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  • प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत के बाद परिवार का दावा, दो साल से नहीं हुई मुलाकात और फोन पर भी संपर्क बंद था

    प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत के बाद परिवार का दावा, दो साल से नहीं हुई मुलाकात और फोन पर भी संपर्क बंद था


    नई दिल्ली । वृंदावन में प्रसिद्ध कथावाचक प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत का मामला सामने आने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे बाराह घाट मार्ग स्थित गुरु कृपा कुंज आश्रम की छत से गिरने के बाद दीपक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तत्काल एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मौत की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।

    दीपक के बहनोई सोनू पटेल ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार के लोग आनन-फानन में आश्रम पहुंचे थे। परिवार को शुरुआत में यह बताया गया कि दीपक गिर गए हैं और अस्पताल में उनका ऑपरेशन होना है। परिजन जब आश्रम पहुंचे तो उन्हें बाहर बैठने के लिए कहा गया। सोनू के मुताबिक, परिवार के सदस्य कई घंटे तक बाहर इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें घटना से जुड़ी पूरी जानकारी तत्काल नहीं दी गई।

    परिजनों के अनुसार, दीपक लोधी वर्ष 2024 से आश्रम से जुड़े हुए थे। सोनू पटेल का दावा है कि गुरु दक्षिणा लेने के बाद से दीपक की परिवार से मुलाकात नहीं हो पाई थी। परिवार का कहना है कि जब भी कोई सदस्य उनसे मिलने के लिए पहुंचता था, तो उसे काफी देर तक इंतजार करना पड़ता था। इस वजह से परिजनों का दीपक से संपर्क बेहद सीमित हो गया था।

    सोनू पटेल ने यह भी बताया कि दीपक पिछले करीब दो वर्षों से अपने पास मोबाइल फोन नहीं रखते थे। ऐसे में परिवार के लोग उनसे फोन पर भी बातचीत नहीं कर पाते थे। परिजनों के मुताबिक, लंबे समय से उनका दीपक से सीधा संपर्क नहीं था। मौत की खबर मिलने के बाद परिवार ने कई सवाल उठाए हैं और घटना की पूरी जानकारी सामने आने की मांग की है।

    उधर, घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन मौत की परिस्थितियों को लेकर जांच अभी जारी है। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक जानकारी जुटाई। फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य एकत्र किए हैं।

    दीपक के शरीर पर चोट के निशान मिलने की बात भी सामने आई है। ये चोटें छत से गिरने के कारण आईं या इससे पहले लगी थीं, इसका स्पष्ट पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि दीपक की मौत किन परिस्थितियों में हुई और घटना के पीछे आत्महत्या के अलावा कोई अन्य कारण तो नहीं है।

    फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच से मिलने वाले साक्ष्यों का इंतजार है। पुलिस घटनास्थल, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित लोगों से मिली जानकारी के आधार पर मौत की परिस्थितियों को समझने की कोशिश कर रही है। वहीं, दीपक के परिजन घटना को लेकर कई सवालों के जवाब चाहते हैं। जांच पूरी होने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह और घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

  • ज्ञानेश कुमार को हटाना इतना आसान नहीं! नोटिस से राष्ट्रपति के आदेश तक, जानिए CEC को हटाने का पूरा प्रोसेस

    ज्ञानेश कुमार को हटाना इतना आसान नहीं! नोटिस से राष्ट्रपति के आदेश तक, जानिए CEC को हटाने का पूरा प्रोसेस

    नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच उन्हें पद से हटाने की मांग भी चर्चा में है। मौजूदा समय में ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त हैं और उन्होंने 19 फरवरी 2025 को 26वें CEC के रूप में पदभार संभाला था।

    CEC को पद से हटाने की प्रक्रिया सामान्य सरकारी अधिकारियों से अलग और काफी कठिन है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है। 2023 के संबंधित कानून में भी यही प्रावधान दोहराया गया है।

    सबसे पहले संसद में देना होता है नोटिस

    CEC को हटाने की प्रक्रिया संसद में प्रस्ताव के नोटिस से शुरू होती है। लोकसभा में दिए जाने वाले नोटिस पर कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में दिए जाने वाले नोटिस पर कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति के पास यह अधिकार होता है कि वे उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के बाद प्रस्ताव को स्वीकार करें या खारिज कर दें।

    अगर दोनों सदनों में एक ही दिन नोटिस दिया जाता है तो दोनों सदनों में प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद ही जांच समिति गठित की जाती है। यदि नोटिस अलग-अलग दिनों में आता है तो संबंधित प्रक्रिया पहले उस सदन में आगे बढ़ती है जहां प्रस्ताव पहले स्वीकार किया गया हो।

    तीन सदस्यीय समिति करती है आरोपों की जांच

    प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई जाती है। Judges (Inquiry) Act, 1968 के तहत समिति में—

    • सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या किसी अन्य न्यायाधीश में से एक सदस्य,
    • किसी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश में से एक सदस्य,
    • एक प्रतिष्ठित कानून विशेषज्ञ

    शामिल होते हैं। दोनों सदनों में एक ही दिन नोटिस दिए जाने की स्थिति में समिति लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति संयुक्त रूप से गठित करते हैं।

    रिपोर्ट के बाद संसद में होता है मतदान

    समिति आरोपों की जांच करती है और अपनी रिपोर्ट देती है। यदि समिति आरोपों को साबित मानती है, तो मामला संसद के सामने आगे बढ़ता है। इसके बाद दोनों सदनों में प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान होता है।

    CEC को हटाने के लिए प्रस्ताव को लोकसभा और राज्यसभा, दोनों में विशेष बहुमत से पारित होना जरूरी है। संविधान में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के लिए प्रत्येक सदन में कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। CEC के लिए भी अनुच्छेद 324(5) के तहत यही संवैधानिक मानक लागू होता है।

    अंत में राष्ट्रपति लेते हैं अंतिम फैसला

    दोनों सदनों से प्रस्ताव पारित होने के बाद संसद राष्ट्रपति को हटाने के लिए अपना अभिभाषण प्रस्तुत करती है। इसके बाद राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी करते हैं। यानी केवल संसद में नोटिस देने या बहस शुरू होने से CEC को पद से नहीं हटाया जा सकता; पूरी संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।

    CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों में बड़ा अंतर

    मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की हटाने की प्रक्रिया अलग है। संविधान के अनुसार CEC को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया से ही हटाया जा सकता है, जबकि अन्य चुनाव आयुक्तों को राष्ट्रपति मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश पर हटा सकते हैं।

    इसलिए CEC के खिलाफ महज राजनीतिक मांग या संसद में नोटिस दिए जाने से तत्काल पद से हटाने की कार्रवाई नहीं होती। प्रस्ताव, उसकी स्वीकार्यता, जांच समिति, दोनों सदनों में विशेष बहुमत और अंत में राष्ट्रपति के आदेश—इन सभी चरणों से गुजरना पड़ता है।

  • बंगाल में माहौल को लेकर शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान बोले माता पिता को ओडिशा भेजने का था प्लान

    बंगाल में माहौल को लेकर शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान बोले माता पिता को ओडिशा भेजने का था प्लान


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक माहौल को लेकर अपने पुराने अनुभव का जिक्र किया है। कोलकाता की नेशनल लाइब्रेरी में आयोजित राम-शरद कोठारी प्रतिभा सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एक समय उन्हें अपने बुजुर्ग माता पिता को ओडिशा भेजने की तैयारी तक करनी पड़ी थी। अधिकारी ने कहा कि उस दौरान उन्हें आशंका थी कि राजनीतिक संघर्ष के बीच उन्हें जेल जाना पड़ सकता है और परिस्थितियां उनके परिवार के लिए मुश्किल हो सकती हैं।

    शुभेंदु अधिकारी के मुताबिक उनके पिता की उम्र करीब 90 वर्ष है जबकि उनकी मां भी 80 वर्ष से अधिक उम्र की हैं। उन्होंने कार्यक्रम में कहा कि उन्होंने यह सोच लिया था कि अगर राजनीतिक संघर्ष के दौरान उन्हें जेल जाना पड़े या कोई दूसरी परिस्थिति पैदा हो तो अपने माता पिता को ओडिशा भेज देंगे। उन्होंने कहा कि उस समय पश्चिम बंगाल में जिस तरह का माहौल बना हुआ था उसे देखते हुए उन्हें इस तरह की तैयारी करनी पड़ी थी।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जनता ने इस बार पश्चिम बंगाल को बचा लिया। उनके इस बयान का संदर्भ राज्य में हुए हालिया राजनीतिक बदलाव से था। उन्होंने यह भी कहा कि अभी राज्य में काफी काम बाकी है और सरकार को आगे कई क्षेत्रों में काम करना है। उनके बयान में राजनीतिक संघर्ष के साथ साथ राज्य की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख रहा।

    यह कार्यक्रम राम कोठारी और शरद कोठारी की स्मृति में आयोजित किया गया था। दोनों को राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े कारसेवकों के रूप में याद किया जाता है। शुभेंदु अधिकारी ने उनके योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार उनकी स्मृति में कई योजनाओं और पहलों पर काम करेगी। इनमें पश्चिम बंगाल में किसी सड़क का नाम उनके नाम पर रखने और विश्वविद्यालयों तथा कॉलेजों में उनके नाम से पुरस्कार शुरू करने की पहल शामिल है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने सनातन परंपराओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े स्थलों के विकास की बात कही। अधिकारी ने कहा कि राज्य में विकास कार्य जरूरी हैं लेकिन इसके साथ विरासत को सुरक्षित रखना भी महत्वपूर्ण है।

    कार्यक्रम के दौरान उन्होंने गौ संरक्षण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य में गौशालाओं को बढ़ावा देने की जरूरत है और इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों तथा संगठनों से आगे आने की अपील की। उन्होंने पुरुलिया कोलकाता और खड़गपुर में संचालित छोटी गौशालाओं का उल्लेख करते हुए राज्य के दूसरे हिस्सों में भी ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करने की बात कही।

    बकरीद के दौरान पशु वध को लेकर भी मुख्यमंत्री ने अपना रुख सामने रखा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कानून के तहत कार्रवाई करेगी और गौ संरक्षण से जुड़े संगठनों को गौशाला स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे पहले 2026 में पश्चिम बंगाल सरकार ने बकरीद के दौरान पशु वध से जुड़े नियमों को लेकर दिशा निर्देश जारी किए थे। इस मुद्दे पर कलकत्ता हाई कोर्ट में भी याचिकाएं पहुंची थीं और अदालत ने सार्वजनिक स्थानों पर गोवंश वध पर रोक से जुड़े प्रावधानों को बरकरार रखा था।

    शुभेंदु अधिकारी ने इसके साथ तारापीठ तारकेश्वर और मदनमोहनजी को जोड़ने वाले प्रस्तावित तीर्थयात्रा सर्किट का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसकी अनुमानित लागत करीब 2000 करोड़ रुपये बताई। मुख्यमंत्री के मुताबिक विकास और विरासत संरक्षण को साथ लेकर चलना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

  • संयुक्त राष्ट्र में जयशंकर ने गांधी की शांति का संदेश दोहराया युद्धों के बीच दुनिया को दिया बड़ा संदेश

    संयुक्त राष्ट्र में जयशंकर ने गांधी की शांति का संदेश दोहराया युद्धों के बीच दुनिया को दिया बड़ा संदेश


    नई दिल्ली । विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से वैश्विक शांति और कूटनीति को लेकर भारत का पक्ष रखा। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने महात्मा गांधी के विचार का उल्लेख किया। जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर अंकित गांधी के संदेश का संदर्भ देते हुए शांति के रास्ते को लेकर उनकी सोच को सामने रखा। उनके इस उल्लेख पर महासभा के हॉल में तालियां बजने की बात सामने आई है।

    जयशंकर ने अपने संबोधन में मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया के अलग अलग हिस्सों में जारी संघर्षों का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता। युद्ध और टकराव का प्रभाव खाद्यान्न ईंधन उर्वरक और वित्त जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ता है। उन्होंने विकासशील देशों के सामने मौजूद इन चुनौतियों को 4F संकट के रूप में रेखांकित किया। इसमें Food यानी खाद्यान्न Fuel यानी ईंधन Fertiliser यानी उर्वरक और Finance यानी वित्त शामिल हैं।

    विदेश मंत्री ने रूस यूक्रेन युद्ध के साथ पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने संघर्षों के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति के महत्व पर जोर दिया। उनका कहना था कि रणभूमि से किसी समस्या का स्थायी समाधान हासिल करना मुश्किल है और देशों के बीच संवाद के जरिए रास्ता तलाशना जरूरी है। यह रुख भारत की उस व्यापक कूटनीतिक स्थिति के अनुरूप है जिसमें बातचीत और कूटनीति को अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान का महत्वपूर्ण माध्यम बताया जाता रहा है।

    जयशंकर ने अपने संबोधन में ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि दुनिया में जारी संघर्षों और बढ़ती प्रतिस्पर्धा की आर्थिक कीमत कई विकासशील देशों को चुकानी पड़ रही है। इन देशों के सामने ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के साथ वित्तीय दबाव भी बढ़ रहा है। ऐसे में वैश्विक संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

    विदेश मंत्री ने बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र समेत वैश्विक संस्थाओं को वर्तमान दुनिया की वास्तविकताओं के अनुरूप अधिक प्रतिनिधित्व वाला बनाने की बात करता रहा है। जयशंकर के संबोधन में भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग और नियम आधारित व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़े मुद्दे सामने आए।

    गांधी के विचार का उल्लेख इस भाषण का एक प्रमुख हिस्सा रहा। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर महात्मा गांधी से जुड़ा संदेश शांति और अहिंसा के विचारों को सामने रखता है। जयशंकर ने इसी संदर्भ को वैश्विक परिस्थितियों से जोड़ते हुए शांति के महत्व को रेखांकित किया। उनका संबोधन ऐसे समय हुआ जब कई क्षेत्रों में संघर्ष और आर्थिक अस्थिरता अंतरराष्ट्रीय एजेंडे के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।

    जयशंकर के भाषण में खाद्य सुरक्षा ऊर्जा सुरक्षा विकासशील देशों की वित्तीय चुनौतियां युद्ध और कूटनीति जैसे कई विषय शामिल रहे। उन्होंने इन समस्याओं से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।

  • वोटर लिस्ट और धार्मिक स्थलों के मुद्दे पर प्रदर्शन 29 सितंबर को जंतर-मंतर पहुंचने की महबूबा की अपील

    वोटर लिस्ट और धार्मिक स्थलों के मुद्दे पर प्रदर्शन 29 सितंबर को जंतर-मंतर पहुंचने की महबूबा की अपील


    नई दिल्ली । पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी यानी PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने 29 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में लोगों से शामिल होने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए धर्मनिरपेक्ष सोच रखने वाले लोगों से प्रदर्शन में पहुंचने को कहा है। यह प्रदर्शन मॉनिटरिंग कमिटी फॉर इंडियन मुस्लिम्स की ओर से आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रदर्शन का समय दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक बताया गया है।

    महबूबा मुफ्ती ने अपने वीडियो संदेश में देश में धार्मिक स्थलों और मतदाता सूचियों से जुड़े कई मुद्दे उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में मस्जिदों दरगाहों और चर्चों को गिराया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि तैयार की जा रही मतदाता सूचियों में विपक्षी समर्थकों धर्मनिरपेक्ष सोच रखने वाले लोगों और खास तौर पर मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। इन आरोपों को महबूबा मुफ्ती ने प्रदर्शन के प्रमुख मुद्दों से जोड़ते हुए लोगों से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की है।

    PDP प्रमुख ने कहा कि मॉनिटरिंग कमिटी फॉर इंडियन मुस्लिम्स ने इन मुद्दों को लेकर 29 सितंबर को प्रदर्शन करने का फैसला किया है। उन्होंने धर्मनिरपेक्ष सोच रखने वाले लोगों से इसमें भाग लेने की अपील की। अपने संदेश में उन्होंने लोकतंत्र भाईचारे और देश की समावेशी सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े मूल्यों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक ऐसे मुद्दों पर लोगों को अपनी आवाज उठानी चाहिए।

    महबूबा मुफ्ती की यह अपील ऐसे समय आई है जब मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। चुनाव आयोग ने अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए SIR की प्रक्रिया और समयसीमा तय की है। आयोग के आधिकारिक दस्तावेज में दिल्ली और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के लिए SIR से जुड़ी प्रक्रिया का कार्यक्रम दर्ज है। हालांकि किसी मतदाता का नाम हटाया जाना या जोड़े जाना संबंधित चुनावी प्रक्रिया और दावे-आपत्तियों के निपटारे के तहत तय होता है।

    महबूबा मुफ्ती ने अपने संदेश में लोगों से अपील करते हुए कहा कि जो भारतीय देश के लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को महत्व देते हैं उन्हें 29 सितंबर को जंतर-मंतर पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के जरिए देश के लोकतंत्र भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब से जुड़े मूल्यों के लिए आवाज उठाई जाएगी।

    इस प्रदर्शन में किन संगठनों और कितने लोगों की भागीदारी होगी इसकी अंतिम तस्वीर 29 सितंबर को ही स्पष्ट होगी। फिलहाल महबूबा मुफ्ती की अपील के बाद यह कार्यक्रम दिल्ली में मतदाता सूची धार्मिक स्थलों और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक चर्चा का एक और केंद्र बन गया है। प्रदर्शन के दौरान उठाए जाने वाले मुद्दों और आयोजकों की मांगों पर आगे की स्थिति सामने आने की उम्मीद है।

  • SIR पर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ी डेडलाइन नोटिस वाले वोटरों को घर बैठे मिलेगी मदद

    SIR पर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ी डेडलाइन नोटिस वाले वोटरों को घर बैठे मिलेगी मदद


    नई दिल्ली । चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर दिल्ली और महाराष्ट्र के मतदाताओं को राहत दी है। आयोग ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाने के साथ नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए प्रक्रिया को भी आसान बनाने का फैसला किया है। अब ऐसे कई मामलों में मतदाताओं को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए चुनाव कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO मतदाताओं के घर जाकर जरूरी दस्तावेज जुटाएंगे और उन्हें ECINET सिस्टम पर अपलोड करने में मदद करेंगे। इसके बाद संबंधित निर्वाचन अधिकारी उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मामले पर फैसला करेगा।

    दिल्ली में SIR के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख अब 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। वहीं नोटिस दावे और आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है। आयोग के इस फैसले से उन मतदाताओं को अतिरिक्त समय मिलेगा जिन्हें मतदाता सूची में किसी तरह की विसंगति को लेकर नोटिस मिला है या जो निर्धारित अवधि में अपनी आपत्ति दर्ज नहीं करा सके थे।

    महाराष्ट्र के मतदाताओं के लिए भी समयसीमा बढ़ाई गई है। यहां दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। वहीं इन मामलों के निपटारे की प्रक्रिया 10 नवंबर 2026 तक चल सकती है। महाराष्ट्र की अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर 2026 को प्रकाशित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि नोटिस पाने वाले मतदाताओं को सामान्य मामलों में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी। केवल असाधारण परिस्थितियों में ही उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ सकता है। इसका उद्देश्य SIR प्रक्रिया में दस्तावेज जमा करने और सुनवाई से जुड़ी परेशानी को कम करना है।

    BLO की भूमिका इस प्रक्रिया में अहम होगी। जिन मतदाताओं से दस्तावेज मांगे गए हैं उनके घर जाकर अधिकारी जरूरी कागजात प्राप्त करेंगे और उन्हें ECINET पर अपलोड करेंगे। इससे खास तौर पर बुजुर्गों दिव्यांगों मजदूरों और ऐसे लोगों को सुविधा मिल सकती है जिनके लिए चुनाव कार्यालय या निर्धारित केंद्र तक पहुंचना मुश्किल होता है। चुनाव आयोग ने बेघर लोगों मजदूरों और रैन बसेरों में रहने वाले लोगों के लिए विशेष हेल्प डेस्क और कैंप लगाने के निर्देश भी दिए हैं।

    SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम और विवरण की जांच करना महत्वपूर्ण है। चुनाव आयोग की वोटर सर्विसेज सुविधा के जरिए मतदाता अपनी जानकारी और संबंधित सेवाओं को ऑनलाइन देख सकते हैं।

    इस पूरे बदलाव का मकसद यह है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिले और दस्तावेज जमा करने या सुनवाई के लिए अनावश्यक भागदौड़ न करनी पड़े। दिल्ली और महाराष्ट्र के मतदाताओं को अब अपनी संबंधित नई समयसीमा का ध्यान रखते हुए दावे या आपत्तियां दर्ज करनी होंगी।

  • दिल्ली से नोएडा गाजियाबाद और कटरा एक्सप्रेसवे तक सीधा कनेक्शन 3 नए लिंक कॉरिडोर से मिलेगी बड़ी राहत

    दिल्ली से नोएडा गाजियाबाद और कटरा एक्सप्रेसवे तक सीधा कनेक्शन 3 नए लिंक कॉरिडोर से मिलेगी बड़ी राहत


    नई दिल्ली । दिल्ली और एनसीआर में लगातार बढ़ते यातायात के दबाव को कम करने के लिए तीन बड़े लिंक एक्सप्रेसवे कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। इन प्रस्तावित कॉरिडोर के जरिए दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों को प्रमुख एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य राजधानी के अंदर से गुजरने वाले अंतरराज्यीय ट्रैफिक को वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराना है। परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार की जा रही है और मंजूरी मिलने के बाद इनके निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने की योजना है।

    प्रस्तावित तीन लिंक में करीब 20 किलोमीटर लंबा UER-II से दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे लिंक करीब 17 किलोमीटर लंबा UER-II से ट्रोनिका सिटी लिंक और करीब 35 किलोमीटर लंबा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से नोएडा कॉरिडोर शामिल है। इन परियोजनाओं के तैयार होने से दिल्ली के भीतर से होकर गुजरने वाले कई वाहनों को बाहरी और तेज मार्ग मिल सकेगा।

    पहली परियोजना अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 यानी UER-II को दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की है। करीब 20 किलोमीटर लंबे इस लिंक से दिल्ली गुरुग्राम और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे की तरफ से पंजाब जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश की ओर जाने वाले वाहनों को फायदा मिलने की उम्मीद है। फिलहाल कई वाहनों को दिल्ली और हरियाणा के व्यस्त मार्गों से होकर गुजरना पड़ता है। नया लिंक तैयार होने पर उन्हें वैकल्पिक रास्ता मिल सकता है।

    इस कॉरिडोर का प्रस्तावित मार्ग कराला-कंझावला क्षेत्र के पास UER-II से शुरू होकर लाडपुर जोंती कनोदा और कुलसी जैसे इलाकों के आसपास से गुजरने और बहादुरगढ़ के पास मुख्य एक्सप्रेसवे से जुड़ने का है। इससे पश्चिमी दिल्ली के साथ नजफगढ़ मुंडका द्वारका और बहादुरगढ़ क्षेत्र की कनेक्टिविटी भी बेहतर हो सकती है।

    दूसरा लिंक करीब 17 किलोमीटर लंबा छह लेन का एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य उत्तरी दिल्ली में अलीपुर के पास UER-II को यमुना पार कर लोनी क्षेत्र के पास ट्रोनिका सिटी और दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे से जोड़ना है। इसकी अनुमानित लागत करीब 3500 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके बनने से दिल्ली के अंदर से गुजरने वाले राजस्थान हरियाणा और दिल्ली के पश्चिमी तथा उत्तरी हिस्सों के वाहनों को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की तरफ जाने के लिए वैकल्पिक मार्ग मिल सकता है।

    तीसरी परियोजना करीब 35 किलोमीटर लंबी होगी और इसे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को नोएडा तथा गौतमबुद्ध नगर क्षेत्र से जोड़ने की योजना है। इसकी अनुमानित लागत करीब 4400 करोड़ रुपये बताई गई है। प्रस्तावित कॉरिडोर अक्षरधाम के आसपास दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से जुड़कर दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा के साथ आगे बढ़ेगा और नोएडा एक्सप्रेसवे से कनेक्ट होने की योजना है।

    इस कॉरिडोर का मकसद दिल्ली के घने यातायात वाले हिस्सों को बाईपास करते हुए नोएडा और ग्रेटर नोएडा तक तेज संपर्क उपलब्ध कराना है। फिलहाल कई इलाकों से नोएडा जाने वाले वाहनों को रिंग रोड आउटर रिंग रोड आईटीओ अक्षरधाम या डीएनडी जैसे व्यस्त रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ता है। ट्रैफिक के हिसाब से इस सफर में काफी समय लग सकता है। प्रस्तावित लिंक तैयार होने के बाद यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    तीनों परियोजनाओं का अंतिम स्वरूप DPR और संबंधित मंजूरियों के बाद स्पष्ट होगा। फिलहाल इन लिंक एक्सप्रेसवे को दिल्ली-NCR में यातायात का दबाव कम करने और अलग-अलग दिशाओं में जाने वाले वाहनों को सीधे वैकल्पिक मार्ग देने की योजना के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है।

  • छात्रों की गूंज कार्यक्रम पर सियासी वार कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी को बताया बीजेपी का अप्रत्यक्ष स्टार प्रचारक

    छात्रों की गूंज कार्यक्रम पर सियासी वार कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी को बताया बीजेपी का अप्रत्यक्ष स्टार प्रचारक


    नई दिल्ली । कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इंदौर में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर मध्य प्रदेश में सियासी बयानबाजी जारी है। इसी क्रम में प्रदेश सरकार में मंत्री और भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उन्हें बीजेपी का अप्रत्यक्ष स्टार प्रचारक बताया। विजयवर्गीय ने दावा किया कि राहुल गांधी जहां भी जाते हैं वहां बीजेपी को फायदा होता है। उनकी यह टिप्पणी सुसनेर में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान सामने आई।

    राहुल गांधी ने 19 सितंबर को इंदौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में युवाओं से संवाद किया था। इस दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था परीक्षा प्रणाली रोजगार और छात्रों से जुड़े कई मुद्दे उठाए थे। राहुल गांधी ने सरकार पर भी सवाल खड़े किए थे। कार्यक्रम में छात्रों की समस्याओं और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया था।

    कार्यक्रम के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हो गई। इससे पहले भी बीजेपी नेताओं ने कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री को लेकर सवाल उठाए थे जबकि कांग्रेस ने कार्यक्रम को छात्रों के मुद्दों से जोड़कर अपना पक्ष रखा था। इस पूरे विवाद के बीच कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी के कार्यक्रम पर कटाक्ष किया।

    सुसनेर में नगर परिषद अध्यक्ष उपचुनाव के लिए बीजेपी प्रत्याशी के समर्थन में रोड शो और सभा के दौरान विजयवर्गीय ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी के कार्यक्रम में मनोरंजन और रैपर का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर तंज कसा। इसके बाद उन्होंने राहुल गांधी को लेकर कहा कि बीजेपी के लिए वह अप्रत्यक्ष स्टार प्रचारक जैसे हैं और उनके कहीं जाने पर बीजेपी को फायदा होता है।

    विजयवर्गीय की इस टिप्पणी को कांग्रेस और बीजेपी के बीच जारी राजनीतिक वार-पलटवार की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। इंदौर का छात्रों की गूंज कार्यक्रम कांग्रेस के छात्र और युवा संवाद अभियान का हिस्सा था। कार्यक्रम से पहले कांग्रेस ने इसे छात्रों की समस्याओं को सामने रखने वाला मंच बताया था। वहीं बीजेपी की ओर से कार्यक्रम और उसमें उठाए गए राजनीतिक मुद्दों पर सवाल खड़े किए गए थे।

    सुसनेर की सभा में विजयवर्गीय ने स्थानीय कांग्रेस विधायक को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने विकास कार्यों और राजनीतिक समर्थन को लेकर एक उदाहरण देते हुए कांग्रेस प्रत्याशी के जीतने की स्थिति में कागजी कार्रवाई का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस प्रत्याशी जीतकर उनके पास काम से संबंधित कागज लेकर आएगा तो वह उन्हें स्वीकार कर लेंगे लेकिन अंत में एक बॉक्स देने की बात कही। विजयवर्गीय ने इसी प्रसंग में कहा कि बॉक्स खोलने पर उसमें घंटी मिलेगी और लोगों को तय करना है कि उन्हें विकास चाहिए या घंटी बजानी है।

    इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम के बाद कांग्रेस ने छात्रों से जुड़े इस अभियान को प्रदेश के अन्य हिस्सों तक ले जाने की घोषणा भी की है। रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस ने इस अभियान के जरिए युवाओं से शिक्षा रोजगार और परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर संवाद बढ़ाने की योजना बनाई है।

    इस तरह राहुल गांधी के इंदौर दौरे के बाद छात्रों से जुड़े मुद्दों के साथ राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कैलाश विजयवर्गीय की अप्रत्यक्ष स्टार प्रचारक वाली टिप्पणी इसी सियासी टकराव का हिस्सा है और आने वाले दिनों में इस पर कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया भी देखने को मिल सकती है।

  • SIR विवाद के बीच EC की तस्वीर ने खींचा सबका ध्यान बैठक से ज्यादा पानी की बोतल के दाम की चर्चा

    SIR विवाद के बीच EC की तस्वीर ने खींचा सबका ध्यान बैठक से ज्यादा पानी की बोतल के दाम की चर्चा


    नई दिल्ली । वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग लगातार चर्चा में है। इसी बीच तीनों चुनाव आयुक्तों की एक बैठक की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद चर्चा का एक अलग विषय सामने आ गया। तस्वीर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी नजर आ रहे हैं। बैठक की तस्वीर में टेबल पर रखी पानी की बोतलों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इन बोतलों को लेकर सोशल मीडिया पर कीमत की चर्चा शुरू हो गई।

    तस्वीर में दिखाई दे रही बोतलें सामान्य प्लास्टिक की बोतलों से अलग नजर आती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ये 250 मिलीलीटर की कांच की बोतलें हैं और इन पर आवा ब्रांड का नाम दिखाई देता है। उपलब्ध ऑनलाइन कीमत के अनुसार 8 बोतलों के पैक की कीमत 999 रुपये बताई गई है। इस हिसाब से एक बोतल की कीमत करीब 125 रुपये बैठती है। 250 मिलीलीटर की एक बोतल के आधार पर गणना करें तो एक लीटर पानी की कीमत लगभग 500 रुपये निकलती है। इसी गणित को लेकर सोशल मीडिया पर तस्वीर की खूब चर्चा होने लगी।

    हालांकि केवल किसी बैठक की तस्वीर में कोई उत्पाद दिखाई देने से यह साबित नहीं होता कि चुनाव आयोग ने वह उत्पाद इसी कीमत पर खरीदा था। यह भी स्पष्ट नहीं है कि तस्वीर में नजर आ रही बोतलें किस माध्यम से बैठक में उपलब्ध कराई गई थीं। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही कीमत की चर्चा को उपलब्ध ऑनलाइन लिस्टिंग के आधार पर देखा जाना चाहिए न कि आयोग की वास्तविक खरीद कीमत के रूप में।

    इससे पहले भी चुनाव आयोग के कार्यालय से जुड़ी तस्वीरों में आवा ब्रांड की पानी की बोतलों को लेकर ऑनलाइन चर्चा सामने आ चुकी है। अगस्त 2025 की एक रिपोर्ट में भी 250 मिलीलीटर की इन बोतलों और उनकी कीमत को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा का उल्लेख किया गया था। उस रिपोर्ट में कंपनी की वेबसाइट पर 8 बोतलों की नियमित कीमत 1600 रुपये और छूट के बाद 999 रुपये होने की जानकारी दी गई थी।

    आवा एक भारतीय मिनरल वॉटर ब्रांड है। कंपनी अपने पानी को प्राकृतिक स्रोत से प्राप्त मिनरल वॉटर के रूप में पेश करती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ब्रांड का पानी अरावली क्षेत्र के प्राकृतिक स्रोत से जुड़े होने का दावा किया जाता है। कंपनी अपने उत्पाद में कैल्शियम मैग्नीशियम सोडियम और पोटेशियम जैसे खनिजों की मौजूदगी का भी उल्लेख करती है।

    वायरल तस्वीर में पानी की बोतलों की चर्चा ऐसे समय हुई है जब SIR को लेकर चुनाव आयोग पहले से ही सार्वजनिक बहस के केंद्र में है। बैठक के बाद आयोग की ओर से आधिकारिक जानकारी भी साझा की गई थी। लेकिन सोशल मीडिया पर तस्वीर के सामने आने के बाद बैठक के फैसलों के साथ टेबल पर रखी बोतलों की कीमत भी चर्चा का विषय बन गई।

    इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 500 रुपये प्रति लीटर का आंकड़ा 250 मिलीलीटर की बोतल और 8 बोतलों के 999 रुपये वाले उपलब्ध पैक की गणना से निकलता है। इसे चुनाव आयोग द्वारा भुगतान की गई वास्तविक कीमत मानना उचित नहीं होगा। तस्वीर ने फिलहाल पानी की कीमत को लेकर सोशल मीडिया पर एक नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।

  • एयर फ्रेशनर और खुशबूदार क्लीनर से सावधान ओजोन के संपर्क में बन रहे नैनोपार्टिकल फेफड़ों तक पहुंचने का खतरा

    एयर फ्रेशनर और खुशबूदार क्लीनर से सावधान ओजोन के संपर्क में बन रहे नैनोपार्टिकल फेफड़ों तक पहुंचने का खतरा


    नई दिल्ली । घर को साफ सुथरा और खुशबूदार रखने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले घरेलू सफाई उत्पाद और एयर फ्रेशनर्स अब स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ा रहे हैं। स्विट्जरलैंड की ईपीएफएल यूनिवर्सिटी और अमेरिका की पर्ड्यू यूनिवर्सिटी से जुड़े शोध में ऐसे उत्पादों से घर के भीतर बेहद छोटे नैनोपार्टिकल बनने की बात सामने आई है। शोध के मुताबिक खुशबूदार उत्पादों से निकलने वाले कुछ रासायनिक यौगिक जब हवा में मौजूद ओजोन के संपर्क में आते हैं तो रासायनिक प्रतिक्रिया शुरू होती है। इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में अल्ट्राफाइन पार्टिकल्स बन सकते हैं जो सांस के साथ फेफड़ों के गहरे हिस्सों तक पहुंचने में सक्षम होते हैं।

    इस शोध में नींबू और चीड़ जैसी खुशबू वाले उत्पादों पर खास ध्यान दिया गया है। ऐसे कई उत्पादों में लिमोनेन और पाइनीन जैसे रासायनिक यौगिक पाए जाते हैं। ये यौगिक हवा में मौजूद ओजोन के साथ प्रतिक्रिया करके बेहद छोटे कण बना सकते हैं। इनका आकार पीएम10 और पीएम2.5 जैसे सामान्य प्रदूषक कणों से भी छोटा हो सकता है। यही वजह है कि सामान्य आंखों से इन्हें देखना संभव नहीं होता लेकिन सांस लेने के दौरान ये शरीर के अंदर जा सकते हैं।

    शोध से जुड़े निष्कर्ष घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता को लेकर महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। जब किसी बंद कमरे में खुशबूदार क्लीनर या एयर फ्रेशनर का इस्तेमाल किया जाता है और वहां पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं होता है तो रासायनिक पदार्थों की मौजूदगी बढ़ सकती है। ऐसे वातावरण में बनने वाले सूक्ष्म कण सांस के प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र को पार कर सकते हैं। नाक के बाल और बलगम आमतौर पर बाहरी कणों को रोकने में मदद करते हैं लेकिन बेहद छोटे नैनोपार्टिकल्स इन फिल्टर से आगे निकल सकते हैं।

    लगातार ऐसे कणों के संपर्क को लेकर श्वसन स्वास्थ्य पर चिंता जताई गई है। उपलब्ध शोध में अस्थमा ब्रोंकाइटिस सांस फूलने और फेफड़ों में सूजन जैसी समस्याओं से संभावित संबंध की चर्चा की गई है। खासतौर पर बच्चों बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों के लिए घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी माना जाता है।

    शोध में सामने आए खतरे को देखते हुए घरेलू सफाई के दौरान कुछ सावधानियां अपनाई जा सकती हैं। विशेषज्ञ सलाह के मुताबिक कम सुगंध वाले या सुगंध रहित क्लीनर का इस्तेमाल करना बेहतर हो सकता है। एक साथ कई खुशबूदार उत्पादों का प्रयोग करने से बचना चाहिए। सफाई के दौरान एग्जास्ट फैन चलाने के साथ खिड़कियां खोलकर पर्याप्त वेंटिलेशन रखना भी उपयोगी हो सकता है।

    इसके अलावा रासायनिक स्प्रे का इस्तेमाल कम करने और जरूरत के अनुसार सफेद सिरका बेकिंग सोडा तथा पानी जैसे पारंपरिक विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। वहीं ऐसे एयर प्यूरीफायर या उपकरणों के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी गई है जो ओजोन गैस छोड़ते हैं। घर को साफ और खुशबूदार रखना जरूरी है लेकिन इसके साथ घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता और सांसों की सुरक्षा पर भी ध्यान देना उतना ही महत्वपूर्ण है।