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  • अवैध प्रवासन बनी चुनौती.. 5 साल में 81 देशों ने एक लाख से ज्यादा भारतीयों को किया डिपोर्ट

    अवैध प्रवासन बनी चुनौती.. 5 साल में 81 देशों ने एक लाख से ज्यादा भारतीयों को किया डिपोर्ट


    नई दिल्ली।
    अवैध प्रवासन (Illegal Migration) सभी देशों के लिए चुनौती बनी हुई है। कई देशों में यह राजनीतिक मुद्दा भी बना है। विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) के आंकड़े बताते हैं कि विदेशों में भारतीयों के अवैध रुप से प्रवासन (Illegal Migration of Indians) के मामले बढ़ रहे हैं। पिछले पांच सालों के दौरान 81 देशों से एक लाख से भी ज्यादा भारतीयों को डिपोर्ट (Deport-वापस भेजना) किया गया है। यह संख्या लगातार बढ़ रही है। मौजूदा समय में औसतन 25 हजार भारतीय हर साल डिपोर्ट होकर आ रहे हैं। जबकि, पांच साल पहले तक यह संख्या 14-15 हजार के बीच होती थी।

    विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार दुनिया के तमाम छोटे बड़े देशों से भारतीयों को डिपोर्ट किया जा रहा है। यहां तक की बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका, कंबोडिया से भी सैकड़ों भारतीयों को डिपोर्ट किया गया है। 2021-2025 के दौरान करीब 1.05 लाख भारतीय वापस भेजे गए हैं।


    विदेशों से वापस भेजने के दो प्रमुख कारण

    विदेश मंत्रालय के अनुसार दो प्रमुख कारणों से डिपोर्ट किया जाता है। एक वीजा की अवधि खत्म होने के बावजूद अवैध रुप से रहने के कारण। दूसरे, बिना वर्क वीजा के किसी दूसरे देश में रोजगार करना। कुछ मामलों में छोटे-मोटे आपराधिक कृत्यों के कारण भी डिपोर्ट कर दिया जाता है। मंत्रालय के अनुसार पिछले पांच सालों में सबसे ज्यादा 68258 भारतीयों को सऊदी अरब से डिपोर्ट किया गया है। दूसरे नंबर पर अमेरिका से 7824 तथा मलेशिया से 6553 लोगों को डिपोर्ट किया गया।

    कुछ देशों से डिपोर्ट होने वालों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। 2021 में अमेरिका से 808 लोग डिपोर्ट हुए थे लेकिन 2025 में यह संख्या 3812 हो गई। यूएई से तब 358 डिपोर्ट हुए थे लेकिन 2025 में यह 1467 पहुंच गई। इसी प्रकार म्यांमार से डिपोर्ट होने वालों की संख्या 338 से बढ़कर 1591 हो गई। बहरीन से वापस भेजे गए भारतीय 273 से बढ़कर 764 तक हो गए। बांग्लादेश से 64 से 156, थाइलैंड से 256 से 481, मालदीव से 16 से 127, कंबोडिया से 44 से 305, कनाडा से 27 से 188 लोग भारत भेजे गए हैं।


    अमेरिका और खाड़ी देशों से सबसे अधिक भारतीय भेजे गए

    आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका, खाड़ी देशों के साथ-साथ यूरोप के छोटे देशों से भी बड़े पैमाने पर लोग डिपोर्ट होकर भारत आ रहे हैं। इनमें जार्जिया से 133, पनामा से 188, पोलेंड से 127, यूके से 578, म्यांमार से 2165, चीन से 1000, बांग्लादेश से 478, श्रीलंका से 1866 भारतीय पिछले पांच सालों में वापस भेजे गए हैं।

    अवैध प्रवासन चुनौती
    हालांकि सभी देश इस प्रकार के आंकड़ों को साझा नहीं करते हैं। विदेश मंत्रालय के ये आंकड़े अपने दूतावासों से मिले हैं। लेकिन डिपोर्ट होने वाले नागरिक चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका सभी के हैं। दरअसल, ज्यादातर मामले रोजगार से जुड़े हैं जिसके चलते में लोग गलत वीजा पर रोजगार करते हैं या वीजा खत्म होने के बाद भी काम करते रहते हैं।


    कैसे होते हैं डिपोर्ट

    यदि कोई भारतीय डिपोर्ट किया जाता है तो संबंधित देश भारत के दूतावास से संपर्क करता है। दूतावास उसकी नागरिकता की पुष्टि होने के बाद उसे भारत भेजने की अनुमति देता है। इसके लिए जरूरी दस्तावेज जारी किया जाता है।

  • भारत दौरे पर आए UAE के राष्ट्रपति, PM मोदी ने गिफ्ट किया शाही झूला… साथ झूलते भी दिखे

    भारत दौरे पर आए UAE के राष्ट्रपति, PM मोदी ने गिफ्ट किया शाही झूला… साथ झूलते भी दिखे


    नई दिल्ली।
    एक दिन के भारत दौरे (India visit) पर आए यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान (UAE President Mohammed bin Zayed Al Nahyan) का एयरपोर्ट पर ही शानदार स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) प्रोटोकॉल तोड़कर उनकी अगुवाई करने दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे थे। दोनों नेता बेहद गर्मजोशी के साथ गले मिले। मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें पारंपरिक तोहफे भी दिए।

    प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति को शाही नक्काशीदार एक झूला गिफ्ट किया। इसमें गुजराती हस्तशिल्प की कलाकारी दिखाई देती है। इसके अलावा झूला अच्छे संबंधों और सहजता का प्रतीक है। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चांदी की एक संदूक में पश्मीना शॉल भी नाहयान को गिफ्ट किया। यह चांदी का ब़क्स तेलंगाना में बनाया गया है। दोनों गिफ्ट एक साथ देकर भारत की साझी विरासत और परंपरा को दिखाने का प्रयास किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नाहयान साथ में झूले पर बैठे भी नजर आए।

    यह उपहार वर्ष 2026 को संयुक्त अरब अमीरात द्वारा ‘परिवार का वर्ष’ घोषित किए जाने के संदर्भ में भी विशेष रूप से सार्थक है। प्रधानमंत्री ने उन्हें एक सुसज्जित चांदी के बॉक्स में पश्मीना शॉल भी भेंट की। यह पश्मीना शाल कश्मीर की है और अत्यंत महीन ऊन से हाथ से बनाई जाती है, जिससे यह मुलायम, हल्की और गर्म होती है। शाल को तेलंगाना में निर्मित एक सजावटी चांदी के बॉक्स में रखा गया है। ये दोनों उपहार मिलकर भारत की समृद्ध हथकरघा और हस्तशिल्प परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं।

    इसी प्रकार, सुसज्जित चांदी के बॉक्स में रखी गई पश्मीना शाल शेखा फातिमा बिंत मुबारक अल केतबी को भी भेंट की गई। उन्हें चांदी के बॉक्स में कश्मीरी केसर भी उपहार स्वरूप प्रदान किया गया। कश्मीर घाटी में उगाया जाने वाला केसर अपने गहरे लाल रेशों और तीव्र सुगंध के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध और विशेष माना जाता है।

  • त्योहारों पर हवाई किराए में भारी वृद्धि को SC ने बताया 'शोषण', DGCA से मांगा जवाब

    त्योहारों पर हवाई किराए में भारी वृद्धि को SC ने बताया 'शोषण', DGCA से मांगा जवाब


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने त्योहारों के दौरान हवाई किराए (Airfares) में होने वाली अत्यधिक वृद्धि पर चिंता जताते हुए सोमवार को कहा कि वह इस संबंध में ‘अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव’ को लेकर हस्तक्षेप करेगा। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए विमानन कंपनियों (Aviation companies) द्वारा हवाई किराए (Airfares) में अत्यधिक वृद्धि को ‘शोषण’ करार दिया और केंद्र सरकार तथा नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) से अपना जवाब दाखिल करने को कहा। याचिका में निजी विमानन कंपनियों के हवाई किराए और अन्य शुल्कों में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए बाध्यकारी नियामक दिशानिर्देशों का अनुरोध किया गया है।

    पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक से कहा, ‘हम निश्चित रूप से हस्तक्षेप करेंगे। कुंभ और अन्य त्योहारों के दौरान यात्रियों के शोषण को ही देख लीजिए। दिल्ली से प्रयागराज और जोधपुर के किराए पर नजर डालिए।’ न्यायमूर्ति मेहता ने अदालत में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि हो सकता है अहमदाबाद के हवाई किराए में वृद्धि न हुई हो, लेकिन जोधपुर जैसे अन्य गंतव्यों के लिए किराए में भारी वृद्धि हुई है।

    केंद्र की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए कौशिक द्वारा समय मांगे जाने के अनुरोध के बाद, शीर्ष अदालत ने मामले में आगे की सुनवाई के लिए 23 फरवरी की तारीख तय की।

    पिछले साल 17 नवंबर को, शीर्ष अदालत ने सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायणन की याचिका पर केंद्र और अन्य से जवाब मांगा था, जिन्होंने नागरिक उड्डयन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले एक मजबूत और स्वतंत्र नियामक की स्थापना का अनुरोध किया। न्यायालय ने केंद्र सरकार, डीजीसीए और भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण को नोटिस जारी कर याचिका पर जवाब मांगा है।

    याचिका में दावा किया गया कि सभी निजी विमानन कंपनियों ने बिना किसी ठोस वजह के ‘इकोनॉमी क्लास’ के यात्रियों के लिए मुफ्त ‘चेक-इन बैगेज’ 25 किलोग्राम से घटाकर 15 किलोग्राम कर दिया है, ‘जिससे पहले जो टिकट सेवा का हिस्सा था, उसे राजस्व के एक नए स्रोत में बदल दिया गया है।’ इसमें कहा गया है कि ‘चेक-इन के लिए केवल एक ही सामान की अनुमति देने की नई नीति और चेक-इन बैगेज का लाभ न उठाने वाले यात्रियों को किसी भी प्रकार की छूट, मुआवजा या लाभ न देना इस उपाय की मनमानी और भेदभावपूर्ण प्रकृति को दर्शाता है।’

    याचिका में दावा किया गया कि वर्तमान में, किसी भी प्राधिकरण के पास हवाई किराए या अन्य सहायक शुल्कों की समीक्षा करने या उन पर अंकुश लगाने की शक्ति नहीं है, जिससे विमानन कंपनियों को छिपे हुए शुल्कों और अप्रत्याशित मूल्य निर्धारण के माध्यम से उपभोक्ताओं का शोषण करने की अनुमति मिलती है। इसमें कहा गया है कि नियामकीय नियंत्रण के अभाव के कारण मनमाने ढंग से किराए में बढ़ोतरी होती है, खासकर त्योहारों या विशेष स्थिति में, जिससे गरीब और अंतिम समय में यात्रा का कार्यक्रम बनाने वाले यात्रियों को नुकसान होता है।

    याचिका में कहा गया है कि अमीर लोग पहले से योजना बना सकते हैं और टिकट बुक कर सकते हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों को अत्यधिक कीमत पर टिकट खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

  • सर्दी के मौसम में बारिश का अलर्ट… अगले तीन दिन इन राज्यों में गिर सकता है पानी

    सर्दी के मौसम में बारिश का अलर्ट… अगले तीन दिन इन राज्यों में गिर सकता है पानी

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir), पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) जैसे उत्तरी राज्यों (Northern States) में शीतलहर (Cold Wave) का प्रकोप जारी है। इस बीच कश्मीर, राजस्थान और कुछ अन्य क्षेत्रों में तापमान में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) में आज सुबह धुंध छाई है। राजस्थान में तापमान में वृद्धि होने लगी है और अब अधिकतर शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया जा रहा है। राज्य की राजधानी जयपुर में न्यूनतम तापमान 13.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कश्मीर घाटी में भीषण ठंड की 40 दिनों की अवधि चिल्लई कलां के बीच न्यूनतम तापमान में कुछ डिग्री की वृद्धि होने से लोगों को थोड़ी राहत मिली। शोपियां और पुलवामा शहरों में न्यूनतम तापमान क्रमशः शून्य से 4.7 डिग्री कम और शून्य से 5.1 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया।

    जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 20 से 21 जनवरी तक छिटपुट बारिश/बर्फबारी की संभावना है। हिमालयी क्षेत्र में 22 से 24 जनवरी तक भारी वर्षा और बर्फबारी होने की उम्मीद है, जो 25 जनवरी को कम तीव्र होगी। कश्मीर घाटी में 22-23 जनवरी, हिमाचल के ऊंचे इलाकों में 23 जनवरी को अलग-अलग स्थानों पर भारी बर्फबारी हो सकती है। पंजाब में 22 से 25 जनवरी तक छिटपुट से मध्यम वर्षा संभावित है। हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 22-25 जनवरी, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 23-24 जनवरी और राजस्थान में 22-23 जनवरी को छिटपुट वर्षा की संभावना है। 22-23 जनवरी को पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान में 30-40 किमी/घंटा की हवाएं चल सकती हैं।


    तापमान में कितना आएगा बदलाव

    उत्तर-पश्चिम भारत में अगले 3 दिनों तक न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, उसके बाद 2 दिनों में 2-4°C की वृद्धि और फिर 2 दिनों में 2-3°C की गिरावट संभावित है। महाराष्ट्र में अगले 3 दिनों में न्यूनतम तापमान 2-4°C बढ़ सकता है, उसके बाद कोई खास बदलाव नहीं होगा। देश के अन्य हिस्सों में न्यूनतम तापमान स्थिर रहेगा। 20 जनवरी तक पंजाब के कुछ इलाकों में सुबह-रात बहुत घना कोहरा छाएगा, 21 जनवरी को घना कोहरा रहेगा। हरियाणा, चंडीगढ़, बिहार में 21 जनवरी तक और उत्तर प्रदेश में 20 जनवरी तक घना कोहरा संभावित है। हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में 20-21 जनवरी को शीतलहर की स्थिति बनी रहेगी।


    पंजाब और हरियाणा में कैसा है मौसम

    पंजाब और हरियाणा के भी कई स्थानों पर शीतलहर का प्रकोप है। अमृतसर सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 2.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से एक डिग्री कम है। फरीदकोट में न्यूनतम तापमान 3.4 डिग्री सेल्सियस, लुधियाना में 4.6 डिग्री, पठानकोट में 4.7 डिग्री, फिरोजपुर में 5.7 डिग्री, होशियारपुर में 5.9 डिग्री, पटियाला में 6.5 डिग्री और गुरदासपुर में 6.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हरियाणा में भिवानी सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान तीन डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। गुरुग्राम में न्यूनतम तापमान 5.5 डिग्री, नारनौल में 6 डिग्री, करनाल में 6.4 डिग्री और अंबाला में 7.8 डिग्री सेल्सियस रहा। दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ में भी रात ठंडी रही और न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से दो डिग्री कम है।

    शिमला स्थित मौसम केंद्र ने हिमाचल प्रदेश में शीतलहर की स्थिति बनी रहने की संभावना जताई है। मौसम केंद्र ने मंगलवार के लिए 5 जिलों (कांगड़ा, मंडी, ऊना, बिलासपुर और हमीरपुर) के अलग-अलग इलाकों में भीषण ठंड का येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार तक मौसम शुष्क बना रहेगा, लेकिन एक और शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ के जल्दी आने के कारण गुरुवार से शनिवार के बीच राज्य में फिर से बर्फबारी और बारिश का नया दौर देखने को मिल सकता है। इस पश्चिमी विक्षोभ के बुधवार से ही उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करने की संभावना है। विभाग ने गुरुवार और शुक्रवार के लिए कई जिलों में यलो अलर्ट भी जारी किया है, जिसमें राज्य के अलग-अलग स्थानों पर भारी बर्फबारी और बारिश की चेतावनी दी गई है।

  • मध्‍य प्रदेश में 22-23 जनवरी के बाद हल्की बारिश के संकेत

    मध्‍य प्रदेश में 22-23 जनवरी के बाद हल्की बारिश के संकेत

    भोपाल। मध्य प्रदेश के आसपास सक्रिय दो साइक्लोनिक
    सर्कुलेशन के कारण मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। इसके असर से प्रदेश
    के पूर्वी जिलों में बादल छाए हुए हैं। आने वाने दिनों में प्रदेश के कुछ
    इलाकों में हल्की बारिश की संभावना है।

    बीते रविवार को भोपाल,
    नर्मदापुरम सहित कई इलाकों में आसमान में बादलों की मौजूदगी रही। मौसम
    विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों तक कड़ाके की ठंड से राहत मिलने की संभावना
    है, हालांकि इसके बाद बूंदाबांदी हो सकती है। सुबह के समय कोहरे का असर भी
    बना रहेगा। आज सोमवार सुबह ग्वालियर, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़,
    छतरपुर, पन्ना और सतना में मध्यम स्तर का कोहरा देखा गया। वहीं भोपाल,
    इंदौर, उज्जैन समेत एक दर्जन से अधिक जिलों में हल्का कोहरा छाया रहा। इस
    बीच, तापमान में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई है।

    मौसम विभाग के
    मुताबिक, प्रदेश के कई हिस्सों में बादल छाए रहने से तापमान में उतार-चढ़ाव
    देखा जा रहा है। रविवार को दिन के तापमान में बढ़ोतरी हुई। इसकी मुख्य वजह
    प्रदेश के ऊपरी हिस्से से गुजर रहे दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन हैं। इसके
    अलावा पाकिस्तान के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ भी मौसम को प्रभावित कर रहा
    है। 19 जनवरी और 21 जनवरी की रात से दो पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत
    में असर दिखा सकते हैं, जिसका प्रभाव मध्य प्रदेश में भी पड़ने की संभावना
    है। इसके चलते 22 और 23 जनवरी के बाद प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्की
    बारिश हो सकती है।

    प्रदेश में सबसे कम तापमान शहडोल के कल्याणपुर में
    दर्ज किया गया, जहां न्यूनतम तापमान 3.7 डिग्री सेल्सियस रहा। खजुराहो में
    5.8 डिग्री, नौगांव और उमरिया में 6 डिग्री, रीवा में 6.4 डिग्री, पचमढ़ी
    में 6.8 डिग्री, मंडला में 7.2 डिग्री और मलाजखंड में 7.6 डिग्री सेल्सियस
    तापमान रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश के पांच बड़े शहरों में न्यूनतम तापमान 10
    डिग्री से ऊपर रहा। भोपाल में 11 डिग्री, इंदौर में 12 डिग्री, ग्वालियर
    में 10 डिग्री, उज्जैन में 13 डिग्री और जबलपुर में 10.5 डिग्री सेल्सियस
    तापमान दर्ज हुआ।

  • PM मोदी 23 जनवरी को तमिलनाडु में NDA के चुनावी अभियान की करेंगे शुरुआत, नए दलों के जुड़ने के आसार

    PM मोदी 23 जनवरी को तमिलनाडु में NDA के चुनावी अभियान की करेंगे शुरुआत, नए दलों के जुड़ने के आसार


    नई दिल्‍ली । तमिलनाडु विधानसभा चुनाव अब चार महीने दूर हैं और इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 जनवरी को मदुरान्दगम में एक विशाल जनसभा के माध्यम से एनडीए (NDA) के चुनाव अभियान का बिगुल फूकेंगे। मदुरान्दगम चेन्नई से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। राज्य के भाजपा नेता इस जनसभा की तैयारियों में जुट गए हैं। मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि इस कार्यक्रम में NDA से जुड़ रहे कुछ राजनीतिक दलों के साथ चुनावी गठबंधन की घोषणा भी की जा सकती है।

    NDA में गठबंधन की तस्वीर 23 जनवरी को हो सकती है साफ
    तमिलनाडु में NDA का नेतृत्व AIADMK के पास है और पार्टी ने संकेत दे दिया है कि वह DMDK एक्टर विजयकांत की पार्टी) के साथ चुनावी गठबंधन को अंतिम रूप देने के करीब है। वहीं, BJP चाहती है कि O. पन्नीरसेल्वम और AMMK के नेता T.T.V. दिनकरण को भी NDA में शामिल किया जाए, लेकिन अभी तक AIADMK महासचिव E. पलनिस्वामी से इस पर सहमति नहीं बनी है।सूत्रों के अनुसार, TTV दिनकरण की पार्टी को NDA के घटक दल के रूप में शामिल किया जा सकता है और इसका ऐलान 23 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में हो सकता है। हालांकि, O. पन्नीरसेल्वम के साथ निजी रंजिश के कारण पलनिस्वामी उन्हें NDA में शामिल करने के लिए तैयार नहीं हैं।

    इस बीचAIADMK ने पहले ही PMK के एक धड़े के साथ गठबंधन का ऐलान कर दिया है। PMK के मुखिया डॉ. रामदोस ने अपने बेटे अंबु मणि रामदोस की बगावत के बावजूद चुनावी गठबंधन को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं की है। वहीं, उनके बेटे अंबुमणि ने AIADMK के साथ मिलकर NDA का हिस्सा बनने का फैसला किया है। इस तरह तमिलनाडु में NDA के गठबंधन की पूरी तस्वीर 23 जनवरी की पीएम मोदी की जनसभा में स्पष्ट होने की संभावना है।

    मजबूत NDA गठबंधन बनाने की कोशिश
    AIADMK और BJP इस बार तमिलनाडु में सत्तारूढ़ DMK-कांग्रेस गठबंधन को चुनौती देने के लिए मजबूत NDA गठबंधन बनाने में जुटी हैं। इस गठबंधन में एक्टर विजय की पार्टी DMDK TVK को भी शामिल किया जा सकता है, जिसे इस चुनाव का X फैक्टर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि विजय का राजनीतिक असर रजनीकांत और कमल हासन की तुलना में ज्यादा है, क्योंकि उन्होंने अपनी फिल्मी लोकप्रियता के चरम पर रहते हुए राजनीति में कदम रखा। यही वजह है कि NDA इस बार चुनावी रणनीति में उनके योगदान को अहम मान रही है। NDA के लिए यह गठबंधन न सिर्फ चुनावी ताकत बढ़ाने का मौका है, बल्कि राज्य में सत्तारूढ़ DMK-कांग्रेस गठबंधन को चुनौती देने का भी प्रमुख हथियार बन सकता है।

    तमिलनाडु चुनाव में विजय की दिशा तय नहीं
    एक्टर विजय और उनकी पार्टी TVK ने स्पष्ट किया है कि वे DMK और BJP दोनों से समान दूरी बनाकर चलेंगे। हालांकि, AIADMK के कुछ नेता उनके साथ गठबंधन को लेकर बैकडोर बातचीत में लगे हुए हैं। इस बीच राजनीतिक हलकों में यह अटकलें भी लग रही हैं कि अगर TVK और AIADMK के बीच समझौता होता है, तो BJP की स्थिति क्या होगी। तमिलनाडु में यह भी चर्चा है कि विजय की फिल्म जन नायक को सेंसर सर्टिफिकेट नहीं मिलने और करूर भगड़ग मामले में CBI से पूछताछ को भाजपा की साजिश के रूप में पेश किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में विजय और उनकी पार्टी की दिशा NDA और DMK-कांग्रेस गठबंधन दोनों के लिए अहम हो सकती है।

    स्टालिन सरकार के खिलाफ गुस्से को भुनाने की रणनीति
    BJP का मानना है कि लॉ एंड आर्डर और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर तमिलनाडु में लोगों के मन में स्टालिन सरकार के खिलाफ नाराजगी है, जिससे उनके लिए सत्ता में बने रहना मुश्किल हो सकता है। इसी कारण पार्टी ने अपने सबसे बड़े ट्रम्प कार्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनावी कैंपेन की शुरूआत के लिए बुलाने का फैसला किया है। 23 जनवरी को PM मोदी मदुरान्दगम में विशाल जनसभा के साथ NDA अभियान की शुरुआत करेंगे, ताकि उनकी लोकप्रियता का लाभ पार्टी को मिल सके। विश्लेषकों का कहना है कि जिस तरह पीएम मोदी ने चुनाव से चार महीने पहले ही दौरा शुरू करने वाले हैं उससे लगता है कि आने वाले दिनों में उनके कई दौरे तमिलनाडु में होने की संभावना है।

  • मुंबई में बीजेपी के मेयर के लिए तैयार हो गए एकनाथ शिंदे? बोले- 'महायुति को मिले जनादेश का…'

    मुंबई में बीजेपी के मेयर के लिए तैयार हो गए एकनाथ शिंदे? बोले- 'महायुति को मिले जनादेश का…'


    नई दिल्ली।बृहन्मुंबई महानगरपालिका बीएमसी चुनावों के नतीजों के बाद मुंबई में महापौर पद को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट कर दिया है कि शिवसेना बीएमसी में बीजेपी-नेतृत्व वाली महायुति को मिले जनादेश का पूरा सम्मान करेगी।

    हालांकि मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर यह खबर उछली कि शिवसेना के 29 निर्वाचित पार्षदों को फाइव स्टार होटल में शिफ्ट किया गया है लेकिन सूत्रों के अनुसार इसे अनावश्यक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। दरअसल हाल ही में हुए चुनावों में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को मामूली बहुमत मिला और इसी के चलते इन नवनिर्वाचित पार्षदों को अस्थायी सुरक्षा और सुविधाओं के लिए होटल में रखा गया था।राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह कदम किसी षड्यंत्र या नाटकीयता के बजाय पार्षदों की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया के सुचारू संचालन के लिए उठाया गया था। इस बीच महापौर पद की सीट को लेकर चर्चा और चर्चाएं लगातार बढ़ रही हैं और सभी की नजरें अब शिवसेना और बीजेपी के आगामी सामंजस्य पर टिकी हुई हैं।

    शिंदे ने अभी तक बीजेपी नेतृत्व से महापौर पद पर चर्चा नहीं कीबीएमसी महापौर पद को लेकर जारी अटकलों में कहा जा रहा है कि एकनाथ शिंदे कम से कम पहले ढाई साल के लिए शिवसेना को यह पद दिलाना चाहते हैं खासकर इस साल दिवंगत बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी का वर्ष होने के कारण।हालांकि शिवसेना सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि शिंदे जानते हैं कि इस बार पार्टी को महापौर पद नहीं मिलेगा और इस मुद्दे पर उन्होंने बीजेपी नेतृत्व से अब तक कोई बातचीत नहीं की है। इसके बावजूद शिंदे यह संदेश देने से भी बच रहे हैं कि उन्होंने पीछे हटने का मन बना लिया है। उनके इस कदम से राजनीतिक हलचल और भी तेज हो गई है और सभी की नजरें अब आगामी रणनीति पर टिक गई हैं।
    महत्वपूर्ण समितियों में शिवसेना को मिलेगी हिस्सेदारी

    डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के करीबी सहयोगी ने कहा कि शिवसैनिक चाहते हैं कि बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर पार्टी का अपना महापौर हो। हालांकि शिंदे भी जानते हैं कि बीजेपी इस मांग को स्वीकार नहीं करेगी फिर भी उन्होंने इसे सार्वजनिक चर्चा में लाने में कोई हर्ज नहीं समझा।साथ ही शिंदे यह संदेश देने से बच रहे हैं कि वह पीछे हट गए हैं। उनके मुताबिक पार्टी को कम से कम महत्वपूर्ण समितियों में हिस्सेदारी तो मिलेगी जिससे शिवसेना के निर्वाचित नेताओं की उपस्थिति और प्रभाव बरकरार रहे। इस कदम से राजनीतिक रणनीति और दबाव दोनों बनाए रखने का प्रयास नजर आता है।

    शिंदे का स्पष्ट संदेश: जनादेश का उल्लंघन नहीं होगा

    शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने साफ किया है कि मुंबई में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को मिले जनादेश का उल्लंघन करने का उनका कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि 29 निर्वाचित शिवसेना पार्षदों को होटल में शिफ्ट करने की चर्चा बेवजह फैलाई जा रही है और इसका उद्देश्य किसी तरह का पाला बदलने से रोकना नहीं है।सूत्रों के अनुसार यह कदम नव निर्वाचित पार्षदों के लिए एक ट्रेनिंग वर्कशॉप का हिस्सा है। शिंदे इस मौके का इस्तेमाल पार्षदों से परिचित होने और उन्हें यह स्पष्ट करने के लिए कर रहे हैं कि पार्टी उनसे क्या अपेक्षा करती है ताकि आगामी जिम्मेदारियों और महापौर पद के कामकाज को समझा जा सके।

  • कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार को फटकारा मंत्री विजय शाह की माफी पर उठाए सवाल

    कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार को फटकारा मंत्री विजय शाह की माफी पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने नाराजगी जताई कि एसआईटी ने मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन राज्य सरकार ने 19 अगस्त 2025 से अब तक कोई निर्णय नहीं लिया।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत का सख्त रुख

    CJI सूर्यकांत ने कहा कि एसआईटी ने पूरी जांच कर विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश राज्य सरकार को भेजी थी।

    अब तक लंबित निर्णय के चलते कानून के अनुसार कार्रवाई नहीं हो सकी।

    खुफिया विभाग के डीआईजी डी. कल्याण चक्रवर्ती से कोर्ट ने मामले के अन्य पहलुओं पर ध्यान रखने के निर्देश दिए।

    विजय शाह की माफी पर सवाल

    मंत्री की ओर से माफी पेश करने का दावा किया गया, लेकिन कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में कोई माफीनामा मौजूद नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट ने उनकी माफी को मगरमच्छ के आंसू बताते हुए इसे कानूनी राहत से अलग करार दिया।

    ऑनलाइन माफी पर भी कोर्ट ने असंतोष जताया और स्पष्ट किया कि ऐसे कदमों से कार्रवाई से राहत नहीं मिल सकती।

    सुप्रीम कोर्ट का आदेश

    मध्य प्रदेश सरकार को अभी तुरंत कार्रवाई करने और एसआईटी की सिफारिशों के मुताबिक मंजूरी देने का निर्देश।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब लंबित मामलों में विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  • प्रधानमंत्री मोदी ने NDRF के स्थापना दिवस पर जवानों को सराहा; बोले– चुनौतीपूर्ण समय में 'आशा का संचार' है यह बल

    प्रधानमंत्री मोदी ने NDRF के स्थापना दिवस पर जवानों को सराहा; बोले– चुनौतीपूर्ण समय में 'आशा का संचार' है यह बल


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज राष्ट्रीय आपदा मोचन बल NDRF के स्थापना दिवस के अवसर पर बल के वीर कर्मियों को नमन किया। प्रधानमंत्री ने संकट की घड़ियों में NDRF के जवानों द्वारा दिखाए जाने वाले अदम्य साहस पेशेवर दक्षता और निस्वार्थ सेवा भाव की सराहना करते हुए उन्हें राष्ट्र का सच्चा रक्षक बताया।

    संकट में अग्रिम पंक्ति के योद्धा प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में लिखा कि NDRF के पुरुष और महिला कर्मियों का दृढ़ संकल्प विपरीत परिस्थितियों में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। उन्होंने कहा कि आपदा के समय ये जवान सदैव अग्रिम पंक्ति में तैनात रहकर अपने परिश्रम से न केवल मानव जीवन की रक्षा करते हैं और राहत कार्य संचालित करते हैं, बल्कि अत्यंत चुनौतीपूर्ण और निराशाजनक परिस्थितियों में भी आम जनमानस के बीच ‘आशा का संचार’ करते हैं।

    वैश्विक स्तर पर अर्जित किया सम्मान प्रधानमंत्री ने बल की कार्यप्रणाली को सेवा के सर्वोच्च मानकों का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों के दौरान NDRF ने न केवल देश के भीतर आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया और तैयारी के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित किया है, बल्कि अपनी कार्यकुशलता के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक सम्मान और ख्याति अर्जित की है। चाहे भूकंप हो चक्रवात हो या कोई अन्य प्राकृतिक विपदा, NDRF के जवानों ने हमेशा अपनी जान जोखिम में डालकर सेवा परमो धर्म के मंत्र को सिद्ध किया है।

    साहस और कर्तव्यनिष्ठा को नमन स्थापना दिवस पर दी गई इस बधाई में प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से जवानों के कौशल और कर्तव्यनिष्ठा को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि देश को अपने इस बल पर गर्व है जो हर विषम परिस्थिति में नागरिकों के लिए सुरक्षा कवच बनकर खड़ा रहता है।उल्लेखनीय है कि NDRF आज अपना स्थापना दिवस मना रहा है। 2006 में गठित इस बल ने अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से देश के आपदा प्रबंधन तंत्र को एक नई शक्ति प्रदान की है।

  • नोएडा बेसमेंट हादसा: SDRF-NDRF के सामने डूबता रहा युवराज, पिता बोले– मेरा बेटा तड़पता रहा कोई नहीं बचा पाया

    नोएडा बेसमेंट हादसा: SDRF-NDRF के सामने डूबता रहा युवराज, पिता बोले– मेरा बेटा तड़पता रहा कोई नहीं बचा पाया


    नई दिल्ली। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में हुआ बेसमेंट हादसा पूरे शहर को झकझोर कर रख देने वाला है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद उनके पिता राजकुमार मेहता का दर्द छलक पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौके पर SDRF और NDRF की टीमें मौजूद थीं, लेकिन उनके बेटे को समय रहते नहीं बचाया गया। राजकुमार मेहता का कहना है कि उनके सामने ही युवराज पानी में तड़पता रहा और मदद के इंतजार में उसकी जान चली गई।

    हादसे की रात करीब 12 बजे युवराज ने अपने पिता को फोन कर बताया कि उसकी कार गहरे पानी से भरे गड्ढे में गिर गई है। सूचना मिलते ही राजकुमार मेहता रात 12:40 बजे मौके पर पहुंचे, लेकिन घना कोहरा और अंधेरा रास्ता बन गया। युवराज ने फोन की टॉर्च जलाकर यह संकेत दिया कि वह पानी में फंसा है और लगातार मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन कोई ठोस रेस्क्यू शुरू नहीं हो सका।पिता का आरोप है कि पुलिस दमकल विभाग SDRF और NDRF मौके पर तो पहुंचे लेकिन उनके पास न तो गोताखोर थे और न ही पर्याप्त उपकरण। बचाव दल ने पानी के अंदर सरिया और अत्यधिक ठंड का हवाला देकर अंदर जाने से मना कर दिया। इसी देरी में युवराज की हालत बिगड़ती चली गई और वह कार समेत डूब गया।

    राजकुमार मेहता ने बताया कि हादसा जिस जगह हुआ, वहां करीब 50 फीट गहरा गड्ढा था, जिसमें पहले से पानी भरा हुआ था। न तो वहां कोई बैरिकेडिंग थी, न रिफ्लेक्टर और न ही चेतावनी बोर्ड। यह इलाका एमजेड विशटाउन प्लानर्स और लोटस ग्रीन से जुड़ा बताया जा रहा है। पिता ने आरोप लगाया कि बिल्डरों और प्राधिकरण की घोर लापरवाही की वजह से उनके बेटे की जान गई।बचाव के दौरान पहले रस्सी फेंकी गई लेकिन वह कार तक नहीं पहुंची। इसके बाद क्रेन मंगाई गई मगर वह भी नाकाम साबित हुई। कई घंटे बाद SDRF और NDRF ने सर्च ऑपरेशन चलाया और युवराज को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

    इस मामले में नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने दोनों बिल्डर कंपनियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या और लापरवाही से जुड़े धाराओं में FIR दर्ज कर ली है। वहीं, इलाके के लोगों और सोसाइटी निवासियों ने कैंडल मार्च निकालकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हादसे की जांच जारी है और जो भी दोषी पाया जाएगा- उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन युवराज के पिता का सवाल अब भी कायम है-अगर समय पर सही इंतजाम होते तो क्या उनका बेटा आज जिंदा होता?