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  • : एटीएफ की बढ़ती कीमतों पर सरकार की एयरलाइंस और तेल कंपनियों से बातचीत, राम मोहन नायडू बोले- सभी पक्षों से चर्चा के बाद फैसला

    : एटीएफ की बढ़ती कीमतों पर सरकार की एयरलाइंस और तेल कंपनियों से बातचीत, राम मोहन नायडू बोले- सभी पक्षों से चर्चा के बाद फैसला

    नई दिल्ली । केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने मंगलवार को कहा कि सरकार एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ की बढ़ी लागत को लेकर एयरलाइंस और तेल विपणन कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण एटीएफ की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। मंत्री का यह बयान इंडिगो की ओर से एटीएफ की बढ़ी कीमतों के कारण फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने के ऐलान के बाद आया है। नायडू ने कहा कि एटीएफ की बढ़ती लागत विमानन क्षेत्र के सामने अहम मुद्दों में से एक है और सरकार इस पर संबंधित पक्षों के साथ चर्चा कर रही है।

    राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित आईएफक्यूएम सिम्पोजियम 2026 कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों से बातचीत में नायडू ने कहा कि पश्चिम एशिया का संकट एटीएफ की कीमतों पर भारी बोझ डाल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार एयरलाइंस और तेल विपणन कंपनियों यानी ओएमसी, दोनों के साथ बातचीत कर रही है और बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह देखा जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस मामले में कोई भी फैसला लेने से पहले नागर विमानन मंत्रालय सभी संबंधित पक्षों से बातचीत करेगा। मंत्रालय संबंधित पक्षों के साथ बैठक करने जा रहा है और सभी पक्षों का नजरिया समझने के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा।

    कॉन्फ्रेंस में नायडू ने विमानन क्षेत्र को लेकर सरकार के दीर्घकालिक विजन की भी जानकारी दी। इसमें सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल यानी एसएएफ को बढ़ावा देना, देश में कई एयरपोर्ट हब विकसित करना और घरेलू एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत करना शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल में एसएएफ की हिस्सेदारी को लेकर नियम बनाया है। इसके तहत 2027 तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल का एक प्रतिशत हिस्सा एसएएफ से आना चाहिए। यह हिस्सेदारी 2028 तक दो प्रतिशत और 2030 तक पांच प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।

    नायडू ने बताया कि सरकार सरकारी रिफाइनरियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के साथ ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के अनुरूप एसएएफ के उत्पादन को लेकर बातचीत कर रही है। सरकार विमानन क्षेत्र में एसएएफ के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के साथ इसके उत्पादन की क्षमता विकसित करने पर भी काम कर रही है। इसके अलावा भारत का लक्ष्य देशभर में कई एयरपोर्ट हब विकसित कर ग्लोबल एविएशन हब बनने का है। इसके लिए हब-एंड-स्पोक मॉडल अपनाने की योजना है, जिसके तहत छोटे शहरों के यात्री घरेलू गेटवे के माध्यम से लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से जुड़ सकेंगे।

    एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत इंजन बनाने की क्षमता को महत्वपूर्ण मानता है और इसके लिए चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। इसकी शुरुआत मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल यानी एमआरओ गतिविधियों तथा कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग से होगी। उन्होंने स्वदेशी हेलीकॉप्टर इंजन बनाने में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। नायडू ने कहा कि डिफेंस सेक्टर में हासिल की गई जानकारी और तकनीक आगे चलकर सिविल एविएशन मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकती है। एटीएफ की कीमतों को लेकर सरकार की बातचीत के बीच अब संबंधित पक्षों की राय और उसके बाद मंत्रालय के फैसले पर नजर रहेगी।

  • CEC विवाद पर विपक्ष का चुनाव आयोग तक मार्च, राहुल-प्रियंका ने पेड़ के नीचे दिया धरना, अखिलेश यादव समेत कई नेता हिरासत में

    CEC विवाद पर विपक्ष का चुनाव आयोग तक मार्च, राहुल-प्रियंका ने पेड़ के नीचे दिया धरना, अखिलेश यादव समेत कई नेता हिरासत में

    नई दिल्ली ।लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग तक विरोध मार्च निकाला। मार्च के दौरान विपक्षी सांसदों ने “वोट चोर, गद्दी छोड़” के नारे लगाए। प्रदर्शन के दौरान चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी नेताओं ने कई आरोप लगाए। मार्च शुरू होने से पहले विपक्षी सांसद संसद के मकर द्वार पर एकत्र हुए थे।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मार्च के दौरान कहा कि विपक्ष का यह प्रदर्शन अन्याय के खिलाफ लड़ाई है। उन्होंने सरकार, चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार आजादी के बाद मिले वयस्क मताधिकार को खत्म करने की कोशिश कर रही है। खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सरकार की कठपुतली बताया और आरोप लगाया कि वह वही करते हैं जो नरेंद्र मोदी और अमित शाह कहते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपनी लड़ाई जारी रखेगा।

    मार्च के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी, NCP-SP सांसद सुप्रिया सुले और INDIA ब्लॉक के कई अन्य सांसद भी मौजूद रहे। विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक पहुंचकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराना चाहते थे। हालांकि पुलिस ने मार्च को रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने सड़क पर एक पेड़ के नीचे ही धरना शुरू कर दिया।

    प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 2017, 2019, 2022 और 2024 में बेईमानी की गई और पश्चिम बंगाल में “पूरा का पूरा खुला खेल” हुआ। उन्होंने चंडीगढ़ की घटना का भी जिक्र करते हुए कहा कि उसे कौन भूल सकता है। उनके इस बयान में चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को दोहराया गया।

    इस बीच पुलिस ने अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया। समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी प्रदर्शन के दौरान भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 150 सांसदों को निलंबित किया जाता है और कई कानून पारित किए जाते हैं, तो भाजपा संविधान की बात कैसे कर सकती है। उन्होंने चुनाव आयोग का बचाव करने को लेकर भी सवाल उठाया।

    कांग्रेस सांसद राजीव राय ने कहा कि भाजपा के खिलाफ लोगों में सड़कों पर आक्रोश है। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं और लोकतंत्र का गला घोंटा गया है तथा लोकतंत्र को बचाने के लिए लोग सड़कों पर उतर आए हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भरोसे के लायक नहीं बताया।

    कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने कहा कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लिया जाना तय है और चुनाव आयोग से लोगों का भरोसा खत्म हो गया है। कांग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देंगे, तब तक विपक्ष पीछे नहीं हटेगा।

    कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि यदि लोगों का मताधिकार छीना जाएगा तो विपक्ष मूकदर्शक बनकर नहीं रहेगा। इस तरह चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों के आरोपों और विरोध के बीच चुनाव आयोग तक मार्च करने की कोशिश की गई, जिसे पुलिस ने रोक दिया और कई नेताओं को हिरासत में लिया गया।

  • ज्ञानेश कुमार 10 अक्टूबर से पहले दे सकते हैं इस्तीफा? सौरभ भारद्वाज के दावे से चुनाव आयोग और SIR विवाद पर बढ़ी सियासी हलचल

    ज्ञानेश कुमार 10 अक्टूबर से पहले दे सकते हैं इस्तीफा? सौरभ भारद्वाज के दावे से चुनाव आयोग और SIR विवाद पर बढ़ी सियासी हलचल


    नई दिल्ली ।
    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दावा किया है कि उनके पास मौजूद जानकारी के अनुसार ज्ञानेश कुमार 10 अक्टूबर से पहले अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि, यह अभी केवल भारद्वाज का दावा है और इस संबंध में चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    सौरभ भारद्वाज ने अपने सूत्रों के हवाले से यह दावा किया है। उनके मुताबिक, उन्हें जानकारी मिली है कि मुख्य चुनाव आयुक्त 10 अक्टूबर से पहले अपने पद से हट सकते हैं। इस दावे के बाद चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई है। भारद्वाज की ओर से अपने दावे के समर्थन में इससे अधिक जानकारी नहीं दी गई है।

    जिस 10 अक्टूबर की तारीख का जिक्र सौरभ भारद्वाज ने किया है, उसी दिन कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी लंबे समय से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर सवाल उठाती रही है। सीजेपी की ओर से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR पर रोक की मांग की जा रही है। पार्टी का कहना है कि इन मुद्दों के समाधान के बिना चुनाव व्यवस्था को लेकर सवाल बने रहेंगे।

    मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर विवाद में SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का मुद्दा भी प्रमुख है। बिहार और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में विपक्षी दल SIR की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के दौरान गड़बड़ी की आशंका है। वहीं, आयोग अपनी तय प्रक्रिया का हवाला देता रहा है।

    इसी विवाद के बीच चुनाव आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त और दो अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद को लेकर भी सवाल उठे हैं। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि पिछले 10 महीनों के दौरान 14 मौकों पर दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों की राय ज्ञानेश कुमार से अलग रही। इस दावे को लेकर चुनाव आयोग के कामकाज और निर्णय प्रक्रिया पर चर्चा तेज हुई है।

    सीजेपी ने चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेद के मुद्दे को भी गंभीर बताया है। पार्टी ने इस मामले में जांच की मांग की है और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई है। वहीं, SIR को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं और मतदाता सूची में संभावित गड़बड़ी को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच सौरभ भारद्वाज का 10 अक्टूबर से पहले ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे का दावा सामने आया है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि मुख्य चुनाव आयुक्त वास्तव में अपने पद से इस्तीफा देंगे या नहीं। चुनाव आयोग की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में फिलहाल इस्तीफे की बात सौरभ भारद्वाज के दावे तक ही सीमित है।

    10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन और SIR को लेकर जारी विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे से जुड़ा यह दावा राजनीतिक चर्चा का नया मुद्दा बन गया है। इस मामले में आगे की स्थिति ज्ञानेश कुमार के किसी आधिकारिक निर्णय या चुनाव आयोग की ओर से सामने आने वाली जानकारी से स्पष्ट होगी।

  • यूपी राज्यसभा चुनाव में सपा का तीसरा दांव, 10 सीटों पर मुकाबला रोचक; बीजेपी की आठवीं सीट और क्रॉस वोटिंग पर नजर

    यूपी राज्यसभा चुनाव में सपा का तीसरा दांव, 10 सीटों पर मुकाबला रोचक; बीजेपी की आठवीं सीट और क्रॉस वोटिंग पर नजर

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन का मंगलवार को आखिरी दिन है। दोपहर तीन बजे तक उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं। इसी वजह से राज्य में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। भारतीय जनता पार्टी ने आठ और समाजवादी पार्टी ने दो प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। सात सीटों पर बीजेपी की जीत संख्या बल के आधार पर लगभग तय मानी जा रही है, जबकि सपा के दो उम्मीदवारों के लिए भी स्थिति मजबूत है। हालांकि बीजेपी के आठवें उम्मीदवार और सपा के संभावित तीसरे उम्मीदवार के कारण चुनाव का गणित दिलचस्प हो गया है।

    सपा के तीसरे उम्मीदवार को लेकर पार्टी के भीतर लगातार चर्चा चल रही है। राज्यसभा उम्मीदवार रामगोपाल यादव से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभी तीन बजे तक नामांकन का समय है और फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव चाहेंगे तो तीसरा उम्मीदवार उतरेगा, नहीं तो नहीं उतरेगा। अखिलेश यादव मंगलवार को विपक्षी गठबंधन के विरोध मार्च में शामिल हुए। विपक्षी सांसद संसद भवन के मकर द्वार से निर्वाचन आयोग मुख्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। ऐसे में नामांकन की समयसीमा खत्म होने तक यह स्पष्ट होना था कि सपा तीसरा प्रत्याशी उतारती है या नहीं।

    सपा के तीसरे उम्मीदवार के नामांकन को लेकर यह भी दावा किया गया कि पार्टी ने जरूरी 10 विधायकों के हस्ताक्षर बतौर प्रस्तावक जुटा लिए हैं। तीसरे उम्मीदवार के नामांकन की स्थिति में 16 अक्टूबर को मतदान होना है और मुकाबला अतिरिक्त वोटों पर निर्भर हो सकता है। सपा पहले ही अपने वरिष्ठ राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव और रिलायंस ग्रुप के सीईओ धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। दोनों उम्मीदवार अखिलेश यादव की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल कर चुके हैं। रामगोपाल यादव छठी बार राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं।

    उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर मौजूदा सांसदों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। विधानसभा में विधायकों की प्रभावी संख्या 397 बताई गई है। इस हिसाब से प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 37 मतों की जरूरत होगी। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास करीब 285 से 290 विधायक हैं। इस संख्या के आधार पर बीजेपी के सात उम्मीदवारों की जीत आसान मानी जा रही है, लेकिन आठवीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। दूसरी ओर सपा के पास 101 विधायक बताए गए हैं, जिससे उसके दो उम्मीदवारों की जीत संभव है। तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए सपा को अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी।

    वोटों के इसी गणित के कारण क्रॉस वोटिंग को लेकर भी चर्चा है। बीजेपी के आठवें उम्मीदवार और सपा के संभावित तीसरे उम्मीदवार के लिए अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी। कांग्रेस के दो विधायक सपा के खाते में बताए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद तीसरे उम्मीदवार के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना जरूरी होगा। ऐसे में दोनों दलों के सामने अतिरिक्त वोट जुटाने की चुनौती होगी। अंतिम दिन नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सपा तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारती है या नहीं। यदि तीसरा उम्मीदवार उतरता है तो 10 सीटों के लिए उम्मीदवारों की संख्या बढ़ जाएगी और 16 अक्टूबर को मतदान की स्थिति बनेगी।

    राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार को लेकर सपा की रणनीति पर सभी की नजर बनी हुई है। पार्टी के पास दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या है, जबकि तीसरे उम्मीदवार के लिए उसे अतिरिक्त विधायकों का समर्थन चाहिए। बीजेपी ने आठ उम्मीदवार उतारकर आठवीं सीट के लिए भी दावा पेश किया है। ऐसे में नामांकन की अंतिम समयसीमा तक दोनों दलों की रणनीति और विधायकों के समर्थन का गणित महत्वपूर्ण बना हुआ है। मतदान की स्थिति बनने पर क्रॉस वोटिंग भी चुनाव के परिणाम को प्रभावित करने वाला अहम पहलू हो सकती है।

  • राहुल गांधी का ज्ञानेश कुमार पर हमला, बोले- हो गया भाई, अब इस्तीफा देने का समय; चुनाव आयोग के बाहर विपक्ष का धरना

    राहुल गांधी का ज्ञानेश कुमार पर हमला, बोले- हो गया भाई, अब इस्तीफा देने का समय; चुनाव आयोग के बाहर विपक्ष का धरना

    नई दिल्ली। विपक्षी गठबंधन के सांसदों ने मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे समेत अन्य मांगों को लेकर संसद भवन परिसर से चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर मार्च किया। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी समेत इंडिया ब्लॉक के सांसद चुनाव आयोग मुख्यालय, निर्वाचन सदन की तरफ बढ़े, लेकिन पुलिस ने उन्हें पार्लियामेंट स्ट्रीट पर रोक दिया। इसके बाद सांसद वहीं सड़क पर बैठ गए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया। सांसदों को नीति आयोग कार्यालय के सामने रोका गया, जो नीति आयोग और आकाशवाणी भवन के बीच चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर जाने वाले रास्ते पर स्थित है।

    प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने ज्ञानेश कुमार के आरएसएस यूनिफॉर्म वाले कटआउट लिए और नारे लगाए। इनमें ‘बीजेपी है सीईसी है’, ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ और ‘डेमोक्रेसी बिकाऊ नहीं है’ जैसे नारे शामिल थे। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ज्ञानेश कुमार को संबोधित करते हुए लिखा, ‘ज्ञानेश, यह हो गया भाई। इस्तीफा देने का समय आ गया है।’ मार्च में तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ ब्रायन, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और सीपीआई (एम) नेता जॉन ब्रिटास समेत कई सांसद शामिल हुए। सांसदों के पहुंचने से काफी पहले संसद और चुनाव आयोग मुख्यालय के अंदर तथा आसपास भारी सुरक्षा तैनात कर दी गई थी और बैरिकेडिंग की गई थी।

    मार्च से पहले विपक्षी सांसदों ने सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज की। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग के प्रति लोगों का भरोसा कम हुआ है। उन्होंने कहा कि जिस संस्था पर पूरा देश भरोसा करता है और गर्व महसूस करता है, उसकी निष्पक्षता पर पहले कभी सवाल नहीं उठाए गए, लेकिन एक व्यक्ति ने उस भरोसे को तोड़ दिया है। उन्होंने एक पूरे नेक्सस के साथ काम करने का भी आरोप लगाया और कहा कि विपक्ष ज्ञानेश कुमार से सवाल करेगा और बीजेपी के मुख्यमंत्री जवाब देना शुरू करेंगे।

    सीपीआई सांसद पी संदोष कुमार ने कहा कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से वोटर रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर के दौरान फॉर्म 6 से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को लेकर विपक्ष की आपत्तियां मजबूत हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 26 सितंबर को चुनाव आयोग की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि फॉर्म 6 से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी है, जबकि उनके मुताबिक यह बयान गुमराह करने वाला साबित हुआ है। सीपीआई नेता ने सीईसी को ‘धोखेबाज चुनाव कमिश्नर’ कहा और दावा किया कि विपक्षी पार्टियां 2025 से इन नियमों के खिलाफ आंदोलन कर रही हैं तथा अपना आंदोलन और तेज करेंगी।

    शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने भी मार्च से पहले बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सांसद शांतिपूर्वक आगे बढ़ना चाहते थे और वे देश के नागरिक होने के साथ संसद के सदस्य भी हैं। राउत ने सवाल किया कि उन्हें रोकने के लिए इतनी बड़ी फोर्स की क्या जरूरत है और कहा कि उनके पास हथियार नहीं हैं। उन्होंने बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स और सीआईएसएफ के जवानों की तैनाती तथा मंत्रियों के घरों के बाहर सुरक्षा बढ़ाए जाने का दावा किया। राउत ने फॉर्म 6 पर सुप्रीम कोर्ट की स्थिति को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सीईसी को पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा था कि उसने फॉर्म 6 के किसी भी बदले हुए वर्जन को मंजूरी नहीं दी है। अदालत ने यह पता लगाने के लिए चुनाव आयोग के रिकॉर्ड की जांच करने की बात कही कि क्या बदलाव किए गए थे और उन्हें किसने मंजूरी दी थी। यह टिप्पणी ज्ञानेश कुमार के कथित एकतरफा फैसलों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान हुई। 26 सितंबर के बयान में आयोग ने कहा था कि एसआईआर के लिए फॉर्म 6 के साथ जुड़ी घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है। यह विरोध एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और तीन सदस्यों वाले आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों को लेकर विपक्ष के अभियान के बीच हुआ। चुनाव आयोग ने आयोग में बंटवारे के सुझावों को खारिज करते हुए कहा है कि एसआईआर से जुड़े फैसले एकमत से लिए गए थे।

  • सुकमा में ग्राम सभा का फैसला, धर्म बदल चुके लोगों को शव दफनाने के लिए सामुदायिक जमीन नहीं देने का प्रस्ताव

    सुकमा में ग्राम सभा का फैसला, धर्म बदल चुके लोगों को शव दफनाने के लिए सामुदायिक जमीन नहीं देने का प्रस्ताव


    नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुनपल्ली गांव में ग्राम सभा ने धार्मिक गतिविधियों और धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों को लेकर कई फैसले लिए हैं। कोंटा जनपद पंचायत के तहत आने वाले इस गांव में 2 अक्टूबर को विशेष ग्राम सभा की बैठक हुई थी। बैठक में गांव की पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था, सामुदायिक हितों और स्थानीय स्तर पर धार्मिक गतिविधियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। ग्राम सभा ने कुल 12 प्रस्ताव पारित किए। इनमें ईसाइयों और धर्म बदल चुके लोगों को चर्च बनाने, प्रार्थना सभा या अन्य धार्मिक आयोजन करने तथा शव दफनाने के लिए सामुदायिक जमीन नहीं देने का प्रस्ताव भी शामिल है।

    ग्राम सभा की ओर से बाहरी पादरियों और ईसाई प्रचारकों के गांव में प्रवेश पर भी रोक लगाने की बात कही गई है। इसके लिए पुनपल्ली गांव में एक सूचना-पट्ट लगाया गया है, जिसमें धर्म परिवर्तन, प्रार्थना सभाओं और अन्य गतिविधियों के लिए पादरियों और ईसाई प्रचारकों के प्रवेश को प्रतिबंधित किए जाने की जानकारी दी गई है। प्रस्ताव के मुताबिक, ग्राम पंचायत की सीमा के भीतर धर्म बदल चुके परिवारों के सदस्यों के शव दफनाने के लिए भी ग्राम सभा की जमीन नहीं दी जाएगी। ग्राम सभा ने तय किया है कि चर्च, प्रार्थना सभा, धार्मिक सभा और शव दफनाने के लिए सामुदायिक जमीन उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।

    ग्राम सभा के फैसलों की जानकारी जनपद पंचायत सदस्य और भारतीय जनता युवा मोर्चा के नेता मड़कम भीमा ने दी। उन्होंने बताया कि विशेष ग्राम सभा में स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में ‘शांति और न्याय समिति’ के गठन का प्रस्ताव भी पारित किया गया। इसके तहत यदि कोई बाहरी व्यक्ति धार्मिक प्रचार या ऐसी गतिविधियों के लिए गांव में आता है तो उसे सबसे पहले समिति को इसकी सूचना देनी होगी। ग्राम सभा ने स्थानीय स्तर पर विवादों से निपटने के लिए भी इस समिति की व्यवस्था की है।

    इन फैसलों में पेसा कानून का भी उल्लेख किया गया है। ग्राम सभा में पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 के तहत पांचवीं अनुसूची वाले अनुसूचित क्षेत्रों के पंजीकृत मतदाता शामिल होते हैं। प्रस्ताव में संविधान के अनुच्छेद 244(1), पांचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम 1996 और छत्तीसगढ़ पेसा कानून 2022 के संशोधित प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। ग्राम सभा का कहना है कि इन फैसलों का उद्देश्य गांव की पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था, रीति-रिवाजों और स्थानीय विरासत की रक्षा करना है।

    ग्राम सभा ने यह भी तय किया है कि उसके फैसलों से जुड़े किसी विवाद की स्थिति में संबंधित प्रशासनिक और कानूनी अधिकारियों को सूचित किया जाएगा और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। ग्रामीणों से ग्राम सभा के फैसलों और स्थानीय नियमों का सम्मान करने की अपील की गई है। इस फैसले के तहत विशेष रूप से ईसाइयों और धर्म बदल चुके लोगों के लिए सामुदायिक जमीन के इस्तेमाल को लेकर प्रावधान किए गए हैं। सूचना-पट्ट के जरिए धार्मिक गतिविधियों और बाहरी प्रचारकों के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध की जानकारी भी सार्वजनिक की गई है।

  • कांग्रेस और हरीश रावत के बीच बढ़ा टकराव, खरगे-राहुल भी अलर्ट; हाईकमान के आदेश के बावजूद जारी रही यात्रा

    कांग्रेस और हरीश रावत के बीच बढ़ा टकराव, खरगे-राहुल भी अलर्ट; हाईकमान के आदेश के बावजूद जारी रही यात्रा


    नई दिल्ली:
    उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा को लेकर टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा के आग्रह पत्र के बावजूद हरीश रावत ने सोमवार को भी अपनी यात्रा जारी रखी। इस बीच उन्होंने पार्टी हाईकमान से अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा है। रावत ने कहा कि उनकी यात्रा को गलत समझा जा रहा है और उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल को पहले ही पूरी स्थिति स्पष्ट कर दी थी। यात्रा पहले से तय होने के कारण उन्होंने उनसे माफी भी मांगी थी। कुमारी सैलजा ने कहा है कि रावत अपनी बात रखना चाहते हैं और वह 7 या 8 अक्टूबर को उनसे बात करेंगी।

    हरीश रावत की यात्रा को लेकर कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट कहा था कि राज्य में कोई भी व्यक्तिगत कार्यक्रम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद सोमवार को रावत ने जसपुर से हल्द्वानी तक धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा निकाली। यात्रा के दौरान कई कांग्रेस नेता और जनप्रतिनिधि उनके साथ दिखाई दिए। कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष और चकराता विधायक प्रीतम सिंह के रावत की यात्रा के समर्थन में आने से पार्टी के भीतर गुटबाजी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में यात्रा के दौरान जसपुर विधायक आदेश सिंह चौहान, अल्मोड़ा विधायक मनोज तिवारी, धारचूला विधायक हरीश धामी और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद कुंजवाल भी शामिल हुए।

    हालांकि काशीपुर में महानगर अध्यक्ष अलका पाल, प्रदेश उपाध्यक्ष अनुपम शर्मा समेत कुछ नेताओं ने यात्रा से दूरी बनाए रखी। इससे पार्टी के भीतर अलग-अलग धड़ों के सक्रिय होने की चर्चा तेज हुई है। रावत ने सोशल मीडिया पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि दिल्ली में उनकी धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा को गलत समझा जा रहा है। उन्होंने कहा कि संभव है कि वह अपनी बात सही तरीके से नहीं समझा पाए हों। प्रदेश प्रभारी ने उन्हें मिलने का समय दिया है और वह वहां अपना स्पष्टीकरण देंगे।

    हरीश रावत के मुद्दे को कांग्रेस हाईकमान भी गंभीरता से ले रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार यह मामला राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संज्ञान में भी लाया गया है। उत्तराखंड चुनाव को गंभीरता से ले रही कांग्रेस इस बार किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती। पार्टी के भीतर यह भी आशंका है कि रावत के समर्थन में और नेता सामने आ सकते हैं, जिससे चुनाव से पहले गुटबाजी बढ़ सकती है। इसी वजह से हाईकमान उनके पक्ष को सुनकर ही आगे कोई फैसला लेने के संकेत दे रहा है।

    कुमारी सैलजा ने कहा कि हरीश रावत अपनी बात रखना चाहते हैं और पार्टी पहले उनका पक्ष सुनना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बातचीत के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। यह पूछे जाने पर कि यदि रावत यात्रा जारी रखते हैं और पार्टी उनकी दलीलों से सहमत नहीं होती तो क्या उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है, सैलजा ने कहा कि इस बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। वहीं, सोमवार रात करीब आठ बजे यात्रा के हल्द्वानी पहुंचने पर हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखंड की धरती पर उन्हें बदलाव की आवाज सुनाई दे रही है। उन्होंने कहा कि 2027 में उत्तराखंड और 2029 में केंद्र में बदलाव होगा और यह बदलाव कांग्रेस लाएगी। स्वराज आश्रम में विधायक सुमित हृदयेश, द्वाराहाट विधायक मदन बिष्ट समेत कई पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया।

  • प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचा मेरठ का परिवार, बेटे प्रिंस की फोटो लेकर मां ने लगाई वापसी की गुहार

    प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचा मेरठ का परिवार, बेटे प्रिंस की फोटो लेकर मां ने लगाई वापसी की गुहार


    नई दिल्ली: मेरठ का एक परिवार सोमवार को लापता बेटे प्रिंस की तलाश में वृंदावन स्थित संत प्रेमानंद महाराज के राधा केलि कुंज आश्रम के बाहर पहुंचा। नेत्रपाल अपनी पत्नी पूनम के साथ बेटे की फोटो हाथ में लेकर उसकी वापसी की गुहार लगाते नजर आए। परिजनों के मुताबिक, प्रिंस नीट परीक्षा देने के बाद 8 मई 2024 को अपने माता-पिता के साथ वृंदावन आया था। अगले दिन लाइन में लगने के बाद 10 मई को उसे एकांतिक वार्ता के लिए पास मिला। वार्ता के लिए प्रिंस अकेला आश्रम के अंदर गया, लेकिन इसके बाद वह बाहर नहीं आया। परिवार का कहना है कि उन्होंने आश्रम के साधकों से इसकी जानकारी मांगी, लेकिन प्रिंस का पता नहीं चल सका।

    पूनम ने बताया कि प्रिंस के वापस नहीं आने के बाद परिवार ने मामले की शिकायत मथुरा पुलिस से भी की थी। इसके बावजूद अब तक बेटे का पता नहीं चला है। परिजन लगातार मेरठ और वृंदावन के बीच आ-जा रहे हैं और उसकी तलाश कर रहे हैं। परिवार को उम्मीद है कि जिस तरह अनुज और मयंक की सकुशल बरामदगी हुई, उसी तरह उनका बेटा प्रिंस भी उन्हें मिल सकता है। इसी उम्मीद के साथ परिवार आश्रम के बाहर पहुंचा और लोगों से बेटे की वापसी में मदद की गुहार लगाई।

    वहीं, झारखंड से 17 वर्षीय एक किशोर भी बिना बताए वृंदावन पहुंच गया और प्रेमानंद महाराज के केलि कुंज आश्रम में जाकर संत से दीक्षा लेने की इच्छा जताई। किशोर की उम्र और परिस्थितियों को देखते हुए आश्रम प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस उसे सुरक्षित रमणरेती पुलिस चौकी ले गई और उसके परिजनों से संपर्क किया। आश्रम के बाहर पिछले कुछ दिनों से लापता बच्चों के परिजनों के पहुंचने का सिलसिला भी जारी है।

    सोमवार को प्रिंस की तलाश में आश्रम पहुंचे मेरठ के परिवार को बाहर मौजूद भक्तों की भीड़ से नोकझोंक का सामना भी करना पड़ा। मौके पर मौजूद पुलिस ने अभद्रता करने के आरोप में एक युवक को हिरासत में लिया। पिछले दो दिनों से आश्रम के बाहर इसी तरह का माहौल बना हुआ है। इस बीच संत प्रेमानंद महाराज के भक्तों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चैनल चलाने वाले एक पत्रकार का पुतला भी फूंका। भक्तों का आरोप है कि पत्रकार संत की छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। संत के दीक्षित साधक रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद सामने आ रही खबरों को लेकर भक्तों में आक्रोश बताया गया है।

    आश्रम से जुड़े विवाद के बीच श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा फलाहारी ने भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि दो गुटों में बंटे आश्रम के शिष्य परिकर की ओर से प्रचार के लिए पैसे देकर एक मशहूर हस्ती को आश्रम बुलाया गया था। उन्होंने आश्रम से जुड़े लोगों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। इस पूरे घटनाक्रम के बीच मेरठ का परिवार अपने बेटे प्रिंस की तलाश में आश्रम पहुंचा और उसकी सकुशल वापसी की उम्मीद जताई।

  • दिशा सालियान मामले में आदित्य ठाकरे पर भाजपा का हमला, नितेश राणे ने विदेश जाने की तैयारी का लगाया आरोप

    दिशा सालियान मामले में आदित्य ठाकरे पर भाजपा का हमला, नितेश राणे ने विदेश जाने की तैयारी का लगाया आरोप

    नई दिल्ली: महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे ने सोमवार को दिशा सालियान मामले को लेकर शिवसेना यूबीटी विधायक आदित्य ठाकरे पर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मामले में आरोपों के बीच आदित्य ठाकरे विदेश जा चुके हो सकते हैं या विदेश जाने की तैयारी कर रहे हैं। राणे ने कहा कि आदित्य ठाकरे ने रविवार को मुंबई में आयोजित विरोध मार्च में हिस्सा नहीं लिया। यह मार्च सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना अध्यक्ष राज ठाकरे के नेतृत्व में निकाला गया था। राणे ने दावा किया कि आदित्य ठाकरे गिरफ्तारी के डर से इस प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए।

    दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक आवासीय इमारत की 12वीं मंजिल से गिरने के बाद हुई थी। वह दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व प्रबंधक थीं। इसके करीब एक सप्ताह बाद सुशांत सिंह राजपूत भी अपने फ्लैट में मृत पाए गए थे। दोनों घटनाओं के बीच संभावित संबंध को लेकर उस समय कई तरह की अटकलें सामने आई थीं। मुंबई पुलिस ने दिशा सालियान की मौत के मामले में आकस्मिक मौत की रिपोर्ट दर्ज की थी। बाद में जांच के आधार पर पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने आत्महत्या की थी।

    दिशा सालियान के पिता ने उनकी मौत के मामले में आदित्य ठाकरे के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की थी। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने हाल में मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। हालांकि प्राथमिकी में किसी व्यक्ति को आरोपी के रूप में नामजद नहीं किया गया है। आदित्य ठाकरे ने अपने बचाव में कहा है कि कुछ लोग राजनीतिक कारणों से उनकी छवि खराब करने के लिए जानबूझकर उनका नाम दिशा सालियान मामले से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

    नितेश राणे ने कहा कि रविवार को आदित्य ठाकरे मंच पर मौजूद नहीं थे और उनकी गैरमौजूदगी की वजह बीमारी बताई गई। उन्होंने कहा कि केवल गैरमौजूदगी के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि आदित्य ठाकरे विदेश चले गए हैं या जाने की तैयारी कर रहे हैं। राणे ने यह भी कहा कि यह संभावना हो सकती है कि वह विदेश गए हों और उनके आवास पर जाकर उनकी मौजूदगी की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि दिशा सालियान की मौत से संबंधित प्राथमिकी और बयानों में आदित्य ठाकरे का नाम बार-बार सामने आया है और जांच एजेंसियों से उनसे पूछताछ कर तथ्यों का पता लगाने की मांग की।

    राणे ने कहा कि यदि जांच एजेंसियों के पास यह संदेह करने का कानूनी आधार है कि आदित्य ठाकरे देश छोड़ सकते हैं, तो कानून के तहत उपलब्ध प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने लुकआउट नोटिस जारी करने और पासपोर्ट जब्त करने जैसे कदमों का उल्लेख किया, लेकिन साथ ही कहा कि ऐसी कार्रवाई केवल आरोपों के आधार पर नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक इसके लिए ठोस सबूत और कानूनी प्रक्रिया जरूरी है। भाजपा नेता ने एक निकाय ठेके से जुड़े मामले में जांच का सामना कर रहे अभिनेता डिनो मोरिया को महज एक ‘मुखौटा’ बताते हुए आदित्य ठाकरे को उनका ‘गॉडफादर’ होने का आरोप भी लगाया। राणे ने कहा कि उनकी मांग निष्पक्ष जांच की है और कानून व्यक्ति के पद या हैसियत की परवाह किए बिना सभी के लिए समान होना चाहिए।

  • 14,500 फीट की ऊंचाई पर पहली बार लगा जाम, आदि कैलाश में घंटों फंसे पर्यटक; वाहनों की बढ़ती संख्या बनी वजह

    14,500 फीट की ऊंचाई पर पहली बार लगा जाम, आदि कैलाश में घंटों फंसे पर्यटक; वाहनों की बढ़ती संख्या बनी वजह

    नई दिल्ली: उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में करीब 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश में पहली बार जाम की स्थिति सामने आई। सोमवार को देशभर से बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या के बीच वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ा। बीते दिनों क्षेत्र में भारी बर्फबारी हुई थी, जिसके बाद सड़क पर तीन से चार फीट तक बर्फ जमा हो गई थी। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने जेसीबी की मदद से सड़क से बर्फ हटाकर यातायात सुचारु कराया, लेकिन सड़क के दोनों किनारों पर जमा बर्फ पूरी तरह नहीं हट सकी। इससे सड़क की प्रभावी चौड़ाई कम हो गई और वाहनों के एक-दूसरे को रास्ता देने में परेशानी होने लगी।

    आदि कैलाश में जाम के पीछे हालिया बर्फबारी के साथ वाहनों की बढ़ती संख्या भी प्रमुख कारण मानी जा रही है। सड़क से बर्फ हटाने के बाद भी दोनों किनारों पर तीन से चार फीट तक बर्फ के ढेर बने हुए हैं। इससे मार्ग संकरा हो गया है। यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ निजी वाहनों का दबाव भी बढ़ा है। ऐलागाड़, कुलागाड़, एस बैंड और मलघाट जैसे संवेदनशील हिस्सों में सड़क पहले से ही अपेक्षाकृत संकरी है। इन स्थानों पर एक साथ अधिक वाहन पहुंचने पर आमने-सामने से वाहनों को निकालना मुश्किल हो जाता है। बर्फबारी के कारण सड़क की स्थिति खराब होने से समस्या और बढ़ जाती है। एक जगह वाहन रुकने पर पीछे आने वाले वाहनों पर भी इसका असर पड़ता है और धीरे-धीरे लंबी कतार बन जाती है।

    आदि कैलाश करीब 4,420 मीटर यानी 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। कुछ वर्ष पहले तक यहां दुर्गम पहाड़ी रास्ते और मौसम की कठिन परिस्थितियां यात्रा में सबसे बड़ी चुनौती मानी जाती थीं। अब वाहनों का बढ़ता दबाव भी नई परेशानी बन गया है। आदि कैलाश मार्ग चीन सीमा तक पहुंच का प्रमुख रास्ता होने के साथ सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। बीआरओ की ओर से सड़क को बेहतर बनाने और कई हिस्सों में डामरीकरण किए जाने के बाद यहां वाहनों की आवाजाही पहले की तुलना में आसान हुई है। इसका असर श्रद्धालुओं की यात्रा पर भी पड़ा है और देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग अपने वाहनों से आदि कैलाश पहुंच रहे हैं।

    पर्यटकों और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या का असर वाहनों की संख्या पर भी साफ दिखाई दे रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2023 में आदि कैलाश क्षेत्र में 10,079 पर्यटक पहुंचे थे। 2024 में यह संख्या बढ़कर 29,423 हो गई और 2025 में 31,558 पर्यटक यहां पहुंचे। 2026 में अब तक यह आंकड़ा 61,950 तक पहुंच चुका है। यानी कुछ ही वर्षों में यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में तीन गुना से अधिक बढ़ोतरी हुई है। बढ़ती आवाजाही के बीच उच्च हिमालयी क्षेत्र की सीमित सड़क चौड़ाई और मौसम की परिस्थितियां यातायात व्यवस्था के लिए चुनौती बन रही हैं।

    आदि कैलाश क्षेत्र में वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है और पुलिसकर्मी यातायात व्यवस्था को सुचारु करने में जुटे हैं। फिलहाल जाम की समस्या के पीछे मुख्य वजह हालिया बर्फबारी बताई जा रही है। सड़क से बर्फ हटाए जाने के बावजूद किनारों पर जमा बर्फ के कारण मार्ग की चौड़ाई कम बनी हुई है। इसके साथ बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही होने से संकरी जगहों पर यातायात प्रभावित हो रहा है। उच्च हिमालयी क्षेत्र में मौसम में अचानक बदलाव और भारी बर्फबारी जैसी परिस्थितियों के बीच वाहनों की बढ़ती संख्या ने यात्रा और यातायात प्रबंधन की चुनौती बढ़ा दी है।