Category: National

  • NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI का बड़ा खुलासा, विशेषज्ञों ने परीक्षा से पहले छात्रों तक पहुंचाए सवाल

    NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI का बड़ा खुलासा, विशेषज्ञों ने परीक्षा से पहले छात्रों तक पहुंचाए सवाल

    नई दिल्ली । NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच एजेंसी ने परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाले दावे किए हैं। जांच के अनुसार प्रश्नपत्र किसी प्रिंटिंग प्रेस से सीधे बाहर नहीं निकला, बल्कि प्रश्नों की जांच, अनुवाद और सुधार की प्रक्रिया से जुड़े कुछ लोगों ने अपने अधिकार का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया। एजेंसी की चार्जशीट में कई लोगों के नाम सामने आए हैं और मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में होनी है।

    जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी समीक्षा से जुड़ी प्रक्रिया के दौरान कुछ विषय विशेषज्ञों के पास परीक्षा से पहले प्रश्नों तक पहुंच थी। आरोप है कि इसी दौरान बॉटनी, जूलॉजी, केमिस्ट्री और फिजिक्स से जुड़े कुछ विशेषज्ञों ने प्रश्नों को निर्धारित प्रक्रिया से बाहर पहुंचाया। एजेंसी का मानना है कि उन्हें मिली गोपनीय जानकारी और जिम्मेदारी का इस्तेमाल परीक्षा की निष्पक्षता को प्रभावित करने के लिए किया गया।

    जांच का एक अहम हिस्सा पुणे में आयोजित कथित गुप्त पढ़ाई के सत्रों से जुड़ा है। एजेंसी के अनुसार कुछ छात्रों को परीक्षा से पहले ऐसे स्थानों पर बुलाया गया, जहां उन्हें संभावित प्रश्न, उनके चार विकल्प और सही उत्तर बताए गए। इन सवालों को छात्रों से हाथ से लिखवाने की बात भी जांच में सामने आई है। कथित तौर पर ऐसा इसलिए किया गया ताकि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल से बचा जा सके और गतिविधि का डिजिटल रिकॉर्ड न बने।

    सीबीआई की जांच के अनुसार कुछ प्रश्नों की तस्वीरें भी बाद में ली गईं और उन्हें दूसरे लोगों तक पहुंचाया गया। जांच में इस पूरे नेटवर्क में पैसों के लेन-देन की आशंका भी सामने आई है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्न कितने लोगों तक पहुंचे और इस प्रक्रिया में कौन-कौन लोग सीधे या परोक्ष रूप से शामिल थे।

    मामले में लातूर से जुड़ी गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है। जांच के मुताबिक कुछ छात्रों को अस्पताल बुलाकर कथित तौर पर पूरे प्रश्न याद कराए गए। इसके बाद लीक हुए प्रश्नों की एक पीडीएफ तैयार की गई और उसे टेलीग्राम के माध्यम से आगे भेजा गया। जांच एजेंसी का दावा है कि यह फाइल कई लोगों तक पहुंची और बाद में लाखों रुपये के बदले दूसरे व्यक्ति को दी गई।

    जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर प्रश्नों के इस नेटवर्क में 10 से 12 लाख रुपये तक के लेन-देन की बात सामने आई है। हालांकि, पूरे मामले में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका और आर्थिक लेन-देन की वास्तविक स्थिति जांच के आगे बढ़ने के साथ स्पष्ट होगी।

    NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा में प्रश्नों की गोपनीयता और परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में यदि जांच में सामने आए आरोप अदालत में साबित होते हैं, तो यह परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद गंभीर खामियों की ओर संकेत कर सकते हैं। फिलहाल सीबीआई पूरे नेटवर्क, प्रश्नों के स्रोत और उन्हें आगे पहुंचाने वाले लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। मामले में अदालत की अगली सुनवाई के बाद आगे की कानूनी स्थिति भी स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • TMC छोड़ने के बाद BJP से भी दूरी, बंगाल के 3 सांसदों ने बदला रास्ता, जानिए क्या है वजह ?

    TMC छोड़ने के बाद BJP से भी दूरी, बंगाल के 3 सांसदों ने बदला रास्ता, जानिए क्या है वजह ?


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद भी नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। मुर्शिदाबाद की तीन लोकसभा सीटों से जुड़े सांसद अबू ताहिर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान इन दिनों अपने राजनीतिक रुख को लेकर चर्चा में हैं।

    तीनों सांसद पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी TMC से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए। अब उन्होंने BJP के नेतृत्व वाले केंद्रीय गठबंधन के साथ औपचारिक तौर पर जुड़ने से भी दूरी बना ली है। हालांकि, केंद्र और राज्य सरकार के साथ प्रशासनिक तथा क्षेत्रीय मुद्दों पर उनका संवाद जारी है।

    NDA बैठकों से बनाई दूरी
    तीनों सांसद नई दिल्ली में होने वाली NDA की प्रमुख संसदीय बैठकों से दूरी बनाए हुए हैं। वहीं, राज्य और केंद्र के नेताओं से उनकी बातचीत मुख्य रूप से विकास और प्रशासन से जुड़े विषयों तक सीमित है।

    जंगीपुर से सांसद खलीलुर रहमान ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल पूछे जाने पर कहा, “हमें गृह मंत्री के साथ दो विषयों पर चर्चा करनी थी, हम किसी अन्य मुद्दे पर कुछ नहीं कह सकते।”

    तीनों सांसदों ने पश्चिम बंगाल की मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इससे संकेत मिलता है कि वे फिलहाल किसी गठबंधन में शामिल होने के बजाय मुद्दा आधारित राजनीति पर जोर दे रहे हैं।

    मुर्शिदाबाद का समीकरण क्यों अहम?
    तीनों सांसद मुर्शिदाबाद जिले की महत्वपूर्ण सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। खलीलुर रहमान जंगीपुर, यूसुफ पठान बहरामपुर और अबू ताहिर खान मुर्शिदाबाद से सांसद हैं।

    मुर्शिदाबाद को पश्चिम बंगाल के संवेदनशील और अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में गिना जाता है। ऐसे में BJP के साथ खुलकर खड़ा होना इन सांसदों के लिए अपने पारंपरिक मतदाताओं के बीच राजनीतिक जोखिम पैदा कर सकता है। यही वजह मानी जा रही है कि वे केंद्र के साथ संवाद तो बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन किसी बड़े राजनीतिक गठबंधन का हिस्सा बनने से फिलहाल बच रहे हैं।

    NCPI के लिए भी बढ़ी चुनौती
    तीनों सांसदों का अलग रुख उनकी नई पार्टी NCPI के लिए भी चुनौती पैदा कर सकता है। करीब 20 सदस्यों वाले इस समूह में यदि अलग-अलग सांसद अपनी स्वतंत्र राजनीतिक रणनीति अपनाते हैं तो संगठन के भीतर मतभेद की स्थिति बन सकती है।

    दूसरी ओर, BJP के लिए भी इन सांसदों को अपने पाले में लाना आसान नहीं होगा। राष्ट्रीय दलों की कोशिश आमतौर पर अलग हुए नेताओं या गुटों को एक साझा राजनीतिक आधार में बदलने की होती है, लेकिन ये सांसद फिलहाल पार्टी लाइन के बजाय अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में पकड़ मजबूत रखने पर ज्यादा ध्यान देते दिखाई दे रहे हैं।

    स्थानीय समीकरण बनाम बड़े गठबंधन
    पश्चिम बंगाल में अगले चुनावों की तैयारियों के बीच मुर्शिदाबाद की तीनों सीटों का घटनाक्रम अहम माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि जिन इलाकों में स्थानीय मुद्दे, मतदाताओं का सामाजिक समीकरण और क्षेत्रीय पकड़ ज्यादा प्रभावी होते हैं, वहां केवल बड़े राजनीतिक गठबंधन के सहारे चुनावी सफलता हासिल करना आसान नहीं होता।

  • रफ्तार ने छीनी जिंदगी, अतीक अहमद के बेटे अबान की दर्दनाक मौत; आखिरी बार बोला- 'मुझे बचा लो'

    रफ्तार ने छीनी जिंदगी, अतीक अहमद के बेटे अबान की दर्दनाक मौत; आखिरी बार बोला- 'मुझे बचा लो'


    नई दिल्ली। माफिया अतीक अहमद के परिवार पर एक बार फिर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गुरुवार सुबह प्रयागराज से झांसी जा रहे अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे 21 वर्षीय अबान अहमद की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। वह अपने बड़े भाई अली से मिलने झांसी जेल जा रहा था। रास्ते में झांसी से करीब 70 किलोमीटर पहले पूंछ थाना क्षेत्र में उनकी तेज रफ्तार क्रेटा कार डिवाइडर से टकरा गई। हादसा इतना भीषण था कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार पांचों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर ही अबान और उसके साथी सोनू ने दम तोड़ दिया जबकि तीन अन्य घायलों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दुर्घटना के समय कार की रफ्तार काफी तेज थी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वाहन कई फीट हवा में उछलकर सड़क पर दूर तक घिसटता चला गया। कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और सभी लोग अंदर फंस गए। आसपास मौजूद लोगों और पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद दरवाजा तोड़कर घायलों को बाहर निकाला।

    घटना के प्रत्यक्षदर्शी दीपक यादव ने बताया कि सबसे पहले वह मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने लोहे की रॉड की मदद से कार का दरवाजा तोड़ा और अंदर फंसे अबान को बाहर निकालने की कोशिश की। उनके अनुसार अबान के मुंह से खून निकल रहा था और उसने धीमी आवाज में कहा मुझे बचा लो। इसके कुछ ही क्षण बाद वह बेहोश हो गया। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।

    हादसे की वजह को लेकर दो अलग-अलग बातें सामने आई हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हाईवे पर अचानक एक बछड़ा आ गया था। उसे बचाने के प्रयास में चालक ने कार मोड़ी और संतुलन बिगड़ने से वाहन डिवाइडर से टकरा गया। वहीं घायल उमर अहमद का कहना है कि सड़क पर पड़ी ईंट के कारण कार अनियंत्रित हुई और हादसा हुआ। पुलिस दोनों पहलुओं की जांच कर रही है।

    फॉरेंसिक जांच के दौरान कार से सिगरेट के पैकेट जूते और दो अंग्रेजी उपन्यास भी बरामद हुए हैं। माना जा रहा है कि अबान ये सामान अपने बड़े भाई अली के लिए लेकर जा रहा था जो इस समय झांसी जेल में बंद है। दुर्घटना के समय अबान आगे की सीट पर बैठा था जबकि उसका साथी जैद वाहन चला रहा था। हल्की बारिश के कारण सड़क भी फिसलन भरी बताई जा रही है जिससे हादसे की आशंका और बढ़ गई।

    अबान अतीक अहमद का सबसे छोटा बेटा था। परिवार पहले ही कई बड़े झटके झेल चुका है। वर्ष 2023 में उसके भाई असद की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी। उसी वर्ष अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज में पुलिस सुरक्षा के बीच हत्या कर दी गई थी। फिलहाल परिवार के अन्य सदस्य अलग-अलग कानूनी मामलों में जेल में हैं जबकि अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन अब भी फरार है।

    अबान के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए झांसी मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। जानकारी के अनुसार शुक्रवार को प्रयागराज में अतीक अहमद की कब्र के पास ही अबान को सुपुर्द ए खाक किया जाएगा। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार के खतरों को सामने लाने वाला साबित हुआ है।

  • युवा भारत पर मोहन भागवत का फोकस, जेनरेशन Z के साथ शिक्षा और नेतृत्व पर करेंगे खुला संवाद

    युवा भारत पर मोहन भागवत का फोकस, जेनरेशन Z के साथ शिक्षा और नेतृत्व पर करेंगे खुला संवाद


    नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत आज मुंबई में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में जेन-जी और जेन-अल्फा पीढ़ी के दो हजार से अधिक विद्यार्थियों से सीधा संवाद करेंगे। यह कार्यक्रम नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस यानी आईआईएमयूएन की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। इसमें देश के सौ से अधिक शहरों से आए 11 से 19 वर्ष आयु वर्ग के छात्र शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी के विचारों को समझना नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देना और शिक्षा तथा समाज से जुड़े विषयों पर खुला संवाद स्थापित करना है।

    यह कार्यक्रम ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब हाल के महीनों में देश में शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर व्यापक बहस देखने को मिली। छात्र आंदोलनों और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों के बाद युवाओं के साथ यह संवाद काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस मंच पर नई पीढ़ी की अपेक्षाओं चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर खुलकर चर्चा होगी।

    मोहन भागवत इससे पहले भी कई बार युवाओं से संवाद के महत्व पर जोर दे चुके हैं। उन्होंने हाल ही में कहा था कि आज की नई पीढ़ी सवाल पूछती है और उसे आदेश देने के बजाय बातचीत के माध्यम से समझना चाहिए। उनके अनुसार बदलते समय में संवाद ही सबसे प्रभावी माध्यम है जिसके जरिए समाज और युवा एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि किसी पर अपनी बात थोपने के बजाय विचारों का आदान प्रदान होना चाहिए ताकि सकारात्मक परिवर्तन संभव हो सके।

    कार्यक्रम के आयोजक आईआईएमयूएन के संस्थापक ऋषभ शाह के अनुसार यह मंच पिछले 15 वर्षों से छात्रों के बीच नेतृत्व संवाद और बहस की संस्कृति को बढ़ावा देने का कार्य कर रहा है। संगठन भारत के 108 शहरों और 15 देशों में अपनी गतिविधियां संचालित करता है तथा अब तक करोड़ों छात्रों तक पहुंच बना चुका है। ऋषभ शाह ने बताया कि मोहन भागवत इससे पहले भी दो बार इस मंच पर छात्रों से संवाद कर चुके हैं और इस बार का निमंत्रण कई महीने पहले भेजा गया था जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया।

    कार्यक्रम में शामिल छात्र विभिन्न सामाजिक शैक्षणिक और राष्ट्रीय विषयों पर अपनी जिज्ञासाएं भी रख सकते हैं। आयोजन का उद्देश्य युवाओं को केवल सुनना नहीं बल्कि उन्हें अपनी बात रखने का अवसर देना भी है। आयोजकों का कहना है कि नेतृत्व तभी विकसित होता है जब युवाओं को खुलकर सोचने और अपनी राय व्यक्त करने का मंच मिले।

    इस कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। भाजपा नेताओं ने इसे वर्षों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा बताया है और कहा है कि संघ लंबे समय से युवाओं के बीच संवाद और व्यक्तित्व निर्माण के कार्यक्रम आयोजित करता रहा है। वहीं आयोजन में कुछ अन्य सार्वजनिक हस्तियों की मौजूदगी को लेकर भी चर्चा हुई लेकिन आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं बल्कि छात्रों के लिए आयोजित एक स्वतंत्र मंच है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते दौर में युवाओं से सीधे संवाद की पहल समाज और संस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण है। शिक्षा तकनीक रोजगार और सामाजिक मूल्यों जैसे विषयों पर खुली बातचीत नई पीढ़ी के आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने में मदद करती है। ऐसे आयोजनों से युवाओं को अपनी सोच साझा करने का अवसर मिलता है और समाज को उनकी अपेक्षाओं को समझने का नया दृष्टिकोण भी प्राप्त होता है।

  • Arvind Kejriwal I आप का दावा, भारत में ब्लॉक हुआ केजरीवाल का इंस्टाग्राम अकाउंट, मेटा से मांगा जवाब

    Arvind Kejriwal I आप का दावा, भारत में ब्लॉक हुआ केजरीवाल का इंस्टाग्राम अकाउंट, मेटा से मांगा जवाब


    नई दिल्ली ।
    आम आदमी पार्टी ने दावा किया है कि उसके राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का इंस्टाग्राम अकाउंट भारत में ब्लॉक कर दिया गया है। पार्टी का कहना है कि इस संबंध में उन्हें एक नोटिस भी मिला है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि अकाउंट को किस वजह से रोका गया और इसे दोबारा कब तथा कैसे बहाल किया जाएगा। इस दावे के बाद राजनीतिक हलकों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भूमिका और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

    अरविंद केजरीवाल ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि उन्हें सूचना मिली है कि उनका इंस्टाग्राम अकाउंट भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने कई बार संबंधित सोशल मीडिया कंपनी से फोन और ईमेल के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। उनके अनुसार कंपनी ने न तो कार्रवाई का कारण बताया और न ही अकाउंट दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया की जानकारी दी।

    आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले नेताओं और लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कार्रवाई की जा रही है। पार्टी का कहना है कि विपक्षी नेताओं की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सेंसरशिप लागू करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    केजरीवाल ने दावा किया कि उन्हें कई ऐसे लोगों के संदेश और फोन कॉल भी मिले हैं, जिन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर इसी तरह की कार्रवाई की शिकायत की है। उनका कहना है कि यदि किसी अन्य व्यक्ति का भी अकाउंट इसी प्रकार बंद किया गया है, तो वह उनसे संपर्क करे ताकि ऐसे सभी मामलों को एक साथ उठाया जा सके। उन्होंने कहा कि इस विषय पर जवाबदेही तय होनी चाहिए और उपयोगकर्ताओं को यह जानने का अधिकार है कि उनके अकाउंट पर कार्रवाई किस आधार पर की गई।

    पार्टी का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म आज राजनीतिक संवाद और जनसंपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं। ऐसे में किसी भी सार्वजनिक प्रतिनिधि या आम नागरिक के अकाउंट पर कार्रवाई पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए। बिना स्पष्ट कारण बताए अकाउंट प्रतिबंधित किए जाने से कई तरह के सवाल खड़े होते हैं और इससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की निष्पक्षता पर भी चर्चा शुरू हो जाती है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर होने वाली कार्रवाई और उसके नियम लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं। विभिन्न देशों में भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, कंटेंट मॉडरेशन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस जारी है। भारत में भी इस प्रकार के मामलों पर समय-समय पर राजनीतिक दल अपनी-अपनी प्रतिक्रिया देते रहे हैं।

    फिलहाल आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठा रही है और मेटा से स्पष्टीकरण की मांग कर रही है। दूसरी ओर, इस मामले में आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत बयान आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अकाउंट पर की गई कार्रवाई का वास्तविक कारण क्या है और आगे इसकी स्थिति क्या होगी।

  • चरखी दादरी में दिनदहाड़े 30 राउंड फायरिंग से सनसनी, स्कॉर्पियो सवार सात लोग घायल, सीसीटीवी से आरोपियों की तलाश

    चरखी दादरी में दिनदहाड़े 30 राउंड फायरिंग से सनसनी, स्कॉर्पियो सवार सात लोग घायल, सीसीटीवी से आरोपियों की तलाश

    नई दिल्ली । हरियाणा के चरखी दादरी में दिनदहाड़े हुई ताबड़तोड़ फायरिंग की घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। सिटी थाने के सामने एक काली स्कॉर्पियो को निशाना बनाकर अज्ञात हमलावरों ने लगातार गोलियां चलाईं, जिससे वाहन में सवार सात लोग घायल हो गए। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हमलावर एक बाइक पर सवार होकर आए थे। उन्होंने स्कॉर्पियो को बीच रास्ते में रुकवाया और अचानक फायरिंग शुरू कर दी। कुछ ही क्षणों में वाहन गोलियों से छलनी हो गया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल इलाके की घेराबंदी कर दी और आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी।

    हमले में घायल हुए लोगों की पहचान अंकित, कीर्तिमान, सूरज, सनी, कृष्ण, अमित और एक अन्य अंकित के रूप में हुई है। सभी घायलों को पहले स्थानीय सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए रोहतक स्थित पीजीआई रेफर कर दिया गया। चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज जारी है और पुलिस लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, डीएसपी और अन्य अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाने का काम शुरू किया। घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया और गोलियों के खोखे सहित अन्य महत्वपूर्ण सुराग एकत्र किए गए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और हर पहलू की गहन पड़ताल की जाएगी।

    हमलावरों की पहचान के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों के साथ प्रत्यक्षदर्शियों से भी पूछताछ कर रही है ताकि आरोपियों की गतिविधियों और उनके भागने के रास्ते का पता लगाया जा सके। इसके अलावा आसपास के थाना क्षेत्रों को भी सतर्क कर दिया गया है और संदिग्ध वाहनों की जांच तेज कर दी गई है।

    घटना के पीछे की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस का कहना है कि आपसी रंजिश, पुराना विवाद और अन्य संभावित कारणों सहित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि उपलब्ध साक्ष्यों और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों तक जल्द पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। इस घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस गश्त भी बढ़ा दी गई है ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके और लोगों में सुरक्षा का भरोसा कायम रहे।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में गतिरोध जारी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गृह मंत्री से सदन में बयान देने की मांग दोहराई।

    जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में गतिरोध जारी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गृह मंत्री से सदन में बयान देने की मांग दोहराई।

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में राजनीतिक टकराव लगातार गहराता जा रहा है। विपक्ष इस पूरे मामले पर सरकार से विस्तृत जवाब की मांग कर रहा है, जबकि सदन की कार्यवाही भी बार-बार बाधित हो रही है। इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह को स्वयं सदन में उपस्थित होकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी देनी चाहिए ताकि सभी सवालों का स्पष्ट उत्तर मिल सके।

    मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्ष पिछले कई दिनों से इस विषय पर चर्चा की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक जवाब सामने नहीं आया है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे संवेदनशील मामलों पर संसद के भीतर खुली चर्चा होना आवश्यक है। उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा के सभापति ने संसदीय कार्य मंत्री को विपक्ष की भावनाओं से गृह मंत्री को अवगत कराने का निर्देश दिया है, जिससे इस विषय पर चर्चा का रास्ता निकल सके।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य केवल राजनीतिक विरोध करना नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जानकारी प्राप्त करना है। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस या अन्य बल प्रयोग किया है तो यह जानना जरूरी है कि ऐसे कदम उठाने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया था। उनके अनुसार संसद इस प्रकार के मुद्दों पर जवाबदेही तय करने का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है और सरकार को यहां विस्तृत स्पष्टीकरण देना चाहिए।

    खड़गे ने अपनी पार्टी की ओर से दो प्रमुख मांगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दें और दूसरी ओर गृह मंत्री अमित शाह सदन में उपस्थित होकर विपक्ष के सवालों का जवाब दें। उनका कहना था कि यदि सरकार इस विषय पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाती है तो राजनीतिक विवाद और गहराने की संभावना बनी रहेगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष संसद की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाना चाहता है, लेकिन महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने की स्थिति में गतिरोध समाप्त होना कठिन है। उनके अनुसार लोकतंत्र में संवाद और जवाबदेही दोनों समान रूप से आवश्यक हैं तथा जनता से जुड़े मामलों पर सरकार को पारदर्शी रुख अपनाना चाहिए।

    अपने बयान के दौरान खड़गे ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छात्रों के हितों और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर लगातार आवाज उठाती रहेगी। उनका कहना था कि किसी भी राज्य में यदि युवाओं और छात्रों से जुड़े प्रश्न सामने आते हैं तो उन पर निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    जंतर-मंतर की घटना को लेकर संसद में जारी गतिरोध के बीच अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि इस विषय पर सदन में विस्तृत चर्चा होती है तो राजनीतिक दलों के बीच जारी टकराव कम होने की संभावना बन सकती है। फिलहाल विपक्ष अपने रुख पर कायम है और सरकार से आधिकारिक जवाब की मांग लगातार दोहरा रहा है।

  • यूपी चुनाव 2027 की पहली बड़ी घोषणा, अयोध्या सीट से पवन पांडे होंगे सपा के उम्मीदवार, अखिलेश का ऐलान

    यूपी चुनाव 2027 की पहली बड़ी घोषणा, अयोध्या सीट से पवन पांडे होंगे सपा के उम्मीदवार, अखिलेश का ऐलान

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी ने अपनी पहली बड़ी चुनावी घोषणा करते हुए अयोध्या विधानसभा सीट से तेज नारायण पांडे उर्फ पवन पांडे को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान इस फैसले का ऐलान किया। इसके साथ ही स्पष्ट हो गया है कि समाजवादी पार्टी अयोध्या जैसी महत्वपूर्ण सीट पर एक बार फिर अनुभवी और पुराने चेहरे पर भरोसा जता रही है।

    उम्मीदवार की घोषणा ऐसे समय की गई है जब प्रदेश में चुनावी तैयारियां धीरे-धीरे गति पकड़ रही हैं। कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि पवन पांडे जनता का भरोसा एक बार फिर जीतेंगे। उन्होंने कहा कि पवन पांडे का क्षेत्र से मजबूत जुड़ाव है और उन्होंने पहले भी यहां के लोगों का विश्वास हासिल किया है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि उनका अनुभव आगामी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    तेज नारायण पांडे, जिन्हें राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में पवन पांडे के नाम से जाना जाता है, लंबे समय से समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए हैं। उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। उन्होंने युवाओं से जुड़े विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई और संगठन में लगातार जिम्मेदारियां निभाते हुए अपनी पहचान बनाई। छात्र जीवन से ही सक्रिय राजनीति में रहने के कारण उन्हें संगठनात्मक कार्यों का भी व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ।

    पवन पांडे पहली बार व्यापक चर्चा में वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान आए, जब उन्होंने अयोध्या विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर राज्य की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। विधायक रहने के दौरान उन्होंने क्षेत्र के विकास, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। इसी राजनीतिक अनुभव और संगठन में सक्रिय भूमिका को देखते हुए पार्टी ने एक बार फिर उन्हें चुनावी मैदान में उतारने का निर्णय लिया है।

    अयोध्या विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीटों में गिनी जाती है। ऐसे में इस सीट पर प्रत्याशी की घोषणा को चुनावी रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शुरुआती चरण में उम्मीदवार घोषित कर समाजवादी पार्टी ने चुनावी तैयारियों का स्पष्ट संदेश दिया है और संगठन को समय रहते सक्रिय करने की कोशिश की है।

    पार्टी की इस घोषणा के बाद प्रदेश की राजनीति में चुनावी सरगर्मियां और तेज होने की संभावना है। आने वाले समय में अन्य प्रमुख दलों की ओर से भी उम्मीदवारों और चुनावी रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाएं की जा सकती हैं। फिलहाल समाजवादी पार्टी ने अयोध्या से पवन पांडे को उम्मीदवार बनाकर चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत कर दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि अन्य राजनीतिक दल इस महत्वपूर्ण सीट पर किस चेहरे को मैदान में उतारते हैं और चुनावी मुकाबला किस दिशा में आगे बढ़ता है।

  • मथुरा: ब्रज की बढ़ती आध्यात्मिक लोकप्रियता: हर वर्ष मथुरा-वृंदावन में 7.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु-पर्यटक पहुंच रहे

    मथुरा: ब्रज की बढ़ती आध्यात्मिक लोकप्रियता: हर वर्ष मथुरा-वृंदावन में 7.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु-पर्यटक पहुंच रहे


    मथुरा। दक्षिण भारत के मदुरै को लंबे समय से देश की प्रमुख टेंपल सिटी के रूप में जाना जाता है, लेकिन अब उत्तर भारत में भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा-वृंदावन भी तेजी से नए ‘टेंपल कैपिटल’ के रूप में उभर रहा है। काशी विश्वनाथ धाम के पुनर्विकास और अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के बाद ब्रज क्षेत्र धार्मिक पर्यटन और आर्थिक विकास का बड़ा केंद्र बनता दिखाई दे रहा है।

    मंदिरों की संख्या के लिहाज से भी ब्रज की पहचान लगातार मजबूत हो रही है। तमिलनाडु के मदुरै में मीनाक्षी अम्मन मंदिर सहित करीब 100 से 150 प्रमुख मंदिर हैं, जबकि मथुरा जनपद में 5 हजार से अधिक पंजीकृत और पौराणिक मंदिर मौजूद हैं। इनमें अकेले वृंदावन में ही लगभग 4 हजार मंदिर हैं, जिससे यह दुनिया के सबसे सघन मंदिर क्षेत्रों में शामिल हो गया है। तुलना करें तो वाराणसी में 3 हजार से अधिक और अयोध्या में करीब 4 हजार मंदिर एवं मठ हैं।

    श्रद्धालुओं की संख्या भी ब्रज की बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार, वाराणसी में हर वर्ष 8.5 से 10 करोड़, अयोध्या में 5.5 से 6.5 करोड़ और मथुरा-वृंदावन में 7.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु एवं पर्यटक पहुंच रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर से बेहतर सड़क संपर्क और वीकेंड पर्यटन ने यहां आने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी की है।

    ब्रज क्षेत्र में चल रही कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं इसकी धार्मिक और आर्थिक पहचान को नई ऊंचाई दे रही हैं। काशी की तर्ज पर प्रस्तावित बांके बिहारी कॉरिडोर, दुनिया का सबसे ऊंचा 70 मंजिला चंद्रोदय मंदिर, यमुना एक्सप्रेसवे के पास प्रस्तावित 9 हजार हेक्टेयर की राया हेरिटेज सिटी और जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की निकटता इस क्षेत्र को वैश्विक धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

    इन परियोजनाओं के चलते ब्रज में निवेश भी तेजी से बढ़ रहा है। बड़े होटल समूह यहां अपने प्रोजेक्ट विकसित कर रहे हैं, जबकि जमीनों की कीमतों में पिछले कुछ वर्षों में 200 से 300 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। धार्मिक पर्यटन, आधारभूत ढांचे और निवेश के बढ़ते दायरे के साथ ब्रज अब उत्तर भारत के नए ‘टेंपल कैपिटल’ के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

  • झांसी: अतीक अहमद के बेटे आबान की सड़क हादसे में मौत, जेल में बंद भाई अली से मिलने जा रहा था

    झांसी: अतीक अहमद के बेटे आबान की सड़क हादसे में मौत, जेल में बंद भाई अली से मिलने जा रहा था


    झांसी।
    उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में गुरुवार सुबह हुए भीषण सड़क हादसे में माफिया और पूर्व सांसद अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे आबान अहमद की मौत हो गई। हादसे में उसके साथ सफर कर रहे सोनू खान की भी जान चली गई, जबकि तीन अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी लोग प्रयागराज से झांसी जेल में बंद अली अहमद से मिलने जा रहे थे।

    जानवर को बचाने में अनियंत्रित हुई कार
    यह हादसा झांसी-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पूंछ थाना क्षेत्र के खिल्ली गांव के पास गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे हुआ। पुलिस के अनुसार, तेज रफ्तार क्रेटा कार के सामने अचानक एक जानवर आ गया। उसे बचाने के प्रयास में चालक ने नियंत्रण खो दिया और कार डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वाहन का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

    आबान और सोनू की मौके पर मौत
    हादसे में आगे की सीट पर बैठे आबान अहमद और सोनू खान के सिर में गंभीर चोटें आईं, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं अहजम, मोहम्मद जैद और उमर अहमद गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायल प्रयागराज के रहने वाले हैं और उनका इलाज मेडिकल कॉलेज में चल रहा है।

    शादी के कार्ड से हुई पहचान
    दुर्घटनाग्रस्त कार की तलाशी के दौरान पुलिस को एक शादी का निमंत्रण कार्ड मिला। उस पर दर्ज मोहम्मद जैद के नाम और संपर्क नंबर के आधार पर पुलिस ने मृतकों और घायलों की पहचान सुनिश्चित की। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक घायल युवक बार-बार सिर्फ यही पूछ रहे थे—”भाई कैसे हैं?”

    एसएसपी ने की पहचान की पुष्टि
    झांसी के एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मृतकों में एक की पहचान अतीक अहमद के बेटे आबान अहमद के रूप में हुई है। पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है।

    झांसी जेल में बंद है अली अहमद
    उमेश पाल हत्याकांड और रंगदारी से जुड़े मामलों में आरोपी अली अहमद को 1 अक्टूबर 2025 को प्रयागराज की नैनी जेल से हाई सिक्योरिटी के तहत झांसी जेल स्थानांतरित किया गया था। नैनी जेल में उसकी बैरक से नकदी मिलने के बाद उसे झांसी भेजा गया था और तब से वह वहीं बंद है।

    2023 में एनकाउंटर में मारा गया था असद
    अतीक अहमद का बेटा असद अहमद 13 अप्रैल 2023 को झांसी के बड़ागांव क्षेत्र में एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में मारा गया था। उमेश पाल हत्याकांड में वांछित असद पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था।