Category: National

  • मंच पर फूट-फूट कर रो पड़े संजय निषाद, क्या छोड़ेंगे BJP का साथ? जानिए सपा में जाने को लेकर खुद ही कैसे साफ की तस्वीर

    मंच पर फूट-फूट कर रो पड़े संजय निषाद, क्या छोड़ेंगे BJP का साथ? जानिए सपा में जाने को लेकर खुद ही कैसे साफ की तस्वीर


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई जब संजय निषाद का गोरखपुर रैली में रोते हुए वीडियो सामने आया। गोरखपुर में आयोजित इस रैली के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

    क्या सपा में वापसी करेंगे?
    वीडियो वायरल होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा था कि क्या संजय निषाद फिर से समाजवादी पार्टी में लौटेंगे? इस पर खुद संजय निषाद ने साफ कहा कि सपा ने उनके लिए पहले ही दरवाजे बंद कर दिए थे। ऐसे में उनके वापस जाने का कोई सवाल ही नहीं है।

    BJP के साथ रहने का किया ऐलान
    संजय निषाद ने साफ तौर पर कहा कि वे भारतीय जनता पार्टी के साथ ही बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि जब सबने उनका साथ छोड़ दिया था, तब BJP ने उनका साथ दिया और वे 2019 से लगातार पार्टी को समर्थन दे रहे हैं। इस बयान से यह साफ हो गया है कि फिलहाल वे NDA के साथ ही रहेंगे।

    आरक्षण को लेकर उठाई आवाज
    रैली के दौरान संजय निषाद ने अपने मुख्य मुद्दे यानी आरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि निषाद समाज को SC आरक्षण मिलना चाहिए और इसके लिए वे लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने BJP से भी इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।

    संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि निषाद समाज का हक इन पार्टियों ने छीना है, जबकि अब वे अपने समाज को एकजुट करने में लगे हैं। संजय निषाद के रोने वाले वीडियो ने भले ही सियासी अटकलों को हवा दी हो, लेकिन उन्होंने खुद साफ कर दिया है कि वे BJP के साथ ही रहेंगे। अब देखना होगा कि आने वाले चुनावी माहौल में उनका अगला कदम क्या होता है और इसका यूपी की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

  • Political Kissa: शादी से पहले ही कह दिया था…एक दिन CM बनूंगा”, 30 साल बाद सच हुआ सपना; जानिए हिमंता बिस्वा सरमा का ये दिलचस्प किस्सा

    Political Kissa: शादी से पहले ही कह दिया था…एक दिन CM बनूंगा”, 30 साल बाद सच हुआ सपना; जानिए हिमंता बिस्वा सरमा का ये दिलचस्प किस्सा


    नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की जिंदगी का एक दिलचस्प किस्सा इन दिनों चर्चा में है। करीब 30 साल पहले उन्होंने अपनी पत्नी से कहा था कि वह एक दिन मुख्यमंत्री बनेंगे। उस समय यह सिर्फ एक सपना था, लेकिन अब वह सच हो चुका है।

    पत्नी ने सुनाया खास पल
    उनकी पत्नी रिनिकी भुयान सरमा ने बताया कि 9 मई को जब हिमंता घर लौटे तो उन्होंने कहा- मुझे मुख्यमंत्री नामित किया गया है। यह सुनकर वह हैरान रह गईं और पूछा, कौन? इस पर उन्होंने जवाब दिया मैं। यह पल उनके परिवार के लिए बेहद खास था। इसके अगले दिन 10 मई को हिमंता बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी में असम के 15वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इस दौरान उनका पूरा परिवार मौजूद रहा।

    छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर
    हिमंता बिस्वा सरमा का राजनीतिक करियर छात्र जीवन से ही शुरू हो गया था। AASU से जुड़े 1994 में सक्रिय राजनीति में आए युवाओं और छात्रों के लिए कई काम किए 1996 में उन्होंने जलुकबारी से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और 2001 में पहली जीत हासिल की। इसके बाद से वह लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं और उनका कद राजनीति में बढ़ता गया।

    कांग्रेस से BJP तक का सफर
    हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने करियर में बड़ा राजनीतिक बदलाव भी किया। पहले कांग्रेस में रहे 2015 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए इसके बाद उनका राजनीतिक ग्राफ तेजी से ऊपर गया 2021 में वह असम के मुख्यमंत्री बने। हिमंता बिस्वा सरमा की कहानी यह दिखाती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो सपने जरूर पूरे होते हैं। एक युवा नेता का सपना आज मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच चुका है, जो लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है।

  • मिडिल ईस्ट तनाव से ऊर्जा संकट गहराया होर्मुज स्ट्रेट बना वैश्विक चिंता का केंद्र

    मिडिल ईस्ट तनाव से ऊर्जा संकट गहराया होर्मुज स्ट्रेट बना वैश्विक चिंता का केंद्र


    नई दिल्ली:
    पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक स्तर पर चिंता को बढ़ा दिया है इस स्थिति को लेकर International Energy Agency के प्रमुख फतिह बिरोल ने कड़ी चेतावनी जारी की है उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात केवल क्षेत्रीय समस्या नहीं हैं बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है

    बिरोल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था एक गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है और यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो इसके परिणाम बेहद व्यापक होंगे उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऊर्जा आपूर्ति में बाधा के कारण तेल और गैस की कीमतों में अस्थिरता बढ़ सकती है जिससे कई देशों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी

    उन्होंने खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट की अहमियत पर जोर दिया जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत इसी मार्ग से गुजरता है लेकिन मौजूदा तनाव के कारण यहां से शिपिंग प्रभावित हो रही है जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ गया है

    आईईए प्रमुख ने यह भी चेतावनी दी कि इस संकट का असर किसी एक देश तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि हर देश इसकी चपेट में आएगा उन्होंने कहा कि चाहे विकसित देश हों या विकासशील सभी को इस ऊर्जा संकट के प्रभाव का सामना करना पड़ेगा

    इसी बीच ईरान की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से बंद नहीं किया गया है और वहां से समुद्री यातायात जारी है हालांकि तनावपूर्ण हालात के चलते सुरक्षा उपायों को सख्त किया गया है जिससे शिपिंग की गति प्रभावित हुई है

    आईईए ने पहले भी सरकारों और नागरिकों को ऊर्जा खपत कम करने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं इनमें घर से काम करना अनावश्यक यात्रा से बचना और ऊर्जा की बचत करने वाले आधुनिक उपाय अपनाना शामिल है इन कदमों का उद्देश्य ऊर्जा की मांग को कम करना और संकट के प्रभाव को सीमित करना है

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव भी बढ़ेगा यह स्थिति वैश्विक मंदी के खतरे को भी जन्म दे सकती है

    फतिह बिरोल ने अपने बयान में यह भी कहा कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष वैश्विक ऊर्जा संकट को और गहरा कर रहा है और यदि समय रहते इसका समाधान नहीं हुआ तो इसके प्रभाव आने वाले समय में और अधिक गंभीर हो सकते हैं

    इस प्रकार पश्चिम एशिया का यह तनाव अब केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष न रहकर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा जोखिम बन गया है जिस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है

  • वित्त विधेयक और कॉर्पोरेट कानून संशोधन 2026-27 पर सरकार का बड़ा कदम संसद में पेश होंगी अहम नीतियां

    वित्त विधेयक और कॉर्पोरेट कानून संशोधन 2026-27 पर सरकार का बड़ा कदम संसद में पेश होंगी अहम नीतियां


    नई दिल्ली:
    केंद्र सरकार आर्थिक और कॉर्पोरेट ढांचे में बड़े सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman सोमवार को संसद में वित्त विधेयक 2026-27 और कॉर्पोरेट कानून संशोधन विधेयक 2026 पेश करेंगी इन विधेयकों का उद्देश्य देश की वित्तीय प्रणाली को मजबूत बनाना और व्यावसायिक वातावरण को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है

    वित्त विधेयक 2026-27 का मुख्य उद्देश्य आगामी वित्तीय वर्ष के लिए केंद्र सरकार की वित्तीय योजनाओं और कर संबंधी प्रावधानों को लागू करना है यह विधेयक सरकार की बजटीय घोषणाओं को कानूनी रूप देने के साथ-साथ आर्थिक नीतियों को व्यवहार में लाने का आधार प्रदान करता है इसके पारित होने के बाद देश की राजकोषीय व्यवस्था और विकास योजनाओं को नई दिशा मिलेगी

    इसके साथ ही कॉर्पोरेट कानून संशोधन विधेयक 2026 भी पेश किया जाएगा जिसमें कंपनी अधिनियम 2013 और सीमित देयता भागीदारी अधिनियम 2008 में बदलाव का प्रस्ताव है यह विधेयक कॉर्पोरेट गवर्नेंस को बेहतर बनाने निवेशकों के हितों की रक्षा करने और कंपनियों के संचालन को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा

    कंपनी अधिनियम कंपनियों के गठन संचालन और विघटन को नियंत्रित करता है जबकि सीमित देयता भागीदारी अधिनियम साझेदारों को सीमित देयता के साथ एक लचीला ढांचा प्रदान करता है इन दोनों कानूनों में प्रस्तावित संशोधन व्यवसायों के लिए अधिक अनुकूल और आधुनिक व्यवस्था तैयार करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है

    इसके अतिरिक्त सरकार ने हाल ही में दिवालियापन और दिवालिया संहिता में संशोधन को मंजूरी दी है जिससे देश में संकटग्रस्त कंपनियों के समाधान की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है इस पहल का उद्देश्य देरी को कम करना और वित्तीय अनुशासन को मजबूत करना है

    इस संबंध में एक संसदीय समिति ने भी महत्वपूर्ण सिफारिशें दी हैं जिसका नेतृत्व भाजपा सांसद Baijayant Panda ने किया था समिति ने मौजूदा दिवालियापन प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए यह सुझाव दिया कि मामलों के निपटान के लिए सख्त समयसीमा निर्धारित की जाए इससे समाधान प्रक्रिया तेज और अधिक प्रभावी हो सकेगी

    समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि लेनदारों की समिति को अधिक अधिकार दिए जाएं ताकि वे निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी ला सकें और ऋणदाताओं के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित हो सके इसके अलावा सीमा पार दिवालियापन के लिए एक समर्पित ढांचे की सिफारिश की गई है जिससे अंतरराष्ट्रीय परिसंपत्तियों और विदेशी लेनदारों से जुड़े मामलों को बेहतर तरीके से संभाला जा सके

    इन विधेयकों और संशोधनों का उद्देश्य भारत के वित्तीय और कॉर्पोरेट ढांचे को अधिक मजबूत पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाना है यदि ये प्रस्ताव पारित हो जाते हैं तो आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक नीतियों और निवेश वातावरण पर इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है

  • सामाजिक न्याय के पुरोधा को राष्ट्र का नमन लोहिया जयंती पर पीएम मोदी ने याद किए उनके क्रांतिकारी विचार

    सामाजिक न्याय के पुरोधा को राष्ट्र का नमन लोहिया जयंती पर पीएम मोदी ने याद किए उनके क्रांतिकारी विचार


    नई दिल्ली:
    देश के प्रखर समाजवादी चिंतक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम मनोहर लोहिया की जयंती के अवसर पर राष्ट्रभर में उन्हें रक्षाबंधन के अवसर पर इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके विचारों और योगदान को याद करते हुए कहा कि गरीबों और संप्रदायों के संप्रदाय के प्रति उनकी विचारधारा आज भी देश को प्रेरित करती है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि उन्होंने केवल स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों को एकजुट नहीं किया बल्कि आजादी के बाद भारत के सामाजिक और राजनीतिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि समाजवादी विचारधारा केवल आर्थिक समानता तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने लैंगिक समानता और सहभागी शासन जैसे सिद्धांतों पर भी गहनता से अपने सिद्धांत पर जोर दिया, आज भी समग्र विकास और लोकतांत्रिक विचारधारा को मजबूत करने की दिशा में सुझाव दिए गए हैं।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी प्रयोगशाला को याद दिलाते हुए कहा कि वे आजादी के आंदोलन से लेकर समाज सुधार तक हर क्षेत्र में सक्रिय हैं, उन्होंने शिक्षा और स्वभाषा के लिए वकालत की और अपने आचरण से सामाजिक जीवन में शुचिता का उदाहरण प्रस्तुत किया।

    स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नडडा ने उन्हें सामाजिक न्याय का संदेश देते हुए कहा कि छोटू ने अपना पूरा जीवन समूह के विकास के लिए अपना विचार समर्पित किया है और आज भी समाज को दिशा देने का काम कर रहे हैं।

    कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि समाज के शोषित और कृषि उत्पादों के केंद्र उनके प्रयासों को हमेशा प्रेरणा देते रहे हैं, वहीं किरण रिजिजू ने कहा कि समाज के शोषित और कृषि उत्पादों की दिशा में दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

    विपक्ष के अध्यक्ष ओम बिरला ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि डॉली ने अपने जीवन में असंगत सामाजिक न्याय और जनभागीदारी के सिद्धांतों को स्वीकार किया है और अंतिम व्यक्ति तक विकास की दिशा तय की है, उनके विचार आज भी एक समावेशी और न्यायपूर्ण भारत के निर्माण में प्रेरणा देते हैं।

    देश के विभिन्न राज्यों के नेताओं ने भी इस अवसर पर अपने विचारों को याद किया, योगी आदित्यनाथ, मोहन यादव, भजन लाल शर्मा, नायब सिंह सैनी और पुष्कर सिंह धामी सहित कई लोगों ने अपने विचारों को याद करते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति को याद किया। तक विकास संकल्प के संकल्प को परिभाषित करें

    राम मनोहरला का जीवन और उनके विचार भारतीय राजनीति और समाज के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने कहा कि वे आज भी देश के विकास के लिए समान विचारधारा वाले हैं और उनकी विरासत हमें सिखाती है कि सच्चा लोकतंत्र तब मजबूत होता है जब समाज का हर वर्ग और सहभागी बने।

  • शहीद दिवस पर Narendra Modi का भावपूर्ण नमन अमर बलिदान की गाथा से गूंजा देश

    शहीद दिवस पर Narendra Modi का भावपूर्ण नमन अमर बलिदान की गाथा से गूंजा देश

    नई दिल्ली: शहीद दिवस के अवसर पर पूरे देश ने एक बार फिर अपने उन अमर वीर सपूतों को याद किया जिनके साहस और बलिदान ने भारत की स्वतंत्रता की नींव को मजबूत किया प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इस मौके पर महान क्रांतिकारी Bhagat Singh Rajguru और Sukhdev Thapar को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान राष्ट्र की सामूहिक चेतना में सदैव जीवित रहेगा

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में इन क्रांतिकारियों के अद्वितीय साहस और राष्ट्र के प्रति उनके अटूट समर्पण को याद किया उन्होंने कहा कि बहुत कम उम्र में ही इन वीरों ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया और यह साबित कर दिया कि सच्ची देशभक्ति किसी भी भय से ऊपर होती है औपनिवेशिक शासन के कठोर अत्याचारों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया और निर्भीकता के साथ बलिदान का मार्ग अपनाया

    उन्होंने यह भी कहा कि इन क्रांतिकारियों के आदर्श आज भी देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं न्याय के प्रति उनकी निष्ठा देशभक्ति की भावना और अन्याय के खिलाफ उनका प्रतिरोध हर भारतीय के दिल में एक नई ऊर्जा का संचार करता है उनके विचार केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं हैं बल्कि वर्तमान और भविष्य को दिशा देने वाले प्रकाश स्तंभ हैं

    प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए संदेश में यह भी रेखांकित किया गया कि आज भी इन अमर शहीदों की गाथाएं देश के हर नागरिक को प्रेरित करती हैं बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक हर कोई उनके साहस और त्याग को याद करता है यह प्रेरणा ही है जो देश को आगे बढ़ने की शक्ति देती है और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की भावना को मजबूत करती है

    भारतीय परंपरा और आध्यात्मिक विचारों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि जो लोग राष्ट्र के लिए अपने प्राणों का बलिदान देते हैं वे अमर हो जाते हैं उनका अस्तित्व समय और परिस्थितियों से परे चला जाता है और वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन जाते हैं उनका जीवन एक ऐसी सुगंध की तरह है जो पीढ़ी दर पीढ़ी फैलती रहती है और समाज को जागरूक और सशक्त बनाती है

    हर वर्ष 23 मार्च को मनाया जाने वाला शहीद दिवस हमें उस ऐतिहासिक क्षण की याद दिलाता है जब इन तीनों महान क्रांतिकारियों को अंग्रेजी हुकूमत द्वारा फांसी दी गई थी यह दिन केवल शोक का नहीं बल्कि गर्व और संकल्प का भी प्रतीक है यह हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता की कीमत क्या होती है और इसे बनाए रखने के लिए हमें किस प्रकार समर्पित रहना चाहिए

    आज का भारत इन वीरों के सपनों को साकार करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है और उनका बलिदान हर नागरिक के लिए एक प्रेरणा स्रोत बना हुआ है शहीद दिवस केवल एक स्मरण नहीं बल्कि एक संकल्प है कि हम उनके आदर्शों पर चलकर एक मजबूत समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण करेंगे

  • छठी बार खिताब जीतना ही एकमात्र सपना हार्दिक पांड्या ने खोला अपनी 'विरासत' का राज, MI फैंस को दिया खास संदेश।

    छठी बार खिताब जीतना ही एकमात्र सपना हार्दिक पांड्या ने खोला अपनी 'विरासत' का राज, MI फैंस को दिया खास संदेश।

    नई दिल्ली:इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 का बिगुल बजने से पहले ही मुंबई इंडियंस के खेमे में हलचल तेज हो गई है। हाल ही में मुंबई इंडियंस के एक खास इवेंट ‘MIX’ (MI Fan Zone) में कप्तान हार्दिक पांड्या ने प्रशंसकों के साथ सीधा संवाद किया और अपने दिल की बात साझा की। हार्दिक पांड्या, जिन्हें अक्सर अपनी बेबाक शैली के लिए जाना जाता है, उन्होंने इस मंच से न केवल अपनी भविष्य की योजनाओं का खुलासा किया, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि इस बार उनका असली ‘गोल’ क्या है। हार्दिक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका सबसे बड़ा सपना मुंबई इंडियंस को छठी बार आईपीएल चैंपियन बनाना है। गौरतलब है कि अब तक मुंबई ने रोहित शर्मा के नेतृत्व में पांच बार खिताब जीता है, लेकिन हार्दिक की कप्तानी में टीम का पिछला सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। ऐसे में पांड्या अब खुद को साबित करने और टीम को फिर से शिखर पर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहे हैं।

    इवेंट के दौरान भावुक होते हुए हार्दिक ने अपनी पुरानी यादों को ताजा किया। उन्होंने बताया कि किस तरह जब वह एक युवा खिलाड़ी के रूप में टीम में आए थे, तब मुंबई इंडियंस के कल्चर, जुनून और कड़ी मेहनत ने उन्हें संवारने में मदद की थी। हार्दिक के अनुसार, उनकी इच्छा केवल मैच जीतना नहीं है, बल्कि एक ऐसी विरासत (Legacy) छोड़ना है, जिस पर आने वाली पीढ़ियां गर्व कर सकें। उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूं कि मुंबई इंडियंस का वह कल्चर हमेशा बना रहे, जहां खिलाड़ी आगे आएं, जी-तोड़ मेहनत करें और मैदान पर अपनी सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट का प्रदर्शन करें।” पांड्या का मानना है कि उनकी सफलता की पहचान उनके खेल के जुनून और कड़ी मेहनत से होनी चाहिए। वह चाहते हैं कि मुंबई इंडियंस न केवल अपनी जीत के लिए, बल्कि अपने जुझारू खेल और सकारात्मक टीम संस्कृति के लिए जानी जाए।

    इतिहास पर नजर डालें तो मुंबई इंडियंस आईपीएल की सबसे सफल टीमों में से एक रही है। 2013 में पहले खिताब से शुरू हुआ यह सफर 2015, 2017, 2019 और 2020 की जीत के साथ पांच ट्रॉफियों तक पहुंचा। खुद हार्दिक पांड्या के पास भी पांच आईपीएल मेडल हैं, जिनमें से चार उन्होंने मुंबई इंडियंस के साथ जीते हैं और एक ऐतिहासिक जीत उन्होंने 2022 में अपनी कप्तानी में गुजरात टाइटन्स को दिलाई थी। अब वह उसी जादू को मुंबई इंडियंस की जर्सी में दोहराना चाहते हैं। हालिया टी20 विश्व कप की जीत ने भी हार्दिक के आत्मविश्वास को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। उस विश्व विजेता टीम के चार मुख्य सदस्य-सूर्यकुमार यादव, जसप्रीत बुमराह, तिलक वर्मा और खुद हार्दिक-मुंबई इंडियंस का हिस्सा हैं, जो इस टीम को कागजों पर बेहद मजबूत बनाता है।

    फैंस के साथ बातचीत के दौरान हार्दिक ने वानखेड़े स्टेडियम के उस अद्भुत माहौल का भी जिक्र किया, जो भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए सेमीफाइनल के दौरान देखा गया था। उन्होंने मुंबई के फैंस यानी ‘MI पल्टन’ को टीम की असली ताकत बताया। हार्दिक ने कहा कि फैंस टीम की आवाज होते हैं और जब वे पूरे जोश के साथ स्टेडियम में मौजूद होते हैं, तो खिलाड़ियों का हौसला दोगुना हो जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी सीजन में भी फैंस इसी तरह टीम के साथ हर अच्छे और बुरे वक्त में खड़े रहेंगे। कुल मिलाकर, हार्दिक पांड्या ने यह साफ कर दिया है कि आईपीएल 2026 उनके लिए सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि अपनी कप्तानी और विरासत को नए सिरे से परिभाषित करने का एक सुनहरा अवसर है।

  • ईरान के समर्थन में कश्मीर से मदद, लोगों ने दान किए गहने और नकद राशि

    ईरान के समर्थन में कश्मीर से मदद, लोगों ने दान किए गहने और नकद राशि


    नई दिल्‍ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान के समर्थन में कश्मीर से मदद की खबर सामने आई है। केंद्र शासित प्रदेश के बडगाम जिले में स्थानीय लोगों ने एक मस्जिद में दान केंद्र स्थापित कर आर्थिक सहयोग जुटाना शुरू किया। यहां समुदाय के लोगों ने सोने-चांदी के बर्तन, गहने और नकद राशि देकर ईरान की सहायता का प्रयास किया।

    जानकारी के अनुसार, Imam Zaman Mosque Budgam में आयोजित इस अभियान के दौरान कई महिलाएं अपने कानों की बालियां, पुराने गहने, बर्तन और अन्य घरेलू सामान लेकर पहुंचीं और उन्हें दान के रूप में सौंप दिया।

    स्थानीय लोगों ने बताई वजह

    स्थानीय निवासी मोहसिन अली ने कहा कि दान केंद्र का उद्देश्य ईरान को आर्थिक मदद पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग किया है। उनके मुताबिक, “हम सीधे जाकर मदद नहीं कर सकते, इसलिए आर्थिक सहयोग के माध्यम से समर्थन दे रहे हैं।”

    ‘कमजोरों की मदद’ बताकर दिया समर्थन

    मोहसिन अली ने कहा कि ईरान को समर्थन देना उनके लिए कमजोरों की मदद करने जैसा है। उन्होंने बताया कि समुदाय के लोगों ने स्वेच्छा से इस अभियान में हिस्सा लिया और जरूरतमंदों के लिए सहयोग दिया।

    ईरानी दूतावास ने जताया आभार

    भारत में स्थित Embassy of Iran in India ने भी इस पहल पर धन्यवाद व्यक्त किया। रिपोर्ट के अनुसार, दूतावास ने सोशल मीडिया के माध्यम से भारत के लोगों के समर्थन की सराहना की। इससे पहले ईरान के समर्थन में दान अभियान शुरू किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।

    वैश्विक तनाव का असर

    United States और Israel के साथ बढ़ते तनाव के चलते Iran क्षेत्र में संघर्ष जारी है। Strait of Hormuz में स्थिति तनावपूर्ण होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    रिपोर्टों के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच हमले और जवाबी कार्रवाई जारी है, जिससे युद्ध लंबा खिंचने की संभावना बढ़ती दिखाई दे रही है।

  • चुनाव आयोग आज बंगाल में जारी करेगा अंतिम मतदाता सूची, पूरे राज्य में अलर्ट

    चुनाव आयोग आज बंगाल में जारी करेगा अंतिम मतदाता सूची, पूरे राज्य में अलर्ट

    कोलकाता। चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में सोमवार को ही पहली पूरक मतदाता सूची प्रकाशित कर सकता है। इसको देखते हुए पूरे बंगाल के थानों को अलर्ट पर रखा गया है। निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने बताया,उचित सत्यापन के बाद 27 लाख से अधिक मामलों का निपटारा हो चुका है।

    निर्वाचन आयोग सोमवार शाम को पश्चिम बंगाल में चुनाव के लिए पहली सप्लिमेंट्री वोटर लिस्ट प्रकाशित कर सकता है। यह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

    अधिकारियों ने बताया कि यह सूची अंतिम मतदाता सूची की तरह ही जारी की जाएगी, जिसकी प्रतियां जिला निर्वाचन अधिकारियों को भेजी जाएंगी और बाद में राज्य भर के मतदान केंद्रों पर प्रदर्शित की जाएंगी।

    निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने बताया, ‘विचाराधीन मामलों की समीक्षा की प्रक्रिया व्यापक रही है और उचित सत्यापन के बाद 27 लाख से अधिक मामलों का निपटारा हो चुका है। पूरक सूची में इन परिणामों को पारदर्शी रूप से शामिल किया जाएगा।” उन्होंने बताया कि ये 27 लाख मतदाता उन 60 लाख मतदाताओं में शामिल थे जिन्हें 28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में ‘विचाराधीन’ के रूप में चिह्नित किया गया था।
    बंगाल में हाई अलर्ट

    पहली पूरक मतदाता सूची के सोमवार को जारी होने की संभावना के मद्देनजर राज्य प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते सभी थानों और पुलिस प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा है। राज्य के गृह विभाग ने जिलाधिकारियों को विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया है। विभाग ने सभी थानों को सरकारी कार्यालयों में भीड़ संभालने के लिए पर्याप्त पुलिस तैनाती का इंतजाम करने और किसी भी व्यवधान को रोकने के लिए कानून लागू करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समन्वय बनाये रखने को भी कहा है।

    मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय ने सोमवार को अनुपूरक मतदाता सूची जारी होने की पुष्टि की है।

    इस सूची से बड़ी संख्या में मतदाताओं को लेकर बनी अनिश्चितता दूर होने की उम्मीद है। इससे पहले 28 फरवरी को जारी अंतिम एसआईआर सूची में 60 लाख से अधिक नामों को विचाराधीन श्रेणी में रखा गया था, जिससे उनकी स्थिति अनसुलझी रह गयी थी।

    सीईओ कार्यालय के सूत्रों ने संकेत दिया है कि शुक्रवार तक, इनमें से लगभग 27 लाख मामलों की समीक्षा की जा चुकी है और राज्य तथा पड़ोसी क्षेत्रों से लाये गये न्यायिक अधिकारियों के पैनल ने इन्हें निपटाया है। तार्किक विसंगति के तहत रखे गये मामलों की समीक्षा के लिए कुल मिलाकर 700 से अधिक न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों को लगाया गया है। पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने पहले उल्लेख किया था कि चुनाव से पहले विचाराधीन सभी मामलों के हल होने की संभावना है।

    इसके अलावा भारत के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भारत चुनाव आयोग ने पुनरीक्षण प्रक्रिया से जुड़े विवादों को निपटाने के लिए राज्य भर में 19 जिला-स्तरीय अपीलीय निकाय स्थापित किए हैं।

    ये अपीलीय निकाय उन मामलों की सुनवाई के लिए जिम्मेदार होंगे जो आधिकारिक निबटारे में विफल रहे थे।

    स्थिति की गंभीरता के मद्देनजर कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी एस शिवगणनम को कोलकाता और उत्तर 24 परगना जैसे प्रमुख जिलों में अपीलों की निगरानी के लिए नियुक्त किया गया है, जबकि अन्य सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को शेष जिलों में इसी तरह के मामलों को संभालने का जिम्मा सौंपा गया है। पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी करने में हुई देरी पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिन्होंने अधिकारियों पर वैध मतदाताओं को बेवजह परेशान करने का आरोप लगाया है।

  • कॉलेजियम प्रणाली पर पूर्व CJI की दो टूक, बोले– फिलहाल भारत के लिए यही सबसे उपयुक्त व्यवस्था

    कॉलेजियम प्रणाली पर पूर्व CJI की दो टूक, बोले– फिलहाल भारत के लिए यही सबसे उपयुक्त व्यवस्था

    नई दिल्ली। देश के पूर्व मुख्य जस्टिस बी आर गवई (Justice B. R. Gavai) ने न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में कॉलेजियम प्रणाली ही भारत के लिए सबसे उपयुक्त व्यवस्था है।
    उन्होंने यह भी माना कि यह प्रणाली पूरी तरह त्रुटिहीन नहीं है, लेकिन अब तक के अनुभव के आधार पर इसे बेहतर विकल्प बताया।
    यह बात पूर्व CJI ने ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन’ के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में कही। इस दौरान उन्होंने “न्यायिक शासन की पुनर्कल्पना” विषय पर बोलते हुए न्यायपालिका, कार्यपालिका और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की।

    ‘कोई भी प्रणाली परिपूर्ण नहीं’

    जस्टिस गवई ने कहा कि कॉलेजियम व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं, लेकिन कोई भी प्रणाली पूरी तरह परिपूर्ण नहीं होती।

    उन्होंने कहा कि लंबे समय तक इसके कामकाज को देखने के बाद उन्हें लगता है कि फिलहाल यही प्रणाली देश के लिए सबसे बेहतर है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि कॉलेजियम मनमाने ढंग से काम नहीं करता। उच्च न्यायालयों में नियुक्ति के लिए संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठ न्यायाधीश नाम सुझाते हैं, जिसके बाद प्रक्रिया केंद्र सरकार को भेजी जाती है। विभिन्न एजेंसियों से सुझाव लेने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाता है।

    सरकार की भूमिका पर क्या बोले

    पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि केंद्र सरकार को किसी नाम पर आपत्ति होती है, तो वह कॉलेजियम को वापस भेज सकती है। कॉलेजियम इन आपत्तियों पर विचार कर अंतिम निर्णय करता है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट कई बार स्पष्ट कर चुका है कि कॉलेजियम द्वारा दोबारा भेजे गए नामों पर नियुक्ति करना कार्यपालिका की जिम्मेदारी होती है।

    उन्होंने खेद जताते हुए कहा कि कई मामलों में दूसरी सिफारिश के बाद भी नियुक्तियां लंबित हैं। उन्होंने इसे आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा नहीं बताते हुए कहा कि यह एक महत्वपूर्ण संस्थागत प्रश्न है, जिस पर ध्यान देना जरूरी है।

    जजों के ट्रांसफर और भूमिका पर टिप्पणी

    जस्टिस गवई ने न्यायाधीशों के स्थानांतरण पर भी कहा कि कुछ विशेष परिस्थितियों में यह आवश्यक हो जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई न्यायाधीश बार-बार शीर्ष अदालत के फैसलों की अनदेखी करता है, तो क्या कॉलेजियम को सुधारात्मक कदम नहीं उठाने चाहिए।

    कार्यपालिका पर संयम की सलाह

    पूर्व CJI ने न्यायपालिका और कार्यपालिका के संतुलन पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अदालतें हमेशा संयम बरतती हैं, लेकिन जब नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है या शक्तियों का संतुलन बिगड़ता है, तो न्यायपालिका हस्तक्षेप करती है।

    उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कार्यपालिका किसी व्यक्ति पर केवल संदेह के आधार पर उसका घर ध्वस्त कर देती है, तो क्या न्यायपालिका चुप बैठ सकती है। उन्होंने कहा कि यह कानून के शासन से जुड़ा गंभीर प्रश्न है, जिस पर विचार होना चाहिए।