Category: National

  • FCRA बिल को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद, शशि थरूर बोले- सामाजिक संस्थाओं की स्वतंत्रता बचाने के लिए विपक्ष एकजुट हो

    FCRA बिल को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद, शशि थरूर बोले- सामाजिक संस्थाओं की स्वतंत्रता बचाने के लिए विपक्ष एकजुट हो

     
    नई दिल्ली । प्रस्तावित फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन संशोधन विधेयक को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस विधेयक का खुलकर विरोध करते हुए इसे नागरिक समाज, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों के लिए गंभीर चुनौती बताया है। उन्होंने विपक्षी दलों से अपील की है कि संसद में इस विधेयक के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाई जाए और इसे वर्तमान स्वरूप में पारित होने से रोका जाए। थरूर का कहना है कि यह केवल कानूनी संशोधन का मामला नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली और स्वतंत्रता से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।

    शशि थरूर ने कहा कि वर्षों से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में कार्य कर रहे अनेक संस्थानों ने देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका मानना है कि प्रस्तावित संशोधन के कारण ऐसे संगठनों पर अतिरिक्त कानूनी और प्रशासनिक दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने चिंता जताई कि यदि नियम अत्यधिक कठोर हुए तो अनेक संस्थाओं के नियमित कार्य प्रभावित हो सकते हैं, जिसका असर समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों तक पहुंचने वाली सेवाओं पर भी पड़ेगा।

    कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में गैर-लाभकारी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों पर लगातार सख्ती बढ़ी है। उनके अनुसार विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले संगठनों की संख्या और फंडिंग में पहले ही उल्लेखनीय गिरावट देखी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यदि नया संशोधन लागू होता है तो अनेक संस्थाओं के संचालन पर और अधिक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने इस पूरे मुद्दे को लोकतांत्रिक व्यवस्था और नागरिक समाज की भूमिका से जोड़ते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की।

    थरूर ने विशेष रूप से केरल का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां लंबे समय से कई सामाजिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य संस्थान बिना किसी भेदभाव के समाज की सेवा करते रहे हैं। उनके अनुसार इन संस्थाओं ने शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने आशंका जताई कि नए प्रावधानों से ऐसे संगठनों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है।

    उन्होंने विपक्षी सांसदों से आग्रह किया कि इस विधेयक पर संसद में व्यापक चर्चा कराई जाए और सभी दल मिलकर अपनी बात मजबूती से रखें। उनका कहना है कि लोकतंत्र में किसी भी महत्वपूर्ण कानून पर सभी पक्षों की राय और विस्तृत विचार-विमर्श आवश्यक होता है। उन्होंने इसे केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि संस्थागत स्वतंत्रता और सार्वजनिक हित से जुड़ा विषय बताया।

    दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि विदेशी अंशदान से जुड़े कानूनों का उद्देश्य पारदर्शिता, जवाबदेही और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सरकार के अनुसार नियामक व्यवस्था को मजबूत बनाने और विदेशी फंड के उपयोग की प्रभावी निगरानी के लिए समय-समय पर कानूनी संशोधन आवश्यक होते हैं। ऐसे में अब प्रस्तावित विधेयक को लेकर संसद में होने वाली चर्चा और विभिन्न राजनीतिक दलों की रणनीति पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • प्रतापगढ़ में दर्दनाक हादसा: बारिश में ढहा 100 साल पुराना मकान, एक ही परिवार के 6 लोगों की मौत

    प्रतापगढ़ में दर्दनाक हादसा: बारिश में ढहा 100 साल पुराना मकान, एक ही परिवार के 6 लोगों की मौत


    प्रतापगढ़।
    उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में बुधवार देर रात एक दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के छह लोगों की मौत हो गई। चिलबिला कोतवाली क्षेत्र के महुली मंडी इलाके में लगातार बारिश के बीच करीब 100 साल पुराना जर्जर मकान अचानक भरभराकर ढह गया। हादसे के समय पूरा परिवार घर के एक कमरे में सो रहा था।

    सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। मलबे में दबे सात लोगों को बाहर निकाला गया, जिनमें छह की मौत हो गई, जबकि परिवार का एक सदस्य सुरक्षित बच गया।

    माता-पिता, बेटा-बहू और दो मासूमों की गई जान
    हादसे में प्रमोद श्रीवास्तव (45), उनकी पत्नी रीता श्रीवास्तव (42), पुत्र अमन/नितिन (24), बहू माधुरी (24), दो वर्षीय पोते माधव और छह माह के मासूम बाबू की मौत हो गई। सभी को तत्काल मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    बारिश के बीच रात में ढही छत
    पुलिस के अनुसार, परिवार बुधवार रात भोजन के बाद एक ही कमरे में सो रहा था। देर रात करीब दो से तीन बजे के बीच लगातार बारिश के दौरान मकान की छत अचानक भरभराकर गिर गई, जिससे पूरा परिवार मलबे में दब गया।

    प्रशासन जांच में जुटा, सीएम ने जताया शोक
    सीओ सिटी आशुतोष मिश्रा ने छह लोगों की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने और पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

  • लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे 18 दिन में 84 जगह धंसा, मरम्मत शुरू; गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया पर उठे सवाल

    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे 18 दिन में 84 जगह धंसा, मरम्मत शुरू; गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया पर उठे सवाल

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लगभग 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर कई स्थानों पर सड़क धंसने और दरारें आने की घटनाएं सामने आने के बाद मरम्मत कार्य लगातार जारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शुरुआती 18 दिनों के भीतर कुल 84 स्थानों पर मरम्मत करनी पड़ी, जिसके बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

    बताया जा रहा है कि एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों में सड़क की सतह बैठने, दरारें आने और पैचवर्क की आवश्यकता पड़ने जैसी समस्याएं सामने आई हैं। कई स्थानों पर मरम्मत के बाद भी सड़क दोबारा प्रभावित होने की जानकारी मिली है। कुछ हिस्सों में जलभराव और सड़क किनारे बने शोल्डर के धंसने की भी शिकायतें सामने आई हैं। इसके चलते संबंधित एजेंसियां लगातार निगरानी और सुधार कार्य में लगी हुई हैं।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने निर्माण करने वाली कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने कंपनी को गैर-प्रदर्शन श्रेणी में रखते हुए उसके कुछ अधिकारियों को परियोजना से हटाने का निर्णय लिया है। साथ ही परियोजना की गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने का फैसला भी लिया गया है। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम निर्माण कार्य, उपयोग की गई सामग्री और तकनीकी मानकों का परीक्षण करेगी।

    सड़क निर्माण क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी एक्सप्रेसवे पर इतने कम समय में बार-बार सड़क धंसने जैसी स्थिति सामने आती है तो निर्माण प्रक्रिया, मिट्टी की तैयारी, जल निकासी व्यवस्था और आधार परत की गुणवत्ता की गहन जांच आवश्यक हो जाती है। उनका कहना है कि यदि मूल संरचना में किसी प्रकार की कमी पाई जाती है तो केवल ऊपरी सतह की मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी और प्रभावित हिस्सों का पुनर्निर्माण करना पड़ सकता है।

    यह एक्सप्रेसवे राज्य की प्रमुख आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल है। इसकी कुल लागत लगभग 4,700 करोड़ रुपये बताई गई है, जिससे यह प्रदेश की सबसे महंगी एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में गिना जा रहा है। इस मार्ग के शुरू होने से लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा समय कम करने तथा यातायात को सुगम बनाने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि शुरुआती दिनों में सामने आई तकनीकी समस्याओं ने परियोजना की गुणवत्ता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    परियोजना का निर्माण एक निजी कंपनी द्वारा किया गया है। इस कंपनी को लेकर पहले भी विभिन्न मामलों में चर्चा होती रही है। हालांकि मौजूदा मामले में जांच का मुख्य केंद्र सड़क निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का पालन है। संबंधित एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि सड़क धंसने के पीछे निर्माण संबंधी कमी, मौसम, जल निकासी व्यवस्था या अन्य कोई तकनीकी कारण जिम्मेदार है।

    फिलहाल एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में मरम्मत कार्य जारी है और कुछ स्थानों पर यातायात को डायवर्जन के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति न हो और यात्रियों को सुरक्षित एवं सुगम यात्रा का लाभ मिल सके।

  • लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सियासत तेज, पंखे से सड़क सुखाने के वीडियो पर अखिलेश का तंज

    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सियासत तेज, पंखे से सड़क सुखाने के वीडियो पर अखिलेश का तंज


    लखनऊ।
    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मरम्मत के दौरान सड़क को पंखों से सुखाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर निशाना साधा है। वहीं, सड़क धंसने की घटनाओं के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और मामले की जांच आईआईटी खड़गपुर को सौंपी गई है।

    अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर वायरल वीडियो साझा करते हुए तंज कसा, “भाजपाई तरक्की की नई हवा”। उन्होंने कहा कि जिस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कुछ ही दिन पहले हुआ हो, उसकी बार-बार मरम्मत होना निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने यह भी पूछा कि जब सड़क उद्घाटन के दो-तीन सप्ताह के भीतर ही कई बार मरम्मत मांग रही है, तो उस पर तेज रफ्तार से सफर करने का जोखिम आखिर कौन उठाएगा।

    20 दिन में कई जगह सड़क धंसने के मामले
    करीब 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को किया गया था। लगभग 4,200 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे पर उद्घाटन के बाद करीब 20 दिनों के भीतर कई स्थानों पर सड़क धंसने और सतह खिसकने की घटनाएं सामने आई हैं, जिसके बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।

    NHAI ने शुरू की सख्त कार्रवाई
    लगातार शिकायतों के बाद NHAI ने निर्माण एजेंसी PNC Infratech के खिलाफ नॉन-परफॉर्मर घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को हटाकर उनके मूल विभाग भेज दिया गया है। इसके अलावा पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया को आरोपपत्र जारी किया गया है।

    साथ ही प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक गुप्ता, रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार और स्वतंत्र अभियंता टीम के प्रमुख सुरेंद्र कुमार को दो वर्षों के लिए NHAI और सड़क परिवहन मंत्रालय की परियोजनाओं से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

    IIT खड़गपुर करेगी तकनीकी जांच
    NHAI का कहना है कि लगातार बारिश के कारण सड़क के नीचे की मिट्टी तक पानी पहुंचने से कुछ हिस्सों में स्लिपेज की स्थिति बनी है। हालांकि वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों की समिति गठित की गई है। इसके अलावा पूरे एक्सप्रेसवे का लेजर प्रोफिलोमीटर तकनीक से परीक्षण कराया जा रहा है।

    मरम्मत तक नहीं लगेगा टोल
    प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित हिस्सों की मरम्मत पर आने वाला करीब 3 करोड़ रुपये का खर्च निर्माण कंपनी ही वहन करेगी। मरम्मत पूरी होने तक एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली भी स्थगित रहेगी और इस दौरान यात्रियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। टोल से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई भी निर्माण एजेंसी से ही की जाएगी।

  • घुमंतू समाज के विकास के लिए योगी सरकार का बड़ा फैसला, CM बोले- अब नहीं खानी पड़ेगी दर-दर की ठोकरें

    घुमंतू समाज के विकास के लिए योगी सरकार का बड़ा फैसला, CM बोले- अब नहीं खानी पड़ेगी दर-दर की ठोकरें

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घुमंतू और विमुक्त समुदायों के लिए बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अब उन्हें दर-दर भटकने और उपेक्षा का सामना नहीं करना पड़ेगा। राज्य सरकार ने घुमंतू विकास बोर्ड का गठन कर इन समुदायों को सम्मानजनक जीवन, सरकारी योजनाओं का लाभ और विकास के समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम उठाया है।

    गुरुवार को बोर्ड के गठन के बाद आयोजित आभार एवं अभिनंदन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बोर्ड केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि वर्षों से उपेक्षित घुमंतू और विमुक्त समाज को न्याय, सम्मान और मुख्यधारा से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए सरकार बिना किसी भेदभाव के समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य हर पात्र व्यक्ति को सभी जनकल्याणकारी योजनाओं से शत-प्रतिशत जोड़ना है।

    योगी आदित्यनाथ ने बताया कि डबल इंजन सरकार ने वनटांगिया, मुसहर, थारू, गौड़, चेरो, बुक्सा, कोल और सहरिया जैसे वंचित समुदायों को राशन कार्ड, भूमि के पट्टे, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास, आयुष्मान भारत कार्ड, निःशुल्क बिजली व गैस कनेक्शन तथा विभिन्न पेंशन योजनाओं से जोड़ा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के लिए जनता केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि ‘जनार्दन’ है। इसी सोच के साथ अनुसूचित जाति-जनजाति के बच्चों के लिए आश्रम पद्धति विद्यालय और श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं, जहां शिक्षा, आवास और भोजन की निःशुल्क व्यवस्था उपलब्ध है।

    उन्होंने कहा कि अब किसी भी घुमंतू या विमुक्त समुदाय को ‘क्रिमिनल ट्राइब’ कहकर नहीं पुकारा जा सकता। ये वे समुदाय हैं जिन्होंने देश की आजादी के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है और अब उन्हें उनका उचित सम्मान दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है। घुमंतू विकास बोर्ड इन समुदायों की पहचान कर उन्हें शासन की सभी योजनाओं से जोड़ने का कार्य करेगा।

    मुख्यमंत्री ने सपेरा समाज का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यह समुदाय गुरु गोरखनाथ की परंपरा का अनुयायी रहा है और प्राचीन काल में समाज को जागरूक करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार घुमंतू समुदायों के सम्मानजनक पुनर्वास और समग्र विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।

  • संजय कपूर संपत्ति विवाद में सुलह की उम्मीद बढ़ी, सुप्रीम कोर्ट ने 2 नवंबर तक बढ़ाई मध्यस्थता अवधि

    संजय कपूर संपत्ति विवाद में सुलह की उम्मीद बढ़ी, सुप्रीम कोर्ट ने 2 नवंबर तक बढ़ाई मध्यस्थता अवधि


    नई दिल्ली ।
    दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की संपत्ति और आरके फैमिली ट्रस्ट से जुड़े पारिवारिक विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में चल रही मध्यस्थता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति देते हुए इसकी अवधि 2 नवंबर तक बढ़ा दी है। अदालत ने संकेत दिया कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और यदि यह प्रक्रिया इसी तरह जारी रही तो लंबे समय से चला आ रहा विवाद आपसी सहमति से समाप्त हो सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया के समानांतर बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना सभी पक्षों के हित में होगा।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने मध्यस्थता से संबंधित रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद कहा कि अब तक की प्रगति संतोषजनक रही है। न्यायालय ने विश्वास व्यक्त किया कि संबंधित पक्ष समाधान के काफी करीब पहुंच चुके हैं। इसी आधार पर मध्यस्थता को अतिरिक्त समय देने का निर्णय लिया गया। साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि मध्यस्थ की फीस का भुगतान आरके फैमिली ट्रस्ट की ओर से किया जाएगा। यदि निर्धारित अवधि में सहमति नहीं बनती है तो सभी पक्ष कानून के अनुसार आगे की न्यायिक कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र होंगे।

    यह विवाद उद्योगपति संजय कपूर के निधन के बाद उनकी विशाल संपत्ति और व्यावसायिक हिस्सेदारी के अधिकारों को लेकर शुरू हुआ था। जून 2025 में उनके निधन के बाद परिवार के विभिन्न सदस्यों के बीच उत्तराधिकार और ट्रस्ट के संचालन को लेकर मतभेद सामने आए। मामले में संजय कपूर की मां रानी कपूर, पत्नी प्रिया कपूर तथा उनकी पहली पत्नी करिश्मा कपूर से हुए बच्चों समायरा और कियान कपूर के हितों और अधिकारों को लेकर भी कई कानूनी प्रश्न उठे। इसी कारण यह मामला पहले निचली अदालतों और बाद में सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा।

    संजय कपूर और करिश्मा कपूर का विवाह वर्ष 2003 में हुआ था, जबकि दोनों वर्ष 2016 में अलग हो गए थे। उनके दो बच्चे हैं, जिनके भविष्य के लिए संजय कपूर ने विभिन्न आर्थिक प्रबंध किए थे। बाद में उन्होंने प्रिया कपूर से विवाह किया। उनके निधन के बाद परिवार के भीतर संपत्ति के प्रबंधन और लाभार्थियों के अधिकारों को लेकर विवाद गहराता चला गया। इसी पृष्ठभूमि में आरके फैमिली ट्रस्ट की भूमिका भी विवाद का प्रमुख कारण बनी।

    विवाद का केंद्र वर्ष 2017 में गठित आरके फैमिली ट्रस्ट है। रानी कपूर का आरोप है कि इस ट्रस्ट का गठन उनकी जानकारी और सहमति के बिना किया गया तथा परिवार की संपत्तियों को इसमें शामिल कर दिया गया। उनका कहना है कि ट्रस्ट की वैधता पर गंभीर सवाल हैं और इसे समाप्त किया जाना चाहिए। दूसरी ओर प्रिया कपूर का पक्ष है कि ट्रस्ट सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए स्थापित किया गया था तथा इसका उद्देश्य लाभार्थियों के हितों की रक्षा करना है। उनका यह भी कहना है कि ट्रस्ट के कामकाज में अनावश्यक हस्तक्षेप से उसके संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

    दोनों पक्षों के बीच बढ़ते विवाद को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही मध्यस्थता का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया था। अदालत ने इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया था। अब मध्यस्थता की अवधि बढ़ाए जाने से यह संकेत मिला है कि अदालत कानूनी संघर्ष के बजाय सहमति आधारित समाधान को प्राथमिकता देना चाहती है। यदि आने वाले महीनों में बातचीत सफल रहती है तो यह मामला लंबी न्यायिक प्रक्रिया से बचते हुए शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो सकता है।

  • राज्यसभा में विपक्ष की मांग पर बढ़ी सियासी तल्खी, सभापति ने रिजिजू से सरकार को संदेश देने का किया आग्रह

    राज्यसभा में विपक्ष की मांग पर बढ़ी सियासी तल्खी, सभापति ने रिजिजू से सरकार को संदेश देने का किया आग्रह


    नई दिल्ली
    । राज्यसभा में गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री की मौजूदगी को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सदन की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने गृह मंत्री की उपस्थिति की मांग उठाई, जिस पर सभापति ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से विपक्ष की भावना सरकार तक पहुंचाने का आग्रह किया। हालांकि इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद स्पष्ट रूप से सामने आए और लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित होती रही।

    सदन की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए केंद्रीय गृह मंत्री की मौजूदगी आवश्यक है। इस पर सभापति ने स्पष्ट किया कि यह किसी प्रकार का निर्देश नहीं, बल्कि विपक्ष की ओर से रखा गया अनुरोध है। उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री से कहा कि विपक्ष की इस भावना और मांग को सरकार के समक्ष रखा जाना चाहिए ताकि इस पर उचित निर्णय लिया जा सके।

    इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह तय करना सरकार का अधिकार है कि किस दिन कौन-सा मंत्री सदन में उपस्थित रहेगा। उन्होंने कहा कि किसी मंत्री की उपस्थिति को लेकर निर्देश नहीं दिए जा सकते। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उस समय सदन में प्रश्नकाल चल रहा था और लगातार हो रहे व्यवधान के कारण प्रश्नकाल की कार्यवाही प्रभावित हो रही है, जिससे महत्वपूर्ण संसदीय कार्य बाधित हो रहे हैं।

    सभापति ने एक बार फिर हस्तक्षेप करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने किसी मंत्री को निर्देश देने का प्रयास नहीं किया है। उन्होंने केवल अपनी बात और विपक्ष की भावना सदन के सामने रखी है। सभापति ने संसदीय कार्य मंत्री से दोहराया कि विपक्ष के अनुरोध को सरकार तक पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी के दायरे में आता है और इसी भावना से उन्होंने यह आग्रह किया है।

    सदन में इस दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच संसदीय नियमों को लेकर भी बहस हुई। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उन्हें संसदीय नियमों की जानकारी है और उन्हें नियम सिखाने की आवश्यकता नहीं है। इसके जवाब में किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी सदस्य पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना नहीं था। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल राज्यसभा के नियमों का उल्लेख किया है और सदन की कार्यवाही हमेशा निर्धारित नियमों के अनुरूप ही संचालित होनी चाहिए।

    रिजिजू ने यह भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष वरिष्ठ और सम्मानित सदस्य हैं तथा सरकार उनके अनुभव का सम्मान करती है। हालांकि उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि किसी भी संसदीय मांग या तर्क के समर्थन में संबंधित नियमों का उल्लेख किया जाना आवश्यक होता है। इस बीच सभापति लगातार सभी सदस्यों से व्यवस्था बनाए रखने और प्रश्नकाल को सुचारु रूप से चलने देने की अपील करते रहे।

    लगातार शोर-शराबे और व्यवधान के कारण सदन की सामान्य कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। सभापति ने कई बार सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और संसदीय गरिमा बनाए रखने का अनुरोध किया, लेकिन हंगामा जारी रहा। अंततः लगातार बाधा उत्पन्न होने के कारण राज्यसभा की कार्यवाही निर्धारित समय तक के लिए स्थगित कर दी गई। पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर संसद में महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति और संवाद की आवश्यकता को रेखांकित किया।

  • जेपीएससी भर्ती विवाद पर छात्र नेता देवेंद्र महतो का बड़ा बयान, मांगें पूरी होने तक भूख हड़ताल रहेगी जारी

    जेपीएससी भर्ती विवाद पर छात्र नेता देवेंद्र महतो का बड़ा बयान, मांगें पूरी होने तक भूख हड़ताल रहेगी जारी

    नई दिल्ली । झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर बड़ी संख्या में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता देवेंद्र महतो ने स्पष्ट किया है कि उनका अनशन अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर उनके अनशन खत्म करने की खबरें चलाई जा रही हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि उन्होंने केवल सलाह के बाद पानी पीना शुरू किया है। उनका कहना है कि भूख हड़ताल पहले की तरह जारी रहेगी और मांगें पूरी होने तक आंदोलन खत्म नहीं किया जाएगा।

    देवेंद्र महतो ने कहा कि उन्होंने समाजसेवी सोनम वांगचुक की सलाह का सम्मान करते हुए केवल पानी ग्रहण किया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। उन्होंने छात्रों और आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि आंदोलन से जुड़ी गलत या भ्रामक जानकारी साझा न करें, क्योंकि इससे छात्रों के संघर्ष पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उनका कहना है कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।

    भूख हड़ताल के पांचवें दिन देवेंद्र महतो की तबीयत में गिरावट भी देखने को मिली है। उन्होंने बताया कि लगातार उपवास के कारण शरीर में कमजोरी बढ़ गई है और अधिक देर तक बोलने पर सीने में तकलीफ महसूस होती है। उठने-बैठने में भी उन्हें सहारे की आवश्यकता पड़ रही है। चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी कर रही है। जांच के दौरान उनके रक्तचाप की स्थिति पहले की तुलना में कुछ बेहतर बताई गई है, लेकिन शारीरिक कमजोरी अभी भी बनी हुई है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि उनका मनोबल पूरी तरह मजबूत है और वह छात्रों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।

    छात्र संगठनों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाना चाहिए ताकि किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार को 16 मांगों का प्रस्ताव सौंपा है। इनमें प्रमुख मांग विवादित परीक्षाओं को रद्द कर निष्पक्ष जांच कराना, भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और सरकारी व्यवस्था के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया संचालित करना शामिल है। इसके अलावा अभ्यर्थियों ने यह भी मांग की है कि चयन प्रक्रिया के सभी चरण पहले से स्पष्ट किए जाएं ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

    छात्रों ने आयोगों में निष्पक्ष और स्वतंत्र अधिकारियों की नियुक्ति की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि भर्ती संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखना आवश्यक है। आंदोलन में शामिल छात्रों का दावा है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। दूसरी ओर प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इस बीच पूरे राज्य में इस आंदोलन को लेकर व्यापक चर्चा बनी हुई है और बड़ी संख्या में छात्र लगातार प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं।

  • झांसी सड़क हादसे में अतीक अहमद के बेटे अबान अहमद की मौत, डिवाइडर से टकराई कार, तीन लोगों की गई जान

    झांसी सड़क हादसे में अतीक अहमद के बेटे अबान अहमद की मौत, डिवाइडर से टकराई कार, तीन लोगों की गई जान

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में गुरुवार को हुए एक भीषण सड़क हादसे में माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद समेत तीन लोगों की मौत हो गई। हादसा पूंछ थाना क्षेत्र के हाईवे पर उस समय हुआ, जब प्रयागराज से झांसी जा रही एक कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे में तीन अन्य लोग घायल हुए हैं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कार में कुल छह लोग सवार थे। सभी लोग झांसी जिला कारागार में बंद अली अहमद से मिलने के लिए जा रहे थे। बताया जा रहा है कि सफर के दौरान हाईवे पर अचानक चालक का वाहन से नियंत्रण हट गया, जिसके बाद कार तेज गति से डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वाहन के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार लोगों को गंभीर चोटें आईं।

    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। राहत एवं बचाव कार्य शुरू करते हुए घायलों को तत्काल एम्बुलेंस की मदद से नजदीकी अस्पताल भेजा गया। चिकित्सकों ने जांच के बाद अबान अहमद समेत तीन लोगों को मृत घोषित कर दिया, जबकि अन्य घायलों का इलाज जारी है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार घायलों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    जानकारी के मुताबिक झांसी जेल में बंद अली अहमद से मिलने के लिए परिवार और परिचित नियमित रूप से आते-जाते रहे हैं। अली अहमद को पिछले वर्ष प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल से स्थानांतरित कर झांसी जिला कारागार भेजा गया था। इसी सिलसिले में परिवार के सदस्य झांसी की ओर जा रहे थे, तभी रास्ते में यह हादसा हो गया।

    पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में दुर्घटना के कई संभावित कारणों पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार यह पता लगाया जा रहा है कि हादसा तेज रफ्तार, चालक को झपकी आने, वाहन के तकनीकी खराब होने या टायर फटने जैसी किसी वजह से हुआ। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।

    पुलिस ने मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। दुर्घटना के बाद मृतकों के परिजनों को सूचना दे दी गई है। इस घटना के बाद अतीक अहमद के परिवार में एक बार फिर शोक का माहौल है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

    सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाना गंभीर दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बनता है। ऐसे मामलों में वाहन की तकनीकी स्थिति, चालक की सतर्कता और यातायात नियमों का पालन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाने का प्रयास जारी है।

  • सीजेपी प्रदर्शन के दौरान बढ़ीं चोरी की वारदातें, फेस रिकॉग्निशन सिस्टम से सैकड़ों संदिग्ध पुलिस के रडार पर

    सीजेपी प्रदर्शन के दौरान बढ़ीं चोरी की वारदातें, फेस रिकॉग्निशन सिस्टम से सैकड़ों संदिग्ध पुलिस के रडार पर


    नई दिल्ली ।
    राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर आयोजित विशाल विरोध प्रदर्शन के दौरान आपराधिक तत्वों द्वारा चोरी और जेबतराशी की घटनाओं को अंजाम देने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। पुलिस आंकड़ों के अनुसार प्रदर्शन के दौरान 177 से अधिक चोरी की शिकायतें दर्ज की गई हैं। इस अप्रत्याशित बढ़ोतरी के बाद दिल्ली पुलिस ने अत्याधुनिक फेस रिकॉग्निशन सिस्टम की मदद से व्यापक अभियान चलाकर 717 संदिग्धों को चिन्हित किया है।

    प्रदर्शन और मार्च के दौरान सबसे अधिक शिकायतें कीमती स्मार्टफोन्स, पर्स और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के गायब होने से संबंधित प्राप्त हुई हैं। विशेषकर जब जंतर-मंतर और आसपास के मुख्य मार्गों पर प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा चरम पर था, तब शातिर जेबतराशों ने अव्यवस्था का फायदा उठाकर दर्जनों लोगों को अपना शिकार बनाया। पीड़ित नागरिकों की लगातार आती शिकायतों को देखते हुए स्थानीय थाना पुलिस और विशेष शाखाओं ने संयुक्त रूप से मामले की पड़ताल शुरू की है।

    जांच प्रक्रिया के तहत दर्ज एफआईआर और ऑनलाइन ई-दर्ज रिपोर्टों का गहन विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार कई नागरिकों ने सीधे तौर पर चोरी का मामला दर्ज कराया, जबकि कुछ ने अपने कीमती सामान के खोने की सूचना दर्ज कराई है। प्राथमिक आकलन के आधार पर पुलिस का मानना है कि गुमशुदगी की अधिकांश घटनाएं संगठित जेबतराशी गिरोहों का परिणाम हो सकती हैं, जिसके चलते सभी मामलों का एक साथ अध्ययन किया जा रहा है।

    वारदातों को सुलझाने के लिए दिल्ली पुलिस ने तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया है। कार्यक्रम स्थल और पहुंच मार्गों के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों से प्राप्त फुटेज को फेस रिकॉग्निशन सॉफ्टवेयर के माध्यम से स्कैन किया गया। इस डिजिटल जांच के दौरान हजारों चेहरों का मिलान पुलिस के पुराने आपराधिक डेटाबेस से कराया गया, जिसके बाद 717 संदिग्ध व्यक्तियों की संदिग्ध उपस्थिति और संलिप्तता की पुष्टि हुई है।

    पहचाने गए संदिग्धों की धरपकड़ के लिए पुलिस की कई समर्पित टीमों का गठन किया गया है। चिन्हित किए गए आरोपियों के रिकॉर्ड और उनके संबंधित इलाकों की पुलिस इकाइयों के साथ डेटा साझा किया गया है। अधिकारियों का मुख्य लक्ष्य चोरी किए गए मोबाइल और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की जल्द से जल्द बरामदगी सुनिश्चित करना तथा भीड़ का फायदा उठाने वाले ऐसे अंतरराज्यीय गिरोहों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना है।

    फिलहाल तकनीकी साक्ष्यों और सीडीआर के आधार पर संदिग्धों के ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। सुरक्षा तंत्र ने बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भाग लेने वाले नागरिकों से अपनी निजी वस्तुओं के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के उपरांत दोषी पाए जाने वाले सभी आरोपियों के विरुद्ध कठोर कानूनी धाराओं के तहत निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।