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  • यूपी के 5 शहर बाढ़ की चपेट में, लखनऊ में 40 हजार मकान जलमग्न, सड़कों पर नाव और कॉलोनी में मगरमच्छ

    यूपी के 5 शहर बाढ़ की चपेट में, लखनऊ में 40 हजार मकान जलमग्न, सड़कों पर नाव और कॉलोनी में मगरमच्छ


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। प्रदेश के पांच जिले इस समय भीषण बाढ़ की चपेट में हैं और छह प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार नौवें दिन बढ़ रहा है जिसके चलते शहर के कई निचले इलाकों में हालात बिगड़ गए हैं। नीम करोली तपोस्थली में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है जबकि खाटू श्याम और चंद्रिका देवी मंदिर भी जलमग्न हो गए हैं। फैजुल्लागंज इलाके में करीब 40 हजार मकानों में पानी भरने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई सरकारी और निजी स्कूल भी पानी में डूब गए हैं और गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक जलभराव की स्थिति बनी हुई है।

    फैजुल्लागंज में बाढ़ का पानी लगातार बढ़ने के कारण स्थानीय लोगों के सामने खाने पीने के पानी और सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की चुनौती खड़ी हो गई है। कई परिवार अपने घरों को छोड़कर दूसरी जगह जाने को मजबूर हैं। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि पानी घरों के अंदर तक पहुंच चुका है। कई जगह सामान्य आवाजाही पूरी तरह प्रभावित है और लोगों को आने जाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है।

    शाहजहांपुर में बाढ़ के पानी के साथ एक विशाल मगरमच्छ आबादी वाले इलाके में पहुंच गया। मंगलवार सुबह करीब 10 बजे करीब छह से सात फीट लंबा मगरमच्छ एक मकान के मुख्य दरवाजे तक पहुंच गया। दरवाजे पर ताला लगा होने के कारण वह घर के अंदर नहीं जा सका। मगरमच्छ को देखकर आसपास के लोगों में अफरा तफरी मच गई। सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद उसे पकड़ने की कोशिश शुरू की गई। आबादी के बीच मगरमच्छ पहुंचने की घटना ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।

    सीतापुर में भी बाढ़ का असर कम नहीं हुआ है। सरायन और कठना नदियों का पानी अब भी रिहायशी इलाकों में बह रहा है। कई क्षेत्रों में लोगों के घरों और रास्तों तक पानी पहुंच गया है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। तरबगंज और कर्नलगंज तहसील के करीब 10 गांव अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। ब्योन्दा माझा दत्तनगर और नकहरा समेत कई गांवों के चारों तरफ पानी भरा हुआ है। प्रशासन ने लोगों की आवाजाही के लिए 50 से अधिक नावें लगाई हैं। घाघरा और सरयू नदियों के कटान के कारण नवाबगंज क्षेत्र में बीते 24 घंटे के दौरान 20 बीघा से अधिक जमीन और फसल नदी में समा गई है।

    उन्नाव में गंगा का जलस्तर अब धीरे धीरे घटने लगा है लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। नदी का पानी अभी भी चेतावनी बिंदु से ऊपर है। गोताखोर कर्बला हुसैन नगर तेजीपुरवा और सैय्यद कंपाउंड जैसे इलाकों में जलभराव बना हुआ है। सड़कों पर पानी होने के कारण मोहल्लों में नावों से आवागमन किया जा रहा है।

    यूपी में बाढ़ की यह स्थिति लगातार प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। नदियों के बढ़ते जलस्तर के साथ कई इलाकों में कटान और जलभराव से लोगों की परेशानी बढ़ रही है। प्रशासन राहत और बचाव व्यवस्था पर नजर बनाए हुए है लेकिन प्रभावित परिवारों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता सुरक्षित रहने के साथ भोजन पीने का पानी और सामान्य आवागमन की व्यवस्था है।

  • त्योहारों से पहले मिठाई विक्रेताओं पर सख्ती की तैयारी, गाजियाबाद में हर डिब्बे पर Use By Date जरूरी होगी

    त्योहारों से पहले मिठाई विक्रेताओं पर सख्ती की तैयारी, गाजियाबाद में हर डिब्बे पर Use By Date जरूरी होगी

    नई दिल्ली । गाजियाबाद में त्योहारों के मौसम को देखते हुए मिठाई और खाद्य पदार्थों के कारोबार से जुड़े विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से जिले के सभी मिठाई विक्रेताओं के लिए मिठाई के डिब्बे पर ‘Use By Date’ लिखना अनिवार्य होगा। नए प्रावधान को प्रभावी तरीके से लागू करने से पहले दुकानदारों को इसकी जानकारी देने के लिए विभाग की ओर से अभियान चलाया जा रहा है।

    इस अभियान के लिए जिले में 18 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के नेतृत्व में 18 टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों का कारोबार करने वाले व्यापारियों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर रही हैं। व्यापारियों को नए नियम के बारे में जानकारी देने के साथ यह भी बताया जा रहा है कि मिठाई के डिब्बे पर ‘Use By Date’ लिखना क्यों जरूरी है और नए प्रावधान का पालन किस तरह किया जाना है।

    खाद्य सुरक्षा विभाग का जोर फिलहाल व्यापारियों को नियमों के बारे में पर्याप्त जानकारी देने पर है। अधिकारियों का मानना है कि त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले दुकानदारों को नए प्रावधान की जानकारी मिलने से उन्हें अपनी व्यवस्था उसके अनुसार तैयार करने का समय मिल जाएगा। विभाग का उद्देश्य जागरूकता के जरिए नियमों के पालन को बढ़ावा देना है, ताकि बाद में नियमों के उल्लंघन की स्थिति कम से कम हो।

    विभाग के मुताबिक त्योहारों को लेकर विशेष अभियान 15 अक्टूबर से शुरू किया जाएगा। हालांकि, इससे पहले ही गठित 18 टीमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों में खाद्य प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण कर रही हैं। निरीक्षण के दौरान दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में उपलब्ध खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच की जा रही है। इसके साथ ही खाद्य पदार्थों को तैयार करने की प्रक्रिया और प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई की स्थिति भी देखी जा रही है।

    जांच के दौरान खाद्य सामग्री को तैयार करने से लेकर उसके भंडारण तक निर्धारित नियमों के पालन की स्थिति भी देखी जा रही है। विभाग की टीमें यह जांच कर रही हैं कि खाद्य प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तैयार और सुरक्षित तरीके से रखा जा रहा है या नहीं। इस दौरान खाद्य पदार्थों के नमूने भी लिए जा रहे हैं।

    निरीक्षण के दौरान लिए गए खाद्य पदार्थों के सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा खाद्य प्रतिष्ठानों के संचालकों को खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों की जानकारी भी दी जा रही है। विभाग की ओर से व्यापारियों को यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि नए प्रावधान लागू होने से पहले वे अपनी व्यवस्था में जरूरी बदलाव कर सकें।

    सहायक खाद्य आयुक्त सुरेश मिश्रा के मुताबिक फिलहाल खाद्य प्रतिष्ठानों के संचालकों को नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है और 18 टीमों के माध्यम से नियमित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। उनके अनुसार शासन से आदेश मिलने के बाद त्योहारों को लेकर विशेष अभियान शुरू किया जाएगा। इस दौरान खाद्य प्रतिष्ठानों के निरीक्षण, खाद्य सामग्री की जांच और नियमों के पालन पर विभाग की कार्रवाई जारी रहेगी।

    15 अक्टूबर से लागू होने वाले ‘Use By Date’ के प्रावधान को लेकर विभाग ने व्यापारियों तक जानकारी पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। त्योहारों से पहले चलाए जा रहे इस जागरूकता अभियान के साथ नियमित निरीक्षण और खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने की कार्रवाई भी जारी है। विभाग का प्रयास है कि मिठाई विक्रेता नए नियम को समझें और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार उसका पालन सुनिश्चित करें।

  • पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर दर्दनाक हादसा, 100 की रफ्तार में ट्रक में घुसी अर्टिगा, 3 टेनिस खिलाड़ियों की मौत

    पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर दर्दनाक हादसा, 100 की रफ्तार में ट्रक में घुसी अर्टिगा, 3 टेनिस खिलाड़ियों की मौत


    सुल्तानपुर । सुल्तानपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर बुधवार सुबह हुए भीषण सड़क हादसे में तीन टेनिस खिलाड़ियों की दर्दनाक मौत हो गई जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा बल्दीराय थाना क्षेत्र में सुबह करीब 5 बजे हुआ जब लखनऊ से देवरिया जा रही अर्टिगा कार आगे चल रहे ट्रक में पीछे से जा घुसी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार लोग अंदर फंस गए। शुरुआती जांच में पुलिस ने हादसे की वजह चालक को झपकी आना बताया है। कार की रफ्तार करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटा होने की बात भी सामने आई है।

    हादसे के बाद पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर चीख पुकार मच गई। सड़क से गुजर रहे राहगीरों और यूपीडा के सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव का काम शुरू किया। कार के दरवाजे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे जिसके चलते अंदर फंसे लोगों को निकालना आसान नहीं था। सुरक्षाकर्मियों और राहगीरों ने काफी मशक्कत के बाद कार के गेट तोड़कर घायलों और अन्य यात्रियों को बाहर निकाला। इसके बाद सभी को एंबुलेंस की मदद से नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया।

    अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने तीन लोगों को मृत घोषित कर दिया। हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान देवरिया निवासी नित्या प्रजापति उम्र 22 वर्ष इरफान अंसारी उम्र 20 वर्ष और भागलपुर निवासी अनिकेत उम्र 24 वर्ष के रूप में हुई है। तीन अन्य लोग घायल हुए हैं जिनमें देवरिया निवासी आनंद यादव उम्र 23 वर्ष राजू उम्र 22 वर्ष और पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के रहने वाले जयंतो शर्मा उम्र 30 वर्ष शामिल हैं। सभी घायलों को बेहतर इलाज के लिए अयोध्या मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।

    घटना के समय कार में सवार लोग सफर के दौरान सो रहे थे। घायल जयंतो शर्मा ने बताया कि टक्कर के बाद अचानक उनकी नींद खुली। उन्होंने देखा कि कार ट्रक के पिछले हिस्से में घुस चुकी थी। कुछ साथी गंभीर रूप से घायल अवस्था में फंसे हुए थे। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया था और यात्रियों को बाहर निकालने के लिए दरवाजे तोड़ने पड़े।

    प्रारंभिक जांच के मुताबिक कार की रफ्तार काफी तेज थी और चालक को संभवतः नींद या झपकी आने के कारण आगे चल रहे ट्रक का समय रहते अंदाजा नहीं हो सका। तेज रफ्तार में चल रही कार सीधे ट्रक के पिछले हिस्से से जा टकराई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। हादसे के कारणों को लेकर अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    इस हादसे ने एक बार फिर हाईवे पर लंबी दूरी की यात्रा के दौरान नींद और तेज रफ्तार के खतरनाक मेल को सामने ला दिया है। खासकर देर रात और सुबह के समय वाहन चलाते वक्त चालक की थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। तीन युवा टेनिस खिलाड़ियों की अचानक हुई मौत से उनके परिवारों और परिचितों में शोक की लहर है। पुलिस ने मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

  • आधार कार्ड में नाम बदलने के नियम बदले, छोटी स्पेलिंग गलती से लेकर शादी और पूरे नाम के बदलाव तक जानें नई प्रक्रिया

    आधार कार्ड में नाम बदलने के नियम बदले, छोटी स्पेलिंग गलती से लेकर शादी और पूरे नाम के बदलाव तक जानें नई प्रक्रिया


    नई दिल्ली ।
    आधार कार्ड में नाम की स्पेलिंग ठीक कराने, शादी या तलाक के बाद सरनेम बदलने और पूरा नाम बदलने के लिए अब बदलाव की श्रेणी के अनुसार प्रक्रिया अपनानी होगी। UIDAI की नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी SOP 18 सितंबर 2026 से लागू है। इसमें नाम में होने वाले अलग-अलग बदलावों के लिए अलग नियम और दस्तावेज तय किए गए हैं। इसलिए हर तरह के नाम सुधार के लिए एक जैसे कागजात लेकर आधार केंद्र जाना जरूरी नहीं है।

    नाम में मामूली गलती को माइनर नेम चेंज की श्रेणी में रखा गया है। इसमें नाम की छोटी स्पेलिंग गलती सुधारना, नाम के शुरुआती अक्षर या छोटे रूप को पूरा लिखना, बीच या आखिरी नाम जोड़ना अथवा हटाना और नाम के क्रम में बदलाव करना शामिल है। यदि नाम का उच्चारण लगभग समान है, लेकिन उसकी स्पेलिंग में मामूली अंतर है, तो उसे भी छोटे बदलाव के रूप में देखा जा सकता है। इसके अलावा नाम में गलत जगह लगाए गए डॉट और बड़े या छोटे अक्षरों से जुड़ी गड़बड़ी को भी ठीक कराया जा सकता है।

    शादी या तलाक के बाद सरनेम बदलने के लिए नई SOP में अलग व्यवस्था है। ऐसे मामलों में तय प्रारूप का Annexure-D शपथ पत्र और पहचान का प्रमाण देना होगा। शपथ पत्र में यह स्पष्ट किया जाता है कि नाम में बदलाव शादी या तलाक के कारण किया जा रहा है और इससे संबंधित व्यक्ति की पहचान नहीं बदल रही है।

    कुछ मामलों में आधार बनवाते समय ही नाम गलत दर्ज हो जाता है। ऐसा तब हो सकता है जब व्यक्ति द्वारा दिए गए दस्तावेज में नाम सही हो, लेकिन आधार में जानकारी दर्ज करते समय डेटा एंट्री की गलती हो जाए। UIDAI ऐसे मामलों को डेटा एंट्री की त्रुटि के रूप में मानता है। वयस्कों के मामले में Annexure-B के तहत शपथ पत्र के साथ पहचान या रिश्ते का प्रमाण मांगा जा सकता है। नाबालिगों के लिए Annexure-C और संबंधित दस्तावेज लागू होंगे। यदि आधार में अंग्रेजी में नाम सही है, लेकिन स्थानीय भाषा में गलत दर्ज है, तो उसे भी सुधरवाने की व्यवस्था है।

    पूरे नाम में बदलाव के लिए नियम अलग हैं। यदि कोई व्यक्ति अपना पूरा नाम बदलना चाहता है या बदलाव इतना बड़ा है कि उसकी पहचान में परिवर्तन माना जाए, तो इसे मेजर नेम चेंज की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे मामलों में गजट नोटिफिकेशन की जरूरत पड़ सकती है। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार पूरे नाम में बदलाव के लिए राज्य या केंद्र सरकार का गजट नोटिफिकेशन और पुराने नाम वाला पहचान प्रमाण जरूरी होता है।

    आधार में नाम अपडेट कराने के लिए सबसे पहले यह तय करना होगा कि बदलाव किस श्रेणी में आता है। इसके बाद संबंधित श्रेणी में जरूरी दस्तावेज जुटाने होंगे। जहां आवश्यक हो, वहां निर्धारित शपथ पत्र या घोषणा तैयार करनी होगी। इसके बाद आधार एनरोलमेंट या अपडेट सेंटर पर जाकर सहायक दस्तावेजों के साथ नाम अपडेट करने का अनुरोध जमा करना होगा।

    रिक्वेस्ट जमा करने के बाद जरूरी वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी और उसका एक्नॉलेजमेंट लेना होगा। इसी एक्नॉलेजमेंट में उपलब्ध जानकारी के जरिए आधार अपडेट रिक्वेस्ट का स्टेटस ट्रैक किया जा सकता है। इस तरह नाम में छोटे सुधार से लेकर बड़े बदलाव तक प्रक्रिया संबंधित श्रेणी और उसके लिए निर्धारित दस्तावेजों के आधार पर पूरी होगी।

  • वृंदावन गुरुकुल में जहरीली गैस का कहर, टैंक में उतरे 4 छात्रों की मौत, साथी को बचाने की कोशिश बनी जानलेवा

    वृंदावन गुरुकुल में जहरीली गैस का कहर, टैंक में उतरे 4 छात्रों की मौत, साथी को बचाने की कोशिश बनी जानलेवा


    वृंदावन । वृंदावन के एक गुरुकुल में मंगलवार रात दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोर कर रख दिया। महर्षि पाणिनि संस्कृत गुरुकुलम में पानी के टैंक की सफाई करने उतरे चार छात्रों की जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत हो गई। इस हादसे में एक अन्य छात्र भी बेहोश हो गया जिसे गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद पूरे गुरुकुल परिसर में अफरा तफरी मच गई और छात्रों तथा कर्मचारियों में दहशत फैल गई।

    जानकारी के मुताबिक हादसा रात करीब 10 बजे हुआ। गुरुकुल में मौजूद छात्र पानी के एक गहरे टैंक की सफाई कर रहे थे। बताया जा रहा है कि टैंक से पहले मोटर के जरिए पानी बाहर निकाला गया और इसके बाद बचा हुआ पानी बाल्टी से निकाला गया। पानी लगभग खत्म होने के बाद एक छात्र टैंक के अंदर सफाई के लिए उतरा लेकिन कुछ ही देर में वह बेहोश होकर गिर गया। ऊपर मौजूद छात्रों ने उसे आवाज लगाई लेकिन जब कोई जवाब नहीं मिला तो उसे बचाने के लिए दूसरे छात्र भी एक के बाद एक टैंक में उतरते चले गए।

    बताया जा रहा है कि टैंक के भीतर जहरीली गैस मौजूद थी जिसकी चपेट में आने से सभी छात्र बेहोश हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी छात्रों को टैंक से बाहर निकाला गया और तत्काल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने मनु कटारे उम्र 20 वर्ष देवांश उम्र 17 वर्ष विशु उम्र 18 वर्ष और आर्यन उम्र 18 वर्ष को मृत घोषित कर दिया। वहीं रुद्राक्ष उम्र 18 वर्ष की हालत गंभीर बताई गई।

    मृत छात्रों में मनु कटारे और देवांश मध्य प्रदेश के जबलपुर और विदिशा के रहने वाले थे जबकि आर्यन कौशांबी और विशु मेरठ का निवासी था। हादसे की सूचना मिलते ही छात्रों के परिवारों में मातम पसर गया। गुरुकुल में पढ़ने वाले अन्य छात्र भी इस घटना से सदमे में हैं।
    मृत छात्रों में मनु कटारे और देवांश मध्य प्रदेश के जबलपुर और विदिशा के रहने वाले थे जबकि आर्यन कौशांबी और विशु मेरठ का निवासी था। हादसे की सूचना मिलते ही छात्रों के परिवारों में मातम पसर गया। गुरुकुल में पढ़ने वाले अन्य छात्र भी इस घटना से सदमे में हैं।

    वृंदावन के चैतन्य विहार स्थित इस गुरुकुल में करीब 120 छात्र पढ़ते हैं। तीन मंजिला इमारत में 43 कमरे हैं और यह संस्थान पिछले करीब तीन वर्षों से संचालित बताया जा रहा है। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह भी मौके पर पहुंचे और गुरुकुल से जुड़े लोगों तथा छात्रों से घटना की जानकारी ली।

    डीएम ने बताया कि टैंक करीब 12 फीट गहरा था और उसमें बदबू आने के बाद उसकी सफाई की जा रही थी। प्रारंभिक तौर पर जहरीली गैस के कारण छात्रों के बेहोश होने और चार छात्रों की मौत की आशंका जताई गई है। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि टैंक में जहरीली गैस कैसे बनी और सफाई के दौरान सुरक्षा के जरूरी इंतजाम क्यों नहीं किए गए।

    हादसे के बाद गुरुकुल के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री ने भी घटना का संज्ञान लिया है और पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा दिया गया है। हादसे ने एक बार फिर बंद टैंकों और गहरे जलाशयों की सफाई के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी के खतरनाक परिणाम सामने ला दिए हैं।

  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में नहीं पहुंचे ओवैसी, बोले- मेरा क्या काम, बताईं 2 बड़ी मांगें

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में नहीं पहुंचे ओवैसी, बोले- मेरा क्या काम, बताईं 2 बड़ी मांगें


    नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मंगलवार को INDIA गठबंधन के प्रदर्शन में AIMIM प्रमुख और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी शामिल नहीं हुए। ओवैसी ने इसकी वजह साफ करते हुए कहा कि उनकी पार्टी INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। हालांकि, उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की मौजूदा प्रक्रिया में बदलाव और SIR को लेकर अपनी अलग मांगें सामने रखीं।

    ‘मैं INDIA का हिस्सा नहीं, तो मेरा क्या काम’
    ओवैसी से जब पूछा गया कि वह ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन में क्यों शामिल नहीं हुए, तो उन्होंने कहा कि AIMIM INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “मैं उसका हिस्सा नहीं हूं, तो किस्सा ही खत्म। मैं उसका हिस्सा नहीं हूं। बेगानी शादी में मेरा क्या काम।”

    हालांकि, प्रदर्शन में शामिल नहीं होने के बावजूद ओवैसी ने चुनाव आयोग की व्यवस्था और SIR को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में सबसे बड़ी समस्या मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया है।

    CEC के चयन में CJI को शामिल करने की मांग
    ओवैसी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनने की मौजूदा प्रक्रिया कार्यपालिका के पक्ष में है और इसमें बदलाव होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि CEC की नियुक्ति करने वाले पैनल में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल किया जाए।

    मौजूदा कानून के तहत CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति में लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। ओवैसी लंबे समय से इस व्यवस्था में CJI को शामिल किए जाने की मांग करते रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव जरूरी है।

    SIR को लेकर भी विरोध
    ओवैसी ने दूसरी बड़ी आपत्ति मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जताई। उन्होंने कहा कि बिहार में SIR शुरू होने के समय AIMIM ने भी इसका विरोध किया था और पार्टी की ओर से मतदाताओं से संबंधित दस्तावेज जमा किए गए थे।

    ओवैसी ने SIR की तुलना NRC से करते हुए इसे लेकर अपनी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इसे स्वीकार नहीं करती और इस व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है।

    यह भी ध्यान देने वाली बात है कि SIR को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियां और चुनाव आयोग का पक्ष अलग-अलग हैं। विपक्षी दल प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग मतदाता सूची को अपडेट करने और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करने की प्रक्रिया के तौर पर इसका बचाव करता रहा है।

    AAP और DMK भी मंगलवार के प्रदर्शन से दूर
    मंगलवार को दिल्ली में हुए INDIA गठबंधन के प्रदर्शन में AAP और DMK भी शामिल नहीं हुए। हालांकि, AAP ने चुनाव आयोग के खिलाफ आगे होने वाले विरोध प्रदर्शन से दूरी नहीं बनाई है। पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज के मुताबिक, बुधवार को दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के बाहर होने वाले प्रदर्शन में AAP शामिल होगी।

    उन्होंने कहा कि जब भी सड़क पर विरोध प्रदर्शन होगा, AAP के कार्यकर्ता उसमें शामिल होंगे। उनके मुताबिक, कांग्रेस और वाम दलों के साथ AAP भी इस प्रदर्शन में हिस्सा लेगी।

    राहुल-प्रियंका ने आकाशवाणी भवन परिसर में दिया धरना
    मंगलवार को INDIA गठबंधन के सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग की ओर मार्च किया था। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR को रोकना और मतदाता सूची से हटाए गए नामों को बहाल करना शामिल था।

    मार्च को पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं ने आकाशवाणी भवन परिसर में धरना शुरू कर दिया। करीब आठ-नौ घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।

    चुनाव आयोग बोला- शाम 4 बजे तक नहीं मांगा था समय
    विपक्ष के प्रदर्शन के बाद चुनाव आयोग ने मंगलवार रात अपने पक्ष में स्पष्टीकरण जारी किया। आयोग ने कहा कि शाम 4 बजे तक किसी राजनीतिक दल ने अपने अधिकृत प्रतिनिधि के जरिए बैठक के लिए औपचारिक समय नहीं मांगा था।

    आयोग के मुताबिक, करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस ने उसे बताया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में 240 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलकर ज्ञापन देना चाहता है। आयोग ने कहा कि राजनीतिक दलों से बैठक के लिए 2025 में तय प्रक्रिया पहले से लागू है और सभी दल इससे अवगत हैं।

    आयोग के अनुसार, जब बैठक की जगह को लेकर जानकारी मिली तो संसद भवन परिसर में बैठक का प्रस्ताव सामने आया। आयोग ने कहा कि उसके प्रोटोकॉल के मुताबिक राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडल से बैठक निर्वाचन आयोग परिसर में ही होती है। उसने ज्ञापन लेने के लिए वरिष्ठ अधिकारी भेजने का प्रस्ताव भी दिया था।

    इस तरह एक तरफ INDIA गठबंधन CEC के इस्तीफे और SIR को लेकर आंदोलन तेज करने की तैयारी में है, वहीं ओवैसी ने गठबंधन के प्रदर्शन से अलग रहते हुए नियुक्ति प्रक्रिया में CJI को शामिल करने और SIR को खत्म करने की अपनी मांग दोहराई है।

  • सुबह मार्च, दोपहर में आकाशवाणी भवन में धरना, रात में हिरासत, राहुल-प्रियंका के प्रदर्शन में दिनभर क्या-क्या हुआ

    सुबह मार्च, दोपहर में आकाशवाणी भवन में धरना, रात में हिरासत, राहुल-प्रियंका के प्रदर्शन में दिनभर क्या-क्या हुआ


    नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन ने मंगलवार को कई घंटे तक दिल्ली की सड़कों पर राजनीतिक हलचल बनाए रखी। सुबह चुनाव आयोग की ओर मार्च से शुरू हुआ विरोध दोपहर में आकाशवाणी भवन परिसर में धरने में बदल गया और करीब नौ घंटे बाद रात में दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। दोनों को बाद में रिहा कर दिया गया।

    INDIA ब्लॉक के नेता SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी समेत विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग से मिलने और ज्ञापन सौंपने की मांग की। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा कि शाम 4 बजे तक किसी राजनीतिक दल ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत बैठक का समय नहीं मांगा था।

    सुबह 11 बजे शुरू हुआ मार्च
    मंगलवार सुबह INDIA ब्लॉक के सांसद संसद भवन से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च के लिए निकले। राहुल गांधी के साथ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी, जया बच्चन, महुआ मोइत्रा समेत कई विपक्षी नेता मौजूद थे।

    मार्च को संसद मार्ग पर बैरिकेड लगाकर रोक दिया गया। इसके बाद कई नेता सड़क पर बैठ गए। प्रदर्शन के कारण पार्लियामेंट स्ट्रीट पर काफी देर तक यातायात प्रभावित रहा। राहुल गांधी के हाथ में एक तख्ती भी थी, जिस पर लिखा था- “Gyanesh, it’s done bro.” प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि उन्हें CEC से मिलने दिया जाए।

    बैरिकेड पर चढ़े राहुल, लहराया तिरंगा
    मार्च रोके जाने के दौरान राहुल गांधी एक बैरिकेड पर चढ़ गए और हाथ में तिरंगा लेकर उसे लहराया। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे सांसदों को हिरासत में लेना शुरू किया। हालांकि, उस समय राहुल गांधी को हिरासत में नहीं लिया गया था। इसके बाद घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ लिया।

    प्रियंका से बात की और आकाशवाणी भवन पहुंचे
    राहुल गांधी ने आकाशवाणी भवन के परिसर में मौजूद अपनी बहन प्रियंका गांधी से बातचीत की और फिर रिसेप्शन गेट की ओर बढ़ गए। वहां कर्मचारियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिससे कुछ देर तनाव की स्थिति बनी। इसके बाद राहुल गांधी अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ अंदर चले गए।

    कुछ देर बाद प्रियंका गांधी भी पुलिस की बस से बाहर आईं और अपने भाई के साथ प्रदर्शन में शामिल हो गईं। दोनों आकाशवाणी भवन के गेट नंबर-4 के पास एक बरगद के पेड़ के नीचे बैठ गए। देखते ही देखते कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता भी वहां पहुंच गए।

    पेड़ के नीचे शुरू हुआ धरना
    राहुल और प्रियंका के धरने की जानकारी फैलते ही आकाशवाणी भवन के आसपास भीड़ बढ़ने लगी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा, दीपेंद्र हुड्डा, चरणजीत सिंह चन्नी और अन्य नेता भी वहां पहुंचे। धरने की तैयारी के लिए बरगद के पेड़ के नीचे मैट और बाद में गद्दे बिछाए गए। राहुल गांधी ज्यादातर समय बैठे रहे, जबकि प्रियंका गांधी पुलिस अधिकारियों से बातचीत करती रहीं।

    कुछ समय बाद प्रदर्शनकारियों के लिए पानी और खाने-पीने का सामान भी पहुंचा। रिपोर्टों के मुताबिक, चिप्स, भुजिया, चॉकलेट, पानी और सॉफ्ट ड्रिंक के पैकेट मंगाए गए। शाम होने के बाद मच्छर भगाने वाली क्रीम भी धरना स्थल तक पहुंचाई गई।

    राहुल ने कहा- जब तक EC नहीं मिलेगा, धरना जारी रहेगा
    दोपहर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वह लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने SIR को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि जब तक चुनाव आयोग INDIA ब्लॉक के सांसदों से मिलने का भरोसा नहीं देता, तब तक वह वहां से नहीं हटेंगे।

    राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि देश के साथ जो किया गया है, वह “देशद्रोह” है। ये उनके राजनीतिक आरोप हैं; चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।

    चुनाव आयोग ने क्या कहा?
    प्रदर्शन के बीच चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर स्थिति स्पष्ट की। आयोग ने कहा कि मंगलवार शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने अधिकृत प्रतिनिधियों के माध्यम से बैठक के लिए समय नहीं मांगा था।

    आयोग के मुताबिक, शाम करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस से सूचना मिली कि राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलना और ज्ञापन सौंपना चाहता है। आयोग ने कहा कि राजनीतिक दलों के साथ बैठक के लिए 2025 में तय प्रक्रिया मौजूद है और उसी के तहत आपसी सहमति से समय तय किया जाना चाहिए।

    बाद की रिपोर्टों के मुताबिक, विपक्षी सांसदों की ओर से करीब 240 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल मिलने की बात सामने आई थी। चुनाव आयोग ने निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार अपने परिसर में मिलने की बात कही, जबकि विपक्ष की ओर से अलग स्थान पर मिलने का प्रस्ताव रखा गया था।

    शाम ढली, पुलिस ने बढ़ाई कार्रवाई
    शाम तक राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेता आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठे रहे। पुलिस प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने की कोशिश करती रही, लेकिन कई घंटे तक गतिरोध बना रहा। रात करीब 8 बजे दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। पहले कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर बसों में बैठाया गया। इसके बाद TMC सांसद महुआ मोइत्रा और डेरेक ओ’ब्रायन समेत अन्य विपक्षी नेताओं को भी हिरासत में लिया गया।

    आखिर में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। राहुल गांधी को पुलिसकर्मी बस तक ले जाते नजर आए। इसके बाद दोनों को किंग्सवे कैंप ले जाया गया, जहां कुछ समय बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।

    SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग में टकराव
    यह पूरा प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच चल रहे विवाद का हिस्सा है। INDIA ब्लॉक के नेताओं का आरोप है कि SIR के दौरान मतदाता सूचियों से नाम हटाने और अन्य प्रक्रियाओं में गड़बड़ी हुई है। विपक्ष इसी आधार पर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

    मंगलवार का घटनाक्रम इस विवाद को लेकर दिल्ली में विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच टकराव का अब तक का बड़ा प्रदर्शन रहा। सुबह का मार्च, बैरिकेड पर राहुल गांधी का तिरंगा लहराना, आकाशवाणी भवन में अचानक धरना और करीब नौ घंटे बाद नेताओं की हिरासत ने पूरे घटनाक्रम को दिनभर सुर्खियों में बनाए रखा।

  • निमिषा ठाकुरिया मौत मामले में आरोपी आशिक अली पुलिस फायरिंग में घायल, हिरासत से भागने की कोशिश का दावा

    निमिषा ठाकुरिया मौत मामले में आरोपी आशिक अली पुलिस फायरिंग में घायल, हिरासत से भागने की कोशिश का दावा

    नई दिल्ली ।गुवाहाटी विश्वविद्यालय की छात्रा निमिषा ठाकुरिया की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में आरोपी आशिक अली मंगलवार तड़के पुलिस फायरिंग में घायल हो गया। घटना धारापुर इलाके में करीब 3:30 बजे हुई। पुलिस का दावा है कि हिरासत में रहने के दौरान आशिक अली ने भागने की कोशिश की, जिसके बाद उसे रोकने के लिए पुलिस ने गोली चलाई। फायरिंग में उसके दाहिने पैर में दो गोलियां लगीं और दोनों आर-पार निकल गईं।

    गोली लगने के बाद आशिक अली को इलाज के लिए गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया। उसे सुबह करीब 5:35 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, उसके शरीर के किसी दूसरे हिस्से में चोट के निशान नहीं मिले हैं। उसकी हालत को लेकर अस्पताल की ओर से इससे अधिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    आशिक अली के दाहिने पैर में दो स्थानों पर गोली लगी। इनमें एक गोली घुटने के नीचे और दूसरी पिंडली में लगी। दोनों गोलियां पैर को पार करते हुए बाहर निकल गईं। पुलिस के मुताबिक, आरोपी को हिरासत से बाहर ले जाने के दौरान उसने भागने की कोशिश की थी। इसके बाद उसे रोकने के लिए पुलिस ने फायरिंग की।

    आशिक अली की आठ दिन की पुलिस रिमांड मंगलवार को खत्म होनी थी। रिमांड पूरी होने के बाद उसे मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी यानी CJM की अदालत में पेश किया जाना था। पुलिस फायरिंग की घटना रिमांड खत्म होने से कुछ घंटे पहले हुई। पुलिस का कहना है कि आरोपी को हिरासत से बाहर ले जाते समय उसने भागने की कोशिश की थी और इसी दौरान गोली चलाई गई।

    निमिषा ठाकुरिया की मौत का मामला 25 सितंबर को सामने आया था। धारापुर स्थित रुद्राक्ष होमस्टे से गुवाहाटी विश्वविद्यालय की छात्रा का शव बरामद हुआ था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, निमिषा अपने कथित प्रेमी आशिक अली के साथ होमस्टे गई थी। वहां एक कमरे के भीतर युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। घटना के बाद पुलिस ने आशिक अली को हिरासत में लिया और उससे पूछताछ शुरू की थी। इसके बाद उसे पुलिस रिमांड पर रखा गया।

    अब रिमांड खत्म होने से ठीक पहले आशिक अली के पुलिस फायरिंग में घायल होने से मामले में नया मोड़ आया है। पुलिस के मुताबिक, फायरिंग हिरासत से भागने की कोशिश के दौरान हुई। घटना की परिस्थितियों को लेकर आगे की जांच में यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि उस समय वास्तव में क्या हुआ था। फिलहाल आशिक अली अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में है और उसके दाहिने पैर में लगी दो गोलियों का इलाज किया जा रहा है।

  • फ्लाईदुबई विमान में को-पायलट के हमले से कैप्टन स्मित की खोपड़ी में धंसी हड्डी, सऊदी अरब में हुई सर्जरी

    फ्लाईदुबई विमान में को-पायलट के हमले से कैप्टन स्मित की खोपड़ी में धंसी हड्डी, सऊदी अरब में हुई सर्जरी

    नई दिल्ली: दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में को-पायलट के हमले से घायल कैप्टन स्मित की चोटों को लेकर गंभीर जानकारी सामने आई है। हमले में उनकी खोपड़ी की हड्डी टूट गई थी और उन्हें ‘डिप्रेस्ड फ्रैक्चर’ हुआ। इस स्थिति में खोपड़ी की टूटी हुई हड्डी का एक हिस्सा अंदर की ओर मस्तिष्क की तरफ धंस जाता है, जिससे मस्तिष्क पर दबाव पड़ सकता है और गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। हमले के दौरान कैप्टन स्मित को अत्यधिक रक्तस्राव और दर्द का सामना करना पड़ा। इसके अलावा उनके अंगों, छाती और ऊपरी पेट के हिस्से में भी गहरे घाव और चोटें आईं। हालांकि, अब उनकी स्थिति में सुधार होने की जानकारी है।

    घटना के तुरंत बाद विमान को सऊदी अरब के ताबुक स्थित प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअजीज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग करानी पड़ी। इसके बाद कैप्टन स्मित को तत्काल चिकित्सा उपचार दिया गया। सऊदी अरब के अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने उनकी खोपड़ी की इमरजेंसी सर्जरी की। गंभीर चोट के बावजूद समय पर किए गए उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार बताया जा रहा है। सर्जरी के बाद उन्हें आगे की चिकित्सा देखभाल के लिए अबू धाबी ले जाया गया।

    पिछले सप्ताह कैप्टन स्मित को हवाई मार्ग से अबू धाबी लाया गया, जहां उन्हें एक सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहां विशेष डॉक्टरों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य पर नजर रख रही है। परिवार को भी उनसे मिलने की अनुमति दे दी गई है। हमले के कारण उन्हें सिर के अलावा शरीर के अन्य हिस्सों में भी चोटें आई थीं, लेकिन फिलहाल उनके स्वास्थ्य में सुधार की जानकारी सामने आई है। उनकी खोपड़ी में हुआ डिप्रेस्ड फ्रैक्चर इस घटना में सामने आई सबसे गंभीर चोटों में शामिल है।

    यह घटना उस समय हुई जब 38 वर्षीय कैप्टन स्मित कॉकपिट में मौजूद थे। ओमान के को-पायलट हम्मामी द्वारा किए गए हमले के दौरान कैप्टन गंभीर रूप से घायल हो गए। तेजी से हो रहे रक्तस्राव और तेज दर्द के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। इसके बाद अन्य क्रू मेंबर और यात्री कॉकपिट के अंदर पहुंच सके। यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने स्थिति को संभालते हुए हमलावर सह-पायलट को काबू में किया।

    हमले के बाद विमान की सुरक्षित लैंडिंग और यात्रियों को बचाने में कैप्टन स्मित की भूमिका महत्वपूर्ण रही। गंभीर चोटों के बावजूद उन्होंने कॉकपिट में संघर्ष जारी रखा और विमान को सुरक्षित रखने की कोशिश की। घटना के बाद उन्हें पहले सऊदी अरब में चिकित्सा सहायता मिली और खोपड़ी की सर्जरी की गई। इसके बाद बेहतर चिकित्सा देखभाल के लिए उन्हें अबू धाबी के सैन्य अस्पताल में स्थानांतरित किया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

  • पंजाब सरकार ने सीबीआई जांच के हाईकोर्ट आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, चुनाव से पहले राजनीतिक प्रेरणा का लगाया आरोप

    पंजाब सरकार ने सीबीआई जांच के हाईकोर्ट आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, चुनाव से पहले राजनीतिक प्रेरणा का लगाया आरोप

    नई दिल्ली । पंजाब की भगवंत मान सरकार ने पंजाब हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार, धांधली और लेनदेन के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया गया था। यह मामला प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पंजाब के पुलिस महानिदेशक को भेजी गई चिट्ठी और उसमें लगाए गए आरोपों से जुड़ा है। मामले में मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर सिंह घुमन और उनके सहयोगियों नितिन गोहल तथा बीर देविंदर के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जरूरत बताई थी और पंजाब पुलिस के रवैये से संतुष्ट नहीं होने के बाद जांच सीबीआई को सौंप दी थी।

    पंजाब सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों में इस मामले पर विचार किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से कहा गया कि पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और चुनाव से पहले लगाए जा रहे ऐसे आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। विकास सिंह ने कहा कि ये आरोप राज्य में अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग से संबंधित हैं और चुनाव से पहले ऐसे मामले गढ़े जा रहे हैं। सरकार ने हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश को इसी आधार पर चुनौती दी है।

    मामले की शुरुआत ईडी की गोपनीय जांच से जुड़ी है। ईडी ने अपनी जांच के दौरान आरोपों से संबंधित सामग्री जुटाई थी। इसमें अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग करवाने, सरकारी नीतियों और मंजूरियों को प्रभावित करने, निविदाओं तथा अन्य सरकारी कामों में कथित आर्थिक लेनदेन से जुड़े आरोपों का उल्लेख था। ईडी ने 30 जुलाई 2026 को यह सामग्री पंजाब के पुलिस महानिदेशक को भेजी थी और मामले में केस दर्ज करने का अनुरोध किया था। इसके बाद इस मामले को लेकर जांच और कार्रवाई का मुद्दा अदालत तक पहुंचा।

    पंजाब हाईकोर्ट ने अधिवक्ता निखिल सराफ की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सीएमओ से जुड़े लोगों पर लगाए गए कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने ईडी की ओर से पंजाब डीजीपी को भेजे गए पत्रों के आधार पर सीबीआई को केस दर्ज करने के निर्देश दिए। अदालत ने संबंधित जांच एजेंसी को दो महीने के भीतर जांच रिपोर्ट दाखिल करने के लिए भी कहा था। हाईकोर्ट के इसी आदेश के खिलाफ अब पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

    मामले में सरकार का कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़े आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित तरीके से उठाया जा रहा है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए इस मामले पर जल्द सुनवाई की मांग की है। दूसरी ओर, हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की आवश्यकता को देखते हुए सीबीआई को जांच सौंपने का फैसला किया था। अदालत ने जांच को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के लिए दो महीने में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश भी दिया था।

    अब सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार की चुनौती पर सुनवाई के बाद मामले की आगे की दिशा तय होगी। इस मामले में ईडी की ओर से जुटाई गई सामग्री में ट्रांसफर-पोस्टिंग, सरकारी नीतियों और मंजूरियों को प्रभावित करने, निविदाओं तथा अन्य सरकारी कार्यों में कथित आर्थिक लेनदेन से जुड़े आरोप शामिल हैं। पंजाब सरकार ने इन आरोपों और जांच की प्रक्रिया को विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। हाईकोर्ट पहले ही सीबीआई को केस दर्ज कर जांच करने और निर्धारित समय में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दे चुका है।