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  • जम्मू-कश्मीर के रामबन में राष्ट्रीय राजमार्ग पर ई-रिक्शा तिरंगा रैली ने हर घर तिरंगा अभियान को जनभागीदारी का रूप दिया

    जम्मू-कश्मीर के रामबन में राष्ट्रीय राजमार्ग पर ई-रिक्शा तिरंगा रैली ने हर घर तिरंगा अभियान को जनभागीदारी का रूप दिया

    नई दिल्ली ।जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में स्वतंत्रता दिवस से पहले हर घर तिरंगा अभियान के तहत आयोजित ई-रिक्शा तिरंगा रैली ने राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और नागरिक भागीदारी का संदेश दिया। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर निकली इस रैली में करीब 300 ई-रिक्शा और ऑटो चालकों ने हिस्सा लिया। रैली के दौरान वाहनों पर तिरंगा लहराता नजर आया और प्रतिभागियों ने देशभक्ति के नारे लगाए।

    रैली का उद्देश्य हर घर तिरंगा अभियान को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ना और नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के प्रति जागरूक करना रहा। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई कि वे अपने घरों पर तिरंगा लगाएं और राष्ट्रीय ध्वज को पूरी गरिमा एवं सम्मान के साथ प्रदर्शित करें।

    अतिरिक्त उपायुक्त वरुणजीत सिंह चरक के नेतृत्व में आयोजित यह रैली कैफेटेरिया मोड़ से शुरू हुई। इसके बाद ई-रिक्शा और ऑटो का काफिला राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-44 के साथ आगे बढ़ते हुए करोल क्षेत्र से गुजरा और जिला कार्यालय पहुंचकर इसका समापन हुआ। पूरे मार्ग पर तिरंगे से सजे वाहनों की मौजूदगी ने अभियान को अलग पहचान दी।

    रैली में प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों ने भी उत्साह के साथ भाग लिया। एआरटीओ वरुण भासिन, डिप्टी एसपी कुलदीप राज, मुख्यालय तहसीलदार रीजूता महाजन और नगर निकाय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुरदर्शन जमवाल समेत कई अधिकारी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

    अतिरिक्त उपायुक्त वरुणजीत सिंह चरक ने कहा कि जिले में हर घर तिरंगा अभियान के तहत कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने ई-रिक्शा और ऑटो रैली को जनभागीदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण बताते हुए लोगों से अपने घरों पर तिरंगा लगाने का आग्रह किया।

    उन्होंने कहा कि अभियान तभी प्रभावी रूप ले सकता है, जब इसमें समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित हो। प्रशासन का जोर इस बात पर रहा कि राष्ट्रीय ध्वज केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित न रहे, बल्कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रत्येक परिवार तक सम्मानपूर्वक पहुंचे।

    रैली में शामिल करीब 300 ई-रिक्शा चालकों की भागीदारी ने स्थानीय परिवहन समुदाय को भी अभियान से जोड़ा। तिरंगा लेकर आगे बढ़ते वाहनों और देशभक्ति के नारों से राष्ट्रीय राजमार्ग का वातावरण उत्साहपूर्ण नजर आया। स्थानीय स्तर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि राष्ट्रीय पर्व से जुड़े अभियान में समाज के विभिन्न वर्ग अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

    स्वतंत्रता दिवस से पहले रामबन जिले में कई स्तरों पर तिरंगा रैलियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ई-रिक्शा तिरंगा रैली इसी क्रम का हिस्सा रही, जिसमें प्रशासन और आम नागरिकों की संयुक्त भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान, देश के प्रति नागरिक जिम्मेदारी और स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

  • मॉनसून सत्र के आखिरी दिन गृहमंत्री अमित शाह के बयान पर विपक्ष हमलावर, पत्र लिखने के समय को लेकर उठाए सवाल

    मॉनसून सत्र के आखिरी दिन गृहमंत्री अमित शाह के बयान पर विपक्ष हमलावर, पत्र लिखने के समय को लेकर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । मॉनसून सत्र के आखिरी दिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के सदन में बयान को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी खींचतान तेज हो गई है। विपक्ष लगातार मांग करता रहा है कि गृहमंत्री सदन में आकर संबंधित मुद्दों पर अपना पक्ष रखें। इसी बीच अमित शाह की ओर से चर्चा के लिए तैयार होने की बात सामने आने के बाद भी विपक्ष का रुख नरम नहीं हुआ है।

    समाजवादी पार्टी के नेताओं ने गृहमंत्री के रुख और सदन में बयान देने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि विपक्ष लगातार अमित शाह के सदन में आने की मांग करता रहा है, लेकिन अब तक वह सदन में नहीं आए। उन्होंने कहा कि सत्र का अंतिम दिन है और सदन की कार्यवाही भी बार-बार स्थगित हो रही है।

    अवधेश प्रसाद ने सवाल उठाया कि यदि गृहमंत्री को बयान देना था तो उन्हें सदन में आने में क्या परेशानी थी। उनके मुताबिक विपक्ष की मांग लगातार बनी रही, लेकिन सरकार की ओर से इस दिशा में अपेक्षित पहल नहीं हुई।

    सपा सांसद राम गोपाल यादव ने भी गृहमंत्री के बयान को लेकर अपनाई गई प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री बयान देने के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष से पहले सवाल लिखित रूप में देने को कहा गया है। उनके अनुसार संसद में सामान्य परंपरा यह रही है कि मंत्री सदन में बयान देते हैं और इसके बाद सांसद उनसे संबंधित विषयों पर स्पष्टीकरण मांगते हैं।

    कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने भी गृहमंत्री के पत्र लिखने के समय पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब मॉनसून सत्र समाप्त होने की स्थिति में पहुंच चुका है, तब 17वें दिन पत्र लिखे जाने का क्या उद्देश्य है। उन्होंने सवाल किया कि क्या गृहमंत्री सदन में आने के बजाय घर से ही जवाब देना चाहते हैं।

    भगत ने कहा कि 19 दिन के सत्र में 17वें दिन पत्र लिखना अपने आप में सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की प्रक्रिया के जरिए जनता और विपक्ष को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि इन आरोपों पर सत्ता पक्ष की ओर से सदन में आगे क्या रुख अपनाया जाता है, यह कार्यवाही के दौरान स्पष्ट होगा।

    सपा नेता हरेंद्र सिंह मलिक ने इस दौरान राम मंदिर से जुड़े चंदा और चोरी के आरोपों का मुद्दा उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मामले को लेकर प्रदर्शन करेगी और इसे लोगों की आस्था तथा भावनाओं से जुड़ा विषय बताया।

    मॉनसून सत्र के अंतिम दिन अब सभी की नजर सदन की कार्यवाही पर है। विपक्ष गृहमंत्री के बयान और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर लगातार दबाव बना रहा है। दूसरी ओर गृहमंत्री की ओर से चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही गई है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आखिरी दिन सदन में दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है या राजनीतिक गतिरोध आगे भी जारी रहता है।

  • ट्रेन स्वच्छता पर नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट उजागर, टॉयलेट की बदबू और रखरखाव में कमियां आईं सामने।

    ट्रेन स्वच्छता पर नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट उजागर, टॉयलेट की बदबू और रखरखाव में कमियां आईं सामने।

    ई दिल्ली । भारतीय रेलवे की सफाई व्यवस्था, डिब्बों के रखरखाव और बायो-टॉयलेट प्रबंधन पर नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक अर्थात कैग की नवीनतम रिपोर्ट में गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। संसद में प्रस्तुत की गई इस रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेन यात्रा के दौरान मिलने वाली ऑन-बोर्ड स्वच्छता सेवाओं से लगभग पचास प्रतिशत यात्री असंतुष्ट हैं। लंबी दूरी का सफर तय करने वाले यात्रियों को टॉयलेट में जलभराव, बदबू और सफाई कर्मियों की अनुपस्थिति जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

    रिपोर्ट में इस बात का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि रेलवे द्वारा प्रतिवर्ष स्वच्छता और रखरखाव के लिए पर्याप्त बजटीय आवंटन किया जाता है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन और वित्तीय अनुशासन में कई खामियां देखी गई हैं। ऑडिट टीम को रेलवे प्रशासन द्वारा ऐसा कोई स्पष्ट और पारदर्शी लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं कराया जा सका, जिससे यह सटीक जानकारी मिल सके कि आवंटित बजट का कितना हिस्सा वास्तव में सफाई कार्यों पर व्यय किया गया।

    वित्तीय प्रक्रियाओं और ठेकेदारों के नियमन को लेकर भी रिपोर्ट में लापरवाही की बात कही गई है। नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदारों पर लगाए गए जुर्माने या राशि कटौती का कोई केंद्रीय डेटाबेस या पारदर्शी रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया जा सका। हालांकि रेलवे प्रशासन ने ठेकेदारों पर दंडात्मक कार्रवाई का दावा किया, किंतु ऑडिट प्रक्रिया के दौरान इस संबंध में कोई ठोस साक्ष्य या वित्तीय विवरण जमा नहीं कराए जा सके।

    सर्वेक्षण के आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट में दर्शाया गया है कि चालीस प्रतिशत से अधिक रेल यात्रियों ने ट्रेनों के टॉयलेट में बदबू और पानी के भराव की समस्या पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। इसके अतिरिक्त, पचास प्रतिशत से अधिक यात्रियों ने ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग सेवाओं के सुचारू रूप से कार्य न करने की शिकायत की है। ट्रेन डिब्बों की अत्याधुनिक और स्वचालित धुलाई के लिए स्वीकृत परियोजनाओं की गति भी अत्यंत धीमी पाई गई है।

    कैग की इस रिपोर्ट में झांसी और ग्वालियर जैसे प्रमुख रेल मंडलों का भी संदर्भ देखने को मिलता है, जहां ऑटोमेटिक कोच वाशिंग प्लांट स्थापित करने के लिए बजट स्वीकृत होने के पश्चात भी परियोजनाएं लंबित पाई गईं। मध्य प्रदेश सहित देश भर के रेल यात्रियों की सुविधाओं और स्वास्थ्य सुरक्षा को देखते हुए यह रिपोर्ट अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कैग ने रेल मंत्रालय को वित्तीय पारदर्शिता और जमीनी क्रियान्वयन को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं।

    विमानन और रेल सेवाओं के तुलनात्मक अध्ययन में यात्रियों की मूल सुविधाओं का ध्यान रखना सर्वोपरि माना गया है। कैग की इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि रेलवे प्रशासन ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने, ऑन-बोर्ड सफाई कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और बायो-टॉयलेट के नियमित रख-रखाव के लिए नई कार्ययोजना लागू करेगा ताकि यात्रा के अनुभव में सुधार किया जा सके।

  • एयर इंडिया फुकेट-दिल्ली उड़ान टर्बुलेंस मामले में बड़ा खुलासा, पायलट के अनिद्रा और नशीली दवा लेने की बात आई सामने।

    एयर इंडिया फुकेट-दिल्ली उड़ान टर्बुलेंस मामले में बड़ा खुलासा, पायलट के अनिद्रा और नशीली दवा लेने की बात आई सामने।

    नई दिल्ली । थाईलैंड के फुकेट से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली आ रहे एयर इंडिया के एक यात्री विमान में हुई गंभीर टर्बुलेंस की घटना के बाद जारी जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। हाल ही में सामने आई आंतरिक सुरक्षा रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित उड़ान के मुख्य पायलट लंबे समय से अनिद्रा की समस्या से ग्रस्त थे और इसके निवारण के लिए नींद की गोलियों का सेवन करते थे। इस घटना के दौरान विमान हवा में अचानक लगभग 300 फीट नीचे गिर गया था, जिससे कई यात्री और क्रू सदस्य घायल हो गए थे।

    उड्डयन दुर्घटना जांच ब्यूरो अर्थात एएआईबी द्वारा इस पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है। प्रारंभिक पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि उड़ान भरने से पूर्व और उड़ान के दौरान सुरक्षा मानकों का उल्लंघन किया गया था। जांच एजेंसियों द्वारा पायलट के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति का परीक्षण किया जा रहा है, जिसमें नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़े पहलुओं की भी जांच शामिल है। घटना के समय विमान में 137 यात्री और चालक दल के सदस्य सवार थे।

    जांच अधिकारियों के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए संबंधित पायलट ने स्वीकार किया है कि वह पारिवारिक चिकित्सक की सलाह पर दवाइयों का सेवन कर रहा था। पायलट का तर्क था कि उड़ानों के अनिश्चित समय और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के कारण उसकी नींद का चक्र प्रभावित हुआ था। हालांकि, उड्डयन नियमों के तहत किसी भी वाणिज्यिक उड़ान को संचालित करने से पहले पायलट का पूर्ण रूप से शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना अनिवार्य है।

    रिपोर्ट में यह गंभीर तथ्य भी सामने आया है कि जिस समय विमान टर्बुलेंस की चपेट में आया, उस दौरान मुख्य पायलट कॉकपिट में अपनी निर्धारित सीट पर मौजूद नहीं था। विमान का नियंत्रण सह-पायलट के हाथों में था। इसके अतिरिक्त, उड़ान भरने से पूर्व फुकेट में चालक दल के सदस्यों के साथ हुई गतिविधियों और बैठकों को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा की जा रही है।

    अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के निर्धारित मानकों के तहत इस घटना की जांच की जा रही है। विमान निर्माता कंपनी एयरबस और फ्रांस का नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो भी तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं। एएआईबी ने आश्वासन दिया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी। मध्य प्रदेश सहित देश भर के विमान यात्रियों के बीच इस घटना के बाद उड्डयन सुरक्षा को लेकर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।

    विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि उड़ानों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता यात्रियों की जान जोखिम में डाल सकता है। इस जांच के निष्कर्षों के आधार पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय द्वारा एयरलाइंस कंपनियों और उनके क्रू मेंबर्स के लिए कड़े दिशानिर्देश जारी किए जाने की संभावना है। फिलहाल मामले से जुड़ी सभी तकनीकी और मेडिकल जांच रिपोर्टों की अंतिम समीक्षा की जा रही है।

  • पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई, 36 घंटे चले सैन्य ऑपरेशन में 62 आतंकवादी ढेर।

    पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई, 36 घंटे चले सैन्य ऑपरेशन में 62 आतंकवादी ढेर।

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा के उत्तरी वजीरिस्तान और बन्नू जिलों में सुरक्षा बलों द्वारा संचालित खुफिया आधारित अभियानों में व्यापक सफलता प्राप्त हुई है। 36 घंटे से अधिक समय तक चले इन सैन्य ऑपरेशनों के दौरान सुरक्षा बलों ने 62 आतंकवादियों को मार गिराया है। इस दौरान चार प्रमुख कमांडरों समेत अनेक आतंकी ठिकानों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया।

    सैन्य कार्रवाई की शुरुआत मंगलवार सुबह उत्तरी वजीरिस्तान क्षेत्र से हुई, जहां संदिग्ध गतिविधियों की निरंतर निगरानी के बाद सटीक हमले किए गए। क्षेत्र में घने वृक्षों के नीचे छिपे आतंकियों की लोकेशन का पता लगाने के लिए आधुनिक क्वाडकॉप्टर तकनीक का सहारा लिया गया। इसके माध्यम से जमीनी बलों को आतंकवादियों की सटीक स्थिति की जानकारी मिली, जिसके बाद सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

    सुरक्षा बलों के अनुसार, उत्तरी वजीरिस्तान में हुए प्राथमिक ऑपरेशन में 52 आतंकवादी मारे गए, जिनमें चार मुख्य कमांडर शामिल थे। इस दौरान भागने का प्रयास कर रहे घायल आतंकियों को भी सुरक्षा बलों ने निशाना बनाया। ठिकाने से बड़ी मात्रा में आधुनिक हथियार, गोला-बारूद और अन्य सैन्य सामग्री बरामद की गई है, जिसका इस्तेमाल क्षेत्र में हिंसक घटनाओं को अंजाम देने के लिए किया जाना था।

    उत्तरी वजीरिस्तान के बाद बुधवार को बन्नू जिले में भी कई अलग-अलग स्थानों पर अभियानों की श्रृंखला शुरू की गई। बन्नू में चलाए गए ऑपरेशनों में ड्रोन तकनीक का व्यापक उपयोग किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 10 अन्य आतंकवादी मारे गए तथा 16 घायल हुए। इससे पूर्व जानी खेल क्षेत्र में एक खेल स्टेडियम के समीप चलाए गए एक अलग अभियान में भी दो आतंकी ढेर किए गए थे।

    स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बन्नू में आतंकवादियों द्वारा एक धार्मिक शैक्षणिक संस्थान अर्थात मदरसे को अपने ठिकाने के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई प्रारंभ करने से पूर्व आम नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित रूप से खाली कराया। क्षेत्र को खाली कराने के उपरांत आतंकियों के ठिकानों पर लक्षित हमले किए गए।

    अभियान के अंतिम चरण में बन्नू तथा आसपास के क्षेत्रों में सर्च और क्लीयरेंस ऑपरेशन चलाए गए ताकि किसी भी संभावित खतरे को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। मध्य प्रदेश तथा अन्य क्षेत्रों के रणनीतिक विशेषज्ञों की नजर भी पड़ोसी देश में बढ़ते आतंकवाद और सैन्य अभियानों पर टिकी हुई है। सुरक्षा अधिकारियों ने प्रतिबद्धता व्यक्त की है कि प्रांत से आतंकवाद का पूरी तरह सफाया होने तक खुफिया आधारित अभियानों का यह सिलसिला निरंतर जारी रहेगा।

  • MP: दीपके और उनके साथियों की इंदौर पुलिस में शिकायत, नाबालिगों को बरगलाने का आरोप…

    MP: दीपके और उनके साथियों की इंदौर पुलिस में शिकायत, नाबालिगों को बरगलाने का आरोप…


    इंदौर।
    अभिजीत दीपके (Abhijit Deepke) और सौरव दास (Sourav Das) समेत उनके अन्य साथियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खुद को सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर बताने वाले एक शख्स ने इंदौर पुलिस में इनकी भूमिकाओं की जांच की मांग उठाई है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party-CJP) के प्रदर्शन में नाबालिग लड़के-लड़कियों को बरगलाकर जमावड़ा कराने में इनकी कथित भूमिका साबित होती हो और पॉक्सो के तहत अपराध पाए जाएं तो FIR दर्ज किया जाना चाहिए।


    किसने दी शिकायत?

    मुंबई के निवासी फैजान अंसारी ने इंदौर पुलिस की अपराध निरोधक शाखा में दी गई अपनी शिकायत में दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP की अगुवाई में 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन में नाबालिगों की कथित मौजूदगी का दावा करते हुए अभिजीत दीपके और सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास समेत अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच करने की मांग की है।


    अभिजीत दीपके, सौरभ दास और अन्य की भूमिकाओं की हो जांच

    मुंबई के निवासी फैजान अंसारी ने शिकायत में कहा कि जांच के जरिये इस बात का पता लगाया जाना चाहिए कि अभिजीत दीपके, सौरभ दास या समूह के अन्य सदस्य नाबालिगों को प्रदर्शन में लाने में कहीं शामिल तो नहीं थे। क्या ये लोग नाबालिगों को भड़काने में शामिल तो नहीं थे।


    इन सुबूतों को सुरक्षित किए जाने की भी मांग

    फैजान अंसारी ने इंदौर पुलिस क्राइम ब्रांच से विरोध प्रदर्शन के फोटो-वीडियो, मीडिया इंटरव्यू, सार्वजनिक बयान, प्रदर्शन स्थल और इसके आस-पास के सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया सामग्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को संरक्षित करके उनकी जांच का अनुरोध किया है।


    जांच में पॉक्सो का अपराध मिले हो तो करें FIR

    शिकायत में कहा गया है कि यदि जांच में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम के तहत किसी भी प्रकार का संज्ञेय अपराध सामने आता है तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।


    इंदौर पुलिस ने भी शुरू की जांच

    अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश दंडोतिया ने बताया कि हमें अंसारी की शिकायत मिली है जो खुद को सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर बता रहे हैं। शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है। जांच में मिले तथ्यों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


    दिल्ली पुलिस की भी भूमिका हो जाएगी अहम

    गौरतलब है कि कथित नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी की अगुवाई में विरोध प्रदर्शन हुआ था। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने संसद तक मार्च की कोशिश थी तब पुलिस के साथ उनकी झड़पें हुई थीं। इसमें कई आपत्तिजनक वीडियो वायरल हुए थे। ऐसे में इस शिकायत के सामने आने से पूरे प्रकरण में नया मोड़ आ गया है। यदि इंदौर पुलिस उक्त शिकायत पर आगे बढ़ती है तब जांच में दिल्ली पुलिस की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाएगी।

  • वायुसेना के बेड़े में पुराने कार्गो विमानों की जगह लेंगे 60 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट….₹1 लाख करोड़ का टेंडर जारी

    वायुसेना के बेड़े में पुराने कार्गो विमानों की जगह लेंगे 60 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट….₹1 लाख करोड़ का टेंडर जारी


    नई दिल्ली ।
    भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के पुराने हो रहे कार्गो विमानों (Cargo planes) के बेड़े को बदलने की तैयारी तेज हो गई है। रक्षा मंत्रालय ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये की लागत से 60 मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (Multirole Transport Aircraft) खरीदने के लिए टेंडर जारी किया है। इस परियोजना में भारतीय कंपनियों को प्रमुख भूमिका दी गई है। HAL, टाटा और महिंद्रा इस दौड़ में शामिल हैं।


    किन भारतीय कंपनियों के साथ कौन-सी विदेशी कंपनियां मैदान में हैं?

    महिंद्रा डिफेंस ने ब्राजील की एम्ब्राएर के साथ साझेदारी की है और उसके C-390 ट्रांसपोर्ट विमान की पेशकश की जाएगी। वहीं, टाटा ने लॉकहीड मार्टिन के साथ हाथ मिलाया है और C-130 विमान की पेशकश करेगा। C-130 पहले से ही भारतीय वायुसेना में विशेष अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।


    कितने विमान भारत में बनाए जाएंगे?

    इस कार्यक्रम के तहत करीब 20 प्रतिशत विमान सीधे तैयार स्थिति में भारतीय वायुसेना को मिलेंगे। बाकी विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इनमें 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री इस्तेमाल करने का लक्ष्य रखा गया है। विमानों का निर्माण भारतीय कंपनियों और मूल विमान निर्माता कंपनियों के बीच संयुक्त उपक्रमों के जरिए किया जाएगा। इस परियोजना में HAL की भी भूमिका रहेगी।


    वायुसेना के पास अभी कितने C-130J विमान हैं?

    भारतीय वायुसेना के बेड़े में फिलहाल 12 C-130J Super Hercules विमान हैं। इसके अलावा, वायुसेना Airbus के साथ C-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम पर भी काम कर रही है। करीब 70 C-295 विमान वायुसेना में शामिल किए जाने हैं, जिनमें अधिकांश का निर्माण भारत में किया जाएगा।


    क्या वायुसेना के आधुनिकीकरण का हिस्सा है यह योजना?

    मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की खरीद वायुसेना के व्यापक आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है। वायुसेना ने 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए भी टेंडर जारी किया है। इसके अलावा, पुराने हॉक ट्रेनर विमानों को बदलने और पायलट प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाने के लिए 100 से अधिक ट्रेनर विमानों को शामिल करने पर भी विचार किया जा रहा है।


    क्या इन विमानों से हवा में ईंधन भरने का काम भी लिया जाएगा?

    मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल केवल सैनिकों और उपकरणों की तेज आवाजाही तक सीमित नहीं रहेगा। भारतीय वायुसेना इन विमानों का इस्तेमाल हवाई ईंधन भरने वाले टैंकर के रूप में भी कर सकती है। इसके अलावा, इनसे उपकरणों और सैनिकों को तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

  • मॉनसून सत्र में शाह पर संजय राउत का हमला, बोले बयान से मत भागिए, भविष्य में इस्तीफा देना होगा

    मॉनसून सत्र में शाह पर संजय राउत का हमला, बोले बयान से मत भागिए, भविष्य में इस्तीफा देना होगा

    नई दिल्ली । मॉनसून सत्र के दौरान संसद में छात्रों के प्रदर्शन पर हुई कार्रवाई और अयोध्या में राम मंदिर के चंदे से जुड़े आरोपों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। विपक्ष इन दोनों मुद्दों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सदन में आने और स्पष्ट बयान देने की मांग कर रहा है। इसी बीच शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत ने शाह पर तीखा हमला बोला है।

    संजय राउत ने कहा कि विपक्ष पिछले कई दिनों से दो प्रमुख मुद्दों को लेकर सदन में चर्चा की मांग कर रहा है। उनके अनुसार पहला मामला राम मंदिर के चंदे से जुड़ा है, जबकि दूसरा छात्रों के खिलाफ कथित तौर पर पैलेट गन और हिंसा के इस्तेमाल के निर्देश से संबंधित है। राउत का कहना है कि इन दोनों विषयों पर संसद में गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

    राउत ने गृह मंत्री अमित शाह के संभावित बयान को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बयान से बचने की कोशिश नहीं होनी चाहिए और सवालों का सामना सदन में किया जाना चाहिए। उन्होंने भविष्य को लेकर दावा करते हुए कहा कि आने वाले समय में शाह को इस्तीफा देना होगा। हालांकि, यह राउत का राजनीतिक बयान है और इस पर सरकार या गृह मंत्री की ओर से संबंधित प्रतिक्रिया का उल्लेख सामने नहीं आया है।

    विपक्षी दलों का कहना है कि मॉनसून सत्र की शुरुआत से ही उनकी मांग स्पष्ट रही है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि विपक्ष केवल एक स्पष्ट बयान चाहता है। उनका सवाल है कि छात्रों के खिलाफ पैलेट गोली और हिंसा का निर्देश किस स्तर से दिया गया था। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि गृह मंत्री ने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया था, तो फिर उनके मंत्रालय में यह आदेश किसने दिया।

    महुआ मोइत्रा ने राम मंदिर के चंदे से जुड़े मामले को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार इस विषय पर चर्चा नहीं कर रही है। उनका तर्क था कि विपक्ष गृह मंत्री को सदन में आने से नहीं रोक रहा, बल्कि वह खुद सदन में आकर जवाब देने की मांग कर रहा है।

    कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी गृह मंत्री के सदन में आने की मांग की। उन्होंने कहा कि छात्रों पर हुई कार्रवाई और राम मंदिर के चंदे से जुड़े सवालों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। विपक्ष का कहना है कि इन मुद्दों पर चर्चा और स्पष्टीकरण संसद के भीतर होना जरूरी है।

    मॉनसून सत्र में इन मुद्दों को लेकर लगातार राजनीतिक बयानबाजी और विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। विपक्ष जहां गृह मंत्री के जवाब को लेकर दबाव बना रहा है, वहीं इन मांगों के कारण सदन की कार्यवाही भी राजनीतिक तनाव के बीच आगे बढ़ रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इन आरोपों और विपक्ष की मांगों पर सदन में किस तरह प्रतिक्रिया देती है।

  • अखिलेश यादव ने अमित शाह के संसद में जवाब देने के बयान पर साधा निशाना, कहा देश भाषण सुनने के मूड में नहीं

    अखिलेश यादव ने अमित शाह के संसद में जवाब देने के बयान पर साधा निशाना, कहा देश भाषण सुनने के मूड में नहीं


    नई दिल्ली ।
    समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संसद में विपक्ष के सवालों का जवाब देने संबंधी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। बुधवार को सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार की ओर से जवाब देने के लिए समय सीमा तय करना अपने आप में अलोकतांत्रिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक जवाब देने के बजाय सत्र समाप्त करने की जल्दबाजी में है।

    अमित शाह ने कहा था कि यदि विपक्ष छात्र आंदोलन से जुड़े विषय पर चर्चा के लिए तैयार होता है तो वह संसद में उठाए जाने वाले हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है और चर्चा के दौरान स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

    इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि संसद में जवाब देने के लिए सरकार द्वारा समय-सीमा तय करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की भावना के अनुरूप नहीं है। उनके अनुसार जवाब केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए नहीं दिया जाना चाहिए, बल्कि उसमें सरकार की जिम्मेदारी और जवाबदेही स्पष्ट होनी चाहिए।

    अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि सरकार जिस समय सीमा में जवाब देने की बात कर रही है, वह वास्तविक उत्तर देने के बजाय एक बयान तक सीमित रह सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी नहीं चाहती कि विपक्ष के सवालों का विस्तृत जवाब दिया जाए और वह संसद के मौजूदा सत्र को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

    समाजवादी पार्टी प्रमुख ने अपने बयान में जिम्मेदारी और जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि किसी सरकार की जवाबदेही समय की शर्त से नहीं, बल्कि उसके उत्तरदायित्व और तर्क से तय होती है। उन्होंने छात्र आंदोलन से जुड़े पूरे मामले को गंभीर बताते हुए विस्तृत जवाब की मांग दोहराई।

    दरअसल, 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष लगातार सरकार से सवाल कर रहा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने पैलेट गन और कील लगी लाठियों का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई को लेकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता सरकार से स्पष्टीकरण की मांग कर चुके हैं।

    विपक्ष की ओर से इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा जा रहा है। इसी बीच सरकार की ओर से संसद में चर्चा और जवाब देने की बात कही गई है। अमित शाह ने संकेत दिया है कि यदि विपक्ष छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार होता है तो वह सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं।

    संसद के मौजूदा मानसून सत्र की निर्धारित अवधि 13 अगस्त तक है। ऐसे में विपक्ष के सवालों और सरकार के जवाब को लेकर समय को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है। हालांकि, सदन की कार्यवाही की आवश्यकता होने पर समय सीमा बढ़ाए जाने की संभावना की भी चर्चा है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच अखिलेश यादव का बयान विपक्ष की ओर से सरकार पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है। वहीं, सरकार का कहना है कि वह छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और उसके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संसद में इस मुद्दे पर चर्चा होती है या नहीं और अमित शाह विपक्ष के आरोपों पर किस तरह जवाब देते हैं।

  • ऑपरेशन सिंदूर के बाद LoC पर बढ़ी सतर्कता, लश्कर जैश और हिज्बुल की गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद LoC पर बढ़ी सतर्कता, लश्कर जैश और हिज्बुल की गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    नई दिल्ली । भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। खुफिया इनपुट के हवाले से सामने आई जानकारी में दावा किया गया है कि नियंत्रण रेखा के पार 500 से अधिक आतंकियों के भारत में घुसपैठ के मौके का इंतजार करने की आशंका है। इस बीच पाकिस्तान की रणनीति में भी बदलाव की बात सामने आई है, जिसके तहत लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों के बीच समन्वय बढ़ाने की कोशिश किए जाने का दावा किया गया है।

    रिपोर्टों के अनुसार, इन संगठनों की गतिविधियों पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की निगरानी और नियंत्रण पहले की तुलना में अधिक बढ़ा है। पहले अलग-अलग आतंकी संगठनों के अपने कमांड ढांचे और नेतृत्व के माध्यम से गतिविधियां संचालित होने की बात कही जाती थी। अब इनके बीच तालमेल को एक केंद्रीय व्यवस्था के तहत मजबूत किए जाने का दावा किया जा रहा है।

    खुफिया अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि पाकिस्तान की ओर से आतंकी नेटवर्क को लेकर पुनर्गठन किया गया है। इसका कथित उद्देश्य अलग-अलग संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और उनकी गतिविधियों पर केंद्रीय स्तर से निगरानी बढ़ाना है। हालांकि ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी से नहीं हुई है।

    सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चिंता नियंत्रण रेखा के पार मौजूद संभावित आतंकियों की संख्या को लेकर है। रिपोर्ट में 500 से अधिक आतंकियों के घुसपैठ के अवसर की प्रतीक्षा करने की आशंका जताई गई है। ऐसे इनपुट के बाद सीमा पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ना स्वाभाविक है।

    बताया गया है कि हाल के महीनों में लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों में तेजी देखी गई है, जबकि जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन की गतिविधियों में अपेक्षाकृत कमी का आकलन किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां इसे पाकिस्तान की बदली हुई रणनीति के संदर्भ में देख रही हैं।

    रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान अब जम्मू-कश्मीर में स्थानीय स्तर पर नेटवर्क तैयार करने पर अधिक जोर दे रहा है। स्थानीय युवाओं को प्रभावित करने और आतंकी नेटवर्क से जोड़ने की कोशिशों की आशंका सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती है। ऐसे प्रयासों का उद्देश्य सीमा पार से होने वाली गतिविधियों के साथ स्थानीय नेटवर्क को जोड़ना बताया जा रहा है।

    सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अलग-अलग आतंकी संगठनों के बीच समन्वय बढ़ता है तो सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती का स्वरूप बदल सकता है। इसी वजह से सीमा सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और आतंकवाद के लिए होने वाली भर्ती को रोकना भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

    भारत की सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिशों को लेकर सतर्क रही हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव के बीच इस तरह के इनपुट को और गंभीरता से देखा जा रहा है। हालांकि किसी भी खुफिया आकलन को अंतिम तथ्य मानने से पहले उसकी पुष्टि जरूरी होती है।

    फिलहाल 500 से अधिक आतंकियों की संभावित मौजूदगी और आतंकी संगठनों पर आईएसआई के बढ़ते नियंत्रण से जुड़े दावे सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय हैं। आने वाले दिनों में सीमा पर गतिविधियों, घुसपैठ के प्रयासों और जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क से जुड़े घटनाक्रम पर सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी महत्वपूर्ण रहेगी।