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  • CJP के प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस अलर्ट, हिरासत में लिए गए लोगों को रखने के लिए 10 जगहें तय

    CJP के प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस अलर्ट, हिरासत में लिए गए लोगों को रखने के लिए 10 जगहें तय


    नई दिल्ली।
    कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के ऐलान को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। प्रदर्शनकारियों की संभावित भीड़ को देखते हुए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 35 हजार से अधिक जवानों की तैनाती की जानकारी सामने आई है। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने वाले लोगों को रखने के लिए 10 स्थान भी चिह्नित किए हैं।

    हिरासत में लिए गए लोगों को रखने के लिए 10 स्थान तय

    पुलिस अधिकारी के मुताबिक, शनिवार को प्रस्तावित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की आशंका को देखते हुए पहले से तैयारी की गई है। प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने वाले लोगों को रखने के लिए 10 स्थानों का चयन किया गया है। ये स्थान नई दिल्ली से दूर और राजधानी के बाहरी इलाकों में स्थित हैं।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन स्थानों में मॉडल टाउन स्थित छत्रसाल स्टेडियम, न्यू पुलिस लाइन, बवाना का राजीव गांधी स्टेडियम, नांगलोई का सूरजमल स्टेडियम और दक्षिण दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम तथा जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम शामिल हैं। इन स्थानों पर भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

    कनॉट प्लेस के पास कुछ प्रदर्शनकारी हिरासत में

    समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। शनिवार को कनॉट प्लेस इलाके में जनपथ के पास कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

    पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ऐसे लोगों पर भी नजर रख रही है जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है या जिन पर लोगों को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाने की आशंका है। पुलिस अधिकारियों की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लोगों से नियमों का पालन करने की अपील की जा रही है।

    जंतर-मंतर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम

    CJP के दोबारा प्रदर्शन के ऐलान के बाद जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस ने संभावित भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है।

    केंद्र सरकार की ओर से भी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए जाने की जानकारी है। प्रशासन की प्राथमिकता प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना और अनधिकृत जमावड़े को रोकना है।

    प्रदर्शन से पहले हिरासत केंद्रों की व्यवस्था, पुलिस बल की तैनाती और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाए जाने से राजधानी में सुरक्षा इंतजाम चर्चा में हैं।

  • मरीज के अटेंडर ने दीवार पर किया पेशाब, गुस्साए लोगों ने अस्पताल में घुसकर डॉक्टर-स्टाफ को पीटा

    मरीज के अटेंडर ने दीवार पर किया पेशाब, गुस्साए लोगों ने अस्पताल में घुसकर डॉक्टर-स्टाफ को पीटा


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश के ग्वालियर के मुरार इलाके में दीवार पर पेशाब करने को लेकर शुरू हुआ विवाद अस्पताल में मारपीट और तोड़फोड़ तक पहुंच गया। आरोप है कि पड़ोसी के घर की दीवार पर पेशाब करने की घटना से नाराज चार लोगों ने श्री साईं मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में घुसकर डॉक्टर और कर्मचारियों के साथ मारपीट की। आरोपियों ने अस्पताल के मुख्य गेट का शीशा भी तोड़ दिया। घटना अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई। डॉक्टर की शिकायत पर पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    दीवार पर पेशाब करने से शुरू हुआ विवाद

    घटना 8 सितंबर की रात करीब 10:30 बजे की बताई जा रही है। पंचशील नगर निवासी डॉ. हिरदेश जाटव श्री साईं मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के संचालक हैं। उनकी शिकायत के मुताबिक, घटना के समय वह और विनोद शर्मा अस्पताल में मौजूद थे। इसी दौरान अस्पताल में भर्ती एक मरीज का अटेंडर पड़ोस में रहने वाले दीपक किरार के मकान की दीवार पर पेशाब करके आया।

    इस बात से नाराज होकर दीपक किरार, बंटी किरार, कालू किरार और अन्नू किरार अस्पताल के बाहर पहुंच गए। आरोप है कि चारों ने वहां मौजूद स्टाफ के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। इसके बाद अस्पताल के मुख्य गेट का शीशा तोड़कर वे अंदर घुस आए और विवाद करने लगे।

    विरोध करने पर डॉक्टर और स्टाफ से मारपीट का आरोप

    डॉ. हिरदेश जाटव के अनुसार, जब उन्होंने और अस्पताल के कर्मचारियों ने आरोपियों को गाली-गलौज करने से रोका, तो वे कथित तौर पर जातिसूचक गालियां देने लगे। विरोध करने पर चारों ने डॉक्टर और स्टाफ के साथ मारपीट शुरू कर दी। घटना के दौरान अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई।

    शिकायत के मुताबिक, मारपीट में अस्पताल कर्मचारी सुनील कुशवाह के सिर के पिछले हिस्से में चोट आई। विवेक अहिरवार की बाईं कलाई और पीठ पर चोट लगी, जबकि अभिषेक चौरसिया के बाएं कान के पीछे सिर में चोट आई। करन बाल्मीक की कमर में भी चोट लगने की बात कही गई है।

    घटना के दौरान मौके पर मौजूद ललित मोहन शुक्ला, सागर राजावत और आसपास के अन्य लोगों ने बीच-बचाव किया। इसके बाद स्थिति को संभाला जा सका। अस्पताल में हुई मारपीट और तोड़फोड़ की पूरी घटना सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड होने की बात कही गई है।

    चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज

    डॉ. हिरदेश जाटव की शिकायत पर मुरार थाना पुलिस ने दीपक किरार, बंटी किरार, कालू किरार और अन्नू किरार के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज, तोड़फोड़ तथा एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है।

    पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर घटना की जांच कर रही है। ग्वालियर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) जयराज कुबेर ने भी मामले को लेकर बयान दिया है। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • अंटार्कटिका में पेंग्विन की आबादी में 63% की गिरावट, गर्म होता समुद्र और भोजन की कमी बढ़ा रही चिंता

    अंटार्कटिका में पेंग्विन की आबादी में 63% की गिरावट, गर्म होता समुद्र और भोजन की कमी बढ़ा रही चिंता


    नई दिल्ली । अंटार्कटिका की बर्फीली दुनिया से वन्यजीवों को लेकर एक चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां स्थित जावोडोवस्की द्वीप पर रहने वाले चिनस्ट्रैप पेंग्विन की आबादी में पिछले 14 वर्षों के दौरान भारी गिरावट दर्ज की गई है। कभी दुनिया की सबसे बड़ी चिनस्ट्रैप पेंग्विन कॉलोनी के रूप में पहचाने जाने वाले इस द्वीप पर अब इनकी संख्या पहले के मुकाबले काफी कम हो गई है। एक नई वैज्ञानिक स्टडी के मुताबिक वर्ष 2011 से 2025 के बीच यहां पेंग्विन के घोंसलों की संख्या में करीब 63 प्रतिशत की कमी आई है। वैज्ञानिकों के अनुमान के अनुसार इस दौरान इनकी प्रजनन करने वाली आबादी लगभग 10.9 लाख से घटकर 4.02 लाख रह गई। यानी करीब 6.8 लाख पेंग्विन के बराबर आबादी कम हो गई है। इस बदलाव ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है और समुद्र के बदलते पर्यावरण पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
    करंट बायोलॉजी नामक वैज्ञानिक जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में जलवायु परिवर्तन और समुद्र के बढ़ते तापमान को पेंग्विन की आबादी में गिरावट से जुड़े संभावित कारणों के रूप में देखा गया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक समुद्र का तापमान बदलने से वहां रहने वाले छोटे जीवों की उपलब्धता और उनके फैलाव पर असर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव उन समुद्री पक्षियों पर पड़ता है जो भोजन के लिए इन्हीं जीवों पर निर्भर रहते हैं। चिनस्ट्रैप पेंग्विन के भोजन में अंटार्कटिक क्रिल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। क्रिल समुद्र में पाए जाने वाले छोटे जीव हैं जो झींगे जैसे दिखाई देते हैं और पेंग्विन समेत कई समुद्री जीवों के लिए भोजन का प्रमुख स्रोत हैं।
    ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे के वैज्ञानिकों ने पेंग्विन की आबादी और उनकी गतिविधियों का अध्ययन करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया। इसके तहत ड्रोन से तस्वीरें ली गईं और हवाई तस्वीरों तथा सैटेलाइट रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया। कुछ पेंग्विन पर ट्रैकिंग डिवाइस लगाकर यह समझने की कोशिश भी की गई कि वे भोजन की तलाश में किन इलाकों तक जाते हैं। अध्ययन में सामने आया कि ये पेंग्विन द्वीप के उत्तर-पश्चिम में मौजूद ठंडे पानी वाले क्षेत्रों में भोजन तलाशना पसंद करते हैं। वहां क्रिल मिलने की संभावना रहती है। लेकिन समुद्र के गर्म होने से क्रिल की उपलब्धता और उनके रहने के क्षेत्रों में बदलाव हो सकता है। ऐसी स्थिति में पेंग्विन को भोजन खोजने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है जिससे उनकी सेहत और प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है।
    शोधकर्ताओं ने वर्ष 2016 में जावोडोवस्की द्वीप पर हुए ज्वालामुखी विस्फोट को भी ध्यान में रखा। हालांकि पेंग्विन की आबादी में गिरावट इस घटना से पहले ही शुरू हो चुकी थी। इसलिए वैज्ञानिकों ने विस्फोट को इस लंबे समय से जारी गिरावट का मुख्य कारण नहीं माना है। अध्ययन में समुद्री परिस्थितियों में होने वाले बदलावों को अधिक गंभीरता से समझने की जरूरत पर जोर दिया गया है।
    पेंग्विन की संख्या में गिरावट के बाद जावोडोवस्की द्वीप अब दुनिया की सबसे बड़ी पेंग्विन कॉलोनी का दर्जा खो चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक अंटार्कटिका के रॉस सागर में स्थित केप अडारे अब दुनिया की सबसे बड़ी पेंग्विन कॉलोनी के रूप में पहचाना जा रहा है जहां बड़ी संख्या में अडेली पेंग्विन रहते हैं। अध्ययन यह भी संकेत देता है कि पर्यावरण में बदलाव का असर सभी पेंग्विन प्रजातियों पर एक जैसा नहीं पड़ रहा है।
    वैज्ञानिकों के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह समझना है कि जावोडोवस्की द्वीप पर पेंग्विन की आबादी में गिरावट कितनी तेजी से जारी रह सकती है। यदि समुद्र के तापमान और भोजन की उपलब्धता में बदलाव लंबे समय तक जारी रहते हैं तो इन पक्षियों के लिए अपने बच्चों का पालन-पोषण करना और जीवित रहना अधिक कठिन हो सकता है। यह अध्ययन बताता है कि जलवायु परिवर्तन का असर उन दूरस्थ इलाकों में भी दिखाई दे रहा है जहां मानवीय गतिविधियां बहुत सीमित हैं। पेंग्विन की घटती संख्या अंटार्कटिका के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र में हो रहे बदलावों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत बन गई है।
  • उत्तराखंड में अचानक बदला मौसम, तेज बारिश और ओलावृष्टि से भारी नुकसान, CM धामी ने हेलिकॉप्टर मोड़कर किया प्रभावित क्षेत्र का दौरा

    उत्तराखंड में अचानक बदला मौसम, तेज बारिश और ओलावृष्टि से भारी नुकसान, CM धामी ने हेलिकॉप्टर मोड़कर किया प्रभावित क्षेत्र का दौरा


    नई दिल्ली । उत्तराखंड में मौसम ने अचानक ऐसा करवट बदला कि हरिद्वार से लेकर ऊधम सिंह नगर तक लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। शुक्रवार 9 अक्टूबर को तेज बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि ने कई इलाकों में नुकसान पहुंचाया। आसमान से गिरे बड़े-बड़े ओलों की वजह से कई गाड़ियों और मकानों के शीशे टूट गए जबकि सोलर पैनलों को भी नुकसान पहुंचा है। खेतों में खड़ी फसलें और कृषि उपज प्रभावित होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। अचानक बदले मौसम के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई और वातावरण में ठंडक बढ़ गई। ओलावृष्टि से हुए नुकसान की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर हालात का जायजा लिया और अधिकारियों को तत्काल सर्वे करने के निर्देश दिए।
    हरिद्वार में शुक्रवार सुबह मौसम ने अचानक करवट ली। आसमान में काले बादल छा गए और बिजली की कड़कड़ाहट के साथ बारिश शुरू हो गई। शुरुआत में बारिश की रफ्तार कम रही लेकिन कुछ ही देर में इसकी तीव्रता बढ़ने लगी। बारिश के साथ बड़े-बड़े ओले गिरने लगे। शहर से लेकर आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी ओलावृष्टि का असर देखने को मिला। अचानक हुई इस मौसमी घटना से लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। कई जगह खड़े वाहनों के शीशे टूट गए जबकि मकानों की खिड़कियों और सोलर पैनलों को भी नुकसान पहुंचा। तेज बारिश और ओलों के कारण लोगों को काफी परेशानी हुई। मौसम में आए बदलाव के बाद तापमान नीचे जाने से ठंडक भी बढ़ गई।
    हरिद्वार के अलावा ऊधम सिंह नगर जिले के कुछ हिस्सों में भी तेज बारिश और ओलावृष्टि हुई। इसका असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा है और किसानों की फसलों तथा कृषि उपज को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अचानक हुई ओलावृष्टि के कारण खेतों में खड़ी फसलों को लेकर किसान चिंतित हैं। फसल को नुकसान होने से उनकी आमदनी पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि प्रभावित खेतों और संपत्तियों को हुए कुल नुकसान की वास्तविक तस्वीर विस्तृत सर्वेक्षण के बाद ही सामने आएगी। ऐसे में प्रशासन के सामने प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द नुकसान का आकलन करने और जरूरतमंद लोगों तक राहत पहुंचाने की चुनौती है।
    ओलावृष्टि से नुकसान की सूचना मिलने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल प्रभावित क्षेत्र का रुख किया। मुख्यमंत्री शुक्रवार को हल्द्वानी से देहरादून लौट रहे थे। इसी दौरान उन्हें ऊधम सिंह नगर के बाजपुर में ओलावृष्टि और उससे हुए नुकसान की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने अपना हेलिकॉप्टर प्रभावित क्षेत्र की ओर मोड़ दिया। मुख्यमंत्री ने पहले हवाई सर्वेक्षण के जरिए हालात का जायजा लिया और फिर जमीन पर पहुंचकर प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं।
    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में फसलों को हुए नुकसान का विस्तृत सर्वे जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने नुकसान का सही आकलन कर निर्धारित समय के भीतर किसानों तक राहत पहुंचाने की प्रक्रिया तेज करने को कहा। धामी ने भरोसा दिलाया कि प्राकृतिक आपदा की इस घड़ी में राज्य सरकार किसानों के साथ खड़ी है और प्रभावित लोगों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
    दूसरी ओर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने भी ओलावृष्टि से हुए नुकसान पर चिंता जताई है। उन्होंने हरिद्वार समेत प्रभावित क्षेत्रों में फसलों सब्जियों और संपत्तियों को हुए नुकसान का सही आकलन कराने की मांग की। साथ ही जिन लोगों को अधिक नुकसान हुआ है उन्हें उचित मुआवजा और सहायता देने की अपील की। अब प्रभावित लोगों की नजर प्रशासनिक सर्वेक्षण और राहत संबंधी फैसलों पर है।

  • UPI से पेमेंट पर अभी नहीं कटेगा MDR…. जनवरी 2027 तक डेडलाइन बढ़ने की उम्मीद!

    UPI से पेमेंट पर अभी नहीं कटेगा MDR…. जनवरी 2027 तक डेडलाइन बढ़ने की उम्मीद!


    नई दिल्ली।
    डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) करने वाले लोगों और कारोबारियों (Businesspeople) के लिए UPI MDR को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। 9 अक्टूबर को होने वाली UPI स्टीयरिंग कमेटी की बैठक नहीं हो पाई। इसी बैठक में UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (Merchant Discount Rate- MDR) को लेकर फैसला होना था। अब यह साफ नहीं है कि अगली बैठक कब होगी और MDR को लागू करने पर अंतिम फैसला कब लिया जाएगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक सुबह होनी थी। इस बैठक में यूपीआई पर लगने वाले चार्ज को लेकर फैसला किया जाना था। फिलहाल यह साफ नहीं है कि बैठक अब कब होगी और MDR पर फैसला कब तक आएगा। पहले इसे 15 अक्टूबर से लागू करने की बात कही गई थी। इधर, MDR लागू होने में देरी की आशंका के बीच 9 अक्टूबर को पेटीएम, मोबिक्विक और पाइन लैब्स के शेयरों में करीब 5% तक गिरावट दर्ज की गई।


    तारीख बढ़ाकर जनवरी 2027 करने के प्रस्ताव

    यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी यूपीआई से जुड़े अहम फैसले लेने वाली आधिकारिक समिति है। इसमें प्रमुख यूपीआई ऐप, बैंक और पेमेंट कंपनियों के अधिकारी शामिल हैं। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) देश में यूपीआई का ऑपरेट करता है। बता दें कि इससे पहले खबर आई थी कि 8 अक्टूबर को बताया था कि NPCI यूपीआई पर MDR लागू करने की तारीख बढ़ाकर जनवरी 2027 करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।


    क्या है UPI MDR और कितनी लगेगी फीस

    बता दें कि MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले दुकानदारों और कारोबारियों से ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने के बदले लिया जाता है। पिछले महीने UPI स्टीयरिंग कमेटी ने 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 0.4% यानी 40 बेसिस पॉइंट MDR तय किया था। उदाहरण के लिए, अगर कोई ग्राहक UPI से 10,000 रुपये का पेमेंट करता है, तो 0.4% के हिसाब से MDR 40 रुपये होगा। वहीं, 2,000 रुपये के पेमेंट पर यह शुल्क 8 रुपये बनता है। हालांकि, रियल चार्ज और लागू होने की शर्तें संबंधित नियमों पर निर्भर करेंगी।


    MDR लागू करने में क्यों हो रही देरी

    MDR को लेकर दुकानदारों के संगठन, फिनटेक कंपनियां और पेमेंट कंपनियां चिंताएं जता रही हैं। उनका कहना है कि त्योहारों के सीजन में इस तरह का शुल्क लागू करने से कारोबार की लागत बढ़ सकती है। इसके अलावा, अलग-अलग तरह के UPI ट्रांजैक्शन पर अलग दरें लागू होने से भी कारोबारियों के बीच भ्रम की स्थिति बन सकती है। दूसरी तरफ, सरकार को भी चिंता है कि बढ़ती महंगाई के बीच MDR से कारोबारियों का खर्च बढ़ सकता है। आशंका यह भी है कि कुछ कारोबारी इस अतिरिक्त लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं। बता दें कि 8 अक्टूबर को वित्त मंत्री ने कहा था कि UPI ट्रांजैक्शन पर MDR का मामला रिलेटेड पार्टी के बीच तय किया जाएगा। ऐसे में अब सबकी नजर NPCI और पेमेंट इंडस्ट्री के अगले फैसले पर है।


    कार्ड और UPI के MDR में क्या है अंतर

    कार्ड पेमेंट आमतौर पर तय मर्चेंट कैटेगरी और रिलेटिवली यूनिफॉर्म फी स्ट्रक्चर के तहत काम करते हैं। दूसरी ओर, UPI का इस्तेमाल छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक बड़े पैमाने पर होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, कार्ड करीब 1.1 करोड़ टर्मिनल पर स्वीकार किए जाते हैं, जबकि UPI का नेटवर्क लगभग 10 करोड़ कारोबारियों तक फैला है। UPI में बिजली-पानी के बिल, लोन की किस्त और शेयर बाजार से जुड़े पेमेंट जैसे कई अलग-अलग तरह के ट्रांजैक्शन शामिल हैं। इन सभी पर एक जैसी फी स्ट्रक्चर लागू करना आसान नहीं है।

  • राफेल डील को लेकर पसोपेश में फ्रांस…. भारत ने रखी अपनी स्वदेशी हथियार प्रणाली लगाने की शर्त

    राफेल डील को लेकर पसोपेश में फ्रांस…. भारत ने रखी अपनी स्वदेशी हथियार प्रणाली लगाने की शर्त


    नई दिल्ली।
    भारत और फ्रांस (India and France) के बीच राफेल विमानों (Rafale Aircraft) की खरीद को लेकर बातचीत की प्रक्रिया जारी है। इस बीच भारत ने एक ऐसी शर्त रखी है, जिसे लेकर फ्रांस पसोपेश में है। भारत ने कहा है कि वह इन लड़ाकू विमानों में स्वदेशी हथियार (Indigenously Developed Weapons) प्रणाली लगाएगा। हालांकि, फ्रांस इसके लिए अब तक तैयार नहीं है। सूत्रों का कहना है कि भारत ने फ्रांस को दो टूक कह दिया है कि अगर यह शर्त नहीं मानी गई तो सौदा भी नहीं हो सकता।

    राफेल लड़ाकू विमान खरीद प्रक्रिया से जुड़े वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि समझौते के तहत 18 विमान फ्रांस से बनकर आने हैं, जबकि 96 विमान भारत में बनने हैं। भारत इन विमानों में स्वदेशी रक्षा प्रणाली यानी देश में निर्मित मिसाइल, राडार आदि स्थापित करना चाहता है।


    फ्रांस सहमत नहीं

    वहीं, फ्रांस का कहना है कि भारत को राफेल में जोड़ी जाने वाली रक्षा प्रणालियां भी फ्रांस से ही लेनी चाहिए। इसे लेकर जारी बातचीत में भारत ने स्पष्ट तौर पर यह संकेत दे दिए हैं कि भारत रक्षा क्षेत्र में लगातार आत्मनिर्भर हो रहा है और स्वदेशी हथियारों को तरजीह दे रहा है। ऐसे में फ्रांस को यह शर्त माननी ही होगी। इससे राफेल सौदे में नया मोड़ आ गया है।


    ऐतराज नहीं होना चाहिए

    वायुसेना के एक अधिकारी ने कहा बिना सोर्स कोड दिए भारतीय हथियार प्रणाली राफेल में लगाने पर फ्रांस को कोई एतराज नहीं होना चाहिए।


    50% स्वदेशी सामग्री पर तैयार था फ्रांस

    इससे पूर्व भारत ने यह शर्त रखी थी कि जिन 96 राफेल विमानों का निर्माण भारत में होगा, उनमें 50 फीसदी स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। फ्रांस पहले इसके लिए भी तैयार नहीं था, लेकिन बाद में उसने यह बात मान ली थी। हाल ही में वायुसेना प्रमुख ए.पी. सिंह ने कहा है कि भारत और फ्रांस के बीच राफेल सौदे इस वित्त वर्ष के आखिर तक हो सकता है। इस पर जल्द फैसला लिए जाने की उम्मीद है।


    सोर्स कोड नहीं देना चाहती दसाल्ट एविएशन

    सूत्रों के अनुसार, राफेल विमानों का निर्माण करने वाली कंपनी दसाल्ट एविएशन भारत की शर्त मानने के लिए इसलिए भी तैयार नहीं है, क्योंकि इसके लिए उसे सोर्स कोड देना पड़ेगा। सोर्स कोड ऐसा सॉफ्टेवयर होता है, जो विमान के साथ-साथ उसमें लगी हर प्रणाली के संचालन के लिए जिम्मेदार है। अगर सोर्स कोड भारत को मिल गया, तो फिर भारत राफेल जैसा विमान खुद भी बना सकता है। इसीलिए दसाल्ट तैयार नहीं है।


    भारत बिना कोड के हथियार लगाने में सक्षम

    वायुसेना का मानना है कि कोई भी कंपनी क्रेता को कभी अपना सोर्स कोड नहीं देती है। ऐसे में दसाल्ट एविएशन का रुख स्वाभाविक है। वायुसेना के अनुसार, भारत दसाल्ट से सोर्स कोड की मांग कर भी नहीं रहा है। वायुसेना से जुड़े सूत्रों ने बताया, ‘हमने फ्रांस से कहा है कि हम सोर्स कोड के बिना भी राफेल में भारतीय हथियार प्रणाली स्थापित करने में सक्षम हैं। वायुसेना और डीआरडीओ ने इसका रास्ता निकाल लिया है।’

  • ‘राष्ट्रपति की बात को गलत तरीके से पेश कर रहे राहुल’, BJP का आरोप- संवैधानिक संस्थाओं को राजनीति में घसीट रहे

    ‘राष्ट्रपति की बात को गलत तरीके से पेश कर रहे राहुल’, BJP का आरोप- संवैधानिक संस्थाओं को राजनीति में घसीट रहे


    नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात के बाद राहुल गांधी के बयान पर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस नेता के उस दावे को झूठा बताया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति ने चुनाव में धांधली के आरोपों का खंडन नहीं किया और विपक्षी नेताओं की बात स्वीकार कर ली। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल पर दुर्भावनापूर्ण राजनीति करने और संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक विवाद में घसीटने का आरोप लगाया। यह विवाद इंडिया ब्लॉक के प्रतिनिधिमंडल की राष्ट्रपति से मुलाकात और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर सौंपे गए ज्ञापन के बाद सामने आया है।

    राहुल के दावे पर भाजपा ने उठाए सवाल

    इंडिया ब्लॉक के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार शाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल ने कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा।

    मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा कि वह इस बात से हैरान और स्तब्ध हैं कि राष्ट्रपति ने चुनाव में धांधली के आरोपों का खंडन नहीं किया और विपक्षी नेताओं की बातों को स्वीकार कर लिया।

    राहुल के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण और अजीब’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी झूठ बोल रहे हैं और राष्ट्रपति की बातचीत को अपने तरीके से पेश कर रहे हैं।

    ‘हर संवैधानिक संस्था को राजनीति का शिकार बना रहे’

    सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राष्ट्रपति ने विपक्ष के आरोप स्वीकार कर लिए, ऐसा दावा करना राहुल गांधी की दुर्भावनापूर्ण राजनीति को दर्शाता है। उनके मुताबिक, राहुल हर संवैधानिक संस्था को अपनी राजनीति का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

    भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी के बयान के दौरान उनके साथ खड़े नेताओं की बॉडी लैंग्वेज और चेहरे के भाव भी कई सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने दावा किया कि राहुल के कथन का सच्चाई से कोई संबंध नहीं दिखता और कांग्रेस नेता का पिछला रिकॉर्ड भी इसी तरह के बयानों का संकेत देता है।

    त्रिवेदी ने आगे कहा कि राहुल का दावा अजीब होने के साथ-साथ तथ्यों से ज्यादा राजनीतिक मंशा से प्रेरित लगता है।

    भाजपा ने राहुल से मांगा सबूत

    भाजपा नेता ने राहुल गांधी से सवाल किया कि राष्ट्रपति ने उनके आरोपों को स्वीकार किया था, इस दावे के समर्थन में उनके पास क्या सबूत हैं। उन्होंने राष्ट्रपति के साथ हुई बैठक को राजनीतिक मकसद के लिए इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया।

    इस मामले में फिलहाल भाजपा की ओर से राहुल गांधी के बयान पर सवाल उठाए गए हैं। वहीं, राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद जो दावा किया, उसे लेकर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है।

  • सर्वपितृ अमावस्या 2026: पितरों के भोग में जरूर शामिल करें ये 7 चीजें, श्राद्ध की थाली में इन खाद्य पदार्थों का है विशेष महत्व

    सर्वपितृ अमावस्या 2026: पितरों के भोग में जरूर शामिल करें ये 7 चीजें, श्राद्ध की थाली में इन खाद्य पदार्थों का है विशेष महत्व

    नई दिल्ली । पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में इस दिन को विशेष महत्व दिया जाता है। माना जाता है कि सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध और तर्पण करने से पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है। यह दिन उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है, जो किसी कारण अपने मृत परिजनों का श्राद्ध उनकी मृत्यु तिथि पर नहीं कर पाए हों या जिन्हें उनकी मृत्यु की सही तारीख याद न हो। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सभी पितरों के निमित्त श्राद्ध किया जा सकता है। इस अवसर पर पितरों को भोजन अर्पित करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भोग की थाली में कुछ विशेष खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं। इनमें खीर, चावल, उड़द दाल से बने व्यंजन, पूड़ी, मौसमी सब्जियां, मौसमी फल और पितरों की पसंद का भोजन प्रमुख हैं।

    श्राद्ध की थाली में सबसे पहले खीर को विशेष स्थान दिया जाता है। मान्यता है कि सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों को अर्पित किए जाने वाले भोग में खीर जरूर शामिल करनी चाहिए। इसे पितरों के भोजन का अहम हिस्सा माना जाता है। परंपरा के अनुसार, खीर गाय के दूध से तैयार करने की बात कही जाती है। धार्मिक मान्यता में भैंस के दूध के बजाय गाय के दूध से बनी खीर को प्राथमिकता दी जाती है। इसलिए इस दिन भोग तैयार करते समय खीर बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री पर विशेष ध्यान दिया जाता है। श्राद्ध की थाली में दूसरा महत्वपूर्ण पदार्थ चावल है। मान्यता है कि पितरों को चावल अर्पित करने से पितृ दोष से राहत मिल सकती है। इसी कारण श्राद्ध के भोजन में चावल को शामिल करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

    तीसरे स्थान पर उड़द दाल से बने व्यंजनों को रखा जाता है। श्राद्ध के भोजन में उड़द दाल की कोई डिश शामिल करने की परंपरा बताई जाती है। इसके लिए उड़द की दाल बनाई जा सकती है। इसके अलावा उड़द के पकौड़े, दाल की कचौड़ी और दही बड़े जैसे व्यंजन भी तैयार किए जा सकते हैं। चौथा खाद्य पदार्थ पूड़ी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूड़ी को पितरों के प्रिय भोजन में शामिल माना जाता है, इसलिए इसे श्राद्ध की थाली में रखने की सलाह दी जाती है। भोग तैयार करते समय इन पारंपरिक व्यंजनों को शामिल करके श्राद्ध की थाली सजाई जाती है। इन खाद्य पदार्थों को पितरों के प्रति सम्मान और श्रद्धा प्रकट करने की परंपरा से जोड़ा जाता है।

    पांचवीं चीज मौसमी सब्जियां हैं। श्राद्ध के भोजन में मौसम के अनुसार उपलब्ध सब्जी शामिल की जा सकती है। इस अवसर पर विशेष रूप से कद्दू की सब्जी बनाने की परंपरा का उल्लेख किया जाता है। इसके बाद छठे स्थान पर मौसमी फलों को रखा जाता है। पितरों को फल अर्पित करने के लिए मौसम में उपलब्ध किसी भी फल को श्राद्ध की थाली में शामिल किया जा सकता है। फल भी भोग का हिस्सा माने जाते हैं। सातवीं चीज पितरों की पसंद का भोजन है। मान्यता के अनुसार, सामान्य रूप से तैयार किए जाने वाले व्यंजनों के साथ उन खाद्य पदार्थों को भी शामिल किया जा सकता है, जो दिवंगत परिजन को पसंद थे। इनमें राजमा, छोले, कढ़ी और रबड़ी जैसे व्यंजन शामिल हो सकते हैं। इस तरह खीर, चावल, उड़द दाल के पकवान, पूड़ी, मौसमी सब्जी, फल और पसंदीदा पकवान मिलाकर भोग की थाली तैयार की जा सकती है।

    सर्वपितृ अमावस्या पर भोग बनाते समय भोजन की शुद्धता का विशेष ध्यान रखने की बात कही जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितरों को अर्पित किए जाने वाले भोजन में लहसुन और प्याज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इस दिन शुद्ध सात्विक भोजन तैयार करने और श्रद्धापूर्वक उसे पूर्वजों को अर्पित करने पर जोर दिया जाता है। श्राद्ध की परंपरा में भोजन केवल खाद्य पदार्थों का संग्रह नहीं, बल्कि दिवंगत परिजनों के प्रति सम्मान और स्मरण का माध्यम भी माना जाता है। हालांकि, पितृ दोष से राहत और पितरों की कृपा से जुड़ी बातें धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। सर्वपितृ अमावस्या पर परिवार अपनी परंपरा और मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध तथा भोग की विधि अपना सकते हैं।

  • ‘PM का अपमान बर्दाश्त नहीं…’, दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के खिलाफ उतरे ‘हिट जनता पार्टी’ के युवा

    ‘PM का अपमान बर्दाश्त नहीं…’, दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के खिलाफ उतरे ‘हिट जनता पार्टी’ के युवा


    नई दिल्ली। दिल्ली में विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शन के बीच शुक्रवार, 9 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के पास जनपथ रोड पर ‘लाल हिट जनता पार्टी’ से जुड़े युवाओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के कथित अपमान और विपक्षी दलों की विरोध-प्रदर्शन की शैली पर नाराजगी जताई। उन्होंने दिल्ली पुलिस और सरकार के समर्थन में नारे लगाए और आरोप लगाया कि विपक्षी दल प्रदर्शन के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे 10 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन के खिलाफ एकजुट हुए हैं।

    ‘PM का अपमान नहीं सह सकते, पुलिस की तैयारी पुख्ता हो’

    समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में प्रदर्शन कर रहे एक युवक ने कहा कि वे प्रधानमंत्री का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते, इसलिए सड़कों पर उतरे हैं। उसने कहा कि पुलिस की तैयारियां इतनी पुख्ता होनी चाहिए कि विरोध करने वाले यहां न पहुंच सकें। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि सरकार प्रदर्शन की अनुमति नहीं देगी और कहा कि अब ‘कॉकरोचों’ का अंतिम समय आ गया है।

    एक अन्य युवक ने कहा कि शुक्रवार को उनके साथ जो हुआ, वैसा ही व्यवहार अगले दिन बड़ी संख्या में आने वाले प्रदर्शनकारियों के साथ भी होना चाहिए। उसने दावा किया कि 10 अक्टूबर को दो लाख लोगों की भीड़ जुट सकती है और तब प्रशासन की कार्रवाई देखी जाएगी।

    विपक्ष पर अमर्यादित टिप्पणियां करने का आरोप

    प्रदर्शनकारियों ने विपक्षी दलों पर लगातार इस्तीफे की मांग करने और नेताओं के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणियां करने का आरोप लगाया। एक युवक ने कहा कि विपक्ष हर मुद्दे पर किसी न किसी का इस्तीफा मांगने लगता है। उसके मुताबिक, अगर कोई देश के लिए अच्छा काम करेगा, तो विपक्ष एक दिन उसका भी इस्तीफा मांगने लगेगा।

    प्रदर्शनकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियां बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं। उसने मांग की कि विपक्षी दलों के प्रदर्शन पर रोक लगाई जाए।

    ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और जंतर-मंतर का भी किया जिक्र

    प्रदर्शन में शामिल एक अन्य व्यक्ति ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का उल्लेख करते हुए जंतर-मंतर पर चल रही गतिविधियों पर सवाल उठाए। उसने आरोप लगाया कि कभी शिक्षा मंत्री तो कभी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा जा रहा है। प्रदर्शनकारी ने आशंका जताई कि आगे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग भी की जा सकती है।

    उसने कहा कि उनका समूह 10 अक्टूबर को होने वाले विरोध-प्रदर्शन के खिलाफ एकत्र हुआ है और चाहता है कि यह प्रदर्शन न हो।

    ‘देश का मजाक बनाया जा रहा है’

    ‘लाल हिट जनता पार्टी’ के बैनर तले प्रदर्शन करने पहुंचे एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि उनका समूह पुलिस के समर्थन में प्रदर्शन करने आया है, लेकिन उसे अनुमति नहीं दी जा रही है। उसने एक महिला के रोने वाले वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि घटना को देखकर उन्हें गुस्सा आया है और वे पुलिस को इस तरह की स्थिति में नहीं देख सकते।

    उसने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री का अपमान किया जा रहा है और देश में कहीं भी किसी के इस्तीफे की मांग उठने लगती है। प्रदर्शनकारी ने कहा कि वे देश के मुखिया का अपमान सहन नहीं करेंगे और आगे बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे।

    फिलहाल, प्रदर्शनकारियों की ये टिप्पणियां विपक्षी दलों के खिलाफ उनके विरोध और नाराजगी को दर्शाती हैं। प्रदर्शन की अनुमति और नियमों के उल्लंघन से जुड़े आरोपों पर संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से रात 8 बजे मिलेंगे INDIA ब्लॉक के 10 सांसद, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त पर रखेंगे अपना पक्ष

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से रात 8 बजे मिलेंगे INDIA ब्लॉक के 10 सांसद, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त पर रखेंगे अपना पक्ष

    नई दिल्ली । मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी विवाद के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के प्रतिनिधिमंडल को शुक्रवार, 9 अक्टूबर की रात 8 बजे मुलाकात का समय दिया है। विपक्षी सांसद इस बैठक में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में संशोधन और मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंताएं राष्ट्रपति के सामने रखेंगे। दिल्ली में पिछले चार दिनों से विपक्षी दलों का प्रदर्शन जारी है।

    मुलाकात के लिए शुरुआत में 15 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल का समय मांगा गया था, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति से मिलने के लिए 10 सांसदों को समय दिया गया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि राष्ट्रपति से मुलाकात का पहला अनुरोध 2 अक्टूबर को भेजा गया था। विपक्षी दल चाहते हैं कि SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों पर राष्ट्रपति को अपनी बात बताई जाए। शुक्रवार रात होने वाली बैठक में प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों और चिंताओं को सामने रखेगा।

    INDIA ब्लॉक के दल SIR प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में संशोधन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए हैं, जिससे उनके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची में किए गए बदलावों और नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ भाजपा ने चुनावी प्रक्रिया में पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।

    विपक्ष का प्रदर्शन 6 अक्टूबर को उस समय तेज हुआ, जब INDIA ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोका। इस दौरान राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया गया। अगले दिन, 7 अक्टूबर को भी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा और जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इन घटनाओं के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी सांसदों के बीच तनाव की स्थिति बनी।

    8 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने राजघाट पर प्रदर्शन किया और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान भी SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दे उठाए गए। प्रदर्शन के साथ-साथ विपक्षी दलों के नेताओं ने अपनी आगे की रणनीति पर भी चर्चा की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लगातार दो दिनों तक विपक्षी सांसदों के लिए दिल्ली में दोपहर के भोजन की बैठक आयोजित की। 7 अक्टूबर को सांसद जनपथ स्थित सागर रत्ना रेस्टोरेंट में जुटे, जबकि 8 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के मोएट्स रेस्टोरेंट में बैठक हुई। इन बैठकों के बाद सांसद प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे।

    7 अक्टूबर की बैठक में समाजवादी पार्टी के सांसद शामिल नहीं हुए थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सपा की ओर से समय पर सूचना नहीं मिलने की बात कही गई थी। कांग्रेस ने कहा था कि सभी विपक्षी दलों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन कम समय मिलने के कारण कुछ दल अपने प्रतिनिधि नहीं भेज सके। अगले दिन समाजवादी पार्टी के सांसद भी बैठक और प्रदर्शन में शामिल हुए।

    प्रदर्शन के दौरान पुलिस और विपक्षी सांसदों के बीच हुए टकराव से जुड़े मामलों में प्राथमिकी दर्ज किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। इनमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कुछ नेताओं पर पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट और सरकारी कामकाज में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए गए हैं। इन मामलों की जांच जारी है। प्राथमिकी दर्ज होना आरोपों के साबित होने का प्रमाण नहीं है। अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ होने वाली बैठक पर नजरें टिकी हैं। विपक्षी सांसदों की कोशिश होगी कि वे मतदाता सूची, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े अपने सवाल राष्ट्रपति के समक्ष रखें।