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  • 2025 इस साल दुनिया के कई प्रमुख विश्वविद्यालय विवादों में बड़े नाम भी रहे शामिल

    2025 इस साल दुनिया के कई प्रमुख विश्वविद्यालय विवादों में बड़े नाम भी रहे शामिल


    नई दिल्ली । यह साल अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। इस साल दुनियाभर में कई घटनाएं देखने को मिलीं कुछ अच्छी तो कुछ बुरी। इस साल विवादों का एक दौर भी देखने को मिला। दुनियाभर में इस साल अलग-अलग तरह के विवाद सामने आए। विवादों में दुनिया के कई विश्वविद्यालयों का नाम भी रहा है। आइए जानते हैं कि इस साल दुनिया के कौन-कौन से विश्वविद्यालय विवादों में रहे।

    अमेरिका का हावर्ड यूनिवर्सिटी विवादों में रहा। इसकी वजह फिलिस्तीन में इजरायल के साथ हो रहा गाजा युद्ध था। यूनिवर्सिटी में गाजा युद्ध को लेकर छात्र प्रदर्शन कैंपस में यहूदी-विरोध और अभिव्यक्ति की आजादी पर बहस देखने को मिली। यह मुद्दा इजरायल को युद्ध के लिए फंडिंग सेफ स्पेस बनाम फ्री स्पीच रहा। अमेरिका का कोलंबिया यूनिवर्सिटी भी इस साल विवादों में घिरा रहा। यहां भी मुद्दा फिलिस्तीन से जुड़ा था। प्रो-फिलिस्तीन छात्र आंदोलन कैंपस में टेंट प्रोटेस्ट क्लास बाधित होना यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा पुलिस बुलाना और छात्रों की गिरफ्तारी चर्चा में रहे।

    ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने भी इस साल विवादों की लिस्ट में अपनी जगह बना ली। यहां औपनिवेशिक इतिहास से जुड़े कोर्स मूर्तियों और नामों में बदलाव की मांग को लेकर विवाद देखने को मिला। इसके अलावा ‘डिकॉलोनाइज द सिलेबस’ अभियान भी चला। ब्रिटेन का मशहूर कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी भी विवादों से घिरा जिसका मुख्य कारण इजरायल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष को लेकर छात्रों और फैकल्टी की राजनीतिक बयानबाजी रहा।

    फ्रांस के साइंसेज पो में मिडिल ईस्ट के मुद्दों को लेकर छात्रों का भारी प्रदर्शन देखने को मिला। हालात पर काबू पाने के लिए क्लास को सस्पेंड करने और कैंपस लॉकडाउन करने का फैसला लिया गया। जर्मनी के फ्री यूनिवर्सिटी बर्लिन में इजरायल और फिलिस्तीन के मुद्दे पर विवाद देखने को मिला। इसका परिणाम यह निकला कि इजरायल-फिलिस्तीन विषय पर आयोजित कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा। इसके अलावा जर्मनी के सख्त एंटी-हेट और एंटी-सेमिटिज्म कानून को लेकर भी विवाद हुआ।

    ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी में भी इन संघर्षों को लेकर छात्रों का गुस्सा देखने को मिला। छात्रों ने विदेशी संघर्षों को लेकर यूनिवर्सिटी में नारे लगाए और विरोध प्रदर्शन भी किया। कुछ गतिविधियों पर प्रशासनिक कार्रवाई भी देखने को मिली।कनाडा का यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो भी विवादों की लिस्ट में शामिल रहा। राजनीतिक गतिविधियों को लेकर प्रोफेसरों और छात्रों के बीच तीखी बयानबाजी और कैंपस में माहौल को लेकर शिकायतें विवादों का हिस्सा रहीं।

    विवादों की इस लिस्ट में भारत के दो विश्वविद्यालय भी शामिल रहे। इसमें एक नाम जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और दूसरा दिल्ली विश्वविद्यालय का था। जेएनयू में छात्र राजनीति विचारधारात्मक टकराव कैंपस हिंसा और प्रशासनिक फैसले विवाद के कारण रहे। इसके अलावा डीयू में इतिहास और राजनीति से जुड़े सिलेबस में बदलाव कुछ विषयों को हटाने और जोड़ने पर विवाद देखने को मिला।

  • PMUY योजना में सब्सिडी प्राप्त करने वालों की संख्या 2025 में बढ़कर 10.35 करोड़ हुई

    PMUY योजना में सब्सिडी प्राप्त करने वालों की संख्या 2025 में बढ़कर 10.35 करोड़ हुई


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना पीएमयूवाई के तहत लाभ पाने वाले लोगों की संख्या 2025 में बढ़कर 10.25 करोड़ हो गई है। यह जानकारी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को दी गई। पीएमयूवाई के तहत सरकार गरीब परिवारों को 14.2 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर पर 300 रुपए की सब्सिडी देती है और एक साल में एक परिवार अधिकतम नौ सिलेंडर्स पर यह सब्सिडी ले सकता है।

    इससे देश में एलपीजी की खपत बढ़ाने में मदद मिली है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश में प्रति परिवार औसत खपत बढ़कर 4.47 सिलेंडर हो गई है जो कि पहले वित्त वर्ष 2019-20 में 3 थी। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में इसके 4.85 प्रति परिवार तक पहुंचने की उम्मीद है।सरकार ने बयान में कहा कि बकाया आवेदन को निपटाने और ज्यादा परिवारों तक एलपीजी गैस को पहुंचाने के लिए सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 25 लाख अतिरिक्त एलपीजी कनेक्शन जारी करने को मंजूरी दी है। आधार ऑथेंटिकेशन में तेजी लाकर सब्सिडी टारगेटिंग और पारदर्शिता में सुधार किया गया।

    1 दिसंबर 2025 तक बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन ने पीएमयूवाई के 71 प्रतिशत और नॉन-पीएमयूवाई के 62 प्रतिशत उपभोक्ताओं को कवर किया।सरकार ने बताया कि देश भर में चलाए गए ‘बेसिक सेफ्टी चेक’ अभियान ने ग्राहक सुरक्षा को मजबूत किया है। ग्राहकों के घरों पर 12.12 करोड़ से अधिक फ्री सेफ्टी इंस्पेक्शन किए गए और 4.65 करोड़ से अधिक एलपीजी होज रियायती दरों पर बदले गए जिससे घरेलू एलपीजी इस्तेमाल में जागरूकता और सेफ्टी स्टैंडर्ड में काफी सुधार हुआ।

    मंत्रालय ने पेट्रोलियम मार्केटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया। 90000 से अधिक रिटेल आउटलेट्स को डिजिटल पेमेंट की सुविधा दी गई जिन्हें 2.71 लाख से ज्यादा पीओएस टर्मिनलों का सपोर्ट मिला।मंत्रालय ने आगे कहा कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कवरेज बढ़कर 307 ज्योग्राफिकल इलाकों तक पहुंच गई है। सितंबर 2025 तक पीएमजी घरेलू कनेक्शन की संख्या बढ़कर 1.57 करोड़ और सीएनजी स्टेशन की संख्या बढ़कर 8400 से अधिक हो गई है।

  • कुमार विश्वास ने बिना नाम लिए गांधी परिवार को बताया 'फर्जी गांधी' सीएम योगी के सामने कसा तंज

    कुमार विश्वास ने बिना नाम लिए गांधी परिवार को बताया 'फर्जी गांधी' सीएम योगी के सामने कसा तंज


    नई दिल्ली ।
    देश के जाने-माने कवि और पूर्व नेता कुमार विश्वास ने एक बार फिर अपने तीखे अंदाज में कांग्रेस पर निशाना साधा है. इस बार उनका तंज सीधे देश के लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल और महात्मा गांधी को लेकर था. लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान कुमार विश्वास ने कांग्रेस की विचारधारा और इतिहास को लेकर व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि कांग्रेस ने कभी सरदार पटेल को अपना बताया ही नहीं.उन्होंने कहा ये लोग तो इतने तेज हैं कि कांग्रेस कार्यालय के बाहर एक पुरखा बिठा रखा था. सरदार पटेल बाहर बैठे थे तो बीजेपी वाले उठा लाए. कांग्रेस बोली पटेल तो हमारे थे.

    नामों में ही उलझी रही कांग्रेस

    कुमार विश्वास ने आगे कहा कि कांग्रेस अपने ही परिवार और नामों में उलझी रही. उन्होंने कहा तुम तो अपने नानाजी पापाजी मम्मीजी चाचीजी में ही लगे रहे. पटेल बाहर बैठे थे तो कोई पूछने वाला ही नहीं था कुमार विश्वास का इशारा कांग्रेस के परिवारवाद की ओर था जिस पर वे पहले भी कई बार सवाल उठा चुके हैं.अपने बयान में कुमार विश्वास यहीं नहीं रुके. उन्होंने महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि बीजेपी को गांधी जी को भी ले आना चाहिए. उन्होंने कहा गांधी जी स्वदेशी भी कह रहे हैं आयुर्वेद भी गीता भी पढ़ रहे हैं खादी भी पहन रहे हैं. सारा काम तो वही है जो बीजेपी वाले कहते हैं.

    कांग्रेस के पास फर्जी गांधी कुमार विश्वास
    इसके साथ ही उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस के पास पहले से ही तीन फर्जी गांधी’ है इसलिए असली गांधी को लेने में बीजेपी को क्या दिक्कत है.कुमार विश्वास का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में इतिहास और महापुरुषों की विरासत को लेकर राजनीति तेज है. उनके इस तंज को कांग्रेस पर सीधा हमला माना जा रहा है. समर्थक जहां इसे सटीक व्यंग्य बता रहे हैं वहीं कांग्रेस समर्थकों को यह बयान नागवार गुजर रहा है.

  • 1 जनवरी से ब्लैक लिस्ट हो जाएंगे ये राशन कार्ड फ्री अनाज और 7 बड़ी योजनाओं का लाभ मिलेगा रुक

    1 जनवरी से ब्लैक लिस्ट हो जाएंगे ये राशन कार्ड फ्री अनाज और 7 बड़ी योजनाओं का लाभ मिलेगा रुक


    नई दिल्ली । राशन कार्ड धारकों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई हैजिससे हजारों लाभार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। अगर आप राशन कार्ड का लाभ उठाते हैंतो 31 दिसंबर से पहले एक जरूरी काम पूरा करना होगा। इस समय सीमा के बाद अगर आप यह काम नहीं करतेतो 1 जनवरी से राशन मिलना बंद हो सकता है और सात प्रमुख सरकारी योजनाओं का लाभ भी रुक सकता है।

    ई-केवाईसी प्रक्रिया अनिवार्य

    दरअसलसरकार ने राशन कार्ड धारकों के लिए ई-केवाईसी इलेक्ट्रॉनिक-नो योर कस्टमरको अनिवार्य कर दिया है। इसका मतलब है कि सभी राशन कार्ड धारकों को अपनी पहचान और अन्य जानकारी ऑनलाइन अपडेट करनी होगी। यदि यह प्रक्रिया 31 दिसंबर तक पूरी नहीं होतीतो 1 जनवरी से आपके राशन कार्ड का लाभ रुक सकता हैऔर आप फ्री राशन और अन्य योजनाओं से वंचित हो सकते हैं।

    किसे-किसे पर पड़ेगा असर

    राशन कार्ड से जुड़ी यह प्रक्रिया हर परिवार के लिए लागू हैजिनके पास सरकारी राशन कार्ड है। इसका सीधा असर उन लाभार्थियों पर होगा जो अब तक अपनी ई-केवाईसी नहीं करवा पाए हैं। इन लाभार्थियों को 1 जनवरी से राशन मिलने में समस्या हो सकती है। इसके अलावासात बड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ भी इन कार्ड धारकों को नहीं मिल पाएगाजिनमें प्रमुख रूप से फ्री राशन योजनापेंशन योजनाएंबीमा योजनाएं अन्य सरकारी मदद शामिल हैं।

    ई-केवाईसी कैसे करें

    खुशखबरी यह है कि इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आपको किसी सरकारी दफ्तर या केंद्र पर जाने की जरूरत नहीं है। ई-केवाईसी मोबाइल फोन से भी किया जा सकता है। इसके लिए आपको निम्नलिखित कदम उठाने होंगे

    स्मार्टफोन या कंप्यूटर का इस्तेमाल करें।

    राज्य सरकार के आधिकारिक राशन कार्ड पोर्टल या एप्लिकेशन पर जाएं। अपना राशन कार्ड नंबर और अन्य जरूरी जानकारी डालें। आधार कार्ड और फोटो अपलोड करें।
     एक बार जब यह प्रक्रिया पूरी हो जाएतो आपको एक कन्फर्मेशन मैसेज मिलेगा। इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद आपको कोई परेशानी नहीं होगी और आप बिना किसी रुकावट के सभी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते रहेंगे।

    क्यों जरूरी है ई-केवाईसी

    ई-केवाईसी से राशन कार्ड की जानकारी को सही तरीके से अपडेट किया जा सकेगा और यह सुनिश्चित होगा कि केवल असली और पात्र लाभार्थी ही सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। इस प्रक्रिया से राशन वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर भी रोक लगेगी।

    समय रहते सुधार लें
    अगर आपने अभी तक अपनी ई-केवाईसी नहीं करवाई हैतो यह समय है कि आप इसे जल्दी से जल्दी पूरा कर लें। ऐसा करने से आप 1 जनवरी से होने वाली किसी भी परेशानी से बच सकते हैं और आपके राशन कार्ड से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के मिलता रहेगा।

  • PNR एक… सीटें अलग-अलग, साथ बैठकर हवाई सफर करने वालों को चुकानी पड़ रही बड़ी कीमत…

    PNR एक… सीटें अलग-अलग, साथ बैठकर हवाई सफर करने वालों को चुकानी पड़ रही बड़ी कीमत…


    नई दिल्ली।
    हवाई जहाज (Airplane) से सफर कर रहे यात्रियों को ऑनलाइन चेक इन (Online check-in) के दौरान बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। खासतौर पर एक टिकट पर यदि दो यात्री हैं तो उन्हें भी एकसाथ बैठने के लिए प्रति सीट तीन सौ से 1500 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं। घरेलू उड़ानों के साथ अंतरराष्ट्रीय उड़ान पर यही नियम: विमानन कंपनियों (Aviation companies) ने घरेलू उड़ानों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय उड़ान पर यह नियम बना रखे हैं।

    अधिकांश विमानन कंपनियों ने ऑनलाइन चेक इन का ऐसा सिस्टम बनाया है, जिसमें परिवार व दोस्तों के साथ सफर करे रहे यात्रियों को एक साथ सीट पाने के लिए न चाहते हुए भी अतिरिक्त शुल्क देना पड़ रहा है।

    दरअसल, ऑनलाइन/वेब चेक इन में सिर्फ एक ही व्यक्ति की सीट अपनी पंसद के हिसाब से निःशुल्क चुनने का विकल्प दिया जा रहा है। यदि टिकट का दूसरा व्यक्ति भी सीट बराबर में चाहता है तो फिर उसे अतिरिक्त भुगतान करना होगा। अतिरिक्त भुगतान न करने की स्थिति में विमानन कंपनी दूसरे व्यक्ति की सीट दूसरी जगह पर दे देगी।

    यह है नियम
    नागर विमानन महानिदेशक (डीजीसीए) का प्रावधान यह है कि विमानन कंपनी अपने सिस्टम के जरिए कोशिश करेंगी कि अगर एक ही रिफरेंस व पीएनआर नंबर पर दो यात्रियों ने टिकट बुक कराए हैं तो ऐसे में दोनों यात्रियों को साथ की सीट पर बैठने का अवसर दिया जाएगा। भले ही, दूसरे यात्री को विंडो साइड की सीट न दी जाए। लेकिन विमानन कंपनी ऑनलाइन चेक इन शुरू होने के साथ ही, अतिरिक्त भुगतान के साथ दूसरी सीट को यात्री की पसंद से चुनने का विकल्प देती हैं।


    एक साथ सफर करने पर भुगतान करना यात्रियों की मजबूरी

    विमानन कंपनियों के इस नए चेक इन सिस्टम के हिसाब से परिवार व दोस्तों के साथ सफर करने वाले यात्रियों के लिए यह मजबूरी है कि वह भुगतान के विकल्प को चुने। ऑनलाइन चेक इन शुरू होने पर दूसरी सीट को अपनी पसंद से चुनने पर तीन से पांच सौ रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है, लेकिन समय बीतने के साथ ही सीट चुनने का विकल्प महंगा होता जाता है। अंतिम समय में यह विकल्प प्रति सीट 1500 से ऊपर भी पहुंच जाता है। इस लिहाज से विमानन कंपनियां पसंद की सीट देने पर भी मोटी कमाई कर रही हैं।


    स्पष्ट प्रावधान नहीं होने के कारण विमानन कंपनियां उठा रहीं लाभ

    डीजीसीए ने वर्ष 2024 में सीट आवंटन को लेकर वायु परिवहन परिपत्र जारी किया, जिसमें अनुसूचित विमानन कंपनियों द्वारा सेवाओं और शुल्कों का पृथक्करण को लेकर कुछ प्रावधान स्पष्ट किया। जैसे कहा गया कि 12 साल से कम उम्र के बच्चे को बिना किसी शुल्क के माता-पिता के साथ सीट देनी होगी।

    जबकि, अन्य मामलों में विमानन कंपनियों को निर्देश दिया कि एयरलाइन अपने सिस्टम/सर्विस में बेहतर प्रैक्टिस के हिसाब से कोशिश करेगी कि यात्राओं को साथ में सीट दें, लेकिन विमानन कम्पनियां सिर्फ अनिवार्य मामलों को छोड़कर बाकी में सर्विस प्रैक्टिस में दो यात्रियों को एक साथ सीट नहीं देती हैं।

  • नवनीत राणा की 4 बच्चों वाली नसीहत पर भड़की प्रियंका चतुर्वेदी… बोलीं- पहले अपने पति कन्विन्स को करें…

    नवनीत राणा की 4 बच्चों वाली नसीहत पर भड़की प्रियंका चतुर्वेदी… बोलीं- पहले अपने पति कन्विन्स को करें…


    नई दिल्ली।
    महाराष्ट्र की विपक्षी पार्टी शिवसेना (उद्धव ठाकरे) (Shiv Sena -Uddhav Thackeray) की नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी (Priyanka Chaturvedi) ने भाजपा नेता और पूर्व सांसद नवनीत राणा (Navneet Rana) के उस बयान की तीखी आलोचना की है, जिसमें राणा ने देशभर के हिन्दुओं को हिंदुस्तान को बचाने लिए तीन-चार बच्चे पैदा (Three-Four Children) करने की नसीहत दी थी। एक टीवी चैनल से बात करते हुए चतुर्वेदी ने कहा, “वो पहले अपने पति से इस बारे में बात करें। वो भी अपने बच्चे बढ़ाएं, फिर अपने पड़ोसियों को कन्विन्स करें। जो अपने पड़ोसियों को कन्विन्स नहीं कर सकते, अपने पति को कन्विन्स नहीं कर सकते वो देश की महिलाओं को कन्विन्स करना बंद करें।”

    दरअसल, भाजपा नेता नवनीत राणा ने दो दिन पहले मंगलवार (23 दिसंबर) को कहा था कि हिंदुओं को कम से कम तीन-चार बच्चे पैदा करना चाहिए ताकि उन लोगों की साजिशों का मुकाबला किया जा सके जो बड़ी संख्या में बच्चे पैदा करके हिंदुस्तान को पाकिस्तान में बदलना चाहते हैं। पूर्व निर्दलीय सांसद राणा ने पत्रकारों से कहा था, “मैं सभी हिंदुओं से अपील करती हूं। सुनिए, ये लोग खुलेआम कहते हैं कि इनकी चार पत्नियां और 19 बच्चे हैं। मेरा सुझाव है कि हमें कम से कम तीन-चार बच्चे पैदा करना चाहिए।”


    नवनीत राणा ने क्यों दी ऐसी सलाह

    राणा ने अमरावती में यह टिप्पणी तब की थी, जब वह मीडिया को एक एक सवाल का जवाब दे रही थीं। राणा ने कहा,‘‘मुझे नहीं पता कि वह मौलाना है या कोई और, लेकिन उसने कहा कि उसके 19 बच्चे और चार पत्नियां हैं, परंतु वह 30 बच्चों की संख्या पूरी नहीं कर पाया। वे बड़ी संख्या में बच्चे पैदा करके हिंदुस्तान को पाकिस्तान में बदलना चाहते हैं, तो हम सिर्फ एक बच्चे से क्यों संतुष्ट हो जाएं? हमें भी तीन से चार बच्चे पैदा करने चाहिए।’’

    इस दौरान उन्होंने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) और राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के बीच बृहन्मुंबई महानगर पालिका चुनाव के लिए गठबंधन की संभावनाओं को भाव नहीं दिया। उन्होंने कहा,‘‘उद्धव ठाकरे बेबसी का पर्याय बन गए हैं। नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों के लिए उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को प्रचार के लिए बाहर नहीं निकाला। अगर कोई उद्धव ठाकरे के साथ जुड़ता भी है, तो उसका प्रदर्शन स्थानीय निकाय चुनाव से भी बदतर होगा।’’

  • इस साल आयकर कानून में हुए कई अहम बदलाव… करदाताओं को मिली बड़ी राहत

    इस साल आयकर कानून में हुए कई अहम बदलाव… करदाताओं को मिली बड़ी राहत


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central government) ने वर्ष 2025 में आयकर कानून (Income Tax Law) में कई अहम बदलाव किए हैं। इनका मकसद टैक्स प्रणाली (Tax system) को सरल बनाना, आम करदाता को राहत देना और डिजिटल प्रक्रियाओं को मजबूत करना है। नए नियमों से नौकरीपेशा, वरिष्ठ नागरिक, मध्यम वर्ग और छोटे करदाता सभी को फायदा मिलेगा।


    1. नया आयकर कानून-2025

    2025 का सबसे बड़ा बदलाव रहा नया आयकर बिल-2025, जो 60 साल से भी ज्यादा पुराने आयकर कानून-1961 की जगह लेगा। संसद ने अगस्त 2025 में नए कानून को पास किया, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इसमें भाषा आसान होगी, धाराएं कम होंगी और टैक्स विवादों में कमी आएगी। यह कानून टैक्सपेयर्स के लिए ज्यादा पारदर्शी होगा।


    2. Tax Year की नई परिभाषा

    नए कानून में ‘आकलन वर्ष’ और ‘वित्तीय वर्ष’ की जगह ‘कर वर्ष’ की अवधारणा लाई गई है। इससे टैक्स गणना आसान होगी और आम लोगों को नियम समझने में दिक्कत नहीं होगी। इसमें शून्य टीडीएस सर्टिफिकेट जैसे नए टूल्स होंगे, जो करदाता की तैयारी में मदद करेंगे।


    3. ₹12 लाख तक कोई Tax नहीं

    इस साल पेश बजट में इनकम टैक्स स्लैब स्लैब में बड़ा बदलाव किया गया। नई कर व्यवस्था को चुनने वाले लोगों के लिए टैक्स फ्री इनकम की सीमा बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दी गई। 75 हजार रुपये की मानक कटौती जोड़ने के बाद वेतनभोगी टैक्सपेयर्स को 12.75 लाख रुपये तक की आय पर कोई कर नहीं देना पड़ेगा।


    4. रिटर्न संशोधन की समय सीमा बढ़ी

    पहले संशोधित आयकर रिटर्न (आईटीआर-यू) दाखिल करने की समय सीमा 24 महीने थी, जिस बढ़ाकर अब 48 महीने कर दिया गया है। मतलब, अगर रिटर्न में कोई गलती हो गई या अतिरिक्त कमाई जोड़नी है, तो चार साल तक सुधार का मौका मिलेगा। ये बदलाव उन लोगों के लिए बड़ा सहारा है जो जल्दबाजी में गलती कर बैठते हैं।


    5. किराये पर टैक्स छूट में बढ़ोतरी

    किराए पर रहने वालों के लिए बड़ी राहत दी गई है। मकान किराया भत्ता (एचआरए) के तहत कर छूट की सीमा ₹2.4 लाख से बढ़ाकर ₹6 लाख कर दी गई है। इससे छोटे-मध्यम किराए पर टीडीएस का झंझट कम हो जाएगा। पहले लोग छोटी रकम पर भी टीडीएस काटने में उलझ जाते थे, लेकिन अब ये प्रक्रिया सरल हो गई है।


    6. वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी राहत

    वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैंक और डाकघर की ब्याज आय पर मिलने वाली कर छूट बढ़ाकर एक लाख कर दी गई है। पहले यह सीमा 50 हजार रुपये थी। इससे पेंशनभोगियों और बुजुर्गों की कर देनदारी कम होगी और नियमित आय पर सुरक्षा मिलेगी।


    7. टीडीएस/टीसीएस में देरी पर मुकदमा नहीं

    टैक्स समय पर चुका दिया गया हो तो अब टीसीएस स्टेटमेंट देरी से जमा करने पर मुकदमा नहीं चलेगा। साथ ही, ऊंची टीडीएस दर सिर्फ तब लगेगी जब पैन नंबर न हो। इससे असमंजस और जुर्माने का खतरा कम होगा। ये बदलाव कर प्रणाली को टैक्सपेयर्स के लिए आसान बनाएगा और कर अनुपालन को बढ़ावा देगा।


    8. आईटीआर फॉर्म में बदलाव

    आकलन वर्ष 2025-26 के लिए नए और संशोधित आईटीआर फॉर्म जारी किए गए हैं। इनमें नए कॉलम जोड़े गए हैं और फॉर्म के ढांचे में भी बदलाव किया गया है। इनके जरिए टैक्सपेयर्स के लिए आईटीआर फॉर्म भरना पहले से आसान हो गया है।


    9. कैपिटल गेन टैक्स में बड़े बदलाव

    2025 में कैपिटल गेन टैक्स के नियमों में भी अहम बदलाव किए गए। इक्विटी पर छोटी अवधि के कैपिटल गेन टैक्स की दर को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया। वहीं, कर मुक्त लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ को दायरा बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये तक कर दिया गया है। इससे ज्यादा के लाभ पर 12.5 प्रतिशत टैक्स देना होगा।


    10. विदेश रकम भेजने की सीमा बढ़ी

    विदेश में पैसे भेजने (एलआरएस) पर टीसीएस की सीमा अब 7 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है। साथ ही, पढ़ाई के लिए भेजे जाने वाले पैसे पर टीसीएस बिल्कुल हटा दिया गया। इससे छात्रों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।

  • ऑक्सफोर्ड यूनियन में भारत-पाकिस्तान बहस वीरांश भानुशाली की तीखी दलीलें और पाकिस्तान के खिलाफ कटाक्ष

    ऑक्सफोर्ड यूनियन में भारत-पाकिस्तान बहस वीरांश भानुशाली की तीखी दलीलें और पाकिस्तान के खिलाफ कटाक्ष


    नई दिल्ली । ऑक्सफोर्ड यूनियन में भारत और पाकिस्तान के बीच आयोजित एक बहस में विवादित बयानों और आरोपों का सिलसिला चल पड़ा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के बेटे मूसा हर्राज पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर एक विशेषज्ञों वाली बहस को विफल किया और पाकिस्तान की जीत का दावा किया। इस विवाद के बीच भारतीय छात्र वीरांश भानुशाली ने पाकिस्तान की सुरक्षा नीति और आतंकवाद के मुद्दे पर तीखा हमला बोला।

    वीरांश भानुशाली ने बहस की शुरुआत 26/11 मुंबई आतंकी हमलों की यादों से की। उन्होंने बताया कि कैसे उनका परिवार और पूरा मुंबई उन तीन रातों में दहशत के साए में जी रहा था। भानुशाली ने कहा “1993 में मुंबई में हुए बम धमाके मेरे घर से महज 200 मीटर दूर हुए थे। मैं आतंकवाद की छाया में बड़ा हुआ हूं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भारत लोकलुभावन नीति अपनाता तो 26/11 के बाद ही युद्ध छेड़ देता लेकिन भारत ने संयम दिखाया और कूटनीति का रास्ता अपनाया।

    भारत की सुरक्षा नीति को चुनावी राजनीति से जोड़ने पर भानुशाली ने करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा “क्या हर आतंकी हमले के पीछे चुनाव था नहीं। आतंकवाद वोट के लिए नहीं आता वह इसलिए आता है क्योंकि पाकिस्तान से उसे संरक्षण मिलता है। भानुशाली ने पाकिस्तान पर हमला करते हुए कहा भारत जब कार्रवाई करता है तो पायलटों की डी-ब्रीफिंग होती है जबकि पाकिस्तान में गीतों की ऑटो-ट्यूनिंग होती है। जब आप अपने लोगों को रोटी नहीं दे सकते तो युद्ध का सर्कस दिखाते हैं।

    यह बहस इस बात का उदाहरण बन गई कि आतंकवाद और सुरक्षा नीति पर भारत और पाकिस्तान के दृष्टिकोण में गहरी खाई है। पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को विदेश नीति के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की आलोचना करते हुए भानुशाली ने साफ कहा कि भारत युद्ध नहीं चाहता लेकिन अपनी सुरक्षा से समझौता भी नहीं करेगा। इस दौरान भारतीय वक्ताओं जे साई दीपक और प्रियंका चतुर्वेदी ने भी खुलासा किया कि उन्हें आखिरी समय पर जानकारी देकर जानबूझकर बहस से रोका गया। हालांकि इस बहस का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और वीरांश भानुशाली की दलीलों को व्यापक समर्थन मिल रहा है।

  • ग्रैप की चार ही स्टेज क्योंइससे ज्यादा प्रदूषण बढ़ने पर क्या हैं नियम

    ग्रैप की चार ही स्टेज क्योंइससे ज्यादा प्रदूषण बढ़ने पर क्या हैं नियम


    नई दिल्ली । केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार बुधवार सुबह दिल्ली और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ है. कई इलाकों में एक्यूआई 349 दर्ज किया है. वहीं धुंध में भी मामूली कमी देखी गई है. हालांकि राष्ट्रीय राजधानी के कुछ निगरानी केंद्रों पर एक्यूआई गंभीर श्रेणी के करीब पहुंच गया है. मंगलवार यानी 23 दिसंबर को दिल्ली भारत का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर थाजबकि नोएडा इस लिस्ट में सबसे ऊपर था. दोनों शहरों में वायु गुणवत्ता गंभीर स्तर पर पहुंच गई और विशेष रूप से सुबह के समय में शहरों में धुंध छाई रही।
    दिल्ली की एयर क्वालिटी में कुछ सुधार के बाद कई लोगों का मानना है कि ग्रैप-4 के सख्त कदमों से दिल्ली और एनसीआर की एयर क्वालिटी में सुधार देखने को मिला रहा है. क्योंकि प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को सील किया गया हैवाहनों की जांच तेज की गई और सफाई अभियान को बढ़ावा दिया जा रहा है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि ग्रैप की चार ही स्टेज क्यों हैं और इससे ज्यादा पॉल्यूशन होने पर क्या नियम है.

    क्या है ग्रैप और क्यों बनाई गई इसकी चार स्टेज

    ग्रैप यानी ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान एक लिस्टेड योजना है. जिसे प्रदूषण के स्तर के अनुसार लागू किया जाता है. इसका उद्देश्य यह है कि जैसे-जैसे एक्यूआई बढ़ें वैसे-वैसे सख्त कदम उठाए जाए. ताकि प्रदूषण को कंट्रोल किया जा सके. ग्रैप को चार स्टेज में बांटा गया है. जो स्टेज-1स्टेज-2स्टेज-3 और स्टेज-4 है. वहीं हर एक स्टेज एक तय एक्यूआई सीमा से जुड़ा होता है और उसी के अनुसार प्रतिबंध लागू होते हैं. सबसे गंभीर स्थिति में स्टेज-4 लागू किया जाता है. जब एक्यूआई 450 के पार चला जाता है.

    ग्रैप 4 ही क्यों माना जाता है सबसे सख्त

    स्टेज-4 को इमरजेंसी कंडीशन के लिए रखा गया है. यह पहले से लागू स्टेज 12 और 3 के सभी प्रतिबंधों के अलावा होता है. इस स्तर पर प्रदूषण को हेल्थ के लिए बहुत खतरनाक माना जाता है. इसलिए स्टेज-4 लागू होने पर सरकार और प्रशासन तुरंत कड़े फैसले लेते हैं. वहीं ग्रैप-4 के तहत दिल्ली और आसपास के एनसीआर इलाकों में पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर लोग रोक लगाई जाती है. इसके अलावा BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल चार पहिया गाड़ियों पर प्रतिबंध होता है. दिल्ली में बाहर से आने वाले नॉन BS-IV वाहनों की एंट्री भी बंद कर दी जाती है. वहीं पुराने डीजल मीडियम और हैवी गुड्स वाहनों को भी जरूरी सेवाओं को छोड़कर अनुमति नहीं मिलती. हालांकि BS-IV इलेक्ट्रिक सीएनजी और एलएनजी से चलने वाले वाहन पब्लिक ट्रांसपोर्ट और आपात सेवाओं को छूट दी जाती है.

    ज्यादा प्रदूषण बढ़ने पर क्या हैं नियम

    ग्रैप की चार स्टेज इसलिए बनाई गई हैक्योंकि स्टेज-4 को सबसे आखिरी और आपात कदम माना जाता है. इसके बाद स्थिति संभालने के लिए सरकार अतिरिक्त फैसले लेती है. जैसे ज्यादा गतिविधियों पर रोकट्रैफिक सीमित करना या हेल्थ इमरजेंसी जारी करना. यानी ग्रैप-4 के बाहर कोई अलग स्टेज नहीं होतीबल्कि स्टेज-4 के अंदर ही हालात के अनुसार फैसले लिए जाते हैं.

  • कर्नाटक में भीषण हादसा… ट्रक से टक्कर के बाद स्लीपर कोच बस में लगी आग… 10 लोगों की मौत

    कर्नाटक में भीषण हादसा… ट्रक से टक्कर के बाद स्लीपर कोच बस में लगी आग… 10 लोगों की मौत


    चित्रदुर्ग ।
    कर्नाटक (Karnataka) में शुक्रवार को एक भीषण सड़क हादसे (Road Accident ) में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई। कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले (Chitradurga district) में एक ट्रक से टक्कर (Collision with a truck) के बाद निजी स्लीपर कोच बस (Sleeper coach bus) में आग लगने से कम से कम 10 लोगों की जलकर मौत हो गई।

    पुलिस ने बताया कि बेंगलुरु से गोकर्ण जा रही निजी स्लीपर कोच बस को एक ट्रक ने सामने से टक्कर मार दी और उसमें तुरंत आग लग गई। पुलिस ने बताया कि चित्रदुर्ग जिले के हिरियूर तालुक में गोरलाथु क्रॉस के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर यह सड़क दुर्घटना हुई।


    डिवाइडर पार कर बस से टकराया ट्रक

    पुलिस ने बताया कि हिरियूर से बेंगलुरु की ओर जा रहा एक ट्रक डिवाइडर को पार कर गया और बेंगलुरु से शिवमोगा जा रही एक बस से टकरा गया। पुलिस का कहना है कि हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। वहीं, हादसे में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका पास के ही अस्पताल में इलाज जारी है।


    शुरुआती जांच में सामने आई ट्रक चालक की लापरवाही

    पुलिस की शुरुआती जांच में ट्रक चालक की लापरवाही की बात सामने आई है। ट्रक से हुई भीषण टक्कर के चलते बस में तुरंत ही आग लग गई थी और वह पूरी तरह जलकर खाक हो गई। इसकी वजह से पुलिस को बचाव कार्य करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा।राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए इस हादसे में स्लीपर कोच में आग लग गई, जिससे कई यात्री अंदर फंस गए थे।


    पीएम मोदी ने हादसे पर जताया दुख

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक में हुए सड़क हादसे पर दुख जताया है। पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट में कहा, ‘कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले में हुई दुर्घटना में हुई जानमाल की हानि से गहरा दुःख हुआ है। अपनों को खोने वालों के प्रति हमारी संवेदनाएं हैं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। प्रत्येक मृतक के परिजनों को पीएमएनआरएफ से 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे।’

    एक रिपोर्ट के मुताबिक चित्रदुर्ग के पुलिस अधीक्षक रंजीत ने घटनास्थल का दौरा किया और जांच की निगरानी कर रहे हैं। हिरियूर ग्रामीण पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर लिया गया है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है। पुलिस ने शक जताया है कि ट्रक चालक गाड़ी चलाते समय सो गया होगा।