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  • गुजरात में सांड से टकराई Land Rover Discovery, डिवाइडर से भिड़ने के बाद SUV के उड़े परखच्चे, दो की मौत

    गुजरात में सांड से टकराई Land Rover Discovery, डिवाइडर से भिड़ने के बाद SUV के उड़े परखच्चे, दो की मौत

    गुजरात : के थराड के पास भारतमाला हाईवे पर 27 सितंबर की सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। राजकोट से राजस्थान की ओर जा रही Land Rover Discovery SUV अचानक हाईवे पर आए सांड से टकरा गई। टक्कर के बाद वाहन का नियंत्रण बिगड़ गया और SUV हाईवे के डिवाइडर से जा भिड़ी। हादसा इतना भीषण था कि वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इसमें सवार तीन लोगों में से दो की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीसरा व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया।

    बताया जा रहा है कि हादसा थराड-डीसा हाईवे पर मालपुर के पास हुआ। तेज रफ्तार से चल रही SUV के सामने अचानक सांड आ गया। ड्राइवर को प्रतिक्रिया देने का पर्याप्त मौका नहीं मिला और वाहन सीधे सांड से टकरा गया। इसके बाद SUV का संतुलन बिगड़ गया और वह डिवाइडर से जा भिड़ी। डिवाइडर से हुई जोरदार टक्कर के कारण वाहन का अगला और साइड का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

    हादसे के बाद SUV का मलबा हाईवे के काफी बड़े हिस्से में फैल गया। मौके पर मौजूद लोगों ने दुर्घटना के बाद राहत कार्य शुरू किया और 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को पहले नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने के कारण बाद में उसे बेहतर इलाज के लिए अहमदाबाद रेफर किया गया। हादसे में शामिल Land Rover Discovery का रजिस्ट्रेशन राजकोट का बताया जा रहा है।

    घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें दुर्घटना के बाद SUV की बेहद खराब हालत दिखाई दे रही है। तस्वीरों में वाहन को हुए भारी नुकसान का अंदाजा लगाया जा सकता है। सांड से टकराने के बाद डिवाइडर से हुई दूसरी टक्कर ने वाहन को काफी नुकसान पहुंचाया। पुलिस और संबंधित अधिकारियों की जांच के जरिए हादसे की पूरी परिस्थितियों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

    इस हादसे ने हाईवे पर आवारा मवेशियों की मौजूदगी से जुड़े खतरे को भी सामने ला दिया है। तेज रफ्तार वाले मार्गों पर अचानक किसी बड़े जानवर के सामने आने से वाहन चालक को प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है। ऐसी स्थिति में अचानक ब्रेक लगाने या वाहन को मोड़ने की कोशिश से भी नियंत्रण बिगड़ने का खतरा रहता है। इससे वाहन डिवाइडर, दूसरे वाहन या सड़क किनारे किसी वस्तु से टकरा सकता है।

    Land Rover Discovery एक प्रीमियम लग्जरी SUV है। तीन रो वाली इस SUV की कीमत 1.25 करोड़ रुपये से शुरू होकर टॉप मॉडल के लिए 1.37 करोड़ रुपये तक बताई गई है। इसमें 3.0 लीटर का छह सिलेंडर डीजल इंजन दिया जाता है, जो अधिकतम 350 PS की पावर देता है। कंपनी के अनुसार यह SUV 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार 6.3 सेकंड में पकड़ सकती है।

    SUV में ऑल-व्हील ड्राइव के साथ ट्विन-स्पीड ट्रांसमिशन और 3,500 किलोग्राम तक की टोइंग क्षमता दी गई है। सुरक्षा और ड्राइविंग सहायता के लिए इसमें ऑटोनॉमस इमरजेंसी ब्रेकिंग, फॉरवर्ड कोलिजन वार्निंग, लेन कीप असिस्ट, ब्लाइंड स्पॉट असिस्ट, रियर ट्रैफिक मॉनिटर और ड्राइवर कंडिशन मॉनिटर जैसे फीचर्स मिलते हैं। इसके अलावा 360 डिग्री कैमरा, 3D सराउंड व्यू कैमरा, कई एयरबैग, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल, ट्रैक्शन कंट्रोल, रोल स्टेबिलिटी कंट्रोल और ISOFIX चाइल्ड-सीट माउंट जैसे सुरक्षा फीचर्स भी दिए गए हैं।

  • FCRA पंजीकरण के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोप में गृह मंत्रालय के दो अधिकारी गिरफ्तार, जांच के बीच बढ़ी हलचल

    FCRA पंजीकरण के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोप में गृह मंत्रालय के दो अधिकारी गिरफ्तार, जांच के बीच बढ़ी हलचल

    नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय से जुड़े दो अधिकारियों को विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी एफसीआरए के तहत पंजीकरण कराने में मदद करने के बदले कथित तौर पर रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। दोनों अधिकारियों को 28 सितंबर को दिल्ली में पकड़ा गया। इनमें एक वरिष्ठ लेखाकार और दूसरा लेखाकार बताया गया है। आरोपों की जांच जारी है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

    गृह मंत्रालय के अनुसार, गिरफ्तार किए गए अधिकारियों में से एक वर्तमान में मंत्रालय के विदेशी प्रभाग में तैनात था। दूसरा अधिकारी फिलहाल वेतन एवं लेखा कार्यालय में कार्यरत था और इससे पहले विदेशी प्रभाग में सेवाएं दे चुका है। शुरुआती पूछताछ में दोनों के कुछ संस्थाओं के संपर्क में रहने और एफसीआरए पंजीकरण तथा लाइसेंस के नवीनीकरण में मदद करने के बदले कथित तौर पर पैसे मांगने की जानकारी सामने आई है।

    मामला सामने आने के बाद एफसीआरए से जुड़ी सेवाओं की प्रक्रिया को लेकर भी लोगों को सावधान किया गया है। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि एफसीआरए से संबंधित सेवाएं ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराई जाती हैं। किसी भी मध्यस्थ, एजेंट या निजी व्यक्ति को इन सेवाओं में मदद करने के लिए अधिकृत नहीं किया गया है।

    मामले की जांच अभी जारी है। आरोपों की पुष्टि अदालत में होना बाकी है। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। इस कार्रवाई के बीच मंत्रालय ने भ्रष्टाचार के प्रति सख्त रुख दोहराते हुए एफसीआरए सेवाओं से जुड़े मामलों में किसी अनधिकृत व्यक्ति के माध्यम से काम कराने से बचने की बात कही है।

    एफसीआरए के तहत विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले संगठनों और गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए पंजीकरण जरूरी होता है। विदेशी फंडिंग से संबंधित गतिविधियों की निगरानी के लिए गृह मंत्रालय नोडल प्राधिकरण के रूप में काम करता है। इसी व्यवस्था के तहत पंजीकरण, नवीनीकरण और अन्य नियामकीय प्रक्रियाएं संचालित की जाती हैं।

    इसी बीच विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर संसद की संयुक्त समिति की बैठक भी हुई। 31 सदस्यीय समिति प्रस्तावित संशोधनों की विस्तृत जांच कर रही है। 29 सितंबर की बैठक में गृह और कानून मंत्रालय के अधिकारियों ने विधेयक के प्रावधानों और 2010 के मूल कानून में बदलाव की जरूरत को लेकर समिति के सामने जानकारी रखी।

    यह विधेयक 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था और बाद में दोनों सदनों की मंजूरी के बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया। समिति प्रस्तावित बदलावों की विभिन्न कानूनी, वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं से जांच कर रही है। विधेयक अभी संसद की समिति के विचाराधीन है और कानून नहीं बना है।

    प्रस्तावित संशोधनों में ऐसे संगठनों से जुड़े विदेशी अंशदान और संपत्तियों के प्रबंधन से संबंधित प्रावधान शामिल हैं, जिनका एफसीआरए प्रमाणपत्र समाप्त हो जाता है, रद्द कर दिया जाता है या जिसका नवीनीकरण नहीं हो पाता। समिति इन प्रावधानों पर विभिन्न पक्षों और विशेषज्ञों के विचार भी सुन रही है।

    एफसीआरए से जुड़े मौजूदा रिश्वत मामले और प्रस्तावित संशोधन विधेयक की संसदीय जांच अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। एक तरफ दो अधिकारियों पर मौजूदा पंजीकरण प्रक्रिया में कथित तौर पर रिश्वत मांगने के आरोपों की जांच चल रही है, वहीं दूसरी तरफ संसद की समिति विदेशी अंशदान से जुड़े कानून में प्रस्तावित बदलावों की समीक्षा कर रही है।

    मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि गिरफ्तार अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं। फिलहाल संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं और एफसीआरए सेवाओं को लेकर अनधिकृत बिचौलियों से सावधान रहने की अपील की गई है।

  • राज्यसभा चुनाव में सपा के तीसरे उम्मीदवार पर केशव मौर्य का बड़ा बयान, बोले- नौवां प्रत्याशी उतारेगी भाजपा

    राज्यसभा चुनाव में सपा के तीसरे उम्मीदवार पर केशव मौर्य का बड़ा बयान, बोले- नौवां प्रत्याशी उतारेगी भाजपा

    उत्तर प्रदेश: के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सपा राज्यसभा चुनाव में तीसरा उम्मीदवार उतारती है तो भाजपा नौवां प्रत्याशी मैदान में उतारेगी। उन्होंने विपक्षी दलों की चुनावी रणनीति और चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी।

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को लखनऊ में राज्यसभा चुनाव की तैयारियों और विपक्षी दलों की रणनीति को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी अगर राज्यसभा चुनाव में तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारती है तो भाजपा की ओर से नौवां प्रत्याशी उतारा जाएगा।

    केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भाजपा राज्यसभा चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश में भाजपा की ओर से आठ उम्मीदवार मैदान में उतारे जा सकते हैं। अगर समाजवादी पार्टी तीसरे उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारती है तो भाजपा भी नौवां प्रत्याशी उतार सकती है। इस बयान के बाद राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों पक्षों के बीच मुकाबले की चर्चा तेज हो गई है।

    राज्यसभा चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश में सीटों के गणित के बीच उम्मीदवारों की संख्या महत्वपूर्ण हो गई है। समाजवादी पार्टी की ओर से तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने की संभावना पर लगातार चर्चा हो रही है। ऐसे में भाजपा की ओर से नौवां उम्मीदवार उतारने की बात सामने आने से चुनावी समीकरण और अधिक चर्चा में आ गए हैं।

    केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के साथ-साथ बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल साथ मिलकर चुनाव लड़ें या अलग-अलग, भाजपा वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने विपक्षी दलों की एकजुटता और चुनावी रणनीति को लेकर भी अपनी बात रखी।

    चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भी केशव प्रसाद मौर्य ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल चुनावी परिस्थितियों के अनुसार चुनाव व्यवस्था को लेकर अपना रुख बदलते हैं। उनके अनुसार, जब इन दलों को चुनाव में सफलता मिलती है तो उन्हें चुनाव व्यवस्था ठीक दिखाई देती है, जबकि भाजपा या एनडीए को सफलता मिलने पर वही व्यवस्था सवालों के घेरे में बताई जाती है।

    केशव प्रसाद मौर्य ने चुनाव परिणामों को अलग-अलग परिस्थितियों में अपनी सुविधा के अनुसार परिभाषित किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने वर्ष 2004 और 2009 में केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार बनने का उल्लेख किया। इसके बाद उत्तर प्रदेश में वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की जीत और वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन के प्रदर्शन का भी जिक्र किया।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में, जब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, भाजपा गठबंधन ने राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 73 सीटें जीती थीं। इसके बाद वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन ने 325 सीटें हासिल की थीं, जबकि समाजवादी पार्टी 47 सीटों तक सीमित रह गई थी। मौर्य ने कहा कि चुनावी परिणामों को अपनी सुविधा के अनुसार अलग-अलग तरीके से देखना उचित नहीं है।

    विपक्षी दलों की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि ये दल अपनी सुविधा के अनुसार चुनाव परिणामों की व्याख्या करते हैं। उन्होंने इसके लिए “मीठा-मीठा गप-गप और तीखा-तीखा थू-थू” वाली टिप्पणी का इस्तेमाल किया।

    केशव प्रसाद मौर्य ने अपने राजनीतिक और वैचारिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए राम, कृष्ण और विश्वनाथ से जुड़े विषयों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीरामलला का भव्य मंदिर बन चुका है, जबकि भगवान श्रीकृष्ण और भगवान विश्वनाथ से जुड़े विषय अभी शेष हैं। तेलंगाना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं के बयानों से भाजपा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता और पार्टी संगठन के विस्तार तथा जनसेवा के संकल्प के साथ काम कर रही है।

  • नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन छोड़ने पर कांग्रेस में फिर चर्चा, दिग्विजय बोले- रोकना चाहिए था, सोनिया गांधी ने दी अलग राय

    नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन छोड़ने पर कांग्रेस में फिर चर्चा, दिग्विजय बोले- रोकना चाहिए था, सोनिया गांधी ने दी अलग राय


    नई दिल्ली। कांग्रेस कार्यसमिति की मंगलवार को हुई बैठक में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन से अलग होने का मुद्दा भी चर्चा में आया। बैठक में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार को गठबंधन से जाने नहीं देना चाहिए था और अगर वह साथ रहते तो राजनीतिक परिस्थितियां अलग हो सकती थीं। इस पर सोनिया गांधी ने अलग राय रखते हुए कहा कि नीतीश कुमार को गठबंधन से बाहर जाना ही था।

    नीतीश कुमार पहले विपक्षी INDIA गठबंधन का हिस्सा थे, लेकिन बाद में उन्होंने गठबंधन से अलग होकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का रुख किया था। मंगलवार की बैठक में उनके इस फैसले और उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा हुई। सामने आई जानकारी के मुताबिक, दिग्विजय सिंह ने कहा कि अगर नीतीश कुमार विपक्षी गठबंधन के साथ बने रहते तो सियासी हालात अलग होते।

    दिग्विजय सिंह की टिप्पणी पर सोनिया गांधी ने कहा कि नीतीश कुमार INDIA गठबंधन में रुकना नहीं चाहते थे। उनके मुताबिक, वह गठबंधन से बाहर निकलने के रास्ते तलाश रहे थे। सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि उनका बाहर जाना पहले से तय दिशा में था। इस तरह बैठक में नीतीश कुमार के फैसले को लेकर कांग्रेस के भीतर अलग-अलग आकलन सामने आए।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस चर्चा में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह इस विषय पर बोलना नहीं चाहते थे, लेकिन नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन से बाहर निकलने के रास्ते तलाशने की बात सामने रखी। खड़गे के मुताबिक, गठबंधन का संयोजक बनने की उनकी कोशिश भी वास्तविक राजनीतिक प्रतिबद्धता के बजाय दिखावे तक सीमित थी। उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार पहले उनसे राज्य की राजनीति में रहने और केंद्र में INDIA गठबंधन को समर्थन देने की बात कह चुके थे।

    नीतीश कुमार के मुद्दे पर हुई यह चर्चा ऐसे समय हुई, जब कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। कांग्रेस ने मतदाता सूची में बदलाव और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कीं। पार्टी की ओर से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों को सार्वजनिक करने समेत कई मांगें रखी गईं।

    कांग्रेस की बैठक के अगले दिन INDIA गठबंधन की बैठक भी नई दिल्ली में निर्धारित थी। इसमें विपक्षी दलों के नेताओं को चुनाव आयोग, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर आगे की रणनीति पर चर्चा करनी थी। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और अन्य घटक दलों के प्रमुख नेताओं की भागीदारी तय थी।

    कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के दौरान राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच बातचीत का एक हल्का-फुल्का पल भी चर्चा में रहा। बैठक में खड़गे ने राहुल गांधी के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि पार्टी उनके पीछे चल रही है। इस पर राहुल गांधी ने मुस्कुराते हुए पूछा कि वे बहुत पीछे तो नहीं हैं। इसके बाद खड़गे ने कहा कि पार्टी उनके साथ चल रही है।

    नीतीश कुमार को लेकर हुई चर्चा ने INDIA गठबंधन के गठन और उसके बाद बदले राजनीतिक समीकरणों को फिर से सामने ला दिया। एक तरफ दिग्विजय सिंह ने उनके गठबंधन में बने रहने को लेकर अलग संभावना व्यक्त की, वहीं सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनके अलग होने को उनकी राजनीतिक दिशा से जुड़ा फैसला बताया। इसी बीच विपक्षी दल चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर अपनी संयुक्त रणनीति तैयार करने में जुटे हुए हैं।

  • Report: भारत के लोग भले ही लंबी उम्र जी रहे …. पर बुढ़ापे में स्वस्थ जीवन और संतुष्टि का अभाव

    Report: भारत के लोग भले ही लंबी उम्र जी रहे …. पर बुढ़ापे में स्वस्थ जीवन और संतुष्टि का अभाव


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में लोग पहले से ज्यादा लंबी उम्र (Longer lifespan) जरूर जी रहे हैं, लेकिन जीवन के आखिरी वर्षों में स्वस्थ, सक्रिय, आर्थिक रूप से सुरक्षित और संतुष्ट रहने की तस्वीर उतनी अच्छी नहीं है। खासकर ग्रामीण बुजुर्ग महिलाओं (Elderly Rural Women) के लिए स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण है। 60 वर्ष की उम्र में ग्रामीण महिलाओं के पास औसतन 18.5 वर्ष की शेष जीवन प्रत्याशा है, लेकिन इनमें सिर्फ 4.6 वर्ष अच्छे जीवन के रहने का अनुमान है। इसके मुकाबले शहरी पुरुषों के लिए 19.1 वर्ष की शेष जिंदगी में 10.2 वर्ष अच्छे जीवन के हैं।

    मुंबई स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज, यूनिवर्सिटी ऑफ विएना और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अध्ययन में यह तस्वीर सामने आई है। अध्ययन के निष्कर्ष प्रतिष्ठित जर्नल सोशल इंडीकेटर्स रिसर्च में प्रकाशित हुए हैं। शोधकर्ताओं ने भारत में बुजुर्गों की स्थिति समझने के लिए आंकड़ों का विश्लेषण किया है।


    पुरुषों में शरीर, महिलाओं में संज्ञानात्मक स्वास्थ्य बड़ी चुनौती

    अध्ययन में अच्छे जीवन के वर्षों में राज्यों के बीच अंतर के कारण भी अलग-अलग दिखाई दिए। पुरुषों के मामले में करीब 45 फीसदी अंतर कार्यात्मक स्वास्थ्य से जुड़ा था, जबकि संज्ञानात्मक स्वास्थ्य का योगदान करीब 31 फीसदी रहा। महिलाओं में स्थिति उलट थी। उनके राज्यों के बीच अंतर में करीब 46 फीसदी हिस्सा संज्ञानात्मक स्वास्थ्य और 31 फीसदी कार्यात्मक स्वास्थ्य से जुड़ा था।ग्रामीण महिलाओं की स्थिति विशेष चिंता पैदा करती है। निर्धारित संज्ञानात्मक स्वास्थ्य कसौटी पर जहां 96 फीसदी शहरी पुरुष खरे उतरते हैं, वहीं ग्रामीण महिलाओं में यह हिस्सा करीब 69 फीसदी था।

    राज्यों में भी बड़ा फासला: 60 वर्ष की उम्र में पंजाब के पुरुषों के लिए अच्छे जीवन के वर्ष 12.9 रहे, जो उनकी शेष जीवन प्रत्याशा का करीब 63 फीसदी है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बुजुर्ग पुरुषों के अच्छे जीवन के वर्ष करीब 6.5 से 6.8 के बीच रहे।महिलाओं में केरल की ग्रामीण महिलाओं की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही। वहां 60 वर्ष की उम्र के बाद 10.1 वर्ष अच्छे जीवन के रहे, जो शेष जीवन का करीब 46 फीसदी है। दूसरी ओर पश्चिम बंगाल में यह आंकड़ा 3.8 वर्ष और महाराष्ट्र की ग्रामीण महिलाओं में महज 2.7 वर्ष रहा।


    नीति के लिए बड़ा संकेत:

    अध्ययन का संकेत साफ है बुजुर्गों के लिए नीति का लक्ष्य केवल जीवन प्रत्याशा बढ़ाना नहीं होना चाहिए। स्वास्थ्य सेवाओं के साथ पुनर्वास, फिजियोथेरेपी, सहायक उपकरण, घरेलू देखभाल और आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाएं भी जरूरी हैं। महिलाओं के लिए जीवनभर शिक्षा और सामाजिक भागीदारी जैसे कारक भी उम्र बढ़ने के साथ महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

  • सामाजिक और आर्थिक बदलाव की राह पर भारत…. देश के 2.8 करोड़ बच्चे बने पहली शिक्षित पीढ़ी

    सामाजिक और आर्थिक बदलाव की राह पर भारत…. देश के 2.8 करोड़ बच्चे बने पहली शिक्षित पीढ़ी


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में करीब 2.8 करोड़ बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने अपने परिवार में छह साल की स्कूली शिक्षा (School Education) पूरी करने वाली पहली पीढ़ी बनकर पीढ़ियों से चले आ रहे अभाव के बीच बदलाव की नई शुरुआत की है। यह आंकड़ा बताता है कि शिक्षा अब केवल बच्चों के भविष्य को बदलने का माध्यम नहीं, बल्कि परिवारों में सामाजिक और आर्थिक बदलाव (Social and Economic changes) की राह भी बना रही है। हालांकि, वैश्विक आंकड़े यह भी बताते हैं कि शिक्षा की इस प्रगति को टिकाऊ बनाने के लिए बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और घर की बुनियादी सुविधाओं पर भी समान ध्यान देना होगा।

    ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव (ओपीएचआई) के अध्ययन में विकासशील देशों में बच्चों की गरीबी, कुपोषण और शिक्षा की स्थिति का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम और ओपीएचआई के वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें गरीबी को केवल परिवार की आय से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर से जुड़े कई अभावों के आधार पर देखा गया है।

    रिपोर्ट के अनुसार भारत में शिक्षा की पहली पीढ़ी बनने वाले 2.8 करोड़ बच्चों का आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक बच्चे का स्कूल पहुंचना केवल उसके व्यक्तिगत जीवन में बदलाव नहीं लाता। जब किसी परिवार में पहली बार कोई बच्चा छह साल की स्कूली शिक्षा पूरी करता है, तो वह अगली पीढ़ी के लिए शिक्षा को सामान्य और जरूरी बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाता है।

    अध्ययन के अनुसार दुनिया के 108 देशों में 10 से 17 वर्ष की उम्र के करीब 7.1 करोड़ बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने अपने परिवार में कम से कम छह साल की स्कूली शिक्षा पूरी करने वाली पहली पीढ़ी का दर्जा हासिल किया है। इनमें करीब आधे बच्चे दक्षिण एशिया में हैं। भारत इस बदलाव में सबसे बड़ी हिस्सेदारी वाले देशों में शामिल है।

    दक्षिण एशिया में भारत के अलावा बांग्लादेश में 30 लाख से अधिक, पाकिस्तान में करीब 20 लाख, नेपाल में 8.37 लाख और अफगानिस्तान में करीब 5.08 लाख बच्चे इस श्रेणी में हैं। भारत, भूटान और बांग्लादेश में इस तरह अपने परिवार की पहली शिक्षित पीढ़ी बनने वाली बच्चियों की हिस्सेदारी लड़कों की तुलना में अधिक पाई गई है। बच्चों के जीवन में शिक्षा और पोषण की चुनौतियां एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। अध्ययन में विकासशील देशों के पांच साल से कम उम्र के 51.8 करोड़ बच्चों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इनमें 25.2 करोड़ बच्चे कुपोषण, बहुआयामी गरीबी या दोनों से प्रभावित पाए गए।


    महिलाओं की शिक्षा से भी जुड़ी बच्चों की स्थिति

    बहुआयामी गरीबी में रहने वाले दो-तिहाई से अधिक बच्चे ऐसे परिवारों से हैं, जहां किसी महिला ने छह साल की स्कूली शिक्षा पूरी नहीं की है। स्कूल से बाहर रहने वाले गरीब बच्चों में यह अनुपात करीब 82 फीसदी है।


    शिक्षा की राह खुली, मंजिल दूर

    अध्ययन की तस्वीर में भारत के लिए एक तरफ 2.8 करोड़ बच्चों की उपलब्धि उम्मीद पैदा करती है तो दूसरी तरफ यह भी स्पष्ट करती है कि शिक्षा को गरीबी से स्थायी मुक्ति का माध्यम बनाने के लिए कई मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा। पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छ पानी, स्वच्छता, आवास और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाओं के बिना केवल स्कूल तक पहुंच सुनिश्चित करना पर्याप्त नहीं होगा।


    13.6 करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर

    108 देशों में स्कूल जाने की उम्र के करीब 104 करोड़ बच्चों के आंकड़ों में 13.6 करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर पाए गए। इनमें 11 करोड़ यानी 80 फीसदी से अधिक बच्चे बहुआयामी गरीबी में भी हैं। अध्ययन के अनुसार, स्कूल से बाहर रहने वाले गरीब बच्चों को औसतन पांच अन्य प्रकार के अभावों का भी सामना करना पड़ता है।

  • ब्लू ड्रम हत्याकांड में आज फैसले की घड़ी, मेरठ कोर्ट पहले तय करेगी मुस्कान-साहिल दोषी हैं या नहीं

    ब्लू ड्रम हत्याकांड में आज फैसले की घड़ी, मेरठ कोर्ट पहले तय करेगी मुस्कान-साहिल दोषी हैं या नहीं


    मेरठ। ब्रह्मपुरी के चर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड में बुधवार, 30 सितंबर को मेरठ जिला जज की अदालत फैसला सुनाएगी। मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में आरोपी मुस्कान और साहिल के खिलाफ पहले अदालत यह तय करेगी कि दोनों दोषी हैं या नहीं। दोष सिद्ध होने पर सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी।

    मामले में 17 सितंबर को अंतिम बहस पूरी हो चुकी है। अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर दोनों आरोपियों के लिए मृत्युदंड की मांग की है। अभियोजन की ओर से हत्या से पहले और बाद में की गई कथित तैयारियों को भी अदालत के सामने रखा गया।

    22 गवाहों की गवाही, दुकानदार भी शामिल

    सौरभ के परिवार की ओर से मुकदमा लड़ रहे अधिवक्ता विजय बहादुर के मुताबिक, वादी पक्ष ने अदालत में 22 गवाह पेश किए हैं। इनमें सौरभ का भाई बबलू, उसकी मां और सौरभ का दोस्त शामिल हैं।

    इसके अलावा नशीली दवाओं, चाकू, नीले ड्रम, सीमेंट और रेत की खरीद से जुड़े दुकानदारों की भी गवाही कराई गई। हत्या के बाद आरोपी जिन स्थानों पर घूमने गए थे, उनसे जुड़े साक्ष्य भी अदालत के सामने रखे गए हैं।

    अभियोजन पक्ष का तर्क है कि हत्या से पहले नशीली दवा और चाकू की व्यवस्था की गई, जबकि हत्या के बाद शव को छिपाने के लिए ड्रम, सीमेंट और रेत खरीदी गई। अभियोजन के मुताबिक, शव को ड्रम में भरकर सीमेंट से सील करने और उसे दूसरी जगह ले जाकर ठिकाने लगाने की योजना थी, लेकिन इससे पहले ही मामला सामने आ गया।

    बचाव पक्ष ने हत्या से ही इनकार किया

    मुस्कान की ओर से अधिवक्ता रेखा जैन ने बचाव पक्ष रखा। विजय बहादुर के अनुसार, बचाव पक्ष ने आरोपियों द्वारा हत्या किए जाने के आरोप से ही इनकार किया है। वादी पक्ष ने अपने साक्ष्य और गवाह अदालत के सामने पेश किए हैं।

    अभियोजन पक्ष ने ऐसे मामलों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए अधिकतम सजा की मांग की है। अधिवक्ता के मुताबिक, इस मामले में न्यूनतम सजा आजीवन कारावास और अधिकतम सजा मृत्युदंड है और अभियोजन ने अधिकतम सजा की मांग की है।

    बच्ची की DNA जांच पर भी हुई चर्चा

    मुस्कान की बेटी के संबंध में DNA जांच की मांग को लेकर अधिवक्ता विजय बहादुर ने कहा कि फिलहाल हत्या का ट्रायल चल रहा है। उनके मुताबिक, इस दौरान ऐसी मांग का मुकदमे पर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सौरभ के परिवार से इस संबंध में उनकी कोई बातचीत नहीं हुई है।

    अधिवक्ता के अनुसार, बच्ची के मामले में सहानुभूति का कोई आधार बनता है या नहीं, इसका फैसला अदालत ही करेगी।

    जेल में पूजा-पाठ कर रही मुस्कान

    मेरठ जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि अदालत में चल रही कार्यवाही के संबंध में उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि मुस्कान पहले की तुलना में अब धार्मिक गतिविधियों में अधिक समय दे रही है।

    उनके मुताबिक, मुस्कान नियमित रूप से संध्या और सुंदरकांड करती है। इसके अलावा वह शिव पूजा भी कर रही है। बच्ची के अलावा जो समय उसे मिलता है, उसमें वह पूजा-पाठ करती है। वहीं, साहिल अन्य बंदियों से ज्यादा बातचीत नहीं करता और अपने काम में लगा रहता है।

    पहले दोष पर फैसला, फिर सजा पर सुनवाई

    अब बुधवार को अदालत के फैसले पर सभी की निगाहें हैं। अदालत पहले यह तय करेगी कि मुस्कान और साहिल के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित हुए हैं या नहीं। यदि दोष सिद्ध होता है, तो इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी।

    अभियोजन पक्ष की ओर से मृत्युदंड की मांग की गई है, लेकिन अंतिम फैसला अदालत के समक्ष पेश साक्ष्यों, गवाहियों और कानूनी दलीलों के आधार पर होगा।

  • ‘हां, मेरे पास ₹1400 करोड़ की संपत्ति, सब कानूनी’, कुमारस्वामी के आरोपों पर CM शिवकुमार का जवाब

    ‘हां, मेरे पास ₹1400 करोड़ की संपत्ति, सब कानूनी’, कुमारस्वामी के आरोपों पर CM शिवकुमार का जवाब


    नई दिल्ली। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपनी करीब ₹1400 करोड़ की संपत्ति को लेकर केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के आरोपों पर जवाब दिया है। शिवकुमार ने कहा कि उनके पास इतनी संपत्ति है, लेकिन उन्होंने इसे कानून के दायरे में रहते हुए हासिल किया है। 2023 के चुनावी हलफनामे में शिवकुमार और उनके आश्रितों ने कुल करीब ₹1,413.8 करोड़ की संपत्ति घोषित की थी।

    दिल्ली में मीडिया से बातचीत में शिवकुमार ने कहा कि उनकी संपत्तियों से जुड़ी जानकारी इनकम टैक्स विभाग के पास है। उन्होंने कहा कि उनके बच्चों को भी कानून के तहत कारोबार करने और संपत्ति खरीदने का अधिकार है। शिवकुमार ने सवाल किया कि क्या एचडी कुमारस्वामी इनकम टैक्स अधिकारी हैं।

    कुमारस्वामी ने NICE प्रोजेक्ट को लेकर लगाए आरोप

    दरअसल, केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर (BMIC), जिसे NICE प्रोजेक्ट भी कहा जाता है, को लेकर शिवकुमार पर आरोप लगाए हैं। कुमारस्वामी ने दावा किया कि प्रोजेक्ट के मूल स्वरूप में बाद में बदलाव किए गए और जमीन आवंटन तथा विकास योजना में कथित अनियमितताओं से निजी पक्षों को फायदा पहुंचा।

    कुमारस्वामी ने शिवकुमार की संपत्ति में हुई बढ़ोतरी पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि शिवकुमार की घोषित संपत्ति करीब ₹4 करोड़ से बढ़कर 2023 में ₹1,413 करोड़ से ज्यादा हो गई। उन्होंने NICE प्रोजेक्ट से जुड़े जमीन सौदों में शिवकुमार और उनके परिवार को कथित लाभ मिलने का आरोप लगाया है। होसकरेहल्ली की जमीन और शोभा डेवलपर्स से जुड़े ज्वाइंट वेंचर का भी उन्होंने उल्लेख किया।

    हालांकि, ये आरोप कुमारस्वामी की ओर से लगाए गए हैं। शिवकुमार ने इन्हें खारिज करते हुए अपनी संपत्ति को वैध बताया है।

    ‘क्या मैंने रिश्वत ली या किसी घोटाले में पकड़ा गया?’

    शिवकुमार ने कहा कि वह किसान और कारोबारी परिवार से आते हैं। उनके मुताबिक, कारोबार और संपत्ति रखना कानून के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी संपत्ति घोषित की है और उनके बच्चों को भी कारोबार करने तथा संपत्ति खरीदने का अधिकार है।

    ₹5 करोड़ के निवेश से जुड़े कुमारस्वामी के आरोप पर भी शिवकुमार ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने न कोई रिश्वत ली है और न किसी घोटाले में पकड़े गए हैं। उनके मुताबिक, समय के साथ संपत्तियों की कीमत बढ़ना अपने आप में गलत नहीं है।

    शिवकुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री एस. बंगारप्पा के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने उस समय करीब ₹99 हजार में एक साइट खरीदी थी, जिसकी मौजूदा कीमत करीब ₹20 करोड़ है। उन्होंने कहा कि संपत्ति की बाजार कीमत बढ़ने को अपने आप में गलत नहीं माना जा सकता।

    शिवकुमार ने कहा कि वह हर साल अपनी संपत्ति घोषित करते हैं। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग और प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी उनकी संपत्तियों की जांच कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई दूसरी एजेंसी भी जांच करना चाहती है तो वह कर सकती है।

    ‘कुमारस्वामी विधानसभा में आकर बहस करें’

    कुमारस्वामी की बहस की चुनौती पर शिवकुमार ने कहा कि विधानसभा की सीढ़ियों पर बहस करने की जरूरत नहीं है। अगर कुमारस्वामी बहस करना चाहते हैं तो विधानसभा के अंदर आकर चर्चा करें। उन्होंने कहा कि वह ऐसी धमकियों से डरने वाले नहीं हैं।

    फोन टैपिंग और ब्लैकमेल जैसे आरोपों को लेकर भी शिवकुमार ने कुमारस्वामी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले भी इस तरह की राजनीति का सामना करना पड़ा है और वह किसी धमकी से डरने वाले नहीं हैं।

    शिवकुमार ने बीजेपी और जेडीएस गठबंधन के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान का भी आरोप लगाया और कहा कि इसी वजह से कुमारस्वामी इस तरह के बयान दे रहे हैं। उन्होंने कुमारस्वामी के परिवार और पुराने प्रोजेक्ट्स से जुड़े मामलों का भी जिक्र किया। हालांकि, शिवकुमार ने कहा कि वह कुमारस्वामी की संपत्तियों पर अभी कोई आरोप नहीं लगाना चाहते और केवल मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे हैं।

    दिल्ली में शिक्षा नीति को लेकर बैठक

    शिवकुमार ने अपने दिल्ली दौरे की वजह भी बताई। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों की शिक्षा नीति और परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने को लेकर बैठक हुई। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल और कई राज्यों के मुख्यमंत्री एवं मंत्री शामिल हुए।

    उन्होंने कहा कि बैठक में परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक रोकने पर चर्चा हुई। शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक में KPSC जैसी परीक्षाओं में भी सुधार किए जाएंगे।

    ठेकेदारों के ₹38 हजार करोड़ के बकाये पर भी बोले

    ठेकेदारों की ओर से सरकार पर करीब ₹38 हजार करोड़ के बकाये का दावा किए जाने पर भी शिवकुमार ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने कई कामों को मंजूरी दी थी, जिसके चलते मौजूदा सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ा है।

    मुख्यमंत्री ने माना कि वर्तमान वित्तीय स्थिति चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार इस स्थिति से निपटने और बकाये से जुड़े मामलों का समाधान निकालने के लिए जरूरी कदम उठाएगी।

  • माइक बंद हुआ तो नाराज हुए सपा महासचिव रामजीलाल सुमन, मंच पर फेंका और चले गए

    माइक बंद हुआ तो नाराज हुए सपा महासचिव रामजीलाल सुमन, मंच पर फेंका और चले गए


    मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में मंगलवार को समाजवादी पार्टी के PDA सम्मेलन के दौरान उस समय असहज स्थिति बन गई, जब पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामजीलाल सुमन के भाषण के बीच माइक बंद हो गया। माइक में आई तकनीकी खराबी से नाराज सुमन ने उसे मंच पर फेंक दिया और अपना संबोधन रोककर कार्यक्रम से चले गए।

    रामजीलाल सुमन सम्मेलन में PDA से जुड़े मुद्दों और संगठन से संबंधित विषयों पर संबोधन दे रहे थे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ता और नेता मौजूद थे। इसी दौरान उनके माइक में आवाज को लेकर परेशानी शुरू हुई। कुछ देर बाद माइक पूरी तरह बंद हो गया।

    माइक फेंककर मंच से उतरे

    माइक बंद होने के बाद रामजीलाल सुमन नाराज नजर आए। उन्होंने माइक को हाथ से मंच पर फेंक दिया और अपना भाषण रोक दिया। इसके बाद वह मंच से नीचे उतरकर कार्यक्रम स्थल से जाने लगे।

    मौके पर मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें रोकने और मनाने की कोशिश की। नेताओं ने उन्हें वापस मंच पर लाने का प्रयास भी किया, लेकिन सुमन वापस मंच पर नहीं लौटे और वहां से चले गए।

    वीडियो में नजर आया पूरा घटनाक्रम

    घटना का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में रामजीलाल सुमन मंच पर खड़े होकर भाषण देते दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान माइक में आवाज आना बंद हो जाती है। इसके बाद वह माइक को लेकर नाराजगी जताते हैं और उसे मंच पर फेंक देते हैं।

    माइक फेंकने के बाद सुमन हाथ जोड़ते हुए लोगों से 15 नवंबर को आगरा आने की अपील करते हैं। इसके बाद वह मंच से नीचे उतर जाते हैं।

    नेताओं ने मनाने की कोशिश की

    रामजीलाल सुमन के मंच से उतरकर चले जाने के बाद सम्मेलन में मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें मनाने की कोशिश की। उन्हें वापस मंच पर लाने का प्रयास किया गया, लेकिन वह वापस नहीं आए। मुरादाबाद में PDA सम्मेलन के दौरान हुई यह घटना अब चर्चा में है और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रहा है।

  • जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में पत्नी-बच्चे को कैंप में लाने को लेकर विवाद, CISF जवान ने 4 साथियों पर बरसाईं गोलियां, मौत

    जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में पत्नी-बच्चे को कैंप में लाने को लेकर विवाद, CISF जवान ने 4 साथियों पर बरसाईं गोलियां, मौत


    कठुआ।
    जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) कैंप में चार जवानों की हत्या के मामले में विवाद की वजह सामने आई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आरोपी हेड कांस्टेबल अवधेश कुमार सिंह का अपनी पत्नी लेडी हेड कांस्टेबल पूजा देवी और बच्चे को लेकर कुछ कर्मियों से विवाद हुआ था। कहासुनी के बाद अवधेश ने अपनी सर्विस रायफल से चार साथियों पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। घटना में चार CISF कर्मियों की मौत हो गई।

    मृतकों की पहचान असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, सब-इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह, कांस्टेबल रफीक अहमद और कांस्टेबल संदीप कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपी हेड कांस्टेबल अवधेश कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है।

    पत्नी और बच्चे को कैंप में लाने को लेकर हुआ विवाद

    पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, अवधेश कुमार की पत्नी पूजा देवी लेडी हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं। बताया गया है कि जब अवधेश ड्यूटी पर रहते थे, तब पूजा देवी अपने बच्चे के साथ क्वार्टर गार्ड में आती थीं। यूनिट प्रशासन ने बच्चे के साथ क्वार्टर गार्ड में प्रवेश करने या वहां रुकने की अनुमति नहीं दी थी।

    इसी बात को लेकर अवधेश कुमार की संबंधित कर्मियों से कहासुनी हो गई। विवाद बढ़ने के बाद वह क्वार्टर गेट के पास स्थित ऑपरेशंस सेक्शन के कार्यालय में पहुंचा, जहां चारों CISF कर्मी मौजूद थे।

    रायफल से कर दी ताबड़तोड़ फायरिंग

    बताया जा रहा है कि कार्यालय में पहुंचते ही अवधेश कुमार सिंह ने अपनी रायफल से चारों कर्मियों पर फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगने से चारों गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें उपचार के लिए पास के NHPC अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने सभी को मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस के मुताबिक, शुरुआती तौर पर घटना के पीछे मामूली कहासुनी और पत्नी-बच्चे से जुड़े विवाद की बात सामने आई है। हालांकि, घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

    सेवा-II पावर प्रोजेक्ट में तैनात थे जवान

    यह घटना कठुआ जिले के पहाड़ी क्षेत्र बसोहली के हट्ट मस्का इलाके में स्थित सेवा-II हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के CISF कैंप में हुई। इस पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा के लिए CISF जवानों की तैनाती की गई है।

    घटना की सूचना मिलते ही बसोहली पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे और आरोपी अवधेश कुमार सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। पुलिस गोलीकांड के कारणों और घटनाक्रम की विस्तृत जांच कर रही है।