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  • मप्र में खेती बनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़, टमाटर कर रहा किसानों को समृद्ध

    मप्र में खेती बनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़, टमाटर कर रहा किसानों को समृद्ध

     अब यह सिर्फ जीवन-यापन का साधन नहीं रही है, राज्‍य में खेती करना मतलब किसानों की समृद्धि, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन बनना है। खासतौर पर टमाटर की खेती ने प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है।

    निरंतर बढ़ते रकबे, रिकॉर्ड उत्पादन, आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकार की दूरदर्शी नीतियों के चलते आज देश का सबसे बड़ा टमाटर उत्पादक राज्य बनकर मप्र उभरा है। दिसंबर 2025 के संदर्भ में देखें तो मध्य प्रदेश सब्जी उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर अपनी स्थिति और मजबूत कर चुका है। प्रदेश में अब लगभग 13 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सब्जियों की खेती हो रही है, जिसमें टमाटर का योगदान सबसे अधिक है।

    वित्त वर्ष 2025-26 की शुरुआत तक टमाटर की खेती का रकबा बढ़कर करीब 1 लाख 35 हजार हेक्टेयर के आसपास पहुँच चुका था। अनुमान है कि इससे 38 से 40 लाख मीट्रिक टन तक टमाटर उत्पादन हो रहा है, जोकि देश की कुल सब्जी आपूर्ति में मध्य प्रदेश की अहम भूमिका को दर्शाता है। इसके साथ ही स्‍वभाविक तौर पर दिसम्‍बर तक उत्‍पादन का आंकड़ा ओर ऊपर गया है। पिछले पाँच वर्षों में टमाटर के रकबे में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2021-22 में जहाँ टमाटर की खेती लगभग 1.10 लाख हेक्टेयर में होती थी, वहीं दिसंबर 2025 तक यह आंकड़ा लगभग 25 हजार हेक्टेयर की बढ़ोतरी के साथ नए रिकॉर्ड पर पहुँच गया है। यह विस्तार सिर्फ क्षेत्रफल तक सीमित नहीं रहा है गुणवत्ता, उत्पादकता और बाजार में विश्वसनीयता का भी प्रमाण है।

    उल्‍लेखनीय है कि प्रदेश के टमाटर की मांग महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के अलावा दिल्ली-एनसीआर, गुजरात और पूर्वी भारत के कई बड़े मंडी केंद्रों तक है। ताजगी, बेहतर आकार, लंबी शेल्फ लाइफ और स्वाद के कारण मध्य प्रदेश का टमाटर थोक व्यापारियों और प्रोसेसिंग उद्योगों की पहली पसंद बन गया है। उत्पादकता के मामले में भी राज्‍य ने अच्‍छी प्रगति की है। दिसंबर 2025 तक टमाटर की औसत उत्पादकता लगभग 29 से 30 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर तक पहुँच गई है, जोकि प्रदेश की औसत उद्यानिकी उत्पादकता से लगभग दोगुनी है। यह सफलता उन्नत बीजों, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई तथा समय पर तकनीकी मार्गदर्शन का परिणाम है।

    प्रदेश में कुल उद्यानिकी फसलों का रकबा अब लगभग 27 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गया है, जिसमें सब्जियों का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है। टमाटर के साथ-साथ धनिया और लहसुन के उत्पादन में भी मध्य प्रदेश दिसंबर 2025 तक देश में प्रथम स्थान बनाए हुए है। इससे राज्य की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को बहुआयामी मजबूती मिली है। राज्य सरकार की योजनाओं ने इस परिवर्तन में निर्णायक भूमिका निभाई है। टमाटर के प्रमाणित बीजों पर 50 प्रतिशत तक अनुदान, सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं में सब्सिडी, फसल बीमा और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से सामूहिक विपणन ने किसानों का जोखिम कम किया है। साथ ही प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना के तहत टमाटर आधारित प्रसंस्करण इकाइयों की संख्या भी 2025 तक तेजी से बढ़ी है।

    अनूपपुर जिला इस सफलता की जीवंत मिसाल बनकर उभरा है। दिसंबर 2025 तक जिले में लगभग 16 हजार किसान टमाटर की खेती से जुड़े हैं और उत्पादन 1.5 लाख मीट्रिक टन के करीब पहुँच गया है। जैतहरी, अनूपपुर और पुष्पराजगढ़ के क्लस्टरों से टमाटर अब मध्यप्रदेश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बड़े बाजारों में भेजा जा रहा है। किसानों की आमदनी में भी बड़ा बदलाव आया है। जहाँ पहले पारंपरिक फसलों से सीमित आय होती थी, वहीं अब टमाटर की खेती से प्रति एकड़ औसतन 80 हजार से एक लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ संभव हो रहा है। महिला किसानों की भागीदारी भी बढ़ी है, जिससे सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को बल मिला है।

    कृषि विशेषज्ञों का इस संबंध में मानना है कि यदि दिसंबर 2025 के बाद कोल्ड स्टोरेज, परिवहन, निर्यात और बड़े स्तर के प्रसंस्करण ढांचे को और सशक्त किया जाए, तो मध्य प्रदेश न केवल भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी टमाटर उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। इस तरह देखें तो दिसंबर 2025 में टमाटर मध्य प्रदेश के किसानों के लिए ‘लाल सोना’ साबित हुआ है, जिसने उनकी आय, आत्मविश्वास और भविष्य तीनों को नई दिशा दी है।

  • आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अयोध्या में किए श्रीरामलला के दर्शन

    आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अयोध्या में किए श्रीरामलला के दर्शन

    आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने रविवार को रामजन्मभूमि में दर्शन पूजन कर श्रीरामलला का आशीर्वाद लिया। उन्होंने मन्दिर की यज्ञशाला के अनुष्ठान में भाग लिया और श्रीराम लला का दर्शन पूजन करने के साथ ही उन्होंने सम्पूर्ण निर्माण को उत्सुकता से निहारा।

    मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने जगतगुरु माधवाचार्य का भी आशीर्वाद लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आज मुझे अयोध्या के दिव्य और भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन और प्रार्थना करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यहां एक बार फिर आना मेरे लिए शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक रूप से उत्थानकारी अनुभव रहा।

    भगवान श्रीराम के मूल्य और आदर्श हम सभी के लिए शाश्वत शिक्षा हैं। ईश्वर करे कि वे हमें सदा मार्गदर्शन और प्रेरणा देते रहें। राम जन्मभूमि में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट महामंत्री चम्पत राय ने मुख्यमंत्री का स्वागत कर निर्माण की बारीकियों को बताया। इस अवसर पर ट्रस्ट सदस्य डाॅ. अनिल मिश्र, गोपाल राव, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही उपस्थित रहे। इसके बाद मुख्यमंत्री आंध्र प्रदेश वापस लौट गए।

  • कांग्रेस में बयानबाज़ी से बढ़ा घमासान: दिग्विजय सिंह के इशारे पर रेवंत रेड्डी का सोनिया गांधी कार्ड

    कांग्रेस में बयानबाज़ी से बढ़ा घमासान: दिग्विजय सिंह के इशारे पर रेवंत रेड्डी का सोनिया गांधी कार्ड


    नई दिल्ली। कांग्रेस के भीतर एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के संगठन सुधार से जुड़े बयान ने पार्टी में अंदरूनी कलह को हवा दे दी है। RSS-BJP की कार्यशैली का उदाहरण देकर दिए गए उनके बयान पर कांग्रेस के कई नेताओं ने आपत्ति जताई, जिसके बाद यह मुद्दा खुलकर सियासी बहस में बदल गया।
    अब इस विवाद में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की एंट्री ने मामला और गरमा दिया है।

    रेवंत रेड्डी ने बिना नाम लिए दिग्विजय सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस की विरासत और सोनिया गांधी के नेतृत्व का मजबूती से बचाव किया। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी के फैसलों ने यह साबित किया है कि कांग्रेस ने हमेशा योग्यता और अनुभव को महत्व दिया।

    रेवंत रेड्डी ने याद दिलाया कि 1991 में तेलंगाना के एक छोटे से गांव से आने वाले पीवी नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री बनाना और 2004 व 2009 में प्रख्यात अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह को देश की कमान सौंपना सोनिया गांधी का ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय था।

    तेलंगाना सीएम ने यह भी कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आजादी की लड़ाई का नेतृत्व किया, संविधान निर्माण में अहम भूमिका निभाई और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत किया।

    विविधताओं से भरे आधुनिक भारत के निर्माण में कांग्रेस का योगदान हर पन्ने पर दर्ज है। राजनीतिक हलकों में रेवंत रेड्डी के इस बयान को दिग्विजय सिंह की उस सोशल मीडिया पोस्ट का सीधा जवाब माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने RSS और जनसंघ में जमीनी कार्यकर्ताओं को शीर्ष पदों तक पहुंचने का उदाहरण दिया था।

    गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लालकृष्ण आडवाणी की तस्वीर साझा करते हुए लिखा था कि RSS-BJP में सामान्य कार्यकर्ता भी मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बन सकता है। उन्होंने इस पोस्ट में राहुल गांधी को टैग कर संगठनात्मक सुधार की जरूरत पर इशारा किया था। इसी बयान के बाद कांग्रेस के भीतर नेतृत्व, संगठन और भविष्य की दिशा को लेकर बहस और तेज हो गई है।

  • CBI की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप, दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को अस्थायी रूप से स्थगित किया

    CBI की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप, दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को अस्थायी रूप से स्थगित किया


    नई दिल्ली।उन्नाव रेप केस में दोषी ठहराए गए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दीजिसमें सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित किया गया था। केंद्रीय जांच ब्यूरो CBI की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले से जुड़े अहम कानूनी सवालों पर अंतिम निर्णय होने तक हाईकोर्ट के आदेश को लागू नहीं किया जाएगा।इस फैसले की घोषणा चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कीजिसमें न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह शामिल थे। अदालत ने कहा कि यह मामला साधारण नहीं है और इसमें पीड़िता की उम्रअपराध की गंभीरता और आरोपी की स्थिति जैसे पहलुओं पर गंभीर विचार आवश्यक हैं।

    दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश

    दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर को सेंगर की उम्रकैद सजा निलंबित कर दी थी। अदालत ने कहा कि सेंगर पहले ही करीब सात साल पांच महीने की सजा काट चुका है। हालांकिहाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सेंगर जेल से बाहर नहीं आ सका क्योंकि वह पीड़िता के पिता की हत्या के मामले में अलग से उम्रकैद की सजा भुगत रहा है।

    CBI की चुनौती

    CBI ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि अपराध के समय सेंगर लोक सेवक थे। एजेंसी का कहना है कि 2017 में घटना के समय सेंगर भारतीय जनता पार्टी के विधायक थे और उन्हें लोक सेवक की श्रेणी से बाहर मानना कानून की गलत व्याख्या होगी।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान जोर देकर कहा कि यह मामला नाबालिग पीड़िता से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि घटना के समय पीड़िता की उम्र मात्र 15 साल 10 महीने थी। इस आधार पर यह अपराध भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और पॉक्सो अधिनियम के तहत आता हैजिसमें सख्त सजा का प्रावधान है।

    सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

    शीर्ष अदालत ने कहा कि लोक सेवक की परिभाषा सहित कई कानूनी सवाल हैंजिन पर विस्तार से विचार किया जाएगा। हालांकिमौजूदा परिस्थितियों में हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाना जरूरी था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सामान्य तौर पर अदालतें किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप से बचती हैंलेकिन इस मामले की गंभीरता अलग है।

    विरोध और जन प्रतिक्रिया

    दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद से ही पीड़िताउसके परिवार और कई सामाजिक संगठनों ने विरोध दर्ज कराया। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट परिसर के बाहर प्रदर्शन हुएजिसमें सजा निलंबन को पीड़िता के साथ अन्याय बताया गया। सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप अब पीड़िता के पक्ष में एक अहम कदम माना जा रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय न केवल कानून की गंभीरता को दर्शाता हैबल्कि नाबालिग पीड़िताओं के मामले में न्याय सुनिश्चित करने का संदेश भी देता है। इस फैसले के बाद अब दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सेंगर की सजा निलंबन पर निर्णय स्थगित रहेगाऔर अंतिम फैसला आने तक वह पहले की तरह जेल में रहेंगे।
  • फ्लाइट कैंसिलेशन से इंडिगो को झटका, नवंबर में घटा मार्केट शेयर; एअर इंडिया और स्पाइसजेट को फायदा

    फ्लाइट कैंसिलेशन से इंडिगो को झटका, नवंबर में घटा मार्केट शेयर; एअर इंडिया और स्पाइसजेट को फायदा


    नई दिल्ली।देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के लिए नवंबर 2025 चुनौतियों से भरा रहा। लगातार फ्लाइट कैंसिलेशन और देरी के कारण कंपनी का घरेलू मार्केट शेयर घटकर 63.6% पर आ गया जो अक्टूबर में 65.6% था। इस गिरावट के चलते एयरलाइन उद्योग में प्रतिस्पर्धा और बढ़ गई है जबकि एअर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी एयरलाइंस ने इस अवसर का लाभ उठाया।

    नागर विमानन महानिदेशालय DGCA द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इंडिगो की मार्केट हिस्सेदारी में लगभग 2% की गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान टाटा समूह की एअर इंडिया का संयुक्त मार्केट शेयर अक्टूबर के 25.7% से बढ़कर नवंबर में 26.7% पहुंच गया। वहीं, आर्थिक संकट से उबरने की कोशिश कर रही स्पाइसजेट की हिस्सेदारी 2.6% से बढ़कर 3.7% हो गई।नवंबर और दिसंबर की शुरुआत में इंडिगो को बड़े पैमाने पर ऑपरेशनल समस्याओं का सामना करना पड़ा। DGCA द्वारा पायलटों की ड्यूटी और आराम से जुड़े नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट FDTL नियम लागू किए गए थे। इंडिगो इन नए नियमों के अनुसार समय पर अपने क्रू रोस्टर और संसाधनों का प्रबंधन नहीं कर सकी। इसका नतीजा यह हुआ कि नवंबर के अंतिम सप्ताह और दिसंबर के पहले हफ्ते में लगभग 5,000 उड़ानें या तो रद्द हुईं या तय समय से देरी से संचालित हुईं।

    लगातार उड़ान बाधित होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और एयरलाइन की विश्वसनीयता पर असर पड़ा। हालात बिगड़ने के बाद DGCA ने सख्त कदम उठाते हुए इंडिगो को अपने विंटर शेड्यूल में 10% कटौती करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी है जिसमें एयरलाइन की योजना और प्रबंधन से जुड़ी खामियों का उल्लेख होने की संभावना है।विशेषज्ञों का मानना है कि इंडिगो के पास मजबूत नेटवर्क और बेड़े की क्षमता है, लेकिन नियामकीय बदलावों के अनुरूप तेजी से ढलना अब उसकी प्राथमिक चुनौती होगी। लगातार फ्लाइट कैंसिलेशन और देरी से यात्रियों में असंतोष बढ़ा है। नवंबर में घरेलू उड़ानों में 1.53 करोड़ यात्रियों ने सफर किया जो पिछले साल की तुलना में करीब 7% अधिक था। इसी अवधि में कुल 1,196 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें आधे से अधिक उड़ान में देरी और कैंसिलेशन से संबंधित थीं, जबकि बैगेज और रिफंड की शिकायतें भी प्रमुख रही।

    इंडिगो के लिए यह समय रणनीतिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच ग्राहकों की संतुष्टि बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर, एअर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी एयरलाइंस के लिए यह अवसर है कि वे अपनी सेवाओं को बेहतर करके मार्केट में स्थायी बढ़त हासिल कर सकें। एअर इंडिया ने पिछले महीनों में अपने बेड़े और मार्ग नेटवर्क का विस्तार किया है, जबकि स्पाइसजेट ने नए रूट और प्रतिस्पर्धी कीमतें पेश कर अपनी स्थिति मजबूत की है विश्लेषकों का कहना है कि इंडिगो को भविष्य में नियामक बदलावों और ऑपरेशनल चुनौतियों से निपटने के लिए नई रणनीति अपनानी होगी। यात्रियों का भरोसा और समय पर उड़ान संचालन कंपनी की दीर्घकालिक सफलता के लिए अहम होंगे। एयरलाइन उद्योग में यह संकेत देता है कि बड़े ऑपरेटरों को भी समय-समय पर अपने प्रबंधन और संसाधन प्रबंधन में सुधार करना होगा, ताकि मार्केट में उनका प्रभुत्व बरकरार रहे।

  • बिहार में भीषण ट्रेन हादसा मालगाड़ी के पटरी से उतरने से 34 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन प्रभावित

    बिहार में भीषण ट्रेन हादसा मालगाड़ी के पटरी से उतरने से 34 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन प्रभावित


    बिहार । शनिवार रात बिहार के झाझा–जसीडीह रेलखंड पर एक भीषण ट्रेन हादसा हुआ जिससे रेलवे परिचालन पूरी तरह से बाधित हो गया। टेलवा बाजार हाल्ट के पास पुल संख्या 676 पर एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई जिससे न केवल मालगाड़ियों बल्कि एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों के मार्ग पर भी असर पड़ा। इस हादसे ने रेलवे सिस्टम को हिलाकर रख दिया और करीब 34 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ।

    हादसे का विवरण

    रात के वक्त हुआ यह हादसा तब हुआ जब मालगाड़ी पुल से गुजर रही थी और अचानक उसके डिब्बे पटरी से उतर गए। घटना के बाद रेलवे विभाग ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया लेकिन इस दुर्घटना के कारण ट्रैक पूरी तरह से जाम हो गया और यातायात बाधित हो गया। हादसे के कारण अप लाइन की 22214 पटना–शालीमार दुरंतो एक्सप्रेस को घंटों झाझा स्टेशन पर रोक दिया गया। ट्रेन को लंबी देरी के बाद गया–किऊल रेलखंड के रास्ते वापस भेजा गया। इस घटना के कारण कई एक्सप्रेस ट्रेनें भी विभिन्न स्टेशनों पर खड़ी रहीं जिनमें जमुई और मननपुर स्टेशनों पर खड़ी ट्रेनें शामिल थीं।रेलवे विभाग ने इन ट्रेनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजने का निर्णय लिया लेकिन यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। ट्रेनें कई घंटों तक खड़ी रही और इस दौरान यात्री अपनी यात्रा में भारी विलंब का सामना करते रहे।

    कई जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनों का प्रभावित होना

    इस हादसे के कारण लगभग 34 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ा जो इस रूट से गुजरने वाली थीं। इनमें से कई ट्रेनों के मार्ग को बदला गया और यात्रियों को भारी असुविधा हुई। खासकर उन यात्रियों के लिए यह बहुत कठिन था जिनकी ट्रेनें स्थगित या मार्ग बदलने के बाद भी घंटों तक नहीं चल पाईं।रेलवे अधिकारियों ने कहा कि जैसे ही ट्रैक पर काम पूरा होगा ट्रेनें फिर से सामान्य रूप से चलने लगेंगी। हालांकि घटना के कारण ट्रेन परिचालन में देरी होने से रेलवे विभाग को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है।

    रेलवे द्वारा राहत कार्य की शुरुआत

    हादसे के बाद रेलवे अधिकारियों ने तत्परता से राहत कार्य शुरू कर दिया। रेलवे कर्मचारी घटनास्थल पर पहुंचे और प्रभावित ट्रैक को सुधारने के लिए काम शुरू किया। वहीं ट्रेनों के मार्ग को बदलने और यात्रियों की सहायता के लिए रेलवे के कंट्रोल रूम द्वारा त्वरित निर्णय लिए गए।
    रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दुर्घटना स्थल पर राहत कार्य तेज़ी से चल रहा है और जल्द ही ट्रैक को बहाल किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि यात्रीगणों को वैकल्पिक मार्गों से भेजने के लिए रेलवे द्वारा विशेष इंतजाम किए गए थे ताकि लोगों को अधिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

    यात्री परेशान

    इस हादसे ने यात्रियों को भारी परेशानी में डाल दिया। कई यात्री ट्रेन के रुकने और मार्ग बदलने के कारण घंटों तक अपनी यात्रा में देरी का सामना कर रहे थे। सोशल मीडिया पर भी यात्रियों ने अपनी परेशानियों का उल्लेख किया जिसमें देर से ट्रेन चलने जानकारी के अभाव और अधिक समय तक खड़े रहने का जिक्र किया गया।कई यात्रियों ने रेलवे की सेवाओं में सुधार की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके और यात्रियों को सुरक्षित और समय पर अपनी यात्रा पूरी करने का मौका मिले। बिहार के झाझा–जसीडीह रेलखंड पर हुए इस भीषण ट्रेन हादसे ने न केवल ट्रेन यातायात को प्रभावित किया बल्कि यात्रियों को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। रेलवे ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया लेकिन इस घटना के बाद यह भी स्पष्ट है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए रेलवे को और अधिक सुरक्षा उपायों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

  • 2025 में हादसों ने देश को दिया गहरा जख्म जून में आई काली आंधी सैकड़ों जानें गईं

    2025 में हादसों ने देश को दिया गहरा जख्म जून में आई काली आंधी सैकड़ों जानें गईं


    नई दिल्ली । साल 2025 में जहाँ भारत ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की वहीं जून महीने ने देश को गहरे जख्म भी दिए। एक के बाद एक दर्दनाक हादसों ने सैकड़ों परिवारों को बर्बाद किया और देशभर में शोक की लहर दौड़ा दी। इन घटनाओं में कहीं आस्था की भीड़ जानलेवा बन गई कहीं उत्सव मातम में बदल गया और कहीं तकनीकी खामियां और लापरवाही ने सैकड़ों घरों के चिराग बुझा दिए।

    प्रमुख हादसों में शामिल घटनाएं -प्रयागराज महाकुंभ जनवरी

    29 जनवरी को प्रयागराज के महाकुंभ में भारी भगदड़ के कारण 37 लोग मारे गए। संगम तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी जब बैरिकेड टूटने से लोग एक-दूसरे के नीचे दब गए। इस घटना में 30 महिलाएं और 7 पुरुष अपनी जान गंवा बैठे।

    दिल्ली रेलवे स्टेशन भगदड़ फरवरी

    15 फरवरी को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ में 18 लोग मारे गए। प्लेटफॉर्म पर भारी भीड़ जमा हो गई थी और ट्रेन के देरी से आने की अफवाह के कारण अफरातफरी मच गई जिससे यह हादसा हुआ।

    गोवा नाइट क्लब अग्निकांड दिसंबर

    6 दिसंबर की रात गोवा के एक नाइट क्लब में लगी आग ने देश को झकझोर दिया। आग में 25 लोगों की मौत हो गई और 6 अन्य घायल हुए। यह हादसा गोवा के पर्यटन उद्योग के लिए बड़ा झटका साबित हुआ।

    हवाई दुर्घटना एयर इंडिया बोइंग 787 जून

    12 जून को अहमदाबाद में एयर इंडिया के बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से 260 लोग मारे गए। विमान दुर्घटना ने पूरे देश को हिला दिया और इस हादसे में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल थे।

    जश्न के दौरान भगदड़ बेंगलुरु जून

    4 जून को बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर आईपीएल के जश्न के दौरान भारी भीड़ जमा हो गई। इस भगदड़ में 11 लोगों की जान चली गई और दर्जनों लोग घायल हो गए। उत्साह और अव्यवस्था के बीच यह घटना कई परिवारों के लिए दर्द और दुख लेकर आई।

    सड़क हादसे तमिलनाडु कर्नाटक और उत्तर प्रदेश दिसंबर
    दिसंबर के अंतिम दिनों में हुए तीन बड़े सड़क हादसों में 9 लोग तमिलनाडु के कडलूर में 7 लोग कर्नाटक के चित्रदुर्ग में और 18 लोग उत्तर प्रदेश के मथुरा में मारे गए। इन हादसों में बसों और अन्य वाहनों के बीच टक्कर के कारण आग लग गई और कई लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे।

    तेलंगाना फैक्ट्री विस्फोट जून

    तेलंगाना के पाशमेलारम स्थित एक फार्मास्यूटिकल फैक्ट्री में 30 से अधिक लोगों की मौत हुई। 30 जून को हुए इस विस्फोट ने वहां काम कर रहे कर्मचारियों की जिंदगी छीन ली और फैक्ट्री के आसपास के इलाकों में भारी नुकसान हुआ।

    देशभर में शोक की लहर

    इन घटनाओं ने देश को गहरे जख्म दिए हैं। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया और इन हादसों ने राष्ट्रीय सुरक्षा यातायात व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा की गंभीर समस्याओं को उजागर किया। कई स्थानों पर हादसों के कारण सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है विशेषकर सार्वजनिक जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में।

    निरंतर बढ़ते हादसों पर सरकार का ध्यान

    इन हादसों के बाद सरकार और संबंधित एजेंसियों ने सुधारात्मक कदम उठाने का वादा किया है। सुरक्षा प्रोटोकॉल्स को और सख्त करने जन जागरूकता फैलाने और तकनीकी सुधारों पर ध्यान देने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। 2025 ने कई क्षेत्रों में भारत की प्रगति को उजागर किया लेकिन इन हादसों ने एक कड़ी चेतावनी दी है कि लोगों की सुरक्षा और जीवन का मूल्य कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।

  • 15 घंटे किया काम763 रुपये कमाईवायरल डिलीवरी बॉय को घर बुलाकर राघव चड्ढा ने करवाया लंच

    15 घंटे किया काम763 रुपये कमाईवायरल डिलीवरी बॉय को घर बुलाकर राघव चड्ढा ने करवाया लंच


    नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर बीते दिनों एक डिलीवरी बॉय का वीडियो तेजी से वायरल हुआ था. जिसमें युवक द्वारा एक छोटी वीडियो में अपना रोज का रुटीन बताया गया था. वीडियो में युवक ने बताया कि उसने 15 घंटे काम किया. इसमें 28 ऑर्डर डिलीवर किए और पूरे दिन में सिर्फ 763 रुपये की कमाई की. वीडियो वायरल होने के बाद युवक का मुद्दा राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने सदन में उठाया. अब उस युवक से राघव चड्ढा ने अपने घर पर मुलाकात की है.

    बता दें कि राघव चड्ढा ने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान कम सैलरीलंबे समय तक काम करने के घंटेऔर गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा की अनुपस्थिति के बारे मेंडिलीवरी पार्टनर की कठिनाई पर ध्यान दिया. उन्होंने सार्वजनिक तौर पर इस मुद्दे को उठाया और गिग वर्कर्स के लिए अपना समर्थन जताया.

    मामले ने इस वजह से पकड़ी तूल

    इस मुद्दे ने इसलिए भी तूल पकड़ी है क्योंकि कई शहरों में गिग वर्कर्स ने हाल ही में हड़ताल और विरोध प्रदर्शन किया. गिग वर्कर्स गुरुवार 25 दिसंबर 2025 को सामूहिक हड़ताल पर चले गए और नए साल से पहले 31 दिसंबर 2025 के लिए निर्धारित दूसरी हड़ताल की घोषणा की. इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स द्वारा बुलाई गई हड़तालसाल के आखिर में चरम मांग के साथ मेल खाती हैजो भोजन और किराने की डिलीवरी के लिए सबसे जरूरी अवधि में से एक है. डिलीवरी साझेदारों ने बार-बार अपारदर्शी एल्गोरिदम-आधारित लक्ष्योंमनमाने दंडअचानक भुगतान परिवर्तन और एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र की कमी के बारे में चिंताओं को उजागर किया है – जिससे भारत की तेजी से बढ़ती गिग अर्थव्यवस्था की चुनौतियां सामने आई हैं.

    राघव चड्ढा ने वायरल डिलीवरी बॉय को बुलाया घर

    संसद के शीतकालीन सत्र में मुद्दा उठाने के बाद राघव चड्ढा ने उस युवक को अपने घर पर बुलाया. जो 15 घंटे काम करने के बाद सिर्फ 763 रुपये ही कमा पाया था. राघव ने युवक को लंच पर बुलाया और फॉर्मल मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने उससे कई चीजों पर बातचीत की. इस दौरान डिलीवरी पार्टनर ने अपना अनुभव साझा किया. इस मुलाकात के बाद उसने राघव चड्ढा का आभार व्यक्त किया.
    राघव चड्ढा ने पोस्ट की मुलाकात की वीडियो
    सांसद राघव चड्ढा ने अपने ‘एक्स’ अकाउंट पर इस मुलाकात की वीडियो शेयर की. उन्होंने पोस्ट में लिखा मैंने ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय हिमांशु को दोपहर के भोजन के लिए आमंत्रित किया उन्होंने लिखा कि हमने उच्च जोखिमोंलंबे घंटोंकम वेतन और बिना सुरक्षा जाल के बारे में विस्तार से बात की. ये आवाजें संसद और उसके बाहर भी सुनी जानी चाहिए. अपने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम सेउन्होंने हाल ही में राइडर्स डिलीवरी बॉयज द्वारा सामना की जाने वाली कठोर वास्तविकताओं और दुखों को साझा किया.
  • भगवान ने सैकड़ों मासूमों को बचा लिया'बिहार के रोहतास रोपवे हादसे पर RJD का बड़ा हमला

    भगवान ने सैकड़ों मासूमों को बचा लिया'बिहार के रोहतास रोपवे हादसे पर RJD का बड़ा हमला


    रोहतास । बिहार के रोहतास जिले में शुक्रवार 26 दिसंबर को हुए रोपवे हादसे पर अब प्रदेश की सियासत गरमा गई हैप्रदेश के प्रमुख सियासी दल राष्ट्रीय जनता दल राजद ने एक्स पोस्ट के जरिये राज्य की नीतीश कुमार सरकार पर बड़ा हमला बोला है. राजद ने सरकार पर कमीशनखोरी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. राष्ट्रीय जनता दल के ऑफिशियल एक्स हैंडल से रोहतास रोपवे हादसे को लेकर सरकार पर हमला बोला गया है. राजद ने एक्स पोस्ट में लिखा भाजपा नीतीश सरकार की कमीशनखोरी की भेंट चढ़ा एक और परियोजना. रोहतास में नवनिर्मित रोप वे हुआ ध्वस्त.

    ट्रायल रन में करोड़ों स्वाहा
    आरजेडी ने आगे कहा कि ट्रायल रन में ही करोड़ों स्वाहा. 1 जनवरी को आम जनता के लिए यह रोप वे खोला जाने वाला था. ईश्वर ने सरकार में बैठे भ्रष्ट भूखे भेड़ियों से सैकड़ों मासूम जानों को बचा लिया.

    ट्रायल के दौरान ध्वस्त हो गया था रोपवे का हिस्सा

    दरअसलबीते 26 दिसंबर को रोहतास जिले में रोहतासगढ़ किला और रोहितेश्वर धाम को जोड़ने वाले नवनिर्मित रोपवे का परीक्षण के दौरान हिस्सा ध्वस्त हो गया. चार ट्रॉलियां और एक टावर क्षतिग्रस्त हुए है. हालांकिगनीमत की बात यह रही है कि इस घटना में कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ.

    रोपवे हादसे पर अधिकारियों ने क्या कहा

    वहीं इस हादसे को लेकर अधिकारियों ने कहा कि ट्रायल के समय रोपवे से जुड़ा एक टावर भी क्षतिग्रस्त हो गया. इस हादसे में चार ट्रॉलिया को भी नुकसान पहुंचा है. अधिकारियों ने कहा कि मौके पर मौजूद मजदूरों ने समय रहते सावधानी दिखाते हुए खुद को सुरक्षित बचा लिया. ट्रायल सफल होने के बाद ही होगा रोपवे का संचालन बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के वरिष्ठ अभियंता खुर्शीद करीम ने कहा कि मामले की जांच के लिए कोलकाता से विशेषज्ञों की एक टीम आ रही है. यह भी कहा है कि जब तक सभी ट्रायल सफल नहीं हो जाते और अधिकारी पूरी तरह संतुष्ट नहीं होते है. तब तक रोपवे को आम लोगों के लिए संचालित नहीं किया जाएगा.

  • कांग्रेस में सियासी हलचल तेज, दिग्विजय सिंह ने मोदी-आडवाणी की तस्वीर से दी संदेश

    कांग्रेस में सियासी हलचल तेज, दिग्विजय सिंह ने मोदी-आडवाणी की तस्वीर से दी संदेश




    DigvijaySinghनई दिल्ली।
    कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक से ठीक पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की पुरानी तस्वीर साझा कर सियासत में हलचल मचा दी है। इस तस्वीर में मोदी आडवाणी के पैरों के पास बैठे दिखाई दे रहे हैं, और दिग्विजय सिंह ने इसे संगठन की ताकत और जमीनी कार्यकर्ताओं की अहमियत के रूप में पेश किया।
    सियासी गलियारों में इस पोस्ट को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे भाजपा और आरएसएस की संगठनात्मक मजबूती के संदर्भ में देख रहे हैं, जबकि कई इसे कांग्रेस में जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं की कमी और संगठन सुधार की आवश्यकता के इशारे के रूप में मान रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या दिग्विजय सिंह अपने इस पोस्ट के जरिए कांग्रेस नेतृत्व को अप्रत्यक्ष संदेश दे रहे हैं।

    इस पोस्ट को और ज्यादा चर्चा में लाने वाली बात यह है कि दिग्विजय सिंह ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के साथ-साथ पीएम मोदी को भी टैग किया।

    पोस्ट की टाइमिंग भी काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि यह CWC बैठक के दौरान किया गया, जिससे इसके राजनीतिक मायने और बढ़ गए।

    19 दिसंबर को भी दिग्विजय सिंह ने राहुल गांधी को लेकर एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने कांग्रेस संगठन में सुधार और व्यावहारिक विकेंद्रीकरण की जरूरत पर जोर दिया था।

    उन्होंने कहा था कि कांग्रेस को चुनाव आयोग की तरह सुधारों की दिशा में कदम उठाना चाहिए। इस बार की पोस्ट के साथ यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि दिग्विजय सिंह कांग्रेस के भीतर संगठन और नेतृत्व को लेकर बहस को तेज कर रहे हैं और पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की चेतावनी दे रहे हैं।

    राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि दिग्विजय सिंह का यह कदम कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेतृत्व दोनों के लिए संदेश है, जिसमें संगठन की ताकत और सक्रियता की अहमियत को याद दिलाया गया है। इस पोस्ट ने पार्टी के भीतर और बाहर चर्चा की लहर दौड़ा दी है, और यह स्पष्ट कर दिया है कि संगठन की मजबूती ही किसी भी राजनीतिक दल की सफलता की कुंजी है।