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  • PM मोदी आज पश्चिम एशिया संकट को लेकर मुख्यमंत्रियों के साथ करेंगे बैठक

    PM मोदी आज पश्चिम एशिया संकट को लेकर मुख्यमंत्रियों के साथ करेंगे बैठक


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) चुनाव वाले राज्यों को छोड़कर अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों (Chief Ministers) के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Conferencing.) के जरिये आज शाम बातचीत करेंगे। खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष (West Asia crisis) शुरू होने के बाद पीएम मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ पहली बार बैठक होगी। कैबिनेट सचिवालय चुनाव वाले राज्यों तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के मुख्य सचिवों के साथ अलग-अलग बैठक करेगा।

    केंद्र सरकार के सूत्रों ने बताया, प्रधानमंत्री शुक्रवार शाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्यमंत्रियों से जुड़ेंगे और इस दौरान संकट से निपटने में राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा भी होगी। इस पहल का उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना से प्रेरित होकर सरकार के प्रयासों में तालमेल सुनिश्चित करना है।

    प्रधानमंत्री मोदी ईरान संघर्ष से उत्पन्न संकट पर लगातार सक्रिय हैं। सोमवार को उन्होंने लोकसभा सांसदों को इस बारे में सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी जबकि मंगलवार को राज्यसभा को इस बारे में संबोधित किया। बुधवार को सर्वदलीय बैठक में उनके वरिष्ठ मंत्रियों ने विपक्ष के सभी दलों के सवालों के जवाब दिए। चूंकि तेल-गैस की आपूर्ति से निपटने में राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है इसलिए इस बारे में अब मोदी मुख्यमंत्रियों से चर्चा करेंगे।

    पीएम मोदी लगातार यह कहते रहे हैं कि ईरान संघर्ष से पैदा संकट लंबा खिंच सकता है। उन्होंने यह आशंका भी जताई है कि संकट की स्थिति में कुछ तत्व इसका फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं और इससे निपटने में राज्यों को सख्त कदम उठाने होंगे। लोकसभा में अपने संबोधन में भी उन्होंने इस बात पर जोर दिया था।


    भारत के पास 60 दिन का ईंधन: सरकार

    इससे पहले सरकार ने नागरिकों को आश्वस्त किया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद कोई तात्कालिक खतरा नहीं है। सरकार ने बताया कि देश के पास 60 दिनों का ईंधन उपलब्ध है। लोगों से ईंधन की कमी से जुड़ी अटकलों पर ध्यान न देने की अपील की गई। सरकार ने पुष्टि की कि देश की ऊर्जा आपूर्ति स्थिर और अच्छी तरह प्रबंधित है और मौजूदा मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है।

    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, कच्चे तेल की आपूर्ति अगले लगभग दो महीने के लिए पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल बाजार कंपनियों ने पहले से ही आयात की व्यवस्था कर ली है, जिससे आपूर्ति में निरंतरता बनी रहे। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के बावजूद भारत 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है, जिससे किसी एक मार्ग या क्षेत्र पर निर्भरता कम हो जाती है।

  • संकट के बीच केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला… पेट्रोल-डीजल पर 10 रुपये घटाया टैक्स

    संकट के बीच केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला… पेट्रोल-डीजल पर 10 रुपये घटाया टैक्स

    नई दिल्ली। भारत सरकार (Government of India) ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Petrol and Diesel Prices) को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Special Additional Excise Duty) घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीजल पर यह ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी गई है। विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क पहले पेट्रोल पर 13 रुपये लीटर था और डीजल पर 10 रुपये था। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण वैश्विक कच्चे तेल के बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा हुआ है।

    नायरा ने बढ़या था पेट्रोल-डीजल के दाम
    इस फैसले से उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि बाजार में कीमतों का ट्रेंड अभी भी अस्थिर बना हुआ है। खास बात यह है कि यह सरकारी हस्तक्षेप उस समय आया है जब निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल के दाम ₹5 प्रति लीटर और डीजल ₹3 प्रति लीटर तक बढ़ा दिए थे।

    रूस की कंपनी रोसनेफ्ट की मालिकाना हक वाली नायरा एनर्जी देश भर में 7,000 से अधिक पेट्रोल पंप चलाती है। वहां के डीलरों ने इस कीमत वृद्धि पर चिंता जताई है, और कहा है कि इससे ईंधन की मांग पर असर पड़ सकता है। साथ ही, उन्होंने संभावित विरोध प्रदर्शनों का भी इशारा किया है। कुछ डीलरों ने यह भी बताया कि पिछले कुछ दिनों में ईंधन की सप्लाई में कटौती की गई है।

    ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर क्या पड़ेगा असर
    सरकार के इस कदम से आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए यह दोधारी तलवार साबित हो सकता है। एक्साइज ड्यूटी घटने से हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOC) जैसी कंपनियों पर कीमतें स्थिर रखने का दबाव बढ़ सकता है, खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।

    क्यों लिया गया यह फैसला?
    इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में सरकार ने टैक्स घटाकर आम लोगों को राहत देने और महंगाई पर नियंत्रण रखने की कोशिश की है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो भविष्य में पेट्रोल-डीजल के दाम फिर बढ़ सकते हैं।

    फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले किए जाने के बाद से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। यह कीमतें करीब 119 डॉलर प्रति बैरल के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई थीं और फिर घटकर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं।

  • लोकसभा की 50% सीट वृद्धि के साथ अगले आम चुनाव से महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी… OBC कोटा नहीं

    लोकसभा की 50% सीट वृद्धि के साथ अगले आम चुनाव से महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी… OBC कोटा नहीं


    नई दिल्ली।
    अगले आम चुनाव (General Elections) में महिलाओं (Women Reservation) के लिए एक तिहाई स्थान सुरक्षित करने की दिशा में सरकार ने कदम बढ़ा दिए हैं। इस विषय पर केवल विपक्षी दलों से ही नहीं बल्कि सत्ताधारी गठबंधन के भीतर भी गहन चर्चा की जा रही है। बुधवार को हुई बैठक में पिछड़ा वर्ग के लिए अलग कोटे जैसे कुछ प्रश्नों के बीच संविधान संशोधन विधेयक (Constitution Amendment Bill) पर सहमति बन गई है। सरकार अब कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों से अंतिम वार्ता के बाद इस विधेयक को प्रस्तुत करने का समय निर्धारित करेगी।

    बैठक के दौरान गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) ने गठबंधन के सहयोगियों को विस्तार से बताया कि सरकार इस विषय पर इतनी सक्रिय क्यों हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के बाद होने वाली सीमा निर्धारण की प्रक्रिया 2029 तक ही पूर्ण हो पाएगी। ऐसी स्थिति में सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम को आगामी आम चुनाव में लागू करने का अपना वचन पूरा करना चाहती है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि विभिन्न क्षेत्रों में सीटों की संख्या को आनुपातिक आधार पर 50 प्रतिशत तक बढ़ाया जाएगा।


    विधानसभा चुनावों पर प्रभाव नहीं

    सरकार जिस योजना पर विपक्ष से संवाद कर रही है उसके अनुसार महिला आरक्षण को वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से ही लागू किया जाना है। सत्ता पक्ष की बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि वर्ष 2023 में विधेयक लाते समय इसे दो हजार उन्नतीस में प्रभावी करने का ही संकल्प लिया गया था। विपक्षी नेताओं का भी यही मानना है कि सरकार ने आगामी वर्षों में होने वाले उत्तर प्रदेश या अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों में इसे लागू करने का कोई संकेत नहीं दिया है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को आगामी आम चुनाव में लागू करने का अपना वचन पूरा करना चाहती है सरकार। -अमित शाह


    पिछड़ा वर्ग कोटे पर सांविधानिक स्थिति

    बैठक में जब पिछड़ा वर्ग के लिए अलग आरक्षण का प्रश्न उठा तो गृह मंत्री ने कहा कि सांविधानिक रूप से ऐसा करना संभव नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि महिला आरक्षण लागू होते ही पिछड़ा वर्ग से आने वाले जनप्रतिनिधियों की संख्या स्वयं ही बढ़ जाएगी। इसका कारण यह है कि कोई भी राजनीतिक दल टिकट वितरण के समय इतने बड़े वर्ग की अनदेखी कर अपना राजनीतिक नुकसान नहीं करना चाहेगा।


    जातिगत गणना की चुनौतियां

    बैठक में 2027 की गणना में जातियों के आंकड़े एकत्रित करने पर भी विमर्श हुआ। एक वरिष्ठ मंत्री ने पुरानी गणना की स्मृतियां साझा करते हुए बताया कि तब लाखों की संख्या में जातियां और उपजातियां सामने आने के कारण उन आंकड़ों का उपयोग कठिन हो गया था। चूंकि जाति बताने का कोई निश्चित स्वरूप नहीं है और यह व्यक्ति की अपनी जानकारी पर आधारित है इसलिए इस बार भी यह संख्या बहुत अधिक बढ़ सकती है।


    विधेयक प्रस्तुत करने की रणनीति

    सरकार इस महत्वपूर्ण निर्णय पर विपक्षी दलों से संवाद के बाद ही अंतिम निर्णय लेगी। वर्तमान में दो विकल्पों पर विचार हो रहा है। पहला विकल्प वर्तमान सत्र के समापन के बाद इसी कार्य के लिए दो दिन की अतिरिक्त बैठक बुलाने का है और दूसरा विकल्प पांच राज्यों के चुनाव बाद मई माह में विशेष सत्र बुलाने का है। सरकार के सूत्रों के अनुसार प्रमुख विपक्षी दल सैद्धांतिक रूप से इस पर सहमत हैं और अन्य दलों से चर्चा बाकी है।

  • गुजरात का ‘बनास बायो-सीएनजी’ मॉडल बन रहा कचरे से कंचन और ग्रामीण समृद्धि का राष्ट्रीय मानक

    गुजरात का ‘बनास बायो-सीएनजी’ मॉडल बन रहा कचरे से कंचन और ग्रामीण समृद्धि का राष्ट्रीय मानक


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वेस्ट टू वेल्थ’, आत्मनिर्भर भारत और हरित ऊर्जा के विज़न को जमीन पर उतारते हुए गुजरात का बनास बायो-सीएनजी प्लांट मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल बन गया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में विकसित इस प्रोजेक्ट को केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय और केंद्रीय सहकारिता विभाग के संयुक्त प्रयासों से देश के लगभग 15 राज्य अपने यहां लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। बनास डेयरी द्वारा विकसित यह मॉडल गोबर और अन्य जैविक अपशिष्ट को स्वच्छ ऊर्जा और जैविक उर्वरक में बदलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रहा है।

    गुजरात सरकार ने इस अभिनव पहल की संभावनाओं को देखते हुए बायो-सीएनजी क्षेत्र को बजटीय प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में सहकारी दुग्ध उत्पादक संघों द्वारा नए प्लांट स्थापित करने के लिए 60 करोड़ रुपए का विशेष प्रावधान किया गया है। राज्य में चरणबद्ध तरीके से लगभग 10 बायो-सीएनजी प्लांट स्थापित करने की योजना प्रस्तावित है। बनासकांठा में 40 मीट्रिक टन प्रतिदिन गोबर प्रसंस्करण क्षमता वाला प्लांट पिछले 6 वर्षों से सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है और इसकी सफलता से प्रेरित होकर 5 और विशाल प्लांट शुरू करने की योजना बन रही है।

    ग्रामिण रोजगार, ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरण सुरक्षा का त्रिकोणीय मॉडल
    हर प्लांट प्रतिदिन लगभग 1 लाख किलो गोबर को वैज्ञानिक पद्धति से प्रोसेस करता है। 50-55 करोड़ रुपए की निवेश लागत से निर्मित यह संयंत्र यह दिखाता है कि इकोलॉजी और इकोनॉमी साथ-साथ चल सकती हैं। बनासकांठा के 20-25 गांवों के लगभग 400-450 पशुपालक परिवार नियमित रूप से गोबर आपूर्ति करते हैं और 1 रुपए प्रति किलो के हिसाब से अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। गोबर संग्रहण और परिवहन के लिए लगभग 13 ट्रैक्टर-ट्रॉली उपयोग में लाई जा रही हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ रही हैं।

    इस बहु-उत्पाद आधारित मॉडल में प्रतिदिन लगभग 1,800 किलोग्राम सीएनजी, 25 मीट्रिक टन ठोस जैविक उर्वरक और 75 मीट्रिक टन तरल जैविक उर्वरक का उत्पादन होता है। इन उत्पादों से प्रतिदिन लगभग 3 लाख रुपए का राजस्व अर्जित होता है, जो वार्षिक रूप से लगभग 12 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। इसके अलावा यह संयंत्र प्रतिवर्ष लगभग 6,750 टन CO2 उत्सर्जन कम करने में सक्षम है, जिससे जलवायु परिवर्तन के खिलाफ गुजरात की भागीदारी स्पष्ट होती है।

    बनास बायो-सीएनजी मॉडल यह सिद्ध करता है कि स्वच्छ ऊर्जा, जैविक उर्वरक और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन का त्रिकोणीय संगम ग्रामीण समृद्धि और पर्यावरण सुरक्षा में कैसे क्रांति ला सकता है। ‘ग्रीन बनासकांठा’ से प्रेरित यह मॉडल अब ‘ग्रीन गुजरात’ की दिशा में पूरे देश के लिए एक नया राष्ट्रीय मानक बन चुका है।

  • सिलाव की मंजुला ने 'PMFME' योजना से खड़ा किया 10 लाख का मसाला उद्योग, 30 से अधिक को रोजगार

    सिलाव की मंजुला ने 'PMFME' योजना से खड़ा किया 10 लाख का मसाला उद्योग, 30 से अधिक को रोजगार


    नई दिल्ली। बिहार के सिलाव प्रखंड के सरीचक गांव की मंजुला कुमारी ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से महिलाओं के लिए स्वावलंबन की नई कहानी लिखी है। कभी छोटे स्तर पर हल्दी पीसकर लोकल मार्केट में बेचने वाली मंजुला ने अब ‘पीएमएफएमई’ (प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन) योजना की मदद से 10 लाख रुपए की लागत से सरीचक एंटरप्राइजेज नामक मसाला उद्योग स्थापित किया है। इस उद्योग के माध्यम से उन्होंने 30 से अधिक लोगों को रोजगार दिया है और इलाके के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। मंजुला ने बाजार में उपलब्ध मसालों से अलग शुद्धता और गुणवत्ता पर खास जोर दिया है। उनकी यूनिट में हल्दी, मिर्च, धनिया और गरम मसाले पीसने के लिए अलग-अलग मशीनें लगी हैं, ताकि ग्राहकों को 100 प्रतिशत शुद्ध मसाले मिल सकें।

    मंजुला कुमारी ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि वह पहले से ही हल्दी का छोटा व्यवसाय करती थीं, लेकिन बढ़ती मांग पूरी करना मुश्किल था। इसी बीच, जीविका कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें पीएमएफएमई योजना की जानकारी मिली। मंजुला ने बड़े स्तर पर व्यवसाय शुरू करने की सोच से आवेदन किया और बड़गांव के केनरा बैंक से 7.21 लाख रुपये का लोन प्राप्त किया। अपनी जमा पूंजी के साथ उन्होंने कुल 10 लाख रुपए से अपनी यूनिट लगाई। उन्होंने बताया कि आमतौर पर लोग एक ही मशीन में सारे मसाले पीसते हैं, लेकिन उनकी हल्दी मशीन पूरी तरह अलग है। इसके अलावा उनके पास जीरा, धनिया, मिर्च, गोलकी और विभिन्न गरम व सब्जी मसाले तैयार करने की सुविधाएं हैं।

    शुरुआत में माल बेचने की कठिनाइयों को मंजुला ने स्मार्ट रणनीति से हल किया। हर गांव में उनका स्टाफ (जीविका से जुड़ी महिलाएं) मांग लेकर सप्लाई करती हैं। वर्तमान में 30 लोग डिस्ट्रीब्यूशन में और 3 लोग पिसाई व पैकेजिंग में काम कर रहे हैं। आज उनके मसाले सिलाव प्रखंड के स्कूलों, राजगीर के बड़े होटलों और हाल ही में खुले मॉल तक सप्लाई हो रहे हैं। इस सफलता पर मंजुला कुमारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेष प्रशंसक बन गई हैं और योजना के तहत उन्हें लगभग ढाई लाख रुपये की अनुदान राशि भी मिली। उनका सपना है कि जीवन में कम से कम एक बार प्रधानमंत्री से मुलाकात हो।

  • PM मोदी कल राज्यों के मुख्यमंत्रियों से करेंगे चर्चा, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव पर होगी समीक्षा

    PM मोदी कल राज्यों के मुख्यमंत्रियों से करेंगे चर्चा, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव पर होगी समीक्षा


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार, 27 मार्च को राज्यों की तैयारियों की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगी।

    सूत्रों के अनुसार, बैठक में विशेष रूप से ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने नियंत्रण और ऊर्जा प्रवाह को प्रभावित करने के कदमों पर ध्यान दिया जाएगा। चर्चा का उद्देश्य देश की एकता बनाए रखना और चुनौतियों का सामूहिक रूप से सामना करने के लिए राज्यों और केंद्र के प्रयासों में तालमेल सुनिश्चित करना होगा।

    पर्याप्‍त मात्रा में ईंधन स्टॉक

    भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में लगभग दो महीने के पर्याप्त तेल और ईंधन का भंडार मौजूद है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अफवाहों में न आएं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति पहले ही सुनिश्चित की जा चुकी है। पीआईबी की 26 मार्च, 2026 की विज्ञप्ति में बताया गया कि तेल विपणन कंपनियों (OMC) ने आयात की अग्रिम व्यवस्था कर ली है, जिससे देश में किसी भी तरह की आपूर्ति समस्या नहीं होगी।

    सरकार ने बुलाई थी सर्वदलीय बैठक

    सरकार ने मिडिल ईस्ट के हालात पर गुरुवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। बैठक में विपक्ष को सूचित किया गया कि पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से चार भारतीय जहाज सुरक्षित निकले हैं। सरकार ने कहा कि पैनिक की कोई जरूरत नहीं है और विपक्ष किसी भी समय जानकारी के लिए संपर्क कर सकता है।

  • देश के वीरों को बड़ा सम्मान: गैलेंट्री अवॉर्ड विजेताओं को ट्रेन में आजीवन मुफ्त सफर की सौगात

    देश के वीरों को बड़ा सम्मान: गैलेंट्री अवॉर्ड विजेताओं को ट्रेन में आजीवन मुफ्त सफर की सौगात


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने वीरता पुरस्कार हासिल करने वाले सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान में एक अहम कदम उठाया है। नए आदेश के अनुसार थल सेना, वायुसेना और नौसेना के गैलेंट्री अवॉर्ड विजेताओं को अब ट्रेनों में आजीवनमुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाएगी। यह विशेष सुविधा फर्स्ट क्लास, 2AC और एसी चेयर कार जैसी श्रेणियों में लागू होगी। खास बात यह है कि इन वीर जवानों के साथ एक सहयोगी (Companion) को भी यात्रा करने की अनुमति दी गई है, जिससे उन्हें अतिरिक्त सुविधा मिल सके।

    परिजनों को भी शामिल किया गया
    सरकार ने इस योजना का दायरा बढ़ाते हुए वीरता पुरस्कार विजेताओं के परिवारों को भी इसमें शामिल किया है। इसके तहत उनके जीवनसाथी चाहे वे विधवा हों, विधुर हों या पुनर्विवाह कर चुके हों, इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। इसके अलावा, अविवाहित मरणोपरांत सम्मानित सैनिकों के माता-पिता को भी जीवनभर मुफ्त रेल यात्रा की सुविधा मिलेगी।

    सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक

    यह फैसला देश के उन बहादुर सैनिकों के प्रति सरकार की कृतज्ञता को दर्शाता है, जिन्होंने अपनी बहादुरी और बलिदान से राष्ट्र की रक्षा की है। इसका उद्देश्य केवल सम्मान देना ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों को भी सामाजिक और आर्थिक सहयोग प्रदान करना है।

    मनोबल बढ़ाने की पहल
    इस तरह की पहल से न सिर्फ सैनिकों और उनके परिवारों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि युवाओं को भी सेना में शामिल होकर देश सेवा के लिए प्रेरणा मिलेगी। यह निर्णय सशस्त्र बलों के कल्याण और सम्मान को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • आंध्र प्रदेश में दर्दनाक हादसा, बस-ट्रक की टक्कर के बाद भड़की आग, 14 लोगों की जिंदा जलकर मौत

    आंध्र प्रदेश में दर्दनाक हादसा, बस-ट्रक की टक्कर के बाद भड़की आग, 14 लोगों की जिंदा जलकर मौत


    नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के मारकापुरम जिले के रायवरम क्षेत्र में गुरुवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। यात्रियों से भरी बस और बजरी से लदे टिपर ट्रक की आमने-सामने की टक्कर के बाद दोनों वाहनों में अचानक आग लग गई। पुलिस के अनुसार, टक्कर के तुरंत बाद आग इतनी तेजी से फैली कि बस के अंदर बैठे यात्रियों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। खासकर पीछे बैठे लोग लपटों और धुएं में फंस गए। दम घुटने और जलने की वजह से 14 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

    घायलों को अस्पताल में कराया गया भर्ती

    स्थानीय लोगों और पुलिस की तत्परता से करीब एक दर्जन घायलों को बचाकर नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। मारकापुरम के डीएसपी नागराजू ने बताया कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि आशंका है कि कुछ शव अभी भी बस के जले हुए मलबे में फंसे हो सकते हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है।

    मुख्यमंत्री ने जताया शोक

    प्रशासन मृतकों की पहचान करने और उनके परिजनों से संपर्क स्थापित करने में जुटा है। पहचान पूरी होने के बाद शव सौंपे जाएंगे। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस दुखद हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

  • ‘पाकिस्तान मध्यस्थ नहीं, सिर्फ पोस्टमैन है’ और अमेरिका का वफादार

    ‘पाकिस्तान मध्यस्थ नहीं, सिर्फ पोस्टमैन है’ और अमेरिका का वफादार


    नई दिल्‍ली।
     मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है। पाकिस्तान इस पूरे घटनाक्रम में अहम मध्यस्थ की भूमिका निभाता नजर आ रहा है। जानकारी के मुताबिक, अमेरिका की ओर से तैयार किए गए सीज़फायर प्रस्ताव को पाकिस्तान ने ईरान तक पहुंचा दिया है। इसी बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर ने पाकिस्तान की भूमिका पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि पाकिस्तान खुद कोई मध्यस्थ नहीं है, बल्कि सिर्फ ‘पोस्टमैन’ या ‘कूरियर’ की तरह काम कर रहा है। यानी असली बातचीत अमेरिका और ईरान के बीच सीधे तौर पर हो रही है, पाकिस्तान सिर्फ संदेश पहुंचाने का काम कर रहा है।

    ‘अमेरिका का वफादार साथी रहा है पाकिस्तान’

    एमजे अकबर के मुताबिक, अमेरिका को पाकिस्तान पर भरोसा इसलिए है क्योंकि पाकिस्तान लंबे समय से अमेरिका का ‘वफादार साथी’ रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका पाकिस्तान को एक आज्ञाकारी सहयोगी मानता है, जबकि भारत एक स्वतंत्र सोच वाला देश है, जो अपनी नीतियां खुद तय करता है और अमेरिका के साथ बराबरी के स्तर पर रिश्ते रखता है।

    शहबाज शरीफ ने मध्यस्थता निभाने की कही बात
    उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान और अमेरिका के बीच सैन्य सहयोग बहुत पुराना है। 1950 के दशक में ही दोनों देशों के बीच समझौते हो गए थे, जिसके तहत अमेरिका को पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल करने की अनुमति मिली थी। यही कारण है कि आज भी दोनों के रिश्ते काफी करीबी माने जाते हैं। दरअसल, यह बयान उस समय आया है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में सोशल मीडिया पर कहा था कि अगर अमेरिका और ईरान चाहें तो पाकिस्तान शांति वार्ता की मेजबानी करने के लिए तैयार है। पाकिस्तान ने खुद को इस संघर्ष में एक मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश की थी।

    ईरान ने ठुकराया अमेरिका का प्रस्ता
    लेकिन दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिका के प्रस्ताव को साफ तौर पर ठुकरा दिया है। ईरान का कहना है कि वह युद्ध तभी खत्म करेगा जब उसकी अपनी शर्तें पूरी होंगी और वह अपने समय के अनुसार ही फैसला करेगा। ईरान ने यह भी कहा कि वह तब तक जवाबी कार्रवाई जारी रखेगा जब तक उसकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं।

    अमेरिका ने ईरान के सामने रखीं 15 शर्ते
    इसी बीच खबरें हैं कि अमेरिका ने ईरान के सामने युद्ध खत्म करने के लिए करीब 15 शर्तें रखी हैं। हालांकि, इस्राइल को चिंता है कि अमेरिका कहीं नरम रुख अपनाकर सिर्फ एक समझौता ढांचा बनाने की कोशिश न करे। गौरतलब है कि यह संघर्ष 28 फरवरी से शुरू हुआ था और अब चौथे हफ्ते में पहुंच चुका है। इस युद्ध का असर सिर्फ इन देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर तेल और ऊर्जा सप्लाई पर भी असर पड़ा है, जिससे पूरी दुनिया में चिंता बढ़ गई है।

  • LPG संकट में भारत के लिए इस पुराने दोस्त ने खोले भंडार, 20000 KM दूर से बढ़ाए मदद के हाथ

    LPG संकट में भारत के लिए इस पुराने दोस्त ने खोले भंडार, 20000 KM दूर से बढ़ाए मदद के हाथ


    नई दिल्ली।
     पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण उपजे गंभीर एलपीजी संकट के बीच, लगभग 20,000 किलोमीटर दूर स्थित एक दक्षिण अमेरिकी देश भारत के लिए एक बड़े मददगार के रूप में सामने आया है। दरअसल पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष के कारण समुद्री यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से भारत की ऊर्जा सप्लाई चेन पर गहरा असर पड़ा है, क्योंकि भारत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात इसी मार्ग से होता है। इस बाधा ने नई दिल्ली को अपने ऊर्जा स्रोतों में तेजी से विविधता लाने के लिए मजबूर कर दिया है।

    अर्जेंटीना का अप्रत्याशित और अहम सहयोग

    इस संकट की घड़ी में अर्जेंटीना एक महत्वपूर्ण रणनीतिक भागीदार बनकर उभरा है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा संबंधों में कितनी तेजी से विकास हुआ है, इसे इन आंकड़ों से समझा जा सकता है। साल 2026 की पहली तिमाही में ही अर्जेंटीना ने भारत को 50,000 टन एलपीजी का निर्यात किया है। यह मात्रा पूरे 2025 में भेजे गए 22,000 टन से दोगुने से भी अधिक है। संघर्ष के गहराने से पहले ही अर्जेंटीना के ‘बाहिया ब्लांका’ बंदरगाह से करीब 39,000 टन एलपीजी भारतीय तटों पर पहुँच चुकी थी। संकट के बीच 5 मार्च को 11,000 टन का एक और शिपमेंट भारत के लिए रवाना किया गया है। गौरतलब है कि साल 2024 से पहले अर्जेंटीना ने भारत को कभी एलपीजी की आपूर्ति नहीं की थी।

    राजनयिक दृष्टिकोण और भविष्य की संभावनाएं
    एक मुताबिक, भारत में अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो अगस्टिन कौसिनो ने इस सहयोग कहा कि उनका देश भारत की ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि अर्जेंटीना के पास गैस का विशाल भंडार है। हमारी राष्ट्रीय गैस और तेल कंपनी के अध्यक्ष ने पिछले साल भारत का दो बार दौरा किया था; भारतीय ऊर्जा कंपनियों और केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी के साथ उनकी कई बैठकें हुईं। यह सहयोग अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन मौजूदा हालात इसे और तेज कर सकते हैं।

    भारत की रणनीति की सराहना
    राजदूत ने भारत सरकार की ‘ऊर्जा विविधता रणनीति’ को बेहद बुद्धिमानी भरा बताया। उन्होंने संसद में दिए गए हालिया बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत अब 40 से अधिक देशों से ऊर्जा आपूर्ति नेटवर्क बना रहा है, जिसमें अर्जेंटीना एक अहम कड़ी है।

    साझेदारी की चुनौतियां
    भले ही यह सहयोग भारत के लिए राहत की बात है, लेकिन इसमें कुछ बड़ी लॉजिस्टिक चुनौतियां भी शामिल हैं। अर्जेंटीना के बाहिया ब्लांका से गुजरात के दाहेज बंदरगाह की दूरी लगभग 20,000 किलोमीटर है। यह ऊर्जा शिपमेंट के लिए दुनिया के सबसे लंबे मार्गों में से एक है। इतनी लंबी दूरी के कारण परिवहन लागत में भारी इजाफा होता है, डिलीवरी में लंबा समय लगता है और खराब मौसम से जुड़े जोखिम भी बढ़ जाते हैं।

    भारत के घरेलू कदम
    आयात के नए विकल्प तलाशने के साथ-साथ भारत सरकार ने घरेलू स्तर पर भी स्थिति को संभालने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। कमर्शियल एलपीजी आवंटन में वृद्धि की है। हॉस्पिटैलिटी और खाद्य सेवा क्षेत्रों को राहत देने के लिए सरकार ने कमर्शियल एलपीजी के कोटे में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इसके अलावा, घरों में निरंतर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ‘पाइप्ड नेचुरल गैस’ (PNG) के कनेक्शन देने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है, जो एक अधिक स्थिर विकल्प है।