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  • संसद के मॉनसून सत्र से मजबूत हुआ NDA…..दल बदल से INDIA गठबंधन को भारी नुकसान

    संसद के मॉनसून सत्र से मजबूत हुआ NDA…..दल बदल से INDIA गठबंधन को भारी नुकसान


    नई दिल्ली।
    संसद (Parliament) का मॉनसून सत्र (Monsoon Session) शुरू होने वाला है। अब एक ओर जहां दलों की टूट के बाद NDA मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है। वहीं, विपक्षी गठबंधन INDIA का संख्याबल कुछ घट गया है। हालांकि, सत्तारूढ़ एनडीए अब भी दो तिहाई बहुमत से काफी दूर है, लेकिन अगर वह लोकसभा में दो और दलों को साध लेता है, तो इसके काफी करीब पहुंच सकता है। इस नंबरगेम को विस्तार से समझते हैं।

    अगर लोकसभा में सभी 540 मौजूदा सांसद उपस्थित होते हैं और वोट देते हैं, तो दो तिहाई बहुमत के लिए 360 मतों की जरूरत होगी। जब अप्रैल में संविधान संशोधन बिल लाया गया, तब सदन में 548 लोकसभा सांसदों ने वोट डाले थे। इनमें से 298 समर्थन और 230 खिलाफ थे। जबकि, 11 सांसद अनुपस्थित थे। इसके चलते दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा घटकर 352 पर आ गया था।


    दल टूटने के बाद नंबर कहां पहुंचे

    तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया के साथ विलय कर लिया था। ये दल एनडीए को समर्थन दे रहा है और सदन में अलग बैठने का अनुरोध किया है। वहीं, शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों ने NDA में शामिल शिवसेना के साथ हाथ मिला लिया है। इसके चलते गठबंधन 319 पर पहुंच गया है। हालांकि, अब तक 360 बहुमत का आंकड़ा दूर है।


    विपक्ष की ताकत समझें

    लोकसभा चुनाव 2024 के बाद 225 पर पहुंचे INDIA गठबंधन को हाल में हुईं पार्टियों में टूट से बड़ा झटका लगा है। 26 सांसदों के जाने के बाद विपक्ष का लोकसभा में आंकड़ा घटकर 199 पर आ गया है। वहीं, 22 सांसदों वाली द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम ने भी खुद को इस गठबंधन से दूर कर लिया है। दरअसल, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस और डीएमके में दूरी बढ़ गई है।

    INDIA अलायंस में सबसे बड़ा दल 98 सांसदों के साथ कांग्रेस है। वहीं, इसके बाद 37 सांसदों वाली समाजवादी पार्टी है। इस लिस्ट में टूट से पहले टीएमसी तीसरे नंबर पर थी। वहीं, शिवसेना यूबीटी चौथे स्थान पर थी, लेकिन अब आंकड़ा बदल गया है।


    कैसे आंकड़ा पा सकता है एनडीए

    इस मुहिम में 5 निर्दलीय सांसदों की भूमिका अहम हो जाती है। दरअसल, अमृतपाल सिंह और शेख अब्दुल रशीद जेल में हैं। अब अगर एनडीए 4 सांसदों वाली YSRCP का समर्थन हासिल करता है। वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एसपी और डीएमके से कुछ बात बनती है, तो एनडीए को फायदा हो सकता है।

    आसान भाषा में समझें, तो शरद पवार गुट के पास 8 सांसद हैं और डीएमके के पास 22 सदस्य हैं। अगर ये दोनों दल वोटिंग से दूर रहते हैं, तो बहुमत का आंकड़ा 330 पर आ जाएगा। वहीं, निर्दलीय और जगन मोहन रेड्डी की पार्टी की मदद से एनडी 9 वोट और जुटा लेगा, लेकिन इसके बाद भी 2 मतों की और दरकार होगी।

  • मोदी कैबिनेट में जल्द होगा बड़ा फेरबदल…! 6 दिग्गज मंत्री OUT और 9 नए चेहरे हो सकते हैं IN

    मोदी कैबिनेट में जल्द होगा बड़ा फेरबदल…! 6 दिग्गज मंत्री OUT और 9 नए चेहरे हो सकते हैं IN


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) जल्द ही अपनी कैबिनेट का विस्तार (Modi Cabinet Reshuffle) करने जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं के मुताबिक, यह फेरबदल जल्द से जल्द होने की संभावना है। इस बार के कैबिनेट विस्तार में कुछ चौंकाने वाले फैसले देखने को मिल सकते हैं। खराब प्रदर्शन और राजनीतिक समीकरणों के चलते कई दिग्गज मंत्रियों (Veteran Ministers) की विदाई हो सकती है, वहीं कुछ नए और अप्रत्याशित चेहरो को कैबिनेट में जगह मिल सकती है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ अलग-अलग हुई मुलाकातों के बाद इस कवायद को अंतिम रूप दिया जा चुका है।

    सूत्रों की मानें तो इस फेरबदल में कुछ बड़े विभागों के मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। ऐसे करीब आधा दर्जन मंत्री हैं, जिनके नाम पर कैंची चल सकती है। वहीं, एनडीए के सहयोगी सहित 9 नेताओं को पीएम मोदी की नई टीम में जगह मिल सकती है।


    धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री:

    हाल ही में देश भर में हुए NEET पेपर लीक विवाद के बाद से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भारी राजनीतिक दबाव है। माना जा रहा है कि इस विवाद का असर उनकी कुर्सी पर पड़ सकता है। इससे पहले भी यूजीसी और एनसीईआरटी विवाद को लेकर वह विपक्ष के निशाने पर हैं।


    हरदीप सिंह पुरी, पेट्रोलियम मंत्री:

    इन्हें भी कैबिनेट से हटाकर संगठन या किसी अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारी में भेजा जा सकता है। इसके अलावा, जिन मंत्रियों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है या जिन राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव होने हैं वहां के समीकरणों को दुरुस्त करने के लिए कुछ राज्यमंत्रियों की भी छुट्टी की जा सकती है।

    इनके अलावा राज्यसभा चुनाव के जरिए ही भाजपा ने इस बात के संकेत दे दिए हैं कि कई मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। उनमें केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके अलावा अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।


    इन नए चेहरों की हो सकती है सरप्राइज एंट्री
    शक्तिकांत दास (पूर्व गवर्नर, RBI):

    रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर और प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव शक्तिकांत दास का नाम इस रेस में सबसे आगे है। उन्हें सीधे कैबिनेट में लाकर कोई बेहद महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो सौंपा जा सकता है।


    श्रीकांत शिंदे (सांसद, शिवसेना):

    महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन को मजबूत करने और शिवसेना के शिंदे गुट को केंद्र में प्रतिनिधित्व देने के लिए सांसद श्रीकांत शिंदे को मंत्री बनाया जा सकता है।


    अरुण गोविल (सांसद, भाजपा):

    रामायण धारावाहिक के जरिए घर-घर में पहचान बनाने वाले मेरठ के नवनिर्वाचित सांसद अरुण गोविल को भी मोदी टीम में जगह मिल सकती है।

    सूत्रों का कहना है कि ऐसे करीब 9 नाम हैं, जिन्हें नई कैबिनेट विस्तार में जगह मिल सकती है।


    शानदार काम करने वालों का होगा प्रमोशन

    भाजपा के वरिष्ठ नेता अनुराग ठाकुर को आगामी फेरबदल में कोई बड़ी और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी जा सकती है। इसके साथ ही बेहतर काम करने वाले कुछ राज्यमंत्रियों (MoS) को प्रमोट करके स्वतंत्र प्रभार या सीधे कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जा सकता है।


    मंत्रालयों में बड़ा फेरबदल

    चर्चा है कि इस फेरबदल में मंत्रियों के विभागों में भी बड़ा उलटफेर होगा। दिल्ली के सियासी हलकों में चर्चा है कि यदि शक्तिकांत दास की कैबिनेट में एंट्री होती है तो उन्हें देश का नया वित्त मंत्री बनाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में वर्तमान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को धर्मेंद्र प्रधान की जगह शिक्षा मंत्रालय जैसी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।


    चुनाव और क्षेत्रीय समीकरणों पर फोकस

    इस पूरे फेरबदल के पीछे आगामी राज्यों के विधानसभा चुनाव और भविष्य की राजनीतिक बिसात (2029 लोकसभा चुनाव) को मुख्य वजह माना जा रहा है। जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को साधने के लिए इस बार ओडिशा, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों को केंद्रीय मंत्रिमंडल में विशेष तवज्जो मिलने के पूरे आसार हैं।

  • कानपुर से इंदौर जाएगा हिप्पो 'सतीश', 700 किमी के सफर में होगा 20 हजार लीटर पानी खर्च

    कानपुर से इंदौर जाएगा हिप्पो 'सतीश', 700 किमी के सफर में होगा 20 हजार लीटर पानी खर्च


    कानपुर। कानपुर और इंदौर चिड़ियाघरों के बीच जल्द ही एक अनोखा एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम होने जा रहा है। इस योजना के तहत कानपुर चिड़ियाघर को इंदौर से एक शेरनी मिलेगी, जबकि बदले में कानपुर का चर्चित दरियाई घोड़ा ‘सतीश’ इंदौर भेजा जाएगा। खास बात यह है कि करीब 700 किलोमीटर लंबे इस सफर के दौरान हिप्पो की देखभाल के लिए लगभग 20 हजार लीटर पानी की व्यवस्था की गई है।

    10 दिन में पूरा होगा 700 किलोमीटर का सफर
    कानपुर से इंदौर की दूरी करीब 700 किलोमीटर है। नेशनल जू अथॉरिटी के दिशा-निर्देशों के अनुसार वन्यजीवों को ले जाने वाले वाहनों की अधिकतम गति 70 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है। रास्ते में निर्धारित पड़ाव और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए हिप्पो ‘सतीश’ को इंदौर पहुंचने में करीब 10 दिन लगने का अनुमान है।

    दरियाई घोड़े के लिए पानी क्यों है जरूरी?
    विशेषज्ञों के अनुसार, दरियाई घोड़ा अपने जीवन का लगभग 80 प्रतिशत समय पानी में बिताता है। लंबे समय तक धूप और गर्म हवा के संपर्क में रहने से उसकी त्वचा सूख सकती है, फट सकती है और स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसी कारण पूरे सफर के दौरान उसके शरीर को लगातार नम बनाए रखने की विशेष व्यवस्था की गई है।

    पिंजरे के ऊपर लगाए जाएंगे दो बड़े पानी के ड्रम
    इंदौर चिड़ियाघर प्रशासन हिप्पो के परिवहन के लिए विशेष डिजाइन का पिंजरा तैयार कर रहा है। पिंजरे के ऊपर 100-100 लीटर क्षमता वाले दो बड़े पानी के ड्रम लगाए जाएंगे। इन ड्रमों से यात्रा के दौरान लगातार हिप्पो के शरीर पर पानी का छिड़काव किया जाएगा, ताकि उसकी त्वचा में नमी बनी रहे और उसे गर्मी से राहत मिलती रहे।

    रास्ते में तय किए गए विशेष पड़ाव
    यात्रा के दौरान वाहन किन स्थानों पर रुकेगा, इसकी भी पहले से योजना बनाई जा रही है। कानपुर चिड़ियाघर प्रशासन के अनुसार, केवल ऐसे हाईवे ढाबों और पड़ावों का चयन किया जा रहा है जहां पर्याप्त पानी की उपलब्धता हो और गहरे ट्यूबवेल चालू अवस्था में हों।

    हर पड़ाव पर पाइप की मदद से हिप्पो को अच्छी तरह नहलाया जाएगा। साथ ही पिंजरे पर लगे पानी के ड्रमों को भी दोबारा भरा जाएगा। अनुमान है कि पूरी 10 दिन की यात्रा में नहलाने और ड्रम भरने सहित कुल करीब 20 हजार लीटर पानी का उपयोग होगा।

    शेरनी के बदले इंदौर जाएगा ‘सतीश’
    कानपुर चिड़ियाघर प्रशासन के मुताबिक, वहां शेरों की संख्या पर्याप्त है, लेकिन शेरनियों की कमी के कारण प्रजनन कार्यक्रम प्रभावित हो रहा था। दूसरी ओर, इंदौर चिड़ियाघर को एक स्वस्थ दरियाई घोड़े की जरूरत थी।

    कानपुर में एक से अधिक हिप्पो मौजूद हैं, लेकिन इंदौर की टीम ने स्वास्थ्य और व्यवहार के आधार पर ‘सतीश’ को चुना है। दोनों चिड़ियाघरों के बीच एक्सचेंज प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जा चुका है और अब केवल स्थानांतरण की तारीख तय होना बाकी है।

  • मोदी 3.0 के पहले कैबिनेट विस्तार की चर्चा तेज, क्या युवाओं, महिलाओं और OBC को मिलेगा बड़ा प्रतिनिधित्व?

    मोदी 3.0 के पहले कैबिनेट विस्तार की चर्चा तेज, क्या युवाओं, महिलाओं और OBC को मिलेगा बड़ा प्रतिनिधित्व?


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के पहले संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट विस्तार 5 जुलाई या 11 जुलाई के बाद कभी भी हो सकता है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई टीम में किन चेहरों को जगह मिलेगी और किन मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव हो सकता है।

    नई सोशल इंजीनियरिंग पर हो सकता है जोर
    राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए युवाओं, महिलाओं और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को अधिक प्रतिनिधित्व देने की रणनीति अपनाई जा सकती है। माना जा रहा है कि इसके जरिए सरकार विकसित भारत-2047 के विजन, महिला सशक्तिकरण और आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए व्यापक राजनीतिक संदेश देना चाहती है।

    युवा नेतृत्व को मिल सकता है अवसर
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार युवाओं को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते रहे हैं। मौजूदा लोकसभा में 30 वर्ष से कम आयु का एक सांसद, 31 से 40 वर्ष के बीच 15 सांसद और 41 से 50 वर्ष आयु वर्ग के 39 सांसद हैं।

    वर्तमान केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 50 वर्ष या उससे कम आयु के मंत्रियों की हिस्सेदारी लगभग 24 प्रतिशत है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में पहली मोदी सरकार के मंत्रिमंडल की औसत आयु 62 वर्ष थी, जो 2019 में घटकर 60 वर्ष और 2021 के पुनर्गठन के बाद 58 वर्ष रह गई। वर्ष 2024 में भी मंत्रिपरिषद की औसत आयु 58 वर्ष है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार और अधिक युवा सांसदों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।

    क्या महिलाओं की बढ़ेगी भागीदारी?
    प्रधानमंत्री मोदी कई मंचों से महिलाओं को देश की प्रमुख शक्ति बताते रहे हैं। वर्तमान में संसद में एनडीए के 58 महिला सांसद हैं, जबकि केंद्रीय मंत्रिमंडल में केवल सात महिला मंत्री हैं। इनमें दो कैबिनेट मंत्री और पांच राज्य मंत्री शामिल हैं, जो कुल मंत्रियों का लगभग 10 प्रतिशत हैं।

    फिलहाल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, रक्षा खडसे, शोभा करंदलाजे, अनुप्रिया पटेल, सावित्री ठाकुर और निमूबेन बंभानिया मंत्रिपरिषद का हिस्सा हैं। वर्ष 2021 के मंत्रिमंडल विस्तार में महिला मंत्रियों की संख्या 11 तक पहुंची थी, जो अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दों और आगामी राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए इस बार मंत्रिमंडल में नए महिला चेहरों को शामिल किया जा सकता है।

    OBC और SC वर्ग पर भी रह सकती है नजर
    मंत्रिमंडल विस्तार में ओबीसी प्रतिनिधित्व भी प्रमुख मुद्दा माना जा रहा है। विपक्ष लगातार जातिगत जनगणना और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर सरकार को घेरता रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद पिछड़े वर्ग के एक हिस्से में बदले राजनीतिक समीकरणों को भी सरकार ध्यान में रख सकती है।

    वर्तमान मंत्रिपरिषद में 27 मंत्री ओबीसी समुदाय से हैं, जो कुल मंत्रियों का लगभग 38 प्रतिशत हैं। इसके अलावा 10 मंत्री अनुसूचित जाति (एससी), पांच अनुसूचित जनजाति (एसटी) और पांच मंत्री अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं।

    विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश और पंजाब सहित आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए ओबीसी, एससी और महिला नेताओं को अधिक प्रतिनिधित्व मिल सकता है। ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दिए जाने की भी संभावना जताई जा रही है, जो युवा होने के साथ-साथ सामाजिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हों।

    आधिकारिक घोषणा का इंतजार
    हालांकि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। लेकिन राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि प्रदर्शन के आधार पर कुछ मंत्रियों के विभागों में फेरबदल हो सकता है, कुछ नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है और कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव संभव है। अब सभी की नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले फैसले पर टिकी हुई है।

  • चुनावी भाषण मामले में अभिषेक बनर्जी को कोर्ट का निर्देश, 8 जुलाई को देना होगा वॉयस सैंपल

    चुनावी भाषण मामले में अभिषेक बनर्जी को कोर्ट का निर्देश, 8 जुलाई को देना होगा वॉयस सैंपल


    नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी को चुनावी भाषण से जुड़े मामले में अदालत से झटका लगा है। पश्चिम बंगाल की एक अदालत ने उन्हें 8 जुलाई को वॉयस सैंपल देने का निर्देश दिया है। यह आदेश विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए कथित धमकी भरे भाषण की जांच के सिलसिले में जारी किया गया है।

    अप्रैल में दर्ज हुई थी FIR
    यह मामला अप्रैल में दिए गए कथित भाषण से जुड़ा है, जिसके बाद बिधाननगर नॉर्थ थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले की जांच कर रही पुलिस ने अदालत से अभिषेक बनर्जी का वॉयस सैंपल लेने की अनुमति मांगी थी। इस पर उत्तर 24 परगना जिले की अदालत ने उन्हें 8 जुलाई को अदालत में उपस्थित होकर अपनी आवाज का नमूना देने का आदेश दिया।

    मजिस्ट्रेट के सामने लिया जाएगा वॉयस सैंपल
    सूत्रों के अनुसार, सरकारी वकील मोहम्मद सबीर अली ने बताया कि अदालत के निर्देश के मुताबिक अभिषेक बनर्जी बिधाननगर कोर्ट में मजिस्ट्रेट के समक्ष अपना वॉयस सैंपल देंगे। इसके बाद पुलिस जांच को आगे बढ़ाएगी और वॉयस सैंपल का उपयोग साक्ष्यों के सत्यापन के लिए किया जाएगा।

    BNSS की धारा 349 के तहत पुलिस ने मांगी थी अनुमति
    पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 349 के तहत अदालत से वॉयस सैंपल लेने की अनुमति मांगी थी। इस प्रावधान के अनुसार, मजिस्ट्रेट किसी भी व्यक्ति को जांच या आपराधिक मामले की सुनवाई के लिए हस्ताक्षर, लिखावट या वॉयस सैंपल देने का निर्देश दे सकता है। इसी आधार पर अदालत ने यह आदेश पारित किया।

    हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
    अभिषेक बनर्जी ने पुलिस के वॉयस सैंपल संबंधी नोटिस को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने एफआईआर रद्द करने की भी मांग की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने नोटिस पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कोई अंतरिम राहत नहीं दी।

    जस्टिस तीर्थंकर घोष ने यह कहते हुए याचिका दूसरी पीठ को स्थानांतरित कर दी कि इसी प्रकार का मामला पहले से हाईकोर्ट की दूसरी बेंच के समक्ष लंबित है।

    31 जुलाई तक कठोर कार्रवाई से मिली है राहत
    मामले की सुनवाई फिलहाल जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की पीठ के समक्ष चल रही है। अदालत ने 21 मई को अभिषेक बनर्जी को इस एफआईआर के संबंध में 31 जुलाई तक किसी भी कठोर कार्रवाई से अंतरिम राहत प्रदान की थी। हालांकि, वॉयस सैंपल देने के ताजा निर्देश के बाद मामले की जांच अब अगले चरण में प्रवेश करेगी।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: आरोपी लवकुश मिश्रा के घर चल सकता है बुलडोजर, पत्नी को अवैध निर्माण पर नोटिस

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: आरोपी लवकुश मिश्रा के घर चल सकता है बुलडोजर, पत्नी को अवैध निर्माण पर नोटिस


    लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपी लवकुश मिश्रा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) ने उनकी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर बन रही एक इमारत को लेकर नोटिस जारी किया है। प्राधिकरण का कहना है कि प्रारंभिक जांच में निर्माण कार्य में नियमों के उल्लंघन के संकेत मिले हैं। इसलिए एक सप्ताह के भीतर आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगा गया है। निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई, जिसमें ध्वस्तीकरण भी शामिल हो सकता है, की जाएगी।

    प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य स्वीकृत मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। इसके बाद संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर पूछा गया है कि भवन निर्माण के लिए स्वीकृत नक्शा और अन्य आवश्यक अनुमतियां ली गई थीं या नहीं। यदि अनुमति से जुड़े दस्तावेज समयसीमा के भीतर प्रस्तुत नहीं किए गए, तो अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि संबंधित जमीन लवकुश मिश्रा के राम मंदिर कार्यालय में कार्यरत रहने के दौरान उनकी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर खरीदी गई थी। सरकारी अभिलेखों के अनुसार, यह भूमि 16 अक्टूबर 2025 को सोहावल तहसील के मंगसी परगना क्षेत्र में कमल स्वरूप सिंह से खरीदी गई थी।

    रजिस्ट्री के समय इस जमीन का मूल्य 8.8 लाख रुपये दर्ज किया गया था। हालांकि, स्थानीय स्तर पर इसकी वर्तमान बाजार कीमत इससे कहीं अधिक, करीब 25 लाख रुपये बताई जा रही है। इसी भूमि पर निर्माण कार्य चल रहा था, जिसकी वैधता की अब जांच की जा रही है।

    गौरतलब है कि राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले की जांच पहले से जारी है। पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं। इसी क्रम में अब आरोपी से जुड़े निर्माण और संपत्ति संबंधी मामलों की भी जांच की जा रही है।

    फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि नोटिस के जवाब में संबंधित पक्ष क्या स्पष्टीकरण देता है। इसके बाद अयोध्या विकास प्राधिकरण आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।

  • देशभर में लागू हुई नई ग्रामीण रोजगार व्यवस्था, 300 रुपये से कम नहीं मिलेगी मजदूरी, रोजगार गारंटी भी बढ़कर 125 दिन हुई

    देशभर में लागू हुई नई ग्रामीण रोजगार व्यवस्था, 300 रुपये से कम नहीं मिलेगी मजदूरी, रोजगार गारंटी भी बढ़कर 125 दिन हुई

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार और आजीविका को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 1 जुलाई 2026 से VB-G RAM G एक्ट 2025 को पूरे देश में लागू कर दिया है। नई व्यवस्था के लागू होने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी दरों का संशोधन प्रभावी हो गया है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाना, रोजगार के अवसरों का विस्तार करना और विभिन्न राज्यों के बीच मजदूरी में मौजूद असमानता को कम करना है। इस बदलाव को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

    नई व्यवस्था के तहत अब देश में इस योजना के अंतर्गत कार्य करने वाले किसी भी पात्र मजदूर को 300 रुपये प्रतिदिन से कम मजदूरी नहीं मिलेगी। जिन राज्यों में पहले मजदूरी दर इस स्तर से नीचे थी, वहां नई दरें लागू कर दी गई हैं। इससे विशेष रूप से उन राज्यों के श्रमिकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है, जहां अब तक अपेक्षाकृत कम मजदूरी मिलती थी। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण श्रमिकों की आमदनी में सुधार होगा और जीवन स्तर बेहतर बनेगा।

    इस कानून के तहत रोजगार गारंटी की अवधि भी बढ़ा दी गई है। पहले जहां पात्र ग्रामीण परिवारों को सीमित अवधि तक रोजगार की गारंटी मिलती थी, वहीं अब उन्हें वर्ष में 125 दिनों तक मजदूरी आधारित रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि अतिरिक्त रोजगार के अवसर मिलने से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और गांवों में रोजगार की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

    नई मजदूरी व्यवस्था लागू होने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर औसत दैनिक मजदूरी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पहले की तुलना में औसत मजदूरी बढ़ने से लाखों श्रमिकों की मासिक आय में सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में क्रय शक्ति बढ़ेगी, स्थानीय बाजारों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और समग्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

    मजदूरी दरों के पुनर्निर्धारण में विशेष रूप से उन राज्यों को प्राथमिकता दी गई है, जहां पहले मजदूरी अपेक्षाकृत कम थी। पूर्वोत्तर राज्यों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, उत्तराखंड और त्रिपुरा जैसे राज्यों में मजदूरी दरों में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। वहीं जिन राज्यों में पहले से अपेक्षाकृत अधिक मजदूरी मिल रही थी, वहां भी नई दरों के अनुरूप संशोधन किया गया है ताकि सभी क्षेत्रों में संतुलित व्यवस्था बनी रहे।

    सरकार के अनुसार नई मजदूरी दरें वैज्ञानिक और पारदर्शी मानकों के आधार पर निर्धारित की गई हैं। इसमें महंगाई, वार्षिक समीक्षा, क्षेत्रीय परिस्थितियों और आर्थिक संकेतकों को ध्यान में रखते हुए मजदूरी तय की गई है। इससे श्रमिकों को न्यायसंगत भुगतान सुनिश्चित करने के साथ-साथ रोजगार व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है।

    सरकार का विश्वास है कि VB-G RAM G एक्ट ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक आत्मनिर्भरता को नई दिशा देगा। बढ़ी हुई मजदूरी, विस्तारित रोजगार गारंटी और समान अवसरों की व्यवस्था से ग्रामीण परिवारों की आय में स्थायी सुधार होने की उम्मीद है। साथ ही यह कदम गांवों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने, सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने और समावेशी विकास के लक्ष्य को गति देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • प्रवासन नीति को मिली नई दिशा, 26 देशों से 28 साझेदारी समझौते कर भारत ने बढ़ाया वैश्विक सहयोग, जयशंकर ने बताया दीर्घकालिक विजन

    प्रवासन नीति को मिली नई दिशा, 26 देशों से 28 साझेदारी समझौते कर भारत ने बढ़ाया वैश्विक सहयोग, जयशंकर ने बताया दीर्घकालिक विजन


    नई दिल्ली ।
    भारत ने वैश्विक स्तर पर सुरक्षित और व्यवस्थित प्रवासन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 26 देशों के साथ 28 प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी समझौते किए हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि इन समझौतों का उद्देश्य कानूनी और सुरक्षित आवागमन को बढ़ावा देना, कौशल आधारित वैश्विक अवसरों का विस्तार करना तथा अवैध प्रवासन और मानव तस्करी जैसी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटना है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कई अन्य देशों के साथ इसी प्रकार के समझौतों पर बातचीत जारी है।

    मानव संसाधन गतिशीलता से जुड़े एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में मानव संसाधनों की सुरक्षित और व्यवस्थित आवाजाही आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय सहयोग में मानव गतिशीलता को एक महत्वपूर्ण स्तंभ मानता है और इसी सोच के अनुरूप विभिन्न देशों के साथ साझेदारी को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

    जयशंकर ने कहा कि प्रवासन एवं गतिशीलता संबंधी समझौते केवल लोगों के आवागमन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका उद्देश्य प्रतिभा को अवसरों से जोड़ना और देशों की आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराना भी है। उनके अनुसार यदि इन व्यवस्थाओं का प्रभावी संचालन किया जाए तो इससे मूल देश, गंतव्य देश, नियोक्ता, कामगार और स्थानीय समुदाय सभी को समान रूप से लाभ मिलता है।

    विदेश मंत्री ने सुरक्षित, नियमित और कानूनी प्रवास की आवश्यकता पर विशेष बल देते हुए कहा कि इसके लिए द्विपक्षीय सहयोग बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रवासन व्यवस्था को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाए रखने के लिए देशों के बीच समन्वय बढ़ाना समय की जरूरत है। इसी उद्देश्य से भारत विभिन्न देशों के साथ दीर्घकालिक और संतुलित साझेदारी विकसित कर रहा है।

    उन्होंने अवैध प्रवासन, धोखाधड़ी करने वाले एजेंटों, शोषणकारी तौर-तरीकों और मानव तस्करी को वैश्विक स्तर की गंभीर चुनौती बताया। उनके अनुसार इस प्रकार की गतिविधियां न केवल कानूनी प्रवासन व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं, बल्कि हजारों लोगों को गंभीर जोखिम में भी डाल देती हैं। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी देशों की साझा जिम्मेदारी और समन्वित कार्रवाई आवश्यक है।

    जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय बड़े सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी बदलावों के दौर से गुजर रही है। विभिन्न क्षेत्रों में जनसंख्या संरचना बदल रही है, जबकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऑटोमेशन, डिजिटलीकरण और हरित प्रौद्योगिकी जैसी नई तकनीकें रोजगार और कौशल की मांग को तेजी से बदल रही हैं। ऐसे परिवर्तनों के बीच वैश्विक श्रम बाजार की जरूरतों के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करना और उनकी सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय आवाजाही सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।

    उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य, विनिर्माण, निर्माण, कृषि और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आज भी कुशल कार्यबल की मांग बनी हुई है। ऐसे में मानव संसाधन गतिशीलता केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक सहयोग और साझा विकास का प्रभावी साधन बन सकती है। विदेश मंत्री के अनुसार भारत की नीति प्रतिभा को वैश्विक अवसरों से जोड़ने, सुरक्षित प्रवासन को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है, जिससे आने वाले वर्षों में रोजगार, कौशल विकास और आर्थिक साझेदारी के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है।

  • भारत-पाक शांति पहल पर सियासत तेज, मोदी-शहबाज को लिखे खुले पत्र पर बीजेपी का पलटवार; आतंकवाद खत्म होने तक बातचीत से इनकार

    भारत-पाक शांति पहल पर सियासत तेज, मोदी-शहबाज को लिखे खुले पत्र पर बीजेपी का पलटवार; आतंकवाद खत्म होने तक बातचीत से इनकार

    नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की मांग को लेकर दोनों देशों के प्रमुख नागरिकों द्वारा जारी संयुक्त शांति पहल अब राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को संबोधित खुले पत्र के सार्वजनिक होने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इस पहल पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई नहीं करता, तब तक किसी भी प्रकार की औपचारिक बातचीत का सवाल नहीं उठता।

    बीजेपी प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत की नीति पहले से स्पष्ट है और इसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं हुआ है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि आतंकवाद और वार्ता एक साथ नहीं चल सकते। उन्होंने कहा कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती पर सक्रिय आतंकवादी संगठनों को संरक्षण देना बंद नहीं करता, तब तक दोनों देशों के बीच बातचीत की कोई संभावना नहीं है।

    उन्होंने यह भी कहा कि समय-समय पर कुछ समूह भारत और पाकिस्तान के बीच शांति और संवाद की पहल करते हैं, लेकिन ऐसे प्रयास तब तक व्यावहारिक नहीं हो सकते जब तक सीमा पार से आतंकवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता। उनका कहना था कि स्थायी शांति के लिए सबसे पहले आतंकवाद के ढांचे को खत्म करना आवश्यक है।

    यह विवाद उस समय सामने आया जब सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस की ओर से दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को एक खुला पत्र भेजा गया। पत्र में भारत और पाकिस्तान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंधों की पूर्ण बहाली, संवाद प्रक्रिया दोबारा शुरू करने तथा लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की अपील की गई है। इसके साथ ही धार्मिक, सांस्कृतिक और मानवीय आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित करने की मांग की गई है, ताकि दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली का माहौल तैयार हो सके।

    संयुक्त शांति प्रस्ताव पर भारत और पाकिस्तान के कुल 117 प्रमुख लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। भारत की ओर से विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई प्रमुख नाम इस पहल का हिस्सा बताए गए हैं। पत्र में दोनों सरकारों से आग्रह किया गया है कि क्षेत्रीय स्थिरता और शांति को ध्यान में रखते हुए संवाद के रास्ते फिर से खोले जाएं तथा लोगों के बीच संपर्क को आसान बनाया जाए।

    इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के हालिया बयान की भी चर्चा हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत को पाकिस्तान के साथ संवाद के सभी रास्ते पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि आतंकवाद के प्रति भारत की सख्त नीति में किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।

    भारत और पाकिस्तान के संबंध पिछले कई वर्षों से सीमा पार आतंकवाद, सुरक्षा चुनौतियों और राजनयिक तनाव के कारण प्रभावित रहे हैं। ऐसे में शांति पहल को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से सार्वजनिक रूप से यही रुख दोहराया जा रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की ठोस कार्रवाई किसी भी संभावित संवाद की पहली और अनिवार्य शर्त है।

  • कैबिनेट की मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर मंजूरी, दिल्ली में बनेगी 6 लेन द्वारका टनल, कानपुर-कबरई फोरलेन हाईवे से बुंदेलखंड को मिलेगी नई रफ्तार

    कैबिनेट की मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर मंजूरी, दिल्ली में बनेगी 6 लेन द्वारका टनल, कानपुर-कबरई फोरलेन हाईवे से बुंदेलखंड को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने देश की सड़क अवसंरचना को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। केंद्रीय कैबिनेट के फैसले के तहत राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में छह लेन वाली द्वारका टनल तथा उत्तर प्रदेश के कानपुर से कबरई तक चार लेन हाईवे का निर्माण किया जाएगा। इन दोनों परियोजनाओं से यातायात व्यवस्था में सुधार, यात्रा समय में कमी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    कैबिनेट के निर्णय के अनुसार दिल्ली में करीब आठ किलोमीटर लंबी छह लेन द्वारका टनल का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना पर लगभग 6,970 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। प्रस्तावित टनल शिवमूर्ति क्षेत्र से शुरू होकर वसंत कुंज के रास्ते बारापुला के निकट तक विकसित की जाएगी। परियोजना को लगभग पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    इस टनल के निर्माण से दिल्ली के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में लंबे समय से बनी ट्रैफिक समस्या को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही हवाई अड्डे, द्वारका, गुरुग्राम और दक्षिण दिल्ली के बीच यात्रा अधिक सुगम और तेज होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शहर के प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव कम होगा और ईंधन की बचत के साथ प्रदूषण में भी कमी आएगी।

    कैबिनेट ने दूसरी बड़ी परियोजना के रूप में उत्तर प्रदेश के कानपुर से कबरई तक लगभग 242 किलोमीटर लंबे फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग को भी मंजूरी प्रदान की है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 7,145 करोड़ रुपये होगी और इसे लगभग ढाई वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह मार्ग आगे चलकर मध्य प्रदेश की दिशा में बेहतर सड़क संपर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा और बुंदेलखंड क्षेत्र को नई विकास संभावनाओं से जोड़ेगा।

    नई सड़क बनने के बाद कानपुर से कबरई के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने का अनुमान है। वर्तमान में इस मार्ग को तय करने में लगभग साढ़े तीन घंटे का समय लगता है, जबकि परियोजना पूरी होने के बाद यही दूरी करीब डेढ़ घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे यात्रियों के साथ-साथ व्यावसायिक परिवहन को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से औद्योगिक गतिविधियों, कृषि उत्पादों के परिवहन और क्षेत्रीय व्यापार को नई गति मिलेगी। बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से बेहतर कनेक्टिविटी की मांग करता रहा है और यह परियोजना निवेश तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध हो सकती है। सड़क नेटवर्क मजबूत होने से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आने और विभिन्न शहरों के बीच आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की भी संभावना है।

    केंद्र सरकार का उद्देश्य आधुनिक, सुरक्षित और तेज परिवहन नेटवर्क विकसित करना है, ताकि देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच संपर्क और अधिक सशक्त हो सके। हाल के वर्षों में राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और सुरंग परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया गया है। नई स्वीकृत दोनों परियोजनाएं इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं।