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  • काशी के पिशाचमोचन में अकाल मौत का तर्पण, घोड़े का कान और गाय की पूंछ छूने की अनोखी परंपरा

    काशी के पिशाचमोचन में अकाल मौत का तर्पण, घोड़े का कान और गाय की पूंछ छूने की अनोखी परंपरा


    नई दिल्ली: पितृपक्ष के दौरान वाराणसी के पिशाचमोचन में हर दिन 20 हजार से ज्यादा लोग पूर्वजों और अकाल मौत से जुड़े श्राद्ध कर्म कराने पहुंच रहे हैं। आदि गंगा विमलोदत्त कुंड के किनारे इन दिनों 10 से 12 तरह के श्राद्ध कर्म कराए जा रहे हैं। नारायण बलि, त्रिपिंडी श्राद्ध और तर्पण के बाद यहां दो विशेष प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं। इनमें संजाब नस्ल के शक्ति घोड़े का कान छूना और अकाल मौत वाले व्यक्ति की फोटो पीपल के सूखे पेड़ पर लगाना शामिल है। मान्यता के अनुसार, इन्हें पितरों और आत्माओं की शांति की कामना से जुड़ी अंतिम प्रक्रिया माना जाता है। पिशाचमोचन पर पितृपक्ष शुरू होने से एक दिन पहले से संजाब नस्ल के दो घोड़े खड़े हैं। इनका इस्तेमाल साल में केवल श्राद्ध के 15 दिनों के दौरान होता है। बाकी समय इनकी बुकिंग विवाह समारोहों के लिए की जाती है।

    पिशाचमोचन क्षेत्र में 10 से 15 पीपल के पेड़ हैं, जिन पर करीब 500 फोटो फ्रेम लगे हुए हैं। वहां मौजूद पंडित अमित मिश्रा के अनुसार, इन पेड़ों पर उन आत्माओं की तस्वीरें लगाई जाती हैं, जिनकी अचानक मौत हुई और जिन्हें शांतिपूर्वक विदा नहीं माना गया। उन्होंने बताया कि लोग ऐसी आत्माओं की शांति के लिए यहां श्राद्ध कराने आते हैं। इसी तरह गाजीपुर के मुख्तार की पत्नी और बेटी भी करीब 30 साल पहले हुई उनकी मौत के बाद श्राद्ध कराने यहां पहुंची थीं। परिवार का कहना था कि उनके पति सपने में आते थे और इससे उन्हें डर लगता था। पिशाचमोचन में अकाल मौत से मुक्ति के लिए पीपल के पेड़ पर फोटो फ्रेम लगाने के साथ कील ठोकने की प्रक्रिया भी श्राद्ध पूजा के पैकेज में शामिल है।

    यहां घोड़े का कान, भैंस का सींग और गाय की पूंछ छूकर पितरों के नाम पर दान करने की भी परंपरा है। जिस संजाब नस्ल के घोड़े का कान लोग छूते हैं, उसका नाम शक्ति है। एक व्यक्ति को घोड़े का कान छूने के लिए कम से कम 10 रुपये देने होते हैं। बताया गया है कि यह घोड़ा रोजाना कम से कम 50 हजार रुपये तक कमा लेता है। पिशाचमोचन में श्राद्ध कर्म कराने वालों में गरीब और संपन्न परिवार दोनों शामिल होते हैं। यहां नेता, जज, फिल्म स्टार और अन्य सम्पन्न परिवार भी तर्पण और पिंडदान के लिए पहुंचते हैं। एक मृतक के तर्पण की सामान्य लागत 15 से 20 हजार रुपये बताई गई है, जबकि कई बार यह खर्च 30 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। भीड़ अधिक होने के कारण कुंड के किनारों के अलावा आसपास के पांच-छह भवनों में भी श्राद्ध कर्म कराए जाते हैं।

    अकाल मौत के लिए यहां सबसे महंगा श्राद्ध नारायण बलि बताया गया है। पांच ब्राह्मणों से नारायण बलि कराने की लागत 15 हजार रुपये है, जबकि त्रिपिंडी श्राद्ध के लिए आठ हजार रुपये और पार्वण श्राद्ध के लिए 2500 रुपये लिए जाते हैं। गयातीर्थ और गया श्राद्ध की कीमत निश्चित नहीं है और यह 1100 से 2500 रुपये या उससे अधिक हो सकती है। यदि एक ही परिवार में कई लोगों की अकाल मौत हुई हो तो प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग श्राद्ध कराया जाता है। पांच लोगों की अकाल मौत होने पर सभी के लिए अलग-अलग नारायण बलि करानी होती है और प्रत्येक के लिए कम से कम 15 हजार रुपये का खर्च बताया गया है।

    पिशाचमोचन में श्राद्ध कर्म की व्यवस्था बड़े स्तर पर होती है। मुन्ना पंडा के परिवार के लोग यहां प्रमुख महंत होते हैं, जबकि पितृपक्ष के 15 दिनों के लिए करीब 400 पंडे श्राद्ध कराने में जुटते हैं। तर्पण के लिए बैठने की जगह का किराया 500 रुपये लिया जाता है। एक तर्पण में करीब डेढ़ से दो घंटे लगते हैं। काम सूर्योदय के साथ शुरू होकर आधी रात तक चलता है। यहां व्यवस्था के लिए पंडे वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल करते हैं। पानी, गोबर, दूध और सफाई जैसी जरूरतों के लिए इसी माध्यम से कर्मचारियों को बुलाया जाता है। यहां आने वाले यजमानों को केवल दक्षिणा लेकर आने की जरूरत होती है, जबकि श्राद्ध और तर्पण में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री पैकेज के साथ यहीं उपलब्ध कराई जाती है।

  • भारत-US ट्रेड डील में फंसा पेंच…. निर्मला सीतारमण बोलीं- आगे कुछ और देना- लेना दोनों पक्षों के लिए मुश्किल

    भारत-US ट्रेड डील में फंसा पेंच…. निर्मला सीतारमण बोलीं- आगे कुछ और देना- लेना दोनों पक्षों के लिए मुश्किल


    नई दिल्ली।
    भारत और अमेरिका (India and America) के बीच ट्रेड डील (Trade Deal) को लेकर लंबे समय से चल रही बातचीत अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां दोनों देशों के लिए एक-दूसरे से नई रियायत हासिल करना आसान नहीं दिख रहा. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने सोमवार को इस मुद्दे पर एक सवाल के जवाब में कहा कि दोनों देशों के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गई है, जहां इसके आगे कुछ और देना या लेना दोनों पक्षों के लिए बहुत मुश्किल होगा।

    भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत फरवरी 2025 से चल रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की वॉशिंगटन में हुई मुलाकात के दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई थी. दोनों देशों ने 2030 तक आपसी कारोबार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा था.

    ट्रेड डील में कहां फंसी बात?

    म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अब तक हुई बातचीत काफी कड़ी रही है और दोनों पक्षों ने अपने-अपने हितों को ध्यान में रखते हुए समझौते पर चर्चा की है. उनके मुताबिक, मौजूदा स्थिति से आगे बढ़कर ज्यादा देना या लेना भारत और अमेरिका दोनों के लिए काफी मुश्किल होगा. सीतारमण ने यह भी कहा कि वह यह मानना चाहेंगी कि दोनों देश बातचीत में एक ‘प्लैटो’ (Plateau) पर पहुंच गए हैं. यानी अब समझौते के अगले चरण में पहुंचने के लिए दोनों पक्षों को अपनी मौजूदा स्थिति से आगे बढ़ना होगा, जो आसान नहीं है.


    अंतरिम समझौते पर सहमति

    दोनों देश एक साल से ज्यादा समय से बड़े व्यापार समझौते से पहले अंतरिम समझौते पर भी काम कर रहे हैं. फरवरी 2026 में भारत और अमेरिका ने इस अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट के लिए एक फ्रेमवर्क का ऐलान किया था. उस समय यह भी साफ किया गया था कि व्यापक समझौते को अंतिम रूप देने के लिए आगे और बातचीत की जरूरत होगी. इसके बाद पूरे 2026 में दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रही, लेकिन अब तक अंतिम समझौता नहीं हो सका है. अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर ने 1 अक्टूबर को भी कहा था कि ट्रेड डील अभी करीब नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह साफ किया था कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है।


    टैरिफ-मार्केट एक्सेस बड़े मुद्दे

    बातचीत के मौजूदा दौर में टैरिफ, बाजार तक पहुंच और दोनों देशों के बीच बड़े व्यापार असंतुलन जैसे मुद्दे अहम बने हुए हैं. यानी मामला सिर्फ आयात शुल्क (Import Duty) तक सीमित नहीं है, बल्कि कई बड़े आर्थिक मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश हो रही है. इसी सिलसिले में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमेरिका के दौरे पर थे. इस दौरान दोनों देशों के बीच अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बातचीत हुई।

    अभी डील फाइनल नहीं हुई
    फिलहाल वित्त मंत्री के बयान से यह स्पष्ट है कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील अभी अंतिम रूप नहीं ले पाई है. निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा कि दोनों देशों के व्यापार में फिलहाल भारत फायदे में हैं और अमेरिका अपने पुराने नुकसान की भरपाई करने और इस व्यापारिक अंतर को कम करने की कोशिश में जुटा है. वित्त मंत्री ने व्यापार घाटा कम करने के लिए अमेरिका द्वारा बार-बार टैरिफ बढ़ाने के तरीके पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि आमतौर पर ऐसे मामले बातचीत से ही सुलझाए जाते हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बहुत बड़ा है, फिर भी इसे सिर्फ भारी टैक्स लगाकर ठीक नहीं किया जा सकता, इसके लिए आपसी बातचीत और लेन-देन का रास्ता अपनाना होगा।

  • भारत-स्विट्जरलैंड के बीच कई समझौतों पर बनी सहमति…. नौकरी से लेकर व्यापार तक हुई कई डील

    भारत-स्विट्जरलैंड के बीच कई समझौतों पर बनी सहमति…. नौकरी से लेकर व्यापार तक हुई कई डील


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने सोमवार को भारत यात्रा (India Trip) पर आए स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाई पारमेलिन (Swiss President Guy Parmelin) से द्विपक्षीय वार्ता की। इस मौके पर हरित ऊर्जा, विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी, परिवहन, आवाजाही समेत कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। बैठक के बाद संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (एफ्टा) देशों के साथ हुए व्यापार समझौते से अगले 15 सालों में देश में सौ अरब डॉलर का निवेश आएगा और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।

    एफ्टा यूरोपीय देशों का एक मुक्त व्यापार संगठन है जिसे 1960 में स्थापित किया गया था। इसमें चार देश स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने बयान में कहा कि राष्ट्रपति पारमेलिन के सहयोग से एफ्टा देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौता लागू हुआ है। यह यूरोप के किसी भी आर्थिक समूह के साथ भारत का पहला समझौता है जो निवेश, नवाचार और साझा समृद्धि का दस्तावेज है।

    मोदी ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड की मित्रता सदियों पुरानी है। 19वीं सदी में स्वामी विवेकानंद ने स्विस आल्प्स में हिमालय की झलक देखी थी। महात्मा गांधी ने भी स्विट्जरलैंड में समय बिताया और वहां के लोगों से संवाद किया। इन ऐतिहासिक यात्राओं की स्मृतियां हमारी मित्रता में गूंजती हैं। मोदी ने स्विट्जरलैंड के पार्मेलिन को भारत की तीन विशेष चीज़- गुलमर्ग, कोणार्क और येऊर तथा हाथ से नक्काशी किया कश्मीरी अखरोट की लकड़ी का दीवार पैनल भेंट किया।


    स्विस बाजार में पहुंच बढ़ेगी

    मोदी ने कहा कि बैठक में हमने अपनी साझेदारी को एक नई गति और नई ऊंचाई दी है। स्विट्जरलैंड के बाजार में भारत की पहुंच बढ़ाने और निवेश को सुगम बनाने के लिए अहम निर्णय लिए हैं। इससे कृषि, फार्मा, वस्त्र तथा इंजीनियरिंग सामानों का स्विट्जरलैंड को निर्यात बढ़ेगा।


    अनुसंधान पर जोर

    इस दौरान स्वास्थ्य, हरित ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र में नए साझा अनुसंधान परियोजनाएं शुरू करने पर भी सहमति जताई गई। भारत के साइंस स्टार्टअप की क्षमता निर्माण के लिए ज्यूरिख विश्वविद्यालय के साथ समझौता किया गया है।


    वैश्विक शांति के लिए मिलकर काम करेंगे

    संयुक्त बयान में दोनों देशों ने कहा कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों, बातचीत और कूटनीति में विश्वास रखते हैं। वे वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए मिलकर कार्य करेंगे। PM मोदी ने अगले वर्ष एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए स्विट्जरलैंड को शुभकामनाएं भी दीं। इस दौरान कहा कि दोनों देश एआई को जिम्मेदार, समावेशी और मानव-केंद्रित बनाने को बढ़ते रहेंगे।


    भारत स्विट्जरलैंड के बीच 5 प्रमुख समझौते

    प्रवासन और आवागमन साझेदारी पर समझौता हुआ। इसमें पांच साल तक के लिए बहु-प्रवेश वीजा का प्रावधान है, जिसमें प्रत्येक यात्रा पर छह महीने तक का प्रवास शामिल है। साथ ही नवीकरणीय एक वर्षीय छात्र परमिट भी शामिल है।

    युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान पर समझौता (वाईपीएस)हुआ। इसका उद्देश्य युवा पेशेवरों के एक से दूसरे देश में अस्थायी रोजगार ग्रहण करने के काम को नियंत्रित करना है। इससे वे अपने क्षेत्र में पेशेवर और भाषायी कौशल को बढ़ा सकते हैं। वाईपीएस में प्रति देश प्रतिवर्ष तीन सौ लोगों का आदान-प्रदान शामिल है, जिसे बढ़ाकर पांच सौ किया जा सकता है।

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के बीच नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उद्यमिता में सहयोग के लिए कार्यान्वयन समझौता हुआ। इसका उद्देश्य द्विपक्षीय आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और नेटवर्किंग के माध्यम से प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप के लिए अकादमिक-उद्योग प्रशिक्षण कार्यक्रम को लागू करना है।

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और स्विस राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन (एसएनएसएफ) के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। इसका उद्देश्य खोजपूर्ण वैज्ञानिक सहयोग का समर्थन करके, भविष्य में संयुक्त अनुसंधान के लिए साझेदारी का निर्माण करना है।

    संघीय आर्थिक कार्य, शिक्षा और अनुसंधान विभाग (ईएईआर) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच चिह्नित क्षेत्रों में परिवहन प्रौद्योगिकियों, गतिशीलता प्रणालियों और अवसंरचना के संवर्धन एवं सहयोग पर समझौता हुआ। इसका मकसद सतत अवसंरचना विकास में सहयोग को बढ़ावा देना है। इसमें ई-वाहनों, रोपवे, चक्रीय अर्थव्यवस्था, सुरंगों और अन्य परिवहन क्षेत्रों में प्रौद्योगिकियों और अवसंरचना को बढ़ाकर परिवहन और गतिशीलता प्रणालियों पर ध्यान दिया गया है।

  • कैबिनेट फेरबदल की अटकलें हुई तेज…. राज्यसभा चुनाव के बाद दो मंत्रियों का पत्ता कटना तय

    कैबिनेट फेरबदल की अटकलें हुई तेज…. राज्यसभा चुनाव के बाद दो मंत्रियों का पत्ता कटना तय


    नई दिल्ली।
    राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Election 2026) की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने सोमवार को 8 और नामों का ऐलान कर दिया है। इसमें सबसे ज्यादा चर्चा बीएल वर्मा (BL Verma) और हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) को टिकट नहीं दिए जाने की है। खास बात है कि दोनों ही केंद्रीय मंत्री थे। साथ ही भाजपा ने अब तक ऐलान नहीं किया कि इन नेताओं की नई भूमिका क्या हो सकती है। दरअसल, ये ऐसे समय पर हुआ है जब कैबिनेट फेरबदल की अटकलें चल रही हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है और महज अटकलों का दौर चल रहा है।

    संविधान के अनुच्छेद 75(5) में कहा गया है कि एक मंत्री अगर लगातार 6 महीने तक किसी भी सदन का सदस्य नहीं रहता है, तो उन्हें पद छोड़ना पड़ता है। अब नवंबर में पुरी और वर्मा दोनों का ही कार्यकाल खत्म हो रहा है। ऐसे में चर्चाएं तेज हो गईं हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाले मंत्री परिषद में नए चेहरों की एंट्री हो सकती है। अभी तक औपचारिक रूप से इसे लेकर कुछ नहीं कहा गया है।


    4 नए मंत्रियों की एंट्री की तैयारी

    पीएम मोदी के टीम में 4 नए मंत्रियों की एंट्री हो सकती है। इसकी वजह पुरी, वर्मा, रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन की राज्यसभा में वापसी नहीं होना है। ये चारों ही एनडीए सरकार में मंत्री थे। बिट्टू रेल राज्य मंत्री थे। उन्होंने जुलाई में पद से इस्तीफा दे दिया था। दरअसल, जून में उनका राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो गया था। इसके बाद पार्टी ने उन्हें उच्च सदन के लिए नॉमिनेट नहीं किया था। दरअसल, चर्चाएं थीं कि बिट्टू अब सरकार से निकल कर पंजाब विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए बड़ी भूमिका निभाने जा रहे हैं। राज्य में 2027 में चुनाव होने हैं।

    जून में ही जॉर्ज कुरियन भी राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं। केरल से भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल कुरियन अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री थे। खास बात है कि कुरियन सरकार में अकेले ईसाई मंत्री थे। उन्होंने 9 जून 2024 को पदभार संभाला था। वह साल 1980 से भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े रहे हैं और पार्टी प्रवक्ता, केरल भाजपा के उपाध्यक्ष समेत कई अहम पदों पर रह चुके हैं।

  • कौशांबी में CEC का पुतला फूंकना सपाइयों को पड़ा भारी, जिलाध्यक्ष समेत 9 नामजद, अज्ञात पर भी FIR

    कौशांबी में CEC का पुतला फूंकना सपाइयों को पड़ा भारी, जिलाध्यक्ष समेत 9 नामजद, अज्ञात पर भी FIR


    कौशांबी। SIR के विरोध में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का सांकेतिक पुतला फूंकना समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को भारी पड़ गया। मंझनपुर चौराहे पर प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम करने, नारेबाजी और पुतला दहन के आरोप में पुलिस ने सपा जिलाध्यक्ष दयाशंकर यादव समेत 9 नामजद और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

    पुलिस के मुताबिक, 5 अक्टूबर को सपा के सैकड़ों कार्यकर्ता पार्टी कार्यालय से नारेबाजी करते हुए मंझनपुर चौराहे पहुंचे थे। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना मुख्य मार्ग पर बैठकर और खड़े होकर यातायात बाधित किया। इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के सांकेतिक पुतले को आग लगा दी गई।

    पुलिस ने बुझाई आग, हटाकर खुलवाया रास्ता
    उप निरीक्षक अभिषेक कुमार यादव की तहरीर के आधार पर दर्ज मुकदमे में कहा गया है कि प्रदर्शन के कारण चौराहे पर यातायात प्रभावित हुआ। पुतला जलाए जाने के बाद धुआं फैलने से मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाई और प्रदर्शनकारियों को हटाकर यातायात व्यवस्था सामान्य कराई।

    घटना के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच नोकझोंक की भी जानकारी सामने आई है। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने जलते हुए पुतले को अपने कब्जे में लेने का प्रयास किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

    इन लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR
    पुलिस ने सपा जिलाध्यक्ष दयाशंकर यादव, शहनवाज, चंद्रजीत यादव, राजू सिंह पटेल, भरत सिंह लोधी, आनंद मोहन पटेल, विभा यादव, सुमित पांडे और आफताब शेख को नामजद किया है। इनके अलावा अन्य अज्ञात लोगों को भी मुकदमे में आरोपी बनाया गया है। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन और पुतला दहन की घटना की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी कराई गई थी। इन्हें जांच में साक्ष्य के तौर पर शामिल किया जा रहा है।

    SIR के विरोध में प्रदर्शन कर रही सपा
    समाजवादी पार्टी SIR को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही है। कौशांबी में भी इसी मुद्दे को लेकर 5 अक्टूबर को पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी की गई और उनका सांकेतिक पुतला जलाया गया।

    अब पुलिस दर्ज मुकदमे के आधार पर मामले की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध वीडियो और फोटो समेत अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • SIR के खिलाफ INDIA के प्रदर्शन से AAP ने बनाई दूरी, संजय सिंह बोले- हम अपनी लड़ाई अलग तरीके से लड़ रहे

    SIR के खिलाफ INDIA के प्रदर्शन से AAP ने बनाई दूरी, संजय सिंह बोले- हम अपनी लड़ाई अलग तरीके से लड़ रहे


    नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ INDIA गठबंधन के 6 अक्टूबर के प्रदर्शन से आम आदमी पार्टी ने दूरी बना ली है। AAP ने कहा है कि वह इस मुद्दे पर अपना आंदोलन अलग तरीके से जारी रखेगी और इसे किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि जनता से जुड़ा मुद्दा मानती है।

    संसद भवन परिसर में सोमवार को मीडिया से बातचीत में AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि SIR में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि 6 अक्टूबर का प्रदर्शन INDIA गठबंधन का है, इसलिए आम आदमी पार्टी इसमें शामिल नहीं होगी।

    संजय सिंह ने कहा, “जहां तक कल के प्रदर्शन की बात है, तो ये INDIA गठबंधन का प्रोटेस्ट है। इसलिए आम आदमी पार्टी इसका हिस्सा नहीं है। हम इस लड़ाई को अपने तरीके से लगातार लड़ रहे हैं।”

    पार्टी बैनर के बिना आंदोलन की बात

    AAP नेता ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को व्यापक जन आंदोलन के रूप में देख रही है। उन्होंने बताया कि AAP अपने प्रदर्शन में पार्टी का बैनर तक इस्तेमाल नहीं कर रही है, क्योंकि उसका मानना है कि यह देश के नागरिकों से जुड़ा मुद्दा है और इसमें हर व्यक्ति की भागीदारी होनी चाहिए।

    संजय सिंह ने यह भी कहा कि CJP और वाम दल समेत कई संगठन अलग-अलग स्थानों पर SIR के खिलाफ अपने स्तर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में आम आदमी पार्टी भी अपनी रणनीति के तहत इस मुद्दे को उठा रही है।

    30 सितंबर की विपक्षी बैठक में भी नहीं पहुंची थी AAP

    AAP ने 30 सितंबर को हुई विपक्षी दलों की बैठक में भी हिस्सा नहीं लिया था। उस बैठक में 19 विपक्षी दलों के नेताओं ने SIR और मतदाता सूची से जुड़ी कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की थी। बैठक के बाद INDIA गठबंधन ने 6 अक्टूबर को अपने सांसदों के साथ चुनाव आयोग तक मार्च करने और राष्ट्रपति से मुलाकात करने का फैसला किया था।

    इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, RJD नेता तेजस्वी यादव, NCP (SP) सांसद सुप्रिया सुले, PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती और वाम दलों के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे।

    शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बैठक में वर्चुअली हिस्सा लिया था। AAP के साथ DMK भी इस बैठक में शामिल नहीं हुई थी।

    SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग आमने-सामने

    SIR को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और बदलावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। INDIA गठबंधन ने इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी विरोध दर्ज कराया है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों में तीन सदस्यीय आयोग के भीतर किसी विभाजन के दावों को खारिज किया है और कहा है कि संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

    AAP की ओर से हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि पार्टी SIR के मुद्दे से पीछे नहीं हट रही है। उसका कहना है कि वह इस मुद्दे पर अपना आंदोलन जारी रखेगी, लेकिन 6 अक्टूबर को होने वाले INDIA गठबंधन के संयुक्त प्रदर्शन का हिस्सा नहीं बनेगी।

  • पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की तैयारी, सरकार विधानसभा में लाएगी बिल

    पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की तैयारी, सरकार विधानसभा में लाएगी बिल


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंग’ करने की तैयारी फिर तेज हो गई है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा है कि राज्य सरकार जल्द विधानसभा में नाम परिवर्तन से जुड़ा विधेयक पेश करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि यह बिल अगले विधानसभा सत्र में लाया जा सकता है।

    समिक भट्टाचार्य ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राज्य का नाम ‘बंगाल’ या ‘वेस्ट बंगाल’ रखने के बजाय ‘पश्चिम बंग’ किया जाएगा। उनके मुताबिक, इस नाम का उद्देश्य राज्य को उसके इतिहास और पहचान से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द इस दिशा में विधायी प्रक्रिया शुरू करेगी।

    वाराणसी में बनेगा ‘पश्चिम बंग भवन’
    समिक भट्टाचार्य ने वाराणसी में ‘पश्चिम बंग भवन’ बनाने की योजना की भी जानकारी दी। उनके मुताबिक, यह भवन राज्य के संस्कृति और पर्यटन विभाग, केंद्र सरकार तथा कूचबिहार के पूर्व राजपरिवार के वंशजों के सहयोग से तैयार किया जाएगा।

    यह भवन केवल सांस्कृतिक केंद्र के तौर पर ही नहीं, बल्कि बंगाल से वाराणसी आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए भी उपयोग किया जाएगा। प्रस्ताव में सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ अन्य सुविधाएं विकसित करने की बात कही गई है।

    भाजपा नेता ने वाराणसी और बंगाल के बीच पुराने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कूचबिहार के राजपरिवार से जुड़े इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि राजपरिवार ने 1836 में बनारस कालीबाड़ी की आधारशिला रखी थी और इसके बाद वहां दो मंदिरों का निर्माण कराया गया था।

    पहले भी कई बार उठा है नाम बदलने का मुद्दा
    पश्चिम बंगाल का नाम बदलने का मुद्दा नया नहीं है। 1999 में ज्योति बसु के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार ने राज्य का नाम ‘पश्चिम बंग’ करने का प्रस्ताव विधानसभा में रखा था। बाद में ‘बांग्ला’ नाम को लेकर भी चर्चा हुई और प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया, लेकिन राजनीतिक सहमति और केंद्र की मंजूरी नहीं मिलने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

    2011 में तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद यह मुद्दा दोबारा उठा। ममता बनर्जी सरकार ने भी ‘पश्चिम बंग’ नाम का प्रस्ताव रखा था। उस समय यह तर्क दिया गया था कि अंग्रेजी वर्णमाला के क्रम में राज्य का नाम काफी नीचे आने के कारण राष्ट्रीय बैठकों में पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधियों को अपनी बारी के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। सर्वदलीय बैठक में प्रस्ताव का समर्थन भी हुआ, लेकिन केंद्र की मंजूरी नहीं मिली।

    इसके बाद 2016 में नाम बदलने की प्रक्रिया फिर शुरू हुई। उस समय बंगाली में ‘बांग्ला’, अंग्रेजी में ‘बंगाल’ और हिंदी में ‘बंगाल’ नाम रखने का प्रस्ताव सामने आया। वर्ष 2018 में विधानसभा ने सर्वसम्मति से राज्य का नाम केवल ‘बांग्ला’ रखने का प्रस्ताव पारित किया था।

    हालांकि, केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी। नाम परिवर्तन के लिए संवैधानिक प्रक्रिया का पालन जरूरी होने की बात सामने आई। साथ ही भाजपा के एक वर्ग ने ‘बांग्ला’ नाम की ‘बांग्लादेश’ से समानता को लेकर भी आपत्ति जताई थी।

    अब आगे क्या होगा?
    समिक भट्टाचार्य ने अब एक बार फिर ‘पश्चिम बंग’ नाम का प्रस्ताव सामने रखा है। हालांकि, केवल राज्य विधानसभा में विधेयक पेश और पारित होने से नाम तुरंत नहीं बदलेगा। राज्य का नाम बदलने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आगे केंद्र और संसद की भूमिका भी होगी। मौजूदा रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्ताव को विधानसभा स्तर से आगे बढ़कर केंद्र की प्रक्रिया और संसद की मंजूरी से गुजरना होगा। इसलिए फिलहाल पश्चिम बंगाल का आधिकारिक नाम ‘पश्चिम बंग’ नहीं हुआ है; यह नाम बदलने की प्रस्तावित प्रक्रिया का हिस्सा है।

  • BSF जवान की दाढ़ी बनी विवाद की वजह, ट्रिम करने से इनकार के बाद ली स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति; हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की

    BSF जवान की दाढ़ी बनी विवाद की वजह, ट्रिम करने से इनकार के बाद ली स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति; हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की


    नई दिल्ली: सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवान खुर्शीद अहमद खान की दाढ़ी रखने की अनुमति को लेकर शुरू हुआ विवाद हाई कोर्ट तक पहुंच गया। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। खान ने 16 जून 2023 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत कमांडेंट, 50 बटालियन BSF, प्रहरिनगर, तुरा, मेघालय ने उनकी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की अर्जी स्वीकार कर उन्हें तत्काल प्रभाव से यूनिट की सेवा से हटा दिया था। खान मार्च 1998 में BSF में भर्ती हुए थे। 6 जनवरी 2018 को उन्हें ठीक से कटी-छंटी दाढ़ी रखने की अनुमति दी गई थी, लेकिन शर्त थी कि दाढ़ी साफ-सुथरी और निर्धारित तरीके से ट्रिम रहे। खान का कहना था कि 16 जून 2023 को यह अनुमति अचानक वापस ले ली गई, जिससे परेशान होकर उन्होंने उसी दिन स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन कर दिया।

    खान के मुताबिक, उनकी सेवानिवृत्ति की अर्जी उसी दिन स्वीकार कर ली गई। बाद में उन्होंने आवेदन वापस लेने की कोशिश की, लेकिन उनका अनुरोध अस्वीकार कर दिया गया। 5 जुलाई 2023 के आदेश में उन्हें पेंशन लेने और ड्यूटी पर वापस नहीं लौटने का निर्देश दिया गया। इसके बाद 19 जुलाई 2024 को BSF महानिदेशक को दी गई उनकी अर्जी पर भी विचार नहीं किया गया। खान ने आरोप लगाया कि दाढ़ी रखने की अनुमति वापस लेना बदले की भावना से किया गया और उनकी सेवानिवृत्ति वास्तव में स्वैच्छिक नहीं थी। दूसरी ओर, BSF ने कहा कि 2018 में दी गई अनुमति कुछ शर्तों के साथ थी। 16 जून 2023 को खान बिना ट्रिम की हुई लंबी दाढ़ी और खराब हालत में पाए गए, जिसे बल के नियमों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ बताया गया। BSF के अनुसार, खान ने दाढ़ी ट्रिम करने से इनकार किया, जिसके बाद अनुमति वापस ली गई।

    BSF ने अदालत को बताया कि खान ने खुद परेड के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने की इच्छा जताई थी। कमांडेंट ने अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में उनसे इस बारे में बात की और पूछे जाने पर खान ने किसी दबाव या मजबूरी से इनकार किया था। इस प्रक्रिया का रिकॉर्ड भी रखा गया था। बल के मुताबिक, खान ने अपनी मां की बीमारी और मेडिकल कैटेगरी के कारण नौकरी की शर्तें पूरी करने में कठिनाई का भी हवाला दिया था। सक्षम अधिकारी ने उनके हालात, सेवा रिकॉर्ड और हाल के व्यवहार पर विचार करने के बाद तीन महीने की नोटिस अवधि में छूट देते हुए तुरा में तत्काल प्रभाव से उनका अनुरोध स्वीकार किया। BSF ने यह भी बताया कि खान के सेवा रिकॉर्ड में 13 प्रतिकूल प्रविष्टियां थीं, जिनमें बिना छुट्टी के अनुपस्थित रहना और नशे में होना शामिल था। वह स्थायी रूप से लो मेडिकल कैटेगरी में भी थे।

    हाई कोर्ट ने मामले में दाढ़ी रखने की अनुमति वापस लेने या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की वैधता पर सुनवाई नहीं की। अदालत ने BSF की अधिकार क्षेत्र संबंधी शुरुआती आपत्ति को स्वीकार करते हुए कहा कि खान ने सेवानिवृत्ति की अर्जी तुरा में दी थी और विवादित आदेश भी वहीं जारी हुआ था। यह क्षेत्र जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। जस्टिस रजनीश ओसवाल ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत किसी हाई कोर्ट में रिट याचिका तभी दाखिल की जा सकती है, जब मामले की कार्रवाई का पूरा या कोई महत्वपूर्ण हिस्सा उसके क्षेत्राधिकार में हुआ हो। अदालत को जम्मू-कश्मीर के भीतर ऐसा कोई आधार नहीं मिला। कोर्ट ने यह भी कहा कि BSF महानिदेशक का कार्यालय नई दिल्ली में होने मात्र से देश का कोई भी हाई कोर्ट मामले की सुनवाई नहीं कर सकता। याचिका शुरुआती चरण में खारिज कर दी गई और खान को संबंधित अधिकार क्षेत्र वाली अदालत में जाने की छूट दी गई।

  • सुप्रीम कोर्ट की दिल्ली पुलिस को सख्त हिदायत, रात 10 बजे भी महिलाओं को सुरक्षित महसूस कराने के लिए पुख्ता सुरक्षा सुनिश्चित करें

    सुप्रीम कोर्ट की दिल्ली पुलिस को सख्त हिदायत, रात 10 बजे भी महिलाओं को सुरक्षित महसूस कराने के लिए पुख्ता सुरक्षा सुनिश्चित करें

    नई दिल्ली ।देश की राजधानी दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं। हाल में स्लीपर बस और दक्षिण दिल्ली के एक पार्क में हुई बलात्कार की घटनाओं का उल्लेख करते हुए अदालत ने पुलिस की कार्यशैली और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल कागजी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। पुलिस को जमीनी स्तर पर ऐसा माहौल तैयार करना होगा, जिसमें यौन अपराध करने की प्रवृत्ति रखने वाले लोगों के मन में कानून का डर हो और महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।

    सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि अपराधियों के मन में ऐसा सख्त खौफ पैदा किया जाए कि वे इस तरह के अपराध को दोबारा करने के बारे में सोचने से भी डरें। अदालत ने कहा कि जब तक असामाजिक तत्वों को यह भरोसा नहीं होगा कि ऐसे अपराध करने पर उन्हें बख्शा नहीं जाएगा, तब तक राजधानी की स्थिति में सुधार मुश्किल है। कोर्ट ने पुलिस से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि आने वाले हफ्तों में ऐसी कोई वीभत्स घटना दोबारा न हो।

    दक्षिण दिल्ली के एक पार्क में हुए गैंगरेप मामले को लेकर भी अदालत ने पुलिस से तीखे सवाल किए। कोर्ट ने कहा कि घटना से पहले स्थानीय लोगों ने पुलिस को असामाजिक तत्वों के बारे में चेतावनी दी थी। ऐसे में अदालत ने सवाल उठाया कि समय रहते उचित कार्रवाई क्यों नहीं की गई। सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए दिल्ली में एक वॉर रूम बनाने के संबंध में भी जानकारी मांगी और सुरक्षा व्यवस्था को इस स्तर तक मजबूत करने को कहा कि रात 10 बजे सड़क पर चलने वाली महिला भी खुद को सुरक्षित महसूस करे।

    अदालत ने यौन अपराधों से जुड़े संदिग्धों पर निगरानी के लिए यौन अपराधियों के राष्ट्रीय डेटाबेस के इस्तेमाल का सुझाव भी दिया। इसके अलावा दिल्ली में मौजूद हजारों अनधिकृत खाने-पीने की जगहों का मुद्दा भी उठाया गया। अदालत के अनुसार, ऐसी जगहों पर अवैध रूप से शराब परोसे जाने और असामाजिक तत्वों के जमा होने की बात सामने आती है। कोर्ट ने इस व्यवस्था पर भी पुलिस का ध्यान आकर्षित किया और सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कार्रवाई पर जोर दिया।

    जस्टिस पारदीवाला ने वर्ष 2012 के निर्भया मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस वीभत्स घटना से पहले भी दोषियों ने ऐसी ही जगहों पर खान-पान किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेजों के आसपास मंडराने वाले मनचलों और शोहदों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। अदालत के निर्देशों का मुख्य जोर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस की जमीनी कार्रवाई मजबूत करने, सुरक्षा चूक रोकने और यौन अपराधों की प्रवृत्ति रखने वाले लोगों के बीच कानून का प्रभावी डर पैदा करने पर रहा।

  • बिहार दरोगा मेंस परीक्षा रद्द होने पर पटना में छात्रों का प्रदर्शन, बैरिकेड तोड़े तो पुलिस ने किया लाठीचार्ज

    बिहार दरोगा मेंस परीक्षा रद्द होने पर पटना में छात्रों का प्रदर्शन, बैरिकेड तोड़े तो पुलिस ने किया लाठीचार्ज

    नई दिल्ली ।बिहार में 1799 पदों के लिए होने वाली दरोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा रद्द किए जाने के खिलाफ सोमवार को पटना में अभ्यर्थियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। अलग-अलग जिलों से पहुंचे अभ्यर्थी गांधी मैदान में एकत्र हुए और वहां से मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी जब जेपी गोलंबर के पास पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। छात्रों ने बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया।

    प्रदर्शन सोमवार सुबह करीब 11:30 बजे गांधी मैदान से शुरू हुआ। बड़ी संख्या में दरोगा भर्ती के अभ्यर्थी वहां जुटे और जेपी गोलंबर की तरफ मार्च करने लगे। जेपी गोलंबर के पास भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर छात्रों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ दिए और डाकबंगला चौराहे की ओर बढ़ने लगे। इसके बाद पुलिस ने लाठियां भांजकर भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की, जिससे मौके पर भगदड़ की स्थिति बन गई। प्रशासन की ओर से कहा गया कि इस तरह के प्रदर्शन से आम लोगों और यातायात व्यवस्था पर असर पड़ रहा था।

    अभ्यर्थियों का मुख्य विरोध 1799 पदों के लिए आयोजित मुख्य परीक्षा को रद्द किए जाने को लेकर है। करीब 10 हजार अभ्यर्थियों ने यह मेंस परीक्षा पास की थी। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि कुछ लोगों की शिकायतों के आधार पर बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने पूरी परीक्षा रद्द कर दी। उनका कहना है कि यदि परीक्षा में किसी स्तर पर गड़बड़ी या भ्रष्टाचार हुआ था तो उसकी जांच कर दोषी अभ्यर्थियों या संबंधित परीक्षा केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए थी। छात्रों का तर्क है कि पूरी परीक्षा रद्द करने से उन अभ्यर्थियों को भी नुकसान हो रहा है, जिन्होंने मेहनत से परीक्षा पास की थी।

    अभ्यर्थियों ने अपनी चार महीने की तैयारी और भविष्य को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि मुख्य परीक्षा पास करने के बाद वे पिछले करीब चार महीने से शारीरिक दक्षता परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। कई अभ्यर्थियों के अनुसार उनकी उम्र सीमा समाप्त हो चुकी है या समाप्त होने के करीब है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले छात्रों के लिए पटना में रहकर लगातार तैयारी करना और परिवार से बार-बार आर्थिक मदद लेना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया के अंतिम चरण में पहुंचने के बाद मुख्य परीक्षा रद्द होने से उनके सामने भविष्य को लेकर परेशानी खड़ी हो गई है।

    प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपनी मांग के समर्थन में चुनाव प्रक्रिया का उदाहरण भी दिया। उनका कहना है कि यदि किसी एक या दो मतदान केंद्रों पर गड़बड़ी मिलती है तो पूरे राज्य का चुनाव रद्द नहीं किया जाता, बल्कि संबंधित बूथ पर दोबारा मतदान कराया जाता है। इसी आधार पर छात्रों ने सवाल उठाया कि परीक्षा में गड़बड़ी की स्थिति में पूरी परीक्षा रद्द करने के बजाय संबंधित स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। अभ्यर्थियों ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि जब तक मुख्य परीक्षा रद्द करने का आदेश वापस लेकर शारीरिक परीक्षा की नई तारीख घोषित नहीं की जाती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।