Category: National

  • सीएम योगी आदित्यनाथ ने पीएम मोदी से की मुलाकात, उत्तर प्रदेश के विकास और राजनीतिक स्थिति पर बातचीत

    सीएम योगी आदित्यनाथ ने पीएम मोदी से की मुलाकात, उत्तर प्रदेश के विकास और राजनीतिक स्थिति पर बातचीत

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास पहुंचे, जहां दोनों नेताओं के बीच उत्तर प्रदेश से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर बातचीत हुई। इस मुलाकात में प्रदेश के विकास कार्यों, प्रशासनिक विषयों और मौजूदा राजनीतिक स्थिति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के बीच हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब उत्तर प्रदेश में कई विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक कार्यों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। दोनों नेताओं की बातचीत में प्रदेश से जुड़े प्रमुख विकास कार्यों की प्रगति और उनसे संबंधित विषयों पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, बैठक में किन-किन मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच समय-समय पर उत्तर प्रदेश से जुड़े विषयों को लेकर बैठकें होती रही हैं। राज्य में केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन, बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट, निवेश, रोजगार और विकास कार्यों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।

    बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति से जुड़े विषयों पर भी बातचीत होने की संभावना जताई गई है। हालांकि, दोनों नेताओं की बैठक के बाद किसी विशेष राजनीतिक फैसले या चर्चा का आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए मुलाकात के राजनीतिक पहलू को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मिलने उनके आवास पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच भी उत्तर प्रदेश से जुड़े राजनीतिक और संगठनात्मक विषयों पर बातचीत होने की संभावना है। मुख्यमंत्री की दिल्ली यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष से मुलाकात को राज्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है और राष्ट्रीय राजनीति में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य में केंद्र और प्रदेश सरकार के स्तर पर चल रही योजनाओं और विकास परियोजनाओं की प्रगति पर नियमित समन्वय की जरूरत रहती है। मुख्यमंत्री की प्रधानमंत्री से मुलाकात में ऐसे विषयों पर चर्चा होना इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा सकता है।

    प्रदेश में बुनियादी ढांचे, औद्योगिक निवेश, सड़क और परिवहन व्यवस्था, रोजगार तथा विभिन्न केंद्रीय योजनाओं से जुड़े कार्य लगातार सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की बैठक के दौरान इन क्षेत्रों में चल रहे कार्यों की स्थिति और आगे की प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया जाना महत्वपूर्ण है।

    फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात के बाद किसी नए निर्णय या घोषणा की जानकारी सामने नहीं आई है। बैठक में उत्तर प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई है। आने वाले दिनों में यदि सरकार या पार्टी की ओर से बैठक के संबंध में विस्तृत जानकारी जारी की जाती है, तो मुलाकात में चर्चा किए गए मुद्दों की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

  • बेंगलुरु के 5-स्टार होटलों में फूड सेफ्टी जांच का बड़ा खुलासा, फंगस लगी सब्जियां और एक्सपायर्ड मीट मिलने से हड़कंप

    बेंगलुरु के 5-स्टार होटलों में फूड सेफ्टी जांच का बड़ा खुलासा, फंगस लगी सब्जियां और एक्सपायर्ड मीट मिलने से हड़कंप


    नई दिल्ली
    । बेंगलुरु के कई नामी थ्री-स्टार और फाइव-स्टार होटलों में खाद्य सुरक्षा को लेकर हुई जांच में गंभीर खामियां सामने आई हैं। अधिकारियों की जांच के दौरान कुछ होटलों में फंगस लगी सब्जियां, एक्सपायर्ड दूध और डेयरी उत्पाद, खराब हालत में रखा चिकन, मटन और मछली तथा नियमों के अनुरूप नहीं रखे गए खाद्य पदार्थ मिले। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से 7 अगस्त को चलाए गए इस विशेष निरीक्षण अभियान में शहर के सभी जोन को शामिल किया गया।

    इस अभियान के तहत 30 टीमों ने बेंगलुरु के कुल 26 थ्री-स्टार और फाइव-स्टार होटलों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने होटलों की रसोई, खाद्य भंडारण व्यवस्था, लेबलिंग और साफ-सफाई समेत कई मानकों की जांच की। इस दौरान कुछ जगहों पर खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग और लेबलिंग में भी नियमों का पालन नहीं किया गया था। अधिकारियों को कई ऐसे उत्पाद मिले जिनकी निर्धारित उपयोग अवधि समाप्त हो चुकी थी। कुछ किचन में साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई।

    जांच के दौरान कुछ होटलों में वेज और नॉन-वेज खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखने के नियमों का भी पालन नहीं मिला। अधिकारियों ने बताया कि कुछ जगहों पर खाद्य पदार्थों की सही जानकारी उपलब्ध नहीं थी और जरूरी लेबलिंग नियमों का पालन नहीं किया गया था। इसके अलावा स्टोरेज में एक्सपायर्ड दूध, डेयरी और बेकरी उत्पाद पाए गए। सब्जियों में फफूंदी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों के अनुचित भंडारण से जुड़ी खामियां भी सामने आईं।

    कार्रवाई के दौरान द ललित अशोक के एनेक्स साउथ परिसर से 76 किलो मीट और 200 किलो सब्जियां जब्त की गईं। इसके अलावा 32 लीटर एक्सपायर्ड दूध भी जब्त कर नष्ट किया गया। शांग्री-ला बेंगलुरु से 15 किलो मीट और फोर सीजन्स होटल बेंगलुरु से 19 किलो मीट जब्त किया गया। विवांता बैंगलोर व्हाइटफील्ड में तीन किलो एक्सपायर्ड बेकरी उत्पाद पाए गए, जबकि ताज यशवंतपुर से 72 किलो मीट और मछली जब्त की गई।

    सबसे बड़ी कार्रवाई रेडिसन ब्लू के द एट्रिया परिसर में सामने आई, जहां कुल 105 किलो एक्सपायर्ड खाद्य उत्पाद जब्त किए गए। इनमें 50 किलो चिकन, 23 किलो मीट, 23 किलो मछली और सात किलो सब्जियां शामिल थीं। अधिकारियों ने नियमों के उल्लंघन वाले होटलों को नोटिस भी जारी किए हैं। अब आगे की कार्रवाई जांच और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर की जाएगी।

    पूरे अभियान के दौरान खाद्य पदार्थों के 35 सैंपल भी लिए गए हैं। इनमें चाय पाउडर, चिकन, मटन, मछली, खाद्य तेल, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, टोमैटो सॉस, नींबू का रस, चीज, पापड़, काजू, अदरक, काली मिर्च, मसाले और दूध जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन नमूनों को खाद्य प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है। फिलहाल संबंधित होटलों से लिए गए सैंपल की लैब रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की स्थिति और स्पष्ट होगी तथा उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

  • भारत ने 20 से अधिक देशों में 7 हजार टन से ज्यादा मखाना भेजा, बिहार के किसानों को मिला वैश्विक बाजार का लाभ

    भारत ने 20 से अधिक देशों में 7 हजार टन से ज्यादा मखाना भेजा, बिहार के किसानों को मिला वैश्विक बाजार का लाभ

    नई दिल्ली ।भारत का मखाना निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में नई ऊंचाई पर पहुंचा है। इस अवधि में भारत ने 20 से अधिक देशों को 7,000 मीट्रिक टन से ज्यादा मखाना और उससे बने मूल्यवर्धित उत्पादों का निर्यात किया। अमेरिका, मध्य पूर्व और अफ्रीकी देशों सहित कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय मखाने की मांग बढ़ने से बिहार के किसानों और इस क्षेत्र से जुड़े उद्योग को नए अवसर मिल रहे हैं।

    मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। देश के कुल मखाना उत्पादन का करीब 85 प्रतिशत हिस्सा बिहार में होता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में भारतीय मखाने की बढ़ती मांग का सीधा लाभ राज्य के उत्पादकों, प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यातकों को मिल सकता है।

    मखाना निर्यात को बेहतर तरीके से दर्ज करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अलग पहचान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने जुलाई 2025 से इसके लिए अलग एचएस कोड लागू किया है। इससे मखाने के व्यापार और निर्यात से जुड़े आंकड़ों की निगरानी अधिक स्पष्ट तरीके से की जा सकेगी।

    इसी क्रम में बिहार से जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाने की पहली व्यावसायिक समुद्री खेप ऑस्ट्रेलिया भेजी गई है। इस खेप के जरिए बिहार के एक प्रमुख भौगोलिक संकेतक उत्पाद ने नए अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश किया है। बिहटा स्थित औद्योगिक क्षेत्र से 18 मीट्रिक टन मिथिला मखाना ऑस्ट्रेलिया भेजा गया।

    इस खेप के लिए मखाना दरभंगा जिले के किसानों से खरीदा गया था। निर्यात से जुड़ी इस पहल का उद्देश्य बिहार के स्थानीय उत्पाद को वैश्विक बाजार से जोड़ना और किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने वाली आपूर्ति श्रृंखला तैयार करना है।

    इस निर्यात प्रक्रिया से जुड़े किसानों को मौजूदा बाजार भाव की तुलना में करीब 18 प्रतिशत अधिक कीमत मिलने की बात सामने आई है। इससे संकेत मिलता है कि किसानों को सीधे निर्यात आधारित बाजारों से जोड़ने और मूल्यवर्धित आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने से उनकी आमदनी बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

    मखाने की वैश्विक मांग बढ़ने के पीछे स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों के प्रति उपभोक्ताओं की बढ़ती रुचि को भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। ऐसे में भारतीय मखाना कृषि आधारित निर्यात के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उत्पाद के रूप में अपनी जगह मजबूत कर सकता है।

    बिहार सरकार भी मखाना क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने पर जोर दे रही है। इसमें किसानों के साथ प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यातकों को सहयोग देने तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों की जरूरत के अनुरूप गुणवत्ता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    राज्य के कृषि मंत्री ने मखाने को बिहार की पहचान से जुड़ा उत्पाद बताते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बिहार आधारित निर्यातकों की भागीदारी बढ़ने से किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। उन्होंने वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए गुणवत्ता मानकों के पालन को महत्वपूर्ण बताया।

    मखाना प्रसंस्करण से जुड़े फोरी समुदाय की पारंपरिक विशेषज्ञता को भी इस उद्योग की महत्वपूर्ण ताकत माना गया है। राज्य सरकार की ओर से इस समुदाय समेत मखाना क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों को सहयोग जारी रखने की बात कही गई है।

    ऑस्ट्रेलिया में जीआई टैग वाले मिथिला मखाने की पहली समुद्री खेप पहुंचना बिहार के कृषि उत्पादों के लिए नए बाजारों के विस्तार का संकेत है। आने वाले समय में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, मध्य पूर्व और अफ्रीकी देशों में मांग बढ़ने से मखाना उद्योग में प्रसंस्करण, निर्यात और रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं। इससे बिहार के किसानों को घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय मूल्य श्रृंखला से जुड़ने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा।

  • उमर खालिद और शरजील इमाम की रिहाई के नारे मामले में सात छात्रों को जमानत, दो पर कोर्ट की सख्ती

    उमर खालिद और शरजील इमाम की रिहाई के नारे मामले में सात छात्रों को जमानत, दो पर कोर्ट की सख्ती


    नई दिल्ली ।
    टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस से जुड़े एक मामले में मुंबई की अदालत ने नौ आरोपी छात्रों में से सात को अग्रिम जमानत दे दी, जबकि दो छात्रों की याचिकाएं खारिज कर दी गईं। मामला पिछले वर्ष संस्थान परिसर में हुई एक सभा के दौरान कथित तौर पर उमर खालिद और शरजील इमाम की रिहाई के समर्थन में नारे लगाए जाने से जुड़ा है।

    मुंबई सेशंस कोर्ट के न्यायाधीश वीबी बोहरा ने दो छात्रों को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि छात्र होने के नाते आरोपियों से देश के कानून का सम्मान करने की अपेक्षा की जाती है। जिन दो छात्रों की याचिकाएं खारिज हुई हैं, उनमें एक 32 वर्षीय गोवंडी निवासी और दूसरा 23 वर्षीय देवनार निवासी बताया गया है।

    मामला 12 अक्टूबर 2025 को TISS में आयोजित एक सभा से जुड़ा है। यह कार्यक्रम दिवंगत पूर्व प्रोफेसर और मानवाधिकार कार्यकर्ता जीएन साईबाबा को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित किया गया था। सभा के दौरान छात्रों ने उनकी तस्वीर लगाई, मोमबत्तियां जलाईं और उनकी कविताएं पढ़ीं। कुछ प्लेकार्ड पर रेस्ट इन पावर जैसे संदेश भी लिखे थे।

    अदालत ने माना कि जीएन साईबाबा को श्रद्धांजलि देना अपने आप में कोई गैरकानूनी गतिविधि नहीं है। विशेष रूप से अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि उन्हें 2024 में बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत मिल चुकी थी। हालांकि, अदालत के अनुसार सभा के दौरान कथित तौर पर लगाए गए कुछ नारे इसे केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखते।

    जांच एजेंसियों के अनुसार, सभा में करीब 10 से 12 छात्र शामिल हुए थे और आरोप है कि वहां उमर खालिद तथा शरजील इमाम की रिहाई की मांग को लेकर नारे लगाए गए। पुलिस के अनुसार, इस सभा के लिए संस्थान प्रशासन से पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। शुरुआती प्राथमिकी में नौ लोगों के नाम दर्ज किए गए थे और बाद में जांच ट्रॉम्बे पुलिस से अपराध जांच विभाग को सौंप दी गई।

    मामले की जांच के दौरान कुछ आरोपियों के लैपटॉप और मोबाइल फोन भी जब्त किए गए। अभियोजन पक्ष का दावा है कि इन उपकरणों में माओवादी संगठनों से संबंधित किताबें और अन्य सामग्री मिली। जांचकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ डिजिटल जानकारी हटाई गई थी।

    अदालत ने जांच में मिली सामग्री के आधार पर कहा कि आरोपियों में से कुछ के माओवादी विचारधारा से प्रभावित होने के संकेत मिलते हैं। अदालत ने यह संभावना भी जताई कि सभा के जरिए संस्थान के अन्य छात्रों को प्रभावित करने का प्रयास किया गया हो सकता है। हालांकि, न्यायाधीश ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की कि केवल माओवादी संगठनों का साहित्य डाउनलोड करना अपने आप में अपराध नहीं माना जा सकता।

    अदालत ने यह भी कहा कि कैंपस में बिना अनुमति रेस्ट इन पावर जैसे शब्दों का इस्तेमाल अकेले कोई अपराध नहीं है। लेकिन कथित नारे, सभा की परिस्थितियां और जांच के दौरान सामने आई सामग्री को एक साथ देखने पर आरोपियों के कथित इरादों की जांच जरूरी हो जाती है।

    जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आपराधिक कार्रवाई में हुई देरी का मुद्दा भी उठाया गया। अदालत ने कहा कि मुकदमों में देरी के पीछे कई प्रशासनिक और न्यायिक कारण हो सकते हैं, जिनमें लंबित मामलों की संख्या और न्यायाधीशों की उपलब्धता शामिल है। न्यायाधीश ने कहा कि इन अर्जियों पर भी दाखिल होने के नौ महीने से अधिक समय बाद आदेश दिया जा रहा है।

    फिलहाल मामले की जांच जारी है। सात छात्रों को अग्रिम जमानत मिलने से उन्हें अंतरिम कानूनी राहत मिली है, जबकि दो छात्रों को अदालत से यह संरक्षण नहीं मिला। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और मामले की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।

  • FSSAI के शराब लेबलिंग नियमों पर कंपनियों की हाईकोर्ट में चुनौती, अचानक बिक्री रोकने से नुकसान की चिंता

    FSSAI के शराब लेबलिंग नियमों पर कंपनियों की हाईकोर्ट में चुनौती, अचानक बिक्री रोकने से नुकसान की चिंता

    नई दिल्ली । भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI के शराब से जुड़े लेबलिंग और उत्पाद मानकों को लेकर विवाद अब बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है। कुछ बड़ी शराब कंपनियों ने नियामक के उन आदेशों को चुनौती दी है, जिनके तहत कुछ प्रकार के भारतीय निर्मित विदेशी मदिरा उत्पादों की बिक्री पर आपत्ति जताई गई है। मामले में अदालत में अगली सुनवाई सोमवार को होने वाली है, जिस पर कंपनियों और नियामक दोनों की नजर बनी हुई है।

    विवाद का केंद्र शराब की लेबलिंग, फ्लेवर और उत्पाद की उम्र से जुड़े दावे हैं। FSSAI का कहना है कि कुछ कंपनियां ऐसे उत्पादों को रम या व्हिस्की के रूप में बाजार में पेश कर रही हैं, जिनमें अतिरिक्त या कृत्रिम फ्लेवर का इस्तेमाल किया गया है। नियामक के अनुसार, यदि किसी स्पिरिट में अलग से फ्लेवर मिलाया गया है, तो उपभोक्ताओं को इसकी स्पष्ट जानकारी लेबल पर दी जानी चाहिए।

    नियामकीय आपत्ति के अनुसार ऐसे उत्पादों की पैकेजिंग पर रम या व्हिस्की के बजाय संबंधित उत्पाद की वास्तविक प्रकृति को स्पष्ट करने वाले शब्दों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को उत्पाद के बारे में सही और पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराना बताया गया है। इसी बिंदु को लेकर शराब कंपनियों और नियामक के बीच कानूनी विवाद गहराया है।

    विवाद का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू शराब की उम्र से संबंधित दावों का है। कुछ उत्पादों पर उन्हें कैस्क में पुरानी या परिपक्व स्पिरिट के तौर पर प्रस्तुत किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। नियामक का तर्क है कि किसी ब्लेंड में इस्तेमाल की गई सबसे कम उम्र वाली स्पिरिट को ध्यान में रखकर ही उम्र संबंधी दावा किया जाना चाहिए। इससे उन उत्पादों की लेबलिंग प्रभावित हो सकती है, जिनमें अलग-अलग उम्र की स्पिरिट का मिश्रण किया गया है।

    इस मामले में United Spirits और Mohan Meakin समेत कई कंपनियों ने अदालत का रुख किया है। कंपनियों की ओर से दलील दी गई है कि अचानक बिक्री रोकने या लेबल बदलने के निर्देश से कारोबार पर गंभीर आर्थिक असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि इन उत्पादों का निर्माण लंबे समय से निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत किया जा रहा है और अचानक बदलाव लागू करना व्यावहारिक रूप से कठिन होगा।

    कंपनियों का एक प्रमुख तर्क यह भी है कि शराब की बोतलों के लेबल में बदलाव केवल प्रिंटिंग तक सीमित प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए कई मामलों में राज्य आबकारी विभागों से आवश्यक मंजूरी लेनी पड़ती है। इसलिए कंपनियों के मुताबिक यदि उन्हें तुरंत नए नियमों के अनुसार लेबल बदलने और मौजूदा स्टॉक की बिक्री रोकने के लिए कहा जाता है, तो इससे तैयार माल और वितरण व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।

    सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी अचानक पूरे उद्योग की गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना को लेकर चिंता जताई। अदालत ने संकेत दिया कि किसी पूरे उद्योग को रातोंरात बंद करने से व्यावहारिक और आर्थिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि शराब के निर्माण, जांच और मार्केटिंग के तकनीकी मानक तय करना न्यायपालिका का काम नहीं है।

    अदालत ने केंद्र सरकार के वकील और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से FSSAI से इस मामले से जुड़ी पूरी जानकारी हासिल कर अगली सुनवाई में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। अब सोमवार को होने वाली सुनवाई में यह महत्वपूर्ण होगा कि अदालत कंपनियों की बिक्री संबंधी मांग और नियामक के खाद्य सुरक्षा तथा लेबलिंग मानकों के बीच किस तरह संतुलन स्थापित करती है।

    इस विवाद का असर केवल संबंधित कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि शराब उद्योग में उत्पादों की लेबलिंग और नियामकीय अनुपालन को लेकर आगे की दिशा भी इससे तय हो सकती है। फिलहाल अंतिम स्थिति अदालत की आगामी सुनवाई और संबंधित पक्षों की दलीलों के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • पीएम मोदी और राघव चड्ढा की मुलाकात से पंजाब की सियासत गरमाई, बीजेपी में अहम भूमिका मिलने की अटकलें तेज

    पीएम मोदी और राघव चड्ढा की मुलाकात से पंजाब की सियासत गरमाई, बीजेपी में अहम भूमिका मिलने की अटकलें तेज

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की शनिवार को हुई मुलाकात के बाद पंजाब की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पंजाब में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। मुलाकात के बाद राघव चड्ढा ने इसे यादगार और ज्ञानवर्धक बातचीत बताया, जिसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य और पंजाब में संभावित भूमिका को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं।

    राघव चड्ढा ने प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद कहा कि उन्हें नरेंद्र मोदी से मिलने का अवसर मिला और दोनों के बीच विस्तृत तथा ज्ञानवर्धक बातचीत हुई। उन्होंने प्रधानमंत्री के समय और उनसे मिले मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया। हालांकि मुलाकात में किसी राजनीतिक जिम्मेदारी या भविष्य की रणनीति को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं हुई है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    राघव चड्ढा पहले आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं और पंजाब की राजनीति में पार्टी के विस्तार के दौरान उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वह राज्यसभा में पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस साल की शुरुआत में उन्होंने आम आदमी पार्टी से अलग रुख अपनाते हुए कई अन्य सांसदों के साथ बीजेपी का रुख किया था। इसके बाद से ही उनके राजनीतिक भविष्य और बीजेपी में संभावित भूमिका को लेकर चर्चा होती रही है।

    पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी अपनी राजनीतिक गतिविधियों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। ऐसे में राघव चड्ढा की पंजाब की राजनीति में समझ और उनकी शहरी छवि को पार्टी के लिए उपयोगी माना जा रहा है। खास तौर पर अमृतसर, लुधियाना और जालंधर जैसे प्रमुख शहरों में पार्टी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। राघव चड्ढा का जालंधर से पारिवारिक संबंध भी बताया जाता है, जिससे पंजाब की स्थानीय राजनीति में उनकी पहचान को लेकर चर्चा और बढ़ जाती है।

    बीजेपी के सामने पंजाब में कई राजनीतिक चुनौतियां भी हैं। शिरोमणि अकाली दल से अलग राजनीतिक रास्ते पर आगे बढ़ने के बाद पार्टी को विभिन्न सामाजिक और कारोबारी समूहों के बीच अपनी स्थिति मजबूत करनी है। ऐसे में शहरी मतदाताओं, कारोबारी समुदाय और मध्यम वर्ग तक पहुंच बनाने के लिए राघव चड्ढा जैसे चेहरे की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि उनकी संभावित जिम्मेदारी को लेकर अभी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    इस मुलाकात से एक दिन पहले शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। लगातार हो रही इन राजनीतिक बैठकों को पंजाब के आगामी चुनावी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि इन मुलाकातों का अंतिम राजनीतिक असर आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।

    फिलहाल राघव चड्ढा की पीएम मोदी से मुलाकात ने पंजाब की राजनीति में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है। बीजेपी में उनकी संभावित भूमिका, चुनावी रणनीति में उनकी भागीदारी और पंजाब के शहरी इलाकों में पार्टी के विस्तार को लेकर अटकलें जारी हैं। यदि पार्टी उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देती है, तो इसका असर राज्य के आगामी राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।

  • उत्तर प्रदेश में एनडीए की रणनीति में चिराग पासवान की भूमिका पर चर्चा तेज, अमित शाह से मुलाकात के निकले सियासी मायने

    उत्तर प्रदेश में एनडीए की रणनीति में चिराग पासवान की भूमिका पर चर्चा तेज, अमित शाह से मुलाकात के निकले सियासी मायने


    नई दिल्ली ।
    उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दल जहां अपने संगठन को मजबूत करने की तैयारी में जुटे हैं, वहीं लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास ने भी उत्तर प्रदेश में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। इसी क्रम में पार्टी के जमुई से सांसद और उत्तर प्रदेश प्रभारी अरुण भारती ने शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस बैठक के बाद यूपी की राजनीति में संभावित गठबंधन और चुनावी रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    अरुण भारती और अमित शाह की मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और आगामी विधानसभा चुनाव से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की बात सामने आई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, एलजेपी रामविलास की ओर से उत्तर प्रदेश में चलाए जा रहे पंडित-पासी-पासवान नारे का भी उल्लेख हुआ। बताया जा रहा है कि अमित शाह ने पार्टी की इस राजनीतिक पहल की सराहना की। इससे संकेत मिलता है कि एलजेपी रामविलास उत्तर प्रदेश में अपने सामाजिक आधार को विस्तार देने की रणनीति पर काम कर रही है।

    केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की अगुवाई वाली लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने संगठन विस्तार के साथ अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने की रणनीति अपनाई है। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी की गतिविधियों में आई तेजी ने राज्य की राजनीति में उसकी संभावित भूमिका को लेकर चर्चा शुरू कर दी है।

    एलजेपी रामविलास पहले ही उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है। पार्टी की इस घोषणा के बाद संगठन को मजबूत करने और चुनावी आधार तैयार करने की कोशिशें जारी हैं। ऐसे में अमित शाह और अरुण भारती की मुलाकात को लेकर कई तरह के राजनीतिक संकेत निकाले जा रहे हैं। हालांकि, इस बैठक के बाद बीजेपी और एलजेपी रामविलास के बीच किसी औपचारिक चुनावी समझौते की घोषणा नहीं हुई है।

    मुलाकात के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी और एलजेपी रामविलास के बीच सीटों को लेकर तालमेल हो सकता है। राजनीतिक हलकों में संभावना जताई जा रही है कि दोनों दल चुनावी रणनीति और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए संभावित सहयोग पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, फिलहाल सीट बंटवारे या गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।

    उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जातीय और सामाजिक समीकरण चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। एलजेपी रामविलास की ओर से पंडित-पासी-पासवान नारे के जरिए अलग-अलग सामाजिक वर्गों को जोड़ने की कोशिश को इसी रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। पार्टी यदि अपना संगठनात्मक आधार मजबूत करने में सफल रहती है तो वह आगामी चुनाव में एनडीए के सामाजिक समीकरण को प्रभावित करने वाली भूमिका निभा सकती है।

    चिराग पासवान की राष्ट्रीय राजनीति में एनडीए के साथ सक्रिय भूमिका रही है और ऐसे में उत्तर प्रदेश में उनकी पार्टी की बढ़ती गतिविधियों को बीजेपी के लिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, उत्तर प्रदेश में पार्टी की वास्तविक चुनावी ताकत और संभावित सीटों को लेकर तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है। इसके लिए संगठन विस्तार और जमीनी सक्रियता का असर देखना महत्वपूर्ण होगा।

    अरुण भारती की अमित शाह से हुई मुलाकात इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि उत्तर प्रदेश चुनाव में अभी समय है, लेकिन प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। आने वाले महीनों में एलजेपी रामविलास की प्रदेश में सक्रियता, बीजेपी के साथ उसके संबंध और सीटों को लेकर होने वाली बातचीत से तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल इस मुलाकात ने इतना जरूर संकेत दिया है कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए के भीतर संभावित राजनीतिक तालमेल को लेकर गतिविधियां बढ़ रही हैं।

  • रांची में JPSC-JSSC छात्रों और सरकार के बीच बातचीत सकारात्मक, मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रखने का फैसला

    रांची में JPSC-JSSC छात्रों और सरकार के बीच बातचीत सकारात्मक, मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रखने का फैसला

    नई दिल्ली । झारखंड की राजधानी रांची में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन शनिवार को 15वें दिन भी जारी रहा। जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के आरोपों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। शुक्रवार रात से शुरू हुई बातचीत शनिवार को भी आगे बढ़ी। छात्रों ने बैठक को सकारात्मक बताया, लेकिन साफ कर दिया कि अभी उनकी किसी प्रमुख मांग पर ठोस फैसला नहीं हुआ है। ऐसे में आंदोलन समाप्त करने का निर्णय नहीं लिया गया है।

    देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले JPSC-JSSC न्याय गुट के आठ छात्रों ने राज्य अतिथि गृह में सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। जानकारी के अनुसार बैठक शनिवार सुबह करीब 11 बजकर 20 मिनट पर शुरू हुई। बातचीत के बाद छात्र वापस प्रदर्शन स्थल पर लौट आए। छात्र नेताओं ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत का माहौल सकारात्मक रहा और उनकी बातों को सुना गया, लेकिन केवल बातचीत से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उनका कहना है कि उन्हें आश्वासन के बजाय अपनी मांगों पर स्पष्ट और ठोस कार्रवाई चाहिए।

    छात्रों की प्रमुख मांग 14वीं जेपीएससी परीक्षा को लेकर है। प्रदर्शनकारी इस परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। छात्रों ने जांच के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी या राज्य से बाहर के सेवानिवृत्त हाई कोर्ट न्यायाधीशों की समिति गठित करने की मांग रखी है। इसके अलावा जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग भी आंदोलन का अहम हिस्सा है।

    बातचीत के बाद झारखंड सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार अलग-अलग छात्र समूहों और संबंधित लोगों से लगातार बातचीत करेगी। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों के सुझाव लिए जाएंगे ताकि मामले को समझकर आगे की कार्रवाई की जा सके। सरकार की ओर से लोगों से अपनी बात और सुझाव साझा करने के लिए ईमेल के माध्यम से जानकारी देने की व्यवस्था भी किए जाने की बात सामने आई है।

    छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता उनके भविष्य से सीधे जुड़ी हुई है। इसलिए वे कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच और परीक्षा प्रणाली में सुधार के मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक धरना जारी रहेगा।

    आंदोलनकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि रविवार तक उनकी मांगों पर संतोषजनक फैसला नहीं लिया गया, तो 10 अगस्त को विधानसभा की ओर मार्च किया जाएगा। इससे आने वाले दिनों में आंदोलन के और तेज होने की संभावना बनी हुई है। हालांकि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत शुरू होने से समाधान की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन फिलहाल दोनों पक्षों के बीच प्रमुख मांगों को लेकर गतिरोध कायम है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और क्या बातचीत के जरिए आंदोलन को समाप्त करने का रास्ता निकल पाता है।

  • आज प्रयागराज से राहुल गांधी का यूपी में चुनावी शंखनाद, 2 लाख छात्रों से करेंगे संवाद

    आज प्रयागराज से राहुल गांधी का यूपी में चुनावी शंखनाद, 2 लाख छात्रों से करेंगे संवाद

    प्रयागराज। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार को प्रयागराज से उत्तर प्रदेश में चुनावी अभियान का आगाज करेंगे। वह केपी इंटर कॉलेज मैदान में करीब दो घंटे तक छात्रों से सीधा संवाद करेंगे। कांग्रेस ने इस कार्यक्रम के जरिए पूर्वांचल के युवाओं तक पहुंच बनाने की रणनीति तैयार की है। कार्यक्रम में प्रदेश के करीब 25 जिलों के शहर और जिला अध्यक्षों के साथ कांग्रेस के सभी छह सांसद और कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहेंगे।

    राहुल गांधी शाम 6:30 बजे से रात 8:30 बजे तक छात्रों से संवाद करेंगे। इस दौरान नीट, आरओ/आरआरओ समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, परीक्षाओं में देरी, भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। कांग्रेस के मुताबिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए करीब दो लाख छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।

    स्वराज भवन में नेताओं के साथ करेंगे मंथन
    छात्र संवाद कार्यक्रम से पहले राहुल गांधी अपने पैतृक आवास स्वराज भवन पहुंचेंगे। यहां वह करीब ढाई घंटे रुकेंगे। इस दौरान पार्टी के सांसदों, विधायकों, प्रदेश प्रभारी, सहप्रभारियों और वरिष्ठ नेताओं के साथ आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा करेंगे। कांग्रेस ने प्रयागराज को चुनने के पीछे यहां मौजूद बड़ी छात्र आबादी को भी अहम वजह माना है। राजस्थान और उत्तराखंड के बाद राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के तहत प्रयागराज में यह आयोजन किया जा रहा है।

    प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का बड़ा केंद्र है प्रयागराज
    प्रयागराज में करीब दो लाख छात्र अलग-अलग डेलीगेसियों और हॉस्टलों में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। इनमें आधे से ज्यादा युवा पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से आते हैं। ऐसे में कांग्रेस की नजर इस बड़े युवा वर्ग पर है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय लंबे समय से देश की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। इसके अलावा मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान जैसे प्रमुख संस्थानों में भी देशभर से छात्र पढ़ने आते हैं।

    पॉप सिंगर लश्करी और MC अल्ताफ देंगे प्रस्तुति
    कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक और सांगीतिक प्रस्तुतियों से होगी। जेन-जी की पसंद को ध्यान में रखते हुए पॉप सिंगर लश्करी और एमसी अल्ताफ को प्रस्तुति के लिए बुलाया गया है। आयोजकों के मुताबिक कार्यक्रम में किसी तरह का राजनीतिक भाषण नहीं होगा। राहुल गांधी सीधे छात्रों से संवाद करेंगे और उनके सामने रोजगार, भर्ती परीक्षाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

  • जेकेआरएलएम की पहल से ग्रामीण महिलाएं बन रहीं उद्यमी, स्वयं सहायता समूहों के जरिए रोजगार और आय के बढ़े अवसर

    जेकेआरएलएम की पहल से ग्रामीण महिलाएं बन रहीं उद्यमी, स्वयं सहायता समूहों के जरिए रोजगार और आय के बढ़े अवसर


    नई दिल्ली ।
    जम्मू-कश्मीर के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अवंतीपोरा में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने मिशन के सहयोग से फूड सर्विस एंटरप्राइज स्थापित कर यह साबित किया है कि उचित प्रशिक्षण, संसाधन और संस्थागत सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं सफल उद्यम खड़ा कर सकती हैं। इस पहल के जरिए महिलाओं को सम्मानजनक आय का साधन मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी तैयार हो रहे हैं।

    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन को जम्मू-कश्मीर में जम्मू-कश्मीर ग्रामीण आजीविका मिशन यानी जेकेआरएलएम के नाम से लागू किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना और उनकी आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराना है। अवंतीपोरा में शुरू किया गया फूड सर्विस उद्यम इसी प्रयास का एक उदाहरण है, जहां महिलाओं ने आजीविका के पारंपरिक साधनों से आगे बढ़कर कारोबार की दिशा में कदम रखा है।

    ग्रामीण विकास विभाग के सचिव एजाज असद ने बताया कि जेकेआरएलएम को ‘उम्मीद’ के नाम से भी जाना जाता है और इस पहल ने ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक अवसरों का विस्तार किया है। उन्होंने कहा कि पुलवामा जिले में फूड सर्विस एंटरप्राइज शुरू किया गया है। इसके लिए राष्ट्रीय संसाधन संगठन ‘कुडुम्बश्री’ के साथ समझौता किया गया है। कुडुम्बश्री को फूड सर्विस से जुड़े उद्यमों को स्थापित करने और संचालित करने का अनुभव है।

    अधिकारियों के अनुसार पुलवामा सहित जम्मू-कश्मीर के 12 अन्य जिलों में भी इस तरह के उद्यम शुरू किए जा चुके हैं। योजना का लक्ष्य आने वाले समय में प्रदेश के सभी 20 जिलों तक इस मॉडल का विस्तार करना है। इन उद्यमों की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को दी जाएगी। इसका उद्देश्य महिलाओं को केवल समूह आधारित गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्थायी आय और कारोबार के अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें।

    जेकेआरएलएम की महिला अधिकारी शाबरा शर्मा ने बताया कि मिशन का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। अवंतीपोरा में स्थापित फूड सर्विस एंटरप्राइज इसी सोच के तहत विकसित किया गया है। महिलाओं को उद्यम संचालन से जोड़कर उन्हें व्यावसायिक अनुभव हासिल करने और अपनी आय बढ़ाने का अवसर दिया जा रहा है।

    ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन की समस्या भी महिलाओं के आर्थिक अवसरों में बाधा बनती है। इसे ध्यान में रखते हुए योजना के तहत जरूरतमंद महिलाओं को वाहनों की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में करीब 96 हजार स्वयं सहायता समूह हैं, जिनसे लगभग साढ़े आठ लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन समूहों के जरिए महिलाओं को सामूहिक रूप से आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और उन्हें उद्यमिता की ओर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। अवंतीपोरा का फूड सर्विस उद्यम इसी बदलाव की तस्वीर पेश करता है, जहां ग्रामीण महिलाएं अब केवल आजीविका चलाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने कारोबार को आगे बढ़ाने और दूसरों के लिए रोजगार पैदा करने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही हैं।