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  • प. बंगाल में चुनावी हलचल… जहां ममता बनर्जी का सियासी उदय हुआ… वहां अब PM मोदी की रैली

    प. बंगाल में चुनावी हलचल… जहां ममता बनर्जी का सियासी उदय हुआ… वहां अब PM मोदी की रैली


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में इस साल विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) है. चुनाव को लेकर सियासी हलचल बढ़ गई है. बंगाल की सियासत एक बार फिर उसी जगह पर आ गई है, जहां से कभी ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) का सियासी उदय हुआ था. जी हां, सिंगूर (Singur) में पीएम मोदी (PM Modi) की रैली होने वाली है. यहीं से भाजपा को उम्मीद की किरण दिख रही है. सिंगूर वही जगह है, जहां कभी टाटा नैनो की फैक्ट्री हुआ करती थी. अब भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 18 जनवरी को होने वाली रैली के लिए इसी जगह को चुना है. पीएम मोदी की रैली से यहां के लोगों को बड़ी उम्मीदें हैं।

    बात अक्टूबर 2008 की है. पश्चिम बंगाल के सिंगूर में करीब 1000 एकड़ उपजाऊ जमीन पर एक अजीब सी खामोशी छा गई. यह खामोशी टाटा ग्रुप के तत्कालीन चेयरमैन रतन टाटा की एक नाटकीय घोषणा के बाद आई थी. वह घोषणा थी टाटा के नैनो कार प्रोजेक्ट से जुड़ी. जी हां, खराब कारोबारी माहौल का हवाला देते हुए टाटा ने नैनो कार प्रोजेक्ट को सिंगूर से गुजरात के सानंद में शिफ्ट करने की घोषणा की. तब टाटा ने एक अच्छा एम (गुड एम) और एक बुरा एम (बैड एम) का जिक्र किया था. टाटा की नजर में शायद इसका अर्थ था बुरा एम मतलब ममता बनर्जी और अच्छा एम मतलब गुजरात के तब के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी. उन्होंने कहा था कि उनके सिर पर बंदूक तान दी गई थी और ट्रिगर दबा दिया गया था.

    अठारह साल बाद भी सिंगूर की वह जमीन ज्यादातर बंजर पड़ी है. खेती वापस शुरू नहीं हुई है. और सिंगूर एक प्रतीक बना हुआ है- खोए हुए मौके, राजनीतिक टकराव और अधूरे वादों का. दरअसल, सिंगूर विवाद के दौरान रतन टाटा ने ममता बनर्जी के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के कारण पश्चिम बंगाल से टाटा मोटर्स का नैनो प्लांट हटाने का फैसला किया था. यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल में भूमि अधिग्रहण और ममता बनर्जी के नेतृत्व में हुए किसान आंदोलन से जुड़ा था. इसी के बाद टाटा समूह को प्लांट गुजरात ले जाना पड़ा.


    सिंगूर के किसानों का दुख

    आज इस जमीन के ज़्यादातर हिस्से पर खेती के कोई निशान नहीं दिखते। जिन्होंने अपनी मर्जी से और बिना मर्ज़ी के ज़मीन दी थी, जिनकी जिंदगी सिंगूर आंदोलन से बदल गई थी. सिंगूर के रहने वाले कौशिक बाग अब 60 के दशक में हैं. उन्होंने बताया कि वह अपनी मर्ज़ी से जमीन देने वाले किसान थे. उन्होंने टाटा फैक्ट्री के लिए सरकार को छह बीघा जमीन दी थी. उन्होंने उस समय तीन महीने की ट्रेनिंग भी ली थी, इस उम्मीद में कि उन्हें रोजगार मिलेगा. लेकिन कुछ नहीं हुआ.


    जमीन मिली मगर अब खेती लायक नहीं

    हालांकि जमीन आखिरकार वापस मिल गई. कौशिक कहते हैं कि अब वह खेती के लायक नहीं रही. 18 साल की रुकावट के बाद अब उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा से बदलाव आ सकता है. हालांकि, कौशिक बाग अकेले नहीं हैं. श्यामापदो दास कहते हैं कि वह बिना मर्जी के जमीन देने वाले किसान थे, जिन्होंने तीन बीघा जमीन दी थी. उन्होंने आंदोलन के दौरान मीटिंग और रैलियों में हिस्सा लिया था, यह मानते हुए कि जमीन वापस मिल जाएगी और खेती फिर से शुरू हो जाएगी.


    सिंगूर की बंजर जमीन

    श्यामापदो दास आज कहते हैं कि खेतों में जंगली जानवर घूमते हैं और खेती असंभव है. पीछे मुड़कर देखें तो श्यामापदो का मानना​है कि सिंगूर एक राजनीतिक अखाड़ा बन गया था और आखिरकार किसानों के साथ धोखा हुआ. वहीं, स्वपन मित्रा कहते हैं कि उस समय उनके परिवार ने राजनीतिक आश्वासनों पर भरोसा किया था. स्वपन मित्रा के पिता ने एक बीघा जमीन दी थी.


    पीएम मोदी आने वाले हैं सिंगूर

    बहरहाल, इस इलाके को अब भी उम्मीद है, वह भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से. इस इलाके को आज भी स्थानीय लोग ‘टाटा की जमीन’ कहते हैं. आज उम्मीद एक अलग रूप में वापस आई है. कारण कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिंगूर आने वाले हैं. कई निवासियों के लिए, इस दौरे से पुनरुद्धार, पहचान और एक संभावित नई शुरुआत की उम्मीदें जुड़ी हैं।


    क्या है सिंगूर विवाद?

    कोलकाता से करीब 40 किलोमीटर दूर सिंगूर में नैनो परियोजना के लिए सरकार ने कुल 997.11 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था. मगर तृणमूल कांग्रेस और किसानों के संगठन कृषि जमीं जिबिका रक्षा कमेटी (केजेजेआरसी) का कहना था कि इसमें से 400 एकड़ जमीन किसानों से उनकी मर्जी के खिलाफ ली गई है, लिहाजा यह जमीन उन्हें लौटा दी जानी चाहिए. तब तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी इस मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गई थीं. इस दौरान हिंसा भी हुई थी. प्रदर्शनकारियों द्वारा कथित रूप से संयंत्र के कर्मचारियों को डराए-धमकाए जाने की वजह से टाटा मोटर्स ने संयंत्र में कामकाज बंद कर दिया. बाद में टाटा ने नैनो प्रोजेक्ट को गुजरात शिफ्ट कर दिया. तब ममता बनर्जी विपक्ष में थीं।

  • केन्द्रीय कर्मचारियों को खुलेगा नया बैंक अकाउंट, मिलेंगी तीन तरह की नई सुविधाएं

    केन्द्रीय कर्मचारियों को खुलेगा नया बैंक अकाउंट, मिलेंगी तीन तरह की नई सुविधाएं


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय कर्मचारियों (Central Government Employees) के लिए जो नया सैलरी बैंक खाता (New Salary Bank Account) होगा, उसके तीन मुख्य खंड हैं – बैंकिंग, बीमा और कार्ड। बैंकिंग सुविधा में उन्नत सुविधाओं के साथ जीरो बैलेंस सैलरी अकाउंट, मुफ्त आरटीजीएस/एनईएफटी/यूपीआई के साथ चेक सुविधा; आवास, शिक्षा, वाहन और व्यक्तिगत आवश्यकता के लिए रियायती ऋण; ऋण के प्रसंस्करण शुल्क में छूट; और लॉकर किराये पर छूट शामिल हैं।

    सैलरी अकाउंट में ही 20 लाख रुपये तक की अंतर्निहित सावधि जीवन बीमा सुरक्षा और किफायती प्रीमियम पर बीमा कवरेज को बढ़ाने के लिए अतिरक्ति टॉप-अप सुविधा दी जाएगी। कर्मचारी और परिवार के लिए व्यापक स्वास्थ्य बीमा कवरेज के तहत एक बेस प्लान और अतिरक्ति टॉप-अप सुविधा शामिल है। साथ ही डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस, रिवॉर्ड प्रोग्राम और कैशबैक ऑफर जैसे बेहतर लाभ दिए जाएंगे।


    सीजीएचएस लाभार्थियों के लिए मेडिक्लेम आयुष-बीमा पालिसी

    सरकार ने केंद्रीय कर्मियों एवं पेंशनधारकों की स्वाथ्य सेवा योजना (सीजीएचएस) के लाभार्थियों के लिए एक परिपूर्ण मेडिक्लेम आयुष बीमा शुरू करने की घोषणा की है जिसे न्यू इंडिया एश्योरेंस तथा डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से जल्द उपलब्ध कराया जाएगा। यह योजना कैशलेस सुविधा, आधुनिक उपचार और अस्पतालों के एक बड़े नेटवर्क के साथ दी जा रही है। यह पॉलिसी विशेष रूप से सीजीएचएस लाभार्थियों के लिए उपलब्ध है, जिसमें प्रति पॉलिसी अधिकतम छह सदस्य हो सकते हैं।


    10 लाख या 20 लाख रुपये के विकल्प

    यह देश के अंदर इंडेम्निटी-आधारित इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन कवरेज प्रदान करती है, जिसमें 10 लाख रुपये या 20 लाख रुपये तक के बीमा राशि के विकल्प हैं। इस योजना में को-पेमेंट कंपोनेंट होगा जिसमें लाभार्थी और बीमा कंपनी के बीच 70:30 या 50:50 के आधार पर भुगतान की व्यवस्था भी शामिल होगी। यह पालिसी जल्द ही न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के कार्यालयों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। इसमें अस्पताल के सामान्य कमरे और आईसीयू के लिए कमरे का किराया क्रमशः बीमा राशि का एक और दो प्रतिशत प्रति दिन तक सीमित रखा गया है तथा इसमें 30 दिनों का प्री-हॉस्पिटलाइजेशन कवरेज और 60 दिनों का पोस्ट-हॉस्पिटलाइजेशन कवरेज उपलब्ध है।

    आयुष उपचार इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन के लिए बीमा राशि के 100 प्रतिशत तक कवर किए जाएंगे। आधुनिक उपचार बीमा राशि के 25 प्रतिशत तक सीमित किया गया है। 100 प्रतिशत आधुनिक उपचार कवरेज के लिए एक वैकल्पिक राइडर रखा गया है। इसमें हर दावारहित वर्ष के लिए 10 प्रतिशत संचयी बोनस रखा गया है।

  • 77वें गणतंत्र दिवस पर यूरोप के दो शीर्ष पदाधिकारी होंगे चीफ गेस्ट… PM मोदी के निमंत्रण पर आ रहे भारत

    77वें गणतंत्र दिवस पर यूरोप के दो शीर्ष पदाधिकारी होंगे चीफ गेस्ट… PM मोदी के निमंत्रण पर आ रहे भारत


    नई दिल्ली।
    देश के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह (77th Republic Day celebrations) में इस बार यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा (European Council President Antonio Luis Santos da Costa) और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (European Commission President Ursula von der Leyen) मुख्य अतिथि होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के निमंत्रण पर ये शीर्ष पदाधिकारी 25 से 27 जनवरी 2026 तक भारत की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। यह यात्रा भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को घोषणा की कि यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन 25 से 27 जनवरी तक 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर भारत के राजकीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरे के दौरान, ये नेता 27 जनवरी को 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भी करेंगे, जहाँ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा की जाएगी।


    भारत और EU के बीच आर्थिक संबंध होंगे मजबूत

    उम्मीद है कि FTA भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच आर्थिक संबंधों को मज़बूत करेगा, जिसमें व्यापार, निवेश और बाज़ार पहुँच जैसे क्षेत्र शामिल होंगे, और अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित भारतीय निर्यातकों को कुछ राहत मिलेगी। इस समझौते के लिए पिछले कई महीनों से गहन बातचीत चल रही है और बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों ने व्यापार से जुड़े अधिकांश जटिल मुद्दों को सुलझा लिया है।


    प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता का कार्यक्रम

    इन दोनों शीर्ष अधिकारियों का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात और प्रधानमंत्री मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता का कार्यक्रम है। इसके अतिरिक्त, शिखर सम्मेलन के इतर एक ‘भारत-यूरोपीय संघ बिजनेस फोरम’ के आयोजन की भी संभावना है। वर्ष 2004 से रणनीतिक साझेदार रहे भारत और यूरोपीय संघ के बीच फरवरी 2025 में यूरोपीय संघ के आयुक्तों की ऐतिहासिक भारत यात्रा के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में काफी विस्तार हुआ है। गणतंत्र दिवस समारोह में इनकी भागीदारी से दोनों पक्षों के बीच सहयोग और आपसी हितों के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को और मजबूती मिलेगी।


    द्विपक्षीय संबंध कई क्षेत्रों में फैले हैं

    मंत्रालय ने कहा है कि पिछले साल फरवरी में EU कॉलेज ऑफ़ कमिश्नर्स की भारत की ऐतिहासिक यात्रा के बाद, द्विपक्षीय संबंध कई क्षेत्रों में फैले हैं। EU अभी भारत का सामान के लिए सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 136 अरब डॉलर से ज़्यादा हो गया है। 27 देशों के राजनीतिक और आर्थिक समूह के साथ FTA भारत का 19वां व्यापार समझौता होगा और इसकी व्यापार रणनीति में एक मुख्य स्तंभ होगा।

  • MP: राहुल गांधी कल आएंगे इंदौर… दूषित पानी से मौतों पर राजनीति का अखाड़ा बना शहर

    MP: राहुल गांधी कल आएंगे इंदौर… दूषित पानी से मौतों पर राजनीति का अखाड़ा बना शहर


    इंदौर।
    लोकसभा (Lok Sabha) में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Opposition Leader Rahul Gandhi) के 17 जनवरी को मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) दौरे के पहले ये शहर पूरी तरह राजनीति का अखाड़ा बन गया है। गांधी दूषित पानी से हुई लगभग 20 से भी ज्यादा लोगों की मौत के मामले को लेकर 17 को इंदौर आने वाले हैं। वे यहां प्रभावितों के परिजन से मुलाकात करेंगे। उनके इस दौरे के पहले राज्य में इस मुद्दे को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) ने कल अपने इंदौर प्रवास के दौरान बिना किसी का नाम लिए इस मामले को लेकर कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ”हमने इस कठिनाई के दौर को महसूस किया है, संवेदना के साथ महसूस किया है, लेकिन आप अगर लाशों पर राजनीति करने आओगे, इंदौर बर्दाश्त नहीं करेगा। कोई बर्दाश्त करने वाला नहीं है।

    उन्होंने कहा कि अगर आपने आपदा में से अवसर तलाश कर राजनीति का रास्ता तलाशा, तो ये उचित नहीं कहा जा सकता। आप सकारात्मक विरोध करो, विपक्ष की आवाज विपक्ष की तरह से रखो, तो हम सब उस बात से सहमत हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा,’लेकिन अगर आपने बात निकाली, तो बात दूर तलक तक जाएगी।

    वहीं कांग्रेस ने भी सरकार पर हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, भाजपाइयों की जुबान अभी भी “भागीरथपुरा” का भय बढ़ा रही है! पीड़ित परिवारों के गहरे जख्मों पर नमक लगा रही है! अहंकार में डूबे हुए “23 सरकारी हत्याओं” के अपराधी इसीलिए निरंकुश हैं, क्योंकि जनमत का अपमान इनकी आदत में आ चुका है! तभी तो ये आंसूओं में डूबे इंदौर का दर्द भूलकर, “जुबानी-जहर” उगल रहे हैं! गलती सुधारने की बजाय अभी भी मुंहजोरी कर रहे हैं!”

    इसी बीच श्री पटवारी ने राहुल गांधी के दौरे के संबंध में कहा कि नेता प्रतिपक्ष इस घटना को लेकर बहुत चिंतित थे। पूरी घटना उनके संज्ञान में है। उन्होंने प्रभावितों के परिजनों से मिलने की इच्छा जाहिर की है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का 17 जनवरी को इंदौर आगमन पीड़ित परिवारों और शहरवासियों को संबल, संवेदना और न्याय की उम्मीद देगा।

    इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से अब तक 20 से भी ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। सरकार जहां लगातार व्यवस्थाएं सुधारने का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे एक मुद्दा बना रही है।

  • काशी के मणिकर्णिका घाट पर सुंदरीकरण के नाम पर बुलडोजर, इंदौर राज परिवार ने दोहराया संकल्प

    काशी के मणिकर्णिका घाट पर सुंदरीकरण के नाम पर बुलडोजर, इंदौर राज परिवार ने दोहराया संकल्प

    काशी। वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर सुंदरीकरण के नाम पर बुलडोजर चलाने, अहिल्याबाई समेत कई ऐतिहासिक मूर्तियों को तोड़कर खंडित करने और गंगा में डाल देने का मामला देश भर में चर्चा का विषय बन गया है। इंदौर से खासगी देवी अहिल्याबाई होल्कर ट्रस्ट के अध्यक्ष और राजपरिवार के प्रतिनिधि यशवंत होल्कर भी दो दिन पहले काशी पहुंचे। अपनी नाराजगी जताई। वापस जाने से पहले उन्होंने मणिकर्णिका घाट की पवित्र माटी माथे लगाई। घाट पर तोड़ी गई मढ़ी के निकट उन्होंने पुन: क्षमायाचना की और काशी में महारानी की विरासत संरक्षित और सुरक्षित रखने का संकल्प भी दोहराया।

    जिला प्रशासन के आला अधिकारियों द्वारा आश्वस्त किए जाने के बाद वह यहां से रवानगी के लिए तैयार हुए। उन्हें विश्वास दिलाया गया है कि खंडित मूर्तियों के अवशेष जल्द खोज लिए जाएंगे। उनके मणिकर्णिका घाट पहुंचने से पहले ही काफी संख्या में पीएसी के जवानों को तैनात कर दिया गया था। इस बात पर कड़ी नजर रखी गई कि कोई दूर से भी मोबाइल से फोटो या वीडियो न बना सके।

    मणिकर्णिका घाट की मौजूदा स्थिति देखने के बाद वह निकट स्थित ताड़केश्वर मंदिर भी गए। प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि रानी मां की चारों मूर्तियां यही रखी जाएंगी। जो दो साबूत मूर्तियां हैं उन्हें यथाशीघ्र इस मंदिर में भेजवाया जाए। अधिकारियों ने जल्द से जल्द मूर्तियां ताड़केश्वर मंदिर भेजने पर सहमति जता दी है। वहीं ट्रस्ट के स्थानीय प्रबंधक रमेश उपाध्याय ने बताया कि गुरुवार को अवकाश का दिन होने से मूर्तियां नहीं लाई जा सकी हैं। उम्मीद है कि 16 जनवरी को शाम तक मूर्तियां गुरुधाम मंदिर से मणिकर्णिका स्थित ताड़केश्वर मंदिर पहुंचा दी जाएं।

    उपाध्याय ने बताया कि हम लोग अपने स्तर से भी मूर्तियों के अवशेष खोजने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन सफलता नहीं मिल रही है। वहां से उठाया गया मलबा कहां फेंका गया है, इसकी जानकारी भी नहीं दी जा रही है। यदि यही बता दिए जाए कि मलबा कहां फेंका गया है तो मूर्तियों के अवशेष खोजने की राह आसान हो सकती है।
    सिविल में मुकदमा दर्ज फिर भी सूचना नहीं दी

    ट्रस्ट के स्थानीय प्रबंधक रमेश उपाध्याय ने बताया कि मणिकर्णिका घाट से सटा हिस्सा जो जनाना घाट के नाम से जाना जाता है, यहां लगी मूर्तियों को संरक्षित करने को लेकर ट्रस्ट की ओर से सिविल कोर्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है। उसमें नगर निगम को पार्टी बनाया गया है। मुकदमे से संबंधित नोटिस तक दिया जा चुका है। वह मुकदमा ही इस बात के लिए किया गया है कि जनाना घाट की मूर्तियों को न तोड़ा जाए। घाट पर बने धार्मिक प्रतीक सुरक्षित रहें। बावजूद इसके ट्रस्ट को बिना सूचित किए तोड़फोड़ की गई। हमारी अब भी इतनी ही मांग है कि मूर्तियां हमें लौटाई जाएं। घाट पर कोई भी निर्माण ट्रस्ट की सहमति के बिना न कराया जाए। मणिकर्णिका घाट ट्रस्ट के अधीन आने वाली धर्मार्थ संपत्ति है।
    प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री से अनुरोध

    इससे पहले मणिकर्णिका घाट पर रानी अहिल्याबाई की मूर्तियां तोड़े जाने की जांच तथा उन्हें खासगी देवी अहिल्याबाई होल्कर ट्रस्ट ने अपनी सुपुर्दगी में देने का अनुरोध प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से किया है। ट्रस्ट के अध्यक्ष यशवंत होल्कर ने मंडलायुक्त की मौजूदगी में नगर आयुक्त को दोनों पत्र गुरुधाम मंदिर में सौंपे।

    यशवंत होल्कर महारानी की तोड़ी गई मूर्तियों के समक्ष क्षमायाचना और शुद्धि पूजन के लिए गुरुधाम मंदिर पहुंचे थे। दो खंडित और दो साबुत मूर्तियां यहीं रखी हैं। उन्होंने कहा कि काशी में रानी अहिल्याबाई की मूर्ति का अपमान अक्षम्य है। काशी में उनकी स्मृतियों के साथ ऐसे आचरण की कल्पना भी इंदौर राजपरिवार को नहीं थी। ट्रस्ट और इंदौर राजपरिवार इसकी कटु शब्दों में भर्त्सना करता है। मणिकर्णिका घाट की मढ़ी के चार किनारों पर बनीं रानी मां की चार मूर्तियां तोड़ी गईं। इनमें से दो खंडित नहीं हैं लेकिन अन्य दो का निचला हिस्सा ही मिला है। उनका शेष हिस्सा सात दिन में हमें उपलब्ध कराया जाए।

    उन्होंने कहा कि हम पुरातात्विक पद्धति से उसका पुनर्निर्माण कराने में सक्षम हैं। जब तक मणिकर्णिका घाट का नवनिर्माण पूरा नहीं हो जाता तब तक मूर्तियों को छोटे विश्वनाथ मंदिर (अहिल्याबाई घाट) के गर्भगृह में रखेंगे और पूजा के लिए पुजारी नियुक्त करेंगे। देशभर की तमाम संपत्तियों की भांति ही मणिकर्णिका घाट के संरक्षण-संवर्द्धन का दायित्व ट्रस्ट का ही है और यह अधिकार सुप्रीम कोर्ट से मिला है।
    लगा मर्डर मिस्ट्री सुलझा रहे अधिकारी

    मणिकर्णिका घाट पर तोड़ी गईं रानी अहिल्याबाई होल्कर की मूर्तियों का गुरुधाम मंदिर में दोपहर नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ऐसे अवलोकन कर रहे थे मानो वह कोई मर्डर मिस्ट्री सुलझाने में लगे हों। खंडित और साबूत मूर्तियों को नीचे से ऊपर तक निहारते हुए फोन पर किसी को यथास्थिति से अवगत कराते जा रहे थे।

    यह काम करते हुए उन्हें अहसास हुआ कि मातहतों और सुरक्षाकर्मियों के अतिरिक्त कुछ अन्य लोग भी परिसर में हैं तो उन्होंने सभी को अनुरोध पूर्वक परिसर से बाहर कर दिया। गेट पर तैनात सिपाही को आदेश दिया कि कोई भी आए गेट नहीं खुलना चाहिए। इसके बाद फिर मूर्तियों की गहन जांच पड़ताल में जुट गए। कुछ सफाई कर्मचारियों से वह साबूत और खंडित मूर्तियां कपड़े में लपेटकर अंदर रखने की तैयारी कर रहे थे।

    इसी बीच होल्कर ट्रस्ट के अध्यक्ष यशवंत होल्कर पहुंच गए। उनके लिए भी द्वार नहीं खोला गया। करीब दस मिनट बाद मंडलायुक्त एस.राजलिंगम को आता देख सिपाही ने दरवाजा खोला। तब ट्रस्ट के अध्यक्ष और कुछ कर्मचारी परिसर में दाखिल हुए। पूजन सामग्री लेकर पहुंचे कर्मचारियों, पूजा कराने पहुंचे ट्रस्ट के पुजारियों को भी बाहर ही रोक दिया गया।

  • अंतिम संस्कार की रस्में शुरू, इंधर जिंदा हो गईं 103 साल की गंगाबाई

    अंतिम संस्कार की रस्में शुरू, इंधर जिंदा हो गईं 103 साल की गंगाबाई


    नागपुर। आपने मौत को चकमा देकर वापस लौटने वाली कहावत कई बार सुनी होगी। हम अक्सर किसी मुश्किल परिस्थिति से लौटने पर इस मुहावरे का प्रयोग कर लेते हैं। लेकिन क्या हो अगर यह मुहावरा सचमुच आंखों के सामने घटित हो जाए? हाल ही में महाराष्ट्र से एक ऐसा ही हैरतअंगेज मामला सामने आया है जहां 103 साल की गंगाबाई को मृत समझ लिया गया। अंतिम संस्कार की पूरी तैयारी भी कर ली गई। लेकिन मातम मनाने आए लोग तब हैरान रह गए जब गंगाबाई का शरीर अचानक हिलने लगा और वे वापस उठ बैठीं। इतना ही नहीं, हैरत की बात यह है कि उसी दिन गंगाबाई का जन्मदिन भी था।

    घटना नागपुर जिले के रामटेक की है। 103 साल की गंगाबाई सखारे को परिवार के लोगों में मृत मान लिया। सोमवार शाम को गंगाबाई के शरीर की हरकतें बंद होने के बाद परिवार को लगा कि गंगाबाई की मौत हो गई है। परिवार ने अंतिम संस्कार की रस्में शुरू कर दीं और सभी रिश्तेदारों को संदेश भी भेज दिए। मौत की खबर फैलते ही दूर-दराज के इलाकों से रिश्तेदार अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने लगे।
    शव वाहन भी हो गया था बुक

    इसके बाद मंगलवार सुबह तक परम्परा के मुताबिक गंगाबाई को नई साड़ी पहना दी गई, उनके हाथ-पैर बांध दिए गए थे, और उनकी नाक में रुई के फाहे भी लगा दिए गए। घर के बाहर शामियाना लगाया गया, कुर्सियां लगाई गईं, अंतिम संस्कार की सामग्री जुटाई गई और शव वाहन भी बुक किया गया।
    हिलने लगे पैर

    तभी कुछ ऐसा हुआ जिससे अब हैरान रह गए। गंगाबाई के पोते राकेश सखारे को अचानक उनके पैरों में हरकत सी दिखाई दी। इसके बाद उन्होंने जैसे ही गंगाबाई की नाक से रुई हटाई, गंगाबाई ने गहरी सांस ली। राकेश सखारे ने पीटीआई से कहा, ‘‘मैंने उनके पैर हिलते देखे और मदद के लिए चिल्लाया। जब हमने उनकी नाक से रुई हटाई, तो उन्होंने जोर-जोर से सांस लेना शुरू कर दिया।’’

    इसके बाद घर में पसरा मातम जश्न के माहौल में बदल गया। गंगाबाई के जिंदा हो जाने को लोग चमत्कार से कम नहीं बता रहें। वहीं इसके बाद परिवारवालों ने गंगाबाई का 103वां जन्मदिन धूमधाम से मनाया।

  • दिल्ली मेट्रो की नई पहल, स्टेशनों से मिलेगी बाइक टैक्सी और कैब सेवा, 'सारथी' ऐप से होगी बुकिंग

    दिल्ली मेट्रो की नई पहल, स्टेशनों से मिलेगी बाइक टैक्सी और कैब सेवा, 'सारथी' ऐप से होगी बुकिंग

    नई दिल्ली दिल्ली मेट्रो अब सिर्फ सफर का साधन नहीं, बल्कि घर से गंतव्य तक की पूरी यात्रा का समाधान बनने जा रही है. यात्रियों की सुविधा और प्रदूषण कम करने के लक्ष्य के साथ दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने इंटीग्रेटेड लास्ट माइल कनेक्टिविटी सेवा शुरू करने का बड़ा फैसला लिया है. इसके तहत मेट्रो स्टेशनों से आगे की यात्रा अब और आसान, किफायती और डिजिटल होगी.

    दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन एनसीआर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की रीढ़ बन चुकी है. रोजाना लाखों यात्री तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद सेवा का लाभ उठा रहे हैं. लेकिन मेट्रो स्टेशन से अंतिम गंतव्य तक पहुंचना अब तक एक बड़ी चुनौती रहा है. इसी कमी को दूर करने के लिए DMRC ने संगठित लास्ट माइल सेवाओं को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की पहल की है.

    सहकार टैक्सी के साथ DMRC की साझेदारी
    DMRC ने सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं. सहकार टैक्सी एक मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव संस्था है जो भारत टैक्सी नामक मोबिलिटी प्लेटफॉर्म संचालित करती है. यह प्लेटफॉर्म भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय की पहल है और पारदर्शी एवं न्यायसंगत सेवाओं को बढ़ावा देता है.

    बाइक टैक्सी, ऑटो और कैब की मिलेगी सुविधा
    इस साझेदारी के तहत मेट्रो यात्रियों को बाइक टैक्सी, ऑटो रिक्शा और कैब सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. यात्री दूरी, समय और किराये के अनुसार विकल्प चुन सकेंगे. इससे अनऑर्गेनाइज्ड और असुरक्षित साधनों पर निर्भरता कम होगी.

    10 मेट्रो स्टेशनों से होगी शुरुआत
    DMRC के प्रधान कार्यकारी निदेशक अनुज दयाल ने बताया कि, पहले चरण में यह लास्ट माइल कनेक्टिविटी सेवा 10 चिन्हित मेट्रो स्टेशनों से शुरू की जाएगी. पायलट प्रोजेक्ट के तहत मिलेनियम सिटी सेंटर और बॉटेनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन पर 31 जनवरी 2026 तक विशेष बाइक टैक्सी सेवाएं शुरू होंगी. इस दौरान यात्रियों की प्रतिक्रिया और संचालन की व्यवहारिकता का आकलन किया जाएगा.

    भारत टैक्सी ऐप और सारथी ऐप होंगे इंटीग्रेट
    इस पहल की सबसे बड़ी खासियत डिजिटल इंटीग्रेशन है. भारत टैक्सी मोबाइल ऐप को DMRC के सारथी ऐप से जोड़ा जाएगा. इसके बाद यात्री एक ही प्लेटफॉर्म से मेट्रो और लास्ट माइल दोनों सेवाओं की प्लानिंग और बुकिंग कर सकेंगे. ऐप इंटीग्रेशन से यात्री उपलब्ध वाहनों की जानकारी, अनुमानित किराया और रियल टाइम ट्रैकिंग देख सकेंगे. इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और इंतजार का समय घटेगा. यात्रा का अनुभव ज्यादा सहज और भरोसेमंद होगा.

    किराया रहेगा किफायती और नियंत्रित
    इस योजना के तहत किराये बाजार दरों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी रहेंगे. पीक ऑवर में मांग के अनुसार किराया बढ़ सकता है, लेकिन इसकी एक सीमा तय होगी. इसका उद्देश्य यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ न डालना है.
    यात्रियों को जागरूक करने के लिए मेट्रो स्टेशनों पर साइनएज लगाए जाएंगे. इनमें बुकिंग प्रक्रिया, सेवा उपलब्धता और पिकअप पॉइंट की जानकारी होगी. इससे यात्रियों को फैसले लेने में आसानी होगी.

    यह पहल DMRC की पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता को भी मजबूत करती है. बेहतर लास्ट माइल कनेक्टिविटी से निजी वाहनों का इस्तेमाल घटेगा. इससे ट्रैफिक और वायु प्रदूषण दोनों में कमी आने की उम्मीद है.

    पैसेंजर सेंट्रिक और सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट की ओर कदम
    DMRC का यह प्रयास पब्लिक ट्रांसपोर्ट को और आकर्षक बनाएगा. निजी वाहनों से मेट्रो की ओर यात्रियों का रुझान बढ़ेगा. यह योजना सस्टेनेबिलिटी, डिजिटल इंडिया और सहकारी विकास जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी मजबूती देगी.

  • अकाल तख्त में पेशी के बाद बोले सीएम भगवंत मान, कहा- मेरा मकसद टकराव नहीं है

    अकाल तख्त में पेशी के बाद बोले सीएम भगवंत मान, कहा- मेरा मकसद टकराव नहीं है

    नई दिल्ली अकाल तख्त के सामने पेश होने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि उन पर लगाए गए सभी आरोपों को लेकर उन्होंने अपना स्पष्टीकरण दे दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनका अकाल तख्त से किसी भी तरह का टकराव नहीं है और वे सिख संस्थाओं का पूरा सम्मान करते हैं। सीएम मान ने बताया कि अब जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज की अगुवाई में पांच सिंह साहिबानों की बैठक होगी, जिसमें उनके जवाब पर विचार कर आगे का फैसला लिया जाएगा।

    फॉरेंसिक जांच के लिए तैयार: सीएम मान

    पेशी के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जिन वीडियो को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाए गए हैं। सीएम मान ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में अकाल तख्त के जत्थेदार को पूरी जानकारी दे दी है और कहा है कि वे हर तरह की फॉरेंसिक जांच के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उन्हें शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के कामकाज को लेकर कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिन्हें उन्होंने जत्थेदार साहिब के समक्ष रखा है।

    “जो भी फैसला होगा, मंजूर होगा”

    मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उन दावों को भी खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि वे अकाल तख्त के साथ टकराव की स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की बातें पूरी तरह भ्रामक हैं और उनकी अकाल तख्त में पूर्ण आस्था है। सीएम मान ने दो टूक कहा कि तख्त की ओर से लिया गया हर फैसला उन्हें स्वीकार होगा।

    उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पंजाब सरकार धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून तैयार करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

  • मणिकर्णिका घाट विवाद: मल्लिकार्जुन खरगे ने PM मोदी पर लगाया विरासत नष्ट करने का आरोप, तस्वीरें कीं साझा

    मणिकर्णिका घाट विवाद: मल्लिकार्जुन खरगे ने PM मोदी पर लगाया विरासत नष्ट करने का आरोप, तस्वीरें कीं साझा

    नई दिल्ली वाराणसी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को लेकर अब राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सौंदर्यीकरण और व्यवसायीकरण के नाम पर सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को बुलडोजर से ध्वस्त किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह के कदम काशी की आत्मा और उसकी परंपराओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

    PM मोदी पर खरगे का तीखा हमला

    गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि पहले काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के दौरान छोटे-बड़े मंदिरों और देवालयों को तोड़ा गया और अब प्राचीन घाटों की बारी आ गई है। खरगे का आरोप है कि सरकार इतिहास की धरोहरों को मिटाकर केवल अपनी नेम-प्लेट चिपकाने में जुटी है।

    तस्वीरें और वीडियो किए साझा

    खरगे ने अपने पोस्ट में कुछ तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए हैं, जिनमें बुलडोजर, टूटती मूर्तियां और निर्माण कार्य दिखाई दे रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सदियों पुरानी मूर्तियों और मंदिरों को सुरक्षित कर संग्रहालयों में क्यों नहीं रखा गया। कांग्रेस अध्यक्ष ने लिखा, “लाखों लोग मोक्ष की कामना लेकर काशी आते हैं। क्या सरकार का इरादा भक्तों के साथ धोखा करने का है?”

    मणिकर्णिका घाट का धार्मिक महत्व

    मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म के सबसे पवित्र अंतिम संस्कार स्थलों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां अंतिम संस्कार करने से आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह घाट वाराणसी के सबसे पुराने घाटों में शामिल है और इसका ऐतिहासिक संबंध माता सती के कर्णफूल से जुड़ा हुआ बताया जाता है।

    पुनर्विकास परियोजना के उद्देश्य

    मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास की नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जुलाई 2023 को रखी थी। यह परियोजना काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का हिस्सा है। इसके तहत घाट को चौड़ा करना, यात्रियों के लिए रैंप और बैठने की व्यवस्था, VIP सुविधाएं, लकड़ी बिक्री के लिए वुड प्लाजा, बेहतर साफ-सफाई और बाढ़ सुरक्षा जैसे प्रावधान शामिल हैं। इसके अलावा स्किंदिया घाट से कनेक्टिविटी को भी मजबूत किया जाएगा।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक इस परियोजना की अनुमानित लागत 17.56 करोड़ रुपये है और इसे वर्ष 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना में इको-फ्रेंडली तकनीक का उपयोग कर लकड़ी की खपत और प्रदूषण को कम करने का दावा किया गया है।

    क्यों हो रहा है विवाद?

    इस परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों और विपक्ष की ओर से आरोप लगाए जा रहे हैं कि निर्माण कार्य के दौरान कई प्राचीन मूर्तियां और छोटे-बड़े मंदिर क्षतिग्रस्त हुए हैं। हालांकि जिला प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज किया है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी मंदिर या सांस्कृतिक संरचना को नुकसान नहीं पहुंचाया जा रहा है और सभी धार्मिक प्रतीकों को सुरक्षित रखते हुए बाद में पुनः स्थापित किया जाएगा।

    वाराणसी जिला प्रशासन ने सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

  • अयोध्या के संतों ने हनी सिंह के विवादित बयान पर जताई कड़ी आपत्ति, कहा-समाज के लिए कलंक

    अयोध्या के संतों ने हनी सिंह के विवादित बयान पर जताई कड़ी आपत्ति, कहा-समाज के लिए कलंक

    नई दिल्ली मशहूर सिंगर यो यो हनी सिंह एक बार फिर विवादों में फंस गए हैं। हाल ही में दिल्ली में आयोजित एक शो के दौरान दिए गए उनके कुछ बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए, जिनमें उन्होंने राजधानी की ठंड को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर हनी सिंह को जमकर ट्रोल किया जा रहा है। वहीं, इस मामले में अब अयोध्या के साधु-संतों की भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।

    अयोध्या के संतों ने हनी सिंह के बयान को अशोभनीय और समाज की मर्यादा के खिलाफ बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। संतों का कहना है कि इस तरह की भाषा न केवल दिल्ली के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देती है।

    साधु-संतों ने की सार्वजनिक माफी की मांग

    मीडिया से बातचीत में अयोध्या के संत सीताराम दास महंत ने कहा कि दिल्ली की ठंड को लेकर दिया गया हनी सिंह का बयान पूरी तरह निंदनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिंगर ने मंच से अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर दिल्लीवासियों की भावनाओं का अपमान किया है। महंत ने कहा कि एक कलाकार का काम समाज को सकारात्मक संदेश देना होता है, लेकिन हनी सिंह ने मर्यादा की सभी सीमाएं लांघ दी हैं।

    उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि हनी सिंह को तुरंत सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। संतों का मानना है कि सस्ती लोकप्रियता और पैसे के लिए इस तरह की अश्लीलता फैलाना समाज के लिए घातक है।

    “हनी सिंह समाज के लिए कलंक”

    साधु-संतों ने अपने बयान में कहा, “हनी सिंह समाज के लिए कलंक हैं। वे मशहूर जरूर हैं, लेकिन ज्ञान और संस्कार के मामले में नहीं। मंच से दिए गए उनके शब्द माताओं और बहनों का अपमान हैं, जो किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हैं।” संतों का कहना है कि ऐसे बयानों पर सख्त प्रतिक्रिया और कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी कलाकार इस तरह की भाषा का इस्तेमाल न करे।

    अश्लीलता समाज के लिए खतरा: महामंडलेश्वर

    महामंडलेश्वर विष्णु दास ने भी हनी सिंह के बयानों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि हनी सिंह एक गायक हैं, लेकिन जिस तरह की भाषा का प्रयोग वे कर रहे हैं, वह समाज में गंदगी फैलाने का काम कर रही है। महामंडलेश्वर ने कहा कि मौसम कुदरत की देन है और उसे लेकर इस तरह की अभद्र टिप्पणियां करना बिल्कुल अनुचित है।

    उन्होंने कहा कि जब कोई कलाकार मंच पर आता है, तो उसकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। लेकिन हनी सिंह ने अपनी जिम्मेदारी को नजरअंदाज करते हुए अश्लीलता फैलाई है। महामंडलेश्वर ने दो टूक कहा कि हनी सिंह को दिल्ली की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई भी होनी चाहिए।