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  • विश्व नंबर वन मैग्नस कार्लसन को दो बार चटाई धूल, 20 वर्षीय ग्रैंडमास्टर प्रज्ञानंद बने नॉर्वे शतरंज जीतने वाले पहले भारतीय

    विश्व नंबर वन मैग्नस कार्लसन को दो बार चटाई धूल, 20 वर्षीय ग्रैंडमास्टर प्रज्ञानंद बने नॉर्वे शतरंज जीतने वाले पहले भारतीय


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक शतरंज के मानचित्र पर भारत के युवा ग्रैंडमास्टर रमेशबाबू प्रज्ञानंद ने एक नया और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है। ओस्लो में आयोजित अत्यंत प्रतिष्ठित और दुनिया के सबसे कठिन शतरंज आयोजनों में से एक ‘नॉर्वे शतरंज टूर्नामेंट’ का खिताब जीतकर प्रज्ञानंद ने इतिहास रच दिया है। इस अभूतपूर्व सफलता के साथ ही वह इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता को जीतने वाले देश के पहले भारतीय शतरंज खिलाड़ी बन गए हैं। भारत के महानतम खिलाड़ी और पूर्व विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद भी अपने करियर में इस प्रतिष्ठित खिताब को हासिल नहीं कर सके थे, जिससे इस 20 वर्षीय युवा खिलाड़ी की उपलब्धि का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

    प्रतियोगिता का अंतिम और निर्णायक दौर बेहद रोमांचक और अत्यधिक दबाव वाला रहा। अंतिम दिन की शुरुआत से पहले प्रज्ञानंद कुल 15 अंकों के साथ तालिका में तीसरे स्थान पर चल रहे थे और खिताब की रेस में पिछड़ते दिख रहे थे। हालांकि, उन्होंने अंतिम राउंड में जर्मनी के मजबूत ग्रैंडमास्टर विंसेंट कीमर के खिलाफ उत्कृष्ट मानसिक सुदृढ़ता और रणनीतिक कौशल का प्रदर्शन किया। क्लासिकल मुकाबले में उन्होंने बेहद सधी हुई चालें चलते हुए कीमर को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। इस शानदार क्लासिकल जीत की बदौलत प्रज्ञानंद को पूरे 3 अंक मिले, जिससे उनका कुल स्कोर 18 अंकों पर पहुंच गया और उन्होंने अंक तालिका में शीर्ष स्थान पर कब्जा जमा लिया।

    इस टूर्नामेंट के परिणाम को प्रभावित करने में अन्य वैश्विक मुकाबलों की भी बड़ी भूमिका रही। अमेरिका के दिग्गज ग्रैंडमास्टर वेसली सो अंतिम दिन अपनी बढ़त को बरकरार रखने में नाकाम रहे और उनका मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ, जिसके बाद वे आर्मागेडन टाई-ब्रेक के फेर में फंस गए। वेसली सो की इस रणनीतिक चूक ने भारतीय ग्रैंडमास्टर के लिए खिताबी जीत के द्वार पूरी तरह खोल दिए। प्रज्ञानंद ने इस सुनहरे अवसर को हाथ से जाने नहीं दिया और आक्रामक खेल दिखाते हुए अंक तालिका में निर्णायक बढ़त हासिल कर ली, जिसने उनकी खिताबी जीत पर मुहर लगा दी।

    इस पूरे टूर्नामेंट के दौरान प्रज्ञानंद की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि विश्व के नंबर एक खिलाड़ी और पांच बार के विश्व चैंपियन मैग्नस कार्लसन के खिलाफ रही। भारतीय युवा खिलाड़ी ने कार्लसन को उनके ही घरेलू मैदान पर एक नहीं बल्कि दो बार क्लासिकल मुकाबलों में शिकस्त देकर पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया। विश्व नंबर वन खिलाड़ी को इस तरह लगातार दबाव में लाना प्रज्ञानंद की वैश्विक स्तर पर बढ़ती ताकत को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, इस टूर्नामेंट में भारत के नवनियुक्त विश्व चैंपियन डी गुकेश भी अपनी चुनौती पेश कर रहे थे, लेकिन उतार-चढ़ाव भरे प्रदर्शन के कारण वे खिताब की दौड़ से बाहर हो गए, जबकि प्रज्ञानंद ने भारतीय उम्मीदों को मजबूती से संभाला।

    प्रज्ञानंद के लिए इस महासमर की शुरुआत बेहद धीमी और औसत रही थी, जहां शुरुआती दौर में वे लय हासिल करने के लिए संघर्ष करते दिखे थे। इसके बावजूद, टूर्नामेंट के दूसरे हाफ में उन्होंने जिस तरह की ऐतिहासिक और अदम्य वापसी की, उसने खेल समीक्षकों को बेहद प्रभावित किया है। उनकी यह जीत केवल उनकी खेल प्रतिभा का नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में शांत रहकर सटीक निर्णय लेने की उनकी अद्वितीय मानसिक क्षमता का जीवंत प्रमाण है। इस खिताबी जीत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रज्ञानंद आने वाले समय में विश्व शतरंज पटल पर लंबे समय तक अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

  • जंतर-मंतर पर तनाव: कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के खिलाफ लामबंदी, सोशल मीडिया पर लाठियां लेकर पहुंचने की दी गई खुली धमकी

    जंतर-मंतर पर तनाव: कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के खिलाफ लामबंदी, सोशल मीडिया पर लाठियां लेकर पहुंचने की दी गई खुली धमकी

    नई दिल्ली । देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर भारी राजनीतिक और सामाजिक तनाव का गवाह बनने जा रहा है। इंटरनेट जगत से शुरू होकर युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) ने शनिवार को दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर एक बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया है। इस आंदोलन के जरिए देश की शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर युवाओं को एकजुट करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, इस प्रदर्शन की घोषणा के साथ ही दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी हो गई हैं क्योंकि कई संगठन इस आंदोलन के पुरजोर विरोध में उतर आए हैं।

    सोशल मीडिया मंचों पर पिछले चौबीस घंटों से कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध और समर्थन को लेकर एक बड़ी वैचारिक और हिंसक जंग छिड़ गई है। एक तरफ जहां देश के विभिन्न हिस्सों से छात्र और युवा इस प्रदर्शन का हिस्सा बनने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ प्रमुख हिंदूवादी संगठनों और कार्यकर्ताओं ने इस आंदोलन को रोकने के लिए सीधे तौर पर बल प्रयोग की चेतावनी दी है। इंटरनेट पर ऐसे कई वीडियो और पोस्ट प्रसारित हो रहे हैं जिनमें कार्यकर्ताओं को लाठियां और डंडे लेकर जंतर-मंतर पहुंचने के लिए उकसाया जा रहा है।

    अपने तीखे और विवादित बयानों के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंकी चौधरी ने इस मामले में खुलकर धमकी दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने आधिकारिक हैंडल से एक संदेश जारी करते हुए कहा है कि वे इस कॉकरोच जनता पार्टी के खेल को पूरी तरह समझ रहे हैं। चौधरी ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से आह्वान किया है कि वे छह जून को पूरी ताकत के साथ और हाथों में लाठियां लेकर पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन और जंतर-मंतर पहुंचें। उन्होंने खुले तौर पर प्रदर्शनकारियों को सबक सिखाने और पीटने की बात कही है, जिससे माहौल में बेहद कड़वाहट आ गई है।

    पिंकी चौधरी के अलावा अवैध धार्मिक निर्माणों के खिलाफ कानूनी और सामाजिक लड़ाई लड़ने का दावा करने वाले एक्टिविस्ट प्रीत सिरोही ने भी सीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सिरोही ने एक वीडियो संदेश जारी कर लोगों से बड़ी संख्या में लाठियों के साथ दिल्ली पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं जंतर-मंतर पर मुस्तैद रहेंगे और यदि प्रदर्शन के दौरान किसी भी व्यक्ति द्वारा देश विरोधी या समाज विरोधी बातें की गईं, तो वे चुप नहीं बैठेंगे और तुरंत बल प्रयोग का सहारा लिया जाएगा। इन बयानों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के बीच तनाव और अधिक गहरा गया है।

    इस भारी विरोध और हिंसा की धमकियों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने बेहद सधी हुई और शांतिपूर्ण प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अमेरिका से भारत लौटने के बाद अपने समर्थकों से लगातार अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के उकसावे में न आएं। पार्टी प्रवक्ताओं ने आधिकारिक बयान जारी कर कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि पूरा प्रदर्शन पूरी तरह से अहिंसक, अनुशासित और संवैधानिक दायरे में होना चाहिए। समर्थकों से हाथ में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा और किताबें लेकर आने को कहा गया है।

    पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा है कि वे प्रदर्शन के दौरान अपने मोबाइल फोन से लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग करते रहें। सीजेपी नेतृत्व को अंदेशा है कि कुछ असामाजिक तत्व उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को बदनाम करने या उसमें हिंसा भड़काने के उद्देश्य से भीड़ में शामिल हो सकते हैं। ऐसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पार्टी ने पुलिस प्रशासन पर भरोसा जताया है और समर्थकों से कहा है कि यदि कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो उसका वीडियो बनाकर तुरंत वहां तैनात पुलिसकर्मियों को सौंप दिया जाए ताकि कानून सम्मत कार्रवाई की जा सके।

  • जगद्गुरु रामभद्राचार्य बोले- दो दिन और चलता 'ऑपरेशन सिंदूर तो PoK भारत का हिस्सा बन गया होता

    जगद्गुरु रामभद्राचार्य बोले- दो दिन और चलता 'ऑपरेशन सिंदूर तो PoK भारत का हिस्सा बन गया होता


    लखनऊ ।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के लखनऊ (Lucknow) में आयोजित श्रीराम कथा कार्यक्रम में जगद्गुरु रामभद्राचार्य (Jagadguru Rambhadracharya) ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि अगर ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) दो दिन और जारी रहता तो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (Pakistan occupied Kashmir) यानी पीओके भारत का हिस्सा बन गया होता. उनके इस बयान के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) भी मंच पर मौजूद थे।

    जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कार्यकाल में ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में स्थित नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया. उन्होंने दावा किया कि यदि यह अभियान कुछ और समय तक चलता तो पीओके का भारत में विलय संभव हो सकता था.

    रामभद्राचार्य ने भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जब सेना प्रमुख ने उनसे गुरु दक्षिणा देने की इच्छा जताई थी, तब उन्होंने पीओके को भारत में वापस लाने की इच्छा व्यक्त की थी. यह कार्यक्रम लखनऊ में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान हुआ. कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य रूप से मौजूद रहे. रामभद्राचार्य ने उनकी ओर इशारा करते हुए कहा कि वह क्षत्रिय हैं और राष्ट्र की रक्षा की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है।


    राजनाथ सिंह की मौजूदगी में रामभद्राचार्य का बड़ा दावा

    उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2029 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिर से सरकार बनाएंगे और राजनाथ सिंह एक बार फिर रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी संभालेंगे. रामभद्राचार्य ने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अभियान आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई थी. बता दें, भारत ने साल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ढांचे को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन सिंदूर चलाया था.


    रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग

    अपने संबोधन के दौरान रामभद्राचार्य ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग भी की. इसके साथ ही उन्होंने रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग रखी. उन्होंने कहा कि भगवान राम राष्ट्र के कल्याण और सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वह पिछले तीन दशकों से जगद्गुरु रामभद्राचार्य को जानते हैं. उन्होंने कहा कि इतनी अद्भुत स्मरण शक्ति और असाधारण प्रतिभा उन्होंने कहीं और नहीं देखी. राजनाथ सिंह ने रामभद्राचार्य के ज्ञान, साहित्य और आध्यात्मिक योगदान की सराहना करते हुए उन्हें समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया.

  • अंडमान के अपतटीय बेसिन में मिला नैचुरल गैस का बड़ा भंडार, केंद्रीय मंत्री पुरी ने शेयर किया वीडियो

    अंडमान के अपतटीय बेसिन में मिला नैचुरल गैस का बड़ा भंडार, केंद्रीय मंत्री पुरी ने शेयर किया वीडियो


    नई दिल्ली।
    अंडमान निकोबार (Andaman and Nicobar) क्षेत्र में प्राकृतिक गैस (Natural Gas) के बड़े भंडार मिले हैं। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने एक वीडियो साझा करते हुए इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (Oil India Limited- OIL) ने अंडमान अपतटीय बेसिन में प्राकृतिक गैस का एक बड़ा भंडार खोज निकाला है। इससे भारत के ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने की संभावना को और भी ज्यादा बल मिला है।

    सोशल मीडिया साइट एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पूरी ने अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने लिखा कि अंडमान निकोबार द्वीपों से 15 किलोमीटर दूर श्री विजय पुरम-3 में हमें प्राकृतिक गैस के भंडार मिले हैं। यह कुआँ पानी में करीब 1900 मीटर गहराई में स्थिति हैं। शुरुआती टेस्टिंग के दौरान लगातार गैस जलने से गैस की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। गैस के नमूने की जांच के लिए उसे लैबोरेट्री में भेजा गया है।”

    बता दें, यह पहली बार नहीं है जब अंडमान निकोबार द्वीप समूह के पास प्राकृतिक गैस के भंडार मिले हों। इससे पहले 2025 में भी बेसिन में प्राकृतिक गैस के स्त्रोत मिलने की पुष्टि हुई थी। सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियान में श्री विजय पुरम-2 के कुओं में गैस मिली थी। इसकी जांच करने पर पता चला था कि इस गैस में 87 फीसदी मीथेन मिली हुई थी। लगातार दो जगह पर प्राकृतिक गैस के भंडार मिलने से इस बात की पुष्टि होती है कि इस पूरे बेसिन में पेट्रोलियम तत्व मौजूद हैं। यह पूरा बेसिन इंडोनेशिया से लेकर म्यांमार तक फैला हुआ है।


    सरकार का समुद्र मंथन अभियान

    पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से भारत ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। हालांकि, भारत सरकार को इसका अंदेशा पिछले कई सालों से है। इसलिए वह लगातार भारतीय समुद्री क्षेत्र में ऊर्जा भंडारों का पता लगाने की कोशिश करती रही है। इसी अभियान को तेज करने के लिए भारत सरकार ने ‘समुद्र मंथन’ नामक एक परियोजना शुरू की है। इसका उद्देश्य भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। सरकार ने इस अभियान के लिए प्रमुख तौर पर अंडमान निकोबार द्वीप समूह के आसपास का हिस्सा चिह्नित किया है। भूवैज्ञानिक दृष्टि से बात करें तो यह क्षेत्र बंगाल-आराकान पेट्रोलियम प्रणाली का हिस्सा है। यही क्षेत्र म्यांमार, थाईलैंड औऱ इंडोनेशिया में बड़े गैस और तेल भंडारों का आधार रही है।

    ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अंडमान के आसपास के क्षेत्रों में तेल और गैस के नए भंडार हो सकते हैं। यह भंडार अगर सामने आ जाते हैं, तो वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका पूरी तरह से बदल सकती है। हालांकि, सरकार लगातार इसकी खोज कर रही है, लेकिन अभी तक इनके आकार की पुष्टि नहीं हो पाई है।

  • RS चुनाव : MP में नटराजन का विरोध, झारखंड में JMM-कांग्रेस के बीच खींचतान…. BJP में उम्मीद जगी

    RS चुनाव : MP में नटराजन का विरोध, झारखंड में JMM-कांग्रेस के बीच खींचतान…. BJP में उम्मीद जगी


    नई दिल्ली।
    राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha elections) में मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में कांग्रेस (Congress) और झारखंड (Jharkhand) में झामुमो-कांग्रेस (JMM-Congress) के बीच जारी खींचतान में भाजपा (BJP) को अपने लिए नई उम्मीद नजर आ रही है। मध्यप्रदेश में जहां कांग्रेस में बाहरी मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natarajan) को उम्मीदवार बनाने से असंतोष है, वहीं सहमति के बिना कांग्रेस के झारखंड में उम्मीदवार घोषित करने से झामुमो नाराज है। इस स्थिति से खुश भाजपा जरूरी संख्याबल की कमी के बावजूद झारखंड में एक और मप्र में तीसरा उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है।

    दरअसल मध्यप्रदेश में पूर्व सीएम दिग्विजय की ना के बाद दूसरे पूर्व सीएम कलमनाथ को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा थी। हालांकि बृहस्पतिवार को जारी सूची में पार्टी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की करीबी और तेलंगाना की प्रभारी मीनाक्षी नटराजन का नाम था। सूची जारी होने के बाद कांग्रेस में असंतोष है और यह असंतोष पिछले चुनाव की तरह ही क्रॉस वोटिंग का कारण बन सकता है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, कमलनाथ को राज्यसभा टिकट नहीं मिलने से छिंदवाड़ा क्षेत्र के पांच कांग्रेस विधायकों को झटका लगा है। उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी पूर्व सीएम को उम्मीदवार बनाएगी। ऐसे में अब इन विधायकों का रुख क्या रहता है, इस पर सभी की नजरें है।

    हालांकि असंतोष की भनक के बाद सतर्क कांग्रेस नेतृत्व ने शनिवार को विधायकों की बैठक बुलाई है। बिहार, हरियाणा और ओडिशा जैसे राज्यों में क्रॉस वोटिंग का नुकसान झेल चुकी पार्टी इस बार मध्य प्रदेश में कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। यही वजह है कि हाल ही में हाईकमान ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व ने साफ संदेश दिया है कि क्रॉस वोटिंग की स्थिति में जवाबदेही तय की जाएगी।


    झारखंड में भी उबाल

    राज्य में दो सीटों पर चुनाव है। यहां एक सीट के लिए प्रथम वरीयता के 28 मतों की जरूरत है। विपक्षी गठबंधन के पास दो सीट जीतने के लिए ठीक 56 मत हैं। जबकि भाजपा के पास 24 मत हैं। यहां झामुमो बिना चर्चा के कांग्रेस के उम्मीदवार उतारने से नाराज है। सीएम हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को विधायकों की बैठक् बुलाई, जिसमें एक सुर में दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने की मांग की गई। चूंकि कांग्रेस के पास महज 16 विधायक हैं, ऐसे में उसे 12 मत हासिल करने के लिए सहयोगियों का समर्थन चाहिए। दूसरी ओर भाजपा पहले से ही एक उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर चुकी है। ऐसे में यहां भी विपक्ष के सामने एकजुटता बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।


    क्या है गणित

    प्रदेश विधानसभा में इस समय 229 विधायक हैं। इनमें भाजपा के पास 164, कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। एक सीट के लिए जरूरत 58 विधायकों के समर्थन की है। इस प्रकार दो सीट जीतने के बाद भाजपा के पास प्रथम वरीयता के अतिरिक्त 48 वोट होंगे। दूसरी ओर कांग्रेस के पास 64 वोट हैं जो जरूरी संख्या बल से 6 ज्यादा हैं। ऐसे में तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए भाजपा को दस अतिरिक्त मत की जरूरत पड़ेगी, जबकि कांग्रेस का हर हाल में एकजुटता दिखानी होगी।

  • भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ी टेंशन….. BGB-BSF ने एक-दूसरे पर लगाए अवैध घुसपैठ कराने के आरोप

    भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ी टेंशन….. BGB-BSF ने एक-दूसरे पर लगाए अवैध घुसपैठ कराने के आरोप


    नई दिल्ली।
    भारत और बांग्लादेश की सीमा (India and Bangladesh Border) पर एक बार फिर तनावपूर्ण स्थिति (Stressful Situation) पैदा हो गई है। सीमा सुरक्षा बल (Border Security Force- BSF) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (Border Guard Bangladesh.- BGB) ने एक-दूसरे पर घुसपैठ कराने और अवैध रूप से लोगों को सीमा पार धकेलने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस तनातनी के बीच सीमा पर स्थित नो-मैन्स लैंड पर बच्चों और महिलाओं सहित दर्जनों लोग फंसे हुए हैं। यह गतिरोध ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं।

    बांग्लादेश के सीमा सुरक्षा बल (BGB) ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर दावा किया कि भारतीय बीएसएफ ने गुरुवार और शुक्रवार के शुरुआती घंटों में कई बार लोगों को बांग्लादेशी क्षेत्र में धकेलने की कोशिश की। BGB के अनुसार, पिछले 24 घंटों में सीमावर्ती इलाकों जैसे पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले के पास लालमोनिरहाट और पंचगढ़, दक्षिण दिनाजपुर और मालदा के पास नौगांव और मालदा और मुर्शिदाबाद के पास चापाइनवाबगंज में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं।

    BGB का दावा है कि उन्होंने जीरो-लाइन पर 70 से अधिक लोगों को बांग्लादेश में प्रवेश करने से रोका है। BGB की 15वीं लालमोनिरहाट बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल मेहंदी इमाम ने बताया, “ये लोग फिलहाल वहीं फंसे हुए हैं और हमारी सेना किसी भी तरह की घुसपैठ को रोकने के लिए हाई अलर्ट पर है।” BGB के मुताबिक, शुक्रवार सुबह नौगांव में 5 बच्चों सहित 17 लोगों को रोका गया। लालमोनिरहाट के तीन इलाकों हातीबांधा, पटग्राम और आदित्यमारी में 33 लोगों को रोका गया। वहीं, गुरुवार तड़के चापाइनवाबगंज में 10 महिलाओं और 6 बच्चों समेत 28 लोगों को जीरो-लाइन पर रोका गया था।


    BSF का पलटवार

    भारतीय सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने BGB के इन आरोपों को खारिज करते हुए बिल्कुल अलग दावा किया है। BSF ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने कूचबिहार के मेखलीगंज इलाके के पनिशाला में महिलाओं और बच्चों सहित 10 बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में अवैध रूप से घुसाने की BGB की कोशिश को नाकाम कर दिया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए BSF ने तुरंत इलाके में अतिरिक्त टुकड़ियों को तैनात कर दिया है ताकि कोई भी भारतीय सीमा में प्रवेश न कर सके। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें BSF और BGB के जवान सीमा पर फंसे कुछ लोगों के सामने इस मुद्दे पर चर्चा करते दिख रहे हैं।


    दोनों देशों ने पल्ला झाड़ा, फ्लैग मीटिंग से इनकार

    BSF और BGB दोनों ही बलों ने इन 10 लोगों को अपना नागरिक मानने से इनकार कर दिया है, इसलिए वे कड़कड़ाती धूप और असुरक्षित माहौल में सीमा पर फंसे रहने को मजबूर हैं। स्थिति को संभालने के लिए BSF द्वारा एक फ्लैग मीटिंग बुलाने का प्रयास किया गया था, लेकिन खबरों के मुताबिक BGB ने इस बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया। इसके बाद BSF ने सीमा पर गश्त काफी तेज कर दी है।


    दिल्ली में होने वाली बैठक पर टिकी नजरें

    सीमा पर उपजे इस ताजा विवाद के बीच दोनों देशों के सुरक्षा बलों के शीर्ष अधिकारी जल्द ही आमने-सामने होंगे। पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार, 8 से 11 जून तक नई दिल्ली में 57वीं भारत-बांग्लादेश सीमा समन्वय बैठक आयोजित होने जा रही है। माना जा रहा है कि इस बैठक में जीरो-लाइन पर फंसे लोगों और घुसपैठ के आरोपों का यह मुद्दा बेहद गरमाएगा।

  • स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट अंतिम चरण में…. अमित शाह बोले- घुसपैठियों और तस्करों की खैर नहीं

    स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट अंतिम चरण में…. अमित शाह बोले- घुसपैठियों और तस्करों की खैर नहीं


    अगरतला।
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) ने शुक्रवार को कहा कि सरकार का स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट (Smart Border Project) अंतिम चरण में है और नया सुरक्षा ग्रिड मॉडर्न तकनीक, स्थानीय प्रशासन व सीमा पर तैनात सैनिकों को शामिल करेगा। शाह ने त्रिपुरा (Tripura) के लंकामुरा बॉर्डर (Lankamura Border) आउटपोस्ट में बीएसएफ जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि जहां भी बल के जवान तैनात हैं, वहां हम स्मार्ट बॉर्डर बनाएंगे। उन्होंने कहा, ‘स्मार्ट बॉर्डर जल्द ही नए सुरक्षा ग्रिड के साथ शुरू किए जाएंगे जिसमें अत्याधुनिक तकनीक, स्थानीय प्रशासन और सीमा सैनिक शामिल होंगे।

    गृह मंत्री ने कहा, ‘देश में 7-8 जगहों पर स्मार्ट बॉर्डर की अवधारणा को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। मैं केंद्रीय गृह सचिव और बीएसएफ महानिदेशक से अनुरोध करता हूं कि वे सीमा क्षेत्रों का दौरा करें और बातचीत करें। ‘ उन्होंने कहा कि हर सीमा की अपनी चुनौतियां हैं। मानव तस्करी, हथियारों की तस्करी से लेकर नशीले पदार्थों की सप्लाई तक; लेकिन बीएसएफ के जवान इन चुनौतियों का सामना पूरी शिद्दत से करते हैं।


    स्मार्ट बॉर्डर पर क्या बोले अमित शाह

    अमित शाह ने बताया कि जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक, गांव के पटवारी और सरपंच भी इस ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक सीमा क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन को इस अवधारणा में शामिल नहीं किया जाता, तब तक सीमाओं को वाकई अभेद्य नहीं बनाया जा सकता और सीमा सुरक्षा को अलग-थलग कल्पना करना कभी सफल नहीं होगा। उन्होंने कहा, ‘2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए हमें सीमाओं से नकली नोटों, मानव तस्करी और ड्रग्स तस्करी को रोकना होगा। ’


    119 किमी नई फेंसिंग लगाने को मंजूरी

    गृह मंत्री ने कहा, ‘सीमा फेंसिंग के आधुनिकीकरण के लिए हमने लगभग 650 किलोमीटर पुरानी (15 वर्ष से अधिक पुरानी) फेंसिंग के एक हिस्से को बदलने के लिए 119 किलोमीटर नई फेंसिंग लगाने को मंजूरी दी है।’ गृह मंत्री ने आगे कहा कि बॉर्डर आउटपोस्ट पर तैनात जवानों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के कई प्रोजेक्ट (बिजली आपूर्ति, हरित ऊर्जा पहल और सुरक्षित पीने का पानी) न केवल शुरू किए गए हैं बल्कि पूरे भी कर दिए गए हैं। शाह ने मई में नई दिल्ली में कहा था कि सरकार अगले वर्ष तक तकनीक से लैस स्मार्ट बॉर्डर परियोजना शुरू करेगी, जिससे पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ 6000 किलोमीटर लंबी सीमा को अभेद्य बनाया जाएगा। देश की जनसांख्यिकी बदलने की साजिश को विफल किया जाएगा।

  • CBSE रिजल्ट पोर्टल पर बड़ा साइबर हमला, 38 लाख से अधिक संदिग्ध रिक्वेस्ट ब्लॉक; सिस्टम रहा सुरक्षित

    CBSE रिजल्ट पोर्टल पर बड़ा साइबर हमला, 38 लाख से अधिक संदिग्ध रिक्वेस्ट ब्लॉक; सिस्टम रहा सुरक्षित


    नई दिल्ली । केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) के पोस्ट-रिजल्ट पोर्टल पर 3 जून 2026 को एक बड़ा साइबर हमला दर्ज किया गया। इस हमले में करीब 38 लाख से अधिक संदिग्ध रिक्वेस्ट भेजी गईं, जिसका उद्देश्य सिस्टम को बाधित करना था। हालांकि, बोर्ड की मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी टीम की सतर्कता के चलते पोर्टल पर कोई असर नहीं पड़ा और सेवा पूरी तरह सुचारू रूप से चलती रही।

     DDoS अटैक के जरिए किया गया हमला
    विशेषज्ञों के अनुसार यह हमला डिनायल-ऑफ-सेवा (DDoS) श्रेणी का था, जिसमें एक साथ भारी मात्रा में ट्रैफिक भेजकर किसी वेबसाइट को ठप करने की कोशिश की जाती है। CBSE के अनुसार, पोर्टल शुरू होने के कुछ ही मिनटों में लाखों रिक्वेस्ट आईं, जिनमें बड़ी संख्या अनधिकृत लॉगिन प्रयासों की थी। सिस्टम ने इन सभी को पहचानकर तुरंत ब्लॉक कर दिया।

     मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था ने रोका नुकसान
    बोर्ड ने बताया कि पोर्टल लॉन्च से पहले व्यापक सुरक्षा परीक्षण किए गए थे, जिनमें पेनिट्रेशन टेस्टिंग, वल्नरेबिलिटी असेसमेंट और लोड टेस्टिंग शामिल थीं। पोर्टल को आधुनिक सुरक्षा तकनीकों जैसे वेब एप्लिकेशन फायरवॉल (WAF), DDoS सुरक्षा प्रणाली, ऑडिट लॉगिंग और 24×7 मॉनिटरिंग से सुरक्षित किया गया था। इसी वजह से यह हमला सफल नहीं हो सका।

     रिजल्ट के बाद बढ़ा ट्रैफिक, हजारों आवेदन दर्ज
    रिजल्ट के बाद छात्रों की ओर से पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन के लिए बड़ी संख्या में आवेदन भी आए हैं। बोर्ड को अब तक हजारों आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन और अंकों के सत्यापन की मांग शामिल है।

     शुरुआती मिनटों में ही भारी दबाव
    रिपोर्ट के अनुसार, पोर्टल लाइव होने के मात्र दो मिनट के भीतर लगभग 15 लाख एक्सेस रिक्वेस्ट दर्ज की गईं। सिस्टम ने तुरंत सक्रिय होकर 1 लाख से अधिक संदिग्ध प्रयासों को ब्लॉक कर दिया।

    यह घटना दिखाती है कि डिजिटल सिस्टम पर साइबर हमलों का खतरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन मजबूत सुरक्षा ढांचे के चलते बड़े संस्थान भी ऐसे हमलों से सुरक्षित रह सकते हैं।

  • गुजरात दौरे पर पीएम मोदी, हथियार निर्माण केंद्र का किया निरीक्षण; रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को देंगे नई गति

    गुजरात दौरे पर पीएम मोदी, हथियार निर्माण केंद्र का किया निरीक्षण; रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को देंगे नई गति

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गुजरात दौरे के दौरान सूरत के हजीरा स्थित अत्याधुनिक रक्षा निर्माण केंद्र का दौरा कर देश की रक्षा आत्मनिर्भरता और औद्योगिक विकास को नया संदेश दिया। अपने कार्यक्रम की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने लार्सन एंड टुब्रो के आर्म्ड सिस्टम्स कॉम्प्लेक्स का निरीक्षण किया, जहां भारतीय सेना के लिए विकसित किए जा रहे आधुनिक सैन्य उपकरणों, बख्तरबंद वाहनों, टैंकों और ड्रोन तकनीक का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने स्वदेशी रक्षा उत्पादन से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं की जानकारी भी प्राप्त की।

    हजीरा स्थित यह रक्षा निर्माण परिसर देश के प्रमुख सैन्य उत्पादन केंद्रों में शामिल माना जाता है। यहां आधुनिक बख्तरबंद वाहन, तोप प्रणाली और कई अन्य रक्षा प्लेटफॉर्म का निर्माण, एकीकरण और परीक्षण किया जाता है। प्रधानमंत्री ने परिसर में तैयार किए जा रहे स्वदेशी रक्षा उपकरणों का बारीकी से निरीक्षण किया और देश में विकसित हो रही तकनीकी क्षमताओं की समीक्षा की। इस दौरे को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

    रक्षा निर्माण केंद्र के निरीक्षण के बाद प्रधानमंत्री ने सूरत में 200 बिस्तरों वाले नए ईएसआईसी अस्पताल का उद्घाटन भी किया। इस अस्पताल के शुरू होने से क्षेत्र के श्रमिकों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद है। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं को मजबूती देने के उद्देश्य से इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    गुजरात दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने सूरत और आसपास के क्षेत्रों के लिए लगभग 18,800 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की शुरुआत भी की। इनमें सड़क, परिवहन, रेलवे और शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करना और औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करना है।

    प्रधानमंत्री ने वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के पैकेज छह और सात का उद्घाटन भी किया। इसके अलावा कई बड़े और छोटे पुलों, रेलवे ओवरब्रिज, फ्लाईओवर और अंडरपास परियोजनाओं को जनता को समर्पित किया गया। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की कई नई परियोजनाओं का शिलान्यास भी कार्यक्रम का हिस्सा रहा। इन परियोजनाओं से गुजरात के विभिन्न हिस्सों में यातायात व्यवस्था बेहतर होने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने दमन से लक्षद्वीप को जोड़ने वाली बंदरगाह और पर्यटन विकास परियोजनाओं का भी वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। इन योजनाओं को समुद्री संपर्क और पर्यटन क्षेत्र के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे तटीय क्षेत्रों के विकास और स्थानीय रोजगार सृजन को भी बल मिलेगा।

    विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण को विशेष प्राथमिकता दी गई। आयोजन स्थल पर पारंपरिक प्रचार सामग्री और बड़े बैनरों का उपयोग सीमित रखा गया। कार्यक्रम में शामिल होने वाले कार्यकर्ताओं और समर्थकों को साइकिल तथा इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया गया। आम नागरिकों की सुविधा के लिए नगर निगम की ओर से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन भी किया गया।

    प्रधानमंत्री का यह दौरा रक्षा उत्पादन, आधारभूत संरचना विकास, स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यावरण संरक्षण जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित रहा। राजनीतिक और औद्योगिक दृष्टि से इसे गुजरात के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम माना जा रहा है, जिससे राज्य में विकास परियोजनाओं और निवेश गतिविधियों को और गति मिलने की संभावना है।

  • हार्ड हिंदुत्व से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में योगी, सॉफ्ट हिंदुत्व के सहारे जवाबी मोर्चा संभाल रहे अखिलेश

    हार्ड हिंदुत्व से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में योगी, सॉफ्ट हिंदुत्व के सहारे जवाबी मोर्चा संभाल रहे अखिलेश

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय शेष है, लेकिन राज्य की राजनीति में चुनावी माहौल धीरे-धीरे आकार लेने लगा है। प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने वोट बैंक को मजबूत करने और नई रणनीतियों के जरिए जनसमर्थन जुटाने में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की राजनीतिक शैली और चुनावी संदेशों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

    हाल के दिनों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भाषणों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिंदुत्व, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों को प्रमुखता मिलती दिखाई दी है। गौ संरक्षण, राम मंदिर, राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दे उनके राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा आगामी चुनाव में विकास और सुशासन के साथ-साथ अपने पारंपरिक वैचारिक आधार को भी मजबूती से सामने रख सकती है।

    योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न जनसभाओं में राम मंदिर निर्माण, राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक गौरव से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए भाजपा सरकार की उपलब्धियों को जनता के सामने रखा है। उनके हालिया बयानों को पार्टी के कोर समर्थक वर्ग को एकजुट रखने और चुनावी संदेश को स्पष्ट करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा नेतृत्व यह भी मानता है कि वैचारिक मुद्दों और विकास कार्यों का संयुक्त प्रस्तुतीकरण चुनावी दृष्टि से लाभकारी साबित हो सकता है।

    दूसरी ओर समाजवादी पार्टी भी बदले हुए राजनीतिक माहौल के अनुरूप अपनी रणनीति में बदलाव करती नजर आ रही है। अखिलेश यादव ने पिछले कुछ समय में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भागीदारी बढ़ाई है। मंदिरों के दर्शन, धार्मिक स्थलों के विकास संबंधी घोषणाएं और सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर सकारात्मक रुख को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसे भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे के मुकाबले सॉफ्ट हिंदुत्व की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

    साथ ही समाजवादी पार्टी अपने पारंपरिक सामाजिक गठबंधन को मजबूत बनाए रखने के प्रयास में भी जुटी हुई है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि धार्मिक मुद्दों पर संतुलित रुख अपनाते हुए व्यापक सामाजिक समूहों को साथ रखा जाए। यही कारण है कि हाल के महीनों में पार्टी के कई नेताओं को विवादित धार्मिक या जातीय टिप्पणियों से बचने की सलाह दी गई है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश का चुनाव केवल वैचारिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा। रोजगार, कानून व्यवस्था, बुनियादी ढांचा, किसानों की समस्याएं और युवाओं की आकांक्षाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। हालांकि हिंदुत्व और सांस्कृतिक पहचान जैसे विषय चुनावी विमर्श का प्रमुख हिस्सा बने रह सकते हैं।

    भाजपा जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अपने मजबूत संगठन और सरकार की उपलब्धियों के सहारे चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी सामाजिक समीकरणों, क्षेत्रीय मुद्दों और संतुलित राजनीतिक संदेश के जरिए मुकाबला करने की रणनीति पर काम कर रही है।

    आने वाले महीनों में दोनों दलों की राजनीतिक गतिविधियां और अधिक तेज होने की संभावना है। फिलहाल यह स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश की चुनावी लड़ाई केवल विकास बनाम विकास की नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश, वैचारिक पहचान और सामाजिक संतुलन की भी होगी। ऐसे में 2027 का चुनाव राज्य की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा साबित हो सकता है।