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  • प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत का मामला मानवाधिकार आयोग पहुंचा, ADG को जांच के निर्देश

    प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत का मामला मानवाधिकार आयोग पहुंचा, ADG को जांच के निर्देश


    मथुरा। वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी उर्फ दीपक पटेल लोधी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। आयोग ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आगरा जोन के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) को मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर चोटों के निशान मिलने और परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद इस मामले की जांच में कई पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है।

    सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत पर आयोग ने लिया संज्ञान
    राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली निवासी सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णा राजपूत की शिकायत के बाद यह कदम उठाया है। शिकायत में रसिक दुलारी के जीवन और गरिमा के साथ जीने के अधिकार का हवाला देते हुए घटना की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग की गई है।

    शिकायतकर्ता ने मामले से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक साक्ष्य, मृतक के कमरे की परिस्थितियों और अन्य महत्वपूर्ण सबूतों की जांच कराने की मांग की है। आयोग ने आगरा जोन के ADG को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

    आश्रम की चौथी मंजिल से गिरने से हुई थी मौत
    रसिक दुलारी की 25 सितंबर को वृंदावन स्थित गुरु कृपा कुंज आश्रम में मौत हो गई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वह आश्रम की चौथी मंजिल से नीचे गिरे थे। शुरुआती जानकारी में घटना को आत्महत्या बताया गया था, लेकिन बाद में सामने आए साक्ष्यों और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने मामले की परिस्थितियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए।

    पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर सात स्थानों पर चोट के निशान मिलने की बात सामने आई है। इनमें निजी अंगों पर गंभीर चोटों का भी उल्लेख किया गया है। इन चोटों की परिस्थितियों और घटना से उनके संबंध की जांच की जा रही है। फिलहाल इन तथ्यों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

    परिवार ने लगाए दो साल तक संपर्क नहीं करने देने के आरोप
    रसिक दुलारी के परिवार ने आरोप लगाया है कि आश्रम में दीक्षा लेने के बाद पिछले दो वर्षों से उन्हें अपने बेटे से मिलने या फोन पर बात करने की अनुमति नहीं दी गई। परिजनों का यह भी आरोप है कि उनकी मौत के बाद आश्रम से जुड़े लोगों ने जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया।

    परिवार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

    CCTV फुटेज में खून से लथपथ हालत में दिखे
    पुलिस जांच में आश्रम के सीसीटीवी फुटेज भी अहम कड़ी माने जा रहे हैं। हाल में सामने आए फुटेज में रसिक दुलारी खून से लथपथ और बदहवास हालत में कमरे से बाहर निकलकर सीढ़ियों के रास्ते छत की ओर जाते दिखाई दिए थे।

    जांच एजेंसियां फुटेज के घटनाक्रम, कमरे की स्थिति और अन्य साक्ष्यों का मिलान कर रही हैं, ताकि मौत से पहले की परिस्थितियों को समझा जा सके। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आश्रम में रहने वाले शिष्यों के मोबाइल फोन के इस्तेमाल और बाहरी लोगों से संपर्क को लेकर किस तरह के नियम या प्रतिबंध लागू थे।

    कमरे से मिला खून लगा ग्राइंडर, फॉरेंसिक जांच जारी
    पुलिस को कमरे से खून लगा एक ग्राइंडर मिलने की जानकारी भी सामने आई है। इसके अलावा जांच में नशीले पदार्थों से जुड़े किसी संभावित पहलू को भी खारिज करने के लिए खून के नमूनों की फॉरेंसिक और टॉक्सिकोलॉजी जांच कराई जा रही है।

    इन जांचों का उद्देश्य घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और मृतक के शरीर में किसी संभावित पदार्थ की मौजूदगी के बारे में तथ्य जुटाना है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही इन पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    ट्रस्ट ने पुलिस जांच में सहयोग की बात कही
    इस मामले के सामने आने के बाद प्रेमानंद महाराज के श्री राधा केलीकुंज ट्रस्ट ने बयान जारी कर पुलिस जांच में पूरा सहयोग करने की बात कही है। अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देशों के बाद जांच की निष्पक्षता और साक्ष्यों के परीक्षण पर विशेष ध्यान रहने की उम्मीद है।

    फिलहाल पुलिस विभिन्न साक्ष्यों और परिस्थितियों की जांच कर रही है। मौत के कारणों, शरीर पर मिले चोटों के निशानों और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

  • बेंगलुरु में SIR पर जनता की अदालत, ध्रुव राठी और प्रकाश राज होंगे शामिल; महिलाओं के समर्थन में चप्पल प्रदर्शन

    बेंगलुरु में SIR पर जनता की अदालत, ध्रुव राठी और प्रकाश राज होंगे शामिल; महिलाओं के समर्थन में चप्पल प्रदर्शन


    नई दिल्ली ।
    कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित फ्रीडम पार्क में 8 अक्टूबर को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर पीपुल्स ट्रिब्यूनल आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके, अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज तथा यूट्यूबर ध्रुव राठी शामिल हुए। कर्नाटक के अलग-अलग हिस्सों से SIR से प्रभावित होने का दावा करने वाले लोग भी कार्यक्रम में पहुंचे और मतदाता सूची से जुड़े अपने अनुभव सामने रखे।

    पीपुल्स ट्रिब्यूनल के बाद महिलाओं के समर्थन में चप्पल प्रदर्शन भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम से पहले प्रकाश राज ने लोगों से बड़ी संख्या में फ्रीडम पार्क पहुंचने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि यह लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है और इसमें सभी नागरिकों को साथ आना चाहिए। उन्होंने 8 अक्टूबर को बेंगलुरु पहुंचकर इस अभियान का हिस्सा बनने की अपील की थी।

    प्रकाश राज ने एक वीडियो के जरिए ध्रुव राठी के कार्यक्रम में शामिल होने की जानकारी भी साझा की थी। इसके बाद ध्रुव राठी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर वीडियो जारी कर कार्यक्रम में अपनी मौजूदगी की पुष्टि की। उन्होंने भी कहा कि यह लड़ाई लोकतंत्र को बचाने के लिए है। इसके बाद दोनों की मौजूदगी को लेकर कार्यक्रम से पहले ही चर्चा तेज हो गई थी।

    अभिजीत दीपके ने भी कार्यक्रम को लेकर सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि सत्ता भले ही सरकार के पास हो, लेकिन सड़कें जनता की हैं और इन्हीं सड़कों के जरिए भारत के लोग अपना लोकतंत्र वापस हासिल करेंगे। उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम को लेकर लोगों के बीच और अधिक चर्चा हुई।

    6 अक्टूबर को कार्यक्रम की जानकारी साझा करते हुए सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने कहा था कि पीपुल्स ट्रिब्यूनल में उन कन्नड़ नागरिकों से बातचीत की जाएगी, जिनके बारे में आरोप है कि उन्हें गलत तरीके से मतदाता सूची से हटा दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य SIR से प्रभावित बताए जा रहे लोगों की बात सुनना और उनके अनुभव सामने रखना बताया गया था।

    रांका ने यह भी कहा था कि पीपुल्स ट्रिब्यूनल के बाद महिलाओं के साथ एकजुटता दिखाने के लिए चप्पल प्रदर्शन किया जाएगा। इस प्रदर्शन के जरिए महिलाओं के समर्थन में अपनी आवाज उठाने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में महिलाओं और छात्रों समेत विभिन्न वर्गों के लोगों की मौजूदगी रही और SIR से संबंधित मुद्दों को लेकर नारे तथा पोस्टर भी दिखाई दिए।

    फ्रीडम पार्क में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान SIR को लेकर मतदाता सूची में नाम हटाए जाने से संबंधित शिकायतों को प्रमुखता से उठाया गया। आयोजकों के अनुसार, कर्नाटक के विभिन्न क्षेत्रों से ऐसे लोग कार्यक्रम में पहुंचे, जो इस प्रक्रिया से प्रभावित होने का दावा करते हैं। पीपुल्स ट्रिब्यूनल और उसके बाद हुए चप्पल प्रदर्शन के जरिए आयोजकों ने मतदाता सूची तथा महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखने की कोशिश की।

  • नोबेल साहित्य पुरस्कार 2026: रविंद्रनाथ टैगोर के बाद अमिताव घोष के नाम की चर्चा, आज होगा विजेता का ऐलान

    नोबेल साहित्य पुरस्कार 2026: रविंद्रनाथ टैगोर के बाद अमिताव घोष के नाम की चर्चा, आज होगा विजेता का ऐलान


    नई दिल्ली ।नोबेल पुरस्कार 2026 के तहत मेडिसिन, केमिस्ट्री और फिजिक्स के पुरस्कारों की घोषणा हो चुकी है। अब गुरुवार को साहित्य के नोबेल पुरस्कार का ऐलान किया जाएगा। पुरस्कार की घोषणा से पहले संभावित विजेताओं को लेकर चर्चा तेज है। इस बीच भारतीय लेखक अमिताव घोष का नाम भी संभावित विजेताओं में शामिल बताया जा रहा है। यदि उन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिलता है, तो वह यह सम्मान पाने वाले दूसरे भारतीय होंगे।

    साहित्य के क्षेत्र में भारत की ओर से अब तक केवल रविंद्रनाथ टैगोर को नोबेल पुरस्कार मिला है। टैगोर को 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया था। वह नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई भी थे। ऐसे में अमिताव घोष के नाम की चर्चा ने भारतीय साहित्य के संदर्भ में इस पुरस्कार को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। हालांकि, अभी साहित्य के नोबेल पुरस्कार के विजेता के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

    अमिताव घोष की साहित्यिक रचनाओं में इतिहास, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन जैसे विषय प्रमुख रूप से दिखाई देते हैं। उनकी चर्चित किताबों में ‘सी ऑफ पॉपीज’ और ‘द ग्रेट डिरेंजमेंट’ शामिल हैं। ‘सी ऑफ पॉपीज’ वर्ष 2008 में इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार की शॉर्टलिस्ट में शामिल हुई थी। यह किताब उनकी आइबिस ट्रिलॉजी का पहला भाग है।

    ‘द ग्रेट डिरेंजमेंट’ में जलवायु परिवर्तन और इंसानों पर उसके प्रभाव से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया गया है। अमिताव घोष की किताबों में इतिहास और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों के साथ बदलती दुनिया से संबंधित विषय भी दिखाई देते हैं। इसी साहित्यिक काम के कारण इस बार साहित्य के नोबेल पुरस्कार के संभावित नामों में उनका उल्लेख किया जा रहा है।

    2026 के नोबेल पुरस्कारों की घोषणा कई चरणों में की जा रही है। साहित्य के पुरस्कार की घोषणा गुरुवार को होने वाली है। इससे पहले संभावित विजेता के तौर पर कई नामों को लेकर अनुमान लगाए जा रहे हैं। बुकमेकरों की ओर से लगाए गए अनुमानों में अमिताव घोष का नाम भी शामिल है। हालांकि, विजेता का वास्तविक फैसला पुरस्कार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

    यदि अमिताव घोष को साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिलता है, तो 1913 में रविंद्रनाथ टैगोर के बाद साहित्य के क्षेत्र में यह भारत के लिए दूसरा नोबेल सम्मान होगा। टैगोर को यह पुरस्कार मिलने के बाद लंबे समय से किसी अन्य भारतीय लेखक को साहित्य का नोबेल नहीं मिला है। इसी वजह से घोष के नाम की चर्चा को खास महत्व मिल रहा है।

    नोबेल पुरस्कार से जुड़े विजेताओं को दिसंबर में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कार प्राप्त करने वालों को मेडल, डिप्लोमा और इनामी राशि प्रदान की जाएगी। इस पुरस्कार की राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर बताई गई है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 11.5 करोड़ रुपये के बराबर है। साहित्य के नोबेल पुरस्कार के विजेता की घोषणा होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस बार यह सम्मान किस लेखक को दिया जाता है।

  • राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए INDIA गठबंधन ने दो बार भेजा पत्र, 7 से 9 अक्टूबर का समय मांगा, अब तक जवाब नहीं

    राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए INDIA गठबंधन ने दो बार भेजा पत्र, 7 से 9 अक्टूबर का समय मांगा, अब तक जवाब नहीं

    नई दिल्ली । INDIA गठबंधन के नेताओं ने भारत के राष्ट्रपति से मुलाकात करने का अनुरोध किया है। कांग्रेस के मुताबिक, इस संबंध में पहला अनुरोध पत्र 2 अक्टूबर को भेजा गया था। इसके बाद राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से मुलाकात में शामिल होने वाले नेताओं के नाम मांगे गए थे। कांग्रेस का कहना है कि उसने 5 अक्टूबर को नेताओं के नाम के साथ दोबारा अनुरोध भेजा और 7, 8 या 9 अक्टूबर को मुलाकात के लिए समय मांगा, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।

    कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि विपक्षी नेता राष्ट्रपति से मुलाकात करना चाहते हैं और इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। पार्टी के अनुसार, पहले पत्र के बाद राष्ट्रपति कार्यालय ने मुलाकात में शामिल होने वाले नेताओं की जानकारी मांगी थी। इसके बाद कांग्रेस ने 5 अक्टूबर को दोबारा पत्र भेजकर संबंधित नेताओं के नाम दिए और मुलाकात के लिए तीन तारीखों का विकल्प भी रखा।

    कांग्रेस का कहना है कि 7, 8 या 9 अक्टूबर में से किसी दिन मुलाकात का समय देने का अनुरोध किया गया था। हालांकि, 8 अक्टूबर तक राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से कोई जवाब नहीं मिलने की बात कांग्रेस ने कही है। पार्टी की ओर से यह भी कहा गया है कि वह अगले दिन तक जवाब का इंतजार करेगी। ऐसे में INDIA गठबंधन के नेताओं की राष्ट्रपति से मुलाकात कब होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

    इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी सांसदों की दूसरी लंच बैठक बुलाई। यह बैठक कनॉट प्लेस में दोपहर करीब पौने दो बजे आयोजित हुई। बैठक में विपक्षी सांसदों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद सभी नेताओं के बस से राजघाट पहुंचने की संभावना भी जताई गई।

    बैठक के दौरान कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने केंद्र की बीजेपी सरकार, केंद्रीय मंत्री और चुनाव आयोग पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अराजकता कौन फैला रहा है, यह सवाल है। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि भाजपा, अमित शाह, नरेंद्र मोदी और ज्ञानेश कुमार लोकतंत्र में अराजकता फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष यहां लोकतंत्र की रक्षा के लिए है और वही काम कर रहा है।

    केसी वेणुगोपाल ने इस लड़ाई को विपक्ष के लिए ‘करो या मरो’ की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि उनका सीधा मकसद देश के आम लोगों और मतदाताओं की रक्षा करना है। उनके मुताबिक, विपक्ष इसी उद्देश्य के साथ काम कर रहा है और उसे लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी कोशिश जारी रखनी है।

    इसी मामले से जुड़े घटनाक्रम के बीच नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया के कार्यकर्ता जनपथ पर जमा हुए। वहीं मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी सांसदों की दूसरी लंच बैठक आयोजित की। विपक्षी नेताओं की गतिविधियों के बीच राष्ट्रपति से मुलाकात का मुद्दा भी सामने है। INDIA गठबंधन के नेताओं ने मुलाकात के लिए दो बार अनुरोध भेजा है, लेकिन कांग्रेस के मुताबिक अभी तक जवाब नहीं आया है।

    कांग्रेस की ओर से राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए 7, 8 और 9 अक्टूबर की तारीखों में समय मांगा गया था। 8 अक्टूबर को भी जवाब नहीं मिलने के बाद अब विपक्षी नेता अगले दिन तक इंतजार करने की बात कह रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से मुलाकात के लिए कब समय दिया जाता है और INDIA गठबंधन के नेताओं की राष्ट्रपति से मुलाकात कब होती है, इस पर अब नजर बनी हुई है।

  • प्रियंका-राहुल गांधी समेत कई नेताओं पर दूसरी FIR, आकाशवाणी भवन में जाने की कोशिश और पुलिस से धक्कामुक्की का आरोप

    प्रियंका-राहुल गांधी समेत कई नेताओं पर दूसरी FIR, आकाशवाणी भवन में जाने की कोशिश और पुलिस से धक्कामुक्की का आरोप

    नई दिल्ली: दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस और INDIA गठबंधन के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने एक और FIR दर्ज की है। इस मामले में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाद्रा समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाम शामिल किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान सरकारी काम में रुकावट डालने और सुरक्षाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की करने का आरोप है। यह इस प्रदर्शन को लेकर दर्ज की गई दूसरी FIR है। पुलिस का कहना है कि कुछ प्रदर्शनकारी बिना अनुमति आकाशवाणी भवन के अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे, जिसके दौरान सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई।

    पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कुछ कांग्रेस नेताओं और समर्थकों ने आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश करने की कोशिश की। पुलिस का दावा है कि इसके लिए किसी तरह की अनुमति नहीं ली गई थी। प्रदर्शनकारियों की इस कोशिश के दौरान वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। पुलिस का कहना है कि इस घटनाक्रम में आकाशवाणी भवन के दो सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं। दोनों का मेडिकल कराया गया है। पुलिस ने प्रदर्शन वाली जगह और भवन परिसर की तस्वीरें भी जुटाई हैं। इसके अलावा कुछ दीवारों को नुकसान पहुंचने की बात भी पुलिस की ओर से कही गई है।

    FIR में सरकारी काम में बाधा डालने और सुरक्षाकर्मियों के साथ कथित बदसलूकी से जुड़े आरोपों को शामिल किया गया है। पुलिस प्रदर्शन के दौरान हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है। आकाशवाणी भवन में प्रवेश की कोशिश, सुरक्षाकर्मियों के साथ हुई कथित धक्का-मुक्की और परिसर में हुए नुकसान से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। मामले में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा के अलावा कई अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाम दर्ज किए गए हैं।

    नई FIR को लेकर राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ पहले ही 45 FIR दर्ज हैं और उनके लिए हर FIR एक “मेडल” की तरह है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि उनका लक्ष्य 100 FIR तक पहुंचने का है। उनके इस बयान के बाद मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। पार्टी का कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को उठाने के कारण विपक्षी नेताओं के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

    चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस और INDIA गठबंधन के प्रदर्शन को लेकर पहले से ही राजनीतिक विवाद बना हुआ है। विपक्षी नेता SIR से जुड़े मुद्दों और चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रख रहे हैं। इसी दौरान प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति भी बनी। अब दूसरी FIR दर्ज होने के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है। एक तरफ पुलिस प्रदर्शन के दौरान सरकारी काम में रुकावट और सुरक्षाकर्मियों के साथ कथित धक्का-मुक्की को आधार बनाकर कार्रवाई कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक कार्रवाई बता रही है। इस मामले में पुलिस द्वारा जुटाए गए फोटो और अन्य जानकारी जांच का हिस्सा हैं।

  • नाना पाटेकर ने किसानों के परिवारों के लिए छोड़ दी थी 1.5 करोड़ की कार, मदद के लिए बांटने को दिए थे चेक

    नाना पाटेकर ने किसानों के परिवारों के लिए छोड़ दी थी 1.5 करोड़ की कार, मदद के लिए बांटने को दिए थे चेक

    नई दिल्ली: अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर के साथ उनके अभिनय करियर के अलावा सामाजिक कार्यों से जुड़े कई किस्से भी चर्चा में हैं। किसानों और उनके परिवारों की मदद से जुड़ा ऐसा ही एक प्रसंग सामने आया है। लेखक रणबीर पुष्प ने एक बातचीत में नाना पाटेकर के बारे में बताते हुए कहा था कि उनके बारे में लोगों ने कई बार गलत राय बनाई। उन्होंने उन दावों को भी गलत बताया था, जिनमें नाना पाटेकर के गुस्सैल स्वभाव की वजह से प्रोड्यूसर्स को नुकसान होने की बात कही जाती थी। इसी बातचीत में उन्होंने नाना के किसानों के प्रति संवेदनशील रवैये से जुड़ा एक किस्सा साझा किया था।

    रणबीर पुष्प के मुताबिक, एक दिन नाना पाटेकर न्यूज देख रहे थे। इस दौरान उन्होंने किसानों की आत्महत्या से जुड़ी खबर देखी, जिसमें एक पूरा परिवार शोक में डूबा हुआ था। उस समय नाना अगले दिन करीब 1.5 करोड़ रुपये की लग्जरी कार खरीदने वाले थे और खरीदारी से जुड़ी सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। लेकिन किसानों के परिवार की स्थिति देखने के बाद उन्होंने अपना फैसला बदल दिया। उन्होंने तुरंत अपने दोस्त को फोन किया और कहा कि 15-15 हजार रुपये के चेक बनवाकर सभी किसानों को बांट दिए जाएं। इस किस्से के जरिए उनके किसानों के प्रति लगाव और जरूरतमंद परिवारों की मदद करने की सोच का उल्लेख किया गया था।

    नाना पाटेकर सामाजिक कार्यों से भी जुड़े रहे और उन्होंने NAAM फाउंडेशन की स्थापना की थी। किसानों की परेशानियों और उनके परिवारों की स्थिति को लेकर उनकी चिंता का जिक्र कई बार किया गया है। रणबीर पुष्प ने इसी संदर्भ में कहा था कि जो व्यक्ति किसानों के दुख को देखकर अपनी 1.5 करोड़ रुपये की कार खरीदने का फैसला बदल सकता है, वह किसी का बुरा कैसे सोच सकता है। किसानों के परिवारों की मदद से जुड़ा यह किस्सा नाना पाटेकर के सामाजिक सरोकारों को सामने रखता है।

    नाना पाटेकर के गुस्से से जुड़ा एक और किस्सा भी इसी बातचीत में बताया गया था। रणबीर पुष्प के मुताबिक, एक बार नाना ने किसी व्यक्ति को कार से प्लास्टिक की बोतल बाहर फेंकते हुए देखा। उन्होंने अपनी कार रोककर उस बोतल को उठाया। इसके बाद उन्होंने उस व्यक्ति की कार रुकवाई और शीशा नीचे करने को कहा। नाना ने उससे सवाल किया कि देश को साफ रखने की जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने गांधीजी का जिक्र करते हुए कहा था कि गांधीजी चले गए हैं, लेकिन लोग अब भी इस धरती पर हैं और एक नागरिक के तौर पर देश को साफ रखना उनकी जिम्मेदारी है। इस घटना में उनका गुस्सा सार्वजनिक जगहों पर स्वच्छता और नागरिक जिम्मेदारी को लेकर था।

    नाना पाटेकर ने 75 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। गुरुवार सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया, जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की और करीब 45 मिनट तक लगातार सीपीआर दिया गया, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और उन्हें पुनर्जीवित नहीं किया जा सका। उनके निधन के साथ हिंदी और मराठी सिनेमा के एक चर्चित अभिनेता का करियर समाप्त हुआ। नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उन्होंने 1978 में फिल्म ‘गमन’ से अभिनय की शुरुआत की और आगे चलकर हिंदी तथा मराठी फिल्मों में पहचान बनाई। उन्होंने अपने करियर में तीन नेशनल अवॉर्ड जीते थे और 2013 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। ‘परिंदा’, ‘तिरंगा’, ‘वेलकम’, ‘अपहरण’ और ‘अब तक छप्पन’ जैसी फिल्मों में उनके काम को जाना जाता है।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन में पुलिस से कथित मारपीट की जांच तेज, वीडियो फुटेज से प्रदर्शनकारियों की पहचान में जुटी दिल्ली पुलिस

    जंतर-मंतर प्रदर्शन में पुलिस से कथित मारपीट की जांच तेज, वीडियो फुटेज से प्रदर्शनकारियों की पहचान में जुटी दिल्ली पुलिस

    नई दिल्ली: जंतर-मंतर के पास कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों से कथित धक्का-मुक्की और मारपीट के मामले में दिल्ली पुलिस ने जांच तेज कर दी है। पुलिस के सामने कई मोबाइल वीडियो और अन्य फुटेज आए हैं, जिनकी मदद से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि प्रदर्शन के दौरान किन लोगों की पुलिसकर्मियों के साथ कथित तौर पर बदसलूकी या मारपीट हुई। इन वीडियो के जरिए प्रदर्शनकारियों की पहचान करने के साथ घटनाक्रम की पूरी कड़ी जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

    जांच के दौरान पुलिस यह भी देख रही है कि घटना की शुरुआत किस तरह हुई और अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान क्या-क्या हुआ। सामने आए वीडियो में महिला पुलिस अधिकारियों और कांस्टेबलों के साथ कथित धक्का-मुक्की और मारपीट के दृश्य होने की बात कही गई है। पुलिस अन्य माध्यमों से मिले वीडियो और फुटेज की भी जांच कर रही है, ताकि घटनाओं का क्रम स्पष्ट किया जा सके और कथित तौर पर शामिल लोगों की पहचान की जा सके। मौजूदा जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

    पुलिस के मुताबिक, इस मामले में भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की उन धाराओं के तहत FIR दर्ज होने की संभावना है, जिनमें सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने, उनके काम में बाधा डालने और ड्यूटी के दौरान उन्हें रोकने जैसे अपराध शामिल हैं। इस कार्रवाई से पहले पुलिस अलग-अलग वीडियो फुटेज का मिलान कर रही है। जांच का मुख्य फोकस प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ हुई कथित बदसलूकी और मारपीट की घटनाओं तथा उनमें शामिल लोगों की पहचान पर है।

    यह मामला 7 अक्टूबर को जंतर-मंतर के पास हुए INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन से जुड़ा है। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। विपक्षी नेताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और अन्य विपक्षी सांसदों ने पुलिस बैरिकेड पार करके जंतर-मंतर की ओर जाने की कोशिश की। राहुल गांधी ने बैरिकेड से लगे गेट को खोलने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी।

    प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस ने पुलिस पर लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया और कहा कि कई विपक्षी नेता घायल हुए। प्रियंका गांधी भी प्रदर्शन के दौरान जमीन पर लेटी हुई नजर आईं। उन्होंने महिला पुलिसकर्मियों पर बदसलूकी करने और जमीन पर गिराने का आरोप लगाया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई अन्य नेताओं को पुलिस ने हिरासत में भी लिया। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट के आरोपों की अलग से जांच की जा रही है। दिल्ली पुलिस की ओर से सामने आए मामलों में पुलिसकर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और ड्यूटी में बाधा डालने से जुड़े पहलुओं को देखा जा रहा है। इससे पहले 6 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर भी दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की थी। पुलिस के अनुसार, INDIA ब्लॉक ने संसद से निर्वाचन सदन तक मार्च की योजना बनाई थी, लेकिन इसके लिए आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी।

  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राहुल-प्रियंका का मोर्चा, CJP के अभिजीत दीपके की मुहिम पर पड़ा असर?

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राहुल-प्रियंका का मोर्चा, CJP के अभिजीत दीपके की मुहिम पर पड़ा असर?


    नई दिल्ली।
    मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध लगातार तेज हो रहा है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी वाड्रा पिछले दो दिनों से चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन में सक्रिय नजर आए हैं। दोनों नेताओं ने जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश की और हिरासत में भी लिए गए। 7 अक्टूबर को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पुलिस की बैरिकेडिंग पार कर आकाशवाणी भवन परिसर तक पहुंच गए, जहां उन्होंने विरोध जारी रखा।

    इस पूरे घटनाक्रम ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके की उस मुहिम को भी चर्चा में ला दिया है, जिसमें वह ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दीपके ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन का ऐलान किया है।

    चुनाव आयोग पर रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद

    राहुल गांधी और कांग्रेस पिछले कुछ समय से चुनाव आयोग तथा भारतीय जनता पार्टी पर मतदाता सूची और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। हाल में एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर कथित मतभेद का दावा किया गया था। चुनाव आयोग ने इन दावों का खंडन किया है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।

    CJP ने भी इस विवाद को अपने आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया है। संगठन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर कई मांगें उठा रहा है।

    CJP और कांग्रेस के मुद्दे एक, रास्ते अलग

    कांग्रेस और CJP दोनों ही चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं, लेकिन दोनों की आंदोलन की रणनीति अलग रही है। इससे पहले जब अभिजीत दीपके ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर लंबा आंदोलन किया था, तब राहुल गांधी उनके प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए थे।

    अब ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर कांग्रेस ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की लगातार सक्रियता ने इस आंदोलन को विपक्ष की मुख्यधारा की राजनीति के केंद्र में ला दिया है।

    आकाशवाणी भवन में राहुल-प्रियंका का धरना

    7 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए और कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा बैरिकेड पार कर आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए और वहीं बैठकर विरोध जारी रखा।

    रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान कांग्रेस के दोनों नेताओं के साथ दूसरे विपक्षी दलों के नेता नजर नहीं आए। इसी वजह से INDIA ब्लॉक के भीतर समन्वय को लेकर भी चर्चा शुरू हुई। हालांकि, दूसरे दलों की गैरमौजूदगी को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दावे सामने आए हैं और सभी विपक्षी दलों की ओर से इस पर कोई एकसमान आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

    CJP की फिर दिल्ली कूच की तैयारी

    इस बीच अभिजीत दीपके भी अपनी मुहिम को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं। मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन के बाद उन्होंने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। CJP का कहना है कि यह प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया में बदलाव की मांग को लेकर होगा।

    CJP के अनुसार, 10 अक्टूबर के प्रदर्शन में कई छात्र संगठनों और अन्य समूहों के शामिल होने की योजना है। संगठन ने संकेत दिया है कि अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में भी वह आंदोलन जारी रखने की कोशिश करेगा।

    कौन सा मुद्दा किसके हाथ में?

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन अब अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक समूहों की गतिविधियों में बंटा दिखाई दे रहा है। कांग्रेस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में सीधे सड़क पर उतरकर मुद्दा उठाया है, जबकि CJP अपने अलग संगठनात्मक नेटवर्क के जरिए प्रदर्शन की तैयारी कर रही है।

    ऐसे में 10 अक्टूबर का प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन महत्वपूर्ण होगा। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि CJP अपने आंदोलन को कितना विस्तार दे पाती है और कांग्रेस के सक्रिय होने के बाद उसके अभियान की सार्वजनिक गूंज किस तरह आगे बढ़ती है। फिलहाल चुनाव आयोग ने अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है, जबकि विपक्षी दल इन मुद्दों पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

  • हिमालय के नीचे छिपा गर्मी का बड़ा संकेत, तीन मीटर तक पिघली जमीन की परत, सैटेलाइट अध्ययन में खुलासा

    हिमालय के नीचे छिपा गर्मी का बड़ा संकेत, तीन मीटर तक पिघली जमीन की परत, सैटेलाइट अध्ययन में खुलासा


    नई दिल्ली। हिमालय में बढ़ते तापमान और बदलते मौसम का असर अब केवल बर्फ और ग्लेशियरों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि जमीन के भीतर भी इसके संकेत मिलने लगे हैं। उत्तर पश्चिमी हिमालय के मटियान और बारालाचा क्षेत्र में किए गए एक अध्ययन में गर्मियों के दौरान जमीन की ऊपरी परत के तीन मीटर तक पिघलने का अनुमान सामने आया है। वैज्ञानिकों ने वर्ष 2020 से 2024 के बीच सैटेलाइट आंकड़ों की मदद से जमीन में होने वाले मौसमी बदलावों का अध्ययन किया। इसके बाद जमीन पर रडार तकनीक के जरिए इन परिणामों की जांच की गई जिसमें सैटेलाइट से मिले आंकड़ों की काफी हद तक पुष्टि हुई।

    यह अध्ययन आईआईटी मंडी से जुड़े शोधकर्ताओं की टीम ने किया है। इसमें कीर्ति कुमार महंत इप्शिता प्रधान और प्रोफेसर डेरिक्स प्रेज शुक्ला शामिल रहे। शोध का सार अगस्त 2026 में इटली के फ्लोरेंस में आयोजित 46वीं कॉसपार वैज्ञानिक सभा में प्रस्तुत किया गया। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान और मौसम में बदलाव जमीन की ऊपरी परत को किस तरह प्रभावित कर रहे हैं।

    वैज्ञानिकों के अनुसार हिमालय के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में गर्मियों के दौरान जमीन की ऊपरी परत पिघलती है और सर्दियों में फिर जम जाती है। इस हिस्से को सक्रिय परत कहा जाता है। इस परत की गहराई में होने वाला बदलाव वहां के तापमान और पर्यावरणीय परिस्थितियों का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। अध्ययन में सैटेलाइट आंकड़ों के आधार पर मटियान में सक्रिय परत की मोटाई करीब एक से तीन मीटर तक आंकी गई जबकि बारालाचा में यह लगभग आधे मीटर से दो मीटर तक पाई गई।

    इन आंकड़ों की वास्तविक स्थिति जांचने के लिए शोधकर्ताओं ने ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार यानी जीपीआर तकनीक का इस्तेमाल किया। यह तकनीक जमीन के भीतर रेडियो तरंगें भेजकर अलग अलग परतों की स्थिति का पता लगाने में मदद करती है। जमीन पर हुई जांच में मटियान में पिघलने वाली परत की गहराई करीब 0.6 से 1.2 मीटर तक मिली। वहीं बारालाचा में यह गहराई लगभग 0.2 से 0.5 मीटर रही। इस अंतर के पीछे अधिक ऊंचाई और अपेक्षाकृत कम तापमान को प्रमुख कारण माना गया है।

    शोधकर्ताओं के लिए यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सक्रिय परत के नीचे लंबे समय से जमी जमीन मौजूद होती है। तापमान में लगातार बढ़ोतरी होने पर इसके पिघलने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसका असर जमीन की मजबूती पानी के प्राकृतिक प्रवाह वनस्पति और कार्बन के प्राकृतिक चक्र पर पड़ सकता है। इसके अलावा हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन और अन्य भू तकनीकी जोखिमों को समझने के लिहाज से भी जमीन के भीतर हो रहे इन बदलावों की निगरानी बेहद जरूरी है।

    इस अध्ययन की एक अहम बात यह भी है कि सैटेलाइट और जमीन पर की गई जीपीआर जांच के परिणामों में मजबूत समानता देखने को मिली। इससे वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि भविष्य में सैटेलाइट तकनीक के जरिए उन दुर्गम हिमालयी इलाकों की भी निगरानी की जा सकेगी जहां जमीन पर जाकर लगातार अध्ययन करना बेहद मुश्किल होता है। बदलते तापमान के बीच हिमालय की जमीन में हो रहे ये बदलाव आने वाले समय के पर्यावरणीय और भूगर्भीय जोखिमों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत माने जा रहे हैं।

  • नाना पाटेकर का गुस्सा पड़ा भारी, रोने के लिए ग्लिसरीन नहीं दी और जड़ दिया थप्पड़, एक्ट्रेस ने भी नहीं किया बर्दाश्त

    नाना पाटेकर का गुस्सा पड़ा भारी, रोने के लिए ग्लिसरीन नहीं दी और जड़ दिया थप्पड़, एक्ट्रेस ने भी नहीं किया बर्दाश्त


    नई दिल्ली। नाना पाटेकर हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में गिने जाते हैं जिनकी दमदार और इंटेंस एक्टिंग ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी है। फिल्मों में उनके किरदार अक्सर बेहद आक्रामक और भावनात्मक नजर आते रहे हैं। उनके गुस्सैल स्वभाव को लेकर भी कई किस्से समय समय पर सामने आते रहे हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला किस्सा साल 1997 में रिलीज हुई फिल्म यशवंत से जुड़ा है। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर ने एक सीन में अपनी को स्टार मधु को कथित तौर पर सच में थप्पड़ मार दिया था। खास बात यह रही कि इसके बाद मधु ने भी बिना देर किए उन्हें पलटकर थप्पड़ मार दिया था।

    फिल्म यशवंत में नाना पाटेकर और मधु ने पति पत्नी का किरदार निभाया था। फिल्म का निर्देशन अनिल मट्टू ने किया था। हाल ही में एक इंटरव्यू में मधु ने इस पुराने किस्से को याद किया और बताया कि उस सीन में उन्हें रोना था। आमतौर पर फिल्मों में कलाकारों की आंखों में आंसू लाने के लिए ग्लिसरीन का इस्तेमाल किया जाता है। मधु भी इसी तरीके का इस्तेमाल करना चाहती थीं लेकिन नाना पाटेकर ने उन्हें ग्लिसरीन लगाने से रोक दिया।

    मधु के मुताबिक नाना चाहते थे कि वह आंसुओं के लिए किसी कृत्रिम तरीके का सहारा न लें बल्कि किरदार की भावनाओं को भीतर से महसूस करें। उन्होंने मधु से कहा कि उन्हें स्थिति को महसूस करना चाहिए ताकि आंखों से आंसू अपने आप निकलें। लेकिन मधु उस समय ऐसा नहीं कर पा रही थीं। इसी दौरान नाना ने उन्हें अचानक असली थप्पड़ मार दिया। थप्पड़ इतना जोरदार था कि मधु की आंखों से सच में आंसू निकल आए।

    इस घटना ने मधु को बुरी तरह चौंका दिया क्योंकि रिहर्सल के दौरान ऐसा कुछ नहीं हुआ था। वह इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं थीं। अचानक थप्पड़ पड़ने के बाद उन्हें गुस्सा आ गया। मधु ने बताया कि उनका स्वभाव भी काफी गुस्सैल है इसलिए उन्होंने नाना पाटेकर को तुरंत पलटकर थप्पड़ मार दिया। सेट पर हुआ यह वाकया उनके लिए काफी हैरान करने वाला था लेकिन बाद में उन्होंने नाना के व्यवहार को लेकर एक अहम बात भी स्पष्ट की।

    मधु के अनुसार नाना पाटेकर उनके साथ सामान्य तौर पर रूड नहीं थे। उनका मानना था कि नाना तभी सख्ती दिखाते थे जब उन्हें लगता था कि सामने वाला कलाकार अपनी क्षमता के मुताबिक बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। वह अभिनय को लेकर बेहद गंभीर रहते थे और अपने को स्टार से भी पूरी तरह भावनात्मक प्रदर्शन की उम्मीद करते थे।

    आज इतने वर्षों बाद यह किस्सा फिर चर्चा में है क्योंकि यह नाना पाटेकर की अभिनय शैली और सेट पर उनके काम करने के तरीके की एक अलग तस्वीर सामने लाता है। हालांकि किसी कलाकार को बिना पूर्व जानकारी के थप्पड़ मारना निश्चित तौर पर असहज स्थिति पैदा कर सकता है। मधु के मुताबिक उस समय उन्हें गुस्सा जरूर आया था लेकिन उन्होंने नाना के साथ काम करने के अनुभव को केवल इस एक घटना तक सीमित नहीं माना। यही वजह है कि फिल्म यशवंत से जुड़ा यह किस्सा आज भी बॉलीवुड के चर्चित शूटिंग किस्सों में याद किया जाता है।