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  • 23 साल की अस्मी ने बदली बार काउंसिल की तस्वीर, निर्विरोध जीत के साथ महिलाओं के प्रतिनिधित्व में बना नया रिकॉर्ड

    23 साल की अस्मी ने बदली बार काउंसिल की तस्वीर, निर्विरोध जीत के साथ महिलाओं के प्रतिनिधित्व में बना नया रिकॉर्ड


    नई दिल्ली। कानून की दुनिया में युवा पीढ़ी की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और इसी कड़ी में 23 साल की अस्मी ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर इतिहास रच दिया है। अस्मी को पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल का सदस्य निर्विरोध चुना गया है। उनकी इस जीत को कानूनी क्षेत्र में नई पीढ़ी की बढ़ती भागीदारी के तौर पर देखा जा रहा है। इतनी कम उम्र में इस महत्वपूर्ण पद तक पहुंचकर अस्मी ने न केवल अपनी पहचान बनाई है बल्कि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा पेश की है जो कानून के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। उनकी जीत इसलिए भी खास है क्योंकि वह देश के किसी भी राज्य बार काउंसिल की सबसे युवा सदस्य बन गई हैं और जेन-जी पीढ़ी से इस पद पर पहुंचने वाली पहली सदस्य बताई जा रही हैं।

    रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को रिटर्निंग ऑफिसर प्रदीप परमार ने अस्मी के निर्विरोध निर्वाचन की आधिकारिक घोषणा की। यह पद पहले मिंदरजीत यादव के पास था लेकिन पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में उनकी नियुक्ति होने के बाद यह स्थान खाली हो गया था। इसके बाद इस पद को भरने के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हुई। अस्मी ने चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। सोमवार 26 अक्टूबर को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख तक किसी अन्य उम्मीदवार ने अपना पर्चा दाखिल नहीं किया। ऐसे में चुनावी मुकाबले की स्थिति नहीं बनी और मंगलवार को उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।

    अस्मी की यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उनके चुने जाने के बाद पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल में महिला सदस्यों का प्रतिनिधित्व देश के राज्य बार काउंसिलों के मुकाबले सबसे अधिक हो गया है। कानूनी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में इसे अहम कदम माना जा रहा है। लंबे समय तक कानून के क्षेत्र में वरिष्ठ और अनुभवी लोगों का प्रभाव अधिक रहा है लेकिन अब युवा वकील भी अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। अस्मी की सफलता इस बदलाव की एक उल्लेखनीय मिसाल बनकर सामने आई है।

    उनके निर्वाचन के बाद बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा के अध्यक्ष अमित राणा और उपाध्यक्ष शर्मिला शर्मा समेत अन्य सदस्यों ने उन्हें बधाई दी। अस्मी की जीत से युवा वकीलों के बीच भी उत्साह बढ़ने की उम्मीद है। बार काउंसिल जैसे संस्थान कानूनी पेशे से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में भूमिका निभाते हैं और वकीलों के हितों तथा पेशेवर व्यवस्था से जुड़े विषयों पर काम करते हैं। ऐसे में कम उम्र में इस संस्था का सदस्य बनना एक बड़ी जिम्मेदारी भी है।

    अस्मी की सफलता यह संदेश देती है कि किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए उम्र से ज्यादा महत्व योग्यता और अवसर का होता है। उनकी उपलब्धि से उन युवाओं को प्रेरणा मिल सकती है जो कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद पेशेवर क्षेत्र में अपनी जगह बनाना चाहते हैं। हालांकि इस नई जिम्मेदारी के साथ उनसे उम्मीदें भी बढ़ेंगी। अब देखना होगा कि वह बार काउंसिल में अपनी भूमिका निभाते हुए युवा वकीलों की जरूरतों और कानूनी पेशे से जुड़े मुद्दों को किस तरह सामने रखती हैं। फिलहाल उनकी निर्विरोध जीत ने उन्हें देश की कानूनी बिरादरी में एक खास पहचान दिला दी है।

  • ग्रेटर नोएडा के PNB में करोड़ों की FD गायब होने का आरोप, मैनेजर समेत 5 कर्मचारी सस्पेंड

    ग्रेटर नोएडा के PNB में करोड़ों की FD गायब होने का आरोप, मैनेजर समेत 5 कर्मचारी सस्पेंड


    ग्रेटर नोएडा। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की सेक्टर पाई-1 शाखा में कई खाताधारकों की करोड़ों रुपये की जमा रकम कथित तौर पर गायब होने का मामला सामने आया है। आरोप है कि खाताधारकों की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) समय से पहले तोड़कर रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी गई। मामले में अब तक 16 लोग पुलिस से शिकायत कर चुके हैं। बैंक प्रबंधन ने शाखा प्रबंधक समेत पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है, जबकि पुलिस और बैंक की एंटी करप्शन टीम मामले की जांच कर रही हैं।

    खाते में 94 लाख रुपये थे, बचे सिर्फ 16 हजार

    मामले का खुलासा ग्रेटर नोएडा के बिरोंडी गांव के रहने वाले गौतम की शिकायत के बाद हुआ। गौतम के मुताबिक, उनके पिता का खाता सेक्टर पाई-1 स्थित PNB शाखा में है। परिवार को 50 हजार रुपये की जरूरत थी। चेकबुक नहीं होने के कारण वह पैसे निकालने के लिए बैंक पहुंचे और निर्धारित प्रक्रिया के तहत निकासी फॉर्म भरकर कर्मचारियों को दिया।

    गौतम का आरोप है कि बैंक कर्मचारियों ने खाते में पर्याप्त रकम नहीं होने की बात कही। इसके बाद जब उन्होंने खाते की जानकारी ली तो पता चला कि उसमें करीब 94 लाख रुपये होने के बावजूद सिर्फ 16 हजार रुपये बचे हैं। इस जानकारी के बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की। गौतम के अनुसार, बैंक अधिकारियों ने उन्हें रकम वापस दिलाने का आश्वासन दिया है।

    जमीन अधिग्रहण के मुआवजे के 1.29 करोड़ रुपये भी गायब होने का आरोप

    एक अन्य खाताधारक ने बताया कि उनकी मां के खाते में जेवर एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण के मुआवजे के रूप में करीब 1 करोड़ 29 लाख रुपये आए थे। परिवार ने जरूरत के अनुसार इसमें से लगभग 10 से 12 लाख रुपये निकाले थे। इसके बाद खाते में करीब 1 करोड़ 18 लाख रुपये शेष रहने चाहिए थे।

    खाताधारक के मुताबिक, जब परिवार को रकम की जरूरत पड़ी तो खाते में एक रुपया भी नहीं मिला। इसी दौरान परिचितों के जरिए उन्हें बैंक में कथित गड़बड़ी की जानकारी हुई। उनका कहना है कि बैंक की ओर से 10 से 15 दिन के भीतर रकम लौटाने का आश्वासन दिया गया है। हालांकि, परिवार पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है।

    पांच कर्मचारी निलंबित, शाखा में नया स्टाफ तैनात

    मामला सामने आने के बाद PNB के वरिष्ठ अधिकारी शाखा पहुंचे और खाताधारकों से बातचीत कर उन्हें आश्वासन दिया। बैंक प्रबंधन ने शाखा प्रबंधक समेत पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही शाखा में नए कर्मचारियों की तैनाती की गई है।

    बैंक स्तर पर यह जांच की जा रही है कि कथित गड़बड़ी कैसे हुई और इसमें किन कर्मचारियों की भूमिका रही। हालांकि, बैंक की ओर से अब तक मामले में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि कुल कितने खाताधारक प्रभावित हुए हैं, कितनी रकम का लेनदेन संदिग्ध है और पैसा किन खातों में ट्रांसफर किया गया।

    पुलिस ने ACP ग्रेटर नोएडा को सौंपी जांच

    नोएडा पुलिस कमिश्नरेट के प्रवक्ता के अनुसार, थाना बीटा-2 क्षेत्र में स्थित बैंक से जुड़ी शिकायतों के मामले में बैंक प्रबंधन ने खाताधारकों को समाधान का आश्वासन दिया है। प्रकरण में शाखा प्रबंधक सहित कई कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच और आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के लिए एसीपी ग्रेटर नोएडा को निर्देश दिए हैं।

    पुलिस के मुताबिक, अब तक 16 लोग शिकायत दे चुके हैं। फिलहाल शिकायतों के आधार पर जांच की जा रही है। जांच में सामने आएगा कि खाताधारकों की रकम किस तरह निकाली गई या दूसरे खातों में ट्रांसफर की गई और कथित गड़बड़ी में किन लोगों की भूमिका थी।

  • छत्तीसगढ़ में कारोबारी नितिन डागा और गुलशन बघेल के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी, दस्तावेजों की जांच जारी

    छत्तीसगढ़ में कारोबारी नितिन डागा और गुलशन बघेल के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी, दस्तावेजों की जांच जारी

    नई दिल्ली । छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने रायपुर और दुर्ग में कारोबारी नितिन डागा तथा बघेल्स कॉर्पोरेट प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक गुलशन बघेल के ठिकानों पर छापेमारी की। अधिकारियों ने दोनों स्थानों पर पहुंचकर दस्तावेजों की जांच शुरू की। रायपुर में नितिन डागा के आवास पर सुबह करीब चार बजे टीम पहुंची, जबकि दुर्ग की ऋषभ कॉलोनी में गुलशन बघेल के घर भी कार्रवाई की गई। फिलहाल, जांच एजेंसी की ओर से छापेमारी के कारण और संबंधित मामले को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    रायपुर में नितिन डागा के आवास पर जांच

    जानकारी के अनुसार, ईडी की टीम रायपुर के पंडरी क्षेत्र स्थित रवि नगर के सुशील विला में कारोबारी नितिन डागा के घर पहुंची। अधिकारियों के दो गाड़ियों से वहां आने की जानकारी सामने आई है। टीम ने आवास के भीतर दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की। नितिन डागा का कारोबार ज्वेलरी और जमीन से जुड़ा बताया जाता है।

    हालांकि, उनके आवास पर की गई कार्रवाई किस मामले से संबंधित है, इसका आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है। जांच एजेंसी की ओर से छापेमारी के उद्देश्य, किसी संभावित अनियमितता या जांच के दायरे को लेकर फिलहाल विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। ऐसे में कार्रवाई के पीछे की वजह की पुष्टि आधिकारिक बयान आने के बाद ही हो सकेगी।

    दुर्ग में गुलशन बघेल के घर भी पहुंची टीम

    दुर्ग की ऋषभ कॉलोनी में बघेल्स कॉर्पोरेट प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक गुलशन बघेल के आवास पर भी ईडी की टीम ने जांच की। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दो गाड़ियों से पहुंचे दल में 10 से अधिक अधिकारी शामिल थे। अधिकारियों ने यहां भी दस्तावेजों की पड़ताल की।

    इस कार्रवाई को भारतमाला परियोजना से जुड़े मामले से संबंधित होने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन जांच एजेंसी ने इसकी पुष्टि नहीं की है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों स्थानों पर की गई कार्रवाई एक ही मामले से जुड़ी है या अलग-अलग जांच के तहत की गई है। किसी संभावित वित्तीय अनियमितता या अन्य आरोप के संबंध में भी आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है।

    कौन हैं गुलशन बघेल?

    गुलशन बघेल बघेल्स कॉर्पोरेट प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक बताए जाते हैं। कंपनी भवन निर्माण, सड़क निर्माण, अर्थवर्क, निर्माण सामग्री की ढुलाई और परिवहन सेवाओं से जुड़े कार्य करती है। कंपनी सरकारी और निजी क्षेत्र की निर्माण परियोजनाओं में भी काम करती है। उनके आवास पर ईडी की कार्रवाई के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही जांच के दायरे को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    पहले भी ठगी के आरोपों को लेकर आए थे चर्चा में

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब छह साल पहले गुलशन बघेल पर खुद को छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का भतीजा बताकर सरकारी नौकरी दिलाने का दावा करने और एक महिला से ठगी करने के आरोप लगे थे। उस मामले में पुलिस ने उन्हें पकड़ा था। हालांकि, उस पुराने प्रकरण और मौजूदा ईडी कार्रवाई के बीच किसी संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    फिलहाल, रायपुर और दुर्ग में जारी जांच के संबंध में कई अहम सवालों के जवाब सामने आना बाकी है। ईडी की ओर से कार्रवाई के कारण, जांच के विषय और दस्तावेजों की पड़ताल से जुड़े निष्कर्षों की आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • खाद्य सुरक्षा पर सवाल, देश में 1.85 लाख नमूने फेल, राजस्थान में सिर्फ 31 मामलों में दोषियों को सजा

    खाद्य सुरक्षा पर सवाल, देश में 1.85 लाख नमूने फेल, राजस्थान में सिर्फ 31 मामलों में दोषियों को सजा

    नई दिल्ली ।देश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट रोकने के लिए की जा रही कार्रवाई के आंकड़े खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती दिखाते हैं। वर्ष 2025-26 में देशभर में 2,23,808 खाद्य नमूनों की जांच की गई। इनमें 40,023 नमूने तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके बावजूद दोषियों को सजा मिलने वाले मामलों की संख्या 1,918 रही। यानी जांच में खामियां सामने आने के मुकाबले सजा तक पहुंचने वाले मामले काफी कम हैं।

    पिछले पांच वर्षों के आंकड़े भी इसी स्थिति की ओर इशारा करते हैं। वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच देशभर में 8.86 लाख खाद्य नमूनों की जांच हुई। इनमें 1,85,780 नमूने फेल पाए गए। इन मामलों में 1,39,507 का निपटारा जुर्माना लगाकर किया गया, जबकि केवल 6,203 मामलों में दोषियों को सजा सुनाई गई। इससे स्पष्ट होता है कि खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई के अलग-अलग परिणाम सामने आए हैं।

    सजा की दर में पिछले वर्षों के दौरान कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन यह अब भी पांच प्रतिशत से कम है। वर्ष 2021-22 में 32,935 नमूने फेल हुए और 671 मामलों में सजा हुई। अगले वर्ष 44,626 नमूनों के फेल होने पर 1,188 मामलों में दोषियों को सजा मिली। वर्ष 2023-24 में सजा की दर 3.4 प्रतिशत और 2024-25 में 3.7 प्रतिशत रही। वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई।

    राजस्थान के आंकड़े विशेष रूप से ध्यान खींचते हैं। वर्ष 2025-26 में राज्य में 17,325 खाद्य नमूनों की जांच की गई, जिनमें 4,594 नमूने फेल पाए गए। यह कुल जांचे गए नमूनों का 26.5 प्रतिशत है। फेल नमूनों की संख्या के मामले में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर रहा। हालांकि, राज्य में केवल 31 मामलों में दोषियों को सजा मिली। फेल नमूनों की संख्या के मुकाबले यह दर एक प्रतिशत से भी कम है।

    मध्य प्रदेश में भी स्थिति में सुधार की जरूरत दिखाई देती है। वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य में फेल हुए खाद्य नमूनों के करीब चार प्रतिशत मामलों में ही सजा हुई। यह राष्ट्रीय औसत 4.8 प्रतिशत से कम है। ऐसे में राज्य में खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच, कानूनी प्रक्रिया और दोषियों को सजा दिलाने की व्यवस्था पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।

    छत्तीसगढ़ में इसी अवधि के दौरान 2,065 खाद्य नमूनों की जांच हुई। इनमें 214 नमूने फेल पाए गए, जो कुल नमूनों का लगभग 10.4 प्रतिशत है। हालांकि, नमूनों के फेल होने की दर अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी आवश्यक बनी रहती है।

    दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में खाद्य नमूनों के फेल होने का आंकड़ा काफी अधिक रहा। वर्ष 2025-26 में वहां 39,519 नमूनों की जांच की गई, जिनमें 20,427 फेल मिले। यह कुल नमूनों का 51.7 प्रतिशत है। इसके बावजूद राज्य में 342 मामलों में ही सजा हुई। हरियाणा में 31 प्रतिशत और झारखंड में 27.8 प्रतिशत नमूने फेल हुए। महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 17.4 प्रतिशत और पंजाब में 13.2 प्रतिशत रहा।

    कुछ राज्यों में दोषियों को सजा मिलने की दर बेहतर दर्ज की गई। तमिलनाडु में 3,984 फेल नमूनों के मुकाबले 857 मामलों में सजा हुई, जबकि केरल में 1,863 फेल नमूनों के मुकाबले 330 मामलों में दोषियों को सजा मिली। इसके विपरीत, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, झारखंड, गोवा, असम, बिहार और पुडुचेरी में दिए गए आंकड़ों के अनुसार किसी मामले में सजा दर्ज नहीं हुई।

    दूध और डेयरी उत्पादों की जांच भी चिंता का विषय है। वर्ष 2025-26 में इनके 39,351 नमूनों की जांच की गई, जिनमें 14,668 फेल मिले। यानी लगभग 37.3 प्रतिशत नमूने तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। दूध रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तु है, इसलिए इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

    खाद्य सुरक्षा कानून, 2006 के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने और जेल का प्रावधान है। असुरक्षित खाद्य पदार्थ से गंभीर नुकसान होने पर छह साल तक की कैद और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि असुरक्षित भोजन से किसी की मौत होती है, तो उम्रकैद और कम से कम 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।

    हालांकि, हर फेल नमूना मिलावट का मामला नहीं होता। इसमें असुरक्षित खाद्य पदार्थ, निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले उत्पाद और गलत लेबल वाले सामान भी शामिल हो सकते हैं। सरकार के मुताबिक, करीब 98 प्रतिशत खाद्य कारोबारी राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

    खाद्य पदार्थों की निगरानी के लिए वर्ष 2025-26 में देशभर में 5,20,566 निरीक्षण किए गए। वर्ष 2024-25 में 4,01,391 और 2023-24 में 3,57,072 निरीक्षण हुए थे। पिछले पांच वर्षों में 4,461 लाइसेंस निलंबित और 11,493 लाइसेंस रद्द किए गए। इन आंकड़ों के बीच सबसे अहम चुनौती यह है कि जांच में खामी मिलने के बाद मामलों का प्रभावी निपटारा हो और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ समय पर कानूनी कार्रवाई हो।

  • राहुल गांधी की संपत्ति मामले में CJI सूर्यकांत की वकील को फटकार, पूछा- क्या मीडिया का ध्यान खींचने के लिए दायर की याचिका?

    राहुल गांधी की संपत्ति मामले में CJI सूर्यकांत की वकील को फटकार, पूछा- क्या मीडिया का ध्यान खींचने के लिए दायर की याचिका?

    नई दिल्ली ।कांग्रेस नेता राहुल गांधी से जुड़े कथित आय से अधिक संपत्ति के मामले में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता पक्ष के वकील को फटकार लगाई। अदालत ने मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराने की मांग पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या याचिका दाखिल करने का उद्देश्य केवल मीडिया का ध्यान आकर्षित करना है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मुद्दे को उठाने के पीछे कोई स्पष्ट आधार नजर नहीं आता और दलील में पर्याप्त दम भी नहीं है।

    सुनवाई के दौरान वकील ने राहुल गांधी के एक हालिया बयान का हवाला दिया। उनका दावा था कि राहुल गांधी ने एक कार्यक्रम में कहा था कि वह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के 200 अधिकारियों के संपर्क में हैं। इसी बयान के आधार पर वकील ने सुप्रीम कोर्ट से मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की मांग की।

    इस दलील पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सवाल किया कि क्या इस मुद्दे पर किसी न्यूज चैनल से सलाह ली गई है। उन्होंने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि मामले को उठाने का उद्देश्य मीडिया का ध्यान आकर्षित करना है। अदालत की इस टिप्पणी से स्पष्ट हुआ कि वह मामले की सुनवाई की मांग के पीछे प्रस्तुत आधार की पर्याप्तता को लेकर संतुष्ट नहीं थी।

    यह विवाद राहुल गांधी की संपत्ति की जांच से संबंधित उस मामले से जुड़ा है, जिसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने मई 2026 में सीबीआई और ईडी को जांच करने का आदेश दिया था। इसके बाद राहुल गांधी ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने इस मामले को दिल्ली हाई कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग भी की थी।

    अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। साथ ही अदालत ने शिकायतकर्ता, सीबीआई और ईडी से जवाब मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों को हाई कोर्ट के समक्ष कोई रिपोर्ट दाखिल नहीं करने का निर्देश भी दिया था। इस रोक के कारण हाई कोर्ट के आदेश के तहत आगे की कार्रवाई पर अंतरिम स्थिति बनी हुई है।

    मामले की शुरुआत कर्नाटक के भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर की शिकायत से हुई थी। उन्होंने राहुल गांधी की संपत्ति को लेकर कई आरोप लगाए थे। शिकायत में लगाए गए आरोपों और संपत्ति की जांच से संबंधित मांगों के आधार पर यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में पहुंचा।

    राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इसके बाद शीर्ष अदालत ने मामले में संबंधित पक्षों से जवाब मांगा और जांच के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई। अब सुनवाई के दौरान याचिका को सूचीबद्ध कराने की मांग और उसके समर्थन में दिए गए तर्क चर्चा में रहे।

    संपत्ति से जुड़े आरोपों के मामले में अदालत की कार्यवाही और जांच एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोप अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं हैं। मामले में आगे की स्थिति संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत के आगामी आदेशों पर निर्भर करेगी।

  • यूपी कैबिनेट के 22 प्रस्तावों को मंजूरी, मैनपुरी सैनिक स्कूल को मुफ्त जमीन और शिक्षा कर्मचारियों को कैशलेस इलाज

    यूपी कैबिनेट के 22 प्रस्तावों को मंजूरी, मैनपुरी सैनिक स्कूल को मुफ्त जमीन और शिक्षा कर्मचारियों को कैशलेस इलाज

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों में शिक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों के स्वास्थ्य और प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने से जुड़े विषय शामिल हैं। बैठक में मैनपुरी स्थित सैनिक स्कूल के लिए 9.524 हेक्टेयर जमीन मुफ्त हस्तांतरित करने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। इसके अलावा माध्यमिक, संस्कृत और बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने से संबंधित प्रस्ताव भी मंजूर किए गए। प्रदेश की ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर यानी जीसीसी नीति-2024 के तहत उच्चस्तरीय समिति की संस्तुतियों को भी स्वीकृति दी गई।

    मैनपुरी सैनिक स्कूल को 9.524 हेक्टेयर जमीन मुफ्त मिलेगी
    कैबिनेट के फैसले के अनुसार, मैनपुरी स्थित सैनिक स्कूल को 9.524 हेक्टेयर भूमि निःशुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस निर्णय के तहत स्कूल के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। सैनिक स्कूलों का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ अनुशासन और रक्षा सेवाओं में करियर बनाने के लिए तैयार करना है। मैनपुरी के सैनिक स्कूल को भूमि हस्तांतरित करने का फैसला इसी संस्थान से संबंधित व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

    शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा

    कैबिनेट बैठक में शिक्षा विभाग के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के स्वास्थ्य से जुड़ा प्रस्ताव भी मंजूर किया गया। इसके तहत माध्यमिक और संस्कृत विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का प्रावधान शामिल है। इस फैसले से संबंधित पात्र कर्मचारियों को इलाज के दौरान निर्धारित व्यवस्था के तहत कैशलेस सुविधा मिल सकेगी।

    बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके आश्रितों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा के दायरे में लाने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इससे कर्मचारियों के परिवारों को भी इस व्यवस्था का लाभ मिल सकेगा। कैशलेस इलाज का उद्देश्य पात्र लाभार्थियों को चिकित्सा खर्च का भुगतान सीधे करने की जरूरत कम करना है। हालांकि, सुविधा के वास्तविक लाभ और उसके इस्तेमाल से संबंधित नियमों का विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।

    जीसीसी नीति-2024 के प्रस्ताव को मंजूरी
    उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर यानी जीसीसी नीति-2024 के तहत उच्चस्तरीय समिति की संस्तुतियों को मंजूरी देने के प्रस्ताव पर भी मुहर लगाई है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर ऐसी इकाइयां होती हैं, जहां कंपनियां तकनीक, वित्त, शोध और दूसरी व्यावसायिक सेवाओं से जुड़े काम करती हैं। इन केंद्रों के माध्यम से कंपनियां अपने विभिन्न व्यावसायिक कार्यों का संचालन और प्रबंधन करती हैं।

    प्रदेश की जीसीसी नीति निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने से संबंधित है। उच्चस्तरीय समिति की संस्तुतियों को मंजूरी मिलने के बाद नीति के तहत संबंधित प्रस्तावों पर आगे की कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, बैठक में स्वीकृत संस्तुतियों के विशिष्ट विवरण और उनसे जुड़ी परियोजनाओं की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

    शिक्षा, स्वास्थ्य और निवेश से जुड़े फैसले

    कैबिनेट बैठक में कुल 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें सैनिक स्कूल मैनपुरी के लिए भूमि हस्तांतरण, शिक्षा विभाग के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा तथा जीसीसी नीति-2024 के तहत उच्चस्तरीय समिति की संस्तुतियां प्रमुख रहीं।

    इन निर्णयों के जरिए सरकार ने शिक्षा संस्थानों से जुड़ी भूमि व्यवस्था, कर्मचारियों के स्वास्थ्य लाभ और निवेश नीति से संबंधित विषयों पर स्वीकृति दी है। मंजूर किए गए प्रस्तावों के क्रियान्वयन और उनसे जुड़े लाभों की विस्तृत जानकारी संबंधित विभागों की आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगी।

  • सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की पेरोल बढ़ाने की याचिका खारिज की, शाम 5 बजे तक जोधपुर जेल में सरेंडर का आदेश

    सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की पेरोल बढ़ाने की याचिका खारिज की, शाम 5 बजे तक जोधपुर जेल में सरेंडर का आदेश

    नई दिल्ली ।सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को मेडिकल आधार पर पेरोल की अवधि बढ़ाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका खारिज करते हुए शाम 5 बजे तक जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। आसाराम राजस्थान में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। अदालत के आदेश के बाद उन्हें निर्धारित समय तक जेल प्रशासन के सामने पेश होना होगा।

    आसाराम को स्वास्थ्य संबंधी कारणों से 20 दिनों की पेरोल दी गई थी, जिसकी अवधि 27 अक्टूबर को समाप्त हो रही थी। उनकी ओर से अदालत में पेरोल आगे बढ़ाने की मांग की गई थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है और वह मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित एक अस्पताल में भर्ती हैं। वकील ने बेहतर इलाज की आवश्यकता का हवाला देते हुए पेरोल की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया, लेकिन अदालत ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया।

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पेरोल की अवधि समाप्त होने के मद्देनजर आसाराम को उसी दिन शाम 5 बजे तक जोधपुर जेल में सरेंडर करने का आदेश दिया। अदालत ने इस मामले में राजस्थान सरकार को भी निर्देश दिए कि जेल में आसाराम के स्वास्थ्य का उचित ध्यान रखा जाए। साथ ही, उनकी जरूरत के अनुसार आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा गया है।

    अदालत के निर्देश का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पेरोल बढ़ाने से इनकार करने के बावजूद जेल में चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। अब आसाराम की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जेल प्रशासन को आवश्यक उपचार की व्यवस्था करनी होगी। हालांकि, मेडिकल आधार पर राहत की मांग को अदालत ने मंजूरी नहीं दी है।

    आसाराम को वर्ष 2018 में राजस्थान के जोधपुर स्थित आश्रम में एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया गया था। अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद से वह जोधपुर जेल में सजा काट रहे हैं। मामले में दोषसिद्धि के बाद उनकी ओर से समय-समय पर स्वास्थ्य और इलाज से जुड़े आधारों पर राहत की मांग की जाती रही है।

    मौजूदा मामले में भी बचाव पक्ष ने स्वास्थ्य की स्थिति को आधार बनाकर पेरोल बढ़ाने की अपील की थी। दलील दी गई कि आसाराम की तबीयत ठीक नहीं है और बेहतर इलाज के लिए उन्हें अतिरिक्त समय की जरूरत है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पेरोल की अवधि आगे बढ़ाने से इनकार करते हुए निर्धारित समय पर जेल लौटने का निर्देश दिया।

    उज्जैन के अस्पताल में भर्ती होने की बात सुनवाई के दौरान आसाराम के वकील ने रखी थी। इसके बावजूद अदालत ने पेरोल बढ़ाने की मांग स्वीकार नहीं की। साथ ही राजस्थान सरकार को निर्देश देकर यह स्पष्ट किया कि जेल में रहने के दौरान उनकी चिकित्सा जरूरतों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

    सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद आसाराम के लिए 27 अक्टूबर को शाम 5 बजे तक जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण करना जरूरी है। वहीं, जेल में उनके स्वास्थ्य की निगरानी और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन की होगी।

  • गैरसैंण में उत्तराखंड विधानसभा का दो दिवसीय सत्र आज से, सरकार पेश करेगी 7,412 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट

    गैरसैंण में उत्तराखंड विधानसभा का दो दिवसीय सत्र आज से, सरकार पेश करेगी 7,412 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट


    नई दिल्ली ।
    उत्तराखंड विधानसभा का दो दिवसीय सत्र मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को गैरसैंण में शुरू हो रहा है। सत्र के पहले दिन राज्य सरकार लगभग 7,412 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश करेगी। इसके अलावा आठ विधेयक सदन में रखे जाने हैं। वित्तीय प्रस्तावों, विधायी कार्यों और जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस होने की संभावना है।

    इस सत्र में राज्य की वित्तीय प्राथमिकताओं और विकास से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान रहने की उम्मीद है। सरकार अनुपूरक बजट के माध्यम से अतिरिक्त वित्तीय प्रावधानों से संबंधित प्रस्ताव सदन के सामने रखेगी। आठ विधेयकों की प्रस्तुति भी कार्यवाही का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। इनके जरिए विभिन्न विधायी विषयों पर सदन में चर्चा और आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    विधानसभा की कार्यवाही के दौरान उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी और पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट को श्रद्धांजलि भी दी जाएगी। सदन में दोनों नेताओं के योगदान को याद किया जाएगा। सत्र के दौरान वित्तीय मामलों के साथ-साथ राज्य के सामाजिक, प्रशासनिक और विकास संबंधी विषयों पर भी विधायकों की ओर से सवाल उठाए जाने की उम्मीद है।

    इस दो दिवसीय सत्र के लिए कुल 31 विधायकों ने 445 सवाल जमा किए हैं। इन सवालों के माध्यम से विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्रों और प्रदेश से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेंगे। प्रश्नों में जनता की समस्याओं और राज्य के विकास से संबंधित विषयों के उठने की संभावना है। सदन में इन सवालों के जवाबों के जरिए सरकार की योजनाओं और संबंधित मामलों पर चर्चा हो सकती है।

    विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूड़ी ने सभी राजनीतिक दलों से सत्र के सुचारू संचालन में सहयोग करने की अपील की है। दो दिन की सीमित अवधि को देखते हुए सदन की कार्यवाही में वित्तीय प्रस्तावों, विधेयकों और विधायकों के सवालों को लेकर महत्वपूर्ण गतिविधियां रहने की उम्मीद है।

    सत्र से पहले सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी कांग्रेस ने अपनी-अपनी रणनीति तैयार करने के लिए बैठकें कीं। दोनों दलों ने उन विषयों पर चर्चा की, जिन्हें वे सदन में उठाना चाहते हैं। इन मुद्दों में शासन, जनकल्याण और राज्य की वित्तीय प्राथमिकताओं से जुड़े विषय शामिल हैं। कांग्रेस कार्य सलाहकार समिति की बैठक में शामिल नहीं हुई।

    सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गैरसैंण में भाजपा विधायक दल की बैठक की अध्यक्षता की थी। बैठक में मंत्रियों और विधायकों ने सत्र की तैयारियों, सदन की कार्यवाही और संभावित मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि बैठक में जनहित, राज्य के विकास और जनकल्याण से संबंधित विषयों पर चर्चा हुई।

    वहीं, कांग्रेस बेरोजगारी, महंगाई, कानून-व्यवस्था और स्थानीय समस्याओं को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। विपक्ष इन मुद्दों को सदन में उठाने के साथ विधानसभा के आसपास विरोध प्रदर्शन करने की योजना भी बना रहा है। ऐसे में सत्र के दौरान सरकार के वित्तीय प्रस्तावों के साथ विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले सवाल भी राजनीतिक गतिविधियों के केंद्र में रहेंगे।

    दो दिवसीय सत्र में अनुपूरक बजट की प्रस्तुति, आठ विधेयकों और 445 सवालों के बीच सरकार तथा विपक्ष की रणनीति पर नजर रहेगी। सदन की कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि निर्धारित समय में किन वित्तीय, विधायी और जनहित के मुद्दों पर चर्चा आगे बढ़ती है।

  • तमिलनाडु में मूसलाधार बारिश से बाढ़ जैसे हालात, सड़कें क्षतिग्रस्त, कई इलाकों में बिजली गुल

    तमिलनाडु में मूसलाधार बारिश से बाढ़ जैसे हालात, सड़कें क्षतिग्रस्त, कई इलाकों में बिजली गुल

    नई दिल्ली । तमिलनाडु के कई जिलों में भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। जगह-जगह सड़कों और घरों में पानी भरने से आवागमन बाधित हुआ है, जबकि कुछ इलाकों में सड़कें क्षतिग्रस्त होने और लंबे समय तक बिजली आपूर्ति ठप रहने की समस्या सामने आई है। लगातार बारिश के कारण लोगों को दैनिक गतिविधियों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच मौसम विभाग ने राज्य के पश्चिमी घाट से लगे जिलों और दक्षिणी हिस्सों में अगले दो दिनों के दौरान कुछ स्थानों पर बारिश होने का अनुमान जताया है।

    तिरुपत्तुर जिले के वायमपट्टू इलाके में भारी बारिश के कारण सड़कें पानी में डूब गईं। जलभराव के बीच वाहन चालकों को आवाजाही करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। पानी से भरे रास्तों के कारण यातायात प्रभावित हुआ और स्थानीय लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में परेशानी हुई।

    शिवगंगा के शहरी क्षेत्रों में भी तेज बारिश दर्ज की गई। यहां बिजली आपूर्ति 10 घंटे से अधिक समय तक बाधित रही। लंबे समय तक बिजली नहीं रहने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। बारिश के कारण पहले से प्रभावित जनजीवन के बीच बिजली गुल रहने से सामान्य कामकाज भी प्रभावित हुआ।

    कोयंबटूर जिले के पुलियामारथुपलायम, सुलूर और वरपट्टी में मूसलाधार बारिश हुई। पुलियामारथुपलायम में बारिश के चलते डामर से बनी एक सड़क क्षतिग्रस्त हो गई। इससे सड़क पर आवागमन प्रभावित हुआ और वहां से गुजरने वाले लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी।

    मयिलादुथुराई जिले के तरंगमबाडी इलाके में भी बारिश का असर देखने को मिला। बारिश के बीच छात्र स्कूल पहुंचे, जिनमें कई बच्चे पूरी तरह भीग गए थे। सुबह के समय खराब मौसम के कारण बच्चों और उनके साथ जाने वाले लोगों को सफर करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

    कोडैकनाल में भारी बारिश से सिल्वर कैस्केड झरने में पानी का बहाव काफी बढ़ गया। वहीं, थोप्पिकनल इलाके में पानी घरों के भीतर तक पहुंच गया। घरों में जलभराव होने से लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हुईं। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश से पैदा हुई चुनौतियों के बीच उदगमंडलम जाने वाली सड़क के भूस्खलन प्रभावित हिस्से को साफ करने और उसकी मरम्मत का काम भी जारी रहा। इस कार्य में सेना के जवान जुटे रहे, ताकि बाधित मार्ग को दोबारा चालू किया जा सके।

    इस बीच मौसम विभाग ने पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ रहे चक्रवात के और तीव्र होकर बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने की आशंका जताई है। विभाग के बुलेटिन के अनुसार, इसके आंध्र प्रदेश के तट पर बापटला और विशाखापत्तनम के बीच यानम के पास पहुंचने और तट से टकराने की संभावना है।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, मंगलवार को तमिलनाडु के पश्चिमी घाट वाले जिलों और दक्षिणी हिस्सों में एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। राज्य के बाकी क्षेत्रों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने की उम्मीद है। बुधवार को पश्चिमी घाट के जिलों में कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश और दक्षिणी तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश होने का अनुमान है।

    राजधानी चेन्नई में मंगलवार को आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों में राज्य में बारिश का दायरा काफी सीमित रह सकता है। हालांकि, अलग-अलग जिलों में बारिश की तीव्रता और स्थानीय परिस्थितियों के कारण लोगों को सतर्क रहने की जरूरत होगी।

  • प्रदूषण जागरूकता अभियान के लिए फीस मांगने वाले सेलिब्रिटीज पर बॉम्बे हाई कोर्ट नाराज, BMC और पुलिस को दिए सख्त निर्देश

    प्रदूषण जागरूकता अभियान के लिए फीस मांगने वाले सेलिब्रिटीज पर बॉम्बे हाई कोर्ट नाराज, BMC और पुलिस को दिए सख्त निर्देश


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र में त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान बढ़ते वायु और ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए चलाए जा रहे प्रयासों के बीच बॉम्बे हाई कोर्ट ने जागरूकता अभियान में सहयोग के लिए फीस मांगने वाले सेलिब्रिटीज पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि प्रदूषण के खिलाफ अभियान में योगदान देने के लिए ऐसे लोगों से संपर्क करने की जरूरत नहीं है, जो इसके बदले भुगतान की मांग करते हैं। पीठ ने उम्मीद जताई कि फिल्मी हस्तियां अपने शहर के प्रति जुड़ाव और सामाजिक जिम्मेदारी दिखाते हुए इस तरह के जनहित अभियान में सहयोग करेंगी।

    सोमवार को सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने अदालत को बताया कि अधिकारियों ने प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए कुछ सेलिब्रिटीज से संपर्क किया था, लेकिन उन्होंने अभियान में शामिल होने के लिए फीस मांगी। इस पर जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की पीठ ने नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि यदि सेलिब्रिटीज अपने ही शहर के प्रति जागरूक नहीं हैं और केवल फीस लेकर अभियान में शामिल होना चाहते हैं, तो यह खेदजनक है।

    पीठ ने यह भी सवाल किया कि जब फिल्मी हस्तियां पुलिस विभाग के कार्यक्रमों में शामिल हो सकती हैं, तो प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता अभियान में सहयोग क्यों नहीं कर सकतीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े संदेशों के प्रचार का खर्च सरकारी खजाने पर नहीं डाला जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण के लिए जारी निर्देशों को लोगों तक पहुंचाने और उनके प्रभावी पालन पर भी चर्चा हुई।

    यह मामला त्योहारों और धार्मिक जुलूसों के दौरान होने वाले वायु तथा ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए अदालत की ओर से स्वत: संज्ञान लेकर शुरू की गई जनहित याचिका से जुड़ा है। हाई कोर्ट ने 22 सितंबर को आदेश दिया था कि त्योहारों के दौरान सार्वजनिक सड़कों और रास्तों पर पटाखे नहीं फोड़े जाएंगे। अदालत ने लेजर लाइट और तेज रोशनी वाली बीम लाइट के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई थी। सुनवाई के दौरान पीठ ने अधिकारियों से पूछा कि गणपति उत्सव और नवरात्रि के समय इन आदेशों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए क्या कदम उठाए गए।

    सुनवाई में शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था का मुद्दा भी उठा। अदालत की सहायता कर रहे एमिकस क्यूरी अस्पी चिनॉय ने प्रशासन की ओर से दाखिल हलफनामों में शिकायतों के लिए समर्पित और रिकॉर्ड की जाने वाली हेल्पलाइन का स्पष्ट विवरण नहीं होने की बात कही। इसके जवाब में बृहन्मुंबई महानगरपालिका की ओर से पेश वकील जोएल कार्लोस ने बताया कि ध्वनि प्रदूषण से जुड़ी शिकायतें 24 घंटे चालू रहने वाली आपदा हेल्पलाइन 1916 पर दर्ज कराई जा सकती हैं।

    अदालत ने मुंबई की बड़ी झुग्गी बस्तियों में प्रदूषण संबंधी नियमों के उल्लंघन पर भी चिंता जताई। पीठ के मुताबिक, इन इलाकों में देर रात तक पटाखे फोड़ने की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे क्षेत्रों में विशेष जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत बताई गई। जस्टिस जीएस कुलकर्णी ने स्पष्ट किया कि अदालत किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है, लेकिन कानून का पालन सभी के लिए जरूरी है। पीठ ने नागरिक अधिकारियों को स्थानीय वार्ड पार्षदों को भी जागरूकता अभियान में सक्रिय रूप से शामिल करने का निर्देश दिया।

    हाई कोर्ट ने BMC, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ निगरानी जारी रखने और नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी। उस दौरान प्रदूषण रोकने और अदालत के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों पर विचार किया जाएगा।