Category: National

  • सीवेज प्रदूषण पर NGT सख्त, MP-UP-राजस्थान से जवाब तलब, इंदौर में मौतें और भोपाल में 'ई-कोलाई' का खतरा

    सीवेज प्रदूषण पर NGT सख्त, MP-UP-राजस्थान से जवाब तलब, इंदौर में मौतें और भोपाल में 'ई-कोलाई' का खतरा


    नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की प्रधान पीठ ने नई दिल्ली में बुधवार को इंदौर, भोपाल और राजस्थान के शहरों में पेयजल में सीवेज की मिलावट से जुड़ी गंभीर समस्याओं पर स्वतः संज्ञान लिया। NGT ने मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की राज्य सरकारों से जवाब तलब किया है। ट्रिब्यूनल ने इंदौर में गंदे पानी के कारण मौतों और भोपाल में पेयजल में ‘ई-कोलाई’ बैक्टीरिया मिलने के मामलों का हवाला दिया।
    मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इंदौर में गंदे पानी के सेवन से मौतें हुई हैं, जबकि भोपाल के कुछ इलाकों में ट्यूबवेल से रिसाव के कारण पेयजल में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। वहीं, राजस्थान के उदयपुर, जोधपुर, कोटा, बांसवाड़ा, जयपुर और अजमेर जैसे शहरों में पुरानी और जर्जर पाइपलाइन प्रणाली के चलते सीवेज के पानी का पेयजल में मिलना जारी है। ग्रेटर नोएडा में भी सीवेज मिला पानी पीने से कई लोग बीमार पड़े, जिनमें बच्चे भी शामिल थे।
    एनजीटी ने इन घटनाओं को गंभीर पर्यावरणीय और जनस्वास्थ्य से जुड़ा मामला माना। पीठ ने संबंधित राज्य सरकारों, प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) से स्पष्ट जवाब तलब किया है। कहा गया है कि यह मामला पर्यावरणीय कानूनों का पालन सुनिश्चित करने, जिम्मेदारी तय करने और नागरिकों के सुरक्षित पेयजल के अधिकार की रक्षा के लिए विचाराधीन रहेगा।

    इसके अलावा, NGT ने मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के मामलों को भी संज्ञान में लिया। रिपोर्ट के अनुसार, सड़क, रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग और कोयला खदान परियोजनाओं के लिए 50 से 100 वर्ष पुराने लगभग 15 लाख पेड़ काटे जा चुके हैं या काटे जाने का प्रस्ताव है। सिंगरौली, खंडवा, विदिशा, भोपाल और इंदौर में भारी संख्या में पेड़ों की कटाई से वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

    पीठ ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य वन विभागों को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई तक शपथ पत्र के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करें। अगली सुनवाई 9 मार्च 2026 को होगी।

  • चूड़ा-दही भोज से दूर रहे तेजस्वी, तेजप्रताप का सियासी वार, शायद जयचंदों ने घेर रखा है

    चूड़ा-दही भोज से दूर रहे तेजस्वी, तेजप्रताप का सियासी वार, शायद जयचंदों ने घेर रखा है


    नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में यादव परिवार के भीतर चल रही खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेजप्रताप यादव ने चूड़ा-दही भोज में तेजस्वी यादव के नहीं पहुंचने पर न सिर्फ नाराजगी जताई, बल्कि तीखा सियासी तंज भी कसा। तेजप्रताप ने कहा कि उन्होंने खुद 13 जनवरी को तेजस्वी यादव को भोज का निमंत्रण देने के लिए संपर्क किया था, लेकिन वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।
    इस पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, हो सकता है उन्हें जयचंदों ने घेर रखा हो।

    तेजप्रताप यादव ने साफ शब्दों में कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी और संतोष की बात यह रही कि उनके पिता और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव कार्यक्रम में पहुंचे। उन्होंने कहा, “पिता जी का आना और उनका आशीर्वाद मिलना ही मेरे लिए सबसे बड़ी जीत है। उससे ऊपर कुछ नहीं।” तेजप्रताप ने बताया कि चूड़ा-दही भोज में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों खेमों के कई बड़े नेता पहुंचे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी निमंत्रण भेजा गया था और कई दलों के नेताओं ने आकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

    इस मौके पर तेजप्रताप यादव ने बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा कि लालू यादव की मूल और असली पार्टी जनशक्ति जनता दल है। उन्होंने अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव को खुली सलाह देते हुए कहा कि उन्हें राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) का विलय जनशक्ति जनता दल में कर देना चाहिए। तेजप्रताप का यह बयान बिहार की सियासत में हलचल पैदा करने वाला माना जा रहा है।

    तेजप्रताप यादव यहीं नहीं रुके। उन्होंने दावा किया कि उन्हें बीजेपी समेत कई राजनीतिक दलों से ऑफर मिल चुके हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि आगे किसके साथ जाना है, इसका फैसला वे खुद लेंगे। उन्होंने कहा, “जो बिहार के हित में काम करेगा, जनता की बात करेगा, जनशक्ति जनता दल उसी का साथ देगा।”

    पार्टी के भविष्य को लेकर तेजप्रताप यादव ने बड़े ऐलान करते हुए कहा कि जनशक्ति जनता दल आने वाले समय में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारेगी। इसके अलावा दिल्ली नगर निगम (MCD) चुनाव और बिहार में इस साल होने वाले विधान परिषद (MLC) चुनाव में भी पार्टी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगी।

    गौरतलब है कि आरजेडी से बाहर होने के बाद तेजप्रताप यादव ने जनशक्ति जनता दल का गठन किया था। उन्होंने इसी पार्टी के सिंबल पर महुआ सीट से बिहार विधानसभा 2025 का चुनाव भी लड़ा, हालांकि जीत हासिल नहीं कर सके। इसके बावजूद तेजप्रताप अपने बयानों और सियासी गतिविधियों के जरिए लगातार यह संकेत दे रहे हैं कि वे बिहार की राजनीति में किसी भी कीमत पर अपनी अलग पहचान और मजबूत भूमिका बनाए रखने के मूड में हैं।

  • संसदीय समिति के सामने जस्टिस वर्मा का पक्ष: कैश कांड में पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल

    संसदीय समिति के सामने जस्टिस वर्मा का पक्ष: कैश कांड में पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली। कैश कांड से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने संसदीय समिति को अपना लिखित जवाब सौंप दिया है। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए महाभियोग की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। जस्टिस वर्मा का कहना है कि यदि प्रशासनिक एजेंसियां घटनास्थल को सुरक्षित रखने में विफल रहीं, तो इसकी जिम्मेदारी उन पर डालना न्यायसंगत नहीं है।

    “घटनास्थल पर मैं सबसे पहले नहीं पहुंचा”

    सूत्रों के मुताबिक, जस्टिस वर्मा ने समिति को दिए जवाब में स्पष्ट किया कि वह घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वाले व्यक्ति नहीं थे। आग लगने जैसी गंभीर घटना में पुलिस और अन्य एजेंसियों की जिम्मेदारी होती है कि वे तुरंत मौके को सील करें और सुरक्षा मानकों का पालन करें। उन्होंने कहा कि पुलिस ने न तो स्थल को सुरक्षित किया और न ही मानक प्रक्रिया का पालन किया, ऐसे में बाद की किसी भी चूक के लिए उन्हें दोषी ठहराना अनुचित है।

    पुलिस और फायर ब्रिगेड की भूमिका पर सवाल

    जस्टिस वर्मा ने अपने जवाब में यह भी कहा कि आग लगने के समय मौके पर पुलिस और फायर ब्रिगेड दोनों मौजूद थीं। इसके बावजूद घटनास्थल को सील नहीं किया गया और आवश्यक सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उस समय किसी भी तरह की नकदी की औपचारिक बरामदगी नहीं की गई थी, जबकि बाद में नकदी मिलने की बात कही जा रही है। उनके अनुसार, जब घटनास्थल पूरी तरह से प्रशासनिक एजेंसियों के नियंत्रण में था, तो उसकी सुरक्षा में हुई चूक की जिम्मेदारी उन पर कैसे डाली जा सकती है।

    महाभियोग प्रक्रिया को दी चुनौती

    इन्हीं तर्कों के आधार पर जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने खिलाफ शुरू की गई महाभियोग प्रक्रिया और संसदीय समिति के गठन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले में शीर्ष अदालत में सुनवाई पूरी हो चुकी है और फैसला सुरक्षित रखा गया है। अब पूरे घटनाक्रम पर देश की सर्वोच्च अदालत के निर्णय की प्रतीक्षा है।

    क्या है कैश कांड की पूरी कहानी

    यह मामला मार्च 2025 में उस समय चर्चा में आया, जब दिल्ली के तुगलक क्रीसेंट स्थित जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के एक स्टोर रूम में आग लग गई। 14 मार्च 2025 को लगी इस आग को बुझाने पहुंची फायर ब्रिगेड और पुलिस टीम को वहां फर्श पर 500 रुपये के नोटों के जले और आंशिक रूप से जले बंडल दिखाई दिए थे। इसी घटना ने पूरे देश में सनसनी फैला दी।

    घटना के बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने जांच के लिए तीन जजों की इन-हाउस समिति गठित की और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा का तबादला दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया। इसके बाद जुलाई 2025 में 140 से अधिक सांसदों ने उनके खिलाफ महाभियोग का नोटिस दिया, जिस पर अगस्त 2025 में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तीन सदस्यीय संसदीय समिति का गठन किया।

    अब जस्टिस यशवंत वर्मा के जवाब और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर इस पूरे मामले की दिशा तय होगी।

  • तमिल संस्कृति भारत की साझा विरासत पोंगल समारोह में बोले पीएम मोदी- भरी रहे थाली और जेब सुरक्षित रहे धरती

    तमिल संस्कृति भारत की साझा विरासत पोंगल समारोह में बोले पीएम मोदी- भरी रहे थाली और जेब सुरक्षित रहे धरती


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पोंगल के पावन अवसर पर तमिल संस्कृति और परंपराओं के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की। केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के दिल्ली स्थित आवास पर आयोजित भव्य पोंगल समारोह में शामिल होकर प्रधानमंत्री ने न केवल इस उत्सव की खुशियों को साझा किया बल्कि इसे भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बताया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रकृति और प्रगति के बीच संतुलन बनाए रखने का एक नया मंत्र भी दिया।

    ग्लोबल फेस्टिवल बना पोंगल: पीएम मोदी समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज पोंगल केवल एक क्षेत्रीय पर्व नहीं बल्कि एक ग्लोबल फेस्टिवल बन चुका है। उन्होंने कहा दुनिया भर में फैला तमिल समुदाय और तमिल संस्कृति से प्रेम करने वाले लोग इसे बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। मैं भी उन प्रेम करने वालों में से एक हूँ और इस विशेष पर्व को आप सभी के साथ मनाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने तमिल संस्कृति को दुनिया की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक बताते हुए इसे सदियों को जोड़ने वाली कड़ी करार दिया।

    अन्नदाता के प्रति आभार और प्रकृति का संतुलन प्रधानमंत्री ने पोंगल के आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस त्योहार में हमारे अन्नदाता की कड़ी मेहनत छिपी है। यह सूर्य देव और धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। पीएम मोदी ने कहा हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि हमारी थाली भी भरी रहे हमारी जेब भी भरी रहे और हमारी धरती भी सुरक्षित रहे। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगली पीढ़ी के लिए मिट्टी की सेहत बनाए रखना और जल संरक्षण करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।तमिल विरासत से प्रधानमंत्री का गहरा जुड़ाव अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने पिछले एक साल में तमिल संस्कृति से जुड़े अपने सुखद अनुभवों को साझा किया। उन्होंने गंगई कोंडा चोलपुरम मंदिर में प्रार्थना वाराणसी के ‘काशी तमिल संगमम’ की जीवंत ऊर्जा और रामेश्वरम में पंबन ब्रिज के उद्घाटन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये अनुभव तमिल विरासत की समृद्धि और महानता का साक्षात् प्रमाण हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि तमिल संस्कृति पूरे भारत की साझा विरासत है जो एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना को और अधिक सशक्त बनाती है।

    एक भारत-श्रेष्ठ भारत का संदेश प्रधानमंत्री ने कहा कि पोंगल जैसे पर्व हमें सिखाते हैं कि प्रकृति के प्रति आभार केवल शब्दों तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि यह हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने संसाधनों के समझदारीपूर्ण उपयोग का आह्वान करते हुए कहा कि जब हम प्रकृति की देखभाल करेंगे तभी हमारा भविष्य सुरक्षित होगा। केंद्रीय मंत्री के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में पारंपरिक तमिल वेशभूषा संगीत और पकवानों ने मिनी तमिलनाडु का दृश्य उत्पन्न कर दिया जहाँ प्रधानमंत्री ने सभी को पोंगल की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

  • प्रयास विफल हो सकते हैं, प्रार्थना नहीं’-DK शिवकुमार की पोस्ट से सियासी हलचल तेज़

    प्रयास विफल हो सकते हैं, प्रार्थना नहीं’-DK शिवकुमार की पोस्ट से सियासी हलचल तेज़

    नई दिल्ली। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री DK शिवकुमार ने राज्य में सत्ता संघर्ष के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक अहम पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “प्रयास भले ही विफल हो जाये, लेकिन प्रार्थना विफल नहीं होती।” इस पोस्ट को राजनीतिक जानकार सियासी संदेश के रूप में देख रहे हैं। माना जा रहा है कि डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार हैं और यह पोस्ट उनके इंतजार और उम्मीद की झलक देती है।

    मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी खींचतान

    कर्नाटक में कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी खींचतान लगातार जारी है। वर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री DK शिवकुमार दोनों ही पार्टी आलाकमान के फैसले के इंतजार में हैं। सिद्धारमैया ने साफ कर दिया कि पार्टी आलाकमान ही अंतिम निर्णय करेगा। राजनीतिक विश्लेषक इसे सियासी संतुलन और फासलों को कम करने की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं।

    राहुल गांधी से हुई अहम मुलाकात

    राज्य में चल रही सियासी चर्चाओं के बीच मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मैसुरु एयरपोर्ट पर DK शिवकुमार और CM सिद्धारमैया से अलग-अलग मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने दोनों नेताओं से राजनीतिक स्थिति और संभावित बदलाव पर चर्चा की। इस मुलाकात को सियासी अटकलों के बीच निर्णायक कदम माना जा रहा है।

    सोशल मीडिया पोस्ट का राजनीतिक महत्व

    DK शिवकुमार का ट्वीट सिर्फ एक उद्धरण नहीं बल्कि रणनीतिक संदेश माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि वह मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी उम्मीद नहीं छोड़ रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह पोस्ट अपने समर्थकों को उत्साहित करने और मीडिया का ध्यान खींचने के लिए भी किया गया है।

    सिद्धारमैया ने सियासी अटकलों को खारिज किया

    मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी के निर्णय का सभी नेता पालन करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अलाभकारी बदलावों और सत्ता फेरबदल की चर्चा केवल अफवाहें हैं। हालांकि, राहुल गांधी से हुई मुलाकात और DK शिवकुमार का ट्वीट इसे राजनीतिक मोड़ और भविष्य के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस में जारी सत्ता संघर्ष और सियासी खींचतान के बीच DK शिवकुमार का ट्वीट और राहुल गांधी से मुलाकात ने राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। सोशल मीडिया पोस्ट और निजी चर्चा से यह स्पष्ट होता है कि राज्य में सत्ता संरचना पर अभी भी निर्णायक फैसले बाकी हैं, और पार्टी आलाकमान की भूमिका इस समय सबसे अहम बनी हुई है।

  • कच्चे तेल के आयात में भारी कटौती… रूस से ईंधन खरीदने के मामले में तीसरे स्थान पर आया भारत

    कच्चे तेल के आयात में भारी कटौती… रूस से ईंधन खरीदने के मामले में तीसरे स्थान पर आया भारत


    नई दिल्ली।
    रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) और सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों (Public sector Refineries) द्वारा कच्चे तेल के आयात (Crude oil Imports) में भारी कटौती (Significant Reduction ) के बाद दिसंबर 2025 में रूस से इस ईंधन को खरीदने के मामले में भारत तीसरे स्थान पर आ गया है। यूरोपीय शोध संस्थान सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) ने मंगलवार को यह जानकारी दी। इसके अनुसार भारत द्वारा रूस से कुल हाइड्रोकार्बन आयात दिसंबर में 2.3 अरब यूरो रहा, जो पिछले महीने के 3.3 अरब यूरो से कम है।

    रिपोर्ट में कहा गया, तुर्की भारत को पीछे छोड़ते हुए दूसरा सबसे बड़ा आयातक बन गया, जिसने रूस से दिसंबर में 2.6 अरब यूरो के हाइड्रोकार्बन खरीदे। चीन शीर्ष खरीदार बना रहा, जिसकी रूस के शीर्ष पांच आयातकों से होने वाली निर्यात आय में 48 प्रतिशत (छह अरब यूरो) की हिस्सेदारी रही।

    सीआरईए ने कहा कि भारत के रूसी कच्चे तेल के आयात में मासिक आधार पर 29 प्रतिशत की भारी गिरावट हुई। रिपोर्ट के अनुसार इस कटौती की मुख्य वजह रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी रही, जिसने दिसंबर में रूस से अपने आयात को आधा कर दिया। सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों ने भी दिसंबर में रूसी आयात में 15 प्रतिशत की कटौती की।


    तेल की कीमतें प्रभावित होने के आसार नहीं

    क्रिसिल रेटिंग्स ने मंगलवार को कहा कि वेनेजुएला के हालिया घटनाक्रमों से कच्चे तेल की कीमतों पर निकट भविष्य में कोई ठोस प्रभाव पड़ने के आसार नहीं है क्योंकि वैश्विक आपूर्ति में इस लातिन अमेरिकी देश की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत बेहद कम है।

    वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति में इस देश की हिस्सेदारी केवल 1.5 प्रतिशत है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें हाल के दिनों में काफी हद तक स्थिर रही हैं जो 60 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के ठीक ऊपर बनी हुई हैं। भारत के संदर्भ में, वेनेजुएला से होने वाला आयात भारत के कुल आयात का 0.25 प्रतिशत से भी कम है। वित्त वर्ष 2024-25 में हुए लगभग 14,000 करोड़ रुपये के आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से अधिक थी।

  • SC का बड़ा फैसला…. ससुर की संपत्ति पर विधवा बहू का भी अधिकार

    SC का बड़ा फैसला…. ससुर की संपत्ति पर विधवा बहू का भी अधिकार


    नई दिल्ली।
    विधवा महिलाओं (Widowed women) के हक में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण पोषण अधिनियम 1956 (Hindu Adoption and Maintenance Act, 1956) के तहत ससुर की मौत के बाद विधवा बहू भी उनकी संपत्ति से मेंटिनेंस का दावा कर सकती है। जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच ने दीवानी अपीलों को खारिज करते हुए कहा कि इस ऐक्ट की धारा 21 (VII) में विधवा बहू को भी शामिल किया गया है। पति की मौत ससुर की मौत से पहले हुई हो या बाद में, विधवा बहू उनकी संपत्ति से भरण-पोषण की हकदार है।


    क्या है पूरा मामला

    यह मामला डॉ. महेंद्र प्रसाद के वारिसों के बीच का था जिनकी दिसंबर 2021 को मौत हो गई थी। डॉ. महेंद्र प्रसाद की बहू गीता शर्मा उनकी संपत्ति से भरण पोषण की मांग कर रही थी। उनके पति की मौत 2023 में हो गई थी। फैमिली कोर्ट ने यह कहते हुए मेंटनिनेंस दिलाने से इनकार कर दिया था कि ससुर की मौत के समय उनके पति जीवित थे। हालांकि हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट को आदेश दिया कि उनकी जरूरत के हिसाब से मेंटिनेंस का निर्देश दे। हाई कोर्ट के आदेश को परिवार के बाकी सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इन सदस्यों में डॉ. प्रसाद के दूसरे बेटे की विधवा बहू और लंबे समय तक लिवइन पार्टनर के रूप में रहने का दावा करने वाली महिला भी शामिल है।

    इस कानून के सेक्शन 21 में डिपेंडेंट्स के बारे में बताया गया है। इसके सब सेक्शन VIII में कहा गया है कि किसी शख्स के बेटे की विधवा भी उसकी संपत्ति से मेंटिनें की हकदार है, जब तक कि वह दूसरा विवाह नहीं करती है। इसके लिए शर्त है कि वह पति की संपत्ति या अपने पुत्र या पुत्री की संपत्ति से भरण पोषण प्राप्त करने में असमर्थ होनी चाहिए।

  • पाक-चीन की कारस्तानी पर भड़के लद्दाख के LG, बोले- ये 1962 नहीं, खुद हो जाएगा टुकड़े-टुकड़े

    पाक-चीन की कारस्तानी पर भड़के लद्दाख के LG, बोले- ये 1962 नहीं, खुद हो जाएगा टुकड़े-टुकड़े


    जम्मू
    । लद्दाख (Ladakh) के उप राज्यपाल कविंदर गुप्ता (Lieutenant Governor Kavinder Gupta) ने मंगलवार को शक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley) पर चीन के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (Pakistan-occupied Kashmir- PoK) का पूरा क्षेत्र भारत का है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी विस्तारवादी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शक्सगाम घाटी में कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स शुरू करने के लिए चीन की आलोचना करते हुए गुप्ता ने कहा है कि यह इलाका भारत का हिस्सा है और ऐसी गतिविधियों को तुरंत रोका जाना चाहिए। भारत की आपत्तियों के मद्देनजर, चीन ने सोमवार को शक्सगाम घाटी पर अपने क्षेत्रीय दावों को दोहराते हुए जोर दिया कि इस क्षेत्र में चीनी अवसंरचना परियोजनाएं ‘संदेह से परे’ हैं।

    गुप्ता ने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लोग भी भारत का हिस्सा बनना चाहते हैं और जल्द ही पाकिस्तान ‘खुद टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा’। जम्मू में उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘पूरा कश्मीर (पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से समेत) हमारा है। हमें नहीं पता कि पाकिस्तान ने चीन के साथ क्या सौदा किया है। चीन को यह समझना चाहिए कि उसकी विस्तारवादी नीति से कुछ भी हासिल नहीं होगा। भारत सक्षम है। यह 1962 का भारत नहीं, 2026 का भारत है। ऐसे किसी भी प्रयास को विफल कर दिया जाएगा। विदेश मंत्रालय इसका संज्ञान ले रहा है।’’


    पहले से हम ज्यादा मजबूत, ये बात समझ ले चीन

    गुप्ता ने कहा कि ऐसे किसी भी कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और चीन को यह समझना होगा कि आज भारत पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन ने पहले अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर भी दावा किया था। पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए राज्यपाल ने आरोप लगाया कि पड़ोसी देश अपने ही लोगों को छल चुका है और संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त है।


    बेचा जा रहा पाकिस्तान

    गुप्ता ने कहा, “पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसे बेचा जा रहा है। उसे अपनी संप्रभुता या अपने लोगों की कोई परवाह नहीं है। बलूचिस्तान, सिंध और कराची में आवाजें उठ रही हैं और वहां पाकिस्तानी सेना द्वारा अत्याचार किए जा रहे हैं। उन क्षेत्रों पर वस्तुतः सेना का ही शासन है।’’ गुप्ता ने संवेदनशील मुद्दों पर भड़काऊ बयानों के प्रति आगाह करते हुए कहा कि पीओके पर संसद का स्पष्ट रुख है।


    ऐसे बयान नहीं दें जो भड़काऊ हो

    उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे बयान नहीं दिए जाने चाहिए जो भड़काऊ प्रकृति के हों। 1994 का एक संसदीय प्रस्ताव है जो स्पष्ट रूप से कहता है कि पूरा पीओके भारत का है।’’ सेना प्रमुख के हालिया बयान (जिसमें कहा गया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जारी है) पर प्रतिक्रिया देते हुए गुप्ता ने कहा कि सशस्त्र बलों को पूर्ण राष्ट्रीय समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा, ‘‘पूरा देश सेना के साथ खड़ा है। सेना प्रमुख ने एक जिम्मेदार बयान दिया है और मैं इसका स्वागत करता हूं।’’ पाकिस्तान ने 1963 में अवैध रूप से शक्सगाम घाटी में स्थित 5,180 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र चीन को सौंप दिया था, जिसे उसने अवैध रूप से कब्जा करके हासिल किया था।

  • इस तरह की तुच्छ याचिका का कोई तुक नहीं… SC ने पूर्व अधिकारी को लगाई फटकार

    इस तरह की तुच्छ याचिका का कोई तुक नहीं… SC ने पूर्व अधिकारी को लगाई फटकार


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को संसद और अन्य सार्वजनिक स्थानों से विनायक दामोदर सावरकर (Vinayak Damodar Savarkar) के चित्रों को हटाने के अनुरोध वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दायर करने वाले पूर्व अधिकारी (Former officer) को याचिका वापस लेने की अनुमति देने से पहले भारी जुर्माना लगाने की चेतावनी दी। SC ने कहा कि इस तरह की याचिका का कोई तुक नहीं बनता।

    मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने सेवानिवृत्त भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी बी बालमुरुगन को इस तरह की याचिका दायर करने के प्रति चेतावनी दी और कहा कि अदालत का समय बर्बाद करने के लिए भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘‘इस तरह की तुच्छ याचिका… मानसिकता दर्शाती है।’’


    ‘आप खुद को क्या समझते हैं?

    वहीं पीठ याचिकाकर्ता के इस निवेदन से भी नाराज थी कि वह वित्तीय बाधाओं के कारण व्यक्तिगत रूप से मामले की बहस करने नहीं आ सकते। मुख्य न्यायाधीश ने फटकार लगाते हुए कहा, ‘‘आप आईआरएस अधिकारी थे। आप दिल्ली आकर खुद पेश हो सकते हैं और बहस कर सकते हैं। हम आप पर भारी जुर्माना लगाना चाहेंगे। आप खुद को क्या समझते हैं?’’

    याचिका में क्या?
    बता दें कि बालमुरुगन ने अपनी जनहित याचिका में संसद के केंद्रीय कक्ष और अन्य सार्वजनिक स्थानों से सावरकर के चित्रों को हटाने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। इसके अलावा याचिका में यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया कि सरकार हत्या या राष्ट्रविरोधी गतिविधियों जैसे जघन्य अपराधों के लिए आरोपित व्यक्तियों को तब तक सम्मानित न करे जब तक कि वे बरी ना हो जाएं।

    समाज में कुछ रचनात्मक भूमिका निभाएं- SC
    याचिका को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बताते हुए पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या वह मामला आगे बढ़ाना चाहते हैं या वापस लेना चाहते हैं। प्रधान न्यायाधीश ने टिप्पणी की, ‘‘कृपया इन सब झंझटों में ना पड़ें। अब अपनी सेवानिवृत्ति का आनंद लें। समाज में कुछ रचनात्मक भूमिका निभाएं।’’ इसके बाद परिणाम को भांपते हुए बालमुरुगन ने याचिका वापस लेने की इजाजत मांगी, जिसे स्वीकार कर लिया गया।

  • इस बार दो दिन मनेगी मकर संक्रांति…. पूजन आज और खिचड़ी का दान का शुभ महूर्त कल

    इस बार दो दिन मनेगी मकर संक्रांति…. पूजन आज और खिचड़ी का दान का शुभ महूर्त कल


    नई दिल्ली।
    मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का त्योहार इस बार दो दिन मनाया जाएगा। पहले दिन यानी आज बुधवार को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे साथ ही षटतिला एकादशी का शुभ संयोग भी बनेगा। तिथि को लेकर भ्रम दूर करते हुए ज्योतिषाचार्य विभोर इंदूसुत ने बताया कि संक्रांति का पूजन और व्रत 14 जनवरी को श्रेष्ठ रहेगा। खिचड़ी का दान 15 जनवरी को करना शास्त्र सम्मत होगा।


    दोपहर 3:07 बजे से विशेष पुण्यकाल

    ज्योतिषाचार्य विभोर इंदूसुत के अनुसार, 14 जनवरी को दोपहर 3:07 बजे से विशेष पुण्यकाल प्रारंभ होगा, जो शाम 5:41 बजे तक रहेगा। इस दौरान सूर्य पूजन, तिल-गुड़ का दान और भगवान विष्णु की आराधना श्रेष्ठ मानी गई है।


    सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग भी बन रहा

    ज्योतिषाचार्य रुचि कपूर के अनुसार 14 जनवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है। इसी दिन खरमास की समाप्ति होगी और शुभ कार्य प्रारंभ हो जाएंगे।


    14 जनवरी को चावल और खिचड़ी का सेवन और दान वर्जित

    एकादशी के कारण 14 जनवरी को चावल और खिचड़ी का सेवन और दान वर्जित रहेगा। प्रेरणा ज्योतिष अनुसंधान अध्यक्ष राहुल अग्रवाल ने बताया कि एकादशी तिथि 14 जनवरी को शाम 5:53 बजे समाप्त होगी, जिसके बाद द्वादशी प्रारंभ होगी। ऐसे में श्रद्धालु संध्या के बाद दान कर सकते हैं, लेकिन 15 जनवरी की सुबह खिचड़ी दान करना उचित रहेगा। ज्योतिष अन्वेषक अमित गुप्ता भी इसी उपाय को अपनाने की सलाह देते हैं।


    मकर संक्रांति को उत्तरायण शुरू

    ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य एक राशि में एक माह तक गोचर करते हैं, फिर अगली राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य 12 राशियों के राशि चक्र को एक वर्ष में पूरा करते हैं। सूर्य जब भी एक राशि से निकलकर दूसरी में प्रवेश करते हैं इसे संक्रांति कहा जाता है। एक वर्ष में सूर्य की 12 संक्रांतियां होती हैं, लेकिन इनमें मकर संक्रांति सबसे ज्यादा महत्व रखने वाली है। सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, इसी दिन मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। मकर संक्रांति को उत्तरायण शुरू होने से दिन बड़ा होने लगता है।