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  • ई20 पेट्रोल पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, कहा- 'दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है'।

    ई20 पेट्रोल पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, कहा- 'दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है'।


    नई दिल्ली ।
    देश में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित यानी ई20 पेट्रोल को लेकर राजनीतिक घमासान काफी तेज हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक विशेष वीडियो संदेश जारी कर केंद्र सरकार की इथेनॉल मिश्रण नीति पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने सरकार की इस नीति की नीयत और निष्पादन पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि आमतौर पर कहावत है कि दाल में कुछ काला है, लेकिन ई20 पेट्रोल के मामले में तो पूरी दाल ही काली नजर आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस निर्णय से देश की आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है और यह सीधे तौर पर लोगों की जेब काटने जैसा है।

    राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी किए गए वीडियो में स्पष्ट किया कि ई20 ईंधन का मुद्दा सीधे तौर पर देश के करोड़ों वाहन चालकों और आम नागरिकों के जीवन से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से चारपहिया वाहनों, मोटरसाइकिलों और स्कूटरों के इंजन पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है। इसके साथ ही वाहनों का माइलेज घटने के कारण लोगों को ईंधन पर अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। विपक्षी नेता ने आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को शांत नहीं होने देगी और इसके खिलाफ आने वाले दिनों में व्यापक स्तर पर जन-अभियान चलाया जाएगा।

    मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का दावा है कि ई20 लागू करते समय सरकार ने उपभोक्ताओं को सस्ता ईंधन देने का जो वादा किया था, उसे पूरा नहीं किया गया है। पार्टी के अनुसार, अधिकांश पेट्रोल पंपों पर केवल ई20 ईंधन उपलब्ध कराए जाने के कारण वाहन मालिकों के पास अन्य कोई विकल्प नहीं बचा है। विपक्ष का आरोप है कि माइलेज कम होने से उपभोक्ताओं पर अरबों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा है, जबकि इसका सबसे अधिक वित्तीय लाभ केवल इथेनॉल उत्पादन से जुड़े उद्योगपतियों और कंपनियों को ही मिल रहा है।

    दूसरी ओर, केंद्र सरकार इस नीति को देशहित और पर्यावरण के अनुकूल बताकर इसका बचाव कर रही है। सरकार का तर्क है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विदेशी कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता को कम करना और कीमती विदेशी मुद्रा बचाना है। इसके साथ ही, इथेनॉल उत्पादन से देश के गन्ना किसानों और कृषि क्षेत्र को बेहतर मूल्य मिलने की बात कही गई है। हालांकि, विपक्ष अब इस मुद्दे को आम जनता के आर्थिक नुकसान से जोड़कर बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहा है, जिससे इस विषय पर आने वाले समय में राजनीतिक पारा और चढ़ने की पूरी संभावना है।

  • श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए मथुरा पहुंचे भरतपुर के गुलाबी पत्थर, नौ अगस्त से कारसेवा का एलान।

    श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए मथुरा पहुंचे भरतपुर के गुलाबी पत्थर, नौ अगस्त से कारसेवा का एलान।

    मथुरा । श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति और मंदिर निर्माण अभियान को लेकर मथुरा में हलचल काफी तेज हो गई है। राधाकुंड क्षेत्र के जुल्हैंदी स्थित चित्रगुप्त पीठ में भव्य मंदिर निर्माण के उद्देश्य से मंगाए गए गुलाबी पत्थरों की पहली खेप देर रात पहुंच गई है। ये विशेष पत्थर राजस्थान के भरतपुर स्थित बंसीपहाड़पुर से मंगवाए गए हैं। उल्लेखनीय है कि इन्हीं प्रसिद्ध पत्थरों का उपयोग अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण में भी किया गया है। चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज के नेतृत्व में पत्थरों के आगमन के साथ ही नौ अगस्त से विधिवत कारसेवा और पत्थर तराशने का काम शुरू करने का ऐलान किया गया है।

    स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए नौ अगस्त को आश्रम से शंखनाद किया जाएगा। इसके लिए एक भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश भर के 13 अखाड़ों के साधु-संतों और प्रमुख धर्माचार्यों को आमंत्रित किया गया है। महाराज ने स्पष्ट किया कि जन्मस्थान पर भव्य मंदिर के निर्माण हेतु कुल पांच हजार मीट्रिक टन गुलाबी पत्थरों का ऑर्डर दिया गया है। पत्थरों की पहली खेप पहुंचने से यह साफ हो गया है कि पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार कार्य को गति दी जाएगी।

    इस अभियान की रूपरेखा तैयार करने के लिए जुलाई माह से ही गतिविधियां जारी थीं। स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने पूर्व में अयोध्या आंदोलन की तर्ज पर कारसेवा का आह्वान किया था, जिसके समर्थन में उन्होंने हरिद्वार जाकर वरिष्ठ संतों से मुलाकात भी की थी। इस पहल को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और निर्मोही अखाड़े सहित कई प्रमुख धार्मिक संगठनों का समर्थन प्राप्त हो चुका है। संतों के इस रुख और पत्थरों के आगमन के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पूरी तरह से सतर्क हो गई है।

    प्रशासनिक अधिकारियों ने शांति व्यवस्था बनाए रखने और स्थिति की समीक्षा के लिए कई बार आयोजकों से बातचीत की थी। हालांकि, आश्रम परिसर में पत्थरों के पहुंचने के बाद संतों का रुख पूरी तरह से स्पष्ट दिखाई दे रहा है। नौ अगस्त से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में संतों का बड़ा जमावड़ा होने की उम्मीद है, जहां से आगामी रूपरेखा पर निर्णय लिया जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम ने मथुरा और आसपास के क्षेत्रों में राजनीतिक व धार्मिक सरगर्मियों को और बढ़ा दिया है।

  • सांसद पार्थ भौमिक के खिलाफ बैरकपुर में लगे विवादित पोस्टर, पीएम मोदी से मुलाकात के बाद बढ़ा तनाव।

    सांसद पार्थ भौमिक के खिलाफ बैरकपुर में लगे विवादित पोस्टर, पीएम मोदी से मुलाकात के बाद बढ़ा तनाव।

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब बैरकपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद पार्थ भौमिक के खिलाफ उनके अपने ही क्षेत्र में जगह-जगह विवादित पोस्टर देखने को मिले। तृणमूल कांग्रेस का दामन छोड़कर हाल ही में नई पार्टी में शामिल हुए भौमिक के खिलाफ लगाए गए इन पोस्टरों में उन्हें गद्दार करार दिया गया है और स्थानीय नागरिकों को उनसे सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है। यह घटनाक्रम नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ उनकी हुई उच्चस्तरीय बैठकों के तुरंत बाद सामने आया है।

    दीर्घकालिक राजनीतिक करियर वाले पार्थ भौमिक लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं। वे 2011 से 2021 के बीच तीन बार विधायक चुने गए और इसके बाद 2024 के आम चुनावों में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर बैरकपुर से सांसद बने थे। हालांकि, राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद उन्होंने पार्टी और इंडिया गठबंधन से दूरी बना ली तथा नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया का हिस्सा बनकर बीजेपी को अपना समर्थन दे दिया। दिल्ली में शीर्ष नेताओं के साथ उनकी बैठकों और तस्वीरों के सार्वजनिक होने के बाद से ही उनके खिलाफ राजनीतिक विरोध मुखर होने लगा था।

    बैरकपुर क्षेत्र में दिखे इन पोस्टरों पर किसी राजनीतिक दल का आधिकारिक नाम दर्ज नहीं है, बल्कि इन्हें स्थानीय नागरिकों के नाम से लगाया गया है। पोस्टरों में भौमिक की तस्वीर के साथ जनता से विश्वासघात करने के आरोप जड़े गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य में तृणमूल कांग्रेस और बागी नेताओं के बीच की कड़वाहट को और अधिक गहरा कर दिया है। स्थानीय स्तर पर इन पोस्टरों के सामने आने के बाद राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी का दौर भी तेज हो गया है।

    स्थानीय नेताओं का कहना है कि पार्टी बदलने और गठबंधन बदलने के फैसले से क्षेत्र के उन लाखों मतदाताओं में भारी नाराजगी है, जिन्होंने उन्हें 2024 के चुनाव में अपना समर्थन दिया था। विरोधियों का दावा है कि यह आक्रोश आम जनता और मतदाताओं की भावना का परिणाम है जो खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। वहीं, समर्थक इसे राजनीतिक द्वेष से प्रेरित और विरोधी दलों की हताशा का नतीजा बता रहे हैं।

    संसदीय क्षेत्र में पोस्टरों के जरिए शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन बंगाल की भावी राजनीति में बढ़ते तनाव का स्पष्ट संकेत दे रहा है। दिल्ली में बैठकों के बाद उभरे इस विवाद से बैरकपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गई हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर विरोध और समर्थन की राजनीति और तीखी होने की संभावना जताई जा रही है।

  • महुआ मोइत्रा केस पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर CJP प्रवक्ता ने दी प्रतिक्रिया, उठाए सवाल

    महुआ मोइत्रा केस पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर CJP प्रवक्ता ने दी प्रतिक्रिया, उठाए सवाल


    नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा की एक आपराधिक मामले में पुलिस के सामने वर्चुअल पेशी की मांग सुप्रीम कोर्ट ने 7 अगस्त को खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता की टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलकों में विवाद खड़ा हो गया है। अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने अदालत की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए जज की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

    अंडे फेंके जाने का दिया गया था हवाला

    महुआ मोइत्रा के खिलाफ फेसबुक पोस्ट से जुड़े मामले में एफआईआर दर्ज है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने उन्हें 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट में महुआ की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने मांग की थी कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से पुलिस के सामने जाने के बजाय वर्चुअली पेश होने की अनुमति दी जाए।

    वकील ने अदालत को बताया कि पिछली बार अपने निर्वाचन क्षेत्र के पुलिस स्टेशन जाने के दौरान महुआ पर अंडे फेंके गए थे। ऐसे में दोबारा वहां जाने पर भीड़ द्वारा उन्हें निशाना बनाए जाने की आशंका है।

    जस्टिस दीपांकर दत्ता की टिप्पणी पर विवाद

    जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने वर्चुअल पेशी की मांग पर राहत देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने टिप्पणी की कि राजनीति में आने के बाद महुआ को अंडों से डर क्यों लगता है, जबकि स्वतंत्रता सेनानियों ने गोलियां तक अपने सीने पर झेली थीं।

    सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद महुआ मोइत्रा की ओर से दायर याचिका वापस ले ली गई, जिसके बाद अदालत ने उसे खारिज कर दिया।

    CJP प्रवक्ता ने जज पर उठाए सवाल

    अदालत की टिप्पणी के बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सुप्रीम कोर्ट के जज चाहते हैं कि महुआ मोइत्रा गोलियां खाएं। उन्होंने न्यायाधीशों की नियुक्ति और न्यायिक जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े किए।

    सौरव दास ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में यह टिप्पणी निंदनीय है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर महुआ मोइत्रा को कुछ होता है तो इसके लिए जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ जिम्मेदार होगी। उन्होंने न्यायिक जवाबदेही की जरूरत बताते हुए यहां तक कहा कि ऐसे मामलों में जजों को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया जाना चाहिए या महाभियोग चलना चाहिए।

    CJP संस्थापक ने भी जताई आपत्ति

    CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि क्या अब अदालत चाहती है कि हर कोई गोलियां खाए। उन्होंने कहा कि यदि संवैधानिक अदालत के न्यायाधीश विपक्षी नेताओं के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी करते हैं, तो आम नागरिक के लिए क्या उम्मीद बचती है।

    मोइत्रा को पहले भी मिल चुकी है अंतरिम राहत

    इस मामले से जुड़े एक अन्य प्रकरण में कलकत्ता हाई कोर्ट ने 21 जुलाई को महुआ मोइत्रा को पांच अक्टूबर तक किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम राहत दी थी। यह मामला कथित तौर पर नफरत फैलाने वाले भाषण से जुड़ा है। महुआ मोइत्रा ने आरोपों को मनगढ़ंत बताया है।

  • FCRA बिल पर संसद में संग्राम के आसार, कांग्रेस ने 10-12 अगस्त के लिए जारी किया व्हिप

    FCRA बिल पर संसद में संग्राम के आसार, कांग्रेस ने 10-12 अगस्त के लिए जारी किया व्हिप


    नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र के अंतिम सप्ताह में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ने के आसार हैं। विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक यानी FCRA बिल को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। कांग्रेस ने शुक्रवार दोपहर लोकसभा सांसदों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी कर 10, 11 और 12 अगस्त को सदन में अनिवार्य रूप से मौजूद रहने का निर्देश दिया है। माना जा रहा है कि दूसरे विपक्षी दल भी इसी तरह के निर्देश जारी कर सकते हैं।

    10 अगस्त को बिल पेश होने की चर्चा

    संभावना जताई जा रही है कि FCRA संशोधन विधेयक 10 अगस्त को लोकसभा में पेश किया जा सकता है। चूंकि यह विधेयक गृह मंत्रालय से संबंधित है, इसलिए विपक्ष की नजर गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी पर भी है।

    शुक्रवार सुबह राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यालय में हुई बैठक में कांग्रेस नेतृत्व ने सहयोगी दलों से भी सोमवार से अपने सांसदों की सदन में पर्याप्त मौजूदगी सुनिश्चित करने को कहा है।

    विपक्ष पहले से ही 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान देने की मांग कर रहा है। इस मुद्दे को लेकर मॉनसून सत्र के दौरान कई बार सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई है।

    कांग्रेस के लोकसभा व्हिप मणिकम टैगोर ने कहा कि पार्टी अगले सप्ताह परिसीमन और FCRA बिल के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमित शाह पिछले 12 दिनों से सदन में मौजूद नहीं हैं और सरकार छात्रों के विरोध प्रदर्शन से ध्यान भटकाने की कोशिश कर सकती है।

    SP और TMC भी विपक्ष के साथ

    FCRA बिल को लेकर इंडिया ब्लॉक के अन्य दल भी कांग्रेस के साथ नजर आ रहे हैं। समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा कि उनकी पार्टी विपक्ष के सामूहिक एजेंडे का समर्थन करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर सपा भी व्हिप जारी कर सकती है।

    सपा नेता ने यह आशंका भी जताई कि सरकार FCRA बिल पर चर्चा के दौरान अमित शाह की जगह गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय को सदन में भेज सकती है।

    वहीं, तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ सांसद के मुताबिक, पार्टी ने भी अपने सभी सांसदों को सोमवार से सदन में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, सभी दलों की ओर से औपचारिक व्हिप जारी करना जरूरी नहीं है और कुछ पार्टियां अपने सांसदों को अनौपचारिक निर्देश भी देती हैं।

    FCRA बिल को लेकर क्या है विवाद?

    FCRA संशोधन विधेयक के कुछ प्रावधानों को लेकर पहले से विवाद है। खास तौर पर ईसाई संगठनों में उस प्रावधान को लेकर चिंता जताई जा रही है, जिसके तहत FCRA रजिस्ट्रेशन खत्म होने वाले संगठनों की संपत्तियों पर सरकार द्वारा नामित प्राधिकरण को पूर्वव्यापी अधिकार मिलने की आशंका है।

    कई चर्च और ईसाई संस्थानों का निर्माण विदेशी चंदे से हुआ है और वे FCRA के दायरे में आते हैं। ऐसे में इस विधेयक को भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील माना जा रहा है, खासकर केरल जैसे राज्यों में जहां पार्टी ईसाई समुदाय के बीच अपना आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

    हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने बुधवार को संकेत दिया था कि विधेयक में कोई दंडात्मक पूर्वव्यापी प्रावधान नहीं होगा। इसके बाद गुरुवार को मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर अपनी चिंताएं रखीं और ज्ञापन सौंपा। लालदुहोमा ने बताया कि शाह ने उन्हें आश्वासन दिया है कि विधेयक 12 अगस्त को लोकसभा में लाया जाएगा और इसमें कोई रेट्रोस्पेक्टिव क्लॉज नहीं होगा।

    13 अगस्त को खत्म होना है मॉनसून सत्र

    संसद का मॉनसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होने वाला है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि फिलहाल सत्र की अवधि बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

    इस बीच राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को किरेन रिजिजू से विपक्ष की भावनाओं से अमित शाह को अवगत कराने और सदन में उनकी मौजूदगी की मांग पर विचार करने को कहा था। ऐसे में सत्र के अंतिम तीन दिन सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

  • IIT मद्रास के छह वैज्ञानिकों को जेसी बोस अनुदान: भारत के अत्याधुनिक अनुसंधान को मिली बड़ी राष्ट्रीय पहचान

    IIT मद्रास के छह वैज्ञानिकों को जेसी बोस अनुदान: भारत के अत्याधुनिक अनुसंधान को मिली बड़ी राष्ट्रीय पहचान

    चेन्नई। किसी देश की वैज्ञानिक शक्ति का वास्तविक आकलन इस बात से होता है कि उसके वैज्ञानिक कितने कठिन सवालों के समाधान खोज रहे हैं और उनका शोध समाज तथा राष्ट्र के भविष्य को कितना बदल सकता है। इसी कसौटी पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT मद्रास) के छह वैज्ञानिकों की उपलब्धि विशेष महत्व रखती है। संस्थान के छह वरिष्ठ संकाय सदस्यों को अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के प्रतिष्ठित जेसी बोस अनुदान के लिए चुना गया है।

    दरअसल, यह उपलब्धि इन छह वैज्ञानिकों के व्यक्तिगत शोध सम्मान तक सीमित नहीं है। यह भारत में उच्च स्तरीय, दीर्घकालिक और समस्या-समाधान आधारित अनुसंधान को मिल रही बढ़ती राष्ट्रीय प्राथमिकता का संकेत भी है। जिन छह प्रोफेसरों को यह अनुदान मिला है, उनका शोध कृत्रिम अंग और पुनर्वास तकनीक, स्वच्छ पेयजल, अगली पीढ़ी का ऑप्टिकल संचार, कार्बन कैप्चर, चिकित्सा उपकरण तथा अत्याधुनिक बोरॉन रसायन विज्ञान जैसे क्षेत्रों से जुड़ा है।चयनित वैज्ञानिकों में प्रो. सुजाता श्रीनिवासन, प्रो. थलप्पिल प्रदीप, प्रो. दीपा वेंकटेश, प्रो. जितेंद्र एस. सांगवाई, प्रो. रामकृष्णन स्वामीनाथन और प्रो. सुंदरगोपाल घोष शामिल हैं।

    छह वैज्ञानिक, छह अलग क्षेत्र- एक साझा लक्ष्य: भारत को ज्ञान और तकनीक में आगे ले जाना
    आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामाकोटी ने चयनित वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि यह संस्थान में महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में हो रहे उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान एवं विकास को दर्शाता है। इन छह वैज्ञानिकों के शोध की विविधता आईआईटी मद्रास की अनुसंधान क्षमता की व्यापक तस्वीर प्रस्तुत करती है। एक ओर जहां प्रो. सुजाता श्रीनिवासन का काम दिव्यांगजनों और गतिशीलता संबंधी चुनौतियों से जूझ रहे लोगों के जीवन को आसान बनाने वाली तकनीकों पर केंद्रित है, वहीं प्रो. थलप्पिल प्रदीप का शोध देश के सामने मौजूद स्वच्छ पेयजल की चुनौती के तकनीकी समाधान खोज रहा है। दूसरी ओर प्रो. दीपा वेंकटेश भारत की उच्च क्षमता वाली ऑप्टिकल संचार व्यवस्था को नई दिशा दे रही हैं और प्रो. जितेंद्र एस. सांगवाई ऊर्जा तथा कार्बन प्रबंधन से जुड़ी जटिल चुनौतियों पर काम कर रहे हैं।

    इसी तरह प्रो. रामकृष्णन स्वामीनाथन का शोध चिकित्सा उपकरणों और मानव शरीर के मस्तिष्क-मांसपेशी संबंधी कार्यों को समझने में मदद कर रहा है, जबकि प्रो. सुंदरगोपाल घोष का काम उन्नत बोरॉन रसायन विज्ञान और भविष्य की रासायनिक तकनीकों के लिए नए रास्ते खोल रहा है।

    कृत्रिम अंगों को भारतीय जरूरतों के अनुरूप बनाने वाली सुजाता श्रीनिवासन
    मैकेनिकल इंजीनियरिंग की प्रोफेसर सुजाता श्रीनिवासन कृत्रिम अंग, सहायक प्रौद्योगिकी और पुनर्वास उपकरणों के क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रही हैं। वे TTK सेंटर फॉर रिहैबिलिटेशन रिसर्च एंड डिवाइस डेवलपमेंट (R2D2) तथा नेशनल सेंटर फॉर असिस्टिव हेल्थ टेक्नोलॉजीज से जुड़ी हैं।

    उनकी टीम ने भारतीय परिस्थितियों और जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए अनेक किफायती सहायक उपकरण विकसित किए हैं। इनमें NeoFly-NeoBolt प्रणाली, स्टैंडिंग व्हीलचेयर, Kadam कृत्रिम घुटना और YD One हल्की व्हीलचेयर उल्लेखनीय हैं। उनके शोध का महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि प्रयोगशाला में विकसित तकनीक को वास्तविक उपयोग तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया है। उनके नाम कृत्रिम अंगों और सहायक प्रौद्योगिकी से जुड़े कई भारतीय, अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट भी हैं।

    करोड़ों लोगों तक सुरक्षित पानी पहुंचाने वाले शोध की पहचान
    रसायन विज्ञान के प्रोफेसर थलप्पिल प्रदीप भारत में स्वच्छ जल तकनीक के क्षेत्र में एक जाना-पहचाना नाम हैं। उनका शोध नैनोमटेरियल्स, माइक्रोड्रॉपलेट्स, आइस केमिस्ट्री और विशेष रूप से किफायती जल शोधन तकनीकों से जुड़ा है।

    उनके शोध का सबसे बड़ा सामाजिक प्रभाव यह है कि प्रयोगशाला में विकसित तकनीकों को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। उन्हें पद्म श्री, विज्ञान श्री, एनी पुरस्कार और विनफ्यूचर पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने आईआईटी मद्रास रिसर्च पार्क में इंटरनेशनल सेंटर फॉर क्लीन वाटर की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जेसी बोस अनुदान का यह उनका तीसरा पांच वर्षीय कार्यकाल है।

    ऑप्टिकल संचार में स्वदेशी क्षमता का निर्माण
    इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की प्रोफेसर दीपा वेंकटेश उच्च क्षमता वाले ऑप्टिकल कम्युनिकेशन, माइक्रोवेव फोटोनिक्स और ऑप्टिकल सिग्नल प्रोसेसिंग में विशेषज्ञता रखती हैं। वे एडवांस्ड ऑप्टिकल कम्युनिकेशन टेस्टबेड की प्रोजेक्ट लीड हैं।

    दूरसंचार विभाग के समर्थन से चल रही इस पहल के तहत आईआईटी मद्रास में मल्टीकोर फाइबर के साथ देश का पहला फील्ड टेस्टबेड स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य भारत में ऑप्टिकल संचार के क्षेत्र में स्वदेशी समाधान विकसित करने और तकनीकी मानकीकरण को आगे बढ़ाना है। वे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी नवाचार राष्ट्रीय फैलोशिप की प्राप्तकर्ता भी हैं।

    कार्बन कैप्चर से ऊर्जा सुरक्षा तक सांगवाई का शोध
    केमिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर जितेंद्र एस. सांगवाई का अनुसंधान वर्तमान वैश्विक ऊर्जा और जलवायु चुनौतियों से सीधे जुड़ा है। उनका प्रमुख शोध क्षेत्र कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड सीक्वेस्ट्रेशन (CCUS), गैस हाइड्रेट्स और अपस्ट्रीम ऑयल एंड गैस इंजीनियरिंग है।

    वे 200 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं और उनके शोध कार्यों को लगभग 11,000 उद्धरण प्राप्त हुए हैं। उनके नाम 43 पेटेंट भी हैं। वे भारतीय राष्ट्रीय अभियांत्रिकी अकादमी और राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारत के फेलो हैं।

    चिकित्सा तकनीक में मानव शरीर को समझने का प्रयास
    प्रो. रामकृष्णन स्वामीनाथन का शोध बायोमेडिकल उपकरणों और मस्तिष्क तथा मांसपेशियों के कार्यों के विश्लेषण से जुड़ा है। उनका प्रयास चिकित्सा उपकरणों को अधिक वैज्ञानिक, सटीक और नैदानिक रूप से उपयोगी बनाने पर केंद्रित रहा है।

    उन्होंने अपने करियर में 50 से अधिक शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया है और 550 से अधिक शोध लेख प्रकाशित किए हैं। चिकित्सा उपकरणों के नियमों और मानकों के वैश्विक सामंजस्य के वे प्रमुख समर्थक हैं और इस विषय से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं।

    बोरॉन रसायन विज्ञान में नई संभावनाओं की तलाश
    रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर सुंदरगोपाल घोष संक्रमण धातु-बोरॉन रसायन विज्ञान में अग्रणी अनुसंधान कर रहे हैं। उनका काम बोरॉन-युक्त आणविक प्रणालियों के संश्लेषण, संरचना, इलेक्ट्रॉनिक बंधन और रासायनिक प्रतिक्रियाशीलता को समझने पर केंद्रित है।

    उन्होंने 325 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं और उनका शोध विशेष रूप से उत्प्रेरण तथा छोटे अणुओं के सक्रियण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण माना जाता है। वे भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारतीय विज्ञान अकादमी तथा राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारत के विशिष्ट फेलो हैं।

    पांच वर्षों तक शोध को मिलेगा मजबूत आधार
    ANRF जेसी बोस अनुदान वरिष्ठ वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को उनके उत्कृष्ट शोध प्रदर्शन के आधार पर प्रदान किया जाता है। चयन में शोध प्रकाशन, पेटेंट, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, शोध परिणाम, अनुदान और वैज्ञानिक उत्कृष्टता के अन्य मानकों को ध्यान में रखा जाता है।

    इस अनुदान के तहत चयनित वैज्ञानिकों को पांच वर्षों तक प्रतिवर्ष 25 लाख रुपये की सहायता मिलती है। इसका उपयोग मानव संसाधन, उपकरण, उपभोग्य सामग्री, यात्रा, आकस्मिक खर्च और अन्य शोध आवश्यकताओं के लिए किया जा सकता है, साथ ही संस्थागत ओवरहेड सहायता भी उपलब्ध होती है।

    उल्‍लेखनीय है कि आईआईटी मद्रास के छह वैज्ञानिकों का एक साथ इस प्रतिष्ठित अनुदान के लिए चयन इस तथ्य को रेखांकित करता है कि भारत का वैज्ञानिक अनुसंधान अब प्रयोगशालाओं और शोध पत्रों से निरंतर आगे बढ़ते हुए कृत्रिम अंगों से लेकर स्वच्छ जल, डिजिटल संचार से लेकर स्वच्छ ऊर्जा और चिकित्सा तकनीक से लेकर उन्नत रसायन विज्ञान तक, भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान तेजी से उन क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ रहा है, जोकि आने वाले दशकों में भारत की सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी शक्ति को निर्धारित करेंगे।

  • J-K में चेकिंग से बचकर भागी काली स्कॉर्पियो, 3 चेतावनी फायर के बाद जंगल में छोड़ी गाड़ी, एक संदिग्ध गिरफ्तार

    J-K में चेकिंग से बचकर भागी काली स्कॉर्पियो, 3 चेतावनी फायर के बाद जंगल में छोड़ी गाड़ी, एक संदिग्ध गिरफ्तार


    जम्मू । रामबन जिले में जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर शुक्रवार तड़के एक काली स्कॉर्पियो सुरक्षा जांच चौकी पर रुकने के बजाय तेज रफ्तार में आगे बढ़ गई। खतरा भांपते हुए पुलिसकर्मियों ने तीन चेतावनी भरे फायर किए। इसके बाद वाहन में सवार लोग स्कॉर्पियो छोड़कर फरार हो गए। बड़े पैमाने पर चलाए गए तलाशी अभियान में एक संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दो अन्य की तलाश जारी है।

    घटना शुक्रवार सुबह करीब 4 बजे चंदेरकोट सुरक्षा जांच चौकी के पास हुई। अधिकारियों के मुताबिक, श्रीनगर से जम्मू की ओर जा रही स्कॉर्पियो का रजिस्ट्रेशन नंबर JK02AK-1743 था। पुलिसकर्मियों ने वाहन को रुकने का इशारा किया, लेकिन चालक ने चौकी की ओर गाड़ी की रफ्तार बढ़ा दी। इससे ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों की जान को खतरा पैदा हो गया।

    पुलिसकर्मी ने किए तीन चेतावनी फायर
    रामबन के एसएसपी अरुण गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि घटना से कुछ समय पहले चंदेरकोट पुलिस स्टेशन को स्कॉर्पियो के आने की सूचना मिली थी। चेकिंग के दौरान चालक को रुकने का संकेत दिया गया, लेकिन उसने चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया और तेज गति से चौकी की तरफ बढ़ने लगा। खतरे को देखते हुए चंदेरकोट चेकपोस्ट पर तैनात कॉन्स्टेबल रसाल चंद ने अपनी सर्विस राइफल से तीन चेतावनी फायर किए। इसके बावजूद चालक और उसके साथी वाहन लेकर वहां से भाग निकले।

    डालवास के पास लावारिस मिली स्कॉर्पियो
    घटना के तुरंत बाद चंदेरकोट पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई। वाहन और उसमें सवार लोगों की तलाश के लिए रामबन पुलिस, स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप, सीआरपीएफ और सेना ने संयुक्त रूप से अभियान शुरू किया। तलाशी के दौरान स्कॉर्पियो डालवास के पास लावारिस हालत में बरामद हुई। पुलिस ने वाहन की गहन जांच कराई और फोरेंसिक टीम ने मौके से जरूरी साक्ष्य व नमूने जुटाए।

    पिछली सीटें हटाई गई थीं, अंदर मिला गोबर
    जांच में स्कॉर्पियो की पिछली सीटें हटाई हुई मिलीं। वाहन के अंदर गोबर भी मिला। पुलिस को आशंका है कि इसका इस्तेमाल एनएच-44 पर मवेशियों की अवैध ढुलाई के लिए किया जा रहा हो सकता है। हालांकि, पुलिस अभी इस पहलू की जांच कर रही है। वाहन पर गोली के तीन निशान भी मिले हैं। शुरुआती तौर पर माना जा रहा है कि ये निशान चंदेरकोट चेकपोस्ट पर पुलिस की फायरिंग के दौरान लगे।

    उधमपुर का एक आरोपी पकड़ा गया
    एसएसपी अरुण गुप्ता के मुताबिक, तलाशी अभियान के दौरान उधमपुर जिले के रहने वाले अल्ताफ मोहम्मद को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, फरार अन्य संदिग्धों की पहचान और तलाश के लिए अभियान जारी है। फोरेंसिक टीम ने बरामद स्कॉर्पियो से साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वाहन सुरक्षा जांच चौकी से क्यों भागा, उसमें सवार लोगों की क्या भूमिका थी और इस पूरी घटना के पीछे वास्तविक मकसद क्या था।

  • Gen-Z के मुद्दे पर थरूर का BJP पर हमला, बोले- सत्ताधारी पार्टी को लगा बड़ा झटका

    Gen-Z के मुद्दे पर थरूर का BJP पर हमला, बोले- सत्ताधारी पार्टी को लगा बड़ा झटका


    नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मुंबई में जेन-जी और जेन-अल्फा के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के संवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दावा किया कि हाल के घटनाक्रमों से सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है।

    थरूर ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए ‘कॉकरोच पार्टी’ के प्रदर्शन, एक मंत्री के इस्तीफे और उसके बाद जल्दबाजी में पारित किए गए बिल के अलावा हालिया दो उपचुनावों के नतीजे भी सत्तारूढ़ दल के लिए चिंता का विषय हैं।

    BJP की गढ़ मानी जाने वाली सीट हारने का किया जिक्र
    शशि थरूर ने प्रशांत किशोर की जीत का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने BJP की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली सीट पर जीत दर्ज की है। उनके मुताबिक, इस सीट पर BJP तीन दशक से ज्यादा समय से जीतती आ रही थी और पार्टी ने यहां नौ बार जीत हासिल की थी, लेकिन अब उसे हार का सामना करना पड़ा।

    उन्होंने मध्य प्रदेश की दतिया सीट का भी उल्लेख किया और कहा कि कांग्रेस इस सीट को बरकरार रखने में सफल रही है। थरूर ने कहा कि दोनों ही सीटें हिंदी भाषी राज्यों में आती हैं और इन नतीजों से आगे के चुनावों को लेकर उम्मीद नजर आती है।

    उन्होंने कहा कि अलग-अलग समय पर होने वाले चुनाव राजनीतिक दलों को अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका देते हैं। थरूर के मुताबिक, अगले मार्च में कुछ राज्यों में चुनाव होने हैं और कांग्रेस उन राज्यों में जीत हासिल करने की स्थिति में है।

    मोहन भागवत ने Gen-Z को लेकर क्या कहा था?
    मुंबई में Gen-Z और Gen-Alpha के साथ संवाद के दौरान RSS प्रमुख मोहन भागवत ने नई पीढ़ी को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि Gen-Z और Gen-Alpha पुरानी पीढ़ी की तुलना में भी अधिक देशभक्त और ईमानदार हैं और उनकी बात सुनी जानी चाहिए।

    भागवत ने यह भी कहा कि नई पीढ़ी के साथ संवाद में कमी रही, जिसकी वजह से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन जैसी स्थिति सामने आई। उन्होंने 20 जुलाई को दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के कुछ दिनों बाद कहा था कि आज की युवा पीढ़ी बहुत से सवाल पूछती है।

    मोहन भागवत का यह संवाद ऐसे समय में हुआ है, जब युवा मुद्दों और Gen-Z की राजनीतिक भागीदारी को लेकर देश की राजनीति में चर्चा तेज है। इसी को लेकर शशि थरूर ने भी सत्ताधारी दल के लिए हालिया घटनाक्रमों को राजनीतिक चेतावनी के तौर पर पेश किया है।

  • अतीक के टूटे पुश्तैनी घर से कब्रिस्तान तक जाएगा अबान का शव, आज पिता की कब्र के बगल में होगा दफन

    अतीक के टूटे पुश्तैनी घर से कब्रिस्तान तक जाएगा अबान का शव, आज पिता की कब्र के बगल में होगा दफन


    प्रयागराज। माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद को शनिवार को प्रयागराज के कसारी-मसारी स्थित पैतृक कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अबान का शव फिलहाल कसारी-मसारी के पास हटवा गांव में रखा गया है, जहां उसकी बुआ प्रवीन कुरैशी रहती हैं। शुक्रवार को आखिरी दीदार के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

    झांसी में पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार को अबान का शव हटवा गांव लाया गया था। अब शनिवार को अंतिम संस्कार से पहले शव को अतीक अहमद के उस पुश्तैनी घर की जगह पर भी रखा जाएगा, जो अब बुलडोजर कार्रवाई के बाद मलबे में तब्दील हो चुका है।

    मलबे में तब्दील घर में लगाया गया टेंट
    कसारी-मसारी स्थित अतीक अहमद का पुश्तैनी मकान कभी उसके परिवार की पहचान हुआ करता था। माफिया और बाहुबली के खिलाफ कार्रवाई के दौरान इस मकान को बुलडोजर से गिरा दिया गया था। अब यहां सिर्फ जमीन और मलबा बचा है।

    बताया जाता है कि अतीक परिवार में किसी सदस्य की मौत होने पर कब्रिस्तान ले जाने से पहले शव को इसी घर में रखा जाता रहा है। वर्ष 2023 में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए अतीक के बेटे असद का शव भी अंतिम संस्कार से पहले यहां लाया गया था। अबान के शव को रखने के लिए मलबे के बीच बची जमीन पर टेंट लगाया गया है। यहां डीप फ्रीजर की व्यवस्था भी की गई है। अंतिम संस्कार के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए पुलिस की तैनाती की गई है।

    अतीक की कब्र के ठीक बगल में खोदी गई कब्र
    अबान को कसारी-मसारी के खानदानी कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा। इसी कब्रिस्तान में अतीक अहमद, उसके पिता हाजी फिरोज अहमद, मां, भाई अशरफ और बेटे असद अहमद की कब्रें हैं। अबान के लिए अतीक अहमद की कब्र के ठीक बगल में कब्र खोदी गई है।

    अंतिम संस्कार में शामिल होंगे अली और उमर
    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को जेल में बंद अतीक के दोनों बेटों अली और उमर को छोटे भाई अबान के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल दी। अली झांसी जेल में, जबकि उमर लखनऊ जेल में बंद है।

    अदालत ने निर्देश दिया है कि अंतिम संस्कार पूरा होने के बाद दोनों को पुलिस कस्टडी में संबंधित जेलों में वापस ले जाया जाएगा। दोनों भाइयों को किसी सार्वजनिक सभा को संबोधित करने और मीडिया, सोशल मीडिया या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से बातचीत करने की अनुमति नहीं होगी। अदालत के आदेश के अनुसार, वे केवल अंतिम संस्कार कराने वाले व्यक्ति, अपनी बुआ और भाई अहजम अहमद से बातचीत कर सकेंगे।

    झांसी में सड़क हादसे में हुई अबान की मौत
    अबान अहमद की मौत गुरुवार को झांसी-कानपुर हाईवे पर सड़क हादसे में हुई थी। पूंछ थाना क्षेत्र के खिल्ली गांव के पास तेज रफ्तार कार अचानक सड़क पर आए जानवर को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई थी। हादसे में अबान और उसके साथी सोनू की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि कार में सवार तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। सभी को झांसी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। अबान अतीक अहमद के पांच बेटों में सबसे छोटा था।

    असद की भी झांसी में हुई थी मौत
    अतीक अहमद का एक और बेटा असद अप्रैल 2023 में झांसी के पास पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। उमेश पाल हत्याकांड में वांछित असद पर पुलिस ने इनाम घोषित किया था। इसके दो दिन बाद 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दोनों को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था, तभी तीन हमलावरों ने उन पर हमला किया था।

  • BJP-कांग्रेस ने सांसदों को जारी किया व्हिप: संसद में अगले हफ्ते क्या होगा? FCRA से परिसीमन तक हलचल तेज

    BJP-कांग्रेस ने सांसदों को जारी किया व्हिप: संसद में अगले हफ्ते क्या होगा? FCRA से परिसीमन तक हलचल तेज


    नई दिल्ली।
    संसद के मानसून सत्र का आखिरी चरण शुरू होने के साथ ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने अपने लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को 10, 11 और 12 अगस्त को सदन में अनिवार्य रूप से मौजूद रहने का निर्देश दिया है। वहीं NDA के सांसदों को भी सोमवार से दिल्ली में रहने को कहा गया है। दोनों खेमों की इस सक्रियता से संसद में अगले सप्ताह किसी बड़े विधायी कदम की अटकलें तेज हो गई हैं।

    चर्चा है कि सरकार FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) में संशोधन या परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को सदन में ला सकती है। हालांकि, अगले सप्ताह के सरकारी कामकाज की सूची में इन दोनों प्रस्तावित विधेयकों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। ऐसे में विपक्ष सरकार के संभावित अंतिम समय के कदम को लेकर सतर्क है।

    कांग्रेस ने तीन दिन के लिए जारी किया सख्त व्हिप

    कांग्रेस ने अपने सांसदों को 10 से 12 अगस्त तक सदन में मौजूद रहने के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। पार्टी ने सांसदों से सुबह 11 बजे से लेकर सदन की कार्यवाही स्थगित होने तक उपस्थित रहने और पार्टी के रुख का समर्थन करने को कहा है।

    कांग्रेस के अलावा INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों ने भी अपने सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की तैयारी शुरू कर दी है। दूसरी तरफ NDA सांसदों को सोमवार से दिल्ली में रहने का निर्देश दिए जाने की खबरों ने संसद में किसी बड़े घटनाक्रम की संभावना को और बढ़ा दिया है।

    सरकारी एजेंडे में अभी FCRA और परिसीमन का जिक्र नहीं

    संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की ओर से अगले सप्ताह के संभावित सरकारी कामकाज की जो सूची पेश की गई है, उसमें FCRA संशोधन विधेयक या परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक का सीधा उल्लेख नहीं है।

    हालांकि, संसदीय प्रक्रिया में सप्लीमेंट्री एजेंडे के जरिए अंतिम समय में किसी विधेयक को सदन के पटल पर लाने का विकल्प सरकार के पास रहता है। यही वजह है कि विपक्ष अपने सांसदों की उपस्थिति को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।

    FCRA विधेयक आया तो क्या होगा?

    FCRA यानी फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट में संशोधन से जुड़ा विधेयक अगर संसद में आता है तो इसे पारित कराने के लिए साधारण बहुमत पर्याप्त होगा। मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में सरकार के लिए इस तरह के विधेयक को पारित कराना अपेक्षाकृत आसान माना जा रहा है।

    यही कारण है कि विपक्ष सरकार की रणनीति पर नजर बनाए हुए है और अपने सांसदों को सदन में मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है।

    परिसीमन वाला विधेयक क्यों ज्यादा अहम?

    अगर सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित कोई संविधान संशोधन विधेयक सदन में पेश करती है तो मामला ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाएगा। संविधान संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की जरूरत होती है। ऐसे में एक-एक सांसद की मौजूदगी और मतदान का महत्व बढ़ जाता है।

    परिसीमन का मुद्दा इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इसका सीधा संबंध भविष्य में लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण से है। इसे लेकर राजनीतिक दलों के बीच लंबे समय से अलग-अलग मत रहे हैं।

    2029 से पहले लागू करने की चुनौती

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक इस मानसून सत्र में नहीं आता है, तो सरकार के पास इसे आगामी सत्रों में लाने का विकल्प रहेगा। 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले इसे लागू करने के लिए पर्याप्त समय बचा हुआ है।

    फिलहाल सरकार की ओर से FCRA या परिसीमन संबंधी विधेयक को अगले सप्ताह पेश करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन BJP और कांग्रेस दोनों की ओर से सांसदों को दिल्ली में रहने और सदन में मौजूद रहने के निर्देशों ने संसद के अगले सप्ताह के एजेंडे को लेकर सियासी अटकलें जरूर तेज कर दी हैं।