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  • 30 सितंबर को दिल्ली में INDIA ब्लॉक की संभावित बैठक, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर चर्चा

    30 सितंबर को दिल्ली में INDIA ब्लॉक की संभावित बैठक, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर चर्चा

    नई दिल्ली । विपक्षी दलों का INDIA ब्लॉक 30 सितंबर को नई दिल्ली में बैठक कर सकता है। इस संभावित बैठक में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। विपक्षी दल इन विषयों पर आगे की संयुक्त रणनीति तैयार करने के लिए आपसी समन्वय बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

    बैठक का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली हो सकता है। विपक्षी दल इस प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां उठा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की रणनीति पर विचार कर रहे हैं।

    इस घटनाक्रम में पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े तृणमूल कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का एक मुद्दे पर साथ आना भी महत्वपूर्ण है। दोनों दल राज्य में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं, लेकिन चुनाव आयोग और मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों पर समन्वित कार्रवाई की जरूरत जता रहे हैं।

    मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव एमए बेबी ने विपक्षी दलों को पत्र लिखकर बैठक बुलाने का अनुरोध किया था। इसके बाद उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी बातचीत की। ममता बनर्जी ने इस मामले से निपटने के लिए समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।

    विपक्षी दलों में कांग्रेस और वामपंथी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने तथा SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग उठा रहे हैं। इस मुद्दे पर विपक्ष संसद के दोनों सदनों में नया प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। इसके कानूनी पहलुओं पर विशेषज्ञों से राय ली जा रही है।

    कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक 29 सितंबर को प्रस्तावित है। इस बैठक में पार्टी चुनाव आयोग और मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े विवाद पर अपना रुख स्पष्ट कर सकती है। इसके बाद 30 सितंबर को होने वाली संभावित विपक्षी बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा हो सकती है।

    विपक्ष की मौजूदा लामबंदी के पीछे चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े फैसलों पर कथित मतभेद की खबर भी एक वजह बताई जा रही है। सामने आई जानकारी में दावा किया गया था कि आयोग के अन्य आयुक्तों ने पुनरीक्षण से संबंधित कुछ फैसलों पर आपत्तियां जताई थीं।

    हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि बहुसदस्यीय संस्था में अलग-अलग विचार सामने आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग ने अपने आदेशों को वैधानिक बताया है। इस मुद्दे पर विपक्ष और चुनाव आयोग के रुख में अंतर बना हुआ है।

    इससे पहले 23 विपक्षी दलों और एक सांसद ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात कर मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। विपक्षी दल अब संसद में प्रस्ताव लाने और आपसी समन्वय के जरिए आगे की कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं।

    30 सितंबर की संभावित बैठक में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव से जुड़े मुद्दे चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। बैठक में शामिल होने वाले दलों और अंतिम एजेंडे को लेकर आगे की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

  • सोनीपत में खेत के कमरे में 32 वर्षीय महिला की हत्या, पति पर शराब के नशे में कस्सी से हमला करने का आरोप

    सोनीपत में खेत के कमरे में 32 वर्षीय महिला की हत्या, पति पर शराब के नशे में कस्सी से हमला करने का आरोप

    नई दिल्ली: हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव रहमाणा में 32 वर्षीय महिला की हत्या का मामला सामने आया है। महिला की पहचान राजवंती के रूप में हुई है। वह अपने पति और करीब 11 साल के बेटे के साथ एक किसान के खेत में बने कमरे में रह रही थी। आरोप है कि घरेलू विवाद के चलते उसके पति नरेश ने शराब के नशे में उस पर धारदार कृषि उपकरण कस्सी से हमला कर दिया। गंभीर चोटों के कारण महिला की मौत हो गई। घटना के बाद से आरोपी पति की तलाश की जा रही है।

    राजवंती और उसका पति नरेश मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं। दोनों अपने बेटे के साथ सोनीपत के रहमाणा गांव में किसान राजेंद्र के खेत में बने कमरे में रह रहे थे। बताया गया है कि पति-पत्नी के बीच अक्सर घरेलू मामलों को लेकर विवाद होता रहता था। ग्रामीणों के मुताबिक, दोनों शराब पीने के आदी थे और उनके बीच आए दिन कहासुनी होती थी।

    आरोप है कि घटना के समय नरेश शराब के नशे में था। घरेलू विवाद के दौरान उसने कथित तौर पर कस्सी से राजवंती पर हमला कर दिया। महिला के चेहरे, सिर और पेट पर कई वार किए गए। हमले में उसे गंभीर चोटें आईं, जिसके चलते उसकी मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

    महिला की हत्या की सूचना मिलने पर मोहाना थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने और वारदात से जुड़े तथ्यों की पड़ताल के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम को भी बुलाया गया।

    पुलिस की शुरुआती जांच में हत्या के पीछे घरेलू विवाद की बात सामने आई है। प्रारंभिक जानकारी के आधार पर महिला के पति नरेश पर हत्या करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस घटनाक्रम की सभी परिस्थितियों की जांच कर रही है और आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

    पुलिस प्रवक्ता रवींद्र कुमार के मुताबिक, गांव रहमाणा से महिला की हत्या की सूचना मिली थी। शुरुआती जांच में महिला के पति पर हत्या का आरोप सामने आया है। महिला पर किसी तेजधार हथियार से हमला किए जाने की बात भी सामने आई है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आरोपी पति की तलाश की जा रही है।

    पुलिस के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान वारदात से जुड़े तथ्यों, घरेलू विवाद की परिस्थितियों और महिला की मौत के कारणों की पड़ताल की जा रही है। फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है।

  • मौसम के बदले तेवर: हेमकुंड साहिब में बर्फबारी, यूपी में सड़कों पर पानी, हिमाचल-उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट

    मौसम के बदले तेवर: हेमकुंड साहिब में बर्फबारी, यूपी में सड़कों पर पानी, हिमाचल-उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट

    नोएडा। मानसून की विदाई के बीच देश के उत्तर और मध्य हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ली है। उत्तराखंड के हेमकुंड साहिब में बर्फबारी से ठंड बढ़ गई है, वहीं उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश से कई शहरों में जलभराव की स्थिति है। हिमाचल प्रदेश में भी बादल सक्रिय हैं और कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। उत्तराखंड में तो 26 और 27 सितंबर के लिए कई जिलों में रेड और ऑरेंज अलर्ट है।

    यूपी में बारिश से जनजीवन प्रभावित, 19 जिलों में स्कूल बंद
    उत्तर प्रदेश में बृहस्पतिवार आधी रात के बाद शुरू हुआ बारिश का सिलसिला शनिवार को भी जारी रहने के आसार हैं। प्रदेश के लगभग सभी हिस्सों में कहीं धीमी तो कहीं तेज बारिश हुई। लगातार बारिश से सड़कों पर पानी भर गया और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।

    मौसम विभाग ने श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, रामपुर, बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर में अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा 62 जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश का अलर्ट है।

    बारिश के कारण मानसून सीजन में प्रदेश में रह गया करीब चार फीसदी बारिश का अंतर भी पूरा हो गया है। हालात को देखते हुए शनिवार को 19 जिलों में स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया गया है। नर्सरी से लेकर डिग्री कॉलेज तक के शिक्षण संस्थान प्रभावित रहेंगे। चार जिलों में कक्षा आठ तक और अन्य जिलों में कक्षा 12 तक के स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए सरोजनीनगर विधायक राजेश्वर सिंह ने भी स्कूल बंद रखने के प्रशासन के फैसले का समर्थन किया है।

    बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से बढ़ी बारिश
    वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने नए मौसम तंत्र के पश्चिमी विक्षोभ के साथ मिलने से उत्तर प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज हुई हैं। शनिवार को भी बारिश का दायरा और बढ़ने की संभावना है। लगातार बारिश के कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तापमान गिरा है। कई जगह अधिकतम तापमान सामान्य से नीचे पहुंच गया है।

    खेतों में बिछी धान की फसल
    लगातार बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है। कई इलाकों में खेतों में खड़ी धान समेत दूसरी फसलें गिर गई हैं। जौनपुर, मिर्जापुर और आजमगढ़ में धान की फसल बिछने की सूचना है। इससे किसानों को फसल खराब होने और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।

    हिमाचल में चार दिन बारिश, 27 सितंबर को सबसे ज्यादा असर
    हिमाचल प्रदेश में भी मौसम का मिजाज बदल गया है। प्रदेश में अगले चार दिन बारिश का दौर रहने का अनुमान है। राजधानी शिमला में सुबह धूप खिली, लेकिन दोपहर होते-होते घने बादल छा गए।

    मौसम विभाग के अनुसार 26 सितंबर की शाम या रात से 29 सितंबर की सुबह तक दक्षिण-पूर्वी हिमाचल और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश हो सकती है। 27 सितंबर को बारिश की तीव्रता सबसे अधिक रहने का पूर्वानुमान है।

    मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के मुताबिक सिरमौर, शिमला, सोलन, मंडी और बिलासपुर के कुछ हिस्सों में 26 सितंबर की शाम से 29 सितंबर की सुबह तक व्यापक बारिश हो सकती है। इस दौरान कहीं-कहीं भारी बारिश के साथ अंधड़ और बिजली चमकने की भी आशंका है।

    29 सितंबर को भी कई हिस्सों में बारिश हो सकती है, जबकि 30 सितंबर से 2 अक्टूबर तक कुछ स्थानों पर हल्की बारिश का अनुमान है। पिछले 24 घंटे में धर्मशाला में 46.0 मिमी, भरेरी में 18.2 मिमी, धौलाकुआं में 11.0 मिमी और भरवाईं में 8.0 मिमी बारिश दर्ज की गई।

    हिमाचल में किस दिन कौन सा अलर्ट
    27 सितंबर: सिरमौर में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। बिलासपुर, मंडी, शिमला, सोलन और किन्नौर के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।

    28 सितंबर: शिमला, सोलन और सिरमौर में येलो अलर्ट रहेगा।
    27 और 28 सितंबर: ऊना, हमीरपुर, चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, किन्नौर और स्पीति के कुछ हिस्सों में मध्यम बारिश की संभावना है।
    26 से 28 सितंबर के बीच शिमला, सोलन और सिरमौर तथा 27 सितंबर को किन्नौर, बिलासपुर, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी में कुछ स्थानों पर 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।
    26 सितंबर को शिमला, सिरमौर और किन्नौर में कई जगह हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर तेज बारिश का अनुमान है। कुल्लू, कांगड़ा, मंडी और लाहौल-स्पीति में हल्की बारिश हो सकती है।

    उत्तराखंड में हेमकुंड साहिब बर्फ से ढका, कई जिलों में रेड अलर्ट
    उत्तराखंड के हेमकुंड साहिब में मौसम खराब होने के बाद लगातार बर्फबारी हो रही है। बर्फबारी के चलते धाम में ठंड काफी बढ़ गई है। इसी बीच प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हुआ है।

    मौसम विज्ञान केंद्र ने 26 से 28 सितंबर तक बारिश की गतिविधियों को लेकर चेतावनी जारी की है। मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सीएस तोमर के अनुसार मौजूदा मौसम प्रणालियों के कारण 26 और 27 सितंबर को पर्वतीय जिलों के कुछ हिस्सों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    दक्षिण ओडिशा और उससे सटे दक्षिण छत्तीसगढ़ के ऊपर बना अवदाब पिछले छह घंटे में 15 किमी प्रति घंटे की गति से उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ा है। इसके प्रभाव से उत्तराखंड में बारिश की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है।

    26 सितंबर को इन जिलों में रेड अलर्ट
    बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ़, चंपावत और ऊधमसिंह नगर के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी और कहीं-कहीं अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट है। वहीं देहरादून, पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग और अल्मोड़ा में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    27 सितंबर को भी कई जिलों में खतरा
    27 सितंबर को देहरादून, टिहरी, हरिद्वार और पौड़ी में भारी से बहुत भारी तथा कहीं-कहीं अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट है।

    नैनीताल, उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का ऑरेंज अलर्ट है।

    28 सितंबर को उत्तरकाशी, हरिद्वार और देहरादून में कुछ स्थानों पर भारी बारिश और गर्जन के साथ तेज बारिश का दौर आने की संभावना है।

    भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का खतरा, यात्रा में सावधानी की अपील
    मौसम विभाग ने संवेदनशील इलाकों में हल्के से मध्यम भूस्खलन और चट्टानें गिरने से सड़क व राजमार्ग बाधित होने की आशंका जताई है। बिजली और पानी जैसी सामुदायिक सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।

    इसके अलावा नदियों का जलस्तर बढ़ने, नालों में अचानक बाढ़ आने और निचले इलाकों में जलभराव का खतरा है। कच्चे मकानों, पुलों और निर्माणाधीन भवनों को भी नुकसान पहुंच सकता है। चारधाम यात्रा, पर्वतारोहण अभियान और हेली सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है।

    प्रशासन ने तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को मौसम को देखते हुए सतर्क रहने और जरूरी होने पर ही यात्रा करने की सलाह दी है। लोगों से नदी-नालों और उफनती धाराओं में जाने, तैरने या नौका विहार से बचने को कहा गया है। भारी बारिश के दौरान घर के भीतर रहने और सक्रिय भूस्खलन वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की गई है।

    गंगोत्री-यमुनोत्री यात्रा अस्थायी रूप से रोकी
    उत्तरकाशी जिले में रेड अलर्ट के मद्देनजर प्रशासन ने गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर हीना और डोबाटा होल्डिंग पॉइंट्स पर यात्रियों को आगे जाने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि बदरीनाथ-केदारनाथ यात्रा सुचारू है।

    जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र और स्मार्ट कंट्रोल रूम को अलर्ट मोड पर रखा गया है। सभी तहसीलों से बारिश और भूस्खलन की सूचनाएं लगातार जुटाई जा रही हैं। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की लाइव सीसीटीवी से भी निगरानी की जा रही है।

    एनएच, बीआरओ, पीडब्ल्यूडी और पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को मशीनरी और मैनपावर तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। सड़क बंद होने की स्थिति में उसे जल्द से जल्द खोलने को कहा गया है। सभी तहसीलों को भी अलर्ट पर रहने और किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल देने के निर्देश हैं।

  • अयोध्या के राम-जानकी मंदिर में चोरी, अष्टधातु की प्राचीन प्रतिमाएं ले गए चोर, पूजा का सामान भी गायब

    अयोध्या के राम-जानकी मंदिर में चोरी, अष्टधातु की प्राचीन प्रतिमाएं ले गए चोर, पूजा का सामान भी गायब

    अयोध्या। धर्मनगरी अयोध्या में प्राचीन श्री राम-जानकी मंदिर को चोरों ने निशाना बनाया। टकसाल चौक स्थित मंदिर में ताला तोड़कर चोर अष्टधातु की श्रीराम, जानकी और लक्ष्मण जी की प्राचीन मूर्तियां समेत पूजा का सामान, लोटा और घंटा भी ले गए। घटना का पता 25 सितंबर की शाम उस समय चला, जब पुजारी आरती के लिए मंदिर पहुंचे।

    आरती के लिए पहुंचे पुजारी तो टूटा मिला ताला
    चोरी की वारदात चौकी चौक क्षेत्र के टकसाल चौक स्थित प्राचीन श्री राम-जानकी मंदिर में हुई। यह मंदिर रामयश कीर्तन सभा परिसर में है और पुराने प्रभात सिनेमा के नाम से भी इस स्थान की पहचान बताई गई है।

    25 सितंबर 2026 की शाम पुजारी जब मंदिर में आरती के लिए पहुंचे तो मुख्य द्वार का ताला टूटा हुआ मिला। अंदर जाकर देखने पर मंदिर से प्राचीन अष्टधातु की श्रीराम, जानकी और लक्ष्मण जी की मूर्तियां गायब मिलीं। इसके अलावा पूजा में इस्तेमाल होने वाला अन्य सामान, लोटा और घंटा भी नहीं मिला।

    अध्यक्ष ने एक व्यक्ति पर जताई आशंका
    घटना के बाद रामयश कीर्तन सभा के अध्यक्ष सुनील कुमार त्रिवेदी ने चौकी चौक पुलिस को लिखित प्रार्थना पत्र दिया। तहरीर में उन्होंने दिल्ली दरवाजा निवासी लवकुश गुप्ता, पुत्र स्व. मिन्नू गुप्ता, पर वारदात में शामिल होने की आशंका जताई है।

    हालांकि, आरोपी पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस मामले में तहरीर में लगाए गए आरोपों और अन्य संभावित पहलुओं की जांच कर रही है।

    सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस
    तहरीर मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि चोरी की वारदात से जुड़े सुराग मिल सकें। पुलिस नामजद व्यक्ति की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश भी दे रही है।

    मंदिर से प्राचीन प्रतिमाओं की चोरी के बाद स्थानीय स्तर पर भी घटना को लेकर चिंता है। अब पुलिस के सामने मूर्तियों को बरामद करने के साथ वारदात में शामिल लोगों की पहचान कर कार्रवाई करने की चुनौती है।

  • यूपी में 36 घंटे बाद मौसम सामान्य होने के आसार, 63 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश, 117 मकान क्षतिग्रस्त

    यूपी में 36 घंटे बाद मौसम सामान्य होने के आसार, 63 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश, 117 मकान क्षतिग्रस्त


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार 48 घंटे से हो रही भारी बारिश और खराब मौसम के बीच प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है। नेपाल में भारी बारिश के चलते सीमावर्ती जिलों में नदियों के जलस्तर पर भी निगरानी बढ़ाई गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 36 घंटे बाद प्रदेश में मौसम के सामान्य होने की संभावना है।

    प्रभावित परिवारों से मिलेंगे अधिकारी
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राहत और बचाव व्यवस्था सक्रिय रखी गई है। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने शनिवार को प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों को अतिवृष्टि से प्रभावित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मिलने और उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान कराने के निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि प्रतिकूल मौसम की स्थिति में आमजन की जान-माल की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। जिलाधिकारियों को स्वयं फील्ड में रहकर हालात का आकलन करने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तुरंत निर्णय लेने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    नेपाल सीमा पर विशेष सतर्कता
    नेपाल में हो रही भारी बारिश को देखते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत सीमावर्ती जिलों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। प्रशासन को नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखने और बाढ़ राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखने के लिए कहा गया है।

    राहत आयुक्त ने अधिकारियों से कहा है कि किसी भी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य में देरी नहीं होनी चाहिए। प्रभावित इलाकों में टीमें लगातार भ्रमण कर स्थिति की निगरानी करेंगी।

    36 घंटे बाद राहत मिलने की उम्मीद
    भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले 36 घंटे बाद प्रदेश में मौसम सामान्य होने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें और मौसम खराब होने की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर रहें।

    किसी भी आपदा या आपात स्थिति में तत्काल सहायता के लिए राहत हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की वेबसाइट पर भी 1070 हेल्पलाइन दर्ज है।

    63 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    राहत आयुक्त के मुताबिक, प्रदेश के 63 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। पिछले 24 घंटे में पूरे प्रदेश में सामान्य से 19 गुना अधिक वर्षा हुई। सबसे ज्यादा अंतर फर्रुखाबाद में रहा, जहां सामान्य से 200 गुना अधिक बारिश दर्ज की गई। कानपुर नगर में यह आंकड़ा 160 गुना, जबकि कन्नौज, कानपुर देहात और हरदोई में सामान्य से 130 गुना अधिक रहा।

    भदोही, देवरिया और अलीगढ़ में सामान्य बारिश दर्ज हुई, जबकि गाजीपुर में सबसे कम बारिश हुई। वहीं बागपत, गाजियाबाद, मथुरा, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ में बारिश दर्ज नहीं हुई।

    117 मकान क्षतिग्रस्त
    पिछले 48 घंटे में अतिवृष्टि और आंधी-तूफान के कारण प्रदेश में 117 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली है। राहत आयुक्त ने संबंधित जिलाधिकारियों को प्रभावित परिवारों को नियमानुसार अनुमन्य सहायता राशि तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

    अधिकारियों को बारिश से हुए नुकसान का तत्काल सर्वे और आकलन कराने को भी कहा गया है, ताकि प्रभावित लोगों को जल्द राहत दी जा सके। फील्ड अधिकारियों को फसलों को हुए नुकसान का भी त्वरित आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे प्रभावित किसानों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

    फायर सर्विस और आपदा मित्रों की मदद लेने के निर्देश
    प्रशासन को जरूरत के अनुसार फायर सर्विस, पीएसी, सिविल डिफेंस, होमगार्ड और आपदा मित्रों की सेवाएं लेने के निर्देश दिए गए हैं। सभी राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय रखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में लगातार भ्रमण और निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है।

    जिलाधिकारियों को खुद फील्ड में रहकर स्थिति पर नजर रखने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार त्वरित निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने भी बारिश प्रभावित जिलों में अधिकारियों को सतर्क रहने और जरूरत के मुताबिक स्थानीय स्तर पर स्कूलों समेत गैर-जरूरी सेवाओं के संबंध में निर्णय लेने को कहा है।

    कच्चे मकानों और जलभराव वाले इलाकों पर नजर
    प्रशासन ने लेखपालों और ग्राम विकास अधिकारियों को कच्चे मकानों के आसपास जलभराव की स्थिति पर तत्काल नजर रखने को कहा है। जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

    जरूरत पड़ने पर ऐसे परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि खराब मौसम के दौरान आमजन की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

  • अनुप्रिया पटेल ने CEC पर विपक्ष के आरोपों का किया बचाव, बोलीं- संवैधानिक पदों पर व्यक्तिगत हमला आदत

    अनुप्रिया पटेल ने CEC पर विपक्ष के आरोपों का किया बचाव, बोलीं- संवैधानिक पदों पर व्यक्तिगत हमला आदत

    नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री और अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों पर व्यक्तिगत हमला करना विपक्ष की आदत बन गई है। अनुप्रिया पटेल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।

    अनुप्रिया पटेल ने विपक्ष के आरोपों को लेकर कहा कि आने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में विपक्ष को अपनी हार का अंदाजा पहले से ही हो गया है। उनके अनुसार, इसी वजह से विपक्ष चुनाव से पहले ही हार के लिए कारण तलाश रहा है और भविष्य में अपनी हार का ठीकरा चुनाव आयोग के सिर पर डालने की तैयारी कर रहा है।

    उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं और उनके पदाधिकारियों पर व्यक्तिगत टिप्पणियां करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा बनाने के बजाय संस्थागत प्रक्रिया पर चर्चा होनी चाहिए।

    केंद्रीय मंत्री ने एनडीए और विपक्ष के बीच चुनावी मुकाबले का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि पिछले चुनावों में एनडीए गठबंधन के सामने विपक्ष को लगातार पराजय का सामना करना पड़ा है। उनका कहना था कि आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी विपक्ष की ओर से अभी से अलग-अलग मुद्दे उठाए जा रहे हैं।

    उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक दलों ने संगठनात्मक और चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। अनुप्रिया पटेल ने अपनी पार्टी की तैयारियों को लेकर कहा कि अपना दल आगामी चुनाव के लिए पूरी मुस्तैदी के साथ तैयार है।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में एनडीए गठबंधन की जीत सुनिश्चित करने में अपना दल ने योगदान दिया था। पार्टी ने दोनों चुनावों में गठबंधन के साथ मिलकर राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी की थी। अनुप्रिया पटेल ने कहा कि आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में भी उनकी पार्टी पूरी ताकत के साथ गठबंधन के साथ मैदान में उतरेगी।

    अनुप्रिया पटेल ने यह भी दावा किया कि आगामी चुनाव में एनडीए गठबंधन रिकॉर्ड जीत दर्ज करेगा। हालांकि, चुनाव अभी दूर है और राजनीतिक दलों की तैयारियां जारी हैं। ऐसे में उनके बयान को आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर गठबंधन की रणनीति और राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच अनुप्रिया पटेल का बयान राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। विपक्ष जहां चुनाव प्रक्रिया और आयोग की भूमिका को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रख रहा है, वहीं अनुप्रिया पटेल ने इन आरोपों का बचाव करते हुए विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाया है। उन्होंने संवैधानिक पदों पर व्यक्तिगत हमलों को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और आगामी चुनाव में एनडीए की तैयारियों को लेकर विश्वास जताया।

  • जीतन राम मांझी ने लोकसभा स्पीकर से SC-ST सांसदों को सदन में अधिक समय देने का किया आग्रह

    जीतन राम मांझी ने लोकसभा स्पीकर से SC-ST सांसदों को सदन में अधिक समय देने का किया आग्रह

    नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से आने वाले सांसदों को सदन में बोलने के लिए अधिक समय देने का आग्रह किया है। मांझी ने विशेष रूप से अहम विधेयकों पर चर्चा के दौरान इन सांसदों को अपने समुदायों से जुड़े मुद्दे रखने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने की मांग की है।

    मांझी ने अपने पत्र में कहा है कि SC और ST सांसदों को सदन में अपने समुदायों से संबंधित विषयों को प्रभावी तरीके से उठाने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने और संबंधित अधिकारियों को जरूरी निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।

    यह मामला पांच अगस्त को मांझी के दिल्ली स्थित आवास पर हुई एनडीए सांसदों की सामूहिक बैठक के दौरान सामने आया था। बैठक में मध्य प्रदेश के खरगौन से सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने SC और ST सांसदों को सदन में बोलने के लिए मिलने वाले समय को लेकर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि सांसदों को बोलने का अवसर मिलता है, लेकिन समुदायों से जुड़े अधिक मुद्दों को सामने रखने के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत है।

    पटेल के अनुसार, सांसदों को कई बार बोलने का अवसर मिलता है, लेकिन हर बार पर्याप्त समय उपलब्ध नहीं हो पाता। ऐसे में SC और ST समुदायों से जुड़े अधिक विषयों को सदन के सामने रखने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता महसूस होती है। उनका कहना था कि इन समुदायों से जुड़े मुद्दों को चर्चा में पर्याप्त जगह मिलनी चाहिए।

    मांझी ने अपने पत्र में इस मांग को आगे बढ़ाते हुए कहा कि संसद में राजनीतिक दलों को चर्चा के लिए जो समय मिलता है, वह उनके सांसदों के बीच विभाजित होता है। ऐसे में SC और ST समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसदों के लिए अपने समुदायों से संबंधित विषयों को विस्तार से रखने का पर्याप्त अवसर हमेशा उपलब्ध नहीं हो पाता।

    केंद्रीय मंत्री ने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि गजेंद्र सिंह पटेल द्वारा उठाए गए मुद्दे पर आगे की कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने की मांग की, ताकि SC और ST सांसदों को महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के दौरान अपने समुदायों से जुड़े विषय सदन के सामने रखने के लिए पर्याप्त अवसर मिल सके।

    मांझी की यह पहल संसद में SC और ST सांसदों की चर्चा में भागीदारी तथा उनके समुदायों से जुड़े मुद्दों को सदन में रखने के लिए मिलने वाले समय से संबंधित है। पत्र के माध्यम से उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से इस विषय पर आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है।

  • तेलंगाना में गणेश विसर्जन के दौरान कई हादसे, सब-इंस्पेक्टर समेत 13 लोगों की मौत, 26 घायल

    तेलंगाना में गणेश विसर्जन के दौरान कई हादसे, सब-इंस्पेक्टर समेत 13 लोगों की मौत, 26 घायल

    नई दिल्ली । तेलंगाना में गणेश उत्सव के समापन के बाद प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान अलग-अलग स्थानों पर कई हादसे सामने आए हैं। इन घटनाओं में अब तक 13 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 26 लोग घायल हुए हैं। मृतकों में एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर भी शामिल हैं। हादसों की पूरी परिस्थितियां अभी स्पष्ट नहीं हो सकी हैं और अलग-अलग घटनाओं की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।

    राज्य के पुलिस महानिदेशक सीवी आनंद ने विसर्जन के दौरान हुई इन घटनाओं की जानकारी दी है। उनके मुताबिक, पूरे राज्य में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान अलग-अलग हादसे हुए। इनमें कई लोगों की जान चली गई और दर्जनों लोग घायल हुए हैं। घायलों को उपचार के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। संबंधित घटनाओं के कारणों और परिस्थितियों की विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रत्येक हादसा किस वजह से हुआ।

    गणेश उत्सव के दौरान इस वर्ष तेलंगाना में बड़ी संख्या में प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। शहरों और कस्बों के अलावा घरों, अपार्टमेंट परिसरों और गेटेड सोसाइटी में भी गणेश प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। उत्सव समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिमाओं को लेकर अलग-अलग विसर्जन स्थलों तक पहुंचे। कई स्थानों पर सामूहिक रूप से विसर्जन कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही।

    पुलिस और प्रशासन की ओर से विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए इंतजाम किए गए थे। भीड़ को नियंत्रित करने, यातायात व्यवस्था संभालने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। इसके बावजूद राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हादसे हुए। इन घटनाओं में पुलिस विभाग से जुड़े एक सब-इंस्पेक्टर की भी मौत हुई है।

    पुलिस महानिदेशक के अनुसार, तेलंगाना में करीब 1.24 लाख गणेश प्रतिमाएं आधिकारिक रूप से स्थापित की गई थीं। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में प्रतिमाएं लोगों ने अपने घरों, अपार्टमेंट और गेटेड सोसाइटी में स्थापित की थीं। इन सभी को मिलाकर राज्य में गणेश प्रतिमाओं की कुल संख्या करीब 3.5 लाख से 4 लाख तक होने का अनुमान लगाया गया है।

    इतनी बड़ी संख्या में प्रतिमाओं के विसर्जन के कारण राज्य के विभिन्न हिस्सों में लोगों की भारी भीड़ जुटी। कई स्थानों पर श्रद्धालु जुलूस के साथ प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए लेकर पहुंचे। इस दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी।

    हादसों में घायल हुए 26 लोगों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। प्रशासन की ओर से घायलों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, मृतकों की घटनाओं और हादसों के कारणों को लेकर पूरी जानकारी अभी सामने आना बाकी है।

    फिलहाल प्रशासन और पुलिस अलग-अलग घटनाओं से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी जुटा रहे हैं। विसर्जन कार्यक्रम के दौरान हुई इन घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। राज्य में बड़ी संख्या में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के बीच हुए इन हादसों ने 13 लोगों की जान ले ली, जबकि 26 लोग घायल हुए हैं। आने वाले समय में जांच और विस्तृत जानकारी के बाद घटनाओं की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य के प्रस्ताव पर हंगामा, नारेबाजी और धक्कामुक्की के बाद कार्यवाही स्थगित

    जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य के प्रस्ताव पर हंगामा, नारेबाजी और धक्कामुक्की के बाद कार्यवाही स्थगित


    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र शासित प्रदेश को तत्काल और पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग वाला प्रस्ताव सदन में पेश किया। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायकों ने इसका विरोध किया, जिसके बाद सदन का माहौल लगातार तनावपूर्ण होता गया। नारेबाजी, तीखी बहस, धक्कामुक्की और दस्तावेजों को फाड़ने की घटनाओं के बीच विधानसभा की कार्यवाही पहले कुछ समय और बाद में सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

    मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रस्ताव के जरिए जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग दोहराई। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया गया और इसे आगे भारत सरकार के पास भेजने की बात भी शामिल थी। हालांकि, प्रस्ताव की प्रस्तावना में वर्ष 2000 के स्वायत्तता संबंधी प्रस्ताव और नवंबर 2024 में पारित विशेष दर्जे से जुड़े प्रस्ताव के संदर्भ ने विवाद खड़ा कर दिया।

    भाजपा विधायकों ने प्रस्ताव में स्वायत्तता के पुराने संदर्भ को शामिल किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि सदन में स्वायत्तता से संबंधित विषय पर चर्चा नहीं होनी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्षी सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। देखते ही देखते कई विधायक अपनी सीटों से उठकर सदन के बीचोंबीच पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे।

    हंगामे के दौरान प्रस्ताव की प्रतियां फाड़कर सदन के बीच में फेंके जाने की भी घटना सामने आई। स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब भाजपा विधायक विक्रम रंधावा ने सदन के बीच से एक कुर्सी उठाने का प्रयास किया। मार्शलों ने उन्हें रोकने की कोशिश की और बाद में उन्हें सदन से बाहर ले जाया गया।

    विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने कई बार सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने देने की अपील की। लेकिन लगातार जारी नारेबाजी और हंगामे के कारण स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। इसके बाद अध्यक्ष ने पहले करीब 30 मिनट के लिए कार्यवाही स्थगित की। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भी हंगामा जारी रहा, जिसके बाद सदन की बैठक सोमवार तक स्थगित कर दी गई।

    इससे पहले कांग्रेस विधायकों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग को लेकर भी सदन में विरोध जताया था। इस दौरान नारेबाजी हुई और सदन का माहौल पहले से ही गरम रहा।

    मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पूर्ण राज्य के दर्जे के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने सार्वजनिक बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक सार्वजनिक कार्यक्रम में, जहां नेता प्रतिपक्ष भी मौजूद थे, उन्होंने राज्य के दर्जे का मुद्दा उठाया था। उनके अनुसार, उस समय प्रधानमंत्री ने इसे सामान्य वादा नहीं बल्कि ‘मोदी की गारंटी’ बताया था। उमर ने सवाल उठाया कि यदि यह गारंटी थी, तो अब तक इसे पूरा क्यों नहीं किया गया।

    जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहा है। विधानसभा में शुक्रवार की कार्यवाही ने इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और भाजपा के बीच मतभेद को एक बार फिर सामने ला दिया। फिलहाल प्रस्ताव पर आगे की चर्चा और सदन की अगली कार्रवाई सोमवार को होने की संभावना है।

  • UN महासभा : कई देशों के प्रतिनिधियों से मिले जयशंकर…, ईरान-रूस के समकक्षों से अलग से की मुलाकात

    UN महासभा : कई देशों के प्रतिनिधियों से मिले जयशंकर…, ईरान-रूस के समकक्षों से अलग से की मुलाकात

    न्यूयार्क। विदेश मंत्री एस. जयशंकर (External Affairs Minister S. Jaishankar) ने शुक्रवार को ईरान और रूस (Iran and Russia) के अपने समकक्षों से मुलाकात की, जिनके साथ द्विपक्षीय मुद्दों, ब्रिक्स समूह में सहयोग और खाड़ी संघर्ष समेत विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। जयशंकर (Jaishankar) ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Russian Foreign Minister Sergey Lavrov) से मुलाकात की और द्विपक्षीय मुद्दों के साथ-साथ ब्रिक्स समूह में सहयोग पर चर्चा की। जयशंकर ने ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के इस समूह का जिक्र करते हुए कहा कि आज रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ सकारात्मक बैठक हुई। कई मौजूदा मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। द्विपक्षीय संबंधों और ब्रिक्स में सहयोग की भी समीक्षा की।

    भारत ने इस महीने की शुरुआत में ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी। इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने हिस्सा लिया था। जयशंकर ने यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र के इतर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ हुई बातचीत उपयोगी रही। हमने खाड़ी संघर्ष से जुड़े ताजा घटनाक्रम पर चर्चा की।

    विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को एक पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल पर कड़ा जवाब दिया, जिसने उनसे आतंकवाद से जुड़ा सवाल पूछा था। यहां पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल का कड़ा जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा कि एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है। आप तो बोलो ही मत। जयशंकर और लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेसोलो न्यंती ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पोत परिवहन और समुद्री कर्मियों की सुरक्षा पर बने ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स’ के बारे में संवाददाताओं को संबोधित किया।

    उनके संबोधन के बाद, पाकिस्तानी पत्रकार ने खड़े होकर जयशंकर से चिल्लाते हुए पूछा कि आपकी सरकार पाकिस्तान में आतंकवाद को प्रायोजित करना कब बंद करेगी? संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने पाकिस्तानी पत्रकार से कहा कि आपने अपना जवाब सुन लिया है। आपने अपना जवाब साफ-साफ सुन लिया है। गुरुवार को, जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ संयुक्त राष्ट्र भवन में दाखिल हो रहे थे, तो एक भारतीय पत्रकार ने उनसे पूछा था कि आप आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेंगे?