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  • भारतीय वायुसेना के 94वें स्थापना दिवस पर राष्ट्रपति- प्रधानमंत्री ने देश के वायुवीरों को किया नमन

    भारतीय वायुसेना के 94वें स्थापना दिवस पर राष्ट्रपति- प्रधानमंत्री ने देश के वायुवीरों को किया नमन


    नई दिल्ली।
    भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के 94वें स्थापना दिवस (94th Foundation Day) पर देश के शीर्ष नेताओं ने वीर वायु योद्धाओं (Brave Air Warriors) के साहस, शौर्य और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को सलाम किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu), प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi), केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्रालय और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेशों के जरिए वायुसेना के जवानों और उनके परिवारों को बधाई दीं। राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि इस अभियान ने देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में वायु योद्धाओं के साहस, सटीक कार्रवाई और अभियान संबंधी तैयारियों को प्रदर्शित किया। वहीं, पीएम मोदी ने कहा कि देश को अपने वायु योद्धाओं पर गर्व है। अमित शाह ने जवानों की अदम्य वीरता और मारक क्षमता की तारीफ की, जबकि योगी आदित्यनाथ ने भारतीय वायुसेना को पूरे देश का गौरव बताया।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ऑपरेशन सिंदूर का किया जिक्र
    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय वायुसेना दिवस पर सभी वायु योद्धाओं, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बधाई दीं। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना ने पेशेवर दक्षता, अनुशासन और हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने की अपनी क्षमता के दम पर देश की शानदार सेवा की है। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में ऑपरेशन सिंदूर का खास तौर पर उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में वायुसेना के जवानों के साहस, सटीक कार्रवाई और अभियान संबंधी तैयारियों को साबित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय वायुसेना ने प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकट के समय भी महत्वपूर्ण सहायता पहुंचाई है। जवानों का समर्पण पूरे देश के लिए प्रेरणा और गर्व का स्रोत है। राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि भारतीय वायुसेना सेवा और उत्कृष्टता की अपनी गौरवशाली परंपरा को आगे भी कायम रखेगी।


    पीएम मोदी बोले- देश को अपने वायु योद्धाओं पर गर्व

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय वायुसेना दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा कर वायु योद्धाओं को नमन किया। उन्होंने देश की हवाई सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों के साहस, प्रतिबद्धता और सर्वोच्च बलिदान को याद किया। पीएम मोदी ने लिखा, ‘भारत को अपने वायु योद्धाओं पर गर्व है। वायुसेना दिवस पर हम अपने आसमान की रक्षा करने वाले उनके साहस और प्रतिबद्धता को सलाम करते हैं!’ प्रधानमंत्री का यह संदेश उन जवानों के प्रति देश की कृतज्ञता जाहिर करता है, जो हर चुनौती का सामना करते हुए भारत की हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।


    ‘पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा वायु योद्धाओं का शौर्य’

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वायुसेना दिवस पर देश के वीर जवानों को सलाम करते हुए उनकी अदम्य वीरता, अचूक निशाने और दुश्मन के ठिकानों पर प्रभावी प्रहार करने की क्षमता की सराहना की। अमित शाह ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय वायुसेना के जवान वास्तविक जीवन के ऐसे बहादुर नायक हैं, जिनकी अद्वितीय वीरता, सटीक निशाने और जबरदस्त मारक क्षमता की गवाही धरती से लेकर दूर अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों तक मिलती है। उन्होंने कहा कि वायु योद्धाओं की देशभक्ति और पेशेवर दक्षता आने वाली पीढ़ियों को लंबे समय तक प्रेरित करती रहेगी। देश के दुश्मनों के मंसूबे खत्म हो जाने के बाद भी इन जवानों के शौर्य और समर्पण की कहानियां लोगों को प्रेरणा देती रहेंगी। गृह मंत्री ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों को भी नमन किया। उनका संदेश भारतीय वायुसेना के जवानों के अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को रेखांकित करता है।

    ‘भारतीय वायुसेना के वीर योद्धाओं को सलाम’
    भारतीय वायुसेना दिवस के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बधाई दी। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, ‘सभी साहसी वायु योद्धाओं और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं। भारतीय वायुसेना साहस, शौर्य, अनुशासन और पेशेवर दक्षता का प्रतीक है। हमारे वायु योद्धाओं ने अटूट प्रतिबद्धता के साथ हमेशा देश के आसमान की रक्षा की है और जब भी देश के सामने कोई संकट आया, वे पूरी तत्परता के साथ राष्ट्र की सेवा में डटे रहे हैं। उनकी निष्ठा और समर्पण ने न केवल भारत की सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सामूहिक संकल्प की भावना को भी मजबूती दी है। राष्ट्र के प्रति उनके साहस, प्रतिबद्धता और निस्वार्थ सेवा को नमन।’


    ‘देश की संप्रभुता की मजबूत प्रहरी है वायुसेना’

    रक्षा मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट कर भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ पर सभी वीर वायु योद्धाओं को नमन किया। मंत्रालय ने कहा कि वायुसेना के जवान ‘अचूक, अभेद्य और सटीक’ की भावना के साथ साहस, शौर्य और कर्तव्यनिष्ठा से देश की सुरक्षा के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। मंत्रालय ने अपने संदेश में वायुसेना के ध्येय वाक्य ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय वायुसेना ने आकाश की सीमाओं से आगे बढ़कर देश की संप्रभुता और सुरक्षा के क्षेत्र में अपनी अद्वितीय क्षमता और प्रतिबद्धता का परिचय दिया है। रक्षा मंत्रालय का यह संदेश बताता है कि देश की हवाई सुरक्षा में वायुसेना की भूमिका कितनी अहम है। जवानों का अनुशासन, उनकी तैयारी और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्रवाई करने की क्षमता भारत की रक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।


    ‘भारतीय वायुसेना पूरे देश का गौरव’

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी भारतीय वायुसेना दिवस पर वायु योद्धाओं और उनके परिवारों को हार्दिक बधाई एवं बधाई दीं। योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में वायुसेना के ध्येय वाक्य ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ का उल्लेख करते हुए कहा कि आसमान की अनंत ऊंचाइयों से लेकर राष्ट्र की सीमाओं तक शौर्य, सामर्थ्य और संकल्प का पर्याय बनी भारतीय वायुसेना हम सभी का गौरव है। उन्होंने अपने संदेश का समापन ‘जय हिंद’ के उद्घोष के साथ किया। मुख्यमंत्री का यह संदेश देश की रक्षा में जुटे वायु योद्धाओं के प्रति सम्मान और उनके योगदान पर गर्व की भावना को दर्शाता है।

  • बागेश्वर धाम विवाद: बयान पर सवाल उठाने के बाद धमकी का दावा, साध्वी हर्षा बोलीं- मुझे डराने की कोशिश न करें

    बागेश्वर धाम विवाद: बयान पर सवाल उठाने के बाद धमकी का दावा, साध्वी हर्षा बोलीं- मुझे डराने की कोशिश न करें


    भोपाल।
    बागेश्वर धाम को लेकर चल रहे विवाद के बीच साध्वी हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंद गिरि ने एक नया वीडियो जारी कर लगातार धमकियां मिलने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें गंदे कमेंट, मैसेज, ई-मेल और धमकियां भेजी जा रही हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि वह इन धमकियों से डरने वाली नहीं हैं और अपनी कही बात पर अब भी कायम हैं।

    साध्वी हर्षा ने कहा कि यदि उन्हें कुछ होता है तो इसकी आशंका उन लोगों पर जाएगी, जिनके श्रद्धालुओं की ओर से उन्हें धमकियां दिए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वीडियो में उन्होंने किसी व्यक्ति, संत, आश्रम या संस्था का नाम नहीं लिया है। धमकी मिलने के उनके दावे की स्वतंत्र पुष्टि भी फिलहाल सामने नहीं आई है।

    धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर उठाया था सवाल

    विवाद की शुरुआत साध्वी हर्षा के उस वीडियो से हुई थी, जिसमें उन्होंने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के महिलाओं की सुरक्षा को लेकर दिए गए बयान पर सवाल उठाए थे।

    धीरेंद्र शास्त्री ने श्रद्धालुओं, खासकर महिलाओं से अकेले बागेश्वर धाम नहीं आने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि यदि कोई महिला अकेले धाम आती है तो उसे किसी अनजान व्यक्ति या धाम के सेवादार पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। उनका कहना था कि धाम के मंदिर और हॉल की सुरक्षा की जिम्मेदारी ली जा सकती है, लेकिन करीब पांच किलोमीटर के पूरे क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी नहीं है।

    उन्होंने श्रद्धालुओं से लंबे समय तक धाम में नहीं रुकने तथा अपनी सुरक्षा और सामान का स्वयं ध्यान रखने की अपील भी की थी।

    हर्षा ने पूछा- फिर भरोसा किस पर करें?

    धीरेंद्र शास्त्री के इसी बयान पर साध्वी हर्षा ने सवाल उठाया था कि जब धाम के प्रमुख स्वयं अपने सेवादारों को लेकर श्रद्धालुओं को सावधान कर रहे हैं, तो परिवार अपने बच्चों और महिलाओं को वहां भेजते समय आखिर किस आधार पर भरोसा करें।

    उन्होंने लोगों से अपील की थी कि दर्शन के बाद ज्यादा समय तक धाम में न रुकें और वापस अपने घर लौट जाएं। नए वीडियो में हर्षा ने कहा कि वह अपनी इस सलाह से पीछे नहीं हटेंगी।

    कुंभ के दौरान भी धमकी मिलने का किया दावा

    साध्वी हर्षा ने नए वीडियो में कुंभ के दौरान भी धमकियां मिलने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी उन्होंने डरकर पीछे हटने के बजाय अपनी बात रखी थी। उनका कहना है कि अब भी धमकियों के बावजूद वह अपनी राय रखने से पीछे नहीं हटेंगी।

    उन्होंने कहा कि वह किसी के खिलाफ अपशब्द नहीं बोल रही हैं। किसी मुद्दे पर जो बात उन्हें सही या गलत लगती है, उस पर अपनी राय रखना उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि धमकियों के जरिए उन्हें डराने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

  • नेशनल हाईवे को जाम फ्री बनाने की तैयारी…. फास्टैग और वाहन डेटाबेस की मदद से होगी एडवांस प्लानिंग

    नेशनल हाईवे को जाम फ्री बनाने की तैयारी…. फास्टैग और वाहन डेटाबेस की मदद से होगी एडवांस प्लानिंग


    नई दिल्ली।
    देश में नेशनल हाईवे (National Highway) के निर्माण और ट्रैफिक प्रबंधन की पुरानी परिपाटी बदलने जा रही है। अब हाईवे पर घंटों लंबे जाम और हादसों का इंतजार करने के बजाय सरकार (Government) फास्टैग (FASTag) और वाहन डेटाबेस (Vehicle Database) की मदद से एडवांस प्लानिंग करेगी। इसके तहत किसी हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ने से दो-तीन साल पहले ही उसके चौड़ीकरण या बाईपास निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी।

    सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फास्टैग अब सिर्फ टोल वसूली का जरिया नहीं रहेगा। इसके डेटा का उपयोग ट्रैफिक पैटर्न, गाड़ियों की रफ्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग में किया जाएगा। वर्तमान में किसी हाईवे सेक्शन पर वाहनों की संख्या उसकी कुल क्षमता के 75 से 80 प्रतिशत तक पहुंचेगी तो डिजिटल सिस्टम ऑटोमैटिक तरीके से चौड़ीकरण, बाईपास या एलिवेटेड कॉरिडोर की जरूरत के लिए अलर्ट कर देगा। इससे गंभीर जाम की स्थिति पैदा होने से 2 से 3 साल पहले ही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और भूमि अधिग्रहण का काम शुरू हो सकेगा।


    दूसरे रास्तों की सलाह से सफर आसान होगा

    अधिकारी ने बताया कि त्योहारों, लंबे सप्ताहांत या छुट्टियों के दौरान टोल प्लाजा पर अचानक गाड़ियों का दबाव बढ़ जाता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एआई आधारित ट्रैफिक कंट्रोल रूम फास्टैग ट्रेंड्स का विश्लेषण कर पहले ही पहचान लेगा कि किस टोल पर कतारें लग सकती हैं। सिस्टम सड़क यात्रियों को राजमार्गयात्रा ऐप, गूगल मैप्स और हाईवे पर लगे वेरिएबल मैसेज साइनेज के जरिए टोल प्लाजा से 20-30 किलोमीटर पहले ही वैकल्पिक रास्तों की सटीक जानकारी दे दी जाएगी।


    मार्च 2027 तक बैरियर मुक्त होंगे टोल

    पीक आवर्स में टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों को खत्म करने के लिए मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएचएफएफ) और स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) आधारित बैरियर-मुक्त व्यवस्था लागू की जा रही है। इससे वाहन 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बिना थमे टोल क्षेत्र पार कर सकेंगे। सड़क परिवहन मंत्रालय, एनएचएआई, अधिकारियों और गति शक्ति सेल की संयुक्त समीक्षा बैठक में इस डिजिटल रोडमैप को अंतिम रूप दिया गया है।

  • नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के रिश्ते का सच, अग्नि साक्षी के राइटर ने बताया दोनों के बीच कैसी थी नजदीकी

    नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के रिश्ते का सच, अग्नि साक्षी के राइटर ने बताया दोनों के बीच कैसी थी नजदीकी


    नई दिल्ली। 90 के दशक में बॉलीवुड की कई जोड़ियां अपने काम के साथ साथ निजी रिश्तों को लेकर भी सुर्खियों में रही थीं। इन्हीं में अभिनेता नाना पाटेकर और अभिनेत्री मनीषा कोइराला का नाम भी अक्सर चर्चा में आता था। दोनों ने फिल्म अग्नि साक्षी में साथ काम किया था और इसी दौरान उनकी नजदीकियों को लेकर तरह तरह की चर्चाएं सामने आने लगी थीं। लंबे समय तक दोनों के कथित अफेयर की खबरें फिल्मी गलियारों में चर्चा का विषय बनी रहीं। हालांकि इन चर्चाओं की कभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। अब अग्नि साक्षी के लेखक रणबीर पुष्प के पुराने बयान ने एक बार फिर इस किस्से को चर्चा में ला दिया है।

    रणबीर पुष्प ने नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के साथ काम करने के अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया था कि दोनों के बीच अच्छी दोस्ती थी। सेट पर दोनों की आपसी समझ भी काफी मजबूत थी। वे अपने किरदारों और दृश्यों को लेकर आपस में चर्चा करते थे और उनकी यह समझ पर्दे पर भी दिखाई देती थी। रणबीर के मुताबिक उन्होंने दोनों को करीब जरूर देखा लेकिन उनके रिश्ते को उन्होंने कभी रोमांटिक नजरिए से नहीं देखा था।

    जब रणबीर से सीधे पूछा गया कि क्या नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के बीच दोस्ती से आगे भी कोई रिश्ता था तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्हें ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ। उन्होंने माना कि दोनों के बीच करीबी और गहरी समझ थी लेकिन इसे प्यार या रोमांस कहना उनके लिए सही नहीं था। रणबीर ने बताया कि दोनों कलाकार साथ काम करते समय अपने सीन को लेकर बातचीत करते थे और इसी वजह से उनकी स्क्रीन केमिस्ट्री भी काफी प्रभावी नजर आती थी।

    रणबीर ने यह भी बताया कि उस समय बाद में अखबारों और मीडिया में नाना और मनीषा के रिश्ते को लेकर कई तरह की बातें सामने आई थीं। उन्होंने उन खबरों को पढ़ा भी था लेकिन अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने कभी दोनों के रिश्ते को उस नजरिए से नहीं देखा। उनका कहना था कि सेट पर उनका मुख्य ध्यान अपने काम पर रहता था। वह काम से जुड़े मामलों पर ध्यान देते थे और कलाकारों के निजी रिश्तों को लेकर ज्यादा गौर नहीं करते थे।

    फिल्म अग्नि साक्षी साल 1996 में रिलीज हुई थी। पार्थो घोष के निर्देशन में बनी इस साइकोलॉजिकल थ्रिलर में नाना पाटेकर मनीषा कोइराला और जैकी श्रॉफ प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म में नाना और मनीषा की जोड़ी को दर्शकों ने देखा और इसी दौरान दोनों की ऑफस्क्रीन बॉन्डिंग को लेकर भी चर्चाएं तेज हुई थीं। वर्षों बाद भी दोनों के कथित रिश्ते का किस्सा बॉलीवुड की चर्चित कहानियों में शामिल रहा है।

    हालांकि रणबीर पुष्प का बयान यह साफ करता है कि उन्होंने दोनों के बीच मजबूत दोस्ती और अच्छी अंडरस्टैंडिंग जरूर देखी थी लेकिन उनके सामने ऐसा कोई अनुभव नहीं आया जिससे वह इसे रोमांटिक रिश्ता मान सकें। ऐसे में नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के बीच प्रेम संबंध की पुरानी चर्चाएं आज भी अफवाहों और अटकलों तक ही सीमित नजर आती हैं।

  • राहुल गांधी की ‘सरप्राइज पॉलिटिक्स’: छोटा दस्ता, अचानक धरना और सरकार पर सीधा वार

    राहुल गांधी की ‘सरप्राइज पॉलिटिक्स’: छोटा दस्ता, अचानक धरना और सरकार पर सीधा वार


    नई दिल्ली। अचानक धरना, पुलिस थाने की ओर कूच या बिना पूर्व सूचना किसी जगह पहुंच जाना राहुल गांधी की हालिया राजनीति में ‘सरप्राइज’ एक अहम रणनीति के तौर पर उभरता दिख रहा है। पिछले कुछ महीनों में उनके ऐसे कई कदम सामने आए हैं, जिनमें बड़ी भीड़ के बजाय सीमित लोगों के साथ अचानक एक्शन लेकर राजनीतिक और मीडिया का ध्यान खींचने की कोशिश नजर आती है।

    औचक एक्शन, कम लोगों के साथ मैदान में उतरना
    राहुल गांधी इन दिनों मोदी सरकार को घेरने के लिए विरोध प्रदर्शन के पारंपरिक तरीकों से अलग रास्ता अपनाते दिख रहे हैं। कभी अचानक धरना, कभी पुलिस थाने की ओर मार्च और कभी किसी तय कार्यक्रम से अलग मौके पर पहुंच जाना—इन कदमों में एक बात समान रहती है, वह है औचक कार्रवाई।

    6 अक्टूबर को चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी मार्च के दौरान भी ऐसा ही देखने को मिला। पुलिस ने संसद मार्ग पर बैरिकेडिंग कर रखी थी। इसके बाद राहुल गांधी ने बैरिकेड पार किया और प्रियंका गांधी के साथ आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंचकर धरना शुरू कर दिया। यह प्रदर्शन करीब आठ घंटे तक चला और बाद में पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया।

    अगले दिन भी विपक्षी दलों के प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी का काफिला अचानक जंतर-मंतर की ओर बढ़ा। इस तरह के कदमों ने पुलिस और प्रशासन के सामने पहले से तय विरोध-प्रदर्शन के प्रबंधन को चुनौती दी है।

    नया नहीं है यह तरीका
    हालांकि राहुल गांधी के लिए अचानक मैदान में उतरना कोई बिल्कुल नया प्रयोग नहीं है। इसकी झलक कई साल पहले भट्टा-पारसौल आंदोलन के दौरान भी दिखाई दी थी। उस समय वह बाइक से पश्चिमी उत्तर प्रदेश पहुंचे थे और किसानों से मुलाकात की थी।

    फर्क इतना है कि हाल के वर्षों में इस तरह के राजनीतिक कदमों की आवृत्ति और दृश्यता बढ़ी है। अब अचानक किए गए किसी एक्शन को सोशल मीडिया और न्यूज कवरेज के जरिए बड़े राजनीतिक संदेश में बदलने की कोशिश भी दिखाई देती है।

    मार्शल आर्ट से राजनीति तक
    राहुल गांधी अपने फिटनेस और मार्शल आर्ट्स अभ्यास को लेकर भी सार्वजनिक तौर पर बात करते रहे हैं। भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान उन्होंने शाम के समय जिउ-जित्सु और मार्शल आर्ट्स से जुड़े अभ्यास को लेकर वीडियो भी साझा किए थे। उनका कहना रहा है कि इन गतिविधियों का उद्देश्य फिटनेस के साथ युवाओं को मार्शल आर्ट्स से जोड़ना भी है।

    फिटनेस को लेकर राहुल गांधी ने अगस्त 2026 में भी बताया था कि वह व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद करीब एक घंटा शारीरिक प्रशिक्षण के लिए निकालते हैं। उनके मुताबिक इसमें ताकत, एरोबिक क्षमता और लचीलेपन पर काम शामिल होता है।

    धरना पॉलिटिक्स में फिटनेस भी जरूरी
    सड़क पर उतरकर किए जाने वाले लंबे राजनीतिक प्रदर्शनों में शारीरिक ऊर्जा भी एक अहम पहलू बन जाती है। राहुल गांधी के हालिया प्रदर्शनों में इसका उदाहरण देखने को मिला है। आकाशवाणी भवन के बाहर उनका धरना कई घंटे चला, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया।

    यानी जिस फिटनेस को राहुल गांधी पहले निजी अनुशासन के तौर पर पेश करते रहे हैं, उसे अब उनकी सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। कांग्रेस भी पिछले कुछ समय से राहुल गांधी की सड़क पर उतरकर सीधे विरोध करने वाली छवि को प्रमुखता देती दिख रही है।

    ‘अड़ियल तेवर’ या सोची-समझी रणनीति?
    हाल के प्रदर्शनों में राहुल गांधी का तरीका सरकार के साथ सीधे टकराव वाला नजर आया है। चाहे प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ते हुए धरने पर बैठना हो या संसद मार्ग पुलिस थाने पहुंचकर एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर टिके रहना—उनके इन कदमों में पीछे हटने के बजाय मौके पर बने रहने का संदेश प्रमुख रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषण में इसे एक ऐसी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य सिर्फ अपनी मांग दर्ज कराना नहीं, बल्कि सरकार और प्रशासन पर तत्काल राजनीतिक दबाव बनाना और घटनाक्रम को सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में लाना भी है। हालिया प्रदर्शनों में राहुल गांधी के अचानक लिए गए फैसलों ने इसी तरह की चर्चा को बढ़ाया है।

    ‘ब्रांड मोदी’ के सामने अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश
    राहुल गांधी के सामने राजनीतिक चुनौती यह भी है कि नरेंद्र मोदी की राजनीति लंबे समय से एक मजबूत और स्थापित राजनीतिक ब्रांड के रूप में सामने रही है। ऐसे में राहुल गांधी की सार्वजनिक छवि को उससे अलग रूप देने की कोशिश कांग्रेस की मौजूदा रणनीति का हिस्सा दिखाई देती है।

    एक तरफ नरेंद्र मोदी की स्थापित सत्ता और संगठन आधारित राजनीति है, तो दूसरी ओर राहुल गांधी की ओर से सड़क पर उतरने, अचानक विरोध करने और टकराव की स्थिति में पीछे नहीं हटने वाली छवि को उभारने का प्रयास नजर आता है।

    हालिया घटनाक्रम से यह जरूर स्पष्ट है कि राहुल गांधी की राजनीति में सरप्राइज, सीमित टीम के साथ अचानक एक्शन और दृश्यता वाले विरोध प्रदर्शन का इस्तेमाल बढ़ा है। अब यह रणनीति कांग्रेस को कितना राजनीतिक लाभ देती है और जनता के बीच राहुल गांधी की छवि को किस दिशा में ले जाती है, इसका आकलन आने वाले समय में राजनीतिक घटनाक्रम और जन प्रतिक्रिया से होगा।

  • बेंगलुरु में आज CJP का प्रदर्शन, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, ध्रुव राठी-प्रकाश राज भी होंगे शामिल

    बेंगलुरु में आज CJP का प्रदर्शन, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, ध्रुव राठी-प्रकाश राज भी होंगे शामिल


    बेंगलुरु। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बेंगलुरु में गुरुवार, 8 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) प्रदर्शन करेगी। फ्रीडम पार्क में होने वाले इस कार्यक्रम में CJP संस्थापक अभिजीत दिपके के साथ यूट्यूबर ध्रुव राठी और अभिनेता-कार्यकर्ता प्रकाश राज के भी शामिल होने की पुष्टि हुई है।

    10:30 बजे शुरू होगा प्रदर्शन

    CJP की ओर से फ्रीडम पार्क में सुबह 10:30 बजे से प्रदर्शन और ‘पीपल्स ट्रिब्यूनल’ आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में कर्नाटक के अलग-अलग जिलों से ऐसे लोगों के पहुंचने की बात कही गई है, जिनका दावा है कि SIR प्रक्रिया के दौरान उनके नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाए गए हैं। आयोजकों के मुताबिक, इन लोगों की बात सुनी जाएगी और उनकी शिकायतों को सामने रखा जाएगा।

    इसके बाद CJP की ओर से ‘चप्पल प्रदर्शन’ भी किया जाएगा। पार्टी के मुताबिक, यह प्रदर्शन SIR को लेकर उसके विरोध का हिस्सा है।

    ध्रुव राठी ने वीडियो जारी कर की अपील

    ध्रुव राठी के बेंगलुरु पहुंचने की जानकारी CJP संस्थापक अभिजीत दिपके और प्रकाश राज की ओर से साझा किए गए वीडियो के जरिए सामने आई। राठी ने भी वीडियो संदेश में 8 अक्टूबर को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने की बात कही और लोगों से प्रदर्शन में पहुंचने की अपील की। उन्होंने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने की भी अपील की है।

    प्रकाश राज ने भी सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर राठी को बेंगलुरु कार्यक्रम का ‘स्पेशल गेस्ट’ बताया। उन्होंने लोगों से बड़ी संख्या में फ्रीडम पार्क पहुंचने की अपील की है।

    SIR पर क्या है प्रदर्शनकारियों की आपत्ति?

    CJP और प्रदर्शन से जुड़े आयोजकों का आरोप है कि SIR के दौरान कई पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इसी मुद्दे पर ‘पीपल्स ट्रिब्यूनल’ में कथित तौर पर प्रभावित लोगों की शिकायतें दर्ज की जाएंगी।

    आयोजकों ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची में नामों को लेकर जवाबदेही की मांग की है। प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई जाएगी।

    दिपके करेंगे लोगों से बातचीत

    CJP संस्थापक अभिजीत दिपके बेंगलुरु में उन स्थानीय लोगों से बातचीत करेंगे, जिनका दावा है कि SIR के दौरान उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। इसके बाद फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन किया जाएगा।

    CJP पिछले कुछ समय से चुनाव आयोग और SIR को लेकर प्रदर्शन कर रही है। इससे पहले पार्टी के नेतृत्व में मुंबई समेत अन्य जगहों पर भी प्रदर्शन हो चुके हैं।

    10 अक्टूबर को दिल्ली में भी प्रदर्शन

    बेंगलुरु के बाद CJP की ओर से 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन की घोषणा की गई है। इस प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई जाएगी। ध्रुव राठी ने भी अपने वीडियो संदेश में लोगों से 10 अक्टूबर को दिल्ली के प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है।

    इस बीच, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दल भी दिल्ली में प्रदर्शन कर चुके हैं। विपक्ष SIR की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि चुनाव आयोग ने प्रक्रिया से जुड़ी आपत्तियों पर अपना पक्ष अलग-अलग मौकों पर रखा है।

  • उमर अब्दुल्ला ने पीएम मोदी के 25 साल के राजनीतिक सफर की तारीफ की, INDIA गठबंधन के प्रदर्शन पर भी दी प्रतिक्रिया

    उमर अब्दुल्ला ने पीएम मोदी के 25 साल के राजनीतिक सफर की तारीफ की, INDIA गठबंधन के प्रदर्शन पर भी दी प्रतिक्रिया


    नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे होने पर उन्हें बधाई दी है। श्रीनगर में मीडिया से बातचीत के दौरान उमर अब्दुल्ला ने कहा कि 25 साल तक लगातार चुनाव जीतते रहना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी सफलता प्रधानमंत्री मोदी के मतदाताओं के साथ मजबूत और लंबे समय से चले आ रहे जुड़ाव को दर्शाती है। उमर अब्दुल्ला ने अपनी और अपनी सरकार के सहयोगियों की ओर से प्रधानमंत्री को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 साल तक लगातार चुनाव जीतना आसान नहीं है। यह सफर पहले राज्य स्तर पर और फिर केंद्र स्तर पर जारी रहा है। उन्होंने लगातार जीत के सिलसिले को आधुनिक राजनीति में एक असाधारण उपलब्धि बताया। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इतने लंबे समय तक चुनावी सफलता बनाए रखना अपने आप में महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद वे देश के प्रधानमंत्री बने और अब सरकार के मुखिया के रूप में 25 साल पूरे कर चुके हैं।

    उमर अब्दुल्ला ने INDIA गठबंधन के प्रदर्शन को लेकर दिए गए बयानों पर भी प्रतिक्रिया दी। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ INDIA गठबंधन की ओर से किए जा रहे प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कहा कि यह विरोध पिछले दिनों दिल्ली में हुई गठबंधन की बैठक का नतीजा है। उन्होंने प्रदर्शन को मनगढ़ंत और फर्जी बताए जाने के दावों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने और उनके सहयोगियों ने इस मुद्दे को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

    मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर जारी सार्वजनिक विरोध और राजनीतिक विवाद पर उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार के उस दावे को चुनौती दी, जिसमें खोजी पत्रकारिता की रिपोर्टों को बेबुनियाद और मनगढ़ंत बताया गया है। उन्होंने प्रदर्शन के संदर्भ में कहा कि अगर यह मामला फर्जी होता तो सबसे पहले उस अखबार के खिलाफ कार्रवाई की जाती, जिसकी रिपोर्ट के जरिए यह पूरा मामला सामने आया है। उमर अब्दुल्ला ने इस आधार पर प्रदर्शन को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई।

    श्रीनगर में कश्मीर घाटी के एक बड़े खेल आयोजन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 साल की राजनीतिक यात्रा के महत्व को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी जीत हासिल करना आसान नहीं है और लंबे समय तक मतदाताओं के साथ जुड़ाव बनाए रखना महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसी बातचीत के दौरान उन्होंने INDIA गठबंधन के प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चल रहे विरोध को लेकर भी अपना पक्ष रखा।

  • चुनाव आयोग से मुलाकात पर EC का बयान, बोला- किसी दल से मिलने में आपत्ति नहीं, तय प्रक्रिया के तहत मांगा जाए समय

    चुनाव आयोग से मुलाकात पर EC का बयान, बोला- किसी दल से मिलने में आपत्ति नहीं, तय प्रक्रिया के तहत मांगा जाए समय

    नई दिल्ली । चुनाव आयोग और विपक्षी नेताओं के बीच मुलाकात को लेकर मंगलवार को गतिरोध की स्थिति बनी रही। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत विपक्षी नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे और चुनाव आयोग से मुलाकात कर अपनी बात रखने की मांग कर रहे थे। इसी बीच चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि उसे किसी भी राजनीतिक दल के सदस्यों से मिलने में कोई आपत्ति नहीं है। आयोग के मुताबिक, राजनीतिक दलों के साथ बैठक के लिए वर्ष 2025 में एक निर्धारित प्रक्रिया और प्रोटोकॉल बनाया गया है, जिसके तहत बैठक के लिए पहले समय मांगा जाना और उसका उद्देश्य बताना जरूरी है।

    आयोग ने कहा कि मंगलवार शाम चार बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से बैठक के लिए समय नहीं मांगा था। आयोग के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान उसे जानकारी मिली थी कि कुछ सांसद चुनाव आयोग से मिलना चाहते हैं। इसके बाद करीब चार बजे दिल्ली पुलिस के माध्यम से सूचना मिली कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलकर ज्ञापन सौंपना चाहता है। आयोग ने इस अनुरोध पर विचार किया।

    चुनाव आयोग के मुताबिक, वर्ष 2025 में राजनीतिक दलों और उनके प्रतिनिधिमंडलों के साथ बैठक के लिए प्रक्रिया तय की गई थी। इसके अनुसार किसी राजनीतिक दल या कई दलों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल को आयोग से मिलने के लिए उसके अधिकृत प्रतिनिधि के जरिए समय लेना होता है। बैठक का समय दोनों पक्षों की सहमति से तय किया जाता है। आयोग ने कहा कि यह नियमित प्रक्रिया है और सभी राजनीतिक दलों को इसके बारे में जानकारी दी गई है।

    आयोग ने बताया कि राहुल गांधी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल के संबंध में बाद में दिल्ली पुलिस की ओर से जानकारी दी गई कि करीब 240 सांसद बैठक करना चाहते हैं। आयोग के अनुसार, प्रस्तावित बैठक का स्थान संसद भवन एनेक्सी बताया गया। यह व्यवस्था तय प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं थी, क्योंकि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ बैठक के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है। आयोग ने इस अनुरोध को असामान्य मानते हुए स्वीकार नहीं किया।

    इसके साथ ही चुनाव आयोग ने सांसदों का ज्ञापन लेने के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था भी सुझाई। आयोग की ओर से कहा गया कि उसका सबसे वरिष्ठ अधिकारी बैठक स्थल पर जाकर सांसदों से ज्ञापन प्राप्त कर सकता है। हालांकि, प्रदर्शनकारी सांसदों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि वह राजनीतिक दलों के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन बैठक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए।

    विपक्षी नेताओं का कहना था कि वे चुनाव आयोग से मिलकर अपनी बात रखना चाहते हैं और जब तक मुलाकात के लिए बुलावा नहीं आता, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। दूसरी ओर आयोग ने बैठक के लिए औपचारिक प्रक्रिया और तय प्रोटोकॉल का हवाला दिया। इस घटनाक्रम में मुख्य विवाद बैठक की इच्छा को लेकर नहीं, बल्कि समय मांगने की प्रक्रिया और प्रस्तावित बैठक स्थल को लेकर सामने आया। आयोग ने दोहराया कि किसी भी राजनीतिक दल से मुलाकात पर उसे कोई आपत्ति नहीं है और तय नियमों के तहत बैठक का अनुरोध किया जा सकता है।

  • मोदी-आबे की दोस्ती से भारत-जापान संबंधों तक, काशी में स्मारक उद्घाटन के दौरान योगी ने बताई इस रिश्ते की खास कहानी

    मोदी-आबे की दोस्ती से भारत-जापान संबंधों तक, काशी में स्मारक उद्घाटन के दौरान योगी ने बताई इस रिश्ते की खास कहानी

    नई दिल्ली । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे की दोस्ती को पद से नहीं बल्कि विश्वास से बना रिश्ता बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के पद बदलते रहे, लेकिन उनकी मित्रता कायम रही। वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में शिंजो आबे मेमोरियल कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की जनसेवा यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने के दिन आबे की स्मृति को समर्पित गलियारे का उद्घाटन विशेष संयोग है।

    मुख्यमंत्री योगी ने जापान की पूर्व प्रथम महिला और शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे के साथ कॉरिडोर का अनावरण किया। उन्होंने इसे उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता, प्रधानमंत्री मोदी और 140 करोड़ भारतीयों की ओर से शिंजो आबे को श्रद्धांजलि बताया। योगी ने कहा कि जापान ने काशी को रुद्राक्ष दिया और अब काशी उसी रुद्राक्ष में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री की स्मृति को स्थायी रूप से संजो रही है।

    योगी ने दोनों नेताओं की पहली मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2007 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते प्रधानमंत्री मोदी जापान गए थे, जहां उनकी शिंजो आबे से पहली मुलाकात हुई। उसी साल आबे ने भारत की संसद में भारत और जापान की मजबूती को एक-दूसरे के हित से जोड़ा था। वर्ष 2014 में काशी-क्योटो पार्टनर सिटी समझौता हुआ और 2015 में शिंजो आबे ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ काशी में गंगा आरती में हिस्सा लिया। 2017 में दोनों नेताओं ने अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन परियोजना का शिलान्यास किया, जबकि 2018 में आबे ने प्रधानमंत्री मोदी को यामानाशी स्थित अपने निजी आवास पर आमंत्रित किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जब दो नेताओं की मित्रता दो देशों के विश्वास में बदलती है तो उसके व्यापक प्रभाव होते हैं। उन्होंने बताया कि 2021 में शिंजो आबे को भारत के प्रमुख नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री मोदी अपने मित्र को अंतिम विदाई देने टोक्यो पहुंचे और भारत में राष्ट्रीय शोक रखा गया। योगी ने इसे प्रोटोकॉल के बजाय व्यक्तिगत रिश्ते से जुड़ा कदम बताया।

    उन्होंने भारत-जापान संबंधों को विश्वास पर आधारित बताते हुए कहा कि करीब 1400 जापानी कंपनियां भारत में काम कर रही हैं। दोनों देशों का सहयोग अब सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। उनके अनुसार जापान के पास तकनीक और अनुभव है, जबकि भारत के पास प्रतिभा और युवा ऊर्जा है।

    योगी ने इसी वर्ष फरवरी में अपनी जापान यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि टोक्यो और यामानाशी में जापानी कंपनियों के साथ हजारों करोड़ रुपये के निवेश समझौते हुए। उन्होंने जापान में मैग्लेव ट्रेन की प्रिसिजन इंजीनियरिंग को करीब से देखने की बात कही। यामानाशी को उत्तर प्रदेश का ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी पार्टनर बताया गया। उन्होंने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ईडा क्षेत्र में 500 एकड़ में जापानी सिटी विकसित की जा रही है और इन्वेस्ट यूपी में यामानाशी डेस्क भी बनाई गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान के पास प्रिसिजन है तो उत्तर प्रदेश के पास बड़े स्तर पर काम करने की क्षमता, 25 करोड़ लोगों का बाजार, देश का सबसे युवा वर्कफोर्स और एक्सप्रेसवे तथा एयरपोर्ट का बड़ा नेटवर्क है। उन्होंने बताया कि 2027 में भारत-जापान राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होंगे और आबे मेमोरियल कॉरिडोर इस अवसर की शुरुआती भेंट है। उन्होंने काशी और क्योटो को अपनी-अपनी सभ्यताओं की आत्मा बताते हुए कहा कि दोनों शहर विरासत के संरक्षण के साथ विकास का संदेश देते हैं।

    योगी ने कॉरिडोर को नई पीढ़ी के लिए जीवंत क्लासरूम बताया। अकी आबे ने शिंजो आबे और प्रधानमंत्री मोदी के आत्मीय संबंधों को याद किया और कहा कि 2015 में काशी आने के बाद उनके पति उनसे गंगा आरती और वाराणसी की यादें साझा करते थे। उन्होंने कहा कि आबे जीवित होते तो अपने नाम पर बने स्मारक को देखकर खुश होते। अकी आबे ने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर की बाहरी दीवारों पर लगे 108 रुद्राक्षों की भी प्रशंसा की और बताया कि जापान में भी 108 संख्या का विशेष महत्व है।

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसेवा के 25 साल पूरे होने पर अपने राजनीतिक सफर और सुशासन की सोच साझा की।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसेवा के 25 साल पूरे होने पर अपने राजनीतिक सफर और सुशासन की सोच साझा की।

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार 7 अक्टूबर को सरकार के प्रमुख के रूप में लोकसेवा के 25 साल पूरे होने के मौके पर जनता से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि जब उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, तब उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वह इस मुकाम तक पहुंचेंगे। उन्होंने इस पूरे सफर के लिए देश के लोकतंत्र और संविधान के प्रति आभार व्यक्त किया।

    दिल्ली में आयोजित ‘सेवा ज्योति’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 25 वर्षों तक सरकार का हिस्सा बने रहना उनके लिए केवल एक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह जनता की सेवा से जुड़ी एक लंबी यात्रा है। उन्होंने अपने शुरुआती राजनीतिक दिनों से लेकर सरकार के प्रमुख के रूप में जिम्मेदारियां संभालने तक के सफर का उल्लेख किया। इस दौरान उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी बड़े पद को लक्ष्य बनाकर राजनीति में कदम नहीं रखा था।

    प्रधानमंत्री ने अच्छे शासन की अपनी सोच पर बात करते हुए ‘सबका साथ, सबका विकास’ को इसका आधार बताया। उन्होंने कहा कि समाज को राजनीति के लिए वोट-बैंक के आधार पर बांटने से कई समस्याएं पैदा हुईं। इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी खेत तक पानी नहीं पहुंचता है तो उसका नुकसान केवल किसी एक जाति के किसान को नहीं होता। इसी तरह बिजली की कमी से पैदा होने वाला अंधेरा किसी एक समुदाय के घर तक सीमित नहीं रहता।

    उन्होंने कहा कि जब किसी समस्या का असर समाज के सभी वर्गों पर पड़ता है तो उसके समाधान का लाभ भी सभी को मिलना चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने अच्छे शासन को ‘सैचुरेशन’ से जोड़ने की बात कही। उनके अनुसार सैचुरेशन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार की योजनाओं और सुविधाओं के लिए पात्र प्रत्येक लाभार्थी तक उनका लाभ पहुंचे। कोई पात्र व्यक्ति छूटे नहीं और किसी हकदार को उसके अधिकार से वंचित न होना पड़े, यही इस व्यवस्था का लक्ष्य है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने राजनीति में आने से पहले के अनुभवों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने आदिवासी इलाकों में काम किया और पहाड़ों में भी समय बिताया। इन अनुभवों के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में संगठन से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। उन्होंने अपने शुरुआती दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय उन्होंने खुद चुनाव लड़ने या किसी बड़े पद पर पहुंचने की योजना नहीं बनाई थी।

    उन्होंने कहा कि जीवन को निजी लाभ के लिए नहीं, बल्कि किसी उद्देश्य के लिए जीना चाहिए। इसी विचार को उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की दिशा से जोड़ा। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद शुरू हुआ उनका सरकार से जुड़ा सफर अब 25 वर्ष पूरे कर चुका है। इस अवसर पर उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता तथा जनता के प्रति जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया।

    ‘सेवा ज्योति’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के संबोधन का प्रमुख केंद्र सुशासन, समान रूप से विकास का लाभ पहुंचाने और सार्वजनिक जीवन में सेवा की भावना रहा। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर के विभिन्न पड़ावों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने कभी इस मुकाम तक पहुंचने की कल्पना नहीं की थी। उनके अनुसार, सार्वजनिक जीवन में उद्देश्य व्यक्तिगत लाभ से ऊपर होना चाहिए और शासन का लक्ष्य सभी तक सुविधाओं और योजनाओं का लाभ पहुंचाना होना चाहिए।