्तिगत दुश्मनी से प्रेरित नहीं है।

    उन्होंने कहा- मैं शाहरुख खान से कभी नहीं मिला। मैंने उन्हें केवल पोस्टरों में देखा है। मैं फिल्में नहीं देखता।
    बांग्लादेश में हालिया घटनाएं

    गौरतलब है कि हाल के दिनों में बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ा है। दिसंबर 2025 में बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले में कथित ईशनिंदा के आरोप में एक हिंदू मजदूर दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद शव को फांसी पर लटका कर जला दिया गया।

    इसके अलावा, राजबाड़ी जिले के पांगशा उपजिले में अमृत मंडल नामक एक अन्य हिंदू युवक की कथित तौर पर लिंचिंग की घटना भी सामने आई।

    इन घटनाओं के बाद भारत में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए और पड़ोसी देश के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई गई। इस पूरे विवाद ने खेल, राजनीति और सांप्रदायिक मुद्दों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

  • सिक्किम में सुबह भूकंप के झटकेलोग घरों से बाहर निकले

    सिक्किम में सुबह भूकंप के झटकेलोग घरों से बाहर निकले


    नई दिल्ली । आज सुबहसिक्किम के सोरेंग शहर में 3.9 तीव्रता का भूकंप आया। यह भूकंप 5:58 बजे के आसपास महसूस हुआ और स्थानीय लोग तुरंत घरों से बाहर निकल आए। भूकंप के झटके महसूस होने के बादवहां के निवासी दहशत में थेहालांकि राहत की बात यह है कि अब तक किसी प्रकार के जान-माल का नुकसान होने की खबर नहीं आई है।

    भूकंप का केंद्र जमीन के नीचे 5 किलोमीटर की गहराई पर थाजिससे इसे बड़ी तीव्रता का भूकंप नहीं माना गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने सोशल मीडिया पर इस घटना की जानकारी दी और बताया कि भूकंप का असर सीमित था।

    सिक्किम में भूकंप की घटनाएं कभी-कभी होती रही हैंलेकिन इस बार तीव्रता बहुत कम थीजिससे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। हालांकिभूकंप के बाद सतर्कता बनाए रखना हमेशा जरूरी होता हैऔर लोगों को अपनी सुरक्षा के लिए सावधानी बरतनी चाहिए। वर्तमान में स्थानीय प्रशासन ने कोई विशेष कदम नहीं उठाए हैंक्योंकि नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है।

  • त्रिवेणी तट पर पौष पूर्णिमा स्नान के साथ माघ मेला शुरू… करोड़ों श्रद्धालु लेंगे पुण्य लाभ

    त्रिवेणी तट पर पौष पूर्णिमा स्नान के साथ माघ मेला शुरू… करोड़ों श्रद्धालु लेंगे पुण्य लाभ


    प्रयागराज।
    पौष पूर्णिमा (Paush Purnima) पर पुण्य की डुबकी के साथ ही प्रयागराज (Prayagraj) के त्रिवेणी तट (Triveni Ghat) पर डेढ़ माह तक चलने वाले माघ मेला 2026 (Magh Mela 2026) का शनिवार को शुभारंभ हो गया है। प्रदेश सरकार और मेला प्रशासन का मानना है कि महाकुंभ 2025 के बाद के इस पहले माघ मेला में श्रद्धालुओं की संख्या 2024 और इससे पूर्व आयोजित माघ मेला की तुलना में ज्यादा हो सकती है। अनुमान है कि पूरे मेला अवधि के दौरान 15 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आएंगे। इसलिए तैयारियां भी उसी अनुरूप की जा रही हैं। मेला क्षेत्र का विस्तार कर गंगा पर बनने वाले पांटुन पुलों की संख्या में इजाफा किया गया है।

    मेला प्रशासन का अनुमान है कि शनिवार को पहले स्नान पर्व पर 25 से 30 लाख श्रद्धालु पावन त्रिवेणी में पुण्य की डुबकी लगाएंगे। प्रथम स्नान पर्व की पूर्ण संध्या पर मीडिया से मुखातिब हुईं मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार और जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने मेला की तैयारियों की जानकारी दी।


    आज शाम 04:03 बजे तक रहेगी पूर्णिमा तिथि

    पौष पूर्णिमा शुक्रवार शाम छह बजकर 12 मिनट से लग गई है। जो शनिवार को शाम चार बजकर तीन मिनट तक रहेगी। तीर्थ पुरोहित राजेंद्र पालीवाल ने बताया कि स्नान का यही समय रहेगा। उदयातिथि के कारण शनिवार को पूरे दिन स्नान का महत्व है।


    स्नान पर्व पर 30 एंबुलेंस रहेंगी तैयार

    माघ मेला के पहले स्नान पर्व पौष पूर्णिमा पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। आकस्मिक स्थिति के लिए मेला में 20 एंबुलेंस-108 और 10 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस की तैनाती की गई है। संगम नोज पर एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस उपलब्ध रहेंगी। मेला क्षेत्र में 20-20 बेड के दो बड़े अस्पताल और सभी सेक्टर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दवाएं और एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है।

    एलोपैथिक के अलावा चार आयुर्वेदिक अस्पतालों में मरीजों का उपचार किया जाएगा। सीएमओ डॉ. एके तिवारी के अनुसार सभी अस्पतालों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टॉफ की तैनाती की गई है। मेला क्षेत्र के अलावा एसआरएन, बेली और कॉल्विन अस्पताल में मरीजों के लिए बेड आरक्षित किए गए हैं। ट्रामा सेंटर में डॉक्टर और फार्मासिस्ट की अतिरिक्त तैनाती की गई है।

  • भाषा विवाद पर CM फडणवीस बोले – महाराष्ट्र में केवल मराठी अनिवार्य, अन्य भाषाओं का भी स्वागत….

    भाषा विवाद पर CM फडणवीस बोले – महाराष्ट्र में केवल मराठी अनिवार्य, अन्य भाषाओं का भी स्वागत….


    मुम्बई।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने एक बार फिर से भाषा विवाद (Language dispute) पर अपना रुख दोहराया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में केवल मराठी भाषा ही अनिवार्य (Marathi language Compulsory) है, इसके अलावा दूसरी भाषाओं का स्वागत है, लेकिन कोई अनिवार्य नहीं है। गौरतलब है कि पिछले साल भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य में पहली कक्षा से हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में शुरू करने के अपने फैसले को तीव्र विरोध प्रदर्शनों के बाद रद्द कर दिया और इस मुद्दे की जांच के लिए एक समिति का गठन किया।

    सतारा में 99वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए फडणवीस ने कहा कि राज्य में भाषा की अनिवार्यता का मुद्दा व्यापक रूप से बहस का विषय बना हुआ है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री के तौर पर मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि महाराष्ट्र में केवल मराठी ही अनिवार्य है। कोई अन्य भाषा अनिवार्य नहीं है। हालांकि, तीन-भाषा प्रणाली को लेकर मतभेद थे। छात्रों को अपनी पसंद की कोई भी भारतीय भाषा सीखने की स्वतंत्रता है। सवाल सिर्फ यह था कि तीसरी भाषा किस कक्षा से शुरू की जानी चाहिए।’’

    विवाद का जिक्र करते हुए फडणवीस ने कहा कि महाविकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार के दौरान तैयार की गई एक रिपोर्ट में पहली कक्षा से ही हिंदी को अनिवार्य बनाने की सिफारिश की गई थी और उनकी सरकार ने शुरू में इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया था। उन्होंने कहा, लेकिन पहली कक्षा से ही (हिंदी) भाषा को अनिवार्य बनाने को लेकर व्यापक बहस और विरोध हुआ, इसलिए नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हालांकि, मैं यह दोहराना चाहूंगा कि महाराष्ट्र में केवल मराठी ही अनिवार्य है, कोई अन्य भाषा नहीं।’’

    उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह भी कहना चाहूंगा कि हम अंग्रेजी, फ्रेंच और स्पेनिश जैसी भाषाओं का खुले दिल से स्वागत करते हैं… इन भाषाओं के प्रति हमारा रुख सकारात्मक है क्योंकि ये अंतरराष्ट्रीय भाषाएं हैं। लेकिन भारतीय भाषाओं का विरोध करते हुए अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का स्वागत करना अनुचित है। मेरा मानना ​​है कि हमारी भारतीय भाषाओं को भी वही सम्मान मिलना चाहिए, और यही हमारा रुख है।’’

  • जावेद अख्तर ने अपने फेंक वीडियो पर जताई नाराजगी… दी कानूनी कार्रवाई की धमकी

    जावेद अख्तर ने अपने फेंक वीडियो पर जताई नाराजगी… दी कानूनी कार्रवाई की धमकी


    मुम्बई।
    मशहूर गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर (Javed Akhtar) ने अपने खिलाफ फैलाए जा रहे एक फर्जी ‘डीपफेक’ वीडियो (Fake ‘deepfake’ videos) पर कड़ी नाराजगी जताई है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर एक AI जेनरेटेड एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्हें सिर पर टोपी पहने दिखाया गया है और दावा किया गया है कि वे अब आस्तिक हो गए हैं। जावेद अख्तर ने शुक्रवार को एक्स पर इस फर्जी वीडियो को सिरे से खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस मामले में कानूनी कार्रवाई और साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

    वीडियो में दावा किया गया था कि जावेद अख्तर ने आखिरकार “खुदा की राह” अपना ली है। इस पर उन्होंने लिखा, “यह पूरी तरह बकवास है।” उन्होंने कहा कि वे इस फर्जी खबर को बनाने और फैलाने वालों को कोर्ट में घसीटेंगे क्योंकि इससे उनकी प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा है।

    आपको बता दें कि हाल ही में दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में जावेद अख्तर और इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती शमाइल नदवी के बीच ‘क्या ईश्वर का अस्तित्व है?’ विषय पर एक गंभीर बहस हुई थी। माना जा रहा है कि इसी चर्चा के बाद उनके विचारों को तोड़-मरोड़कर पेश करने के लिए यह डीपफेक वीडियो बनाया गया।

    जावेद अख्तर अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो तकनीक के इस गलत इस्तेमाल से परेशान हैं। हाल के दिनों में कई अन्य सितारों ने भी अपनी आवाज उठाई है। कुछ दिनों पहले, भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपनी उन AI जेनरेटेड तस्वीरों की आलोचना की थी जिनमें उन्हें संसद के बाहर साड़ी के बजाय पेंट-सूट में दिखाया गया था। उन्होंने इसे अपनी निजता का उल्लंघन बताते हुए कहा कि यह तय करना उनका अधिकार है कि वे क्या पहनना चाहती हैं।

    वहीं, दिसंबर 2025 में दक्षिण भारतीय अभिनेत्री श्रीलीला और निवेथा थॉमस ने भी अपनी फर्जी तस्वीरों के खिलाफ चेतावनी जारी की थी। निवेथा ने इसे ‘डिजिटल प्रतिरूपण’ करार देते हुए कानूनी कार्रवाई की बात कही थी।


    भारत में डीपफेक के खिलाफ क्या हैं नियम?

    भारत सरकार ने 2025 के अंत तक डीपफेक और AI जेनरेटेड कंटेंट के लिए कड़े दिशानिर्देश लागू किए हैं। आईटी नियम 2021 (संशोधित) के तहत प्लेटफॉर्म्स को शिकायत मिलने के 36 घंटे के भीतर ऐसी भ्रामक सामग्री हटानी होती है। सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि सभी AI-जनित फोटो या वीडियो पर कम से कम 10% हिस्से में यह स्पष्ट लिखा होना चाहिए कि यह ‘सिंथेटिक’ या ‘AI जेनरेटेड’ है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मानहानि और जालसाजी के लिए जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।

  • बांग्लादेशी क्रिकेटर पर सियासी वबाल… विपक्षी नेता और पूर्व क्रिकेटरों ने किया शाहरूख का समर्थन

    बांग्लादेशी क्रिकेटर पर सियासी वबाल… विपक्षी नेता और पूर्व क्रिकेटरों ने किया शाहरूख का समर्थन


    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में चुनावी सरगर्मी (Election activity) के बीच अब राजनीति का नया मैदान खेल बनता नजर आ रहा है. इस बार निशाने पर हैं फिल्म अभिनेता और आईपीएल टीम कोलकाता नाइट राइडर्स (IPL team Kolkata Knight Riders- KKR) के मालिक शाहरुख खान (Shahrukh Khan). वजह बनी है आईपीएल के आगामी सीजन के लिए केकेआर द्वारा बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान (Mustafizur Rahman) को टीम में शामिल किया जाना. इस फैसले को लेकर भाजपा नेता संगीत सोम, कुछ धार्मिक नेताओं और सोशल मीडिया पर सक्रिय समूहों ने तीखा विरोध शुरू कर दिया है।

    भाजपा नेताओं का कहना है कि जब बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार और हत्याओं की खबरें सामने आ रही हैं, तब ऐसे देश के खिलाड़ियों को आईपीएल में शामिल करना गलत है. संगीत सोम ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश की सरकार, वहां के खिलाड़ी और सेलिब्रिटी हिंदुओं के पक्ष में आवाज नहीं उठा रहे, ऐसे में भारतीय लीग में बांग्लादेशी खिलाड़ियों को क्यों जगह दी जा रही है. उन्होंने सीधे तौर पर इस फैसले के लिए शाहरुख खान को जिम्मेदार ठहराया।

    इस मुद्दे को बंगाल की सियासत से जोड़ते हुए भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. भाजपा नेताओं का कहना है कि शाहरुख खान को सिर्फ मजहब के आधार पर तरजीह दी जा रही है. आरोप लगाए गए कि राज्य सरकार उनके कार्यक्रमों में सहयोग करती है, ईडन गार्डन्स से जुड़े ठेके कथित तौर पर मुस्लिम ठेकेदारों को दिए जाते हैं और शाहरुख को बंगाल का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया. भाजपा का दावा है कि यह सब तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा है।


    शाहरुख के समर्थन में आए विपक्षी नेता और पूर्व क्रिकेटर

    लेकिन टीएमसी से लेकर कांग्रेस तक और आम आदमी पार्टी से लेकर समाजवादी पार्टी तक सवाल उठा रही है कि हिंदुओं की हत्या पर अगर बांग्लादेश का विरोध करना है तो बांग्लादेशी खिलाड़ी को खिलाने पर भारत सरकार क्यों चुप है? बीसीसीआई उन खिलाड़ियों की नीलामी क्यों करवाती है? विदेश मंत्री ढाका क्यों जाते हैं? शेख हसीना भारत में क्यों रहती हैं? से तमाम सवाल विपक्ष उठा रहा है और कह रहा है कि ऐसे में सिर्फ शाहरुख खान को निशाना बनाना राजनीति से प्रेरित है।


    फिर शेख हसीना को भारत में रखना कैसे ठीक: संजय सिंह

    आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने शाहरुख खान को निशाना बनाए जाने पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में जो हो रहा है, वह दरिंदगी की पराकाष्ठा है. हिंदुओं को टारगेट करके जो मारा जा रहा है, उस पर भारत सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए. लेकिन प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर खामोश हैं. क्रिकेट खिलाड़ी को टीम रखने पर शाहरुख खान को गद्दार करार दिया जा रहा है तो शेख हसीना को भारत में रखने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को क्या संज्ञा दी जाएगी?

    आम आदमी पार्टी नेता ने आगे कहा कि पहलगाम में धर्म पूछकर लोगों को मारा गया, उसके बाद पूरे देश ने कहा पाकिस्तान संग क्रिकेट नहीं खेलना चाहिए. जय शाह ने पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेला. इसको क्या कहेंगे? क्या इनको गद्दार की संज्ञा में लाया जाएगा? अभी बेगम खालिदा जिया की मौत पर दुख प्रकट करने के लिए विदेश मंत्री जयशंकर बांग्लादेश गए. ऐसे में हमें सलेक्टिव नहीं होना चाहिए. हमें दो तरह की बातें नहीं करनी चाहिए.

    उन्होंने कहा कि सरकार की नीति क्या है, ये स्पष्ट होना चाहिए. कोई भी कुछ भी बोल देता है. इस तरह से शाहरुख को आरोपी बनाना ठीक नहीं. आईपीएल में पाकिस्तान के खिलाड़ियों को नहीं लिया जाता, इसी तरह बांग्लादेश को भी बैन करिए फिर.


    भाजपा सांसद खुद संगीत सोम का बयान गलत बता चुके: सपा

    वहीं समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अमीक जामेई ने भी शाहरुख खान का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश आज भारी कट्टरता के रास्ते पर चल रहा है. मोहम्मद युनूस जैसा आदमी वहां का केयरटेकर बना हुआ है, खुद पीएम मोदी ने उसका समर्थन किया था. ये संगीत सोम जो सरधना से विधायक थे, बुरी तरह हारे. अब इन्हें कवरेज नहीं मिलती इसलिए सु्र्खियों के लिए ये ऐसे बयान देते हैं. खुद भाजपा के वरिष्ठ सांसद इनके बयान को गलत बता चुके हैं.


    सिर्फ शाहरुख को ही क्यों टारगेट किया जा रहा है: अतुल वासन

    पूर्व भारतीय क्रिकेटर अतुल वासन से जब सवाल पूछा गया कि क्रिकेट आयोजन कराने वाले बोर्ड पर कोई सवाल नहीं उठाता है. इसके जवाब में वासन ने कहा कि इसके लिए टाइमलाइन समझने की जरूरत है. शाहरुख खान ने इस बांग्लादेशी प्लेयर को नहीं चुना. एक क्रिकेट मैनेजमेंट कमेटी है जो चयन करती है. साथ ही बीसीसीआई ने बांग्लादेशी क्रिकेटरों का नाम रखा था निलामी में, वहां से शाहरुख की टीम ने अपनी जरूरत के हिसाब से इस खिलाड़ी को उठाया. मुझे लगता है कि शाहरुख का नाम एकदम से लेना ठीक नहीं है. उन्हें इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहिए क्योंकि उनकी टीम ने इस खिलाड़ी को अपने हिसाब से लिया है.

    उन्होंने कहा कि शाहरुख खान भी एक देशभक्त हैं और मुझे लगता है कि जिस तरह से बांग्लादेश का विरोध हो रहा है तो वह बांग्लादेशी खिलाड़ी को अपनी टीम में नहीं रखेंगे. पाकिस्तान से इस मामले की तुलना करना ठीक नहीं है क्योंकि पाकिस्तान का इतिहास बांग्लादेश से अलग रहा है. भारत सरकार भी अभी वेट एंड वॉच की स्थिति में नजर आ रही है. ऐसे में एक आदमी (शाहरुख) को निशाना बनाना बिल्कुल ठीक नहीं है. क्रिकेट को राजनीति के लिए इस्तेमाल करना गलत है. केकेआर के और भी मालिक हैं शाहरुख के अलावा. इनमें जुही चावला भी है, तो उन्हें कोई क्यों निशाना नहीं बनाता? और मान लिजिए कि बांग्लादेशी खिलाड़ी को निकाल भी दिया जाता है तो इससे क्या कुछ बदल जाएगा?

    पहले भी अलग-अलग टीम से खेलते रहे हैं रहमान
    वैसे, मुस्तफिजुर रहमान पिछले कई सीजन से अलग अलग टीमों के लिए आईपीएल खेल रहे हैं. लेकिन इस बार विवाद के पीछे चुनावी सियासत बड़ी वजह नजर आ रही है. हालांकि इन तमाम सियासी जुगालियों पर भारत सरकार या बीसीसीआई की ओर से न तो कोई सवाल उठाया गया है और न आपत्ति जताई गई है. लेकिन आईपीएल से पहले शाहरुख और उनकी टीम को लेकर सियासत खूब हो रही है।

    दिलचस्प बात यह है कि बांग्लादेशी खिलाड़ियों के खेलने पर आपत्ति कुछ मुस्लिम संगठनों की ओर से भी जताई गई है. ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख उमर अहमद इलियासी ने कहा कि बांग्लादेशी क्रिकेटरों को वहां हो रहे अत्याचारों पर खुद आवाज उठानी चाहिए. वहीं, कुछ धर्मगुरुओं ने शाहरुख खान से माफी और बयान देने की मांग तक कर डाली।

  • दिल्ली में 'शब्दोत्सव 2026' का उद्घाटन हर्ष मल्होत्रा ने कहा- भारत की संस्कृति का लघु रूप देखने को मिला

    दिल्ली में 'शब्दोत्सव 2026' का उद्घाटन हर्ष मल्होत्रा ने कहा- भारत की संस्कृति का लघु रूप देखने को मिला


    नई दिल्ली । दिल्ली में तीन दिवसीय सांस्कृतिक और साहित्यिक उत्सव ‘शब्दोत्सव 2026’ का उद्घाटन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को किया। उद्घाटन समारोह की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ गीत के साथ हुई। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े प्रमुख नेता मौजूद रहे।केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कार्यक्रम में संबोधित करते हुए कहा कि ‘शब्दोत्सव 2026’ में भारत की विविधता और संस्कृति का लघु रूप देखने को मिला है।
    उन्होंने कहा कि यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत उदाहरण है। मल्होत्रा ने कहा भारत हमेशा से विश्व गुरु था और आज भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई शिक्षा नीति में बदलाव के साथ भारतीय संस्कृति को शिक्षा के साथ जोड़ा गया है।उन्होंने यह भी कहा कि भारत विविधताओं में एकता का देश है। यह देश विश्व में कहीं और नहीं मिलता जहां 340 से अधिक भाषाएं और 1600 से ज्यादा बोलियां जीवित हैं। यह भारत की असली पहचान है।

    वहीं दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ और ‘जय श्रीराम’ के नारों से की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में दिल्ली को वैचारिक आतंकवाद का गढ़ बनाने की कोशिश की गई थी। लेकिन अब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में कला और संस्कृति को फिर से समृद्ध किया जा रहा है। कपिल मिश्रा ने आगे कहा “दिल्ली में पिछले 10 महीनों में कई बड़े और दिव्य कार्यक्रम हुए हैं जो पहले कभी नहीं हुए थे। ‘शब्दोत्सव 2026’ का आयोजन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हम दिल्ली को नक्सली विचारधारा झूठे इतिहास और धर्म विरोधी सोच से मुक्त कर रहे हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में इस तरह का कार्यक्रम आतंकवाद और हिंसा के खिलाफ एक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ के रूप में है। “जब कोई आतंकवादी या नक्सली कोई हिंसक कदम उठाता है तो वह विचारों से ही शुरू होता है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उन विचारों को बदलने का है।इस कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति साहित्य और कला को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं को प्रेरित करने का प्रयास किया गया। ‘शब्दोत्सव 2026’ ने दिल्ली में सांस्कृतिक पुनर्निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इसके जरिए राजधानी में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हो रही है।

  • राहुल गांधी की राम से तुलना पर सियासी बवाल, नाना पाटोले के बयान को संजय निरुपम ने बताया हास्यास्पद

    राहुल गांधी की राम से तुलना पर सियासी बवाल, नाना पाटोले के बयान को संजय निरुपम ने बताया हास्यास्पद

    नई दिल्ली।कांग्रेस नेता नाना पाटोले द्वारा राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से किए जाने पर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। इस बयान पर शिवसेना नेता संजय निरुपम ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। गुरुवार को उन्होंने इसे न केवल हास्यास्पद बयान बताया बल्कि कांग्रेस पार्टी के राम के प्रति रुख पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।

    संजय निरुपम ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का इतिहास भगवान राम और राम मंदिर के विरोध से जुड़ा रहा है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर कांग्रेस ने हमेशा बाधाएं खड़ी कीं और कई बार भगवान राम के अस्तित्व पर ही सवाल उठाए। ऐसे में राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से करना पूरी तरह अनुचित और हास्यास्पद है।उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस नेताओं को भगवान राम के नाम का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं करना चाहिए। निरुपम के अनुसार कांग्रेस पार्टी के आचरण और उसके नेताओं की गतिविधियों को देखते हुए उनकी तुलना भगवान राम से नहीं बल्कि रावण से की जानी चाहिए। उन्होंने कहा राम के नाम को बदनाम मत कीजिए। जिन लोगों का आचरण राम के आदर्शों से मेल नहीं खाता वे ऐसी तुलना करने के अधिकारी नहीं हैं।

    दरअसल यह विवाद तब शुरू हुआ जब बुधवार को कांग्रेस नेता नाना पाटोले से राहुल गांधी के राम मंदिर न जाने को लेकर सवाल किया गया। इसके जवाब में पाटोले ने कहा था कि कांग्रेस भगवान राम का काम कर रही है और राहुल गांधी शोषितों पीड़ितों और वंचितों के लिए वही कार्य कर रहे हैं जो भगवान राम ने किया था। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी देशभर में न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं और जब वे अयोध्या जाएंगे तो राम मंदिर में प्रार्थना करेंगे।नाना पाटोले ने यह भी दावा किया कि जब रामलला के मंदिर के ताले बंद थे तब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उन्हें खुलवाने का आदेश दिया था। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया।

    गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब नाना पाटोले राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से जोड़कर विवादों में आए हों। इससे पहले अक्टूबर 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी उन्होंने राहुल गांधी और भगवान राम के नाम को जोड़ते हुए बयान दिया था जिस पर भाजपा नेताओं ने कड़ा विरोध जताया था।उस समय पाटोले ने सफाई देते हुए कहा था कि कांग्रेस राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से नहीं करती बल्कि यह केवल एक संयोग है कि दोनों के नामआर अक्षर से शुरू होते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि भगवान राम शंकराचार्य और राहुल गांधी की यात्राओं में समानता बताना तुलना नहीं है।

    हालांकि भाजपा नेताओं ने उनके इस तर्क को खारिज करते हुए इसे हिंदू भावनाओं का अपमान बताया था। भाजपा नेता सीआर केशवन ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए नाना पाटोले से सवाल किया था कि राहुल गांधी अब तक अयोध्या राम मंदिर क्यों नहीं गए।अब एक बार फिर इस बयान ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है और राहुल गांधी कांग्रेस तथा राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर सियासी टकराव तेज हो गया है।

     

  • स्टेन स्वामी का मेमोरियल पर दिए बयान पर फ‍िर चर्चा में आए जस्‍ट‍िस स्‍वाम‍िनाथन ?

    स्टेन स्वामी का मेमोरियल पर दिए बयान पर फ‍िर चर्चा में आए जस्‍ट‍िस स्‍वाम‍िनाथन ?

    चैन्‍नई। तमिलनाडु में मंदिर में दीप जलाने के मुद्दे को लेकर राज्य सरकार और केंद्र में विपक्षी पार्टियों के निशाने पर आए जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन ने एक और अहम फैसला सुनाया है। मद्रास हाई कोर्ट में जस्टिस स्वामीनाथन ने 1755 में अंग्रेजों के खिलाफ लड़े नथम कनवाई युद्ध की याद में स्मारक स्तूप बनाने का रास्ता साफ कर दिया है।
    यह फैसला 18वीं सदी में गुलामी के दौर में भारतीयों के प्रतिरोध की एक प्रेरक इतिहास को उदाहरण बनाता है।

    जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन की तरफ से यह फैसला नथम के तहसीलदार द्वारा इस स्मारक को अनुमति न दिए जाने के बाद आया है। तहसीलदार द्वारा अनुमति न मिलने के बाद एक याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में रिट दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस स्वामीनाथन ने इस बात पर चिंता जताई कि आज की पीढ़ी को भारत के औपनिवेशिक शासन का इतिहास पता नहीं है, न ही उन्हें इस गुलामी से मुक्त कराने के लिए लड़ी गई लड़ाइयों के बारे में ही जानकारी है।

    जस्टिस ने कहा, “राज्य में अगर स्टैन स्वामी की याद में पत्थर का स्तंभ लगाया जा सकता है, उसके लिए अनुमति कि आवश्यकता नहीं पड़ी, तो निश्चित रूप से नथन कनवाई युद्ध की स्मृति में स्तूप स्थापित करने किए भी किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है।”

    गौरतलब है कि अदालत ने जिन स्टेन स्वामी का जिक्र हुआ है वह जेसुइट पादरी और आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता थे। इनका नाम भीमा कोरेगांव में भड़की हिंसा से भी जोड़ा जाता है, 2021 में इनकी मौत के बाद मद्रास हाई कोर्ट ने उनकी याद में एक स्मृति स्तंभ बनाने की अनुमति दी थी।
    क्या हुआ था नथम कनवाई युद्ध में?

    इस स्मारक को बनाने के लिए याचिका लेकर आए वकील ने तथ्य रखा कि वर्ष 1755 में नथम कनवाई इलाके में मेलूर कल्लर समुदाय और ब्रिटिश सेना के बीच में एक भीषण युद्ध हुआ था। इस युद्ध में कल्लर समुदाय विजयी रहा था। याचिकाकर्ता के मुताबिक यह युद्ध कोइलकुड़ी के तिरुमोगुर मंदिर की वजह से हुआ था। इस मंदिर से ब्रिटिश सैनिकों ने कर्नल अलेक्जेंडर हेरॉन के नेतृत्व में पीतल की मूर्तियां और अन्य कीमती सामान लूट लिया था। इसके बाद जुटे कल्लर समुदाय ने युद्ध के जरिए इन मूर्तियों को वापस पा लिया।

  • इंदौर की घटना पर भड़के ओवैसी? कहा-चले हैं विश्वगुरु बनने, चुल्लू भर पानी में डूब मरें ये लोग…

    इंदौर की घटना पर भड़के ओवैसी? कहा-चले हैं विश्वगुरु बनने, चुल्लू भर पानी में डूब मरें ये लोग…


    हैदराबाद। भाजपा शासित मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले और देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा जीतने वाले इंदौर में दूषित पानी पीने के कारण उल्टी-दस्त के प्रकोप से अब तक 13 मौत का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इस आंकड़े पर स्थानीय लोगों, सरकार और अधिकारियों के बीच विरोधाभास बना हुआ है।
    इस बीच, हैदराबाद से सांसद और AIMIM की चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इस हादसे के लिए भाजपा को न सिर्फ जिम्मेदार ठहराया है बल्कि उसकी नीतियों की भी आलोचना की है। ओवैसी ने दो टूक कहा कि ये लोग आम लोगों के घरों पर बुलडोजर तो चलवा सकते हैं लेकिन उन्हें साफ पानी पीने जैसी मूलभूत सुविधा भी नहीं दे सकते हैं।

    हैदराबाद में पत्रकारों से बात करते हुए ओवैसी ने कहा, “…उन्हें (बीजेपी) सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन की परवाह है… वे साफ पीने के पानी जैसी ज़रूरी चीज़ें भी नहीं दे सकते और खुद को विश्वगुरु कहते हैं।”

    उन्होंने कहा, “उन्हें सिर्फ बुलडोजर की फिक्र है। किसी मुसलमनान पर इल्जाम लगा तो उसको लाकर पीटते हैं और घर तोड़ देते हैं। इनकी सरकार ऐसी ही है कि देश में इंसानों को बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया नहीं करा सकते। हम 2026 में आ गए हैं और ये लोग विश्वगुरू बनने का दावा करते हैं लेकिन साफ पानी भी नहीं दे सकते हैं। लोग गंदा पानी पीकर मर रहे हैं तो इन लोगों (बीजेपी के लोगों) को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए।”

    13 लोगों के मरने का दावा
    बता दें कि इंदौर में स्थानीय नागरिकों ने दूषित जल के प्रकोप के दौरान पिछले आठ दिन में छह माह के बच्चे समेत 13 लोगों के दम तोड़ने का दावा किया है, जबकि प्रशासन ने डायरिया से केवल चार लोगों की मौत की पुष्टि की है। अधिकारियों के मुताबिक पहली नजर में लीकेज के कारण पेयजल की पाइपलाइन में ड्रेनेज का गंदा पानी मिलने के कारण भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त का प्रकोप फैला। भागीरथपुरा, राज्य के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र ‘इंदौर-1’ में आता है।
    अधिकारियों के मुताबिक चार लोगों की मौत

    विजयवर्गीय ने संवाददाताओं को बताया कि उल्टी-दस्त के प्रकोप से भागीरथपुरा में 1,400 से 1,500 लोग प्रभावित हुए जिनमें से लगभग 200 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं।

    उन्होंने कहा कि इन मरीजों की हालत खतरे से बाहर है और स्वस्थ होने पर लोगों को अस्पताल से लगातार छुट्टी दी जा रही है।विजयवर्गीय ने उल्टी-दस्त के प्रकोप से मरे लोगों के आंकड़े को लेकर जारी विरोधाभास पर कहा,‘‘मुझे प्रशासन के अधिकारियों ने इस प्रकोप से चार लोगों की मौत की जानकारी दी है, पर यहां (भागीरथपुरा में) आठ-नौ लोगों की मौत की सूचना है। हम इस सूचना की तसदीक कर लेंगे और इसके सही पाए जाने पर संबंधित मृतकों के परिवारों के मुख्यमंत्री मोहन यादव की घोषणा के अनुसार सहायता राशि प्रदान की जाएगी।’’
    अतिरिक्त मुख्य सचिव का दौरा

    इस बीच, राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने स्थानीय अफसरों के साथ भागीरथपुरा क्षेत्र का दौरा करके हालात का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि पेयजल की आपूर्ति की पाइपलाइन के लीकेज को दुरुस्त करने के बाद भागीरथपुरा में बृहस्पतिवार को जलप्रदाय किया गया और घरों से पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए।