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  • NEET पेपर लीक कांड में CBI का बड़ा खुलासा, पुणे के लेक्चरर कुलकर्णी को बताया मास्टरमाइंड

    NEET पेपर लीक कांड में CBI का बड़ा खुलासा, पुणे के लेक्चरर कुलकर्णी को बताया मास्टरमाइंड


    नई दिल्ली।
    नीट यूजी पेपर लीक मामले (NEET-UG Paper leak case) ने परीक्षा सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच के बाद एक बड़े नाम का खुलासा हुआ है, जिसे इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। आरोपी पीवी कुलकर्णी (PV Kulkarni.) पुणे के एक कॉलेज में लेक्चरर के रूप में तैनात है। आरोप है कि उसने परीक्षा प्रक्रिया की गोपनीयता का दुरुपयोग करते हुए पेपर लीक और नकल से जुड़ा एक नेटवर्क तैयार किया।

    जांच एजेंसियों के अनुसार, पीवी कुलकर्णी की भूमिका केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं थी। उसने कुछ छात्रों के लिए विशेष कोचिंग कक्षाएं भी चलाईं। इन कक्षाओं में कथित तौर पर परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों और उनके संभावित उत्तरों पर फोकस किया जाता था। बताया जा रहा है कि ये कोचिंग क्लासेस पुणे स्थित उनके आवास पर ही चलाई जाती थीं, जहां सीमित और चयनित छात्रों को ही प्रवेश दिया जाता था। इस गतिविधि ने परीक्षा की पारदर्शिता पर गंभीर संदेह पैदा कर दिया है।

    शुरुआती जांच में क्या आया सामने
    CBI की शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क अकेले एक व्यक्ति की ओर से नहीं चलाया जा रहा था, बल्कि इसमें कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। जांचकर्ताओं का मानना है कि यह एक संगठित गिरोह की तरह काम कर रहा था, जो परीक्षा से पहले ही छात्रों तक गोपनीय जानकारी पहुंचाने की कोशिश करता था। इसी वजह से NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है और प्रशासन पर भी सख्त कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।

    फिलहाल इस मामले में जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और CBI अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। कई लोगों से पूछताछ की जा रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। सरकार और जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा प्रणाली में किसी भी तरह की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला न केवल परीक्षा घोटाले का है, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से भी जुड़ा गंभीर मुद्दा बन गया है।

  • देशभर में कल 5 घंटे हड़ताल पर रहेंगे गिग वर्कर्स…. पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से भड़के, दी चेतावनी

    देशभर में कल 5 घंटे हड़ताल पर रहेंगे गिग वर्कर्स…. पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से भड़के, दी चेतावनी


    नई दिल्ली।
    देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Petrol and Diesel Prices) में लगभग 3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद ऑनलाइन डिलीवरी (Online delivery.) और ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं (App based Taxi services) से जुड़े गिग वर्कर्स (Gig Workers) के सामने एक नया आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पिछले करीब चार वर्षों में देशव्यापी स्तर पर ईंधन की कीमतों में यह पहली बड़ी बढ़ोतरी है। इसके विरोध में गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन रविवार दोपहर 12:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक ऐप-आधारित सेवाओं को पूरी तरह से बंद रखने का एलान किया है। यूनियन ने कंपनियों से प्रति किलोमीटर सर्विस रेट में तत्काल बढ़ोतरी करने की मांग की है।

    यूनियन ने चेतावनी दी है कि ईंधन के दामों में हुई इस वृद्धि से देश के लगभग 1.2 करोड़ गिग वर्कर्स बुरी तरह प्रभावित होंगे, जो अपनी दैनिक आजीविका के लिए पूरी तरह मोटरसाइकिल और स्कूटर पर निर्भर हैं। आपको बता दें कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मिडिल ईस्ट में जारीतनाव को इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह बताया जा रहा है।


    LPG संकट ने दोगुनी की मुसीबत

    ईंधन की मार के साथ-साथ चल रहे एलपीजी संकट ने गिग वर्कर्स की कमर तोड़ दी है। एलपीजी की किल्लत के कारण कई रेस्तरां और क्लाउड किचन ने या तो अपनी सेवाएं सीमित कर दी हैं या वे अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं। भोजन की आपूर्ति ठप होने से फूड डिलीवरी के ऑर्डर वॉल्यूम में 50% से 70% तक की भारी गिरावट आई है। यह स्थिति उन डिलीवरी पार्टनर्स के लिए बेहद गंभीर है, जिनकी दैनिक कमाई पूरी तरह से ऑर्डरों की अधिक संख्या पर मिलने वाले इंसेंटिव पर टिकी होती है।


    20 प्रति किलोमीटर का न्यूनतम रेट तय हो

    GIPSWU की अध्यक्ष सीमा सिंह ने इस ईंधन बढ़ोतरी को महंगाई और भीषण गर्मी से जूझ रहे श्रमिकों पर सीधा प्रहार बताया है। उन्होंने कहा, “Swiggy, Zomato, Blinkit और अन्य कंपनियों के डिलीवरी वर्कर्स अब इस बढ़े हुए खर्च का बोझ उठाने की स्थिति में बिल्कुल नहीं हैं। हम सरकार और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से मांग करते हैं कि वर्कर्स के लिए कम से कम 20 प्रति किलोमीटर का न्यूनतम सर्विस रेट तय किया जाए।”

    यूनियन ने आगाह किया कि यदि ईंधन और वाहनों के रखरखाव के खर्च के अनुपात में कमाई नहीं बढ़ी, तो कई कर्मचारी इस सेक्टर को छोड़ने के लिए मजबूर हो जाएंगे। रिपोर्ट के अनुसार, इस संकट का सबसे बुरा असर महिला गिग वर्कर्स, डिलीवरी एजेंटों और ड्राइवरों पर पड़ रहा है, जिनमें से कई विपरीत मौसम और भारी ट्रैफिक के बीच रोजाना 10 से 14 घंटे काम करते हैं।

    कल होने वाले 5 घंटे के इस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में कई प्रमुख प्लेटफॉर्म्स से जुड़े वर्कर्स के शामिल होने की उम्मीद है। Swiggy, Zomato, Blinkit, Zepto, Ola, Uber और Rapido सर्विस पर इसका असर दिखेगा। नीति आयोग के अनुमानों के मुताबिक, चुनौतियों के बावजूद इस सेक्टर का विस्तार तय है। 2020-21 में भारत में गिग वर्कर्स की संख्या 77 लाख थी। वर्ष 2029-30 तक इसके बढ़कर 2.3 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है।

  • शिवसेना चुनाव चिन्ह विवाद पर बयानबाजी से भड़का SC…. नेताओं को लगाई फटकार

    शिवसेना चुनाव चिन्ह विवाद पर बयानबाजी से भड़का SC…. नेताओं को लगाई फटकार


    नई दिल्ली।
    शिवसेना (Shiv Sena) के चुनाव चिह्न (Election Symbol Dispute) को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बहुत सख्त रुख अपनाया है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने नेताओं द्वारा कोर्ट के खिलाफ की जा रही बयानबाजी पर गहरी नाराजगी जताई। शुक्रवार को इस अहम मामले की सुनवाई करते हुए जजों ने साफ कहा कि नेता मीडिया में अदालत के खिलाफ कोई भी गैरजिम्मेदार बातें न कहें। अदालत ने सख्त चेतावनी दी है कि इस तरह का व्यवहार बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    असल में, शिवसेना के दोनों गुटों (उद्धव और शिंदे) के बीच चुनाव चिह्न को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत इस बात से बहुत नाराज थी कि नेता अदालत के अंदर तो खुद सुनवाई टालने के लिए नई तारीखें मांगते हैं, लेकिन बाहर जाकर मीडिया में यह गलत बात फैलाते हैं कि सुप्रीम कोर्ट कोई फैसला नहीं कर रहा है। अदालत ने नेताओं के इस काम को बहुत ही गलत आचरण माना है।


    सुप्रीम कोर्ट ने उद्धव ठाकरे गुट के वकील को क्या चेतावनी दी?

    सुनवाई के दौरान अदालत ने सीधे तौर पर उद्धव ठाकरे गुट के वकील को कड़े निर्देश दिए। पीठ ने कहा कि सबसे पहले अपने लोगों को मीडिया में ऐसे गैरजिम्मेदार बयान देने से रोकें। जज ने सख्त लहजे में कहा कि आप लोग अदालत के अंदर हमसे तारीख मांगते हैं और बाहर जाकर कहते हैं कि अदालत सुनवाई नहीं कर रही है। अदालत ने साफ किया कि अगर किसी को लगता है कि जज यहां खाली बैठे हैं, तो यह बात बिल्कुल भी स्वीकार नहीं की जाएगी।


    मुख्य न्यायाधीश और शिंदे गुट के वकील ने क्या कहा?

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कड़े शब्दों में कहा कि हम यहां शाम चार बजे तक बैठकर काम करते हैं, इसलिए नेताओं को अपने शब्दों का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करना चाहिए। वहीं, एकनाथ शिंदे गुट की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने भी अदालत की बात का पूरा समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अदालत के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी नहीं होनी चाहिए क्योंकि अदालत ने हमेशा सभी पक्षों की बातों को बहुत ही शांति और धैर्य के साथ सुना है।


    मामले की अगली सुनवाई कब होगी और ठाकरे गुट के वकील ने क्या सफाई दी?

    अदालत की इस कड़ी फटकार के बाद उद्धव ठाकरे गुट के वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने अपनी सफाई पेश की। उन्होंने अदालत को बताया कि वकील ऐसे किसी भी बयान का बिल्कुल समर्थन नहीं करते हैं और वे अदालत की सुविधा के अनुसार किसी भी समय बहस करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। इन सभी दलीलों को सुनने के बाद, अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 जुलाई की तारीख तय की गई है।

  • चुनावी हार के बाद ममता का बड़ा संदेश, बोलीं- जिसे जाना है जाए, TMC को फिर से खड़ा करेंगे

    चुनावी हार के बाद ममता का बड़ा संदेश, बोलीं- जिसे जाना है जाए, TMC को फिर से खड़ा करेंगे



    कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार झेलने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी अब पार्टी को नए सिरे से मजबूत करने में जुट गई हैं। चुनाव नतीजों के बाद उन्होंने कोलकाता के कालीघाट स्थित अपने आवास पर पार्टी उम्मीदवारों के साथ अहम समीक्षा बैठक की। इस बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी मौजूद रहे।

    पार्टी में बढ़ती अंदरूनी हलचल और नेताओं के पाला बदलने की अटकलों के बीच ममता बनर्जी ने साफ संदेश दिया कि जो नेता पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे ऐसा कर सकते हैं।

    ‘जिसे जाना है जाए, मैं नहीं रोकूंगी’
    बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने दो टूक कहा कि वे किसी को भी जबरदस्ती पार्टी में बनाए रखने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा, “जो लोग दूसरी पार्टियों में जाना चाहते हैं, वे जा सकते हैं। मैं पार्टी को फिर से खड़ा करूंगी।”

    उन्होंने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा कि जिन पार्टी कार्यालयों को नुकसान पहुंचा है, उन्हें दोबारा तैयार किया जाए। ममता ने कहा कि दफ्तरों की मरम्मत कर उन्हें फिर से सक्रिय बनाया जाए। उन्होंने यहां तक कहा कि जरूरत पड़ी तो वह खुद भी पार्टी कार्यालयों को पेंट करेंगी। ममता ने भरोसा जताया कि तृणमूल कांग्रेस मुश्किल हालात के बावजूद झुकेगी नहीं और एक बार फिर मजबूती से वापसी करेगी।

    सोशल मीडिया पर दिखी एकजुटता
    बैठक के बाद टीएमसी के आधिकारिक एक्स (X) अकाउंट से नेताओं की तस्वीरें साझा की गईं। पोस्ट में कहा गया कि पार्टी के उम्मीदवारों ने दबाव और धमकियों के बावजूद साहस के साथ चुनाव लड़ा। पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि तृणमूल कांग्रेस एक परिवार की तरह एकजुट है और जनता के जनादेश की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

    चुनाव में TMC को बड़ा झटका
    हालिया विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। 294 सीटों वाली विधानसभा में पार्टी सिर्फ 80 सीटों पर सिमट गई। टीएमसी ने 291 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 211 उम्मीदवार हार गए। हारने वालों में कई बड़े नेता और मंत्री भी शामिल रहे। सबसे बड़ा झटका खुद ममता बनर्जी को लगा, जो अपने गढ़ माने जाने वाले भवानीपुर सीट से चुनाव हार गईं।

    ‘जनादेश लूटा गया’
    चुनावी हार की समीक्षा के दौरान ममता बनर्जी ने नतीजों पर सवाल भी उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के जनादेश को “लूटा” और “चुराया” गया है। टीएमसी नेतृत्व का कहना है कि पार्टी इस हार के बाद संगठन को नए सिरे से मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय करने की दिशा में काम करेगी।

  • बकरीद से पहले अलीगढ़ में बयान पर विवाद, ट्रैफिक फ्री सड़क की मांग से गरमाई राजनीति

    बकरीद से पहले अलीगढ़ में बयान पर विवाद, ट्रैफिक फ्री सड़क की मांग से गरमाई राजनीति


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में ईद-उल-अजहा (बकरीद) को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। यहां एक मौलाना द्वारा नमाज के दौरान ट्रैफिक फ्री सड़क की मांग किए जाने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। मौलाना का कहना है कि बकरीद के दिन बड़ी संख्या में लोग ईदगाह और मस्जिदों में नमाज अदा करने पहुंचते हैं, जिससे सड़कों पर भीड़ और जाम की स्थिति बन जाती है। ऐसे में कुछ समय के लिए ट्रैफिक को नियंत्रित या पूरी तरह डायवर्ट किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को किसी तरह की असुविधा न हो।

    सुविधा और व्यवस्था को लेकर तर्क
    मौलाना ने अपने बयान में कहा कि यह कोई विशेष मांग नहीं है, बल्कि त्योहार के दौरान भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। उनके अनुसार, प्रशासन अन्य बड़े आयोजनों में भी भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष इंतजाम करता है, इसलिए धार्मिक अवसरों पर भी इसी तरह की व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ईदगाह और आसपास के क्षेत्रों में भीड़ अधिक होने से आम लोगों और नमाज पढ़ने वालों दोनों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है, जिसे बेहतर ट्रैफिक प्लानिंग से हल किया जा सकता है।

    बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज
    इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोगों ने इसे धार्मिक आयोजन की सामान्य प्रशासनिक मांग बताया है, जबकि कुछ वर्गों का कहना है कि सड़कें आम जनता के आवागमन के लिए होती हैं और उन्हें पूरी तरह बंद करना उचित नहीं है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे व्यवस्था सुधार की जरूरत बता रहे हैं, तो कुछ इसे अनुचित मांग मान रहे हैं।

    प्रशासन की भूमिका पर नजर
    फिलहाल स्थानीय प्रशासन की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि बकरीद को ध्यान में रखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था की तैयारी शुरू कर दी है। संभावना जताई जा रही है कि भीड़ और यातायात को नियंत्रित करने के लिए कुछ स्थानों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया जा सकता है, ताकि त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

    बकरीद जैसे बड़े धार्मिक अवसरों पर भीड़ प्रबंधन हमेशा एक चुनौती रहता है। ऐसे में प्रशासन और समाज के बीच संतुलन बनाकर ही समाधान निकाला जा सकता है, ताकि न तो आम लोगों को परेशानी हो और न ही धार्मिक आयोजन प्रभावित हों।

  • 16 मई का मौसम अलर्ट: 15 राज्यों में भारी बारिश-तूफान की चेतावनी, 85 km/h तक चलेंगी हवाएं

    16 मई का मौसम अलर्ट: 15 राज्यों में भारी बारिश-तूफान की चेतावनी, 85 km/h तक चलेंगी हवाएं

    नई दिल्ली। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार 16 मई को देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज एक बार फिर बिगड़ने वाला है। पूर्वानुमान के मुताबिक उत्तर, पूर्व और मध्य भारत के करीब 15 राज्यों में बारिश, आंधी और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है। कई जगहों पर हवा की रफ्तार 80 से 85 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिससे पेड़ गिरने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की संभावना जताई गई है।

    मौसम विभाग ने बताया है कि उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, झारखंड, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश और आंधी देखने को मिल सकती है। वहीं कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की भी संभावना है, जिससे किसानों को फसलों को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

    दिल्ली में 16 मई की शाम बादल छाने और हल्की आंधी चलने की संभावना है, जबकि तापमान 39 डिग्री सेल्सियस तक रह सकता है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में 60–65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। बिहार में स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है, जहां 80–85 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।

    झारखंड, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भी भारी बारिश और तेज हवाओं के साथ मौसम खराब रहने की संभावना है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क बाधित होने का खतरा भी बढ़ सकता है। वहीं पंजाब और राजस्थान में भी गरज-चमक के साथ आंधी-बारिश का असर देखने को मिलेगा।

    मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में जहां एक ओर तेज गर्मी और लू जैसी स्थिति बनी रहेगी, वहीं कुछ जिलों में तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।

    दक्षिण-पश्चिम और मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने निम्न दबाव क्षेत्र के कारण भी मौसम में यह बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इसके अलावा पूर्वी मध्य प्रदेश और आसपास के इलाकों में बने चक्रवाती परिसंचरण का भी असर देश के मौसम पैटर्न पर पड़ रहा है।

    कुल मिलाकर 16 मई को देश के बड़े हिस्से में मौसम काफी अस्थिर रहने वाला है। तेज बारिश, आंधी और तूफानी हवाओं को देखते हुए प्रशासन और आम लोगों दोनों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।

  • RSS-पाकिस्तान संवाद पर सियासी घमासान: प्रियंका चतुर्वेदी ने BJP-आरएसएस पर साधा निशाना, विपक्ष हुआ आक्रामक

    RSS-पाकिस्तान संवाद पर सियासी घमासान: प्रियंका चतुर्वेदी ने BJP-आरएसएस पर साधा निशाना, विपक्ष हुआ आक्रामक


    नई दिल्ली।
    आरएसएस द्वारा पाकिस्तान से संवाद की वकालत किए जाने को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। शिवसेना (यूबीटी) की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इस तरह के रुख से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के पीड़ितों को न्याय की उम्मीद छोड़ देनी चाहिए।

    प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर टिप्पणी करते हुए इसे “RSS और पाकिस्तान की जुगलबंदी” बताया और आरोप लगाया कि यह बीजेपी के “अमन की आशा” वाले दृष्टिकोण की ओर इशारा करता है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

    यह विवाद तब और बढ़ा जब आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने पाकिस्तान के साथ बातचीत की आवश्यकता पर जोर दिया और संवाद को आगे बढ़ाने की बात कही। उनके इस रुख का पाकिस्तान ने भी स्वागत किया और कहा कि शांति, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बातचीत जरूरी है।

    इस मुद्दे पर पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे ने भी आरएसएस नेता के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद जरूरी है, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बातचीत का मतलब सुरक्षा विकल्पों को छोड़ना नहीं है।

    इसके अलावा नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने भी बातचीत के विचार का समर्थन करते हुए कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और दोनों देशों के बीच संवाद जारी रहना चाहिए।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे विवाद ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान नीति को लेकर अलग-अलग विचारधाराओं को सामने ला दिया है। एक तरफ जहां कुछ नेता बातचीत को समाधान मानते हैं, वहीं दूसरी ओर इसे आतंकवाद के पीड़ितों के साथ न्याय से जोड़कर विरोध भी किया जा रहा है।

    कुल मिलाकर यह मुद्दा अब केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश की घरेलू राजनीति में भी तीखी बहस का कारण बन गया है, जहां संवाद बनाम सख्त रुख की लड़ाई साफ दिखाई दे रही है।

  • सूर्यकुमार यादव बने पिता: बेबी शावर में पत्नी देविशा का ट्रेडिशनल और रॉयल लुक वायरल

    सूर्यकुमार यादव बने पिता: बेबी शावर में पत्नी देविशा का ट्रेडिशनल और रॉयल लुक वायरल



    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव के घर 7 मई 2026 को खुशियों ने दस्तक दी, जब उनकी पत्नी देविशा शेट्टी ने एक बेटी को जन्म दिया, जिसका नाम रिद्धिमा रखा गया है। बेटी के जन्म के बाद परिवार में जश्न का माहौल देखने को मिला और इस खास मौके पर बेबी शावर की खूबसूरत तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

    बेबी शावर में दिखा प्यार और साथ का खूबसूरत अंदाज
    बेबी शावर फंक्शन में सूर्यकुमार यादव और देविशा का प्यार भरा अंदाज फैंस को खूब पसंद आ रहा है।
    तस्वीरों में सूर्यकुमार अपनी पत्नी पर प्यार लुटाते दिखे। कभी उनके बालों में गजरा लगाते नजर आए तो कभी उन्हें प्यार से खाना खिलाते हुए दिखाई दिए।

    वहीं देविशा अपने मॉम टू बी ग्लो और पारंपरिक साड़ी लुक में बेहद खूबसूरत नजर आईं।

    देविशा का ट्रेडिशनल साड़ी लुक बना आकर्षण
    देविशा ने इस खास मौके पर गोल्डन और ऑरेंज टोन की कांजीवरम साड़ी पहनी, जो साउथ इंडियन रॉयल लुक दे रही थी।

    साड़ी में गोल्डन जरी वर्क और ग्रीन बॉर्डर

    नीट ड्रेपिंग के साथ बेबी बंप फ्लॉन्ट

    ऑरेंज हैवी एम्ब्रॉयडरी ब्लाउज

    उनका पूरा लुक बेहद ग्रेसफुल और एलिगेंट नजर आया।

    ज्वेलरी और मेकअप ने बढ़ाया ग्लैमर
    देविशा ने अपने लुक को पारंपरिक साउथ इंडियन टच दिया:

    लेयर्ड नेकलेस और ग्रीन स्टोन चोकर

    झुमके, मांग टीका और कमरबंध

    मेहंदी लगे हाथ और सॉफ्ट वेवी हेयरस्टाइल

    बालों में लगा गजरा, जिसे सूर्यकुमार ने खुद सजाया

    मेकअप को उन्होंने सॉफ्ट और नेचुरल रखा, जिससे उनका प्रेग्नेंसी ग्लो और भी उभरकर सामने आया।

    सूर्यकुमार यादव का सिंपल लेकिन स्टाइलिश लुक
    सूर्यकुमार यादव ने इस मौके पर ऑफ-व्हाइट एथनिक लुक चुना।
    उन्होंने टेक्सचर्ड बंदगला जैकेट को मैचिंग कुर्ता और पैंट के साथ पेयर किया, जो देविशा के हैवी ट्रेडिशनल लुक के साथ शानदार कॉन्ट्रास्ट बना रहा था।

    कपल गोल्स बने सूर्यकुमार और देविशा
    दोनों का यह बेबी शावर लुक सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया जा रहा है।
    जहां एक तरफ देविशा का रॉयल ट्रेडिशनल अंदाज नजर आया, वहीं सूर्यकुमार का सिंपल और एलीगेंट लुक उन्हें परफेक्ट कपल बनाता दिखा। सूर्यकुमार यादव और देविशा की यह खास झलक सिर्फ एक फैमिली मोमेंट नहीं, बल्कि प्यार, साथ और नए जीवन की शुरुआत का खूबसूरत उत्सव है, जिसने फैंस का दिल जीत लिया है।

  • चार राज्यों को जोड़ने वाला हाईस्पीड कॉरिडोर तैयार, बेंगलुरु–हैदराबाद–नागपुर एक्सप्रेसवे से घटेगा आधा सफर समय

    चार राज्यों को जोड़ने वाला हाईस्पीड कॉरिडोर तैयार, बेंगलुरु–हैदराबाद–नागपुर एक्सप्रेसवे से घटेगा आधा सफर समय

    नई दिल्ली । भारत में बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास के बीच एक और महत्वाकांक्षी परियोजना सुर्खियों में है, जो देश के दक्षिण और मध्य हिस्सों की तस्वीर बदलने की क्षमता रखती है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से विकसित किया जा रहा बेंगलुरु–हैदराबाद–नागपुर हाईस्पीड एक्सप्रेसवे एक ऐसा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर है, जो न केवल यात्रा को तेज बनाएगा बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी नई दिशा देगा।

    यह लगभग 1100 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे चार प्रमुख राज्यों से होकर गुजरेगा, जिनमें कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र शामिल हैं। इस मार्ग में आने वाले प्रमुख शहरों में नागपुर, हिंगनघाट, आदिलाबाद, निजामाबाद, हैदराबाद, कुरनूल, अनंतपुर और चिक्काबल्लापुर जैसे महत्वपूर्ण केंद्र शामिल हैं। यह कॉरिडोर इन क्षेत्रों को सीधे एक हाईस्पीड नेटवर्क से जोड़ देगा, जिससे व्यापार और आवागमन दोनों में क्रांतिकारी सुधार देखने को मिलेगा।

    वर्तमान समय में महाराष्ट्र के नागपुर से कर्नाटक के बेंगलुरु तक की यात्रा में लगभग 23 से 24 घंटे का समय लग जाता है। लेकिन इस नए एक्सप्रेसवे के तैयार होने के बाद यही सफर घटकर लगभग 11 से 12 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। इसे 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के अनुसार डिजाइन किया जा रहा है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा अधिक सुरक्षित और तेज हो जाएगी।

    इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 35 हजार करोड़ रुपये है। शुरुआत में इसे 6-लेन एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसे भविष्य में बढ़ते यातायात को देखते हुए 8 या 12 लेन तक विस्तारित करने की योजना भी शामिल है। यह एक एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे होगा, जिसमें प्रवेश और निकास के लिए सीमित स्थान निर्धारित किए जाएंगे, जिससे ट्रैफिक फ्लो सुचारू और नियंत्रित रहेगा।

    इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी विशेषता इसके आसपास विकसित होने वाली औद्योगिक संरचना है। इसके किनारे विशेष आर्थिक क्षेत्र और औद्योगिक पार्क विकसित करने की योजना बनाई गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और रियल एस्टेट तथा व्यापारिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।

    हाल ही की प्रगति के अनुसार, परियोजना के कई हिस्सों में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर काम तेजी से चल रहा है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। हालांकि पर्यावरणीय मंजूरियों के कारण कुछ चरणों में देरी देखने को मिली, लेकिन अब परियोजना को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    यह हाईस्पीड एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं बल्कि एक व्यापक विकास मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में भारत के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और आर्थिक ढांचे को एक नई गति प्रदान करेगा।

  • NEET पेपर लीक से हिला सिस्टम: ऋतिक मिश्रा की आत्महत्या पर बवाल, राहुल गांधी का सरकार पर तीखा हमला, परीक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

    NEET पेपर लीक से हिला सिस्टम: ऋतिक मिश्रा की आत्महत्या पर बवाल, राहुल गांधी का सरकार पर तीखा हमला, परीक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल


    नई दिल्ली। NEET परीक्षा विवाद और पेपर लीक मामले ने देशभर में छात्रों और अभिभावकों में गहरी चिंता पैदा कर दी है। इसी बीच लखीमपुर खीरी के 21 वर्षीय NEET उम्मीदवार ऋतिक मिश्रा की आत्महत्या ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। परिवार का कहना है कि ऋतिक ने 3 मई को कानपुर में NEET-UG परीक्षा दी थी और परीक्षा रद्द होने के बाद वह मानसिक तनाव में आ गया था। गुरुवार को उसने अपने घर पर आत्महत्या कर ली, जिसके बाद इलाके में शोक और गुस्से का माहौल है।

    इस घटना पर राजनीति भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि “सिस्टम द्वारा हत्या” है। उन्होंने X पर लिखा कि पिछले कई वर्षों में दर्जनों परीक्षा घोटालों ने करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है, लेकिन जिम्मेदारी तय नहीं की गई। राहुल गांधी ने ऋतिक के आखिरी शब्द “अब नहीं देनी प्रतियोगी परीक्षा” का हवाला देते हुए सरकार से जवाबदेही की मांग की और कहा कि इस लड़ाई को वह छात्रों के साथ मिलकर लड़ेंगे।

    सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि 2015 से 2026 के बीच कई परीक्षा घोटाले सामने आए हैं, जिनमें NEET और अन्य मेडिकल परीक्षाएं भी शामिल हैं। उनका कहना है कि अधिकांश मामलों में जांच एजेंसियां सक्रिय होने के बावजूद दोषियों को सजा नहीं मिल पाई है, जबकि छात्रों का भविष्य प्रभावित होता रहा है।

    वहीं दूसरी ओर, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। पेपर लीक के आरोपों के बाद 3 मई को आयोजित परीक्षा रद्द कर दी गई है और अब इसे 21 जून को दोबारा कराया जाएगा। सरकार ने जांच CBI को सौंपी है, जिसने देश के कई राज्यों में छापेमारी करते हुए अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया है।

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि भविष्य में NEET परीक्षा को और पारदर्शी बनाने के लिए इसे कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में लाने पर विचार किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं ताकि ऐसे विवाद दोबारा न हों।

    फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और छात्रों में असमंजस का माहौल बना हुआ है। परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर देशभर में गंभीर बहस छिड़ गई है।