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  • आई-पैक मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त ममता सरकार को नोटिस;सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश

    आई-पैक मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त ममता सरकार को नोटिस;सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश


    नई दिल्ली: पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक I-PAC से जुड़े छापेमारी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ा संदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के पुलिस महानिदेशक डीजीपी राजीव कुमार को नोटिस जारी करते हुए उनसे दो हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि छापेमारी से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल स्टोरेज को अगली सुनवाई तक सुरक्षित रखा जाए।

    यह मामला प्रवर्तन निदेशालय ईडी द्वारा आई-पैक के कार्यालय और सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर की गई छापेमारी से जुड़ा है। ईडी का आरोप है कि इस दौरान राज्य प्रशासन और पुलिस ने केंद्रीय एजेंसी के काम में बाधा डाली। ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस प्रकरण में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं आरोपी हैं। उन्होंने दावा किया कि डीजीपी राजीव कुमार की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया और पुलिस की भूमिका सहयोगी की रही।मामले की सुनवाई जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने की। दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर फिलहाल रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि ईडी की याचिकाओं में गंभीर संवैधानिक और कानूनी सवाल उठाए गए हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    पीठ ने टिप्पणी की कि यदि ऐसे मामलों को अनसुलझा छोड़ दिया गया तो इससे एक या एक से अधिक राज्यों में अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी डीजीपी राजीव कुमार कोलकाता पुलिस कमिश्नर और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया। सभी प्रतिवादियों को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी को तय की गई है।अपने अंतरिम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि तलाशी वाले परिसरों के अंदर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग डीवीआर और अन्य स्टोरेज डिवाइस को किसी भी हाल में नष्ट या छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। यह निर्देश अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा।

    वहीं पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने ईडी की याचिकाओं की वैधता पर सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह की कार्रवाइयां अक्सर चुनावों से पहले देखने को मिलती हैं और जब मामला पहले से हाईकोर्ट में लंबित है तब सुप्रीम कोर्ट को इस पर विचार नहीं करना चाहिए।इसी बीच ईडी ने एक नई अर्जी दाखिल कर डीजीपी राजीव कुमार समेत पश्चिम बंगाल पुलिस के शीर्ष अधिकारियों को निलंबित किए जाने की मांग भी की है। इस पर भी सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार से जवाब तलब किया है। यह मामला अब राजनीतिक और संवैधानिक दोनों दृष्टियों से बेहद अहम बन गया है।

  • पीएम मोदी के नेतृत्व में तेजी से बढ़ा भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से कारोबार हुआ आसान

    पीएम मोदी के नेतृत्व में तेजी से बढ़ा भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से कारोबार हुआ आसान


    नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम पिछले आठ वर्षों में अभूतपूर्व गति से बढ़ा है। केवल नीति समर्थन ही नहींबल्कि मजबूत डिजिटल और पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण स्टार्टअप्स को अब व्यापार करना आसान हो गया है। यह बात स्टार्टअप फाउंडर्स ने गुरुवार को साझा की।हेल्थकेयर स्टार्टअप 1एमजी के सीईओ प्रशांत टंडन ने कहा कि आज भारत में एक उद्यमी को वही सुविधाएँ मिलती हैंजिनकी उसे ज़रूरत होती है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के आने के बाद स्टार्टअप्स को स्टॉपलाइट में रखा गयाजिससे भारत को ग्लोबल स्टार्टअप मैप पर मान्यता मिली। टंडन के अनुसार सरकार कॉरपोरेट्स और आम जनता भी अब स्टार्टअप्स की अहमियत समझ रही है।

    उन्होंने आगे बताया कि इस बदलाव के पीछे जेएएम ट्रिनिटी (जनधन आधार मोबाइल) और यूपीआई जैसे मजबूत पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इससे उद्यमियों को ऐसी प्रणालियाँ विकसित करने का अवसर मिला जिनसे देश की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।अर्बन कंपनी के सह-संस्थापक और सीईओ अभिराज सिंह बहल ने कहा कि जब उन्होंने अर्बन कंपनी शुरू की थी तब भारत में केवल एक-दो यूनिकॉर्न मौजूद थे। लेकिन पिछले आठ वर्षों में स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हुआ है। आज देश में 110 यूनिकॉर्न और हजारों स्टार्टअप्स विभिन्न सेक्टर्स में अपनी पहचान बना चुके हैं। उनके मुताबिक इस विकास और विस्तार का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को जाता है।

    प्रिस्टिन केयर के सह-संस्थापक हरसिमरबीर सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी के 2015 के न्यूयॉर्क भाषण को उनके जीवन में परिवर्तनकारी बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री में स्टार्टअप्स के लिए CEO जैसी विशेषताएं हैं-समस्याओं को तुरंत पहचानना और उनका समाधान करना। उन्होंने सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के हालिया उदाहरण का जिक्र किया जहां सरकार ने समय रहते निवेश और सुधार के लिए पहल की।

    रेज कॉफी के संस्थापक भरत सेठी ने 2016 में स्टार्टअप इंडिया मिशन के उद्घाटन का अनुभव साझा किया। उनके मुताबिकउस समय भारत परिवर्तन के दौर से गुजर रहा था और इस मिशन ने स्टार्टअप्स के लिए एक नई दिशा तय की। उन्होंने बताया कि स्टार्टअप इंडिया मिशन ने न केवल व्यवसायियों को प्रोत्साहित किया बल्कि पूरे देश में उद्यमिता के लिए जागरूकता भी बढ़ाई।स्टार्टअप फाउंडर्स का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नीति  डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रेरणा का अनोखा मिश्रण भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में सक्षम रहा है।

  • BMC मतदान 2026: सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, मतदाताओं के लिए पिंक बूथ और वरिष्ठ नागरिक टीमें..

    BMC मतदान 2026: सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, मतदाताओं के लिए पिंक बूथ और वरिष्ठ नागरिक टीमें..


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र में बीएमसी चुनाव 2026 के लिए मतदान सुबह से जारी है और यह शाम 5:30 बजे तक चलेगा। मुंबई समेत राज्य की 29 महानगरपालिकाओं में मतदान होना है, जिसमें बृहन्मुंबई नगर निगमBMC विशेष रूप से राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। मुंबई के 227 वार्डों में कुल 1,700 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं जबकि शहर के 1.03 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं।मतदान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है। मुंबई पुलिस ने जगह-जगह बैरिकेडिंग लगाई है, वाहनों की जांच की जा रही है और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। मतदाताओं की सुविधा के लिए महिलाओं द्वारा संचालित पिंक पोलिंग बूथ बनाए गए हैं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए मदद के विशेष प्रबंध किए गए हैं।

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उनके परिवार ने मतदान कर अपनी स्याही लगी उंगलियां दिखाई। फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने जनता से मतदान करने की अपील की। इसी तरह, वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद उज्ज्वल निकम ने मतदान के बाद अपने अनुभव साझा किए और मुंबई में पहली बार वोट डालने का महत्व बताया।बॉलीवुड सेलेब्स और राजनीतिक दिग्गज भी मतदान में सक्रिय रहे। सलमान खान के पिता और प्रसिद्ध लेखक सलीम खान ने माउंट मेरी चर्च में पोलिंग बूथ पर वोट डाला। शिवसेनायूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे, उनकी पत्नी रश्मि और बेटे आदित्य ठाकरे भी मतदान केंद्र पहुंचे। मुंबई में एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे अपने परिवार के साथ वोट डालने पहुंचे और उन्होंने मार्कर पेन से मतदान के तरीके पर सवाल उठाए, साथ ही मतदान प्रक्रिया में हेराफेरी की चेतावनी दी।

    मतदाता अनुभव और शिकायतें

    कुछ मतदाताओं ने मतदान के दौरान समस्याओं की शिकायत की। शिवसेनायूबीटी सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने बताया कि उनका नाम मतदाता सूची में नहीं था और उन्हें दूसरे पोलिंग सेंटर पर भेजा गया। इसके अलावा, कल्याण से एमएनएस उम्मीदवार उर्मिला तांबे ने आरोप लगाया कि उंगलियों पर लगी स्याही मिटाने की शिकायतें सत्ताधारी पार्टी की मदद के लिए हो रही हैं।हालांकि निर्वाचन आयोग के पीआरओ ने बताया कि मार्कर पेन का इस्तेमाल नई बात नहीं है। आयोग ने कहा कि 2012 से यह तरीका अपनाया जा रहा है और स्थानीय निकाय चुनावों में मतदान के बाद उंगलियों पर निशान लगाने के लिए पारंपरिक रूप से मार्कर पेन का उपयोग किया जाता है।मतगणना 16 जनवरी 2026 को होगी। सुरक्षा, पारदर्शिता और मतदाता सुविधा को लेकर किए गए कदमों के बावजूद चुनाव में बढ़ते राजनीतिक दाव-पेंच और मतदान प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।

  • सिर्फ 4 दिन के लिए! IndiGo में न्यू ईयर फ्लाइट सेल, बचत का मौका बच्चों और बड़े यात्रियों के लिए

    सिर्फ 4 दिन के लिए! IndiGo में न्यू ईयर फ्लाइट सेल, बचत का मौका बच्चों और बड़े यात्रियों के लिए


    नई दिल्ली। IndiGo एयरलाइंस ने नए साल की शुरुआत में यात्रियों के लिए खास Sale Into 2026 फ्लाइट ऑफर की घोषणा की है। इस सेल में न सिर्फ वयस्क यात्रियों के लिए, बल्कि छोटे बच्चों के लिए भी बेहद आकर्षक ऑफर शामिल है। एयरलाइन के मुताबिक घरेलू उड़ानों पर यदि यात्री IndiGo के डायरेक्ट चैनल यानी आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप से टिकट बुक करते हैं तो 0 से 24 महीने तक के बच्चे सिर्फ 1 रुपये में यात्रा कर सकते हैं।इस ऑफर का फायदा उठाने के लिए चेक-इन के समय बच्चे की उम्र साबित करने के लिए दस्तावेज दिखाना आवश्यक है। इसके लिए जन्म प्रमाण पत्र अस्पताल का डिस्चार्ज पेपर वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट या पासपोर्ट मान्य होगा। यदि सही दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए तो बच्चे के टिकट का पूरा किराया देना पड़ेगा।

    किफायती टिकट और सीमित अवधि की बुकिंग

    IndiGo की यह न्यू ईयर सेल 13 जनवरी से 16 जनवरी 2026 तक बुकिंग के लिए उपलब्ध रहेगी। इस दौरान घरेलू उड़ानों के लिए किराया ₹1,499 से और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ₹4,499 से शुरू होगा। ये सभी किराए ऑल-इनक्लूसिव वन-वे हैं। इसके अलावा, चुनिंदा घरेलू रूट्स पर प्रीमियम IndiGoStretch उड़ानों के टिकट ₹9,999 से शुरू होंगे, जिसमें यात्रियों को अधिक आराम और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा।

    ऐड-ऑन सेवाओं पर छूट

    IndiGo सिर्फ फ्लाइट टिकट पर ही नहीं बल्कि अपनी लोकप्रिय 6E ऐड-ऑन सेवाओं पर भी जबरदस्त छूट दे रहा है। फास्ट फॉरवर्ड सेवा पर 70% तक छूट, प्रीपेड एक्स्ट्रा बैगेज पर 50% तक छूट, और स्टैंडर्ड सीट सेलेक्शन पर 15% तक छूट दी जा रही है। इसके अलावा चुनिंदा घरेलू रूट्स पर इमरजेंसी XL (एक्स्ट्रा लेगरूम) सीटें सिर्फ ₹500 में उपलब्ध होंगी।

    कहां और कैसे करें बुकिंग

    यात्री इंडिगो की आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल ऐप, AI-पावर्ड असिस्टेंट 6ESkai, WhatsApp नंबर +91 70651 45858, या चुनिंदा ट्रैवल पार्टनर वेबसाइट और ऐप के जरिए टिकट बुक कर सकते हैं। एयरलाइन ने स्पष्ट किया है कि ऑफर सीमित अवधि के लिए है और जल्दी बुकिंग करने पर ही यात्री इसका पूरा लाभ उठा सकते हैं।यह सेल यात्रियों को कम खर्च में यात्रा का मौका देती है और छोटे बच्चों के साथ सफर करना पहले से कहीं ज्यादा आसान और किफायती बनाती है। ऐसे में परिवार और बच्चे के साथ घरेलू यात्रा करने वालों के लिए यह ऑफर एक शानदार अवसर साबित हो सकता है।

  • लालू यादव को सर्वोच्च सम्मान देने की मांग, पोस्टर विवाद में लिखी लाइन-‘हमारे भगवान’

    लालू यादव को सर्वोच्च सम्मान देने की मांग, पोस्टर विवाद में लिखी लाइन-‘हमारे भगवान’

    नई दिल्ली बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव को भारत रत्न देने की मांग उठ रही है. आरजेडी कार्यालय के बाहर इस मांग को लेकर पोस्टर लगाए गए हैं, जिनपर लालू यादव को ‘गरीबों का मसीहा’ बताया गया है. इन पोस्टर्स पर लालू यादव और बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की तस्वीर लगी है.

    इसके साथ पोस्टर्स पर लिखा है, ‘गरीबों के मसीहा हमारे भगवान. भारत सरकार से अपने आदरणीय नेता के लिए एक मांग. लालू प्रसाद यादव को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए.’ बताया जा रहा है कि ये पोस्टर RJD अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश सचिव राजेंद्र रजक द्वारा लगाए गए हैं.

    ‘समाजवादी आंदोलन के अनमोल रत्न लालू यादव’

    बता दें, पहले भी RJD की तरफ से लालू यादव को भारत रत्न देने की मांग की जाती रही है. हालांकि, पहली बार पोस्टर लगाकर ऐसी मांग उठाई गई है. पार्टी की तरफ से ये कहा जाता रहा है कि समाजवादी आंदोलन के बचे अनमोल रत्न लालू यादव भारत रत्न के योग्य हैं, जिन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में सामाजिक न्याय की राजनीति को नई दिशा दी.

    बता दें, समाजवादी पृष्ठभूमि के स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह और स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर को नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ही भारत रत्न दिया गया है. लालू यादव भी समाजवादी पृष्ठभूमि से हैं.

    नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की हुई थी मांग

    यह मांग ऐसे समय में जोर पकड़ रही है जब कुछ दिन पहले ही जदयू नेता KC त्यागी ने सीएम नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग की थी. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी थी. हालांकि, जदयू ने उनके बयान से किनारा कर लिया था.

  • ईरान का हवाई क्षेत्र बंद, रायपुर परिवार समेत कई यात्रियों की अंतरराष्ट्रीय यात्रा टली

    ईरान का हवाई क्षेत्र बंद, रायपुर परिवार समेत कई यात्रियों की अंतरराष्ट्रीय यात्रा टली


    नई दिल्ली। इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य और राजनीतिक तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात पर दिखाई देने लगा है। सुरक्षा कारणों को हवाला देते हुए ईरान ने अपना एयरस्पेस अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इस फैसले से भारत से पश्चिमी देशों की ओर जाने वाली कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को बीच रास्ते में ही वापस लौटना पड़ा, जिससे यात्रियों में भारी असुविधा और असमंजस पैदा हुआ।

    जानकारी के अनुसार, 14 जनवरी की देर रात मुंबई से उड़ान भरने वाली कई अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स का मार्ग तय रूट के अनुसार तेहरान एयरस्पेस से होकर गुजरना था। हालांकि, उड़ान के कुछ घंटे बाद ईरान की ओर से एयरस्पेस बंद करने की सूचना मिलने पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने सभी संबंधित विमानों को मुंबई लौटने के निर्देश दिए। सुबह करीब 4 बजे ये फ्लाइट्स वापस मुंबई एयरपोर्ट पर लैंड हुईं, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।इन उड़ानों में रायपुर निवासी करोबारी महावीर तालेड़ा और उनका परिवार भी शामिल थे, जो न्यूयॉर्क जा रहे थे। महावीर ने बताया कि फ्लाइट ने समय पर उड़ान भरी थी, लेकिन दो घंटे बाद पायलट ने घोषणा की कि तकनीकी और सुरक्षा कारणों से विमान को वापस ले जाया जा रहा है। अचानक लिए गए इस फैसले से यात्रियों में चिंता और असमंजस की स्थिति उत्पन्न हुई।

    मुंबई एयरपोर्ट पर लौटने के बाद यात्रियों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। महावीर के अनुसार, यात्रियों के ठहरने और आगे की यात्रा के विकल्पों की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी। कई यात्रियों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें रिफंड या वैकल्पिक फ्लाइट के बारे में तुरंत कोई जानकारी नहीं दी गई, जिससे नाराजगी बढ़ी।एयर इंडिया ने यात्रियों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। एयरलाइन ने बताया कि ईरान के एयरस्पेस बंद होने के कारण कुछ उड़ानों को वैकल्पिक रूट से संचालित किया जा रहा है, जिससे देरी हो सकती है। वहीं, कुछ रूट ऐसे हैं जहां बदलाव संभव न होने के कारण उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।

    इंडिगो ने भी अपनी एडवाइजरी में कहा कि ईरान के हवाई क्षेत्र बंद होने से कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ सकता है। एयरलाइंस ने यात्रियों से अपील की है कि वे फ्लाइट की स्थिति अपनी एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट या कस्टमर केयर से पहले जांच लें।विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान हालात में अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए अनिश्चितता बनी हुई है। ईरान और इजराइल के बीच तनाव से जुड़े हालात कब सामान्य होंगे, इसका अभी कोई निश्चित अनुमान नहीं है। यात्रियों को अपनी यात्रा के दौरान धैर्य बनाए रखने और सभी अपडेट लगातार जांचने की सलाह दी जा रही है।

  • बीएमसी चुनाव: बहुमत में तो कभी नहीं आई शिवसेना, आज उद्धव के लिए चुनौती

    बीएमसी चुनाव: बहुमत में तो कभी नहीं आई शिवसेना, आज उद्धव के लिए चुनौती

    मुंबई। बीएमसी चुनाव में आज वोटिंग का दिन है. फैसला 16 जनवरी यानी कल आएगा. उद्धव ठाकरे के लिए पार्टी को बचाने की निर्णायक लड़ाई है. कभी ठाकरे परिवार के दबदबे वाली बीएमसी में पिछले तीस सालों में जो कुछ हुआ, आज उद्धव को सारी बातें याद आ रही होंगी. इसमें ‘बिग ब्रदर’ की हैसियत उन्हें सबसे ज्यादा चुभ रही होगी जो पहले जूनियर था लेकिन बाद में पार्टी को ही चुनौती दे बैठा.
    वैसे तो भाजपा का गठबंधन भी भारत के सबसे अमीर नगर निगम पर फतह के लिए जोर लगा रहा है लेकिन कोई और है जिसके लिए यह अग्निपरीक्षा है. जून 2022 में पार्टी के विभाजन के बाद यह तीसरी चुनावी फाइट है. करीब तीन दशक से लगातार शिवसेना मुंबई पर राज करती आई है.
    बीएमसी का मतलब ही शिवसेना बन चुका था. ऐसे में 2017 के बाद होने जा रहे इस हाई प्रोफाइल चुनाव पर देश की नजरें हैं क्योंकि अब शिवसेना दो हिस्सों में बंट चुकी है. उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे दोनों अपनी शिवसेना को सही और असली साबित करने के लिए यह निर्णायक लड़ाई जीतना चाहेंगे.

    उद्धव ठाकरे इस चुनाव की अहमियत समझते हैं शायद इसीलिए उन्होंने अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन हासिल करने के लिए सबसे पहले परिवार को एकजुट करने की सोची. महाराष्ट्र में दशकों से बाल ठाकरे का ही नाम बोलता है. शिंदे भी ठाकरे की तस्वीर लेकर अपनी सियासत चमका रहे हैं. आज भी सोशल मीडिया के प्रोफाइल में उन्होंने बैकग्राउंड में ठाकरे को लगा रखा है. ऐसे में उद्धव के सामने चुनौती बड़ी है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने मराठी वोटों को एकसाथ लाने के लिए चचेरे भाई राज ठाकरे के साथ गठबंधन किया है. राज ने नवंबर 2005 में शिवसेना से अलग होकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) बना ली थी. हालांकि इतने से ही बीएमसी में जीत की गारंटी नहीं मिल जाती. उद्धव की सबसे बड़ी चुनौती वो जूनियर है जो आज ‘बिग ब्रदर’ बनकर सामने खड़ा है.
    – ग्रेटर मुंबई नगर निगम के तौर पर इसे 1873 में स्थापित किया गया.
    – 1931 में प्रेसिडेंट की जगह बीएमसी चीफ को मेयर कहा जाने लगा.
    – आजादी के बाद 1948 में वयस्क मताधिकार के आधार पर बीएमसी में पहले चुनाव हुए.
    – 1972 में बीएमसी ने मराठी को आधिकारिक भाषा के तौर पर स्वीकार किया.
    – 1991 में सीटों की संख्या 221 पहुंची. 1992 और 1997 में चुनाव कराए गए
    – 2002 में सीटें 227 हुईं. इसका वार्षिक बजट कई छोटे राज्यों से भी ज्यादा है.

    उद्धव शिवसेना की चुनौती
    – मुंबई ही नहीं, पूरे देश में यह धारणा है कि बीएमसी का मतलब शिवसेना है लेकिन कम लोग जानते होंगे कि ठाकरे पार्टी ने अपने दम पर कभी बहुमत हासिल नहीं किया. शिवसेना ने हमेशा गठबंधन से ही नगर निगम की सरकार चलाई है.
    – इसने 1985 में चुनाव जीता था और 170 में से 74 सीटें मिलीं. तब पार्टी ने 140 सीटों पर चुनाव लड़ा था.
    – अविभाजित शिवसेना का सबसे जबर्दस्त प्रदर्शन 1997 में दिखा जब शिवसेना ने 221 में 103 सीटें जीत लीं.
    – इसके बाद ग्राफ गिरने लगा और 100 से नीचे आ गया. 2012 में 75 सीटें मिली थीं.
    – 2017 में यह 84 सीटों पर आकर सिमट गई.
    – 2019 के विधानसभा चुनाव में संयुक्त शिवसेना ने 16 प्रतिशत वोट हासिल किए थे. पांच साल बाद दोनों गुटों को मिलाकर 20 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले.

    इसमें शिंदे ग्रुप को ज्यादा 12 प्रतिशत और उद्धव गुट को 10 प्रतिशत मिले थे. इस बार उद्धव चाहेंगे कि बीएमसी में शिंदे ग्रुप से ज्यादा वोट अपने साथ खींचा जाए.
    भाजपा का बढ़ना
    हां, शिवसेना के साथ अलायंस में जूनियर के तौर पर शामिल हुई भाजपा लगातार बढ़ती गई. 2014 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में वह ‘बिग ब्रदर’ बन गई. बीएमसी चुनाव में भी वह पहले 20-30 सीटें निकाल रही थी लेकिन 2017 में यह 82 के आंकड़े पर पहुंच गई. तब यह शिवसेना से केवल 2 सीटें पीछे थी. इस बार के चुनाव में भाजपा शिंदे सेना की मदद से पहली बार बीएमसी पर कब्जा करना चाहती है. आसान नहीं है लेकिन पहले से कम मुश्किल है. इसका मैसेज बड़ा होगा- ठाकरे अब भाजपा के लिए किसी भी तरह से चुनौती नहीं हैं.
  • चुनावी वादा पूरा करने के लिए हफ्तेभर में 500 कुत्तों को मार डाला! जानिए मामला?

    चुनावी वादा पूरा करने के लिए हफ्तेभर में 500 कुत्तों को मार डाला! जानिए मामला?


    हैदराबाद। चुनावी वादा पूरा करने में नेताओं का रिकॉर्ड भले ही खराब रहता हो, लेकिन हाल ही में तेलंगाना से चुनावी वादा को पूरा करने के लिए कुत्तों की हत्या का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां कुछ गांव के सरपंचों ने लोगों से किया हुआ वादा निभाने के चक्कर में एक सप्ताह में करीब 500 कुत्तों को मार डाला है। घटना सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है।

    एक हफ्ते में कई गांवों में 500 कुत्तों को जहर देकर मार दिया गया। पशु कल्याण कार्यकर्ता अडुलापुरम गौतम द्वारा 12 जनवरी को दर्ज कराई गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कामारेड्डी जिले के भवानीपेट, पालवंचा, फरीदपेट, वाडी और बंदारमेश्वरपल्ली सहित कई गांवों में आवारा कुत्तों को योजनाबद्ध तरीके से मारा गया। उन्होंने दावा किया कि पिछले दो-तीन दिनों में ही लगभग 200 कुत्तों को मारा गया है।

    सरपंचों ने करवाई हत्या

    शिकायत के मुताबिक गौतम को 12 जनवरी को दोपहर करीब 3 बजे कुत्तों की कथित सामूहिक हत्या को लेकर विश्वसनीय जानकारी मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि ये काम गांव के सरपंचों के कहने पर किए गए। हत्याओं को क्रूर बताते हुए गौतम ने इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
    कुत्तों को लगाए गए जहरीले इंजेक्शन

    वहीं पुलिस के मुताबिक पांच गांव के सरपंचों और किशोर पांडे नाम के एक व्यक्ति सहित छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि कुत्तों को जहरीले इंजेक्शन दिए गए, जिससे उनकी मौत हो गई।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शवों को गांवों के बाहरी इलाकों में दफना दिया गया था और बाद में पशु चिकित्सा टीमों द्वारा पोस्टमार्टम जांच के लिए उन्हें बाहर निकाला गया। आगे की जांच जारी है।
    चुनाव से पहले किया था वादा

    ग्रामीणों के मुताबिक कुछ उम्मीदवारों ने हाल ही में हुए पंचायत चुनावों के दौरान ग्रामीणों से आवारा कुत्तों से निजात दिलाने का वादा किया था। ग्रामीणों ने बताया, “पिछले साल दिसंबर में हुए चुनावों से पहले, कुछ उम्मीदवारों ने ग्रामीणों से वादा किया था कि वे आवारा कुत्तों और बंदरों की समस्या से निपटेंगे। अब वे आवारा कुत्तों को मारकर उन वादों को ‘पूरा’ कर रहे हैं।”

  • दिल्ली-नोएडा की तर्ज पर पूरे यूपी में लागू होगा डबल हेलमेट नियम, जानें कितनी होगी जुर्माने की रकम

    दिल्ली-नोएडा की तर्ज पर पूरे यूपी में लागू होगा डबल हेलमेट नियम, जानें कितनी होगी जुर्माने की रकम


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए नया कदम उठाया है। अब सड़क पर बाइक और स्कूटी चलाने वाले सभी वाहन चालकों और उनके सवारों के लिए डबल हेलमेट पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। यह नियम दिल्ली और नोएडा में लागू डबल हेलमेट नियम की तर्ज पर राज्यव्यापी प्रभावी होगा।

    क्यों जरूरी है डबल हेलमेट?
    बाइक और स्कूटी पर सवार लोगों की सुरक्षा बढ़ाने और सिर की चोटों से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

    अधिकारियों के अनुसार, कई बार दुर्घटनाओं में सवार का सिर और चालक का सिर दोनों गंभीर रूप से घायल होते हैं, इसलिए केवल चालक के लिए हेलमेट पहनना पर्याप्त नहीं है।

    जुर्माना और दंड
    यदि कोई चालक या सवार डबल हेलमेट नहीं पहनता है, तो उसे 200 रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि नियम के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, और यह नियम सभी सड़क और हाईवे पर लागू रहेगा।

    सरकार का उद्देश्य
    उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि इस कदम से सड़क दुर्घटनाओं में मौत और गंभीर चोटों की संख्या में कमी आएगी। साथ ही यह सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद करेगा।

  • विदेशियों को आकर्षित नहीं कर पा रहा भारत…. राजस्थान से भी छोटे देश वियतनाम पहुंचे 3 गुना से भी ज्यादा टूरिस्ट

    विदेशियों को आकर्षित नहीं कर पा रहा भारत…. राजस्थान से भी छोटे देश वियतनाम पहुंचे 3 गुना से भी ज्यादा टूरिस्ट


    नई दिल्ली।
    साल 2025 के पहले नौ महीनों में भारत (India) सिर्फ 6.18 मिलियन विदेशी पर्यटकों (6.18 Million Foreign Tourists) को ही आकर्षित कर पाया. यह आंकड़ा चौंकाने वाला है, क्योंकि अकेला पेरिस शहर (Paris city) एक साल में करीब 18 मिलियन अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का स्वागत कर चुका है. भारत के बेहद करीब वियतनाम (Vietnam), जो क्षेत्रफल में राजस्थान से भी छोटा है, उसने 2025 में 20 मिलियन विदेशी पर्यटकों का रिकॉर्ड बनाया.


    क्या भारत अब बजट डेस्टिनेशन नहीं रहा?

    आज भारत न तो विदेशी टूरिस्ट के लिए सस्ता है और न ही अपने ही नागरिकों के लिए. घरेलू छुट्टी का खर्च कई बार श्रीलंका या थाईलैंड जैसे देशों की इंटरनेशनल ट्रिप से ज्यादा हो जाता है. घरेलू फ्लाइट्स महंगी हैं, होटल ओवरप्राइस्ड हैं और सर्विस क्वालिटी में लगातार गिरावट देखी जा रही है. वियतनाम में एक हफ्ते की अच्छी ट्रिप 50 से 60 हजार रुपये प्रति व्यक्ति में हो जाती है. वहीं गोवा की इसी तरह की यात्रा का खर्च इतना ही या उससे ज्यादा हो सकता है. यही वजह है कि कई भारतीयों को विदेशी यात्रा ज्यादा सस्ती और ज्यादा आकर्षक लगने लगी है।


    इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं में क्या कमी है?

    भारत में पब्लिक ट्रांसपोर्ट भरोसेमंद नहीं है. कई टूरिस्ट प्लेस पर कैब ड्राइवर मीटर से चलने से इनकार करते हैं और गैंग बनाकर मनमाना किराया वसूलते हैं. मेट्रो शहरों से आखिरी मील कनेक्टिविटी कमजोर है. इसके अलावा प्रदूषण भी एक बड़ा कारण है, राजधानी दिल्ली में AQI महीनों तक तीन अंकों में बना रहता है. सार्वजनिक स्थानों पर थूकना आम है. ऐतिहासिक स्मारकों पर लिखावट और नुकसान दिखाई देता है. शौचालय गंदे हैं और कई हेरिटेज साइट्स पर बदबू पर्यटकों का स्वागत करती है. ऐसी हालत में लोग ऊंची कीमत चुकाने से पहले सौ बार सोचते हैं।


    टूरिज्म में सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता क्यों?

    सुरक्षा भारत की सबसे कमजोर कड़ी बन चुकी है. महिला वर्ल्ड कप के दौरान ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के साथ छेड़छाड़, राजस्थान में फ्रेंच टूरिस्ट के साथ रेप और कर्नाटक में इजरायली महिला के साथ गैंगरेप जैसी घटनाएं अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक पहुंचती हैं. ये घटनाएं भारत की वैश्विक छवि को गहराई से प्रभावित करती हैं. गोवा या केरल के बजट में लोग बाली, कुआलालंपुर या दुबई घूम लेते हैं. थाईलैंड में अलग से टूरिस्ट पुलिस है. वहां इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर, शहर साफ और सुरक्षा सिस्टम मजबूत है. ऐसे में सवाल उठता है कि कोई भारत क्यों चुने, जब खर्च ज्यादा और अनुभव कमजोर हो।


    भारत पर्यटन को मजबूत कैसे बना सकता है?

    भारत के पास प्राचीन मंदिर, जीवंत संस्कृति, रेगिस्तान, पहाड़, समुद्र तट और जंगल हैं. सबसे पहले सुरक्षा पर जीरो टॉलरेंस जरूरी है. साफ-सफाई को सख्ती से लागू करना होगा और नागरिकों को भी जिम्मेदारी निभानी होगी. कीमत और सुविधाओं में संतुलन, बेहतर सर्विस स्टैंडर्ड और प्रोफेशनल प्रमोशन जरूरी है. पर्यटन सिर्फ स्मारक नहीं, अनुभव है और वही तय करता है कि पर्यटक दोबारा लौटेगा या नहीं.