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  • Weather: मानसून फिर हुआ सक्रिय…. दिल्ली समेत देश के कई इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट

    Weather: मानसून फिर हुआ सक्रिय…. दिल्ली समेत देश के कई इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट


    नई दिल्ली।
    मौसम विभाग (IMD) ने 14 अगस्त को उत्तर-पश्चिम (North-west), मध्य, पूर्व, पूर्वोत्तर, पश्चिम और दक्षिण भारत (South India) के कई इलाकों (Rain) में बारिश का अनुमान जताया है. इस दौरान कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश (Heavy Rain) हो सकती है. वहीं, कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ मौसम खराब रहने की आशंका है।

    तटीय पश्चिम बंगाल (Coastal West Bengal) के ऊपर बना डिप्रेशन अगले 24 घंटे में उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए गंगीय पश्चिम बंगाल और झारखंड की ओर जा सकता है. इसके प्रभाव से पूर्वी भारत के कई हिस्सों में तेज बारिश हो सकती है. मॉनसून ट्रफ भी सक्रिय है और अपनी सामान्य स्थिति के आसपास बनी हुई है।


    दिल्ली-NCR समेत उत्तर भारत में बारिश

    दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में 14 अगस्त को ज्यादातर इलाकों में बारिश होने का अनुमान है. हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है. राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में दिनभर रुक-रुककर बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है. आने वाले दिनों में भी इन इलाकों में बारिश का दौर जारी रह सकता है.


    यूपी में 14 से 18 अगस्त तक होगी बारिश

    उत्तर प्रदेश में भी मानसून सक्रिय रहेगा. पूर्वी यूपी में 14 से 18 अगस्त तक ज्यादातर इलाकों में बारिश का अनुमान है, जबकि पश्चिमी यूपी में 15 और 16 अगस्त को कई जगहों पर बारिश हो सकती है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में 18 अगस्त तक कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है. पश्चिमी यूपी में 14 से 18 अगस्त के बीच भी कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है. कई इलाकों में गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा.


    हिमाचल और उत्तराखंड के लिए भी अलर्ट

    हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 19 अगस्त तक कई से ज्यादातर इलाकों में बारिश होने का अनुमान है. 14 अगस्त को दोनों राज्यों में कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है. हिमाचल प्रदेश में बहुत भारी बारिश की भी आशंका है. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी मौसम गीला रहने की संभावना है. 14 अगस्त को यहां कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है. पूर्वी राजस्थान में भी भारी बारिश का अनुमान है, जबकि पश्चिमी राजस्थान में छिटपुट बारिश हो सकती है.


    मध्य भारत में भी भारी बारिश का दौर

    छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में मॉनसून का असर तेज रहेगा. 14 अगस्त को छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में ज्यादातर जगहों पर बारिश हो सकती है. पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी कई इलाकों में बारिश का अनुमान है. पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है. छत्तीसगढ़ में स्थिति ज्यादा गंभीर रह सकती है. यहां भारी से बहुत भारी बारिश और कुछ जगहों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की आशंका है. लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।


    बंगाल, झारखंड और ओडिशा में बारिश

    पूर्वी भारत में गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा 14 अगस्त को सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में रह सकते हैं. इन राज्यों में कई से ज्यादातर स्थानों पर बारिश होने और कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है. तटीय पश्चिम बंगाल के ऊपर बना डिप्रेशन उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए गंगीय पश्चिम बंगाल और झारखंड को प्रभावित कर सकता है. इन इलाकों में बारिश के साथ गरज, बिजली और तेज झोंके वाली हवाएं चल सकती हैं. गंगीय पश्चिम बंगाल में थंडरस्क्वॉल की स्थिति भी बन सकती है, जहां हवा की रफ्तार 50-60 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंकों की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है.


    पूर्वोत्तर और पश्चिमी भारत में भी बारिश

    पूर्वोत्तर भारत में अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कई से ज्यादातर इलाकों में बारिश हो सकती है. अरुणाचल प्रदेश तथा असम और मेघालय में कुछ जगहों पर भारी बारिश की संभावना है. नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी भारी बारिश हो सकती है. कई स्थानों पर गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा रहेगा. पश्चिमी भारत में कोंकण और गोवा तथा मध्य महाराष्ट्र में कई इलाकों में बारिश हो सकती है. गुजरात क्षेत्र में भी ज्यादातर स्थानों पर बारिश का अनुमान है और कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है. मराठवाड़ा तथा सौराष्ट्र और कच्छ में छिटपुट से कुछ इलाकों में बारिश होने की संभावना है।


    दक्षिण भारत में भी खूब बरसेगा मॉनसून

    दक्षिण भारत में तटीय कर्नाटक और केरल में कई से ज्यादातर इलाकों में बारिश होने का अनुमान है. केरल और तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है. तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल के कुछ हिस्सों में गरज, बिजली और तेज हवाएं चलने की आशंका है. आईएमडी के मुताबिक कुछ क्षेत्रों में हवा की रफ्तार 40-50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जबकि झोंकों की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक रह सकती है।

    बंगाल की खाड़ी में समुद्र में रहेगा हलचल
    बंगाल की खाड़ी में भी मौसम खराब रहने की संभावना है. 14 अगस्त की सुबह तक उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और इससे लगे ओडिशा, पश्चिम बंगाल तथा उत्तर आंध्र प्रदेश के तटों पर 45-55 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. हवा के झोंकों की रफ्तार 65 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. इन क्षेत्रों के आसपास समुद्र के उग्र रहने की आशंका को देखते हुए आईएमडी ने मछुआरों को उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और पश्चिम बंगाल, ओडिशा तथा उत्तर आंध्र प्रदेश के तटों के पास या समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है।

  • NALSAR छात्रों को राहत: CJI सूर्यकांत के विरोध के बाद BCI ने एडवोकेट एनरोलमेंट पर रोक हटाई

    NALSAR छात्रों को राहत: CJI सूर्यकांत के विरोध के बाद BCI ने एडवोकेट एनरोलमेंट पर रोक हटाई


    नई दिल्ली। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के छात्रों को बड़ी राहत दी है। BCI ने छात्रों के एडवोकेट के तौर पर एनरोलमेंट पर लगाई गई रोक वापस ले ली है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच रिपोर्ट आने तक छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

    इससे पहले BCI ने सभी स्टेट बार काउंसिल को निर्देश दिया था कि NALSAR से 2026 में कानून की डिग्री हासिल करने वाले किसी भी छात्र का अगले आदेश तक एडवोकेट के तौर पर एनरोलमेंट न किया जाए। यह विवाद यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने के विरोध से जुड़ा था।

    अब BCI ने अपने पहले आदेश की समीक्षा करते हुए पूरे 2026 बैच के एनरोलमेंट पर लगी रोक हटा दी है। साथ ही कहा है कि जांच रिपोर्ट मिलने से पहले इस मामले में छात्रों के खिलाफ कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जाएगा।

    BCI का दावा- शिक्षकों और बाहरी लोगों ने छात्रों को उकसाया
    BCI ने आरोप लगाया है कि NALSAR के कुछ छात्रों को कुछ शिक्षकों और बाहरी लोगों ने विरोध के लिए उकसाया था। परिषद ने मामले की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

    BCI ने इससे पहले NALSAR के वाइस चांसलर से पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट मांगी थी। परिषद का कहना था कि यदि रिपोर्ट में छात्रों की ओर से किसी तरह की अनुशासनहीनता सामने नहीं आती है तो उनके एनरोलमेंट की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।

    शुरुआती फैसले की कानूनी जगत में हुई आलोचना
    BCI के शुरुआती फैसले की कानूनी जगत में आलोचना हुई थी। इसके बाद परिषद ने अपने आदेश की समीक्षा की। BCI का कहना है कि शुरुआती जानकारी में सामने आया कि विरोध के पीछे कुछ शिक्षक और चुनिंदा बाहरी लोग शामिल थे और उन्होंने छात्रों को कथित तौर पर उकसाया।

    परिषद का मानना है कि पूरे बैच को इस घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। BCI के अनुसार, ज्यादातर छात्र विवाद में शामिल नहीं थे और न ही वे इस अभियान का हिस्सा बनना चाहते थे। इसी आधार पर छात्रों के करियर को ध्यान में रखते हुए 2026 बैच के सभी छात्रों के एनरोलमेंट पर लगी रोक हटाने का फैसला लिया गया।

    जांच रिपोर्ट के बाद हो सकती है आगे की कार्रवाई
    हालांकि, BCI ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। परिषद अब NALSAR प्रशासन की जांच रिपोर्ट का इंतजार करेगी। यदि अंतिम रिपोर्ट में सामने आता है कि कुछ लोगों ने छात्रों को विरोध के लिए उकसाया या इस घटनाक्रम में उनकी प्रमुख भूमिका थी, तो उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जा सकता है।

    पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने उठाए थे सवाल
    भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल और वरिष्ठ वकील केके वेणुगोपाल ने भी BCI के शुरुआती फैसले पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि छात्रों के एडवोकेट के तौर पर एनरोलमेंट पर रोक लगाना ‘रूल ऑफ लॉ’ यानी कानून के शासन का उल्लंघन है। वेणुगोपाल ने यह भी कहा था कि BCI के पास छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करने का अधिकार नहीं है।

    BCI के शुरुआती आदेश के बाद NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई थी। स्टेट बार काउंसिल में एनरोलमेंट वकालत के पेशे में प्रवेश की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। ऐसे में रोक जारी रहने पर उन छात्रों पर भी असर पड़ सकता था, जिन्हें प्लेसमेंट मिल चुका है या जो वकालत शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं।

    CJI के दीक्षांत समारोह में आने का हुआ था विरोध
    पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब NALSAR ने अपने दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया। इसके बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने कथित तौर पर उनके कार्यक्रम में शामिल होने का विरोध किया। इसी घटनाक्रम का BCI ने संज्ञान लिया था।

    BCI के ताजा आदेश के बाद 2026 बैच के छात्रों का एडवोकेट के तौर पर एनरोलमेंट फिलहाल बहाल हो गया है। अब आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी। जांच में अनुशासनहीनता नहीं मिलने पर छात्रों के खिलाफ किसी कार्रवाई की संभावना कम हो सकती है।

  • Maharashtra: नासिक में सुबह-सुबह महसूस किए गए भूकंप के झटके… तीव्रता 3.4 रही

    Maharashtra: नासिक में सुबह-सुबह महसूस किए गए भूकंप के झटके… तीव्रता 3.4 रही


    नासिक।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) के नासिक (Nashik) में शुक्रवार सुबह-सुबह भूकंप के झटके (Earthquake tremors) महसूस किए गए। जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 5 बजकर 32 मिनट पर आए इस भूकंप की तीव्रता 3.4 बताई जा रही है.

    इससे पहले महाराष्ट्र के पालघर में भी सोमवार रात करीब एक घंटे के अंदर भूकंप के दो झटके महसूस किए गए. दोनों झटकों की तीव्रता 3.4 रही थी। महाराष्ट्र के पालघर में पहला झटका रात 10:04 बजे महसूस किया गया. करीब 56 मिनट बाद 11 बजे फिर भूकंप आया. दोनों की तीव्रता 3.4 मापी गई।

    बता दें, भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है. 7.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप को खतरनाक श्रेणी में रखा जाता है. वहीं, 2.0 या उससे कम तीव्रता वाले भूकंप माइक्रो भूकंप कहते हैं, जिन्हें अधिकांश लोग महसूस भी नहीं कर पाते. दूसरी ओर, 4.5 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप इमारतों और घरों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है।

    इस बीच, लद्दाख के लेह में भी गुरुवार को सुबह-सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक, सुबह 6:05 बजे आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.5 दर्ज की गई।


    कैसे आता है भूकंप?

    धरती के अंदर 7 प्लेट्स ऐसी होती हैं जो लगातार घूम रही हैं. ये प्लेट्स जिन जगहों पर ज्यादा टकराती हैं, उसे फॉल्ट लाइन जोन कहते हैं. बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं. जब प्रेशर ज्यादा बनने लगता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं. इन प्लेट्स के टूटने के कारण अंदर की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है. इस डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।

  • चमोली की जिस टनल में हुआ हादसा, आखिर किस प्रोजेक्ट का है हिस्सा? जानें 444 MW की विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना के 5 बड़े फायदे

    चमोली की जिस टनल में हुआ हादसा, आखिर किस प्रोजेक्ट का है हिस्सा? जानें 444 MW की विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना के 5 बड़े फायदे


    चमोली।
    उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में गुरुवार शाम निर्माणाधीन सुरंग में मलबा और पानी घुसने से बड़ा हादसा हो गया। अचानक टनल में पानी और मलबा आने के कारण कई मजदूर अंदर फंस गए। राहत और बचाव दल ने करीब 13 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि बाकी मजदूरों की तलाश और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ NDRF, SDRF और मेडिकल टीम भी मौजूद है।

    हादसे के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर पहाड़ के भीतर इतनी बड़ी सुरंग क्यों बनाई जा रही थी? दरअसल, यह कोई सामान्य सड़क या आवाजाही की सुरंग नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की एक बड़ी जलविद्युत परियोजना का हिस्सा है।

    यह सुरंग 444 मेगावाट की विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना (VPHEP) के तहत बनाई जा रही है। आइए जानते हैं इस प्रोजेक्ट की खासियत और इससे होने वाले फायदे।

    क्या है विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना?

    विष्णुगाड-पीपलकोटी हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर विकसित की जा रही एक महत्वपूर्ण रन-ऑफ-द-रिवर जलविद्युत परियोजना है।

    इस परियोजना में अलकनंदा नदी के तेज बहाव और करीब 237 मीटर के हेड का इस्तेमाल कर बिजली पैदा की जाएगी। यह परियोजना ऋषिकेश से लगभग 225 किलोमीटर दूर NH-58 पर स्थित है।

    परियोजना का निर्माण THDC इंडिया लिमिटेड कर रहा है, जबकि सुरंग निर्माण का काम HCC को दिया गया है। इसकी कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 444 मेगावाट है, जिसे 111-111 मेगावाट की चार यूनिट के जरिए हासिल किया जाएगा।

    कैसे काम करेगा पूरा प्रोजेक्ट?

    विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना को मुख्य रूप से तीन बड़े हिस्सों में समझा जा सकता है।

    1. 65 मीटर ऊंचा डायवर्जन डैम

    अलकनंदा नदी के पानी को परियोजना की दिशा में मोड़ने के लिए करीब 65 मीटर ऊंचे कंक्रीट डायवर्जन डैम का निर्माण किया जा रहा है।

    2. 13.4 किलोमीटर लंबी हेड रेस टनल

    यह परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण सुरंगों में से एक है। करीब 13.4 किलोमीटर लंबी हेड रेस टनल के जरिए नदी का पानी बिजली उत्पादन के लिए टर्बाइन तक पहुंचाया जाएगा।

    3. 3.04 किलोमीटर लंबी टेल रेस टनल

    टर्बाइन से बिजली पैदा होने के बाद पानी को दोबारा अलकनंदा नदी में छोड़ने के लिए करीब 3.04 किलोमीटर लंबी टेल रेस टनल बनाई जा रही है।

    पीपलकोटी में हुआ ताजा हादसा इसी जलविद्युत परियोजना के टनल निर्माण कार्य के दौरान हुआ है।

    परियोजना के 5 बड़े फायदे

    1. 444 मेगावाट बिजली का उत्पादन

    परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि 444 मेगावाट बिजली उत्पादन होगी। इससे उत्तराखंड और आसपास के क्षेत्रों की बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।

    2. नदी के बहाव से बिजली

    यह रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना है। यानी बिजली उत्पादन के लिए नदी के प्राकृतिक बहाव और ऊंचाई के अंतर का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तरह बड़े पैमाने पर पानी को लंबे समय तक रोककर रखने की जरूरत अपेक्षाकृत कम होती है।

    3. स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा

    जलविद्युत को नवीकरणीय ऊर्जा के प्रमुख स्रोतों में गिना जाता है। परियोजना से बिजली उत्पादन बढ़ने पर कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

    4. राज्य की ऊर्जा जरूरतों में मदद

    444 मेगावाट की क्षमता वाली परियोजना उत्तराखंड की ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत कर सकती है। इससे राज्य को बिजली की उपलब्धता बढ़ाने और ऊर्जा क्षेत्र में अपनी क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।


    5. स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियां

    इतनी बड़ी परियोजना के निर्माण और संचालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। इसके साथ ही निर्माण कार्य, परिवहन, स्थानीय सेवाओं और दूसरे कारोबारों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

    हादसे के बाद रेस्क्यू पर नजर

    पीपलकोटी टनल हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में बड़े निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल प्राथमिकता टनल के अंदर फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना है। NDRF, SDRF और अन्य बचाव दल मौके पर जुटे हैं और ऑपरेशन लगातार जारी है।

    हालांकि यह परियोजना उत्तराखंड की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन चमोली जैसे संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र में सुरंग निर्माण के दौरान मजदूरों की सुरक्षा, भूगर्भीय जोखिम और आपातकालीन बचाव व्यवस्था भी उतनी ही अहम हो जाती है।

  • NDA-NA परीक्षा 2 के लिए UPSC ने जारी किया कार्यक्रम, तय तारीख पर दो पालियों में होगी परीक्षा

    NDA-NA परीक्षा 2 के लिए UPSC ने जारी किया कार्यक्रम, तय तारीख पर दो पालियों में होगी परीक्षा

    नई दिल्ली । संघ लोक सेवा आयोग ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और नौसेना अकादमी परीक्षा यानी NDA-NA परीक्षा 2 की तारीख घोषित कर दी है। परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह महत्वपूर्ण अपडेट है। आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा निर्धारित तारीख पर आयोजित की जाएगी और इसे दो अलग-अलग शिफ्ट में संपन्न कराया जाएगा।

    NDA और NA परीक्षा भारतीय सशस्त्र बलों में अधिकारी बनने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है। इसके माध्यम से योग्य उम्मीदवारों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय नौसेना अकादमी में प्रशिक्षण एवं आगे की सैन्य शिक्षा के अवसर मिलते हैं। परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को आयोग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार अपनी तैयारी और परीक्षा संबंधी व्यवस्थाएं पूरी करनी होंगी।

    NDA-NA परीक्षा 2 के आयोजन को लेकर उम्मीदवारों के बीच लंबे समय से तारीख का इंतजार था। अब परीक्षा कार्यक्रम स्पष्ट होने के बाद अभ्यर्थी अपनी तैयारी को अंतिम चरण में ले जा सकते हैं। परीक्षा दो शिफ्ट में होने के कारण उम्मीदवारों को अपने निर्धारित पेपर और परीक्षा केंद्र से संबंधित जानकारी पर विशेष ध्यान देना होगा।

    परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए एडमिट कार्ड भी महत्वपूर्ण दस्तावेज होगा। उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र पर प्रवेश के लिए आयोग द्वारा निर्धारित नियमों और आवश्यक दस्तावेजों का पालन करना होगा। परीक्षा केंद्र पर पहुंचने से पहले अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड में दर्ज केंद्र, रिपोर्टिंग समय और अन्य निर्देशों को ध्यान से देख लेना चाहिए।

    NDA-NA परीक्षा में गणित और सामान्य योग्यता से जुड़े विषयों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसलिए उम्मीदवारों के लिए अब बचे समय में पाठ्यक्रम के महत्वपूर्ण हिस्सों का दोहराव, पिछले प्रश्नपत्रों का अभ्यास और समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना उपयोगी रहेगा। दो शिफ्ट में परीक्षा आयोजित होने के कारण अभ्यर्थियों को परीक्षा पैटर्न और अपनी तैयारी के अनुरूप रणनीति बनानी होगी।

    UPSC की परीक्षाओं में समय प्रबंधन के साथ प्रश्नों को सही तरीके से हल करना भी महत्वपूर्ण होता है। उम्मीदवारों को परीक्षा के दौरान दिए गए निर्देशों का पालन करना होगा और निर्धारित समय के भीतर अपने प्रश्नपत्र को पूरा करना होगा। परीक्षा से पहले मॉक टेस्ट और पुराने प्रश्नपत्रों का अभ्यास अभ्यर्थियों को वास्तविक परीक्षा परिस्थितियों के लिए तैयार करने में मदद कर सकता है।

    NDA-NA परीक्षा 2 को लेकर उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा से संबंधित किसी भी महत्वपूर्ण सूचना के लिए आयोग की आधिकारिक अधिसूचनाओं पर नजर बनाए रखें। परीक्षा की तारीख, शिफ्ट, एडमिट कार्ड और केंद्र से जुड़ी जानकारी में किसी भी बदलाव या नए निर्देश की स्थिति में आयोग की सूचना को ही अंतिम माना जाएगा।

    परीक्षा की तारीख घोषित होने के साथ अब अभ्यर्थियों के पास अपनी तैयारी को व्यवस्थित करने का स्पष्ट समय-सारिणी आधार उपलब्ध है। उम्मीदवारों को अंतिम दिनों में नए विषयों पर अत्यधिक निर्भर रहने के बजाय पहले से तैयार पाठ्यक्रम के रिवीजन, अभ्यास और कमजोर हिस्सों को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।

    NDA-NA परीक्षा में सफल उम्मीदवारों के लिए आगे चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरण महत्वपूर्ण होते हैं। लिखित परीक्षा के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया जाता है। इसलिए लिखित परीक्षा को केवल एक चरण मानकर तैयारी करने के बजाय अभ्यर्थियों को आगे की चयन प्रक्रिया की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखना चाहिए।

    परीक्षा कार्यक्रम जारी होने के बाद अब उम्मीदवारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती अपनी तैयारी को अंतिम रूप देना है। निर्धारित तारीख तक नियमित अध्ययन, प्रश्नपत्र अभ्यास और समय प्रबंधन के जरिए अभ्यर्थी परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

  • सीवान फायरिंग विवाद के बीच तेजस्वी यादव का 19 अगस्त को राजभवन मार्च,बिहार पुलिस ने घातक हथियारों पर लगाई रोक

    सीवान फायरिंग विवाद के बीच तेजस्वी यादव का 19 अगस्त को राजभवन मार्च,बिहार पुलिस ने घातक हथियारों पर लगाई रोक

    नई दिल्ली । बिहार के सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की ओर से AK-47 से फायरिंग के मामले ने राज्य की राजनीति और कानून-व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। घटना के विरोध में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने 19 अगस्त को पटना में राजभवन मार्च निकालने का ऐलान किया है। इसी बीच बिहार पुलिस मुख्यालय ने भीड़ नियंत्रण और सामान्य विधि-व्यवस्था की ड्यूटी में AK-47, INSAS और SLR जैसे असॉल्ट हथियारों के इस्तेमाल पर रोक लगाने का निर्देश जारी किया है।

    सीवान में बिहार बंद और छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई के बीच एक जवान के AK-47 से फायरिंग करने का वीडियो सामने आया था। इस घटना में तीन छात्रों के घायल होने की जानकारी सामने आई। घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए और प्रदर्शनकारियों के बीच इस तरह के घातक हथियार के इस्तेमाल पर जवाब मांगा।

    मामले के सामने आने के बाद संबंधित पुलिस जवान को निलंबित किया गया। हालांकि विपक्ष का कहना है कि केवल एक जवान के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं है और फायरिंग के आदेश तथा पूरी कार्रवाई की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। घटना को लेकर अलग-अलग दावे भी सामने आए हैं, इसलिए पूरे घटनाक्रम की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    तेजस्वी यादव ने सीवान की घटना को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि छात्रों के आंदोलन के दौरान AK-47 से फायरिंग का आदेश किस स्तर से दिया गया। उन्होंने मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है। इसी मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय जनता दल ने 19 अगस्त को पटना में पार्टी कार्यालय से राजभवन या लोक भवन तक मार्च निकालने का निर्णय लिया है।

    प्रस्तावित मार्च में पार्टी के विधायक, विधान परिषद सदस्य और कार्यकर्ताओं के शामिल होने की बात कही गई है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में होने वाले इस मार्च के जरिए विपक्ष सीवान फायरिंग मामले में जवाबदेही तय करने और पुलिस कार्रवाई की जांच की मांग उठाएगा।

    इसी बीच बिहार पुलिस मुख्यालय के नए निर्देश को महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। निर्देश के अनुसार सामान्य कानून-व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण की ड्यूटी के दौरान AK-47, INSAS और SLR जैसे असॉल्ट हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य भीड़ नियंत्रण के दौरान बल प्रयोग को लेकर स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

    पुलिस मुख्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन हथियारों का इस्तेमाल पूरी तरह समाप्त नहीं किया गया है। उग्रवाद, आतंकवाद या बड़े अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियानों जैसी परिस्थितियों में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि सामान्य प्रदर्शन, भीड़ नियंत्रण या कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में इन हथियारों के प्रयोग की अनुमति नहीं होगी।

    विशेष परिस्थिति में ऐसे हथियारों को साथ रखना जरूरी होने पर भी भीड़ नियंत्रण के दौरान इनके इस्तेमाल पर रोक लागू रहेगी। जिला स्तर पर पुलिस अधिकारियों और जवानों को नए निर्देशों की जानकारी देने तथा उनके पालन को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी तय की गई है।

    सीवान की घटना के बाद अब बिहार में पुलिस की भीड़ नियंत्रण नीति और प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहा है, जबकि पुलिस प्रशासन ने असॉल्ट हथियारों के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

    अब 19 अगस्त को प्रस्तावित तेजस्वी यादव के राजभवन मार्च पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर रहेगी। सीवान की घटना के बाद लिया गया हथियार संबंधी निर्णय आने वाले समय में बिहार में कानून-व्यवस्था और विरोध प्रदर्शनों से निपटने की रणनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • JPSC-JSSC विवाद में झारखंड पुलिस की कार्रवाई, विधानसभा घेराव के बाद करीब 600 प्रदर्शनकारियों पर FIR दर्ज

    JPSC-JSSC विवाद में झारखंड पुलिस की कार्रवाई, विधानसभा घेराव के बाद करीब 600 प्रदर्शनकारियों पर FIR दर्ज

    नई दिल्ली । झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन विधानसभा घेराव के बाद और तेज हो गया है। 10 अगस्त को रांची में विधानसभा की ओर मार्च के दौरान हुए हंगामे के बाद पुलिस ने करीब 600 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इनमें लगभग 100 लोग नामजद हैं, जबकि करीब 500 अज्ञात प्रदर्शनकारियों को आरोपी बनाया गया है।

    छात्र संगठन लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए आंदोलन कर रहे हैं। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर विधानसभा घेराव के लिए आगे बढ़े थे। प्रदर्शनकारियों को विधानसभा की ओर जाने से रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी।

    स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस, वाटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। पुलिस की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने पथराव किया और स्थिति को हिंसक बनाने की कोशिश की। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

    हंगामे के बाद दर्ज की गई प्राथमिकी में नामजद लोगों के अलावा बड़ी संख्या में अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस अब उपलब्ध CCTV फुटेज और मौके पर बनाए गए वीडियो के आधार पर प्रदर्शन में कथित तौर पर हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों की पहचान करने में जुटी है।

    पुलिस की जांच का मुख्य आधार घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरे और उपलब्ध वीडियो फुटेज हैं। अधिकारियों की ओर से कथित तौर पर हिंसा में शामिल लोगों की पहचान होने के बाद उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति की भूमिका को अंतिम रूप से तय नहीं किया जा सकता।

    छात्र संगठनों की प्रमुख मांग भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराना है। प्रदर्शनकारी विवादित परीक्षाओं की समीक्षा या उन्हें रद्द करने, कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और पूरे मामले की केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग कर रहे हैं।

    आंदोलन कई सप्ताह से जारी है और विधानसभा घेराव के बाद सरकार तथा प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के बीच विवाद और बढ़ गया है। छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि अभ्यर्थियों के भविष्य पर किसी प्रकार का असर न पड़े।

    FIR दर्ज होने के बावजूद छात्र आंदोलन के पूरी तरह समाप्त होने के संकेत नहीं हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रदर्शनकारी 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव की तैयारी कर रहे हैं। प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए रांची प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की तैयारी की है।

    मुख्यमंत्री आवास के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है। प्रशासन के सामने अब एक ओर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर भर्ती परीक्षाओं से जुड़े छात्रों के आरोपों और मांगों को लेकर समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

    JPSC और JSSC से जुड़ा विवाद अब परीक्षा संबंधी शिकायतों से आगे बढ़कर पुलिस कार्रवाई और बड़े छात्र आंदोलन का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में प्रस्तावित प्रदर्शन और जांच की कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि सरकार और आंदोलनकारी अभ्यर्थियों के बीच गतिरोध किस दिशा में जाता है।

  • संसद परिसर में विपक्षी सांसदों का अनोखा विरोध, पवन खेड़ा के नेतृत्व में सरकार से सदन में जवाब मांगा

    संसद परिसर में विपक्षी सांसदों का अनोखा विरोध, पवन खेड़ा के नेतृत्व में सरकार से सदन में जवाब मांगा

    नई दिल्ली । संसद का मॉनसून सत्र गुरुवार को दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के साथ समाप्त हो गया। सत्र के अंतिम दिन भी विपक्ष और सरकार के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर राजनीतिक टकराव देखने को मिला। कार्यवाही समाप्त होने से पहले विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

    कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने एक खिलौना बंदर को प्रदर्शन का हिस्सा बनाया। इस दौरान सांसदों ने नारे लगाते हुए सरकार पर सदन के भीतर विपक्ष के सवालों का जवाब नहीं देने का आरोप लगाया। प्रदर्शन के दौरान 56 इंच का छोटा बंदर, जल्दी आओ सदन के अंदर जैसे नारे लगाए गए।

    विपक्षी सांसदों का यह प्रदर्शन संसद के मॉनसून सत्र में लगातार बने रहे राजनीतिक तनाव के बीच हुआ। विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार से चर्चा और जवाब की मांग करता रहा, जबकि सदन की कार्यवाही कई मौकों पर व्यवधान के कारण प्रभावित हुई।

    निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने सत्र के समापन के बाद सरकार पर विपक्ष और जनता से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों पर चर्चा नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से बड़ी-बड़ी बातें की गईं, लेकिन छात्रों के मुद्दों, चंदे से जुड़े सवालों और लोगों की आस्था से जुड़े विषयों पर सदन में अपेक्षित चर्चा नहीं हुई।

    पप्पू यादव ने बच्चों से जुड़े मामलों में लाठी और गोली चलने के आरोपों का भी उल्लेख किया और कहा कि सरकार को इन मुद्दों पर जवाब देना चाहिए था। उनके अनुसार, संसद में चर्चा की जिम्मेदारी सरकार की है और विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना तथा जवाब मांगना है।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार चर्चा से बचती रही। विपक्ष की ओर से लगातार मुद्दे उठाए जाने के बावजूद सदन में उन पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार से सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार है और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उनका जवाब दे।

    राजद सांसद मनोज झा ने भी संसद की कार्यवाही में बार-बार हो रहे व्यवधान को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन घटनाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनकी जिम्मेदारी किसकी थी।

    मनोज झा ने पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर भी जवाबदेही का सवाल उठाया। उनका कहना था कि लोकतंत्र में किसी घटना की जिम्मेदारी तय किए बिना व्यवस्था का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने इस मुद्दे को सीधा और स्पष्ट सवाल बताते हुए सरकार से जवाब की अपेक्षा जताई।

    मॉनसून सत्र के अंतिम दिन लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही समय बाद स्थगित हो गई, जबकि राज्यसभा की कार्यवाही भी बाद में अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। इसके साथ ही संसद का यह सत्र समाप्त हो गया।

    सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए। विपक्ष ने जहां विभिन्न मामलों पर तत्काल चर्चा और सरकार की जवाबदेही की मांग की, वहीं सरकार की ओर से भी विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने के आरोप लगाए गए।

    अंतिम दिन संसद परिसर में हुआ खिलौना बंदर वाला प्रदर्शन विपक्ष की सरकार के खिलाफ राजनीतिक रणनीति का एक प्रतीकात्मक हिस्सा रहा। प्रदर्शन के जरिए विपक्ष ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार को सदन के भीतर उठाए गए सवालों का जवाब देना चाहिए और महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा से बचना नहीं चाहिए।

  • देवेंद्र नाथ महतो ने अस्पताल से मांगी छुट्टी, जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा मुद्दे पर आंदोलन स्थल लौटने की जताई इच्छा

    देवेंद्र नाथ महतो ने अस्पताल से मांगी छुट्टी, जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा मुद्दे पर आंदोलन स्थल लौटने की जताई इच्छा


    नई दिल्ली । झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अस्पताल से छुट्टी देने की मांग की है। अनशन के 12वें दिन उन्होंने सिविल सर्जन को पत्र लिखकर अस्पताल से डिस्चार्ज करने का आग्रह किया है। महतो का कहना है कि वह इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन उनका मन लगातार आंदोलन स्थल पर लगा हुआ है।

    देवेंद्र नाथ महतो कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर अनशन कर रहे हैं। उनका आंदोलन झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया, कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े सवालों को लेकर चल रहा है। वह सरकार से इन मुद्दों पर स्पष्ट जवाब और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनके साथ बड़ी संख्या में छात्र और युवा भी आंदोलन में शामिल हैं।

    10 अगस्त को विधानसभा मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई में महतो को चोट लगी थी। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। तब से उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। दूसरी ओर, उनके साथी प्रदर्शन स्थल पर आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं और अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।

    अस्पताल से छुट्टी की मांग करते हुए लिखे पत्र में महतो ने अपने साथियों से दूर रहने को लेकर परेशानी जताई है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में उनके शरीर का इलाज हो रहा है, लेकिन उनका मन आंदोलन स्थल पर है। उनके मुताबिक, उनके साथी लगातार अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और ऐसे समय में उनका अस्पताल में रहना उन्हें भीतर से परेशान कर रहा है।

    महतो ने चिकित्सकों से आग्रह किया है कि उन्हें अस्पताल से जाने की अनुमति दी जाए, ताकि वह जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे प्रदर्शन में वापस पहुंच सकें। उन्होंने अपने पत्र में यह भी कहा है कि यदि उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिलती है, तो वह डॉक्टरों की सलाह का पालन करते हुए उपचार जारी रखेंगे।

    छात्र नेता ने अपने आंदोलन को केवल व्यक्तिगत संघर्ष नहीं बताया है। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में छात्र और युवा परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर उनके साथ खड़े हैं। ऐसे में वह खुद को आंदोलन से जुड़े छात्रों के प्रति जिम्मेदार मानते हैं। उनका मानना है कि जब छात्र अपनी मांगों के लिए लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, तब उनका उनसे अलग रहना उचित नहीं लग रहा।

    जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच यह आंदोलन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। आंदोलनकारी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित गड़बड़ियों को लेकर सरकार से जवाब की मांग कर रहे हैं। इन मांगों को लेकर प्रदर्शन का सिलसिला जारी है।

    फिलहाल देवेंद्र नाथ महतो सदर अस्पताल में भर्ती हैं और उनका अनशन भी जारी है। अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों की ओर से उनकी स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाना है। यदि उन्हें छुट्टी मिलती है, तो वह अपने साथियों के बीच प्रदर्शन स्थल पर लौट सकते हैं। इस बीच आंदोलनकारी छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं।

  • मॉनसून सत्र का समापन, हंगामे के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित संसद; लोकसभा एक मिनट, राज्यसभा एक घंटे चली

    मॉनसून सत्र का समापन, हंगामे के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित संसद; लोकसभा एक मिनट, राज्यसभा एक घंटे चली


    नई दिल्ली । 
    संसद का मॉनसून सत्र गुरुवार को हंगामे और नारेबाजी के बीच समाप्त हो गया। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के साथ ही सत्र का औपचारिक समापन हो गया। सत्र के आखिरी दिन दोनों सदनों में राजनीतिक गतिरोध का असर साफ दिखाई दिया।

    लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होने के कुछ ही देर बाद भारी हंगामे के कारण अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। अंतिम दिन सदन की कार्यवाही लगभग एक मिनट ही चल सकी। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित कई प्रमुख नेता सदन में मौजूद रहे।

    राज्यसभा में हालांकि लोकसभा की तुलना में अधिक समय तक कार्यवाही चली। उच्च सदन में करीब एक घंटे तक विभिन्न मुद्दों पर चर्चा और विधायी कामकाज हुआ। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने खान और खनिज संबंधी संशोधन विधेयक, 2026 को विचार और पारित करने के लिए सदन में पेश किया।

    विधेयक पर चर्चा के बाद राज्यसभा ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। इसके बाद सदन में हंगामा बढ़ गया और कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। इसी के साथ मॉनसून सत्र का समापन हो गया।

    सत्र के अंतिम दिन राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक कार्यक्रम के बाद कथित तौर पर किए गए शुद्धिकरण को लेकर गंभीर आपत्ति जताई। खड़गे ने कहा कि वह इस विषय को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहते, लेकिन उन्हें अपने साथ अछूत जैसा व्यवहार किए जाने और अपमानित महसूस होने की बात कही।

    खड़गे ने कहा कि वह लंबे समय से संसद के सदस्य हैं और अनुसूचित जाति से आते हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में किसी के सामने मदद या सुरक्षा के लिए इस तरह की गुहार नहीं लगाई और उनमें परिस्थितियों का सामना करने की ताकत है।

    खड़गे के आरोपों पर राज्यसभा में सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने जवाब दिया। नड्डा ने कहा कि यदि ऐसी घटना हुई है तो यह बेहद दुखद है और भारतीय जनता पार्टी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। उन्होंने मामले की जांच कराने का भरोसा भी दिया।

    नड्डा ने कहा कि इस तरह की गतिविधि पूरे देश के लिए अफसोस की बात है और पार्टी इसकी निंदा करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित घटना की जांच की जाएगी और पार्टी स्तर पर भी मामले को देखा जाएगा।

    मॉनसून सत्र के अंतिम दिन सदनों की कार्यवाही का सीमित रहना विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच जारी टकराव को भी दर्शाता है। लोकसभा में कार्यवाही शुरू होते ही स्थगन और राज्यसभा में विधायी कामकाज के बाद हंगामे के कारण कार्यवाही रोकना सत्र के अंतिम दिन की प्रमुख घटनाएं रहीं।

    दोनों सदनों के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के साथ ही संसद का मॉनसून सत्र समाप्त हो गया। अंतिम दिन हुए घटनाक्रम में विधायी कामकाज के साथ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी प्रमुखता से सामने आए।