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  • पब्लिक वाहनों को पैनिक बटन के बगैर न दिया जाए फिटनेस सर्टिफिकेट…SC का सख्त निर्देश

    पब्लिक वाहनों को पैनिक बटन के बगैर न दिया जाए फिटनेस सर्टिफिकेट…SC का सख्त निर्देश


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सड़क सुरक्षा से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान बड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि टैक्सी, बस और अन्य पब्लिक सर्विस वाहनों (Public Transport Vehicle) को तब तक फिटनेस सर्टिफिकेट न दिया जाए जब तक उनमें पैनिक बटन और व्हीकल ट्रैकिंग डिवाइस (Vehicle Tracking Device:) यानी की वीएलटीडी न लगाए जाएं। कोर्ट के अनुसार यह कदम यात्रियों खासकर बच्चें, महिला और बुजुर्ग के लिए उठाए जा रहे हैं।


    Panic Button आखिर क्या होता है?

    पैनिक बटन एक इमरजेंसी सेफ्टी फीचर होता है, जिसे खतरे या आपातकालीन स्थिति में इस्तेमाल किया जाता है। जैसे मान लीजिए अगर कोई यात्री खतरा महसूस करे, हादसे का शिकार हो जाए या फिर कोई मेडिकल इमरजेंसी आ जाए। यानी किसी भी प्रकार का संकट हो, तो इस बटन को दबाकर तुरंत मदद मांगी जा सकती है। यह बटन दबाते ही वाहन की GPS लोकेशन कंट्रोल रूम, पुलिस या इमरजेंसी सिस्टम तक पहुंच जाती है।


    गाड़ियों में कहां लगाया जाता है यह बटन?

    आमतौर पर यह बटन वाहन के सीट के पास, दरवाजे के आसपास या वाहन के पिलर पर लगाया जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर यात्री इसे तुरंत इस्तेमाल कर सके। अधिकतर मामलों में यह लाल रंग का छोटा बटन होता है, जिसे आसानी से पहचाना जा सके।


    किन परिस्थितियों में इस्तेमाल करें ?

    हमेशा याद रखें कि इस बटन का इस्तेमान किसी गंभीर और वास्तविक स्थिति में करें। जैसे:
    दुर्घटना होने पर: अगर गाड़ी किसी सुनसान इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है और फोन का नेटवर्क नहीं है, तो फौरन इस बटन का इस्तेमाल करें, इससे समय रहते आप तक मदद पहुंच सकती है।
    खतरा महसूस होने पर: अगर सफर के दौरान कोई अजनबी पीछा करे, ड्राइवर बदतमीजी करे या कोई वाहन में जबरन घुसने की कोशिश करे, तो यात्री इसे दबाकर मदद मांग सकते हैं। यह महिलाओं के लिए काफी सुरक्षित विकल्प हो सकता है।
    मेडिकल इमरजेंसी: अगर ड्राइविंग के दौरान चालक या यात्री की अचानक तबीयत खराब हो जाए, तो इस बटन के जरिए एम्बुलेंस या मेडिकल टीम को तुरंत बुलाया जा सकता है।
    सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश सड़क सुरक्षा के क्षेत्र के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जो डिजिटल निगरानी के जरिए अपराध और हादसों पर लगाम लगाने में मदद कर सकता है।


    Vehicle Tracking Device कैसे करता है काम?

    सुप्रीम कोर्ट ने व्हीकल ट्रैकिंग डिवाइस को लेकर भी निर्देश दिए हैं। आपको बता दें यह एक स्मार्ट ट्रैकिंग सिस्टम होता है, जो वाहन की लाइव लोकेशन लगातार मॉनिटर करता रहता है। यह सिस्टम सीधे कंट्रोल रूम और इमरजेंसी नेटवर्क से जुड़ा होता है। जैसे ही कोई यात्री पैनिक बटन दबाता है, वाहन की सटीक लोकेशन तुरंत संबंधित कंट्रोल सेंटर तक पहुंच जाती है। इससे पुलिस, एम्बुलेंस या सुरक्षा एजेंसियों को वाहन तक जल्दी पहुंचने में मदद मिलती है। खासकर टैक्सी, बस और कैब जैसी पब्लिक गाड़ियों में यह फीचर यात्रियों की सुरक्षा को मजबूत बनाता है।


    क्या इससे सच में सुरक्षा बढ़ेगी?

    अभी इसपर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सभी पब्लिक सर्विस वाहनों में पैनिक बटन या व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम को सख्ती से लगा दिया जाए, तो काफी हद तक सुधार देखने को मिल सकता है। हो सकता है कि इससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्ग यात्रियों को ज्यादा सुरक्षा मिले। साथ ही अपराध और छेड़छाड़ जैसी घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। सड़क हादसों या मेडिकल इमरजेंसी के दौरान भी राहत और मदद तेजी से पहुंचाई जा सकेगी, जिससे कई जानें बचाई जा सकती हैं।

  • UP में आंधी-बारिश ने मचाई तबाही. अब तक 111 लोगों की मौत, 170 पशुओं की भी गई जान

    UP में आंधी-बारिश ने मचाई तबाही. अब तक 111 लोगों की मौत, 170 पशुओं की भी गई जान


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में आंधी, तेज बारिश, ओलावृष्टि और बिजली गिरने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है. राज्य के कई जिलों में आए भीषण तूफान (Severe Storms) और खराब मौसम (Bad Weather) के कारण अब तक कम से कम 111 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 72 लोग घायल बताए जा रहे हैं. इसके अलावा 170 पशुओं की मौत और 227 घरों के क्षतिग्रस्त होने की भी सूचना है।

    गुरुवार को राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि 13 मई को हुए खराब मौसम के कारण राज्य के 26 जिलों से मौतों की सूचना मिली है. तेज हवाओं के चलते कई इलाकों में पेड़ उखड़ गए, बिजली के खंभे गिर गए और मकानों को नुकसान पहुंचा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने स्थिति का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित परिवारों तक 24 घंटे के अंदर राहत सामग्री और आर्थिक सहायता पहुंचाई जाए. उन्होंने सभी मंडलायुक्तों और जिला मजिस्ट्रेटों से घटनाओं का पूरी संवेदनशीलता के साथ सत्यापन करने और पीड़ित परिवारों से सीधा संपर्क स्थापित कर हर संभव मदद उपलब्ध कराने को कहा है.

    राहत आयुक्त कार्यालय ने बताया कि राज्य स्तर से हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जिला प्रशासन के साथ सीधे समन्वय के जरिए राहत कार्य संचालित किए जा रहे हैं. प्रभावित जिलों को आवश्यक धनराशि भी उपलब्ध कराई जा रही है ताकि राहत और बचाव कार्यों में कोई बाधा न आए।


    प्रयागराज में सबसे ज्यादा तबाही

    प्रयागराज जिला प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार, गुरुवार सुबह तक तूफान और बारिश के कारण 17 लोगों की मौत की सूचना थी. बाद में अन्य क्षेत्रों से भी जानकारी आने के बाद प्रशासन ने बुधवार की घटनाओं में कुल 24 लोगों की मौत की पुष्टि की. तेज हवाओं और बारिश के चलते कई ग्रामीण इलाकों में मकानों को नुकसान पहुंचा और बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई. प्रशासन द्वारा राहत एवं बचाव कार्य जारी है।


    भदोही में 16 लोगों की मौत

    भदोही जिले में तूफान से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 16 लोगों की मौत हुई. अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट कुंवर वीरेंद्र कुमार मौर्य ने बताया कि कई क्षेत्रों में तेज आंधी के कारण पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए. कई मकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।


    फतेहपुर में दीवार गिरने और हादसों में गई जान

    फतेहपुर जिले में तूफान और बारिश से जुड़ी घटनाओं में 9 लोगों की मौत हुई, जबकि 16 लोग घायल हो गए. अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट अविनाश त्रिपाठी ने बताया कि खागा तहसील में पांच महिलाओं सहित आठ लोगों की मौत हुई. वहीं सदर तहसील में एक घर की दीवार गिरने से एक महिला की जान चली गई. घायलों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में कराया जा रहा है।


    प्रतापगढ़ में शेड और दीवार गिरने से मौतें

    प्रतापगढ़ जिले में तेज हवाओं और बारिश के बीच दीवार गिरने, सीमेंटेड शेड ढहने और बिजली गिरने की अलग-अलग घटनाओं में चार लोगों की मौत हुई. पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने बताया कि लालगंज कोतवाली क्षेत्र के ओझा का पुरवा गांव में एक सीमेंटेड शेड गिरने से भीम यादव (25) मलबे के नीचे दब गए और उनकी मौत हो गई. उन्होंने बताया कि बघराई थाना क्षेत्र के सरी स्वामी गांव में दीवार गिरने से भूषण पांडे (56) की मौत हुई. इसके अलावा नारंगपुर गांव की शांति देवी (46) और छत्रपुर शिवाला रघना गांव के लाल बहादुर (44) की भी तूफान से जुड़ी घटनाओं में जान चली गई।


    कानपुर देहात में बिजली गिरने से युवती की मौत

    कानपुर देहात जिले में बारिश से संबंधित घटनाओं में दो लोगों की मौत हुई. पुलिस सूत्रों के अनुसार, रसूलाबाद क्षेत्र के भौथारी गांव में भारी बारिश के दौरान 19 वर्षीय रुचि बकरियों के साथ नीम के पेड़ के नीचे खड़ी थी, तभी बिजली गिरने से उसकी मौत हो गई. इस घटना में कई बकरियों की भी मौत हो गई. पास में खड़ा एक 60 वर्षीय व्यक्ति भी घायल हो गया. अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) दुष्यंत कुमार ने बताया कि स्थानीय अधिकारियों से मानव और पशुधन नुकसान की रिपोर्ट मांगी गई है और सरकारी नियमों के अनुसार सहायता दी जाएगी।


    देवरिया और सोनभद्र में भी हादसे

    देवरिया जिले के भीमपुर गौरा गांव निवासी कोमल यादव (62) की बिजली गिरने से मौत हो गई. इस घटना में दो अन्य लोग घायल हुए हैं. एक अन्य घटना में नेरुअरी गांव निवासी रामनाथ प्रसाद (65) की भी बिजली गिरने से मौत हो गई. वहीं सोनभद्र जिले में माधव सिंह (38) की तेज बारिश और तूफान के दौरान उखड़े पेड़ के नीचे दबने से मौत हो गई.


    CM योगी ने दिए सख्त निर्देश

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों के अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने और पीड़ितों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा है. साथ ही राजस्व विभाग, कृषि विभाग और बीमा कंपनियों को नुकसान का सर्वेक्षण कर सरकार को जल्द रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है. राज्य सरकार का कहना है कि राहत और पुनर्वास कार्य तेजी से जारी हैं और प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

  • पटना में ब्लैकआउट ड्रिल के बीच कारोबारी की हत्या, बदमाशों ने अंधेरे का फायदा उठाकर मारी गोली

    पटना में ब्लैकआउट ड्रिल के बीच कारोबारी की हत्या, बदमाशों ने अंधेरे का फायदा उठाकर मारी गोली


    पटना। बिहार की राजधानी पटना में आयोजित ‘ब्लैकआउट मॉक ड्रिल’ के दौरान एक सनसनीखेज हत्या की वारदात सामने आई है। शहर में सुरक्षा अभ्यास के तहत 15 मिनट के लिए बिजली बंद की गई थी, इसी दौरान सुल्तानगंज थाना क्षेत्र में 25 वर्षीय मसाला कारोबारी पिंटू उर्फ बड़का की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

    मृतक मुसल्लहपुर हाट के पीछे का निवासी था और मसालों का कारोबार करता था। बताया जा रहा है कि अपराधियों ने पहले से घात लगाकर पिंटू को निशाना बनाया। जैसे ही मॉक ड्रिल के तहत इलाके की लाइटें बंद हुईं, बदमाशों ने उसके सिर में गोली मार दी।

    गोली चलते ही मची अफरा-तफरी
    वारदात के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गोली की आवाज सुनते ही मंडी क्षेत्र में भगदड़ मच गई। स्थानीय लोगों ने गंभीर रूप से घायल पिंटू को तुरंत पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी अंधेरे और सन्नाटे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।

    पुलिस और एफएसएल टीम जांच में जुटी
    सूचना मिलते ही सुल्तानगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची और इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम को भी बुलाया गया है, जो घटनास्थल से सबूत जुटाने में लगी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार शुरुआती जांच में हत्या के पीछे पुरानी रंजिश की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल आरोपियों की तलाश जारी है।

    प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
    इस घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। जिस ब्लैकआउट ड्रिल को आपात स्थिति से निपटने की तैयारी के तौर पर आयोजित किया गया था, उसी दौरान अपराधियों ने हत्या की वारदात को अंजाम दे दिया। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि मॉक ड्रिल के दौरान सुरक्षा और गश्त के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए थे। घटना के बाद इलाके में लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।

  • विदेश दौरे से लौटते ही पीएम मोदी करेंगे बड़ी बैठक, पेट्रोल-डीजल और सोने के बाद अब अगले कदम की तैयारी

    विदेश दौरे से लौटते ही पीएम मोदी करेंगे बड़ी बैठक, पेट्रोल-डीजल और सोने के बाद अब अगले कदम की तैयारी

    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों को नई गति देने की तैयारी तेज हो गई है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी 21 मई को मंत्रिपरिषद की एक अहम बैठक करने जा रहे हैं। यह बैठक उनके 15 से 20 मई 2026 तक प्रस्तावित विदेश दौरे के तुरंत बाद होगी। प्रधानमंत्री इस दौरान यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा पर रहेंगे।

    सुधारों की गति बढ़ाने पर जोर
    सरकारी सूत्रों के अनुसार इस बैठक का मुख्य उद्देश्य “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” और “ईज ऑफ लिविंग” को और सरल बनाना है। इसके लिए नियमों और प्रक्रियाओं को आसान करने और अनुपालन बोझ को कम करने पर विशेष चर्चा होगी। बैठक में उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), कृषि, वाणिज्य, स्वास्थ्य, ऊर्जा, पर्यावरण, श्रम, सड़क परिवहन और परमाणु ऊर्जा सहित करीब एक दर्जन मंत्रालयों के सचिव प्रेजेंटेशन दे सकते हैं।

    जन-केंद्रित सुधारों की समीक्षा
    बैठक में उन सुधारों की समीक्षा भी की जाएगी जो एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल में विभिन्न मंत्रालयों द्वारा नीतियों और नियमों में लागू किए गए हैं। फोकस इस बात पर रहेगा कि इन सुधारों से आम जनता और कारोबारियों को कितना लाभ मिला है। अधिकारियों के मुताबिक, बैठक का केंद्र “सरलीकरण और डीरेगुलेशन” यानी नियमों को आसान बनाना होगा।

    ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ को मिलेगी रफ्तार
    पिछली मंत्रिपरिषद बैठक 4 जून 2025 को हुई थी, जिसमें प्रधानमंत्री ने सरकार को “रिफॉर्म एक्सप्रेस” की तरह आगे बढ़ने का संदेश दिया था। हालांकि, पश्चिम एशिया संकट के कारण कई नीतिगत प्राथमिकताएं प्रभावित हुईं और सरकार को आपात प्रबंधन पर ध्यान देना पड़ा। अब उम्मीद की जा रही है कि यह बैठक सुधार एजेंडे को फिर से गति देगी।

    कोविड जैसी तेज सुधार नीति की जरूरत पर जोर
    विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक संकट के बीच भी सुधारों की प्रक्रिया को जारी रखना जरूरी है। उनका कहना है कि जिस तरह कोविड काल के दौरान तेज फैसलों से कई बड़े सुधार लागू किए गए थे, उसी तरह अब भी इसी गति को बनाए रखने की जरूरत है। इस बैठक में नीति आयोग से जुड़े उच्च स्तरीय समूहों द्वारा सुझाए गए सुधारों पर भी चर्चा होने की संभावना है, ताकि आने वाले समय में नीतिगत फैसलों को और प्रभावी बनाया जा सके।

  • पंजाब बोर्ड परिणाम ने बढ़ाया गौरव: टॉपर छात्राओं की ऐतिहासिक सफलता और सरकारी स्कूलों का शानदार प्रदर्शन चर्चा में

    पंजाब बोर्ड परिणाम ने बढ़ाया गौरव: टॉपर छात्राओं की ऐतिहासिक सफलता और सरकारी स्कूलों का शानदार प्रदर्शन चर्चा में

    नई दिल्ली । पंजाब में इस वर्ष घोषित हुए 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणामों ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नई सकारात्मक तस्वीर पेश की है। पूरे राज्य में छात्रों के प्रदर्शन ने यह दिखाया कि मेहनत, अनुशासन और बेहतर शैक्षणिक माहौल के साथ बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। इस बार विशेष रूप से छात्राओं का प्रदर्शन सबसे अधिक चर्चा में रहा, जिन्होंने न केवल शानदार सफलता हासिल की बल्कि मेरिट सूची में भी अपना दबदबा कायम रखा।

    घोषित परिणामों में कुल सफलता प्रतिशत 91 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया, जो पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर माना जा रहा है। छात्राओं ने इस बार लड़कों से आगे निकलते हुए अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। परीक्षा परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि राज्य में बेटियां शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही हैं और अपनी मेहनत से प्रेरणा बन रही हैं।

    इस वर्ष की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि तीन छात्राओं ने 500 में से पूरे 500 अंक प्राप्त कर राज्यभर में पहला, दूसरा और तीसरा स्थान हासिल किया। तीनों ने शत-प्रतिशत अंक हासिल कर ऐसा रिकॉर्ड बनाया जिसने पूरे शिक्षा जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनकी इस उपलब्धि को लगातार मेहनत और समर्पण का परिणाम माना जा रहा है।

    परिणाम घोषित होने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री ने इन प्रतिभाशाली छात्राओं और उनके परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह सफलता केवल विद्यार्थियों की नहीं बल्कि उनके माता-पिता और शिक्षकों की मेहनत का भी परिणाम है। उन्होंने छात्रों की उपलब्धियों को पंजाब के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा कि सही अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने पर सामान्य परिवारों के बच्चे भी असाधारण उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और मजबूत बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। स्कूलों में बेहतर सुविधाएं और शैक्षणिक वातावरण तैयार करने के प्रयासों का असर अब परिणामों में साफ दिखाई देने लगा है।

    इस बार सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन भी बेहद उल्लेखनीय रहा। राज्य के 416 सरकारी स्कूलों ने 100 प्रतिशत परिणाम दर्ज कर एक नया रिकॉर्ड कायम किया। यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था में लगातार सुधार हो रहा है और छात्र बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। लंबे समय तक निजी स्कूलों को लेकर जो धारणा बनी हुई थी, उसे अब सरकारी स्कूलों के परिणाम चुनौती देते नजर आ रहे हैं।

    परीक्षाओं में लाखों विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया था और उनमें बड़ी संख्या में छात्र सफल रहे। छात्राओं का सफलता प्रतिशत विशेष रूप से प्रभावशाली रहा, जिसने शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और मजबूत होती स्थिति को दर्शाया।

    शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे परिणाम विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को मजबूत करते हैं और दूसरे छात्रों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते हैं। साथ ही यह सफलता शिक्षकों की मेहनत और परिवारों के सहयोग को भी सामने लाती है, जिन्होंने छात्रों को आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया।

    कुल मिलाकर पंजाब बोर्ड का इस वर्ष का परीक्षा परिणाम शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव और बेहतर भविष्य का संकेत देता है। छात्राओं की ऐतिहासिक सफलता और सरकारी स्कूलों के शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि सही दिशा और निरंतर प्रयासों के साथ शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।

  • 10वीं और आईटीआई पास उम्मीदवारों के लिए खुशखबरी, रेलवे में निकली बंपर वैकेंसी..

    10वीं और आईटीआई पास उम्मीदवारों के लिए खुशखबरी, रेलवे में निकली बंपर वैकेंसी..

    नई दिल्ली । सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए रेलवे क्षेत्र से एक बड़ी अवसरभरी खबर सामने आई है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने ट्रेड अप्रेंटिस के 1,191 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती अभियान को तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए करियर की मजबूत शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में पद उपलब्ध होने के कारण रोजगार की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों में उत्साह का माहौल बना हुआ है।

    इस भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी और गैर-तकनीकी ट्रेडों में पद शामिल किए गए हैं। फिटर, इलेक्ट्रीशियन, वायरमैन, पेंटर, प्लंबर, वेल्डर, मशीनिस्ट और डीजल मैकेनिक जैसे प्रमुख ट्रेडों के साथ-साथ कंप्यूटर ऑपरेटर और स्टेनोग्राफर से जुड़े पदों पर भी भर्ती की जाएगी। अलग-अलग ट्रेडों में पदों की संख्या तय की गई है ताकि विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवाओं को अवसर मिल सके।

    आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार निर्धारित अंतिम तिथि तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन प्रक्रिया को अंतिम दिनों तक टालने के बजाय समय रहते पूरा कर लें। ऑनलाइन आवेदन के दौरान उम्मीदवारों को अपने शैक्षणिक दस्तावेज और आवश्यक जानकारी सही तरीके से भरनी होगी।

    इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास होना अनिवार्य है। इसके साथ ही संबंधित ट्रेड में आईटीआई प्रमाणपत्र होना भी जरूरी रखा गया है। रेलवे की यह भर्ती विशेष रूप से उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जो तकनीकी कौशल के आधार पर सरकारी क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं।

    उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 15 वर्ष और अधिकतम आयु 24 वर्ष निर्धारित की गई है। हालांकि आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट भी दी जाएगी। इससे विभिन्न सामाजिक वर्गों के अभ्यर्थियों को समान अवसर देने का प्रयास किया गया है।

    चयन प्रक्रिया मेरिट के आधार पर पूरी की जाएगी। उम्मीदवारों के शैक्षणिक प्रदर्शन और निर्धारित मानकों के अनुसार मेरिट सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद योग्य उम्मीदवारों का मेडिकल परीक्षण और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। चयनित अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण अवधि के दौरान मासिक स्टाइपेंड भी प्रदान किया जाएगा, जिससे उन्हें सीखने के साथ आर्थिक सहायता भी मिल सके।

    रेलवे में अप्रेंटिसशिप को हमेशा से युवाओं के लिए व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का एक मजबूत माध्यम माना गया है। इस प्रशिक्षण के जरिए उम्मीदवारों को तकनीकी कार्यों की वास्तविक समझ मिलती है, जो भविष्य में स्थायी रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में मदद करती है। बड़े संस्थान में काम करने का अनुभव युवाओं के आत्मविश्वास और कौशल दोनों को मजबूत करता है।

    कुल मिलाकर यह भर्ती अभियान उन युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है जो तकनीकी क्षेत्र में सरकारी नौकरी की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। सीमित योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों के लिए भी यह मौका भविष्य में बेहतर करियर और स्थिर रोजगार की नई संभावनाएं खोल सकता है।

  • राजधानी में संसाधन बचाने की मुहिम तेज: दिल्ली सरकार ने विदेश यात्राओं और सरकारी खर्चों में कटौती का किया ऐलान

    राजधानी में संसाधन बचाने की मुहिम तेज: दिल्ली सरकार ने विदेश यात्राओं और सरकारी खर्चों में कटौती का किया ऐलान

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में अब सरकारी कार्यप्रणाली को अधिक सादगीपूर्ण और संसाधन-केंद्रित बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। ऊर्जा बचत, सरकारी खर्चों में कटौती और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। इन फैसलों के तहत आने वाले एक वर्ष तक सरकार का कोई भी मंत्री या अधिकारी सरकारी विदेश यात्रा पर नहीं जाएगा। इसके साथ ही प्रशासनिक स्तर पर भी कई नई व्यवस्थाएं लागू करने की तैयारी शुरू हो चुकी है।

    सरकार का मानना है कि मौजूदा समय में ईंधन और संसाधनों का संतुलित उपयोग बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ राजधानी में एक व्यापक जन-अभियान की शुरुआत की जा रही है, जिसका उद्देश्य केवल सरकारी स्तर पर बदलाव करना नहीं बल्कि आम लोगों को भी इस पहल से जोड़ना है। सरकार का कहना है कि यदि प्रशासन और जनता दोनों मिलकर छोटे-छोटे कदम उठाएं तो बड़े स्तर पर बचत और सकारात्मक बदलाव संभव हो सकते हैं।

    वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था को इस अभियान का अहम हिस्सा बनाया गया है। सरकारी विभागों में सप्ताह में दो दिन घर से काम करने की योजना तैयार की गई है। साथ ही निजी कंपनियों और संस्थानों से भी अपील की जाएगी कि वे अपने कर्मचारियों को सीमित दिनों के लिए घर से काम करने की सुविधा दें। माना जा रहा है कि इससे सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होगी, ट्रैफिक का दबाव घटेगा और पेट्रोल-डीजल की खपत में कमी आएगी।

    सरकारी वाहनों के इस्तेमाल को भी सीमित करने का फैसला लिया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों और मंत्रियों के काफिलों में गाड़ियों की संख्या कम की जाएगी और जहां संभव होगा वहां सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दी जाएगी। अगले छह महीनों तक नई पेट्रोल, डीजल, सीएनजी या हाइब्रिड गाड़ियों की खरीद नहीं की जाएगी। इसके साथ ही कर्मचारियों को मेट्रो और बस जैसे सार्वजनिक परिवहन के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने की योजना भी बनाई गई है।

    राजधानी में मेट्रो स्टेशनों तक पहुंच आसान बनाने के लिए विशेष बस सेवाएं शुरू करने की तैयारी की गई है। इसके अलावा बैठकों और प्रशासनिक गतिविधियों को अधिक से अधिक ऑनलाइन मोड में करने की योजना बनाई जा रही है। विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों से भी ऑनलाइन क्लास और मीटिंग्स को बढ़ावा देने की अपील की गई है, ताकि अनावश्यक यात्रा को कम किया जा सके।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगले कुछ महीनों तक बड़े सरकारी आयोजन और खर्चीले कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे। इसके साथ ही “मेड इन India” उत्पादों को बढ़ावा देने और सरकारी विभागों में स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को प्राथमिकता देने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

    ऊर्जा बचत के तहत सरकारी दफ्तरों में बिजली उपयोग को नियंत्रित करने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। एयर कंडीशनर के तापमान को सीमित रखने और बिजली की अनावश्यक खपत रोकने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

    कुल मिलाकर राजधानी में शुरू की गई यह पहल केवल खर्च कम करने का प्रयास नहीं बल्कि एक नई प्रशासनिक सोच का संकेत मानी जा रही है। सरकार इस अभियान के जरिए सादगी, जिम्मेदारी और संसाधनों के संतुलित उपयोग का संदेश जनता तक पहुंचाना चाहती है।

  • रिलायंस कम्युनिकेशंस मामले में जांच तेज, कई शहरों में पूर्व अधिकारियों के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई

    रिलायंस कम्युनिकेशंस मामले में जांच तेज, कई शहरों में पूर्व अधिकारियों के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई


    नई दिल्ली । रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जांच अब और अधिक गंभीर होती दिखाई दे रही है। देश के कई बड़े शहरों में एक साथ चलाए गए तलाशी अभियान ने कारोबारी और वित्तीय जगत में नई हलचल पैदा कर दी है। यह कार्रवाई उन मामलों से जुड़ी बताई जा रही है जिनमें भारी वित्तीय नुकसान और नियमों के कथित उल्लंघन की जांच की जा रही है।

    जानकारी के मुताबिक जांच एजेंसियों की टीमों ने मुंबई, गुरुग्राम और बेंगलुरु समेत कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई कंपनी के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों और निदेशकों से जुड़े परिसरों पर केंद्रित रही। बताया जा रहा है कि जिन अधिकारियों के यहां तलाशी ली गई, वे वर्ष 2015 से 2017 के बीच कंपनी के महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत थे और वित्तीय संचालन से जुड़े फैसलों में उनकी अहम भूमिका थी।

    तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़ी सामग्री बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियां इन दस्तावेजों की गहराई से जांच कर रही हैं ताकि कथित गड़बड़ियों और पैसों के इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों का पता लगाया जा सके। अधिकारियों का मानना है कि इन रिकॉर्ड्स से जांच को नई दिशा मिल सकती है।

    पिछले कुछ महीनों में इस मामले में लगातार नई कार्रवाइयां देखने को मिली हैं। कई वित्तीय संस्थानों और बैंकों की शिकायतों के बाद यह जांच शुरू हुई थी। आरोप है कि संबंधित मामलों में हजारों करोड़ रुपये के कथित वित्तीय नुकसान की आशंका है। यही कारण है कि जांच एजेंसियां लगातार अलग-अलग स्तरों पर दस्तावेजों और लेनदेन की जांच कर रही हैं।

    इस पूरे मामले में पहले भी कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाए जा चुके हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि अब तक बड़ी मात्रा में दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत एकत्र किए गए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच जारी है। अधिकारियों का मानना है कि मामले में कई जटिल वित्तीय लेनदेन शामिल हो सकते हैं, जिनकी परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं।

    इससे पहले कंपनी से जुड़े कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को भी हिरासत में लिया गया था। उन पर बैंकिंग संचालन और फंड के इस्तेमाल से जुड़ी कथित अनियमितताओं में शामिल होने के आरोप लगे हैं। फिलहाल उनसे पूछताछ की प्रक्रिया जारी है और जांच एजेंसियां मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण होती है। बड़े कॉरपोरेट संस्थानों से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों की सख्ती यह संदेश देती है कि वित्तीय नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जा रहा है। वहीं, कारोबारी जगत की नजरें अब इस जांच के अगले चरण पर टिकी हुई हैं।

    आने वाले समय में इस मामले से जुड़े और भी बड़े खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है। लगातार बढ़ती जांच गतिविधियां यह संकेत दे रही हैं कि एजेंसियां इस पूरे मामले की हर परत तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, ताकि वित्तीय अनियमितताओं की पूरी तस्वीर साफ हो सके।

  • दिल्ली में बस्तर के भविष्य पर बड़ी बैठक, अमित शाह और सीएम विष्णु देव साय ने तैयार किया विकास का खाका

    दिल्ली में बस्तर के भविष्य पर बड़ी बैठक, अमित शाह और सीएम विष्णु देव साय ने तैयार किया विकास का खाका

    नई दिल्ली ।छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र अब केवल सुरक्षा चुनौतियों के लिए नहीं बल्कि तेजी से बदलते विकास मॉडल के लिए भी चर्चा में आने लगा है। इसी बदलाव को लेकर नई दिल्ली में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें बस्तर के विकास कार्यों, स्वास्थ्य सुविधाओं और नक्सल प्रभावित इलाकों में प्रशासनिक पहुंच को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

    बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में अब सरकारी योजनाओं का असर जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। जिन गांवों तक पहले स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना बेहद कठिन माना जाता था, वहां अब डॉक्टरों और स्वास्थ्य टीमों की नियमित पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। कई इलाकों में मेडिकल टीमें पैदल पहुंचकर लोगों की जांच कर रही हैं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।

    उन्होंने यह भी बताया कि बड़े स्तर पर स्वास्थ्य जांच अभियान चलाकर लाखों लोगों के मेडिकल रिकॉर्ड तैयार किए गए हैं। डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल के जरिए अब मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा सकेगी, जिससे इलाज की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बनेगी। इसके साथ ही गंभीर मरीजों को बड़े अस्पतालों तक पहुंचाने की व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।

    बस्तर में सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ अब बुनियादी सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुराने सुरक्षा शिविरों को धीरे-धीरे जन सुविधा केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और सरकारी योजनाओं से जुड़ी सेवाएं एक ही स्थान पर मिल रही हैं। इससे उन लोगों को राहत मिली है जिन्हें पहले छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी।

    बैठक में बस्तर के लिए तैयार किए गए विकास रोडमैप पर भी चर्चा हुई। इसमें सड़क निर्माण, रोजगार, शिक्षा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर के युवाओं को स्थानीय स्तर पर अवसर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे मुख्यधारा से तेजी से जुड़ सकें।

    जगदलपुर में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को भी इस बदलाव का अहम हिस्सा बताया गया। नए चिकित्सा संस्थानों और आपातकालीन सेवाओं के विस्तार से अब लोगों को इलाज के लिए बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। प्रशासन का मानना है कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाओं की पहुंच बढ़ने से क्षेत्र में स्थायी बदलाव संभव होगा।

    मुख्यमंत्री ने बैठक में यह भी कहा कि बस्तर में अब सकारात्मक माहौल बन रहा है और लोगों का भरोसा सरकार की योजनाओं पर बढ़ रहा है। पहले जो इलाके लंबे समय तक विकास से दूर रहे, वहां अब सड़कें, स्वास्थ्य सेवाएं और सरकारी सहायता पहुंच रही हैं। इससे आम लोगों के जीवन में धीरे-धीरे बदलाव दिखाई देने लगा है।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी बस्तर में हो रहे कार्यों की सराहना की और संकेत दिए कि आने वाले समय में इस मॉडल को और मजबूत किया जाएगा। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बस्तर को विकास, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के नए उदाहरण के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रही हैं।

  • पीएम की अपील का असर दिखा, नितिन गडकरी ने बदला तरीका, बस से किया निरीक्षण दौरा

    पीएम की अपील का असर दिखा, नितिन गडकरी ने बदला तरीका, बस से किया निरीक्षण दौरा

    नई दिल्ली ।  देश में ऊर्जा संरक्षण और परिवहन व्यवस्था में बदलाव की दिशा में एक प्रतीकात्मक लेकिन प्रभावशाली कदम उस समय देखने को मिला जब केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अपने निर्धारित दौरे के दौरान पारंपरिक काफिले का उपयोग न करते हुए बस से यात्रा करने का निर्णय लिया। यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है जब देश में ईंधन की बचत और वैकल्पिक ऊर्जा को अपनाने को लेकर लगातार चर्चा तेज हो रही है।

    नितिन गडकरी पुणे में संत ज्ञानेश्वर मौली महाराज पालकी मार्ग के निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। सामान्य परिस्थितियों में ऐसे निरीक्षणों में सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों से बड़े काफिले का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इस बार उन्होंने अलग रास्ता चुना और बस से सफर करते हुए यह संदेश दिया कि ऊर्जा संसाधनों का उपयोग सोच-समझकर और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।

    यात्रा के दौरान उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पेट्रोल और डीजल जैसे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता अब लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है। बदलते वैश्विक हालात, ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि देश वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर तेजी से आगे बढ़े। उनके अनुसार यह केवल सरकार की नीति नहीं बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बन चुकी है।

    गडकरी ने यह भी कहा कि वे लंबे समय से वैकल्पिक ईंधनों के विकास और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं। इथेनॉल, मेथनॉल, बायोडीजल, एलएनजी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे विकल्पों को उन्होंने भविष्य की ऊर्जा जरूरतों का आधार बताया। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों के विस्तार को भी उन्होंने देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना।

    उनका मानना है कि परिवहन क्षेत्र में हो रहे ये बदलाव केवल तकनीकी सुधार नहीं हैं, बल्कि यह एक बड़े आर्थिक परिवर्तन की शुरुआत हैं। उनके अनुसार जैसे-जैसे वैकल्पिक ईंधन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का उपयोग बढ़ेगा, वैसे-वैसे देश में नई आर्थिक संभावनाएं और रोजगार के अवसर भी विकसित होंगे।

    यह पूरा घटनाक्रम प्रधानमंत्री की उस हालिया अपील के बाद और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, जिसमें उन्होंने देशवासियों से ईंधन के उपयोग में सावधानी बरतने की बात कही थी। इस अपील का उद्देश्य यह था कि बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य और ऊर्जा संकट की संभावनाओं को देखते हुए हर स्तर पर बचत की आदत अपनाई जाए।

    इसके बाद कई प्रशासनिक स्तरों पर भी बदलाव देखने को मिल रहे हैं। सरकारी काफिलों में वाहनों की संख्या कम करने और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ाने जैसे कदम धीरे-धीरे लागू किए जा रहे हैं। यह बदलाव न केवल प्रशासनिक व्यवस्था में दिखाई दे रहा है, बल्कि आम जनता के बीच भी ऊर्जा संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है।

    नितिन गडकरी का बस से सफर केवल एक यात्रा नहीं बल्कि एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि ऊर्जा बचत अब केवल नीति का हिस्सा नहीं, बल्कि व्यवहारिक जीवन का अनिवार्य हिस्सा बननी चाहिए। इस कदम ने एक बार फिर यह चर्चा तेज कर दी है कि भारत किस तरह आने वाले समय में हरित ऊर्जा और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।