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  • ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के लिए जरूरी खबर, वाहन जब्ती के नियम समझें

    ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के लिए जरूरी खबर, वाहन जब्ती के नियम समझें


    नई दिल्ली। सड़क पर वाहन चलाने के साथ-साथ सही जगह पार्क करना भी उतना ही जरूरी है। अक्सर लोग जल्दबाजी या लापरवाही में ऐसी जगह वाहन खड़ा कर देते हैं, जहां पार्किंग की अनुमति नहीं होती। ऐसी स्थिति में ट्रैफिक पुलिस कार्रवाई करते हुए वाहन को टो कर सकती है। वाहन टो होने पर चालान के साथ-साथ वाहन छुड़ाने में अतिरिक्त खर्च और समय दोनों लगते हैं। इसलिए हर वाहन चालक के लिए ट्रैफिक नियमों की जानकारी बेहद जरूरी है।

    नो-पार्किंग जोन में सबसे ज्यादा कार्रवाई
    यदि कोई वाहन No Parking क्षेत्र में खड़ा पाया जाता है, तो ट्रैफिक पुलिस तुरंत कार्रवाई कर सकती है। कई शहरों में नो-पार्किंग जोन पर विशेष निगरानी रखी जाती है और वहां खड़े वाहनों को सीधे टो कर लिया जाता है। इसलिए वाहन पार्क करने से पहले आसपास लगे संकेत बोर्ड और पार्किंग निर्देशों को ध्यान से देखना जरूरी है।

    ट्रैफिक बाधित करने पर भी टो होगी गाड़ी
    अगर आपकी गाड़ी ऐसी जगह खड़ी है जिससे यातायात प्रभावित हो रहा है, तो पुलिस उसे तुरंत हटवा सकती है।
    चौराहों, संकरी गलियों, बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में गलत पार्किंग अक्सर जाम का कारण बनती है। ऐसे मामलों में ट्रैफिक पुलिस वाहन को टो करने के साथ जुर्माना भी लगा सकती है।

    फुटपाथ और जेब्रा क्रॉसिंग पर पार्किंग गैरकानूनी
    फुटपाथ और जेब्रा क्रॉसिंग पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए बनाए जाते हैं। इन जगहों पर वाहन खड़ा करना नियमों के खिलाफ माना जाता है। यदि कोई वाहन इन स्थानों पर खड़ा पाया जाता है, तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है और कई मामलों में वाहन को टो भी किया जाता है। ट्रैफिक सिग्नल के पास पार्किंग करना भी नियम उल्लंघन की श्रेणी में आता है।

    लंबे समय तक खड़ी गाड़ी भी बन सकती है समस्या
    अगर कोई वाहन लंबे समय तक सार्वजनिक स्थान पर बिना निगरानी के खड़ा रहता है और यातायात में बाधा बनता है, तो पुलिस उसे लावारिस मानकर हटवा सकती है। कई शहरों में ऐसे वाहनों की पहचान के लिए विशेष अभियान भी चलाए जाते हैं।

     नियमों का उद्देश्य सुरक्षा और व्यवस्था
    ट्रैफिक नियमों का मकसद केवल चालान काटना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखना है। गलत पार्किंग से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है और लोगों को परेशानी होती है।

     इन बातों का रखें विशेष ध्यान
    हमेशा निर्धारित पार्किंग स्थल पर ही वाहन खड़ा करें
    नो-पार्किंग जोन से बचें
    फुटपाथ और जेब्रा क्रॉसिंग पर पार्किंग न करें
    ट्रैफिक सिग्नल और चौराहों के पास वाहन खड़ा न करें
    लंबे समय तक सार्वजनिक स्थान पर वाहन छोड़ने से बचें

    नियमों का पालन करके न सिर्फ चालान और टोइंग से बचा जा सकता है, बल्कि सड़क पर सभी की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है।

  • रिजल्ट सुधारना हुआ महंगा? CBSE की नई फीस व्यवस्था पर सवाल

    रिजल्ट सुधारना हुआ महंगा? CBSE की नई फीस व्यवस्था पर सवाल


    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के परिणाम जारी होने के बाद पोस्ट-रिजल्ट प्रक्रिया का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है। जो छात्र अपने प्राप्त अंकों से संतुष्ट नहीं हैं, वे अब अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी मंगवा सकेंगे और इसके बाद वेरिफिकेशन या री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर पाएंगे। हालांकि इस प्रक्रिया में तय किए गए शुल्क को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच नाराजगी और चर्चा दोनों बढ़ गई हैं।

    कॉपी देखने के लिए 700 रुपए प्रति विषय
    CBSE के अनुसार छात्र 19 मई से 22 मई 2026 तक अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए प्रति विषय ₹700 शुल्क निर्धारित किया गया है। यानी अगर किसी छात्र को तीन विषयों की कॉपी देखनी है, तो उसे ₹2100 तक खर्च करने पड़ सकते हैं। इसी वजह से सोशल मीडिया पर कई लोग इसे छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बता रहे हैं।

    दो चरणों में होगी पूरी प्रक्रिया
    बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार यह प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में छात्र अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी प्राप्त करेंगे। इसके बाद ही दूसरे चरण में वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन किया जा सकेगा। CBSE ने स्पष्ट किया है कि केवल वही छात्र री-इवैल्यूएशन के लिए पात्र होंगे, जिन्होंने पहले स्कैन कॉपी के लिए आवेदन किया होगा।

    वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन की फीस भी तय
    यदि छात्र स्कैन कॉपी देखने के बाद अपने अंकों से संतुष्ट नहीं होते हैं, तो वे 26 मई से 29 मई 2026 के बीच वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकेंगे।
    इसके लिए बोर्ड ने अलग-अलग शुल्क तय किए हैं-
    वेरिफिकेशन शुल्क: ₹500 प्रति उत्तर पुस्तिका
    री-इवैल्यूएशन शुल्क: ₹100 प्रति प्रश्न

    बढ़ भी सकते हैं और घट भी सकते हैं अंक
    CBSE ने साफ किया है कि री-इवैल्यूएशन के बाद अंकों में बदलाव संभव है। यानी छात्रों के नंबर बढ़ भी सकते हैं और कम भी हो सकते हैं। अगर किसी छात्र के अंकों में बदलाव होता है, तो उसे पुरानी मार्कशीट और प्रमाणपत्र जमा करने होंगे। इसके बाद बोर्ड संशोधित अंकपत्र जारी करेगा।

    पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी
    बोर्ड ने बताया कि आवेदन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से पूरी की जाएगी। छात्रों को तय समय सीमा के भीतर आवेदन करना और शुल्क जमा करना होगा। प्रत्येक चरण में केवल एक बार आवेदन की अनुमति होगी।

    सोशल मीडिया पर उठ रहे सवाल
    उत्तर पुस्तिका देखने के लिए ₹700 प्रति विषय शुल्क तय होने के बाद सोशल मीडिया पर कई छात्र और अभिभावक सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि अपनी ही कॉपी देखने के लिए इतनी बड़ी रकम लेना छात्रों पर अतिरिक्त दबाव डालता है। कई यूजर्स इसे “शिक्षा का महंगा सिस्टम” बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग पारदर्शिता के लिए इस प्रक्रिया को जरूरी भी मान रहे हैं।

  • बोधगया में वेब सीरीज की शूटिंग करते दिखे तेज प्रताप यादव, भगवा वस्त्र में योग और पूजा के दृश्य शूट; पिता लालू यादव की फिल्मी एंट्री भी फिर चर्चा में

    बोधगया में वेब सीरीज की शूटिंग करते दिखे तेज प्रताप यादव, भगवा वस्त्र में योग और पूजा के दृश्य शूट; पिता लालू यादव की फिल्मी एंट्री भी फिर चर्चा में

    नई दिल्ली। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव इन दिनों अपनी नई वेब सीरीज की शूटिंग को लेकर चर्चा में हैं। गुरुवार को तेज प्रताप यादव बोधगया में भगवा वस्त्र पहने शूटिंग करते नजर आए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    बताया जा रहा है कि वेब सीरीज के कुछ खास दृश्यों की शूटिंग के लिए बोधगया और भूटान मंदिर को चुना गया। शूटिंग के दौरान तेज प्रताप योग करते और भक्ति भाव में डूबे दिखाई दिए। फिल्म यूनिट का कैमरा और डायरेक्शन क्रू लगातार उन्हें सीन समझाता नजर आया।

    हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इस वेब सीरीज का नाम क्या है, इसे कौन-सी प्रोडक्शन कंपनी बना रही है और यह कब रिलीज होगी। लेकिन शूटिंग की तस्वीरों और वीडियो ने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा बढ़ा दी है।

    शूटिंग खत्म होने के बाद तेज प्रताप यादव गया के प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने गर्भगृह में पूजा-अर्चना की और मंदिर परिसर से पूजा सामग्री भी खरीदी।

    इस बीच लोगों को साल 2005 में रिलीज हुई फिल्म पद्मश्री लालू प्रसाद यादव भी याद आ गई, जिसमें लालू प्रसाद यादव ने खुद कैमियो रोल किया था। अब बेटे तेज प्रताप के वेब सीरीज में नजर आने से लालू परिवार की “फिल्मी कनेक्शन” वाली चर्चा फिर तेज हो गई है।

  • डॉलर पर निर्भरता घटाने और आर्थिक सुरक्षा के लिए भारत समेत कई देश बढ़ा रहे सोने का भंडार

    डॉलर पर निर्भरता घटाने और आर्थिक सुरक्षा के लिए भारत समेत कई देश बढ़ा रहे सोने का भंडार


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की है, जिससे घरेलू खपत और आयात बिल पर नियंत्रण रखा जा सके। वहीं दूसरी ओर सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) लगातार अपने सोने के भंडार को बढ़ा रहे हैं, जिससे सवाल उठ रहा है कि एक तरफ आम लोगों को सोना खरीदने से क्यों रोका जा रहा है और दूसरी तरफ सरकारी स्तर पर इसकी खरीद क्यों जारी है।

    आंकड़ों के अनुसार,भारतीय रिजर्व बैंक के पास वर्तमान में करीब 880 टन से अधिक सोना भंडार है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने लगातार सोने की खरीद बढ़ाई है और वैश्विक गोल्ड रिजर्व रैंकिंग में भी अपनी स्थिति मजबूत की है। इसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर पर निर्भरता कम करना और आर्थिक स्थिरता को मजबूत बनाना है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर भी कई देश जैसे चीन, तुर्किये और पोलैंड अपने गोल्ड रिजर्व को तेजी से बढ़ा रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर पर घटता भरोसा माना जा रहा है। खासकर 2022 में रूस के विदेशी मुद्रा भंडार पर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के बाद कई देशों ने डॉलर की निर्भरता कम करने की रणनीति अपनाई है।

    सोने को सुरक्षित संपत्ति माना जाता है क्योंकि यह किसी एक देश की मुद्रा या नीतियों पर निर्भर नहीं होता। इसी कारण केंद्रीय बैंक इसे अपने रिजर्व में बढ़ा रहे हैं। भारत भी इसी रणनीति के तहत अपने विदेशी मुद्रा भंडार को संतुलित करने और आर्थिक जोखिम कम करने के लिए सोना खरीद रहा है।

    हालांकि, दूसरी तरफ भारत में सोने का आयात भारी मात्रा में डॉलर खर्च करता है। भारत अपनी जरूरत का लगभग पूरा सोना आयात करता है, जिससे देश का आयात बिल बढ़ता है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है। यही कारण है कि सरकार आम लोगों से सोने की खरीद सीमित करने की अपील कर रही है ताकि घरेलू मांग नियंत्रित रहे और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हो।

    आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष भारत ने सोने पर भारी खर्च किया है, लेकिन ऊंची कीमतों के कारण खपत में गिरावट भी देखी गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में अगर सोने की कीमतें और बढ़ती हैं तो आयात और भी महंगा हो जाएगा।

    कुल मिलाकर, एक तरफ सरकार वैश्विक आर्थिक सुरक्षा और डॉलर जोखिम से बचाव के लिए सोना जमा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ घरेलू अर्थव्यवस्था और आयात बिल को नियंत्रित रखने के लिए जनता से सोने की खरीद कम करने की अपील की जा रही है।

  • एमपी, यूपी और राजस्थान में पारा 47°C तक पहुंचने की आशंका, कई राज्यों में हीटवेव और बारिश दोनों के अलर्ट

    एमपी, यूपी और राजस्थान में पारा 47°C तक पहुंचने की आशंका, कई राज्यों में हीटवेव और बारिश दोनों के अलर्ट


    नई दिल्ली। मौसम विभाग के अनुसार इस बार मानसून सामान्य समय से पहले 26 मई के आसपास केरल पहुंच सकता है, लेकिन इसके बावजूद देश में मौसम का मिजाज चिंताजनक बना हुआ है। अमेरिकी एजेंसी NOAA की रिपोर्ट के अनुसार इस साल सुपर अल-नीनो की स्थिति बनने की संभावना है, जिससे मानसून कमजोर रह सकता है और देश के कई हिस्सों में सूखा व भीषण गर्मी बढ़ सकती है।

    अल-नीनो एक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ने से मानसूनी हवाओं की दिशा प्रभावित होती है, जिससे भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में बारिश कम होने और तापमान बढ़ने की आशंका रहती है। इसी कारण इस बार बारिश सामान्य से कम और गर्मी अधिक रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।

    मौसम विभाग के मुताबिक इस बार मानसून केरल से 1 जून के बजाय 26 मई के आसपास प्रवेश कर सकता है, लेकिन इसके बाद अलग-अलग राज्यों में इसकी गति अलग-अलग रहेगी। अनुमान के अनुसार राजस्थान में 20 जून, मध्य प्रदेश में 12 जून, उत्तर प्रदेश में 18 जून और बिहार में 8 से 10 जून के बीच मानसून पहुंच सकता है।

    फिलहाल देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और लू का असर जारी है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड और विदर्भ में हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है, जहां तापमान 46 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। कई इलाकों में रात के समय भी लू चलने की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    मध्य प्रदेश के भोपाल में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया, जिससे सड़कों का डामर तक पिघलने की स्थिति बन गई। वहीं राजस्थान के फलौदी में 44.8 डिग्री और महाराष्ट्र के अमरावती में 45.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जिससे कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ है।

    इसके साथ ही मौसम विभाग ने अलग-अलग राज्यों में बारिश और आंधी-तूफान के अलर्ट भी जारी किए हैं। झारखंड में ऑरेंज अलर्ट, बिहार और हरियाणा के कुछ जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी है, जबकि जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।

    वहीं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और महाराष्ट्र में हीटवेव का असर अगले एक सप्ताह तक जारी रहने की आशंका है। कई राज्यों में तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
     

  • CM रेवंत रेड्डी का बड़ा दावा, राहुल गांधी होंगे अगले लोकसभा चुनाव में INDIA ब्लॉक के PM चेहरे

    CM रेवंत रेड्डी का बड़ा दावा, राहुल गांधी होंगे अगले लोकसभा चुनाव में INDIA ब्लॉक के PM चेहरे

    हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने राष्ट्रीय राजनीति को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा है कि अगले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेता राहुल गांधी INDIA ब्लॉक की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। हैदराबाद में आयोजित एक कॉन्क्लेव के दौरान उन्होंने यह बात कही और दावा किया कि जल्द ही कांग्रेस पार्टी इस संबंध में आधिकारिक घोषणा करेगी।

    राहुल गांधी को लेकर बड़ा दावा
    मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि राहुल गांधी का मुख्य उद्देश्य कांग्रेस को सत्ता में वापस लाना है और वे खुद उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा प्रधानमंत्री बनने की नहीं है, लेकिन हाल ही में विकाराबाद में हुई एक बैठक के दौरान मैंने उन्हें इस जिम्मेदारी को स्वीकार करने के लिए तैयार किया है।” रेवंत रेड्डी के अनुसार, कांग्रेस जल्द ही राहुल गांधी के नाम को औपचारिक रूप से घोषित करेगी और इसके बाद INDIA ब्लॉक के सहयोगी दलों से भी समर्थन जुटाया जाएगा।

    INDIA ब्लॉक की रणनीति और नया विजन
    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विपक्षी गठबंधन की ओर से एक विस्तृत पॉलिसी डॉक्यूमेंट तैयार किया जाएगा, जिसके आधार पर जनता से जनादेश मांगा जाएगा। उन्होंने राजनीतिक शैली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज के समय में जनता तेज और सीधे परिणाम चाहती है, जिसे उन्होंने “स्विगी स्टाइल पॉलिटिक्स” की संज्ञा दी।

    बंदी संजय मामले पर तीखा बयान
    इस दौरान रेवंत रेड्डी ने केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार से जुड़े POCSO मामले पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पुलिस कानून के अनुसार निष्पक्ष जांच कर रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बंदी संजय से अपील करते हुए कहा कि वे अपने बेटे को पुलिस के सामने पेश करें और जांच में सहयोग करें। रेवंत रेड्डी ने कहा, “राजनीति करने के बजाय नैतिक जिम्मेदारी दिखानी चाहिए और कानून का सामना करना चाहिए।”

    अवैध निर्माण और विकास परियोजनाओं पर बयान
    मुख्यमंत्री ने झीलों, तालाबों और सरकारी जमीनों पर हो रहे अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम जनता के भविष्य के लिए जरूरी है। उन्होंने एक जापानी कहावत का उल्लेख करते हुए कहा कि लोग कई बातें भूल सकते हैं, लेकिन जल स्रोतों को नुकसान पहुंचाने वालों को कभी नहीं भूलते। उन्होंने मूसी नदी पुनरुद्धार परियोजना का भी जिक्र किया और कहा कि प्रभावित लोगों को सरकार की ओर से डबल-बेडरूम मकान, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं दी जाएंगी।

    ‘फ्यूचर सिटी’ और विकास का विजन
    रेवंत रेड्डी ने ‘तेलंगाना राइजिंग 2047’ और ‘भारत फ्यूचर सिटी’ का विजन साझा करते हुए बताया कि हैदराबाद के पास लगभग 30 हजार एकड़ में हाई-टेक फ्यूचर सिटी विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना में आईटी कंपनियों, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) और कृषि आधारित उद्योगों को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट्स में से तीन हैदराबाद को मिले हैं और शमशाबाद में एक आधुनिक बुलेट ट्रेन हब भी विकसित किया जाएगा।

    पूर्व सरकार पर निशाना
    मुख्यमंत्री ने पूर्व सरकार पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि पिछली सरकार ने केंद्र से अपेक्षित सहयोग नहीं लिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार केंद्र के साथ बेहतर समन्वय बनाकर राज्य के विकास और फंडिंग को आगे बढ़ा रही है।

  • ब्रिक्स बैठक में पश्चिम एशिया पर फूटा मतभेद, संयुक्त बयान अटका; 63 बिंदुओं का अलग दस्तावेज जारी

    ब्रिक्स बैठक में पश्चिम एशिया पर फूटा मतभेद, संयुक्त बयान अटका; 63 बिंदुओं का अलग दस्तावेज जारी



    नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में हुई ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर गंभीर मतभेद सामने आए, जिसके चलते इस बार कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया जा सका। बैठक में ईरान, इजरायल और अमेरिका से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच अलग-अलग राय देखने को मिली, जिससे साझा सहमति बनाना मुश्किल हो गया। इसके बाद अध्यक्ष की ओर से एक विस्तृत बयान जारी किया गया, जिसमें 63 बिंदुओं के जरिए सभी देशों के विचारों को शामिल किया गया।

    सूत्रों के अनुसार, बैठक में ईरान ने मांग रखी थी कि इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमलों की निंदा ब्रिक्स मंच से की जाए, लेकिन इस पर सभी सदस्य देश सहमत नहीं हो सके। कुछ देशों ने कहा कि किसी एक पक्ष को सीधे तौर पर निशाना बनाना कूटनीतिक संतुलन के खिलाफ होगा, जबकि अन्य देशों ने क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए सख्त रुख अपनाने की वकालत की।

    इसी असहमति के कारण संयुक्त बयान पर सहमति नहीं बन सकी। बाद में जारी अध्यक्षीय बयान में कहा गया कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर सदस्य देशों के विचार अलग-अलग हैं, लेकिन सभी देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि संकट का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। बयान में अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर भी जोर दिया गया।

    बयान में यह भी कहा गया कि ब्रिक्स देशों ने एकतरफा प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत दंडात्मक उपायों की आलोचना की है। साथ ही मानवीय संकटों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। बैठक में फलस्तीन के मुद्दे पर भी चर्चा हुई, जिसमें 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फलस्तीन राज्य के समर्थन की बात दोहराई गई।

    इस तरह पश्चिम एशिया के संवेदनशील मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण के कारण ब्रिक्स बैठक में एकजुटता की कमी दिखी, हालांकि संवाद और शांति की आवश्यकता पर सभी देशों ने सहमति व्यक्त की।

  • उदयनिधि स्टालिन के बयान पर फिर विवाद, सफाई में क्या बोले DMK नेता?

    उदयनिधि स्टालिन के बयान पर फिर विवाद, सफाई में क्या बोले DMK नेता?


    चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर ‘सनातन धर्म’ को लेकर गर्म हो गई है। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) नेता और राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन ने अपने पुराने बयान पर उठे विवाद के बाद सफाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी धर्म या आस्था का विरोध करना नहीं है, बल्कि उस सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाना है जो लोगों को ऊंच-नीच और जातियों में बांटती है।

    उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि जब उन्होंने विधानसभा में सनातन धर्म को लेकर टिप्पणी की थी, तब उनका आशय समाज में मौजूद जाति आधारित भेदभाव और असमानता से था। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी बातों को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। उनके अनुसार, समाज में समानता और न्याय स्थापित करना ही उनका मुख्य उद्देश्य है।

    उन्होंने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी और विचारधारा किसी भी धार्मिक आस्था के खिलाफ नहीं है। उन्होंने लिखा कि द्रविड़ आंदोलन की परंपरा हमेशा से सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों पर आधारित रही है। उन्होंने पेरियार, डॉ. भीमराव अंबेडकर, सी.एन. अन्नादुरई और एम. करुणानिधि जैसे नेताओं के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सोच इन्हीं मूल्यों से प्रेरित है।

    उदयनिधि ने कहा कि मंदिरों या धार्मिक स्थलों पर किसी को रोकने का सवाल ही नहीं उठता। उनका कहना था कि हर व्यक्ति को समाज और धार्मिक स्थलों में समान अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं, जिससे अनावश्यक विवाद पैदा हो रहा है।

    गौरतलब है कि यह विवाद नया नहीं है। इससे पहले सितंबर 2023 में भी उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को लेकर एक विवादित टिप्पणी की थी, जिसमें उन्होंने इसकी तुलना कुछ सामाजिक बुराइयों से करते हुए इसे खत्म करने की बात कही थी। उस बयान के बाद देशभर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भारी विरोध हुआ था और मामला अदालत तक भी पहुंचा था, जहां उन्हें कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था।

    हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में अपने पहले भाषण में उन्होंने एक बार फिर इस मुद्दे को उठाया, जिससे विवाद दोबारा भड़क गया। विपक्षी दलों ने उनके बयान को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया, वहीं डीएमके ने इसे सामाजिक न्याय की लड़ाई करार दिया।

    अब बढ़ते राजनीतिक दबाव और आलोचनाओं के बीच उदयनिधि स्टालिन ने अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। हालांकि, उनके बयान के समर्थन और विरोध में राजनीतिक माहौल लगातार गरमाया हुआ है।

  • तेल संकट की टेंशन खत्म? रणनीतिक भंडारण बढ़ाने की नई योजना

    तेल संकट की टेंशन खत्म? रणनीतिक भंडारण बढ़ाने की नई योजना


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बने अनिश्चित माहौल के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की प्रमुख ऊर्जा कंपनी अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) ने भारत में कच्चे तेल का रणनीतिक भंडारण बढ़ाने पर सहमति जताई है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

    भारत का कच्चा तेल रिजर्व 70% तक बढ़ेगा
    नई डील के तहत ADNOC भारत में अपने क्रूड स्टोरेज को बढ़ाकर लगभग 3 करोड़ बैरल तक ले जाएगा। इससे भारत के कुल रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में करीब 70 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने का अनुमान है।

    फिलहाल भारत के पास:
    लगभग 5.3 मिलियन टन (करीब 38 मिलियन बैरल) का रणनीतिक तेल भंडार है
    जो विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर जैसे स्थानों पर स्थित है नए समझौते के बाद इसमें कई मिलियन बैरल का अतिरिक्त तेल स्टोरेज जुड़ जाएगा।

    संकट के समय भारत को मिलेगी बड़ी सुरक्षा
    यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल आपूर्ति को लेकर अस्थिरता बनी हुई है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह कदम भारत को किसी भी वैश्विक संकट, युद्ध या सप्लाई बाधा के समय मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करेगा। यूएई पहले से ही भारत के शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता देशों में शामिल है, और अब यह साझेदारी और गहरी होती जा रही है।

    LPG और ऊर्जा सहयोग भी बढ़ा
    सिर्फ कच्चे तेल ही नहीं, बल्कि यूएई की कंपनी ADNOC ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के साथ LPG (रसोई गैस) सप्लाई और ट्रेडिंग को लेकर भी समझौता किया है।
    इससे:
    भारत में LPG सप्लाई मजबूत होगी
    दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी
    गैस की उपलब्धता पर दबाव कम होगा

    आगे की बड़ी योजनाएं
    भारत सरकार पहले से ही रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व को बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत:
    ओडिशा (चंडीखोल)
    कर्नाटक (पादुर)
    में नए स्टोरेज प्रोजेक्ट्स तैयार किए जा रहे हैं।
    इसके साथ ही देश 20–30 दिनों का LPG रिजर्व बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।

    वैश्विक ऊर्जा रणनीति में भारत की मजबूत स्थिति
    UAE की यह पहल दिखाती है कि भारत वैश्विक ऊर्जा साझेदारी में तेजी से एक महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी न केवल तेल आपूर्ति को स्थिर करेगी, बल्कि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी बड़ा कदम साबित हो सकती है।

  • शराबबंदी को लेकर सड़क पर उतरी भाजपा, सीएम आवास के बाहर प्रदर्शन

    शराबबंदी को लेकर सड़क पर उतरी भाजपा, सीएम आवास के बाहर प्रदर्शन


    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में शुक्रवार को उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के आवास के बाहर शराबबंदी की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता सड़क पर उतरे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की और करीब 10 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया।

    BJP का तीखा हमला, बयान ने बढ़ाया विवाद
    प्रदर्शन के दौरान बीजेपी नेताओं ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। पार्टी नेताओं ने कहा कि सरकार राजस्व (रेवेन्यू) के नाम पर शराब की बिक्री को बढ़ावा दे रही है, जो युवाओं के भविष्य के लिए नुकसानदायक है। बीजेपी महासचिव अनवर खान के एक बयान ने विवाद और बढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि “अगर सरकार को सिर्फ रेवेन्यू की चिंता है तो हम मस्जिदों के बाहर बैठकर भीख मांग लेंगे।” इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं और इसे लेकर बहस तेज हो गई है।

    शराबबंदी को लेकर BJP का अल्टीमेटम
    बीजेपी नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने शराबबंदी पर कोई कदम नहीं उठाया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पार्टी ने कहा कि यह विरोध काजीगुंड से लेकर करनाह (LoC क्षेत्र) तक फैलाया जाएगा। नेताओं का कहना है कि कश्मीर की पहचान सूफी और संत परंपरा से जुड़ी है, इसलिए यहां शराब की बिक्री का विरोध जरूरी है।

    सरकार और विपक्ष का जवाब
    इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पहले ही शराबबंदी की मांग को खारिज कर चुके हैं। उनका कहना है कि राजस्व और प्रशासनिक कारणों से इस तरह का फैसला आसान नहीं है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने भी संकेत दिया कि शराब पर प्रतिबंध लगाने से राज्य के राजस्व पर बड़ा असर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बैन लगाने से अवैध तस्करी बढ़ सकती है।

    राजनीतिक टकराव तेज
    नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने पलटवार करते हुए कहा कि मौजूदा आबकारी नीति पहले की सरकारों के समय बनी थी, जिसमें BJP भी शामिल थी। पार्टी का कहना है कि आज जो मुद्दा उठाया जा रहा है, उसकी नींव पहले ही डाली जा चुकी थी।