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  • आईएसआई समर्थित नेटवर्क की दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हमले की साजिश पंजाब पुलिस ने विफल की।

    आईएसआई समर्थित नेटवर्क की दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हमले की साजिश पंजाब पुलिस ने विफल की।

    नई दिल्ली । पंजाब पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के संयुक्त प्रयासों से सीमा पार संचालित एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े दो अलग-अलग आतंकी मॉड्यूल को निष्क्रय करते हुए राजधानी दिल्ली में एक संभावित भीषण हमले की योजना को समय रहते नाकाम कर दिया गया है। जांच अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार यह नेटवर्क काफी समय से देश के विभिन्न संवेदनशील हिस्सों में समानांतर गतिविधियां चलाने का प्रयास कर रहा था।

    प्रारंभिक तफ्तीश में इस बात की पुष्टि हुई है कि इस साजिश का मुख्य लक्ष्य राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर क्षेत्र में एकत्रित हुए छात्र आंदोलनकारियों को निशाना बनाना था। आतंकियों की मंशा भीड़भाड़ वाले इलाके में अफरा-तफरी और अशांति फैलाकर व्यवस्था को छिन्न-भिन्न करने की थी। सुरक्षा बलों द्वारा सही समय पर की गई त्वरित और सटीक कार्रवाई के चलते किसी भी तरह की अनहोनी घटना को होने से रोक लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

    कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने इस सिलसिले में विभिन्न स्थानों से कुल नौ संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लिया है। पकड़े गए आरोपियों में चार नाबालिग भी शामिल पाए गए हैं, जिनका इस्तेमाल आकाओं द्वारा मोहरे के रूप में किया जा रहा था। तलाशी अभियान के दौरान संदिग्धों के कब्जे से कई अत्याधुनिक हथियार, गोला-बारूद और आपत्तिजनक सामग्रियां बरामद की गई हैं। पूछताछ में सामने आया है कि इन सभी को सरहद पार बैठे हैंडलरों के माध्यम से लगातार दिशा-निर्देश प्राप्त हो रहे थे।

    सुरक्षा तंत्र के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मॉड्यूल के कुछ सदस्यों ने पहले ही जंतर-मंतर पहुंचकर वहां का जायजा ले लिया था। उन्हें इस गतिविधि को अंजाम देने के लिए जरूरी संसाधन और सहायता मुहैया कराई जा रही थी। हालांकि, निरंतर निगरानी और खुफिया जानकारी के सटीक विश्लेषण के आधार पर संदिग्धों की पहचान कर ली गई। इस घटनाक्रम के उपरांत दिल्ली समेत देश के अन्य संवेदनशील राज्यों में सुरक्षा ढांचा और मजबूत किया जा रहा है।

    जांच में यह पहलू भी उजागर हुआ है कि गिरोह के सदस्यों को विभिन्न रणनीतिक स्थानों और सुरक्षा बलों के काफिलों की गतिविधियों की रेकी करने का जिम्मा सौंपा गया था। वे अपने डिजिटल उपकरणों से गोपनीय वीडियो तैयार कर विदेशी हैंडलरों को भेज रहे थे। इस नेटवर्क का उद्देश्य केवल एक तात्कालिक हमला करना नहीं, बल्कि लंबे समय तक देश में अस्थिरता का माहौल बनाए रखना था, जिसके चलते अब जांच का दायरा कई अन्य राज्यों तक विस्तृत कर दिया गया है।

    मामले में नाबालिगों की मौजूदगी ने सुरक्षा विश्लेषकों की चिंता बढ़ा दी है। गिरोह के सरगना युवाओं और किशोरों को भड़काकर तथा पैसों का लालच देकर गैरकानूनी गतिविधियों में धकेल रहे थे। इसके अलावा, अवैध बैंकिंग मार्गों और हवाला के माध्यम से पैसों के लेन-देन की बात भी सामने आई है। वित्तीय जांच एजेंसियां इस पूरे फंडिंग नेटवर्क की तह तक जाने के लिए बैंक खातों और विदेशी संपर्कों की सूक्ष्म पड़ताल में जुटी हुई हैं।

    पुलिस और जांच एजेंसियां वर्तमान में गिरफ्तार किए गए सभी नौ आरोपियों से आमने-सामने बैठाकर विस्तृत पूछताछ कर रही हैं। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि अंतर-राज्यीय और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के कारण इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश का समय पर पर्दाफाश संभव हो सका है। आने वाले दिनों में इस मामले की विस्तृत जांच के आधार पर कई अन्य महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां और नए तथ्य सामने आने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

  • रांची छात्र आंदोलन के बीच सीआईडी की बड़ी कार्रवाई, पांच और गिरफ्तार; वार्ता को लेकर सक्रिय हुई हेमंत सरकार

    रांची छात्र आंदोलन के बीच सीआईडी की बड़ी कार्रवाई, पांच और गिरफ्तार; वार्ता को लेकर सक्रिय हुई हेमंत सरकार

    नई दिल्ली । झारखंड में प्रतियोगी परीक्षा में कथित धांधली को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। एक तरफ जहां जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई तेज कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच वार्ता के रास्ते तलाशने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। आपराधिक जांच विभाग यानी सीआईडी ने इस प्रकरण में पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिससे इस मामले में अब तक हुई गिरफ्तारियों का दायरा और बढ़ गया है।

    इस हालिया कार्रवाई में परीक्षा आयोजन से जुड़े एक पूर्व अधिकारी के कार्यालय में तैनात कर्मचारी, कुछ अभ्यर्थी और बिचौलिए पुलिस की गिरफ्त में आए हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और जब्त दस्तावेजों के आधार पर यह गिरफ्तारियां की गई हैं। सीआईडी की टीमें पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के उद्देश्य से लगातार विभिन्न ठिकानों पर दबिश दे रही हैं और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

    इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूरे मामले पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए आंदोलनकारी छात्रों से संवाद की पेशकश की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार युवाओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और सभी जायज मांगों पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।

    दूसरी ओर, आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे बंद कमरे में वार्ता के पक्षधर नहीं हैं। छात्रों की मांग है कि बातचीत किसी सार्वजनिक मंच पर हो या फिर पूरी प्रक्रिया का सीधा प्रसारण किया जाए, ताकि सभी अभ्यर्थियों के सामने पूरी पारदर्शिता बनी रहे। कुछ छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि मुख्यमंत्री को स्वयं अनशन स्थल पर आकर छात्रों की समस्याएं सुननी चाहिए और तुरंत समाधान की घोषणा करनी चाहिए।

    प्रदर्शन स्थल पर अनशन पर बैठे छात्रों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। आंदोलनकारी मुख्य रूप से विवादित परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने, दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और भविष्य की भर्ती परीक्षाओं के लिए सख्त कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। मध्य प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों के छात्र संगठन भी झारखंड के इस घटनाक्रम पर अपनी नजर बनाए हुए हैं और लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से आंदोलन को समर्थन मिल रहा है।

    संभावित विधानसभा घेराव और प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए हैं। शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। फिलहाल सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बने इस गतिरोध का नतीजा क्या निकलता है, इस पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।

  • FCRA बिल पर घिरी सरकार… परिसीमन विधेयक की राह में खतरा बनेगी सहयोगी दलों की नाराजगी!

    FCRA बिल पर घिरी सरकार… परिसीमन विधेयक की राह में खतरा बनेगी सहयोगी दलों की नाराजगी!


    नई दिल्ली।
    संसद (Parliament) के मौजूदा सत्र में केंद्र सरकार के सामने एक नई राजनीतिक चुनौती खड़ी होती दिखाई दे रही है। चर्चा इस बात को लेकर तेज है कि क्या भाजपा (BJP) के नेतृत्व वाली सरकार विदेशी अंशदान विनियमन कानून (FCRA) में संशोधन से जुड़े विधेयक को इसी सप्ताह सदन में पेश करेगी या फिर इसे आगे के लिए टाल दिया जाएगा। इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक समीकरण बताया जा रहा है, जिसका सीधा संबंध प्रस्तावित परिसीमन विधेयक (Proposed Delimitation Bill) से जुड़ा हुआ है।

    FCRA संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को संसद में साधारण बहुमत की जरूरत होगी, लेकिन परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी दिलाने के लिए व्यापक समर्थन जुटाना आवश्यक होगा। यही वजह है कि दोनों विधेयकों को लेकर सरकार की रणनीति को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं बढ़ गई हैं।

    सूत्रों के अनुसार, भाजपा अपने महत्वाकांक्षी परिसीमन विधेयक, जिसे 131वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में पेश किए जाने की संभावना है, को पारित कराने के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से बाहर मौजूद दलों से भी संपर्क साध रही है। हालांकि दूसरी ओर विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक 2026 को लेकर कई विपक्षी और क्षेत्रीय दलों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। तमिलनाडु की डीएमके और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) जैसे दल इसका विरोध करने के संकेत दे चुके हैं, जबकि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी जैसे दल अभी अपने रुख को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं।

    एक समाचार चैनल द्वारा विभिन्न राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं और सूत्रों से बातचीत में यह सामने आया कि FCRA विधेयक को लेकर दलों के बीच मतभेद गहरे हैं। इसमें भाजपा के सहयोगी दलों की राय भी शामिल है। दक्षिण भारत की एक प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी ने मौजूदा स्वरूप में FCRA विधेयक को लेकर चिंता जताई है। पार्टी को आशंका है कि प्रस्तावित बदलावों का असर उन संस्थानों पर पड़ सकता है, जो उसके परंपरागत मतदाता वर्ग से जुड़े हुए हैं।

    पार्टी के एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा, “सरकार के साथ बातचीत अभी जारी है। यदि हमारे सुझावों को स्वीकार किया जाता है तो हम सहयोग करने पर विचार कर सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो हमें विरोध करना पड़ेगा।” मतदान से दूरी बनाने के विकल्प पर उन्होंने कहा कि यह उनके लिए संभव नहीं है। पार्टी या तो विधेयक के समर्थन में मतदान करेगी या फिर विरोध में। उनका कहना था कि यह विषय उनके मुख्य मतदाता वर्ग से सीधे जुड़ा हुआ है और इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    सूत्रों के अनुसार, इस क्षेत्रीय दल का बड़ा समर्थन आधार ईसाई और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों में है। पार्टी को डर है कि FCRA विधेयक का वर्तमान स्वरूप इन समुदायों के बीच असंतोष पैदा कर सकता है। राजनीतिक स्थिति यह है कि परिसीमन विधेयक पर यह दल सरकार के साथ खड़ा हो सकता है, लेकिन इसके लिए उसकी अपनी शर्तें हैं। वहीं FCRA संशोधन विधेयक पर समर्थन मिलने की संभावना काफी कम नजर आ रही है।

    इधर, एनसीपी (शरद पवार गुट) और डीएमके ने भी स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वे FCRA विधेयक के मौजूदा स्वरूप के पक्ष में नहीं हैं। दोनों दल चाहते हैं कि इस विधेयक को आगे विचार के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा जाए। एनसीपी (शरद पवार गुट) के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा की आवश्यकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि हर दानदाता और हर संस्था को संदेह की नजर से क्यों देखा जाए।

    एनसीपी सांसद ने कहा कि सामाजिक संस्थाओं और धर्मार्थ संगठनों के माध्यम से मिलने वाली सहायता का उपयोग बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और जनकल्याण के कार्यों में होता है। उनका कहना था कि कुछ संस्थाओं की गलतियों के आधार पर सभी संस्थानों और दानदाताओं पर संदेह करना उचित नहीं है।

    उन्होंने कहा कि मौजूदा स्वरूप में उनकी पार्टी इस विधेयक का समर्थन नहीं कर सकती और इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की मांग करेगी। वहीं परिसीमन विधेयक पर समर्थन के सवाल पर उन्होंने कहा कि जब तक राजनीतिक दलों को विधेयक का प्रारूप उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक कोई अंतिम निर्णय लेना संभव नहीं है।

    डीएमके भी FCRA विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति में भेजने की मांग कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, तमिलनाडु में कांग्रेस से दूरी बढ़ने के बाद डीएमके इस मुद्दे पर अपनी अलग राजनीतिक लाइन तैयार कर रही है। डीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया कि मौजूदा स्वरूप में यह विधेयक अल्पसंख्यक संस्थानों, शैक्षणिक संगठनों और गैर सरकारी संगठनों पर दबाव बढ़ाने का माध्यम बन सकता है। उनका कहना था कि विधेयक में ऐसे प्रावधान हैं, जिनसे सरकार को FCRA के तहत धन प्राप्त करने वाले संस्थानों की संपत्तियों पर कार्रवाई करने का अधिकार मिल सकता है, जिसमें पहले से खरीदी गई संपत्तियां भी शामिल हो सकती हैं।

    डीएमके नेता ने सवाल उठाया कि वर्षों पहले खरीदी गई संपत्तियों पर बाद में कार्रवाई करने का अधिकार देना कितना उचित होगा। उन्होंने कहा कि गैर सरकारी संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। यदि सुधार की जरूरत है तो नियमों में बदलाव किए जा सकते हैं, लेकिन ऐसा प्रावधान नहीं होना चाहिए जिससे सभी संस्थानों को संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया जाए।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि डीएमके और वाईएसआर कांग्रेस जैसी पार्टियां FCRA विधेयक का विरोध करती हैं और दूसरी ओर परिसीमन विधेयक पर भाजपा का समर्थन करती हैं तो उनके सामने राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी। सूत्रों के अनुसार, इन दलों में इस मुद्दे पर गंभीर मंथन चल रहा है। वहीं विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने संसद में FCRA संशोधन विधेयक को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि कांग्रेस कई कारणों से इस विधेयक का विरोध करेगी।

    केरल से जुड़े कांग्रेस नेताओं ने भी आशंका जताई है कि प्रस्तावित संशोधनों का असर राज्य के गैर सरकारी संगठनों और धार्मिक संस्थाओं पर पड़ सकता है। विपक्ष का कहना है कि पिछली तारीख से संपत्तियों पर कार्रवाई करने की संभावित शक्ति और अधिकारियों को व्यापक अधिकार देना चिंता का विषय है। एक वरिष्ठ सीपीएम नेता ने दावा किया कि प्रस्तावित FCRA संशोधन के तहत अधिकारियों को मिलने वाली शक्तियां वक्फ संशोधन कानून में दिए गए अधिकारों से भी अधिक व्यापक हो सकती हैं।

    गौरतलब है कि इससे पहले महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को विपक्षी एकजुटता के कारण संसद में चुनौती का सामना करना पड़ा था। हालांकि पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद सामने आए हैं। वहीं एनसीपी के नए राजनीतिक समीकरण और ‘ऑपरेशन टाइगर’ की सफलता के बाद NDA का संख्या बल मजबूत हुआ है।

    ऐसे में भाजपा आने वाले छह महीने से कम समय में परिसीमन विधेयक को आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकती है। राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए अब इस विधेयक के पारित होने की संभावना पहले की तुलना में अधिक दिखाई दे रही है, लेकिन FCRA संशोधन विधेयक पर सहयोगी दलों और विपक्ष की नाराजगी सरकार के लिए नई चुनौती बन सकती है।

  • परिसीमन बिल पर सरकार को एक विपक्षी दल का मिल सकता है साथ, द्रमुक का बदल रहा मूड

    परिसीमन बिल पर सरकार को एक विपक्षी दल का मिल सकता है साथ, द्रमुक का बदल रहा मूड


    नई दिल्ली।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) में बदली राजनीतिक परिस्थितियों के बाद केंद्र के परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) पर द्रमुक के रुख में भी बदलाव दिख रहा है। राज्य में चुनाव से पहले इस बिल का खुला विरोध कर रही द्रमुक अब कह रही है कि विधेयक के प्रावधानों को देखने के बाद इसके समर्थन करने या नहीं करने का फैसला लिया जाएगा।

    सूत्रों का कहना है उसके इस रुख का मतलब है कि यदि बिल में यह प्रावधान होता है कि राज्यों में विधानसभा की मौजूदा सीटों की संख्या में समान रूप से 50% की वृद्धि होगी तो द्रमुक समर्थन देने के लिए तैयार हो सकती है। अप्रैल में जो बिल सरकार ने पेश किया था, तब ऐसी बात कही गई थी लेकिन यह विधेयक में नहीं थी। वह विधेयक पारित नहीं हो पाया था।


    पहले विरोध में थी DMK

    सरकार पिछले सत्र में जब यह बिल लाई थी तो द्रमुक ने इसका खुलकर विरोध किया था और इसे तमिलनाडु के हितों के खिलाफ बताया था। तब विधेयक के प्रावधानों की बात पर कोई चर्चा नहीं हुई थी। सूत्रों का कहना है कि द्रमुक के दबाव में ही तब इंडिया गठबंधन ने इस विधेयक का विरोध किया था। तब सरकार को भी ऐसी उम्मीद नहीं थी कि स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने वाली कांग्रेस इस विधेयक का विरोध करेगी। द्रमुक के वरिष्ठ नेता त्रिरुचि शिवा ने कहा कि जो रुख पहले था, वह अब नहीं है। अब हम कह रहे हैं कि पहले विधेयक का प्रारूप सामने हो, उसके बाद निर्णय करेंगे।

    द्रमुक के लोकसभा में 22 सदस्य हैं जो सरकार को दो तिहाई बहुमत से इस विधेयक को पारित कराने में अहम साबित हो सकते हैं। इस बिल को पारित करने के लिए सरकार को लोकसभा में 360 सांसदों का समर्थन चाहिए। अभी तक एनडीए के पास 326 तक की संख्या हुई है। बता दें कि इससे पूर्व कांग्रेस के टीवीके सरकार को समर्थन देने के मुद्दे पर नाराज द्रमुक इंडिया गठबंधन से अलग हो चुका है। ऐसे में सत्ता पक्ष की उम्मीदें उससे बढ़ी हैं।


    विशेष सत्र बुलाने का प्रस्ताव नहीं

    संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बुधवार रात कहा कि महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को लेकर 16 से 18 अगस्त के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार मौजूदा मॉनसून सत्र में संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने की नए सिरे से कोशिश कर रही है। इस विधेयक का मकसद 2029 में लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करना है।

    कुछ राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि स्वतंत्रता दिवस के बाद संसद का विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण संशोधन विधेयक फिर से पेश किए जा सकते हैं। इस बारे में पूछे जाने पर रीजीजू ने विशेष सत्र के किसी भी प्रस्ताव से इनकार किया।

  • JPPSC-JSSC विवाद पर झारखंड सरकार का वार्ता प्रस्ताव, छात्रों ने सार्वजनिक बातचीत की मांग रखकर आंदोलन जारी रखा

    JPPSC-JSSC विवाद पर झारखंड सरकार का वार्ता प्रस्ताव, छात्रों ने सार्वजनिक बातचीत की मांग रखकर आंदोलन जारी रखा

    नई दिल्ली । झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर जारी छात्र आंदोलन आठवें दिन भी जारी रहा। राजधानी रांची में आंदोलनरत छात्र झारखंड लोक सेवा आयोग (JPPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से जुड़ी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने छात्रों को बातचीत का प्रस्ताव दिया है, जिससे पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है।

    बुधवार को रांची के धरना स्थल पर प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे और प्रदर्शनकारी छात्रों से सरकार की ओर से वार्ता का संदेश दिया। अधिकारियों ने छात्रों से पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बनाकर सरकार के साथ बातचीत करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से सर्किट हाउस में वार्ता का प्रस्ताव भेजा गया, ताकि छात्रों की मांगों पर चर्चा कर समाधान का रास्ता निकाला जा सके।

    हालांकि प्रदर्शनकारी छात्रों ने बंद कमरे में बातचीत करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि यदि सरकार वास्तव में उनकी बात सुनना चाहती है तो बातचीत सार्वजनिक रूप से और मीडिया की मौजूदगी में होनी चाहिए। छात्रों ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं धरना स्थल पर आकर उनसे संवाद करें, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे और जनता भी बातचीत को देख सके।

    धरना स्थल पर प्रशासन और छात्रों के बीच लगातार संवाद की कोशिशें जारी रहीं। प्रशासन प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से वार्ता शुरू कराने का प्रयास करता रहा, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम रहे। छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर ठोस और स्पष्ट निर्णय के बिना आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। उनका उद्देश्य केवल निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    इस आंदोलन ने राज्य की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। विपक्षी दलों ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों का समर्थन जताया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में विपक्षी प्रतिनिधियों ने आंदोलन स्थल पहुंचकर छात्रों से मुलाकात की और उनकी मांगों पर चर्चा की। इसके अलावा कई सामाजिक और साहित्यिक हस्तियां भी आंदोलन को समर्थन देने के लिए धरना स्थल पहुंचीं और छात्रों का मनोबल बढ़ाया।

    झारखंड में चल रहे इस आंदोलन को राज्य के युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता से जुड़े बड़े मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजर सरकार और छात्रों के बीच संभावित वार्ता पर टिकी हुई है। यदि दोनों पक्ष सहमति के साथ किसी समाधान पर पहुंचते हैं तो लंबे समय से जारी गतिरोध समाप्त हो सकता है। फिलहाल प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत की संभावनाएं बनी हुई हैं, जबकि छात्र अपनी मांगों पर अडिग हैं और आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।

  • राहुल गांधी के साथ सामने आए प्रदर्शनकारी छात्र, लाठीचार्ज, पैलेट गन और अभद्र व्यवहार के लगाए आरोप

    राहुल गांधी के साथ सामने आए प्रदर्शनकारी छात्र, लाठीचार्ज, पैलेट गन और अभद्र व्यवहार के लगाए आरोप


    नई दिल्ली ।
    कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े छात्र-छात्राओं के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में अपनी बात रखते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने वाले युवाओं के साथ कथित रूप से बल प्रयोग किया गया और उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया गया। राहुल गांधी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और छात्रों के साथ हुई कथित घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद छात्र-छात्राओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए पुलिस कार्रवाई को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। एक छात्रा ने दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने के बावजूद उन्हें देशद्रोही कहा गया। उनका आरोप था कि प्रदर्शन के दौरान बिना किसी उकसावे के बल प्रयोग किया गया और उन्हें शारीरिक चोटें भी आईं। छात्रा ने कहा कि वे केवल अपनी मांगों को शांतिपूर्ण ढंग से रखना चाहते थे।

    राहुल गांधी ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों ने कोई गैरकानूनी कार्य नहीं किया और वे केवल शिक्षा व्यवस्था तथा युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को उठा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल युवाओं पर दबाव बनाने और उन्हें माफी मांगने के लिए मजबूर करने जैसी घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि देश को ऐसी शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है जिसमें परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष हो और युवाओं का भविष्य सुरक्षित रहे।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल अन्य प्रदर्शनकारियों ने भी अपनी आपबीती सुनाई। एक छात्रा ने दावा किया कि प्रदर्शन के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर लगातार आपत्तिजनक टिप्पणियों और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना था कि उन्होंने इस संबंध में शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सोशल मीडिया पर महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल पर भी चिंता व्यक्त की।

    एक अन्य छात्रा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया, जिससे उन्हें चोट लगी। वहीं एक अन्य प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि हिरासत के दौरान उनके नाम और पहचान के आधार पर अलग व्यवहार किया गया। इन सभी आरोपों के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।

    जंतर-मंतर प्रदर्शन और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया है, जबकि इस पूरे मामले पर आगे संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई और आधिकारिक पक्ष का भी इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

  • निलंबन के बाद धरने पर बैठे सपा विधायक सचिन यादव, वही पोस्टर दिखाकर बोले- सरकार चर्चा से भाग रही है

    निलंबन के बाद धरने पर बैठे सपा विधायक सचिन यादव, वही पोस्टर दिखाकर बोले- सरकार चर्चा से भाग रही है

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र से निलंबित किए गए समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक सचिन यादव बुधवार को विधानसभा परिसर में चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के पास धरने पर बैठ गए। इस दौरान उनके हाथ में वही पोस्टर था, जिसे सदन के भीतर दिखाने पर उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई थी।

    धरने के दौरान सचिन यादव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है और जनता इस पर सरकार से जवाब चाहती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले कहा था कि “दूध का दूध और पानी का पानी” हो जाएगा, लेकिन अब तक आरोपियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनके अनुसार विपक्ष इस मुद्दे पर सदन में चर्चा चाहता है, जबकि सरकार इससे बच रही है।

    सचिन यादव के पास मौजूद पोस्टर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर के साथ उनके पुराने बयान का उल्लेख करते हुए सवाल किया गया था कि मामले में कार्रवाई का क्या हुआ।

    पोस्टर दिखाने पर हुआ था निलंबन
    मंगलवार को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सपा विधायक राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण पर चर्चा कराने की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। दोपहर बाद जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना वक्तव्य दे रहे थे, तभी सचिन यादव ने मुख्यमंत्री की तस्वीर वाला पोस्टर सदन में लहराया।

    इस पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कड़ी आपत्ति जताई और पहले चेतावनी दी। पोस्टर हटाने से इनकार करने पर सचिन यादव को सदन से निलंबित कर दिया गया। इसके बाद सदन में हंगामा बढ़ गया और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

    बुधवार को भी नहीं चल सकी कार्यवाही
    बुधवार को भी विधानसभा में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच गतिरोध बना रहा। हंगामे के कारण कार्यवाही पहले आधे घंटे के लिए और बाद में दोपहर एक बजे तक स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष लगातार राम मंदिर चढ़ावा मामले पर चर्चा की मांग करता रहा, जबकि सदन की कार्यवाही बाधित होती रही।

  • उर्स-ए-रजवी: बरेली जंक्शन पर 25 ट्रेनों का अतिरिक्त ठहराव, यात्रियों की सुविधा के लिए छह स्पेशल ट्रेनें भी चलेंगी

    उर्स-ए-रजवी: बरेली जंक्शन पर 25 ट्रेनों का अतिरिक्त ठहराव, यात्रियों की सुविधा के लिए छह स्पेशल ट्रेनें भी चलेंगी


    बरेली।
    आला हजरत के उर्स-ए-रजवी के मद्देनजर रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। 6 से 8 अगस्त तक बरेली जंक्शन पर 25 ट्रेनों को अतिरिक्त ठहराव दिया जाएगा। इनमें छह ऐसी सुपरफास्ट ट्रेनें भी शामिल हैं, जिनका नियमित रूप से यहां ठहराव नहीं होता। इसके अलावा आठ अगस्त को तीन जोड़ी विशेष अनारक्षित ट्रेनों का संचालन भी किया जाएगा।

    सीनियर डीसीएम महेश यादव ने बताया कि उर्स के दौरान 20 ट्रेनों के ठहराव की अवधि बढ़ाई गई है, ताकि यात्रियों को चढ़ने और उतरने में सुविधा मिल सके। वहीं, बरेली-सहारनपुर, इज्जतनगर-लालकुआं और बरेली सिटी-पीलीभीत रूट पर तीन जोड़ी विशेष अनारक्षित ट्रेनें चलाई जाएंगी।

    इन ट्रेनों को मिलेगा अतिरिक्त ठहराव
    अस्थायी रूप से जिन प्रमुख ट्रेनों का बरेली जंक्शन पर ठहराव रहेगा, उनमें गंगा-सतलुज एक्सप्रेस, अर्चना एक्सप्रेस, जम्मूतवी-कानपुर सेंट्रल सुपरफास्ट, जननायक एक्सप्रेस, चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस, काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस, जनसेवा एक्सप्रेस, योग नगरी ऋषिकेश-प्रयागराज संगम एक्सप्रेस, शहीद एक्सप्रेस, सरयू-यमुना एक्सप्रेस, अकाल तख्त एक्सप्रेस, कोलकाता-नांगल डैम एक्सप्रेस और जलियांवाला बाग एक्सप्रेस शामिल हैं।

    इसके अलावा जनसाधारण एक्सप्रेस, बेगमपुरा एक्सप्रेस और सप्तक्रांति एक्सप्रेस की दोनों दिशाओं की सेवाओं को भी बरेली जंक्शन पर अतिरिक्त अस्थायी ठहराव दिया गया है। रेलवे ने बताया कि 8 अगस्त को बरेली-मुरादाबाद पैसेंजर (64177) अपने निर्धारित समय दोपहर 2:40 बजे के बजाय 3:45 बजे रवाना होगी।

    दिल्ली कैंट पर चार ट्रेनों का ठहराव रहेगा निरस्त
    उधर, दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म संख्या 2 और 3 के उन्नयन कार्य के चलते 13 अक्तूबर तक चार ट्रेनों का वहां ठहराव अस्थायी रूप से रद्द कर दिया गया है। इनमें जैसलमेर-काठगोदाम एक्सप्रेस, साबरमती-वाराणसी सुपरफास्ट, उदयपुर सिटी-नई दिल्ली एक्सप्रेस और बीकानेर-हावड़ा साप्ताहिक एक्सप्रेस शामिल हैं। यात्रियों से यात्रा से पहले ट्रेन की अद्यतन स्थिति की जानकारी लेने की अपील की गई है।

  • UP : बारिश बनी आफत: फिरोजाबाद में भरभराकर गिरा मकान, परिवार ने भागकर बचाई जान

    UP : बारिश बनी आफत: फिरोजाबाद में भरभराकर गिरा मकान, परिवार ने भागकर बचाई जान

    फिरोजाबाद। लगातार हो रही बारिश ने फिरोजाबाद में एक परिवार का आशियाना छीन लिया। थाना बसई मोहम्मदपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत सोफीपुर में बुधवार सुबह बारिश के चलते एक मकान अचानक भरभराकर ढह गया। गनीमत रही कि परिवार के सभी सदस्य समय रहते घर से बाहर निकल आए, जिससे बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, मकान गिरने से लाखों रुपये का घरेलू सामान मलबे में दबकर नष्ट हो गया।

    पीड़ित राजन सिंह ने बताया कि पिछले कई दिनों से हो रही बारिश के कारण मकान में सीलन आ गई थी और उसकी हालत काफी जर्जर हो चुकी थी। बुधवार सुबह अचानक दीवार और छत एक साथ गिर गईं, जिससे वर्षों की मेहनत से बसाया गया घर मलबे में तब्दील हो गया।

    घटना की सूचना तत्काल स्थानीय प्रशासन को दी गई, लेकिन पीड़ित परिवार का आरोप है कि काफी समय बीतने के बाद भी कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इसे लेकर ग्रामीणों में भी नाराजगी देखी गई।

    आर्थिक रूप से कमजोर राजन सिंह के सामने अब परिवार और छोटे बच्चों के लिए रहने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। उनका कहना है कि वे अपने दम पर दोबारा मकान बनाने की स्थिति में नहीं हैं। पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन और तहसील अधिकारियों से आर्थिक सहायता, तत्काल राहत और सरकारी आवास योजना के तहत मदद उपलब्ध कराने की मांग की है।

  • यूपी विधानसभा में भावुक हुए सतीश महाना, बोले- राजनीति अंतिम पड़ाव पर, तय करूंगा इस कुर्सी के योग्य हूं या नहीं

    यूपी विधानसभा में भावुक हुए सतीश महाना, बोले- राजनीति अंतिम पड़ाव पर, तय करूंगा इस कुर्सी के योग्य हूं या नहीं

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना सदन में भावुक हो गए। मंगलवार को हुई तीखी नोकझोंक और हंगामे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनका राजनीतिक जीवन अंतिम चरण में है और अब उन्हें गंभीरता से विचार करना होगा कि वे विधानसभा अध्यक्ष के पद के योग्य हैं या नहीं।

    सतीश महाना ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों से उन्होंने सदन को संवाद, मर्यादा और लोकतांत्रिक परंपराओं के साथ चलाने का प्रयास किया, लेकिन हाल की घटनाओं ने उन्हें आत्ममंथन के लिए मजबूर कर दिया है। उन्होंने कहा कि पहली बार ऐसा लगा कि या तो उनके प्रयासों में कहीं कमी रह गई या फिर डॉ. भीमराव आंबेडकर की वह बात सही साबित हो रही है कि कमी संविधान में नहीं, बल्कि उसे संचालित करने वालों में होती है। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीरता से विचार करेंगे और यह तय करेंगे कि उनकी भूमिका और कार्यशैली उचित रही या नहीं।

    बिना चर्चा के पारित हुए कई विधेयक
    सदन में लगातार हंगामे के बीच कई महत्वपूर्ण विधेयक बिना विस्तृत चर्चा के पारित हो गए। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव रखा, जिसे सभापति ने स्वीकार कर लिया।

    केशव मौर्य ने साधा विपक्ष पर निशाना
    उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी पर लोकतांत्रिक परंपराओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी बात रखने का अवसर तक नहीं दिया, जिससे स्पष्ट है कि उसका उद्देश्य केवल सदन की कार्यवाही बाधित करना था। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता के मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय विपक्ष ने हंगामे का रास्ता चुना। साथ ही उन्होंने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

    हंगामे के बीच सपा विधायक निलंबित
    मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वक्तव्य के दौरान विपक्ष के हंगामे के बीच समाजवादी पार्टी के विधायक सचिन यादव को निलंबित कर दिया गया। इसके बाद वह विधानसभा परिसर में चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के सामने धरने पर बैठ गए। बाद में अन्य विपक्षी विधायक भी उनके समर्थन में पहुंचे। विपक्ष का आरोप था कि वह राम मंदिर चढ़ावा मामले पर चर्चा कराना चाहता था, लेकिन सरकार इस मुद्दे पर सदन में बहस से बच रही है।