Category: National

  • दिल्ली में राशन कार्ड पर बड़ी कार्रवाई: 8 लाख कार्ड रद्द, आय सीमा बढ़कर हुई 1.20 लाख; अब नए पात्र परिवारों को मिलेगा लाभ

    दिल्ली में राशन कार्ड पर बड़ी कार्रवाई: 8 लाख कार्ड रद्द, आय सीमा बढ़कर हुई 1.20 लाख; अब नए पात्र परिवारों को मिलेगा लाभ


    नई दिल्ली । दिल्ली की सियासत और जनहित से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दिल्ली सरकार ने राशन कार्ड प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने के लिए कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। सरकार ने एक तरफ जहाँ राशन कार्ड के लिए वार्षिक आय की सीमा बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर अपात्र लोगों पर गाज गिराते हुए 8 लाख से अधिक कार्ड रद्द कर दिए हैं। इस कदम से वर्षों से राशन के इंतजार में बैठे लाखों परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण जगी है।

    आय सीमा में बढ़ोतरी, अब 1.20 लाख वाले भी पात्र मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि दिल्ली में राशन कार्ड के लिए वार्षिक पारिवारिक आय की सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर अब 1.20 लाख रुपये कर दिया गया है। इस निर्णय का उद्देश्य राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के दायरे को बढ़ाना है ताकि बढ़ती महंगाई के बीच मध्यम-निम्न आय वर्ग के अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त या सस्ता अनाज मिल सके। सत्यापन में खुली पोल: 8.27 लाख लाभार्थी सूची से बाहर सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा डेटा की गहन जांच और फिजिकल वेरिफिकेशन कराया गया, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच के बाद कुल 8,27,756 स्थान रिक्त हुए हैं।

    6.46 लाख लोगों की आय मानकों से अधिक पाई गई।

    23,394 लाभार्थियों के नाम दोहराव में दर्ज थे। 6,185 मामलों में मृत व्यक्तियों के नाम पर राशन उठाया जा रहा था। 95,682 लोग लंबे समय से राशन नहीं ले रहे थे, जिनमें से 56 हजार से अधिक ने खुद को सिस्टम से बाहर करने का अनुरोध किया। पहले आओ-पहले पाओ सिस्टम खत्म, अब DM करेंगे फैसला सरकार ने राशन कार्ड जारी करने की पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। अब प्राथमिकता जिला स्तर पर गठित कमेटियों द्वारा तय की जाएगी। जिला मजिस्ट्रेट या अपर जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली यह समिति स्थानीय विधायकों और अधिकारियों के साथ मिलकर आवेदनों की जांच करेगी। साथ ही, भविष्य की रिक्तियों को भरने के लिए 20 प्रतिशत की एक वेटिंग लिस्ट भी तैयार रखी जाएगी।

    कौन होगा अपात्र? कड़े किए गए नियम मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि अब राशन कार्ड बनवाने के लिए राजस्व विभाग का आय प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा। निम्नलिखित श्रेणियों को अपात्र माना जाएगा दिल्ली की ए से ई श्रेणी की पॉश कॉलोनियों में संपत्ति रखने वाले। आयकर दाता । चारपहिया वाहन मालिक व्यावसायिक वाहन को छोड़कर । सरकारी कर्मचारी के परिवार। किलोवाट से अधिक बिजली कनेक्शन वाले घर। विपक्ष का हमला: कांग्रेस ने बताया जटिल प्रक्रिया सरकार के इस फैसले पर राजनीतिक घमासान भी शुरू हो गया है। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार राशन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया को जानबूझकर जटिल बना रही है। उन्होंने मांग की कि यह सुविधा हर विधानसभा क्षेत्र में सुलभ होनी चाहिए ताकि गरीबों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। वर्तमान में दिल्ली में करीब 11.65 लाख लोग राशन कार्ड मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिनके लिए रिक्त हुए ये 8 लाख स्थान बड़ी राहत साबित हो सकते हैं।

  • सांसद मनोज तिवारी के घर लाखों की चोरी: पूर्व कर्मचारी ने डुप्लीकेट चाबियों से लगाया सेंध,

    सांसद मनोज तिवारी के घर लाखों की चोरी: पूर्व कर्मचारी ने डुप्लीकेट चाबियों से लगाया सेंध,


    नई दिल्ली । भोजपुरी सुपरस्टार और उत्तर-पूर्वी दिल्ली से बीजेपी सांसद मनोज तिवारी के मुंबई स्थित आवास पर लाखों रुपये की चोरी का मामला सामने आया है। अंधेरी पश्चिम के पॉश इलाके शास्त्रीनगर स्थित ‘सुंदरबन अपार्टमेंट’ में हुई इस वारदात को किसी बाहरी अपराधी ने नहीं, बल्कि सांसद के ही एक पूर्व भरोसेमंद कर्मचारी ने अंजाम दिया। हालांकि, तकनीक और पुलिस की मुस्तैदी के चलते आरोपी अब सलाखों के पीछे है। साढ़े पांच लाख की चपत और शातिर साजिश अंबोली पुलिस के अनुसार, इस चोरी के पीछे सुरेंद्रकुमार दीनानाथ शर्मा नाम का शख्स शामिल है, जिसे करीब दो साल पहले नौकरी से निकाल दिया गया था।
    आरोपी ने बेहद शातिर तरीके से घर, बेडरूम और अलमारी की ‘बनावटी चाबियां’ तैयार कर ली थीं। इसकी मदद से वह घर में दाखिल होता और किसी को भनक लगे बिना नकदी पर हाथ साफ कर देता था। सांसद के मैनेजर प्रमोद पांडेय की शिकायत के अनुसार, घर से कुल 5.40 लाख रुपये की चोरी हुई है। दो किस्तों में हुई चोरी, जून से दिसंबर तक का खेल चोरी का यह सिलसिला काफी समय से चल रहा था। जून 2025 में अलमारी से पहली बार 4.40 लाख रुपये गायब हुए थे। उस वक्त घर में कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था, जिसके कारण चोर का पता नहीं चल सका। घर में बार-बार हो रही नकदी की कमी को देखते हुए मैनेजर ने दिसंबर 2025 में घर के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगवाए।

    मोबाइल अलर्ट ने पकड़वाया चोर चोर की किस्मत ने 15 जनवरी 2026 की रात को धोखा दे दिया। रात करीब 9 बजे जब आरोपी सुरेंद्रकुमार घर में घुसकर अलमारी से एक लाख रुपये निकाल रहा था, तभी मैनेजर प्रमोद पांडेय के मोबाइल पर सीसीटीवी का ‘मोशन अलर्ट’ मैसेज आया। सीसीटीवी फुटेज में पूर्व कर्मचारी को चोरी करते हुए साफ देखा गया। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और गिरफ्तारी फुटेज मिलते ही अंबोली पुलिस हरकत में आई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पुलिस ने चोरी में इस्तेमाल की गई बनावटी चाबियां और सीसीटीवी फुटेज को साक्ष्य के तौर पर जब्त कर लिया है। फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में है और उससे पूछताछ की जा रही है कि क्या इस वारदात में कोई और भी उसके साथ शामिल था।

  • सावधान! आपके बच्चों के बैग में तो नहीं 'नकली' किताबें? दिल्ली पुलिस ने पकड़ा 2 करोड़ का फर्जी NCERT सिंडिकेट

    सावधान! आपके बच्चों के बैग में तो नहीं 'नकली' किताबें? दिल्ली पुलिस ने पकड़ा 2 करोड़ का फर्जी NCERT सिंडिकेट


    नई दिल्ली । दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शिक्षा के नाम पर ठगी करने वाले एक बहुत बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने देशभर में फर्जी NCERT किताबें छापने और उनकी सप्लाई करने वाले एक संगठित गिरोह को दबोचा है। इस कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में नकली किताबें और प्रिंटिंग उपकरण बरामद किए गए हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस की इस दबिश से उन माफियाओं में हड़कंप मच गया है जो छात्रों और अभिभावकों की जेब पर डाका डाल रहे थे।

    45 हजार के करीब किताबें और प्रिंटिंग प्रेस जब्त क्राइम ब्रांच ने इस ऑपरेशन के दौरान कुल 44,862 नकली किताबें बरामद की हैं। केवल किताबें ही नहीं, पुलिस ने गाजियाबाद के लोनी इलाके में चल रही एक पूरी अवैध फैक्ट्री को भी सील कर दिया है। यहाँ से दो अत्याधुनिक ऑफसेट प्रिंटिंग प्रेस मशीनें, कागज की रील, प्रिंटिंग इंक और एल्युमिनियम की प्लेटें जब्त की गई हैं। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह हूबहू असली जैसी दिखने वाली NCERT किताबें छाप रहा था, जिससे आम आदमी के लिए असली और नकली का फर्क करना नामुमकिन था।

    दरियागंज से गाजियाबाद तक फैला था जाल इस कार्रवाई की शुरुआत 10 नवंबर 2025 को हुई थी, जब पुलिस को दरियागंज के एक गोदाम में नकली किताबों के स्टॉक की जानकारी मिली। वहां की गई छापेमारी में 12,755 किताबें बरामद हुईं। मामले की गहराई से जांच करते हुए पुलिस ने 16 जनवरी 2026 को गाजियाबाद के लोनी स्थित जावली गाँव में एक गुप्त प्रिंटिंग यूनिट पर धावा बोला। यहाँ से 32,107 अतिरिक्त किताबें और प्रिंटिंग का पूरा तामझाम बरामद हुआ। जांच में खुलासा हुआ कि यह फैक्ट्री दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश में सप्लाई का मुख्य केंद्र थी।

    गिरोह के तीन सदस्य गिरफ्तार, एक पुराना खिलाड़ी पुलिस ने इस मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया है विनोद जैन 65 वर्ष यह इस गिरोह का सबसे शातिर सदस्य है और पहले भी इसी तरह के जालसाजी के मामलों में शामिल रह चुका है। सुमित 35 वर्ष यह जावली स्थित अवैध फैक्ट्री का संचालन देख रहा था। कनिष्क 32 वर्ष यह भी गिरोह के साथ मिलकर सप्लाई चेन को मैनेज कर रहा था। जांच अभी जारी है दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच अब इस गिरोह की पूरी सप्लाई चेन और उन थोक विक्रेताओं की पहचान करने में जुटी है, जो इन नकली किताबों को दुकानों तक पहुँचाते थे। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि शिक्षा क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अभिभावकों को भी सलाह दी गई है कि वे अधिकृत विक्रेताओं से ही किताबें खरीदें और किताबों पर लगे होलोग्राम और प्रिंट की गुणवत्ता की सावधानीपूर्वक जांच करें।

  • BMC चुनाव 2026: मुंबई में 'बिहारी बाबू' का जलवा, उद्धव-राज ठाकरे का मराठी कार्ड फेल, बीजेपी गठबंधन की ऐतिहासिक वापसी

    BMC चुनाव 2026: मुंबई में 'बिहारी बाबू' का जलवा, उद्धव-राज ठाकरे का मराठी कार्ड फेल, बीजेपी गठबंधन की ऐतिहासिक वापसी

    मुंबई । देश की सबसे अमीर नगर पालिका, बृहन्मुंबई नगर निगम BMC के 2026 के चुनाव परिणामों ने महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। करीब तीन दशक बाद बीएमसी की सत्ता से शिवसेना का एकछत्र राज खत्म हो गया है और भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले ‘महायुति’ गठबंधन ने पूर्ण बहुमत के साथ जीत दर्ज की है। लेकिन इस चुनाव की सबसे बड़ी सुर्खी ‘मराठी मानुष’ बनाम ‘उत्तर भारतीय’ के एजेंडे का ध्वस्त होना रही। मुंबई के मतदाताओं ने क्षेत्रवाद को दरकिनार कर बिहार मूल के छह उम्मीदवारों को भारी मतों से जिताकर निगम भेजा है।

    मिथिलांचल के वीरों ने फहराया परचम इस चुनाव में विशेष रूप से बिहार के मधुबनी जिले और मिथिलांचल क्षेत्र का दबदबा देखने को मिला। मधुबनी के झंझारपुर तालुका से ताल्लुक रखने वाले छह नेताओं ने मुंबई की राजनीति में अपनी धाक जमाई है शिवकुमार झा BJP .कांदिवली ईस्ट वार्ड 23 से लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर हैट्रिक बनाई। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को करीब 5,400 वोटों के बड़े अंतर से हराया। विनोद मिश्रा BJP मलाड वार्ड 43 से एक बड़ी जीत हासिल की। राजेश झा शिवसेना – शिंदे गोरेगांव वार्ड 163 से विजयी रहे। संतोष कुमार मंडल व उमेश राय BJP कांदिवली के वार्ड 160 और 161 से जीत दर्ज की। धीरेंद्र मिश्रा: कुर्ला-चांदीवली वार्ड 174 से कड़े मुकाबले में जीत हासिल की।

    ठकरे परिवार का ‘मराठी मानुष’ एजेंडा हुआ विफल लंबे समय से मुंबई की राजनीति उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के इर्द-गिर्द ‘मराठी मानुष’ के मुद्दे पर सिमटी रही है। हालांकि, 2026 के इन परिणामों ने स्पष्ट कर दिया कि खुद मराठी मतदाताओं ने भी इस संकीर्ण एजेंडे के बजाय विकास और समावेशी राजनीति को चुना है। कांदिवली, मलाड, गोरेगांव और कुर्ला जैसे क्षेत्रों में उत्तर भारतीय वोटरों ने निर्णायक भूमिका निभाई, जिससे उद्धव ठाकरे की शिवसेना को तगड़ा झटका लगा है।

    सत्ता का नया समीकरण 227 सीटों वाली बीएमसी में बहुमत के लिए 114 सीटों की आवश्यकता थी, जिसे बीजेपी-शिंदे गठबंधन ने आसानी से पार कर लिया। बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। 19 सालों से बीएमसी पर काबिज शिवसेना को इस बार विपक्ष में बैठना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रवासियों के प्रति नफरत की राजनीति अब मुंबई में काम नहीं कर रही है, और उत्तर भारतीय उम्मीदवार अब केवल ‘वोट बैंक’ नहीं बल्कि ‘निर्णायक नेतृत्व’ के रूप में उभर रहे हैं।

  • CJI सूर्यकांत के सामने ही गुहार लगने लगीं ममता बनर्जी, बोली-संविधान, लोकतंत्र को बचा लीजिए

    CJI सूर्यकांत के सामने ही गुहार लगने लगीं ममता बनर्जी, बोली-संविधान, लोकतंत्र को बचा लीजिए


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने CJI सूर्यकांत से देश के संविधान, लोकतंत्र और न्यायपालिका की रक्षा करने का शनिवार को आग्रह किया। कलकत्ता हाई कोर्ट की जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच के भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में बनर्जी ने न्यायमूर्ति सूर्यकांत से देश के लोगों को ‘‘एजेंसियों’’ द्वारा गलत तरीके से निशाना बनाये जाने से बचाने का भी आह्वान किया।
    बिना विस्तृत जानकारी दिए उन्होंने कहा, ‘कृपया देश के संविधान, लोकतंत्र, न्यायपालिका, इतिहास और भूगोल को विनाश से बचाएं।’ बनर्जी ने कहा, ‘‘आप (प्रधान न्यायाधीश) हमारे संविधान के संरक्षक हैं, हम आपके कानूनी संरक्षण में हैं। कृपया जनता की रक्षा करें।’’
    न्यायमूर्ति सूर्यकांत भी कार्यक्रम में मौजूद थे।
    मीडिया ट्रायल को रोकना होगा

    बनर्जी ने कहा, ‘आजकल मामलों के निपटारे से पहले ही ‘मीडिया ट्रायल’ का चलन है; इसे भी रोकना होगा।’ एक जनसभा के बाद अपने व्हाट्सएप चैनल पर एक पोस्ट में, श्री बनर्जी ने पश्चिम मेदिनीपुर को एक ऐसी भूमि के रूप में चित्रित किया जिसने औपनिवेशिक विरोधी संघर्ष से लेकर 2011 के राजनीतिक उथल-पुथल तक बार-बार दमन के खिलाफ आवाज उठायी है। गौरतलब है कि वर्ष 2011 में टीएमसी ने पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे के 34 साल के शासन को समाप्त किया था।

    उन्होंने पश्चिमी मेदिनीपुर जिले के लंबे राजनीतिक प्रतिरोध के इतिहास का भी इस मौके पर जिक्र किया। बनर्जी ने लिखा, “अविभाजित मेदिनीपुर की धरती ने ब्रिटिश साम्राज्य की कठोर पकड़ को चुनौती देते हुए अत्याचार, शोषण और अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध की गर्जना की थी। उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए, पश्चिम मेदिनीपुर के लोग 2011 में लोकतंत्र की बहाली के लिए अग्रणी भूमिका में खड़े हुए।”

    राणा संकल्प सभा में भारी जनसमूह की उपस्थिति का जिक्र करते हुए, तृणमूल नेता ने जोर देकर कहा कि यह भीड़ जनता के उस संकल्प को दर्शाती है जो विभाजन और भेदभाव की उन ताकतों को हराना चाहती है, जिन्हें उन्होंने ‘बंगाल-विरोधी विभाजनकारी ताकतें’ बताया।

  • तमिलनाडु चुनाव : तमिलनाडु कांग्रेस ने आलाकमान पर छोड़ दिया फाइनल फैसला

    तमिलनाडु चुनाव : तमिलनाडु कांग्रेस ने आलाकमान पर छोड़ दिया फाइनल फैसला

    नई दिल्‍ली। कांग्रेस ने शनिवार देर रात चली मैराथन बैठक के बाद घोषणा करते हुए कहा कि तमिलनाडु में पार्टी की चुनावी रणनीति और संभावित सत्ता-साझाकरण गठबंधनों पर अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की लगभग साढ़े तीन घंटे तक चली इस बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने की। इसमें तमिलनाडु और पुडुचेरी के 40 से अधिक वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया।

    चर्चा के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए पार्टी के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने इन वार्ताओं को “रचनात्मक और पार्टी को मजबूत करने पर केंद्रित” बताया। उन्होंने कहा कि नेतृत्व ने सामूहिक और व्यक्तिगत, दोनों तरह के सत्र आयोजित किए ताकि राज्य के नेता “स्वतंत्र रूप से अपने विचार व्यक्त कर सकें।”

    हालांकि गठबंधन या सत्ता-साझाकरण की मांगों के विशिष्ट विवरण स्पष्ट नहीं किए गए, लेकिन श्री वेणुगोपाल ने पुष्टि की कि राज्य इकाई की चिंताओं को विस्तार से सुना गया है। उन्होंने कहा, “बैठक ने सर्वसम्मति से माननीय कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता को चुनावी रणनीति से संबंधित मामलों पर निर्णय लेने का अधिकार दिया है।

    पार्टी हाई कमान पार्टी की विचारधारा और तमिलनाडु के लोगों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उचित समय पर निर्णय लेगा।”

    पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और सार्वजनिक अटकलों को रोकने के लिए हाई कमान ने बयानों को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है। श्री वेणुगोपाल ने जोर देकर कहा कि सभी नेताओं को अनुशासित रहना चाहिए और सोशल मीडिया सहित किसी भी मंच पर व्यक्तिगत शिकायतों या अटकलों को साझा करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा, “नेताओं को एक सुर में बोलने की सलाह दी गई है।”

    पुडुचेरी के संबंध में नेतृत्व ने घोषणा की कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी 21 जनवरी से एक बड़ी ‘पदयात्रा’ शुरू करेगी। यह मार्च पूरे राज्य को कवर करेगा, जिसमें वरिष्ठ राष्ट्रीय नेतृत्व के भी शामिल होने की संभावना है। यह बैठक तमिलनाडु में द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन के भीतर कांग्रेस की भूमिका को लेकर बढ़ती अटकलों के बीच हुई है, जहां स्थानीय इकाइयां कथित तौर पर शासन और सीटों के बंटवारे में बड़ी हिस्सेदारी की मांग कर रही हैं।

  • असम में पीएम मोदी के दौरे का उत्साह, लोग बोले-काजीरंगा कॉरिडोर से विकास को मिलेगा नया रास्ता

    असम में पीएम मोदी के दौरे का उत्साह, लोग बोले-काजीरंगा कॉरिडोर से विकास को मिलेगा नया रास्ता

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को असम के नगांव जिले में 6,950 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट का भूमि पूजन करेंगे और दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाएंगे। इस कार्यक्रम को लेकर असम में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

    भाजपा विधायक दिप्लू रंजन शर्मा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “आज के समय में ‘मोदी मतलब बिजनेस’ और ‘मोदी मतलब विकास’ है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में असम में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का काम तेजी से हो रहा है, जिससे ‘विकसित भारत 2047’ का संकल्प भी साकार होता है।”

    विधायक ने बताया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में असम को देश के टॉप-5 राज्यों में शामिल करना हमारा लक्ष्य है और प्रधानमंत्री लगातार इसमें मदद कर रहे हैं। शर्मा ने कहा, “पीएम मोदी ने अब तक करीब 36 बार असम का दौरा किया है और पूर्वोत्तर में लगभग 75 बार आए हैं। उनका दृष्टिकोण हमेशा दीर्घकालिक और विकासोन्मुखी होता है।”

    स्थानीय लोगों का कहना है कि काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर न केवल आने-जाने में सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगा। “यह प्रोजेक्ट असम के लिए एक नया युग लेकर आएगा और यातायात को बेहतर बनाएगा,” स्थानीय व्यवसायी ने कहा।

    कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग प्रधानमंत्री का स्वागत करने पहुंचे। एक महिला ने कहा, “यह गर्व की बात है कि इतने सालों बाद पीएम मोदी असम आ रहे हैं। उनके काम और असम के प्रति उनके प्रेम के लिए हम उन्हें धन्यवाद देते हैं।”

    भाजपा विधायक दिप्लू रंजन शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का विज़न असली विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार पर केंद्रित है। उनका यह कार्यक्रम न केवल असम के लोगों के लिए सुविधाजनक होगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को भी मजबूती देगा।

    प्रधानमंत्री मोदी असम में 6,950 करोड़ रुपये के काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर का भूमि पूजन करेंगे और दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर राज्य में विकास और रोजगार को बढ़ावा देंगे।

  • ED का दावा… अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने बिना वैरिफिकेशन के नियुक्त किए थे दिल्ली धमाके से जुड़े तीनों डॉक्टर

    ED का दावा… अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने बिना वैरिफिकेशन के नियुक्त किए थे दिल्ली धमाके से जुड़े तीनों डॉक्टर


    नई दिल्ली।
    फरीदाबाद (Faridabad) के अल फलाह विश्वविद्यालय (Al Falah University) ने अन्य विशेषज्ञों के साथ तीन डॉक्टरों की नियुक्ति (Appointment Three Doctors) बिना किसी पुलिस जांच या वेरिफिकेशन के की थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) (Enforcement Directorate – ED) की जांच में यह बात सामने आई है कि इन 3 डॉक्टरों में से दो को एनआईए ने गिरफ्तार किया है जबकी तीसरा डॉक्टर उमर उन नबी नवंबर 2025 में दिल्ली के लालकिला के पास हुए धमाके में कथित तौर पर आत्मघाती हमलावर के रूप में शामिल था।


    इन्हें बनाया मुख्य आरोपी

    विश्वविद्यालय के मालिक के खिलाफ चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान ED ने कई वरिष्ठ अधिकारियों और शिक्षकों के बयानों को अदालत में दाखिल अपनी चार्जशीट में शामिल किया है। इस मामले में अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी और सभी संस्थानों को चलाने वाले अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट को मुख्य आरोपी बनाया गया है। इन दोनों पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।


    जमीन और इमारत जब्त

    ईडी ने लगभग 260 पन्नों की चार्जशीट में सिद्दीकी और उनके ट्रस्ट पर छात्रों की फीस से अवैध तरीके से पैसा इकट्ठा करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन पर अपने संस्थानों की मान्यता और कागजों के बारे में गलत जानकारी देने के आरोप में केस चलाने की मांग की गई है। ईडी ने बताया कि उसने फरीदाबाद के धौज इलाके में स्थित विश्वविद्यालय की जमीन और इमारत को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है जिसकी कीमत लगभग 140 करोड़ रुपये है।


    नियमित शिक्षक दिखाकर ली एनएमसी से मंजूरी

    अदालत ने अभी तक ईडी की चार्जशीट का संज्ञान नहीं लिया है। अधिकारियों ने चार्जशीट के आधार पर जानकारी दी है कि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर केवल कागजों पर तैनात थे। उन्हें 22 दिन पंच या हफ्ते में दो दिन अटेंडेंस जैसी शर्तों पर नियमित शिक्षक दिखाकर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) से जरूरी मंजूरी ली गई थी ताकि मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य सुविधा देखभाल इकाई बिना किसी बाधा के चलती रहे।


    बिना पुलिस सत्यापन आरोपी डॉक्टरों की नियुक्ति

    ईडी ने यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार का बयान दर्ज किया है। रजिस्ट्रार ने बयान में कहा है कि मेडिकल कॉलेज के आरोपी डॉक्टरों को बिना किसी पुलिस सत्यापन के नियुक्त किया गया था। वहीं विश्वविद्यालय की कुलपति और प्राचार्य ने कहा है कि जो डॉक्टर आतंक से जुड़े मामलों में शामिल बताए जा रहे हैं वे उनके कार्यकाल में नियुक्त किए गए। इनमें अक्टूबर 2021 से डॉ. मुजम्मिल गनई, अक्टूबर 2021 से डॉ. शाहीन सईद और मई 2024 से डॉ. उमर नबी शामिल हैं।


    जवाद अहमद सिद्दीकी ने नियुक्ति को दी मंजूरी

    कुलपति और प्राचार्य ने एजेंसी को बताया कि नियुक्तियों की सिफारिश विश्वविद्यालय के मानव संसाधन प्रमुख ने की थी। इन्हें चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी ने मंजूरी दी थी। धमाके की साजिश के आरोपी डॉक्टरों की नियुक्ति के समय पुलिस वेरिफिकेशन नहीं किया गया। चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी ने अपने बयान में कहा है कि उनका किसी आतंकवादी संगठन से कोई संबंध नहीं है।


    कई डॉक्टर अस्थायी नियुक्त

    ईडी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में कर्मचारियों की नियुक्ति पर सिद्धिकी का कंट्रोल था। कुछ को फेक एक्सपीरियंस लेटर भी दिए गए। सिद्धिकी ने जून 2025 में मेडिकल कॉलेज की अंतिम एनएमसी जांच के दौरान भी धोखा देना जारी रखा। ईडी ने निष्कर्ष निकाला कि कई डॉक्टर केवल नियामक निरीक्षण की जरूरत के लिए अस्थायी तौर पर नियुक्त किए गए थे। डॉक्टरों के रोजगार की शर्तें भी कई तरह से फर्जी थीं।


    फेक मरीज किए भर्ती

    आरोपपत्र में संलग्न कुछ दस्तावेज और वीडियो चैट से पता चलता है कि एनएमसी निरीक्षण से लगभग 3 हफ्ते पहले अस्पताल में मरीज, स्टाफ या डॉक्टर मौजूद नहीं थे। रिकॉर्ड से पता चला कि निरीक्षण से पहले फेक मरीज भर्ती किए गए। सिद्धिकी ने धनशोधन मामले में प्रमुख भूमिका निभायी। इस मामले में कथित अपराध से प्राप्त राशि के 493.24 करोड़ रुपये होने का पता चला है जो छात्रों से वार्षिक ट्यूशन और परीक्षा शुल्क के रूप में वसूल की गई।

  • उद्धव ठाकरे का दावा : BMC में अब भी हो सकता है उलटफेर

    उद्धव ठाकरे का दावा : BMC में अब भी हो सकता है उलटफेर


    मुंबई। बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) चुनाव में बीजेपी और शिवसेना शिेंदे गुट की बड़ी जीत के बाद उद्धव ठाकरे को करारा झटका लगा है। हालांकि वह अब भी हार स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं और कह रहे हैं कि मेयर उनका ही बनेगा। उनके इस बयान के बाद शिंदे गुट के पार्षदों को रिजॉर्ट भेज दिया गया।
    देश की सबसे अमीर महानगरपालिका की 89 सीटों पर अकेले बीजेपी ने ही कब्जा किया है। ऐसे में पूरी संभावना है कि मेयर बीजेपी का होगा। लेकिन उद्धव ठाकरे के दावे ने गहमा-गहमी बढ़ा दी है।

    पिछले 25 साल से बीएमसी में अविभाजित शिवसेना का कब्जा था। हालांकि शिवसेना के दो फाड़ होने के बाद समीकरण बदल गए. इस बार के चुनाव में उद्धव सेना को कुल 65 सीटें मिली हैं। वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 29 सीटें मिली हैं। अगर दोनों की सीटें जोड़ दी जाएं तो उनकी 94 सीटें हो जाती हैं। वहीं बीजेपी की 89 ही सीटें हैं। ऐसे में अगर शिवसेना बंटी ना होती तो बीजेपी उससे पीछे रह जाती।

    शिवसेना (UBT) नेता सुनील प्रभु ने कहा कि शिवसेना के बंटने की वजह से ही बीजेपी की जीत हो सकती है। पू्र्व कांग्रेस नेता संजय झा ने कहा कि अब भी शिवसेना की ताकत का लोहा सबको मानना चाहिए। अगर शिवसेना एक होती तो बीएमसी में बीजेपी का दांव ही ना लग पाता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर दोनों शिवसेना सम्मान बचाना चाहती हैं तो साथ आएं और बीजेपी को विपक्ष में बैठा दें।

    उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनकी पार्टी का मेयर अब भी बन सकता है। इसके बाद शिंदे ने अपने पार्षदों को रिजॉर्ट में शिफ्ट कर दिया। बीजेपी और शिंदे सेना की कुल सीटें 118 हैं। वहीं 227 सीटों वाली महानगरपालिका में बहुमत का जादुई आंकड़ा 114 है। इस बार अजित पवार ने अकेले ही चुनाव लड़ा था।

    उन्होंने कुल तीन सीटें जीती हैं। अगर उनका समर्थन मिलता है तो यह संख्या 121 हो जाएगी।

    दूसरी ओर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की कुल सीटें 71 हैं। इसके अलावा एक सीट एनसीपी (शरद पवार) ने जीती है। कांग्रेस अगर उनके साथ आती है तो 24 सीटें और जुड़ जाएंगी। अगर बीजेपी विरोधी बाकी दल जैसे कि ऐआईएमआईएम और समाजवादी पार्टी का भी साथ मिलता है तो यह संख्या 106 हो जाएगी। अब बहुमत में केवल 8 सीटों की कमी रह जाती है।

    बतादें कि दो दशकों के बाद बाल ठाकरे के बेटे उद्धव और भतीजे राज ठाकरे साथ आए थे। इसके बाद भी उनके साथ आने का फायदा नहीं मिल पाया। ऐसे में कहा जा रहा है कि यह ठाकरे परिवार की बड़ी हार है। हालांकि एकनाथ शिंदे की पार्टी से तुलना करें तो उद्धव की पार्टी काफी आगे है। उद्धव ठाकरे ने 65 सीटों पर जीत हासिल की है। ऐसे में बीएमसी में उद्धव ठाकरे मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

  • PM मोदी ने मालदा रैली में की TMC सांसद के पिता की तारीफ, भाषण के दौरान दी श्रद्धांजलि

    PM मोदी ने मालदा रैली में की TMC सांसद के पिता की तारीफ, भाषण के दौरान दी श्रद्धांजलि


    कोलकाता।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने विभाजन के दौरान मालदा (Malda) को भारत (India) में शामिल कराने में भूमिका निभाने को लेकर अनुभवी वकील और हिंदू महासभा के नेता शिवेंदु शेखर राय (Shivendu Shekhar Rai) को अपने भाषण के दौरान श्रद्धांजलि दी। इसके बाद राय को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई। शिवेंदु के बेटे एवं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के राज्यसभा सदस्य सुखेन्दु शेखर राय (Sukhendu Shekhar Roy) ने संयमित प्रतिक्रिया व्यक्त की है।


    शिवेंदु शेखऱ के प्रयास से बचा मालदा

    मोदी ने शनिवार को मालदा में एक जनसभा में अपने भाषण की शुरुआत शिवेंदु शेखर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए की। उन्होंने 1947 में शिवेंदु शेखर के योगदान को याद किया जब मुस्लिम लीग द्वारा जिले को तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में शामिल करने की मांगों के बीच मालदा का भविष्य अनिश्चित बना हुआ था। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मैं सर्वप्रथम मालदा के महान सपूत शिवेंदु शेखर राय को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं, जिनके प्रयासों से मालदा की पहचान बची रही।’’ उनके इस बयान से श्रोताओं में मौजूद कई लोग चकित हो गये।

    इससे पूर्व दिन में, भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने कार्यक्रम में पहले स्मृति चिन्ह के रूप में मोदी को शिवेंदु शेखर राय की एक फ्रेम की हुई तस्वीर भेंट की। यह तस्वीर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने प्रधानमंत्री को दी, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया क्योंकि शिवेंदु शेखर राय के पुत्र तृणमूल सांसद हैं।


    श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सहयोगी थे शिवेंदु शेखर

    स्वतंत्रता-पूर्व मालदा के एक प्रख्यात दीवानी वकील और हिंदू महासभा के नेता शिवेंदु शेखर राय, राजनीतिक विचारधाराओं से परे अपनी व्यापक लोकप्रियता के लिए जाने जाते थे। वह विश्वविद्यालय के दिनों से ही शिक्षाविद और महासभा नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी के घनिष्ठ सहयोगी थे और विभाजन वार्ता के दौरान उन्होंने पर्दे के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    उनके बेटे सुखेन्दु शेखर राय का कहना है कि जब मालदा को पूर्वी पाकिस्तान में शामिल किए जाने की संभावना आसन्न प्रतीत हुई, तो उनके पिता ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के पिता, प्रख्यात बैरिस्टर एन सी चटर्जी से संपर्क करके इस कदम को चुनौती देने के प्रयास शुरू किए।

    सुखेन्दु शेखर राय के अनुसार चूंकि एन सी चटर्जी दक्षिण बंगाल और कोलकाता को सुरक्षित रखने में व्यस्त थे, इसलिए शिवेंदु शेखर राय ने फिर श्यामा प्रसाद मुखर्जी से संपर्क किया, जिन्होंने उन्हें आगे की कार्रवाई के बारे में सलाह दी और उन्हें बंगाल सीमा आयोग के समक्ष मालदा का ऐतिहासिक, जनसांख्यिकीय और प्रशासनिक मामला व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत करने में सहयोग किया।

    राज्यसभा सदस्य ने बताया कि बिधु शेखर शास्त्री और इतिहासकार सर जदुनाथ सरकार जैसे विद्वानों ने भी आयोग के सामने प्रस्तुत किये गये ज्ञापन तैयार करने में सहायता की।लप्रधानमंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए सुखेन्दु शेखर राय ने संयमित लेकिन भावुक स्वर में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ‘‘यह इतिहास है और इसे नकारने की कोई गुंजाइश नहीं है।’’

    उन्होंने कहा कि मालदा भारत में इसलिए बना हुआ है क्योंकि उनके पिता ने इसे भारत में बनाए रखने के आंदोलन का नेतृत्व किया था। उन्होंने कहा, ‘‘कोई राजनीतिक दल इतिहास को अपने हिसाब से ढालने या अस्वीकार करने की कोशिश कर सकता है, इससे मुझे कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन एक ऐसे व्यक्ति के पुत्र के रूप में, जिन्होंने मालदा को भारत में बनाए रखने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई, अगर प्रधानमंत्री उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, तो क्या मुझे दुखी होना चाहिए? बिल्कुल नहीं।’’

    उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ मैं ही नहीं, बल्कि मेरे भाई-बहन, रिश्तेदार और परिवार के सभी सदस्य गर्व महसूस करते हैं। सिर्फ इसलिए कि मैं तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा हूं, क्या मुझे दुखी होना चाहिए? यह तो सरासर बेतुका होगा।’’ मोदी द्वारा भाजपा के मंच से तृणमूल सांसद के पिता का जिक्र करना राजनीतिक रूप से भले ही महत्वपूर्ण हो, लेकिन सुखेन्दु शेखर राय ने इसे समकालीन राजनीतिक संदेश के बजाय लंबे समय से प्रतीक्षित ऐतिहासिक मान्यता के रूप में प्रस्तुत करना बेहतर समझा। उन्होंने कहा, ‘‘यह मालदा के विभाजन काल के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है जिसे आज के राजनीतिक मतभेदों से परे याद रखा जाना चाहिए।’’