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  • वैश्विक नेताओं की शुभकामनाओं पर पीएम मोदी का आभार, भारत-मालदीव समेत कई देशों के साथ संबंध मजबूत करने की दोहराई प्रतिबद्धता

    वैश्विक नेताओं की शुभकामनाओं पर पीएम मोदी का आभार, भारत-मालदीव समेत कई देशों के साथ संबंध मजबूत करने की दोहराई प्रतिबद्धता

    नई दिल्ली । भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें मिल रही शुभकामनाओं का सिलसिला लगातार जारी है। विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों, प्रधानमंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर उन्हें बधाई संदेश भेजे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इन संदेशों का जवाब देते हुए वैश्विक साझेदारी, आपसी सहयोग और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया है।

    प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद का धन्यवाद करते हुए कहा कि भारत और मालदीव के बीच संबंध केवल कूटनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, समृद्धि और सतत विकास को लेकर साझा दृष्टिकोण भी मौजूद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत भविष्य में भी दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

    भारत और मालदीव के संबंध पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्रीय रणनीतिक महत्व के कारण लगातार चर्चा में रहे हैं। ऐसे समय में प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी दोनों देशों के बीच सहयोग और विश्वास को आगे बढ़ाने के संकेत के रूप में देखी जा रही है। हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और विकास को लेकर भारत की नीति में मालदीव महत्वपूर्ण भागीदार माना जाता है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर क्रिश्चन स्टॉकर की शुभकामनाओं का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने हाल में हुई मुलाकातों और संवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और ऑस्ट्रिया के बीच सहयोग के नए अवसरों पर मिलकर काम करने की दिशा में दोनों देश आगे बढ़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करने की संभावनाएं मौजूद हैं।

    फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब को धन्यवाद देते हुए प्रधानमंत्री ने हालिया कूटनीतिक संपर्कों और रायसीना डायलॉग में उनकी भागीदारी को याद किया। उन्होंने कहा कि भारत और फिनलैंड के बीच सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए दोनों देश प्रतिबद्ध हैं। प्रौद्योगिकी, नवाचार और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने भी प्रधानमंत्री मोदी को बधाई देते हुए दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को मजबूत बनाने की इच्छा व्यक्त की। विशेष रूप से मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में जारी प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने भविष्य में संबंधों के और विस्तार की उम्मीद जताई। इसे भारत और न्यूजीलैंड के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने प्रधानमंत्री मोदी की उपलब्धि को भारतीय लोकतंत्र में जनता के विश्वास का प्रतीक बताया। उन्होंने भारत के साथ साझेदारी को और मजबूत करने की इच्छा व्यक्त की। वहीं जापान के पूर्व प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने भी प्रधानमंत्री मोदी को लंबे और सफल कार्यकाल के लिए बधाई देते हुए भविष्य में फिर मुलाकात की उम्मीद जताई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक नेताओं की ओर से मिल रही ये शुभकामनाएं केवल व्यक्तिगत सम्मान का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और प्रभाव को भी दर्शाती हैं। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए जवाबों में भी यही संदेश दिखाई देता है कि भारत आने वाले समय में अपने रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक साझेदारों के साथ सहयोग को और गहरा करने की दिशा में सक्रिय रूप से आगे बढ़ता रहेगा।

  • रूस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भारत का संदेश, विदेश सचिव विक्रम मिस्री बोले- भरोसा और आपसी समझ ही भारत-रूस संबंधों की सबसे बड़ी ताकत

    रूस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भारत का संदेश, विदेश सचिव विक्रम मिस्री बोले- भरोसा और आपसी समझ ही भारत-रूस संबंधों की सबसे बड़ी ताकत


    नई दिल्ली ।
    भारत और रूस के बीच दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा देते हुए विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने रूसी फेडरेशन के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस अवसर पर उन्होंने रूस को राष्ट्रीय दिवस की शुभकामनाएं देते हुए दोनों देशों के बीच विकसित हुए मजबूत और भरोसेमंद संबंधों को वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में स्थिरता का महत्वपूर्ण आधार बताया।

    समारोह को संबोधित करते हुए विदेश सचिव ने कहा कि भारत और रूस के संबंध केवल कूटनीतिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक ऐसी साझेदारी है जिसने समय की हर परीक्षा में अपनी मजबूती साबित की है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच स्थापित विश्वास और परस्पर सम्मान ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को निरंतर विस्तार देने में अहम भूमिका निभाई है।

    उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी और अधिक सुदृढ़ हुई है। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच नियमित संवाद तथा उच्च स्तरीय यात्राओं ने संबंधों को नई दिशा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि एक-दूसरे की प्राथमिकताओं, हितों और संवेदनशीलताओं को समझने की क्षमता ही इस संबंध की सबसे बड़ी विशेषता है।

    विदेश सचिव ने वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती चुनौतियों और तनावों के बीच भारत और रूस के संबंध संतुलन और सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश केवल अपने राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता में भी सकारात्मक योगदान दे रहे हैं।

    उन्होंने पिछले वर्ष आयोजित भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। इस दौरान कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण समझौतों और सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए। शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, समुद्री सहयोग, आर्कटिक क्षेत्र, कौशल विकास और अकादमिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को नई गति मिली है।

    आर्थिक संबंधों पर चर्चा करते हुए विदेश सचिव ने कहा कि भारत और रूस के बीच व्यापारिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। लगातार दो वित्तीय वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार 60 अरब डॉलर से अधिक रहा है, जो दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की बढ़ती गहराई को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के नेताओं ने वर्ष 2030 तक व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है और इस दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि रक्षा सहयोग भारत-रूस संबंधों का महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है। इसके अलावा नागरिक परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग निरंतर आगे बढ़ रहा है। नई तकनीकों, नवाचार और औद्योगिक विकास के क्षेत्रों में भी सहयोग की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।

    विक्रम मिस्री ने कौशल आधारित मानव संसाधन सहयोग को भविष्य की बड़ी संभावनाओं वाला क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि भारत का विशाल पेशेवर और प्रशिक्षित कार्यबल रूस की बढ़ती कौशल आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके साथ ही दोनों देश नए कनेक्टिविटी और परिवहन नेटवर्क विकसित करने की दिशा में भी कार्य कर रहे हैं, जिससे व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को और गति मिलेगी।

    उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पारंपरिक सहयोग के क्षेत्रों को और मजबूत करने तथा नए अवसरों की तलाश के माध्यम से भारत और रूस की साझेदारी आने वाले वर्षों में और अधिक व्यापक तथा प्रभावशाली बनेगी।

  • भारत-अमेरिका संबंधों को नई मजबूती का संदेश, अमेरिकी नेताओं और कॉर्पोरेट जगत ने पीएम मोदी को दी विशेष बधाई

    भारत-अमेरिका संबंधों को नई मजबूती का संदेश, अमेरिकी नेताओं और कॉर्पोरेट जगत ने पीएम मोदी को दी विशेष बधाई

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर अमेरिका के राजनीतिक और कारोबारी जगत से उन्हें व्यापक स्तर पर बधाई संदेश प्राप्त हुए हैं। अमेरिकी सांसदों, सीनेटरों और प्रमुख उद्योगपतियों ने इस अवसर को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए प्रधानमंत्री के नेतृत्व, आर्थिक नीतियों और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका की सराहना की है।

    अमेरिकी नेताओं ने अपने संदेशों में भारत और अमेरिका के बीच लगातार मजबूत होते संबंधों का विशेष उल्लेख किया। उनका मानना है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग आने वाले वर्षों में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस दौरान कई सांसदों ने लोकतांत्रिक मूल्यों और साझा हितों को दोनों देशों की साझेदारी का मजबूत आधार बताया।

    अमेरिका के विभिन्न राजनीतिक प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री मोदी के लंबे कार्यकाल को भारतीय जनता के विश्वास और समर्थन का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि लगातार वर्षों तक देश का नेतृत्व करना केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और लोकतांत्रिक स्वीकार्यता का भी प्रमाण है। अमेरिकी नेताओं ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में रेखांकित करते हुए उसकी बढ़ती वैश्विक भूमिका की प्रशंसा की।

    कई अमेरिकी सांसदों ने भारत-अमेरिका संबंधों को वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में और अधिक महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच सहयोग न केवल आर्थिक विकास बल्कि वैश्विक स्थिरता, सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने भविष्य में दोनों देशों के बीच और गहरे सहयोग की उम्मीद भी व्यक्त की।

    कारोबारी जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की आर्थिक प्रगति को उल्लेखनीय बताया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में भारत ने वैश्विक निवेशकों के लिए एक आकर्षक और भरोसेमंद बाजार के रूप में अपनी पहचान मजबूत की है। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, निवेश-अनुकूल वातावरण और बुनियादी ढांचे के विकास ने अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का विश्वास बढ़ाया है।

    अमेरिकी निवेशकों ने भारत को वैश्विक निवेश के प्रमुख केंद्रों में शामिल बताते हुए कहा कि देश में दीर्घकालिक आर्थिक संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं। उनका मानना है कि सुधारों, स्थिर नीतियों और बढ़ते उपभोक्ता बाजार ने भारत को वैश्विक व्यापार समुदाय के लिए महत्वपूर्ण गंतव्य बना दिया है। कई कंपनियों ने भारत में अपने निवेश और साझेदारी को आगे भी जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है।

    तकनीकी क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भारत के डिजिटल परिवर्तन की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार, तकनीकी नवाचार और डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की दिशा में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। इससे न केवल आर्थिक गतिविधियों को गति मिली है बल्कि उद्यमिता और नवाचार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का तेजी से विस्तार वैश्विक तकनीकी कंपनियों के लिए भी नए अवसर लेकर आया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल कनेक्टिविटी और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में भारत की सक्रिय भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है।

    अमेरिकी राजनीतिक और कारोबारी समुदाय की ओर से मिले इन संदेशों को भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और मजबूत होती अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यह भी माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक सहयोग के नए आयाम विकसित हो सकते हैं।

  • TMC में बगावत के बीच ममता के साथ खड़े हुए शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद, बागियों पर साधा निशाना

    TMC में बगावत के बीच ममता के साथ खड़े हुए शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद, बागियों पर साधा निशाना


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इस समय गंभीर अंदरूनी संकट से गुजर रही है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और गुटबाजी की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों के बागी रुख अपनाने की चर्चाओं के बीच पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को उस समय बड़ी राहत मिली जब वरिष्ठ सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद खुलकर उनके समर्थन में सामने आए।

    आसनसोल से सांसद और लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे Shatrughan Sinha ने पार्टी छोड़ने या किसी बागी गुट में शामिल होने की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह ममता बनर्जी के साथ थे, हैं और आगे भी रहेंगे। उनके अनुसार राजनीति में कठिन समय ही रिश्तों और निष्ठा की असली परीक्षा होती है।

    शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि जब उनके राजनीतिक जीवन में चुनौतीपूर्ण दौर आया था, तब Mamata Banerjee ने उन पर भरोसा जताया था। उन्होंने दावा किया कि ऐसे समय में उनका कर्तव्य बनता है कि वे भी ममता बनर्जी का साथ दें। उन्होंने यह भी कहा कि उनके नाम को लेकर जो अटकलें लगाई जा रही हैं, वे निराधार हैं और उनका किसी कथित बागी समूह से कोई संबंध नहीं है।

    अपने विशेष अंदाज में शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि वह स्वयं अपने लिए “तीन लाइन का व्हिप” जारी कर रहे हैं कि उनका राजनीतिक और नैतिक समर्थन ममता बनर्जी तथा टीएमसी के साथ बना रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों में उनके मित्र हो सकते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वे पार्टी छोड़ने जा रहे हैं।

    इसी क्रम में बर्धमान-दुर्गापुर से सांसद Kirti Azad भी पार्टी नेतृत्व के समर्थन में मजबूती से सामने आए। उन्होंने बागी नेताओं पर निशाना साधते हुए दावा किया कि कुछ लोग राजनीतिक दबाव और अन्य कारणों से पार्टी छोड़ रहे हैं। कीर्ति आजाद ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल टीएमसी को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं और कुछ नेताओं को प्रभावित किया जा रहा है।

    उन्होंने बागी नेताओं के उस दावे को भी चुनौती दी, जिसमें बड़ी संख्या में सांसदों के समर्थन की बात कही गई थी। कीर्ति आजाद के अनुसार, पार्टी के भीतर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इससे संगठन की मूल ताकत कमजोर नहीं होती। उन्होंने विश्वास जताया कि ममता बनर्जी अपनी राजनीतिक क्षमता और अनुभव के बल पर मौजूदा संकट से पार्टी को बाहर निकाल लेंगी।

    इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के बीच सामने आए मतभेदों पर भी प्रतिक्रिया दी गई। कीर्ति आजाद ने कहा कि कल्याण बनर्जी लंबे समय से पार्टी के महत्वपूर्ण नेता रहे हैं और उन्होंने हमेशा संगठन के लिए काम किया है। उनके अनुसार, नेतृत्व स्तर पर उत्पन्न मतभेदों का समाधान बातचीत और संगठनात्मक प्रक्रिया के जरिए निकाला जा सकता है।

    गौरतलब है कि हाल के दिनों में टीएमसी के कई नेताओं और सांसदों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में बागी खेमे द्वारा समर्थन जुटाने की बात कही गई है, जबकि पार्टी नेतृत्व इन दावों को गंभीरता से नहीं ले रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी इस चुनौती से कैसे निपटती है।

    फिलहाल इतना स्पष्ट है कि पार्टी के संकट के दौर में शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद जैसे वरिष्ठ नेताओं का सार्वजनिक समर्थन ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके बयानों ने यह संकेत दिया है कि टीएमसी के भीतर चल रही उठापटक के बावजूद नेतृत्व के साथ खड़े रहने वाले नेताओं की संख्या भी कम नहीं है।

  • अभिषेक बनर्जी पर बढ़ा दबाव: कल्याण बनर्जी के बेटे ने छोड़ा केस, बोले- सम्मान नहीं मिलेगा तो साथ नहीं देंगे

    अभिषेक बनर्जी पर बढ़ा दबाव: कल्याण बनर्जी के बेटे ने छोड़ा केस, बोले- सम्मान नहीं मिलेगा तो साथ नहीं देंगे


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही खींचतान अब सार्वजनिक रूप से सामने आने लगी है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को लेकर वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी के परिवार की नाराजगी ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। अधिवक्ता शीर्षाण्य बनर्जी, जो वरिष्ठ टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी के पुत्र हैं, ने दावा किया है कि पेशेवर सम्मान और वकालत की परंपराओं की अनदेखी किए जाने के कारण उन्होंने अभिषेक बनर्जी से जुड़े कानूनी मामलों से खुद को अलग करने का निर्णय लिया है।

    शीर्षाण्य बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे 2 जून से एक मामले पर काम कर रहे थे और उनका प्रयास था कि अभिषेक बनर्जी को कानूनी राहत मिल सके। उनका दावा है कि बाद में उन्हें जानकारी दी गई कि मामले की पैरवी के लिए किसी अन्य वकील को जिम्मेदारी दी जा रही है, जो उनके पिता कल्याण बनर्जी से जूनियर हैं। शीर्षाण्य के अनुसार, वकालत के पेशे में वरिष्ठता और पेशेवर शिष्टाचार का विशेष महत्व होता है और इसी सिद्धांत के आधार पर उन्होंने मामले से अलग होने का फैसला किया।

    उन्होंने कहा कि वकीलों का भी आत्मसम्मान होता है और पेशेवर सम्मान हर व्यक्ति का अधिकार है। उनका दावा है कि यदि किसी पेशेवर को उचित सम्मान नहीं दिया जाता है तो उसके लिए ऐसे मामलों में काम जारी रखना मुश्किल हो जाता है। शीर्षाण्य ने यह भी कहा कि उन्होंने जो निर्णय लिया है, वह पूरी तरह पेशेवर आधार पर लिया गया है और इसका उद्देश्य अपने पेशे की गरिमा बनाए रखना है।

    हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह फैसला पार्टी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के प्रति उनके रुख को प्रभावित नहीं करता। शीर्षाण्य ने कहा कि वे ममता बनर्जी के नेतृत्व और पार्टी के लिए पहले की तरह काम करते रहेंगे। उनका कहना था कि टीएमसी केवल किसी एक नेता का नाम नहीं है, बल्कि बूथ स्तर पर काम करने वाले हजारों कार्यकर्ताओं और नेताओं का सामूहिक संगठन है।

    इस बीच, वरिष्ठ टीएमसी नेता Kalyan Banerjee ने भी अभिषेक बनर्जी के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी आपत्तियां रखते हुए अभिषेक बनर्जी पर अहंकारी व्यवहार का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि वे अभिषेक से जुड़े कानूनी मामलों में आगे काम नहीं करेंगे। हालांकि, इन बयानों पर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी के भीतर विभिन्न स्तरों पर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। कई नेता संगठनात्मक फैसलों और नेतृत्व शैली को लेकर अपनी राय सार्वजनिक रूप से व्यक्त कर रहे हैं। ऐसे में कल्याण बनर्जी और शीर्षाण्य बनर्जी की टिप्पणियां पार्टी के अंदर चल रही बहस को और तेज कर सकती हैं।

    फिलहाल यह पूरा विवाद राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर अभिषेक बनर्जी पार्टी संगठन में अपनी भूमिका को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी पार्टी के लिए नई चुनौती के रूप में देखी जा रही है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे को किस तरह संभालता है, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

  • हाईकोर्ट की सख्ती के बावजूद सड़कों पर घुमाए गए TMC नेता जहांगीर खान, बंगाल पुलिस की कार्रवाई पर उठा विवाद

    हाईकोर्ट की सख्ती के बावजूद सड़कों पर घुमाए गए TMC नेता जहांगीर खान, बंगाल पुलिस की कार्रवाई पर उठा विवाद


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था और राजनीतिक घटनाक्रम के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता जहांगीर खान से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है। हाल ही में गिरफ्तार किए गए जहांगीर खान को पुलिस द्वारा दक्षिण 24 परगना जिले के फालता क्षेत्र में सार्वजनिक रूप से पैदल ले जाने के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब कुछ दिन पहले ही कलकत्ता हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत में आरोपियों को सार्वजनिक रूप से घुमाने की प्रथा पर कड़ी टिप्पणी की थी।

    जानकारी के अनुसार, जहांगीर खान को सोमवार को भारत-नेपाल सीमा के निकट उत्तर बंगाल के पानीटंकी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ जबरन वसूली सहित कई गंभीर आरोपों में सात एफआईआर दर्ज होने की बात कही जा रही है। गिरफ्तारी के बाद अदालत ने उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था। गुरुवार को सामने आए वीडियो में पुलिसकर्मी उन्हें फालता और आसपास के इलाकों में पैदल ले जाते दिखाई दे रहे हैं, जिसके बाद इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    जहांगीर खान पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक चर्चित नाम रहे हैं। उन्हें टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद Abhishek Banerjee का करीबी माना जाता है। विधानसभा उपचुनाव के दौरान भी उनका नाम लगातार चर्चा में रहा था। बताया जाता है कि मतदान से पहले वह क्षेत्र से गायब हो गए थे और उसके बाद से उनके खिलाफ विभिन्न मामलों की जांच जारी थी।

    इस मामले ने इसलिए भी ध्यान आकर्षित किया है क्योंकि हाल ही में कलकत्ता हाईकोर्ट की अवकाशकालीन पीठ ने आरोपियों को सार्वजनिक रूप से घुमाने के मामलों पर पश्चिम बंगाल पुलिस से रिपोर्ट मांगी थी। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा था कि पुलिस को किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार अवश्य है, लेकिन उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित या बदनाम करने का अधिकार नहीं है। न्यायालय ने यह भी संकेत दिया था कि ऐसी कार्रवाइयों को संवैधानिक अधिकारों के संदर्भ में परखा जाना चाहिए।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) में पुलिस को कुछ विशेष परिस्थितियों में ही कड़े नियंत्रण या हथकड़ी के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। कानून का उद्देश्य सुरक्षा और जांच सुनिश्चित करना है, न कि किसी आरोपी को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना। यही कारण है कि आरोपी को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की घटनाएं अक्सर न्यायिक समीक्षा और मानवाधिकार संबंधी बहस का विषय बन जाती हैं।

    देश के अन्य राज्यों में भी इस तरह के मामलों पर अदालतें सख्त रुख अपना चुकी हैं। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय और राजस्थान उच्च न्यायालय ने भी पूर्व में ऐसी घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि किसी भी आरोपी के सम्मान और गरिमा के अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए, चाहे उसके खिलाफ आरोप कितने भी गंभीर क्यों न हों।

    फिलहाल जहांगीर खान का मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति और पुलिस प्रशासन दोनों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर उनके खिलाफ दर्ज मामलों की जांच जारी है, वहीं दूसरी ओर पुलिस की कार्रवाई को लेकर कानूनी और संवैधानिक प्रश्न भी उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में अदालत और प्रशासन की प्रतिक्रिया इस मामले की दिशा तय कर सकती है।

  • TMC में बगावत और गहराई: काकोली घोष ने ऋतब्रत बनर्जी से बनाई दूरी, NDA समर्थन के दावे से बढ़ी सियासी हलचल

    TMC में बगावत और गहराई: काकोली घोष ने ऋतब्रत बनर्जी से बनाई दूरी, NDA समर्थन के दावे से बढ़ी सियासी हलचल


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही अंदरूनी कलह अब नए मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। पार्टी के भीतर उभरे बागी नेताओं के बीच भी रणनीतिक मतभेद सामने आने लगे हैं। लोकसभा में बागी सांसदों के कथित गुट का नेतृत्व करने का दावा कर रहीं टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनका बंगाल विधानसभा में बागी गुट का नेतृत्व कर रहे ऋतब्रत बनर्जी से कोई संबंध नहीं है।

    काकोली घोष दस्तीदार का यह बयान ऐसे समय आया है जब टीएमसी के भीतर असंतोष और संभावित टूट की चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं। हाल ही में राज्यसभा के कुछ सदस्यों के इस्तीफों और पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों ने राजनीतिक हलकों में नई अटकलों को जन्म दिया है। इसी बीच काकोली ने दावा किया कि लोकसभा में उनके साथ कई सांसद खड़े हैं और वे बंगाल के हितों के लिए एक अलग राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    मीडिया से बातचीत में काकोली ने कहा कि जब उन्होंने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाई थी, तब वे अकेली थीं, लेकिन अब कई सांसद उनके साथ आ चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऋतब्रत बनर्जी विधानसभा की राजनीति में सक्रिय हैं, जबकि उनका संघर्ष संसद के स्तर पर है। इस कारण दोनों की राजनीतिक रणनीति और प्राथमिकताएं अलग हैं।

    टीएमसी के भीतर जारी इस घटनाक्रम में एक बड़ा विरोधाभास भी सामने आया है। जहां ऋतब्रत बनर्जी खुद को राज्य में भाजपा के विकल्प के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं काकोली घोष का दावा है कि उनका गुट केंद्र की एनडीए सरकार को समर्थन देने के पक्ष में है। यही कारण है कि दोनों नेताओं के बीच दूरी और अधिक स्पष्ट दिखाई देने लगी है।

    काकोली घोष ने लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर कल्याण बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उनके अनुसार संसद के भीतर महिलाओं के प्रति कथित व्यवहार को लेकर उन्होंने आपत्ति जताई है। काकोली ने स्पष्ट कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में कल्याण बनर्जी के साथ राजनीतिक रूप से नहीं जुड़ सकतीं।

    दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी ने काकोली के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है और वे इस तरह के विवादों में पड़ने से बचना चाहते हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि दोनों गुट फिलहाल अपने-अपने राजनीतिक रास्तों पर आगे बढ़ना चाहते हैं।

    सबसे बड़ा विवाद काकोली घोष के उस दावे को लेकर है जिसमें उन्होंने कहा कि टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने अलग गुट को मान्यता दिलाने और एनडीए सरकार को समर्थन देने के लिए पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, स्पीकर कार्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।

    इतना ही नहीं, जिन सांसदों के नाम कथित रूप से बागी गुट में शामिल बताए जा रहे हैं, उनमें से कुछ ने सार्वजनिक रूप से इन दावों का खंडन भी किया है। आसनसोल से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि वे पूरी तरह टीएमसी और ममता बनर्जी के साथ हैं। वहीं जयनगर से सांसद प्रतिमा मंडल ने भी ऐसी खबरों को अफवाह बताते हुए चुनौती दी कि यदि कोई पत्र मौजूद है तो उसे सार्वजनिक किया जाए।

    इस बीच दिल्ली में केंद्रीय मंत्री के आवास पर कथित रूप से हुई एक बैठक की चर्चाओं ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। हालांकि बैठक में शामिल नेताओं और वहां हुई चर्चाओं को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी काकोली घोष का दावा है कि उनके साथ सांसदों की संख्या लगातार बढ़ रही है और कई अन्य नेता भी संपर्क में हैं।

    पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी के भीतर बढ़ती यह हलचल आने वाले दिनों में राज्य और राष्ट्रीय राजनीति दोनों पर असर डाल सकती है। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व इस चुनौती का सामना किस तरह करता है और बागी गुट अपने दावों को किस हद तक साबित कर पाता है।

  • UP: फिरोजाबाद में स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस पर पथराव… RSS चीफ मोहन भागवत भी ट्रेन में थे

    UP: फिरोजाबाद में स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस पर पथराव… RSS चीफ मोहन भागवत भी ट्रेन में थे


    नई दिल्ली।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के फिरोजाबाद जिले (Firozabad district) में गुरुवार की देर शाम लखनऊ-नई दिल्ली स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस (Lucknow-New Delhi Swarna Shatabdi Express) पर कुछ अज्ञात असामाजिक तत्वों ने ताबड़तोड़ पथराव कर दिया। यह घटना उस समय बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल हो गई जब सुरक्षा एजेंसियों को पता चला कि इसी ट्रेन के प्रभावित कोच में आरएसएस प्रमुख (सरसंघचालक) मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) भी सफर कर रहे थे। राहत की बात यह है कि इस घटना में मोहन भागवत पूरी तरह सुरक्षित हैं और ट्रेन में सवार किसी अन्य यात्री को भी कोई चोट नहीं आई है। सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) और उत्तर प्रदेश पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना गुरुवार शाम करीब 7.15 से 7.20 बजे के बीच हुई।

    ट्रेन जब कानपुर से दिल्ली की ओर जा रही थी, तब फिरोजाबाद रेल खंड के मक्खनपुर स्टेशन को पार करने के बाद रसूलपुर और दक्षिण थाना क्षेत्र की सीमा पर पेमेश्वर गेट के पास अचानक ट्रेन पर पत्थर फेंके गए। एक भारी पत्थर सीधे एग्जीक्यूटिव क्लास के E-1 कोच की खिड़की से टकराया। पत्थर लगने से सीट संख्या 50 के पास का बाहरी शीशा पूरी तरह चटक गया। नॉर्थ सेंट्रल रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक, मोहन भागवत इसी कोच की सीट नंबर 39 और 40 पर सवार थे। वे बोगी के दूसरी तरफ बैठे होने के कारण मलबे और सीधे प्रहार से पूरी तरह सुरक्षित रहे।


    टूंडला जंक्शन पर हाई-अलर्ट, 7 मिनट रुकी ट्रेन

    हमले के तुरंत बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल को देखते हुए ट्रेन को बीच रास्ते में कहीं भी नहीं रोका गया और सीधे अगले बड़े स्टेशन टूंडला जंक्शन के लिए रवाना किया गया। शाम 7.34 बजे जैसे ही शताब्दी एक्सप्रेस टूंडला जंक्शन के प्लेटफॉर्म पर पहुंची, वहां पहले से मौजूद रेलवे सुरक्षा बल (RPF), GRP और स्थानीय पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने ट्रेन को चारों तरफ से सुरक्षा घेरे में ले लिया। कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल के कारण संघ प्रमुख को ट्रेन से नीचे नहीं उतारा गया, बल्कि अधिकारियों ने बोगी के भीतर जाकर ही उनका हालचाल जाना। सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद ट्रेन को शाम 7.41 बजे दिल्ली के लिए रवाना कर दिया गया, जो रात 10.13 बजे सुरक्षित नई दिल्ली पहुंची।


    सीसीटीवी से 3 किशोर चिह्नित, एक संदिग्ध हिरासत में

    घटना की गंभीरता को देखते हुए आगरा जोन के ADG एस.के. भगत, आगरा रेंज के DIG शैलेंद्र पांडे और फिरोजाबाद के SSP आदित्य लांग्हे भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। SSP आदित्य लांग्हे ने बताया कि इस मामले में RPF की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ रसूलपुर थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। रेलवे ट्रैक के आसपास के करीब 150 सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद रात करीब 12 बजे तीन किशोरों को चिह्नित किया गया है। फिलहाल पुलिस ने एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ जारी है।


    पथराव के लिए बदनाम है यह इलाका

    पुलिस अधिकारियों ने स्वीकार किया कि फिरोजाबाद का यह विशेष रेल खंड पहले भी ट्रेनों पर पथराव की घटनाओं के लिए बदनाम रहा है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि SOG, सर्विलांस और चार थानों की संयुक्त टीमें आरोपियों की धरपकड़ के लिए लगातार छापेमारी कर रही हैं और इस तरह की हरकतों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

  • राज्यसभा चुनावः 27 सीटों में से 24 का फैसला निर्विरोध… 19 पर NDA और 5 पर कांग्रेस की जीत

    राज्यसभा चुनावः 27 सीटों में से 24 का फैसला निर्विरोध… 19 पर NDA और 5 पर कांग्रेस की जीत


    नई दिल्ली।
    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) और पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा (Pawan Khera) के अलावा भाजपा नेता सतीश पूनिया (Satish Poonia) और तरुण चुघ (Tarun Chugh) सहित 24 उम्मीदवार गुरुवार को राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। राज्यसभा की 27 सीटों में से 24 सीटों का फैसला निर्विरोध हो गया। इनमें 19 सीटों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए, जबकि शेष पांच सीटें कांग्रेस के खाते में गईं।


    इन सीटों पर होगा चुनाव

    झारखंड की दो सीटों पर, जहां कड़ा मुकाबला होने की संभावना है, तथा मिजोरम की एक सीट पर चुनाव 18 जून को कराया जाएगा। दस राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के चुनाव तथा महाराष्ट्र, ओडिशा और तमिलनाडु की एक-एक सीट पर उपचुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच गुरुवार को की गई। निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए सभी उम्मीदवारों को संबंधित निर्वाचन अधिकारियों ने जीत का प्रमाण-पत्र सौंप दिया।


    रोमांचक होगा मुकाबला

    झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव कराया जाएगा, जहां तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें झामुमो के बैद्यनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी शामिल हैं। नाथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के निदेशक हैं और उन्हें भाजपा का समर्थन प्राप्त है। झारखंड विधानसभा में INDIA गठबंधन के 56 विधायक हैं और जीत के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को 28 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होगी।

    वहीं, भाजपा के पास 21 विधायक हैं। इसके अलावा नीतीश कुमार की पार्टी जद(यू), लोजपा (रामविलास) और ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन का एक-एक विधायक है। मिजोरम से एकमात्र राज्यसभा सीट के चुनाव के लिए, सत्तारूढ़ ज़ोरम पीपल्स मूवमेंट (JPM) के प्रवक्ता के लालतलुआंगकिमा और मुख्य विपक्षी पार्टी मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) से ज़ोथानसांगी हमार चुनावी मैदान में हैं।

    MP में हुआ बड़ा खेला
    मध्यप्रदेश में राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव में भाजपा के तीनों उम्मीदवारों तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को निर्वाचन अधिकारी ने निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया।

    कांग्रेस अध्यक्ष खरगे समेत चार उम्मीदवारों को कर्नाटक से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। इनमें एक भाजपा उम्मीदवार है। खरगे के अलावा, अन्य नवनिर्वाचित सदस्यों में कांग्रेस सचिव मंसूर अली खान, खेड़ा और भाजपा के एम नागराज शामिल हैं। राज्य से मौजूदा चार राज्यसभा सदस्यों इरन्ना कडाडी और नारायण कोरागाप्पा (दोनों भाजपा से), कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खरगे और जनता दल (सेक्युलर) के नेता एचडी देवेगौड़ा का कार्यकाल 25 जून को खत्म हो रहा है और इन रिक्त पदों को भरने के लिए चुनाव की घोषणा की गई थी।


    अन्य राज्यों का हाल

    राज्यसभा चुनाव के इस दौर के साथ ही, संसद में देवेगौड़ा की पांच दशकों से ज्यादा लंबी पारी खत्म हो जाएगी। गुजरात से चार सीट के लिए सत्तारूढ़ भाजपा के सभी चारों उम्मीदवारों को निर्वाचित घोषित कर दिया गया। इनमें राजूभाई शुक्ला, मानसिंह परमार, मुकेशभाई राठवा और जितेंद्र कंजारिया शामिल हैं।

    आंध्र प्रदेश से NDA के चारों उम्मीदवार राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुन लिए गए। निर्वाचित उम्मीदवारों में तीन तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और एक जनसेना से है। निर्वाचन अधिकारी आर वनिता रानी ने बश्याम रामकृष्ण, लिंगमनेनी रमेश, सी विजय और सना सतीश बाबू के उच्च सदन के लिए निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा की। रामकृष्ण, विजय और बाबू तेदेपा से हैं, जबकि रमेश जनसेना से हैं। विजय, आंध्र प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सी अय्यन्नापतरुदू के पुत्र हैं।

    राजस्थान से भाजपा के दो और कांग्रेस के एक उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। निर्वाचन अधिकारी ने भाजपा के सतीश पूनिया और अलका गुर्जर तथा कांग्रेस के नीरज डांगी को संसद के उच्च सदन के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया।

    नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जेम्स के संगमा मेघालय से राज्यसभा की एकमात्र सीट के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए। मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा के भाई जेम्स के संगमा को उच्च सदन के द्विवार्षिक चुनाव के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया, क्योंकि मुकाबले में कोई अन्य उम्मीदवार नहीं था। वानवेइरॉय खरलुखी का कार्यकाल पूरा होने के बाद राज्यसभा की सीट खाली हो गई थी।

    मणिपुर में, भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष अधिकारीमायुम शारदा देवी को राज्य से एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। भाजपा के वरिष्ठ नेता ताई तागाक अरुणाचल प्रदेश से एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के राजेंद्र जैन उपचुनाव में महाराष्ट्र से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।

    ओडिशा में, भाजपा उम्मीदवार देवाशीष सामंतराय को राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। बीजू जनता दल (BJD) छोड़ने और संसद के उच्च सदन के सदस्य के रूप में इस्तीफा देने के बाद 26 मई को भाजपा में शामिल हुए सामंतराय इस उपचुनाव में एकमात्र उम्मीदवार थे। तमिलनाडु से कांग्रेस उम्मीदवार प्रवीण चक्रवर्ती को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया।

    अन्नाद्रमुक नेता सी षणमुगम ने अपना छह वर्षीय कार्यकाल 2028 में समाप्त होने से पहले ही सात मई को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। वह वर्ष 2022 में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के समर्थन से चक्रवर्ती ने नामांकन पत्र दाखिल किया था। नौ जून को अधिकारियों ने उनके नामांकन को वैध घोषित कर दिया, जबकि 12 निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए।

  • दिल्ली-NCR में तेज आंधी और झमाझम बारिश से कूल-कूल हुआ मौसम…. आज कई राज्यों में अलर्ट

    दिल्ली-NCR में तेज आंधी और झमाझम बारिश से कूल-कूल हुआ मौसम…. आज कई राज्यों में अलर्ट


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) और एनसीआर (NCR) में गुरुवार रात तेज आंधी, गरज-चमक और बारिश (Strong Winds, Thunderstorms Rain) के साथ मौसम ने अचानक करवट ले ली. दिनभर की भीषण गर्मी (Scorching heat) और उमस के बाद आई बारिश ने लोगों को राहत दी, लेकिन तेज हवाओं और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने रेड अलर्ट जारी कर दिया।

    दिल्ली के कई इलाकों में देर रात तेज हवाएं चलीं, आसमान में घने बादल छा गए और बारिश दर्ज की गई. मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ घंटों तक गरज-चमक के साथ बारिश जारी रह सकती है. इस दौरान 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और उनके झोंके 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है.

    IMD ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने, कमजोर ढांचों और पेड़ों से दूर रहने तथा खुले इलाकों में जाने से बचने की सलाह दी है. विभाग के मुताबिक रेड अलर्ट का मतलब है कि मौसम की स्थिति जान-माल के लिए खतरा पैदा कर सकती है और तत्काल सावधानी बरतना जरूरी है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पाकिस्तान और उससे सटे क्षेत्रों में बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर वायुमंडलीय अस्थिरता बढ़ी है. इसी वजह से दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में मौसम तेजी से बदल रहा है.


    दिल्ली समेत इन राज्यों में आज भी बारिश

    शुक्रवार को भी उत्तर भारत के कई राज्यों में मौसम सक्रिय रहेगा. दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तर राजस्थान में गरज-चमक, तेज हवाओं और धूल भरी आंधी की संभावना है. वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

    दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. केरल, तटीय कर्नाटक, अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह, सिक्किम और पश्चिमी असम में मध्यम से भारी बारिश का अनुमान है।

    हालांकि बारिश के बावजूद राजस्थान और विदर्भ के कुछ हिस्सों में लू का असर जारी रह सकता है. गुरुवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 38.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि उमस के कारण महसूस किया जाने वाला तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में बादल और बारिश के कारण तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी।