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  • श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर 9 अगस्त से कारसेवा, मथुरा में जुटने लगे साधु-संत, पुलिस अलर्ट

    श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर 9 अगस्त से कारसेवा, मथुरा में जुटने लगे साधु-संत, पुलिस अलर्ट

    मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए मथुरा में 9 अगस्त से प्रस्तावित कारसेवा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राधाकुंड क्षेत्र के जुल्हेंदी स्थित चित्रगुप्त पीठ में 9 अगस्त को कारसेवा का शंखनाद किया जाएगा। आयोजन से पहले ही देश के अलग-अलग हिस्सों से साधु-संतों का मथुरा पहुंचना शुरू हो गया है। कार्यक्रम में 13 अखाड़ों के महंतों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। आयोजन को देखते हुए पुलिस-प्रशासन भी सतर्क हो गया है।

    श्रीराम मंदिर में लगे पत्थरों की पहली खेप पहुंची
    श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए मंगाए गए गुलाबी पत्थरों की पहली खेप शुक्रवार देर रात चित्रगुप्त पीठ पहुंच गई। ये पत्थर राजस्थान के भरतपुर स्थित बंसीपहाड़पुर से मंगाए गए हैं। इसी क्षेत्र के गुलाबी पत्थरों का इस्तेमाल अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण में भी किया गया है। चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज की ओर से इन पत्थरों का ऑर्डर दिया गया है। रविवार से शंखनाद कार्यक्रम के लिए पत्थरों को तराशने का काम शुरू किए जाने की तैयारी है।

    5 हजार मीट्रिक टन पत्थरों का दिया गया है ऑर्डर
    स्वामी सच्चिदानंद महाराज के अनुसार, 9 अगस्त को आश्रम से विधिवत कारसेवा की घोषणा की जाएगी। इसके लिए एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 13 अखाड़ों के साधु-संतों को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया है। इसके लिए गुलाबी रंग के करीब 5 हजार मीट्रिक टन पत्थरों का ऑर्डर दिया गया है। इनमें से एक खेप शुक्रवार देर रात पहुंच चुकी है।

    अयोध्या आंदोलन की तर्ज पर कारसेवा का ऐलान
    स्वामी सच्चिदानंद ने इससे पहले 4 जुलाई को अयोध्या आंदोलन की तर्ज पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए कारसेवा का ऐलान किया था। इसके बाद 12 जुलाई को उन्होंने हरिद्वार स्थित वात्सल्य गंगा आश्रम में साध्वी ऋतंभरा से मुलाकात कर इस अभियान के लिए समर्थन मांगा था।

    अब 9 अगस्त को चित्रगुप्त पीठ में होने वाले कार्यक्रम पर सभी की नजर है। साधु-संतों के जुटने और कारसेवा के ऐलान को देखते हुए प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है।

  • वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, ठाकुरजी के दर्शन कर विवेकानंद प्रतिमा पर चढ़ाए फूल

    वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, ठाकुरजी के दर्शन कर विवेकानंद प्रतिमा पर चढ़ाए फूल


    वृंदावन।
    पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपने तीन दिवसीय प्रवास के तहत शनिवार सुबह वृंदावन पहुंचे। यहां उन्होंने रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम हॉस्पिटल का दौरा किया। अस्पताल पहुंचने पर सेवाश्रम के सचिव स्वामी सुप्रकाशानंद और अस्पताल प्रभारी स्वामी काली कृष्णानंद ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया।

    अस्पताल परिसर में पूर्व राष्ट्रपति ने स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद वह रामकृष्ण मठ पहुंचे और मंदिर में ठाकुरजी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
    अस्पताल परिसर में पूर्व राष्ट्रपति ने स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद वह रामकृष्ण मठ पहुंचे और मंदिर में ठाकुरजी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।

    ‘शारदा ब्लॉक’ का किया अवलोकन
    ठाकुरजी के दर्शन के बाद रामनाथ कोविंद ने अस्पताल के ‘शारदा ब्लॉक’ का भी अवलोकन किया। यह वही ब्लॉक है जिसका उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान लोकार्पण हुआ था। इस दौरान उन्होंने रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के संतों से मुलाकात की और उनके साथ आत्मीय संवाद किया।

    सिग्नेचर वृंदावन धाम आश्रम का किया उद्घाटन
    रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के कार्यक्रम पूरे करने के बाद पूर्व राष्ट्रपति रुकमणि विहार स्थित ‘सिग्नेचर वृंदावन धाम आश्रम’ पहुंचे। यहां उन्होंने आश्रम का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर संतों और गणमान्य लोगों की मौजूदगी में रामनाथ कोविंद ने आश्रम परिसर में पौधरोपण भी किया। पौधरोपण के जरिए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

  • UP: हरिद्वार तक पहुंचेगा गंगा एक्सप्रेसवे, बिजनौर से होकर बनेगा करीब 30 किमी नया लिंक

    UP: हरिद्वार तक पहुंचेगा गंगा एक्सप्रेसवे, बिजनौर से होकर बनेगा करीब 30 किमी नया लिंक

    मेरठ। गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार से जोड़ने की परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार के बीच इस परियोजना को लेकर समझौता ज्ञापन (एमओयू) हो चुका है। समझौते में दोनों राज्यों की जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं। प्रस्तावित एक्सप्रेसवे बिजनौर के रास्ते हरिद्वार तक पहुंचेगा और इसकी लंबाई करीब 30 किलोमीटर होगी।

    गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के पास रहेगी। दोनों राज्यों के बीच इस परियोजना को लेकर पिछले महीने सहमति बनी थी।

    उत्तराखंड पर नहीं आएगा निर्माण का खर्च
    एमओयू के अनुसार हरिद्वार तक एक्सप्रेसवे के निर्माण में होने वाला वित्तीय खर्च उत्तराखंड सरकार को नहीं उठाना होगा। हालांकि, उत्तराखंड की ओर से भूमि अधिग्रहण और यूटिलिटी शिफ्टिंग में सहयोग किया जाएगा। शासन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार परियोजना से संबंधित दोनों एमओयू पिछले महीने ही अंतिम रूप ले चुके थे। समझौते को कैबिनेट की मंजूरी भी मिल चुकी है।

    बिजनौर के रास्ते हरिद्वार तक करीब 30 किमी का लिंक
    हरिद्वार को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए तैयार किए जा रहे प्रस्तावित मार्ग का एक हिस्सा बिजनौर से होकर गुजरेगा। करीब 30 किलोमीटर के इस लिंक से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच सड़क संपर्क पहले से बेहतर होने की उम्मीद है। परियोजना को लेकर दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच कई चरणों में बैठकें हो चुकी हैं। अब निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं को तेजी मिलने की संभावना है।

    धार्मिक पर्यटन से लेकर कारोबार तक को फायदा
    गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक पहुंचने से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। देश के अलग-अलग हिस्सों से हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवागमन आसान होगा।

    इसके अलावा बेहतर कनेक्टिविटी का असर औद्योगिक निवेश और व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। परियोजना के जरिए क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच लोगों और सामान की आवाजाही अधिक सुगम हो सकेगी।

  • UP Election 2027 से पहले PDA की नई परिभाषा पर मायावती का हमला, अखिलेश यादव की रणनीति पर उठाए सवाल

    UP Election 2027 से पहले PDA की नई परिभाषा पर मायावती का हमला, अखिलेश यादव की रणनीति पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली ।
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य की राजनीति में जातीय समीकरणों को लेकर बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से PDA फॉर्मूले में ‘P’ का अर्थ पंडित बताए जाने के बाद बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। मायावती ने आरोप लगाया कि सपा चुनावी परिस्थितियों और राजनीतिक जरूरतों के अनुसार अपने सामाजिक समीकरण की व्याख्या बदलती रहती है। उनके बयान के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में PDA को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

    मायावती ने कहा कि समाजवादी पार्टी पहले PDA में ‘P’ का अर्थ पिछड़ा बताती थी, जबकि इसके साथ दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को जोड़ा जाता था। अब अखिलेश यादव की ओर से ‘P’ को पंडित बताए जाने को उन्होंने चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा है। मायावती का कहना है कि ब्राह्मण समाज के लोगों का बसपा की ओर बढ़ता जुड़ाव देखकर सपा ने अपने राजनीतिक संदेश में बदलाव किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आने पर अलग-अलग सामाजिक वर्गों को साधने के लिए सपा अपनी राजनीतिक भाषा और समीकरण में परिवर्तन करती है।

    उत्तर प्रदेश में लंबे समय से जातीय और सामाजिक गठजोड़ चुनावी राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रमुख राजनीतिक दल अलग-अलग समुदायों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। अखिलेश यादव का PDA फॉर्मूला भी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को राजनीतिक रूप से एकजुट करने की रणनीति के तौर पर सामने आया था। अब इसमें पंडित शब्द को शामिल किए जाने से सपा की रणनीति को लेकर विपक्षी दलों को हमला करने का नया मुद्दा मिल गया है।

    मायावती ने इस दौरान बसपा की राजनीतिक विचारधारा को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी किसी एक जाति, समुदाय या वर्ग के हित तक सीमित नहीं है। बसपा ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति पर काम करने का दावा करती है और उसका उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलना है। मायावती ने अपनी पार्टी की पिछली सरकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकारों के दौरान भी सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर नीतियां बनाई गई थीं।

    बसपा प्रमुख ने लोगों से जाति आधारित राजनीतिक नारों और चुनावी समीकरणों को लेकर सतर्क रहने की अपील भी की। उनका कहना है कि चुनाव के समय अलग-अलग समुदायों को आकर्षित करने के लिए राजनीतिक दल अपनी भाषा और रणनीति बदल सकते हैं, लेकिन इससे समाज की मूल समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होता। मायावती ने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनावी लाभ के लिए राजनीतिक समीकरण बदलने के बजाय सभी वर्गों के व्यापक हित पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाताओं की भूमिका को देखते हुए अखिलेश यादव के बयान और मायावती की प्रतिक्रिया को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जातीय संतुलन और सामाजिक गठबंधन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है। आने वाले समय में PDA की परिभाषा और इसके दायरे को लेकर सपा, बसपा तथा अन्य दलों के बीच बयानबाजी और बढ़ सकती है। मायावती का ताजा हमला इसी व्यापक राजनीतिक मुकाबले का हिस्सा माना जा रहा है।

  • पश्चिमी यूपी में ‘बम भोले’ की गूंज, डाक कांवड़ और पैदल जत्थों में दिखा जोश

    पश्चिमी यूपी में ‘बम भोले’ की गूंज, डाक कांवड़ और पैदल जत्थों में दिखा जोश

    मेरठ। सावन के साथ कांवड़ यात्रा 2026 ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सड़कों को पूरी तरह भक्तिमय कर दिया है। दिल्ली-हरिद्वार हाईवे से लेकर मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और बागपत तक हर तरफ ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम भोले’ के जयकारे सुनाई दे रहे हैं। कंधों पर गंगाजल लेकर शिवभक्त अपने गंतव्य और शिवालयों की ओर लगातार बढ़ रहे हैं। दिन हो या रात, हाईवे पर कांवड़ियों की भीड़ कम नहीं हो रही। पैदल जत्थों के साथ डाक कांवड़िए भी तेज रफ्तार में आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं।

    शिव भजनों पर झूमते कांवड़िए, डीजे-ढोल बना आकर्षण
    कांवड़ यात्रा के दौरान कई जत्थों में भक्ति का उत्साह देखते ही बन रहा है। शिवभक्त रास्ते में शिव भजनों पर नाचते-गाते आगे बढ़ रहे हैं। कई जत्थों के साथ डीजे, ढोल और भजन मंडलियां भी चल रही हैं। शाम ढलते ही कांवड़ मार्गों की रौनक और बढ़ जाती है। रोशनी से सजी कांवड़ें, डीजे की धुन और भगवा वस्त्रों में नजर आते शिवभक्त पूरे माहौल को मेले जैसा बना देते हैं।

    हाईवे पर डाक कांवड़िए तेजी से अपने गंतव्य की तरफ बढ़ रहे हैं। वहीं सामान्य कांवड़ लेकर पैदल चल रहे शिवभक्त भजनों और जयकारों के बीच अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं। कांवड़ियों का जोश राह से गुजरने वाले लोगों का भी ध्यान खींच रहा है। शहरों के लोग बड़ी संख्या में कांवड़ मार्गों तक पहुंचकर यात्रा का नजारा देख रहे हैं और कई जगह सेवा शिविरों में शिवभक्तों की मदद भी कर रहे हैं।

    सेवा शिविरों में भंडारे, जगह-जगह फूलों से स्वागत
    कांवड़ मार्गों पर शिवभक्तों के लिए जगह-जगह सेवा शिविर लगाए गए हैं। इन शिविरों में भोजन, पानी, शरबत और आराम करने की व्यवस्था की गई है। बड़ी संख्या में युवा और स्वयंसेवक दिन-रात कांवड़ियों की सेवा में जुटे हुए हैं। कई जगह शिवभक्तों का पुष्प वर्षा कर स्वागत भी किया जा रहा है। मुजफ्फरनगर में सीओ ऋषिका सिंह भी महिला कांवड़ियों की सेवा करती नजर आईं। महिला कांवड़ियों के पैर दबाते हुए उनका वीडियो और तस्वीरें भी चर्चा में रहीं।

    11 अगस्त को महाशिवरात्रि, और बढ़ेगी कांवड़ियों की भीड़
    कांवड़ यात्रा के दौरान शाम और रात में हाईवे और कांवड़ मार्गों पर मेले जैसा दृश्य दिखाई दे रहा है। शिवभक्तों के साथ स्थानीय लोग भी इन रास्तों पर पहुंच रहे हैं। कुछ लोग कांवड़ यात्रा का भक्तिमय नजारा देखने आ रहे हैं तो कई सेवा शिविरों में पहुंचकर कांवड़ियों की सेवा कर रहे हैं। 11 अगस्त को महाशिवरात्रि के अवसर पर शिवालयों में कांवड़िए गंगाजल चढ़ाएंगे। इस वजह से कांवड़ मार्गों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही और बढ़ने की संभावना है।

  • पीएम मोदी ने IIT दिल्ली के छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए किया तैयार, नई सोच और समाधान खोजने पर दिया जोर

    पीएम मोदी ने IIT दिल्ली के छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए किया तैयार, नई सोच और समाधान खोजने पर दिया जोर

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजधानी दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने संस्थान से पढ़ाई पूरी करने वाले तीन हजार से अधिक छात्रों को संबोधित किया और उन्हें जीवन की नई पारी के लिए शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में छात्रों को यह समझाने की कोशिश की कि कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके सामने वास्तविक दुनिया की ऐसी चुनौतियां आएंगी, जिनका सामना करने के लिए केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी सोच, मेहनत, रचनात्मकता और नए विचारों के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

    पीएम मोदी ने कहा कि कॉलेज और बाहर की दुनिया में काफी अंतर होता है। पढ़ाई के दौरान छात्रों को यह मालूम होता है कि उन्हें कौन सा विषय पढ़ना है और परीक्षा में किस तरह के सवाल सामने आ सकते हैं। लेकिन नौकरी, व्यवसाय या रोजमर्रा की जिंदगी में परिस्थितियां पहले से तय नहीं होतीं। कई बार अचानक कोई नई समस्या सामने आती है और उस समय यह भी स्पष्ट नहीं होता कि असल समस्या क्या है। ऐसे अवसरों पर व्यक्ति को खुद स्थिति को समझना पड़ता है और समाधान तलाशना होता है। प्रधानमंत्री ने छात्रों से कहा कि उन्हें भविष्य की ऐसी परिस्थितियों के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए।

    उन्होंने छात्रों के भविष्य के सपनों का जिक्र करते हुए कहा कि आज समारोह में मौजूद हर विद्यार्थी के मन में आने वाले कल की अपनी अलग तस्वीर होगी। कोई पहली नौकरी और पहली सैलरी का इंतजार कर रहा होगा, तो कोई नए शहर में नई शुरुआत की तैयारी कर रहा होगा। कुछ विद्यार्थी अपना पहला स्टार्टअप शुरू करने का सपना भी देख रहे होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी का रास्ता और सपना अलग हो सकता है, लेकिन दीक्षांत समारोह का यह अवसर सभी के लिए समान रूप से विशेष है।

    समारोह में पीएम मोदी ने IIT दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी नई पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन पहलों के लिए संस्थान और छात्रों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने संकेत दिया कि तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में विद्यार्थियों के लिए नई तकनीकों को समझना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ अपनी मौलिक सोच और समस्या समाधान की क्षमता को मजबूत करना भी जरूरी है।

    प्रधानमंत्री ने छात्रों के साथ हल्के-फुल्के अंदाज में संवाद करते हुए उनके मन में चल रहे विचारों का जिक्र किया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह बाबा बागेश्वर नहीं हैं, लेकिन कुछ तो पता चलता होगा कि विद्यार्थियों के मन में क्या चल रहा है। उन्होंने IIT दिल्ली में छात्रों के पहले दिन से लेकर दीक्षांत समारोह तक के सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि ओरिएंटेशन से कनवोकेशन तक की यात्रा पूरी करना उनके लिए संतोष का विषय होगा।

    पीएम मोदी ने कहा कि IIT दिल्ली से निकलने वाले छात्र केवल डिग्री लेकर आगे नहीं बढ़ रहे हैं, बल्कि देश के लिए कुछ बड़ा करने का सपना भी लेकर जा रहे हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उनकी नई यात्रा के लिए बधाई दी और उम्मीद जताई कि वे अपनी प्रतिभा और ज्ञान का इस्तेमाल समाज तथा देश की प्रगति में करेंगे। उन्होंने छात्रों को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को तैयार रखने और हर चुनौती को सीखने तथा आगे बढ़ने के अवसर के रूप में देखने का संदेश दिया।

  • मेरठ में कांवड़ियों पर CM योगी ने बरसाए फूल, शिवभक्तों ने लगाए ‘बोल बम’ के जयकारे

    मेरठ में कांवड़ियों पर CM योगी ने बरसाए फूल, शिवभक्तों ने लगाए ‘बोल बम’ के जयकारे


    मेरठ। कांवड़ यात्रा के दौरान शनिवार को मेरठ में शिवभक्तों का भव्य स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दुल्हैडा चुंगी पहुंचे और हरिद्वार से कांवड़ लेकर लौट रहे कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा कर उनका अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री के पहुंचते ही कांवड़ मार्ग पर उत्साह का माहौल बन गया और शिवभक्तों ने ‘बोल बम’ के जयकारे लगाए।

    भगवा रंग में सजे कांवड़ मार्ग पर जब फूलों की बारिश हुई तो पूरा माहौल भक्तिमय नजर आया। मुख्यमंत्री करीब 30 मिनट तक कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहे।

    पुष्पवर्षा के बाद हिंडन एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए CM
    कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कार से शोभित विश्वविद्यालय स्थित हेलीपैड के लिए रवाना हुए। यहां से उनका हेलिकॉप्टर गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट के लिए रवाना हुआ। मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए प्रशासन ने कांवड़ यात्रा की व्यवस्थाओं पर विशेष निगरानी रखी। कांवड़ियों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर यातायात, सुरक्षा और मार्गों की निगरानी को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती गई।

    कांवड़ मार्ग पर चाक-चौबंद रही सुरक्षा
    मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए शोभित विश्वविद्यालय के हेलीपैड से लेकर दुल्हैडा चुंगी तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पूरे मार्ग में जगह-जगह पुलिस बल तैनात रहा। यातायात व्यवस्था सुचारु रखने के साथ कांवड़ मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को भी लगातार मॉनिटर किया गया। कार्यक्रम स्थल के आसपास सुरक्षा एजेंसियां भी सक्रिय रहीं। मुख्यमंत्री की मौजूदगी को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने किसी भी तरह की चूक रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरती।

    मंच के सामने काफी देर उड़ता रहा ड्रोन, पुलिस में मचा हड़कंप
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम के दौरान उस समय सुरक्षा को लेकर हलचल मच गई, जब मंच के सामने आसमान में एक ड्रोन काफी देर तक उड़ता दिखाई दिया। कार्यक्रम स्थल पर ड्रोन उड़ाने की अनुमति नहीं थी।

    ड्रोन नजर आने के बाद पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने उसके संचालक की तलाश शुरू कर दी। आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ की गई और ड्रोन ऑपरेटर की पहचान करने का प्रयास किया गया। इसी दौरान कार्यक्रम स्थल पर लगे माइक से घोषणा कराई गई कि ड्रोन उड़ाने वाला व्यक्ति तत्काल उसे नीचे उतार ले। घोषणा के कुछ देर बाद ड्रोन को नीचे उतार लिया गया।

  • UP बीजेपी में संगठनात्मक फेरबदल, क्षेत्रीय और मोर्चा प्रभारियों की नियुक्ति

    UP बीजेपी में संगठनात्मक फेरबदल, क्षेत्रीय और मोर्चा प्रभारियों की नियुक्ति

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में संगठन को और सक्रिय करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने क्षेत्र और विभिन्न मोर्चों के प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है। पार्टी की ओर से जारी सूची में छह नेताओं को प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दिलीप पटेल को अवध क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया है।

    पार्टी के फैसले के मुताबिक रामप्रताप सिंह चौहान को पश्चिम, गीता शाक्य को ब्रज, शंकर लोधी को कानपुर, दिलीप पटेल को अवध, रमेश सिंह को काशी और अभिजात मिश्रा को गोरखपुर क्षेत्र का प्रभारी नियुक्त किया गया है।

    मोर्चों की जिम्मेदारी भी तय
    भाजपा ने अलग-अलग मोर्चों के लिए भी प्रभारियों के नाम घोषित किए हैं। सूची के अनुसार राजेश चौधरी को युवा मोर्चा प्रभारी, संजय राय को पिछड़ा मोर्चा प्रभारी, डॉ. धर्मेंद्र सिंह को अनुसूचित मोर्चा प्रभारी, कामेश्वर सिंह को महिला मोर्चा प्रभारी, डॉ. प्रियंका रावत को अनुसूचित जनजाति मोर्चा प्रभारी, देवेश कोरी को अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी, शंकर गिरी को किसान मोर्चा प्रभारी बनाया है।

    संगठन के अन्य पदों पर भी नियुक्तियां
    पार्टी ने संगठन से जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण दायित्व भी तय किए हैं। गोविंद नारायण शुक्ला को मुख्यालय प्रभारी बनाया गया है। वहीं प्रदेश मंत्री नरेंद्र शर्मा को मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी मिली है।

    इसके अलावा प्रदेश उपाध्यक्ष ब्रज बहादुर को विस्तारक योजना का संयोजक बनाया गया है। अर्चना मिश्रा को ‘मन की बात’ का संयोजक और राहुल वाल्मीकि को सह-संयोजक नियुक्त किया गया है। भाजपा की इन नियुक्तियों को प्रदेश में संगठनात्मक गतिविधियों को तेज करने और अलग-अलग क्षेत्रों व मोर्चों के बीच समन्वय मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • ई20 पेट्रोल पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, कहा- 'दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है'।

    ई20 पेट्रोल पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, कहा- 'दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है'।


    नई दिल्ली ।
    देश में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित यानी ई20 पेट्रोल को लेकर राजनीतिक घमासान काफी तेज हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक विशेष वीडियो संदेश जारी कर केंद्र सरकार की इथेनॉल मिश्रण नीति पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने सरकार की इस नीति की नीयत और निष्पादन पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि आमतौर पर कहावत है कि दाल में कुछ काला है, लेकिन ई20 पेट्रोल के मामले में तो पूरी दाल ही काली नजर आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस निर्णय से देश की आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है और यह सीधे तौर पर लोगों की जेब काटने जैसा है।

    राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी किए गए वीडियो में स्पष्ट किया कि ई20 ईंधन का मुद्दा सीधे तौर पर देश के करोड़ों वाहन चालकों और आम नागरिकों के जीवन से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से चारपहिया वाहनों, मोटरसाइकिलों और स्कूटरों के इंजन पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है। इसके साथ ही वाहनों का माइलेज घटने के कारण लोगों को ईंधन पर अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। विपक्षी नेता ने आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को शांत नहीं होने देगी और इसके खिलाफ आने वाले दिनों में व्यापक स्तर पर जन-अभियान चलाया जाएगा।

    मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का दावा है कि ई20 लागू करते समय सरकार ने उपभोक्ताओं को सस्ता ईंधन देने का जो वादा किया था, उसे पूरा नहीं किया गया है। पार्टी के अनुसार, अधिकांश पेट्रोल पंपों पर केवल ई20 ईंधन उपलब्ध कराए जाने के कारण वाहन मालिकों के पास अन्य कोई विकल्प नहीं बचा है। विपक्ष का आरोप है कि माइलेज कम होने से उपभोक्ताओं पर अरबों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा है, जबकि इसका सबसे अधिक वित्तीय लाभ केवल इथेनॉल उत्पादन से जुड़े उद्योगपतियों और कंपनियों को ही मिल रहा है।

    दूसरी ओर, केंद्र सरकार इस नीति को देशहित और पर्यावरण के अनुकूल बताकर इसका बचाव कर रही है। सरकार का तर्क है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विदेशी कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता को कम करना और कीमती विदेशी मुद्रा बचाना है। इसके साथ ही, इथेनॉल उत्पादन से देश के गन्ना किसानों और कृषि क्षेत्र को बेहतर मूल्य मिलने की बात कही गई है। हालांकि, विपक्ष अब इस मुद्दे को आम जनता के आर्थिक नुकसान से जोड़कर बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहा है, जिससे इस विषय पर आने वाले समय में राजनीतिक पारा और चढ़ने की पूरी संभावना है।

  • श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए मथुरा पहुंचे भरतपुर के गुलाबी पत्थर, नौ अगस्त से कारसेवा का एलान।

    श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए मथुरा पहुंचे भरतपुर के गुलाबी पत्थर, नौ अगस्त से कारसेवा का एलान।

    मथुरा । श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति और मंदिर निर्माण अभियान को लेकर मथुरा में हलचल काफी तेज हो गई है। राधाकुंड क्षेत्र के जुल्हैंदी स्थित चित्रगुप्त पीठ में भव्य मंदिर निर्माण के उद्देश्य से मंगाए गए गुलाबी पत्थरों की पहली खेप देर रात पहुंच गई है। ये विशेष पत्थर राजस्थान के भरतपुर स्थित बंसीपहाड़पुर से मंगवाए गए हैं। उल्लेखनीय है कि इन्हीं प्रसिद्ध पत्थरों का उपयोग अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण में भी किया गया है। चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज के नेतृत्व में पत्थरों के आगमन के साथ ही नौ अगस्त से विधिवत कारसेवा और पत्थर तराशने का काम शुरू करने का ऐलान किया गया है।

    स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए नौ अगस्त को आश्रम से शंखनाद किया जाएगा। इसके लिए एक भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश भर के 13 अखाड़ों के साधु-संतों और प्रमुख धर्माचार्यों को आमंत्रित किया गया है। महाराज ने स्पष्ट किया कि जन्मस्थान पर भव्य मंदिर के निर्माण हेतु कुल पांच हजार मीट्रिक टन गुलाबी पत्थरों का ऑर्डर दिया गया है। पत्थरों की पहली खेप पहुंचने से यह साफ हो गया है कि पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार कार्य को गति दी जाएगी।

    इस अभियान की रूपरेखा तैयार करने के लिए जुलाई माह से ही गतिविधियां जारी थीं। स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने पूर्व में अयोध्या आंदोलन की तर्ज पर कारसेवा का आह्वान किया था, जिसके समर्थन में उन्होंने हरिद्वार जाकर वरिष्ठ संतों से मुलाकात भी की थी। इस पहल को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और निर्मोही अखाड़े सहित कई प्रमुख धार्मिक संगठनों का समर्थन प्राप्त हो चुका है। संतों के इस रुख और पत्थरों के आगमन के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पूरी तरह से सतर्क हो गई है।

    प्रशासनिक अधिकारियों ने शांति व्यवस्था बनाए रखने और स्थिति की समीक्षा के लिए कई बार आयोजकों से बातचीत की थी। हालांकि, आश्रम परिसर में पत्थरों के पहुंचने के बाद संतों का रुख पूरी तरह से स्पष्ट दिखाई दे रहा है। नौ अगस्त से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में संतों का बड़ा जमावड़ा होने की उम्मीद है, जहां से आगामी रूपरेखा पर निर्णय लिया जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम ने मथुरा और आसपास के क्षेत्रों में राजनीतिक व धार्मिक सरगर्मियों को और बढ़ा दिया है।