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  • IIT बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे की मौत मामले में प्रोफेसर दूल्ला से 8 घंटे पूछताछ, करीब 50 लोगों के बयान दर्ज

    IIT बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे की मौत मामले में प्रोफेसर दूल्ला से 8 घंटे पूछताछ, करीब 50 लोगों के बयान दर्ज

    नई दिल्ली: IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला से करीब 8 घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान जांच टीम ने उनसे मामले से जुड़े कई सवाल किए। साहिल के परिवार ने प्रोफेसर दूल्ला पर जातिगत भेदभाव का आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। पूछताछ के दौरान प्रोफेसर दूल्ला ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि छात्र से जुड़े मामले में उन्होंने संस्थान के नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुसार ही काम किया था। साहिल वाकोडे की मौत की जांच लगातार जारी है और मामले में अलग-अलग लोगों से जानकारी जुटाई जा रही है।

    22 वर्षीय साहिल वाकोडे ने 18 सितंबर को पवई कैंपस स्थित हॉस्टल के कमरे में आत्महत्या कर ली थी। जानकारी के अनुसार, परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए उसे पकड़ा गया था। इसके कुछ घंटे बाद उसका शव हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटका मिला था। साहिल के माता-पिता ने आरोप लगाया था कि प्रोफेसर दूल्ला ने उनके बेटे के साथ जातिगत भेदभाव किया। परिवार ने इस मामले में प्रोफेसर की गिरफ्तारी की मांग की है। मामले को लेकर परिवार की ओर से लगातार कार्रवाई की मांग की जा रही है। वहीं, 18 सितंबर के सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दिया था कि परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़े जाने के बाद प्रोफेसर दूल्ला ने साहिल वाकोडे को एक तरफ खींच लिया था।

    मुंबई पुलिस के मुताबिक, क्राइम ब्रांच इस मामले में IIT बॉम्बे के डायरेक्टर शिरीष केदारे को भी पूछताछ के लिए बुला सकती है। जांच के दौरान क्राइम ब्रांच अब तक साहिल के माता-पिता और उसके क्लासमेट समेत करीब 50 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है। पुलिस ने साहिल के पिता रविंद्र वाकोड़े की शिकायत के आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। जांच टीम मामले से जुड़े लोगों के बयान और उपलब्ध जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है। दूसरी ओर, IIT बॉम्बे के कुछ संकाय सदस्यों ने प्रोफेसर दूल्ला के समर्थन में बयान देते हुए कहा कि उन्हें केवल अपना काम करने के लिए बदनाम किया जा रहा है।

    इस मामले को लेकर साहिल के परिवार की ओर से विरोध भी जारी है। मुंबई के आजाद मैदान में साहिल के माता-पिता पिछले छह दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वे प्रोफेसर दूल्ला की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। परिवार का आरोप है कि साहिल के साथ जातिगत भेदभाव किया गया था और इसी मामले में वे प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, प्रोफेसर दूल्ला ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए संस्थान के नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन करने की बात कही है। क्राइम ब्रांच की ओर से अब तक करीब 50 लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और प्रोफेसर दूल्ला से लंबी पूछताछ भी की गई है। मामले में आगे की जांच जारी है।

  • जितिया व्रत से पहले मड़ुआ की रोटी खाने से 51 बीमार, अस्पताल में भर्ती मां के लिए भूख से बिलखता रहा छह माह का बच्चा

    जितिया व्रत से पहले मड़ुआ की रोटी खाने से 51 बीमार, अस्पताल में भर्ती मां के लिए भूख से बिलखता रहा छह माह का बच्चा

    नई दिल्ली: बलिया। बांसडीह क्षेत्र के आसचौरा और चौकन गांव में जीवित्पुत्रिका व्रत से एक दिन पहले मड़ुआ के आटे से बनी रोटी और लिट्टी खाने के बाद 51 लोगों की तबीयत बिगड़ गई। बीमार लोगों में महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल हैं। रोटी-लिट्टी खाने के कुछ देर बाद ही पेट में दर्द, उल्टी, कंपकंपी और चक्कर की शिकायत शुरू हो गई। इसके बाद गांव में अफरातफरी मच गई। परिजनों और आसपास के लोगों ने बीमारों को बांसडीह सीएचसी, निजी अस्पतालों और जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने फूड प्वाइजनिंग के लक्षणों के आधार पर इलाज शुरू किया। देर शाम स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मड़ुआ के बीज का आटा बेचने वाली दुकान को सीज कर दिया।

    जिउतिया व्रत से पहले मड़ुआ की रोटी खाने की दोनों गांवों में पुरानी परंपरा बताई गई है। संतान की मंगलकामना के लिए माताएं चौबीस घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं, लेकिन इस बार व्रत से एक दिन पहले रोटी खाने के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं बीमार पड़ गईं। एक साथ 50 से अधिक मरीजों के अस्पताल पहुंचने से वहां भी अफरातफरी की स्थिति बन गई। एक बेड पर दो मरीजों को लेटाकर उपचार किया गया। स्ट्रेचर कम पड़ने पर कुछ मरीजों को गोद में उठाकर ले जाया गया। देर शाम तक अस्पताल में मरीजों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। प्रशासन के निर्देश पर दोनों गांवों में दो एम्बुलेंस के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात की गई।

    चौकन निवासी 35 वर्षीय सुनीता भी मड़ुआ की रोटी खाने के बाद जिला अस्पताल में भर्ती हैं। दूसरी ओर उनका छह माह का बेटा भूख से बिलखता रहा। जिस बेटे के स्वास्थ्य के लिए मां जिउतिया का निर्जला व्रत रखने वाली थीं, वह अपनी तबीयत खराब होने के कारण उसे दूध पिलाने की स्थिति में नहीं थीं। बच्चा अपने पिता राजकुमार की गोद से मां को देखकर रो रहा था। डॉक्टरों की टीम के पूछने पर पिता ने बताया कि बच्चा अब तक केवल मां का दूध ही पीता है। उधर, देर शाम जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि दोनों गांवों के 49 लोग अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें 43 जिला अस्पताल, तीन बांसडीह सीएचसी और तीन निजी अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें 37 महिलाएं, 12 पुरुष और 10 बच्चे शामिल बताए गए। सभी की हालत खतरे से बाहर है।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया कि सभी लोगों को मड़ुआ का आटा एक ही दुकान से मिला था। चौकन गांव के किसान रिंकू सिंह ने पिछले वर्ष बांसडीह कचहरी स्थित सरकारी बीज भंडार से खेत में बोने के लिए मिले मड़ुआ के बीज को घर में रखा था। जीवित्पुत्रिका व्रत के लिए मड़ुआ का आटा नहीं मिलने की बात सामने आने पर उन्होंने करीब दो किलो बीज को आसचौरा में छितेश्वर वर्मा की चक्की पर पिसवा दिया। गुरुवार रात आटा तैयार हुआ। उसमें से कुछ आटा चक्की संचालक ने भी रख लिया। चक्की से लौटते समय सोनू की मां ने रिंकू से व्रत के लिए आटा मांग लिया। बाद में वही आटा दुकान पर रखा गया और गांव की कुछ महिलाओं को बांटा गया।

    घटना की सूचना मिलने पर जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह, एसपी ओमवीर सिंह और सीएमओ डॉ. अभय नारायण राय समेत प्रशासनिक टीम जिला अस्पताल पहुंची और इलाज की व्यवस्था का जायजा लिया। इसके बाद अधिकारियों ने प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के सहायक आयुक्त (द्वितीय) जेपी सिंह के नेतृत्व में टीम ने दुकानदार सोनू वर्मा और किसान रिंकू सिंह से पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में आटा मड़ुआ के बीज से तैयार होने की बात सामने आई है। खाद्य विभाग ने आटा और उससे बनी रोटी के नमूने जांच के लिए लखनऊ भेजे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आटे में मौजूद पदार्थ और बीमारी के कारण की स्थिति स्पष्ट होगी।

  • फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार को लेकर बढ़ी जिज्ञासा, 24 घंटे में इंटरनेट सर्च में 5000% से ज्यादा उछाल

    फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार को लेकर बढ़ी जिज्ञासा, 24 घंटे में इंटरनेट सर्च में 5000% से ज्यादा उछाल

    नई दिल्ली: फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की चर्चा घटना के बाद दुनिया भर में हो रही है। 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान में दूसरे पायलट ने कथित तौर पर उन पर हमला कर विमान को क्रैश करने की कोशिश की। इस दौरान कैप्टन स्मित मच्छार घायल हो गए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और आरोपी पायलट से संघर्ष किया। इस कार्रवाई के चलते विमान में सवार 174 यात्रियों की जान बच सकी। घटना के बाद लोग उनकी बहादुरी के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत परिचय के बारे में भी जानकारी हासिल करने में जुट गए हैं। इसका असर इंटरनेट पर होने वाली खोजों में भी दिखाई दिया।

    भारत में स्मित मच्छार का नाम तेजी से ट्रेंड करने लगा। उपलब्ध गूगल ट्रेंड्स के आंकड़ों के अनुसार, 24 घंटे के भीतर मच्छार के नाम से जुड़े सर्च शब्दों में 5000 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। विदेशों में लोगों की रुचि उनके धर्म से जुड़ी जानकारी जानने में दिखाई दी, जहां इससे संबंधित इंटरनेट सर्च में 3000 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि बताई गई। वहीं भारत में उनके नाम के साथ जाति से जुड़ी जानकारी जानने की कोशिश ज्यादा दिखाई दी। इस तरह विमान में हुई घटना के बाद कैप्टन की बहादुरी के साथ उनकी व्यक्तिगत पहचान को लेकर भी इंटरनेट पर लोगों की उत्सुकता बढ़ गई।

    स्मित मच्छार शादीशुदा हैं या सिंगल, इसे लेकर भी इंटरनेट पर काफी खोज की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह मूल रूप से गुजरात के रहने वाले हैं। सोशल मीडिया पर किए गए दावों के अनुसार उनका जन्म गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले के वधवान में हुआ बताया गया है। उनके परिवार का संबंध राजकोट और कच्छ-सौराष्ट्र क्षेत्र से भी बताया जाता है। इसी तरह उनके सरनेम को लेकर भी जानकारी सामने आती रही है। गुजरात में मच्छार सरनेम के लोहाना और नागर ब्राह्मण समुदायों में इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इस तरह की व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी को लेकर इंटरनेट पर मौजूद दावों को उसी रूप में देखा जा रहा है।

    घटना के बाद कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी को लेकर सम्मान भी सामने आया है। मुंबई में इस्राइल के महावाणिज्य दूतावास ने उनके सम्मान में एक विशेष बिलबोर्ड लगाया। मुंबई स्थित इस्राइल के महावाणिज्य दूत यानिब रेवाच ने सोशल मीडिया पर बिलबोर्ड की तस्वीर साझा की और कैप्टन की बहादुरी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत को एक नया हीरो मिला है और इस्राइल कैप्टन स्मित मच्छार का नाम कभी नहीं भूलेगा। इस घटना के बाद स्मित मच्छार की पहचान और उनके साहस से जुड़ी जानकारी को लेकर इंटरनेट पर लगातार बढ़ती दिलचस्पी दिखाई दे रही है।

  • देर रात भोपाल पहुंचे अमित शाह… आज गोपालक सम्मेलन में होंगे शामिल, देंगे कई सौगातें

    देर रात भोपाल पहुंचे अमित शाह… आज गोपालक सम्मेलन में होंगे शामिल, देंगे कई सौगातें


    भोपाल।
    केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह (Amit Shah) शुक्रवार देररात भोपाल पहुंचे। यहां सीएम मोहन यादव (CM Mohan Yadav) और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल (Hemant Khandelwal) ने स्वागत किया। केंद्रीय मंत्री अमित शाह शनिवार को राजधानी में राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में शामिल होंगे। इसमें प्रदेश के अलग-अलग जिलों से 35 हजार से अधिक गोपालक और दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्य जुटेंगे। इसके अलावा वे नए आपराधिक कानूनों पर राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे और मध्य प्रदेश सरकार व केंद्रीय गृह मंत्रालय के बीच लंबित विषयों पर बैठक करेंगे।

    राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित होगा। इसमें भोपाल के अलावा सीहोर, बैतूल, राजगढ़, हरदा, गुना, अशोकनगर, शाजापुर, विदिशा, रायसेन और नर्मदापुरम समेत कई जिलों से गोपालक और दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्य पहुंचेंगे। सम्मेलन में कृषक कल्याण वर्ष के तहत किए गए कार्यों और बलराम कृषि महोत्सव की जानकारी अमित शाह को दी जाएगी। गृह, पशुपालन, सहकारिता, लोक निर्माण और परिवहन विभाग की ओर से अपने-अपने कार्यों और योजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। सम्मेलन में दुग्ध उत्पादन और सहकारिता को बढ़ावा देने से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होगी।


    उज्जैन में डेयरी प्लांट का वर्चुअल भूमि-पूजन करेंगे

    अमित शाह उज्जैन में तीन लाख लीटर प्रसंस्करण क्षमता वाले अत्याधुनिक डेयरी प्लांट का वर्चुअल तरीके से भूमि-पूजन करेंगे। वे भोपाल में तैयार 40 हजार लीटर उत्पादन क्षमता वाले फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट और मध्य प्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन भोपाल के परिसर में बनाई गई सहकारी क्षेत्र की पहली अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला और मिनी डेयरी संयंत्र शिवपुरी का शुभारंभ भी करेंगे।


    नए आपराधिक कानूनों पर प्रदर्शनी का उद्घाटन

    अमित शाह भेल दशहरा मैदान में नए आपराधिक कानूनों को लेकर आयोजित राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद होटल ताज लेक फ्रंट में मध्य प्रदेश सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय के बीच लंबित विषयों पर बैठक होगी। नारकोटिक्स को लेकर प्रेस वार्ता भी उनके कार्यक्रम में शामिल है। शाह IISER के विस्तारित परिसर भौरी का शिलान्यास भी करेंगे। इसके बाद IISER के मुख्य परिसर में स्वामी विवेकानंद की नवनिर्मित प्रतिमा के अनावरण एवं शिलान्यास समारोह में शामिल होंगे।


    शनिवार का मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम

    सुबह 11 बजे: होटल ताज लेक फ्रंट से सड़क मार्ग से भेल दशहरा मैदान के लिए रवाना होंगे।
    सुबह 11:25 बजे: भेल दशहरा मैदान पहुंचेंगे।
    सुबह 11:30 से दोपहर 12:00 बजे तक: नए आपराधिक कानूनों पर राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे।
    दोपहर 12:05 से 1:05 बजे तक: भेल दशहरा मैदान में राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में शामिल होंगे।
    दोपहर 1:05 बजे: भेल दशहरा मैदान से होटल ताज के लिए रवाना होंगे।
    दोपहर 1:30 बजे: होटल ताज लेक फ्रंट पहुंचेंगे।
    दोपहर 1:30 से 2:15 बजे तक: लंच के लिए समय आरक्षित रहेगा।
    दोपहर 2:15 से शाम 4:15 बजे तक: होटल ताज में मध्य प्रदेश सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय के बीच लंबित विषयों पर बैठक करेंगे।
    शाम 4:15 से 5:15 बजे तक: समय आरक्षित रहेगा। इस दौरान नारकोटिक्स पर प्रेस वार्ता निर्धारित है।
    शाम 5:15 बजे: होटल ताज लेक फ्रंट से सड़क मार्ग से IISER के विस्तारित परिसर, भौरी के लिए रवाना होंगे।
    शाम 5:40 बजे: IISER के विस्तारित परिसर, भोपाल बायपास रोड, भौरी पहुंचेंगे।
    शाम 5:45 से 6:00 बजे तक: IISER के विस्तारित परिसर के शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल होंगे।
    शाम 6 बजे: IISER के विस्तारित परिसर से IISER मुख्य परिसर, भौरी के लिए रवाना होंगे।
    शाम 6:05 बजे: IISER मुख्य परिसर, भौरी पहुंचेंगे।
    शाम 6:10 से 7:25 बजे तक: स्वामी विवेकानंद की नवनिर्मित प्रतिमा के अनावरण एवं शिलान्यास समारोह में शामिल होंगे।
    शाम 7:30 बजे: IISER मुख्य परिसर, भौरी से सड़क मार्ग से भोपाल स्टेट हैंगर के लिए रवाना होंगे।
    शाम 7:45 बजे: भोपाल स्टेट हैंगर पहुंचेंगे।
    शाम 7:50 बजे: विशेष विमान से भोपाल से दिल्ली के लिए रवाना होंगे।

  • बिहार में बाढ़ राहत बनी आफत: हेलीकॉप्टर से गिरा राशन का पैकेट सिर पर लगा, सारण में बुजुर्ग की मौत

    बिहार में बाढ़ राहत बनी आफत: हेलीकॉप्टर से गिरा राशन का पैकेट सिर पर लगा, सारण में बुजुर्ग की मौत


    सारण। बिहार के सारण जिले में बाढ़ पीड़ितों तक राहत पहुंचाने की कोशिश के दौरान बड़ा हादसा हो गया। अमनौर थाना क्षेत्र के परशुरामपुर गांव में वायुसेना के हेलीकॉप्टर से गिराए जा रहे सूखे राशन के पैकेट 60 वर्षीय अनिल कुमार सिंह उर्फ अप्पू सिंह पर जा गिरे। गंभीर चोट लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इसी गांव में हेलीकॉप्टर की तेज हवा के कारण एक महिला और उसके दो बच्चे भी घायल हो गए।

    हादसे के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। गुस्साए लोगों ने अनिल सिंह का शव सड़क पर रखकर आवागमन रोक दिया। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के समझाने के बाद जाम हटाया गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए छपरा सदर अस्पताल भेज दिया।

    खाना खाने के बाद बैठे थे, तभी गिरा राशन का पैकेट

    मृतक के बेटे अभिनव प्रताप सिंह के मुताबिक, उनके पिता खाना खाने के बाद बैठे हुए थे। इसी दौरान बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए हेलीकॉप्टर से राहत सामग्री के पैकेट गिराए जा रहे थे। एक पैकेट उनके पिता के सिर पर आकर लगा, जिससे वह जमीन पर गिर पड़े। इसके बाद कई और पैकेट उनकी छाती पर भी जा गिरे।

    अनिल कुमार सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वह अखबार हॉकर थे। अमनौर थानाध्यक्ष विमलेश कुमार ने भी घटना की पुष्टि की है। उनके मुताबिक, गंभीर चोट लगने के कारण बुजुर्ग की मौके पर ही मौत हुई।

    नेपाल से आई बाढ़ से कई प्रखंड प्रभावित

    नेपाल से आई बाढ़ के कारण सारण जिले के कई प्रखंड प्रभावित हैं। इनमें मकेर, अमनौर और परसा सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। बाढ़ के कारण कई गांवों का संपर्क सड़क मार्ग से टूट गया है और वे टापू जैसे हालात में पहुंच गए हैं।

    ऐसे गांवों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हवाई मार्ग का इस्तेमाल किया जा रहा है। वायुसेना के हेलीकॉप्टर से प्रभावित लोगों के बीच सूखा राशन और अन्य राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। इसी दौरान परशुरामपुर गांव में राशन के पैकेट गिराने के दौरान यह हादसा हुआ।

    छत पर खड़ी महिला और दो बच्चे भी घायल

    इसी गांव में राहत सामग्री पहुंचाने के दौरान दूसरा हादसा भी हुआ। रंभा देवी अपने दो बच्चों के साथ घर की छत पर खड़ी होकर हेलीकॉप्टर से गिराई जा रही राहत सामग्री का इंतजार कर रही थीं।

    हेलीकॉप्टर के नीचे से उड़ने के कारण पैदा हुई तेज हवा की वजह से रंभा देवी छत से बगल के मकान पर जा गिरीं। उनके कमर में गंभीर चोट आई है। वहीं, उनके दोनों बच्चों के पैरों में फ्रैक्चर होने की जानकारी सामने आई है। तीनों घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है।

    एक ही गांव में दो हादसों से ग्रामीणों में दहशत

    राहत सामग्री पहुंचाने के दौरान एक ही गांव में दो हादसे होने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। एक ओर बाढ़ से लोग परेशान हैं, वहीं राहत सामग्री पहुंचाने के दौरान हुए हादसे ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। प्रशासन की ओर से घटना की जानकारी जुटाई जा रही है और घायल महिला व उसके बच्चों का इलाज कराया जा रहा है।

  • प्रेमानंद के शिष्य की मौत पर पंडोखर धाम के गुरुशरण महाराज का दावा- ‘99% तक संकेत दे सकता हूं’

    प्रेमानंद के शिष्य की मौत पर पंडोखर धाम के गुरुशरण महाराज का दावा- ‘99% तक संकेत दे सकता हूं’


    दतिया। वृंदावन में संत प्रेमानंद के शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध मौत का मामला अब पंडोखर धाम तक पहुंच गया है। पंडोखर धाम के पीठाधीश्वर गुरुशरण महाराज ने दावा किया है कि यदि आश्रम प्रबंधन, पुलिस, जांच एजेंसी या मृतक के परिजन उनके दरबार में आते हैं तो उनका ‘दिव्य दरबार’ घटना से जुड़े रहस्य को सामने लाने में जांच में सहयोग कर सकता है।

    दीपक लोधी की 25 सितंबर को गुरु कृपा कुंज आश्रम की चौथी मंजिल से गिरने के बाद संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। इस मामले को लेकर गुरुशरण महाराज ने कहा कि उनका मकसद किसी को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि जांच एजेंसियों को जिम्मेदार व्यक्ति या तत्वों तक पहुंचने में मदद करना है, ताकि परिवार को न्याय मिल सके और किसी निर्दोष के साथ अन्याय न हो।

    बोले- ‘99 प्रतिशत तक संकेत दे सकता हूं’
    गुरुशरण महाराज ने कहा कि जो लोग इस घटना से संबंधित जानकारी चाहते हैं, वे उनके पास आ सकते हैं। उनका दावा है कि वह घटना के संबंध में “99 प्रतिशत तक संकेत” दे सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह पुलिस, अदालत या जांच एजेंसी नहीं हैं और किसी को सजा देने का अधिकार उनके पास नहीं है।

    उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल इतना है कि जांच सही दिशा में आगे बढ़े और वास्तविक तथ्य सामने आएं। उनके मुताबिक, वह जांच एजेंसियों को उस बिंदु तक पहुंचने में मदद कर सकते हैं, जिससे घटना को लेकर ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ हो सके।

    प्रेमानंद महाराज से मौन तोड़ने की अपील
    गुरुशरण महाराज ने संत प्रेमानंद महाराज से भी अपने शिष्य की मौत को लेकर सामने आने और घटना पर स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वृंदावन में हर तरफ राधा नाम की गूंज सुनाई देती है, लेकिन उसी धाम के एक आश्रम की चौथी मंजिल से हुई इस मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    उन्होंने कहा कि मृतक के परिजन और जांच से जुड़े लोग यदि उनसे संपर्क करते हैं तो वह सहयोग के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि उनका एकमात्र उद्देश्य घटना की सच्चाई सामने लाना, परिवार को न्याय दिलाना और किसी निर्दोष व्यक्ति को फंसने से बचाना है।

    दूसरे कथित सिद्धियों के दावेदारों को भी चुनौती
    गुरुशरण महाराज ने सिद्धियों और भविष्यवाणी की क्षमता का दावा करने वाले अन्य लोगों को भी इस मामले की सच्चाई सामने लाने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास ऐसी शक्ति है तो उसे घटना से जुड़े तथ्यों को सामने रखकर अपनी क्षमता साबित करनी चाहिए।

    उन्होंने बिना नाम लिए बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि भारत में पर्चा लिखने का दावा करने वाला कोई व्यक्ति अब तक यह कहने के लिए सामने नहीं आया कि वह इस मामले के बारे में सब कुछ बताने को तैयार है।

    जांच से ही सामने आएगा मौत का कारण
    दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत को लेकर फिलहाल गुरुशरण महाराज की ओर से किए गए दावे जांच का विकल्प नहीं हैं। घटना की वास्तविक परिस्थितियां, मौत का कारण और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका जैसे सवाल पुलिस या संबंधित जांच एजेंसी की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होंगे।

    गुरुशरण महाराज ने अपने बयान में भी कहा कि वह कोई थाना, अदालत या जांच एजेंसी नहीं हैं। उन्होंने केवल जांच में सहयोग करने और घटना से जुड़े संभावित तथ्यों तक पहुंचने के लिए संकेत देने की बात कही है।

  • मुंबई के बाद दिल्ली कूच करेगी CJP, दिपके का ऐलान- ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो जंतर-मंतर पर जुटेंगे

    मुंबई के बाद दिल्ली कूच करेगी CJP, दिपके का ऐलान- ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो जंतर-मंतर पर जुटेंगे


    नई दिल्ली। मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दिपके ने अब दिल्ली कूच का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो 10 अक्टूबर को देशभर से लोग दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटेंगे। दिपके ने इसे शांतिपूर्ण आंदोलन बताया है।

    2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी अपनी अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद बड़ी संख्या में समर्थक वहां पहुंचे। प्रदर्शन में युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले पोस्टर और तिरंगे नजर आए।

    शिवाजी पार्क में जुटी बड़ी भीड़

    शिवाजी पार्क बड़े राजनीतिक और सामाजिक आयोजनों के लिए जाना जाता है। प्रदर्शन के दौरान तेज गर्मी और बैरिकेडिंग के बावजूद बड़ी संख्या में युवा वहां पहुंचे। दादर स्टेशन और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

    मंच से दिपके ने इसे “जंतर-मंतर 2.0” बताते हुए ‘चलो दिल्ली’ का नारा दिया। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो देशभर के युवा और Gen-Z दिल्ली पहुंचेंगे। CJP की ओर से आगे अन्य शहरों में भी आंदोलन करने की बात कही गई है।

    वोटर लिस्ट को लेकर दिपके के क्या आरोप?

    दिपके ने चुनावी मतदाता सूची को लेकर कई दावे किए। उनका आरोप है कि दो साल में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए। उन्होंने 2024 के करीब 97 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं और लोकसभा चुनाव में NDA और विपक्षी गठबंधन के बीच करीब 2 प्रतिशत के वोट शेयर अंतर का हवाला देते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का चुनावी नतीजों पर असर पड़ सकता है।

    दिपके ने दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सीट से करीब 40 हजार वोटर हटाए जाने और तमिलनाडु में करीब एक लाख नाम हटाए जाने का भी दावा किया। पश्चिम बंगाल में भी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का आरोप उन्होंने लगाया। ये आंकड़े और आरोप CJP तथा दिपके के दावे हैं; इनका अंतिम सत्यापन या न्यायिक निष्कर्ष इस रिपोर्ट में स्थापित नहीं है।

    दिपके ने यह भी आरोप लगाया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में करीब 40 लाख वोटर जोड़े गए और इसे चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी से जोड़ा। बीजेपी समर्थकों की ओर से तेलंगाना, कर्नाटक और झारखंड में विपक्षी दलों की जीत का उदाहरण दिए जाने पर उन्होंने कहा कि अगर मैच फिक्स हो तो हर गेंद नो-बॉल नहीं होती और हर कैच नहीं छूटता।

    CJP की प्रमुख मांगें क्या हैं?

    मुंबई प्रदर्शन में CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के अलावा उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग रखी। पार्टी ने SIR प्रक्रिया को रोकने और 2024 लोकसभा चुनाव से पहले वाली मतदाता सूची को बहाल करने की मांग भी उठाई है। इसके साथ नए मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन के लिए स्वतंत्र संस्था बनाने की मांग भी सामने रखी गई है।

    दिपके ने ‘एक देश, एक चुनाव’ की बहस को लेकर भी केंद्र सरकार पर आरोप लगाए। उनका कहना है कि बीजेपी का लक्ष्य ‘एक देश, एक पार्टी’ की दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने महाराष्ट्र में शिवसेना और NCP से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों का हवाला देते हुए क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने का आरोप लगाया और शिंदे गुट की शिवसेना को ‘शेल कंपनी’ कहा। ये दिपके के राजनीतिक आरोप हैं।

    प्रदर्शन में फिल्मी हस्तियां भी पहुंचीं

    शिवाजी पार्क के प्रदर्शन में अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी, निर्देशक विशाल भारद्वाज, फिल्मकार हंसल मेहता, संगीतकार विशाल ददलानी और महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी समेत कई लोग मौजूद रहे। शिवसेना (यूबीटी) ने भी प्रदर्शन को समर्थन दिया।

    स्थानीय विधायक महेश सावंत ने बताया कि आदित्य ठाकरे की तबीयत खराब होने के कारण वह प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए।

    CJP नेता ने दिल्ली पुलिस को दी चेतावनी

    CJP नेता सौरव दास ने पिछले जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को लेकर दिल्ली पुलिस पर निशाना साधा। उन्होंने पुलिस को चेतावनी देते हुए कहा कि वह अपने रवैये में सुधार करे, वरना आंदोलन और तेज किया जाएगा। CJP नेताओं ने इसे ‘जंतर-मंतर सीजन 2’ बताया है।

    वामपंथी कार्यकर्ता शैलेश कांबले ने कहा कि कई वामपंथी संगठन भी आंदोलन में शामिल हुए हैं। वहीं, कानून के छात्र आयान पटेल ने मतदान के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया पर चिंता जताई। मंच से बोलने वाली किशोरी अनुजा ने भी सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।

    अब CJP ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अगला प्रदर्शन करने की घोषणा की है। हालांकि, इस प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी स्थिति अलग विषय है और इसमें बदलाव संभव है।

  • जवाई बांध में 24 फीट से भी कम पानी, 500 से ज्यादा मगरमच्छ और लाखों मछलियों पर संकट

    जवाई बांध में 24 फीट से भी कम पानी, 500 से ज्यादा मगरमच्छ और लाखों मछलियों पर संकट


    पाली।
    पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा और पाली जिले की पहचान माने जाने वाले जवाई बांध में जल संकट गहराता जा रहा है। 61.25 फीट की भराव क्षमता वाले बांध में पानी का स्तर घटकर 24 फीट से भी नीचे पहुंच गया है। कम होते जलस्तर का असर अब इंसानों के साथ-साथ बांध के जलीय जीवों पर भी दिखाई देने लगा है। जवाई में रहने वाले 500 से ज्यादा मगरमच्छों और लाखों मछलियों के सामने पानी और भोजन का संकट खड़ा हो गया है।

    जलस्तर लगातार घटने से मगरमच्छों के लिए तैरने और सुरक्षित स्थानों की उपलब्धता कम होती जा रही है। वहीं, पानी का तापमान बढ़ने से मछलियों के जीवन पर भी असर पड़ रहा है। बड़ी संख्या में मछलियों के मरने की स्थिति में बांध का पानी दूषित होने का खतरा भी बढ़ सकता है। इससे मगरमच्छों के लिए भोजन की उपलब्धता पर भी असर पड़ेगा।

    तीन महीने का पानी बचने का दावा

    विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा स्थिति में जवाई बांध में करीब तीन महीने का पानी ही बचा है। इसके बाद बांध के डेड स्टोरेज में पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। ऐसी स्थिति में जल संकट का असर केवल मानव आबादी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बांध के पूरे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ सकता है।

    500 से अधिक मगरमच्छ और बड़ी संख्या में मछलियां जवाई के पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में जलस्तर में और गिरावट आने पर इनके संरक्षण के लिए प्रशासन और वन्यजीव विभाग के सामने चुनौती बढ़ सकती है। समय रहते जल प्रबंधन और वन्यजीवों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले समय में जलीय जीवों के सामने गंभीर संकट पैदा हो सकता है।

    मगरमच्छों के लिए मशहूर है जवाई

    जवाई बांध और इसके आसपास का क्षेत्र अपनी अनूठी जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहां के तेंदुओं के साथ-साथ विशालकाय मगरमच्छ भी पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण हैं। पहाड़ियों से घिरे बांध के पानी और चट्टानी किनारों पर धूप सेंकते मगरमच्छों को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर पहुंचते हैं।

    जवाई क्षेत्र में तेंदुओं और मगरमच्छों का प्राकृतिक सह-अस्तित्व इसकी खास पहचान है। जवाई सफारी के दौरान पर्यटक बांध के उथले पानी और चट्टानों पर मगरमच्छों की गतिविधियों को करीब से देखते हैं। वन्यजीव पर्यटन यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    ऐसे में जवाई बांध का लगातार घटता जलस्तर केवल जल संकट नहीं, बल्कि यहां के वन्यजीव और पूरे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।

  • 308 पहियों वाले ‘बाहुबली’ ट्रक का क्यों बदला गया रूट? फुट ओवरब्रिज काटकर निकाला, अब इस रास्ते से लखीमपुर पहुंचेगा

    308 पहियों वाले ‘बाहुबली’ ट्रक का क्यों बदला गया रूट? फुट ओवरब्रिज काटकर निकाला, अब इस रास्ते से लखीमपुर पहुंचेगा


    लखीमपुर।
    उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के कुंभी में निर्माणाधीन चीनी मिल के प्लांट के लिए बेल्जियम से समुद्री मार्ग के जरिए लाया गया विशाल बॉयलर इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, इस भारी-भरकम मशीन से ज्यादा 308 पहियों वाला ट्रेलर लोगों का ध्यान खींच रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस ‘बाहुबली’ ट्रक के वीडियो तेजी से चर्चा में हैं। इसे देखने और वीडियो बनाने के लिए सड़क किनारे लोगों की भीड़ जुट रही है। फोटो और सेल्फी लेने के लिए उमड़ रही भीड़ के कारण ट्रेलर को आगे बढ़ने में परेशानी हो रही है। इसी के चलते इसके निर्धारित मार्ग में बदलाव करना पड़ा है।

    ट्रेलर को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए पुलिस की टीम साथ चल रही है। रास्ते में आने वाले संकेतक बोर्ड और फुट ओवरब्रिज जैसी बाधाओं को हटाने के लिए भी इंतजाम किए जा रहे हैं। गुरुवार को यह ट्रेलर हरहुआ से रिंग रोड फेज-1 होते हुए संदहा के पास पहुंचा। स्वर्वेद महामंदिर के नजदीक बने फुट ओवरब्रिज को इसके गुजरने के लिए देर शाम तक काटकर हटाया गया। इसके बाद ट्रेलर को वहां से निकाला गया।

    स्वर्वेद मंदिर के पास फुट ओवरब्रिज बना बाधा

    करीब 200 टन वजनी बॉयलर लेकर चल रहा 308 पहियों वाला ट्रेलर हरहुआ से आगे बढ़ते हुए उमरहां के पास पहुंचा तो स्वर्वेद महामंदिर के सामने बना पैदल फुट ओवरब्रिज रास्ते में बाधा बन गया। भारी-भरकम ट्रेलर को निकालने के लिए ओवरब्रिज के हिस्से को काटने का काम शुरू किया गया। इस दौरान आसपास के लोग विशाल ट्रक को देखने के लिए जमा रहे।

    ट्रेलर के हरहुआ, संदहा और उमरहां सहित विभिन्न स्थानों से गुजरने के दौरान बड़ी संख्या में लोग वीडियो और रील बनाते नजर आए। लोगों की भीड़ के चलते वाहन की रफ्तार प्रभावित हुई। संभावना जताई गई कि ट्रेलर गुरुवार देर रात उमरहां पहुंचेगा, जिसके बाद वह गाजीपुर की ओर रवाना होगा।

    डाफी टोल प्लाजा पर 693 रुपये का टोल

    लखीमपुर खीरी के लिए बॉयलर लेकर जा रहा मल्टी-एक्सल वैक्यूम ट्रेलर बुधवार दोपहर करीब 12 बजे के बाद डाफी टोल प्लाजा से आगे बढ़ा। यहां ट्रेलर से 693 रुपये टोल लिया गया। इसके बाद वाहन उल्टी लेन से रखौना होते हुए रिंग रोड पर पहुंचा। गंजारी स्टेडियम के पास ट्रेलर अपनी निर्धारित लेन में आया और देर शाम कोईराजपुर के पास पहुंचा।

    बॉयलर लेकर चलने वाला यह ट्रेलर डाफी टोल प्लाजा से अखरी, लठिया, कन्नाडाड़ी और मोहनसराय होते हुए राजातालाब की ओर बढ़ा था। गुरुवार सुबह इसे संदहा के रास्ते आगे गाजीपुर की ओर रवाना किया गया।

    ट्रेलर निकालने के लिए हटाए गए संकेतक और ओवरब्रिज

    करीब 200 टन वजनी यह विशाल ट्रेलर बॉयलर के साथ दोपहर करीब 1:30 बजे मोहनसराय पहुंचा। यहां रास्ते में लगे संकेतक बोर्ड को हटाना पड़ा। मोहनसराय-गंगापुर मोड़ पर फुट ओवरब्रिज को भी पहले ही काटकर हटाया जा चुका था।

    ट्रेलर के पहुंचने पर जेसीबी की मदद से संकेतक और फुट ओवरब्रिज के हिस्सों को ऊपर उठाकर रास्ता साफ किया गया। वाहन के गुजरने के बाद आवश्यक हिस्सों को दोबारा व्यवस्थित किया गया। ट्रेलर रखौना होते हुए रिंग रोड फेज-2 से आगे बढ़ा। इसके सुरक्षित आवागमन के लिए संबंधित मार्गों पर कुछ समय के लिए सामान्य यातायात भी रोका जाता रहा।

    दलदली जमीन में फंस गया था ट्रेलर

    इससे पहले भी 308 पहियों वाले ट्रेलर को रास्ते में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बेल्जियम से समुद्री मार्ग के जरिए ओडिशा पहुंचे इस ओवर डायमेंशन कार्गो बॉयलर को सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश लाया जा रहा है। बिहार के नौबतपुर बॉर्डर पर पहुंचने के बाद ट्रेलर शुक्रवार को कटसिला के पास हाईवे पर रात होने के कारण रोक दिया गया था।

    शनिवार को पचफेड़वा के पास रिंग रोड के पुल के कारण ट्रेलर को वैकल्पिक मार्ग से निकालने की योजना बनाई गई, लेकिन निर्धारित तरीके से आगे बढ़ना संभव नहीं हो सका। रविवार को बॉयलर लेकर चल रहा ट्रेलर रेवसा के पास रिंग रोड की पूर्वी सर्विस लेन पर पहुंचा। आगे जमीन दलदली होने के कारण उसे वहीं रोकना पड़ा। बाद में देर शाम ट्रेलर रिंग रोड पार कर पश्चिमी लेन तक पहुंचा। रिपोर्ट के अनुसार, वाहन चंदौली में भी करीब दो दिन तक फंसा रहा, जहां से उसे निकालने के लिए रास्ता तैयार किया गया।

    देश के पहले बायोप्लास्टिक प्लांट के लिए लाया जा रहा बॉयलर

    यह विशाल बॉयलर लखीमपुर खीरी जिले के कुंभी में मैसर्स बलराम चीनी मिल लिमिटेड की ओर से बनाए जा रहे बायोप्लास्टिक यानी पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) विनिर्माण संयंत्र के लिए लाया जा रहा है। इसे देश के पहले बायोप्लास्टिक विनिर्माण संयंत्र के रूप में बताया जा रहा है।

    इस विशेष उपकरण की लंबाई करीब 41 मीटर, चौड़ाई 6 मीटर और ऊंचाई 7 मीटर है। इसका वजन 164.28 मीट्रिक टन बताया गया है। इसे ले जाने के लिए 308 पहियों वाले विशेष ट्रेलर का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    ट्रैफिक पुलिस ने ट्रेलर को चंदौली जिले की सीमा से सुरक्षित निकालकर वाराणसी में प्रवेश कराया। अब सड़क की स्थिति, रास्ते में आने वाली बाधाओं और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।

  • पश्चिम बंगाल में एक साल के दौरान जारी OBC सर्टिफिकेट होंगे अमान्य? सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला

    पश्चिम बंगाल में एक साल के दौरान जारी OBC सर्टिफिकेट होंगे अमान्य? सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला


    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) प्रमाणपत्रों की वैधता से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई करने की बात कही। मामला कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका से संबंधित है, जिसमें 8 मई 2025 से 18 मई 2026 के बीच राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए सभी ओबीसी प्रमाणपत्रों को अमान्य करार दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

    जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने याचिका को इसी तरह के मुद्दे से संबंधित एक अन्य लंबित याचिका के साथ जोड़ दिया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से आग्रह किया कि मामले का अंतिम फैसला आने तक कुछ रिक्त पदों पर नियुक्तियां नहीं की जाएं।

    इस पर पीठ ने कहा कि सरकारी पदों को खाली नहीं रखा जा सकता। अदालत ने निर्देश दिया कि इस दौरान की जाने वाली नियुक्तियां विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) के अंतिम परिणाम के अधीन रहेंगी। राज्य सरकार को सफल उम्मीदवारों को जारी किए जाने वाले नियुक्ति पत्रों में भी इस शर्त का उल्लेख करना होगा।

    मई 2024 के फैसले से शुरू हुआ विवाद

    ओबीसी आरक्षण को लेकर विवाद मई 2024 में कलकत्ता हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद शुरू हुआ था। अदालत ने तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा 2010 से 2012 के बीच जारी कार्यकारी आदेशों के तहत ओबीसी सूची में शामिल की गई कई श्रेणियों को रद्द कर दिया था। इसके साथ ही ओबीसी-ए और ओबीसी-बी में उप-वर्गीकरण तथा दोनों श्रेणियों के बीच 17 प्रतिशत आरक्षण के वितरण से संबंधित प्रावधान भी निरस्त कर दिए गए थे।

    इसके बाद राज्य सरकार ने मई और जून 2025 में नई अधिसूचनाएं जारी कर संशोधित ओबीसी आरक्षण नीति लागू करने की कोशिश की। हालांकि, कलकत्ता हाईकोर्ट ने 17 जून 2025 को इन अधिसूचनाओं पर रोक लगा दी। अदालत का कहना था कि राज्य सरकार कार्यकारी आदेश जारी करके न्यायालय के फैसले को निष्प्रभावी नहीं कर सकती।

    ओबीसी-ए प्रमाणपत्र को लेकर भी पहुंचा मामला

    बाद में पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन हुआ और शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी। इसके बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में दायर अपनी अपीलें वापस ले लीं।

    वर्तमान याचिकाएं कलकत्ता हाईकोर्ट के 12 अगस्त के आदेश के बाद दायर की गई हैं। उस आदेश में अदालत ने एक ऐसे उम्मीदवार की याचिका खारिज कर दी थी, जिसने 2025 की अधिसूचना के तहत अप्रैल 2026 में जारी ओबीसी-ए प्रमाणपत्र के आधार पर राहत मांगी थी।

    अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान ओबीसी प्रमाणपत्रों की वैधता और उनसे जुड़े नियुक्ति मामलों पर आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।